Author: bharati

  • दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर PUC को लेकर बढ़ा हड़कंप, एसोसिएशन ने उठाई आवाज

    दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर PUC को लेकर बढ़ा हड़कंप, एसोसिएशन ने उठाई आवाज


    नई दिल्ली । दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र PUC को लेकर अब बढ़ती अव्यवस्था और भ्रम ने वाहन मालिकों और ट्रक ऑपरेटरों की चिंता बढ़ा दी है। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनके अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अस्पष्ट और उलझे हुए नियमों के कारण वाहन मालिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ANPR व्यवस्था और मैन्युअल जांच में अंतर

    राजेंद्र कपूर ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने PUC प्रणाली को डिजिटल और सरल बनाने का प्रयास किया था लेकिन पेट्रोल पंपों पर अब भी मैन्युअल PUC जांच की जा रही है। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन प्रणाली लागू होने के बावजूद मैन्युअल जांच जारी रहना नई डिजिटल व्यवस्था के उद्देश्य के विपरीत है। इससे वाहन मालिकों को असुविधा होती है और भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ती है। कपूर ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब वह अपनी निजी कार में पेट्रोल भरवाने गए तो उनकी 2024 में बनी कार के बावजूद PUC प्रमाणपत्र की मांग की गई जिससे और भी भ्रम पैदा हुआ।

    एसोसिएशन की मांग

    ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने संबंधित विभागों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों और कर्मचारियों को साफ निर्देश दिए जाएं कि ANPR प्रणाली लागू होने के बाद मैन्युअल PUC जांच न की जाए। कपूर ने कहा कि नियमों का उद्देश्य आम नागरिकों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सुविधा और पारदर्शिता देना है लेकिन मैन्युअल जांच से यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

    PUC प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

    राजेंद्र कपूर ने यह भी कहा कि अगर नियमों के कारण नई परेशानियां पैदा हो रही हैं तो उनकी समीक्षा और स्पष्टता बेहद जरूरी है। PUC प्रणाली में सुधार और नियमों की स्पष्टता से ही डिजिटल व्यवस्था का सही लाभ नागरिकों और वाहन मालिकों को मिलेगा। इससे सिस्टम का उद्देश्य पूरा होगा और वाहन संचालन में पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित होगी।

  • .तो हम आपसे गठबंधन तोड़ देंगे', उद्धव ठाकरे गुट की शरद पवार की NCP को चेतावनी!

    .तो हम आपसे गठबंधन तोड़ देंगे', उद्धव ठाकरे गुट की शरद पवार की NCP को चेतावनी!

    नई दिल्ली/महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण जोड़ने में लगे हैं. लेकिन इस बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने शरद पवार की एनसीपी को साफ कह दिया है कि अगर उनकी पार्टी अजित पवार की एनसीपी से किसी भी तरह का गठबंधन करेगी तो शिवसेना यूबीटी शरद पवार गुट से अपना गठबंधन तोड़ देगी.

    दरअसल, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सचिन अहीर ने गुरुवार 18 दिसंबर को कहा कि एनसीपी शरदचंद्र पवार को साफ कह दिया गया है कि अगर वे अजित पवार की एनसीपी के साथ नगर निकाय चुनाव में गठबंधन करती है तो हम उससे गठबंधन तोड़ देंगे.

    सचिन अहीर ने कहा कि शिवसेना यूबीटी पुणे नगर निगम चुनावों के लिए गठबंधन के वास्ते एनसीपी एसपी से बातचीत कर रही है. अहीर ने बताया हमने एनसीपी के साथ गठबंधन करने को लेकर अपना स्टैंड शरद पवार की पार्टी के सामने रख दिया है

  • पटना  झारखंड और अन्य हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस  SC कॉलेजियम ने की सिफारिश

    पटना झारखंड और अन्य हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस SC कॉलेजियम ने की सिफारिश


    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार को हुई बैठक में 5 प्रमुख हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर अपनी सिफारिशें की हैं। ये रिक्तियां रिटायरमेंट और ट्रांसफर के चलते उत्पन्न हो रही हैं और कॉलेजियम ने विभिन्न हाईकोर्ट में इन पदों को भरने के लिए न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। हालांकि इन सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी बाकी है।
    कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह पद उत्तराखंड हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    इसके अलावा केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है जबकि उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।

  • भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला  एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार

    भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली । 2025 का वर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुआ खासकर भारत के लिए जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए भारत पर 50% आयात शुल्क लगा दिए। इस टैरिफ ने भारत के निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। खासकर कपड़ा रत्न-आभूषण दवा समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इस फैसले का असर पड़ा।

    लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।

    भारत ने एफटीए पर काम तेज किया

    अमेरिकी टैरिफ से जूझते हुए भारत ने तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत इस समय यूरोपीय संघ न्यूजीलैंड और चिली के साथ उन्नत स्तर की एफटीए वार्ता कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ओमान के साथ पहला एफटीए समझौता करने की योजना बनाई जिस पर नवंबर में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों वस्त्र फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण था।

    एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा

    भारत की आर्थिक रणनीति में एफटीए अब एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरी हिस्सेदारी दिलाने निर्यात में निरंतर वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए के माध्यम से व्यापार टैरिफ में कटौती और स्थिर व्यापार नियम भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करते हैं साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां

    अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बावजूद भारत ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं से बचने के लिए एफटीए पर तेजी से काम किया। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के मुताबिक भारत एफटीए को एक रणनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जिससे निर्यात बाजारों में विविधता लाई जा सके और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम किया जा सके। भारत के पास फिलहाल 26 देशों के साथ 15 एफटीए हैं और 26 अन्य देशों के साथ प्राथमिकता व्यापार समझौते हैं।

    भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा

    हाल के वर्षों में भारत ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते किए हैं जिससे इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी साल मई में भारत और ब्रिटेन ने भी लंबे समय से लंबित एफटीए पर सहमति की घोषणा की थी जिसके तहत भारतीय खाद्य उत्पादों और मसालों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन समझौतों ने तेज और स्पष्ट व्यापार ढांचे की जरूरत को और मजबूत किया है।

    सरकार का रुख और भविष्य की दिशा

    भारत सरकार वैश्विक व्यापार में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफटीए वार्ताओं को आगे बढ़ा रही है। व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि आगामी वर्ष में इन समझौतों से अच्छे नतीजे मिलेंगे। हालांकि भारत के व्यापारिक साझेदारों से ज्यादा बाजार पहुंच की मांग और छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

    भारत और अमेरिका के रिश्ते

    भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं खासकर रूस से रियायती कच्चे तेल की निरंतर खरीद को लेकर। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की शांति योजना की सराहना की और दोनों नेताओं ने फोन पर व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत की।

    कई देशों से हाथ मिलाने का कारण

    वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में भारत अब एक स्थिर और आकर्षक पार्टनर के रूप में उभर रहा है। विकसित देशों जैसे ब्रिटेन यूरोपीय संघ और ईएफटीए के देशों के लिए भारत का बड़ा बाजार और सस्ते उत्पाद आकर्षण का कारण बन रहे हैं जबकि उभरते बाजार जैसे ओमान चिली क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देख रहे हैं
    भारत की एफटीए नीति वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच उसके निर्यात और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम साबित हो रही है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।

  • शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा

    शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल के दिनों में अपने राजनीतिक रुख में बदलाव दिखाया है और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। बीते कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें आम रही हैं। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ की थी जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और पार्टी से दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
    हालांकि अब शशि थरूर ने अपने रुख में बदलाव किया है। उन्होंने पार्टी का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है और हाल ही में राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर पोस्ट साझा किया है। थरूर ने इसे री-शेयर करते हुए लिखा कि मनरेगा देश की सबसे सफल विकास योजनाओं में शामिल रही है और ग्रामीण गरीबों के लिए यह एक अहम सामाजिक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को खत्म करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा योजना को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
    मोदी सरकार ने मनरेगा की जगह VB-GRAM G बिल संसद में लाकर पारित किया जिसे विपक्षी दल ग्रामीण हितों के खिलाफ मान रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह नया कानून मनरेगा की अधिकार और मांग पर आधारित गारंटी व्यवस्था को समाप्त करता है और इसे केंद्र से संचालित राशन-आधारित योजना में बदल देता है। शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस संदेश को साझा कर इसे समर्थन दिया।राहुल गांधी ने पोस्ट में मनरेगा के ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने ग्रामीणों को अपने काम का सही मूल्य दिलाने में मदद की मजदूरी में सुधार किया पलायन को कम किया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि VB-GRAM G इन उपलब्धियों को कमजोर करता है और कोविड काल में मनरेगा की उपयोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
    थरूर का रुख पहले मोदी सरकार की सराहना करने वाला था लेकिन अब वे पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की तारीफ की थी लेकिन उसके बाद कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। लोकसभा में भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन शांति विधेयक 2025 पर चर्चा में उन्होंने इसके खामियों को उजागर किया और कहा कि यह रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करता है। इसके अलावा थरूर ने केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFK में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न देने की आलोचना की। उन्होंने इसे सिनेमाई अशिक्षा और नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता करार दिया। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुमति देने का अनुरोध भी किया। साथ ही उन्होंने फिल्म अभिनेता देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे
  • ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतना ओलंपिक गोल्ड जीतने से भी कठिन: मोंटी पनेसर

    ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतना ओलंपिक गोल्ड जीतने से भी कठिन: मोंटी पनेसर


    नई दिल्ली । इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर मोंटी पनेसर ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि यह ओलंपिक गोल्ड मेडल जीतने से भी ज्यादा कठिन है। पनेसर का यह बयान ऑस्ट्रेलिया में चल रही एशेज सीरीज के संदर्भ में आया जिसमें इंग्लैंड की टीम 0-2 से पीछे चल रही है। पनेसर ने यह भी बताया कि ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट क्रिकेट जीतना एक बेहद कठिन चुनौती है जिसका मुकाबला करने के लिए किसी टीम को बहुत अधिक तैयारी और संघर्ष करना पड़ता है।

    ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज लगभग 100 सालों से खेली जा रही है और पिछले कुछ दशकों से इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। पनेसर के अनुसार इंग्लैंड की मौजूदा टीम भी उस चुनौती से जूझ रही है। वर्तमान में एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम 86 रनों से पीछे है और सीरीज के हारने का खतरा तीसरे टेस्ट में ही मंडरा रहा है।

    पनेसर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा ऑस्ट्रेलिया में जीतना बहुत कठिन है। इंग्लैंड के लिए यह शायद हर 20 साल में एक बार होता है। उन्होंने इंग्लैंड के पिछले एशेज विजेता अभियान की भी चर्चा की जिसमें 2010-11 की एशेज सीरीज इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल की थी। पनेसर ने उस सीरीज में अपनी भागीदारी का अनुभव भी साझा किया और बताया कि उस समय इंग्लैंड की टीम को वार्म-अप मैच खेलने का अवसर मिला था जिससे उन्हें परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में मदद मिली थी।

    पनेसर ने आगे कहा ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेलना एक अलग स्तर की चुनौती है। इंग्लैंड की टीम को अब समझना होगा कि यहाँ की तेज और बाउंसी पिचों पर खेलने के लिए विशेष रणनीति की जरूरत होती है। इंग्लैंड की टीम के आक्रामक खेल को लेकर भी पनेसर ने अपनी राय व्यक्त की और कहा कि इस तरह की पिचों पर आक्रामक खेल अधिक मुश्किल हो जाता है। इंग्लैंड के बल्लेबाज जब शुरुआत में ही आक्रामक हो जाते हैं तो वह खुद को परेशानी में डाल लेते हैं पनेसर ने कहा।

    उनके मुताबिक इंग्लैंड की टीम को अपनी गलतियों से सीखने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया जैसी कठिन परिस्थितियों में वे सफल हो सकें। पनेसर ने यह भी बताया कि हालात में ढलने के लिए इंग्लैंड को अपनी तैयारी को और बेहतर बनाना होगा।
    पनेसर ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने की कठिनाई को ओलंपिक गोल्ड जीतने से भी अधिक चुनौतीपूर्ण करार देते हुए कहा यह लगभग तीन या चार ओलंपिक खेलों में मुकाबला करने और फिर अंत में गोल्ड जीतने जैसा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंग्लैंड ने शायद इसे थोड़ा कम आंका है लेकिन उम्मीद है कि उन्होंने अपनी गलतियों से सीख लिया होगा और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

  • कपिल देव ने गौतम गंभीर को लेकर दी बड़ी प्रतिक्रिया  क्या वह टीम के कोच बन सकते हैं

    कपिल देव ने गौतम गंभीर को लेकर दी बड़ी प्रतिक्रिया क्या वह टीम के कोच बन सकते हैं


    नई दिल्ली । भारत के क्रिकेट जगत में हाल ही में एक बयान ने सबको चौंका दिया है और वह था कपिल देव का गौतम गंभीर को लेकर दिया गया बयान। कपिल देव ने गुरुवार को इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स शताब्दी सत्र में यह टिप्पणी की कि गौतम गंभीर को टीम का मुख्य कोच नहीं होना चाहिए। उनका कहना था कि वर्तमान समय में ‘कोच’ शब्द को गलत समझा जाता है और इस भूमिका को केवल खिलाड़ी प्रबंधन तक सीमित कर दिया गया है। कपिल देव ने स्पष्ट रूप से कहा गौतम गंभीर कोच नहीं हो सकते वह टीम के मैनेजर हो सकते हैं।”

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब साउथ अफ्रीका से भारत की टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार के बाद गौतम गंभीर की कोचिंग रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर उनकी रणनीति जिसमें उन्होंने लगातार खिलाड़ियों को रोटेट किया और कामचलाऊ खिलाड़ियों पर निर्भर रहने की कोशिश की को लेकर आलोचनाएं हो रही हैं। कपिल देव ने इस मुद्दे पर और भी खुलकर बात करते हुए कहा आज के दौर में कोच वह नहीं होता जिसे आप स्कूल और कॉलेज में सीखते थे बल्कि यह एक प्रकार का प्रबंधन कार्य है। आपको खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके मनोबल को बढ़ाने की भूमिका निभानी होती है।

    कपिल ने यह भी कहा कि यदि सुनील गावस्कर आज के दौर में खेल रहे होते तो वह टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज होते। उनका मानना था कि जिन खिलाड़ियों का डिफेंस मजबूत होता है वे आसानी से आक्रामक खेल सकते हैं क्योंकि उनके पास अधिक समय होता है। इस टिप्पणी में कपिल ने क्रिकेट के आधुनिक रूपों जैसे टी20 और टी10 के बारे में भी अपनी राय दी और यह बताया कि वे इन सभी प्रारूपों में रुचि रखते हैं।

    कपिल देव की यह टिप्पणी भारतीय क्रिकेट में नई बहस का कारण बन सकती है क्योंकि गंभीर की कोचिंग शैली और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने विरोध जताया है। वहीं मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान ने भी क्रिकेट के इस नए युग को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने हाल ही में भारत के स्वदेश में हुए महिला विश्व कप जीतने के बारे में याद किया और बताया कि कैसे इंडिया नाम के साथ ट्रॉफी हासिल करना उनके लिए एक खास अनुभव था।

    गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर चल रही बहस को लेकर कपिल देव के बयान ने अब इसे और भी गंभीर बना दिया है। कई क्रिकेट विशेषज्ञ अब इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि क्या गंभीर को आगे चलकर टीम का मुख्य कोच बनने की भूमिका निभानी चाहिए या फिर उनके लिए यह और भी बेहतर होगा कि वे किसी अन्य भूमिका में खेल जगत की सेवा करें।

  • 2026 में आने वाली इन फिल्मों का बजट आपको सदमा दे देगा: सबसे महंगी है इस छोटे एक्टर की फिल्म

    2026 में आने वाली इन फिल्मों का बजट आपको सदमा दे देगा: सबसे महंगी है इस छोटे एक्टर की फिल्म

    नई दिल्ली । 2026 हिंदी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक साल बनने जा रहा है। इस साल कई बड़े बजट की फिल्मों का इंतजार किया जा रहा है जिनका बजट जानकर दर्शकों की आँखें चौंक जाएंगी। कई मेकर्स इस साल फिल्मों पर मोटी रकम खर्च कर रहे हैं और फिल्म इंडस्ट्री में इन फिल्मों का क्लैश होने वाला है। शाहरुख खान रणबीर कपूर सनी देओल और सलमान खान जैसी बड़ी स्टारकास्ट की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने के लिए तैयार हैं। आइए जानते हैं 2026 में आने वाली कुछ बड़ी फिल्मों के बजट के बारे में जो आपका सिर चकरा देगी।

    बॉर्डर 2

    सनी देओल की फिल्म बॉर्डर का दूसरा पार्ट 2026 में रिलीज़ होने वाला है। फिल्म में वरुण धवन अहान पांडे और दिलजीत दोसांझ जैसे स्टार्स भी नजर आने वाले हैं। यह फिल्म युद्ध पर आधारित है और इसकी कहानी बॉर्डर के पिछले हिस्से को आगे बढ़ाती है। फिल्म को 150 करोड़ के बजट में बनाया गया है और इसे 23 जनवरी 2026 को रिलीज़ किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म अपनी लागत वसूलने में सफल रहेगी खासकर सनी देओल के प्रशंसकों के लिए।

    लव एंड वॉर

    विक्की कौशल आलिया भट्ट और रणबीर कपूर स्टारर फिल्म लव एंड वॉर एक लव ट्रायंगल पर आधारित होगी। इस फिल्म का निर्देशन संजय लीला भंसाली कर रहे हैं और यह फिल्म 14 अगस्त 2026 को रिलीज़ होगी। फिल्म के बजट की बात करें तो रिपोर्ट्स के अनुसार इसे 200 करोड़ के बजट में तैयार किया जा रहा है। यह फिल्म भंसाली के शानदार निर्देशन और स्टार कास्ट के साथ एक बड़ा हिट साबित हो सकती है।

    . किंग

    किंग खान यानी शाहरुख खान की फिल्म किंग एक एक्शन पैक्ड फिल्म होगी जिसमें शाहरुख खान अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। फिल्म का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं और इस फिल्म में रानी मुखर्जी दीपिका पादुकोण अरशद वारसी और बॉबी देओल जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। इस फिल्म का बजट 300 करोड़ रुपये से ज्यादा है और यह फिल्म दिवाली 2026 पर रिलीज़ हो सकती है। शाहरुख की फैन फॉलोइंग के कारण यह फिल्म भी धमाका करने के लिए तैयार है।

    रामायण

    2026 की सबसे महंगी फिल्म रामायण होने जा रही है। इस फिल्म में रणबीर कपूर और साई पल्लवी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म पौराणिक भारतीय कथा रामायण पर आधारित है और इसके दोनों भागों का कुल बजट 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। यह फिल्म न सिर्फ भारत बल्कि हॉलीवुड की फिल्मों से भी महंगी होगी। यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नई मिसाल कायम करने के लिए तैयार है।

    धुरंधर 2

    धुरंधर का पहला भाग इस समय बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाते हुए 500 करोड़ के करीब पहुंच चुका है। अब इसके दूसरे भाग का इंतजार किया जा रहा है जो 2026 में रिलीज़ होगा। फिल्म के दूसरे पार्ट का बजट 200 से 250 करोड़ रुपये तक हो सकता है। धुरंधर 2 भी पहली फिल्म की तरह दर्शकों का दिल जीतने के लिए तैयार है और यह फिल्म अपने भव्य बजट के साथ और भी बड़ा धमाका करने की उम्मीद करती है। 2026 में रिलीज़ होने वाली इन फिल्मों का बजट हिंदी सिनेमा के लिए एक नया रिकॉर्ड बना सकता है। रामायण और किंग जैसी फिल्में बड़े पैमाने पर बनाई जा रही हैं वहीं बॉर्डर 2 और धुरंधर 2 जैसी फिल्में भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरने के लिए तैयार हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर क्या असर पड़ेगा और क्या ये अपने बजट को वसूल करने में सफल होंगी या नहीं।

  • नेहा कक्कड़ के 'लॉलीपॉप' गाने पर मचा बवाल: अश्लील डांस और बोलों को लेकर लोग भड़के

    नेहा कक्कड़ के 'लॉलीपॉप' गाने पर मचा बवाल: अश्लील डांस और बोलों को लेकर लोग भड़के


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों एक गाना सुर्खियों में है और वह है नेहा कक्कड़ और उनके भाई टोनी कक्कड़ का नया गाना कैंडी शॉप । 15 दिसंबर को जारी हुए इस गाने को लेकर अब तक लाखों व्यूज मिल चुके हैं लेकिन इसके साथ ही ट्रोलिंग भी तेज़ हो गई है। लोग इस गाने के बोल और डांस मूव्स को लेकर बुरी तरह भड़के हुए हैं। गाने की लिरिक्स और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर आलोचनाएं हो रही हैं खासकर इसके कथित अश्लील कंटेंट को लेकर।

    ‘लॉलीपॉप’ के डांस और लिरिक्स पर हल्ला

    गाने के लिरिक्स में बार-बार लॉलीपॉप का जिक्र किया गया है जो दर्शकों को वल्गर और अश्लील लग रहा है। गाने में नेहा कक्कड़ और टोनी कक्कड़ दोनों ही लॉलीपॉप पर डांस करते हुए दिखाई दे रहे हैं और कुछ लोग इसे बेहद गंदा और आपत्तिजनक मान रहे हैं। गोइंग टु द कैंडी शॉप कैंडी शॉप आई वॉन्ट वन लॉलीपॉप जैसे बोलों ने फैंस को नाराज कर दिया है। इसके साथ ही गाने में टोनी के कुछ मराठी लिरिक्स भी हैं जो कुछ दर्शकों के लिए और भी विवादास्पद हो गए हैं।

    सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का तूफान

    गाने की ट्रोलिंग सिर्फ यूट्यूब तक सीमित नहीं रही बल्कि यह ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर भी फैल गई है। ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा क्या समझा जाए इस स्टेप से? मजबूरी है आज के समाज में ऐसा कंटेंट लोग पसंद कर रहे हैं। कुछ यूज़र्स ने गाने के लिरिक्स और डांस मूव्स को बच्चों के लिए अनफिट बताया। एक अन्य यूज़र ने कमेंट किया गाना सुनने में ठीक है लेकिन स्टेप्स ने सवाल खड़े कर दिए हैं खासकर जब वही स्टेप्स बच्चों की रील्स तक पहुंच रहे हैं।

    कुछ यूज़र्स ने गाने की तुलना ढिंचैक पूजा से की जो पहले भी विवादों में रही थीं। कई लोग इस गाने को लेकर शॉक्ड हैं और इसे अपमानजनक मान रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा इतना ऊपर भी नहीं उड़ना चाहिए कि नीचे गिरने पर कंकाल भी ना मिले। वहीं कुछ लोग इस गाने को एक ‘माता के भजन से कैंडी शॉप तक के सफर’ के रूप में देख रहे हैं।

    गाने का सांस्कृतिक संदर्भ

    गाने के कुछ शब्दों में पुणे और हरियाणा का जिक्र किया गया है जिससे और भी विवाद उत्पन्न हो गया। आलोचकों का कहना है कि गाने में इन शहरों का नाम लेकर इन्हें अश्लील कंटेंट से जोड़ना उचित नहीं था। लोग इसे बेतुका और अनावश्यक मान रहे हैं।

    पुराने समय से लेकर अब तक का बदलाव

    नेहा कक्कड़ और उनके भाई टोनी कक्कड़ जिनकी पहचान पहले धार्मिक भजनों और पारंपरिक गीतों के लिए थी अब इस प्रकार के गाने कर रहे हैं। कुछ लोग यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या अब पैसे के लिए ऐसे गाने बनाए जा रहे हैं? लोगों ने ये भी कहा कि पहले ये लोग अपने भजनों के लिए प्रसिद्ध थे अब पैसे के लिए वे अश्लील कंटेंट में भी शामिल हो गए हैं।

    क्या है गाने का असर
    यह गाना सोशल मीडिया पर पूरी तरह से एक बहस का मुद्दा बन चुका है। जहां एक ओर यह गाना बुरी तरह से ट्रोल हो रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे मनोरंजन का साधन मानते हैं और इससे जुड़े मजेदार प्रतिक्रियाओं का आनंद ले रहे हैं। हालांकि गाने के विवादित डांस स्टेप्स और बोलों के कारण यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे गाने समाज में सकारात्मक संदेश दे रहे हैं या फिर यह गलत तरीके से युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं।

  • पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप

    पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है जिसमें एक यातायात थाने में पदस्थ एएसआई पर अपनी ही घर में काम करने वाली महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसे धमकाने का आरोप लगा है। यह मामला उस समय सामने आया जब पीड़िता ने स्थानीय सिविल लाइन थाने में एएसआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि वह पिछले दो सालों से एएसआई के घर पर घरेलू कामकाजी झाड़ू-पोछा का काम कर रही थी और इस दौरान आरोपी ने उसे नौकरी और पगार बढ़ाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।

    शोषण का आरोप

    पीड़िता के अनुसार एएसआई सुरेंद्र मालवीय ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले ने पूरे हरदा जिले में गहरी चिंता और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। यह घटना दिखाती है कि जब कानून के रखवाले खुद मर्यादा लांघने लगें तो आम जनता से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

    पुलिस कार्रवाई

    पुलिस ने पीड़िता की शिकायतa पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता IPC और अनुसूचित जाति-जनजाति एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हरदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP अमित कुमार मिश्रा ने इस घटना की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि अपराध क्रमांक 410/25 के तहत धारा 69 गलत तरीके से संबंध बनाना 351 धमकाना बीएनएस और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) 3(2)(V-A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    आरोपी एएसआई का बयान

    इस मामले में पुलिस के द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन आरोपों को लेकर एएसआई सुरेंद्र मालवीय की स्थिति पर अब तक कोई सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में आमतौर पर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता है। इस मामले में भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी तरह से तत्पर दिखाई दे रही है।

    शोषण और असुरक्षा का माहौल

    यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुए शारीरिक शोषण का नहीं है बल्कि इसने समाज में महिलाओं की असुरक्षा और उनके शोषण की समस्याओं को उजागर किया है। जब एक सरकारी कर्मचारी जो लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मेदार होता है खुद ऐसी घटनाओं का हिस्सा बने तो यह समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ावा देता है।

    समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

    इस मामले ने प्रशासन और समाज के लिए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या ऐसे मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर समाज और प्रशासन का दायित्व पूरा हो रहा है? इस घटना के बाद महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की आवश्यकता और बढ़ गई है। मध्य प्रदेश के हरदा जिले का यह मामला एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे की ओर इशारा करता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन यह सिर्फ एक शुरूआत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।