Author: bharati

  • क्रेडिट कार्ड से पेमेंट के बाद पैसा वापस पाने के लिए रिफंड या चार्जबैक, जानें सही विकल्प

    क्रेडिट कार्ड से पेमेंट के बाद पैसा वापस पाने के लिए रिफंड या चार्जबैक, जानें सही विकल्प


    नई दिल्ली । क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन खरीदारी करना सुविधाजनक है, लेकिन कई बार ऑर्डर रद्द होने, सामान नहीं मिलने, गलत बिलिंग या भुगतान से जुड़ी समस्या के कारण ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पैसे वापस पाने के लिए रिफंड और चार्जबैक दो प्रमुख विकल्प हैं। हालांकि, दोनों की प्रक्रिया, इस्तेमाल करने का तरीका और समय अलग-अलग होता है। इसलिए शिकायत की प्रकृति के अनुसार सही विकल्प चुनना जरूरी है।

    क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने के बाद यदि ग्राहक किसी सामान को वापस करता है या ऑर्डर रद्द कर देता है, तो वह संबंधित विक्रेता या कंपनी से रिफंड मांग सकता है। इसी तरह, बिल में कोई गलती मिलने पर भी ग्राहक विक्रेता से भुगतान वापस करने का अनुरोध कर सकता है। रिफंड की प्रक्रिया आमतौर पर मर्चेंट यानी विक्रेता की ओर से शुरू की जाती है। इसके बाद संबंधित राशि ग्राहक के क्रेडिट कार्ड खाते में वापस जमा होती है।

    उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ग्राहक ने ऑनलाइन 7,000 रुपये का सामान खरीदा और बाद में ऑर्डर रद्द कर दिया, तो वह संबंधित ई-कॉमर्स कंपनी से पैसे वापस मांग सकता है। रिफंड का अनुरोध स्वीकार होने के बाद राशि वापस आने में कुछ कार्यदिवस लग सकते हैं। यह अवधि विक्रेता की प्रक्रिया और भुगतान व्यवस्था पर निर्भर करती है। ऐसे में ग्राहक को ऑर्डर की जानकारी, भुगतान की रसीद और कंपनी के साथ हुई बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए।

    दूसरी ओर, चार्जबैक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें ग्राहक किसी विवादित क्रेडिट कार्ड लेनदेन को लेकर अपने कार्ड जारी करने वाले बैंक से शिकायत करता है। इसका इस्तेमाल उस समय किया जा सकता है, जब विक्रेता उचित रिफंड देने से इनकार कर दे, शिकायत का जवाब नहीं दे या भुगतान करने के बावजूद सामान अथवा सेवा उपलब्ध न कराए। यदि खाते में कोई अनधिकृत लेनदेन दिखाई देता है या धोखाधड़ी का संदेह होता है, तो ग्राहक को बैंक को तुरंत सूचित करना चाहिए।

    चार्जबैक की प्रक्रिया में बैंक विवादित भुगतान की जांच करता है। इस दौरान ग्राहक से लेनदेन का विवरण, भुगतान की रसीद, ऑर्डर से जुड़े दस्तावेज और विक्रेता के साथ हुई बातचीत के प्रमाण मांगे जा सकते हैं। जांच के दौरान विक्रेता को भी अपने पक्ष में सबूत देने का अवसर मिल सकता है। इसलिए केवल शिकायत दर्ज कराने से पैसा वापस मिलने की गारंटी नहीं होती। बैंक उपलब्ध तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर निर्णय लेता है। निर्धारित समयसीमा के भीतर शिकायत करना भी महत्वपूर्ण है।

    रिफंड और चार्जबैक के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि रिफंड के लिए ग्राहक सीधे विक्रेता से संपर्क करता है, जबकि चार्जबैक के लिए बैंक के माध्यम से विवाद उठाया जाता है। रिफंड की अवधि विक्रेता की प्रक्रिया पर निर्भर करती है, जबकि चार्जबैक की जांच में कई सप्ताह लग सकते हैं। इसलिए सामान्य ऑर्डर रद्द होने या सामान लौटाने की स्थिति में पहले रिफंड मांगना उचित रहता है। यदि विक्रेता समस्या का समाधान नहीं करता, तो ग्राहक बैंक से चार्जबैक की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ले सकता है।

    इन दोनों प्रक्रियाओं का अनुरोध करने से आमतौर पर क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर नहीं पड़ता। हालांकि, विवाद के दौरान क्रेडिट कार्ड के बकाया बिल का भुगतान रोकना या निर्धारित तारीख के बाद भुगतान करना स्कोर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ग्राहक को बैंक से भुगतान संबंधी निर्देश स्पष्ट करने चाहिए और केवल विवादित राशि के आधार पर पूरे बिल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सही दस्तावेज सुरक्षित रखना, समय पर शिकायत करना और बैंक की प्रक्रिया का पालन करना पैसे वापस पाने में मददगार हो सकता है।

  • नितेश तिवारी की रामायण में कुंभकर्ण का किरदार निभाएंगे फैजल मलिक, हल्क को बनाया रोल की तैयारी का रेफरेंस

    नितेश तिवारी की रामायण में कुंभकर्ण का किरदार निभाएंगे फैजल मलिक, हल्क को बनाया रोल की तैयारी का रेफरेंस


    नई दिल्ली। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह लगातार बढ़ रहा है। फिल्म में भगवान राम और रावण जैसे प्रमुख किरदारों के साथ अब दूसरे महत्वपूर्ण पात्रों की भी चर्चा होने लगी है। इसी बीच पंचायत वेब सीरीज में प्रह्लाद चाचा के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता फैजल मलिक ने अपने नए रोल को लेकर दिलचस्प खुलासा किया है। वह फिल्म में रावण के भाई कुंभकर्ण की भूमिका निभाते नजर आएंगे। खास बात यह है कि इस विशालकाय पौराणिक पात्र को पर्दे पर जीवंत करने के लिए फैजल मलिक ने हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म एवेंजर्स के हल्क से प्रेरणा ली है।

    फैजल मलिक ने वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में बताया कि जब वह कुंभकर्ण के लुक और उसके व्यक्तित्व की कल्पना कर रहे थे तो उनके सामने हल्क का उदाहरण था। अभिनेता मार्क रफालो ने जिस तरह हल्क जैसे विशाल हरे किरदार को पर्दे पर प्रस्तुत किया है उससे उन्हें अपने किरदार की शारीरिक बनावट और रूप को समझने में मदद मिली। फैजल के मुताबिक हल्क उनके लिए एक अहम रेफरेंस था। हालांकि कुंभकर्ण का किरदार केवल विशाल शरीर तक सीमित नहीं है बल्कि उसका अपना पौराणिक महत्व और अलग व्यक्तित्व भी है। ऐसे में इस भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।

    अभिनेता ने बताया कि रामायण का हिस्सा बनना उनके लिए बचपन के सपने के सच होने जैसा है। वह भी रामायण देखते हुए बड़े हुए हैं और इस महाकाव्य से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है। ऐसे में इसकी कहानी के किसी महत्वपूर्ण पात्र को निभाने का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। फैजल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कुंभकर्ण को आम इंसान से अलग और असाधारण रूप में कैसे प्रस्तुत किया जाए। पौराणिक कथाओं में कुंभकर्ण को विशाल शरीर वाले शक्तिशाली योद्धा के रूप में जाना जाता है। उसकी लंबी नींद भी उसके चरित्र की एक प्रमुख विशेषता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए किरदार के लिए खास तैयारी करनी पड़ी।

    फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी टीम ने भी कुंभकर्ण के लुक को तैयार करने में काफी मेहनत की है। फैजल मलिक के अनुसार यह किरदार फिल्म के दूसरे पात्रों से अलग है और इसकी विशालता को पर्दे पर उतारने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। दर्शकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म में कुंभकर्ण का रूप कैसा दिखाई देता है और फैजल अपने अभिनय से इस पौराणिक पात्र को किस तरह जीवंत बनाते हैं।

    फैजल ने यह भी कहा कि उनके लिए एक बड़ी चुनौती दर्शकों के दिलों में वही जगह बनाना है जो उन्हें पंचायत में प्रह्लाद चाचा के किरदार से मिली थी। इस भूमिका ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और अब वह चाहते हैं कि दर्शक कुंभकर्ण के रूप में भी उन्हें उतना ही प्यार दें। उनके लिए यह किरदार एक नई शुरुआत और अभिनय की अलग दुनिया में कदम रखने जैसा है।

    बातचीत के दौरान फैजल मलिक ने रामानंद सागर की टीवी रामायण की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि उस धारावाहिक के किरदार और उन्हें निभाने वाले कलाकार आज भी लोगों की यादों में अमर हैं। अरुण गोविल को दशकों बाद भी दर्शक भगवान राम के रूप में देखते हैं और उनके प्रति सम्मान जताते हैं। यह रामायण के सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है। अब नई फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं और फैजल मलिक का कुंभकर्ण वाला किरदार फिल्म के चर्चित आकर्षणों में शामिल हो सकता है।

  • रामानंद सागर नहीं दिखाना चाहते थे लव-कुश की कहानी, सीता वनवास एपिसोड ने खड़ा किया विवाद, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

    रामानंद सागर नहीं दिखाना चाहते थे लव-कुश की कहानी, सीता वनवास एपिसोड ने खड़ा किया विवाद, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला


    नई दिल्ली। 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुई रामानंद सागर की रामायण भारतीय टेलीविजन के इतिहास का एक यादगार धारावाहिक बन गई थी। इस शो ने भगवान राम की कथा को घर-घर तक पहुंचाया और इसके किरदारों को दर्शकों के बीच विशेष पहचान दिलाई। रामायण की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके प्रसारण के दौरान कई जगहों पर लोग अपना काम रोककर टीवी के सामने बैठ जाते थे। हालांकि इस धारावाहिक की सफलता के बाद इसकी आगे की कहानी यानी लव-कुश की कथा को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ जिसने निर्माता रामानंद सागर को कानूनी मुश्किलों में डाल दिया। सीता वनवास से जुड़े एक एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग उठी और मामला अदालत तक पहुंच गया।

    रामानंद सागर की रामायण 1987 से 1988 के बीच प्रसारित हुई थी और इसके कुल 78 एपिसोड दिखाए गए थे। यह धारावाहिक मुख्य रूप से गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस पर आधारित था। रामानंद सागर इसी ग्रंथ के अनुसार कथा को आगे बढ़ाते हुए धारावाहिक का समापन करना चाहते थे। लेकिन रामायण खत्म होने के बाद दर्शकों और विभिन्न संगठनों की ओर से लव-कुश की कहानी दिखाने की मांग तेज होने लगी। इसके बाद उत्तर रामायण बनाने की तैयारी शुरू हुई। हालांकि रामानंद सागर इस कहानी को लेकर सहज नहीं थे।

    सागरवर्ल्ड पर प्रेम सागर के ब्लॉग के अनुसार रामानंद सागर इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे कि भगवान राम अपनी गर्भवती पत्नी सीता को एक धोबी की बात पर वनवास भेज देंगे। तुलसीदास की रामचरितमानस में लव-कुश की कथा का विस्तृत वर्णन नहीं होने के कारण भी वह इस कहानी को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। दूसरी ओर वाल्मीकि समाज की ओर से मांग की जा रही थी कि रामायण की कथा को वाल्मीकि रामायण के आधार पर पूरा दिखाया जाए। बताया जाता है कि इस विषय पर रामानंद सागर तक प्रधानमंत्री कार्यालय से भी संपर्क किया गया था और दूरदर्शन के अधिकारियों के सामने भी यह मुद्दा रखा गया था।

    लगातार बढ़ते दबाव के बाद दूरदर्शन ने रामानंद सागर को लव-कुश की कहानी तैयार करने की अनुमति दी। हालांकि इसके लिए विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर कथा प्रस्तुत करने की शर्त रखी गई थी। इसके बाद रामानंद सागर ने रामायण के अलग-अलग संस्करणों का अध्ययन किया। इसी दौरान उन्हें राधेश्याम द्वारा रचित रामायण का एक संस्करण मिला जिसमें माता सीता के अयोध्या छोड़ने की घटना को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया था।

    इसी संस्करण के आधार पर सीता वनवास का एपिसोड तैयार किया गया। इसमें दिखाया गया कि भगवान राम सीता को वनवास जाने के लिए नहीं कहते बल्कि माता सीता स्वयं अपने पति की मर्यादा और सम्मान बनाए रखने के लिए अयोध्या छोड़ने का फैसला करती हैं। लेकिन इस प्रस्तुति को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

    प्रेम सागर के ब्लॉग के मुताबिक जिस दिन इस एपिसोड का प्रसारण होना था उस दिन रामानंद सागर दूरदर्शन कार्यालय में मौजूद थे। प्रसारण से करीब एक घंटे पहले धीरेंद्र ब्रह्मचारी वहां पहुंचे और एपिसोड को रोकने की मांग की। हालांकि रामानंद सागर ने उनकी बात नहीं मानी और एपिसोड का प्रसारण हो गया। इसके बाद दर्शकों के एक वर्ग ने रामायण की मूल कथा से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। विवाद इतना बढ़ा कि रामानंद सागर के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामला दर्ज हो गया। रिपोर्ट के अनुसार यह मुकदमा करीब दस वर्षों तक चला। इस तरह लव-कुश की कथा और सीता वनवास का एक एपिसोड रामानंद सागर के करियर के सबसे चर्चित विवादों में शामिल हो गया।

  • अल्बानिया में PM एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर बवाल, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर फेंके पेट्रोल बम

    अल्बानिया में PM एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर बवाल, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर फेंके पेट्रोल बम


    नई दिल्ली। अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन हिंसक हो गया है। मंगलवार रात प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पेट्रोल बम फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने पानी की बौछार करने वाली गाड़ियों (वाटर कैनन) का इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आठवें दिन में पहुंच गया है। राजधानी के अलावा देश के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन फैलने की खबर है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार में कथित भ्रष्टाचार, रोजगार के सीमित अवसरों और शिक्षा के खराब स्तर को लेकर लोगों में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों और बैंकों में आग लगाने, दुकानों के शीशे तोड़ने और सड़कों से पत्थर उखाड़कर पुलिस पर फेंकने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया।

    13 अक्टूबर से शुरू हुई हिंसा, 17 अक्टूबर को प्रदर्शन तेज
    रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई थी। इसके बाद 17 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन और उग्र हो गया। उस दिन हजारों लोग शिक्षा मंत्रालय के बाहर जमा हुए और दंगा रोधी पुलिस पर पत्थर फेंके। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया।

    मंगलवार रात भी तिराना में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को निशाना बनाते हुए पेट्रोल बम फेंके। पुलिस ने वाटर कैनन के जरिए भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की। लगातार जारी हिंसा ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था की चुनौती बढ़ा दी है।

    2013 से सत्ता में हैं एडी रामा, चौथी बार संभाली सरकार
    प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहा यह आंदोलन उनके राजनीतिक कार्यकाल की बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। रामा वर्ष 2013 से सत्ता में हैं और पिछले साल उन्होंने चौथी बार प्रधानमंत्री पद संभाला था।

    प्रदर्शनकारियों की नाराजगी का प्रमुख कारण सरकार में कथित भ्रष्टाचार के अलावा रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दे हैं। आंदोलन अब राजधानी से बाहर दूसरे शहरों तक फैलने के कारण सरकार पर दबाव बढ़ रहा है।

    गर्मियों में भी हुए थे सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
    अल्बानिया में मौजूदा अशांति की पृष्ठभूमि में गर्मियों के दौरान हुए कई महीनों के विरोध प्रदर्शन भी शामिल हैं। उस समय ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे। उनका मुख्य विरोध एक महंगी तटीय विकास परियोजना को लेकर था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर का समर्थन प्राप्त है।

    अब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग, भ्रष्टाचार के आरोप और सामाजिक-आर्थिक समस्याओं को लेकर विरोध तेज हो गया है। तिराना समेत कई शहरों में जारी प्रदर्शनों के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

  • ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता

    ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता


    नई दिल्ली। अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर ईरान ने अपना रुख सख्त कर दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह अपने यूरेनियम का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब वॉशिंगटन भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगा और उसकी सभी शर्तें पूरी करने की दिशा में कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के बीच आया यह बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान से यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने होंगे। बातचीत की प्रक्रिया ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह पूरा करने से शुरू होनी चाहिए।

    रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक में भी तेहरान का यही रुख दोहराया। मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत का रास्ता निकालने के प्रयासों के तहत ईरान पहुंचे हैं।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद स्पीकर से मिले मुनीर
    ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में आसिम मुनीर के साथ बैठक की। इस दौरान क्षेत्रीय घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों पर चर्चा हुई।

    नूरन्यूज के अनुसार, मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ से भी मुलाकात की। इन बैठकों में क्षेत्रीय तनाव कम करने और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने रखीं सात शर्तें
    ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक नहीं जीत सकता, जब तक वह पिछले महीने तेहरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता।

    इन शर्तों का संबंध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से भी है। प्रमुख मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर शत्रुता रोकना शामिल है।

    रेजाई ने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख के मुताबिक, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

    परमाणु कार्यक्रम पर अटका समझौता
    ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ किसी संभावित समझौते की राह में प्रमुख बाधा बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि युद्ध समाप्त करने और समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में महत्वपूर्ण कमी करनी होगी।

    अमेरिका, इजरायल और कई अन्य पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह ईरान की ओर से यूरेनियम का 60 प्रतिशत तक संवर्धन करना है। यह स्तर आम नागरिक परमाणु उपयोग के लिए जरूरी संवर्धन स्तर से काफी अधिक है और लगभग 90 प्रतिशत संवर्धन वाले हथियार-ग्रेड यूरेनियम के स्तर के करीब है।

    हालांकि, ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। यूरेनियम संवर्धन की सीमा और संवर्धित यूरेनियम के भंडार का भविष्य दोनों देशों के बीच बातचीत के अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    पाकिस्तान फिर करा रहा बातचीत की कोशिश
    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बाद जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था। हालांकि, कुछ ही हफ्तों बाद दोनों देशों के बीच लड़ाई दोबारा शुरू होने से यह समझौता टूट गया।

    आसिम मुनीर की मौजूदा ईरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच मतभेद दूर करने और बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास जारी हैं। ईरान ने यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजने और बातचीत से पहले अपनी शर्तें पूरी करने की मांग दोहराकर स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

  • इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल

    इटली में सख्त कानून: नाबालिगों की लूटपाट पर माता-पिता भरेंगे हर्जाना, हिंसक प्रदर्शन में 5 साल तक जेल


    नई दिल्ली। इटली में हिंसक प्रदर्शनों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सुरक्षा से जुड़े कई कड़े प्रावधानों को मंजूरी दी है। नए कानून के तहत प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वालों को पांच साल तक की जेल और 20 हजार यूरो तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल नाबालिगों के माता-पिता को भी नुकसान की भरपाई करनी पड़ सकती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तरी इटली के कई शहरों में हुई हिंसा के बाद सरकार ने ये कदम उठाए हैं। इनमें देश की आर्थिक राजधानी मिलान भी शामिल है। यहां युवाओं के समूहों ने दुकानों के शीशे तोड़े, सामान लूटा और पुलिस पर हमले किए। प्रधानमंत्री मेलोनी ने सोशल मीडिया पर नए कानून की जानकारी देते हुए कहा कि तोड़फोड़ और चोरी कोई क्रांतिकारी काम नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तोड़फोड़ और चोरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपराध हैं।

    पांच साल तक जेल और 20 हजार यूरो जुर्माने का प्रावधान
    नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं। इनके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के समूह में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति को पांच साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा अधिकतम 20 हजार यूरो का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

    यदि प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अपना चेहरा ढका हो या किसी अन्य व्यक्ति को चोट पहुंची हो, तो सजा और बढ़ सकती है। नए नियमों के तहत अधिकारियों को सार्वजनिक संपत्ति या अन्य स्थानों को हुए नुकसान की भरपाई तत्काल सुनिश्चित करने के आदेश देने का अधिकार भी दिया गया है।

    नाबालिगों की तोड़फोड़ पर माता-पिता की भी जवाबदेही
    सरकार ने नाबालिगों की ओर से की जाने वाली तोड़फोड़ और लूटपाट को लेकर भी सख्ती बढ़ाई है। यदि ऐसी घटनाओं में नाबालिग शामिल पाए जाते हैं, तो उनके माता-पिता को नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

    इसके अलावा पुलिस को 14 से 17 साल की उम्र के उन किशोरों को हिरासत में लेने की अनुमति भी दी गई है, जिन्होंने कोई अपराध नहीं किया है, लेकिन उनके खतरनाक होने के सबूत मौजूद हैं। इससे पहले यह अधिकार केवल वयस्कों के मामले में लागू होता था।

    मिलान में पुलिस के साथ तैनात होंगे 500 सैनिक
    सरकार को शनिवार को होने वाले प्रदर्शनों के दौरान फिर से हिंसा भड़कने की आशंका है। इसे देखते हुए मिलान में 2026 के अंत तक पुलिस की मदद के लिए 500 सैनिक तैनात किए जाएंगे।

    रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, सेना महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में पुलिस की मदद करेगी।

    2022 से सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त कदम उठा रही सरकार
    प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार वर्ष 2022 में सत्ता में आने के बाद से सुरक्षा के मुद्दे पर कई सख्त फैसले ले चुकी है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसे कदम अपराध और हिंसा की मूल वजहों को दूर करने में पर्याप्त साबित नहीं होते। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में इटली की जेलों में कैदियों की संख्या 17 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

    महंगाई और डीजल की कीमतों पर ट्रक ड्राइवरों का प्रदर्शन
    इटली के दक्षिणी हिस्से में बढ़ती महंगाई और डीजल की कीमतों को लेकर ट्रक ड्राइवरों के प्रदर्शन भी जारी हैं। सड़कें जाम किए जाने से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कुछ पास्ता कंपनियों को उत्पादन रोकना पड़ा है, जबकि कृषि संगठनों ने फल और सब्जियों के खराब होने की आशंका जताई है।

    सरकार ने ट्रांसपोर्ट कंपनियों को नई सहायता देने का भरोसा दिया है। ऐसे में एक ओर सरकार हिंसक प्रदर्शनों पर सख्ती बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर महंगाई और परिवहन से जुड़े विरोध प्रदर्शनों से भी निपटने की चुनौती बनी हुई है।

  • MP Weather: दशहरे पर भी बरसे बादल, आज 21 जिलों में बारिश का अलर्ट; 40 Km की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

    MP Weather: दशहरे पर भी बरसे बादल, आज 21 जिलों में बारिश का अलर्ट; 40 Km की रफ्तार से चलेंगी हवाएं


    भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का दौर थम नहीं रहा है। दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय होने से प्रदेश के पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में पिछले पांच दिन से आंधी-बारिश हो रही है। मंगलवार को दशहरे के दिन भी कई इलाकों में बारिश हुई, जिससे कुछ जगह रावण के पुतले भीग गए। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन तक प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में इसी तरह मौसम बने रहने का अनुमान है।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बुधवार को प्रदेश के 21 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चलने की भी संभावना है।

    इन 21 जिलों में बारिश का अनुमान
    मौसम विभाग के मुताबिक, बुधवार को इंदौर, उज्जैन, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, धार, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में बारिश हो सकती है।

    2022 के बाद इस बार दशहरे पर हुई बारिश
    मंगलवार को दशहरे के दिन रतलाम, महू समेत कई जगह बारिश हुई। बारिश के कारण कुछ स्थानों पर रावण के पुतले भीग गए। ऐसे में आयोजकों को पुतलों को बरसाती से ढंकना पड़ा। इससे पहले वर्ष 2022 में भी दशहरे के दिन तेज बारिश हुई थी। भोपाल में बारिश से रावण का पुतला भीगने के कारण दहन नहीं हो पाया था। बाद में पुतले पर केरोसिन और पेट्रोल डालकर उसे जलाने का प्रयास किया गया था। प्रदेश के अन्य जिलों में भी बारिश के चलते रावण दहन प्रभावित हुआ था।

    कई शहरों में रात का पारा 20 डिग्री से नीचे
    मौसम विभाग के अनुसार, बीती रात प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। पचमढ़ी में रात का तापमान 17 डिग्री, कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 18.1 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.2 डिग्री और ग्वालियर में 18.3 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, दिन के तापमान की बात करें तो रतलाम, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार रिकॉर्ड किया गया।

    3 अक्टूबर को विदा हो चुका है मानसून, फिर भी बारिश
    मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही विदा हो गया था। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून की वापसी हो गई, लेकिन मौसम प्रणालियों के सक्रिय होने से बारिश जारी है। पिछले एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला है। इनमें से कई जिलों में पिछले पांच दिन से तेज बारिश हो रही है। बुधवार को भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला असर
    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का मिला-जुला असर देखने को मिलता है। इस बार भी ऐसा ही मौसम बना हुआ है। अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने के साथ धूप खिली, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। दूसरी ओर, प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर भी जारी है।

  • आज का राशिफल: वृषभ को व्यापार में तेजी, मिथुन को भाग्य का साथ, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    आज का राशिफल: वृषभ को व्यापार में तेजी, मिथुन को भाग्य का साथ, जानें सभी 12 राशियों का भविष्यफल

    नई दिल्ली ।बुधवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग संभावनाएं लेकर आ सकता है। कुछ राशियों को कार्यक्षेत्र और कारोबार में प्रगति के अवसर मिल सकते हैं, जबकि कुछ को धैर्य, सावधानी और खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। वृषभ राशि के जातकों के लिए व्यापार में तेजी और पद-प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के संकेत हैं। वहीं, मेष राशि वालों को आर्थिक उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। ज्योतिषीय राशिफल के अनुसार जानिए मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए कैसा रह सकता है कल का दिन।

    मेष राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र और व्यापार में तेजी बने रहने की संभावना है। आर्थिक उन्नति के नए अवसर मिल सकते हैं और महत्वपूर्ण काम पूरे करने में सफलता मिल सकती है। अधिकारियों और सलाहकारों का सहयोग मिलने से आपकी साख और प्रभाव बढ़ सकता है। परिवार के लोगों से मुलाकात होने के संकेत हैं। शुभ अंक 3, 5 और 9 हैं। खाकी रंग शुभ माना गया है। भगवान गणेश की पूजा और हरी वस्तुओं का दान करने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों का प्रबंधन और कामकाज बेहतर रह सकता है। कारोबार में तेजी बनाए रखने और उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने की कोशिश सफल हो सकती है। अधिकारियों से सहयोग मिलने के साथ पद और प्रतिष्ठा मजबूत होने के संकेत हैं। सुख-सुविधाओं में भी बढ़ोतरी संभव है। प्रतिस्पर्धा में सक्रिय रहकर लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। शुभ अंक 3, 5 और 6 हैं। फिरोजी रंग शुभ रहेगा। गणेश पूजा, हरी वस्तुओं का दान और ध्यान-साधना लाभकारी माने गए हैं।

    मिथुन राशि के जातकों को भाग्य का साथ मिल सकता है। कामकाज में लाभ बढ़ने और सुखद अवसर मिलने की संभावना है। उच्च शिक्षा और कार्यकुशलता पर ध्यान देने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। आकर्षक प्रस्ताव मिलने के संकेत हैं और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। शुभ अंक 3, 5 और 6 हैं। हरा रंग शुभ माना गया है।

    कर्क राशि वालों के लिए दिन सामान्य रह सकता है। परिवार का सहयोग मिलेगा, लेकिन अप्रत्याशित परिस्थितियां चिंता बढ़ा सकती हैं। जरूरी कामों पर ध्यान देना और निजी मामलों में सतर्क रहना उचित होगा। महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है। शुभ अंक 2, 3 और 5 हैं।

    सिंह राशि के पेशेवर कामों में गति आ सकती है। साझेदारी और टीमवर्क से लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। व्यापार में भरोसा बढ़ने और नेतृत्व क्षमता बेहतर होने के संकेत हैं। निजी मामलों को सुलझाने के अवसर मिल सकते हैं और दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रह सकती हैं। शुभ अंक 1, 3 और 5 हैं।

    कन्या राशि वालों को मेहनत और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा। पेशेवर संबंध मजबूत करने से कामकाज में मदद मिल सकती है। मित्रों का सहयोग मिलेगा, लेकिन विरोधियों की सक्रियता को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। नए लोगों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने और जल्द प्रतिक्रिया देने से बचें। शुभ अंक 3 और 5 हैं।

    तुला राशि के लिए दिन उत्साह बढ़ाने वाला हो सकता है। मित्रों और करीबियों के साथ समय बिताने के अवसर मिल सकते हैं। पढ़ाई, कला और कौशल से जुड़े मामलों में बेहतर प्रदर्शन की संभावना है। पेशेवर लोगों को मनचाही उपलब्धि मिल सकती है। शुभ अंक 3, 5 और 6 हैं।

    वृश्चिक राशि वालों को भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए धैर्य से काम लेना चाहिए। जल्दबाजी से असहज स्थिति बन सकती है। परिवार के लोगों के साथ संवाद बनाए रखें और बातचीत में विनम्र रहें। सुख-सुविधाओं से जुड़ी खरीदारी संभव है। शुभ अंक 3, 5 और 9 हैं।

    धनु राशि वालों का आत्मविश्वास और बातचीत का तरीका प्रभावशाली रह सकता है। सामाजिक गतिविधियों में अच्छा प्रदर्शन करने और भाई-बंधुओं से संबंध मजबूत करने के अवसर मिलेंगे। यात्रा की संभावना भी है। करियर और कारोबार में मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए काम पर ध्यान दें। शुभ अंक 1 और 3 हैं।

    मकर राशि के जातकों के पारिवारिक प्रयास सफल हो सकते हैं। घर में सुख-समृद्धि और संबंधों में सामंजस्य बना रहने के संकेत हैं। धन-संपत्ति से जुड़े मामलों में प्रगति हो सकती है। बचत पर ध्यान देने से आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। शुभ अंक 5 और 8 हैं।

    कुंभ राशि वालों को रचनात्मक कार्यों और नई योजनाओं पर आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। वाणी और व्यवहार से लोग प्रभावित हो सकते हैं। कामकाज में सहयोग मिलने और बाधाएं कम होने की संभावना है। शुभ अंक 3, 5 और 8 हैं।

    मीन राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत होगी। विरोधियों की गतिविधियों के बीच अनुशासन और धैर्य बनाए रखें। निवेश और न्यायिक मामलों में लापरवाही से बचना चाहिए। रिश्तेदारों और बड़ों का सहयोग मिल सकता है। दूर देश से जुड़े कामों में सक्रियता बढ़ सकती है, लेकिन निर्णय सोच-समझकर लें। शुभ अंक 3, 6 और 9 हैं।

  • शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन

    शिवपुरी की महारानी मां काली आज पालकी में निकलेंगी, हजारों भक्तों के साथ गणेश कुंड में होगा विसर्जन


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर धार्मिक उत्सव और प्रतिमा विसर्जन की गतिविधियां तेज रहेंगी। खटीक मोहल्ले में विराजमान मां काली की प्रतिमा को श्रद्धालु पालकी में बैठाकर भव्य शोभायात्रा के साथ विसर्जन स्थल गणेश कुंड तक ले जाएंगे। शिवपुरी की महारानी के नाम से प्रसिद्ध मां काली की इस यात्रा में हजारों भक्तों के शामिल होने की संभावना है। यात्रा का निर्धारित समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक रखा गया है। इस दौरान यात्रा मार्ग को वाहनों के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र बनाया जाएगा।

    खटीक समाज द्वारा प्रतिवर्ष शारदीय नवरात्रि में खटीक मोहल्ले में मां काली की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नवरात्रि के समापन पर दशहरे के दिन प्रतिमा को पालकी में विराजमान कर विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा है। इस शोभायात्रा की खास पहचान पालकी में मां काली की प्रतिमा का नगर भ्रमण और श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी है। प्रतिमा की पालकी लगभग 2 किलोमीटर की दूरी करीब 30 से 35 मिनट में तय करती है। यात्रा को देखने और मां के दर्शन करने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्र होते हैं।

    इस बार तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण महाअष्टमी, महानवमी और दशहरे के आयोजन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं देखने को मिलीं। शारदीय नवरात्रि में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट के बाद शुरू हुई और 19 अक्टूबर को सुबह लगभग 10 बजकर 52 मिनट तक रही। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो गई। इसी कारण 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों पर्व मनाए गए, जबकि 20 अक्टूबर को दशहरा मनाया जा रहा है। कुछ श्रद्धालुओं ने नवरात्रि के नौ दिनों के अनुसार पूजा-अर्चना और विसर्जन का कार्यक्रम पहले ही पूरा कर लिया था। इसके चलते सोमवार को भी शहर के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।

    मंगलवार को शिवपुरी में मां काली के साथ अन्य देवी प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं भी निकाली जाएंगी। शहर में आधा सैकड़ा से अधिक शोभायात्राएं निकलने की संभावना है। माधव चौक पर स्थापित वैष्णो देवी की झांकी का चल समारोह भी दशहरे के दिन निकाला जाएगा। यह शोभायात्रा शाम को शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरेगी। इसके अलावा क्षत्रिय समाज का चल समारोह भी आयोजित होगा। प्रतिमाओं की शोभायात्राओं के चलते शहर में देर रात तक धार्मिक गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    श्रद्धालुओं की भीड़ और शोभायात्राओं को व्यवस्थित रखने के लिए जिला प्रशासन तथा पुलिस ने यातायात प्रबंध किए हैं। मां काली की यात्रा के दौरान दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक संबंधित मार्ग पर वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। शाम 6 बजे से माधव चौक के चारों ओर के रास्ते कार्यक्रम समाप्त होने तक बंद रहेंगे। फिजिकल रोड से माधव चौक की ओर और गुरुद्वारा की तरफ से कोर्ट रोड पर अनावश्यक वाहनों का प्रवेश रोका जाएगा। लक्ष्मी निवास से सब्जी मंडी और हंस बिल्डिंग की ओर जाने वाला मार्ग शाम 7 बजे से अंतिम झांकी निकलने तक बंद रहेगा।

    यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने बताया कि व्यवस्था बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। माधव चौक पर वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। सुरवाया तिराहे पर मंगलवार रात 7 बजे से बुधवार सुबह 10 बजे तक हाईवे से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य अमोला में विसर्जन के दौरान संभावित हादसों को रोकना है। भीड़ कम होने के बाद मार्गों को चरणबद्ध तरीके से खोला जाएगा। श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से निर्धारित यातायात व्यवस्था का पालन करने की अपेक्षा की गई है।

  • शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद

    शिवपुरी में तीन जगह होगा रावण दहन, 70 फीट के पुतले के साथ पहली बार जलेगा मेघनाद


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी शहर में मंगलवार, 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व तीन प्रमुख स्थानों पर रावण दहन के साथ मनाया जाएगा। इस बार शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ एक खास आकर्षण भी रहेगा। गांधी पार्क में 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले के साथ पहली बार मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। वहीं, सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में 73 साल पुरानी परंपरा के तहत रावण दहन होगा। झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में भी दशहरे के आयोजन की तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    शहर के सिद्धेश्वर मंदिर मैदान, गांधी पार्क और काली माता मंदिर परिसर में अलग-अलग समय पर रावण दहन किया जाएगा। इन आयोजनों में राम-रावण युद्ध का मंचन, धार्मिक चल समारोह और शस्त्र पूजन जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। आयोजक विजयादशमी के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों की तैयारियों में जुटे हैं।

    सिद्धेश्वर मंदिर मैदान में पंजाबी परिषद की ओर से शाम 7:30 बजे रावण दहन किया जाएगा। परिषद पिछले 73 वर्षों से इस आयोजन की परंपरा निभाती आ रही है। इस बार यहां 45 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया गया है, जबकि पिछले वर्ष पुतले की ऊंचाई 51 फीट थी। पुतला तैयार करने की जिम्मेदारी इस बार भी आजाद खान ने संभाली है। रावण दहन से पहले मैदान में राम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया जाएगा। इसके बाद पुतले का दहन होगा।

    इस आयोजन से पहले आनंदपुर कुटिया जल मंदिर से भगवान राम की बारात और चल समारोह निकाला जाएगा। यह यात्रा हंस बिल्डिंग, ओरिएंटल बैंक, धर्मशाला रोड, मिर्ची बाजार और गोयल मेडिकल के सामने से होते हुए माधव चौक पहुंचेगी। इसके बाद चल समारोह सिद्धेश्वर मंदिर मैदान की ओर बढ़ेगा। धार्मिक उद्घोषों के बीच श्रद्धालु इस आयोजन में भाग लेंगे।

    गांधी पार्क में मानव वेलफेयर सोसायटी की ओर से रात 8 बजे रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यहां 70 फीट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया है। इस बार आयोजन की विशेषता यह है कि रावण के साथ मेघनाद का पुतला भी जलाया जाएगा। शिवपुरी के इस आयोजन में पहली बार दोनों पुतलों का दहन होगा। कार्यक्रम में भगवान राम की भूमिका निभाने वाले कलाकार दोनों पुतलों का दहन करेंगे।

    इसी समय झांसी रोड स्थित काली माता मंदिर परिसर में नरसिंह मंदिर दशहरा समिति की ओर से रावण दहन किया जाएगा। समिति ने यहां 40 फीट ऊंचा पुतला तैयार कराया है। पिछले साल भी पुतले की ऊंचाई 40 फीट ही थी। इस परिसर में रावण दहन के साथ पथ संचलन और पुलिस शस्त्र पूजन का कार्यक्रम भी रखा गया है। समिति ने नागरिकों, समाजसेवियों और धर्मप्रेमियों से आयोजन में शामिल होने की अपील की है।

    शहर के इन तीन प्रमुख स्थानों के अलावा शिवपुरी जिले के अन्य कस्बों और क्षेत्रों में भी विजयादशमी मनाई जाएगी। विभिन्न स्थानों पर रावण दहन और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाएगा। इस बार सिद्धेश्वर मैदान की पुरानी परंपरा और गांधी पार्क में पहली बार मेघनाद दहन शिवपुरी के दशहरा आयोजनों के प्रमुख आकर्षण रहेंगे।