Author: bharati

  • 4000 करोड़ की रामायण को लेकर बड़ा दावा रिलीज से पहले दर्शक ने बताया कैसा है रणबीर कपूर का राम अवतार संगीत की तारीफ कर कही ये बात

    4000 करोड़ की रामायण को लेकर बड़ा दावा रिलीज से पहले दर्शक ने बताया कैसा है रणबीर कपूर का राम अवतार संगीत की तारीफ कर कही ये बात


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस फिल्म को लेकर रिलीज से पहले ही एक बड़ा दावा सामने आया है। अमेरिका की एक एक्स यूजर प्रिया मैथ्यू ने सोशल मीडिया पर फिल्म देखने का अनुभव साझा करते हुए इसका शुरुआती रिव्यू दिया है। उनके मुताबिक फिल्म की कहानी भावनात्मक और प्रभावशाली है और इसका संगीत भी उन्हें काफी पसंद आया। हालांकि उन्होंने फिल्म के अंग्रेजी डब वर्जन को लेकर कुछ कमियां भी बताई हैं। इस प्रतिक्रिया के सामने आने के बाद रणबीर कपूर की रामायण को लेकर फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

    प्रिया मैथ्यू ने दावा किया कि उन्होंने इसी सप्ताह आयोजित एक स्क्रीनिंग के दौरान फिल्म का अंग्रेजी वर्जन देखा था। उनके अनुसार फिल्म देखने का अनुभव अच्छा रहा और कहानी ने उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि फिल्म उन्हें पसंद आई लेकिन अंग्रेजी डबिंग उतनी प्रभावशाली नहीं लगी। उन्होंने इस बारे में सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट को भी अपनी प्रतिक्रिया देने की बात कही। प्रिया का कहना है कि वह फिल्म को उसकी मूल भाषा हिंदी में देखना पसंद करेंगी ताकि संवादों और भावनाओं का प्रभाव बेहतर तरीके से महसूस किया जा सके।

    फिल्म की कहानी से जुड़ाव के सवाल पर प्रिया ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि फिल्म काफी भावनात्मक और शक्तिशाली है। कहानी के साथ उनका जुड़ाव बना रहा और कई दृश्य उन्हें भीतर तक प्रभावित करने वाले लगे। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म देखने के दौरान उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। इस प्रतिक्रिया ने फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह एक दर्शक की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है और इसे फिल्म की आधिकारिक या सर्वमान्य समीक्षा नहीं माना जा सकता।

    रामायण के संगीत को लेकर भी प्रिया ने अपनी राय रखी। उन्होंने एआर रहमान के संगीत की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें भारतीय संगीत का प्रभाव अधिक पसंद आया। उन्होंने इसकी तुलना हॉलीवुड संगीतकार हंस जिमर के संगीत से भी की और रहमान के काम को बेहतर बताया। प्रिया ने यह आशंका भी जताई कि अंग्रेजी वर्जन में कुछ गाने हटाए गए हो सकते हैं। हालांकि फिल्म के अलग-अलग संस्करणों में गानों को लेकर उनके इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान एक यूजर ने उनसे पूछा कि क्या फिल्म में भगवान हनुमान को दिखाया गया है। इस सवाल पर प्रिया ने कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि वह फिल्म से जुड़ा कोई स्पॉइलर साझा नहीं करना चाहतीं। इससे फिल्म के महत्वपूर्ण दृश्यों और किरदारों को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बनी हुई है।

    नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे। साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं जबकि यश रावण की भूमिका में दिखाई देंगे। रवि दुबे लक्ष्मण और सनी देओल हनुमान के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह लारा दत्ता काजल अग्रवाल अरुण गोविल और कुणाल कपूर सहित कई कलाकार भी शामिल हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म का पहला भाग 5 नवंबर को दिवाली के मौके पर रिलीज होने वाला है जबकि दूसरा भाग अगले साल दिवाली पर आने की योजना है। निर्माता नमित मल्होत्रा के मुताबिक दोनों भागों को मिलाकर इस महागाथा का कुल बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया गया है। इतने बड़े बजट और शानदार कलाकारों की मौजूदगी के कारण फिल्म से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। अब दर्शकों को आधिकारिक ट्रेलर और फिल्म की रिलीज का इंतजार है ताकि वे खुद तय कर सकें कि बड़े पर्दे पर रामायण की यह नई प्रस्तुति उनकी उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

  • नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नवंबर 2026 में दिवाली, धनतेरस, छठ पूजा और देव दीपावली समेत जानें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की तारीखें

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 का महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दौरान धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और छठ पूजा जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाएंगे। इसके अलावा देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा और गुरु नानक जयंती जैसे महत्वपूर्ण पर्व भी इसी महीने पड़ेंगे। व्रत और त्योहारों की तारीखों की जानकारी पहले से होने पर लोग अपनी धार्मिक तैयारियां और पूजा-पाठ की योजनाएं व्यवस्थित कर सकते हैं। नवंबर के कैलेंडर में महीने की शुरुआत से लेकर अंतिम सप्ताह तक कई महत्वपूर्ण तिथियां शामिल हैं।

    महीने की शुरुआत 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, राधा कुंड स्नान और कालाष्टमी के साथ होगी। इसके बाद 5 नवंबर को रमा एकादशी, कृष्ण पद्मनाभ द्वादशी और गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। 6 नवंबर को धनतेरस, धनत्रयोदशी, यम दीपम और शुक्र प्रदोष व्रत पड़ेंगे। धनतेरस को दीपावली पर्व की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है।

    धनतेरस की तिथि को लेकर दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 11 बजकर 45 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसके अगले दिन 7 नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजा और मासिक शिवरात्रि के पर्व पड़ेंगे।

    8 नवंबर, रविवार को दिवाली मनाई जाएगी। इस अवसर पर घरों में दीप जलाने और माता लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह लगभग 11 बजकर 28 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी, काली पूजा, केदार गौरी व्रत और कमला जयंती भी सूची में शामिल हैं। 9 नवंबर को अन्वाधान और कार्तिक अमावस्या के पर्व बताए गए हैं।

    10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, बलि प्रतिपदा और गुजराती नववर्ष मनाया जाएगा। इसके अगले दिन 11 नवंबर को भाई दूज, यम द्वितीया, चित्रगुप्त पूजा और चंद्र दर्शन होंगे। 13 नवंबर से छठ पर्व की शुरुआत होगी। इसी दिन नागुला चविथी और लाभ चतुर्थी भी पड़ेंगे। 14 नवंबर को लाभ पंचमी और 15 नवंबर को छठ पूजा का दूसरा दिन तथा स्कंद षष्ठी मनाई जाएगी।

    महीने के मध्य में 16 नवंबर को वृश्चिक संक्रांति और जैन अष्टाह्निका का प्रारंभ होगा। 17 नवंबर को गोपाष्टमी, मंडला पूजा प्रारंभ और मासिक दुर्गाष्टमी पड़ेंगे। 18 नवंबर को अक्षय नवमी, आंवला नवमी और जगद्धात्री पूजा मनाई जाएगी।

    20 नवंबर को देवउठनी एकादशी, देवोत्थान एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी और भीष्म पंचक का प्रारंभ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और चातुर्मास का समापन होता है। 21 नवंबर को तुलसी विवाह, योगेश्वर द्वादशी, गुरुवायुर एकादशी और वैष्णव देवोत्थान एकादशी मनाई जाएगी। 22 नवंबर को विश्वेश्वर व्रत और रवि प्रदोष व्रत पड़ेंगे।

    23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी, मणिकर्णिका स्नान और कार्तिक चौमासी चौदस मनाई जाएगी। 24 नवंबर को देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और पुष्कर स्नान के पर्व पड़ेंगे। इसी दिन भीष्म पंचक का समापन भी होगा। 25 नवंबर को मार्गशीर्ष मास का प्रारंभ, रोहिणी व्रत और इष्टि होंगे। महीने के अंतिम प्रमुख व्रतों में 27 नवंबर को गणाधिप संकष्टी और मार्गशीर्ष गणेश चतुर्थी शामिल हैं।

  • अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा

    अनंत सिंह की बगावत से बिहार की सियासत में भूचाल बोले केकड़ा बिच्छू बन गए पार्टी के मालिक कुत्ता भी नहीं पूछेगा


    बिहार । बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद अनंत सिंह ने तीखे तेवर दिखाते हुए जदयू नेतृत्व पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले चुनाव में पार्टी को अपनी राजनीतिक ताकत का अंदाजा लग जाएगा और उसे 12 सीटें हासिल करना भी मुश्किल होगा। अनंत सिंह ने कहा कि जनता ही असली मालिक है और चुनाव के समय सबको अपनी औकात पता चल जाएगी। उनके इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।

    जदयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में मोकामा विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी पूर्व विधायक नीलम देवी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त कर दी है। निष्कासन के बाद एक इंटरव्यू में अनंत सिंह ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें बाहर कर दिया है तो उन्हें इससे कोई परेशानी नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी जिसके हाथ में है वह अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। वह किसी के पास दोबारा पार्टी में शामिल रखने की गुहार लगाने नहीं जाएंगे। अनंत सिंह ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो किया वह उचित था और उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है।

    अनंत सिंह ने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि आज ऐसे लोग पार्टी के मालिक बनकर बैठे हैं जिनका संगठन को खड़ा करने में कोई खास योगदान नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में मंत्री और दूसरे पदों पर बैठे कई लोगों ने संगठन के लिए कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई है। उनके मुताबिक चुनाव आने पर ऐसे नेताओं को अपनी वास्तविक राजनीतिक हैसियत का पता चल जाएगा। अनंत सिंह ने इसी दौरान केकड़ा और बिच्छू जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए नेतृत्व पर कटाक्ष किया। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    नीतीश कुमार को लेकर पूछे गए सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि उनके मन में नीतीश कुमार के प्रति सम्मान पहले की तरह बना रहेगा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के रहते शायद उन्हें पार्टी से निकालने की हिम्मत कोई नहीं करता। अनंत सिंह ने मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज पार्टी में ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है जो पहले इस स्थिति में नहीं थे। हालांकि उन्होंने निशांत कुमार को लेकर कोई तीखी टिप्पणी करने से परहेज किया। अनंत सिंह ने कहा कि निशांत के बारे में वह कुछ नहीं कहना चाहते और पार्टी जो भी फैसला करेगी उसके लिए वह तैयार हैं।

    भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर अनंत सिंह ने फिलहाल कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वह आगे किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगे इसका फैसला अभी नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार जताने की बात कही। अनंत सिंह ने दोहराया कि जनता ही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है और चुनाव के समय जनता का फैसला सामने आ जाएगा। उन्होंने अपनी विधानसभा सदस्यता को लेकर संभावित कार्रवाई पर भी कहा कि पार्टी जो करना चाहती है कर सकती है और उन्हें इसकी चिंता नहीं है।

    दरअसल जदयू ने अनंत सिंह के खिलाफ पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और हालिया विधान परिषद चुनाव में प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करने के आरोप लगाए हैं। पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी बयान में उनकी प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की जानकारी दी गई। अनंत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया और जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार को हराने की बात कही। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है। अब देखना होगा कि इस राजनीतिक टकराव का बिहार की आगामी चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष

    वोट चोरी के आरोपों पर आर-पार की लड़ाई के मूड में INDIA गठबंधन ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जन महाभियोग चलाएगा विपक्ष


    नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज होने जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन इंडिया ने जन महाभियोग चलाने का ऐलान किया है। इसके तहत 30 अक्टूबर को दिल्ली में मॉक पार्लियामेंट आयोजित की जाएगी जिसमें विपक्षी दलों के नेता एकजुट होकर मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली और जनसभा आयोजित करने की तैयारी है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इसे वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि इंडिया गठबंधन के नेता 30 अक्टूबर को एक साथ आकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनता का फैसला सामने रखेंगे। विपक्ष ने इस आयोजन को पब्लिक इम्पीचमेंट यानी जन महाभियोग का नाम दिया है। हालांकि यह संसदीय प्रक्रिया के तहत होने वाला औपचारिक महाभियोग नहीं बल्कि राजनीतिक विरोध का एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम होगा। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को व्यापक जनसमर्थन दिलाना है।

    विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि इससे मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इसी मुद्दे पर निर्वाचन आयोग को घेरने की रणनीति बनाई है। हालांकि निर्वाचन आयोग विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज करता रहा है। ऐसे में मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।

    30 अक्टूबर को होने वाली मॉक पार्लियामेंट के आयोजन स्थल को लेकर दिल्ली के अशोक होटल का नाम सामने आया है। हालांकि आयोजन की तैयारियों और स्थान के संबंध में अंतिम जानकारी की पुष्टि होना बाकी है। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी इस कार्यक्रम को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा और वोट चोरी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के उद्देश्य से विपक्षी दल एकजुट होकर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। विपक्ष इस आयोजन के जरिए चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा प्रमुखता से उठाना चाहता है।

    मॉक पार्लियामेंट के बाद 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी गठबंधन की बड़ी रैली प्रस्तावित है। कांग्रेस ने इसे दिल्ली चलो मार्च और वोट चोरी के खिलाफ जनआंदोलन से जोड़कर पेश किया है। केसी वेणुगोपाल के मुताबिक इस कार्यक्रम में कम से कम 10 लाख जागरूक नागरिकों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से संपर्क कर नेताओं और कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या में दिल्ली में मौजूदगी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

    विपक्ष की इस रणनीति को चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के मुद्दे पर सरकार तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मॉक पार्लियामेंट और रामलीला मैदान की रैली को कितना जनसमर्थन मिलता है। फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग और वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में नए टकराव का केंद्र बनता नजर आ रहा है।

  • विदिशा में मौत बनकर दौड़ी 11 हजार वोल्ट की बिजली बुजुर्ग हाईटेंशन तार से चिपके और मौके पर तोड़ा दम

    विदिशा में मौत बनकर दौड़ी 11 हजार वोल्ट की बिजली बुजुर्ग हाईटेंशन तार से चिपके और मौके पर तोड़ा दम


    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में बिजली विभाग की कथित लापरवाही के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। गंजबासौदा में तीसरी मंजिल के छज्जे पर खड़े होकर गुटखा थूकने के दौरान 65 वर्षीय बुजुर्ग 11 केवी की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए। करंट का झटका इतना तेज था कि वह बुरी तरह झुलस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा तफरी मच गई और स्थानीय लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखने को मिली। लोगों का आरोप है कि खतरनाक बिजली लाइन को हटाने के लिए कई बार शिकायत की गई थी लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।

    यह घटना शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे गंजबासौदा शहर के वार्ड नंबर 6 स्थित गायत्री नगर में हुई। जानकारी के मुताबिक 65 वर्षीय प्रभुलाल गुप्ता मकान की तीसरी मंजिल के छज्जे पर खड़े थे। इसी दौरान उन्होंने गुटखा थूकने की कोशिश की और पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए। बिजली का करंट लगने से वह बुरी तरह झुलस गए। हादसे के बाद उनका शरीर मकान के छज्जे की संरचना में फंसकर लटक गया। घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग कुछ देर के लिए सहम गए। बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई।

    हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग को जानकारी दी जिसके बाद हाईटेंशन लाइन की बिजली बंद कराई गई। सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम और गंजबासौदा शहर थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रभुलाल गुप्ता मूल रूप से छतरपुर जिले के रहने वाले थे और पिछले करीब दस वर्षों से गंजबासौदा में किराए के मकान में रह रहे थे। उनकी मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में शोक का माहौल बन गया।

    घटना के बाद बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। मकान मालकिन पदमा चिढ़ार ने बताया कि मकान के पास से गुजर रही हाईटेंशन लाइन को हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार मांग की गई थी। उनके मुताबिक अधिकारियों ने लाइन हटाने का आश्वासन दिया था लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि रिहायशी इलाके में घरों के बेहद करीब से गुजर रही हाईटेंशन लाइन लोगों की जान के लिए खतरा बनी हुई है।

    वार्ड पार्षद मनीष विश्वकर्मा ने भी बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बिजली के खंभों तारों और डीपी के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई मकानों के नजदीक से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन मकानों के ऊपर से भी बिजली की लाइन बेहद करीब से निकल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
    वार्ड पार्षद मनीष विश्वकर्मा ने भी बिजली विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बिजली के खंभों तारों और डीपी के रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कई मकानों के नजदीक से 11 केवी की लाइन गुजर रही है। कुछ स्थानों पर निर्माणाधीन मकानों के ऊपर से भी बिजली की लाइन बेहद करीब से निकल रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।

    इस दर्दनाक हादसे ने रिहायशी इलाकों में बिजली की खतरनाक लाइनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद लाइन हटाने या सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने में देरी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने मांग की है कि क्षेत्र में गुजर रही हाईटेंशन लाइनों का निरीक्षण कराया जाए और जहां भी खतरा है वहां तत्काल सुरक्षा के उपाय किए जाएं ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

  • हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल

    हैदराबादः भगवान राम की मूर्ति हटाने का विरोध.. BJP बोली – कांग्रेस का तेलंगाना में भी होगा UP जैसा हाल


    हैदराबाद।
    तेलंगाना (Telangana) की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad) में एक चौराहे से भगवान राम की मूर्ति (Lord Ram – Idol) हटाने जाने का भाजपा (BJP) ने विरोध किया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के ऊपर राम विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस फैसले के बाद उन्हें जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस ने इसी तरह से भगवान राम की मूर्ति हटाई थी। उसके बाद कांग्रेस वहां से साफ हो गई। यही हाल तेलंगाना में भी होने वाला है। बता दें, यह मूर्ति दशहरा के पहले कुछ हिंदु संगठनों द्वारा लगाई गई थी। बाद में इन संगठनों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील की थी।

    दशहरे के कार्यक्रम के पूरा होने के बाद कुछ हिंदू समूहों ने चौराहे का नाम बदलने की अपील करते हुए मूर्ति को यहीं स्थापित रखने पर जोर दिया। प्रशासन को इसकी जानकारी मिलने के बाद नगर प्रशासन ने ट्रस्ट को मूर्ति हटाने का आदेश जारी कर दिया। सोशल मीडिया पर भी भगवान राम की मूर्ति हटाए जाने का वीडियो तेजी के साथ वायरल हो रहा है।


    प्रशासन ने दिया सुप्रीम कोर्ट का हवाला
    हिंदू संगठनों की तरफ से किए जा रहे विरोध के बीच नगर प्रशासन ने कानून का हवाला दिया। प्रशासन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के नियम का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों, फुटपाथों और सार्वजनिक ऊपयोग की जगह पर गैर कानूनी रूप से मूर्तियां स्थापित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।


    भाजपा बोली- कांग्रेस का उत्तर प्रदेश जैसा हाल होगा
    भारतीय जनता पार्टी के तेलंगाना अध्यक्ष एन रामचंद्र राव ने कहा कि कांग्रेस को अब जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, “यह पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस सरकार ने भगवान राम की प्रतिमा को हटाने की कोशिश की है। इससे पहले भी 1949 में पंडित नेहरू की सरकार ने प्रतिमा को हटा दिया था। बाद में कांग्रेस उत्तर प्रदेश से गायब हो गई। अब कांग्रेस सरकार ने बशीरबाग में भी अपनी हरकत को दोहराया है। फिर वही हाल कांग्रेस का इंतजार कर रहा है। लोग न भूलते हैं और न ही माफ करते हैं।

    इस घटनाक्रम का भाजपा और विश्व हिंदू परिषद की तरफ से विरोध किया गया। भाजपा के तेलंगाना सोशल मीडिया हैंडल पर कांग्रेस को हिंदू विरोधी मानसिकता का करार दिया गया। पोस्ट में लिखा गया, “कांग्रेस सरकार की हिंदू-विरोधी मानसिकता एक बार फिर सबके सामने आ गई है। हैदराबाद में बशीरबाग मंदिर के पास, दशहरा के पावन अवसर पर हिंदू संगठनों द्वारा स्थापित प्रभु श्री राम की मूर्ति को हटाना, करोड़ों भक्तों का सीधा अपमान है। उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक, जनता ने हमेशा राजनीतिक अहंकार को कुचला है। तेलंगाना की जनता न तो माफ करेगी और न ही चुप बैठेगी।”

    बता दें, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा समेत कई हिंदु संगठन इस चौराहे का नाम बशीबाग से बदलकर श्रीराम चौक करने की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। मूर्ति के हटाए जाने के बाद विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविनुथला शशिधर ने कहा कि भविष्य में मंदिर में 108 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब हैदराबाद समेत राज्य के कई शहरों के पुराने नाम बहाल किए जाएंगे।

  • जजों की नियुक्ति में सरकार के आगे नरम पड़ जाते थे पूर्व CJI चंद्रचूड़; SC के पूर्व जज कौल का दावा

    जजों की नियुक्ति में सरकार के आगे नरम पड़ जाते थे पूर्व CJI चंद्रचूड़; SC के पूर्व जज कौल का दावा


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व न्यायाधीश (Former Judge) जस्टिस संजय किशन कौल (Justice Sanjay Kishan Kaul) ने अपनी आत्मकथा विदाउट फियर ऑफ फेवर (Without Fear of Favour) में कई दावे किए हैं। इस किताब ने देश की शीर्ष न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जस्टिस कौल का दावा है कि जजों की नियुक्ति के मामलों में पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) का सरकार की तरफ झुकाव रहता था। डीवाई चंद्रचूड़ कॉलेजियम की औपचारिक बैठक से पहले ही सरकार से अनौपचारिक सहमति लेने की कोशिश करते थे।

    दिसंबर 2023 में रिटायर हुए जस्टिस कौल के अनुसार, सरकार के साथ संबंधों को संभालने को लेकर उनके और तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ के बीच गंभीर मतभेद थे। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कौल ने अपनी किताब में लिखा है कि कॉलेजियम की चर्चा से पहले सरकार की सहमति लेना एक गलत संदेश देता है। जब भी न्यायपालिका सरकार को मौका देगी तो राजनीतिक वर्ग अपनी बात मनवाने की कोशिश करेगा।

    जस्टिस कौल ने अपनी किताब में कॉलेजियम से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया है। जजों के छह खाली पदों को भरा जाना था। कॉलेजियम के सदस्य पहले ही पांच नामों पर सहमत हो चुके थे। कौल लिखते हैं, “बैठक में जाते समय सीजेआई ने एक छठा नाम सुझाया। बाकी जजों ने इसका विरोध किया। मुझे शक हुआ कि यह नाम सरकार के कहने पर सुझाया गया है। इसके बाद CJI उन्हें एक तरफ ले गए और सोचने लगे कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए।”

    कौल आगे लिखते हैं, “मेरा शक सही निकला और मैंने उनसे समझदारी से काम लेने को कहा। कॉलेजियम की बैठक के बीच वे ऐसा नहीं कर सकते थे।”

    एक अल्पसंख्यक समुदाय के जज उम्मीदवार की नियुक्ति के समय सरकार ने उनकी जाति और धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए। जस्टिस कौल ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह के सवाल बेतुके थे। जब चंद्रचूड़ ने सरकार के रुख को साझा किया तो जस्टिस कौल इतने नाराज हो गए कि उन्होंने फाइल बंद की और कॉलेजियम की बैठक से वॉकआउट कर दिया। बाद में सरकार ने अपना रुख बदला और उस जज की नियुक्ति हो गई।


    ‘रीढ़ की हड्डी’ वाले जजों का सम्मान करती है सरकार

    आत्मकथा में जस्टिस कौल ने लिखा, “मेरा अनुभव रहा है कि सरकार उन जजों का बहुत अधिक सम्मान करती है जिनमें रीढ़ की हड्डी यानी कि दृढ़ता होती है। जब न्यायपालिका मजबूती से अपनी बात रखती है तो सरकार को पीछे हटना पड़ता है।” उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का काम सरकार के साथ संतुलन बनाना है न कि विपक्ष की भूमिका निभाना। 2015 में रद्द किए गए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग पर उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को तुरंत खारिज करने के बजाय एक मौका दिया जाना चाहिए था।

    उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान मामले का भी जिक्र किया, जिसमें उनकी बेंच ने इस सौदे को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया था। उन्होंने लिखा, “जो लोग मौजूदा सरकार का विरोध करते हैं वे उम्मीद करते हैं कि अदालत उनकी मदद के लिए आगे आएगी। लेकिन अदालत का काम यह नहीं है।”


    जस्टिस चंद्रचूड़ क्या बोले?

    जस्टिस कौल के इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “मैंने अभी किताब नहीं पढ़ी है, इसलिए संदर्भ जाने बिना टिप्पणी करना कठिन है। हालांकि, मेरे कार्यकाल में कॉलेजियम की बैठकें बेहद सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई हैं। मुझे ऐसी किसी घटना की याद नहीं है जब जस्टिस कौल कॉलेजियम की बैठक से वॉकआउट कर गए हों। सरकार के साथ संवाद एक सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि जजों की नियुक्ति का वारंट राष्ट्रपति ही जारी करते हैं।”


    कॉलेजियम की कमियों पर सवाल

    जस्टिस कौल ने अपनी किताब में उस न्यायिक प्रणाली की भी आलोचना की है जिसमें उन्होंने 22 वर्षों तक सेवा दी। उन्होंने कॉलेजियम प्रणाली को अत्यधिक अपारदर्शी और कमियों से भरी बताया, जिसमें अनौपचारिक चैनलों के जरिए सरकारी दबाव की गुंजाइश बनी रहती है। इसके अलावा उन्होंने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में कुछ महत्वपूर्ण मामलों के उनके बेंच से हटाए जाने और वरिष्ठ अधिवक्ताओं के नामांकन को टाले जाने पर भी अपनी निराशा व्यक्त की है।

  • भारत से रियाद और दम्माम के लिए 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी उड़ानें… एअर इंडिया ने बढ़ाई अवधि

    भारत से रियाद और दम्माम के लिए 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी उड़ानें… एअर इंडिया ने बढ़ाई अवधि


    रियाद।
    पश्चिम एशिया (West Asia Tension) के संवेदनशील हालात के मद्देनजर भारत (India) से संचालित उड़ान सेवाओं को निलंबित रखने का फैसला लिया गया है। भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने शनिवार को बताया कि एअर इंडिया (Air India) और एअर इंडिया एक्सप्रेस (Air India Express) की रियाद और दम्माम आने-जाने वाली उड़ानें 7 नवंबर तक निलंबित रहेंगी। वहीं, जेद्दा के लिए दोनों एयरलाइंस की सेवाएं 31 अक्टूबर तक बंद रहेंगी।


    हवाई अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों से तनाव

    दूतावास की तरफ से जारी बयान के मुताबिक रियाद और दम्माम के लिए उड़ान सेवाओं का निलंबन जारी रहेगा, जबकि जेद्दा के लिए उड़ानें भी फिलहाल निर्धारित तिथि तक संचालित नहीं होंगी। यह फैसला सऊदी अरब में नागरिक बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से रियाद और दम्माम के हवाई अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों के मद्देनजर लिया गया है।


    उमराह यात्रियों की स्वदेश वापसी कैसे?

    इस बीच, भारत सरकार ने कहा कि सऊदी अरब में फंसे भारतीय उमराह यात्रियों की वापसी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास संबंधित एयरलाइंस और टूर ऑपरेटरों के संपर्क में हैं, ताकि यात्रियों की जल्द वापसी सुनिश्चित की जा सके।


    सरकार सऊदी में फंसे लोगों की मदद के लिए क्या कर रही है?

    नई दिल्ली में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में लगभग 3,000 फंसे हुए उमराह यात्री सऊदी अरब से भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा 10,000 से ज्यादा सामान्य उमराह यात्री भी भारत वापस आए हैं। उन्होंने कहा कि बाकी बचे यात्रियों की जल्द वापसी के लिए व्यवस्थाओं पर चर्चा जारी है। भारतीय दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार फंसे हुए लोगों के संपर्क में हैं और सामुदायिक स्वयंसेवकों के सहयोग से उनकी हर संभव मदद कर रहे हैं।


    भारतीयों के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम का संचालन

    विदेश मंत्रालय के अनुसार रियाद और जेद्दा में भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए 24 घंटे कंट्रोल रूम भी संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, जमीनी स्थिति की जानकारी देने के लिए नियमित सलाह (एडवाइजरी) जारी की जा रही है।


    तेल क्षेत्र और एयरपोर्ट पर हमले की चपेट में आए भारतीय

    बता दें कि भारत ने हाल ही में सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों की निंदा की थी। इनमें किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और अरामको के शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले शामिल हैं। दम्माम हवाई अड्डे पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य भारतीय घायल हुए थे। वहीं, शायबा तेल क्षेत्र पर हुए हमले में भी एक भारतीय नागरिक घायल हुआ था।

  • भारत घूमने आया कपल, ऑटो खरीद 75 दिन किया सफर, ऐसा भाया कि जहाज पर लादकर साथ ले गए ब्रिटेन

    भारत घूमने आया कपल, ऑटो खरीद 75 दिन किया सफर, ऐसा भाया कि जहाज पर लादकर साथ ले गए ब्रिटेन


    नई दिल्ली।
    भारत (India) घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक (Foreign tourists) आमतौर पर टैक्सी, बस या किराये की कार से सफर करते हैं. लेकिन ब्रिटेन (Britain) के हेलेन और मिक (Helen and Mick) ने अपना रास्ता खुद चुना. उन्होंने चेन्नई में एक लाल रंग का ऑटो रिक्शा खरीदा और उसे नाम दिया ‘टिम्मी द टिन कैन’।

    ऑटो का लुक भी काफी दिलचस्प है. उसके आगे कार्टून जैसी आंखें और मुस्कुराता हुआ चेहरा बना है. यह ऑटो तमिलनाडु के चेन्नई में रजिस्टर्ड है. ब्रिटिश कपल हेलेन और मिक के लिए धीरे-धीरे यह सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं रहा, बल्कि उनके सफर का सबसे खास साथी बन गया. जब वे भारत की यात्रा खत्म कर यूके (UK) पहुंचे, तो अपने साथ ऑटो को भी पानी के जहाज से लेकर चले गए।


    ऑटो से घूमे, सोशल मीडिया पर भी शेयर किया सफर

    हेलेन और मिक ने अपने इस लाल ऑटो के नाम से इंस्टाग्राम पर ‘timmy_the_tin_can’ अकाउंट बनाया. यहां वे सफर के वीडियो और तस्वीरें शेयर करने लगे. देखते ही देखते लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ने लगी. कपल के इस अकाउंट पर नौ हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. उनकी पोस्ट में कहीं सड़क पर दौड़ता टिम्मी नजर आता है, तो कहीं उसके साथ बिताए खास पलों की झलक मिलती है. भारत की सड़कों पर इस तरह ऑटो से घूमना उनके लिए एक अलग अनुभव रहा।


    राजस्थान से गोवा तक तय किया लंबा रास्ता

    कपल ने अपने ऑटो से भारत के अलग-अलग हिस्सों की सैर की. उनके सफर में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दक्षिण भारत की कई जगहें शामिल रहीं. वे आगरा पहुंचे और ताजमहल भी देखा. इसके अलावा गोवा के बीच तक भी अपने ऑटो से गए. इस दौरान उन्होंने करीब 4,218 किलोमीटर की दूरी तय की. पूरे सफर में टिम्मी उनके साथ रहा. कभी शहरों की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर, तो कभी लंबे रास्तों पर चलता यह ऑटो उनकी यात्रा की पहचान बन गया।


    भारत छोड़ते वक्त टिम्मी को अलविदा कहना मुश्किल

    किसी जगह घूमने के दौरान वहां की यादें साथ रह जाती हैं, लेकिन हेलेन और मिक के लिए भारत की यादों के साथ एक ऑटो भी जुड़ गया. कई हफ्तों तक साथ सफर करने के बाद टिम्मी उनके लिए महज एक गाड़ी नहीं रहा था. जब वापस ब्रिटेन जाने का वक्त आया, तो उसे भारत में छोड़कर जाना आसान नहीं लगा. ऐसे में कपल ने उसे अपने साथ यूके ले जाने का फैसला किया. इसके बाद ऑटो को समुद्री रास्ते से भेजने की तैयारी की गई।


    लकड़ी के बड़े क्रेट में पैक होकर पहुंचा लंदन

    टिम्मी को भारत से ब्रिटेन पहुंचाने के लिए समुद्री माल ढुलाई का सहारा लिया गया. करीब छह महीने की शिपिंग के बाद 23 अक्टूबर 2026 को ऑटो लंदन गेटवे पोर्ट पहुंचा. सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो में कपल लकड़ी के बड़े क्रेट से अपने लाल ऑटो को बाहर निकालते दिखाई देता है. इतने लंबे इंतजार के बाद टिम्मी को दोबारा सामने देखकर उनकी खुशी साफ झलकती है. अब यही वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    सीजन वन खत्म, अब ब्रिटेन की बारी
    कपल ने अपने पोस्ट में भारत के सफर को याद करते हुए बताया कि उनके लिए यह अनुभव काफी भावुक रहा. उन्होंने 75 दिनों में 4,218 किलोमीटर की यात्रा पूरी की और ऐसी यादें बनाईं, जिन्हें वे कभी नहीं भूलना चाहते. उनके मुताबिक, टिम्मी ने उनकी जिंदगी को एक अलग अनुभव दिया. अब उन्होंने अपने सफर के अगले हिस्से का इशारा भी कर दिया है. भारत में टिम्मी के साथ उनकी कहानी का पहला हिस्सा पूरा हो चुका है, जबकि अगला सफर ब्रिटेन में शुरू होने वाला है।


    एक ऑटो, हजारों किलोमीटर और ढेर सारी यादें

    हेलेन और मिक की कहानी में खास बात सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने भारत में ऑटो खरीदा और उसे विदेश ले गए. असल बात यह है कि सफर के दौरान एक साधारण-सा वाहन उनकी यात्रा का अहम हिस्सा बन गया. भारत की सड़कों पर बिताए दिन, अलग-अलग शहरों की झलक और रास्ते में बने अनुभव अब उनके साथ यूके तक पहुंच गए हैं. टिम्मी को अपने साथ ले जाकर कपल ने इन यादों को भी अपने पास रखने का इंतजाम कर लिया. अब सोशल मीडिया पर लोग उनके अगले सफर का इंतजार कर रहे हैं. देखना दिलचस्प होगा कि भारत में हजारों किलोमीटर घूम चुका यह लाल ऑटो ब्रिटेन की सड़कों पर कैसी कहानी लिखता है।

  • Travel in Winter Season: सर्दियों की छुट्टियों में इन जगहों की करें सैर और परिवार के साथ उठाएं यादगार सफर का आनंद

    Travel in Winter Season: सर्दियों की छुट्टियों में इन जगहों की करें सैर और परिवार के साथ उठाएं यादगार सफर का आनंद


    नई दिल्ली । सर्दियों का मौसम घूमने फिरने और नई जगहों को एक्सप्लोर करने के लिए काफी पसंद किया जाता है। ठंडी हवाएं खूबसूरत नजारे और छुट्टियों का माहौल सफर को यादगार बना देते हैं। इस मौसम में कोई बर्फ से ढके पहाड़ देखना चाहता है तो किसी को झीलों के किनारे सुकून के पल बिताना पसंद होता है। वहीं कुछ लोग ऐतिहासिक शहरों और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर जगहों पर घूमना पसंद करते हैं। अगर आप भी सर्दियों में छुट्टियां बिताने का प्लान बना रहे हैं तो भारत में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जहां मौसम के हिसाब से शानदार अनुभव मिल सकता है। हालांकि यात्रा की योजना बनाते समय मौसम सड़क की स्थिति और स्थानीय नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
    मनाली की बर्फीली वादियां
    हिमाचल प्रदेश का मनाली सर्दियों में घूमने के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां पहाड़ों की खूबसूरती देवदार के पेड़ और ठंडा मौसम पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। मौसम अनुकूल रहने पर आसपास के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी का आनंद भी लिया जा सकता है। सोलंग घाटी में पर्यटक बर्फ से जुड़ी गतिविधियों का अनुभव कर सकते हैं। हालांकि भारी बर्फबारी के दौरान रास्ते बंद हो सकते हैं इसलिए यात्रा से पहले स्थानीय मौसम और सड़क की जानकारी लेना जरूरी है। गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखना भी फायदेमंद रहेगा।
    शिमला में बिताएं सुकून के पल
    हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला सर्दियों में घूमने के लिए एक और लोकप्रिय जगह है। यहां की पहाड़ी सड़कें औपनिवेशिक दौर की इमारतें और मॉल रोड पर्यटकों को खास अनुभव देते हैं। परिवार के साथ घूमने या दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताने के लिए यह अच्छा विकल्प हो सकता है। बर्फबारी होने पर शहर का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है लेकिन बर्फ पड़ना हर दिन तय नहीं होता। इसलिए केवल बर्फ देखने की उम्मीद से यात्रा करने के बजाय यहां के दूसरे पर्यटन स्थलों को भी अपनी योजना में शामिल करें।
    कश्मीर की वादियों का आकर्षण
    सर्दियों में कश्मीर की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है। श्रीनगर की डल झील गुलमर्ग के पहाड़ और पहलगाम के प्राकृतिक नजारे सफर को यादगार बना सकते हैं। गुलमर्ग में मौसम अनुकूल रहने पर बर्फ से जुड़ी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। वहीं श्रीनगर में स्थानीय खानपान और बाजारों को करीब से जानने का मौका मिलता है। यहां जाने से पहले मौसम की स्थिति और यात्रा संबंधी सलाह जरूर जांचें क्योंकि बर्फबारी के कारण परिवहन प्रभावित हो सकता है।
    राजस्थान में सर्दियों की सैर
    अगर आपको ज्यादा ठंड पसंद नहीं है तो राजस्थान घूमने का अच्छा विकल्प हो सकता है। जयपुर उदयपुर और जैसलमेर जैसे शहर सर्दियों में घूमने के लिए आकर्षक माने जाते हैं। जयपुर में ऐतिहासिक किले और महल देखने का मौका मिलता है जबकि उदयपुर की झीलें और सुंदर इमारतें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। जैसलमेर में रेगिस्तान की सैर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनुभव लिया जा सकता है। दिन का मौसम अक्सर घूमने के लिए अनुकूल रहता है हालांकि रात में तापमान गिर सकता है।
    यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    सर्दियों में घूमने निकलने से पहले होटल और परिवहन की बुकिंग समय पर कर लें। गर्म कपड़े आरामदायक जूते और जरूरी दवाएं अपने साथ रखें। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोग मौसम की चेतावनी और सड़क बंद होने की जानकारी जरूर जांचें। वाहन से सफर करते समय कोहरे और फिसलन वाली सड़कों पर विशेष सावधानी बरतें। बजट तय करके चलना और यात्रा कार्यक्रम में थोड़ा अतिरिक्त समय रखना भी उपयोगी होगा। सही तैयारी के साथ सर्दियों की छुट्टियों को सुरक्षित और यादगार बनाया जा सकता है।