Author: bharati

  • पाकिस्तान में LPG सिलेंडर 8,200 रुपये तक पहुंचा, भारत में घरेलू गैस के दाम स्थिर

    पाकिस्तान में LPG सिलेंडर 8,200 रुपये तक पहुंचा, भारत में घरेलू गैस के दाम स्थिर

    नई दिल्ली। पाकिस्तान में ईरान से गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में तेजी आने की खबर है। वहां 12 किलोग्राम के सिलेंडर की कीमत कुछ ही दिनों में 4,500 पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर लाहौर में करीब 7,500 रुपये और स्कर्दू में 8,200 रुपये तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, भारत में 26 अक्टूबर को घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम स्थिर हैं। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपये में मिल रहा है।

    दिए गए विनिमय दर के अनुसार, एक भारतीय रुपया करीब 2.91 पाकिस्तानी रुपये के बराबर है। इस हिसाब से दिल्ली में घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 2,740 पाकिस्तानी रुपये होती है। हालांकि, दोनों देशों में सिलेंडर का वजन, मूल्य निर्धारण और बाजार की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।

    ईरान से आपूर्ति प्रभावित होने के बीच पाकिस्तान में गैस संकट

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की एक प्रमुख वजह ईरान से होने वाली गैस आपूर्ति में रुकावट है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान और ईरान के बीच दो अहम सीमा चौकियां 17 अक्टूबर से बंद हैं।

    सीमा चौकियां बंद होने के कारणों को लेकर दोनों देशों ने अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए हैं। पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं और तस्करी पर रोक लगाने को इसकी वजह बताया है, जबकि ईरान ने तकनीकी कारणों का हवाला दिया है।

    आपूर्ति प्रभावित होने के बीच पाकिस्तान के कुछ इलाकों में एलपीजी सिलेंडर महंगे हो गए हैं। इससे घरेलू उपभोक्ताओं पर खर्च का दबाव बढ़ने की आशंका है।

    सरकारी कीमत 3,296 रुपये, बाजार में इससे ज्यादा दाम

    पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) ने 11.8 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 3,296 पाकिस्तानी रुपये निर्धारित की है। इसके बावजूद बाजार में सिलेंडर इससे काफी अधिक कीमत पर बेचे जाने की खबरें हैं।

    लाहौर में 12 किलोग्राम के सिलेंडर का दाम करीब 7,500 पाकिस्तानी रुपये और स्कर्दू में लगभग 8,200 रुपये बताया गया है। इस तरह कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को निर्धारित कीमत से दोगुने से भी अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।

    भारत के चार शहरों में LPG सिलेंडर के रेट

    26 अक्टूबर को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमुख शहरों में घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतें इस प्रकार हैं।

    शहर घरेलू सिलेंडर (14.2 किलो) कमर्शियल सिलेंडर (19 किलो)
    दिल्ली ₹942 ₹2,810
    मुंबई ₹941.50 ₹2,764
    चेन्नई ₹957.50 ₹2,983
    अहमदाबाद ₹949 ₹2,831.50

    ये कीमतें उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। उपभोक्ता अपने शहर में लागू दर की पुष्टि संबंधित गैस वितरक से कर सकते हैं।

    घरेलू सिलेंडर के दाम 7 जून से स्थिर

    इंडियन ऑयल के मुताबिक, एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में आखिरी बदलाव 1 अक्टूबर को हुआ था। उस समय दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये बढ़ाई गई थी।

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 7 जून से स्थिर बताए गए हैं। इस वजह से फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ा है।

    गैस वितरकों के कमीशन में बढ़ोतरी की उम्मीद

    इस बीच, एलपीजी वितरकों के लिए कमीशन में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने वितरकों के कमीशन में अंतरिम बढ़ोतरी की संयुक्त सिफारिश करने पर सहमति जताई है। यह फैसला 21 अक्टूबर को मुंबई में हुई बैठक में लिया गया।

    वितरकों के कमीशन में नियमित बढ़ोतरी के प्रस्ताव पहले ही पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक मंजूरी नहीं मिली है।

    पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों में उछाल के बीच भारत में घरेलू सिलेंडर के दाम फिलहाल स्थिर हैं। हालांकि, पाकिस्तान में आपूर्ति संबंधी व्यवधान और वहां के बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी की खबरों पर नजर बनी हुई है।

  • भगवान शिव की पूजा में इन नियमों का रखें खास ध्यान, जलाभिषेक से बेलपत्र चढ़ाने तक जानें सही विधि और जरूरी सावधानियां

    भगवान शिव की पूजा में इन नियमों का रखें खास ध्यान, जलाभिषेक से बेलपत्र चढ़ाने तक जानें सही विधि और जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । भगवान शिव को हिंदू धर्म में देवों के देव महादेव कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्चे मन से उनकी पूजा करने और श्रद्धा के साथ जलाभिषेक करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव होता है। भगवान शिव की पूजा में दिखावे से ज्यादा महत्व भक्ति और पवित्र भावना को दिया जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि और सावन के महीने में भी शिव भक्त विशेष पूजा और अभिषेक करते हैं। हालांकि शिव पूजा करते समय कुछ पारंपरिक नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं महादेव की पूजा की सामान्य विधि और इससे जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं के बारे में।

    स्नान और स्वच्छता से करें पूजा की शुरुआत

    धार्मिक परंपरा के अनुसार शिव पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। पूजा स्थल को साफ रखें और भगवान शिव के सामने दीपक जलाकर अपनी आराधना शुरू करें। इसके बाद हाथ जोड़कर महादेव का ध्यान करें और अपनी मनोकामना व्यक्त करें। पूजा करते समय मन को शांत रखना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा में जल्दबाजी करने के बजाय श्रद्धा और एकाग्रता के साथ हर विधि पूरी करनी चाहिए।

    शिवलिंग पर जलाभिषेक का महत्व

    भगवान शिव की पूजा में जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जल चढ़ाते समय भगवान शिव का ध्यान करना और मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु चाहें तो ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। कई परंपराओं में दूध दही शहद और घी से भी अभिषेक किया जाता है। हालांकि सामान्य पूजा के लिए स्वच्छ जल अर्पित करना भी पर्याप्त माना जाता है। पूजा में उपयोग होने वाली सामग्री साफ होनी चाहिए और जलाभिषेक श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

    बेलपत्र और फूल चढ़ाते समय रखें ध्यान

    भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार बेलपत्र साफ और साबुत होना चाहिए। इसे अर्पित करते समय मन में महादेव का स्मरण करें। धतूरा और कुछ विशेष फूल भी शिव पूजा में चढ़ाए जाते हैं। हालांकि पूजा सामग्री और विधि में क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए अपने परिवार या स्थानीय मंदिर में प्रचलित विधि का पालन किया जा सकता है। पूजा सामग्री अर्पित करते समय स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और पौधों को अनावश्यक नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए।

    शिव पूजा में किन बातों से बचें

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिव पूजा के दौरान मन और व्यवहार की पवित्रता पर विशेष जोर दिया जाता है। पूजा करते समय क्रोध विवाद और अपशब्दों से बचने का प्रयास करें। शिवलिंग पर सामग्री चढ़ाते समय मंदिर की परंपराओं का सम्मान करें। कुछ मंदिरों में विशेष वस्तुएं चढ़ाने या शिवलिंग को स्पर्श करने के नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए वहां के पुजारी के निर्देशों का पालन करना उचित रहता है। पूजा के नाम पर अंधविश्वास फैलाने या किसी को डराने वाली बातों पर बिना विचार किए भरोसा नहीं करना चाहिए।

    सच्ची श्रद्धा को माना जाता है सबसे महत्वपूर्ण

    भगवान शिव की आराधना का उद्देश्य केवल मनोकामना पूरी करना नहीं बल्कि मन में संयम दया और अच्छे विचार विकसित करना भी है। पूजा के बाद जरूरतमंदों की सहायता करना माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना तथा दूसरों के प्रति अच्छा व्यवहार रखना भी धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। महादेव की पूजा में महंगी सामग्री की अनिवार्यता नहीं है। स्वच्छ जल बेलपत्र और सच्ची श्रद्धा के साथ की गई साधारण पूजा भी भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब पूजा के साथ अच्छे कर्म और सकारात्मक व्यवहार जुड़े हों तो जीवन में शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • चुनाव में जीत के लिए भी ट्रंप के भरोसे नेतन्याहू, समर्थन बढ़ाने के लिए तीन दिन में दो बार किया फोन

    चुनाव में जीत के लिए भी ट्रंप के भरोसे नेतन्याहू, समर्थन बढ़ाने के लिए तीन दिन में दो बार किया फोन


    तेल अवीव।
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर चुनावी जीत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में पिछड़ने के अनुमानों के बीच नेतन्याहू ने पिछले तीन दिनों में ट्रंप से दो बार फोन पर बात कर समर्थन बढ़ाने की मांग की। हालांकि, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने इन दावों से इनकार किया है। व्हाइट हाउस ने भी इस संबंध में पूछे गए सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

    एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी और एक इजरायली सूत्र ने नेतन्याहू की ओर से अतिरिक्त समर्थन मांगे जाने की जानकारी दी है। अमेरिकी सूत्र के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने इस कोशिश को नेतन्याहू की ‘हताशा की निशानी’ के रूप में देखा। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि इजरायली प्रधानमंत्री को चुनावी मुकाबले में अपनी स्थिति कमजोर होने की चिंता है।

    हालांकि, लिकुड पार्टी की प्रवक्ता नेटा मोल्चो ने इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में या ट्रंप के समर्थन वाले बयान से पहले उनसे मदद नहीं मांगी थी।

    ट्रंप पहले ही कर चुके हैं नेतन्याहू का समर्थन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नेतन्याहू के समर्थन में बयान दे चुके हैं। उन्होंने इजरायली मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा था कि नेतन्याहू की चुनावी हार का असर अमेरिका और इजरायल के संबंधों पर पड़ सकता है।

    एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद नेतन्याहू की ओर से ट्रंप से और समर्थन देने का अनुरोध किया गया। इजरायली सूत्र ने बताया कि नेतन्याहू की ओर से सुझाव दिया गया था कि ट्रंप इजरायली पत्रकारों से फोन पर बातचीत करें और चुनाव अभियान के प्रति अपना समर्थन जाहिर करें।

    इसी दौरान नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी फोन पर बातचीत की थी। हालांकि, इस बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इजरायल के चुनाव को लेकर कोई समर्थन संदेश जारी नहीं किया गया।

    पहले भी विदेशी नेताओं के साथ दिखा चुके हैं नजदीकी

    नेतन्याहू इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान विदेशी नेताओं के साथ अपने संबंधों को प्रमुखता देते रहे हैं। पिछले चुनावों में इजरायल की इमारतों पर प्रधानमंत्री मोदी, डोनाल्ड ट्रंप और अन्य विदेशी नेताओं के साथ उनकी तस्वीरों वाले पोस्टर लगाए गए थे। इन तस्वीरों के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ अपने संबंधों को चुनाव प्रचार में जगह दी थी।

    सर्वेक्षणों में बहुमत से दूर दिख रहा नेतन्याहू का गठबंधन

    नेतन्याहू की चिंता की एक प्रमुख वजह चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुमान हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तीन सर्वेक्षणों में 120 सदस्यीय इजरायली संसद नेसेट में उनके गठबंधन को बहुमत के आंकड़े से पीछे रहने का अनुमान जताया गया है।

    इन सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यह उनके मौजूदा गठबंधन की सीटों की संख्या से 17 कम है। उनकी प्रमुख पार्टी लिकुड, जिसके पास वर्तमान में 32 सीटें हैं, के घटकर करीब 20 सीटों पर सिमटने का अनुमान लगाया गया है।

    हालांकि, नेतन्याहू समर्थक चैनल 14 के सर्वेक्षण में तस्वीर अलग दिखाई गई है। सप्ताह की शुरुआत में जारी इस सर्वेक्षण में नेतन्याहू के गठबंधन को 60 सीटें और लिकुड पार्टी को 30 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था।

    इस तरह अलग-अलग सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है। चुनाव में उनकी पार्टी और सहयोगी दलों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि वे सत्ता में बने रह पाते हैं या नहीं।

  • आज का राशिफल: ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों का दिन, नौकरी कारोबार प्रेम और परिवार के मामले में जानें क्या होगा खास

    आज का राशिफल: ग्रहों की चाल बदलेगी इन राशियों का दिन, नौकरी कारोबार प्रेम और परिवार के मामले में जानें क्या होगा खास


    नई दिल्ली । आज का दिन नई उम्मीदों और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है। कुछ लोगों को कार्यक्षेत्र में अपनी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है तो कुछ लोगों को जरूरी फैसले लेते समय धैर्य बनाए रखने की आवश्यकता होगी। आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाना फायदेमंद रहेगा। परिवार और रिश्तों में बातचीत के जरिए गलतफहमियां दूर करने का अवसर मिल सकता है। प्रेम जीवन में भावनाओं को समझना जरूरी होगा जबकि विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और इसे सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता है। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचें। वृषभ राशि के जातकों को परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिल सकता है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और किसी भी निवेश से पहले अच्छी तरह विचार करें। मिथुन राशि वालों के लिए बातचीत और संपर्क लाभकारी साबित हो सकते हैं। नौकरी में नए अवसरों की जानकारी मिल सकती है। हालांकि जरूरी काम टालने से बचना बेहतर रहेगा।

    कर्क राशि के जातकों को भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों की सलाह काम आ सकती है। सिंह राशि वालों के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का समय है। कार्यक्षेत्र में अपनी योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से पूरा करने का प्रयास करें। कन्या राशि के जातकों को आज अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। काम का दबाव बढ़ने पर आराम के लिए भी समय निकालें और छोटी गलतियों को नजरअंदाज न करें।

    तुला राशि वालों के लिए रिश्तों में संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण रहेगा। किसी पुराने मतभेद को बातचीत से सुलझाने का मौका मिल सकता है। वृश्चिक राशि के जातकों को अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना चाहिए। कामकाज में किसी भी तरह की गोपनीय जानकारी साझा करने से पहले सावधानी बरतें। धन से जुड़े मामलों में सोच समझकर निर्णय लें। धनु राशि वालों के लिए नई चीजें सीखने और योजनाओं को आगे बढ़ाने का दिन हो सकता है। यात्रा की योजना बनाते समय जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी कर लें।

    मकर राशि के जातकों को मेहनत और अनुशासन के साथ काम करने की जरूरत होगी। लंबे समय से रुके काम को पूरा करने की दिशा में प्रयास सफल हो सकते हैं। कुंभ राशि वालों के लिए नए विचार और रचनात्मक काम उपयोगी साबित हो सकते हैं। दोस्तों और सहकर्मियों के साथ बातचीत से नई जानकारी मिल सकती है। मीन राशि के जातकों को अपने मन की शांति और भावनात्मक संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। परिवार के साथ समय बिताने से अच्छा महसूस हो सकता है। आर्थिक मामलों में दूसरों के कहने पर जल्दबाजी में निर्णय न लें।

    कुल मिलाकर आज का दिन सभी राशियों के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय करने और समझदारी से आगे बढ़ने का संदेश देता है। नौकरीपेशा लोगों को जिम्मेदारियों पर ध्यान देना चाहिए जबकि कारोबार करने वाले जातकों को लेनदेन में स्पष्टता बनाए रखनी चाहिए। प्रेम जीवन में एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा। विद्यार्थियों के लिए नियमित अभ्यास और समय का सही उपयोग लाभकारी रहेगा। याद रखें कि सफलता केवल ग्रहों की स्थिति पर नहीं बल्कि आपकी मेहनत धैर्य और निर्णय लेने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।

  • Netflix पर 26 से 30 अक्टूबर तक मनोरंजन का डबल धमाका, दिवाली के फेस्टिव मूड में घर बैठे देखें 7 नई फिल्में और सीरीज

    Netflix पर 26 से 30 अक्टूबर तक मनोरंजन का डबल धमाका, दिवाली के फेस्टिव मूड में घर बैठे देखें 7 नई फिल्में और सीरीज


    नई दिल्ली । दिवाली के फेस्टिव सीजन में अगर आप घर बैठे मनोरंजन का मजा लेना चाहते हैं तो नेटफ्लिक्स पर आने वाला यह सप्ताह आपके लिए खास हो सकता है। 26 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2026 के बीच ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने की जानकारी सामने आई है। इस सूची में कॉमेडी हॉरर मिस्ट्री रोमांस और साइकोलॉजिकल थ्रिलर जैसे अलग-अलग जॉनर के कंटेंट शामिल हैं। ऐसे में दर्शकों को अपनी पसंद के हिसाब से देखने के लिए कई विकल्प मिल सकते हैं। इस सप्ताह रिलीज होने वाले कंटेंट में मिनिमम वेज से लेकर अक्का और मीठे में क्या है जैसी फिल्में और सीरीज चर्चा में हैं। आइए जानते हैं इन सातों फिल्मों और सीरीज की कहानी और रिलीज से जुड़ी जानकारी।

    1. मिनिमम वेज

    नेटफ्लिक्स पर 26 अक्टूबर को मिनिमम वेज नाम की सीरीज रिलीज होने की जानकारी दी गई है। यह सीरीज आज की पीढ़ी और उसकी जिंदगी से जुड़े मुद्दों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सीरीज में कुल 28 एपिसोड होंगे और शुरुआती 14 एपिसोड पहले चरण में उपलब्ध कराए जाएंगे। बाकी एपिसोड बाद में रिलीज किए जाने की बात कही गई है। युवा दर्शकों के लिए यह सीरीज खास हो सकती है।

    2. द वन अबाउट मैथ्यू पैरी

    फ्रेंड्स जैसी लोकप्रिय टीवी सीरीज में अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता मैथ्यू पैरी की जिंदगी पर आधारित तीन हिस्सों वाली डॉक्यूमेंट्री भी नेटफ्लिक्स की आगामी रिलीज सूची में शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे 27 अक्टूबर से देखा जा सकेगा। डॉक्यूमेंट्री में अभिनेता के जीवन और उनसे जुड़े पहलुओं को दिखाए जाने की उम्मीद है। मैथ्यू पैरी के प्रशंसकों के लिए यह एक खास पेशकश हो सकती है।

    3. द बर्थडे

    द बर्थडे एक स्पेनिश फिल्म है जिसे डार्क कॉमेडी हॉरर और मिस्ट्री के मिश्रण के रूप में बताया गया है। इसकी कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्दगिर्द घूमती है जो अपनी गर्लफ्रेंड के पिता की जन्मदिन पार्टी में शामिल होता है। पार्टी के दौरान कहानी किस दिशा में आगे बढ़ती है यह फिल्म का दिलचस्प पहलू हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यह फिल्म 30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

    4. अक्का

    तमिल वेब सीरीज अक्का भी 30 अक्टूबर को रिलीज होने वाली फिल्मों और सीरीज की सूची में शामिल है। इसकी कहानी 1980 के दौर की पृष्ठभूमि में रची गई है। सीरीज में एक ऐसे शहर को दिखाया गया है जहां महिलाओं का दबदबा है। इसमें राधिका आप्टे और कीर्ति सुरेश जैसे कलाकार नजर आएंगे। अलग तरह की दुनिया और रहस्य से जुड़ी कहानी पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

    5. ए कपल ऑफ लाइज

    ए कपल ऑफ लाइज एक स्वीडिश साइकोलॉजिकल थ्रिलर सीरीज है। इसकी कहानी एक अमीर कपल के इर्दगिर्द घूमती है। रिश्तों में छिपे रहस्य और मनोवैज्ञानिक उलझनों पर आधारित कहानियां पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह सीरीज दिलचस्प विकल्प हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे 30 अक्टूबर से नेटफ्लिक्स पर देखा जा सकेगा।

    6. मीठे में क्या है

    हिंदी फिल्म मीठे में क्या है एक पारिवारिक ड्रामा है। इसकी कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्दगिर्द घूमती है जो दिवाली मनाने के लिए एक साथ आता है। त्योहार के दौरान परिवार के सदस्यों के रिश्ते और उनसे जुड़ी परिस्थितियां कहानी का अहम हिस्सा हैं। फिल्म में ऋत्विक भौमिक रोहिणी हट्टंगड़ी आयशा रजा मिश्रा अभय कॉल और तराना राजा जैसे कलाकार नजर आएंगे। रिपोर्ट के अनुसार यह फिल्म 30 अक्टूबर से नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध होगी।

    7. कोलिजन कोर्स

    कोलिजन कोर्स एक स्पेनिश थ्रिलर फिल्म है जिसका निर्देशन डेनियल सांचेज़ ने किया है। फिल्म को लेकर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह 30 अक्टूबर को नेटफ्लिक्स पर दस्तक देगी। थ्रिलर फिल्मों के शौकीनों के लिए यह सप्ताह की नई पेशकशों में से एक हो सकती है।

    कुल मिलाकर 26 से 30 अक्टूबर के बीच नेटफ्लिक्स पर अलग-अलग तरह की कहानियां देखने को मिल सकती हैं। जहां अक्का और ए कपल ऑफ लाइज रहस्य और रोमांच का अनुभव दे सकती हैं वहीं मीठे में क्या है परिवार के साथ देखने के लिए एक विकल्प बन सकती है। हालांकि रिलीज तारीखों और उपलब्धता में बदलाव संभव है इसलिए दर्शकों को अंतिम जानकारी नेटफ्लिक्स के आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर जरूर देखनी चाहिए।

  • एक्शन के बाद रोमांस में भी छाएंगे टाइगर श्रॉफ, 2027 में इन 8 फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर वापसी की उम्मीद

    एक्शन के बाद रोमांस में भी छाएंगे टाइगर श्रॉफ, 2027 में इन 8 फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर वापसी की उम्मीद


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ आने वाले समय में बड़े पर्दे पर एक बार फिर अपना दम दिखाने की तैयारी में हैं। एक्शन और शानदार स्टंट के लिए पहचाने जाने वाले टाइगर की आने वाली फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा है। बीते कुछ वर्षों में उनकी फिल्मों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है लेकिन अब कई नए प्रोजेक्ट उनके करियर को नई दिशा दे सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2027 में उनकी कुछ फिल्में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती हैं। खास बात यह है कि इन फिल्मों में एक्शन के साथ रोमांस और अलग तरह की कहानियों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। जाह्नवी कपूर और सारा अली खान जैसी अभिनेत्रियों के साथ उनकी जोड़ी को लेकर भी चर्चाएं हैं। हालांकि इन सभी फिल्मों की रिलीज तारीख और कलाकारों से जुड़ी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

    1. लग जा गले में दिखेगा रोमांटिक अंदाज

    टाइगर श्रॉफ को आमतौर पर एक्शन फिल्मों में देखा गया है लेकिन लग जा गले में उनका अलग अंदाज देखने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस फिल्म में जाह्नवी कपूर उनके साथ नजर आ सकती हैं। करण जौहर के निर्देशन से जुड़ी बताई जा रही इस फिल्म में लक्ष्य लालवानी के शामिल होने की भी चर्चा है। खबरों के मुताबिक फिल्म मई 2027 में रिलीज हो सकती है। अगर यह जानकारी सही साबित होती है तो दर्शकों को टाइगर का रोमांटिक रूप देखने का मौका मिल सकता है।

    2. सचिन रवि की एक्शन थ्रिलर

    कन्नड़ फिल्म निर्देशक सचिन रवि के हिंदी फिल्म प्रोजेक्ट में भी टाइगर श्रॉफ का नाम सामने आया है। रिपोर्ट्स में फिल्म को हिटमैन बताया गया है। यह एक्शन थ्रिलर होगी जिसमें टाइगर अपने दमदार एक्शन और स्टंट से दर्शकों का मनोरंजन कर सकते हैं। फिल्म के संवाद लेखक सुमित अरोड़ा बताए जा रहे हैं जिन्होंने जवान जैसी फिल्मों के लिए भी संवाद लिखे हैं। इस प्रोजेक्ट की रिलीज 2027 में होने की चर्चा है।

    3. वज्र में दिखेगा आध्यात्मिक एक्शन

    टाइगर श्रॉफ की संभावित फिल्मों में वज्र का नाम भी शामिल है। इसे बड़े बजट की स्पिरिचुअल एक्शन थ्रिलर बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक राम माधवानी इस फिल्म का निर्देशन कर सकते हैं और शूटिंग का कुछ हिस्सा जापान में किए जाने की योजना है। फिल्म की कहानी और रिलीज से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने का इंतजार है।

    4. रैंबो को लेकर अब भी इंतजार

    रैंबो लंबे समय से चर्चा में रहने वाला प्रोजेक्ट है। इसे हॉलीवुड की चर्चित एक्शन फिल्म के हिंदी रूपांतरण के तौर पर पेश किए जाने की खबरें आती रही हैं। टाइगर श्रॉफ इस फिल्म से जुड़े रहे हैं लेकिन फिलहाल इसकी स्थिति और रिलीज को लेकर स्पष्ट आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दर्शकों को इस प्रोजेक्ट के बारे में नई घोषणा का इंतजार करना होगा।

    5. रेस 4 में शामिल होने की चर्चा

    रेस फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म रेस 4 में भी टाइगर श्रॉफ का नाम सामने आया है। हालांकि अभी उनके फिल्म में होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कलाकारों को लेकर बातचीत चल रही है और निर्माता रमेश तौरानी भी कास्ट फाइनल होने की बात से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में टाइगर की एंट्री को फिलहाल संभावित खबर के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

    6. पीपल फैक्ट्री के साथ दो फिल्मों की डील

    रिपोर्ट्स के मुताबिक टाइगर श्रॉफ ने हैदराबाद के प्रोडक्शन हाउस पीपल फैक्ट्री के साथ दो फिल्मों के लिए समझौता किया है। इन प्रोजेक्ट्स को बड़े बजट और एक्शन से भरपूर बताया जा रहा है। हालांकि दोनों फिल्मों के नाम कहानी और रिलीज तारीख को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

    7. मिशन ईगल में सारा अली खान के साथ जोड़ी

    मिशन ईगल भी टाइगर श्रॉफ की संभावित फिल्मों की सूची में शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस एक्शन थ्रिलर में सारा अली खान उनकी जोड़ीदार हो सकती हैं और जगन शक्ति निर्देशन की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। फिल्म को लेकर आधिकारिक घोषणा और रिलीज की जानकारी का इंतजार है।

    8. स्क्रू ढीला में रश्मिका मंदाना की चर्चा

    स्क्रू ढीला को लेकर भी काफी समय से खबरें सामने आती रही हैं। इस फिल्म का निर्देशन शशांक खेतान से जुड़ा बताया गया है। रिपोर्ट्स में रश्मिका मंदाना का नाम भी संभावित अभिनेत्री के तौर पर सामने आया है। हालांकि कलाकारों और फिल्म की मौजूदा स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।

    कुल मिलाकर टाइगर श्रॉफ के नाम से जुड़ी ये आठ फिल्में उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ा रही हैं। कुछ प्रोजेक्ट्स में एक्शन की भरमार हो सकती है तो कुछ में अभिनेता का रोमांटिक अंदाज देखने को मिल सकता है। हालांकि सभी फिल्मों को लेकर एक जैसी स्थिति नहीं है और कई प्रोजेक्ट अभी चर्चा या शुरुआती स्तर पर बताए जा रहे हैं। ऐसे में रिलीज तारीखों और कलाकारों की अंतिम सूची के लिए आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।

  • बीजेपी को ब्लडी झूठी पार्टी कहने पर नसीरुद्दीन शाह पर बरसे गजेंद्र चौहान, बोले- आप सिक्के के दोनों पहलू नहीं देखते

    बीजेपी को ब्लडी झूठी पार्टी कहने पर नसीरुद्दीन शाह पर बरसे गजेंद्र चौहान, बोले- आप सिक्के के दोनों पहलू नहीं देखते


    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और अभिनेता गजेंद्र चौहान के बीच राजनीतिक बयान को लेकर जुबानी बहस तेज हो गई है। नसीरुद्दीन शाह की भारतीय जनता पार्टी पर की गई टिप्पणी के बाद गजेंद्र चौहान ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह वरिष्ठ और बेहतरीन कलाकार हैं लेकिन राजनीतिक मुद्दों पर उनकी टिप्पणियों में अक्सर एकतरफा नजरिया दिखाई देता है। गजेंद्र चौहान ने सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक दल की आलोचना करने के बजाय देश और समाज से जुड़े मुद्दों पर रचनात्मक सुझाव भी दिए जाने चाहिए। यह विवाद कोलकाता स्थित सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट यानी एसआरएफटीआई में जारी छात्र विरोध प्रदर्शन को लेकर सामने आया है।

    नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर जताई नाराजगी

    एक समाचार एजेंसी से बातचीत में गजेंद्र चौहान ने नसीरुद्दीन शाह की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने बीजेपी के लिए ब्लडी झूठी पार्टी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था। गजेंद्र चौहान ने कहा कि यह दुखद है कि एक वरिष्ठ कलाकार इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को देश के करोड़ों लोगों ने समर्थन दिया है उसके बारे में इस तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। गजेंद्र चौहान ने अपनी बात रखते हुए नसीरुद्दीन शाह से कहा कि उन्हें शर्म आनी चाहिए।

    गजेंद्र चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि वह नसीरुद्दीन शाह की अभिनय प्रतिभा का सम्मान करते हैं। हालांकि उनके मुताबिक राजनीतिक और सामाजिक मामलों पर विचार रखते समय सभी पक्षों को समझना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि नसीरुद्दीन शाह की सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में कई बार किसी मुद्दे का केवल एक पक्ष सामने आता है। गजेंद्र चौहान ने कहा कि वह उन्हें एक बेहतरीन कलाकार और अच्छा इंसान मानते हैं लेकिन उनकी टिप्पणियों में संतुलित नजरिए की कमी महसूस करते हैं।

    छात्र आंदोलन को लेकर क्या बोले गजेंद्र चौहान

    यह विवाद एसआरएफटीआई में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सामने आया है। संस्थान में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर नसीरुद्दीन शाह ने अपनी राय जाहिर की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि सत्तारूढ़ दल उन लोगों से बदला लेने की कोशिश करता है जो उसकी विचारधारा और नीतियों से सहमत नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और फिल्म जगत से जुड़ी बहस तेज हो गई।

    गजेंद्र चौहान ने छात्र आंदोलन पर बात करते हुए कहा कि छात्रों को अपनी मांगों और चिंताओं को लेकर विरोध करने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए छात्रों और संस्थान के प्रशासन के बीच बातचीत जरूरी है। उनके मुताबिक लंबे समय तक चलने वाला आंदोलन अपने आप समस्या का समाधान नहीं कर सकता। इसके लिए दोनों पक्षों को एक दूसरे की बात सुननी होगी और सहमति बनाने की दिशा में प्रयास करना होगा।

    राजनीतिक मुद्दों पर कलाकारों की राय से बढ़ी बहस

    नसीरुद्दीन शाह और गजेंद्र चौहान की इस बयानबाजी ने एक बार फिर राजनीतिक मुद्दों पर कलाकारों की भूमिका को चर्चा में ला दिया है। एक ओर नसीरुद्दीन शाह ने सरकार और सत्तारूढ़ दल की नीतियों पर सवाल उठाए हैं तो दूसरी ओर गजेंद्र चौहान ने उनकी भाषा और नजरिए पर आपत्ति जताई है। दोनों कलाकारों की टिप्पणियों के बीच एसआरएफटीआई का छात्र आंदोलन भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस पूरे मामले में छात्रों की मांगों और संस्थान के प्रशासन के पक्ष को समझना भी जरूरी है। फिलहाल गजेंद्र चौहान की टिप्पणी के बाद दोनों कलाकारों के बयानों को लेकर बहस जारी है। विवाद का समाधान बातचीत से निकलता है या राजनीतिक बयानबाजी आगे भी जारी रहती है इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

  • US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार

    US का अगला राष्ट्रपति कौन होगा….. ट्रंप ने जेडी वेंस और रुबियो को बताया संभावित दावेदार


    मिशिगन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) को लेकर रिपब्लिकन पार्टी के संभावित दावेदारों के नाम बताए हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Foreign Minister Marco Rubio) का नाम लेते हुए कहा कि पार्टी में कई मजबूत नेता हैं। ट्रंप ने रिपब्लिकन पार्टी की टीम को मजबूत बताते हुए डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा।

    मिशिगन में रैली से पहले एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप से पूछा गया कि 2028 में राष्ट्रपति पद के लिए कौन चुनाव लड़ सकता है। इस पर उन्होंने कहा कि अभी किसी एक नेता को सबसे आगे बताना जल्दबाजी होगी। हालांकि, पार्टी में कई अच्छे नाम मौजूद हैं।

    ट्रंप ने कहा “मैं आपको बता सकता हूं कि मेरी नजर में कौन है, लेकिन अभी थोड़ा जल्दी है।” उन्होंने जेडी वेंस और मार्को रुबियो का नाम लेते हुए कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के पास मजबूत नेताओं की कमी नहीं है, जबकि डेमोक्रेट्स के पास ऐसी टीम नहीं है।


    रूस-यूक्रेन युद्ध और तेल को लेकर भी बोले ट्रंप

    मिशिगन रवाना होने से पहले ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका तेल उद्योग को मौजूदा संघर्ष के कारण बंधक नहीं बनने देगा। ट्रंप ने दोहराया कि उनके विचार में यह युद्ध शुरू ही नहीं होना चाहिए था।


    3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव पर नजर

    अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन के लिए अहम माने जा रहे हैं। इन चुनावों से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों (प्रतिनिधि सभा और सीनेट) में किस पार्टी की स्थिति मजबूत होगी। इसका असर ट्रंप के विधायी एजेंडे और वॉशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर पड़ सकता है।


    ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट की चर्चा

    ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चिंताओं और घटती लोकप्रियता जैसी चुनौतियां भी हैं। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सितंबर में प्रकाशित एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत तक गिर गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 से उसके सर्वे रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनाव से पहले किसी राष्ट्रपति की रेटिंग का यह सबसे निचला स्तर था।

  • रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना

    रक्षा निर्यात में तेजी से आगे बढ़ रहा भारत….. यूरोप को सबसे ज्यादा हथियार देने वाला तीसरा देश बना


    नई दिल्ली।
    भारत (India) रक्षा निर्यात (Defence Exports) के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब यूरोप (Europe) का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है. पिछले वित्त वर्ष में भारत ने 38,424 करोड़ रुपये मूल्य के रक्षा सामान का निर्यात किया. यह उपलब्धि मुख्य रूप से यूरोप की बढ़ती मांग से जुड़ी है. रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था, उसके बाद यूरोपीय देशों ने अपनी सेनाओं को मजबूत करने की होड़ शुरू कर दी।

    गोला-बारूद, तोपखाने और विस्फोटक पदार्थों की जरूरत अचानक बहुत बढ़ गई. भारत ने इस मौके का फायदा उठाया और यूरोपीय खरीदारों को गोले, मोर्टार और विस्फोटक पदार्थों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति शुरू कर दी. इन वस्तुओं की खेप में 1,600 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी हुई है।

    यूरोपीय संघ ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने का फैसला लिया है. कई यूरोपीय देशों के पास पुराने स्टॉक खत्म हो गए थे और नए उत्पादन में समय लग रहा था. ऐसे में भारत जैसे देश ने तेज आपूर्ति की क्षमता दिखाई. भारत के रक्षा उद्योग ने ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत उत्पादन क्षमता बढ़ाई है.

    सरकारी और निजी कंपनियां मिलकर गोला-बारूद और तोपखाने के सिस्टम बना रही हैं. इससे न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि निर्यात भी तेजी से बढ़ रहा है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हाल में कहा कि आगे और ज्यादा संयुक्त उद्यम बनाए जाएंगे. इससे तकनीक साझा होगी और उत्पादन और बढ़ेगा।

    भारत अब सिर्फ छोटे हथियार नहीं बल्कि तोपखाने के सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और अन्य रक्षा उपकरण भी निर्यात कर रहा है. ये सामान 80 से ज्यादा देशों तक पहुंच रहे हैं. यूरोप के अलावा अफ्रीका, दक्षिण पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों में भी भारतीय रक्षा उत्पादों की मांग बढ़ रही है. यह बदलाव भारत की छवि को हथियार आयातक से निर्यातक देश के रूप में बदल रहा है।

    ‘मेक इन इंडिया’ अभियान ने रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया है. पहले भारत ज्यादातर हथियार विदेश से खरीदता था, लेकिन अब घरेलू कंपनियां आधुनिक हथियार बनाने में सक्षम हो रही हैं. कई निजी कंपनियों ने भी इस क्षेत्र में निवेश किया है. इससे रोजगार बढ़े हैं और विदेशी मुद्रा भी कमाई जा रही है. यूरोप की मांग ने भारतीय कंपनियों को बड़े ऑर्डर दिए हैं, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और बेहतर हुई है।

    हालांकि चुनौतियां भी हैं. गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना, डिलीवरी समय पर करना और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा का सामना करना जरूरी है. अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे पारंपरिक हथियार निर्यातक देशों के मुकाबले भारत को अपनी जगह और मजबूत करनी होगी. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत संयुक्त उद्यमों पर जोर देता रहा और नई तकनीक अपनाता रहा तो आने वाले सालों में निर्यात और तेजी से बढ़ सकता है।

    इस पूरे विकास से साफ है कि भू-राजनीतिक तनावों ने भारत के लिए नए मौके खोले हैं. यूक्रेन युद्ध ने यूरोप को हथियारों की जरूरत बढ़ा दी और भारत ने अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल किया. अब भारत रक्षा निर्यात में वैश्विक खिलाड़ी बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह उपलब्धि न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

  • बद्रीनाथ धाम का अद्भुत रहस्य: क्यों कहते हैं इसे भू-वैकुंठ और शीतकाल में कहां होते हैं भगवान बद्री के दर्शन?

    बद्रीनाथ धाम का अद्भुत रहस्य: क्यों कहते हैं इसे भू-वैकुंठ और शीतकाल में कहां होते हैं भगवान बद्री के दर्शन?


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की ऊंची पहाड़ियों के बीच स्थित बद्रीनाथ धाम देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर चार धाम यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। अलकनंदा नदी के किनारे बसे इस दिव्य धाम में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु बद्री विशाल के रूप में विराजमान हैं। इसी वजह से बद्रीनाथ धाम को भू-वैकुंठ यानी धरती पर भगवान विष्णु का धाम कहा जाता है। लेकिन इस मंदिर की खासियत केवल इसकी आस्था और पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं है। यहां की एक ऐसी परंपरा भी है जिसके तहत सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भी भगवान की पूजा लगातार जारी रहती है।

    क्यों कहा जाता है बद्रीनाथ को भू-वैकुंठ?

    हिंदू धर्म में वैकुंठ को भगवान विष्णु का दिव्य निवास माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहती है और यहां दर्शन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है। इसी धार्मिक विश्वास के कारण इस तीर्थ को भू-वैकुंठ की संज्ञा दी गई है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने बद्रीनाथ क्षेत्र में नर-नारायण के रूप में कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि तपस्या के दौरान माता लक्ष्मी ने उन्हें कठिन मौसम से बचाने के लिए बदरी यानी बेर के वृक्ष का रूप धारण किया था। इसी कथा को बद्रीनाथ नाम की उत्पत्ति से जोड़कर देखा जाता है। हिमालय की गोद में स्थित यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

    सर्दियों में क्यों बंद हो जाते हैं मंदिर के कपाट?

    बद्रीनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 3133 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सर्दियों में भारी बर्फबारी होती है और तापमान काफी नीचे चला जाता है। ऐसे मौसम में मंदिर तक पहुंचना और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा करना कठिन हो जाता है। इसी कारण हर साल शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

    आमतौर पर बद्रीनाथ मंदिर के कपाट अप्रैल या मई में खुलते हैं और अक्टूबर या नवंबर में बंद होते हैं। हालांकि कपाट खुलने और बंद होने की तारीख धार्मिक पंचांग तथा परंपराओं के अनुसार निर्धारित की जाती है। कपाट बंद होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इसके बाद शीतकालीन पूजा की परंपराएं शुरू होती हैं।

    छह महीने कहां होती है भगवान बद्री विशाल की पूजा?

    बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि भगवान की पूजा भी बंद हो जाती है। धार्मिक परंपरा के अनुसार शीतकाल में भगवान बद्री विशाल की पूजा के लिए उनकी उत्सव मूर्ति को पांडुकेश्वर स्थित योगध्यान बदरी मंदिर ले जाया जाता है। वहीं जोशीमठ के नरसिंह मंदिर का भी बद्रीनाथ धाम की शीतकालीन पूजा व्यवस्था में विशेष महत्व है।

    जोशीमठ को ज्योतिर्मठ के नाम से भी जाना जाता है। सर्दियों में बद्रीनाथ के कपाट बंद रहने के दौरान यहां भगवान की पूजा से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं। इस व्यवस्था के जरिए हिमालय में मौसम की कठिन परिस्थितियों के बावजूद धार्मिक अनुष्ठान जारी रहते हैं। यही परंपरा बद्रीनाथ धाम की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को खास बनाती है।

    कौन करते हैं बद्रीनाथ मंदिर में पूजा?

    बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी को रावल कहा जाता है। परंपरागत रूप से रावल केरल के नंबूदरी ब्राह्मण समुदाय से होते हैं। मंदिर में वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने बद्रीनाथ में भगवान विष्णु की मूर्ति को पुनः स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    बद्रीनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालु आसपास के कई धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों के दर्शन भी करते हैं। इनमें माणा गांव व्यास गुफा भीम पुल और सरस्वती नदी का क्षेत्र प्रमुख हैं। इस तरह बद्रीनाथ धाम केवल दर्शन का स्थान नहीं बल्कि पौराणिक मान्यताओं प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन परंपराओं का अनूठा संगम है।

    भू-वैकुंठ के रूप में प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि यहां मौसम के कारण मंदिर के कपाट भले ही कुछ महीनों के लिए बंद हो जाएं लेकिन भगवान के प्रति श्रद्धा और पूजा की परंपरा निरंतर बनी रहती है।