Author: bharati
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संघर्षों से भरा रहा अनिल से मिस्टर इंडिया बनने का सफर, आज हैं अपार संपत्ति के मालिक
नई दिल्ली । मिस्टर इंडिया के नाम से मशहूर अभिनेता अनिल कपूर आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अभिनेता अभिनय के लिए ही नहीं बढ़ती उम्र के बावजूद चुस्ती और फुर्ती के लिए जाने जाते हैं। आज अनिल कपूर अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। अनिल कपूर का जन्म 24 दिसंबर 1956 को हुआ था। अनिल कपूर ने बॉलीवुड इंडस्ट्री को कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, लेकिन यहां तक पहुंचना आसान नहीं था। इस मुकाम को हासिल करने के लिए अनिल ने जिंदगी में कई परेशानियों का सामना किया है। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े कई अनसुने किस्से बताने जा रहे हैं..बॉलीवुड इंडस्ट्री मे आने से पहले अनिल कपूर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अभिनेता जब मुंबई आए थे, तो उनके परिवार के पास पैसों की तंगी थी। अनिल तब अपने परिवार के साथ राज कपूर के गैरेज में रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर, राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन हैं। इसके बाद उन्होंने एक इलाके में कमरा किराए पर लिया था। लंबे समय तक वे किराए के कमरे में भी रहे थे। अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।बॉलीवुड इंडस्ट्री मे आने से पहले अनिल कपूर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। अभिनेता जब मुंबई आए थे, तो उनके परिवार के पास पैसों की तंगी थी। अनिल तब अपने परिवार के साथ राज कपूर के गैरेज में रहे थे। दरअसल, अनिल कपूर के पिता सुरिंदर कपूर, राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर के कजिन हैं। इसके बाद उन्होंने एक इलाके में कमरा किराए पर लिया था। लंबे समय तक वे किराए के कमरे में भी रहे थे। अभिनेता ने खुद इस बात का खुलासा एक इंटरव्यू में किया था।अनिल कपूर ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1979 में की, उन्होंने निर्देशक उमेश मेहरा की फिल्म हमारे तुम्हारे में कैमियो किया था। साल 1980 में आई तेलुगू फिल्म वामसा वृक्षम में अनिल कपूर मुख्य भूमिका में काम किया। इसके बाद अभिनेता ने 1983 में फिल्म वो सात दिन के जरिए बतौर लीड एक्टर बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद एक एक करके अनिल कपूर कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते गए और बेटा, मिस्टर इंडिया, मेरी जंग, कर्मा, तेजाब, कसम, राम लखन, हमारा दिल आपके पास है, लाडला और नायक जैसी कई बेहतरीन फिल्में की।अनिल कपूर की डायलॉग की तरह ही उनकी लव लाइफ भी झकास है। अभिनेता जब बॉलीवुड इंडस्ट्री में अभिनेता बनने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे, तब उनकी मुलाकात मॉडल सुनीता से हुई। पहली नजर में ही मिस्टर इंडिया को सुनीता से प्यार हो गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन दिनों अनिल के खर्चे सुनीता ही उठाया करती थीं। अनिल कपूर ने सुनीता से साल 19 मई 1984 में शादी की थी।अभिनेता लग्जरी लाइफ जीने के लिए भी जाने जाते हैं। अनिल कपूर के पास मुंबई के अलावा दुबई, कैलिफोर्निया और लंदन में करोड़ों के घर हैं। अभिनेता के पास ल्गजरी कारों के कलेक्शन है, जिसमें बीएमडब्लयू, मर्सिडीज, बेंज एड क्लास, बेंटली, जगुआर और ऑडी है। मिस्टर इंडिया की नेेटवर्थ 134 करोड़ रुपये है। -

रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से मिलेंगे 5 जबरदस्त फायदे जानें सही तरीका
नई दिल्ली । चिया सीड्स एक छोटे आकार के बीज होते हैं जो पोषण से भरपूर होते हैं और इन्हें सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। अगर आप रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स का सेवन करते हैं तो आपको एक महीने में ही कई शारीरिक बदलाव नजर आने लगते हैं। ये बीज शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं और सेहत में सुधार करते हैं। तो आइए जानते हैं चिया सीड्स के सेवन से मिलने वाले 5 जबरदस्त फायदे:वजन तेजी से कंट्रोल होता है
चिया सीड्स में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है। नियमित रूप से 1 चम्मच चिया सीड्स खाने से वजन कम करने में मदद मिलती है और यह शरीर के मेटाबोलिज्म को भी बेहतर बनाता है।पाचन तंत्र मजबूत होता है
अगर आपको कब्ज गैस या ब्लोटिंग की समस्या रहती है तो चिया सीड्स आपके लिए एक बेहतरीन उपाय हो सकते हैं। इन बीजों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं जो आंतों की सफाई करते हैं और पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है
चिया सीड्स डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं। ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोकते हैं और शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारने में मदद करते हैं। इससे डायबिटीज का जोखिम कम होता है और ब्लड शुगर लेवल नियंत्रित रहता है।दिल की सेहत में सुधार होता है
चिया सीड्स में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते हैं जो दिल के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ये खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं जिससे दिल की सेहत बेहतर रहती है। इसके नियमित सेवन से हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा भी घटता है।त्वचा में नेचुरल ग्लो आता है
चिया सीड्स में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और उसे चमकदार बनाते हैं। इसके सेवन से त्वचा स्वस्थ सॉफ्ट और ग्लोइंग नजर आने लगती है। इसके अलावा ये त्वचा को हाइड्रेट भी करते हैं जिससे उम्र बढ़ने के लक्षण कम होते हैं।चिया सीड्स खाने का सही तरीका
चिया सीड्स को कभी भी सूखा न खाएं। चम्मच चिया सीड्स को एक गिलास पानी में भिगोकर 20-30 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद आप इसे सुबह खाली पेट या किसी स्मूदी दही या सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। चिया सीड्स का सेवन बहुत आसान है और अगर आप इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो आप एक महीने में इसके अद्भुत लाभ देख सकते हैं। तो बिना किसी मेहनत के अपनी सेहत में सुधार के लिए रोजाना 1 चम्मच चिया सीड्स जरूर शामिल करें। -

1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाने से क्या होंगे फायदे? जानें 7 हैरान कर देने वाले लाभ
नई दिल्ली । खजूर एक सुपरफूड के रूप में जाना जाता है जो न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। अगर आप हर सुबह खाली पेट 1 महीने तक खजूर खाते हैं तो आपके शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। खजूर में वह सभी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ विभिन्न बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। आइए जानते हैं खजूर के सेवन से मिलने वाले 7 महत्वपूर्ण फायदे ।
पाचन तंत्र को मजबूत बनाएंखजूर में उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो पाचन को बेहतर बनाता है। रोज सुबह खजूर खाने से आंतों की सफाई होती है और कब्ज गैस एसिडिटी जैसी समस्याएं कम होती हैं। इससे पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है।
शरीर को मिलती है भरपूर ऊर्जाखजूर में प्राकृतिक शुगर ग्लूकोज फ्रक्टोज और सुक्रोज होता है जो तुरंत शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है। इससे पूरे दिन थकान या कमजोरी का अनुभव नहीं होता और आप दिनभर सक्रिय रहते हैं।वजन बढ़ाने या घटाने में मदद
जो लोग दुबले-पतले हैं उनके लिए खजूर वजन बढ़ाने में मदद करता है क्योंकि यह उच्च कैलोरी वाला होता है। वहीं सीमित मात्रा में सेवन करने पर खजूर मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाकर वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।खून की कमी एनीमिया को दूर करता है
खजूर आयरन से भरपूर होता है जो खून की कमी को दूर करता है। रोजाना खजूर खाने से हीमोग्लोबिन लेवल बढ़ता है जिससे एनीमिया चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।दिल को स्वस्थ रखता है
खजूर में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं। इसके सेवन से दिल की सेहत बेहतर रहती है और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम होता है।दिमाग और याददाश्त को तेज करता है
खजूर में एंटीऑक्सिडेंट्स और विटामिन्स होते हैं जो दिमाग को सक्रिय रखते हैं। इसका नियमित सेवन याददाश्त को बेहतर बनाता है और मानसिक तनाव को कम करता है। यह दिमाग को तेज रखने में भी सहायक होता है।
हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनाता हैखजूर में कैल्शियम फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इसके सेवन से जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है और हड्डियां मजबूत होती हैं।खजूर खाने का सही तरीका
सुबह खाली पेट 2–3 खजूर खाएं। आप चाहें तो रात में खजूर को पानी में भिगोकर सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। इसके बाद एक गिलास गुनगुना पानी पीना फायदेमंद होता है। अगर आपको डायबिटीज है तो खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करें और डॉक्टर की सलाह लें। अगर आप सिर्फ 1 महीने तक सुबह खाली पेट खजूर खाना शुरू कर देते हैं तो शरीर में अंदर से मजबूत बदलाव दिखने लगेंगे और कई बीमारियों से भी राहत मिल सकती है। -

जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार
नई दिल्ली ।जनवरी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष महीना है क्योंकि इस महीने माघ माह की शुरुआत होती है जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना विभिन्न व्रतों और त्योहारों से भरा होता है जिनका सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा महत्व है। खासकर मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक इन दिनों का पालन लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं।मकर संक्रांति 14 जनवरी
मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी बनाते हैं और दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस दिन सूर्य की उपासना और उत्तरायण के शुभारंभ के रूप में होता है।लोहड़ी 13 जनवरी
लोहड़ी पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सर्दी के मौसम के अंत और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग आग जलाकर उस पर तिल गुड़ और मूंगफली डालते हैं और इसके साथ ही गाते-बजाते हैं।सकट चौथ 19 जनवरी
सकट चौथ को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घर-घर खास पकवान बनते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।मौनी अमावस्या 20 जनवरी
मौनी अमावस्या को विशेष रूप से उपवास और मौन रहने का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और तर्पण करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हुए अपनी बुराईयों और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।बसंत पंचमी 25 जनवरी
बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और यह विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और नए ज्ञान की प्राप्ति के लिए लोग विशेष आयोजन करते हैं। पीले रंग की विशेषता के साथ यह दिन उल्लास और उत्सव का प्रतीक बन जाता है। जनवरी का महीना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक अवसरों के साथ आता है। इस दौरान श्रद्धालु इन व्रतों और त्योहारों का पालन करके जीवन में सुख समृद्धि और पुण्य की कामना करते हैं। -

शशि थरूर ने क्यों की नीतीश सरकार की तारीफ, बिहार को लेकर कही ये बड़ी बात, कांग्रेस को फिर लगेगा बुरा!
नई दिल्ली । कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने सोमवार 22 दिसंबर को नीतीश कुमार सरकार की तरफ से बिहार में बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे कार्यों की जमकर सराहना की, जबकि कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू के साथ गठबंधन में है.नालंदा साहित्य महोत्सव में भाग लेने के लिए बिहार आए शशि थरूर ने एक चैनल संग बातचीत में कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कहीं बेहतर है. सड़कें बेहतर हैं. लोग देर रात तक सड़कों पर दिखते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं होता था. अब तक बिजली, पानी और बाकी सब कुछ ठीक चल रहा है.नीतीश के बारे में पूछे जाने पर क्या बोलेउन्होंने कहा कि मेरा मतलब है, इसमें कोई शक नहीं कि हाल के वर्षों में बहुत सी अच्छी चीजें हुई हैं. नीतीश कुमार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस सांसद ने टालमटोल करते हुए कहा कि मुझे यहां राजनीति में मत घसीटिए. मैं निश्चित रूप से इस प्रगति को देखकर बहुत खुश हूं. बिहार की जनता और उनके प्रतिनिधि इसके लिए श्रेय के पात्र हैं.कांग्रेस का क्या है रिएक्शन
बिहार में थरूर के बीजेपी संग गठबंधन वाली सरकार की प्रशंसा करने वाली हालिया टिप्पणी पर कांग्रेस ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. पिछले महीने दुबई में एक मीडिया कार्यक्रम में थरूर ने राजनीतिक परिदृश्य पर खेद व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि हर किसी को वैचारिक रूप से कट्टरपंथी होना पड़ता है और वे दूसरे पक्ष की अच्छाई को नहीं देखते या दूसरे पक्ष के किसी भी व्यक्ति से बात नहीं करते.
हिजाब विवाद को लेकर क्या कहा थाबता दें कि 4 बार के सांसद शशि थरूर, प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ बीजेपी की प्रशंसा करने वाले कई बयानों के बाद कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के साथ अपने संबंध खराब होते देख रहे हैं. थरूर हमेशा से यह कहते रहे हैं कि उनकी टिप्पणियां केवल भारत की बेहतर सेवा करने की इच्छा को दर्शाती हैं. इससे पहले शशि थरूर ने हिजाब विवाद को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना करते हुए कहा था कि यह घटना अनुचित थी. -

भारतीय खिलाड़ियों का बर्ताव गलत, आईसीसी के सामने उठाएंगे मुद्दा, मोहसिन नकवी की गीदड़भभकी
नई दिल्ली । पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और एशियन क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने कहा है कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ियों का पाकिस्तानी खिलाड़ियों के प्रति गलत व्यवहार रहा था और वह इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सामने उठाएंगे.मोहसिन नकवी ने कहा कि अंडर-19 एशिया कप फाइनल के दौरान भारतीय खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को उकसाते रहे. पाकिस्तान इस घटना की जानकारी आधिकारिक तौर पर आईसीसी को देगा. राजनीति और खेल को हमेशा एक दूसरे से अलग रखना चाहिए.अंडर-19 एशिया कप में पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मेंटर रहे सरफराज अहमद ने कहा खेल के दौरान भारत का बर्ताव सही नहीं था और क्रिकेट की भावना के खिलाफ था. इसके बावजूद, हमने अपनी जीत का जश्न खेल की भावना के साथ मनाया. क्रिकेट हमेशा खेल भावना के साथ खेला जाना चाहिए.
भारतीय खिलाड़ियों के खेल भावना से जुड़ा मुद्दा सबसे पहले सरफराज अहमद ने ही उठाया था.पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदुर के बाद एशिया कप के दौरान भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच पहली बार मैदान पर दूरी दिखी थी. भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाया था. इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने भी मैच के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया था. एशिया कप जीत के बाद भारतीय टीम ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से भी इनकार कर दिया था.
अंडर-19 एशिया कप में भी भारतीय टीम का स्टैंड यही रहा. भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया. अंडर-19 एशिया 2025 दुबई में हाल ही में संपन्न हुई है. लीग स्टेज में भारत ने पाकिस्तान को हरा दिया था, लेकिन 21 दिसंबर को हुए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा. पाकिस्तान ने भारत को 348 रन का लक्ष्य दिया था. भारतीय टीम 156 पर सिमट गई और 191 रन से खिताबी मुकाबला हार गई.
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आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी को मिलेगा वैश्विक मानक दर्जा WHO और आयुष मंत्रालय की बड़ी पहल
नई दिल्ली । भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा।इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।
प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचानप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।
बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्वबैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।भारत की प्रमुख भूमिका
भारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेशक सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार महानिदेशक सीसीआरएस और डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।WHO के वैश्विक प्रयास
इस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल
यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने एक बड़ी पहल की है। इस पहल के तहत आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अब अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के तहत एक समर्पित मॉड्यूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस कदम से इन प्रणालियों को वैश्विक पहचान और वैज्ञानिक आधार मिलेगा। इस संदर्भ में 20-21 दिसंबर को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक अहम तकनीकी बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक WHO और आयुष मंत्रालय के बीच 24 मई 2025 को हुए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन एमओयू के अंतर्गत आयोजित की गई थी। बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों से जोड़ने के लिए एक समान कोडिंग प्रणाली का विकास करना था जिससे उपचार की प्रभावशीलता को समझने शोध और नीति निर्माण में मदद मिल सके।प्रधानमंत्री मोदी का विजन और वैश्विक पहचान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि आयुष प्रणालियों को वैज्ञानिक और मानकीकृत तरीके से अपनाने से ये चिकित्सा पद्धतियां दुनिया भर में प्रभावी रूप से फैल सकती हैं। यह कदम भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगा।बैठक में वैश्विक प्रतिनिधित्व
बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव कविता गर्ग ने की। इस बैठक में WHO के छह क्षेत्रों अफ्रीका अमेरिका पूर्वी भूमध्यसागर यूरोप दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिमी प्रशांत से प्रतिनिधियों ने भाग लिया।इसके अलावा भारत भूटान ब्राजील ईरान मलेशिया नेपाल मॉरीशस दक्षिण अफ्रीका श्रीलंका फिलीपींस यूके और अमेरिका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस बैठक में भारतीय आयुष प्रणालियों को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए प्रमुख स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के कोड पर चर्चा की गई। साथ ही आयुर्वेद सिद्ध और यूनानी चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप कोड को भी विस्तृत रूप से परखा गया।वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा को एकीकृत करना
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ जोड़ने में आसानी होगी। यह कदम सुरक्षित साक्ष्य-आधारित और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देगा। विशेष रूप से आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का यह अवसर है।
भारत की प्रमुख भूमिकाभारत जो पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का एक अहम केंद्र है इस पहल में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बैठक में भारतीय टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया जिसमें प्रो. रबिनारायण आचार्य महानिदेश सीसीआरएएस प्रो. एनजे मुथुकुमार सीसीआरएसऔर डॉ. जहीर अहमद महानिदेशक सीसीआरयूएम जैसे प्रमुख विशेषज्ञ शामिल थे।
WHO के वैश्विक प्रयासइस पहल में डब्ल्यूएचओ के जानी-मानी शख्सियतों ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया। जिनेवा में डब्ल्यूएचओ मुख्यालय के प्रमुख प्रतिनिधि रॉबर्ट जैकब नेनाद कोस्टांजेक स्टीफन एस्पिनोसा और डॉ. प्रदीप दुआ ने वर्गीकरण चर्चाओं का नेतृत्व किया। साथ ही डब्ल्यूएचओ ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर जीटीएमसी और डब्ल्यूएचओ एसईएआरओ कार्यालय से जुड़े विशेषज्ञों ने भी इस पहल को प्रभावी बनाने में मदद की।पारंपरिक चिकित्सा के लिए समर्पित मॉड्यूल
यह पहल पारंपरिक चिकित्सा उपचारों के लिए एक समर्पित वर्गीकरण प्रणाली को विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दुनिया भर में पारंपरिक इलाज की जानकारी को सही तरीके से दर्ज किया जा सकेगा जिससे उपचार के परिणामों की बेहतर समझ हो सकेगी और स्वास्थ्य नीति बनाने में मदद मिलेगी। WHO और आयुष मंत्रालय की यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के लिए वैश्विक पहचान प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कदम न केवल भारतीय आयुष प्रणालियों को विज्ञान आधारित बना सकेगा बल्कि यह अन्य देशों में भी इन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। -

दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर चलती कार में लगी आग पुलिस ने शीशा तोड़कर बचाई चालक की जान
नई दिल्ली । दिल्ली के वजीराबाद फ्लाईओवर पर रविवार शाम एक चलती कार में अचानक आग लग गई जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने के कारण कार का सेंट्रल लॉक जाम हो गया और चालक अंदर फंस गया। हालांकि दिल्ली पुलिस के ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने अपनी बहादुरी से ड्राइवर की जान बचा ली। घटना रविवार शाम की है जब बुराड़ी से मजनू का टीला की तरफ जा रही कार में वजीराबाद फ्लाईओवर पर आग लग गई। आग लगते ही कार का सेंट्रल लॉक काम नहीं करने लगा और चालक अंदर फंस गया। इस स्थिति में ट्रैफिक पुलिस की बहादुरी की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया।
पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया ने बचाई जानटीम इंस्पेक्टर टीआई संतोष गुप्ता और उनके साथी पुलिसकर्मी वजीराबाद फ्लाईओवर के पास ड्यूटी पर तैनात थे जब उन्होंने देखा कि एक कार धू-धू कर जल रही है और उसके अंदर चालक फंसा हुआ है। तुरंत ही उन्होंने अपनी कार्रवाई शुरू की। संतोष गुप्ता ने बताया “कार में आग लगने के बाद ड्राइवर सेंट्रल लॉक की वजह से अंदर फंसा हुआ था। हम पहले तो दरवाजे को खोलने की कोशिश करते रहे लेकिन सफल नहीं हो सके। तब हमने शीशा तोड़कर चालक को बाहर निकाला।
पानी से आग पर काबू पाया गयाइसी दौरान पास ही खड़ा एमसीडी का पानी का टैंकर भी मौके पर पहुंच गया। ट्रैफिक पुलिस ने इसका इस्तेमाल कर कार की आग पर काबू पाया। पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से आग को बढ़ने से रोका गया और चालक को किसी भी बड़ी चोट से बचा लिया गया।इस पूरी घटना के दौरान वजीराबाद फ्लाईओवर पर ट्रैफिक भी प्रभावित हुआ। कार के जलने और पुलिस की कार्रवाई के कारण सड़क पर जाम लग गया था। हालांकि पुलिस ने तुरंत रास्ता खाली करने और ट्रैफिक की समस्या को हल करने के लिए काम किया।
दमकल को देरी से सूचनाघटना की जानकारी दमकल विभाग को दी गई थी लेकिन जाम के कारण उन्हें घटनास्थल पर पहुंचने में कुछ समय लग गया। इस बीच पुलिस ने अपनी तत्परता से चालक की जान बचाई और आग पर काबू पा लिया।
टीआई संतोष गुप्ता ने दी प्रतिक्रियाटीआई संतोष गुप्ता ने कहा हमारा सबसे पहला उद्देश्य था कि चालक को सुरक्षित निकाला जाए। इसके बाद हमने पास ही खड़े पानी के टैंकर से आग को बुझाया। टीम की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया।इस घटना से यह साबित होता है कि आपातकालीन स्थिति में पुलिस और अन्य एजेंसियों की तत्परता और बहादुरी से जान बचाने में मदद मिल सकती है। दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को कई लोग सराह रहे हैं क्योंकि एक सामान्य घटना में यदि समय रहते सही कदम नहीं उठाए जाते तो परिणाम गंभीर हो सकते थे। -

एशेज सीरीज हारने के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम ने की आलोचना बोले मेरे हाथ में कुछ नहीं
नई दिल्ली । एडिलेड ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड की टीम को एक और एशेज सीरीज हार का सामना करना पड़ा है। महज 11 दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को हराया और पहले दो टेस्ट तो सिर्फ 6 दिन में ही समाप्त हो गए थे। हालांकि तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड ने थोड़ी सी लड़ाई जरूर दिखाई लेकिन सीरीज का निर्णय एडिलेड में ही हो गया। इस हार के बाद इंग्लैंड के हेड कोच ब्रैंडन मैकुलम की आलोचना हो रही है।तीसरे टेस्ट मैच के बाद जब मैकुलम से पूछा गया कि क्या वह इंग्लैंड के हेड कोच पद से इस्तीफा देंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि यह फैसला उनके हाथ में नहीं है। मैकुलम ने कहा “मुझे नहीं पता। असल में यह फैसला मेरे हाथ में नहीं है है ना, मैं सिर्फ अपनी तरफ से काम करता रहूंगा जो भी मैंने सीखा है उसे लागू करने की कोशिश करूंगा और टीम के साथ सामंजस्य बैठाऊंगा।
मैकुलम ने कहा कि इस काम में मजा आता है और यह एक बेहतरीन अनुभव है।आप दुनिया भर में टीम के साथ यात्रा करते हैं और रोमांचक क्रिकेट खेलते हैं। हम कुछ विशेष हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने कहा। इंग्लैंड का खेल इस बार काफी अलग था। उनकी टीम बैजबॉल की पारंपरिक शैली से हटकर खेल रही थी जिसमें स्कोरिंग रेट पर कम ध्यान दिया गया। मैकुलम ने इस बारे में कहा “हमने कभी नहीं कहा कि हमें 5.5-6 ओवर की रफ्तार से रन बनाने होंगे। हमारा उद्देश्य खेल की स्थिति को समझना और रिस्क को पहचानना था।
मैकुलम ने यह भी कहा कि उनका फोकस हमेशा टीम के खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकालने पर रहा है। उन्होंने कहा “मेरे लिए यह खिलाड़ियों से सर्वश्रेष्ठ निकलवाने की कोशिश करना है। बाकी के फैसले तो दूसरों पर निर्भर करते हैं। जब मैंने काम शुरू किया था तब से लेकर अब तक टीम में बहुत तरक्की हुई है।इंग्लैंड का बैजबॉल तरीका जो पिछले कुछ समय से चर्चा में रहा है उसे लेकर मैकुलम ने कहा “यह तरीका किसी खास स्कोरिंग रेट के बारे में नहीं था। हमने जो रणनीति बनाई वह खिलाड़ियों के कौशल और टैलेंट पर आधारित थी। जब तक मैं इस काम में हूं यह तरीका नहीं बदलेगा।”
कुल मिलाकर इंग्लैंड की टीम के लिए यह एशेज सीरीज एक और निराशाजनक अनुभव रही है। हालांकि मैकुलम का कहना है कि यह एक प्रक्रिया है और टीम को सुधार की दिशा में काम करना जारी रखना होगा।
इस हार के बावजूद मैकुलम और इंग्लैंड की टीम आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कुछ महीनों में इंग्लैंड किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या वे अपनी रणनीतियों में बदलाव करते हैं या नहीं।
