Author: bharati

  • Netflix की सस्पेंस फिल्म ‘गजब रात’ में भोपाल का जलवा, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक शूट हुए अहम सीन

    Netflix की सस्पेंस फिल्म ‘गजब रात’ में भोपाल का जलवा, अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड से ऑपरेशन थिएटर तक शूट हुए अहम सीन


    भोपाल। बॉलीवुड की क्राइम थ्रिलर फिल्म गजब रात में भोपाल की लोकेशंस ने खास जगह बनाई है। अभिनेता मनोज बाजपेयी की इस फिल्म के कई महत्वपूर्ण और रहस्य से भरे दृश्य शहर के मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल परिसर में फिल्माए गए हैं। फिल्म की आधी से ज्यादा शूटिंग इन्हीं परिसरों में पूरी किए जाने की जानकारी सामने आई है। अस्पताल के गलियारों से लेकर इमरजेंसी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर तक कई जगहों को फिल्म की कहानी के मुताबिक इस्तेमाल किया गया है। इससे भोपाल के स्थानीय लोगों और संस्थान से जुड़े विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों में भी उत्साह देखने को मिल रहा है।

    फिल्म में अस्पताल का माहौल कहानी के सस्पेंस और जांच-पड़ताल वाले हिस्सों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। अभिनेता मनोज बाजपेयी के किरदार को अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और कॉरिडोर में तेजी से भागते हुए तथा मामले की गुत्थी सुलझाने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। इन दृश्यों में अस्पताल का वास्तविक परिसर कहानी को प्रभावशाली पृष्ठभूमि देता है। फिल्म में इस्तेमाल की गई इन लोकेशंस के कारण भोपाल के दर्शकों के लिए पर्दे पर अपने शहर की जगहों को पहचानना भी खास अनुभव बन गया है।

    मानसरोवर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चीफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर इंजीनियर गौरव तिवारी के मुताबिक फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्य एमजीयू हॉस्पिटल और मानसरोवर मेडिकल कॉलेज परिसर में शूट किए गए हैं। शूटिंग के दौरान संस्थान के विभिन्न हिस्सों को फिल्म की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया गया। इससे परिसर को बड़े पर्दे पर देखने की उत्सुकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर भी फिल्म की शूटिंग को लेकर चर्चा हो रही है क्योंकि शहर की इमारतें और आसपास के क्षेत्र फिल्म के दृश्यों में नजर आते हैं।

    फिल्म के लिए अस्पताल के कई अलग-अलग हिस्सों में कैमरा लगाया गया। इनमें ऑपरेशन थिएटर मरीजों के वार्ड अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस क्षेत्र फार्मेसी पैरामेडिकल लैब और अस्पताल का रिसेप्शन शामिल हैं। इसके अलावा लंबे कॉरिडोर और परिसर के गार्डन में भी दृश्य फिल्माए गए। इन जगहों को कहानी के हिसाब से इस्तेमाल कर फिल्म के माहौल को रहस्यमयी और वास्तविक बनाने की कोशिश की गई। अस्पताल जैसी लोकेशन क्राइम थ्रिलर में कहानी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ किरदारों की गतिविधियों को विश्वसनीय रूप देने में भी मदद करती है।

    भोपाल में फिल्मों की शूटिंग होने से शहर की लोकेशंस को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलता है। जब किसी फिल्म में स्थानीय संस्थानों और परिचित जगहों को दिखाया जाता है तो वहां रहने वाले लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ जाती है। गजब रात में मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल की मौजूदगी इसी वजह से चर्चा में है। संस्थान से जुड़े लोगों के लिए भी यह अनुभव खास है कि उनके परिसर में फिल्माए गए दृश्य अब दर्शकों तक पहुंच रहे हैं।

    मनोज बाजपेयी अपनी गंभीर अभिनय शैली और जटिल किरदारों के लिए पहचाने जाते हैं। क्राइम और इनवेस्टिगेशन पर आधारित इस फिल्म में अस्पताल के भीतर फिल्माए गए सस्पेंस से भरे दृश्य कहानी की रहस्यमय परतों को सामने लाते हैं। भोपाल की लोकेशंस ने फिल्म को वास्तविक परिवेश देने में योगदान दिया है। आधे से ज्यादा शूटिंग शहर के इन संस्थानों में होने की जानकारी के बाद फिल्म और भोपाल के बीच जुड़ाव भी चर्चा का विषय बन गया है। अब स्थानीय दर्शकों की दिलचस्पी इस बात में है कि फिल्म में उनके शहर की कौन-कौन सी जगहें दिखाई देती हैं और कहानी में इन लोकेशंस की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

  • दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी ने बनाया इतिहास, 16.514 किलो के सोने के झुमकों से दो विश्व रिकॉर्ड कायम

    दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी ने बनाया इतिहास, 16.514 किलो के सोने के झुमकों से दो विश्व रिकॉर्ड कायम

    नई दिल्ली ।दुबई में भारतीय ज्वेलरी कंपनी जॉयअलुक्कास ने सोने के विशाल झुमकों की एक जोड़ी तैयार करके दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। 22 कैरेट सोने से बने इन झुमकों का कुल वजन 16.514 किलोग्राम है। इन्हें दुनिया की सबसे भारी और सबसे बड़ी सोने की बालियों की जोड़ी के रूप में मान्यता मिली है। इस विशेष रचना को तैयार करने में दर्जनों कारीगरों ने कई महीनों तक मेहनत की और पारंपरिक आभूषण कला को बड़े आकार में पेश किया।

    इन झुमकों को ‘मयूर सहस्र’ नाम दिया गया है। इस नाम का अर्थ ‘एक हजार मोर’ बताया गया है। इनका डिजाइन मोर से प्रेरित है, जिसे भारतीय संस्कृति में सुंदरता और शालीनता का प्रतीक माना जाता है। आभूषणों की बनावट में दक्षिण एशिया की शादियों में पहने जाने वाले पारंपरिक घंटीनुमा झुमकों की झलक भी दिखाई देती है। इस तरह डिजाइन में सांस्कृतिक परंपरा और आधुनिक आभूषण निर्माण का मेल देखने को मिलता है।

    इन विशाल झुमकों को बनाने में 55 कुशल कारीगरों ने कुल 5,840 घंटे काम किया। इनकी लंबाई 1.215 मीटर और व्यास 0.682 मीटर है। वजन, आकार और निर्माण में लगे समय के कारण यह परियोजना कंपनी के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गई है। इतने बड़े आभूषण को तैयार करने के लिए डिजाइन से लेकर अंतिम रूप देने तक कारीगरों को लंबे समय तक काम करना पड़ा।

    24 अक्टूबर को इन झुमकों को दुबई के गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ज्वेल ऑफ जॉय शोरूम में प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था और पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री भी मौजूद थे। अब इन रिकॉर्डधारी झुमकों को इसी क्षेत्र में स्थित ज्वेल ऑफ जॉय बाय जॉयअलुक्कास शोरूम में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है। यहां आने वाले लोग इस विशाल स्वर्ण आभूषण को देख सकते हैं।

    जॉयअलुक्कास ज्वेलरी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जॉन पॉल अलुक्कास के अनुसार, इस रचना के पीछे दुबई के साथ कंपनी का लंबा जुड़ाव और शहर के विकास से जुड़ी प्रेरणा रही है। दुबई को लंबे समय से सोने के कारोबार के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। कंपनी का मानना है कि यह रचना शहर की इसी पहचान को दर्शाती है और उसके साथ उसके व्यावसायिक संबंधों का प्रतीक है।

    समूह के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने इस उपलब्धि को दुबई और इसे बनाने वाले कारीगरों के प्रति सम्मान बताया। उनके मुताबिक, कंपनी करीब चार दशकों से दुबई के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने इस परियोजना को कारीगरों की मेहनत का परिणाम बताते हुए कहा कि एक ही रचना के लिए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मिलना कंपनी, कर्मचारियों और उसके ग्राहकों के लिए गर्व का विषय है।

    जॉय अलुक्कास केरल के कारोबारी हैं और जॉयअलुक्कास समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक हैं। कंपनी की शुरुआत 1987 में हुई थी। इसका कारोबार भारत सहित ब्रिटेन, अमेरिका, सिंगापुर, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और ओमान जैसे देशों तक फैला है। परिवार ने केरल के त्रिशूर से आभूषण कारोबार शुरू किया था। बाद में जॉय अलुक्कास ने 2001 में अपने नाम से ज्वेलरी कारोबार को आगे बढ़ाया। दुबई में तैयार किए गए ये विशाल झुमके अब कंपनी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और पारंपरिक आभूषण निर्माण कौशल की एक खास मिसाल बन गए हैं।

  • MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन

    MP में रेल यात्रियों की बढ़ी परेशानी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग से आज 4 मेमू ट्रेनें रद्द; भोपाल समेत कई रूट पर बदले स्टेशन


    भोपाल। मध्य प्रदेश में बीना रेलवे स्टेशन पर चल रहे यार्ड रीमॉडलिंग के काम का असर रेल संचालन पर पड़ रहा है। रविवार 25 अक्टूबर को बीना और रूठियाई के बीच चलने वाली चार मेमू ट्रेनें निरस्त रहेंगी। इसके अलावा भोपाल कटनी कोटा नागदा दमोह और ललितपुर रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों के शुरुआती या अंतिम स्टेशन में बदलाव किया गया है। कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित मार्ग के बजाय वैकल्पिक रूट से चलाने की व्यवस्था की गई है। इन बदलावों के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में बदलाव करना पड़ सकता है।

    रेलवे के अनुसार बीना स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के दौरान ट्रैक और प्लेटफॉर्म की उपलब्धता के साथ परिचालन संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी बदलाव किए गए हैं। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और बदले हुए स्टॉपेज की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। इसके लिए रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 या आधिकारिक पूछताछ माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

    रविवार को बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61611 और रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61612 के साथ बीना-रूठियाई मेमू ट्रेन नंबर 61625 तथा रूठियाई-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61626 निरस्त रहेंगी। इन ट्रेनों के बंद रहने से इस रूट पर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।

    भोपाल और बीना के बीच चलने वाली ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव किया गया है। भोपाल-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61631 और 11605 बीना के बजाय मंडी बामोरा स्टेशन पर अपनी यात्रा समाप्त करेंगी। वहीं बीना-भोपाल मेमू ट्रेन नंबर 11606 और 61632 मंडी बामोरा से रवाना होंगी। यह बदलाव 25 अक्टूबर तक निर्धारित है। ऐसे में भोपाल और बीना के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को मंडी बामोरा से आगे जाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

    दमोह और ग्वालियर रूट पर भी ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया गया है। बीना-दमोह पैसेंजर ट्रेन नंबर 51885 मालखेड़ी स्टेशन से शाम 6 बजकर 10 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। वहीं दमोह-बीना पैसेंजर ट्रेन नंबर 51886 की यात्रा मालखेड़ी में समाप्त होने का समय सुबह 11 बजकर 45 मिनट तय किया गया था। बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन नंबर 51883 भी 24 अक्टूबर तक मालखेड़ी से दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर रवाना होने के लिए निर्धारित थी। इन ट्रेनों से सफर करने वाले यात्रियों को तारीख के अनुसार परिचालन की पुष्टि करनी चाहिए।

    नागदा रूट पर नागदा-बीना एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19341 गुना स्टेशन पर यात्रा समाप्त करेगी जबकि बीना-नागदा एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 19342 25 अक्टूबर तक गुना से रवाना होने के लिए निर्धारित है। ललितपुर रूट पर ललितपुर-बीना मेमू ट्रेन नंबर 64618 आगासोद स्टेशन पर समाप्त होगी और बीना-ललितपुर मेमू ट्रेन नंबर 64617 आगासोद से शुरू होगी।

    कटनी रूट पर कटनी-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11602 खुरई स्टेशन पर समाप्त होगी जबकि बीना-कटनी मेमू ट्रेन नंबर 11601 26 अक्टूबर तक खुरई से रवाना होगी। कोटा रूट पर कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 11603 महादेवखेड़ी में समाप्त होगी और बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 61634 वहीं से शुरू होगी। कोटा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61633 मुंगावली में समाप्त होगी जबकि बीना-कोटा मेमू ट्रेन नंबर 11604 26 अक्टूबर तक मुंगावली से रवाना होने के लिए निर्धारित है।

    बीना-कटनी मुड़वारा मेमू ट्रेन नंबर 61619 भी 26 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी से फ्लाईओवर मार्ग के जरिए सुबह 10 बजकर 20 मिनट पर चलने के लिए निर्धारित है। वहीं कटनी मुड़वारा-बीना मेमू ट्रेन नंबर 61620 को 25 अक्टूबर तक महादेवखेड़ी तक विस्तारित किया गया है। इसका निर्धारित आगमन समय रात 12 बजकर 50 मिनट है।

    रेलवे की सूचना के अनुसार कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी अलग-अलग तारीखों में वैकल्पिक मार्ग से चलाने की व्यवस्था की गई थी। इनमें बांद्रा टर्मिनस-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अहमदाबाद-दरभंगा एक्सप्रेस दरभंगा-अहमदाबाद एक्सप्रेस अहमदाबाद-बनारस सिटी एक्सप्रेस और बनारस सिटी-अहमदाबाद एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों के लिए बताई गई कई तारीखें 20 से 24 अक्टूबर के बीच की हैं। इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा की तारीख के अनुसार ताजा स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के चलते हुए इन अस्थायी बदलावों के बीच सही जानकारी लेकर स्टेशन पहुंचना यात्रियों के लिए जरूरी है।

  • गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की सप्लाई सुधारने की तैयारी, सरकार ने एल्युमिनियम कैन के सर्टिफिकेशन की समयसीमा बढ़ाई

    गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की सप्लाई सुधारने की तैयारी, सरकार ने एल्युमिनियम कैन के सर्टिफिकेशन की समयसीमा बढ़ाई

    नई दिल्ली । गर्मियों में बीयर और कोल्ड ड्रिंक्स की बढ़ती मांग के बीच एल्युमिनियम कैन की संभावित कमी दूर करने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। पेय पदार्थों के लिए इस्तेमाल होने वाले एल्युमिनियम कैन पर अनिवार्य भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) सर्टिफिकेशन लागू करने की समयसीमा छह महीने तक बढ़ाई गई है। इस कदम से पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों और कैन निर्माताओं को उत्पादन, आयात तथा पैकेजिंग की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

    पहले कंपनियों को 31 अक्टूबर 2026 तक निर्धारित प्रमाणन हासिल करना था। अब अलग-अलग श्रेणियों की कंपनियों के लिए नियमों के अनुपालन की समयसीमा अलग-अलग रखी गई है। बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2027, छोटी कंपनियों को 1 जुलाई 2027 और सूक्ष्म कंपनियों को 1 अक्टूबर 2027 से संबंधित नियमों का पालन करना होगा। इस बदलाव से कंपनियों को प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करने और बाजार की जरूरतों के अनुसार कैन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    भारत में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की बिक्री में एल्युमिनियम कैन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इन पेय पदार्थों की कुल सालाना बिक्री में अब कैन की हिस्सेदारी एक चौथाई से अधिक हो गई है। बीते दो वर्षों के दौरान मांग में तेजी आई है, लेकिन घरेलू निर्माताओं का उत्पादन उसी गति से नहीं बढ़ पाया। इसके चलते कंपनियों को पैकेजिंग सामग्री की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

    उद्योग से जुड़े अनुमान के मुताबिक, भारतीय बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल लगभग 60 करोड़ अतिरिक्त कैन के उत्पादन की उम्मीद थी। हालांकि, अब तक इस अतिरिक्त क्षमता का करीब आधा हिस्सा ही हासिल हो सका है। ऐसे में सरकार की ओर से समयसीमा बढ़ाने से कंपनियों को आगामी गर्मियों के सीजन के लिए पहले से स्टॉक तैयार करने और सप्लाई की बेहतर योजना बनाने का अवसर मिलेगा।

    कैन की कमी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भी एक कारण हैं। मध्य पूर्व में जारी युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। विदेशों में स्थित जिन निर्माताओं को भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणन मिला हुआ है, वे भी भारत की बढ़ती मांग पूरी करने में पर्याप्त साबित नहीं हो रहे हैं। इस वजह से पेय पदार्थ कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों से पैकेजिंग सामग्री जुटानी पड़ रही है।

    कमी को पूरा करने के लिए कंपनियां संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे बाजारों से एल्युमिनियम कैन आयात कर रही हैं। हालांकि, आयातित कैन घरेलू स्तर पर उपलब्ध कैन की तुलना में लगभग 25 से 30 प्रतिशत महंगे पड़ते हैं। इससे कंपनियों की लागत बढ़ रही है और पैकेजिंग की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

    घरेलू उत्पादन बढ़ाने में भी समय लग रहा है। कैन निर्माता अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए नई उत्पादन लाइनें स्थापित करना जरूरी है। लेकिन नई लाइन लगाने और उसे चालू करने में एक साल तक का समय लग सकता है। इस कारण तत्काल उत्पादन बढ़ाकर मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर खत्म करना आसान नहीं है।

    सरकार ने अप्रैल 2025 में एल्युमिनियम पेय कैन को अनिवार्य बीआईएस प्रमाणन के दायरे में लाने के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किया था। इसका उद्देश्य कैन की सुरक्षा, उत्पादों की ताजगी और रीसाइक्लिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इन मानकों में कैन की सामग्री, आकार, ढक्कन की सील, दबाव सहने की क्षमता, रिसाव रोकने की व्यवस्था और सुरक्षा परत शामिल हैं। विदेशी कारखानों के निरीक्षण की जरूरत पड़ने पर प्रमाणन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय भी लग सकता है। ऐसे में समयसीमा बढ़ने से कंपनियों को नियमों का पालन करने के साथ आगामी गर्मियों के लिए सप्लाई तैयार करने में राहत मिल सकती है।

  • बैंक ने कहा- FDR जारी ही नहीं की, फिर भी शराब ठेके में कैसे हुई स्वीकार? भोपाल मामले में लोकायुक्त की FIR से मचा हड़कंप

    बैंक ने कहा- FDR जारी ही नहीं की, फिर भी शराब ठेके में कैसे हुई स्वीकार? भोपाल मामले में लोकायुक्त की FIR से मचा हड़कंप


    भोपाल । भोपाल में शराब दुकान का ठेका हासिल करने के लिए करीब 2 करोड़ 75 लाख 33 हजार 335 रुपये की कथित फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद यानी एफडीआर जमा कराने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिस बैंक के नाम पर एफडीआर प्रस्तुत की गई उसने इसे जारी करने से ही इनकार कर दिया था। इसके बावजूद दस्तावेज को प्रतिभूति के तौर पर स्वीकार कर लिया गया और शराब दुकान का ठेका आवंटित हो गया। अब लोकायुक्त संगठन ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि कथित फर्जी दस्तावेजों को किस आधार पर मंजूरी दी गई और इस पूरी प्रक्रिया में किन अधिकारियों तथा निजी व्यक्तियों की भूमिका रही।

    लोकायुक्त ने इस मामले में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के पूर्व ओएसडी और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त दीपम रायचूरा तथा हरियाणा के झज्जर निवासी शराब ठेकेदार जसवंत सिंह को आरोपी बनाया है। मामला वित्तीय वर्ष 2024-25 में भोपाल के पीएंडटी चौराहा कंपोजिट शराब दुकान समूह के ठेके से जुड़ा है। आरोप है कि ठेका हासिल करने के लिए कथित फर्जी एफडीआर के साथ उसकी सत्यापन रिपोर्ट भी सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में प्रस्तुत की गई। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज कहां तैयार हुए और सत्यापन की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी कैसे हुई।

    इस मामले में दीपम रायचूरा की भूमिका भी जांच के दायरे में है। विभागीय जांच के बाद उन्हें 12 अक्टूबर को निलंबित किया गया था। इससे पहले उन्हें उप मुख्यमंत्री के ओएसडी के अतिरिक्त प्रभार से भी मुक्त कर दिया गया था। अब लोकायुक्त की ओर से एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला विभागीय कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के फैसलों और दस्तावेजों को मंजूरी देने की प्रक्रिया की पड़ताल की जाएगी।

    लोकायुक्त जांच में सबसे अहम सवाल एफडीआर के सत्यापन से जुड़ा है। एजेंसी यह पता लगाएगी कि कथित एफडीआर किसने तैयार कराई और बैंक के नाम पर सत्यापन रिपोर्ट किसने बनाई। इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि दस्तावेजों की जांच करने वाले अधिकारियों ने उन्हें स्वीकार करने से पहले आवश्यक पुष्टि की थी या नहीं। यदि बैंक ने वास्तव में एफडीआर जारी नहीं की थी तो उसके बावजूद उसे वैध प्रतिभूति मानने का आधार क्या था यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

    जांच एजेंसी ठेका आवंटन और लाइसेंस हस्तांतरण की प्रक्रिया की भी पड़ताल कर सकती है। इसमें यह देखा जाएगा कि निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं और दस्तावेजों की पुष्टि के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी भूमिका किस तरह निभाई। लोकायुक्त संगठन के अनुसार जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि संबंधित सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका भी जांची जाएगी।

    इस मामले में कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर उन्हें जमा कराने और स्वीकार किए जाने तक की पूरी कड़ी स्पष्ट करना जांच एजेंसी के सामने चुनौती होगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि ठेका आवंटन की प्रक्रिया में किसी स्तर पर जानबूझकर अनियमितता की गई थी या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही हुई। जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदार लोगों की भूमिका और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद भोपाल के शराब ठेका आवंटन से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक और आबकारी विभाग के स्तर पर चर्चा में है।

  • टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली टीम पाकिस्तान, भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा

    टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली टीम पाकिस्तान, भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे स्थान पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में मैदान पर उतरते ही भारतीय टीम ने इस प्रारूप में अपने 300 मैच पूरे कर लिए। इसके साथ ही भारत, पाकिस्तान के बाद टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 300 या उससे अधिक मुकाबले खेलने वाली दुनिया की दूसरी टीम बन गया। हालांकि, सर्वाधिक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के मामले में पाकिस्तान अब भी शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। भारत ने तीन बार टी20 विश्व कप का खिताब जीता है, लेकिन मैचों की संख्या के लिहाज से वह पाकिस्तान से पीछे है।

    क्राइस्टचर्च के हेग्ले ओवल मैदान पर न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला गया दूसरा टी20 मुकाबला भारतीय टीम के लिए इस लिहाज से खास रहा। इस मैच के साथ भारत ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 300 मुकाबले खेलने का आंकड़ा छुआ। पिछले वर्षों में द्विपक्षीय सीरीज, टी20 विश्व कप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के कारण इस प्रारूप में भारत के मैचों की संख्या लगातार बढ़ी है। टी20 क्रिकेट की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय टीमें भी इस प्रारूप में अधिक मुकाबले खेल रही हैं।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान ने अब तक 304 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और वह इस सूची में पहले स्थान पर है। भारत 300 मुकाबलों के साथ दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। न्यूजीलैंड 269 मैचों के साथ तीसरे स्थान पर है। इसके बाद वेस्टइंडीज का नंबर आता है, जिसने 260 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले हैं। श्रीलंका 243 मैचों के साथ इस सूची में पांचवें स्थान पर है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में एशियाई टीमों के साथ-साथ अन्य प्रमुख क्रिकेट देशों की भी लंबी भागीदारी रही है।

    मैचों की कुल संख्या के अलावा भारत का जीत का रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय है। 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारतीय टीम ने 200 मैच जीते हैं। उसे 83 मैचों में हार का सामना करना पड़ा, जबकि सात मुकाबले टाई रहे और 10 मैचों का कोई परिणाम नहीं निकल सका। इस तरह भारत ने इस प्रारूप में जीत का दोहरा शतक पूरा कर लिया है। टीम के प्रदर्शन में बल्लेबाजी और गेंदबाजी के योगदान के साथ लंबे समय तक निरंतरता बनाए रखना भी अहम रहा है।

    दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अपने 304 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में से 176 में जीत दर्ज की है। उसे 116 मुकाबलों में हार मिली, जबकि चार मैच टाई रहे और आठ मुकाबलों का कोई नतीजा नहीं निकला। भारत और पाकिस्तान के आंकड़ों की तुलना करने पर जीत की संख्या में भारतीय टीम आगे दिखाई देती है। भारत ने पाकिस्तान से चार मैच कम खेले हैं, लेकिन उसकी जीत की संख्या 200 है, जबकि पाकिस्तान की जीत 176 है।

    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के विस्तार में द्विपक्षीय सीरीज और आईसीसी टूर्नामेंट की अहम भूमिका रही है। इस प्रारूप में कम समय में परिणाम मिलने के कारण दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है। भारत ने भी लगातार अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेकर अपने मैचों की संख्या 300 तक पहुंचाई है। टी20 विश्व कप में टीम की सफलता ने इस प्रारूप में भारतीय क्रिकेट की पहचान को और मजबूत किया है।

    भारत का 300 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों तक पहुंचना उसके क्रिकेट कार्यक्रम में इस प्रारूप की अहमियत को दर्शाता है। पाकिस्तान फिलहाल सर्वाधिक मुकाबले खेलने वाली टीम है, लेकिन भारत ने जीत की संख्या के मामले में मजबूत रिकॉर्ड बनाया है। आने वाले समय में दोनों टीमों के मैचों की संख्या में बदलाव हो सकता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में टी20 मुकाबले लगातार खेले जा रहे हैं।

  • MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी

    MP में कोचिंग सेंटरों पर नई नियमावली लागू करने की तैयारी, फीस से लेकर टीचर की योग्यता तक वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को व्यवस्थित बनाने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नए नियमों का प्रारूप जारी किया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र पंजीयन एवं विनियमन नियम 2026 का नोटिफिकेशन जारी किया गया है। इसके तहत कोचिंग संस्थानों के पंजीयन से लेकर शिक्षकों की योग्यता सुरक्षा व्यवस्था फीस की जानकारी और विद्यार्थियों की शिकायतों के समाधान तक कई महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। इन नियमों का उद्देश्य कोचिंग संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाना और विद्यार्थियों को सुरक्षित तथा बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।

    प्रस्तावित नियमों के अनुसार हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट बनाकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसमें कोचिंग की फीस का पूरा विवरण शिक्षकों की योग्यता उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल होगी। संस्थान को यह भी बताना होगा कि वहां किन परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। इससे दाखिला लेने से पहले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को कोचिंग सेंटर की व्यवस्था और खर्च की जानकारी मिल सकेगी। फीस और सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना इन प्रावधानों का प्रमुख उद्देश्य है।

    पंजीयन व्यवस्था के तहत कोचिंग संचालकों को निर्धारित समय सीमा में आवेदन करना होगा। प्रारूप के मुताबिक संस्थानों को नियम लागू होने के बाद 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है जिसके बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होगा। पंजीयन किसी दूसरे व्यक्ति या संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। यदि किसी कोचिंग सेंटर की एक से अधिक शाखाएं हैं तो हर शाखा को अलग कोचिंग सेंटर माना जाएगा। इससे प्रत्येक शाखा की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की अलग निगरानी की जा सकेगी।

    विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसरों में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना जरूरी होगा। हालांकि निगरानी के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। शौचालयों चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था स्वच्छ पेयजल साफ-सफाई प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम करने होंगे। आगंतुकों का रिकॉर्ड रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करने पर भी जोर दिया गया है।

    शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी प्रावधान किए गए हैं। प्रारूप के अनुसार ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था भी करनी होगी। विद्यार्थियों को परीक्षा और प्रतियोगिता के दबाव से निपटने में मदद देने के लिए मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया गया है। नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने और अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    नियमों में प्रवेश और पढ़ाई के दौरान धर्म मूलवंश जाति लिंग जन्मस्थान या अन्य आधारों पर किसी विद्यार्थी के साथ भेदभाव नहीं करने का प्रावधान है। इन आधारों पर विद्यार्थियों का अलग बैच बनाने पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और शिक्षकों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।

    पंजीयन या नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार होने अथवा पंजीयन रद्द या निलंबित किए जाने की स्थिति में अपील का अधिकार भी दिया गया है। संबंधित आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। प्रारूप में सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने का उल्लेख है।

    इन प्रस्तावित नियमों से विद्यार्थियों और अभिभावकों को कोचिंग चुनने से पहले फीस शिक्षकों की योग्यता सुविधाओं और सुरक्षा इंतजामों की जानकारी मिल सकेगी। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य सहायता और शिकायतों के समाधान की औपचारिक व्यवस्था विकसित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी से ही यह स्पष्ट होगा कि कोचिंग संस्थानों में पारदर्शिता और विद्यार्थियों की सुरक्षा को कितना मजबूत बनाया जा सकेगा।

  • मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गिनाए देशवासियों के प्रयास, खेती से स्वास्थ्य और तकनीक तक की उपलब्धियां

    मन की बात के 139वें एपिसोड में पीएम मोदी ने गिनाए देशवासियों के प्रयास, खेती से स्वास्थ्य और तकनीक तक की उपलब्धियां

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 139वें एपिसोड में देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की ओर से किए जा रहे सामाजिक, पर्यावरणीय और तकनीकी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 12 साल पहले विजयदशमी के अवसर पर शुरू हुआ यह कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ रहा है। इस यात्रा में देशवासियों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके लिए मन की बात किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है। यह आम लोगों के परिश्रम, साहस, समर्पण और सेवा भावना को समझने के साथ उनके योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

    प्रधानमंत्री ने पंजाब में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेती विरासत मिशन नाम की संस्था पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के लिए नव-त्रिन्जन पहल शुरू की गई है। इसके तहत बिना रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के जैविक कपास उगाई जाती है। प्राकृतिक रंगों वाली कपास से धागे और कपड़े तैयार करने में भी मदद मिलती है, जिससे उन्हें रंगने के लिए अलग से रसायनों की जरूरत कम होती है।

    उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का भी जिक्र किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, नदी में पानी कम होने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत भी सूख रहे थे। इसके बाद नदी को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। वर्षा जल को रोकने, जमीन में पानी के पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे उपाय अपनाए गए। इन प्रयासों से हेवल नदी को फिर से जीवन देने में मदद मिली और कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन का रास्ता भी खुला।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में हो रहे कामों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना ग्रीस तक पहुंच रहा है, जबकि कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव भेजी जा रही है। महाराष्ट्र में आदिवासी समुदायों ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया है। शबरी नेचुरल्स के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पाद बाजार में लाए जा रहे हैं। इनकी पैकेजिंग पर आदिवासी कला की झलक दिखाई देती है, जिसे जापान के प्रतिष्ठित गुड डिजाइन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

    डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप के उदाहरण दिए। बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी हुई थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों से संपर्क किया। बच्चे को निमोनिया होने का पता चला और विशेषज्ञों की निगरानी में उसकी स्थिति में सुधार हुआ।

    इसी तरह, लक्षद्वीप के कल्पेनी में करीब 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ने पर ई-संजीवनी के जरिए कवरत्ती में मौजूद अनुभवी डॉक्टरों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने स्थानीय चिकित्सा दल को मार्गदर्शन दिया, जिससे मरीज को राहत पहुंचाने में मदद मिली। इन उदाहरणों के जरिए दूरदराज के इलाकों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की उपयोगिता सामने आई।

    प्रधानमंत्री ने आईआईटी मद्रास में स्थापित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का भी उल्लेख किया। इस केंद्र ने मस्तिष्क की उच्च रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल त्रिआयामी तस्वीरें तैयार करने के लिए एक तकनीकी मंच विकसित किया है। इसका उद्देश्य आने वाले समय में 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना और उनका विस्तृत अध्ययन करना है। इस पहल को मस्तिष्क अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया।

  • पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..

    पाकिस्तान में LPG संकट गहराया, 12 किलो सिलेंडर की कीमत 8200 रुपये तक पहुंची..


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में महंगाई के बीच रसोई गैस की कमी ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के कई हिस्सों में घरेलू इस्तेमाल वाले LPG सिलेंडरों की कीमतों में तेजी से उछाल आया है। करीब 12 किलो गैस वाला सिलेंडर, जो कुछ दिन पहले लगभग 4,500 पाकिस्तानी रुपये में मिल रहा था, अब 7,000 रुपये से अधिक कीमत पर बिक रहा है। कुछ क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को इसके लिए 8,200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। गैस की बढ़ती कीमतों और सीमित उपलब्धता ने घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

    इस संकट की प्रमुख वजह ईरान से होने वाली LPG आपूर्ति का बाधित होना है। पाकिस्तान और ईरान के बीच स्थित दो प्रमुख सीमा चौकियां 17 अक्टूबर से बंद हैं। सीमा बंद होने के कारणों को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अवैध तस्करी रोकने को इसकी वजह बताया है, जबकि ईरान ने इसे तकनीकी समस्या से जुड़ा मामला कहा है।

    पाकिस्तान अपनी LPG जरूरत का लगभग आधा हिस्सा ईरान से प्राप्त करता है। ऐसे में सीमा पर आवाजाही बंद होने से गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण बाजार में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया है। इसका असर सीधे सिलेंडरों की कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

    पाकिस्तान की LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा किया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश अपनी कुल आवश्यकता का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ईरान के अलावा ओमान और इराक भी गैस आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं। इन देशों से आने वाली खेप प्रभावित होने से संकट और गंभीर हो गया है।

    पाकिस्तान में प्रतिदिन लगभग 6,500 से 7,000 टन LPG की खपत होती है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन करीब 2,000 से 2,500 टन प्रतिदिन है। शेष जरूरत पूरी करने के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, खपत और उत्पादन के बीच का यह अंतर देश को बाहरी आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़े तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों ने समुद्री परिवहन को भी प्रभावित किया है। इसके कारण इराक और ओमान से आने वाली गैस की आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह पाकिस्तान को एक साथ सीमा पार आपूर्ति और समुद्री मार्गों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    गैस की कमी के बीच कालाबाजारी की समस्या भी सामने आई है। पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण ने 11.8 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर की आधिकारिक कीमत 3,296 पाकिस्तानी रुपये निर्धारित की है। इसके बावजूद कई बाजारों में सिलेंडर इससे दोगुने से भी अधिक दाम पर बेचे जा रहे हैं। आधिकारिक दर और बाजार में वसूली जा रही कीमत के बीच बड़ा अंतर उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा रहा है।

    कीमतों की स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में और गंभीर है। बलूचिस्तान में 12 किलो का सिलेंडर लगभग 7,000 रुपये में मिल रहा है, जबकि लाहौर में इसकी कीमत 7,500 रुपये तक बताई गई है। दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्र स्कर्दू में उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर के लिए 8,200 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।

    आपूर्ति सामान्य होने में देरी से घरेलू उपभोक्ताओं के सामने परेशानी बनी रह सकती है। फिलहाल सीमा चौकियों के बंद रहने, समुद्री मार्गों पर तनाव और आयात पर निर्भरता के कारण पाकिस्तान के LPG बाजार पर दबाव है। गैस की उपलब्धता में सुधार और कीमतों में स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाधित आपूर्ति कितनी जल्दी बहाल होती है।

  • धोनी के IPL करियर पर सस्पेंस बरकरार, CSK के दिग्गज ने बताया कब लेंगे आखिरी फैसला; फिटनेस बनेगी सबसे बड़ा पैमाना

    धोनी के IPL करियर पर सस्पेंस बरकरार, CSK के दिग्गज ने बताया कब लेंगे आखिरी फैसला; फिटनेस बनेगी सबसे बड़ा पैमाना


    नई दिल्ली । आईपीएल 2027 में महेंद्र सिंह धोनी खेलते नजर आएंगे या क्रिकेट को अलविदा कह देंगे इस सवाल का जवाब जानने के लिए प्रशंसकों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है। चेन्नई सुपर किंग्स के दिग्गज खिलाड़ी धोनी ने अपने भविष्य को लेकर अहम संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि अगले सीजन में खेलने का फैसला लेने से पहले वह अपनी फिटनेस का आकलन करेंगे। इस संबंध में दिसंबर से पहले फैसला लिए जाने की संभावना है। हालांकि धोनी ने आईपीएल 2027 में खेलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही संन्यास को लेकर कोई अंतिम घोषणा की है।

    बंगलूरू में आयोजित एक हेल्थकेयर कार्यक्रम के दौरान धोनी से पूछा गया कि क्या वह आईपीएल का एक और सीजन खेलना चाहेंगे। इस सवाल पर उन्होंने अपने चिर परिचित मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। धोनी ने कहा कि उन्हें पहले डॉक्टर से फिटनेस टेस्ट कराना होगा। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि वह एक और सीजन खेलने के लिए कितने मजबूत हैं। उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि अगर वह खेलने की स्थिति में नहीं हुए तो डॉक्टरों को उनकी सेहत का ध्यान रखना होगा ताकि यह पुरानी गाड़ी सड़क पर चलती रहे। उनके इस बयान से साफ है कि अगले सीजन में खेलने का फैसला उनकी शारीरिक स्थिति पर निर्भर करेगा।

    धोनी आईपीएल 2026 में फिटनेस संबंधी परेशानियों खासकर पिंडली की समस्या के कारण पूरे सीजन से बाहर रहे थे। उनकी गैरमौजूदगी चेन्नई सुपर किंग्स के समर्थकों के लिए बड़ा झटका रही। अब प्रशंसकों की निगाहें उनकी फिटनेस और संभावित वापसी पर टिकी हैं। धोनी लंबे समय से आईपीएल के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और चेन्नई की टीम के साथ उनका खास जुड़ाव रहा है। ऐसे में उनके भविष्य से जुड़ा हर बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन जाता है।

    चेन्नई सुपर किंग्स के पिछले दो सीजन भी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। टीम ने धोनी की कप्तानी में 2023 में आखिरी बार आईपीएल खिताब जीता था। इसके बाद ऋतुराज गायकवाड़ के नेतृत्व में टीम ने 2024 से आगे का सफर तय किया लेकिन उसे वैसी सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद की जा रही थी। चेन्नई सुपर किंग्स 2025 में अंक तालिका में सबसे निचले स्थान पर रही जबकि 2026 में टीम आठवें स्थान पर रही। लगातार निराशाजनक प्रदर्शन के बाद टीम के भविष्य और धोनी की संभावित भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    धोनी ने चेन्नई के हालिया प्रदर्शन पर बात करते हुए माना कि पिछले दो वर्षों में टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। वहीं उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खेल की तारीफ भी की। धोनी के मुताबिक किसी टीम का कागजों पर मजबूत दिखाई देना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना मैदान पर सही समय पर अच्छा प्रदर्शन करना। टी20 क्रिकेट में शीर्ष टीमों के बीच अंतर बहुत कम होता है और किसी एक मुकाबले का प्रदर्शन नतीजे को बदल सकता है। उन्होंने कहा कि आरसीबी ने शानदार क्रिकेट खेली है और उसकी उपलब्धियों को स्वीकार करने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।

    धोनी ने यह भी कहा कि खेल में अच्छा और खराब समय आता रहता है। जब कोई टीम उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाती तो उसे अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करना चाहिए। उन्होंने बंगलूरू के क्रिकेट मैदान की भी तारीफ की। उनके अनुसार यहां बल्लेबाजों को बड़े शॉट खेलने का अच्छा मौका मिलता है क्योंकि गेंद आसानी से बाउंड्री पार कर सकती है। कई बार शॉट पूरी तरह सही नहीं लगने के बावजूद गेंद छक्के के लिए चली जाती है। हालांकि ऐसा मैदान गेंदबाजों के लिए चुनौती भी पैदा करता है। फिलहाल धोनी के आईपीएल भविष्य पर अंतिम फैसला उनकी फिटनेस के आकलन के बाद ही सामने आएगा और प्रशंसकों को दिसंबर से पहले उनके अगले कदम का इंतजार रहेगा।