Category: Economy

  • कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। इसी बीच कर्मचारी यूनियनों ने एक अहम मांग उठाई है कि वेतन आयोग की समीक्षा हर 10 साल की बजाय हर 5 साल में की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उसके मुकाबले वेतन में होने वाली बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं रह जाती।

    यूनियनों का मानना है कि लंबे अंतराल में वेतन संरचना असंतुलित हो जाती है। निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के वेतन के बीच अंतर समय के साथ और ज्यादा बढ़ता जाता है, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। इसका सीधा असर आम कर्मचारियों की जीवनशैली और उनकी क्रय शक्ति पर पड़ता है।

    कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब वेतन में बढ़ोतरी होती है, तो वह प्रतिशत के आधार पर तय होती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम फायदा होता है, जबकि अधिक वेतन पाने वालों को उसी अनुपात में अधिक लाभ मिल जाता है।

    यूनियनों का सुझाव है कि अगर वेतन आयोग की समीक्षा छोटे अंतराल पर की जाए, तो महंगाई और वेतन के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हो सकता है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आएगी और उनकी वास्तविक आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

    इस बीच वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चाओं के लिए बैठकों का दौर भी जारी है। इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें वेतन, पेंशन और भत्तों जैसे विषय शामिल हैं।

    फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले समय में इस पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी, ऑटो-एनर्जी स्टॉक्स में तेजी से बाजार में दिखी खरीदारी की दिलचस्पी

    निफ्टी में कंसोलिडेशन जारी, ऑटो-एनर्जी स्टॉक्स में तेजी से बाजार में दिखी खरीदारी की दिलचस्पी


    नई दिल्ली।
    शेयर बाजार में गुरुवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, जहां प्रमुख इंडेक्स में शुरुआती बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 50 ने दिन की शुरुआत 24400 के स्तर के आसपास की और कुछ समय के लिए इस स्तर को पार भी किया। वहीं सेंसेक्स भी तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में अच्छी बढ़त दर्ज की।

    हालांकि बाजार में शुरुआती तेजी के बाद निफ्टी एक सीमित दायरे में फंसता नजर आया और ऊपरी स्तर पर कंसोलिडेशन का माहौल बन गया। इंडेक्स लगातार 24300 से 24400 के बीच ट्रेड करता दिखा, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार फिलहाल अगली बड़ी चाल के लिए रुककर स्थिति का आकलन कर रहा है।

    इस बीच सेक्टर वाइज मूवमेंट काफी दिलचस्प रहा। ऑटो सेक्टर में निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई है और लार्जकैप ऑटो कंपनियों में खरीदारी देखने को मिल रही है। कई प्रमुख ऑटो स्टॉक्स में हल्की से मध्यम तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेक्टर बाजार में मजबूती का केंद्र बना रहा।

    मेटल सेक्टर में भी खरीदारी का रुझान देखने को मिला। कुछ प्रमुख मेटल कंपनियों के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक इस सेक्टर में रिकवरी की उम्मीद के साथ एंट्री कर रहे हैं। इसके अलावा एनर्जी सेक्टर में भी धीरे-धीरे निवेश बढ़ता हुआ दिखाई दिया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय निवेशक उन सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं जहां हाल ही में रिकवरी के संकेत मिले हैं या जहां स्टॉक्स ने निचले स्तर से वापसी दिखाई है। यही वजह है कि ऑटो, मेटल और एनर्जी जैसे सेक्टर फोकस में बने हुए हैं।

    तकनीकी स्तर पर निफ्टी ने पहले जिस स्तर को रेजिस्टेंस माना जा रहा था, उसे पार करने की कोशिश की है, लेकिन अब वह स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर रहा है। फिलहाल 24300 से 24250 का क्षेत्र बाजार के लिए मजबूत खरीदारी का दायरा माना जा रहा है।

    अगर बाजार इस जोन में आता है, तो वहां से फिर से खरीदारी देखने की संभावना बनी रहती है, जिससे निफ्टी एक बार फिर ऊपरी स्तरों की ओर बढ़ सकता है। कुल मिलाकर बाजार फिलहाल संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट दिख रही है और न ही मजबूत ब्रेकआउट, बल्कि निवेशक अगले बड़े ट्रेंड का इंतजार कर रहे हैं।

  • सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के बाद बना रिटर्न का इतिहास, 1 लाख बना 14 करोड़, कंपनी ने दिया 1400 गुना फायदा

    सरकारी हिस्सेदारी बिक्री के बाद बना रिटर्न का इतिहास, 1 लाख बना 14 करोड़, कंपनी ने दिया 1400 गुना फायदा


    नई दिल्ली।
    पिछले कुछ दशकों में शेयर बाजार ने कई ऐसे उदाहरण दिए हैं, जिन्होंने निवेशकों की सोच पूरी तरह बदल दी है। ऐसी ही एक कंपनी है जिसने लंबे समय में निवेशकों को असाधारण रिटर्न देकर मल्टीबैगर बनने की पहचान हासिल की है। समय के साथ इस कंपनी का प्रदर्शन इतना मजबूत रहा कि शुरुआती निवेशकों की पूंजी कई गुना बढ़कर करोड़ों में बदल गई।

    साल 2002 के आसपास अगर किसी निवेशक ने इस कंपनी में सिर्फ 1 लाख रुपये लगाए होते, तो आज वह राशि बढ़कर करीब 14 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी होती। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि सही कंपनी और लंबे समय तक निवेश कितना बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

    इस कंपनी की कहानी एक बड़े बदलाव से शुरू होती है, जब सरकार ने अपनी हिस्सेदारी निजी क्षेत्र को बेची थी। इसके बाद कंपनी के संचालन और रणनीति में कई अहम बदलाव हुए, जिसने इसके विकास की रफ्तार को तेज कर दिया। धीरे-धीरे कंपनी ने अपने कारोबार को मजबूत किया और बाजार में अपनी पकड़ बनानी शुरू की।

    पिछले 24 वर्षों में इस कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है और निवेशकों को लगभग 1400 गुना तक का रिटर्न दिया है। समय के साथ इसकी सालाना ग्रोथ भी स्थिर और प्रभावशाली बनी रही, जिससे यह बाजार में एक भरोसेमंद स्टॉक के रूप में उभरी।

    कंपनी का कारोबार भी समय के साथ काफी विस्तृत हुआ है। जहां पहले यह सीमित क्षेत्र में काम करती थी, वहीं अब यह कई नए सेगमेंट्स में तेजी से आगे बढ़ रही है। खासकर मेटल और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में इसका फोकस लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाएं और मजबूत हो रही हैं।

    इसके अलावा कंपनी ने सिल्वर जैसे अहम मेटल के उत्पादन में भी बड़ा विस्तार किया है। यह धातु अब सिर्फ एक कीमती संसाधन नहीं रह गई है, बल्कि आधुनिक तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कंपनी की अहमियत और भी बढ़ गई है।

    मजबूत उत्पादन क्षमता, कम लागत में संचालन और लगातार बढ़ते प्रॉफिट ने इस कंपनी को निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना दिया है। लंबे समय में इसका प्रदर्शन यह दिखाता है कि धैर्य और सही निवेश रणनीति से बाजार में बड़ा वेल्थ क्रिएशन संभव है।

  • पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    पाम ऑयल संकट से हिल सकता है FMCG सेक्टर, साबुन-शैंपू की कीमतों पर बढ़ा दबाव..

    नई दिल्ली। रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैंपू और अन्य FMCG उत्पादों की कीमतों पर आने वाले समय में असर देखने को मिल सकता है। वजह है पाम ऑयल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में आई दिक्कतें, जो अब भारतीय बाजार तक पहुंच चुकी हैं। यह वही कच्चा माल है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ खाने के तेल में बल्कि साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, बिस्किट और कई पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

    भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पाम ऑयल का आयात इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर सप्लाई में बाधा, बायोडीजल की बढ़ती मांग और भू-राजनीतिक तनाव के कारण इसकी कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर FMCG उत्पाद बनाती हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां सीधे तौर पर कीमतें बढ़ाने से बच सकती हैं, लेकिन इसका असर प्रोडक्ट के साइज या पैकेजिंग पर दिख सकता है। यानी साबुन का साइज छोटा हो सकता है या शैंपू की मात्रा पहले से कम हो सकती है, जिससे उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से बोझ बढ़ेगा।

    HUL और गोदरेज जैसी बड़ी FMCG कंपनियों पर इसका असर सबसे ज्यादा देखने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि इनका प्रोडक्शन काफी हद तक पाम ऑयल पर निर्भर करता है। कच्चे माल की बढ़ती लागत से इन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बन सकता है, जिससे उनकी मुनाफे की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    पाम ऑयल का इस्तेमाल सिर्फ खाने के तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक उपयोग के कई उत्पादों का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमतों में किसी भी तरह का उतार-चढ़ाव सीधे आम उपभोक्ता की जेब पर असर डालता है।

    फिलहाल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और रणनीति के तहत धीरे-धीरे बदलाव करने की योजना बना सकती हैं ताकि अचानक कीमत बढ़ाने से बचा जा सके। लेकिन अगर पाम ऑयल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर बाजार में साफ तौर पर दिखाई दे सकता है।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल

    पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, सोना-चांदी में जोरदार उछाल से बाजार में हलचल


    नई दिल्ली। देश में 7 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों IOC, BPCL और HPCL ने आज भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिली है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। एक्साइज ड्यूटी में पहले हुई कटौती का असर अब भी दिखाई दे रहा है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बड़ा बदलाव नहीं हो रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर बनी हुई हैं। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, पटना, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी कीमतें पिछले दिनों की तरह ही बनी हुई हैं। खास बात यह है कि कई बड़े शहरों में पेट्रोल अभी भी ₹100 के पार बना हुआ है, जबकि डीजल अधिकतर जगहों पर ₹100 से नीचे है।

    वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार से निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखी गई है। स्पॉट गोल्ड करीब 3 प्रतिशत से अधिक उछलकर 4700 डॉलर प्रति औंस के स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी तेज उछाल देखने को मिला है, जहां यह 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 77 डॉलर प्रति औंस के ऊपर कारोबार करती दिखी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में नरमी और संभावित युद्धविराम की उम्मीदों ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। इसके साथ ही डॉलर के कमजोर होने से सोने की मांग बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों में तेजी आई है। जब डॉलर कमजोर होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना सस्ता हो जाता है और निवेशक इसकी ओर आकर्षित होते हैं।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार में एक अलग प्रभाव डाला है। इससे महंगाई के दबाव में थोड़ी कमी आई है और निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने और चांदी की ओर बढ़ा है।

    फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं और किसी भी राजनीतिक या आर्थिक बदलाव का सीधा असर सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

  • ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    नई दिल्ली।
    बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रुख के साथ हुई और पूरे सत्र में सकारात्मक माहौल बना रहा। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच खरीदारी का रुझान बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई और बाजार ने मजबूती के साथ अपनी दिशा तय की।

    बाजार में सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर का देखने को मिला, जहां लगातार खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग शेयरों में आई इस तेजी ने न केवल प्रमुख सूचकांकों को ऊपर उठाया, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया। वित्तीय सेक्टर की मजबूती के कारण बाजार में स्थिरता बनी रही और तेजी का रुझान दिनभर कायम रहा।

    इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। छोटे और मध्यम कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक केवल बड़े स्टॉक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक बाजार में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुझान बना रहा, जिससे बाजार की गति और मजबूत हुई।

    हालांकि कुछ सेक्टर्स में हल्का दबाव भी देखने को मिला, जहां एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन इन कमजोरियों का असर पूरे बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा और कुल मिलाकर बाजार हरे निशान में ही बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव मजबूत बना हुआ है।

    वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक माहौल रहा, जिसका लाभ भारतीय बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय संकेतों में सुधार और कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के चलते निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना बढ़ी, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली, जबकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखी। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलन और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई और तेजी का रुख बना रहा।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय सकारात्मक चरण में दिखाई दे रहा है, जहां वैश्विक संकेत, मजबूत सेक्टोरल प्रदर्शन और घरेलू निवेशकों की सक्रियता मिलकर बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल रुझान मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

  • आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    आर्थिक मजबूती की नई मिसाल, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और स्थिर नीति बनी बड़ी ताकत

    नई दिल्ली।
    भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक नया वैश्विक आकलन सामने आया है, जिसमें देश को उभरते बाजारों में सबसे मजबूत स्थिति में रखा गया है। यह आकलन इस आधार पर किया गया है कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई वैश्विक आर्थिक झटकों के बावजूद अपनी स्थिरता और विकास क्षमता को बनाए रखा है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे तीन प्रमुख आधार हैं। इनमें विशाल विदेशी मुद्रा भंडार, स्थिर और संतुलित आर्थिक नीतियां तथा मजबूत घरेलू पूंजी बाजार शामिल हैं। ये तीनों तत्व मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद से वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार कई चुनौतियों से गुजरती रही है। महामारी का प्रभाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी और बैंकिंग क्षेत्र में आए संकट जैसी परिस्थितियों ने कई देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। इन कठिन हालातों के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर प्रदर्शन किया है।

    इस मूल्यांकन में यह भी सामने आया है कि भारत ने फंडिंग लागत में अचानक वृद्धि या अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों तक पहुंच में किसी बड़ी बाधा का सामना नहीं किया, जो कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हुई।

    देश की मौद्रिक नीति को भी स्पष्ट और स्थिर बताया गया है, जिससे महंगाई की उम्मीदें नियंत्रित रहती हैं और निवेशकों का भरोसा बना रहता है। साथ ही जरूरत के अनुसार मुद्रा विनिमय दर में लचीलापन बनाए रखना भी भारत की आर्थिक मजबूती का एक महत्वपूर्ण पहलू माना गया है।

    आकलन में यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के दौरान भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहेगा। इसका कारण यह है कि देश के पास पहले से मौजूद आर्थिक सुरक्षा ढांचा किसी भी बाहरी झटके को संभालने में सक्षम है।

    भारत की तुलना कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं से की गई, जहां यह पाया गया कि विभिन्न देशों ने महामारी के बाद आर्थिक दबावों को अलग-अलग स्तर पर झेला है, लेकिन भारत ने अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाई है।

  • वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    वैश्विक बाजार का असर, सोना-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी..

    नई दिल्ली।
    वैश्विक वित्तीय बाजार में बुधवार को एक अहम बदलाव देखने को मिला, जिसका सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी के बाद सोने और चांदी की कीमतों में तेज बढ़त दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की गतिविधियों में भी तेजी आ गई है। शुरुआती कारोबार से ही दोनों धातुएं मजबूत रुख के साथ आगे बढ़ती नजर आईं और दिन चढ़ने के साथ इनमें लगातार तेजी बनी रही।

    बाजार में सोने की कीमतों ने मजबूत शुरुआत की और कुछ ही समय में इसमें उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने अपने पिछले स्तर को पार करते हुए नया उच्च स्तर भी छुआ। कीमतों में यह बढ़त निवेशकों की बढ़ती खरीदारी और वैश्विक संकेतों में बदलाव का परिणाम मानी जा रही है।

    इसी तरह चांदी के बाजार में भी तेजी का रुख देखा गया। चांदी ने भी शुरुआती कारोबार में मजबूती दिखाई और कुछ ही समय में इसमें तेज उछाल दर्ज हुआ। कारोबार के दौरान चांदी ने अपने पिछले रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर मजबूत स्थिति बनाई, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि बाजार में इसकी मांग बढ़ रही है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में अनिश्चितता और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा लाभ कीमती धातुओं को मिल रहा है।

    इस पूरी स्थिति के पीछे मुख्य कारण डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट को माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने पर आमतौर पर कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी जैसी धातुओं की मांग बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि निवेशक डॉलर से हटकर उन संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं, जो आर्थिक अनिश्चितता के समय सुरक्षित मानी जाती हैं।

    घरेलू बाजार में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया है, जहां सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। कारोबार के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव जरूर रहा, लेकिन कुल मिलाकर रुझान मजबूती की ओर ही बना रहा।

    विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक डॉलर इंडेक्स पर दबाव बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी में मजबूती का माहौल बना रह सकता है। हालांकि बाजार की प्रकृति को देखते हुए इसमें अचानक बदलाव की संभावना भी बनी रहती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी के साथ कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।

    फिलहाल बाजार का रुख यह संकेत दे रहा है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों का असर आने वाले दिनों में भी कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकता है, और सोना-चांदी में तेजी या मंदी पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर रहेगी।

  • सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

    सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?



    नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।

    अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं।

    वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।

    कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।

  • L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर

    L&T का धमाका: मुनाफा उछला, ₹38 प्रति शेयर डिविडेंड; ऑर्डर बुक रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्ली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से चर्चा में रही इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro (L&T) ने अपने तिमाही और सालाना नतीजों से निवेशकों को खुश कर दिया है। कंपनी ने न सिर्फ मुनाफे में जबरदस्त बढ़त दर्ज की, बल्कि हर शेयर पर ₹38 के भारी-भरकम डिविडेंड का ऐलान भी किया है।

    कंपनी की ओर से जारी एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, L&T का ग्रुप ऑर्डर इनफ्लो 22% की बढ़त के साथ ₹4.35 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह कंपनी की मजबूत ऑर्डर बुक और भविष्य की ग्रोथ संभावनाओं का साफ संकेत देता है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में कंपनी का समेकित राजस्व ₹82,762 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 11% ज्यादा है। खास बात यह रही कि अंतरराष्ट्रीय कारोबार से ₹43,747 करोड़ की कमाई हुई, जो कुल राजस्व का 53% हिस्सा है।

    पूरे वित्त वर्ष की बात करें तो कंपनी का Recurring PAT ₹17,238 करोड़ रहा, जिसमें सालाना आधार पर 18% की मजबूत बढ़त दर्ज की गई। वहीं, Consolidated PAT ₹16,084 करोड़ रहा। इसमें ₹1,155 करोड़ का एक बार का प्रावधान (Exceptional Item) शामिल है, जो नए श्रम कानूनों के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया गया है।

    निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी डिविडेंड को लेकर आई है। L&T ने ₹2 फेस वैल्यू वाले हर शेयर पर ₹38 का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है, जो पिछले साल के ₹34 प्रति शेयर से ज्यादा है।

    कंपनी ने इसके लिए 22 मई 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है। यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट अकाउंट में L&T के शेयर होंगे, उन्हें यह डिविडेंड मिलेगा। शेयरधारकों की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का भुगतान 10 जून 2026 तक किया जा सकता है।

    कुल मिलाकर, मजबूत ऑर्डर बुक, बढ़ता मुनाफा और आकर्षक डिविडेंड—तीनों फैक्टर L&T को निवेशकों के लिए एक बार फिर चर्चा में ले आए हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग सेक्टर में कंपनी की पकड़ आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।