Author: bharati

  • नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां

    नीदरलैंड दौरे पर पीएम मोदी का संबोधन, 2014 के चुनाव नतीजे किए याद; बोले- ‘16 मई को कुछ खास हुआ था’, भारत की विकास यात्रा पर गिनाईं उपलब्धियां



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड के आधिकारिक दौरे पर हैं, जो उनकी पांच देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव है। द हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने 2014 लोकसभा चुनाव के नतीजों को याद किया और कहा कि 16 मई 2014 को देश में स्थिर और पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने का रास्ता साफ हुआ था।

    पीएम मोदी ने कहा, “आज से 12 वर्ष पहले 2014 में 16 मई को कुछ खास हुआ था। उस दिन भारतवासियों के विश्वास ने नई दिशा दी, जिसने उन्हें बिना रुके और बिना थके काम करने की ताकत दी।”

    अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय समुदाय की भूमिका की सराहना की और कहा कि नीदरलैंड का हेग आज भारत-नीदरलैंड मित्रता का जीवंत प्रतीक बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पासपोर्ट और पता बदल सकता है, लेकिन भारतीयों का अपनी संस्कृति और देश के प्रति लगाव हमेशा बना रहता है।

    पीएम मोदी ने भारत की विकास यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि देश आज बड़े पैमाने पर सोलर पार्क, एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, इलेक्ट्रिफाइड रेल नेटवर्क और सिविल एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर विकास वाले देशों में शामिल हो रहा है और नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के निमंत्रण पर हो रही है। नीदरलैंड में करीब 90,000 से अधिक भारतीय मूल के लोग रहते हैं और लगभग 3,500 भारतीय छात्र वहां उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    पीएम मोदी 17 मई तक नीदरलैंड में रहेंगे और इस दौरान कई द्विपक्षीय और सामुदायिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।

  • मालदीव में बड़ा डाइविंग हादसा, इटली के 5 गोताखोरों की मौत; गहरी समुद्री गुफाओं की खोज के दौरान लापता, अब तक सिर्फ एक शव बरामद

    मालदीव में बड़ा डाइविंग हादसा, इटली के 5 गोताखोरों की मौत; गहरी समुद्री गुफाओं की खोज के दौरान लापता, अब तक सिर्फ एक शव बरामद

    नई दिल्ली। मालदीव के वावू एटोल में एक दर्दनाक डाइविंग हादसे में इटली के 5 अनुभवी गोताखोरों की मौत हो गई। सभी गोताखोर समुद्र के करीब 50 मीटर गहराई में मौजूद अंडरवॉटर गुफाओं की खोज के लिए उतरे थे, लेकिन इसके बाद वे वापस नहीं लौट सके।

    स्थानीय अधिकारियों ने इस घटना को मालदीव के इतिहास का सबसे बड़ा डाइविंग हादसा बताया है। अब तक सिर्फ एक गोताखोर का शव बरामद किया गया है, जबकि बाकी चार के गुफा प्रणाली के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।

    मृतकों की पहचान मोनिका मोंटेफाल्कोने, जॉर्जिया सोमाकाल, फेडेरिको गुआल्तिएरी, म्यूरियल ओडेनिनो और जियानलुका बेनेडेट्टी के रूप में की गई है। ये सभी ‘ड्यूक ऑफ यॉर्क’ नाम की बोट से समुद्र में डाइविंग के लिए गए थे।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार गोताखोर यूनिवर्सिटी ऑफ जेनोवा से जुड़े हुए थे, जबकि एक बोट ऑपरेशंस मैनेजर था। इनमें वैज्ञानिक, मरीन बायोलॉजिस्ट और स्कूबा डाइविंग इंस्ट्रक्टर भी शामिल थे।

    रेस्क्यू टीम को खराब मौसम और तेज हवाओं (25 से 30 मील प्रति घंटे) के कारण ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्र के अंदर कम विजिबिलिटी और गुफा प्रणाली की जटिल संरचना भी बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रही है।

    अधिकारियों के अनुसार, जिस गुफा में डाइवर्स गए थे, उसमें तीन बड़े चैम्बर्स हैं जो संकरी सुरंगों से जुड़े हैं। टीम अब तक दो चैम्बर्स की तलाशी ले चुकी है, लेकिन बाकी हिस्सों में अब भी तलाशी जारी है।

    इटली सरकार और डाइविंग विशेषज्ञ संगठन मिलकर शवों को वापस लाने और हादसे की जांच में जुटे हैं। शुरुआती जांच में यह संभावना जताई जा रही है कि खराब मौसम के कारण डाइवर्स रास्ता भटक गए होंगे या किसी एक डाइवर को बचाने के प्रयास में बाकी लोग भी फंस गए होंगे।

    डाइविंग विशेषज्ञ ऑक्सीजन टॉक्सिसिटी जैसी संभावनाओं की भी जांच कर रहे हैं, जिसमें गहराई में गैस मिश्रण असंतुलित होने पर ऑक्सीजन जहरीली हो सकती है।

    फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन मौसम साफ होने के बाद फिर से शुरू किए जाने की तैयारी है, लेकिन गुफा के अंदर शेष चार गोताखोरों की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है

  • ब्रिटेन में भारतीय मूल के पूर्व इमाम को उम्रकैद, 20 साल न्यूनतम सजा; ‘जिन्न’ का डर दिखाकर लड़कियों से यौन शोषण के मामले में 21 आरोपों में दोषी करार

    ब्रिटेन में भारतीय मूल के पूर्व इमाम को उम्रकैद, 20 साल न्यूनतम सजा; ‘जिन्न’ का डर दिखाकर लड़कियों से यौन शोषण के मामले में 21 आरोपों में दोषी करार

    नई दिल्ली। ब्रिटेन में भारतीय मूल के पूर्व इमाम अब्दुल हलीम खान को बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण के गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने उसे रेप, नाबालिगों के साथ यौन अपराध और यौन शोषण सहित कुल 21 मामलों में दोषी पाया है। 54 वर्षीय आरोपी को कम से कम 20 साल जेल में रहना होगा।

    लंदन पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को धार्मिक और आध्यात्मिक शक्ति वाला व्यक्ति बताकर पीड़ितों का विश्वास जीतता था। वह लड़कियों को यह कहकर डराता था कि उन पर ‘जिन्न’ या बुरी आत्मा का असर है और इसी बहाने उनका शारीरिक शोषण करता था।

    जांच में सामने आया कि 2004 से 2015 के बीच उसने ईस्ट लंदन की बांग्लादेशी मुस्लिम कम्युनिटी की 7 महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाया। इनमें 12 साल तक की बच्चियां भी शामिल थीं।

    पुलिस का कहना है कि आरोपी पीड़ितों को यह धमकी भी देता था कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उनके परिवार पर ‘काला जादू’ का असर होगा, जिसके डर से कई पीड़ित सालों तक चुप रहीं।

  • अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी

    अमेरिका का बड़ा एंटी-ISIS ऑपरेशन: अफ्रीका में छिपा नंबर-2 कमांडर ढेर, ट्रम्प का दावा,संगठन की कमर टूटी



    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अफ्रीका में एक बड़े सैन्य ऑपरेशन के दौरान आतंकी संगठन ISIS का दूसरा सबसे बड़ा कमांडर अबू बिलाल अल मिनुकी मारा गया है। यह कार्रवाई अमेरिकी सेना और नाइजीरियाई सुरक्षा बलों के संयुक्त ऑपरेशन के तहत की गई, जिसमें लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी।

    ट्रम्प के अनुसार, यह आतंकी संगठन के सबसे सक्रिय और रणनीतिक दिमागों में से एक था, जो फंडिंग नेटवर्क और हमलों की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाता था। उसके मारे जाने से ISIS के कमांड स्ट्रक्चर और वित्तीय नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचा है। हालांकि इस ऑपरेशन की सटीक जगह और समय को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।

    सूत्रों के मुताबिक, अबू बिलाल अल मिनुकी का जन्म 1982 में नाइजीरिया के बोर्नो राज्य में हुआ था और वह लंबे समय से अफ्रीका में छिपकर ISIS की गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसे 2023 में अमेरिका ने “ग्लोबल टेररिस्ट” घोषित किया था, जिसके बाद उसकी संपत्तियां फ्रीज कर दी गई थीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी।

    ISIS के इस नंबर-2 कमांडर को संगठन के भीतर “शैडो ऑपरेटर” माना जाता था, क्योंकि वह सीधे सामने नहीं आता था और नेटवर्क व फंडिंग को नियंत्रित करता था। उसके कई नाम भी बताए जाते थे, लेकिन उसकी कोई आधिकारिक तस्वीर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं थी।

    नाइजीरिया और आसपास के पश्चिमी अफ्रीकी देशों में ISIS और उससे जुड़े संगठनों की गतिविधियां लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई हैं। बोको हराम और इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस जैसे संगठन इस क्षेत्र में लगातार हिंसा फैला रहे हैं, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस ऑपरेशन को ISIS के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक सफलता माना जा रहा है, लेकिन संगठन के पूरी तरह खत्म होने की संभावना अभी भी नहीं है क्योंकि इसके नेटवर्क कई देशों में फैले हुए हैं और यह समय-समय पर नए नेतृत्व के साथ सक्रिय हो जाता है।

    कुल मिलाकर, यह कार्रवाई अफ्रीका में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अहम उदाहरण मानी जा रही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • भारत की वैश्विक उड़ान का संदेश: नीदरलैंड में मोदी बोले-स्टार्टअप से लेकर सेमीकंडक्टर तक, अब ग्रोथ इंजन बनेगा भारत

    भारत की वैश्विक उड़ान का संदेश: नीदरलैंड में मोदी बोले-स्टार्टअप से लेकर सेमीकंडक्टर तक, अब ग्रोथ इंजन बनेगा भारत



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीदरलैंड के द हेग दौरे पर प्रवासी भारतीयों को संबोधित करने पहुंचे, जहां उन्होंने भारत की तेज आर्थिक और तकनीकी प्रगति पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है और अब वैश्विक ग्रोथ इंजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस कार्यक्रम में भारतीय समुदाय ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और पीएम ने इसे भारत के किसी उत्सव जैसा माहौल बताया।

    अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि देश में स्टार्टअप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है और आज यह संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत में यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और डिजिटल इंडिया अभियान ने इस विकास को नई गति दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में UPI के जरिए होने वाले डिजिटल ट्रांजेक्शन ने दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बनाया है, जहां अरबों लेनदेन हर साल डिजिटल माध्यम से हो रहे हैं।

    पीएम मोदी ने सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हो रहे निवेश का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि देश में 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से कुछ में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। इससे भारत जल्द ही चिप डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब सिर्फ ट्रांसफॉर्मेशन नहीं बल्कि फास्टेस्ट और बेस्ट ग्रोथ मॉडल चाहता है।

    विदेशी निवेश और नवाचार पर जोर देते हुए पीएम ने कहा कि भारत के युवा आज स्टार्टअप, एआई, सेमीकंडक्टर और नई टेक्नोलॉजी में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब लोगों के सपने पूरे होते हैं। इसी वजह से देश में पेटेंट फाइलिंग और इनोवेशन में भी तेजी आई है।

    कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने नीदरलैंड में बसे भारतीय समुदाय की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासी अपनी मेहनत और प्रतिभा से नीदरलैंड की अर्थव्यवस्था और समाज में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने डच नेतृत्व द्वारा भारतीय समुदाय की प्रशंसा का भी उल्लेख किया।

    मोदी ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे बचपन से ही देशभक्ति की भावना से जुड़े रहे हैं और जनता का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि 2014 में मिली स्थिर सरकार के बाद भारत ने विकास की नई गति पकड़ी है और यह यात्रा लगातार जारी है।

    इस यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहल भी सामने आई, जब नीदरलैंड ने 11वीं सदी की ‘अनाइमंगलम कॉपर प्लेट्स’ भारत को वापस लौटाईं। ये प्राचीन तांबे की पट्टिकाएं चोल काल से जुड़ी हैं और इनमें दक्षिण भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों का महत्वपूर्ण विवरण दर्ज है। इनका वजन लगभग 30 किलो है और इन्हें भारत की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

    कुल मिलाकर पीएम मोदी का यह दौरा भारत-नीदरलैंड संबंधों को मजबूत करने, प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव बढ़ाने और भारत की वैश्विक आर्थिक छवि को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार

    डॉलर पर निर्भरता घटाने और आर्थिक सुरक्षा के लिए भारत समेत कई देश बढ़ा रहे सोने का भंडार


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है, जिससे घरेलू खपत और आयात बिल पर नियंत्रण रखा जा सके। वहीं दूसरी ओर सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ा रहे हैं, जिससे सवाल उठ रहा है कि एक तरफ आम लोगों को सोना खरीदने से क्यों रोका जा रहा है और दूसरी तरफ सरकारी स्तर पर इसकी खरीद क्यों जारी है।

    आंकड़ों के अनुसार,भारतीय रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में करीब 880 टन से अधिक सोना भंडार है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है और वैश्विक गोल्ड रिजर्व रैंकिंग में भी अपनी स्थिति मजबूत की है। इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार में डॉलर पर निर्भरता कम करना और आर्थिक स्थिरता को मजबूत बनाना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भी कई देश जैसे चीन, तुर्किये और पोलैंड अपने गोल्ड रिजर्व को तेजी से बढ़ा रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर पर घटता भरोसा माना जा रहा है। खासकर 2022 में रूस के विदेशी मुद्रा भंडार पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद कई देशों ने डॉलर की निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई है।

    सोने को सुरक्षित संपत्ति माना जाता है क्योंकि यह किसी एक देश की मुद्रा या नीतियों पर निर्भर नहीं होता। इसी कारण केंद्रीय बैंक इसे अपने रिजर्व में बढ़ा रहे हैं। भारत भी इसी रणनीति के तहत अपने विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित करने और आर्थिक जोखिम कम करने के लिए सोना खरीद रहा है।

    हालांकि, दूसरी तरफ भारत में सोने का आयात भारी मात्रा में डॉलर खर्च करता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना आयात करता है, जिससे देश का आयात बिल बढ़ता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। यही कारण है कि सरकार आम लोगों से सोने की खरीद सीमित करने की अपील कर रही है ताकि घरेलू मांग नियंत्रित रहे और विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो।

    आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष भारत ने सोने पर भारी खर्च किया है, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण खपत में गिरावट भी देखी गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में अगर सोने की कीमतें और बढ़ती हैं तो आयात और भी महंगा हो जाएगा।

    कुल मिलाकर, एक तरफ सरकार वैश्विक आर्थिक सुरक्षा और डॉलर जोखिम से बचाव के लिए सोना जमा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू अर्थव्यवस्था और आयात बिल को नियंत्रित रखने के लिए जनता से सोने की खरीद कम करने की अपील की जा रही है।

  • खंडवा में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का हंगामा, ज्ञापन सौंपा

    खंडवा में NEET पेपर लीक को लेकर छात्रों का हंगामा, ज्ञापन सौंपा


    नई दिल्ली। खंडवा में NEET-2026 परीक्षा को लेकर उठे कथित पेपर लीक विवाद ने छात्र राजनीति को गर्मा दिया। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।

    छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में कुछ भ्रष्ट तत्वों ने सेंध लगाकर मेहनती और ईमानदार विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। उनका कहना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एग्जाम में ऐसी घटनाएं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती हैं।

    जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
    ज्ञापन में छात्रों ने स्पष्ट रूप से कई मांगें रखीं-
    पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
    दोषी व्यक्तियों, संस्थानों और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
    परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित व पारदर्शी बनाया जाए
    भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जाए ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो

    प्रदर्शन में कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तमपाल सिंह और चंदन राजपूत भी मौजूद रहे। नेताओं ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।

    आंदोलन के बीच उठा स्थानीय मुद्दों का सवाल भी
    कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने के दौरान केवल NEET मामला ही नहीं, बल्कि इलाके की अन्य समस्याएं भी उठीं। कांग्रेस नेताओं ने किल्लोद ब्लॉक में फ्लोराइड युक्त पानी से हो रही बीमारियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि कुएं खुदवाए जाने के बावजूद अब तक कनेक्शन न मिलने से ग्रामीणों को राहत नहीं मिल पाई है। इसके अलावा लहाड़पुर क्षेत्र में पेयजल संकट को भी गंभीर समस्या बताया गया।

     प्रशासन का जवाब
    कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पीएचई विभाग और जनपद सीईओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को पंचायत स्तर पर समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया है। प्रशासन ने ग्रामीणों को जल्द राहत मिलने का आश्वासन भी दिया है।

  • 242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    242 पन्नों के फैसले का होगा कानूनी परीक्षण, मुस्लिम पक्ष ने जताई अपील की बात

    इंदौर/धार। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच द्वारा भोजशाला मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह कानूनी विवाद एक नए चरण में प्रवेश करता नजर आ रहा है। फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी शुरू कर दी है। पक्षकारों का कहना है कि वे 242 पन्नों के विस्तृत फैसले का गहन अध्ययन करने के बाद इसे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

    हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका को स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा का विशेष अधिकार प्रदान किया है। साथ ही, वर्ष 2003 में दिए गए उस आदेश को भी निरस्त कर दिया गया है, जिसमें मुस्लिम पक्ष को सीमित समय के लिए नमाज की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को इस फैसले का प्रमुख आधार माना है।

    ASI की रिपोर्ट को मामले में निर्णायक माना गया है, जिसमें 98 दिनों के सर्वे और लगभग 2100 पन्नों की जांच रिपोर्ट शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजशाला परिसर ऐतिहासिक रूप से मां वाग्देवी और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र रहा है। कोर्ट ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर परिसर को हिंदू धार्मिक स्वरूप से जुड़ा माना है।

    हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला का स्वरूप मंदिर जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद से अलग प्रकृति का है, क्योंकि यह रिट याचिका के रूप में सुना गया था।

    मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया है कि वे इस निर्णय को स्वीकार नहीं करते और सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देंगे। उनका कहना है कि पूरे फैसले का कानूनी और तथ्यात्मक विश्लेषण करने के बाद ही अगला कदम तय किया जाएगा।

    इस बीच, हिंदू पक्ष ने इस फैसले को अपनी बड़ी जीत बताते हुए इसे ऐतिहासिक न्याय करार दिया है। वहीं, क्षेत्र में फिलहाल स्थिति शांत बनी हुई है, लेकिन कानूनी लड़ाई के अगले चरण को लेकर दोनों पक्षों में सक्रियता बढ़ गई है।

  • बांग्लादेश बनाम पाकिस्तान टेस्ट में बड़ा हादसा: हसन अली गंभीर रूप से चोटिल

    बांग्लादेश बनाम पाकिस्तान टेस्ट में बड़ा हादसा: हसन अली गंभीर रूप से चोटिल


    नई दिल्ली।  बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सिलहट इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन एक बड़ा हादसा देखने को मिला, जब पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली गेंदबाजी करते समय गंभीर रूप से चोटिल हो गए। यह घटना बांग्लादेश की पारी के आठवें ओवर के दौरान हुई, जब हसन अली अपनी ही गेंद को रोकने के प्रयास में संतुलन खो बैठे और बुरी तरह मैदान पर गिर पड़े।

    गिरने के दौरान उनका सिर जमीन से जोर से टकराया, जिसके बाद वे दर्द से कराहते नजर आए। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों और अंपायरों ने तुरंत मेडिकल टीम को बुलाया। फिजियो ने शुरुआती जांच के बाद उनकी स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें स्ट्रेचर पर बाहर ले जाने का फैसला किया, जिससे मैदान पर कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया।

    हालांकि राहत की बात यह रही कि कुछ देर बाद हसन अली की स्थिति में सुधार हुआ और वे वापस मैदान पर लौटे। इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी भी की, जिससे टीम और प्रशंसकों ने राहत की सांस ली।

    इस मैच में पाकिस्तान के कप्तान शान मसूद ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया था। बांग्लादेश की शुरुआत शानदार नहीं रही और शुरुआती झटके लगते ही टीम दबाव में आ गई। वहीं पाकिस्तान ने प्लेइंग इलेवन में तीन बड़े बदलाव किए, जिसमें बाबर आजम की वापसी भी शामिल रही।

    पाकिस्तान की टीम में अजान अवैस, शान मसूद, बाबर आजम, सऊद शकील और मोहम्मद रिजवान जैसे खिलाड़ी शामिल रहे, जबकि बांग्लादेश की ओर से नजमुल हुसैन शान्तो और लिटन दास जैसे अनुभवी खिलाड़ी मैदान में उतरे।

    पहले टेस्ट में बांग्लादेश ने पाकिस्तान को 104 रनों से हराकर इतिहास रचा था, जिससे यह सीरीज और भी रोमांचक हो गई है। इस ताजा हादसे ने मैच के पहले दिन को चर्चा में ला दिया, हालांकि हसन अली की वापसी ने टीम को राहत दी।

  • आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान पर IMF की सख्ती, बढ़ेगा राजस्व लक्ष्य

    आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान पर IMF की सख्ती, बढ़ेगा राजस्व लक्ष्य


    नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्ती एक बार फिर बढ़ गई है। आईएमएफ ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए पाकिस्तान के पेट्रोलियम लेवी टारगेट को बढ़ाकर लगभग 1.73 लाख करोड़ रुपये तय कर दिया है, जो मौजूदा लक्ष्य से करीब 25,900 करोड़ रुपये अधिक है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान में पहले से जारी महंगाई संकट के और गहराने की आशंका जताई जा रही है।

    आईएमएफ की स्टाफ-लेवल रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार को अपने राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अब अतिरिक्त 86 हजार करोड़ रुपये के बराबर संसाधन जुटाने होंगे। इसके लिए केंद्र और प्रांतीय सरकारों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी डाली गई है। केंद्र सरकार को नए टैक्स उपायों और प्रवर्तन सुधारों के जरिए लगभग आधा लक्ष्य हासिल करना होगा, जबकि प्रांतीय सरकारें सेवाओं पर सेल्स टैक्स और कृषि आयकर के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की कोशिश करेंगी।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान का कुल बजट आकार 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक है। वहीं, देश का रक्षा बजट भी बढ़कर लगभग 2.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।

    आईएमएफ ने पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (FBR) के लिए भी लक्ष्य और कड़े कर दिए हैं। अब उसे 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाना होगा। लगातार दो वर्षों से लक्ष्य पूरा न कर पाने के कारण इस बार निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है।

    सबसे अहम बदलाव यह है कि अब केवल इंडिकेटिव टारगेट नहीं बल्कि क्वांटिटेटिव परफॉर्मेंस क्राइटेरिया लागू किया गया है। इसका मतलब यह है कि लक्ष्य पूरा न होने पर पाकिस्तान को आईएमएफ बोर्ड से विशेष छूट लेनी होगी, जिससे उसकी वित्तीय स्वतंत्रता और सीमित हो जाएगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आईएमएफ की ये सख्त शर्तें पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा सकती हैं। पहले से ही महंगाई, कर्ज और कमजोर राजस्व व्यवस्था से जूझ रहे देश पर यह फैसला आम जनता के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो सकता है।