Author: bharati

  • 100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी

    100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इस साल जून (June) का महीना पिछले 100 सालों में तीसरा सबसे सूखा जून (Third-driest June) साबित होने जा रहा है। महीने के खत्म होने में सिर्फ एक दिन बचा है और देशभर में बारिश में 42% की भारी कमी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का सीधा संकेत है कि भारत में मॉनसून (Monsoon) को कमजोर करने में ‘अल नीनो’ (‘El Niño’) का प्रभाव शुरू हो चुका है।


    आंकड़ों में समझें सूखे की स्थिति

    देशभर में अब तक जून महीने में औसतन 92.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 157.7 मिमी होना चाहिए। अगर महीने के आखिरी दिन यानी मंगलवार को अच्छी बारिश हो भी जाती है, तो भी जून में कुल बारिश 100 मिमी के आसपास ही रहने का अनुमान है।

    पिछले 100 वर्षों (1927-2026) के इतिहास में, जून में इससे कम बारिश केवल दो बार हुई है- साल 2009 में (87.5 मिमी) और 2014 में (92.1 मिमी)। ये दोनों ही वर्ष पिछले दो दशकों के भीतर के हैं।

    4 जून को केरल में मॉनसून की कमजोर दस्तक के बाद से अब तक यह जोर नहीं पकड़ सका है। पूरे जून के दौरान देशभर में केवल एक ही दिन ऐसा रहा, जब रोजाना होने वाली बारिश का आंकड़ा सामान्य से अधिक दर्ज किया गया हो।


    मध्य भारत में सबसे ज्यादा बुरा हाल

    देश के सभी चार प्रमुख क्षेत्रों में बारिश की इतनी बड़ी कमी दर्ज होना एक दुर्लभ घटना है, जो अल नीनो के प्रभाव की ओर इशारा कर रही है। मध्य भारत के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं और बारिश में 54% की कमी दर्ज की गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 41% कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम भारत क्षेत्र में बारिश में 30% की कमी रही। दक्षिण भारत में 28% कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।


    अल नीनो का बढ़ता असर और जुलाई से उम्मीदें

    अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में सतह के पानी के गर्म होने की एक प्रक्रिया है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम और विशेषकर भारतीय मॉनसून पर पड़ता है। अमेरिकी एजेंसी ‘इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी’ ने पिछले हफ्ते अपने एक अपडेट में बताया था कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे तापमान के बीच अल नीनो ‘मध्यम ताकत’ तक पहुंचने के करीब है। अगले कुछ महीनों में इसके और मजबूत होने का अनुमान है, जिससे भारतीय मानसून पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    हालांकि, इन सबके बीच एक राहत भरी खबर भी है। मौसम विभाग (IMD) के अनुमानों के मुताबिक, जुलाई के पहले हफ्ते में देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी और व्यापक बारिश होने की उम्मीद है। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्य भारत को मिल सकता है, जहां अब तक बारिश की सबसे ज्यादा कमी रही है।

  • MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली

    MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली


    नीमच/शाजापुर।
    केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी (Union Minister Pralhad Joshi) ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कुल 950 मेगावाट क्षमता वाली दो सोलर पावर परियोजनाओं (Two Solar Power Projects) का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि नीमच सोलर पार्क का टैरिफ 2.14 रुपये प्रति यूनिट है, जो शायद दुनिया में किसी ‘वैनिला सोलर’ प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम है।

    एनर्जी सेक्टर में ‘वैनिला सोलर’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन सोलर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए किया जाता है जो सिर्फ सोलर पैनल से बिजली बनाते हैं और जिनमें बैटरी स्टोरेज जैसी अतिरिक्त सुविधाएं नहीं होती हैं।

    जोशी ने एक भव्य समारोह में रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स नीमच में 500 मेगावाट का सोलर पार्क और शाजापुर में 450 मेगावाट का सोलर पार्क का उद्घाटन किया. इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे।

    नीमच सोलर पार्क में बनने वाली बिजली का टैरिफ 2.14 रुपये, 2.149 रुपये और 2.15 रुपये प्रति यूनिट है. यह पार्क तीन यूनिट में फैला है और कुल 2500 एकड़ जमीन पर बना है. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे और राज्य ग्रिड को साफ-सुथरी बिजली सप्लाई करेगा।

    उद्घाटन समारोह में बोलते हुए नए और रिन्यूएबल एनर्जी मंत्री जोशी ने कहा, “नीमच सोलर पार्क में बहुत अच्छा काम हुआ है. जहां तक मुझे पता है, 2.14 रुपये प्रति यूनिट का टैरिफ शायद वैनिला सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली बिजली के लिए सबसे कम है – न सिर्फ देश में, बल्कि पूरी दुनिया में.” उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में राज्य सरकार की कोशिशों की तारीफ़ की और कहा कि मध्य प्रदेश एक ‘ग्रीन एनर्जी पावरहाउस’ बन रहा है।

    जोशी ने कहा कि राज्य की कुल 38 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता में से लगभग 12 गीगावाट क्षमता रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर आधारित है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उम्मीदों के अनुसार, राज्य की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए. केंद्र सरकार की स्टडीज़ के अनुसार, राज्य में लगभग 55 गीगावाट विंड एनर्जी पैदा करने की क्षमता है।

    उन्होंने कहा कि अभी राज्य में 3.7 गीगावाट विंड एनर्जी क्षमता लगी हुई है और 1.3 गीगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है. जोशी ने कहा, “अगर अगले दो सालों के लिए लक्ष्य तय करके राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन को कम से कम 10 गीगावाट तक बढ़ाया जाता है, तो बिजली की लागत काफी कम हो जाएगी. इससे राज्य के किसानों और उद्योगों को फायदा होगा और नए औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा.”

    केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि राज्य की हर सरकारी इमारत में सोलर पावर प्रोजेक्ट होना चाहिए. इस कार्यक्रम में जोशी और मुख्यमंत्री यादव ने लगभग 1554 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाले 38 औद्योगिक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया. अधिकारियों ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स से 3200 से ज्यादा लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

  • टमाटर-प्याज-आलू की कीमतों में भारी इजाफा…. बिगड़ा रसोई का बजट

    टमाटर-प्याज-आलू की कीमतों में भारी इजाफा…. बिगड़ा रसोई का बजट


    नई दिल्ली।
    अगर आपको पिछले कुछ दिनों से सब्जी मंडी (Vegetable Market) में टमाटर, प्याज और आलू पहले से महंगे नजर आ रहे हैं, तो यह सिर्फ आपका भ्रम नहीं है। देशभर में इन तीनों जरूरी सब्जियों की कीमतों (Vegetable prices) में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इससे एक बार फिर खाने-पीने की चीजों की महंगाई यानी फूड इंफ्लेशन (Food inflation) बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में टमाटर की औसत खुदरा कीमत में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्याज लगभग 11 प्रतिशत और आलू करीब 1.3 प्रतिशत महंगा हुआ है। ये तीनों सब्जियां भारतीय रसोई का अहम हिस्सा हैं और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में इनका संयुक्त योगदान करीब 1.75 प्रतिशत है। इसलिए इनके दाम बढ़ने का सीधा असर महंगाई के आंकड़ों पर भी पड़ सकता है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो टमाटर की कीमत करीब 25 प्रतिशत अधिक हो चुकी है, जबकि प्याज लगभग 3.3 प्रतिशत महंगा है। हालांकि, आलू अभी भी पिछले साल के मुकाबले करीब 17 प्रतिशत सस्ता है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है।


    50% तक बढ़ीं टमाटर की कीमतें

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर टमाटर पर देखने को मिला है। उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में टमाटर की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में टमाटर लगभग दोगुना महंगा हो गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह भीषण गर्मी को माना जा रहा है। अत्यधिक तापमान के कारण टमाटर की फसल प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हो गया। इसके अलावा गर्म मौसम में लंबी दूरी तक टमाटर की ढुलाई भी मुश्किल हो गई, क्योंकि फल जल्दी पककर खराब होने लगे।

    दिल्ली की आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार, राजस्थान और हरियाणा से आने वाली टमाटर की आवक में काफी कमी आई है। इसका सीधा असर राजधानी समेत उत्तर भारत के कई शहरों में कीमतों पर पड़ा है।


    प्याज की कीमतों में भी तेजी

    प्याज की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। कई राज्यों में प्याज 10 से 20 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेमौसम बारिश के कारण प्याज की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता प्रभावित हुई, जिससे बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज कम पहुंच रहा है।

    एक्सपर्ट बताते हैं कि मानसून के दौरान टमाटर और प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। लेकिन इस बार एल-नीनो के प्रभाव, भीषण गर्मी और मानसून में देरी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अगर आने वाले दिनों में बारिश सामान्य नहीं रही या आपूर्ति में और कमी आई, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    महंगाई के बढ़ते दबाव के बीच आम लोगों की रसोई का बजट फिर बिगड़ सकता है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका है। अगर टमाटर, प्याज और आलू की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में फूड इंफ्लेशन के आंकड़ों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल, उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि मानसून की रफ्तार और सरकारी कदम इन बढ़ती कीमतों पर कितना असर डाल पाते हैं।

  • कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट

    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी…. 70 डॉलर पर आए दाम, जानें पेट्रोल-डीजल के आज के रेट


    नई दिल्ली।
    कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (Decline Crude Oil Prices) के बीच आज 30 जून को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Oil Marketing Companies) ने पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Rates) के नए रेट जारी कर दी हैं। देश भर में ईंधन की कीमतें स्थिर हैं। दूसरी ओर अमेरिकी WTI क्रूड 0.83 डॉलर सस्ता होकर 70.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। वहीं ब्रेंट क्रूड भी 1 प्रतिशत से अधि टूटकर 72.40 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

    एक अच्छी खबर यह है कि मॉर्गन स्टेनली ने तेल की कीमतों का अनुमान घटा दिया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही उम्मीद से जल्दी सामान्य हो रही है। वहीं, अमेरिका से मजबूत सप्लाई और चीन की कमजोर मांग के कारण बाजार में सरप्लस का खतरा बढ़ गया है।


    70 डॉलर पर आएगा कच्चा तेल

    ब्लूमबर्ग की खबर के मुताबिक बैंक ने अपने विश्लेषकों मार्टिन रैट्स, शार्लोट फिर्किंस और एमी गोवर के हवाले से सोमवार को जारी एक नोट में कहा कि उसने 2026 की तीसरी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड के दाम का अनुमान 15 डॉलर घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

    उम्मीद है कि अगले साल की तीसरी तिमाही तक कीमतें और गिरकर 70 डॉलर पर आ जाएंगी। उन्होंने कहा, “होर्मुज के रास्ते निर्यात उम्मीद से तेजी से सुधर रहा है।” हालांकि, सप्ताहांत में संघर्ष बढ़ने के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग पर यातायात धीमा हो गया था, जिसमें दो जहाजों को नुकसान पहुंचा, लेकिन इस बात के संकेत मिले हैं कि टैंकर होर्मुज से गुजरने को तैयार हैं।


    35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले

    मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि उसने गुरुवार को 35 तेल और गैस टैंकर होर्मुज से बाहर निकले। यह पहली बार है जब यह संख्या फरवरी में संघर्ष शुरू होने से पहले के आम स्तर (30 से 40) पर लौट आई है।

    बैंक के अनुसार, 2027 में तेल बाजार को संतुलित रखने के लिए होर्मुज से आवाजाही को केवल संघर्ष से पहले के स्तर के लगभग 65% (यानी करीब 11 से 12 लाख बैरल प्रतिदिन) तक पहुंचने की जरूरत है।


    126 डॉलर के ऊपर पहुंच गया था कच्चा तेल

    बता दें अप्रैल में ब्रेंट फ्यूचर्स 126 डॉलर के शिखर से ऊपर चले गए थे, लेकिन अब उनकी सारी बढ़त खत्म हो गई है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच चार महीने के युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। सोमवार को सबसे सक्रिय सितंबर कांट्रैक्ट 73.91 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।


    आज क्या हैं पेट्रोल-डीजल के रेट?

    – अयोध्या: पेट्रोल 102.4 और डीजल 97.87 रुपये लीटर
    – लखनऊ: पेट्रोल 102.05 रुपये और डीजल 99.28 रुपये लीटर
    – पटना: पेट्रोल 112.70 रुपये और डीजल 99.87 रुपये लीटर
    – दिल्ली: पेट्रोल 102.12 और डीजल 95.20 रुपये लीटर
    – कोलकाता: पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये लीटर
    – चेन्नई: पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये लीटर
    – मुंबई: पेट्रोल 111.21 और डीजल 97.83 रुपये लीटर
    – भोपाल: पेट्रोल 114.65 रुपये और डीजल 99.74 रुपये प्रति लीटर
    – इंदौर: पेट्रोल 114.61 और डीजल की 99.70 रुपये लीटर
    – जयपुर: पेट्रोल 112.66 रुपये और डीजल 97.78 रुपये लीटर

  • लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….

    लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार….


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) लोकसभा सीटों (Lok Sabha seats) की संख्या बढ़ाने के लिए कई तरह के फार्मूलों पर काम कर रही है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। साथ ही, सरकार महिला आरक्षण कानून (Women’s Reservation Law) को लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment Bill) के नए मसौदे को प्रभावी बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।

    दक्षिणी राज्यों की इस चिंता को ध्यान में रखते हुए मसौदा तैयार किया जा रहा है कि आबादी के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया से लोकसभा में उनकी राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका, क्योंकि सरकार इसे पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई।


    क्या है नया फॉर्मूला

    पहले वाले विधेयक को आधार बनाते हुए नए मसौदे में 1971 की जनगणना के आधार पर राज्यों के बीच सीटों के मौजूदा अनुपात को बनाए रखने का प्रस्ताव किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यह उन प्रस्तावों में से एक है जिन पर सरकार काम कर रही है, और अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, क्योंकि अभी की जा रही जनगणना के आंकड़े आने बाकी हैं।


    दो तिहाई बहुमत का इंतजार

    सूत्रों ने बताया कि सरकार को जब संख्याबल का भरोसा हो जाएगा उसके बाद ही विधेयक संसद में पेश किया जाएगा। अभी सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास लोकसभा में लगभग 300 सांसद हैं और तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए उसे 360 के आंकड़े की जरूरत है।


    2034 से पहले अड़चन

    मौजूदा कानून के तहत महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं किया जा सकेगा, क्योंकि यह प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के पूरा होने से जुड़ी हुई है। इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून में बदलाव की जरूरत थी।

    सरकार की योजना के अनुसार, 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, पिछली प्रकाशित जनगणना के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया के बाद लोकसभा सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 कर दी जाएगी।


    पिछला संविधान संशोधन विधेयक

    अप्रैल में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटें बढ़ाई जाएंगी। विधेयक में कहा गया है कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें ‘किसी राज्य या केंद्र-शासित प्रदेश के अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों को बारी-बारी से आवंटित की जाएंगी।’

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अर्चना पूरन सिंह का बड़ा दावा बोलीं बढ़ती टेक्नोलॉजी पानी की कमी की बड़ी वजह

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अर्चना पूरन सिंह का बड़ा दावा बोलीं बढ़ती टेक्नोलॉजी पानी की कमी की बड़ी वजह


    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने बीते कुछ वर्षों में लोगों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। पढ़ाई से लेकर नौकरी कारोबार कंटेंट क्रिएशन और मनोरंजन तक लगभग हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि जहां एक ओर एआई को भविष्य की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है वहीं दूसरी ओर इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब अभिनेत्री अर्चना पूरन सिंह ने इसी मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए ऐसा बयान दिया है जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

    अर्चना पूरन सिंह ने अपने परिवार के साथ बातचीत के दौरान कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर पानी की उपलब्धता पर भी पड़ रहा है। उनका कहना है कि एआई टूल्स को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में संसाधनों की जरूरत होती है और हर बार जब कोई व्यक्ति एआई से सवाल पूछता है तब उसके जवाब को तैयार करने की प्रक्रिया में काफी पानी खर्च होता है। उनके अनुसार यही कारण है कि भविष्य में पानी की समस्या और गंभीर हो सकती है।

    यह चर्चा उस समय शुरू हुई जब अर्चना अपने बेटों आर्यमन और आयुष्मान के साथ मुंबई में पानी की कमी पर बात कर रही थीं। परिवार ने बताया कि शहर के कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण जल संकट बढ़ गया है। इसी दौरान एआई और डेटा सेंटरों में होने वाली पानी की खपत का विषय सामने आया।

    अर्चना के छोटे बेटे आयुष्मान ने बताया कि जब वह एआई आधारित वीडियो तैयार कर रहे थे तब किसी ने उन्हें बताया था कि इस तकनीक का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में पानी की खपत बढ़ाता है। यह बात जानने के बाद उन्होंने एआई का उपयोग कम कर दिया। वहीं आर्यमन ने भी कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग एआई का उपयोग केवल मनोरंजन और समय बिताने के लिए कर रहे हैं जबकि इसके पीछे पर्यावरणीय लागत भी जुड़ी हुई है।

    हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सीधे पानी का उपयोग नहीं करता बल्कि इसे संचालित करने वाले विशाल डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए कई जगह पानी आधारित कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। सर्वर लगातार चलने के कारण अत्यधिक गर्म होते हैं और उन्हें नियंत्रित तापमान पर बनाए रखने के लिए पानी की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से एआई के बढ़ते उपयोग के साथ डेटा सेंटरों की जल और ऊर्जा खपत भी बढ़ती है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि जल संकट का कारण केवल एआई नहीं है। जलवायु परिवर्तन भूजल का अत्यधिक दोहन अनियोजित शहरीकरण और बढ़ती आबादी भी पानी की कमी के बड़े कारण हैं। इसलिए एआई को अकेले जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह उचित नहीं माना जा सकता। हालांकि यह जरूर सच है कि नई तकनीकों के विस्तार के साथ उनके पर्यावरणीय प्रभाव पर गंभीरता से विचार करना जरूरी हो गया है।

    अर्चना पूरन सिंह का बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में टिकाऊ तकनीक और ग्रीन डेटा सेंटर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। उनका यह बयान लोगों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि तकनीक का उपयोग जितना जरूरी है उतना ही जरूरी उसका जिम्मेदार और संतुलित इस्तेमाल भी है। आने वाले समय में एआई के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • सबसे बड़ा कर्म वही जो आपको भीतर से मजबूत बनाए संदीप माहेश्वरी का विचार बदल सकता है जीवन देखने का नजरिया

    सबसे बड़ा कर्म वही जो आपको भीतर से मजबूत बनाए संदीप माहेश्वरी का विचार बदल सकता है जीवन देखने का नजरिया


    नई दिल्ली। जीवन में हर व्यक्ति सफलता सम्मान और खुशहाली की तलाश करता है लेकिन इन सबकी असली नींव हमारे कर्मों पर टिकी होती है। इंसान जैसा सोचता है वैसा ही करता है और जैसा करता है वैसा ही उसका व्यक्तित्व बनता है। यही कारण है कि अच्छे और बुरे कर्मों की चर्चा हर धर्म और हर दर्शन में की गई है। मोटिवेशनल स्पीकर संदीप माहेश्वरी का एक विचार कर्म को समझने का बेहद सरल लेकिन गहरा नजरिया देता है। उनके अनुसार सबसे अच्छा कर्म वही है जो इंसान को भीतर से मजबूत बनाए और सबसे बुरा कर्म वह है जो उसके आत्मविश्वास और आत्मसम्मान को कमजोर कर दे।

    अक्सर लोग किसी भी काम को समाज की नजर या दूसरों की राय के आधार पर सही और गलत मान लेते हैं लेकिन असली फैसला हमारा अंतर्मन करता है। यदि किसी काम को करने के बाद मन में संतोष आत्मविश्वास और शांति का अनुभव हो तो समझिए कि वह सही दिशा में उठाया गया कदम है। ऐसे कर्म व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और जीवन की चुनौतियों का सामना करने का साहस देते हैं।

    इसके विपरीत यदि कोई काम करने के बाद अपराधबोध डर बेचैनी या हीन भावना महसूस होने लगे तो यह संकेत है कि वह कर्म हमारे व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचा रहा है। चाहे दुनिया उस काम की सराहना करे लेकिन यदि वह भीतर की शांति छीन ले तो उसका परिणाम लंबे समय तक नकारात्मक रहता है। ऐसे कर्म धीरे धीरे इंसान के आत्मविश्वास को खत्म कर देते हैं और उसे मानसिक रूप से कमजोर बना देते हैं।

    जीवन में सच्ची ताकत केवल धन पद या प्रसिद्धि से नहीं आती बल्कि अपने निर्णयों पर विश्वास रखने से आती है। जब व्यक्ति अपने मूल्यों और सिद्धांतों के अनुसार कार्य करता है तब उसके भीतर एक अलग तरह की ऊर्जा पैदा होती है। यही ऊर्जा कठिन परिस्थितियों में भी उसे हार मानने नहीं देती। सही कर्म इंसान को न केवल सफल बनाते हैं बल्कि उसे बेहतर इंसान भी बनाते हैं।

    हर दिन हमारे सामने कई छोटे बड़े फैसले आते हैं। किसी की मदद करना ईमानदारी से काम करना सच बोलना अपने कर्तव्यों को निभाना और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखना ऐसे कर्म हैं जो मन को संतोष देते हैं। वहीं झूठ छल कपट स्वार्थ और दूसरों को नुकसान पहुंचाने वाले कार्य कुछ समय के लिए लाभ जरूर दे सकते हैं लेकिन अंत में मन को अशांत कर देते हैं।

    विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सकारात्मक सोच और अच्छे कर्म मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं। जब व्यक्ति अपने काम से संतुष्ट होता है तो तनाव कम होता है आत्मविश्वास बढ़ता है और रिश्ते भी मजबूत होते हैं। यही कारण है कि अच्छे कर्म केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    हर इंसान को समय समय पर अपने कर्मों का मूल्यांकन करना चाहिए। खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि जो काम मैं कर रहा हूं क्या वह मुझे भीतर से मजबूत बना रहा है या कमजोर कर रहा है। यदि उत्तर सकारात्मक है तो वही रास्ता सही है। जीवन की सबसे बड़ी सफलता बाहरी उपलब्धियों से नहीं बल्कि भीतर की शांति आत्मविश्वास और संतोष से मिलती है। इसलिए ऐसे कर्म चुनिए जो आपको मजबूत बनाएं क्योंकि वही आपके उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव साबित होंगे।

  • भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप

    भोपाल में IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और पूर्व IPS पिता पर FIR, कुक से मारपीट का आरोप


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें IPL खिलाड़ी शशांक सिंह और उनके रिटायर्ड IPS पिता शैलेश सिंह पर अपने घरेलू रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और अवैध रूप से बंधक बनाने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में परिवार के ड्राइवर को भी सह-आरोपी बनाया गया है। घटना भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के मेंदोरी गांव स्थित आवास की बताई जा रही है।

    कुक ने दर्ज कराई शिकायत
    रीवा जिले के रहने वाले 31 वर्षीय कुक विपेंद्र सिंह तोमर ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि उन्हें 15,000 रुपये मासिक वेतन, रहने-खाने की सुविधा और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने के आश्वासन पर नौकरी पर रखा गया था।

    शिकायत के अनुसार, काम शुरू होने के कुछ ही घंटों में खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद उन पर दबाव बनाया गया और गाली-गलौज की गई।

    मोबाइल छीना, कमरे में बंद होने का आरोप
    पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने नौकरी छोड़कर घर लौटने की बात कही तो स्थिति बिगड़ गई। उनका मोबाइल फोन छीन लिया गया ताकि वह किसी से संपर्क न कर सकें। इसके बाद उन्हें जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया।

    कुक के अनुसार, खुद को बचाने के लिए उन्होंने एक कमरे में खुद को बंद कर लिया, लेकिन आरोप है कि पिता-पुत्र और ड्राइवर ने दरवाजा खोलकर उनके साथ मारपीट की। पुलिस के अनुसार, मेडिकल जांच में पीड़ित के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे मारपीट की पुष्टि हुई है।

    FIR दर्ज, BNS की धाराएं लागू
    रातीबड़ पुलिस ने शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(B), 115(2) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की आगे जांच कर रही है।

  • भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन में एसी पर सख्ती, नेट जीरो नीति के तहत घरों से हटाने के निर्देश

    भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन में एसी पर सख्ती, नेट जीरो नीति के तहत घरों से हटाने के निर्देश


    नई दिल्ली। यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। ब्रिटेन में तापमान कई इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। हीटवेव के कारण जनजीवन प्रभावित है, लेकिन इसी बीच पर्यावरणीय नीतियों के तहत कुछ स्थानीय प्रशासनिक निकाय घरों में लगाए गए एयर कंडीशनर (एसी) को लेकर सख्ती बरत रहे हैं।

    रिपोर्टों के अनुसार, लंदन के कुछ काउंसिल क्षेत्रों में निवासियों को एसी हटाने या उनके उपयोग को सीमित करने संबंधी नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों का तर्क है कि एयर कंडीशनर अधिक ऊर्जा की खपत करते हैं और कार्बन उत्सर्जन बढ़ाते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल अंतिम विकल्प के रूप में ही किया जाना चाहिए।

    हीटवेव से जनजीवन प्रभावित

    ब्रिटेन में भीषण गर्मी के चलते कई क्षेत्रों में स्कूल बंद किए गए हैं और कुछ रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। मौसम विभाग ने अत्यधिक गर्मी को देखते हुए लोगों की सुरक्षा के लिए उच्च स्तर की चेतावनी जारी की है।

    रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि कई अस्पतालों में तापमान अधिक होने और पर्याप्त शीतलन व्यवस्था नहीं होने के कारण हजारों गैर-आपातकालीन सर्जरी स्थगित करनी पड़ी हैं।

    क्या है नेट जीरो नीति?

    ब्रिटेन में लागू नेट जीरो नीति का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर तक लाना है। भवन निर्माण और ऊर्जा उपयोग से जुड़े दिशानिर्देशों के तहत पहले प्राकृतिक या पैसिव कूलिंग उपाय अपनाने पर जोर दिया जाता है।

    इन उपायों में भवनों का बेहतर वेंटिलेशन, खिड़कियां खोलकर रखना, छायादार व्यवस्था और सीलिंग फैन का उपयोग शामिल है। एसी के इस्तेमाल की अनुमति तभी दी जाती है, जब ये विकल्प पर्याप्त न हों।

    पर्यावरण संरक्षण पर जोर

    रिपोर्टों के मुताबिक, लंदन के कुछ स्थानीय निकायों ने नेट जीरो नीति के तहत भवनों में लगाए गए एसी हटाने या उनके उपयोग पर आपत्ति जताई है। प्रशासन लोगों को अधिक से अधिक प्राकृतिक वेंटिलेशन और सीलिंग फैन जैसे वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दे रहा है।

    हालांकि, भीषण गर्मी के बीच एसी के उपयोग को लेकर यह नीति बहस का विषय बनी हुई है। एक ओर सरकार और स्थानीय निकाय पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ते तापमान के बीच लोगों की सुविधा और स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

  • जुलाई 2026 का धार्मिक कैलेंडर जारी, देवशयनी एकादशी, रथयात्रा, गुरु पूर्णिमा समेत जानिए किस दिन कौन-सा व्रत और त्योहार

    जुलाई 2026 का धार्मिक कैलेंडर जारी, देवशयनी एकादशी, रथयात्रा, गुरु पूर्णिमा समेत जानिए किस दिन कौन-सा व्रत और त्योहार

    नई दिल्ली। जुलाई 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस महीने आषाढ़ और श्रावण मास से जुड़े अनेक प्रमुख व्रत एवं त्योहार मनाए जाएंगे। भगवान विष्णु, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और गुरु परंपरा से जुड़े कई पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जाएंगे। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, दान-पुण्य और भजन-कीर्तन का आयोजन होगा। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखकर धार्मिक परंपराओं का पालन करेंगे।

    महीने की शुरुआत 3 जुलाई को कृष्णपिङ्गल संकष्टी चतुर्थी से होगी। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक गणेश पूजा और व्रत करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इसके बाद 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुसार 11 जुलाई को वैष्णव योगिनी एकादशी का पालन किया जाएगा।

    12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत मनाया जाएगा, जो भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद 14 जुलाई को आषाढ़ अमावस्या और दर्श अमावस्या का पर्व आएगा। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण, दान और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु अपने पूर्वजों की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।

    15 जुलाई से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा। यह पर्व देवी साधना और शक्ति उपासना के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन चंद्र दर्शन का भी संयोग रहेगा। 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी, जिसे देशभर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश करने पर कर्क संक्रांति भी मनाई जाएगी, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व माना जाता है।

    महीने के उत्तरार्ध में 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का पर्व आएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इसके अगले दिन 26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत रहेगा, जिसमें भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। 27 जुलाई से जयापार्वती व्रत प्रारंभ होगा, जिसे विशेष रूप से वैवाहिक सुख और परिवार की मंगलकामना के लिए किया जाता है। 28 जुलाई को कोकिला व्रत मनाया जाएगा, जिसमें माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

    29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा, व्यास पूजा और आषाढ़ पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा को ज्ञान, शिक्षा और आध्यात्मिक परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और महर्षि वेदव्यास को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गुरु के प्रति श्रद्धा और सेवा से ज्ञान, सफलता और जीवन में सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

    महीने का समापन 30 जुलाई को इष्टि अनुष्ठान के साथ होगा। पूरे जुलाई माह में विभिन्न धार्मिक पर्वों के कारण मंदिरों में विशेष आयोजन, पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रमों की रौनक देखने को मिलेगी। श्रद्धालु इस दौरान व्रत, दान, जप और पूजा के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हुए सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना करेंगे।