Author: bharati

  • आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    आतंकी धमकी से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों में चिंता, पत्र में कई लोगों की निजी जानकारी का किया गया जिक्र

    नई दिल्ली ।जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों को कथित आतंकी संगठन की ओर से धमकी भरे पत्र मिलने का मामला सामने आया है। इन पत्रों में कई कश्मीरी पंडितों के नाम और उनके पते का उल्लेख किए जाने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रों के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की जांच शुरू कर दी है।

    बताया गया है कि धमकी भरे पत्र में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ लोगों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। पत्र में लोगों के नाम के साथ उनके घर और गली से जुड़ी जानकारी भी दर्ज होने की बात सामने आई है। इस तरह की निजी जानकारी का इस्तेमाल किए जाने से प्रभावित लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है।

    जानकारी के अनुसार, पत्र में कश्मीर से बाहर चले गए कश्मीरी पंडितों को लेकर आपत्तिजनक आरोप लगाए गए हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। हालांकि, प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि पत्र वास्तव में किस संगठन या व्यक्ति की ओर से भेजे गए हैं और इनमें किए गए दावों की वास्तविकता क्या है।

    मामले में यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल नाम के संगठन का उल्लेख सामने आया है, जिसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक मोर्चा बताया जा रहा है। हालांकि, पत्र की वास्तविकता, इसे जारी करने वाले व्यक्ति या संगठन और इसके पीछे की मंशा की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। सुरक्षा एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले भी कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी सामने आई थी। पिछले मामले में कुछ सरकारी कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी पत्र में शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई थी।

    हालिया घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों की सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है। कुछ समय पहले कुलगाम में दो प्रवासी मजदूरों पर हमला कर उनकी हत्या किए जाने की घटना ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए थे।

    जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी हाल में घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को मिल रही आतंकी धमकियों को गंभीरता से लेने की बात कही थी। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से ऐसे मामलों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने पूर्व में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं का भी उल्लेख किया था।

    प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी प्राथमिकता धमकी की विश्वसनीयता का आकलन करने के साथ प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। सुरक्षा एजेंसियां पत्रों की जांच, उनके प्रसार के स्रोत और संभावित जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में जुटी हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर की जाएगी।

    कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए इस घटनाक्रम ने सुरक्षा और विश्वास से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने ला दिया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और समय रहते आवश्यक कदम उठाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है, ताकि धमकी के कारण लोगों में भय का माहौल न बने और किसी संभावित घटना को रोका जा सके।

  • इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी

    इंदौर होटल कांड में नया मोड़, युवक ने बदली पहचान; मोबाइल और कमरे की तलाशी में मिला संदिग्ध सामान, पुलिस जांच में जुटी


    इंदौर । इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में स्थित एक होटल में युवती के साथ दो युवकों के मिलने के बाद रविवार रात हंगामा हो गया। स्कीम नंबर 114 पार्ट-1 स्थित होटल सिल्वर पैलेस में कुछ लोगों ने युवती के साथ गलत गतिविधि होने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। इसके बाद राजपूत करणी सेना के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और होटल के कमरे से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। दूसरा युवक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने फिलहाल पकड़े गए युवक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

    मिली जानकारी के मुताबिक करणी सेना के कार्यकर्ताओं को होटल में एक हिंदू युवती के साथ दो युवकों के मौजूद होने की सूचना मिली थी। संगठन के पदाधिकारी होटल पहुंचे और कमरे में मौजूद युवकों से पूछताछ की। आरोप है कि दोनों युवक युवती को नशा करा रहे थे। पूछताछ के दौरान पकड़े गए युवक ने पहले अपनी पहचान छिपाते हुए अपना नाम लक्की बताया। बाद में पूछताछ में उसकी पहचान खजराना निवासी फैजान खान के रूप में हुई। उसके साथ मौजूद अमन खान मौके से निकल गया।

    मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने अमन पर फर्जी पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराने और ब्लैकमेल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए। संगठन का दावा है कि दोनों युवक खजराना और आसपास के क्षेत्रों में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।

    घटना के दौरान फैजान के मोबाइल फोन की जांच किए जाने का भी दावा किया गया। संगठन के मुताबिक मोबाइल में कई युवतियों के साथ आपत्तिजनक फोटो वीडियो और चैट मिले। इसके अलावा गांजा एमडी और चाकू की तस्वीरें भी मोबाइल में होने की बात सामने आई। होटल के कमरे की तलाशी के दौरान शराब की बोतलें कंडोम और कथित तौर पर सेक्स वर्धक गोलियां मिलने का भी दावा किया गया है। पुलिस इन सभी बरामद वस्तुओं और डिजिटल सामग्री की जांच कर रही है।

    मामले में सबसे अहम पहलू युवती की स्थिति और उसके बयान को माना जा रहा है। लसूड़िया थाना प्रभारी राजकुमार यादव के मुताबिक पुलिस के पास करणी सेना के कार्यकर्ता फैजान नाम के युवक को लेकर आए थे। पुलिस का कहना है कि युवक काफी नशे की हालत में था। उसके मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो चाकू और गांजे से संबंधित तस्वीरें मिलने की बात भी सामने आई है। पुलिस अधिकारी के अनुसार युवक का नशा उतरने के बाद उससे विस्तार से पूछताछ की जाएगी और युवती से भी घटना के संबंध में जानकारी ली जाएगी।

    फिलहाल पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की है। फरार बताए जा रहे अमन खान की तलाश और मामले में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। करणी सेना के पदाधिकारियों ने फरार युवक की गिरफ्तारी और पूरे मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

    पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि होटल के कमरे में वास्तव में क्या हुआ था और युवती के साथ किसी तरह की जबरदस्ती या नशीला पदार्थ देने की बात सही है या नहीं। फिलहाल मामले में लगाए गए सभी गंभीर आरोप जांच के अधीन हैं।

  • प्रणेश एम ने सात अंक लेकर जीता खिताब, बेहतर टाईब्रेक से भारतीय ग्रैंडमास्टर ने हासिल किया पहला स्थान

    प्रणेश एम ने सात अंक लेकर जीता खिताब, बेहतर टाईब्रेक से भारतीय ग्रैंडमास्टर ने हासिल किया पहला स्थान


    नई दिल्ली ।
    भारतीय ग्रैंडमास्टर प्रणेश एम ने हंगरी में आयोजित कानिज्सा ओपन 2026 शतरंज टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है। नौ राउंड की इस प्रतियोगिता में प्रणेश ने कुल सात अंक हासिल किए और बेहतर टाईब्रेक के आधार पर पहला स्थान हासिल किया। मजबूत अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच मिली यह जीत भारतीय शतरंज के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    टूर्नामेंट के नौवें और आखिरी राउंड में प्रणेश ने जर्मनी के वादिम पेट्रोव्स्की को सफेद मोहरों से हराया। इस जीत के साथ उन्होंने सात अंक पूरे किए और खिताब की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। अंतिम राउंड के परिणामों के बाद कई खिलाड़ी समान अंकों पर थे, जिसके चलते विजेता का फैसला टाईब्रेक के आधार पर हुआ।

    नौ राउंड पूरे होने के बाद प्रणेश के अलावा इजराइल के ओर ब्रोंस्टीन, यूक्रेन के आंद्रेई वोलोकिटिन और भारत के कार्तिक वेंकटरमन ने भी सात-सात अंक हासिल किए। हालांकि, बेहतर टाईब्रेक के कारण प्रणेश सबसे आगे रहे और उन्होंने टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया।

    कार्तिक वेंकटरमन के पास आखिरी दौर से पहले खिताब अकेले जीतने का अवसर था, लेकिन उनके मुकाबले में आंद्रेई वोलोकिटिन ने ड्रॉ हासिल किया। दूसरी ओर, ओर ब्रोंस्टीन ने अपने हमवतन आईएम बेनी आइजेनबर्ग को हराकर सात अंक पूरे किए और शीर्ष समूह में जगह बनाई।

    प्रणेश की उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि कानिज्सा ओपन को मध्य यूरोप के प्रतिस्पर्धी ओपन टूर्नामेंटों में शामिल किया जाता है। ऐसे टूर्नामेंट में अलग-अलग देशों के मजबूत खिलाड़ियों के खिलाफ लगातार अच्छा प्रदर्शन करना किसी भी शतरंज खिलाड़ी के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। प्रणेश ने पूरे आयोजन के दौरान अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी और आखिरी दौर में जीत के साथ खिताब पर कब्जा किया।

    अगस्त 2026 की ताजा एफआईडीई रैंकिंग के अनुसार प्रणेश की रेटिंग 2673 है और वह विश्व रैंकिंग में 44वें स्थान पर हैं। तमिलनाडु के कराईकुडी से आने वाले प्रणेश ने अंतरराष्ट्रीय शतरंज में लगातार अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है। कानिज्सा ओपन की जीत उनके करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ती है।

    इस प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों का सामूहिक प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। कानिज्सा ओपन 2026 के ग्रुप ए में कुल 226 खिलाड़ी शामिल हुए। भारत के नीलाश साहा ने 6.5 अंक हासिल कर 10वां स्थान प्राप्त किया। वह कई अन्य खिलाड़ियों के साथ समान अंकों पर रहे।

    नीतीश बेलुरकर ने छह अंक के साथ 20वां स्थान हासिल किया। अजय संतोष पार्वथारेड्डी और भट्टाचार्य सोहम भी छह-छह अंक लेकर क्रमश: 21वें और 23वें स्थान पर रहे। इस तरह छह भारतीय खिलाड़ी शीर्ष 23 में जगह बनाने में सफल रहे।

    प्रणेश की जीत पर हंगरी स्थित भारतीय दूतावास ने भी उन्हें बधाई दी। उनकी सफलता को वैश्विक मंच पर भारतीय शतरंज प्रतिभा के शानदार प्रदर्शन के रूप में रेखांकित किया गया। हंगरी में भारतीय खिलाड़ियों के अच्छे प्रदर्शन के संदर्भ में भी इस उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया गया।

    कानिज्सा ओपन में प्रणेश का प्रदर्शन उनकी निरंतरता और दबाव में बेहतर परिणाम हासिल करने की क्षमता को दर्शाता है। सात अंकों पर संयुक्त रूप से रहने वाले चार खिलाड़ियों में बेहतर टाईब्रेक के आधार पर पहला स्थान हासिल करना उनकी इस प्रतियोगिता में मजबूत स्थिति को स्पष्ट करता है। यह जीत आने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए भी उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाली उपलब्धि साबित हो सकती है।

  • इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन

    इंदौर की लकड़ी मंडी में बड़ा खेल! शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, राज्य स्तरीय टीम ने पकड़े बिना टीपी और फर्जी दस्तावेज वाले वाहन


    इंदौर । इंदौर के धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में अवैध वनोपज के कारोबार को लेकर वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब तीन महीने पहले ही विभाग के अधिकारियों को शिकायत मिली थी कि मार्केट और आसपास के इलाकों में बिना ट्रांजिट परमिट यानी टीपी के लकड़ी और अन्य वनोपज लाई जा रही है। शिकायतों को गंभीर मानते हुए इंदौर डीएफओ ने सात रात्रि गश्ती दल भी गठित किए थे। इन दलों को अलग-अलग दिनों में जीएनटी मार्केट और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी कर अवैध परिवहन रोकने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई और आखिरकार राज्य स्तरीय उड़न दस्ते को इंदौर आकर कार्रवाई करनी पड़ी।

    वन विभाग की ओर से 15 मई को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया था कि सीएम हेल्पलाइन फोन और अन्य माध्यमों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि जीएनटी मार्केट में बिना टीपी अवैध वनोपज लाई जा रही है और उसका कारोबार किया जा रहा है। इसके बाद सात टीमों को रात में गश्त करने और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे कि बिना वैध दस्तावेज के कोई वनोपज इंदौर में प्रवेश न कर सके। प्रत्येक टीम को सप्ताह में एक दिन रात्रि गश्त करनी थी। यानी विभाग को शिकायत की जानकारी भी थी और निगरानी के लिए बाकायदा व्यवस्था भी बनाई गई थी लेकिन अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लग सका।

    मामला राज्य स्तर तक पहुंचने के बाद भोपाल से राज्य स्तरीय उड़न दस्ता इंदौर पहुंचा। टीम ने धार रोड स्थित जीएनटी टिम्बर मार्केट में कार्रवाई करते हुए बबूल की लकड़ी से भरे दो वाहनों को पकड़ा। जांच के दौरान एक वाहन का चालक लकड़ी के परिवहन से संबंधित टीपी पेश नहीं कर सका। दूसरे वाहन में महाराष्ट्र के जलगांव की टीपी दिखाई गई लेकिन जांच में उसे फर्जी पाया गया। टीम ने दस्तावेज को स्कैन कर तैयार की गई फर्जी टीपी बताया। दोनों वाहनों को जब्त कर वन विभाग के नवरत्न बाग स्थित कार्यालय भेज दिया गया।

    इस कार्रवाई के दौरान स्थानीय वन अमले को पहले से शामिल नहीं किया गया था। राज्य स्तरीय टीम के साथ उज्जैन और देवास के वन कर्मचारी भी मौजूद रहे। टीम ने जीएनटी मार्केट की जालाराम इंटरप्राइजेस की आरा मशीन की भी जांच की। करीब दो घंटे तक दस्तावेज और रिकॉर्ड खंगालने के बाद मशीन को सील कर दिया गया।

    प्रारंभिक जांच में यह आशंका भी सामने आई है कि अलग-अलग राज्यों की टीपी का इस्तेमाल कर मध्यप्रदेश की लकड़ी को दूसरे राज्यों से लाई गई वनोपज के रूप में दिखाया जा रहा हो सकता है। महाराष्ट्र तेलंगाना गुजरात राजस्थान और उत्तर प्रदेश की टीपी के जरिए लकड़ी के परिवहन की शिकायतें जांच के दायरे में हैं। यह भी आरोप सामने आते रहे हैं कि एक ही टीपी के आधार पर अलग-अलग वाहनों में लकड़ी भेजी जाती है।

    जीएनटी मार्केट में बिना सील हैमर के लकड़ी से भरे वाहनों के पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं। आरोप है कि ऐसी लकड़ी को आरा मशीनों में चीरकर गुटके और फाचरे तैयार किए जाते हैं और फिर उन्हें इंदौर की नगरीय सीमा से बाहर भेज दिया जाता है। अब राज्य स्तरीय टीम इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    डीएफओ इंदौर लालसुधाकर सिंह के मुताबिक बिना वैध दस्तावेज के वनोपज का परिवहन अवैध माना जाता है और ऐसे मामलों में वाहन तथा संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब विभाग को तीन महीने पहले ही अवैध कारोबार की सूचना मिल चुकी थी और सात गश्ती दल निगरानी में लगाए गए थे तो राज्य स्तरीय टीम की कार्रवाई से पहले स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस सवाल का जवाब भी सामने आने की उम्मीद है।

  • कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद

    कोच के दस्तावेजों पर IDA का स्विमिंग पूल टेंडर? बिना अनुमति इस्तेमाल का आरोप, संस्था ने कहा- आरोप बेबुनियाद


    इंदौर  इंदौर में स्विमिंग पूल संचालन के एक टेंडर को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। दिल्ली के रिटायर्ड इंटरनेशनल स्विमिंग कोच मुकुंद मोहन शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल कर इंदौर डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी IDA का स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल किया गया। कोच का दावा है कि उन्होंने ये दस्तावेज केवल दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के टेंडर में भाग लेने के लिए एक संस्था को दिए थे लेकिन बाद में उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर के टेंडर में कर लिया गया। मामला सामने आने के बाद उन्होंने इंदौर पुलिस कमिश्नर से शिकायत की है और अब क्राइम ब्रांच मामले में FIR दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

    मुकुंद मोहन शर्मा के अनुसार वह वर्ष 2022 में अपने छात्र संदीप तोकस के माध्यम से देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट से जुड़े थे। इसके बाद 21 फरवरी 2023 को उन्होंने संस्था के डायरेक्टर देवेंद्र लांबा और उनकी पत्नी मधुलिका को अपने शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता से जुड़े दस्तावेज दिए थे। उनका कहना है कि ये दस्तावेज केवल नई दिल्ली के तालकटोरा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के स्विमिंग पूल संचालन के टेंडर में इस्तेमाल करने के लिए दिए गए थे। बाद में वह टेंडर निरस्त हो गया।

    कोच का आरोप है कि टेंडर निरस्त होने के बाद उन्होंने अपने दस्तावेजों को किसी अन्य सरकारी अर्धसरकारी या निजी संस्था की टेंडर प्रक्रिया में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद उन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल इंदौर में IDA के स्विमिंग पूल संचालन का ठेका हासिल करने में किया गया। शर्मा के मुताबिक 8 सितंबर 2023 को IDA का अनुबंध हासिल किया गया था। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया में उनसे किसी तरह की लिखित अनुमति या सहमति नहीं ली गई।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शर्मा को कथित दस्तावेज दुरुपयोग की जानकारी करीब तीन साल बाद जनवरी 2026 में मिली। एक परिचित के माध्यम से उन्हें पता चला कि उनके दस्तावेज इंदौर के IDA टेंडर में लगाए गए हैं। इसके बाद उन्होंने IDA के CEO को ईमेल के जरिए शिकायत की। 25 फरवरी को उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए ईमेल भेजा और 7 मार्च को रिमाइंडर भी भेजा। कई महीने तक स्पष्ट कार्रवाई या जांच की जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने लिखित शिकायत के साथ शपथपत्र भी दिया।

    शर्मा ने यह भी आशंका जताई है कि उनके शैक्षणिक और पेशेवर दस्तावेजों का इस्तेमाल अन्य शहरों में स्विमिंग पूल के टेंडर लाइसेंस या परमिट हासिल करने के लिए भी किया गया हो सकता है। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर के स्विमिंग पूल से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में भी अपने दस्तावेजों के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की है।

    हालांकि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट के संचालक देवेंद्र लांबा ने शर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत और निराधार बताया है। उनका कहना है कि शर्मा पहले उनके संस्थान से जुड़े थे और उनकी शैक्षणिक योग्यता तथा उपलब्धियों से संबंधित दस्तावेज संस्था के रिकॉर्ड में उपलब्ध थे। लांबा के मुताबिक किसी कोच या कर्मचारी के संस्थान से जुड़ने पर उसकी योग्यता और उपलब्धियों के दस्तावेज रिकॉर्ड में रखना सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि क्राइम ब्रांच की शिकायत के बाद संस्था अपना जवाब दे चुकी है और जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज और अंडरटेकिंग भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई जाएगी।

    लांबा ने यह भी कहा कि देवा स्विमिंग इंस्टीट्यूट का हेड ऑफिस गुरुग्राम में है और देश के अलग-अलग हिस्सों में उसके कई सेंटर संचालित होते हैं। उनके मुताबिक टेंडर प्रक्रिया स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि हेड ऑफिस के माध्यम से की जाती है।

    वहीं IDA के CEO डॉ. परीक्षित झाडे ने बताया कि मुकुंद मोहन शर्मा की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और विभागीय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला आरोप और जांच के स्तर पर है और क्राइम ब्रांच की पड़ताल के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों का वास्तव में किस तरह इस्तेमाल हुआ और टेंडर प्रक्रिया में किसी नियम का उल्लंघन हुआ या नहीं।

  • आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई

    आयुष्मान क्लेम में बड़ा खेल सामने आया, कहीं ओवर डायग्नोसिस तो कहीं टेलीफोन पर इलाज; भोपाल के 3 अस्पतालों पर कार्रवाई


    भोपाल भोपाल में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज में कथित गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। आयुष्मान योजना की टीम ने शहर के तीन निजी अस्पतालों में औचक निरीक्षण कर कई अनियमितताएं पकड़ी हैं। जांच के बाद तीनों अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से आयुष्मान योजना से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। अब इन अस्पतालों में पहले इलाज करा चुके मरीजों के रिकॉर्ड और आयुष्मान क्लेम की भी जांच की जाएगी।

    आयुष्मान भारत के अधिकारियों और विभागीय टीम ने यश्वी मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान सबसे गंभीर मामला मरीजों को दूसरे जिलों से बड़ी संख्या में भोपाल बुलाकर भर्ती करने का सामने आया। यश्वी अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि सिंगरौली और दूसरे जिलों के गांवों से मरीजों को एक साथ बड़ी संख्या में भोपाल लाया गया था। उन्हें मुफ्त इलाज का भरोसा देकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच टीम ने 30 मरीजों के रिकॉर्ड खंगाले जिनमें करीब 20 मरीज दूसरे जिलों के पाए गए।

    आयुष्मान योजना के अधिकारियों ने माना कि मामले की पूरी तस्वीर पुराने रिकॉर्ड की जांच के बाद ही साफ होगी। इसी वजह से तीनों अस्पतालों के पहले के आयुष्मान क्लेम का डेस्क ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए हैं। पुराने मरीजों से भी संपर्क कर यह पता लगाया जाएगा कि उन्हें किस बीमारी के लिए भर्ती किया गया था उनका वास्तविक इलाज क्या हुआ और अस्पताल में कितने दिन रखा गया। मरीजों के बयान और अस्पताल के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा।

    जांच के दौरान एक मरीज के मामले ने भी सवाल खड़े किए। ब्रजनारायण नाम के मरीज को पेट में दर्द की शिकायत थी। अस्पताल की फाइल में उन्हें गंभीर संक्रमण ब्लड प्रेशर गिरने और अंगों पर असर जैसी स्थिति बताते हुए 8 से 11 अगस्त तक आईसीयू में भर्ती दिखाया गया। लेकिन 11 अगस्त की सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर उन्हें अस्पताल के बाहर देखा गया। बाद में रात 9 बजकर 36 मिनट पर वह आईसीयू वार्ड में दूसरे मरीजों के साथ बातचीत करते नजर आए। इस मामले ने आईसीयू में भर्ती दिखाकर किए गए क्लेम की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं।

    मारुति मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी आईसीयू में भर्ती मरीजों के मामलों में ओवर डायग्नोसिस की आशंका सामने आई। जांच टीम को वहां मरीजों का इलाज करते हुए BAMS डॉक्टर भी मिले। अधिकारियों ने ऐसे मामलों के रिकॉर्ड की जांच करने और यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि मरीजों को जिस गंभीर स्थिति में भर्ती दिखाया गया था वह चिकित्सकीय रूप से वास्तव में सही थी या नहीं।

    सूर्यांश मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की जांच में भी गंभीर अनियमितता सामने आई। रिकॉर्ड में जिन डॉक्टरों के नाम मरीजों के इलाज से जुड़े थे वे मौके पर मरीजों का इलाज करते नहीं मिले। जांच के दौरान टेलीफोन पर इलाज किए जाने की बात भी सामने आई। अब अस्पताल के रिकॉर्ड में दर्ज डॉक्टरों की भूमिका और मरीजों के इलाज से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।

    आयुष्मान योजना के सीईओ अरविंद कुमार शाह के मुताबिक तीनों अस्पतालों में तत्काल प्रभाव से नए आयुष्मान मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। पुराने मरीजों के क्लेम का भी ऑडिट किया जाएगा। अस्पतालों से जवाब मिलने और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

    इस कार्रवाई के बाद आयुष्मान योजना से जुड़े दूसरे अस्पतालों पर भी जांच की नजर रहेगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि कहीं मरीजों को अनावश्यक रूप से भर्ती करने फर्जी या बढ़े हुए क्लेम लगाने अथवा इलाज की स्थिति को गलत तरीके से दर्ज करने जैसी गड़बड़ी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल तीन अस्पतालों पर हुई कार्रवाई ने आयुष्मान योजना के नाम पर होने वाले संभावित फर्जीवाड़े को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • कभी MP से बाघ मांग रहा था छत्तीसगढ़, अब खुद पहुंच रहे टाइगर और बढ़ा रहे कुनबा; अचानकमार बना नई उम्मीद का केंद्र

    कभी MP से बाघ मांग रहा था छत्तीसगढ़, अब खुद पहुंच रहे टाइगर और बढ़ा रहे कुनबा; अचानकमार बना नई उम्मीद का केंद्र


    छत्तीसगढ़ कभी बाघों की कमी से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के जंगलों में अब टाइगरों की दहाड़ फिर सुनाई दे रही है। खास बात यह है कि इसके पीछे किसी बड़े ट्रांसलोकेशन अभियान से ज्यादा प्राकृतिक जंगलों और वन्यजीव कॉरिडोर की भूमिका सामने आई है। मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ कान्हा और पेंच टाइगर रिजर्व से निकलकर बाघ प्राकृतिक रास्तों से छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व तक पहुंचे और अब वहीं अपना क्षेत्र बनाकर प्रजनन कर रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ में बाघों की आबादी बढ़ाने की उम्मीद मजबूत हुई है।

    एक समय ऐसा था जब छत्तीसगढ़ को अपने जंगलों में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश से बाघ लेने की जरूरत महसूस हुई थी। इसके लिए बाघों को दूसरे राज्यों से लाने की चर्चा भी हुई थी लेकिन अब प्राकृतिक रूप से पहुंचे बाघ ही छत्तीसगढ़ के जंगलों में नया कुनबा तैयार कर रहे हैं। यही वजह है कि फिलहाल मध्य प्रदेश से बाघ लाने के प्रस्ताव को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।

    अचानकमार टाइगर रिजर्व में बांधवगढ़ से पहुंची बाघिन झुमरी इस बदलाव की सबसे बड़ी मिसाल बनी है। करीब 400 किलोमीटर का सफर तय कर झुमरी वर्ष 2021 में बांधवगढ़ से अचानकमार पहुंची थी। यहां उसने अपना क्षेत्र बनाया और अब तक तीन बार में सात शावकों को जन्म दे चुकी है। हाल ही में उसके फिर चार शावकों को जन्म देने की जानकारी सामने आई है। झुमरी के कारण अचानकमार में बाघों की प्राकृतिक आबादी बढ़ाने की उम्मीद को नई मजबूती मिली है।

    मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले बाघों में केवल झुमरी ही नहीं है। वर्ष 2023 में कान्हा से टी-200 नाम का बाघ अचानकमार पहुंचा था। पेंच से आई गंगा नाम की बाघिन ने भी यहां अपना कुनबा बढ़ाने में योगदान दिया। इसके अलावा मध्य प्रदेश से घायल अवस्था में पहुंची एक बाघिन को आशा नाम दिया गया। इन बाघों और बाघिनों की मौजूदगी ने अचानकमार के जंगलों में बाघों की आबादी के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो अचानकमार में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। वर्ष 2010 में यहां केवल एक बाघ दर्ज किया गया था। 2014 में यह संख्या बढ़कर तीन हुई और 2018 में पांच बाघ दर्ज किए गए। अब हालिया निगरानी में यहां 18 बाघों की मौजूदगी का पता चला है। वहीं छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 में 17 बाघ दर्ज किए गए थे जबकि अप्रैल 2025 तक राज्य में बाघों की संख्या बढ़कर 35 हो गई।

    वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक इस बदलाव में मध्य प्रदेश के टाइगर रिजर्व से प्राकृतिक रूप से होने वाला बाघों का मूवमेंट बेहद महत्वपूर्ण है। अचानकमार टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर प्रियंका पांडेय के अनुसार मध्य प्रदेश से पहुंचे बाघ और बाघिनों ने यहां प्रजनन कर आबादी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।

    हालांकि बाघों के इस प्राकृतिक आवागमन को बनाए रखना आसान नहीं है। बांधवगढ़ कान्हा और पेंच से अचानकमार तक आने वाले बाघों को जंगलों के बीच सुरक्षित कॉरिडोर की जरूरत होती है। रास्ते में इंसानी बस्तियां सड़कें और दूसरी बाधाएं उनके लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। बाघों की आबादी को लंबे समय तक स्थायी रूप से बढ़ाने के लिए इन प्राकृतिक कॉरिडोर को सुरक्षित रखना जरूरी होगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच जीन पूल का प्राकृतिक आदान प्रदान भी वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। यदि जंगलों के बीच संपर्क टूटता है तो बाघों की आवाजाही प्रभावित होगी और भविष्य में आनुवंशिक विविधता पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच मौजूद प्राकृतिक वन गलियारों का संरक्षण दोनों राज्यों में बाघों की आबादी के लिए बेहद अहम है।

    छत्तीसगढ़ के जंगलों में लौटती बाघों की दहाड़ इसलिए भी खास है क्योंकि यह संरक्षण की उस सफलता को दिखाती है जिसमें प्रकृति को अपना रास्ता देने पर वन्यजीव खुद नए क्षेत्रों तक पहुंचकर अपना कुनबा बढ़ा सकते हैं। अब चुनौती इस प्राकृतिक रास्ते को सुरक्षित रखने की है ताकि मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ तक बाघों की यह आवाजाही भविष्य में भी जारी रहे।

  • हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन

    हर-हर महादेव से गूंजा मध्य प्रदेश, महाकाल से ओंकारेश्वर तक विशेष पूजा; 6 क्विंटल फूलों से सजे भोजेश्वर के होंगे भव्य दर्शन


    उज्जैन सावन के चौथे और आखिरी सोमवार पर मध्य प्रदेश के शिवालयों में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। सुबह से ही उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर भोजपुर टीकमगढ़ इंदौर मंदसौर और ग्वालियर तक शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। हर तरफ हर हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के प्रिय सावन महीने के अंतिम सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष पूजा अभिषेक और आकर्षक श्रृंगार किया गया है।

    उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में सोमवार तड़के भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट 2:30 बजे खोल दिए गए। परंपरा के अनुसार सभा मंडप में भगवान शिव के गण वीरभद्र के कान में स्वस्ति वाचन कर बाबा की आज्ञा ली गई। इसके बाद चांदी का पट खोलकर कर्पूर आरती की गई। नंदी हॉल में नंदी का स्नान ध्यान और पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर शहद तथा फलों के रस से बने पंचामृत से विशेष पूजन हुआ।

    भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत चंद्र त्रिशूल मुकुट और अन्य आभूषण धारण कराए गए। भांग चंदन और ड्रायफ्रूट से श्रृंगार करने के बाद भस्म अर्पित की गई। बाबा को शेषनाग का रजत मुकुट रजत की मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। फूलों की माला से भी भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। फल और मिठाई का भोग लगाया गया। बाबा के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

    महाकाल मंदिर में आज शाम 4 बजे बाबा की राजसी सवारी भी निकलेगी। पूजा अर्चना के बाद भगवान महाकाल को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। सवारी में भगवान के अलग अलग स्वरूपों के दर्शन होंगे। चंद्रमौलेश्वर पालकी में मनमहेश गजराज पर शिव तांडव गरुड़ रथ पर और उमा महेश नंदी रथ पर विराजमान होंगे। घुड़सवार पुलिस दल सशस्त्र बल होमगार्ड भजन मंडलियां और पुलिस बैंड सवारी का हिस्सा होंगे। रामघाट पर शिप्रा नदी के जल से भगवान का अभिषेक और पूजन किया जाएगा।

    ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। यहां बाबा का रुद्राभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है। शाम को भगवान ओंकारेश्वर का नौका विहार होगा। पारंपरिक सवारी के दौरान हेलिकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की जाएगी। सवारी में पुलिस बैंड सात ढोल बैंड और धार्मिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

    भोजपुर के ऐतिहासिक भोजेश्वर महादेव मंदिर में भी सावन के अंतिम सोमवार को विशेष आयोजन हुआ। यहां भगवान भोजेश्वर महादेव को महाकालेश्वर स्वरूप में सजाया गया है। भोलेनाथ का करीब 6 क्विंटल फूलों से भव्य श्रृंगार किया गया। टीकमगढ़ के शिवधाम कुंडेश्वर में रिमझिम बारिश के बीच श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। इंदौर के गेंदेश्वर महादेव मंदिर में प्रतीकात्मक रूप से 12 ज्योतिर्लिंग बनाए गए हैं जहां सुबह से भक्त दर्शन कर रहे हैं।

    मंदसौर के अष्टमुखी पशुपतिनाथ मंदिर में मंगला आरती के बाद अभिषेक और पूजन शुरू हुआ। वहीं इंदौर के पंचकुइयां स्थित प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर में बेलपत्र और फूलों से बाबा का विशेष श्रृंगार किया गया। रतलाम से सांवरिया मित्र मंडल की पैदल कांवड़ यात्रा केदारेश्वर के लिए रवाना हुई है जिसमें ढोल ताशे डीजे और धार्मिक झांकियां शामिल हैं। श्योपुर में भी कांवड़िए भूतेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगे।

    सावन के अंतिम सोमवार पर मध्य प्रदेश का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। मंदिरों में विशेष श्रृंगार से लेकर अभिषेक कांवड़ यात्राओं और भव्य सवारियों तक हर जगह श्रद्धा और उत्साह का संगम दिखाई दे रहा है। शाम को महाकाल की राजसी सवारी और ओंकारेश्वर की पारंपरिक यात्रा के साथ शिवभक्ति का यह पर्व और भव्य रूप लेगा।

  • एचआईवी से बचाव के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन को भारत में मंजूरी, ज्यादा जोखिम वाले वयस्कों और किशोरों को मिलेगा लाभ

    एचआईवी से बचाव के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन को भारत में मंजूरी, ज्यादा जोखिम वाले वयस्कों और किशोरों को मिलेगा लाभ

    नई दिल्ली ।एचआईवी संक्रमण से बचाव की दिशा में भारत में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। देश में पहली बार एचआईवी संक्रमण के ज्यादा जोखिम वाले लोगों के लिए लेनाकैपाविर इंजेक्शन के इस्तेमाल को मंजूरी मिली है। यह इंजेक्शन एचआईवी-1 संक्रमण से बचाव के लिए प्री-एक्सपोजर प्रोफाइलेक्सिस यानी PrEP के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की विशेषज्ञ समितियों ने इसके निर्माण और बिक्री से जुड़े प्रस्ताव पर अहम सिफारिशें की हैं।

    लेनाकैपाविर का विकल्प खास तौर पर उन वयस्कों और किशोरों के लिए प्रस्तावित है जिनका वजन कम से कम 35 किलोग्राम है और जिनमें एचआईवी-1 संक्रमण का खतरा अधिक है। इसका उद्देश्य संक्रमण होने से पहले शरीर में दवा की मौजूदगी के जरिए एचआईवी के जोखिम को कम करना है। ऐसे लोगों के लिए यह रोकथाम के उपलब्ध विकल्पों में एक नया विकल्प जोड़ सकता है।

    हालांकि, लेनाकैपाविर शुरू करने से पहले एचआईवी जांच का निगेटिव होना जरूरी होगा। इसका कारण यह है कि PrEP का इस्तेमाल संक्रमण से पहले बचाव के लिए किया जाता है। यदि किसी व्यक्ति में पहले से एचआईवी संक्रमण मौजूद है, तो उसके लिए केवल रोकथाम वाली दवा का इस्तेमाल उचित उपचार का विकल्प नहीं माना जाता।

    एचआईवी से बचाव के लिए PrEP उन लोगों को दिया जाता है जिनमें संक्रमण का जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है। जोखिम की स्थिति व्यक्ति की परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी कारकों पर निर्भर करती है। ऐसे लोगों में चिकित्सकीय मूल्यांकन और एचआईवी जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि PrEP उनके लिए उपयुक्त है या नहीं।

    लेनाकैपाविर एक लंबे समय तक असर करने वाली एंटीरेट्रोवायरल दवा है। इसकी खासियत यह है कि इसे नियमित रूप से रोजाना गोली लेने के बजाय लंबे अंतराल पर दिए जाने वाले इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि एचआईवी रोकथाम के क्षेत्र में इस दवा को महत्वपूर्ण विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

    विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें भारत में एचआईवी रोकथाम की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। लंबे समय तक असर करने वाले विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिन्हें रोजाना दवा लेने में परेशानी होती है या नियमित रूप से दवा लेना व्यावहारिक रूप से कठिन लगता है।

    हालांकि लेनाकैपाविर को एचआईवी का इलाज या वैक्सीन नहीं माना जाना चाहिए। इसका इस्तेमाल संक्रमण से पहले बचाव के लिए किया जाता है। इंजेक्शन लेने वाले व्यक्ति को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एचआईवी जांच और आवश्यक स्वास्थ्य निगरानी करानी होगी। इसके साथ सुरक्षित व्यवहार और अन्य उपलब्ध रोकथाम उपायों की भूमिका भी बनी रहेगी।

    इसी प्रक्रिया के दौरान अन्य दवाओं से जुड़े प्रस्तावों पर भी विशेषज्ञ समिति ने विचार किया है। एटॉपिक डर्मेटाइटिस के हल्के से मध्यम मामलों में गैर-प्रतिरक्षा-कमजोर वयस्कों के लिए रक्सोलिटिनिब 1.5 प्रतिशत क्रीम के निर्माण और बिक्री की अनुमति की सिफारिश की गई है। इसके अलावा पेट और आंत से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली रिफैक्सिमिन को 400 और 550 मिलीग्राम के सैशे में उपलब्ध कराने की दिशा में भी सिफारिश की गई है।

    लेनाकैपाविर की मंजूरी से एचआईवी रोकथाम के क्षेत्र में एक नया चिकित्सकीय विकल्प जुड़ा है। अब इसके प्रभावी और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया, एचआईवी जांच और पात्र लोगों की पहचान महत्वपूर्ण होगी। ज्यादा जोखिम वाले लोगों तक रोकथाम के प्रभावी विकल्प पहुंचाना एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित करने की व्यापक रणनीति का अहम हिस्सा रहेगा।

  • भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम

    भोपाल में दिखेगा सेना का शौर्य, आर्मी डे परेड में पहली बार सड़कों पर उतरेंगे टैंक; 50 हजार दर्शकों के लिए खास इंतजाम


    भोपाल । भोपाल में देश की सैन्य ताकत और शौर्य का ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिलेगा जब सेना के भारी-भरकम टैंक शहर की सड़कों पर अपनी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन करते नजर आएंगे। 15 जनवरी 2027 को आर्मी डे के मौके पर होने वाली विशेष परेड के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। इस ऐतिहासिक आयोजन को करीब 50 हजार दर्शकों के देखने की उम्मीद है। खास बात यह है कि भोपाल में पहली बार आर्मी डे परेड किसी सैन्य कैंटोनमेंट के भीतर नहीं बल्कि आम लोगों के बीच सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित की जाएगी।

    आर्मी डे परेड 2027 के लिए भोपाल का चयन इसी साल मार्च में किया गया था। इसके बाद से ही प्रशासन और सेना के स्तर पर आयोजन को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं। शनिवार को सेना भोपाल पुलिस जिला प्रशासन बिजली कंपनी लोक निर्माण विभाग भेल और सीपीए के अधिकारियों ने प्रस्तावित परेड मार्ग और आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक जाने वाली सड़क का जायजा लिया और सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए जरूरी बदलावों पर चर्चा की।

    एडीएम महेंद्र कपचे के नेतृत्व में अधिकारियों ने पूरे मार्ग का निरीक्षण किया। गोविंदपुरा थाने से जंबूरी मैदान तक करीब 2.4 किलोमीटर लंबे मार्ग को विशेष रूप से तैयार किया जाएगा। इस सड़क की चौड़ाई बढ़ाकर करीब 15 मीटर की जाएगी। भारी सैन्य टैंकों और अन्य सैन्य वाहनों की आवाजाही को देखते हुए सड़क की मजबूती बढ़ाने का काम भी किया जाएगा। पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर एससी वर्मा के मुताबिक सड़क को इस तरह मजबूत किया जाएगा कि भारी वजन वाले सैन्य टैंकों का दबाव आसानी से सह सके।

    परेड को देखने आने वाले लोगों के लिए भी विशेष इंतजाम किए जाएंगे। सड़क के दोनों ओर करीब 50 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन की कोशिश है कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के बावजूद आयोजन स्थल पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था सुचारु बनी रहे। इसी वजह से पूरे मार्ग को पहले से चिन्हित कर आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।

    आयोजन के दौरान सड़क पर स्पीड ब्रेकर नहीं होंगे ताकि टैंक और सैन्य वाहनों की आवाजाही में किसी तरह की बाधा न आए। इसके अलावा मार्ग में आने वाले कुछ बिजली के पोल और पेड़ों को भी हटाया जाएगा। सैन्य वाहनों की पार्किंग के लिए नटराज-हेमा स्कूल मार्ग को निर्धारित किया गया है। इससे मुख्य परेड मार्ग पर भीड़ और वाहनों का दबाव कम रखने में मदद मिलेगी।

    भोपाल में होने वाला यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि आम नागरिकों को सेना के अत्याधुनिक टैंकों और सैन्य वाहनों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। आमतौर पर आर्मी डे परेड सैन्य कैंटोनमेंट क्षेत्रों में आयोजित होती रही है लेकिन 2027 में भोपाल में इसे सार्वजनिक क्षेत्र में आयोजित करने का फैसला किया गया है। इससे शहरवासियों के बीच सेना के प्रति जुड़ाव और गौरव की भावना को और मजबूत करने की उम्मीद है।

    आयोजन को सफल बनाने के लिए सेना और स्थानीय प्रशासन के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। सड़क की मजबूती से लेकर दर्शकों के बैठने की व्यवस्था यातायात प्रबंधन बिजली व्यवस्था और सुरक्षा तक हर पहलू पर तैयारी की जा रही है। आने वाले दिनों में परेड मार्ग पर निर्माण और सुधार कार्य तेज होने की संभावना है। 15 जनवरी 2027 को भोपाल में होने वाला आर्मी डे समारोह शहर के लिए एक ऐतिहासिक अवसर होगा जब राजधानी की सड़कों पर पहली बार सेना के टैंक अपनी ताकत का प्रदर्शन करते दिखाई देंगे और हजारों लोग इस भव्य सैन्य आयोजन के गवाह बनेंगे।