Author: bharati

  • शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    शुक्रवार व्रत से सुख-समृद्धि की कामना, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा; इन नियमों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली । हिंदू धार्मिक परंपरा में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और संतोषी माता की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ व्रत रखने से घर में सुख शांति और समृद्धि का भाव बढ़ता है। शुक्रवार को अलग अलग परंपराओं के अनुसार संतोषी माता व्रत और वैभव लक्ष्मी व्रत किया जाता है। इसलिए व्रत शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप किस परंपरा के अनुसार उपवास कर रहे हैं क्योंकि दोनों की पूजा विधि और नियम अलग हो सकते हैं।

    संतोषी माता का शुक्रवार व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और साफ कपड़े पहनकर पूजा की तैयारी करते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके संतोषी माता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा स्थल पर कलश रखा जा सकता है और माता को लाल या गुलाबी फूल तथा लाल चुनरी अर्पित करने की परंपरा है। इसके बाद धूप और दीप जलाकर माता का ध्यान किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा के दौरान मन को शांत रखना और श्रद्धा के साथ माता का स्मरण करना व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    संतोषी माता के व्रत में गुड़ और चने का भोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा के दौरान गुड़ और चना माता को अर्पित किया जाता है और बाद में इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। व्रत कथा का पाठ या श्रवण भी इस पूजा का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। कथा पूरी होने के बाद माता की आरती की जाती है और परिवार के सदस्यों में प्रसाद बांटा जाता है। धार्मिक परंपरा में यह व्रत अक्सर लगातार सोलह शुक्रवार तक करने का विधान बताया जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार व्रत की अवधि तय करते हैं।

    संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने का विशेष नियम माना जाता है। नींबू इमली अचार और अन्य खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं किया जाता। कुछ परंपराओं में व्रत करने वाले व्यक्ति के साथ परिवार के सदस्यों को भी खट्टी चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में अंतर हो सकता है। इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।

    अगर शुक्रवार का व्रत माता लक्ष्मी के लिए रखा जा रहा है तो पूजा में लाल वस्त्र पर माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करके फूल फल अक्षत और दीप अर्पित करने की परंपरा है। शाम के समय भी माता की पूजा और दीपदान किया जा सकता है। वैभव लक्ष्मी व्रत से जुड़ी परंपराओं में संकल्प के साथ निश्चित संख्या में शुक्रवार तक व्रत रखने और अंत में उद्यापन करने का विधान भी मिलता है। उद्यापन की विधि व्रत की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि संयम और सदाचार पर भी जोर दिया जाता है। क्रोध से बचना कटु वचन न बोलना और किसी के प्रति गलत भावना न रखना धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है। व्रत के दिन जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है।

    इस तरह शुक्रवार व्रत को केवल मनोकामना पूरी करने का माध्यम मानने के बजाय श्रद्धा संयम और सकारात्मक दिनचर्या के रूप में करना अधिक महत्वपूर्ण है। पूजा के नियमों में क्षेत्र और परिवार के अनुसार अंतर हो सकता है इसलिए किसी विशेष संकल्प या लंबे व्रत की शुरुआत से पहले योग्य पंडित या अपनी पारिवारिक परंपरा से जानकारी लेना बेहतर रहेगा। यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसे आस्था से जुड़े सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • Aaj Ka Rashifal 21 August 2026: चंद्रमा की स्थिति बढ़ाएगी भावनात्मक हलचल, जानें सभी 12 राशियों का हाल

    Aaj Ka Rashifal 21 August 2026: चंद्रमा की स्थिति बढ़ाएगी भावनात्मक हलचल, जानें सभी 12 राशियों का हाल


    नई दिल्ली । 21 अगस्त 2026 शुक्रवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से उतार चढ़ाव से भरा रह सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार चंद्रमा वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। इस स्थिति को भावनात्मक रूप से संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में कई लोगों को किसी फैसले पर पहुंचने से पहले अपनी भावनाओं के बजाय परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज कुछ राशियों को काम और करियर में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं जबकि कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में विशेष सावधानी बरतनी होगी।

    मेष राशि वालों के लिए दिन मेहनत का अच्छा परिणाम देने वाला रह सकता है। पुराने निवेश या पहले किए गए प्रयासों से संतोषजनक संकेत मिल सकते हैं। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और परिवार से जुड़ी कोई उपलब्धि खुशी दे सकती है। हालांकि किसी बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। वृषभ राशि वालों को धैर्य और निरंतरता के साथ आगे बढ़ना होगा। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए आर्थिक बातचीत आगे बढ़ सकती है लेकिन किसी पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करने से बचें।

    मिथुन राशि वालों के लिए करियर के लिहाज से अच्छी खबर मिल सकती है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अवसर मिलने के संकेत हैं। यात्रा भी लाभकारी हो सकती है। हालांकि धन से जुड़े फैसलों में सावधानी जरूरी है। कर्क राशि वालों को परिवार और काम के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। कार्यक्षेत्र में विकास का मौका मिल सकता है और वरिष्ठ लोगों की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर कदम उठाएं।

    सिंह राशि वालों के लिए आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता मजबूत रहने की संभावना है। कार्यक्षेत्र में आपकी बात को महत्व मिल सकता है। किसी बड़े व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। कन्या राशि वालों के लिए प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा। अधूरे काम पूरे करने की दिशा में प्रगति हो सकती है और नए लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ दे सकता है।

    तुला राशि वालों के लिए दिन में कुछ अस्थायी रुकावटें आ सकती हैं लेकिन धैर्य रखने पर स्थिति संभल सकती है। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। वृश्चिक राशि वालों में आज ऊर्जा और जोश भरपूर रह सकता है। नई योजनाओं पर काम करने की इच्छा बढ़ेगी लेकिन मनमानी या जल्दबाजी विवाद की वजह बन सकती है। इसलिए संयम के साथ फैसले लें।

    धनु राशि वालों को कार्यस्थल पर सतर्क रहना होगा। गलत जानकारी या अधूरी सूचना के आधार पर फैसला लेने से नुकसान हो सकता है। खर्चों पर नियंत्रण रखना भी जरूरी होगा। मकर राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। मित्रों और अनुभवी लोगों का सहयोग किसी मुश्किल काम को आसान कर सकता है। कुंभ राशि वालों को नई तकनीक और नए विचारों का फायदा मिल सकता है लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। मीन राशि वालों के लिए दिन रचनात्मकता और आत्ममंथन का रहेगा। काम में नई दिशा मिल सकती है लेकिन आर्थिक निर्णय लेते समय विशेष सावधानी बरतना उचित होगा।

    कुल मिलाकर 21 अगस्त का दिन आत्मविश्वास के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश देता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति अवसरों के साथ कुछ चुनौतियां भी ला सकती है। इसलिए किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी के बजाय परिस्थितियों का आकलन करना बेहतर रहेगा। यह राशिफल धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए।

  • भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज

    भोपाल में रहवासी इलाकों की दुकानों पर सीलिंग की तैयारी, 8 हजार से ज्यादा नोटिस; व्यापारियों का विरोध तेज


    भोपाल ।
    भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार को लेकर नगर निगम की कार्रवाई अब और सख्त होती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम ने शहरभर में ऐसे भवनों और संपत्तियों की पहचान शुरू की है जहां आवासीय उपयोग की अनुमति के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 62 हजार से ज्यादा संपत्तियां जांच के दायरे में हैं और नोटिस की संख्या लगातार बढ़ रही है। 18 अगस्त तक नगर निगम की ओर से 6589 नोटिस जारी किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद भी सर्वे और नोटिस जारी करने की प्रक्रिया जारी रही।

    नगर निगम की कार्रवाई का अगला चरण सुनवाई और अंतिम आदेश से जुड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक नोटिस मिलने के बाद संबंधित संपत्ति के दस्तावेज और वास्तविक उपयोग की जांच की जाएगी। मामले के गुण दोष के आधार पर अंतिम आदेश जारी होगा। इसके बाद यदि व्यावसायिक गतिविधि नियमों के विपरीत पाई गई और आदेश का पालन नहीं हुआ तो प्रतिष्ठान को सील करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में अंतिम चेतावनी भी दी जा चुकी है और ऐसे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की तैयारी है।

    इस पूरे अभियान ने भोपाल के व्यापारियों में चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि शहर के कई इलाकों में वर्षों से छोटे कारोबार चल रहे हैं और अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग होने से दुकानदारों के साथ वहां काम करने वाले कर्मचारियों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से ऐसी नीति बनाने की मांग की है जिससे नियमों के दायरे में रहकर पुराने व्यावसायिक उपयोग को नियमित करने का रास्ता निकले। व्यापारियों की ओर से मिक्स्ड लैंड यूज और नए मास्टर प्लान को लेकर भी मांग उठाई जा रही है।

    कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर भी उतर चुके हैं। रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन और चक्काजाम के दौरान कारोबारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। महिला कारोबारियों ने भी विरोध में हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ब्यूटी पार्लर क्लीनिक दुकान और दूसरे छोटे व्यवसाय बंद होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित हो सकती है। व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यावहारिक समाधान निकालने की अपील की है।

    दूसरी तरफ रहवासी संगठन इस कार्रवाई के समर्थन में हैं। उनका कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से पार्किंग ट्रैफिक शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। इसी वजह से कई रहवासी संगठनों ने अभियान चलाकर आवासीय क्षेत्रों में नियमों के खिलाफ कारोबार पर रोक लगाने की मांग की है। भोपाल में रहवासियों की ओर से टॉर्च मार्च भी निकाला जा चुका है और आगे भी विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।

    नगर निगम का सर्वे केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहने वाला है। अधिकारियों की ओर से भवन की अनुमति भूमि उपयोग और आसपास की स्थिति की भी जांच की जा रही है। मुख्य मार्गों से लेकर उनसे जुड़ी गलियों और कॉलोनियों तक सर्वे का दायरा बढ़ाया गया है। जल निकायों हरित पट्टी और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित निर्माण भी जांच के दायरे में हैं। नगर निगम का उद्देश्य यह पता लगाना है कि स्वीकृत उपयोग और मौके पर हो रही गतिविधि में कितना अंतर है।

    इस विवाद की जड़ में भोपाल की पुरानी शहरी योजना और भूमि उपयोग का सवाल भी है। व्यापारियों का कहना है कि शहर के कई हिस्सों में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ चल रही हैं। उनका तर्क है कि मास्टर प्लान में स्पष्ट नीति बनाकर इस स्थिति का समाधान किया जा सकता है। दूसरी ओर रहवासियों का कहना है कि नियमों को नजरअंदाज कर किसी भी इलाके को धीरे धीरे बाजार में बदलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि भोपाल में आगे रास्ता क्या निकलेगा। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद नगर निगम पर नियमों का पालन कराने का दबाव है तो दूसरी तरफ हजारों कारोबारियों की आजीविका का सवाल है। ऐसे में सुनवाई के बाद होने वाले अंतिम आदेश और सरकार की भविष्य की शहरी नीति इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी। फिलहाल नोटिस और सर्वे के बीच भोपाल के व्यापारियों और रहवासियों की निगाह नगर निगम की अगली कार्रवाई पर टिकी है।

  • त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग

    त्योहारी सीजन से पहले महंगी हुई शक्कर, बढ़ते भाव पर सरकार की नजर; स्टॉक और जमाखोरी की जांच की मांग


    भोपाल ।
    भोपाल में शक्कर की कीमतों में तेजी ने त्योहारी सीजन से पहले आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय व्यापारियों के मुताबिक बाजार में शक्कर के भाव तेजी से ऊपर जा रहे हैं और खुदरा बाजार में ग्राहकों को इसके लिए और अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में भोपाल के थोक भाव में 19 अगस्त को करीब 2 रुपये की बढ़ोतरी के बाद कीमत 62 रुपये किलो तक पहुंचने की बात कही गई है। इसलिए अलग-अलग क्वालिटी और बाजार स्तर के हिसाब से भाव में अंतर संभव है।

    शक्कर के बढ़ते दामों का असर केवल घरेलू रसोई तक सीमित नहीं है। किराना दुकानदारों के साथ मिठाई और खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों पर भी इसका असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जब किसी जरूरी खाद्य वस्तु के भाव लगातार बदलते हैं तो दुकानदारों के लिए नया स्टॉक खरीदना और ग्राहकों को स्थिर कीमत पर माल उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाता है। वहीं ग्राहक भी बढ़े हुए भाव को लेकर सवाल करने लगे हैं।

    बाजार विशेषज्ञों ने तेजी के पीछे मांग और आपूर्ति के साथ कारोबार में बढ़ती सट्टेबाजी और जमाखोरी की आशंका पर भी नजर रखने की जरूरत बताई है। हालांकि किसी कारोबारी या समूह द्वारा कृत्रिम कमी पैदा किए जाने की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। ऐसे में वास्तविक स्टॉक और बाजार में हो रही खरीद बिक्री के आंकड़ों की निगरानी महत्वपूर्ण हो जाती है।

    राष्ट्रीय स्तर पर भी शक्कर की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। रॉयटर्स के मुताबिक घरेलू कीमतें करीब दो महीनों में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ी हैं और उत्पादन में कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

    बढ़ते भाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने भी कदम उठाए हैं। सरकार ने थोक उपभोक्ताओं के लिए शक्कर के स्टॉक पर सीमा लागू करने का फैसला किया है। सितंबर से नवंबर के बीच 10 टन से अधिक मासिक खपत करने वाले थोक उपभोक्ताओं को 15 दिन से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इससे जमाखोरी पर अंकुश लगाने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    इसके साथ ही सरकार ने 10 लाख टन कच्ची शक्कर के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति भी दी है। इसका मकसद घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति लाकर कीमतों पर दबाव कम करना है। सरकार की योजना के तहत आयात की प्रक्रिया अगस्त के अंतिम सप्ताह में शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक इसकी अनुमति दी गई है।

    भोपाल के बाजार में अब निगाह इस बात पर है कि आने वाले दिनों में शक्कर की सप्लाई और कीमत किस दिशा में जाती है। कारोबारियों की मांग है कि बड़े स्टॉकिस्ट और थोक व्यापारियों के स्टॉक की नियमित निगरानी हो तथा असामान्य खरीद या भंडारण की स्थिति में जांच की जाए। इससे वास्तविक कमी और कृत्रिम तेजी के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा।

    फिलहाल शक्कर की कीमतों में तेजी ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि त्योहारी मांग बढ़ने के साथ आम आदमी की रसोई पर इसका कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। सरकार के स्टॉक नियंत्रण और आयात जैसे कदमों से बाजार में आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद है। लेकिन स्थानीय स्तर पर कीमतें कब स्थिर होंगी इसका असर सप्लाई और बाजार की गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

  • ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति

    ट्रंप की सबसे बड़े विरोधी से फिर यारी! कभी कोर्ट में खिलाफ गवाही देने वाले कोहेन के शो में पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके पूर्व करीबी सहयोगी माइकल कोहेन के बीच सालों पुरानी कड़वाहट अब कम होती नजर आ रही है। कभी ट्रंप के खिलाफ अदालत में अहम गवाही देने वाले कोहेन के रेडियो शो में ट्रंप पहुंचे। बातचीत के दौरान दोनों के बीच पुरानी तल्खी की जगह दोस्ताना अंदाज दिखाई दिया। कोहेन ने पुराने दिनों को याद करते हुए ट्रंप को फिर ‘बॉस’ कहकर संबोधित किया।

    कभी ट्रंप के लिए सबकुछ करने को तैयार थे कोहेन

    माइकल कोहेन लंबे समय तक ट्रंप के बेहद करीबी माने जाते थे। करीब 15 साल तक दोनों साथ रहे। उस दौर में कोहेन खुद को ट्रंप का बेहद वफादार बताते थे। लेकिन 2018 में दोनों के रिश्तों में बड़ी दरार आ गई।

    जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद कोहेन ने ट्रंप के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 2019 में अमेरिकी कांग्रेस के सामने भी गवाही दी और ट्रंप से जुड़े कई मामलों पर अपनी बात रखी।

    हश-मनी केस में ट्रंप के खिलाफ गवाही

    2024 में कोहेन ट्रंप के हश-मनी मामले में अभियोजन पक्ष के प्रमुख गवाह बने। उन्होंने दावा किया कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ऐसी जानकारियों को सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की गई थी, जो ट्रंप के चुनाव अभियान के लिए नुकसानदेह हो सकती थीं।

    इस मुकदमे में ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया। कोहेन की गवाही केस की अहम कड़ी रही। दूसरी तरफ कोहेन खुद भी कानूनी मामलों में फंसे और कई आरोपों में दोष स्वीकार करने के बाद उन्हें तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई।

    किताब में ट्रंप पर लगाए थे गंभीर आरोप

    कोहेन ने 2020 में प्रकाशित अपनी किताब में ट्रंप पर तीखे आरोप लगाए थे। उन्होंने ट्रंप को बेहद चालाक और लोगों को प्रभावित करने वाला व्यक्ति बताया था। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया था कि पुराने रिश्ते और भावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई थीं।

    बाद में कोहेन ने अपने रुख में बदलाव करते हुए दावा किया कि ट्रंप के खिलाफ गवाही देने के दौरान जांच एजेंसियों ने उन पर दबाव बनाया था। ट्रंप ने भी कोहेन के इन बयानों को सोशल मीडिया पर साझा किया था।

    एक साल से फिर हो रही थी बातचीत

    कोहेन ने बताया कि पिछले करीब एक साल से दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई है। उनका कहना है कि दोनों ने पुरानी कड़वाहट को पीछे छोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माफी का मतलब अतीत को मिटा देना नहीं है, बल्कि आगे बढ़ना है।

    रेडियो शो का माहौल भी दोनों के बदले रिश्ते की झलक दे रहा था। कार्यक्रम में दोस्ती और दोबारा साथ आने की थीम वाले गाने बजाए गए।

    कोहेन ने फिर मांगी सजा में राहत

    कोहेन ने यह भी बताया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपनी सजा माफी की अर्जी दोबारा भेजी है। पहले उनकी अर्जी खारिज हो चुकी है। अब उन्होंने नए सिरे से राहत की मांग की है और जल्द ही इस संबंध में फिर संपर्क करने की बात कही है।

    कभी ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले कोहेन और उनके ‘बॉस’ का दोबारा दोस्ताना अंदाज अमेरिकी राजनीति में रिश्तों के बदलते समीकरण की नई तस्वीर पेश कर रहा है।

  • सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    नई दिल्ली ।सावन का महीना शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में लोग खानपान में बदलाव करते हैं। बहुत से परिवारों में इस दौरान मांस, मछली, चिकन और अंडे से दूरी बनाई जाती है। कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन भी छोड़ देते हैं। आमतौर पर इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे जीवनशैली, संयम, जीवदया और मानसून के दौरान खाद्य सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी समझा जा सकता है।

    हिंदू परंपरा में सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और ध्यान तथा धार्मिक गतिविधियों में समय देते हैं। धार्मिक दृष्टि से साधना के समय भोजन में सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है। इसी सोच के तहत कई लोग मांसाहार छोड़कर हल्का और सात्त्विक भोजन अपनाते हैं।

    सात्त्विक भोजन की अवधारणा ताजे, पौष्टिक और अपेक्षाकृत हल्के भोजन से जुड़ी है। इसका उद्देश्य केवल खानपान को बदलना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और मन को शांत रखने की साधना से भी जोड़ा जाता है। हालांकि धार्मिक ग्रंथों में सावन के दौरान हर व्यक्ति के लिए मांसाहार पूरी तरह प्रतिबंधित होने का सीधा निर्देश नहीं मिलता। यह परंपरा धार्मिक आचार, स्थानीय मान्यताओं और लंबे समय से चली आ रही जीवनशैली का हिस्सा बनी है।

    सावन चातुर्मास की अवधि में भी आता है। परंपरागत रूप से यह समय तप, व्रत, दान और आत्मसंयम के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। वर्षा ऋतु में साधु-संतों द्वारा यात्राएं सीमित करने की परंपरा भी रही है। इसे मौसम की कठिन परिस्थितियों के साथ-साथ छोटे जीवों को अनजाने में नुकसान से बचाने की भावना से भी जोड़ा जाता है।

    बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मांस, मछली, चिकन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होने वाले होते हैं। इनके सुरक्षित भंडारण और उचित तापमान पर रखे जाने की जरूरत होती है। कच्चे मांस को गलत तरीके से रखने या संभालने पर उसमें मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव दूसरे खाद्य पदार्थों तक भी पहुंच सकते हैं।

    मानसून में जलभराव, दूषित पानी, अस्वच्छ बाजार और बिजली आपूर्ति में बाधा जैसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की स्वच्छता को प्रभावित कर सकती हैं। पुराने समय में रेफ्रिजरेशन और सुरक्षित परिवहन की सुविधाएं सीमित थीं। ऐसे वातावरण में जल्दी खराब होने वाले भोजन से दूरी बनाना व्यावहारिक सावधानी भी रही होगी।

    हालांकि विज्ञान यह नहीं कहता कि सावन के महीने में मांसाहार अपने आप हानिकारक हो जाता है। बीमारी का जोखिम मुख्य रूप से भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण और पकाने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यदि मांस या मछली ताजा हो, उचित तापमान पर रखी गई हो और पूरी तरह पकाई जाए तो संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

    इसी तरह यह दावा भी सही नहीं है कि सावन में हर व्यक्ति की पाचन शक्ति निश्चित रूप से कमजोर हो जाती है। उमस, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित खानपान और बहुत अधिक तला या मसालेदार भोजन कुछ लोगों में अपच और भारीपन बढ़ा सकता है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति की स्थिति और खानपान पर निर्भर करता है।

    इसलिए सावन में नॉनवेज खाना या छोड़ना व्यक्तिगत आस्था, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं पर निर्भर कर सकता है। धार्मिक दृष्टि से इसे संयम और जीवदया का माध्यम माना जाता है, जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसून में भोजन की स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव पर विशेष ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

    सावन की इस परंपरा को केवल डर या बीमारी से जोड़कर देखने के बजाय इसके व्यापक भाव को समझना जरूरी है। इसमें कुछ समय के लिए स्वाद और इच्छाओं पर नियंत्रण, सादगी अपनाने, प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और भोजन को लेकर सावधानी बरतने की भावना शामिल है।

  • 82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR

    82 लाख की जमीन 18 लाख में रजिस्ट्री का आरोप, कटनी की DSP नेहा पच्चीसिया सहित 3 पर FIR


    कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ सीएसपी नेहा पच्चीसिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। मामला हत्या के एक आरोपी के परिवार की बेशकीमती जमीन के कथित दबाव में कराए गए सौदे से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ BNS की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है। कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने FIR की पुष्टि की है।

    82.86 लाख की जमीन 18.20 लाख में रजिस्ट्री का आरोप

    शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, सरकारी गाइडलाइन के अनुसार जमीन की कीमत 82 लाख 86 हजार रुपए थी। आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री महज 18 लाख 20 हजार रुपए में कराई गई। दस्तावेजों में 15 लाख रुपए चेक और 3.20 लाख रुपए नकद भुगतान का उल्लेख है।

    मामला कुठला थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के केस से जुड़ा है। इस मामले में आकाश लोधी को मुख्य आरोपी बनाया गया था। गिरफ्तारी के बाद डिफॉल्ट जमानत पर बाहर आए आकाश ने जमीन के सौदे को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे।

    DSP पर परिवार पर दबाव बनाने का आरोप

    आकाश लोधी का आरोप है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद DSP नेहा पच्चीसिया ने उसके परिवार पर जमीन बेचने के लिए दबाव बनाया। उसने दावा किया कि उसके पिता रमेश लोधी को दो दिन तक DSP के घर पर बैठाकर रखा गया। इसके बाद सरकारी वाहन से ग्राम कन्हवारा स्थित करीब 2.15 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।

    आकाश के मुताबिक, जमीन की गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख रुपए थी, जबकि सौदा 1 करोड़ 7 लाख रुपए में तय किया गया था। आरोप है कि रजिस्ट्री के समय सिर्फ 15 लाख रुपए का चेक दिया गया और बाकी 92 लाख रुपए सात दिन में देने की बात कही गई।

    रकम नहीं मिली तो CM हेल्पलाइन में शिकायत

    आरोप के मुताबिक, बाकी रकम नहीं मिलने पर रमेश लोधी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की। उन्होंने जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति जताई। इसके बाद रमेश लोधी और उनके दामाद को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने का भी आरोप लगाया गया।

    शिकायत के बाद जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और IPS अधिकारी अनु बेनीवाल को जांच सौंपी गई। जांच में जमीन के सौदे, रजिस्ट्री और रकम के लेनदेन से जुड़े कई पहलुओं की पड़ताल की गई।

    बैंक खाते में ट्रांसफर हुए 15 लाख रुपए

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपए क्षितिज राज के खाते से ट्रांसफर किए गए थे। शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर और संबंधी बताया गया है।

    जांच में कथित तौर पर यह भी देखा गया कि आपराधिक मामले की जांच के दौरान रमेश लोधी पर जमीन कम कीमत में बेचने का दबाव बनाया गया या नहीं।

    पहले भी विवादों में रही हैं नेहा पच्चीसिया

    DSP नेहा पच्चीसिया इससे पहले भी शिकायतों और विवादों को लेकर चर्चा में रही हैं। एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की कथित अवैध वसूली की शिकायत के बाद कटनी एसपी ने उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड किया था। साथ ही DSP से तीन थानों का प्रभार भी वापस लिया गया था।

    इसके अलावा हत्या के एक मामले में समय पर चालान पेश नहीं होने के कारण आरोपी को डिफॉल्ट बेल मिलने का मामला भी विभागीय जांच के दायरे में आया था। इसी मामले में आरोपी ने नेहा पच्चीसिया के खिलाफ न्यायालय में परिवाद पेश कर जमीन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे।

    अब पुलिस जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

    लगातार सामने आई शिकायतों के बाद जबलपुर रेंज के आईजी के निर्देश पर मामलों की जांच कराई गई। विभागीय जांच और शिकायतों के आधार पर अब कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया, क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

    फिलहाल पुलिस जमीन के सौदे, कथित दबाव और बैंक खातों के जरिए हुए लेनदेन की जांच कर रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

  • MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट

    MP में नर्मदा-मंदाकिनी खतरे के निशान के पार, कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, आज भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम के कारण डिंडौरी, पन्ना, रीवा, सतना, छतरपुर समेत कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मैहर में आज सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई है, जबकि डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे।

    16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे में 4 से 8 इंच तक बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, पन्ना, सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की चेतावनी है। भोपाल समेत कई जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    मऊगंज में नदी उफनी, एक मजदूर बहा

    मऊगंज में अष्टभुजा नदी के उफान पर आने से नईगढ़ी गांव में बाढ़ की स्थिति बन गई। अमृत योजना के निर्माण कार्य में लगे चार मजदूर फंस गए, जिनमें से एक तेज बहाव में बह गया। बताया गया कि वह करीब दो घंटे तक मदद के लिए गुहार लगाता रहा।

    उमरिया में भी एक बुजुर्ग के बाढ़ में बहने की खबर है। डिंडौरी में भारी बारिश के कारण आंगनवाड़ी से लेकर 12वीं तक के स्कूल बंद रहे। खरमेर नदी का पानी पुल के ऊपर आने से डिंडौरी-मंडला स्टेट हाईवे पर आवागमन बंद हो गया।

    चित्रकूट में बाजार तक पहुंचा मंदाकिनी का पानी

    चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया। सड़कों पर पानी भरने के कारण नाव चलानी पड़ी। गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। रीवा के निराला नगर हॉस्टल समेत नौ इलाकों में जलभराव से घरों और दुकानों में रखा सामान प्रभावित हुआ है।

    MP में अब तक 23.6 इंच बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून ट्रफ समेत अन्य सिस्टम सक्रिय होने से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी बारिश हो रही है। 20 से 24 अगस्त के बीच बारिश का असर धीरे-धीरे मध्य और पश्चिमी हिस्सों की ओर बढ़ने के संकेत हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 599 मिमी यानी 23.6 इंच बारिश हो चुकी है। सामान्य बारिश 675.1 मिमी यानी 26.6 इंच के मुकाबले यह करीब 3 इंच कम है। प्रदेश में अब तक 11% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में 11% और पश्चिमी हिस्से में 12% बारिश सामान्य से कम है।

    39 जिलों में अब भी बारिश का घाटा

    प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से 4% से 58% तक कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का घाटा 19% तक है। वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी सामान्य से 5% से 39% तक कम बारिश हुई है।

    इसके उलट अनूपपुर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, बड़वानी, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, गुना, ग्वालियर, खंडवा, खरगोन और राजगढ़ में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

  • 10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा

    10 साल से बेटे के अगले गुरुवार का इंतजार, अब आश्रम ही परिवार; भारत भवन की कलाकार की कहानी ने झकझोरा


    भोपाल  भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की जिंदगी बाहर से भले ही सामान्य नजर आए लेकिन उनके भीतर कई ऐसी कहानियां दबी हैं जो रिश्तों और बदलते पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। हाल ही में आश्रम में रहने वाले 70 वर्षीय घनश्याम की मौत के बाद जब उनके चारों बच्चे अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे तो वहां रहने वाले दूसरे बुजुर्ग भी भावुक हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक घनश्याम का निधन 4 अगस्त 2026 को हुआ था। आश्रम प्रबंधन ने परिवार के आने का इंतजार किया लेकिन कोई नहीं पहुंचा। आखिरकार पुलिस की मदद से उनका अंतिम संस्कार कराया गया।

    घनश्याम की कहानी भी संघर्ष से भरी रही। वह इंदौर में टायर और ट्यूब का कारोबार करते थे और उन्होंने अपने चार बच्चों को पालने के लिए जीवनभर मेहनत की। बुजुर्गावस्था में वह भोपाल के अपना घर वृद्धाश्रम में रहने लगे। उनके निधन के बाद परिवार से संपर्क किया गया लेकिन किसी के नहीं पहुंचने पर दो दिन तक उनके शव को इस उम्मीद में रखा गया कि शायद कोई अपना अंतिम विदाई देने आ जाए। परिवार की ओर से अंतिम संस्कार आश्रम से कराने की बात कही गई। इस घटना ने आश्रम में रह रहे दूसरे बुजुर्गों के भीतर अपने भविष्य को लेकर चिंता पैदा कर दी।

    इसी आश्रम में रहने वाली 80 वर्षीय अंजली श्रीवास्तव की कहानी भी बेहद भावुक कर देने वाली है। अंजली को करीब एक दशक से आश्रम में रहते हुए बताया गया है। उन्होंने एक पुराने प्रसंग को याद करते हुए कहा कि जब उन्हें मोतियाबिंद की समस्या थी तब एक मिठाई कारोबारी उन्हें मंदिर के पास से उठाकर आश्रम छोड़ गया था। कुछ समय बाद उनका बेटा उनसे मिलने आया और अगले गुरुवार को वापस आने की बात कही। वह गुरुवार फिर कभी नहीं आया। अंजली की यह कहानी इंतजार और उम्मीद के उस दर्द को सामने लाती है जिसमें बुजुर्ग वर्षों तक अपनों के लौटने की राह देखते रहते हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में भी अंजली श्रीवास्तव ने बताया था कि वह अपना घर वृद्धाश्रम में करीब 11 वर्षों से रह रही थीं।

    आश्रम में रहने वाली रानी चंद्र सक्सेना की जिंदगी भी कभी कला और सम्मान से जुड़ी थी। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने भारत भवन से जुड़कर रंगमंच पर काम किया और रंग निर्देशक बाबा कारंत के साथ कई नाटकों में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन में समाचार वाचक के तौर पर भी काम किया। उनके पति सरकारी मत्स्य विभाग में वरिष्ठ पद पर रहे थे। आज उनकी जिंदगी का एक बड़ा सहारा उनका बेटा है जो विदेश में रहता है लेकिन दूरी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण रानी ने करीब 15 वर्ष पहले आश्रम को अपना ठिकाना बना लिया।

    रानी का कहना है कि अब आश्रम ही उनका परिवार है। उन्हें यह उम्मीद नहीं है कि विदेश में रहने वाला बेटा उनके पास लौटकर आएगा। उन्होंने आश्रम संचालिका माधुरी मिश्रा को अपने अंतिम समय की जिम्मेदारी भी सौंप दी है। यह बात केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं बल्कि उन अनेक बुजुर्गों की स्थिति को सामने लाती है जो उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच चुके हैं जहां उन्हें सबसे ज्यादा अपनेपन और सहारे की जरूरत होती है।

    अपना घर वृद्धाश्रम की संचालिका माधुरी मिश्रा के मुताबिक कोई भी बुजुर्ग खुशी से अपना घर नहीं छोड़ता। उनके अनुसार कई बुजुर्ग परिस्थितियों से मजबूर होकर आश्रम पहुंचते हैं। जब किसी बुजुर्ग की मृत्यु के बाद परिवार का कोई सदस्य नहीं आता तो वहां रहने वाले दूसरे लोगों को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगती है। भोपाल में वर्षों से बुजुर्गों की सेवा कर रहा यह आश्रम अब कई लोगों के लिए केवल रहने की जगह नहीं बल्कि उनका अंतिम सहारा और परिवार बन चुका है।

    इन कहानियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि बुजुर्गों को केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि समय अपनापन और सम्मान भी चाहिए। जिंदगी की भागदौड़ में परिवार कितना भी दूर क्यों न हो जाए लेकिन माता पिता के जीवन के आखिरी पड़ाव पर उनकी मौजूदगी और संवेदनशीलता सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है।

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पीथमपुर में दो बड़े उद्योगों का किया उद्घाटन, धार में निवेश और रोजगार को मिलेगी नई गति

    मध्य प्रदेश: के धार जिले के पीथमपुर में औद्योगिक विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में एडवांस ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया गया। इन दोनों औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार, इन उद्योगों से 30 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है।

    पीथमपुर लंबे समय से मध्य प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है और अब यहां नई तकनीक से जुड़े उद्योगों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। ऑप्टिकल फाइबर निर्माण से दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जबकि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट ऊर्जा भंडारण और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों क्षेत्रों में भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इन संयंत्रों की शुरुआत को औद्योगिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

    उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि नए उद्योगों की स्थापना से मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के विकास के साथ देश की आर्थिक प्रगति को भी गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए किए गए समझौतों को अब जमीन पर उतारने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले के औद्योगिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते एक महीने के दौरान वह दूसरी बार इस क्षेत्र में आए हैं और इससे पहले भी कई उद्योगों का लोकार्पण किया गया था। उनके मुताबिक, पिछले समय में किए गए कई समझौते अब वास्तविक औद्योगिक परियोजनाओं में बदल रहे हैं। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

    धार जिले को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह क्षेत्र कभी पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब औद्योगिक विकास की वजह से इसकी तस्वीर बदल रही है। जनजातीय बहुल धार और पीथमपुर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ने वाले इलाकों में शामिल हो रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से स्थानीय कारोबार, परिवहन, निर्माण, सेवा और अन्य सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    ऑप्टिकल फाइबर और बैटरी निर्माण जैसे क्षेत्रों में निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को नए प्रकार के कौशल और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही उद्योगों के आसपास सहायक इकाइयों और सेवा क्षेत्र के विस्तार की संभावना भी बनेगी।

    सरकार का जोर प्रदेश में बड़े निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ रोजगार आधारित औद्योगिक विकास पर है। पीथमपुर में शुरू हुए दोनों प्लांट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन परियोजनाओं से उत्पादन बढ़ने और रोजगार के अवसरों में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे धार जिले की औद्योगिक पहचान और मजबूत होने के साथ मध्य प्रदेश के आर्थिक विकास को भी नई गति मिल सकती है।