Category: Economy

  • DRI का बड़ा खुलासा: गोल्ड स्मगलिंग गिरोह बेनकाब, करोड़ों की एसेट्स सीज

    DRI का बड़ा खुलासा: गोल्ड स्मगलिंग गिरोह बेनकाब, करोड़ों की एसेट्स सीज


    नई दिल्ली। डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने संगठित सोने की तस्करी के नेटवर्क को बेनकाब किया है और 14.13 करोड़ रुपए मूल्य के सोने, चांदी और भारतीय मुद्रा को जब्त किया है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा रविवार को दी गई। अधिकारियों ने कहा कि इस नेटवर्क में शामिल 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

     यह गिरोह विदेशी मूल के सोने की भारत में तस्करी करने, उसे ट्रेनों के माध्यम से परिवहन करने, पहचान चिह्नों को हटाने के लिए अवैध संयंत्रों में उसे पिघलाने और फिर घरेलू बुलियन बाजार में बेचने में लगा हुआ था।

    इस अभियान के दौरान, डीआरआई अधिकारियों ने लगभग 13.41 करोड़ रुपए मूल्य का 8,286.81 ग्राम सोना, 19.67 लाख रुपए मूल्य की 7,350.4 ग्राम चांदी और 51.74 लाख रुपए की भारतीय मुद्रा जब्त की। यह जब्ती सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत की गई।

    यह मामला तब सामने आया जब डीआरआई अधिकारियों ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए कोलकाता से ट्रेन से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे एक यात्री को रोका।

    यात्री के पास विदेशी मुहरों वाला सोना था, जिसे स्टेशन के बाहर किसी अन्य व्यक्ति को पहुंचाना था। अधिकारियों ने तुरंत ही वाहक और प्राप्तकर्ता दोनों को पकड़ लिया।उनकी जानकारी के आधार पर, डीआरआई टीमों ने दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया और एक अवैध सोना पिघलाने की सुविधा का पता लगाया।

    जांचकर्ताओं ने पाया कि इस इकाई का उपयोग विदेशी मूल के सोने को पिघलाने और उस पर से पहचान चिह्नों को हटाने के लिए किया जा रहा था, ताकि इसे स्थानीय बाजार में बेचा जा सके।

    परिसर से अतिरिक्त सोना, चांदी और नकदी बरामद की गई, और सुविधा का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी हिरासत में ले लिया गया। आगे की जांच के बाद अधिकारी कोलकाता पहुंचे, जहां गिरोह के कथित सरगना का पता एक अन्य अवैध सोना पिघलाने वाली इकाई से चला।

    इस अभियान के दौरान और अधिक मिलावटी सोना बरामद किया गया। सरगना को दो वाहकों के साथ गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने तस्करी किया हुआ विदेशी चिह्नों वाला सोना प्राप्त किया था, उस पर से चिह्नों को हटाने के लिए उसे पिघलाया और फिर वितरण के लिए ट्रेन से दिल्ली भेजा था। अधिकारियों ने बताया कि सोने की तस्करी, परिवहन, पिघलाने और बिक्री में शामिल सभी छह लोगों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है।

    एजेंसी ने कहा कि नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और तस्करी किए गए सोने के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

  • MP के 22 लाख पेंशनर्स के लिए झटका: केंद्र ने पेंशन राशि बढ़ाने से किया इंकार, महंगाई के बीच आर्थिक मदद पर संकट

    MP के 22 लाख पेंशनर्स के लिए झटका: केंद्र ने पेंशन राशि बढ़ाने से किया इंकार, महंगाई के बीच आर्थिक मदद पर संकट


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के करीब 22.5 लाख पेंशनर्स के लिए दिल्ली से निराशाजनक खबर है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत दी जाने वाली पेंशन राशि में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यह निर्णय नीति आयोग की सिफारिशों और विभिन्न मूल्यांकन अध्ययनों के बावजूद लिया गया है, जिनमें पेंशन राशि बढ़ाने और भुगतान प्रणाली को मजबूत करने की सलाह दी गई थी।

    राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। विशेष रूप से विकलांगता पेंशन (IGNDPS) के मामले में मध्य प्रदेश 1,01,470 लाभार्थियों के साथ देश में दूसरे स्थान पर है, केवल बिहार इससे आगे है। चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश को 889.77 करोड़ रुपए की निधि जारी की है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार से भी अधिक है।

    पेंशन की वर्तमान व्यवस्था:

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन (IGNOAPS):

    60-79 वर्ष के बुजुर्ग: 600 रुपए/माह (केंद्र 200 + राज्य 400)

    80 वर्ष या उससे अधिक: 600 रुपए/माह (केंद्र 500 + राज्य 100)

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन (IGNWPS):

    40-79 वर्ष की BPL विधवाओं को 600 रुपए/माह (केंद्र 300 + राज्य 300)

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन (IGNDPS):

    18-79 वर्ष के 80% या अधिक दिव्यांग: 600 रुपए/माह (केंद्र 300 + राज्य 300)

    80 वर्ष के बाद: केंद्र 500 + राज्य 100 रुपए/माह

    इस फैसले से लाखों बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनर्स को महंगाई के इस दौर में आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद नहीं पूरी होगी। हालांकि मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही अपनी ओर से पेंशन राशि का योगदान सुनिश्चित किया है, लेकिन केंद्रीय हिस्से में वृद्धि न होने से कुल राशि में बदलाव नहीं होगा।

    सरकार का निर्णय और प्रभाव:

    केंद्र ने पेंशन बढ़ोतरी से इनकार किया, बावजूद इसके कि नीति आयोग और अध्ययन पेंशन राशि बढ़ाने की सलाह दे चुके थे।

    इसका असर सीधे उन 22.5 लाख लाभार्थियों पर पड़ेगा, जो इस राशि का उपयोग भोजन, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों के लिए करते हैं।

    मध्य प्रदेश सामाजिक सुरक्षा के मामले में अग्रणी है, लेकिन पेंशन राशि स्थिर रहने से आर्थिक दबाव बना रहेगा।

    राज्य और केंद्र सरकार की संयुक्त व्यवस्था के बावजूद अब पेंशन बढ़ाने की मांग लाभार्थियों और सामाजिक संगठनों की तरफ से तेज हो सकती है।

  • मार्केट आउटलुक: अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमत और फेड की बैठक पर निर्भर करेगी शेयर बाजार की चाल

    मार्केट आउटलुक: अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल की कीमत और फेड की बैठक पर निर्भर करेगी शेयर बाजार की चाल


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला हफ्ता काफी अहम होगा। अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध; विदेशी निवेशकों के रुझान, कच्चे तेल की कीमत और फेड रिजर्व की बैठक के निर्णय से बाजार की चाल निर्धारित होगी।

    अमेरिकी फेड की ब्याज दरों को लेकर दो दिवसीय बैठक 17 मार्च से शुरू होगी और इसके फैसलों का ऐलान 18 मार्च को किया जाएगा। मौजूदा समय में युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों के चलते इस बार की फेड बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

    कच्चे तेल की कीमतें भी इस हफ्ते बाजार के लिए काफी अहम होंगी। बीते एक हफ्ते में आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा के चलते कच्चे तेल का दाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करीब 11 प्रतिशत बढ़ गया है। ऐसे में कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव अगले हफ्ते बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    अमेरिका, इजरायल-ईरान युद्ध लगातार तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि यूएस ईरान के तेल निर्यात के लिए अहम खार्ग द्वीप पर अतिरिक्त एयर स्ट्राइक कर सकता है। ऐसे में युद्ध और खींचने भी बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। मार्च के पहले पखवाड़े में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 52,704 करोड़ रुपए इक्विटी बाजार से निकाले। ऐसे में एफआईआई का रुझान भी बाजार का सेंटीमेंट तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    मध्य पूर्व में तनाव के चलते भारतीय बाजार के लिए बीता हफ्ता काफी नुकसान वाला रहा है। इस दौरान सेंसेक्स 4,354.98 अंक या 5.52 प्रतिशत और निफ्टी 1,299.35 अंक या 5.31 प्रतिशत की गिरावट देखी गई।

    9-13 मार्च के बीच हुई गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर सूचीबद्ध सभी कंपनियों का मार्केटकैप 20 लाख करोड़ रुपए कम होकर 430 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जो इस हफ्ते की शुरुआत में करीब 450 लाख करोड़ रुपए था।

    इस हफ्ते के दौरान सूचकांकों में सबसे अधिक गिरावट ऑटो में देखी गई। सभी सूचकांकों निफ्टी ऑटो 10.64 प्रतिशत की गिरावट के साथ टॉप लूजर था। इसके साथ निफ्टी पीएसयू बैंक 7.27 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 7.01 प्रतिशत,निफ्टी प्राइवेट बैंक 6.96 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 5.90 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस 5.68 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग 5.60 प्रतिशत और निफ्टी इन्फ्रा 5.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

  • घरेलू एयरलाइंस ने मध्य पूर्व क्षेत्र की कई उड़ानों को रद्द किया

    घरेलू एयरलाइंस ने मध्य पूर्व क्षेत्र की कई उड़ानों को रद्द किया


    नई दिल्ली। घरेलू एयरलाइंस ने रविवार को मध्य पूर्व क्षेत्र की कई उड़ानों को रद्द कर दिया है। इसमें अधिक उड़ानें यूएई के दुबई और अबू धाबी शहरों की हैं। इन उड़ानों के रद्द होने की वजह क्षेत्र में तनाव का लगातार बढ़ना है।

    भारतीय एयरलाइंस में एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने पश्चिम एशियाई देशों को जाने वाली कई उड़ानें रद्द की हैं, जबकि इंडिगो ने दुबई जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया है।

    एयर इंडिया समूह ने एक बयान में कहा, “संयुक्त अरब अमीरात के एयरपोर्ट अधिकारियों के नए निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को 15 मार्च 2026 के लिए अपनी अस्थायी उड़ानों में कटौती करनी पड़ रही है।

    बयान ने आगे कहा गया, “एयर इंडिया: दिल्ली-दुबई की एक वापसी उड़ान संचालित करेगी, दुबई के लिए निर्धारित पांच उड़ानों में से चार रद्द कर दी गई हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस:​​दिल्ली-दुबई की एक वापसी उड़ान संचालित करेगी, दुबई के लिए निर्धारित छह उड़ानों में से पांच रद्द कर दी गई हैं। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने अबू धाबी की सभी पांच उड़ानें रद्द कर दी हैं।

    एयर इंडिया एक्सप्रेस दिल्ली, कन्नूर, कोच्चि, कोझिकोड, मुंबई और तिरुवनंतपुरम के लिए उड़ानें संचालित करने की योजना बना रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस रस अल खैमाह-कोझिकोड और रस अल खैमाह-कोच्चि के बीच उड़ानें संचालित करेगी।

    एयरलाइन ने कहा, “ये उड़ानें स्लॉट की उपलब्धता और संचालन के समय की स्थिति के अनुसार संचालित की जाएंगी। इंडिगो ने कहा कि उसने अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष से संबंधित हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के चलते दुबई आने-जाने वाली उड़ानें रद्द कर दी हैं।

    इंडिगो ने आगे कहा, “मध्य पूर्व में बदलती स्थिति के कारण, दुबई में उड़ान संचालन को और प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे उड़ान समय सारिणी में बदलाव हुए हैं। दुबई आने-जाने वाले यात्रियों से अनुरोध है कि हवाई अड्डे के लिए रवाना होने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच कर लें। हम यात्रियों को नवीनतम जानकारी से अवगत कराने के लिए सूचनाएं भी भेज रहे हैं।

    एक पिछले पोस्ट में, इंडिगो ने यह भी कहा था कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में, साथ ही यूरोप के चुनिंदा मार्गों पर, अपने उड़ान नेटवर्क को धीरे-धीरे पुनर्स्थापित करने के लिए निकट समन्वय में है।

  • Central Mine Planning IPO: ऑफर फॉर सेल पर आधारित, निवेशकों के लिए 24 मार्च तक खुला मौका

    Central Mine Planning IPO: ऑफर फॉर सेल पर आधारित, निवेशकों के लिए 24 मार्च तक खुला मौका

    नई दिल्ली:कोल इंडिया की सब्सिडियरी कंपनी Central Mine Planning का आईपीओ इस हफ्ते निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। यह IPO 20 मार्च से खुलेगा और 24 मार्च तक निवेशक इसमें हिस्सेदारी ले सकते हैं। ग्रे मार्केट के हालिया आंकड़े बताते हैं कि इस आईपीओ में पहले से ही आकर्षक प्रीमियम देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर इस आईपीओ पर काफी तेज है क्योंकि यह ऑफर फॉर सेल पर आधारित है और कोल इंडिया की प्रतिष्ठित सब्सिडियरी कंपनी द्वारा जारी किया जा रहा है।

    Central Mine Planning IPO के तहत 10.71 करोड़ शेयर जारी किए जाएंगे। यह एक मेनबोर्ड सेगमेंट का आईपीओ है और इसकी लिस्टिंग बीएसई और एनएसई दोनों जगह होगी। हालांकि कंपनी ने अभी तक प्राइस बैंड और लॉट साइज की घोषणा नहीं की है, लेकिन उम्मीद है कि सोमवार तक यह जानकारी सार्वजनिक कर दी जाएगी।

    आईपीओ में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालीफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स QIBs के लिए आरक्षित रहेगा। वहीं 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए उपलब्ध होगा और शेष 15 प्रतिशत नॉन-इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए रखा गया है।

    कंपनी की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नजर आ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में Central Mine Planning का रेवन्यू 2,177 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2024 में 1,770 करोड़ रुपये था। टैक्स के बाद प्रॉफिट वित्त वर्ष 2025 में 667 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले साल यह 503 करोड़ रुपये था। यह वृद्धि निवेशकों के लिए आकर्षक संकेत है।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम GMP की रिपोर्ट के अनुसार, इस IPO के शेयर आज 19 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। आईपीओ में सबसे अधिक GMP 24 रुपये प्रति शेयर देखा गया। यह संकेत करता है कि निवेशकों की ओर से शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक है और शेयरों की मांग अच्छी रहेगी।

    Central Mine Planning भारत की सबसे बड़ी कोयला और मिनिरल कंसल्टेंसी फर्म है। कंपनी के पास वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 61 प्रतिशत मार्केट शेयर था। कंपनी कोयला मंत्रालय के साथ-साथ पेट्रोलियम मंत्रालय को भी सलाह देती है, जिससे इसकी प्रतिष्ठा और बाजार में स्थिरता बनी रहती है।

    इस IPO के मर्चेंट बैंकर्स के रूप में IDBI Capital Markets & Securities और SBI Capital Markets चुने गए हैं। रजिस्ट्रार के रूप में केफिन टेक्नोलॉजी नियुक्त की गई है।

    विशेष रूप से निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। इसलिए किसी भी निवेश से पहले विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।

     Central Mine Planning का IPO निवेशकों के लिए एक आकर्षक अवसर के रूप में सामने आया है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, ग्रे मार्केट प्रीमियम और प्रतिष्ठित कंपनी होने के कारण यह IPO चर्चा में है। निवेशक इसे लेकर उत्साहित हैं और आगामी लिस्टिंग पर नजर रखे हुए हैं।

  • MP में LPG का बड़ा संकट: होटलों के चूल्हे ठंडे, घरों में 8 घंटे की कतार, प्रशासन अलर्ट पर

    MP में LPG का बड़ा संकट: होटलों के चूल्हे ठंडे, घरों में 8 घंटे की कतार, प्रशासन अलर्ट पर



    भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) संकट ने आम नागरिक और व्यवसाय दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिली रिपोर्टों के मुताबिक, घरेलू गैस की कमी ने लोगों को धूप में घंटों कतार में खड़ा कर दिया है, वहीं कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने से होटलों और रेस्तरां के चूल्हे ठंडे पड़े हैं। राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद और बोगदा पुल इलाकों में स्थिति गंभीर है। स्थानीय निवासी शीबा खान के अनुसार, उनके पास 13 मार्च को डिलीवरी का मैसेज तो आया, लेकिन सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, जिससे उन्हें अब रिश्तेदारों के यहां खाना बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं मोहम्मद रियाज ने तीन दिन गैस न मिलने के बाद नया इंडक्शन चूल्हा खरीदा, ताकि परिवार भूखा न रहे।

    कॉमर्शियल सिलेंडरों की किल्लत ने प्रदेश के होटल और रेस्तरां उद्योग को भी प्रभावित किया है। पिछले छह दिनों में 50,000 से ज्यादा होटलों और छोटे रेस्टॉरेंट्स को सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल और इंदौर के कई होटलों ने मेन्यू छोटा कर दिया है, जबकि कई रेहड़ियां और स्ट्रीट फूड ठेले पूरी तरह बंद हो गए हैं। इससे दैनिक मजदूरी पर निर्भर दुकानदारों की आमदनी भी प्रभावित हो रही है।

    हालांकि ग्वालियर और उज्जैन में प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं। ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने दावा किया कि जिले में स्टॉक की कोई कमी नहीं है और खाद्य विभाग की टीमें लगातार चेकिंग कर रही हैं। अफवाहों को रोकने के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। उज्जैन में रविवार की छुट्टी के बावजूद महाकाल गैस एजेंसी खोलकर घरेलू गैस की सप्लाई जारी रखी गई। एजेंसी संचालक भगवान दास एरन ने बताया कि घरेलू सिलेंडर की निरंतर सप्लाई की जा रही है, हालांकि कॉमर्शियल सिलेंडरों के लिए नए आदेशों का इंतजार किया जा रहा है।

    इंदौर में स्थिति थोड़ी मिश्रित रही। प्रशासन के निर्देश पर रविवार को खुली एजेंसियों में उपभोक्ताओं ने बुकिंग कराने में कोई परेशानी नहीं बताई, लेकिन सप्लाई में देरी के कारण डिलीवरी 7-8 दिन में मिलने का आश्वासन दिया गया। वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने KYC प्रक्रिया और गैस पाइप (नली) खरीदने का दबाव भी अनुभव किया।

    इस संकट ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में LPG की आपूर्ति और वितरण में प्रशासनिक और लॉजिस्टिक चुनौतियां हैं। घरों में खाना बनाने वाले आम नागरिक और व्यवसायिक स्तर पर रेस्तरां चलाने वाले दोनों ही इस संकट से प्रभावित हैं। ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर में प्रशासन की सक्रियता के बावजूद राजधानी भोपाल सहित कई इलाकों में जनता को गैस के लिए लंबी कतारों और देरी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं की मांग है कि राज्य सरकार और गैस एजेंसियां जल्द से जल्द सप्लाई और वितरण सुचारू करें ताकि रोजमर्रा के काम और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित न हों।

  • FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…

    FASTag: वार्षिक पास की कीमत बढ़ी….एक अप्रैल से चुकाने होंगे ज्यादा पैसे…


    नई दिल्ली।
    भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (National Highway Authority of India- NHAI) (एनएचएआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए FASTag Annual Pass (फास्टैग वार्षिक पास) की कीमत में बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से गैर-व्यावसायिक वाहनों (कार, जीप और वैन) के लिए वार्षिक पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़ाकर 3075 रुपये कर दी गई है। फास्टैग वार्षिक पास पिछले साल 15 अगस्त को शुरू किया गया था। ताकि टोल शुल्क के बोझ को कम किया जा सके और हाईवे पर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाया जा सके।


    FASTag वार्षिक पास क्या है और कौन ले सकता है?

    फास्टैग वार्षिक पास उन वाहन मालिकों के लिए है जिनके पास गैर-व्यावसायिक वाहन और सक्रिय फास्टैग है।

    इस पास के तहत:
    – यह 1 साल या 200 टोल क्रॉसिंग तक मान्य रहता है
    – किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग के टोल प्लाजा पर लागू होता है
    – 200 बार टोल पार करने या 1 साल पूरा होने के बाद पास स्वतः समाप्त हो जाता है
    – इस पास को Rajmargyatra (राजमार्गयात्रा) मोबाइल एप या एनएचएआई की वेबसाइट के जरिए खरीदा जा सकता है।


    पास की कीमत हर साल क्यों बढ़ती है?

    सरकार ने नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) संशोधन नियम 2025 के तहत यह प्रावधान किया है कि फास्टैग वार्षिक पास की कीमत हर साल संशोधित की जाएगी। इसी नियम के अनुसार 2026-27 के लिए पास की कीमत में यह मामूली बढ़ोतरी की गई है।


    अभी कितने लोग FASTag वार्षिक पास का इस्तेमाल कर रहे हैं?

    सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के अनुसार: देश में 50 लाख से अधिक लोग फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग कर रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर होने वाले कुल कार टोल लेन-देन का लगभग 28 प्रतिशत अब इसी पास के जरिए होता है। इसके अलावा 2016 से अब तक 11.86 करोड़ फास्टैग जारी किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग सक्रिय हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक टोल वसूली फास्टैग के माध्यम से होती है।


    किन टोल प्लाजा पर वार्षिक पास का उपयोग सबसे ज्यादा है?

    कुछ टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास का उपयोग काफी अधिक है। दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर बिजवासन टोल प्लाजा – लगभग 57 प्रतिशत कारें फास्टैग वार्षिक पास से गुजरती हैं। दिल्ली के मुंडका टोल प्लाजा (UER-II) – लगभग 53 प्रतिशत उपयोग। झिंझोली टोल प्लाजा (NH-334P) – करीब 53 प्रतिशत गैर-व्यावसायिक वाहन फास्टैग वार्षिक पास का इस्तेमाल करते हैं।


    क्षेत्रीय स्तर पर:

    – चंडीगढ़ – 14 प्रतिशत
    – तमिलनाडु – 12.3 प्रतिशत
    – दिल्ली – 11.5 प्रतिशत
    – 15 अगस्त 2025 से जनवरी 2026 तक फास्टैग वार्षिक पास से 26.55 करोड़ से अधिक टोल लेन-देन दर्ज किए जा चुके हैं।


    क्या यह पास सभी टोल प्लाजा पर मान्य है?

    – नहीं। यह पास केवल राष्ट्रीय राजमार्ग और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे के लगभग 1150 टोल प्लाजा पर ही मान्य है। राज्य सरकार या स्थानीय निकायों द्वारा संचालित एक्सप्रेसवे या स्टेट हाईवे के टोल प्लाजा पर फास्टैग वार्षिक पास सामान्य फास्टैग की तरह काम करेगा और सामान्य टोल शुल्क लागू होगा।


    क्या FASTag Annual Pass लेना अनिवार्य है?

    – नहीं। फास्टैग वार्षिक पास पूरी तरह वैकल्पिक है।
    – जो उपयोगकर्ता फास्टैग वार्षिक पास नहीं लेते हैं, उनके लिए मौजूदा फास्टैग सिस्टम पहले की तरह ही चलता रहेगा और वे प्रति टोल क्रॉसिंग के हिसाब से शुल्क देते रहेंगे।


    पास खत्म होने पर क्या होगा?

    यदि: 200 ट्रिप पूरी हो जाती हैं, या 1 साल की वैधता समाप्त हो जाती है तो फास्टैग वार्षिक पास अपने आप सामान्य फास्टैग में बदल जाएगा।हालांकि, अगर 200 ट्रिप पहले ही पूरी हो जाएं तो उपयोगकर्ता चाहें तो उसी साल के भीतर फिर से नया फास्टैग वार्षिक पास खरीद सकते हैं।


    खर्च और समय दोनों की बचत

    फास्टैग वार्षिक पास की कीमत में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद यह योजना हाईवे उपयोगकर्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह व्यवस्था टोल भुगतान को आसान बनाने के साथ-साथ नियमित यात्रियों के लिए खर्च और समय दोनों की बचत में मदद कर रही है।

  • भारत आ रहे एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा को लेकर भारत सतर्क, फारस की खाड़ी के पास नौसेना के युद्धपोत तैनात

    भारत आ रहे एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा को लेकर भारत सतर्क, फारस की खाड़ी के पास नौसेना के युद्धपोत तैनात


    तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कदम तेज कर दिए हैं। भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी के आसपास अपने कई युद्धपोत तैनात कर दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर भारत की ओर आने वाले व्यापारिक जहाजों को सहायता और सुरक्षा दी जा सके।

    सूत्रों के मुताबिक इन युद्धपोतों की तैनाती का उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, क्योंकि क्षेत्र में हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं।

    दो भारतीय एलपीजी जहाजों को मिली अनुमति

    इस बीच शनिवार को ईरान ने भारत की ओर जा रहे दो भारतीय झंडे वाले एलपीजी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी। इनमें एक जहाज शिवालिक है, जो जहाज ट्रैकिंग वेबसाइट के अनुसार फिलहाल ओमान के पास देखा गया है और इसके 21 मार्च तक अपने गंतव्य तक पहुंचने की संभावना है।

    भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर नजर

    बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने शुक्रवार को फारस की खाड़ी की समुद्री स्थिति और भारतीय जहाजों व नाविकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। मंत्रालय के मुताबिक फारस की खाड़ी में 24 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर 668 भारतीय नाविक तैनात हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्व में तीन जहाजों पर 76 भारतीय नाविक मौजूद हैं।

    24 घंटे निगरानी कर रही सरकार

    मंत्रालय ने बताया कि डीजी शिपिंग जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय मिशनों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है। सभी जहाजों और चालक दल की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 24 घंटे के नियंत्रण कक्ष के सक्रिय होने के बाद से अब तक 2,425 से अधिक कॉल और 4,441 ईमेल प्राप्त हुए हैं। इसके साथ ही 223 से ज्यादा फंसे भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी सुनिश्चित की गई है।

    ईरान ने सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिया

    भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहाली ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद ईरान भारत की ओर जाने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। उन्होंने भारत और ईरान को पुराने मित्र बताते हुए कहा कि दोनों देशों के हित और भविष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद पर ईरान का बयान

    वहीं भारत में ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने कहा कि ईरान कभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना नहीं चाहता था। उन्होंने मौजूदा हालात के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वैश्विक नेताओं को युद्ध रोकने के लिए उन पर दबाव बनाना चाहिए, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतों का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

  • करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण

    करदाताओं को भेजे गए अग्रिम टैक्स रिमाइंडर ईमेल में गड़बड़ी, आयकर विभाग ने जारी किया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली।
    आयकर विभाग ने शनिवार को करदाताओं से आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025–26) के लिए अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए ईमेल संदेशों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने करदाताओं से त्रुटिपूर्ण ईमेल को नजरअंदाज करने की अपील की है।

    आयकर विभाग ने ‘एक्स’ पोस्ट पर जारी एक बयान में कहा कि उसे करदाताओं से गलत जानकारी वाले ईमेल मिलने की शिकायतें प्राप्त हुई है। विभाग ने इस मुद्दे को ध्यान में लाने के लिए करदाताओं का धन्यवाद किया और असुविधा के लिए माफी मांगी है। आयकर ने बताया कि संचार प्रणाली के लिए जिम्मेदार सेवा प्रदाता के समन्वय से इस मामले को सुलझाया जा रहा है।

    आयकर विभाग ने इस संबंध में स्पष्टीकरण जारी करते हुए करदाताओं से इन ईमेल को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील की है। विभाग ने स्वीकार किया है कि अग्रिम कर ई-अभियान के तहत भेजे गए कुछ ईमेल में महत्वपूर्ण लेन-देन से संबंधित गलत विवरण थे। दरअसल यह समस्या आकलन वर्ष 2026-27 (वित्त वर्ष 2025-26) के लिए भेजे गए ईमेल में सामने आई है। विभाग ने करदाताओं को हुई असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

    विभाग ने करदाताओं से अनुरोध किया है कि वे पहले भेजे गए त्रुटिपूर्ण ईमेल को अनदेखा करें। विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे अपनी लेन-देन की जानकारी की पुष्टि आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध अनुपालन पोर्टल के ‘ई-अभियान’ टैब के जरिए करें। ये संचार केवल करदाताओं को उनकी वित्तीय जानकारी की समीक्षा करने और अग्रिम कर का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए एक अनुस्मारक के रूप में कार्य करते हैं। विभाग ने इस प्रक्रिया में करदाताओं से सहयोग की अपेक्षा की है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले एक-दो दिनों से कई करदाताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) को आयकर विभाग की ओर से ‘नज’ ईमेल भेजे जा रहे थे। विभाग के इन ईमेल में यह कहा गया था कि करदाता द्वारा किया गया एडवांस टैक्स भुगतान उनके वित्तीय लेन-देन से मेल नहीं खाता है। इसके साथ ही ईमेल में उस साल के दौरान किए गए कुछ ‘महत्वपूर्ण ट्रांजैक्शन’ का भी जिक्र किया गया था। इसके बाद आयकर विभाग ने स्पष्टीकरण जारी किया है।

  • मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    मध्य प्रदेश में LPG संकट: सिलेंडर 30% महंगे, होटल और घरों में हाहाकार

    भोपाल। मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले 6 दिनों से प्रदेश के कई शहरों में कॉमर्शियल और घरेलू सिलेंडर की सप्लाई बाधित है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि होटल, रेस्टोरेंट और घरों में रसोई गैस की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

    सिलेंडर के लिए लंबी लाइनें:
    भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख शहरों में लोग सुबह-सुबह सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े हो रहे हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग भी सिलेंडर लेने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं। कई बार बुकिंग पूरी नहीं हो पा रही है, जबकि कभी-कभी 6 से 8 घंटे इंतजार के बाद सिलेंडर मिल पा रहा है।

    होटल और रेस्टोरेंट्स पर असर:
    प्रदेश में करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट्स इस संकट से प्रभावित हैं। इन व्यवसायों को अपने संचालन के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, जिससे खाना पकाने में बाधा और ग्राहकों की सेवा प्रभावित हो रही है।

    विकल्प और बढ़ा खर्च:
    गैस की कमी के कारण इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का उपयोग बढ़ गया है। हालांकि, इनके संचालन की लागत 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। भोपाल में कुछ रेहड़ियां और छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल्स अस्थायी रूप से बंद भी हो गए हैं।

    राज्यव्यापी स्थिति:
    LPG संकट केवल भोपाल तक सीमित नहीं है। राजधानी से लेकर छिंदवाड़ा और अन्य शहरों में रसोई गैस की कमी ने आम जनता और व्यवसायों में हाहाकार मचा दिया है।

    विशेषज्ञों की चेतावनी:
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो इससे खाद्य सेवा उद्योग और घरेलू रसोई दोनों प्रभावित होंगे। लंबे समय तक गैस की कमी के कारण लोग सस्ता और असुरक्षित विकल्प, जैसे खुले भट्ठी या कोयला, इस्तेमाल करने पर मजबूर हो सकते हैं, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

    सरकारी कदम:
    इस समय सरकारी एजेंसियां और वितरक प्रयास कर रहे हैं कि जल्द से जल्द सिलेंडर की सप्लाई बहाल हो। हालाँकि, अभी तक कोई ठोस समयरेखा नहीं दी गई है।

    मध्य प्रदेश में LPG संकट से गृहस्थी और व्यापार दोनों प्रभावित हैं। होटल और रेस्टोरेंट्स संचालन के लिए संघर्ष कर रहे हैं, घरों में रसोई गैस की कमी आमजन की दिनचर्या पर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की सुविधा दोनों पर लंबी अवधि में असर डाल सकता है।