Author: bharati

  • सियासी लड़ाई ने लिया पारिवारिक विवाद का रूप: इमरान मसूद के दामाद पर मारपीट के आरोप, शायान बोले मैदान में आकर लड़ो

    सियासी लड़ाई ने लिया पारिवारिक विवाद का रूप: इमरान मसूद के दामाद पर मारपीट के आरोप, शायान बोले मैदान में आकर लड़ो


    सहारनपुर सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के परिवार का राजनीतिक विवाद अब पारिवारिक कलह तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार के भीतर चल रही तनातनी खुलकर सामने आ गई है। शनिवार को इमरान मसूद के भतीजे हमजा नोमान मसूद ने फेसबुक लाइव के जरिए अपने बहनोई शायान मसूद और उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाए। हमजा ने दावा किया कि उनकी बहन सुबिया मसूद के साथ मारपीट और गाली गलौज की गई तथा उन्हें घर से निकाल दिया गया। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    हमजा नोमान मसूद का कहना है कि परिवार पिछले करीब पांच वर्षों से कई बातों को रिश्तेदारी और परिवार की प्रतिष्ठा के चलते नजरअंदाज करता रहा। उनका आरोप है कि उनकी बहन के साथ लगातार ज्यादती होती रही और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि चुप रहना संभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके पास घर के भीतर हुई बातचीत से जुड़ी कई रिकॉर्डिंग और वीडियो मौजूद हैं। हमजा ने चेतावनी दी कि अगर विवाद आगे बढ़ता रहा तो वह इन रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक कर सकते हैं।

    हमजा ने राजनीतिक कारणों से भी अपनी बहन को परेशान किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि परिवार ने लंबे समय तक रिश्ते बचाने की कोशिश की लेकिन अब उनकी बहन और उसके छोटे बच्चे की जिम्मेदारी उनका परिवार उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शायान ने बच्चे की जरूरतों के लिए भी आर्थिक मदद नहीं की। हमजा ने कहा कि उनकी बहन को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है और परिवार उसके साथ मजबूती से खड़ा है।

    हमजा ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि उनके पास ऐसी बातचीत और रिकॉर्डिंग हैं जिनमें उन्हें और उनके चाचा इमरान मसूद को राजनीतिक रूप से रास्ते से हटाने जैसी बातें कही गईं। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई रिकॉर्डिंग पेश नहीं की है। उनका कहना है कि वह अब तक परिवार की गरिमा बनाए रखने के लिए चुप रहे लेकिन लगातार हो रही बयानबाजी के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    दूसरी तरफ शायान मसूद ने इन आरोपों के जवाब में इसे राजनीतिक विवाद से जोड़ते हुए हमजा को चुनौती दी। उनका कहना है कि अगर राजनीतिक लड़ाई लड़नी है तो राजनीतिक मैदान में आकर मुकाबला किया जाए। शायान ने कहा कि वह परिवार की निजी बातें सार्वजनिक करके विवाद को और बढ़ाना नहीं चाहते। उन्होंने दावा किया कि उनके पास भी बहुत कुछ कहने के लिए है लेकिन वह परिवार के भीतर की बातों को सार्वजनिक करना उचित नहीं समझते।

    दरअसल यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब शायान मसूद ने 20 अगस्त को कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। सपा में शामिल होने के बाद शायान ने इमरान मसूद की राजनीतिक रणनीति पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई जरूरी है और अखिलेश यादव के खिलाफ बोलने से भाजपा को फायदा पहुंचता है।

    अब शायान के सपा में जाने के बाद शुरू हुआ राजनीतिक मतभेद परिवार के निजी विवाद तक पहुंच गया है। एक तरफ शायान इसे राजनीतिक मुकाबला बता रहे हैं तो दूसरी तरफ हमजा परिवार के भीतर गंभीर आरोपों को सार्वजनिक कर रहे हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप और दावे सामने हैं और मामले में लगाए गए पारिवारिक आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

  • यूपी में आसमान से आफत और नदियों का रौद्र रूप: बांध ओवरफ्लो, गांवों में घुसा पानी, आज 71 जिलों में बारिश का अलर्ट

    यूपी में आसमान से आफत और नदियों का रौद्र रूप: बांध ओवरफ्लो, गांवों में घुसा पानी, आज 71 जिलों में बारिश का अलर्ट


    उत्तर प्रदेशउत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं जबकि 92 गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं। 26 गांव ऐसे हैं जो चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुके हैं। इन गांवों को आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़कें डूब जाने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव और मोटर बोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

    बाढ़ और बारिश के बीच उन्नाव से सामने आया एक मामला बेहद चिंता बढ़ाने वाला है। गंगाघाट में गंगा स्नान के दौरान दो बच्चियां अचानक नदी में डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए उनके पिता भी नदी में कूद गए लेकिन तेज बहाव के कारण वह भी मुश्किल में फंस गए। इसी दौरान वहां मौजूद एक पंडा ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी और काफी मशक्कत के बाद पिता और दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने एक बार फिर उफनती नदियों में स्नान के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।

    प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दारागंज घाट की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए लोगों को सड़कों और ऊंचे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की स्थिति गंभीर हो गई है। अस्सी घाट पर होने वाला सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम का मंच पानी में डूब गया है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी तक पानी पहुंच चुका है और घाट की कई सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। घाट किनारे मौजूद कई मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।

    झांसी में बेतवा नदी पर बना बांध इस सीजन में पहली बार ओवरफ्लो हो गया है। करीब 140 साल पुराने पारीछा बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जबकि संतकबीर नगर में 20 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां नौ सरकारी स्कूलों के परिसरों में भी पानी पहुंच गया है। कानपुर के निचले इलाकों में पांडू नदी का पानी घुसने से करीब दो हजार लोग प्रभावित हुए हैं। आजमगढ़ में भी कई प्रमुख इलाकों की गलियां जलभराव से परेशान हैं।

    रविवार को प्रयागराज गोरखपुर मेरठ बहराइच समेत करीब 20 शहरों में तेज बारिश हुई। शाहजहांपुर में सुबह घना कोहरा छाया रहा और दृश्यता 50 मीटर से भी कम हो गई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण हवा में नमी बढ़ने और रात के तापमान में गिरावट से कोहरे की स्थिति बनी।

    मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के 71 जिलों में गरज चमक के साथ बारिश होने का अलर्ट है जबकि 12 जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक मानसूनी सिस्टम के उत्तर की ओर सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाओं के लगातार आने के कारण अगले एक दो दिन बारिश में तेजी बनी रह सकती है। 25 अगस्त से पश्चिमी हवाओं के प्रभाव में बदलाव आने की संभावना है जिससे पश्चिमी और मध्य यूपी में भारी बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।

    ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने और उफनती नदियों तथा जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • समुद्र के रास्ते भारत की दोस्ती का संदेश, लिस्बन पहुंचा INS सुदर्शिनी; जानिए क्यों खास है ‘लोकायन 2026’ अभियान

    समुद्र के रास्ते भारत की दोस्ती का संदेश, लिस्बन पहुंचा INS सुदर्शिनी; जानिए क्यों खास है ‘लोकायन 2026’ अभियान


    नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का पाल प्रशिक्षण पोत आईएनएस सुदर्शिनी अपनी लंबी समुद्री यात्रा लोकायन 2026 के तहत पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन पहुंच गया है। तीन मस्तूलों और पारंपरिक पालों से सुसज्जित यह पोत टैगस नदी के रास्ते लिस्बन पहुंचा और इस दौरान पारंपरिक नौकायन तथा समुद्री कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। आधुनिक दौर में जब नौसैनिक अभियानों में अत्याधुनिक तकनीक और मशीनों का दबदबा है ऐसे समय में आईएनएस सुदर्शिनी भारत की पुरानी समुद्री परंपराओं और नौकायन कौशल की झलक दुनिया के सामने पेश कर रहा है। इसकी यात्रा को केवल एक प्रशिक्षण अभियान के तौर पर नहीं देखा जा रहा बल्कि इसके जरिए भारत अलग अलग देशों के साथ दोस्ती सहयोग और आपसी समझ का संदेश भी पहुंचा रहा है।

    भारतीय नौसेना के अनुसार लिस्बन आईएनएस सुदर्शिनी की सात महीने लंबी समुद्री यात्रा का 15वां बंदरगाह पड़ाव है। इस लंबे अभियान के दौरान पोत कई देशों के बंदरगाहों तक पहुंच रहा है। हर पड़ाव पर भारतीय नौसेना के अधिकारी चालक दल और प्रशिक्षण ले रहे कैडेट स्थानीय नौसेना तथा प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इस पूरी यात्रा का उद्देश्य समुद्री प्रशिक्षण के साथ भारत की समुद्री विरासत और मित्रता की भावना को दुनिया तक पहुंचाना है। लिस्बन में पोत की मौजूदगी भारत और पुर्तगाल के बीच पुराने समुद्री संबंधों को भी नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।

    आईएनएस सुदर्शिनी पर तैनात प्रशिक्षु नौसैनिकों के लिए यह यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। खुले समुद्र में लंबी दूरी तय करने के दौरान उन्हें समुद्र की बदलती परिस्थितियों को समझने और चुनौतीपूर्ण वातावरण में काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलता है। पारंपरिक पालों के जरिए नौकायन करना उनके प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे उन्हें हवा की दिशा समुद्री परिस्थितियों और जहाज के संतुलन जैसी कई बारीकियों को करीब से समझने का मौका मिलता है। इस तरह यह पोत आधुनिक नौसैनिक प्रशिक्षण के साथ पारंपरिक समुद्री कौशल को भी जीवित रखने का काम कर रहा है।

    लिस्बन पहुंचने के बाद आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और कैडेट पुर्तगाली नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों स्थानीय प्रशासन और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर अनुभव साझा किए जाएंगे। जहाजों का पारस्परिक निरीक्षण और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों का मकसद दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी समझ और सहयोग को मजबूत करना है।

    लोकायन 2026 की सबसे खास बात यही है कि यह समुद्री प्रशिक्षण के साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूत करने का माध्यम बन रहा है। आईएनएस सुदर्शिनी जब अलग अलग देशों के बंदरगाहों पर पहुंचता है तो वहां भारतीय समुद्री परंपरा की झलक दिखाई देती है और साथ ही भारत की मित्रता तथा सहयोग की भावना भी सामने आती है। लिस्बन में इसका पहुंचना इसी व्यापक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    तीन मस्तूलों वाला यह पाल पोत आज भारत की समुद्री विरासत का प्रतीक बनकर दुनिया के सामने मौजूद है। एक ओर यह नौसेना के युवा कैडेटों को समुद्र की वास्तविक चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है तो दूसरी ओर भारत के वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को भी आगे बढ़ा रहा है। लोकायन 2026 के तहत इसकी यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे भारत की समुद्री मित्रता और सहयोग का संदेश दुनिया के नए हिस्सों तक पहुंचता रहेगा।

  • टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास

    टीम इंडिया को मिला नया शतकवीर, देवदत्त पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट में सेंचुरी लगाकर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने एक बार फिर अपने बल्ले का दम दिखाते हुए लगातार दूसरा शतक जड़ दिया। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने शानदार धैर्य और बेहतरीन तकनीक का परिचय देते हुए 168 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही पडिक्कल ने विदेशी धरती पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। इससे पहले गाले में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट में भी उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेली थी और अब कोलंबो में भी अपने प्रदर्शन को दोहराकर टीम इंडिया के लिए बड़ी पारी खेली है।

    पडिक्कल ने कोलंबो टेस्ट में 193 गेंदों का सामना करते हुए 117 रन बनाए। उनकी पारी में 12 शानदार चौके शामिल रहे। उनकी बल्लेबाजी की खास बात यह रही कि उन्होंने शुरुआत से ही श्रीलंकाई गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास के साथ बल्लेबाजी की और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना विकेट संभालकर रखा। इससे पहले गाले टेस्ट में पडिक्कल ने 167 रन की शानदार पारी खेली थी। उनकी उस पारी की बदौलत भारतीय टीम ने पहला टेस्ट 165 रन से अपने नाम किया था। अब दूसरे टेस्ट में भी शतक लगाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि उनका पिछला प्रदर्शन महज संयोग नहीं था।

    लगातार दो टेस्ट में शतक लगाने की उपलब्धि ने पडिक्कल को भारतीय क्रिकेट के एक खास क्लब में पहुंचा दिया है। साल 2018-19 के बाद विदेशी जमीन पर लगातार दो टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले वह पहले भारतीय बल्लेबाज हैं। उनसे पहले चेतेश्वर पुजारा ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी के दौरान यह उपलब्धि हासिल की थी। पुजारा ने मेलबर्न टेस्ट में 106 और सिडनी टेस्ट में 193 रन की शानदार पारियां खेली थीं। अब पडिक्कल ने भी लगातार दो विदेशी टेस्ट में शतक लगाकर इस खास रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है।

    कोलंबो टेस्ट में भारतीय टीम की शुरुआत हालांकि उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम इंडिया को शुरुआती झटका केएल राहुल के रूप में लगा। राहुल केवल 18 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद यशस्वी जायसवाल और पडिक्कल ने पारी को संभालने की कोशिश की। जायसवाल ने 45 रन की उपयोगी पारी खेली लेकिन असिथा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए।

    इसके बाद पडिक्कल ने कप्तान शुभमन गिल के साथ मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए 120 रन की शानदार साझेदारी हुई। गिल ने भी अर्धशतक जमाते हुए 50 रन बनाए लेकिन फर्नांडो की गेंद पर विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। दूसरी तरफ पडिक्कल लगातार क्रीज पर डटे रहे और अपने शतक तक पहुंचकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।

    भारतीय टीम ने इस मुकाबले में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका दिया है। कुलदीप संक्रमण के कारण मुकाबले के लिए उपलब्ध नहीं थे। सारांश जैन इसी मुकाबले से टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण कर रहे हैं। वहीं भारत की नजर अब दूसरे टेस्ट में बड़ी पहली पारी का स्कोर खड़ा करने और सीरीज पर कब्जा मजबूत करने पर है। इस बीच पडिक्कल की लगातार दूसरी शतकीय पारी टीम इंडिया के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक खबर बनकर सामने आई है।

  • दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास

    दीप्ति शर्मा की कहानी: भक्ति से ताकत और क्रिकेट में कमाल, विश्व कप फाइनल में ऑलराउंड प्रदर्शन से रचा इतिहास


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सफलता की कहानी जब भी लिखी जाएगी तो उसमें दीप्ति शर्मा का नाम बेहद खास अंदाज में दर्ज होगा। गेंद और बल्ले दोनों से टीम के लिए मैच का रुख बदलने वाली दीप्ति ने 2025 वनडे विश्व कप में ऐसा प्रदर्शन किया जिसने उन्हें भारतीय क्रिकेट की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। खुद को बजरंगबली का भक्त बताने वाली दीप्ति मैदान पर भी अपनी टीम के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाती नजर आती हैं। 24 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मी दीप्ति ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई और भारतीय टीम के तीनों फॉर्मेट में अपनी उपयोगिता साबित की।

    दीप्ति बाएं हाथ से बल्लेबाजी करती हैं जबकि दाएं हाथ से ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हैं। भारतीय टीम के लिए उन्होंने 2014 में वनडे क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की। इसके बाद 2016 में टी20 और 2021 में टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू किया। धीरे धीरे वह टीम इंडिया की ऐसी ऑलराउंडर बन गईं जिनसे किसी भी मुकाबले में बल्ले और गेंद दोनों से महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद रहती है। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि दबाव की परिस्थितियों में भी वह अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखने में कामयाब रहती हैं।

    2025 में भारत में खेले गए वनडे विश्व कप में दीप्ति ने अपनी इसी क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। टूर्नामेंट में उन्होंने नौ मुकाबलों में 215 रन बनाए और तीन अर्धशतक लगाए। गेंदबाजी में उन्होंने 22 विकेट हासिल किए और पूरे टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज बनीं। उनके इस शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन विश्व कप के फाइनल में आया जहां उन्होंने भारत को चैंपियन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

    फाइनल मुकाबले में दीप्ति ने पहले बल्ले से शानदार पारी खेली और 58 गेंदों पर 58 रन बनाए। उनकी पारी में तीन चौके और एक छक्का शामिल रहा। इसके बाद जब गेंदबाजी की बारी आई तो उन्होंने विपक्षी बल्लेबाजों पर ऐसा शिकंजा कसा कि मैच का रुख भारत की ओर पूरी तरह मुड़ गया। दीप्ति ने 9.3 ओवर में 39 रन देकर पांच विकेट हासिल किए। उनके इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को 52 रन से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई और टीम पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम करने में सफल रही।

    दीप्ति का रिकॉर्ड सिर्फ विश्व कप तक सीमित नहीं है। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने सात मैचों की 12 पारियों में 402 रन बनाए हैं और उनके नाम 25 विकेट भी हैं। वनडे क्रिकेट में उन्होंने 124 मैचों की 106 पारियों में 2771 रन बनाए हैं जिसमें एक शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वाधिक वनडे स्कोर 188 रन है जो भारतीय महिला क्रिकेट में एक बड़ा व्यक्तिगत रिकॉर्ड है। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। 149 मैचों में उनके नाम 1270 रन और 168 विकेट दर्ज हैं।

    दीप्ति की प्रतिभा का सम्मान सिर्फ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक सीमित नहीं है। वह विमेंस प्रीमियर लीग के साथ ऑस्ट्रेलिया की बिग बैश लीग और द हंड्रेड जैसी बड़ी विदेशी लीग में भी अपना जलवा दिखा चुकी हैं। उनकी ऑलराउंड क्षमता उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट की बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल करती है। आने वाले वर्षों में भी उनसे कई बड़े प्रदर्शन और रिकॉर्ड की उम्मीद की जा सकती है।

  • WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर

    WTC में बदला समीकरण: ऑस्ट्रेलिया नंबर-1 पर मजबूत, बांग्लादेश की हार से भारत को राहत; अब श्रीलंका टेस्ट पर नजर


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की प्वाइंट्स टेबल में ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच खेले गए दूसरे टेस्ट के नतीजे का असर साफ दिखाई देने लगा है। मैके में ऑस्ट्रेलिया ने बांग्लादेश को पारी और 51 रन से हराकर न सिर्फ दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-1 से बराबर की बल्कि डब्ल्यूटीसी की तालिका में अपनी स्थिति भी और मजबूत कर ली। इस हार का सीधा फायदा भारतीय टीम को मिला है क्योंकि बांग्लादेश का जीत प्रतिशत गिर गया है और अब अगर भारत श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में जीत दर्ज करता है तो वह बांग्लादेश को पीछे छोड़कर अंक तालिका में ऊपर पहुंच सकता है। ऑस्ट्रेलिया इस समय 80 प्रतिशत जीत के साथ पहले स्थान पर बना हुआ है जबकि दक्षिण अफ्रीका 75 प्रतिशत जीत के साथ दूसरे नंबर पर है। न्यूजीलैंड 72.22 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर मौजूद है। बांग्लादेश को दूसरे टेस्ट से पहले तक 66 प्रतिशत जीत हासिल थी लेकिन ऑस्ट्रेलिया से मिली करारी हार के बाद उसका जीत प्रतिशत घटकर 55.56 हो गया है और टीम चौथे स्थान पर है।

    भारत के लिए यह स्थिति इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि टीम इस समय श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेल रही है। पहले टेस्ट में शानदार जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम दूसरे टेस्ट में भी मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश कर रही है। यदि टीम इंडिया कोलंबो टेस्ट अपने नाम करने में सफल रहती है तो डब्ल्यूटीसी प्वाइंट्स टेबल में उसका समीकरण और बेहतर हो सकता है। ऐसे में बांग्लादेश की हार भारतीय टीम के लिए राहत लेकर आई है। हालांकि डब्ल्यूटीसी में सिर्फ जीत ही महत्वपूर्ण नहीं होती बल्कि जीत प्रतिशत के आधार पर टीमों की स्थिति तय होती है इसलिए हर टेस्ट का परिणाम बेहद अहम माना जाता है।

    मैके में खेले गए दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत से ही बांग्लादेश पर दबाव बनाए रखा। बांग्लादेश की पहली पारी महज 64 रन पर सिमट गई जिसके जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने 210 रन बनाए और 146 रन की बड़ी बढ़त हासिल की। इसके बाद बांग्लादेश की दूसरी पारी भी ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सकी और पूरी टीम सिर्फ 95 रन पर ऑलआउट हो गई। इस तरह ऑस्ट्रेलिया ने दूसरे दिन ही पारी और 51 रन से मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस मैच में मिचेल स्टार्क ऑस्ट्रेलिया की जीत के सबसे बड़े नायक रहे। उन्होंने पहली पारी में छह और दूसरी पारी में चार विकेट लेकर मैच में कुल 10 विकेट झटके।

    ऑस्ट्रेलिया की इस शानदार जीत में कप्तान पैट कमिंस और नाथन लायन ने भी अहम भूमिका निभाई। कमिंस ने दोनों पारियों में कुल छह विकेट लिए जबकि लायन ने भी महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। बांग्लादेश ने सीरीज के पहले टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया को नौ विकेट से हराकर बड़ा उलटफेर किया था लेकिन दूसरे टेस्ट में कंगारू टीम ने जबरदस्त वापसी करते हुए मेहमान टीम को कोई मौका नहीं दिया। अब सीरीज 1-1 से बराबर हो चुकी है और डब्ल्यूटीसी की दौड़ में ऑस्ट्रेलिया ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। वहीं भारतीय टीम की नजर अब श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के नतीजे पर है क्योंकि जीत उसे डब्ल्यूटीसी की तालिका में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है।

  • साइकिल पर सवार हुए BRICS देश, मांडविया और रक्षा खडसे ने किया नेतृत्व; युवाओं को दिया फिट और स्वस्थ रहने का

    साइकिल पर सवार हुए BRICS देश, मांडविया और रक्षा खडसे ने किया नेतृत्व; युवाओं को दिया फिट और स्वस्थ रहने का


    नई दिल्ली। विशाखापत्तनम में रविवार को फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का अनोखा संगम देखने को मिला। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री मनसुख मांडविया तथा युवा मामले और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने BRICS Friendship Cycling Event का नेतृत्व किया। यह कार्यक्रम Fit India Sundays on Cycle के 87वें संस्करण के तहत आयोजित किया गया। खास बात यह रही कि BRICS युवा और खेल मंत्रियों की बैठक के दौरान हुए इस आयोजन में कई सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भी साइकिल चलाकर दोस्ती सहयोग और स्वस्थ जीवनशैली का संदेश दिया।

    साइकिलिंग कार्यक्रम में मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया संयुक्त अरब अमीरात ईरान और दक्षिण अफ्रीका के मंत्री तथा विभागीय प्रमुखों ने हिस्सा लिया। अलग अलग देशों के प्रतिनिधियों का एक साथ साइकिल चलाना BRICS देशों के बीच सहयोग और आपसी मित्रता का प्रतीक बना। इस सप्ताह Fit India Sundays on Cycle की थीम उन्नत भारत अभियान रखी गई थी। आयोजन के जरिए फिटनेस को केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य से जोड़ने के बजाय पर्यावरण संरक्षण ईंधन की बचत और स्वस्थ समाज के निर्माण से भी जोड़ा गया।

    कार्यक्रम के दौरान मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Fit India Movement देशभर में लगातार विस्तार कर रहा है। उनके मुताबिक देश में 18 हजार से ज्यादा स्थानों पर Fit India Sundays on Cycle के जरिए युवा और आम लोग साइकिल चलाकर फिटनेस का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने साइकिलिंग को बेहतरीन व्यायाम बताते हुए कहा कि इससे शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के साथ प्रदूषण कम करने और ईंधन बचाने में भी मदद मिलती है। साइकिल का ज्यादा इस्तेमाल ट्रैफिक पर दबाव कम करने में भी उपयोगी हो सकता है।

    मांडविया ने फिटनेस को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज बनता है और स्वस्थ समाज ही खुशहाल तथा मजबूत देश की नींव तैयार करता है। उन्होंने लोगों से प्रत्येक रविवार साइकिल चलाने और अपनी फिटनेस को प्राथमिकता देने की अपील की। BRICS देशों से आए प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना की और पूरे भारत में फिटनेस अभियान को बढ़ावा देने के प्रयासों की प्रशंसा की।

    Fit India Sundays on Cycle का 87वां संस्करण देश के अलग अलग हिस्सों में आयोजित किया गया। नई दिल्ली के अलावा लेह कारगिल और पोर्ट ब्लेयर जैसे स्थानों पर भी लोगों ने साइकिलिंग और फिटनेस गतिविधियों में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों ने नशा मुक्त भारत की शपथ भी ली। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे से दूर रखते हुए स्वस्थ और सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था।

    नई दिल्ली के मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में सुबह साढ़े पांच बजे से फिटनेस कार्यक्रम शुरू हुआ जिसमें एक हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। यहां योग जुम्बा और रस्सी कूदने जैसी गतिविधियों के बाद इंडिया गेट के आसपास पांच किलोमीटर की साइकिल रैली आयोजित की गई। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक अलग अलग उम्र के लोगों ने कार्यक्रम में उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजन स्थल पर कैरम शतरंज बैडमिंटन रस्साकशी और बाधा दौड़ जैसी गतिविधियों के लिए विशेष गेम जोन भी तैयार किया गया था।

    Fit India Sundays on Cycle युवा मामले और खेल मंत्रालय की पहल है जिसे Cycling Federation of India राहगिरी फाउंडेशन और MY Bharat के सहयोग से आयोजित किया जाता है। यह अभियान देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ आयोजित किया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को नियमित व्यायाम के लिए प्रेरित करना और साइकिलिंग को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाना है। विशाखापत्तनम का BRICS Friendship Cycling Event इसी अभियान को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ने वाला विशेष आयोजन बन गया।

  • अजीत डोभाल कल चीन जाएंगे, वांग यी के साथ LAC तनाव, सैनिक तैनाती और सीमा विवाद पर अहम बातचीत की संभावना

    अजीत डोभाल कल चीन जाएंगे, वांग यी के साथ LAC तनाव, सैनिक तैनाती और सीमा विवाद पर अहम बातचीत की संभावना

    नई दिल्ली । भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक स्तर पर एक बार फिर महत्वपूर्ण बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को चीन की राजधानी बीजिंग का दौरा करेंगे। इस दौरान वह भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता में हिस्सा लेंगे। बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    डोभाल और वांग यी के बीच होने वाली बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव को कम करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य करने की दिशा में प्रमुख मुद्दा रहा है।

    विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत में एलएसी की मौजूदा स्थिति, सैनिकों की तैनाती, सैन्य गतिविधियों में कमी, डिसएंगेजमेंट और सीमा प्रबंधन जैसे विषय प्रमुखता से उठ सकते हैं। दोनों पक्ष सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी विचार कर सकते हैं।

    भारत और चीन के रिश्तों में जून 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद गंभीर तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे। तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है।

    सीमा पर तनाव कम करने के साथ दोनों देशों के बीच व्यापक संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने की कोशिश भी चलती रही है। भारत का लगातार रुख रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता के बिना द्विपक्षीय संबंधों में पूरी तरह सामान्य स्थिति बहाल करना मुश्किल होगा।

    विशेष प्रतिनिधि तंत्र की भूमिका केवल तत्काल सैन्य तनाव को संभालने तक सीमित नहीं है। यह भारत और चीन के बीच सीमा प्रश्न के व्यापक और दीर्घकालिक समाधान की संभावनाओं पर बातचीत का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। ऐसे में डोभाल की यात्रा को सीमा विवाद के राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वांग यी के साथ बातचीत में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने और सीमा पर तनाव की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों पर भी विचार हो सकता है। सीमा प्रबंधन से जुड़े मौजूदा तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने तथा सैन्य गतिविधियों के कारण उत्पन्न होने वाली संभावित गलतफहमियों को रोकने पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।

    डोभाल और वांग यी पहले भी भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि वार्ता के माध्यम से सीमा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत करते रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष स्तर के अधिकारियों के बीच यह संवाद सीमा विवाद को कूटनीतिक माध्यम से संभालने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    भारत के लिए सीमा पर स्थायी शांति और सैनिकों की स्थिति से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं, जबकि चीन के साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर रखने की जरूरत भी बनी हुई है। व्यापार, आर्थिक सहयोग और अन्य क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर तनाव कम करना आवश्यक माना जाता है।

    अजीत डोभाल का बीजिंग दौरा इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। वार्ता से तत्काल किसी बड़े समझौते की उम्मीद के बजाय सीमा पर स्थिरता, संवाद को निरंतर बनाए रखने और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में प्रगति पर नजर रहेगी। विशेष प्रतिनिधियों की बैठक से निकलने वाले संकेत आने वाले समय में भारत-चीन संबंधों की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

  • यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दो दिवसीय दौरा, युवाओं और अधिकारियों के साथ होगी अहम चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर तैयारियां तेज होने लगी हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल सोमवार से दो दिनों के लिए उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेगा। इस दौरान चुनावी व्यवस्था की तैयारियों को समझने के साथ मतदाताओं और युवाओं को मतदान प्रक्रिया की जानकारी देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दौरे के दौरान चुनाव से जुड़े अधिकारी भी निर्वाचन व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विषयों पर चर्चा करेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लखनऊ में कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इनमें छात्रों के साथ संवाद से लेकर चुनावी अधिकारियों के साथ बैठक और बूथ स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों से सीधी बातचीत शामिल है। कार्यक्रमों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के साथ आम लोगों और विशेष रूप से युवा मतदाताओं को मतदान से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है।

    ज्ञानेश कुमार लखनऊ के कॉल्विन तालुकदार कॉलेज में विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे। इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई इसी कॉलेज से की थी। छात्रों के साथ संवाद के दौरान मतदान के महत्व, मतदाता बनने की प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भूमिका से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा की जाएगी।

    इसके बाद इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में चुनावी जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें ईएलसी 2.0 और ईसीआईनेट के बारे में जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के 20 जिलों से चुनाव से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। इनमें लखनऊ के अलावा अयोध्या, कानपुर, रायबरेली, सीतापुर और उन्नाव सहित अन्य जिले भी शामिल हैं।

    ईएलसी यानी इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब की शुरुआत युवाओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देने के उद्देश्य से की गई थी। अब इसके नए स्वरूप ईएलसी 2.0 के माध्यम से स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को चुनाव से जुड़ी जानकारी और अधिक आसान तरीके से उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल मतदान करने के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि पूरी निर्वाचन प्रक्रिया को समझाना भी है।

    लखनऊ में होने वाले कार्यक्रम में लाइव डेमो के माध्यम से मतदाता बनने, मतदान करने और मतगणना की प्रक्रिया समझाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए तीन स्टॉल लगाए जाएंगे। इनके जरिए विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी चुनाव की अलग-अलग प्रक्रियाओं को व्यावहारिक तरीके से समझ सकेंगे। ईएलसी को पूरे वर्ष सक्रिय रखने की योजना भी है, ताकि युवाओं को चुनावी जानकारी लगातार मिलती रहे।

    दौरे के दूसरे दिन 25 अगस्त को ज्ञानेश कुमार करीब 500 बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ से सीधे बातचीत करेंगे। बीएलओ मतदाता सूची से जुड़े काम, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाताओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके साथ संवाद के दौरान जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों और निर्वाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हो सकती है।

    इस दौरे में 20 जिलों के डिप्टी जिला चुनाव अधिकारी भी शामिल होंगे। इससे राज्य में चुनावी तैयारियों को लेकर विभिन्न स्तर के अधिकारियों के बीच समन्वय मजबूत करने का अवसर मिलेगा। छात्रों, नए मतदाताओं और चुनावी कर्मचारियों के साथ संवाद के जरिए निर्वाचन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुगम और सहभागी बनाने पर जोर रहेगा।

    उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग की यह गतिविधि युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने और बूथ स्तर की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। खास तौर पर ईएलसी 2.0 के माध्यम से नई पीढ़ी को मतदान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं करीब 500 बीएलओ के साथ सीधा संवाद जमीनी स्तर की तैयारियों को समझने और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है।

  • सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने पर विवादों में घिरे दीपेंदर हुड्डा ने दी सफाई, बोले सिख समाज से हमारा रिश्ता भाइयों जैसा

    नई दिल्ली ।कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुड्डा सज्जन कुमार को श्रद्धांजलि देने के दौरान की गई अपनी कथित टिप्पणी को लेकर विवाद में घिरने के बाद सफाई दी है। हुड्डा ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और उनकी मंशा सिख समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की बिल्कुल नहीं थी। उन्होंने कहा कि सिख समाज के साथ उनका रिश्ता परिवार जैसा है और जरूरत के समय दोनों पक्ष एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं।

    सज्जन कुमार का हाल ही में निधन हुआ था। वह 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए कांग्रेस के पूर्व नेता थे। उनके निधन के बाद श्रद्धांजलि देते हुए हुड्डा की ओर से की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सज्जन कुमार के सार्वजनिक जीवन और लोगों से जुड़ाव की प्रशंसा की।

    इस टिप्पणी के बाद हुड्डा पर सवाल उठने लगे। मामला इतना बढ़ा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता कुलदीप शर्मा ने भी पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति जताई। इसके बाद हुड्डा ने अपने बयान को लेकर विस्तृत सफाई सामने रखी और कहा कि उनकी बात का अर्थ उस तरह नहीं था, जिस तरह उसे सार्वजनिक चर्चा में पेश किया जा रहा है।

    हुड्डा ने कहा कि पिछले दो दिनों से वह देख रहे हैं कि उनके बयान को अलग संदर्भ में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि उनके बयान में एक ऐसा अंग्रेजी शब्द भी जोड़ा गया, जिसका उन्होंने इस्तेमाल नहीं किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भी भावना सिख समाज के किसी व्यक्ति को ठेस पहुंचाने वाली नहीं थी।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि सिख समाज देश का गौरवशाली समाज है और उसके बलिदानों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि उनकी किसी बात से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद प्रकट करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सिख समुदाय के साथ उनके परिवार और राजनीतिक जीवन का पुराना संबंध रहा है।

    हुड्डा ने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके परदादा चौधरी मातूराम का संबंध पंजाब के पगड़ी संभाल जट्टा आंदोलन से रहा था। उन्होंने शहीद भगत सिंह के चाचा सरदार अजीत सिंह के साथ उनके परदादा के संघर्ष का जिक्र किया और कहा कि यह इतिहास दोनों समुदायों के बीच पुराने संबंधों को दर्शाता है।

    उन्होंने किसान आंदोलन का भी उल्लेख किया। हुड्डा के मुताबिक, जब पंजाब से किसान आंदोलन के दौरान किसान हरियाणा पहुंचे तो उन्होंने उनके साथ खड़े होकर समर्थन दिया था। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच यह सहयोग किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बना हुआ है।

    1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर भी हुड्डा ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि न्याय की लड़ाई में वह सिख समाज के साथ हैं और दंगों के मामलों में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पीड़ितों को न्याय मिलना जरूरी है।

    इस सफाई के बाद हुड्डा ने विवादित टिप्पणी को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। अब राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर आगे क्या प्रतिक्रिया होती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।