Author: bharati

  • दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट

    दर्द की गोली को हल्के में न लें! बार-बार पेनकिलर लेने से किडनी पर पड़ा असर, इंदौर में 31 वर्षीय युवक का हुआ ट्रांसप्लांट


    भोपाल । बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से पेनकिलर लेकर खाना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। दर्द कम होते ही लोग इसे बीमारी का इलाज मान लेते हैं लेकिन इंदौर में सामने आया एक मामला इस आदत के गंभीर खतरे की ओर इशारा करता है। 31 वर्षीय नंदराम को अहमदाबाद में काम करने के दौरान बुखार और हाथ पैर में दर्द हुआ तो उसने डॉक्टर से संपर्क करने के बजाय मेडिकल स्टोर से पेनकिलर खरीदकर लेना शुरू कर दिया। करीब एक महीने में उसने लगभग 13 बार दवा ली। हर बार कुछ समय के लिए राहत मिलती रही लेकिन समस्या दोबारा सामने आती रही। बाद में जब पेट में दर्द शुरू हुआ तो जांच में उसकी दोनों किडनियां गंभीर रूप से खराब पाई गईं।

    ललितपुर जिले के तुर्का गांव निवासी नंदराम ने इसके बाद दिल्ली भोपाल और अहमदाबाद में इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर उसे नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ने लगी। करीब एक साल तक डायलिसिस के बाद उसे इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए भर्ती किया गया। 4 अगस्त को उसकी मां भगवती ने अपनी किडनी दान की और बेटे को नई जिंदगी मिली। यह ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किया गया। फिलहाल नंदराम की हालत स्थिर बताई गई है और ट्रांसप्लांट के बाद नई किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ दर्द निवारक दवाओं का बार बार या लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर NSAIDs जैसी दवाओं का अधिक इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है। ये दवाएं किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में एक्यूट किडनी इंजरी का खतरा बढ़ सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन भी लंबे समय तक या अधिक मात्रा में NSAIDs के इस्तेमाल को किडनी के लिए नुकसानदायक मानता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पेनकिलर की एक या दो खुराक लेने से हर व्यक्ति की किडनी खराब हो जाएगी। खतरा दवा के प्रकार और मात्रा के साथ व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करता है। पहले से किडनी की बीमारी होना हाई ब्लड प्रेशर या शरीर में पानी की कमी जैसी स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। डिहाइड्रेशन खुद भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

    डॉक्टरों का कहना है कि बार बार होने वाले बुखार या दर्द को केवल पेनकिलर से दबाने के बजाय उसके कारण की जांच कराना जरूरी है। संक्रमण सूजन या दूसरी बीमारी की वजह से दर्द और बुखार हो सकता है। ऐसे में दवा का चुनाव उसकी सही मात्रा और कितने समय तक इस्तेमाल करना है यह डॉक्टर की सलाह से तय किया जाना चाहिए।

    इंदौर में इलाज करा रहे 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार का मामला भी पेनकिलर के लंबे इस्तेमाल से जुड़ी गंभीर परेशानी की ओर ध्यान खींचता है। अशोक नगर निवासी जितेंद्र इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे और काम के दौरान होने वाली थकान तथा शरीर के दर्द से राहत के लिए पेनकिलर लेने लगे। करीब एक महीने तक लगातार दवा लेने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच में दोनों किडनियों के खराब होने की जानकारी मिली। वर्ष 2021 से वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहे हैं और अब सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस के लिए अस्पताल जाना पड़ता है।

    एमजीएम मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में अब तक 8 किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की जानकारी दी गई है। इनमें सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त किए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार 7 मामलों में मां ने अपने बच्चों को किडनी दान की है। अस्पताल का कहना है कि मरीजों को समय पर उपचार जरूरी दवाएं और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों की सलाह साफ है कि हर दर्द के लिए खुद से पेनकिलर लेना सुरक्षित तरीका नहीं है। अगर दर्द या बुखार बार बार हो रहा है तो उसके कारण की जांच कराना ज्यादा जरूरी है। दवा की जरूरत होने पर डॉक्टर से सही दवा और उसकी खुराक के बारे में सलाह लेना चाहिए। खासकर लंबे समय तक दर्द निवारक दवा लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है। दवाओं के गलत या अत्यधिक इस्तेमाल से होने वाली किडनी की क्षति कई बार गंभीर स्थिति तक पहुंच सकती है और कुछ मामलों में डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत भी पड़ सकती है।

  • अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल

    अस्पताल दूर टीकाकरण अधूरा और कुपोषण का संकट, बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत ने खोली सिस्टम की पोल


    भोपाल । मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक में बैगा आदिवासी परिवारों के बच्चों की मौत का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। प्रभावित गांवों में बच्चों के बीमार पड़ने और मौतों की खबर सामने आने के बाद सरकारी टीमें सक्रिय हुईं लेकिन बीमारी के कारण और मृतकों की संख्या को लेकर सरकारी दावे और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे दावों में अंतर दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन के अनुसार आठ बच्चों की मौत हुई है जबकि स्थानीय कांग्रेस विधायक संजय उइके ने 20 बच्चों की मौत का दावा किया है। उन्होंने मृत बच्चों की सूची होने और कई परिवारों को लंबे समय तक राशन नहीं मिलने की बात भी कही है।

    बिरसा ब्लॉक के बैगा बहुल इलाकों में कुंडेकसा अडोरी कोरका और बांदरी समेत कई गांवों में बड़ी संख्या में बच्चे बीमार हुए। बच्चों में बुखार सर्दी खांसी दस्त त्वचा संबंधी समस्या और मिजल्स जैसे लक्षण सामने आए। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में घर घर सर्वे शुरू किया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 14 अगस्त तक 140 प्रभावित बच्चों में से 100 स्वस्थ होकर घर लौट चुके थे जबकि 40 बच्चों का उपचार चल रहा था। स्वास्थ्य टीमों ने बच्चों को विटामिन ए ओआरएस आयरन सिरप और अन्य जरूरी दवाएं भी दीं।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को लेकर उठ रहा है। प्रभावित आदिवासी गांव बेहद दुर्गम इलाकों में स्थित हैं और कई जगह अस्पताल तथा स्वास्थ्य केंद्र काफी दूर हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ इलाकों में निकटतम अस्पताल करीब 70 किलोमीटर दूर है। ऐसे में गंभीर हालत में बच्चों को समय पर अस्पताल पहुंचाना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कई परिवार पारंपरिक उपचार और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध साधनों पर निर्भर रहते हैं जिससे अस्पताल पहुंचने में और देरी हो सकती है।

    दूसरी बड़ी चिंता कुपोषण की है। प्रभावित क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों में किए गए वजन परीक्षण में बड़ी संख्या में बच्चे सामान्य से कम वजन के पाए गए। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार जुलाई में 28 आंगनवाड़ी केंद्रों में छह साल से कम उम्र के 1149 बच्चों का वजन किया गया। इनमें 213 बच्चे मध्यम रूप से कम वजन वाले और 18 बच्चे गंभीर रूप से कम वजन वाले पाए गए। यानी पोषण संकट बीमारी के साथ बच्चों की स्थिति को और गंभीर बना रहा था।

    टीकाकरण को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। मिजल्स से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है लेकिन दूरदराज के गांवों में वैक्सीनेशन कवरेज और स्वास्थ्य कर्मियों की नियमित पहुंच को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। स्वास्थ्य विभाग ने बाद में प्रभावित इलाकों में सर्वेक्षण टीमों की संख्या बढ़ाई और घर घर जाकर बच्चों की जांच शुरू की। 14 अगस्त तक 20 सर्वेक्षण टीमें सक्रिय थीं और सैकड़ों लोगों की जांच की जा चुकी थी।

    सरकार की ओर से बीमारी को किसी रहस्यमयी बीमारी के बजाय मौसमी संक्रमणों से जोड़कर देखा गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि कई मामलों में मलेरिया और मिजल्स जैसे लक्षण पाए गए हैं। आईसीएमआर और नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की टीमें भी क्षेत्र में पहुंचकर स्थिति का आकलन कर चुकी हैं। प्रशासन ने पानी के स्रोतों को सैनिटाइज करने सफाई अभियान चलाने और मच्छरों के नियंत्रण के लिए फॉगिंग तथा एंटी लार्वा गतिविधियां शुरू की हैं।

    प्रशासन ने अब प्रभावित गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। घर घर स्वास्थ्य जांच के साथ बीमार बच्चों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और पोषण तथा राशन की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन की ओर से यह भी बताया गया है कि कई बच्चों को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर घर भेजा जा चुका है।

    हालांकि मौतों की वास्तविक संख्या और उनके कारण को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक किसी एक बीमारी को सभी मौतों का निश्चित कारण बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल यह मामला सिर्फ बीमारी का नहीं बल्कि दूरदराज आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच पोषण टीकाकरण और समय पर निगरानी की व्यवस्था का भी बड़ा सवाल बन चुका है। बैगा जैसे विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह के बच्चों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाना इस संकट से निकलने की सबसे बड़ी चुनौती है।

  • BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी

    BJP युवा मोर्चा की नई टीम तैयार, ग्वालियर से भोपाल और उज्जैन तक बदली कमान; जानें किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने युवा मोर्चा के संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति के बाद भाजयुमो प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर ने 12 जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा की है। इसके साथ ही 9 जिलों में जिला महामंत्रियों की नियुक्ति भी की गई है। नई जिम्मेदारियां ग्वालियर ग्रामीण मऊगंज सतना कटनी पांढुर्णा भोपाल ग्रामीण धार ग्रामीण बुरहानपुर देवास विदिशा उज्जैन ग्रामीण और शाजापुर में दी गई हैं। इससे पहले जुलाई में भी युवा मोर्चा ने 15 जिलों में अध्यक्षों की नियुक्ति की थी। उस सूची में ग्वालियर नगर समेत कई जिलों को नई कमान मिली थी। (peptechtime.com)

    ताजा नियुक्तियों में ग्वालियर ग्रामीण की जिम्मेदारी शिवराज यादव को दी गई है जबकि मनोज गुर्जर को जिला महामंत्री बनाया गया है। मऊगंज में प्रवीण सिंह जिलाध्यक्ष और विवेक तिवारी महामंत्री होंगे। सतना में यश यादव को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है और शुभम परिहार जिला महामंत्री बनाए गए हैं। कटनी में पारस जैन को जिलाध्यक्ष तथा देवांश श्रीवास्तव को महामंत्री नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों के जरिए पार्टी ने ग्रामीण और संगठनात्मक क्षेत्रों में युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।

    पांढुर्णा में विवेक रामचाकले को जिलाध्यक्ष बनाया गया है जबकि पंकज बंजारी को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। भोपाल ग्रामीण में वीरेंद्र सिंह राजपूत को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। धार ग्रामीण में उज्ज्वल सोलंकी को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इन दोनों जिलों में फिलहाल जिला महामंत्री के नाम की घोषणा नहीं की गई है।

    बुरहानपुर में भरत रावल को जिलाध्यक्ष और अमित वास्कले को जिला महामंत्री बनाया गया है। देवास में रजत पाल सिंह को अध्यक्ष तथा मोहित जाट को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। विदिशा में अनुज मित्तल जिलाध्यक्ष होंगे जबकि शिवेंद्र सिंह राजपूत को जिला महामंत्री बनाया गया है। उज्जैन ग्रामीण में हरजीत सिंह को जिलाध्यक्ष और राहुल धाकड़ को जिला महामंत्री की जिम्मेदारी मिली है। शाजापुर में हर्षवर्धन मंडलोई को जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यहां भी महामंत्री का नाम फिलहाल घोषित नहीं किया गया है।

    बीजेपी युवा मोर्चा में लगातार हो रही इन नियुक्तियों को संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जुलाई में प्रदेश के 15 जिलों में अध्यक्षों की पहली बड़ी सूची जारी हुई थी जिसमें सागर ग्रामीण हरदा सीधी टीकमगढ़ खरगोन जबलपुर ग्रामीण बैतूल झाबुआ उज्जैन नगर ग्वालियर नगर रतलाम बड़वानी शहडोल सीहोर और खंडवा शामिल थे। उस सूची में छह जिलों के महामंत्रियों की भी घोषणा की गई थी। (starsamachar.com)

    पार्टी के युवा संगठन में जिला अध्यक्षों की भूमिका अहम मानी जाती है। इन पदाधिकारियों के जरिए बूथ स्तर तक युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और संगठन की गतिविधियों को गति देने की जिम्मेदारी रहती है। आने वाले समय में प्रदेश के बाकी जिलों में भी नियुक्तियां होने की संभावना है। इससे युवा मोर्चा का संगठनात्मक ढांचा और मजबूत होने के साथ आगामी राजनीतिक गतिविधियों में युवाओं की भूमिका बढ़ सकती है।

    इधर बीजेपी महिला मोर्चा ने भी प्रदेश में संगठनात्मक नियुक्तियों का ऐलान किया है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अर्चना परांजपे राजगढ़े की ओर से जारी सूची में अलग अलग संभागों के लिए प्रभारियों की नियुक्ति की गई है। चंबल की जिम्मेदारी ज्योति तोमर को जबकि ग्वालियर की जिम्मेदारी क्रांति जोशी को दी गई है। सागर में शालिनी खरबानी रीवा में आशा गुप्ता शहडोल में डॉ. स्वप्ना वर्मा और जबलपुर में डॉ. सारिका उपाध्याय को जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा छिंदवाड़ा नर्मदापुरम भोपाल इंदौर निमाड़ उज्जैन और मंदसौर संभाग में भी महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    बीजेपी के दोनों मोर्चों में एक साथ संगठनात्मक गतिविधियां तेज होने से साफ है कि पार्टी जिला स्तर पर अपनी टीम को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। युवा और महिला कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां देकर संगठन बूथ और जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।

  • MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी

    MP में बाढ़ जैसे हालात से हड़कंप, ट्रक पानी में फंसा; कई इलाकों में घरों में घुसा पानी और स्कूलों की छुट्टी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के पूर्वी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण कई जिलों में लगातार बारिश हो रही है और नदी नाले उफान पर हैं। डिंडौरी पन्ना रीवा सतना मैहर और छतरपुर समेत कई इलाकों में हालात बिगड़ने लगे हैं। नर्मदा और मंदाकिनी जैसी नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है जबकि कई निचले इलाकों में पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में प्रदेश के 16 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। स्थानीय मौसम रिपोर्टों के मुताबिक कुछ इलाकों में 4 से 8 इंच तक बारिश होने की संभावना है।

    भारी बारिश को देखते हुए मैहर और डिंडौरी में स्कूलों की छुट्टी कर दी गई है। डिंडौरी में आंगनवाड़ी केंद्रों को भी बंद रखा गया है। प्रशासन ने नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। मौसम विभाग की ओर से पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया था।

    मैहर में बारिश के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। गुरुवार देर रात मर्जुआ नाले को पार करने की कोशिश के दौरान एक ट्रक करीब सात फीट गहरे पानी में फंस गया। ट्रक में ड्राइवर और क्लीनर मौजूद थे। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। मुकुंदपुर चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा ने पानी में उतरकर ट्रक तक पहुंचने की कोशिश की। ग्रामीणों की मदद से रस्से का सहारा लिया गया और दोनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    बारिश का असर पन्ना और चित्रकूट इलाके में भी दिखाई दे रहा है। रनेह जलप्रपात और बृहस्पति कुंड में पानी का बहाव तेज हो गया है। वहीं नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से जबलपुर का धुआंधार जलप्रपात भी सामान्य रूप से दिखाई नहीं दे रहा है। कई स्थानों पर नदी और नालों का पानी पुलों के ऊपर से बह रहा है जिससे आवागमन प्रभावित हुआ है। डिंडौरी मंडला स्टेट हाईवे पर भी पानी आने के कारण यातायात बाधित होने की स्थिति बनी है।

    रीवा और सतना के कई रिहायशी इलाकों में भी पानी घुसने की खबर है। कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की जरूरत पड़ी है। जबलपुर में बरगी डैम के गेट खोले जाने से नर्मदा के जलस्तर पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसे हालात में प्रशासन और स्थानीय एजेंसियां निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रही हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर समेत 16 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके अलावा ग्वालियर दतिया शिवपुरी गुना अशोकनगर विदिशा रायसेन नर्मदापुरम सागर दमोह पन्ना सीधी और सिवनी में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के अन्य हिस्सों में भी कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है।

    लगातार बारिश के बावजूद पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में कुल बारिश अभी सामान्य से कम है। मौसम रिपोर्ट के अनुसार 20 अगस्त तक मध्य प्रदेश में करीब 599 मिलीमीटर यानी 23.6 इंच बारिश दर्ज की गई है जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश करीब 675 मिलीमीटर यानी 26.6 इंच मानी जाती है। यानी प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां धीरे धीरे मध्य और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ सकती हैं। ऐसे में पूर्वी हिस्से के बाद राज्य के दूसरे जिलों में भी बारिश का असर बढ़ने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखें तथा मौसम और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों पर नजर रखें।

  • बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव

    बीना स्टेशन पर रेलवे का मेगा ब्लॉक, ट्रेनों के नंबर और रूट बदले; मालखेड़ी भोपाल और कटनी में मिलेगा अस्थाई ठहराव


    भोपाल । मध्य प्रदेश से होकर ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों के लिए सितंबर और अक्टूबर में बड़ी परेशानी सामने आ सकती है। पश्चिम मध्य रेलवे के बीना स्टेशन यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण ट्रेनों के संचालन में व्यापक बदलाव किया गया है। रेलवे के संशोधित आदेश के अनुसार 16 ट्रेनें पूरी तरह निरस्त रहेंगी जबकि 48 ट्रेनों को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा कुछ ट्रेनों के नंबर में बदलाव किया गया है और कई प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की सुविधा के लिए अस्थाई ठहराव की व्यवस्था की गई है। बीना यार्ड रीमॉडलिंग के कारण 20 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच रेल परिचालन में बड़े स्तर पर बदलाव प्रस्तावित है।

    बीना स्टेशन पर आगासौद और बीना के बीच तीसरी रेल लाइन को बीना स्टेशन से जोड़ने का काम किया जा रहा है। इसके लिए प्री नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग से जुड़े कार्य किए जाएंगे। रेलवे के मुताबिक सुरक्षित रेल संचालन के लिए इस दौरान कुछ ट्रेनों को रद्द करना पड़ेगा जबकि कई ट्रेनों के मार्ग बदले जाएंगे। यह काम कई चरणों में पूरा किया जा रहा है और नॉन इंटरलॉकिंग का अंतिम चरण 13 से 15 अक्टूबर तक निर्धारित है।

    इस बदलाव के तहत दादर से बलिया जाने वाली ट्रेन को नए नंबर 11043 के साथ चलाया जाएगा जबकि बलिया से दादर की सेवा 11044 नंबर से संचालित होगी। इसी तरह दादर से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन को 11047 और गोरखपुर से दादर जाने वाली ट्रेन को 11048 नंबर दिया गया है। यानी जिन यात्रियों ने पुराने ट्रेन नंबर देखकर टिकट या यात्रा की योजना बनाई है उन्हें यात्रा से पहले संशोधित नंबर जरूर जांचना होगा।

    गुना रूठियाई और मक्सी क्षेत्र से परिवर्तित मार्ग पर चलने वाली कई ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर अस्थाई ठहराव दिया गया है। इनमें डॉ अंबेडकर नगर रीवा ट्रेन 11704 हावड़ा इंदौर ट्रेन 22912 अहमदाबाद दरभंगा ट्रेन 15560 भुज शालीमार ट्रेन 22829 और अहमदाबाद गोरखपुर ट्रेन 19489 समेत कई सेवाएं शामिल हैं। इन ट्रेनों को मालखेड़ी स्टेशन पर करीब दो मिनट रुकने की व्यवस्था की गई है। वापसी दिशा की कई ट्रेनों को भी इसी तरह का अस्थाई ठहराव मिलेगा।

    वेरावल और जबलपुर के बीच चलने वाली 11465 और 11466 ट्रेन को भी परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। यात्रियों को राहत देने के लिए इन दोनों ट्रेनों का निशातपुरा के बजाय भोपाल स्टेशन पर करीब पांच मिनट का अस्थाई ठहराव रखा गया है। यह बदलाव संबंधित निर्धारित तारीखों पर लागू रहेगा।

    कटनी स्टेशन पर भी चार ट्रेनों को दो मिनट का अस्थाई ठहराव मिलेगा। इनमें लोकमान्य तिलक टर्मिनस बलिया ट्रेन 11071 और 11072 तथा रानी कमलापति रीवा ट्रेन 12185 और 12186 शामिल हैं। इसके अलावा कटनी साउथ स्टेशन पर हावड़ा भोपाल ट्रेन 13025 और 13026 सहित भोपाल धनबाद भोपाल चोपन भोपाल सिंगरौली और सिंगरौली भोपाल जैसी सेवाओं को अस्थाई ठहराव दिया जाएगा।

    यार्ड के काम का असर मेमू ट्रेनों पर भी पड़ेगा। कोटा बीना मेमू 61633 को निर्धारित अवधि में बीना के बजाय मुंगावली में शॉर्ट टर्मिनेट किया जाएगा। वहीं बीना भोपाल की कुछ मेमू सेवाओं को बीना के बजाय मंडी बामोरा से शुरू किया जाएगा। भोपाल बीना मेमू भी निर्धारित अवधि में मंडी बामोरा में शॉर्ट टर्मिनेट होगी।

    रीमॉडलिंग के दौरान बीना स्टेशन पर कई ट्रेनों के ठहराव समय में भी कटौती की गई है। जिन ट्रेनों का निर्धारित ठहराव 10 मिनट था उनमें इसे घटाकर दो मिनट किया गया है। पांच मिनट वाले ठहराव को भी दो मिनट किया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि सितंबर और अक्टूबर में बीना होकर यात्रा करने से पहले ट्रेन का नंबर रूट ठहराव और शुरुआती या अंतिम स्टेशन जरूर जांच लें। यार्ड रीमॉडलिंग पूरा होने के बाद ट्रेनों का संचालन सामान्य व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा।

  • बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनने में हैं कन्फ्यूज तो उनकी पसंद के हिसाब से आजमाएं ये पर्सनलाइज्ड और यादगार विकल्प

    बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनने में हैं कन्फ्यूज तो उनकी पसंद के हिसाब से आजमाएं ये पर्सनलाइज्ड और यादगार विकल्प


    नई दिल्ली ।
    बॉयफ्रेंड के लिए सही गिफ्ट चुनना कई बार आसान नहीं होता। खासकर तब जब आप ऐसा तोहफा देना चाहती हों जो सिर्फ महंगा या आकर्षक न हो, बल्कि आपके रिश्ते की खासियत और आपकी भावनाओं को भी जाहिर करे। ऐसे में गिफ्ट चुनते समय उनकी पसंद, जरूरत और रोजमर्रा की आदतों को ध्यान में रखना सबसे बेहतर तरीका हो सकता है।

    अगर आप ऐसा तोहफा देना चाहती हैं जिसका इस्तेमाल वह रोज कर सकें और साथ ही उससे आपकी कोई खास याद भी जुड़ी हो, तो पर्सनलाइज्ड वॉलेट और कीचेन अच्छा विकल्प हो सकता है। वॉलेट पर उनका नाम, किसी खास तारीख या तस्वीर को शामिल कराया जा सकता है। वहीं कीचेन पर दोनों के नाम के शुरुआती अक्षर या छोटा सा संदेश लिखवाकर इसे और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है।

    यादों से जुड़ा गिफ्ट देने की इच्छा हो तो स्क्रैपबुक एक अलग और भावनात्मक विकल्प बन सकती है। इसमें रिश्ते से जुड़ी तस्वीरों के साथ पहली मुलाकात, कोई यादगार यात्रा, खास तारीख या साथ बिताए गए किसी महत्वपूर्ण पल का जिक्र किया जा सकता है। इसके साथ उनकी पसंद की चॉकलेट, छोटा सा उपयोगी सामान और हाथ से लिखा नोट रखकर सरप्राइज बॉक्स तैयार किया जा सकता है।

    अगर आपके बॉयफ्रेंड को अपने लुक और पर्सनैलिटी का ध्यान रखना पसंद है, तो उनकी पसंद की खुशबू वाला परफ्यूम और ग्रूमिंग किट भी उपयोगी तोहफा हो सकता है। गिफ्ट खरीदते समय उनकी पसंद को प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि पसंद के मुताबिक चुना गया साधारण सामान भी महंगे लेकिन बिना सोचे-समझे चुने गए तोहफे से ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

    गिफ्ट चुनने का एक और अच्छा तरीका उनकी हॉबी को समझना है। अगर उन्हें क्रिकेट पसंद है तो क्रिकेट से जुड़ी कोई उपयोगी चीज दी जा सकती है। गेमिंग पसंद करने वाले व्यक्ति के लिए गेमिंग से जुड़ा सामान, संगीत पसंद करने वाले के लिए उनकी पसंद के कलाकार या शैली से संबंधित वस्तु और किताबें पढ़ने वाले व्यक्ति के लिए उनकी रुचि की किताब बेहतर विकल्प हो सकती है।

    फिटनेस में रुचि रखने वाले बॉयफ्रेंड के लिए उनकी जरूरत के अनुसार फिटनेस एक्सेसरी भी चुनी जा सकती है। इसी तरह रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाला कोई सामान भी अच्छा गिफ्ट बन सकता है। इसका फायदा यह है कि तोहफा केवल सजावट तक सीमित नहीं रहता और लंबे समय तक उपयोग में आता है।

    गिफ्ट चुनते समय बजट को लेकर दबाव लेने की जरूरत नहीं है। किसी तोहफे की कीमत से ज्यादा उसमें शामिल व्यक्तिगत सोच महत्वपूर्ण हो सकती है। एक छोटा फोटो फ्रेम, पर्सनलाइज्ड कीचेन या हाथ से लिखा संदेश भी रिश्ते के लिए खास महत्व रख सकता है।

    तोहफा देने का तरीका भी उसे यादगार बना सकता है। किसी खास दिन डिनर के दौरान सरप्राइज देना, किसी पुरानी याद से जुड़ी जगह पर गिफ्ट देना या साधारण तरीके से हाथ से लिखा नोट साथ रखना पल को खास बना सकता है। इसलिए बॉयफ्रेंड के लिए गिफ्ट चुनते समय महंगे विकल्प तलाशने के बजाय उनकी पसंद और आपके रिश्ते से जुड़ी भावनाओं को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।

  • नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    नियाज खान का बड़ा दावा-नाम सुनते ही मकान देने से किया इनकार, पूछा क्या हर मुसलमान आतंकवादी है?

    भोपाल । पूर्व IAS अधिकारी नियाज खान एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने देश में मुसलमानों के प्रति कथित भेदभाव और नफरत के माहौल को लेकर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए उनके पोस्ट के मुताबिक उनका दावा है कि कोई मुसलमान कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो उसे हिंदू बहुल रिहायशी इलाके में मकान लेने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ धर्म की पहचान के आधार पर हर मुसलमान को आतंकवादी समझा जाना उचित है। नियाज खान इससे पहले भी धर्म और सामाजिक सौहार्द से जुड़े अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। वर्ष 2025 में भी उनके एक पोस्ट को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी जिसमें उन्होंने भारत के हिंदू और मुस्लिम समाज के बीच साझा सांस्कृतिक और आनुवंशिक जुड़ाव की बात कही थी।

    नियाज खान ने अपने ताजा बयान में दावा किया कि हिंदू परिवार कई बार मुसलमानों को अपना मकान देने से बचते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें खुद ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा है। उनके मुताबिक भोपाल के शक्तिनगर इलाके में उन्होंने एक मकान लेने की कोशिश की थी लेकिन मकान मालिक ने उनका नाम पूछने के बाद कथित तौर पर मकान देने से इनकार कर दिया। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत अनुभव का दावा है और इससे पूरे समाज के व्यवहार के बारे में कोई सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    नियाज खान ने अपने पोस्ट में यह सवाल भी उठाया कि क्या किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान के आधार पर उसे संदेह की नजर से देखना सही है। उन्होंने मुसलमानों को लेकर बने पूर्वाग्रहों पर चिंता जताते हुए कहा कि देश के मुसलमान भी देश के प्रति उतने ही जिम्मेदार और देशभक्त हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर धार्मिक पहचान और आवासीय भेदभाव को लेकर बहस तेज होने की संभावना है।

    नियाज खान ने इससे पहले देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर भी सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी थी। उन्होंने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और किसी दूसरे देश पर निर्भरता कम करने की बात कही थी। उनके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में भारत को अपनी क्षमता पर ज्यादा भरोसा करना चाहिए।

    इसके अलावा नियाज खान ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और अजय देवगन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने पान मसाला और गुटखा से जुड़े विज्ञापनों में फिल्मी सितारों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ऐसे उत्पादों के प्रचार से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने दोनों अभिनेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए उन्हें जेल भेजने तक की बात कही। यह उनका व्यक्तिगत बयान और मांग है। दोनों अभिनेताओं के खिलाफ इस बयान के आधार पर किसी आपराधिक दोष का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    गौरतलब है कि तंबाकू और गुटखा विज्ञापनों को लेकर शाहरुख खान और अजय देवगन समेत कुछ बड़े फिल्मी सितारों का नाम पहले भी कानूनी बहस में आया है। वर्ष 2023 में केंद्र सरकार की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया गया था कि शाहरुख खान अक्षय कुमार और अजय देवगन को गुटखा कंपनियों से जुड़े विज्ञापनों के मामले में नोटिस जारी किए गए थे।

    नियाज खान के ताजा बयान ने एक बार फिर धर्म के आधार पर भेदभाव और सार्वजनिक जीवन में मशहूर हस्तियों की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। उनके बयानों पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं लेकिन इन मुद्दों पर बहस करते समय व्यक्तिगत अनुभव और व्यापक सामाजिक स्थिति के बीच अंतर करना जरूरी है। साथ ही किसी समुदाय के बारे में सामान्यीकरण करने के बजाय घटनाओं और आरोपों को तथ्य और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर देखना ज्यादा उचित होगा।

  • जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार

    जहरीली शराब ने खोला MP-गुजरात नेटवर्क का राज, 38.59% मेथनॉल वाली शराब से 9 मौतें; उज्जैन से रईस गिरफ्तार


    भोपाल ।
    गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मामला अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। इस कांड में मौतों का आंकड़ा नौ तक पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है और गुजरात पुलिस की जांच में मध्य प्रदेश से जुड़े आरोपियों की भूमिका भी सामने आई है। गुजरात स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से रईस को पकड़ा है। पुलिस के मुताबिक रईस पर जहरीली शराब तैयार करने वाले नेटवर्क में अहम भूमिका निभाने का आरोप है। उसे गुजरात ले जाकर पूछताछ की जा रही है।

    जांच में मुरैना निवासी नरेंद्र सिंह यादव उर्फ डॉक्टर का नाम भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक रईस को नरेंद्र के कथित अनुभव की जानकारी थी और इसी वजह से उसे गुजरात बुलाया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार भावनगर में रईस और नरेंद्र ने स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ मिलकर नकली शराब तैयार की। एफआईआर में आरोप है कि पहले एक खेप तैयार की गई थी लेकिन बाद की खेप में मेथनॉल मिलाकर करीब 25 कार्टन जहरीली शराब तैयार की गई। इसे अलग अलग लोगों तक पहुंचाया गया।

    इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शराब को तैयार करने में नरेंद्र की भूमिका बताई जा रही है वही शराब पीने के बाद उसकी भी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नरेंद्र को भावनगर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 18 अगस्त को उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में उसे मामले के आरोपियों में शामिल किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति की आपराधिक भूमिका का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

    फोरेंसिक जांच में जहरीली शराब की गंभीरता भी सामने आई है। जब्त किए गए एक नमूने में 38.59 प्रतिशत मेथनॉल पाया गया जबकि इथेनॉल की मात्रा सिर्फ 0.94 प्रतिशत थी। मेथनॉल अत्यंत जहरीला पदार्थ है और लाइसेंसी शराब में इसका इस तरह मौजूद होना सामान्य नहीं है। इसी जहरीले मिश्रण को पीने के बाद कई लोगों की हालत बिगड़ी और मौतें हुईं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि मेथनॉल कहां से खरीदा गया और तैयार की गई शराब की कितनी बोतलें अभी भी लोगों तक पहुंची हैं।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रईस और उसके साथियों ने शराब बनाने के लिए कच्चा माल जुटाया था। एफआईआर के मुताबिक इसमें मेथनॉल के साथ बोतलें कैप और ब्रांडेड शराब जैसे दिखने वाले स्टीकर शामिल थे। पुलिस का आरोप है कि नकली शराब को असली ब्रांड की बोतलों जैसा रूप देकर बाजार में पहुंचाने की कोशिश की गई। गुजरात पुलिस ने अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और बड़ी मात्रा में नकली शराब रसायन तथा अन्य सामान जब्त किए हैं।

    इस मामले का मध्य प्रदेश से जुड़ना इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मुरैना में जनवरी 2021 में जहरीली शराब कांड में 24 लोगों की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई की गई थी। पांच साल बाद भावनगर कांड में मुरैना के एक व्यक्ति का नाम सामने आने से अवैध शराब के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर सवाल फिर खड़े हो गए हैं। 2021 के मुरैना मामले में बाद में अदालत ने 14 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी।

    अब गुजरात पुलिस की जांच का फोकस केवल भावनगर तक सीमित नहीं है। रईस के मध्य प्रदेश संपर्कों से लेकर शराब बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए कच्चे माल की सप्लाई और तैयार शराब के वितरण तक हर कड़ी की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे। भावनगर की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि अवैध और मिलावटी शराब किस तरह लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क की पूरी कड़ी तक पहुंचना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।

  • शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा से जुड़ी खास मान्यता, ऐसे रखें व्रत और करें विधि-विधान से पूजन

    शुक्रवार को संतोषी माता की पूजा से जुड़ी खास मान्यता, ऐसे रखें व्रत और करें विधि-विधान से पूजन


    नई दिल्ली ।
    हिंदू धार्मिक परंपरा में संतोषी माता का व्रत सुख शांति संतोष और मनोकामना पूर्ति की कामना से किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार के दिन रखने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार माता संतोषी अपने भक्तों की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होती हैं। इस व्रत में कठिन नियमों से ज्यादा मन की शुद्धता और संयम को महत्व दिया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस व्रत को लगातार 16 शुक्रवार तक करने का विधान भी मिलता है हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की अवधि को लेकर कुछ अंतर हो सकता है।

    संतोषी माता का व्रत रखने वाले श्रद्धालु शुक्रवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करके माता संतोषी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजा स्थल पर लाल वस्त्र बिछाकर माता को लाल या गुलाबी फूल अर्पित किए जा सकते हैं। इसके बाद जल से भरा कलश रखा जाता है और उसके ऊपर गुड़ तथा चने से भरा पात्र रखने की परंपरा है। घी का दीपक जलाकर धूप और दीप से माता की पूजा की जाती है।

    पूजा के दौरान माता संतोषी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। संकल्प में अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत की अवधि और मनोकामना का स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद माता को गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। संतोषी माता के व्रत में गुड़ और चने को विशेष प्रसाद माना जाता है। पूजा के बाद संतोषी माता की व्रत कथा पढ़ने या सुनने की परंपरा है। कथा के दौरान भक्त माता का स्मरण करते हैं और कथा पूरी होने के बाद आरती की जाती है। इसके बाद गुड़ और चने का प्रसाद परिवार और श्रद्धालुओं में बांटा जाता है।

    इस व्रत का सबसे प्रमुख नियम खट्टी चीजों से परहेज करना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखने वाले व्यक्ति को शुक्रवार के दिन नींबू इमली अचार और दूसरी खट्टी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। कुछ परंपराओं में परिवार के सदस्यों को भी उस दिन खट्टी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत में भोजन के नियम भी अलग अलग परंपराओं के अनुसार बदल सकते हैं। कुछ लोग दिनभर निराहार रहते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु सात्त्विक भोजन या गुड़ चना और खीर जैसे प्रसाद का सेवन करते हैं।

    संतोषी माता के व्रत में केवल भोजन से जुड़े नियमों को ही महत्वपूर्ण नहीं माना जाता बल्कि व्यवहार में संयम रखने पर भी जोर दिया जाता है। व्रत के दिन क्रोध से बचना किसी का अपमान न करना और मन में नकारात्मक भाव न रखना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता और भोजन दान भी कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता का ध्यान और कथा का श्रवण मन को एकाग्र रखने का माध्यम माना जाता है।

    जब 16 शुक्रवार का संकल्प पूरा हो जाता है तो धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत का उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन विशेष पूजा और भोग लगाया जाता है। कुछ परंपराओं में बच्चों को भोजन कराने और उन्हें दक्षिणा या मिठाई देने का विधान बताया गया है। उद्यापन की विस्तृत विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए किसी विशेष संकल्प के साथ व्रत शुरू करने से पहले अपनी पारिवारिक परंपरा या योग्य धार्मिक आचार्य से विधि जानना उचित रहता है।

    इस तरह संतोषी माता का व्रत केवल मनोकामना से जुड़ी धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि संतोष संयम श्रद्धा और सकारात्मक भाव को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा के साथ की गई पूजा भक्त के मन में विश्वास और शांति का भाव पैदा करती है। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा परंपराओं पर आधारित है।