Author: bharati

  • जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में

    जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में


    रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जमीन विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवरमऊ ग्राम सभा के पूरे दुर्गा सिंह मजरे में हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान वीरेंद्र सिंह पर चाकू से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतक के परिजनों ने इस घटना के लिए उसके ससुर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान ससुर ने चाकू से हमला किया, जिसके कारण वीरेंद्र सिंह की मौत हुई। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घटना की सूचना मिलते ही नसीराबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पुलिस ने मृतक के सास और ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

  • हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

    नई दिल्ली । भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत ने 61 यूनिकॉर्न स्टार्टअप के साथ दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि देश में नवाचार, तकनीकी विकास और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानी जा रही है। यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका बाजार मूल्य एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। उसके पास 806 यूनिकॉर्न हैं, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसके बाद चीन 381 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 70 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत 61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहा है।

    देश के भीतर बेंगलुरु एक बार फिर स्टार्टअप राजधानी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। शहर में 25 यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नवाचार केंद्र बनाती हैं। इसके बाद मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों शहरों ने तकनीकी उद्यम, निवेश और प्रतिभा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 1,603 तक पहुंच गई है। इन सभी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति ने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति दी है और इसी वजह से यूनिकॉर्न कंपनियों के मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार एआई क्षेत्र ने इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव डाला है। वैश्विक यूनिकॉर्न कंपनियों की कुल वैल्यू में एआई आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एआई यूनिकॉर्न की संख्या भी तेजी से बढ़कर 215 हो गई है, जो फिनटेक क्षेत्र की कंपनियों के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनी रह सकती है।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के दौरान 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह संख्या वर्ष 2021 के रिकॉर्ड स्तर से कम है, लेकिन इस बार उभरने वाले स्टार्टअप अधिक परिपक्व और उच्च गुणवत्ता वाले माने जा रहे हैं। इनमें एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियों का दबदबा देखने को मिला।

    वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक सबसे अधिक मूल्यांकन वाली यूनिकॉर्न कंपनी बनी हुई है। इसके बाद ओपनएआई और चीन की बाइटडांस का स्थान है। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और निवेशकों का झुकाव भी इसी क्षेत्र की ओर रहेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग केवल संख्या का संकेत नहीं बल्कि देश की नवाचार क्षमता, उद्यमिता संस्कृति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। यदि निवेश, अनुसंधान, तकनीकी विकास और नीतिगत सहयोग की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी लगातार विकसित कर रहा है।

  • कौशांबी में बड़ा धमाका, टोल प्लाजा से टकराया गैस टैंकर, आग की लपटों में घिरे कर्मचारी, राहत कार्य जारी

    कौशांबी में बड़ा धमाका, टोल प्लाजा से टकराया गैस टैंकर, आग की लपटों में घिरे कर्मचारी, राहत कार्य जारी


    कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में शुक्रवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। कोखराज टोल प्लाजा के पास एलपीजी से भरा एक टैंकर अनियंत्रित होकर टोल प्लाजा से टकरा गया। टक्कर के तुरंत बाद जोरदार धमाका हुआ और टैंकर में भीषण आग लग गई। कुछ ही पलों में आग की ऊंची लपटों और घने धुएं ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसा सुबह करीब छह बजे हुआ। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि टोल प्लाजा पर मौजूद कर्मचारी इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में कुल 10 लोग झुलस गए हैं, जिनमें पांच टोल कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। घायलों में पांच लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

    हादसे के दौरान टैंकर के चालक और परिचालक ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते वाहन से छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बच गई। दूसरी ओर आग की चपेट में आए कई कर्मचारी सड़क पर दर्द से तड़पते दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी।

    आग इतनी भीषण थी कि उसकी लपटें और धुएं का गुबार करीब दो किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। सुरक्षा के मद्देनजर टोल प्लाजा के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र को खाली कराते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

    सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, जबकि राहत एवं बचाव अभियान भी जारी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही सीमित कर दी है।

    पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक आशंका है कि टैंकर के अनियंत्रित होने के कारण यह दुर्घटना हुई, हालांकि वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • वैश्विक तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, आपूर्ति सुधरने से बाजार को राहत, फिर भी पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है नजर

    वैश्विक तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, आपूर्ति सुधरने से बाजार को राहत, फिर भी पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है नजर

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी का दौर जारी है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति सामान्य होने के कारण शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों के दाम दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। ऊर्जा बाजार में यह गिरावट ऐसे समय दर्ज की गई है जब निवेशकों का भरोसा आपूर्ति व्यवस्था के स्थिर होने की ओर बढ़ा है। हालांकि पश्चिम एशिया में हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं ने यह संकेत भी दिया है कि बाजार पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं निकला है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ सप्ताह से उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां रही हैं। पहले संघर्ष और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब हालात अपेक्षाकृत सामान्य होने के बाद बाजार में राहत का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति सुचारु बनी रहती है तो निकट भविष्य में कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।

    हालांकि इस राहत के बीच ओमान के निकट एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने ऊर्जा बाजार को फिर से सतर्क कर दिया। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए तेल की कीमतों में तेजी आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका थी कि यदि समुद्री सुरक्षा प्रभावित हुई तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। बाद में बाजार ने स्थिति का आकलन किया और कीमतें दोबारा गिरावट की ओर लौट गईं। इससे स्पष्ट है कि निवेशक अभी भी पश्चिम एशिया की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि, सुरक्षा चुनौती या राजनीतिक तनाव का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में इस मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही में सुधार होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका काफी कम हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है।

    सप्ताहभर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल आपूर्ति की स्थिति को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त है। फिर भी विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यदि क्षेत्रीय तनाव दोबारा बढ़ता है या समुद्री मार्गों में किसी प्रकार की बाधा आती है तो कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात लागत कम हो सकती है, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है। साथ ही परिवहन, विनिर्माण और ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों को भी लागत में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लंबे समय तक बना रहता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है।

    भारतीय कच्चे तेल बास्केट की औसत कीमतों में भी हाल के समय में उल्लेखनीय कमी आई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में आई नरमी का असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इससे विदेशी मुद्रा व्यय में कमी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    फिलहाल वैश्विक तेल बाजार राहत और सतर्कता के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। एक ओर आपूर्ति सामान्य होने से कीमतों में गिरावट का माहौल बना है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया की घटनाएं यह याद दिला रही हैं कि ऊर्जा बाजार अभी भी भू-राजनीतिक जोखिमों से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मांग की दिशा ही कच्चे तेल की कीमतों का अगला रुख तय करेगी।

  • अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें

    अयोध्या विवाद पर सीएम योगी का बड़ा बयान, बोले- प्रमाण हैं तो SIT को दें, बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें


    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में आयोजित एक जनसभा के दौरान विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे और जय श्रीराम का उद्घोष करने वालों पर कार्रवाई करते थे, वही आज आस्था की बात कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आरोप जनता स्वीकार नहीं करेगी।

    सीएम योगी ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय ऐसा था जब कुछ राजनीतिक दल और उनके समर्थक यह कहते थे कि भगवान राम का अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध करने के लिए अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ी गई और मंदिर निर्माण रोकने के प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर वे लोग थे जो जय श्रीराम का नारा लगाने वालों पर लाठीचार्ज और गोली चलाने तक से पीछे नहीं हटते थे, लेकिन आज वही लोग आस्था के साथ खिलवाड़ होने का आरोप लगा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग राम नवमी, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, कांवड़ यात्रा और दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान कानून व्यवस्था बिगड़ने का आरोप झेलते रहे, वे अब अयोध्या को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जनता को स्वीकार नहीं है।

    योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और आरोप लगाया कि उसने देश में भ्रष्टाचार और बेईमानी को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि देश को केवल लूटा ही नहीं गया बल्कि उसकी व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया गया। ऐसे लोग अब अयोध्या और धार्मिक आस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जो उचित नहीं है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होगी और सच सभी के सामने लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

    अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने विपक्ष से अपील की कि यदि उनके पास किसी भी आरोप से जुड़े तथ्य या प्रमाण हैं तो उन्हें विशेष जांच दल यानी एसआईटी के सामने प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई ठोस सबूत नहीं है तो बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

  • भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में दोनों देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देश ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो व्यापार, निवेश, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करे। उनका कहना है कि आगामी समय में लागू होने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने यूके के बिजनेस एवं ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाने, निवेश बढ़ाने तथा नई व्यापारिक संभावनाओं पर विचार किया गया। गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, पारदर्शिता और भविष्य की साझा सोच लगातार मजबूत हो रही है, जो इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) लागू होने के बाद दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और कारोबारियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहन देना और आर्थिक सहयोग को व्यापक आधार प्रदान करना है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों में रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा। उन्होंने कारोबारी समुदाय से आग्रह किया कि वे इस समझौते के माध्यम से उपलब्ध होने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं।

    गोयल ने कहा कि भारत और यूके के बीच संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक दायरे से कहीं आगे निकल चुके हैं। दोनों देश तकनीक, नवाचार, निवेश, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, आवश्यक खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूनाइटेड किंगडम वैश्विक वित्त, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है। मजबूत आर्थिक सहयोग से उद्योगों के लिए बाजार का विस्तार होगा और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

    पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारत और यूके के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। उनका कहना है कि दोनों देश साझा हितों और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी व्यापार, निवेश, तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

  • अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद

    अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: रातभर पूछताछ में कई राज बेनकाब, 8 आरोपी गिरफ्तार, 60 लाख रुपये बरामद


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूरी रात पूछताछ की। शुरुआती जांच में ऐसे कई तथ्य सामने आए हैं जिनसे संकेत मिलता है कि चढ़ावे की रकम में हेराफेरी का यह कथित खेल पिछले दो से तीन वर्षों से लगातार चल रहा था।

    पुलिस के अनुसार अब तक करीब 60 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गई कुल रकम कितनी है और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पूछताछ के दौरान कुछ आरोपियों ने कथित तौर पर ऐसे लोगों के नाम भी बताए हैं जिनकी भूमिका की अब जांच की जा रही है।

    जांच में सामने आया कि चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित रूप से नकदी की गड्डियां अलग कर दी जाती थीं। इसके बाद उन्हें अस्थायी रूप से बाथरूम में छिपाया जाता था ताकि किसी को शक न हो। मौका मिलने पर यह रकम मंदिर परिसर से बाहर पहुंचाई जाती थी और बाद में एक तय स्थान पर उसका बंटवारा किया जाता था। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

    एफआईआर में जिन आठ लोगों को नामजद किया गया है उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे मामले की परतें खोली जा सकें।

    जांच के अनुसार रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू मंदिर की गणना व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभाता था और गणना कक्ष की चाबी भी उसके पास रहती थी। सुभाष श्रीवास्तव गणना प्रक्रिया का प्रभारी बताया जा रहा है। वहीं अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा चढ़ावे की गिनती से जुड़े कार्यों में तैनात थे। पुलिस का दावा है कि इन दोनों के ठिकानों से चोरी की रकम भी बरामद हुई है। मनीष यादव, करुणेश पाण्डेय, रमाशंकर मिश्रा और अविनाश शुक्ला की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है।

    पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गबन की राशि को किस तरह ठिकाने लगाया गया और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी संलिप्तता रही है। बरामद नकदी के अलावा बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

    फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत अलर्ट तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने कहा फिलहाल ईरान की यात्रा न करें


    नई दिल्ली । भारत ने ईरान में मौजूद सुरक्षा हालात को देखते हुए अपने नागरिकों के लिए नई ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने साफ कहा है कि परिस्थितियों में कुछ सुधार के संकेत जरूर मिले हैं लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा सकती। ऐसे में भारतीय नागरिक अगली सूचना तक ईरान की सभी गैर जरूरी यात्राओं से बचें और केवल अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही वहां जाने का निर्णय लें।

    दूतावास ने स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के लिए ईरान की यात्रा बेहद जरूरी है वे पूरी सतर्कता बरतें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सभी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। भारतीय मिशन लगातार वहां की बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर नई एडवाइजरी जारी की जाएगी।

    भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों से भी विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्हें सलाह दी गई है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा करने से बचें और किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। केवल विश्वसनीय समाचार स्रोतों और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर ही निर्णय लें।

    दूतावास ने कहा कि सुरक्षा हालात में सुधार के बावजूद जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मौजूदा एडवाइजरी को फिलहाल वापस नहीं लिया गया है। हालात पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आवश्यकता के अनुसार आगे के निर्देश जारी किए जाएंगे।

    भारतीय नागरिकों से यह भी कहा गया है कि यदि वे ईरान में रह रहे हैं तो अपने संपर्क विवरण भारतीय दूतावास के पास अवश्य दर्ज कराएं ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनसे तुरंत संपर्क किया जा सके। दूतावास ने आपातकालीन सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत संपर्क करने की सलाह दी है।

    यह एडवाइजरी ऐसे समय जारी की गई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। हालांकि क्षेत्र में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और किसी भी समय स्थिति बदल सकती है। इसी वजह से भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

    भारतीय दूतावास ने भरोसा दिलाया है कि वह ईरान में रह रहे प्रत्येक भारतीय की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे धैर्य बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में दूतावास द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों का उपयोग करें।

    आपातकालीन संपर्क नंबर

    +989128109115

    +989128109109

    +989128109102

    +989932179359

  • होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट, ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की निकासी पर लगी रोक

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा संकट, ड्रोन हमले के बाद 11 हजार नाविकों की निकासी पर लगी रोक

    नई दिल्ली ।  होर्मुज जलडमरूमध्य में एक कार्गो जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं सुरक्षा हालात बिगड़ने के चलते अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन आईएमओ ने 11 हजार से अधिक फंसे नाविकों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाया जा रहा विशेष रेस्क्यू अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया है। इस फैसले के बाद हजारों नाविक अब भी समुद्र में फंसे हुए हैं और उनकी सुरक्षित वापसी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने बताया कि गुरुवार को जिस मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ वह संगठन की आधिकारिक निकासी योजना का हिस्सा नहीं था। इसके बावजूद इस घटना ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक निकासी सूची में शामिल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती तब तक बचाव अभियान को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

    जानकारी के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ओमान और कई सदस्य देशों के सहयोग से पिछले कुछ दिनों से फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चला रहे थे। इस विशेष ऑपरेशन का उद्देश्य युद्ध और बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्र में फंसे जहाजों और उनके चालक दल को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना था।

    इसी दौरान ओमान के तट के पास सिंगापुर के झंडे वाले कार्गो जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस हमले में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

    आईएमओ प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगेज ने कहा कि निकासी अभियान को फिलहाल अस्थायी रूप से स्थगित किया गया है और सुरक्षा स्थिति की दोबारा समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी जहाज को तब तक आगे नहीं बढ़ाया जाएगा जब तक सभी संबंधित देशों और एजेंसियों की ओर से सुरक्षित मार्ग की गारंटी नहीं मिल जाती।

    बताया जा रहा है कि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद लगभग 11 हजार नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना बनाई गई थी। हालांकि ताजा ड्रोन हमले ने इस पूरी प्रक्रिया को झटका दिया है और अब निकासी अभियान अनिश्चितकाल के लिए टल सकता है।

    अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार इस पूरे क्षेत्र में अभी भी करीब 20 हजार से अधिक नाविक विभिन्न मालवाहक और वाणिज्यिक जहाजों पर फंसे हुए हैं। इनमें से लगभग 11 हजार लोगों को पहले चरण में सुरक्षित निकालने की योजना तैयार की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक समुद्री व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है।

    अमेरिका की ओर से ईरान पर लगाए गए आरोपों के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि ईरान ने अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि सुरक्षा हालात कब सामान्य होंगे और हजारों फंसे नाविकों का रेस्क्यू अभियान दोबारा कब शुरू किया जाएगा।

  • तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल

    तीस्ता पर चीन-बांग्लादेश समझौता, भारत के लिए बढ़ी टेंशन? सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास नई रणनीतिक हलचल


    नई दिल्ली । चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी परियोजना को लेकर सहयोग का नया अध्याय शुरू हो गया है। दोनों देशों ने तीस्ता सहित अन्य नदियों के जल प्रबंधन, तकनीकी सहयोग और संभावित वित्तीय सहायता को लेकर सहमति जताई है। इस फैसले को भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि तीस्ता नदी परियोजना भारत के बेहद संवेदनशील सिलिगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ के निकट स्थित है। यही संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सबसे अहम संपर्क मार्ग है।

    बीजिंग में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और चीन के जल संसाधन मंत्री ली गुओयिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, जल संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास पर व्यापक सहयोग को लेकर चर्चा हुई। बांग्लादेश ने तीस्ता परियोजना के लिए चीन से आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहयोग की मांग भी की है। चीन लंबे समय से इस परियोजना में रुचि दिखाता रहा है और अब दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों ने इस सहयोग को नई गति दे दी है।

    तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक चीन दौरा माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने जल संसाधन प्रबंधन के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि तीस्ता परियोजना से सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी, बाढ़ नियंत्रण में मदद मिलेगी और लाखों लोगों की आजीविका बेहतर होगी।

    हालांकि इस समझौते को भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों के नजरिए से भी देखा जा रहा है। तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलकर सिक्किम और पश्चिम बंगाल से गुजरते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। परियोजना का स्थान सिलिगुड़ी कॉरिडोर के काफी निकट होने के कारण विशेषज्ञ इसे सामरिक दृष्टि से संवेदनशील मानते हैं। यही कारण है कि चीन की बढ़ती मौजूदगी पर भारत की नजर बनी हुई है।

    भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पश्चिम बंगाल की सहमति नहीं बनने के कारण दोनों देशों के बीच व्यापक जल समझौता अब तक नहीं हो सका है। ऐसे में बांग्लादेश द्वारा चीन के साथ बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल यह सहयोग जल संसाधन प्रबंधन और विकास परियोजनाओं तक सीमित बताया जा रहा है, लेकिन भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर रखेगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परियोजना का वास्तविक स्वरूप क्या होता है और इसका क्षेत्रीय सुरक्षा तथा कूटनीतिक संबंधों पर कितना प्रभाव पड़ता है।