Author: bharati

  • रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप

    रिसर्च अब जमीन पर उतारने की तैयारी, भोपाल में आज ‘वन इंस्टीट्यूट-वन प्रॉमिस’ कॉन्क्लेव; 2047 के लिए बनेगा रोडमैप


    भोपाल। मध्यप्रदेश को वर्ष 2047 तक समृद्ध और विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार ने विशेषज्ञ संस्थानों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से 24 अगस्त को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 को लेकर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रदेश में मौजूद 130 से ज्यादा केंद्रीय, राज्य स्तरीय और निजी संस्थानों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। कॉन्क्लेव का सबसे खास हिस्सा वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस होगा, जिसमें प्रत्येक संस्थान मध्यप्रदेश के विकास में अपने स्तर पर एक ठोस योगदान का संकल्प देने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

    सरकार की कोशिश है कि प्रदेश में मौजूद IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO, केंद्रीय विश्वविद्यालयों और दूसरे विशेषज्ञ संस्थानों की विशेषज्ञता का इस्तेमाल सिर्फ अकादमिक और शोध गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रदेश की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक, कौशल विकास और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों के समाधान में इन संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग करने की योजना है।

    कॉन्क्लेव में सरकार के अलग-अलग विभाग अपनी प्राथमिकताएं और चुनौतियां विशेषज्ञ संस्थानों के सामने रखेंगे। इसके बाद संबंधित संस्थान अपने शोध, तकनीक, विशेषज्ञों और उपलब्ध संसाधनों के जरिए इन समस्याओं के समाधान की दिशा सुझाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार, शिक्षा संस्थानों, शोध संगठनों, उद्योग और नवाचार क्षेत्र के बीच ऐसा तालमेल तैयार करना है, जिससे भविष्य में संयुक्त परियोजनाएं विकसित की जा सकें और उनका लाभ प्रदेश की जनता तक पहुंच सके।

    इस कार्यक्रम में 59 केंद्रीय संस्थानों के अलावा 26 राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय, 11 शासकीय इंजीनियरिंग संस्थान, 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज, 8 राज्य स्तरीय शोध संस्थान और 9 चयनित निजी विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रस्तावित है। इनमें IIT इंदौर, IIM इंदौर, IISER भोपाल, MANIT भोपाल, AIIMS भोपाल, IIIT, NFSU भोपाल, RRCAT इंदौर, DRDO और ISRO जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। कृषि, चिकित्सा, प्रबंधन, रक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण, तकनीक और कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को भी इस पहल में शामिल किया गया है।

    कॉन्क्लेव में दोपहर 2 बजे से 3:45 बजे तक समावेशी आर्थिक विकास और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी। इस दौरान कृषि, उद्यानिकी, पर्यावरण, उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, MSME, नगरीय विकास, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, औद्योगिक विकास, जनजातीय कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग अपनी प्राथमिकताएं सामने रखेंगे। इसके बाद विशेषज्ञ संस्थानों के साथ समाधान और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा होगी।

    इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान और केंद्रीय संस्थानों के बीच होने वाले एमओयू भी होंगे। इन समझौतों के जरिए संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी समाधान, क्षमता निर्माण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए सहयोग का रास्ता तैयार किया जाएगा। यानी इसका तत्काल असर किसी नई सरकारी योजना के रूप में दिखाई देने के बजाय आने वाले समय में नई तकनीक, बेहतर नीतियों और शोध आधारित समाधानों के रूप में सामने आ सकता है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन भी होगा। इससे पहले केंद्रीय संस्थानों के प्रमुख मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद करेंगे। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल समृद्ध मध्यप्रदेश@2047 की विकास परिकल्पना पर मुख्य वक्तव्य देंगे। सरकार की कोशिश है कि 2047 के लक्ष्य को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न रखकर प्रदेश में मौजूद विशेषज्ञ संस्थानों को भी उसका सक्रिय साझेदार बनाया जाए। अब देखने वाली बात होगी कि वन इंस्टीट्यूट वन प्रॉमिस के तहत संस्थानों की ओर से सामने आने वाले संकल्प कितनी तेजी से जमीन पर उतरते हैं और उनका वास्तविक लाभ मध्यप्रदेश को किस रूप में मिलता है।

  • वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी

    वर्ग-1 शिक्षक भर्ती में दूसरी काउंसलिंग की मांग तेज, 24 से 26 अगस्त तक अंबेडकर पार्क में धरना देंगे अभ्यर्थी


    भोपालभोपाल में उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती 2023 के अभ्यर्थियों ने दूसरी काउंसलिंग और पदवृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। वेटिंग शिक्षक संघ वर्ग-1 भर्ती 2023 के बैनर तले अभ्यर्थी 24 से 26 अगस्त तक टीटी नगर स्थित अंबेडकर पार्क में तीन दिवसीय धरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक दूसरी काउंसलिंग शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    अभ्यर्थियों के मुताबिक उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा समेत चयन से जुड़े सभी चरण पूरे किए हैं। परिणाम आने और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद उन्हें नियुक्ति की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी काउंसलिंग नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। संघ का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर शासन और प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिए गए और अलग-अलग समय पर प्रदर्शन भी किए गए। हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है, जिससे दूसरी काउंसलिंग का रास्ता साफ हो सके।

    अभ्यर्थियों का सबसे बड़ा सवाल अमोल सोले प्रकरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले से जुड़ा है। संघ का दावा है कि दूसरी काउंसलिंग को SLP डायरी नंबर 14600/2025 का हवाला देकर रोका जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला करीब 11 अभ्यर्थियों से संबंधित है, ऐसे में इसके कारण हजारों पात्र और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चितकाल तक रोकना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि मामला सीमित संख्या में अभ्यर्थियों से जुड़ा है तो बाकी पात्र अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया आगे क्यों नहीं बढ़ाई जा रही है।

    संघ ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर यह मामला विभाग के लिए इतना महत्वपूर्ण है तो करीब डेढ़ साल के दौरान मुख्य पीठ के समक्ष इसकी प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित क्यों नहीं हो पाई। अभ्यर्थियों का कहना है कि कई बार सुनवाई की तारीख आने से पहले ही मामला आगे बढ़ जाता है और इस वजह से दूसरी काउंसलिंग का इंतजार और लंबा होता जा रहा है। उनका कहना है कि लगातार देरी के कारण हजारों युवाओं के रोजगार और भविष्य पर असर पड़ रहा है।

    वेटिंग शिक्षक संघ ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी की स्थिति लगातार बनी हुई है। दूसरी ओर पात्र और चयन प्रक्रिया से गुजर चुके अभ्यर्थी उपलब्ध हैं। ऐसे में वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया को लंबित रखने से केवल अभ्यर्थियों को ही नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। संघ का कहना है कि रिक्त पदों पर योग्य अभ्यर्थियों को मौका देकर शिक्षकों की जरूरत को पूरा किया जा सकता है।

    अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह और डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मामले में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि जब सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, योग्य अभ्यर्थी उपलब्ध हैं और दूसरी काउंसलिंग की मांग लंबे समय से की जा रही है, तो फिर फैसला लेने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

    वेटिंग शिक्षक संघ के अनुसार 24, 25 और 26 अगस्त को अंबेडकर पार्क, टीटी नगर में होने वाला धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। संघ ने प्रशासन से तीन दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति भी मांगी है। संगठन का कहना है कि आंदोलन के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासन की ओर से निर्धारित सभी नियमों का पालन किया जाएगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार पदवृद्धि के साथ जल्द से जल्द दूसरी काउंसलिंग शुरू करे, ताकि वर्षों से नियुक्ति की राह देख रहे पात्र शिक्षकों को रोजगार का अवसर मिल सके।

  • 4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना

    4 दिन से पानी तक नहीं पिया, तबीयत बिगड़ने पर भी पीछे नहीं हटे नरेंद्र; भोपाल में 25 हजार पद बढ़ाने की मांग पर धरना


    नई दिल्ली। भोपाल में वर्ग-2 माध्यमिक और वर्ग-3 प्राथमिक शिक्षक भर्ती 2025 में पदवृद्धि की मांग को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। नीलम पार्क में 21 अगस्त से जारी अनिश्चितकालीन धरने के बीच ब्यावरा निवासी अभ्यर्थी नरेंद्र राजपूत पिछले चार दिनों से निर्जल अनशन पर बैठे हैं। सोमवार रात करीब 3 बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत हुई, जिसके बाद धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। आंदोलनकारियों के मुताबिक पुलिस और प्रशासन की ओर से उन्हें अस्पताल ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन नरेंद्र ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

    नरेंद्र राजपूत का कहना है कि जब तक सरकार शिक्षक भर्ती में पदवृद्धि को लेकर कोई ठोस आदेश जारी नहीं करती, तब तक वह धरना स्थल से नहीं हटेंगे। उन्होंने मांग की है कि यदि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो धरना स्थल पर ही डॉक्टरों की टीम भेजकर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। आंदोलनकारियों का कहना है कि लगातार चार दिन तक भोजन और पानी नहीं लेने के कारण नरेंद्र की हालत कमजोर हो रही है और ऐसे में प्रशासन को तत्काल स्वास्थ्य व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।

    शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी लंबे समय से वर्ग-2 और वर्ग-3 में पद बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं, लेकिन भर्ती प्रक्रिया में पर्याप्त पद शामिल नहीं किए गए। इसके चलते पात्रता और चयन परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के बावजूद कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए हैं। आंदोलनकारी अब सरकार से पदों की संख्या बढ़ाने के साथ बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग कराने की मांग कर रहे हैं।

    अभ्यर्थियों की मांग है कि वर्ग-2 में प्रत्येक विषय के 3 हजार अतिरिक्त पद बढ़ाए जाएं, जबकि वर्ग-3 में कुल 25 हजार पद किए जाएं। उनका कहना है कि रिक्त पदों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर मिल सकता है। इसी मांग को लेकर प्रदेशभर के अभ्यर्थी भोपाल में जुटे हैं और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।

    इस आंदोलन में महिला अभ्यर्थियों की भी बड़ी भागीदारी है। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ नीलम पार्क में धरने पर बैठी हैं। इंदौर की दीप्ति सिंह ठाकुर अपनी 5 और 8 साल की बेटियों के साथ आंदोलन में शामिल हैं। वहीं सरोज कुशवाहा अपने छोटे बेटे माधव के साथ धरना स्थल पर मौजूद हैं। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि बच्चों के साथ पार्क में रहना बेहद मुश्किल हो रहा है। मच्छरों की समस्या, पानी और वॉशरूम की परेशानी के अलावा छोटे तालाब के पास होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसके बावजूद वे अपनी मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही हैं।

    पदवृद्धि की मांग को लेकर प्रदेशभर से अभ्यर्थी 21 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। डीपीआई के सामने प्रदर्शन और ज्ञापन देने के बाद अभ्यर्थियों ने रैली निकाली और नीलम पार्क पहुंचकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच भी कई चरणों में भोपाल में प्रदर्शन और धरने किए जा चुके हैं, लेकिन उनकी मांग पर अब तक ठोस निर्णय नहीं हुआ।

    अब नरेंद्र राजपूत की तबीयत बिगड़ने के बाद आंदोलन को लेकर प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई है। अभ्यर्थियों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर पदवृद्धि पर निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि वे किसी आश्वासन के बजाय लिखित आदेश चाहते हैं, ताकि बढ़े हुए पदों पर दूसरी काउंसलिंग शुरू हो सके और शिक्षक भर्ती में चयन से वंचित योग्य अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति का अवसर मिल सके।

  • सोमवार के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा: इन नियमों का रखें ध्यान, महादेव की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम

    सोमवार के दिन ऐसे करें भगवान शिव की पूजा: इन नियमों का रखें ध्यान, महादेव की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दिन भोलेनाथ की पूजा करने और व्रत रखने की विशेष धार्मिक मान्यता है। सावन के सोमवार के अलावा सामान्य सोमवार को भी भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और सुख शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। हालांकि शिव पूजा के दौरान कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि पूजा में विधि के साथ श्रद्धा और मन की शुद्धता का भी विशेष महत्व होता है। अगर आप सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने जा रहे हैं तो कुछ आसान नियमों को जरूर ध्यान में रखें।

    सोमवार की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थान को साफ करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। अगर घर में शिवलिंग है तो उसे साफ स्थान पर रखकर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। सबसे पहले शिवलिंग पर स्वच्छ जल अर्पित करें। अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार दूध से भी अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर दोबारा जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

    भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय माना जाता है। सोमवार की पूजा में साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखें कि वह गंदा या क्षतिग्रस्त न हो। इसके अलावा भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की भी धार्मिक परंपरा है। पूजा के दौरान चंदन अर्पित करें और धूप तथा दीप जलाएं। इसके बाद भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।

    सोमवार की पूजा में मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त शांत मन से ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा शिव चालीसा और भगवान शिव की स्तुति का पाठ भी किया जा सकता है। पूजा के दौरान जल्दबाजी करने के बजाय कुछ समय भगवान शिव के ध्यान में बिताना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    सोमवार के दिन कुछ चीजों से दूरी रखने की भी धार्मिक मान्यता है। पूजा के दौरान भगवान शिव को केतकी के फूल अर्पित नहीं किए जाते। इसी तरह शिवलिंग पर हल्दी और सिंदूर चढ़ाने की परंपरा सामान्य रूप से नहीं मानी जाती क्योंकि शिवलिंग की पूजा की अपनी विशिष्ट विधि है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए।

    अगर सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो भोजन को लेकर भी अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार नियम अपनाएं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ भक्त फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना और व्रत में मान्य अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवार की पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल भगवान शिव को प्रसन्न करना नहीं बल्कि मन को शांत और सकारात्मक बनाना भी है। इसलिए इस दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचने का प्रयास करें। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। भगवान शिव की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण चीज श्रद्धा है। इसलिए विधि के साथ सच्चे मन से महादेव का स्मरण करें और जीवन में सुख शांति तथा सकारात्मकता की कामना करें।

  • अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग

    अफसर पढ़ाएंगे, विशेषज्ञ देंगे गाइडेंस और फीस होगी जीरो, भोपाल में 50 युवाओं के लिए फ्री सिविल सर्विस कोचिंग


    नई दिल्ली। भोपाल में संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी MPPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर है। जिला प्रशासन की पहल पर आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए एक बार फिर नि:शुल्क कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही हैं। इस बार नए बैच में 50 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके लिए 24 अगस्त से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए हैं और आवेदन की प्रक्रिया 31 अगस्त तक चलेगी। विद्यार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

    निःशुल्क कोचिंग की शुरुआत 5 सितंबर से होगी। इस बार क्लासेस पॉलीटेक्निक चौराहा स्थित हिंदी भवन में आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर देना है, जो आर्थिक कारणों से महंगी निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा पाते। प्रशासन की इस पहल से UPSC और MPPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बिना फीस के पढ़ाई और मार्गदर्शन हासिल करने का मौका मिलेगा।

    इस फ्री कोचिंग में केवल किताबों और सामान्य अध्ययन तक सीमित तैयारी नहीं होगी, बल्कि विद्यार्थियों को अनुभवी लोगों और विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन भी मिलेगा। स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोग और कॉलेज के प्रोफेसर्स भी विद्यार्थियों को पढ़ाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन से जुड़े ऐसे अधिकारी, जिनकी पढ़ाने में रुचि है, वे भी नियमित रूप से क्लास लेंगे। अधिकारियों की ओर से रोजाना करीब एक से दो घंटे की कक्षाएं लेने की योजना है।

    कोचिंग में अलग-अलग विषयों की तैयारी के लिए विषय विशेषज्ञों को भी जोड़ा जाएगा। इससे विद्यार्थियों को परीक्षा के सिलेबस को समझने, जरूरी विषयों पर फोकस करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। प्रशासन की कोशिश है कि विद्यार्थियों को ऐसा शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जाए, जहां वे आर्थिक दबाव के बिना अपनी तैयारी को मजबूत कर सकें।

    भोपाल जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले इस तरह की नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद जरूरतमंद विद्यार्थियों के लिए यह पहल लगातार उपयोगी साबित हो रही है। इस बार भी नए बैच के जरिए अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देने की कोशिश की जा रही है। खास तौर पर उन छात्रों को इससे फायदा हो सकता है, जो प्रतिभाशाली होने के बावजूद कोचिंग की महंगी फीस के कारण अच्छे संस्थानों तक नहीं पहुंच पाते।

    इस नि:शुल्क कोचिंग का संचालन जिला प्रशासन भोपाल के मार्गदर्शन में आदर्श परिवार एवं आधुनिक नालंदा की ओर से पं. रविशंकर शुक्ल न्यास के सहयोग से किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थी रजिस्ट्रेशन और प्रवेश से जुड़ी जानकारी के लिए 8357835433 और 9584732481 नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और जरूरी जानकारी भी इन्हीं माध्यमों से प्राप्त की जा सकती है।

    UPSC और MPPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए यह मौका खास है, क्योंकि सीमित सीटों के कारण केवल 50 छात्रों को ही इस बैच में जगह मिलेगी। ऐसे में इच्छुक विद्यार्थियों को रजिस्ट्रेशन की अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। 5 सितंबर से हिंदी भवन में शुरू होने वाली यह पहल उन युवाओं के लिए उम्मीद की नई राह बन सकती है, जो प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखते हैं लेकिन संसाधनों की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।

  • त्योहारी सीजन में बढ़ी मावे की मांग, खरीदारी से पहले रंग, खुशबू और बनावट देखकर ऐसे करें गुणवत्ता की शुरुआती पहचान

    त्योहारी सीजन में बढ़ी मावे की मांग, खरीदारी से पहले रंग, खुशबू और बनावट देखकर ऐसे करें गुणवत्ता की शुरुआती पहचान

    नई दिल्ली ।त्योहारों का मौसम शुरू होते ही मिठाइयों और उनसे जुड़े खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने लगती है। इस दौरान मावे का इस्तेमाल बड़ी मात्रा में किया जाता है, क्योंकि कई पारंपरिक मिठाइयों में यह प्रमुख सामग्री होती है। मांग बढ़ने के साथ बाजार में घटिया या मिलावटी मावे की बिक्री की आशंका भी बढ़ सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए मावा खरीदते समय सावधानी बरतना जरूरी हो जाता है।

    मावा खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग और बनावट पर ध्यान दिया जा सकता है। सामान्य तौर पर अच्छी गुणवत्ता वाला मावा हल्के क्रीम या सफेद रंग का दिखाई देता है और उसकी बनावट अपेक्षाकृत नरम होती है। यदि मावा जरूरत से ज्यादा चमकदार, असामान्य रूप से सफेद या बहुत अलग रंग का नजर आए तो सावधानी बरतनी चाहिए।

    मावे को हल्के हाथ से दबाकर उसकी बनावट का शुरुआती अंदाजा भी लगाया जा सकता है। यदि वह बहुत ज्यादा रबड़ जैसा, असामान्य रूप से सख्त या बनावट में अलग महसूस हो तो उसे खरीदने से पहले अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। हालांकि केवल रंग और बनावट देखकर मावे को पूरी तरह असली या नकली घोषित नहीं किया जा सकता।

    मावे की खुशबू भी शुरुआती जांच में मदद कर सकती है। सामान्य मावे में दूध जैसी हल्की और प्राकृतिक गंध होती है। यदि उसमें तेज रासायनिक, साबुन जैसी या दूसरी असामान्य गंध महसूस हो तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है। हालांकि खुशबू भी गुणवत्ता की अंतिम पुष्टि का आधार नहीं है।

    यदि किसी विश्वसनीय दुकान पर मावा चखने की अनुमति हो तो बहुत थोड़ी मात्रा से स्वाद का अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्य मावे में दूध जैसा स्वाद और हल्की प्राकृतिक मिठास रहती है। कड़वा, साबुन जैसा या किसी अन्य तरह का असामान्य स्वाद मिलने पर उसे नहीं खरीदना चाहिए। बहुत अधिक मीठा स्वाद भी सावधानी का संकेत हो सकता है।

    मावे में स्टार्च जैसी मिलावट की शुरुआती जांच के लिए आयोडीन आधारित घरेलू परीक्षण का इस्तेमाल किया जाता है। थोड़े से मावे को पानी के साथ गर्म करने के बाद ठंडा किया जा सकता है और फिर आयोडीन की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। मिश्रण का रंग नीला या नीला-काला होने पर उसमें स्टार्च मौजूद होने की संभावना हो सकती है। यह केवल प्रारंभिक संकेत है, इसे मिलावट का पक्का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

    मावा खरीदते समय उसकी कीमत पर भी ध्यान देना जरूरी है। यदि कोई उत्पाद बाजार की सामान्य कीमत की तुलना में असामान्य रूप से सस्ता मिल रहा है तो उसकी गुणवत्ता को लेकर सतर्क रहना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए कि मावा भरोसेमंद दुकान या डेयरी से ही खरीदा जाए।

    पैक्ड मावा खरीदते समय पैकेट की पैकिंग, तारीख और उत्पाद से जुड़ी जरूरी जानकारी अवश्य देखनी चाहिए। पैकेट फटा हुआ हो या उत्पाद की स्थिति संदिग्ध लगे तो उसे खरीदने से बचना बेहतर है। किसी भी तरह का संदेह होने पर मावे का सेवन न करना ही सुरक्षित विकल्प है।

    त्योहारों के दौरान मिठाइयों और मावे की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं की सावधानी सबसे महत्वपूर्ण है। घरेलू तरीकों से केवल शुरुआती संकेत मिल सकते हैं, जबकि किसी खाद्य पदार्थ की वास्तविक मिलावट की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच अधिक विश्वसनीय मानी जाती है। इसलिए खरीदारी में गुणवत्ता, स्रोत और पैकेजिंग को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम

    सावन का चौथा सोमवार आज: शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या न करें, जानें पूजा विधि और व्रत के खास नियम


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पवित्र महीने में आने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। सावन के चौथे सोमवार पर शिव भक्त सुबह से ही भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना और अभिषेक में जुट जाते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन सच्चे मन से भगवान शिव का जलाभिषेक करने और व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन मंदिर में जाकर शिवलिंग का अभिषेक करना और शिव मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। यदि आप भी सावन के चौथे सोमवार का व्रत रख रहे हैं तो पूजा के दौरान कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। संभव हो तो घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित करके पूजा करें या किसी शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का दर्शन करें। शिवलिंग पर सबसे पहले स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार दूध से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद दोबारा जल अर्पित करें।

    भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर साफ और साबुत बेलपत्र अर्पित करें। इसके साथ धतूरा और आक के फूल चढ़ाने की भी परंपरा है। भगवान शिव को सफेद फूल अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान चंदन लगाएं और धूप दीप जलाकर महादेव की आरती करें। इसके बाद भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। ॐ नमः शिवाय का जाप सावन सोमवार के दिन विशेष रूप से किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिव चालीसा और शिव स्तुति का पाठ भी कर सकते हैं।

    सावन सोमवार के व्रत में खानपान का विशेष ध्यान रखा जाता है। कुछ भक्त पूरे दिन निराहार रहकर व्रत करते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। फल दूध दही मखाना और व्रत में स्वीकार्य खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। व्रत हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक भूखा रहने में परेशानी होती है तो वह अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन सोमवार के दिन केवल पूजा करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार को भी सात्विक रखना चाहिए। इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक विचारों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान भगवान शिव से परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना करें।

    सावन के चौथे सोमवार पर भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और विश्वास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं। इसलिए पूजा में दिखावे के बजाय मन की शुद्धता और भक्ति भावना को महत्व दें। ध्यान रखें कि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा और व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा।

  • हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप

    हथकड़ी में नजर आया इंग्लैंड का स्टार तेज गेंदबाज, पुलिस ले गई थाने, मचा हड़कंप


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ब्राइडन कार्स से जुड़ी एक घटना ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में डरहम के इस तेज गेंदबाज को डर्बी स्थित एक क्लब के बाहर पुलिस अधिकारियों के साथ हथकड़ी में जाते देखा गया। पुलिस शनिवार रात हुई एक घटना के सिलसिले में मामले की जांच कर रही है।

    इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) ने रविवार को घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि उसे डर्बी में हुई घटना की जानकारी है और मामले की जांच की जा रही है। बोर्ड ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद जरूरत के मुताबिक आगे की जानकारी साझा की जाएगी।

    पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट की टीम में हैं कार्स

    ब्राइडन कार्स इंग्लैंड की उस टीम का हिस्सा हैं, जिसे पाकिस्तान के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में उतरना है। हालांकि, पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट के लिए टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली थी।

    फिलहाल ECB ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि पुलिस जांच के बावजूद कार्स दूसरे टेस्ट के लिए इंग्लैंड की टीम में बने रहेंगे या नहीं।

    इंग्लैंड टीम के अनुशासन पर पहले भी उठे सवाल

    कार्स के खिलाफ जांच ऐसे समय शुरू हुई है, जब इंग्लैंड की टेस्ट टीम में खिलाड़ियों के मैदान से बाहर के व्यवहार और अनुशासन को लेकर चर्चा चल रही है। टेस्ट कप्तान जो रूट ने हाल ही में खिलाड़ियों के जिम्मेदार व्यवहार और अच्छे रोल मॉडल बनने पर जोर दिया था।

    रूट ने एक क्रिकेट पॉडकास्ट में कहा था कि टीम में खिलाड़ियों पर कोई सख्त कर्फ्यू लागू नहीं किया जाएगा, लेकिन उनसे मैदान के बाहर भी समझदारी और जिम्मेदारी से फैसले लेने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा था कि इंग्लैंड के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों को अपनी मैदान के बाहर की जिम्मेदारियों का भी एहसास होना चाहिए।

    बेन स्टोक्स भी तोड़ चुके हैं टीम प्रोटोकॉल

    इंग्लैंड की टीम में अनुशासन को लेकर इस साल जून में भी विवाद हुआ था। पूर्व कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर टीम के प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने का मामला सामने आया था। इसके बाद दोनों को ओवल में न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया गया था।

    बाद में स्टोक्स ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया, जबकि ब्रेंडन मैकुलम ने टेस्ट कोच का पद छोड़ दिया। ऐसे में ब्राइडन कार्स से जुड़ी ताजा घटना ने इंग्लैंड की टीम के अनुशासन और खिलाड़ियों के व्यवहार को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक

    गोलन हाइट्स पर पहले इजरायल को 'कब्जाधारी' बताया, फिर पलटे अमेरिकी राजदूत टॉम बराक


    नई दिल्ली। गोलन हाइट्स को लेकर अमेरिकी राजदूत टॉम बराक के बयान से नया विवाद खड़ा हो गया है। बराक ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा था कि इजरायल अब भी गोलन हाइट्स पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के खिलाफ है। उनका यह बयान अमेरिका की मौजूदा नीति से अलग माना गया, क्योंकि 2019 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। विवाद बढ़ने के बाद बराक ने रविवार को सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    बराक ने लेबनानी-ऑस्ट्रेलियाई कारोबारी और पत्रकार मारियो नौफल को दिए इंटरव्यू में गोलन हाइट्स का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि इजरायल अभी भी इस इलाके पर कब्जा किए हुए है और यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के अनुरूप नहीं है।

    1967 में इजरायल ने किया था कब्जा

    गोलन हाइट्स सीरिया का रणनीतिक क्षेत्र है। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध के दौरान इजरायल ने इस इलाके पर कब्जा कर लिया था। 1981 में इजरायल ने इसे अपने में मिला लिया, लेकिन संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश आज भी इस कदम को मान्यता नहीं देते।

    अमेरिका का रुख हालांकि अलग रहा है। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स पर इजरायल की संप्रभुता को मान्यता दी थी। यह इस मुद्दे पर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव था।

    विवाद बढ़ा तो बराक ने दी सफाई

    गोलन हाइट्स को लेकर दिए बयान के बाद अमेरिकी राजदूत सवालों के घेरे में आ गए। इजरायल की ओर से भी उनके बयान पर आपत्ति जताई गई। इसके बाद रविवार को बराक ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का मतलब संयुक्त राष्ट्र के रुख का समर्थन करना नहीं था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, बराक ने कहा कि 2019 में ट्रंप ने गोलन हाइट्स को लेकर जो अमेरिकी नीति तय की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि वह गोलन हाइट्स का उदाहरण दक्षिणी लेबनान की स्थिति को समझाने के लिए दे रहे थे। उनका कहना था कि बातचीत के जरिए हुए समझौते केवल नक्शे बदलने की तुलना में ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

    अमेरिकी सांसद और इजरायल ने जताई आपत्ति

    बराक के बयान पर रिपब्लिकन सीनेटर रिक स्कॉट ने भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी राजदूत ट्रंप के उस फैसले को भूल गए हैं, जिसमें गोलन हाइट्स को इजरायल का हिस्सा माना गया था।

    इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने भी बराक के बयान का विरोध किया और इसे ट्रंप की नीति के बिल्कुल विपरीत बताया।

    सीरिया एयरबेस पर भी बयान से विवाद

    टॉम बराक इसी इंटरव्यू में सीरिया के एक एयरबेस पर इजरायली हमले की आलोचना को लेकर भी चर्चा में आए। इजरायल ने मंगलवार को एयरबेस पर हमला किया था। उसका कहना था कि वह सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी को रोकने के लिए की गई कार्रवाई थी।

    रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने रविवार को इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि इजरायल सीरिया में तुर्की की ऐसी सैन्य मौजूदगी स्वीकार नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो।

    हिजबुल्लाह पर भी देनी पड़ी सफाई

    बराक का एक अन्य बयान भी विवाद का कारण बना। उन्होंने इजरायल-लेबनान मुद्दे पर कहा था कि बातचीत की मेज से हिजबुल्लाह और ईरान गायब हैं। इसके बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि वह दोनों को वार्ता में शामिल करने की बात कर रहे हैं।

    हालांकि, बराक ने बाद में स्पष्ट किया कि अमेरिका हिजबुल्लाह से बातचीत नहीं करता। उनका मकसद केवल यह बताना था कि इजरायल-लेबनान का मुद्दा जटिल है, क्योंकि हिजबुल्लाह को हथियार और आर्थिक मदद ईरान से मिलती है।

  • अरंडी का तेल बालों और त्वचा की देखभाल में कैसे मदद करता है, जानिए इसके संभावित फायदे और जरूरी सावधानियां

    अरंडी का तेल बालों और त्वचा की देखभाल में कैसे मदद करता है, जानिए इसके संभावित फायदे और जरूरी सावधानियां

    नई दिल्ली ।अरंडी का तेल लंबे समय से घरेलू और पारंपरिक देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह अरंडी के बीजों से निकाला जाता है और सामान्य तौर पर गाढ़ा तथा हल्के पीले रंग का होता है। इसमें मौजूद फैटी एसिड और अन्य घटक इसे त्वचा और बालों की देखभाल के लिए उपयोग किए जाने वाले तेलों में शामिल करते हैं। हालांकि, प्राकृतिक उत्पाद होने का मतलब यह नहीं है कि यह हर व्यक्ति की त्वचा या बालों के लिए समान रूप से उपयुक्त होगा।

    बालों की देखभाल में अरंडी के तेल का इस्तेमाल खासतौर पर सूखे और बेजान बालों के लिए किया जाता है। इसकी गाढ़ी बनावट बालों और स्कैल्प पर नमी बनाए रखने में मदद कर सकती है। इससे बालों को मुलायम महसूस कराने और उनमें चमक लाने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, इसे बालों की तेज ग्रोथ कराने वाले निश्चित उपचार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

    अरंडी का तेल सीधे लगाने पर कुछ लोगों को काफी गाढ़ा लग सकता है। इसलिए इसे नारियल या बादाम जैसे हल्के तेल के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना सुविधाजनक रहता है। तेल को बालों और स्कैल्प पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। मसाज करते समय बहुत अधिक दबाव डालने से बचना चाहिए। इस्तेमाल की मात्रा बालों की लंबाई और जरूरत के अनुसार रखी जा सकती है।

    त्वचा की देखभाल में भी अरंडी के तेल का उपयोग किया जाता है। इसमें मौजूद रिसिनोलिक एसिड त्वचा को नमी प्रदान करने में मदद कर सकता है। खासतौर पर शरीर के ऐसे हिस्सों पर इसे लगाया जाता है जहां रूखापन अधिक महसूस होता है। हाथ, पैर और अन्य सूखे हिस्सों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाने से त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

    सर्दियों या कम नमी वाले मौसम में त्वचा का रूखापन बढ़ सकता है। ऐसे समय में कुछ लोग अरंडी के तेल को मॉइस्चराइजिंग देखभाल के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, तैलीय या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इसे चेहरे पर लगाने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकती है।

    फटी एड़ियों की घरेलू देखभाल में भी अरंडी का तेल इस्तेमाल किया जाता है। रात में पैरों को साफ करके एड़ियों पर थोड़ी मात्रा में तेल लगाया जा सकता है। इसके बाद मोजे पहनने से तेल त्वचा के संपर्क में अधिक समय तक रह सकता है। इससे सूखी त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन गहरी दरार, रक्तस्राव या संक्रमण होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

    अरंडी का तेल इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना एक जरूरी सावधानी है। त्वचा के छोटे हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। लालिमा, खुजली, जलन या सूजन जैसी परेशानी होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए। आंखों और शरीर के संवेदनशील हिस्सों के संपर्क से भी इसे बचाना जरूरी है।

    अरंडी के तेल को त्वचा या बालों की देखभाल में सीमित और उचित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके संभावित लाभ मुख्य रूप से नमी बनाए रखने और त्वचा तथा बालों को मुलायम महसूस कराने से जुड़े हैं। किसी गंभीर त्वचा समस्या, संक्रमण या लगातार बालों से जुड़ी परेशानी में घरेलू तेलों को उपचार का विकल्प मानने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना अधिक उचित रहता है।