Category: Economy

  • जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड ने एंकर निवेशकों से जुटाए 120 करोड़ रुपये

    जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड ने एंकर निवेशकों से जुटाए 120 करोड़ रुपये


    नई दिल्ली/मुंबई।
    जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड ने अपने शुरुआती आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से पहले एंकर निवेशकों से 120 करोड़ रुपये जुटाए हैं। अहमदाबाद की कृषि रसायन कंपनी का यह इश्यू सोमवार, 16 मार्च, 2026 को निवेशकों के निवेश करने के लिए खुलेगा।

    कंपनी ने शुक्रवार को स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि उसने एंकर निवेशकों को 320 रुपये प्रति शेयर की दर से 37,50,000 इक्विटी शेयर आवंटित किए गए हैं। एंकर निवेशकों के तौर पर भाग लेने वाली कुछ प्रमुख संस्थाओं में शाइन स्टार बिल्ड कैप प्राइवेट लिमिटेड, क्राफ़्ट इमर्जिंग मार्केट फंड पीसीसी, सिटाडेल कैपिटल फंड और क्राफ़्ट इमर्जिंग मार्केट फंड पीसीसी और एलीट कैपिटल फंड शामिल हैं।

    जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड का आईपीओ निवेश के लिए 16 मार्च को खुलेगा। इसमें निवेश के लिए निवेशक 18 मार्च तक बोली लगा सकते हैं। कंपनी ने इसके लिए मूल्य का दायरा (प्राइस बैंड) 304–320 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी के शेयर 24 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध होंगे।

    निवेशक कम से कम 46 इक्विटी शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं, और उसके बाद 46 इक्विटी शेयरों के गुणकों में बोली लगा सकते हैं। कंपनी की योजना इस आईपीओ से 400 करोड़ रुपये जुटाने की है। जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड नए निर्गम से प्राप्त 170 करोड़ रुपये की राशि का इस्तेमाल ऋण भुगतान के लिए करेगी, जबकि इसका शेष एक हिस्सा सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए रखा जाएगा।

    उल्लेखनीय है कि जीएसपी क्रॉप साइंस लिमिटेड एक रिसर्च, आधारित एग्रोकेमिकल कंपनी है। यह भारत में कीटनाशकों, खरपतवारनाशकों, फफूंदीनाशकों और पौधों के विकास को नियंत्रित करने वाले पदार्थों के विकास और निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।

  • सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा

    सावधान! इंश्योरेंस लेने की सोच रहे हैं तो अभी जान लें ये नियम, अगर नहीं जाना तो नॉमिनी को भी नहीं मिलेगा पैसा


    नई दिल्ली। आजकल शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसमें सदस्यों के लिए लाइफ इंश्योरेंस ना किया जाता हो। बिताते समय के साथ यह संख्या और भी तेजी से बढ़ती जा रही है। लोग अपनी गाड़ियों के साथ-साथ खुद का भी लाइफ इंश्योरेंस करा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर भी कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं जिसे आज हम आपके सामने रखेंगे और इससे जुड़ी तमाम जानकारियां बताएंगे। जानिए किन-किन कारण से क्लेम नहीं किया जा सकता।

    हत्या की वजह से हुई मौत
    अगर पॉलिसी धारक की मौत हो गई है और उसे घटना में नॉमिनी की संलिप्त पाई जाती है तो ऐसी स्थिति में नॉमिनी को क्लेम नहीं दिया जाएगा। केवल एक ही स्थिति में नॉमिनी को क्लेम मिल सकता है या तो वह कानूनन अपराध मुक्त हो जाए या कोर्ट द्वारा बरी हो जाए। हत्या के कारण हुई मौत के बाद पॉलिसी प्रोवाइडर कंपनी के द्वारा यह जांच की जाती है कि पॉलिसी धारा किसी आपराधिक गतिविधि में तो सन लिप्त नहीं था। अगर किसी अपराध में संलिप्त पाई जाती है तो भी क्लेम को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

    धूम्रपान और नशे के कारण मृत्यु
    अगर पॉलिसी धारक किसी भी प्रकार का नशा करता है और उसके प्रभाव के कारण उसकी जान चली जाती है तो ऐसी स्थिति में भी पॉलिसी धारक को इंश्योरेंस का लाभ नहीं मिल सकेगा। जबकि प्राकृतिक कर्म से अगर मौत होती है तो पॉलिसी धारक को डेथ क्लेम के रूप में राशि का भुगतान किया जाता है।

    साहसिक गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण हुई मौत
    इंश्योरेंस प्रोवाइडर कंपनी पॉलिसी धारक से उसकी शारीरिक बीमारियों एवं कार्यशाली के बारे में जानकारी लेती है जिसके आधार पर वह पॉलिसी धारक का प्रीमियम तय करती है। अगर कोई पॉलिसी धारक पर्वतारोहण करता है या स्काई डाइविंग जैसे साहसिक गतिविधियों में लगा हुआ होता है तो उनके साथ दुर्घटना घटने के सबसे अधिक चांस होते हैं। ऐसी स्थिति में उन पॉलिसी धारकों को क्लेम रीइंबर्समेंट से बाहर रखा जाता है।

  • FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल

    FD Scheme: एफडी कराने की सोच रहे हैं तो पत्नी के नाम से कराएं, हो जाएंगे मालामाल


    नई दिल्ली। जैसे जैसे निवेश के नए नए तरीके सामने आ रहे हैं वैसे वैसे लोग उन्हें अपनाते जा रहे है। हालांकि एक वर्ग ऐसा भी है जो आज भी एफड़ी और आरडी जैसे पारंपरिक निवेशों में यकीन रखता है। आमतौर पर देखा जाता है कि नौकरीपेशा लोग अपने नाम से एफडी कराते हैं। लेकिन अगर आप अपने बजाय अपनी पत्नी के नाम से एफडी कराएं तो आप न सिर्फ मोटा रिटर्न कमा सकते हैं बल्कि काफी पैसे भी बचा सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे?

    FD से मिले ब्याज पर 10% कटौती
    अगर कोई व्यक्ति एक लेखा वर्ष में एफडी पर 50 हजार रुपये से ज्यादा का ब्याज प्राप्त करता है तो उसे उस राशि पर 10 प्रतिशत TDS देय होता है। जबकि किसी व्यक्ति के पास पैन नंबर नहीं है तो इस राशि का प्रतिशत दोगुना हो जाता है यानी 20 प्रतिशत। ऐसी स्थिति में अगर आपकी पत्नी टैक्स ब्रैकेट से बाहर हैं या हाउसवाइफ हैं तो आपकी यह राशि एकमुश्त बच सकती है।

    पत्नी के नाम पर FD कराने से होगी बंपर बचत
    नए टैक्स सिस्टम में जिन लोगो की कुल टैक्सेबल इनकम 4 लाख रुपये से कम है और पुराने टैक्स सिस्टम में जिन लोगों की इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है उन्हें एफड़ी पर TDS देय नहीं होता है। उन्हें TDS से छूट दी जाती है। लिहाजा अगर आपकी पत्नी हाउस वाइफ हैं तो स्वभाविक है कि वह टैक्स के दायरे से बाहर होंगी इसलिए उनके नाम से एफडी करवाने से आप TDS की पूरी पूरी बचत कर सकते हैं।

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    इसके अलावा, अगर आप जॉइंट एफडी कराते हैं और अपनी पत्नी को फर्स्ट होल्डर बनाते हैं तो ऐसी स्थिति में भी आप काफी बचत कर सकते हैं। बताते चलें कि ये फायदा सिर्फ उन लोगों को मिल सकता है, जिनकी पत्नी जॉब नहीं करती हैं।

  • Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल निशान पर

    Stock Market Today: लाल निशान पर खुला शेयर बाजार, Sensex 645 अंक टूटा; Nifty भी लाल निशान पर


    नई दिल्ली। शुक्रवार, 13 मार्च को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स BSE Sensex और NSE Nifty 50 दोनों ही लाल निशान पर खुले। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 590 अंक या 0.78 प्रतिशत गिरकर 75,444.22 के स्तर पर खुला। वहीं निफ्टी 50 भी 176 अंक या 0.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,462.50 के स्तर पर ओपन हुआ।

    शुरुआती कारोबार में जारी रही गिरावट
    सुबह करीब 9:20 बजे तक सेंसेक्स 566 अंक गिरकर 75,467 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 185 अंक टूटकर 23,453 के आसपास ट्रेड करता दिखा। इस दौरान बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और ज्यादातर सेक्टरों में कमजोरी देखने को मिली।

    इन शेयरों में रही तेजी और गिरावट
    खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स की कंपनियों में कुछ शेयरों में तेजी भी देखने को मिली। टॉप गेनर Power Grid Corporation of India, NTPC, ITC Limited, Reliance Industries टॉप लूजर Larsen & Toubro, Tata Steel, InterGlobe Aviation (IndiGo), HDFC Bank, Mahindra & Mahindra एशियाई शेयर बाजारों में भी शुक्रवार को कमजोरी देखने को मिली। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका ने बाजार पर दबाव बनाया। जापान का Nikkei 225 करीब 2 प्रतिशत गिर गया, जबकि TOPIX Index में करीब 1.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 3 प्रतिशत नीचे रहा और Hang Seng Index के भी कमजोर शुरुआत के संकेत मिले।

    गुरुवार को भी बाजार में आई थी बड़ी गिरावट
    इससे पहले गुरुवार, 12 मार्च को भी शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 829 अंक गिरकर 76,034.42 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 50 227 अंक टूटकर 23,639.15 के स्तर पर बंद हुआ था। उस दिन भी बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला और सेंसेक्स के 30 शेयरों में से सिर्फ 6 शेयर ही हरे निशान में बंद हुए थे, जबकि 24 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई थी।
  • कोविड के बाद आरईआईटी मार्केट में भारत का जबरदस्त उछाल, 1.72 लाख करोड़ रुपए

    कोविड के बाद आरईआईटी मार्केट में भारत का जबरदस्त उछाल, 1.72 लाख करोड़ रुपए


    नई दिल्ली।  कोविड-19 महामारी के बाद भारत का सूचीबद्ध रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) बाजार तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2020 में इसका आकार 27,100 करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह जानकारी सीबीआरई इंडिया रिसर्च की हालिया रिपोर्ट में सामने आई है।

    आरईआईटी की तेजी का कारण
    रिपोर्ट में बताया गया है कि इस वृद्धि की शुरुआत उस समय हुई जब वित्त वर्ष 2020 में देश का पहला आरईआईटी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुआ। इसके बाद नए आरईआईटी की लिस्टिंग और पहले से मौजूद आरईआईटी के यूनिट प्राइस में लगातार बढ़ोतरी ने बाजार की रफ्तार को और तेज किया। रिपोर्ट के अनुसार, सूचीबद्ध आरईआईटी में से चार आरईआईटी ने वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही से लेकर वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के बीच 20 प्रतिशत से अधिक सालाना बढ़ोतरी दर्ज की।

    नियामकीय बदलाव से बाजार को मिलेगी मजबूती
    सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन और सीईओ अंशुमन मैगजीन ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अस्थिर आर्थिक माहौल के बावजूद भारत का आरईआईटी बाजार निवेशकों को लगातार बेहतर रिटर्न देता रहा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 और उसके बाद आरईआईटी के उपयोग को बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण नियामकीय बदलाव किए जा रहे हैं:

    सेबी की नई वर्गीकरण नीति: जनवरी 2026 से आरईआईटी को हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट की जगह इक्विटी से जुड़े निवेश साधन के रूप में वर्गीकृत किया गया। इससे म्यूचुअल फंड और विशेष निवेश फंड की भागीदारी बढ़ेगी और बाजार में तरलता बेहतर होगी।

    आरबीआई का प्रस्ताव: भारतीय रिजर्व बैंक ने कमर्शियल बैंकों को सीधे आरईआईटी को कर्ज देने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इससे आरईआईटी का ढांचा इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनवीआईटी) के अनुरूप हो जाएगा।

    सरकारी संपत्तियों का मॉनेटाइजेशन: केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने सीपीएसई की व्यावसायिक रियल एस्टेट संपत्तियों को आरईआईटी के जरिए मॉनेटाइज करने की योजना बनाई है। इससे निवेशकों को सरकारी समर्थन वाले एसेट में निवेश का अवसर मिलेगा और सरकारी संपत्तियों का वास्तविक मूल्य सामने आएगा।

    भारत का एसएम आरईआईटी बाजार
    सीबीआरई इंडिया रिसर्च के अनुसार, भारत का एसएम आरईआईटी बाजार 75 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है। इस वृद्धि में 500 मिलियन वर्ग फुट से ज्यादा ऑफिस, लॉजिस्टिक्स और रिटेल संपत्तियों का योगदान होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऑफिस सेक्टर आरईआईटी निवेश के लिए सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला सेगमेंट है, जिसमें लगभग 42 प्रतिशत निवेशक निवेश करने की इच्छा जता चुके हैं।

    लिस्टेड आरईआईटी: निवेशकों के लिए नया विकल्प
    फिलहाल भारत के शेयर बाजार बीएसई और एनएसई पर पांच आरईआईटी लिस्टेड हैं। ये निवेशकों को रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश करने का नया और सुरक्षित विकल्प प्रदान कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आरईआईटी में लंबी अवधि का निवेश करने से स्थिर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ती है और यह निवेशकों के पोर्टफोलियो को विविधता प्रदान करता है।

    कोविड के बाद भारत का लिस्टेड आरईआईटी मार्केट न केवल तेजी से बढ़ा है, बल्कि नियामकीय बदलाव और सरकारी समर्थन के कारण यह भविष्य में और विस्तार की ओर बढ़ रहा है। निवेशकों के लिए यह बाजार स्थिर रिटर्न और लंबी अवधि के अवसर दोनों प्रदान करता है।

  • ईरान संकट में निवेश: वॉरेन बफे की सलाह से बनाएं स्मार्ट रणनीति

    ईरान संकट में निवेश: वॉरेन बफे की सलाह से बनाएं स्मार्ट रणनीति


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला कर रख दिया है। इस उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जो तेज़ी से बढ़ती हुई भारतीयों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए चिंता का कारण बन गई है। बढ़ती तेल की कीमतें महंगाई को बढ़ाती हैं और वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकती हैं।
    भारत में शेयर बाजारों पर दबाव
    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए इस संकट का असर और गहरा है। बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के बीच जोखिम कम करने के लिए जल्दबाजी में फैसला लेने लगे। उद्यमियों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ाने के साथ-साथ व्यापार घाटा भी बढ़ा सकती हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है।

    वॉरेन बफे की सलाह बनी चर्चा का केंद्र
    बाजार में इस उथल-पुथल के बीच दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे का एक पुराना इंटरव्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चर्चा में आ गया है। 2022 में पत्रकार चार्ली रोज को दिए गए इंटरव्यू में बफे ने युद्ध, आर्थिक मंदी और महामारी जैसी परिस्थितियों में भारतीयों के लिए अहम सुझाव दिए थे।

    बफे, जो बर्कशायर हाथवे के डिपार्टमेंट और पूर्व सीईओ रह चुके हैं, को दुनिया के सबसे सफल निवेशकों में मिलता जाता है। उनकी निवेश रणनीति का मुख्य आधार लंबी अवधि का निवेश और बाजार की स्थिरता के दौरान धैर्य बनाए रखना है। ‘ओरेकल ऑफ ओमाहा’ के नाम से मशहूर बफे का रुझान है कि भू-राजनीतिक संकट, आर्थिक मंदी और बाजार में गिरावट समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन ये लंबे समय में आर्थिक प्रगति को रोक नहीं पाता।

    इतिहास से सीख
    इतिहास गवाह है कि शेयर बाजार ने कई बड़े संकटों का सामना किया है – महानदी, वैश्विक वित्तीय संकट और कोविड-19 जैसी घटनाएं शामिल हैं। इन मुश्किल दौरों के बावजूद समय के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार आगे बढ़ रहे हैं। बफे का कहना है कि संभावित संकट के बावजूद लंबी अवधि में बाजार की बढ़ोतरी बनी रहती है, और इसलिए स्थानीय उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है।

    लंबी अवधि के नजरिए पर ध्यान दें
    मौजूदा समय में अमेरिका-ईरान संघर्ष दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। लंबी अवधि तक युद्ध और तेल बाजार में बाधाओं की आशंका से शेयर बाजारों में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे समय में कई निवेशक तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय जोखिम कम करने के लिए जल्दबाजी में फैसला लेते हैं।

    बफे की फिलॉसफी यही कहती है कि कंपनियों की लंबी अवधि की वृद्धि पर ध्यान दें, न कि बाजार की स्थानीय हलचल पर। उनकी परिस्थितियां हैं कि संकट भले ही कुछ समय के लिए बाजार को प्रभावित करें, लेकिन अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक प्रगति को पटरी से नहीं उतारते।

    अवसरों के लिए संदेश
    वॉरेन बफे की सलाह हर निवेशक के लिए स्पष्ट है: संकट के समय धैर्य बनाए रखें, लंबी अवधि के अवसरों को पहचानें और जल्दबाजी से बचें। चाहे युद्ध हो, आर्थिक मंदी या महामारी, बाजार हमेशा ऊपर-नीचे होता रहेगा। समझ यही है कि संभावित लाभार्थियों को समझ हुए दीर्घकालिक रणनीति अपनी जाए, जिससे निवेश स्थिर और सुरक्षित रहे।

  • दो-पहिया और कारों की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी, बाजार में उत्साह

    दो-पहिया और कारों की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी, बाजार में उत्साह


    नई दिल्ली। भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर ने फरवरी 2026 में मजबूत बिक्री के आंकड़े दर्ज किए हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में यात्री वाहनों की थोक बिक्री फरवरी में सालाना आधार पर 10.6 प्रतिशत बढ़कर 4,17,705 यूनिट्स हो गई है। पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 3,77,689 यूनिट्स था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि के पीछे बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट और उपभोक्ता मांग में मजबूती का बड़ा हाथ है।

    SUV की बढ़ती लोकप्रियता ने खींचा ध्यान
    सियाम के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में सबसे अधिक वृद्धि एसयूवी सेगमेंट में हुई। बीते महीने एसयूवी की बिक्री सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत बढ़कर 2,36,957 यूनिट्स हो गई, जबकि फरवरी 2025 में यह आंकड़ा 2,08,795 यूनिट्स था। हालांकि कारों की थोक बिक्री में हल्की गिरावट रही, जो 1,06,799 यूनिट्स पर सीमित रही, पिछले साल समान अवधि में यह 1,10,966 यूनिट्स थी। वैन की बिक्री में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 11,620 यूनिट्स रही।

    दोपहिया वाहनों की बिक्री में रिकॉर्ड वृद्धि
    फरवरी 2026 में दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 35.2 प्रतिशत का उछाल आया, जो पिछले साल समान महीने में 13,84,605 यूनिट्स से बढ़कर 18,71,406 यूनिट्स पर पहुंच गई। दोपहिया वाहन, विशेषकर स्कूटर और मोटरसाइकिल की मांग में तेजी ने बिक्री में यह बड़ा योगदान दिया।

    तिपहिया वाहनों की मांग में भी बढ़ोतरी
    इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी 29 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। फरवरी 2026 में तिपहिया वाहनों की बिक्री 74,573 यूनिट्स रही, जो फरवरी 2025 में 57,788 यूनिट्स थी। इस प्रकार, यात्री वाहनों, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जो इंडस्ट्री के लिए उत्साहवर्धक संकेत है।

    उद्योग में सकारात्मक माहौल, लेकिन चुनौतियां भी
    सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा, “उद्योग में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। फरवरी में अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज हुई है। हालांकि मार्च में देश के कई हिस्सों में त्योहार का माहौल रहेगा, लेकिन पश्चिम एशिया में हालिया संघर्ष आपूर्ति श्रृंखला पर चिंता का विषय बना हुआ है, जो विनिर्माण और निर्यात दोनों को प्रभावित कर सकता है।”

    उन्होंने आगे कहा कि उद्योग को आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों के बावजूद, घरेलू मांग के चलते विश्वास है कि साल 2026 में बिक्री में बढ़ोतरी जारी रहेगी।

    निष्कर्ष: ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूती
    फरवरी 2026 के आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारत का ऑटोमोबाइल बाजार मजबूत स्थिति में है। SUV और दोपहिया वाहन खपत में तेज़ी के साथ, यह सेक्टर न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहा है, बल्कि निर्यात संभावनाओं के लिहाज से भी आशाजनक बना हुआ है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में त्योहार और छुट्टियों के चलते बिक्री में और बढ़ोतरी संभव है।

    मुख्य तथ्य:

    यात्री वाहन: 4,17,705 यूनिट्स (+10.6%)

    SUV: 2,36,957 यूनिट्स (+13.5%)

    कार: 1,06,799 यूनिट्स (-3.8%)

    वैन: 11,620 यूनिट्स

    दोपहिया वाहन: 18,71,406 यूनिट्स (+35.2%)

    तिपहिया वाहन: 74,573 यूनिट्स (+29%)
    इस तरह फरवरी 2026 ने भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक मजबूत और उत्साहवर्धक महीना साबित किया है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर Donald Trump बोले- अमेरिका के लिए अच्छा मौका

    कच्चे तेल की कीमतों में उछाल पर Donald Trump बोले- अमेरिका के लिए अच्छा मौका


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इस स्थिति से कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है और कई सरकारें ईंधन की खपत कम करने के उपाय तलाश रही हैं। इसी बीच Donald Trump ने कहा है कि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से अमेरिका को आर्थिक रूप से फायदा हो रहा है। उनका कहना है कि क्योंकि United States दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है, इसलिए तेल महंगा होने पर उसे ज्यादा आय प्राप्त होती है।

    ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने रखी अपनी बात
    ट्रंप ने यह टिप्पणी अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। उन्होंने लिखा कि जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो अमेरिका को इससे काफी मुनाफा होता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Iran को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए, क्योंकि इससे मध्य पूर्व और पूरी दुनिया की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि वे किसी भी हालत में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

    गैस की बढ़ती कीमतों को बताया नियंत्रण में
    ट्रंप ने बुधवार को ओहियो में एक कार्यक्रम के दौरान भी ईंधन की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि गैस की कीमतें जितनी बढ़ने की आशंका थी, उतनी नहीं बढ़ी हैं। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि आने वाले समय में कीमतें इतनी कम हो जाएंगी कि लोगों को इसकी चिंता भी नहीं रहेगी। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।

    आईईए ने दी तेल आपूर्ति संकट की चेतावनी
    इस बीच International Energy Agency (आईईए) ने चेतावनी दी है कि ईरान से जुड़े हमलों और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण दुनिया को तेल आपूर्ति में बड़ी बाधा का सामना करना पड़ सकता है। एजेंसी का कहना है कि यह इतिहास की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक साबित हो सकती है। स्थिति को संभालने के लिए आईईए के सदस्य देशों ने बुधवार को एक अहम फैसला लिया। इसके तहत 32 सदस्य देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से लगभग 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में जारी करने पर सहमति जताई है, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके।

    आपातकालीन भंडार से तेल जारी करने का फैसला
    आईईए के सदस्य देशों के पास कुल मिलाकर 1.2 अरब बैरल से अधिक का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी सरकारी नियमों के तहत लगभग 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल का भंडार उपलब्ध है।
    यह समन्वित रूप से तेल भंडार जारी करने का आईईए के इतिहास में छठा मौका है। इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में भी इसी तरह के कदम उठाए गए थे। गौरतलब है कि International Energy Agency की स्थापना 1974 में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई थी।

    होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रभावित हुई आपूर्ति
    आईईए के कार्यकारी निदेशक Fatih Birol ने हाल ही में सदस्य देशों की एक विशेष बैठक बुलाई थी, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और तेल आपूर्ति पर उसके असर का आकलन किया गया। बैठक के बाद ही आपातकालीन भंडार जारी करने का निर्णय लिया गया।

    दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते तेल आपूर्ति प्रभावित हो गई है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मौजूदा हालात में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का निर्यात संघर्ष से पहले के स्तर के 10 प्रतिशत से भी कम रह गया है।

  • बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया

    बाजार नियामक में बदलाव, K. V. Ramana Murthy को Securities and Exchange Board of India का फुल-टाइम मेंबर नियुक्त किया गया

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) में अहम नियुक्ति करते हुए सीनियर अधिकारी कोम्पेला वेंकट रमना मूर्ति को पूर्णकालिक सदस्य नियुक्त किया है। वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने आधिकारिक बयान में बताया कि 1991 बैच के इंडियन डिफेंस अकाउंट्स सर्विस (IDAS) अधिकारी रहे रमना मूर्ति को तीन साल की अवधि के लिए सेबी का पूर्णकालिक सदस्य बनाया गया है। उनकी नियुक्ति सरकार की कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी के बाद की गई है और यह उनके पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी।

    मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने दी मंजूरी
    सरकार के बयान के अनुसार, अपॉइंटमेंट्स कमेटी ऑफ द कैबिनेट ने के.वी. रमना मूर्ति की नियुक्ति को तीन साल की अवधि या अगले आदेश तक के लिए स्वीकृत दी है। सेबी में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में उनकी भूमिका, पूंजी बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत सुझावों, नियामक निगरानी और जांच दिशानिर्देशों में अहम होगी। इससे पहले मूर्ति रक्षा लेखा तंत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं और वे प्रोडक्शनल कंट्रोलर जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स जैसे प्रमुख पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

    पहले भी सेबी बोर्ड से जुड़े रहे हैं मूर्ति
    के.वी. रमना मूर्ति का सेबी से कार्य पहले से रहा है। इससे पहले वे मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स के प्रतिनिधि के रूप में सेबी बोर्ड में अंशकालिक सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके पास सरकारी वित्तीय प्रबंधन और नियामक उद्देश्यों का लंबा अनुभव है, जिसे अब पूंजी बाजार के नियमन और विकास में उपयोग किया जाएगा।

    सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या हुई चार
    रमना मूर्ति की नियुक्ति के साथ सेबी बोर्ड में पूर्णकालिक सदस्यों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। पिछले वर्ष कुछ पद खाली होने के बाद बोर्ड में यह महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। सेबी के अन्य पूर्णकालिक सदस्यों में कमलेश चंद्र वार्ष्णेय और संदीप प्रधान शामिल हैं, जो भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) कैडर से आते हैं। इसके अलावा अमरजीत सिंह भी पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने सेबी में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है।

    सेबी बोर्ड की संरचना
    सेबी के बोर्ड की संरचना में एक अध्यक्ष, चार पूर्णकालिक सदस्य और चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। वर्तमान में सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे हैं, जिन्होंने 1 मार्च 2025 को यह पदभार संभाला था। अंशकालिक सदस्यों में दीप्ति गौड़ मुखर्जी, अनुराधा ठाकुर, शिरीष चंद्र मुर्मू और एन. वेंकटराम शामिल हैं। ये सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे नियामक प्रक्रिया में व्यापक दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है।

    कैपिटल बाजार के विकास में अहम भूमिका
    सेबी के पूर्णकालिक सदस्य देश केकैपिटल बाजार के विकास, निकायों के हितों की रक्षा और वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे नीतिगत आशाजनक, बाजार निगरानी और जांच से जुड़े मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं।

    इस बीच सेबी अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने हाल ही में कहा कि अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (एआईएफ) भारत के कैपिटल बाजार के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फंड डीटीएच ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देकर भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे

    बुलियन मार्केट अपडेट: मुनाफावसूली के चलते Gold के दाम 1.60 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे


    नई दिल्ली। अनमोल के बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। सोने और चांदी की खदानों में वसुले के कारण दबाव बनाया जा रहा है, जिससे दोनों किशोरों के दाम नीचे आ गए। अंतर्राष्ट्रीय आंतरायिक से मिले फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा और रेस्टॉरेंट द्वारा मान्यता प्राप्त क्रांति के कारण घरेलू बाज़ार में भी गिरावट का माहौल बना हुआ है। इसी के साथ सोने की कीमत एक बार फिर 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गयी है, जबकि चांदी की कीमत भी 2.60 लाख रुपये प्रति किलो से नीचे हो गयी है।

    24 कैरेट सोने की कीमत में 1,700 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (सीएए) की ओर से दोपहर 12 बजे जारी ताजा गिरावट के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोना 1,748 रुपये सस्ता 1,58,555 रुपये प्रति 10 ग्राम। इससे पहले इसकी कीमत 1,60,303 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। सोने के समुद्र तट में यह विविधता के बीच सार्वभौम का संकेत जा रहा है। विशेषज्ञ का कहना है कि हाल के दिनों में सोने में तेज गति से देखने को मिला था, बाद में जिज्ञासा ने लाभ बुक करना शुरू कर दिया।

    22 और 18 कैरेट सोना भी हुआ सस्ता
    सोने के अन्य कैरेट में भी गिरावट दर्ज की गई। 22 कैरेट सोने का दाम 1,46,838 रुपये प्रति 10 ग्राम, प्रति 10 ग्राम कीमत 1,45,236 रुपये। वहीं 18 कैरेट सोने की कीमत भी 1,20,227 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम कीमत 1,18,916 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।कोल्डजे की ओर से सोने-अलावेरिया के शोरूम में दो बार रिलीज की जाती है-एक बार दोपहर 12 बजे और दूसरी बार शाम 5 बजे। इन कोटा के आधार पर देश के विभिन्न शहरों, बाजारों में दम तय हो जाता है।

    चांदी की कीमत में 8,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट
    सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी से गिरावट का आकलन किया गया। चांदी का दाम 8,350 रुपये प्रति यूनिट 2,59,951 रुपये प्रति किलो रह गया। इससे पहले इसकी कीमत 2,68,301 रुपये प्रति किलो थी। सिल्वर की इंडस्ट्रीज़ में यह औद्योगिक गिरावट की मांग है, औद्योगिक और वैश्विक उद्यमों में वित्तीय रुझान के कारण मनी जा रही है। विशेषज्ञ के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय कंपनी दबाव बना रही है तो चांदी के बाजार में भी आगे बढ़ सकती है।

    बाज़ार में भी बेचारे
    घरेलू बाज़ार बाज़ार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया (MCX) पर भी सोने और चाँदी की कमी देखने को मिली। दोपहर करीब 12:30 बजे सोने का 2 अप्रैल 2026 का बायोडाटा कॉन्ट्रैक्ट 0.40 प्रतिशत प्रतिशत 1,59,632 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार हो रहा था। वहीं चांदी का 5 मई 2026 को नरसंहार अनुबंध 1.81 प्रतिशत जनसंख्या 2,63,099 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गया। इसका मतलब यह है कि इंटर्नशिप का रुख सख्त हो गया है।

    अंतरराष्ट्रीय में भी दबाव
    वैश्विक बाजार में भी अनमोल साॅस्टेट्स की मंदी का रुख बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 0.64 प्रतिशत शेयर बाजार 5,092 डॉलर प्रति शेयर की बढ़त पर पहुंच गई, जबकि चांदी करीब 3 प्रतिशत शेयर बाजार में 82 डॉलर प्रति शेयर की बढ़ोतरी पर कारोबार कर रही थी।
    विशेषज्ञ का कहना है कि वैश्विक आर्थिक पर्वतमाला और वैज्ञानिकों के रुख का सीधा असर सोने-असारिया की सीमा पर है।

    डॉलर और बांड उपज बढ़ने से दबाव
    मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी स्टॉक मानव मोदी के अमेरिका-इजरायल और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक स्थिति के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र में उत्पादकता और उत्पादन को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।

    इंडोनेशिया में अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी से देखने को मिल रही है, जिससे सोने की कीमत पर दबाव पड़ रहा है। निवेशकों का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक विकास और डॉलर की चाल के आधार पर सोने-रेसा के बांध में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।