Author: bharati

  • शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने क्यों रचाया था महारास, गोपी बनने के बाद गोपेश्वर महादेव कैसे पड़े प्रसिद्ध

    शरद पूर्णिमा पर श्रीकृष्ण ने क्यों रचाया था महारास, गोपी बनने के बाद गोपेश्वर महादेव कैसे पड़े प्रसिद्ध

    नई दिल्ली । शरद पूर्णिमा का हिंदू धर्म में विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में इसी पूर्णिमा की चांदनी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। श्रीकृष्ण की इस दिव्य लीला को देखने और उसमें शामिल होने के लिए देवता भी उत्सुक थे। ब्रज में प्रचलित एक कथा के मुताबिक, भगवान शिव भी माता पार्वती के साथ वृंदावन पहुंचे थे। महारास में प्रवेश करने के लिए उन्हें गोपी का रूप धारण करना पड़ा। इसी प्रसंग से भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव के रूप में प्रसिद्ध होने की मान्यता जुड़ी है।

    शरद पूर्णिमा की रात वृंदावन की प्राकृतिक सुंदरता और चंद्रमा की चांदनी को महारास की कथा से जोड़ा जाता है। श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला का विस्तार से वर्णन मिलता है। धार्मिक वर्णन के अनुसार, शरद ऋतु की एक रात आकाश में पूर्ण चंद्रमा चमक रहा था। वृंदावन में खिले फूलों और यमुना के किनारे बहती शीतल हवा के बीच भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी बजाई।

    बांसुरी की मधुर धुन सुनकर गोपियां उनकी ओर आकर्षित हुईं और उनके पास पहुंच गईं। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से अनेक रूप धारण किए, जिससे प्रत्येक गोपी को अनुभव हुआ कि श्रीकृष्ण केवल उसी के साथ रास कर रहे हैं। इस लीला को भक्ति और भगवान के प्रति समर्पण के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ब्रज में शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

    भगवान शिव के गोपी रूप में महारास में शामिल होने की कथा भी ब्रज की प्रचलित धार्मिक मान्यताओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। कथा के अनुसार, भगवान शिव श्रीकृष्ण की इस दिव्य लीला के दर्शन करना चाहते थे। वह माता पार्वती के साथ वृंदावन पहुंचे, लेकिन महारास मंडल में प्रवेश के समय उन्हें रोक दिया गया। मान्यता के अनुसार, वहां श्रीकृष्ण के साथ सखी भाव से लीला में शामिल होने के लिए गोपी रूप में होना आवश्यक था।

    महारास में प्रवेश पाने की इच्छा से भगवान शिव ने गोपी का रूप धारण करने का निर्णय लिया। कथा के अनुसार, उन्होंने यमुना में स्नान किया और गोपी का रूप लेकर महारास मंडल में प्रवेश किया। वह लीला में इतने मग्न हो गए कि उनका घूंघट हट गया और वहां मौजूद गोपियों को उनके वास्तविक स्वरूप का पता चल गया। भगवान शिव को देखकर गोपियां हंसने लगीं। भगवान श्रीकृष्ण भी उनकी भक्ति और लीला में शामिल होने की इच्छा से प्रसन्न हुए। इसके बाद भगवान शिव को गोपेश्वर नाम से संबोधित किए जाने की मान्यता प्रचलित हुई। वृंदावन में स्थित गोपेश्वर महादेव मंदिर इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने महारास के माध्यम से गोपियों की मनोकामना पूरी की थी। इस लीला को कामदेव के अहंकार पर विजय से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि रास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की योगमाया से प्रत्येक गोपी को उनके साथ होने का अनुभव हुआ, लेकिन इस दिव्य प्रसंग में सांसारिक कामना के बजाय भक्ति और समर्पण का भाव प्रमुख रहा।

    कथा में यह भी बताया जाता है कि महारास के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने अनंत रूप धारण किए थे। चंद्रमा की चांदनी और उस रात के दिव्य वातावरण का वर्णन भी इस प्रसंग का हिस्सा है। शरद पूर्णिमा की रात को लेकर ब्रज में आज भी धार्मिक आयोजन और श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण किया जाता है।

    श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध के अध्याय 29 से 33 तक रासलीला का वर्णन मिलता है। इन पांच अध्यायों को रास पंचाध्यायी कहा जाता है। इनमें श्रीकृष्ण की बांसुरी सुनकर गोपियों का उनके पास पहुंचना, उनका अंतर्धान होना, गोपियों का विरह और फिर महारास का प्रसंग शामिल है। शरद पूर्णिमा पर कई श्रद्धालु रास पंचाध्यायी का पाठ या श्रवण करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार, श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण करने से भक्ति भाव और मानसिक शांति की अनुभूति होती है।

  • शिवपुरी-भोपाल मार्ग पर थार से 92 हजार रुपये और सोने की अंगूठी चोरी, CCTV में संदिग्ध कार दिखने से बढ़ी जांच

    शिवपुरी-भोपाल मार्ग पर थार से 92 हजार रुपये और सोने की अंगूठी चोरी, CCTV में संदिग्ध कार दिखने से बढ़ी जांच

    शिवपुरी जिले में शिवपुरी-भोपाल मार्ग पर दिनदहाड़े चोरी की घटना सामने आई है। यहां जिला अस्पताल में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर और वॉइस ऑफ नर्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह राजपूत की महिंद्रा थार से एक बैग चोरी होने की जानकारी सामने आई है। बैग में करीब 92 हजार रुपये नकद, सोने की एक अंगूठी और महत्वपूर्ण दस्तावेज रखे हुए थे। घटना के बाद नर्सिंग संगठन ने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर चोरी में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है।

    जानकारी के अनुसार, यह घटना शिवपुरी-भोपाल मार्ग पर अतलपुर स्थित महाकाल होटल के पास हुई। शिवराज सिंह राजपूत अपनी पत्नी को चिकित्सीय परीक्षण और उपचार के लिए भोपाल लेकर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी महिंद्रा थार से बैग चोरी होने की बात सामने आई। वाहन का पंजीकरण नंबर MP 07 AN 1009 बताया गया है। चोरी हुए सामान में नकदी और सोने की अंगूठी के अलावा जरूरी दस्तावेज भी शामिल हैं।

    वॉइस ऑफ नर्स संगठन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, वारदात को मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात बदमाशों ने अंजाम दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई। संगठन का दावा है कि फुटेज में मोटरसाइकिल सवार संदिग्धों के साथ एक अन्य संदिग्ध कार भी दिखाई दे रही है। इस वजह से वारदात में एक से अधिक लोगों की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है।

    हालांकि, घटना में शामिल लोगों की पहचान और चोरी की पूरी परिस्थितियों को लेकर पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में संदिग्ध बाइक सवारों और कार से संबंधित जानकारी को फिलहाल संगठन की ओर से सामने रखे गए विवरण के आधार पर देखा जा रहा है। सीसीटीवी फुटेज की जांच इस मामले में अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे संदिग्ध वाहनों की गतिविधियों और घटना के आसपास की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

    घटना के बाद वॉइस ऑफ नर्स संगठन ने शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक से मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। संगठन ने आग्रह किया है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग के आधार पर संदिग्ध कार और मोटरसाइकिल सवारों की पहचान की जाए। साथ ही, चोरी हुए करीब 92 हजार रुपये, सोने की अंगूठी और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

    नर्सिंग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवराज सिंह राजपूत की थार से सामान चोरी होने की घटना के बाद संगठन ने मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। संगठन की मांग है कि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों का इस्तेमाल करते हुए आरोपियों तक पहुंचा जाए और चोरी गए सामान की बरामदगी सुनिश्चित की जाए।

    फिलहाल, मामले में पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज से मिलने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात किस तरह हुई, संदिग्ध वाहनों की इसमें क्या भूमिका थी और चोरी की घटना में कितने लोग शामिल थे। पुलिस की ओर से आरोपियों की पहचान और आगे की कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।

  • वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित नमो घाट पर रविवार को भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में शामिल होकर आसमान में लड़ाकू विमानों की कलाबाजी और वायुसेना की हवाई क्षमताओं का प्रदर्शन देखा। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को देखने के लिए गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    एयर शो के दौरान विमानों की उड़ान, उनके बीच समन्वय और हवाई करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों सहित कुल 100 विमानों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इनमें 52 लड़ाकू विमान बताए गए। गंगा के ऊपर विमानों की गतिविधियों को देखने के लिए सुबह से ही नमो घाट और आसपास के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी।

    प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम के दौरान सफेद टोपी और चश्मा पहने नजर आए। उनके साथ मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें एक पेंटिंग भेंट की। आयोजन के जरिए भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन से जुड़ी दक्षता को प्रदर्शित किया गया।

    एयर शो से पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी के रूपापुर में अरविंद टेक्सटाइल मिल की नई इकाई का उद्घाटन किया। इस परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों से भी बातचीत की। इस इकाई को क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    टेक्सटाइल इकाई के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री पुलिस लाइन से नमो घाट तक रोड शो करते हुए पहुंचे। इस मार्ग की दूरी करीब सात किलोमीटर बताई गई। रास्ते में प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। उनके स्वागत में ढोल-नगाड़े बजाए गए और भजन गाए गए। इस दौरान समर्थकों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर फूल भी बरसाए।

    ‘विंग्स ओवर गंगा’ का आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के साथ वायुसेना की हवाई संचालन क्षमता को आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। राफेल और सुखोई जैसे विमानों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष आकर्षण दिया। गंगा के किनारे से आसमान में विमानों की गतिविधियां देखने के लिए स्थानीय निवासियों के अलावा अन्य दर्शक भी पहुंचे।

    वाराणसी में आयोजित इस एयर शो में प्रधानमंत्री की मौजूदगी के साथ औद्योगिक परियोजना का उद्घाटन भी दौरे का हिस्सा रहा। एक ओर टेक्सटाइल इकाई के माध्यम से विनिर्माण और रोजगार से जुड़ी पहल सामने आई, वहीं दूसरी ओर एयर शो ने भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को प्रदर्शित किया। नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे वाराणसी के प्रमुख आयोजनों में शामिल कर दिया।

  • वाराणसी में विंग्स ओवर गंगा एयर शो, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों ने दिखाई ताकत..

    वाराणसी में विंग्स ओवर गंगा एयर शो, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों ने दिखाई ताकत..

    नई दिल्ली । वाराणसी में भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित विंग्स ओवर गंगा एयर शो में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। 22 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देश के 12 एयरबेस से आए कुल 100 विमान शामिल हुए। रविवार, 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वाराणसी पहुंचे और रोड शो किया। इस दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।

    काशी में आयोजित इस एयर शो को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया। इसमें भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरकर अपनी क्षमता दिखाई। राफेल, सुखोई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों ने हवाई प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इनके अलावा अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। सी-295, सी-17 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों की मौजूदगी भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।

    इस आयोजन में देश के 12 एयरबेस से विमान वाराणसी पहुंचे। इनमें चेन्नई और ग्वालियर के एयरबेस भी शामिल थे। काशी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर एयर शो आयोजित किया गया। विभिन्न विमानों की उड़ानों और सामूहिक फॉर्मेशन के जरिए वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन का परिचय दिया गया।

    एयर शो में विमानों की उड़ान के साथ वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित किया गया। आसमान में विमानों ने अलग-अलग समूह बनाकर कई आकृतियां तैयार कीं। इन फॉर्मेशन को महादेव, नटराज, कैलाश, विश्वनाथ, त्रिदेव, वरुणा, हनुमान, ओंकार, भागीरथी, काशी और रुद्र जैसे नाम दिए गए। इन नामों के माध्यम से काशी की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को हवाई प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया गया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। पूरे जिले को 30 जोन और 50 से अधिक सेक्टर में बांटा गया। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए 11,500 से ज्यादा जवान तैनात किए गए। इसके साथ ही निगरानी के लिए 200 सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया गया।

    प्रशासन ने करीब 50 लाख लोगों की भीड़ को संभालने के मद्देनजर इंतजाम किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी पहुंचने और रोड शो के कार्यक्रम को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। शहर में विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती और निगरानी के जरिए आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की गई।

    विंग्स ओवर गंगा एयर शो में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों की भागीदारी के साथ काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई। 12 एयरबेस से आए 100 विमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को बड़े स्तर का हवाई प्रदर्शन बनाया।

  • मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान

    मदरसे में बच्चों के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला, 18 बालक और 8 बालिकाएं रेस्क्यू; अधिकारियों के सामने दर्ज हुए बयान


    ग्वालियर । ग्वालियर में एजी ऑफिस के पास स्थित दारुल कुरआन मदरसे से रेस्क्यू किए गए 26 बच्चों ने कथित प्रताड़ना को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इनमें 18 बालक और 8 बालिकाएं शामिल हैं। बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति की कार्रवाई के बाद बच्चों के बयान दर्ज किए गए। अधिकारियों के सामने अपनी बात रखते समय कई बच्चे भावुक हो गए। बच्चों ने बताया कि वे अब मदरसे में नहीं रहना चाहते और सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करना चाहते हैं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने मदरसे की इमारत सील कर दी है और संचालन से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की है।

    बच्चों के आरोपों के मुताबिक मामूली गलती होने पर उन्हें लोहे की रॉड पर लटकाकर पीटा जाता था। कुछ बच्चों ने घंटों मुर्गा बनाकर रखने की बात भी कही है। उनका कहना है कि इस तरह की सजा से उन्हें शारीरिक और मानसिक परेशानी होती थी। बच्चों ने अधिकारियों को बताया कि वे वहां खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते थे। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी लेकिन बच्चों के बयान के आधार पर प्रशासन और बाल अधिकार से जुड़ी एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं।

    बच्चों ने भोजन को लेकर भी शिकायत की है। उनके मुताबिक सुबह और शाम उन्हें दो-दो रोटियां दी जाती थीं और अधिक खाना मांगने पर मना कर दिया जाता था। बालिकाओं ने आरोप लगाया कि मदरसे में आने वाली एक महिला जिन्हें वे बाजी कहती थीं उनसे घरेलू काम करवाती थीं। उनके अनुसार उन्हें झाड़ू-पोछा लगाने बर्तन और कपड़े धोने तथा टॉयलेट साफ करने के लिए कहा जाता था। छत से कपड़े उतारने में देरी होने पर मारपीट किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

    बालिकाओं ने कपड़े पहनने को लेकर दबाव बनाने की बात भी कही है। उनके आरोपों के मुताबिक उन पर हिजाब पहनने के लिए जोर दिया जाता था और विरोध करने पर डराने वाली बातें कही जाती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित महिला के बेटे की ओर से रात में खिड़की से ताक-झांक की जाती थी। बच्चों का कहना है कि शिकायत के बावजूद उनकी बात पर कार्रवाई नहीं हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का विस्तृत जवाब सामने आना बाकी है।

    प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मदरसे से इस्लामिक किताबें और अन्य सामग्री मिलने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों ने इमारत को सील करते हुए संचालक से मदरसा चलाने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। झांसी रोड के एसडीएम अतुल सिंह के मुताबिक मदरसे को सील कर नोटिस जारी किया गया है। बाल कल्याण समिति के सामने बच्चों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की जांच और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस मामले में बच्चों की सुरक्षा और उनके भविष्य की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। रेस्क्यू किए गए बच्चों ने अधिकारियों के सामने मदरसे में वापस नहीं जाने की इच्छा जताई है। अब संबंधित विभागों के सामने उनकी सुरक्षित देखभाल शिक्षा और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। साथ ही बच्चों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करना भी जरूरी होगा। फिलहाल मदरसे की इमारत सील है और प्रशासन दस्तावेजों तथा बच्चों के बयानों के आधार पर आगे की प्रक्रिया कर रहा है।

  • पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए

    पाकिस्तानी कंट्री कोड वाले नंबर से कॉल कर महिला को ठगा, मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़े जाने की कहानी सुनाकर ऐंठे 2 लाख रुपए


    ग्वालियर। ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र में सोशल मीडिया पर दोस्ती कर एक शादीशुदा महिला से करीब 2 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी ने पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले मोबाइल नंबर से महिला को फोन किया और खुद को विदेशी नागरिक बताकर बातचीत शुरू की। कुछ समय तक दोस्ती का भरोसा जीतने के बाद उसने महिला को भारी मात्रा में सोना गिफ्ट करने का लालच दिया। इसके बाद आरोपी ने कहानी बनाई कि वह सोना लेकर भारत आ रहा था लेकिन मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने खुद को छुड़ाने के लिए 2 लाख रुपए की जरूरत बताई। उसकी बातों में आकर महिला ने अलग-अलग ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 12 बार में रकम ट्रांसफर कर दी। बाद में आरोपी ने और पैसे मांगने शुरू किए तो महिला को ठगी का शक हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना बताई। शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    पुलिस के अनुसार गेरू वाले बंगले के पास त्यागी नगर मुरार निवासी 25 वर्षीय गजल बाथम सोशल मीडिया पर एक अनजान व्यक्ति के संपर्क में आई थी। आरोपी पिछले कुछ दिनों से उसकी पोस्ट पर कमेंट कर रहा था। इसी दौरान 3 अक्टूबर 2026 को महिला के मोबाइल पर पाकिस्तान के कंट्री कोड +92 वाले एक अनजान नंबर से कॉल आया। महिला को शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि नंबर पाकिस्तान के कंट्री कोड से जुड़ा है। फोन करने वाले ने खुद को विदेशी नागरिक बताया और मीठी बातें करके उससे दोस्ती बढ़ाने की कोशिश की।

    अगले दिन 4 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने दोबारा फोन किया। उसने महिला से आधार कार्ड मांगा लेकिन महिला ने अपना आधार कार्ड देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी ने दोस्ती का भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह उसे बड़ी मात्रा में सोना गिफ्ट करना चाहता है और खुद लेकर भारत आ रहा है। सोना मिलने की उम्मीद में महिला उसकी बातों पर भरोसा करने लगी।

    कुछ देर बाद आरोपी ने घबराए हुए अंदाज में फोन किया और दावा किया कि वह सोना लेकर मुंबई पहुंचा था लेकिन एयरपोर्ट पर एयरफोर्स और सुरक्षा एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया है। उसने महिला को बताया कि अधिकारियों ने उसे छोड़ने के लिए 2 लाख रुपए मांगे हैं। आरोपी ने यह भी कहा कि उसके पास करीब 20 लाख रुपए का सोना है और यदि वह रकम भेज देगी तो वह इस परेशानी से बाहर निकल जाएगा। पुलिस के मुताबिक इसी कहानी के जरिए आरोपी ने महिला को पैसे भेजने के लिए तैयार किया।

    इसके बाद आरोपी ने महिला को अलग-अलग दुकानों के ऑनलाइन क्यूआर कोड भेजे। महिला ने उन कोड पर कुल 12 ट्रांजेक्शन में 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। रकम कई हिस्सों में भेजी गई जिसमें 19 हजार रुपए से लेकर 36 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन शामिल थे। पैसे मिलने के बाद भी आरोपी नहीं रुका और उसने महिला से और रकम की मांग शुरू कर दी।

    जब महिला ने बताया कि उसके पास अब पैसे नहीं हैं तो आरोपी लगातार फोन कर उसे परेशान करने लगा। इसके बाद महिला को संदेह हुआ और उसने अपने पति को पूरी घटना की जानकारी दी। ठगी का अहसास होने पर साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई।

    मुरार थाना प्रभारी गोविंद बगोली के मुताबिक पीड़िता की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। जिन बैंक खातों और क्यूआर कोड के जरिए रकम ट्रांसफर की गई है उनकी बैंकिंग और तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आरोपियों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार

    ग्वालियर की लापता कॉलेज छात्रा को पुलिस ने हरियाणा से खोज निकाला, कमरे में मिली युवती; साथ ले जाने वाला युवक फरार


    ग्वालियर। ग्वालियर में लापता और अपहृत बालक-बालिकाओं की तलाश के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा को हरियाणा से बरामद कर लिया है। छात्रा करीब डेढ़ महीने पहले कॉलेज जाने की बात कहकर घर से निकली थी लेकिन वापस नहीं लौटी थी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू की थी। जांच के दौरान छात्रा के मोबाइल की लोकेशन हरियाणा के कैथल में मिलने के बाद पुलिस टीम वहां पहुंची और 23 अक्टूबर को आजाद कॉलोनी स्थित एक कमरे से उसे बरामद कर लिया। पुलिस के मुताबिक एक युवक छात्रा को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। पुलिस की कार्रवाई की भनक लगते ही वह मौके से फरार हो गया। अब पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई कर रही है।

    पुलिस के अनुसार ग्वालियर के उपनगर मुरार निवासी एक व्यक्ति ने 7 सितंबर 2026 को थाने में अपनी 21 वर्षीय बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजन ने बताया था कि छात्रा सुबह करीब 9 बजे मुरार स्थित गर्ल्स कॉलेज जाने के लिए घर से निकली थी। परिवार को उम्मीद थी कि वह कॉलेज से लौट आएगी लेकिन देर रात तक उसके घर नहीं पहुंचने पर चिंता बढ़ गई। परिजनों ने अपने स्तर पर रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस से मदद मांगी।

    शिकायत मिलने के बाद मुरार थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह के निर्देश पर और सीएसपी मुरार संदीप बांगरे के मार्गदर्शन में छात्रा की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। टीम का नेतृत्व मुरार थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद बल्लभ बगोली ने किया। पुलिस ने संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाने के साथ ही मुखबिर तंत्र और मोबाइल लोकेशन के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

    तलाश के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि छात्रा का मोबाइल हरियाणा के कैथल में सक्रिय हुआ है। इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम तत्काल कैथल के लिए रवाना हुई। स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के बाद टीम ने 23 अक्टूबर 2026 को शुगर मिल के पास स्थित आजाद कॉलोनी में एक कमरे पर दबिश दी। इसी दौरान छात्रा को बरामद कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक छात्रा को सुरक्षित ग्वालियर लाया गया है। उसे 24 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे ग्वालियर पहुंचाया गया।

    पुलिस का कहना है कि छात्रा को अपने साथ ले जाने वाला युवक कार्रवाई के दौरान मौके से फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। फिलहाल पुलिस छात्रा के बयान दर्ज कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आ सके और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

    एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार ऑपरेशन मुस्कान के तहत मुरार से लापता कॉलेज छात्रा को हरियाणा के कैथल से बरामद किया गया है। पुलिस अब छात्रा के बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अगला कदम उठाएगी।

  • इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव

    इंदौर में छेड़छाड़ के दो मामले आए सामने, रिसेप्शनिस्ट से अश्लील हरकत का आरोप तो नाबालिग छात्रा पर मिलने का दबाव


    इंदौर । इंदौर के द्वारकापुरी इलाके में एक निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। युवती की शिकायत पर पुलिस ने सब्जी व्यापारी नरेंद्र साहू के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। युवती का आरोप है कि व्यापारी पिछले करीब 20 दिनों से उसे देखकर अश्लील इशारे करता था और आपत्तिजनक हरकतों के जरिए परेशान कर रहा था। शनिवार रात हुई घटना के बाद युवती ने पुलिस से शिकायत की जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

    द्वारकापुरी पुलिस के मुताबिक युवती फूटी कोठी क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती है। अस्पताल के बाहर सब्जियों की दुकानें लगती हैं जिनमें से एक दुकान नरेंद्र साहू की बताई गई है। युवती ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि आरोपी उसे देखकर अश्लील हरकतें करता था और इस वजह से वह कई दिनों से परेशान थी। मामले में पुलिस ने युवती के आरोपों के आधार पर प्रकरण दर्ज किया है।

    शिकायत के मुताबिक शनिवार रात अस्पताल से निकलने के दौरान युवती के साथ यह घटना हुई। अस्पताल का गार्ड उसे गेट तक छोड़ने आया था। युवती उस समय अपने भाई का इंतजार कर रही थी। इसी दौरान आरोप है कि नरेंद्र साहू ने जानबूझकर अश्लील हरकत करते हुए अपना निजी अंग दिखाया। युवती ने इसका विरोध करते हुए आरोपी को ललकारा तो अस्पताल का स्टाफ भी मौके पर पहुंच गया। इसके बाद आरोपी वहां से चला गया।

    घटना के बाद युवती अपनी बहन के साथ द्वारकापुरी थाने पहुंची और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।

    इसी बीच इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में भी छेड़छाड़ और परेशान करने का एक अलग मामला सामने आया है। यहां 11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा की शिकायत पर पुलिस ने संजय नाम के युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। छात्रा का आरोप है कि उसके साथ पहले पढ़ने वाला संजय उसे लगातार मोबाइल फोन पर कॉल करता था और मिलने के लिए दबाव बनाता था।

    शिकायत के अनुसार एक दिन पहले युवक छात्रा के घर के बाहर पहुंच गया और फोन कर उससे जबरन मिलने की जिद करने लगा। लगातार परेशान किए जाने से छात्रा ने अपने पिता को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया। शनिवार को पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया।

    इंदौर में सामने आए इन दोनों मामलों में शिकायतकर्ताओं के आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की है। एक मामले में निजी अस्पताल की रिसेप्शनिस्ट ने सब्जी व्यापारी पर अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है जबकि दूसरे मामले में नाबालिग छात्रा ने परिचित युवक पर मिलने के लिए दबाव बनाने की शिकायत की है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण होगी।

  • अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    नई दिल्ली ।अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी परेशानियों के बीच ईरान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार जारी रखने और उसे विस्तार देने की अपील की है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारतीय कारोबारियों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन ऊर्जा, कृषि और जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं।

    ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी समस्याओं ने दोनों देशों के व्यापार को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद ईरान भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर जोर दे रहा है। फतहली के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है और व्यापार को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

    बासमती चावल की आपूर्ति पर भी ईरान ने भरोसा दिलाया है। ईरान भारत से बासमती चावल और चाय खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में प्रतिबंधों और भुगतान में आ रही दिक्कतों के बीच इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फतहली ने भारतीय बासमती चावल समेत जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की आशंका को खारिज किया।

    ईरानी राजदूत के अनुसार, उनका देश संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने की तैयारी कर चुका है और आयात के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके पीछे केवल आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यापक आर्थिक दबाव भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है।

    फतहली ने कहा कि ईरान लगभग 47 वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इस दौरान उसने उनके प्रभाव को कम करने के तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके 15 पड़ोसी देश व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी के लिए नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। ईरान दूसरे देशों के साथ पारस्परिक लाभ वाले संबंध बनाए रखने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।

    भारत और ईरान के कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हुई है। फतहली ने बताया कि भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी अंतिम समझौते या नई व्यवस्था की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे उपायों को तय करने और लागू करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत तथा संबंधित पक्षों के बीच समन्वय जरूरी होगा।

    चाबहार बंदरगाह को लेकर भी ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। भारत के संचालन से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।

    फतहली ने कहा कि ईरान चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विकास में योगदान देने के इच्छुक किसी भी देश के निवेश और भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। हालांकि, बंदरगाह से संबंधित आगे की व्यवस्था और भारत-ईरान व्यापार को प्रभावित करने वाली बाधाओं के समाधान के लिए बातचीत तथा समन्वय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

  • बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत

    बूढ़े होते भारत में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा, 2036 तक 1.69 करोड़ मरीज होने का अनुमान, राष्ट्रीय योजना की जरूरत


    नई दिल्ली ।
    भारत में औसत जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ बुजुर्गों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां भी गंभीर होती जा रही हैं। कैंसर, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों पर व्यापक चर्चा होती है, लेकिन डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश के बढ़ते खतरे और उससे प्रभावित लोगों की देखभाल पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। यह बीमारी केवल याददाश्त को प्रभावित नहीं करती, बल्कि व्यक्ति की पहचान, निर्णय लेने की क्षमता, स्वतंत्रता और रोजमर्रा के जीवन को भी मुश्किल बना सकती है। ऐसे में भारत में एक समर्पित राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना की जरूरत महसूस की जा रही है।

    डिमेंशिया ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति की याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। अल्जाइमर रोग इसके प्रमुख कारणों में से एक है, लेकिन डिमेंशिया केवल अल्जाइमर तक सीमित नहीं है। गंभीर अवस्था में मरीज परिचित लोगों को पहचानने, दैनिक गतिविधियां करने और अपने आसपास हो रही घटनाओं को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इससे उसकी सुरक्षा के साथ गरिमा और स्वायत्तता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

    भारत में इस समस्या का वास्तविक आकार समझने के लिए उपलब्ध आंकड़े महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। वर्ष 2017 से 2020 के बीच जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित एक राष्ट्रीय अध्ययन में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में डिमेंशिया की व्यापकता 7.4 प्रतिशत आंकी गई थी। इस दर को जनसंख्या अनुमानों पर लागू करते हुए शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में देश में लगभग 88 लाख मामले होने का अनुमान लगाया था। यदि यह दर अपरिवर्तित रहती है, तो वर्ष 2036 तक मरीजों की संख्या बढ़कर 1.69 करोड़ तक पहुंच सकती है।

    दुनिया के अन्य देशों में भी डिमेंशिया गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इंग्लैंड और वेल्स में वर्ष 2025 के दौरान यह सभी मौतों के 12.7 प्रतिशत मामलों से जुड़ा था। महिलाओं की मौतों में इसका हिस्सा 16.5 प्रतिशत बताया गया। अमेरिका में वर्ष 2024 के दौरान लगभग 10 प्रतिशत मौतों के लिए डिमेंशिया जिम्मेदार था। भारत में मृत्यु संबंधी आंकड़ों की विश्वसनीयता सीमित होने के कारण इस बीमारी के प्रभाव का सटीक आकलन करना कठिन है।

    चिकित्सा विज्ञान में प्रगति ने लोगों की उम्र बढ़ाने में मदद की है, लेकिन लंबा जीवन हमेशा बेहतर स्वास्थ्य की गारंटी नहीं देता। अल्जाइमर की कुछ नई दवाएं शुरुआती चरण में पहचाने गए चुनिंदा मरीजों में संज्ञानात्मक गिरावट की गति को कुछ हद तक धीमा कर सकती हैं। हालांकि, ये दवाएं डिमेंशिया का पूर्ण इलाज नहीं हैं और न ही गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त मस्तिष्क को पहले जैसी स्थिति में ला सकती हैं। इसलिए शुरुआती पहचान, नियमित देखभाल और परिवारों को सहायता उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

    डिमेंशिया का प्रभाव मरीज तक सीमित नहीं रहता। गंभीर अवस्था में व्यक्ति को भोजन करने, नहाने, शौचालय जाने और सुरक्षित रहने के लिए लगातार मदद की जरूरत पड़ सकती है। भारत में यह जिम्मेदारी अक्सर पत्नी, बेटी या बहू पर आती है। लंबे समय तक देखभाल करने के कारण परिवार के सदस्यों के रोजगार, आर्थिक स्थिति और अपने स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।

    शहरीकरण, रोजगार के लिए दूसरे शहरों या देशों में पलायन और छोटे होते परिवारों ने पारंपरिक संयुक्त परिवार व्यवस्था की देखभाल संबंधी क्षमता को भी प्रभावित किया है। आर्थिक रूप से संपन्न परिवार पेशेवर देखभाल और आवासीय सुविधाएं ले सकते हैं, लेकिन वहां भी मरीज की स्वतंत्रता और सम्मान बनाए रखना जरूरी है। सुरक्षा के नाम पर उसकी गतिविधियों पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाना नई समस्याएं पैदा कर सकता है।

    भारत सरकार ने वर्ष 2010 में बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया था, लेकिन इसमें डिमेंशिया के लिए अलग समर्पित व्यवस्था नहीं है। केरल में डिमेंशिया से संबंधित विशेष सेवाएं शुरू की गई हैं, जबकि कर्नाटक में जिला स्तर पर 32 मस्तिष्क स्वास्थ्य क्लीनिक स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद वर्ष 2025 की एक समीक्षा में राष्ट्रीय डिमेंशिया योजना, समर्पित वित्तपोषण और मापने योग्य लक्ष्यों की कमी सामने आई।

    बढ़ती बुजुर्ग आबादी के बीच डिमेंशिया की चुनौती स्वास्थ्य सेवाओं, परिवारों और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती जा रही है। समय पर पहचान, प्रशिक्षित देखभालकर्मियों की उपलब्धता, परिवारों को आर्थिक और मानसिक सहयोग तथा मरीजों की गरिमा की रक्षा पर केंद्रित राष्ट्रीय योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।