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  • दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती

    दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत, घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मजबूती


    नई दिल्ली। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितताओं के बावजूद भारत लगातार मजबूत आर्थिक प्रदर्शन कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट के अनुसार भारत इस समय दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।

    International Monetary Fund के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रही। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत प्रदर्शन माना जा रहा है।

    जब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं नीतिगत अनिश्चितताओं और वैश्विक चुनौतियों के कारण अपने विकास अनुमान घटा रही हैं, तब भारत की आर्थिक रफ्तार अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुमान के अनुसार पूरे वर्ष के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, भले ही वैश्विक व्यापार में चुनौतियां बनी रहें।

    वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का सबसे बड़ा योगदान
    आईएमएफ का अनुमान है कि वर्ष 2026 में वैश्विक जीडीपी वृद्धि में भारत का योगदान लगभग 17 प्रतिशत हो सकता है। यह आंकड़ा भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शीर्ष पर बनाए रखता है।

    रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक वृद्धि में योगदान के मामले में अमेरिका दूसरे स्थान पर रह सकता है, जहां से लगभग 9.9 प्रतिशत योगदान की उम्मीद जताई गई है।

    इसके अलावा अन्य देशों में

    Indonesia से 3.8 प्रतिशत

    Turkey से 2.2 प्रतिशत

    Saudi Arabia से 1.7 प्रतिशत

    Vietnam से 1.6 प्रतिशत योगदान का अनुमान लगाया गया है।

    वहीं Nigeria और Brazil से करीब 1.5 प्रतिशत योगदान की संभावना जताई गई है।

    तुलनात्मक रूप से देखें तो China की विकास दर लगभग 4.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो भारत की तुलना में कम है।

    घरेलू निवेशकों से शेयर बाजार को मिल रही मजबूती
    भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का असर देश के पूंजी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में घरेलू निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ी है, जिससे शेयर बाजार को स्थिरता और मजबूती मिल रही है।

    घरेलू म्यूचुअल फंड उद्योग ने वर्ष 2025 में अपने एसेट बेस में लगभग 14 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की। इसके साथ कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर करीब 81 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय निवेशक अब लंबे समय के लिए पूंजी बाजार में निवेश करने के प्रति अधिक भरोसा दिखा रहे हैं।

    एसआईपी निवेश में रिकॉर्ड वृद्धि
    साल 2025 में सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी Systematic Investment Plan के जरिए निवेश भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान एसआईपी के माध्यम से कुल 3.34 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ। तुलना करें तो 2024 में यह आंकड़ा 2.68 लाख करोड़ रुपये था जबकि 2023 में यह 1.84 लाख करोड़ रुपये रहा था। इस तेजी से बढ़ते निवेश से साफ है कि छोटे और मध्यम निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड योजनाओं में लगातार बढ़ रहा है।

    विदेशी निवेश पर निर्भरता कम हो रही
    पहले भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव काफी हद तक विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर रहता था। लेकिन अब घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी के कारण बाजार की संरचना धीरे-धीरे बदल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों की बढ़ती संख्या बाजार को स्थिरता प्रदान कर रही है और लंबे समय में यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।

    निवेश के क्षेत्र में अभी भी बड़ी संभावनाएं
    हालांकि भारत में निवेश की संभावनाएं अभी भी काफी व्यापक हैं। आंकड़ों के अनुसार देश में अभी केवल 15 से 20 प्रतिशत परिवार ही शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। इसके मुकाबले United States में लगभग 50 से 60 प्रतिशत परिवार पूंजी बाजार से जुड़े हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय साक्षरता और डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में भारत में घरेलू निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है, जिससे अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार दोनों को मजबूती मिलेगी।

  • आईपीओ को बढ़ावा: सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव

    आईपीओ को बढ़ावा: सरकार ने पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों में किया बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। देश में बड़ी कंपनियों के लिए पूंजी बाजार तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार का मानना है कि इससे बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ लाना आसान होगा और पूंजी बाजार में निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    नए नियमों के तहत कंपनियां अब आईपीओ के समय पहले की तुलना में कम हिस्सेदारी जनता को ऑफर कर सकेंगी। इसके बाद तय समय सीमा के भीतर धीरे-धीरे अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक करनी होगी। यह व्यवस्था खास तौर पर बड़ी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिन्हें पहले आईपीओ के समय बड़ी हिस्सेदारी बेचने की अनिवार्यता के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। यह संशोधन Securities Contracts (Regulation) Act, 1956 के तहत जारी Securities Contracts (Regulation) Amendment Rules, 2026 के माध्यम से किया गया है, जिसे Ministry of Finance ने अधिसूचित किया है।

    कंपनियों के आकार के अनुसार तय होगा पब्लिक ऑफर
    सरकार ने नई व्यवस्था में कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी के आधार पर न्यूनतम पब्लिक ऑफर तय किया है। जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये के बीच होगी, उन्हें कम से कम 400 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे।

    4,000 करोड़ से 50,000 करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 10 प्रतिशत शेयर जनता को देने होंगे और तीन साल के भीतर इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत करना होगा। सरकार ने कहा है कि इस हिस्सेदारी को बढ़ाने की समयसीमा और प्रक्रिया बाजार नियामक Securities and Exchange Board of India द्वारा तय की जाएगी।

    बड़ी कंपनियों के लिए अलग व्यवस्था
    नई नीति में अत्यधिक बड़ी कंपनियों के लिए भी विशेष प्रावधान बनाए गए हैं। 50,000 करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 1,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और प्रत्येक श्रेणी के शेयरों में कम से कम 8 प्रतिशत पब्लिक हिस्सेदारी होनी चाहिए।

    1 लाख करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपये की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 6,250 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और लिस्टिंग के समय कम से कम 2.75 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग बनाए रखना होगा।

    वहीं 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक पूंजी वाली कंपनियों को लिस्टिंग के समय कम से कम 15,000 करोड़ रुपये के शेयर जनता को ऑफर करने होंगे और कम से कम 1 प्रतिशत पब्लिक शेयरहोल्डिंग रखना अनिवार्य होगा।

    छोटी कंपनियों के लिए पुराना नियम ही लागू
    सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों की पोस्ट-इश्यू पूंजी 1,600 करोड़ रुपये तक है, उनके लिए पहले से लागू नियम ही जारी रहेंगे। ऐसे मामलों में कंपनियों को आईपीओ के समय कम से कम 25 प्रतिशत शेयर जनता को देना अनिवार्य रहेगा।

    न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी के लिए नई शर्त
    नई व्यवस्था के तहत कंपनी के आकार की परवाह किए बिना किसी भी कंपनी को कम से कम 2.5 प्रतिशत इक्विटी या कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज जनता को ऑफर करना अनिवार्य होगा।

    इसके अलावा यदि किसी कंपनी की लिस्टिंग के समय पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15 प्रतिशत से कम होती है, तो उसे पांच वर्षों के भीतर इसे 15 प्रतिशत और दस वर्षों के भीतर 25 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा।

    पूंजी बाजार को मिलेगा बढ़ावा
    विशेषज्ञों का मानना है कि इन नए नियमों से भारत के पूंजी बाजार में बड़ी कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी। कई बड़ी कंपनियां, जो पहले बड़ी हिस्सेदारी बेचने की शर्त के कारण आईपीओ लाने से हिचकिचाती थीं, अब आसानी से बाजार में लिस्ट हो सकेंगी। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से न केवल निवेशकों को नए अवसर मिलेंगे, बल्कि भारतीय शेयर बाजार की गहराई और मजबूती भी बढ़ेगी।

  • ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज

    ऊर्जा आपूर्ति को राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर गया एलपीजी लेकर आ रहा ‘नंदा देवी’ जहाज


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई हैभारत आने वाला जहाज ‘नंदा देवी’ भी दुनिया का सबसे पवित्र समुद्री जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित बाहर निकल गया है। इससे पहले क्रूज़ लेकर आने वाला जहाज ‘शिवालिक’ भी इसी जलडमरूमध्य को मजबूती से पार कर चुका है।

    सरकारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सुरक्षा के बावजूद दोनों पार्टिसिपेंट्स के सीक्वल पर नजर रखी जा रही थी। ईरान की ओर से प्रामाणिक बैठक के बाद इन साथियों को सुरक्षित मार्ग दिया गया, ताकि वे इस नामित समुद्री मार्ग को पार कर सकें।

    46 हजार टन से अधिक वजन लेकर आ रही हैं ‘नंदा देवी’
    आधिकारिक तौर पर जहाज ‘नंदा देवी’ भारत के लिए 46,000 मक्के टन से अधिक कोयला लेकर आ रहा है। यह घरेलू गैस और औद्योगिक इंजीनियरों के लिए बेहद अहम मानी जाती है। ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है, इस जहाज का सुरक्षित नेतृत्व भारत की ऊर्जा सुरक्षा के महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    दूसरी ओर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में जहाज ‘शिवालिक’ को भारत लाया जा रहा है। फर्जी का कहना है कि अगले दो दिन में आप किसी भी भारतीय पोर्ट पर पहुंच सकते हैं। संभावना है कि यह जहाज मुंबई या कांडला पोर्ट पर स्थित होगा। समुद्री जहाज खुले समुद्र में पहुंच चुका है और नौसेना की दिशा में सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ रहा है।

    मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच हुई अहम बातचीत
    इन खिलाड़ियों की सुरक्षित छुट्टियों के पीछे उच्च सरकारी छात्रवृत्ति का प्रयास भी अहम रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के बीच माल और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अहम बातचीत हुई। इसके बाद बच्चों को सुरक्षित मार्ग मिलने का रास्ता साफ हो गया।

    ईरान ने भारतीय खिलाड़ियों को संकेत के संकेत दिए थे सुरक्षित मार्ग
    इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी संकेत दिया कि बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय छात्रों को जल्द ही होर्मुज जल्दरूमध्य से सुरक्षित मार्ग मिल सकता है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के इस क्षेत्र में साझा हित हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत ने यह भी कहा कि भारत ने युद्ध के बाद की स्थिति में विभिन्न क्षेत्रों में ईरान की मदद की है, इसलिए दोनों देशों के संबंध मजबूत बने हैं।

    इससे एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची ने भी कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के सहयोगियों को इस समुद्री मार्ग से यात्रा की अनुमति दे दी है।

    दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्ग
    होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन परिवहन में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस के सहयोगियों का इसी रास्ते से दबदबा है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और व्यापार को प्रभावित कर सकता है।

    फारस की खाड़ी में 28 भारतीय खिलाड़ियों की निगरानी
    इस बीच बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में इस समय भारतीय ध्वज वाले 28 जहाज मौजूद हैं। इन कर्मचारियों और उनके चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    जानकारी के अनुसार इन खिलाड़ियों में से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं। वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्सों में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक इंजीनियर शामिल हैं।

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिर स्थिति में भारत की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति शामिल है। ऐसे में ‘नंदा देवी’ और ‘शिवालिक’ का सुरक्षित बाहर जाना भारत के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

  • तेल संकट का असर एयरलाइन किराए पर: ग्वालियर-बेंगलुरु फ्लाइट में एयर इंडिया ने जोड़ा 300 रुपए सरचार्ज, 20% छूट का दावा

    तेल संकट का असर एयरलाइन किराए पर: ग्वालियर-बेंगलुरु फ्लाइट में एयर इंडिया ने जोड़ा 300 रुपए सरचार्ज, 20% छूट का दावा


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हो रहे उतार-चढ़ाव का असर अब हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में Air India ने ग्वालियर से Bengaluru जाने वाली अपनी फ्लाइट के टिकट पर 300 रुपए का नया सरचार्ज जोड़ दिया है। हालांकि एयरलाइन की ओर से इस अतिरिक्त शुल्क की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।

    दिलचस्प बात यह है कि सरचार्ज जोड़ने के साथ ही एयरलाइन टिकटों पर 20 प्रतिशत तक छूट देने का दावा भी कर रही है। इस वजह से यात्रियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कई यात्रियों का कहना है कि पहले टिकट की मूल कीमत बढ़ाई जाती है और फिर उस पर छूट का प्रचार करके वास्तविक बढ़ोतरी को कम दिखाने की कोशिश की जाती है।

    एयरलाइन के स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक यह सरचार्ज पिछले दो दिनों से लागू किया गया है और फिलहाल 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के कारण एयरलाइंस को अपने संचालन खर्च को संतुलित करने के लिए ऐसे कदम उठाने पड़ रहे हैं।

    दरअसल, वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में अस्थिरता के कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की लागत भी बढ़ रही है। विमानन उद्योग में ईंधन खर्च संचालन लागत का बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए कीमतों में बदलाव का असर सीधे टिकट किराए पर पड़ता है।

    ग्वालियर से फिलहाल IndiGo की नियमित उड़ानें Delhi और Mumbai के लिए संचालित हो रही हैं, जबकि बेंगलुरु रूट पर एयर इंडिया की सेवा उपलब्ध है। ऐसे में इस रूट पर लगाए गए नए सरचार्ज ने यात्रियों का ध्यान खींचा है और टिकट कीमतों में बदलाव चर्चा का विषय बन गया है।

    यात्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले समय में अन्य रूट्स पर भी एयरलाइंस इसी तरह के अतिरिक्त शुल्क या किराया संशोधन कर सकती हैं।

  • रिपोर्ट का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस बढ़ाने के लिए मेटा में छंटनी संभव

    रिपोर्ट का दावा: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस बढ़ाने के लिए मेटा में छंटनी संभव


    नई दिल्ली दुनिया की बड़ी टेक कंपनी में शामिल मेटा प्लेटफॉर्म एक बार फिर बड़े स्तर के कर्मचारियों के ड्रॉ पर विचार कर रही है। कंपनी का फोकस अब तेजी से बढ़ती आर्टिफिशियल टेक्निकल टेक्नोलॉजी (मैटोलिट) सेक्टर पर है और इसी वजह से वह अपने प्लांट को नई कंपनी से सलाह देने की योजना बना रही है।

    मीडिया विद्वान का कहना है कि मेटा अपने आर्किटेक्चर और डेटा सेंटर की मजबूती को मजबूत करने के लिए भारी निवेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही कंपनी की लागत कम करने और कार्यकुशल बनाने की दिशा में भी अधिक कदम उठाए जा सकते हैं।

    न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के अंदर चल रही चर्चाओं में कर्मचारियों की बड़ी कटौती पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटा के कुल कर्मचारियों में से लगभग 20 प्रतिशत या उससे अधिक की निकासी की संभावना बनी हुई है।

    करीब 16 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
    दिसंबर के अंत तक मेटा में करीब 79,000 कर्मचारी कर्मचारी थे। यदि प्रस्तावित अधिसूचना लागू होती है तो लगभग 16,000 कर्मचारियों की नौकरियाँ प्रभावित हो सकती हैं।

    हालाँकि कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। मेटा के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने इस रिपोर्ट में केवल विशाल पर आधारित रेटिंग के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक बड़े पैमाने पर खींचने या समय लेने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग तरह के आंकड़ों से यह आकलन किया है कि किस तरह के ऑपरेशन को और अधिक कुशल बनाया जा सकता है और किस तरह के ढांचे का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

    मेटा में पहले भी हो चुका है बड़ा ड्रॉ
    यदि इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को खींचा जाता है तो यह मेटा के इतिहास की सबसे बड़ी पुनर्स्थापना प्रक्रिया हो सकती है। इससे पहले भी कंपनी की लागत के लिए कर्मचारियों की संख्या कम कर दी गई है।

    2022 और 2023 के दौरान मेटा ने दो चरणों में 21,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। उस समय कंपनी ने इसे “ईयर ऑफ फिशिएंसी” यानि कि प्रशिक्षण की रणनीति का हिस्सा बताया था।

    मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग कंपनी को जनरेटिव फिल्म के क्षेत्र में मजबूत स्थिति के लिए तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि नीतिगत रणनीति के तहत आर्किटेक्चरल टेक्नोलॉजी, डेटा सेंटर और बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बनाई जा रही है।

    मस्जिद से लेकर सभी प्रकार के प्रभावशाली
    इस बीच इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टैनली की टॉयलेट रिपोर्ट में कहा गया है कि मेटल के गोदाम पर सिक्किम के प्रभाव से कोई गंभीर नुकसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मशीनों को ऑटोमेट किया जा सकता है, लेकिन इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पूरी तरह से ऑर्डर होने की संभावना कम है। इसके बजाय कई कर्मचारी नए प्रकार के कर्मचारियों में स्थानांतरण हो सकते हैं और भविष्य में ऐसे रोजगार भी पैदा हो सकते हैं जो अभी मौजूद नहीं हैं। हालांकि टेक इंस्टीट्यूट के कुछ दिग्गजों का मानना ​​है कि अगले 12 से 18 महीनों में कंप्यूटर आधारित कई व्हाइट-कॉलर की हिस्सेदारी काफी हद तक ऑटोमेटेड हो सकती है।

    टेक इंडस्ट्री में ड्रॉ का जबरदस्त ट्रेंड
    मेटा इको कंपनी नहीं है जो निवेश के लिए काम में बदलाव पर विचार कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक ओरेकल ने भी अपने स्मार्टफोन डेटा सेंटर की क्षमता बढ़ाने के लिए 20,000 से 30,000 बेरोजगारी खत्म करने की योजना बनाई है। वहीं ई-कॉमर्स और क्लाउड दिग्गज अमेज़न ने भी हाल ही में लगभग 16,000 कर्मचारियों के लिए प्लॉट आधारित रिवाइवल योजना की घोषणा की है।

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आने वाले वर्षों में टेक सोसायटी की रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। इंटरमीडिएट पारंपरिक प्रयोगशालाओं से अधिकांश ध्यान स्टूडियो, क्लाउड स्टूडियो और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र पर केंद्रित कर रहे हैं।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में हफ्तेभर में 6% गिरावट

    मध्य पूर्व तनाव का असर: भारतीय शेयर बाजार में हफ्तेभर में 6% गिरावट


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। इस सप्ताह प्रमुख घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई और बाजार में लगातार बिकवाली का माहौल बना रहा।

    सप्ताह के दौरान Nifty 50 में 5.31 प्रतिशत की गिरावट आई और आखिरी कारोबारी दिन यह 2.06 प्रतिशत टूटकर 23,151 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं BSE Sensex 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,564 के स्तर पर बंद हुआ।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए यह स्थिति आर्थिक चिंताओं को बढ़ाती है, जिससे निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।

    ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
    इस गिरावट का सबसे ज्यादा असर ऑटो सेक्टर पर पड़ा। Nifty Auto Index में इस सप्ताह करीब 10 से 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मार्च 2020 के बाद इसका सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है।

    ऑटो इंडेक्स के लगभग सभी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसके अलावा सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बैंकिंग, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।

    एक दिन में 10 लाख करोड़ रुपये का नुकसान
    शुक्रवार को बाजार में आई तेज गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई। अनुमान के मुताबिक सिर्फ एक कारोबारी सत्र में ही निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

    वहीं व्यापक बाजार सूचकांकों में भी गिरावट देखने को मिली। Nifty Midcap 100 4.59 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty Smallcap 100 में 3.66 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    बाजार में बढ़ा डर और उतार-चढ़ाव
    विश्लेषकों के अनुसार बाजार में डर और अस्थिरता बढ़ रही है। इसका संकेत India VIX से भी मिलता है, जो 22 के स्तर से ऊपर पहुंच गया है। यह आने वाले समय में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव की संभावना का संकेत देता है।

    तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। इसके बाद 23,300 और 23,500 के स्तर पर रेजिस्टेंस देखने को मिल सकता है।

    वहीं Bank Nifty के लिए 53,500 पहला सपोर्ट स्तर है और इसके नीचे 53,000 का स्तर अहम माना जा रहा है। दूसरी ओर 54,000 और 54,300 के स्तर को प्रमुख रेजिस्टेंस बताया जा रहा है।

    कच्चे तेल और गैस की चिंता बढ़ी
    विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसके अलावा एलएनजी और एलपीजी की संभावित कमी से औद्योगिक उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। सीएनजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ने से उपभोक्ताओं की मांग के पैटर्न में बदलाव आ सकता है, खासकर उन शहरों में जहां सीएनजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल होता है।

    रुपये पर भी बढ़ा दबाव
    वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय मुद्रा भी कमजोर हुई है। भारतीय रुपया लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.45 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इस हफ्ते बाजार में आई करीब 6 प्रतिशत की गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है, और फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात पर निर्भर रहने वाली है।

  • भारत की पहली खनन कंपनी बनी एनएमडीसी, एक वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन आयरन ओर उत्पादन

    भारत की पहली खनन कंपनी बनी एनएमडीसी, एक वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन आयरन ओर उत्पादन


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख खनन कंपनी NMDC लिमिटेड ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के समाप्त होने से पहले ही 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर लिया है। इसके साथ ही NMDC एक ही वित्त वर्ष में 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन करने वाली भारत की पहली खनन कंपनी बन गई है।

    सरकारी बयान के अनुसार यह उपलब्धि न सिर्फ कंपनी की बढ़ती उत्पादन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि भारत की लौह अयस्क आपूर्ति श्रृंखला में उसकी मजबूत और अहम भूमिका को भी साबित करती है।

    1958 में हुई थी कंपनी की स्थापना
    NMDC लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1958 में भारत के लौह अयस्क खनिजों के विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह सरकारी कंपनी इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्य करती है और इसे ‘नववर्ष CPSE’ का दर्जा प्राप्त है।

    शुरुआती दौर में कंपनी का उत्पादन सीमित था। उदाहरण के तौर पर 1978 में कंपनी ने लगभग 10 मिलियन टन लौह अयस्क का उत्पादन किया था। लेकिन समय के साथ कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता में लगातार विस्तार किया और अब यह आंकड़ा बढ़कर 50 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

    पिछले दशक में तेज हुई उत्पादन वृद्धि
    पिछले कुछ दशकों में एनएमडीसी की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015 में कंपनी का उत्पादन करीब 30 मिलियन टन था, जो अब बढ़कर 50 मिलियन टन हो गया है।

    इसका मतलब है कि पिछले करीब एक दशक में उत्पादन में लगभग दो-तिहाई की बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि वर्तमान उत्पादन क्षमता का लगभग एक-पांचवां हिस्सा पिछले चार दशकों में ही जोड़ा गया है। इसे कंपनी के इतिहास का सबसे तेज विस्तार माना जा रहा है।

    एनएमडीसी 2.0 के तहत मजबूत प्रदर्शन
    इस उपलब्धि पर कंपनी के डायरेक्टर और मैनेजमेंट डायरेक्टर अमिताव मुखर्जी ने इसे एनएमडीसी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

    उन्होंने कहा, “50 मिलियन टन उत्पादन तक पहुंचे एक बड़ी उपलब्धि है और यह एनएमडीसी 2.0 के तहत हमारे मजबूत प्रदर्शन को बरकरार है। जिस क्षमता को बनाने में पहले दशकों लगे, उसे हमने बेहतर क्रियान्वयन, जिम्मेदारी खनन और राष्ट्रीय स्तर के प्रति बढ़ने के जरिए कुछ ही वर्षों में तेजी कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की सबसे बड़ी लौह ओर उत्पादक कंपनी होने के कारण एनएमडीसी पर बड़ी जिम्मेदारी भी है।

    छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में प्रमुख खदानें
    एनएमडीसी की प्रमुख खदानें खनिज संपन्न राज्य छत्तीसगढ़ और कर्नाटक में स्थित हैं। इन खदानों में अत्याधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खनन किया जाता है। कंपनी देश में लौह अयस्क की स्थिर और भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभाती है, जिससे इस्पात उद्योग को निरंतर कच्चा माल उपलब्ध हो सके।

    भारत के इस्पात उत्पादन लक्ष्य में अहम भूमिका
    भारत ने वर्ष 2030 तक अपनी इस्पात उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में लौह अयस्क की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना देश की एक महत्वपूर्ण जरूरत बन गई है। इस लक्ष्य को हासिल करने में NMDC Limited की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आगे भी उसका ध्यान संचालन संयंत्र, नई तकनीकों के इस्तेमाल और जिम्मेदारी खनन पर रहेगा ताकि विकास के अगले चरण को हासिल किया जा सके।

    NMDC की यह उपलब्धि भारतीय खनन उद्योग के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का आंकड़ा पार कर कंपनी ने न सिर्फ नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि देश के इस्पात उद्योग और आर्थिक विकास को भी व्यापक प्रदान की है।

  • अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया

    अमेरिका में भारतीय मूल के नेता को सम्मान, सीनेट में सुनील पुरी को याद किया गया


    नई दिल्ली अमेरिका की सीनेट में भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति और राष्ट्रपति सुनील पुरी को श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान अमेरिकी सीनेटर डिक डर्बिन ने उनके जीवन और समाज के लिए दिए गए योगदान को याद किया।

    सीनेटर डर्बिन ने बताया कि किस तरह भारत से बहुत कम पैसे लेकर अमेरिका आए एक युवा ने मेहनत और लगन के दम पर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई, बल्कि रॉकफोर्ड, इलिनोइस के विकास में भी अहम भूमिका निभाई।

    मुंबई से अमेरिका तक का प्रेरणादायक सफर
    डर्बिन ने अपनी किताब में कहा कि सुनील पुरी अमेरिका में मुंबई से बेहतर शिक्षा का सपना देखते थे। वह रॉकफोर्ड यूनिवर्सिटी (पूर्व में रॉकफोर्ड कॉलेज) की पढ़ाई करने आये थे। कॉलेज के दिनों में आर्थिक स्थिति आसान नहीं थी। पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें कई छोटी-मोटी सब्जियां उगानी पड़ती हैं।

    सीनेटर डर्बिन ने बताया कि कड़ी मेहनत और लगन के साथ उन्होंने हर तरह का काम किया, जिसमें अस्पताल में बेडपैन साफ ​​करना और भर्ती जैसे कठिन काम भी शामिल थे। इसी संघर्ष के दम पर उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आगे बढ़ने का रास्ता निकाला।

    रियल एस्टेट में बनी बड़ी पहचान
    एक रियल एस्टेट कंपनी की स्थापना के बाद सुनील पुरी ने ‘फर्स्ट रॉकफोर्ड ग्रुप’ का नाम रखा, जिसके बाद उन्हें ‘फर्स्ट मिडवेस्ट ग्रुप’ का नाम दिया गया।

    इस कंपनी ने रॉकफोर्ड सिटी में कई पुनर्विकास कंपनियों को आगे बढ़ाया। डर्बिन ने बताया कि कंपनी ने कई वीरान और उपेक्षित इमारतों को फिर से विकसित कर उन्हें उपयोगी स्थानों पर रेस्तरां, कार्यालय और गोदामों में बदल दिया।

    उनके अनुसार इन कोलिक ने शहर में नई ऊर्जा भर दी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा किए।

    समाजसेवा में भी दिया बड़ा योगदान
    व्यवसाय के साथ-साथ सुनील पुरी समाजसेवा के कार्य में भी सक्रिय रहे। डर्बिन ने बताया कि अपने माता-पिता से मिली सीख से प्रेरणा लेकर वह हमेशा समाज को कुछ वापस करने की बात करते थे।

    उन्होंने कई कोचिंग संस्थानों के लिए लाखों डॉलर का दान और अपना समय भी समर्पित किया। उनके योगदान में कई महत्वपूर्ण स्मारक हो सकते हैं, जिनमें ‘कीलिंग-पुरी पीस प्लाजा’, दक्षिण-पूर्व रॉकफोर्ड की वाईएमसीए शाखा और ‘साल्वेशन आर्मी पुरी फैमिली डिजास्टर सर्विसेज सेंटर’ शामिल हैं।

    भारत-अफ्रीका को मजबूत बनाने में भूमिका
    सीनेटर डर्बिन ने यह भी निर्देश दिया कि सुनील पुरी भारत और अमेरिका के सशक्तिकरण को हमेशा के लिए मजबूत करने के लिए सक्रिय रहें।

    उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम किया। इसी मित्र में उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन और बराक ओबामा के साथ भारत की यात्रा भी की थी।

    सुनील पुरी का जीवन संघर्ष, परिश्रम और समाजसेवा का उदाहरण है। एक साधारण प्रवासी से लेकर सफल उद्योगपति और पदवी तक की यात्रा पर निकले उनके कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। अमेरिकी सीनेट द्वारा दी गई श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अमेरिका और भारत दोनों के समाज में गहरी छाप छोड़ी है।

  • MP में एलपीजी संकट: रायसेन में चक्काजाम, भोपाल में डॉक्टरों को भूखे पेट ड्यूटी का खतरा

    MP में एलपीजी संकट: रायसेन में चक्काजाम, भोपाल में डॉक्टरों को भूखे पेट ड्यूटी का खतरा


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एलपीजी संकट लगातार गहराता जा रहा है। प्रदेश के 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टॉरेंट पिछले पांच दिनों से कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई न मिलने से जूझ रहे हैं। कई होटलों में केवल 24 घंटे का स्टॉक बचा है, जिससे खान-पान व्यवस्था ठप होने के कगार पर है। लोग वैकल्पिक तौर पर इंडक्शन और डीजल भट्ठियों का सहारा ले रहे हैं, लेकिन घरेलू रसोई और हॉस्पिटल किचन की समस्याएं और भयावह हो गई हैं।

    सबसे ज्यादा उग्र स्थिति रायसेन में देखने को मिली। सागर रोड स्थित गैस एजेंसी पर सुबह 5 बजे से कतार में खड़े सैकड़ों लोगों का धैर्य जवाब दे गया। सुबह 10 बजे तक एजेंसी नहीं खुली तो लोगों ने खाली सिलेंडर सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं। एक महिला ने कहा, “मैं सुबह 7 बजे ही घर का सारा काम छोड़ एजेंसी पहुंच गई थी। घर में न चाय बनी, न बच्चों के लिए खाना। खाली सिलेंडर लेकर दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है।”

    रायसेन में चक्काजाम की सूचना पर एसडीएम और तहसीलदार भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे और उपभोक्ताओं को समझाइश देकर शांत किया। प्रदर्शन के कारण सागर रोड पर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं और आवागमन बाधित रहा। एजेंसी संचालक का कहना है कि भोपाल से आ रहा सिलेंडर ट्रक रास्ते में पंक्चर हो गया था, इसलिए डिलीवरी में देरी हुई। प्रशासन ने आश्वासन दिया कि ट्रक पहुंचते ही वितरण शुरू कर दिया जाएगा।

    राजधानी भोपाल में भी हालात गंभीर हैं। गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में एलपीजी संकट के कारण हॉस्टल मेस, जेडीए कैंटीन और मरीजों के सेंट्रलाइज्ड किचन की प्रोडक्शन क्षमता 50% तक घट गई है। मेस संचालकों को कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे, बुकिंग पर 25 दिन की वेटिंग दी जा रही है। वैकल्पिक उपाय के तौर पर डीजल भट्ठियों का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन उन पर चाय और रोटी बनाना संभव नहीं।

    संकट बढ़ता रहा तो रेजिडेंट डॉक्टरों को खाली पेट ड्यूटी करनी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा। एलपीजी संकट ने राज्य में खाद्य सुरक्षा, रेस्टॉरेंट व्यवसाय और हॉस्पिटल संचालन को सीधे प्रभावित कर दिया है।

  • LPG किल्लत की आशंका के बीच IRCTC अलर्ट: ट्रेनों में इंडक्शन व रेडी-टू-ईट फूड की तैयारी, WCR में 25 क्लस्टर किचन से जारी सप्लाई

    LPG किल्लत की आशंका के बीच IRCTC अलर्ट: ट्रेनों में इंडक्शन व रेडी-टू-ईट फूड की तैयारी, WCR में 25 क्लस्टर किचन से जारी सप्लाई


    नई दिल्ली। शहर में एलपीजी की संभावित किल्लत की खबरों के बीच ट्रेनों में भोजन व्यवस्था को लेकर यात्रियों के बीच चिंता बढ़ने लगी थी। इस बीच IRCTC ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल ट्रेनों में कैटरिंग व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और यात्रियों को भोजन की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी है।

    IRCTC के प्रवक्ता एके सिंह के मुताबिक पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) क्षेत्र में करीब 25 क्लस्टर किचन संचालित किए जा रहे हैं। इन किचनों से क्षेत्र की प्रमुख ट्रेनों में नियमित रूप से भोजन लोड किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी ट्रेन में भोजन सप्लाई बाधित होने की स्थिति सामने नहीं आई है और किचनों में एलपीजी सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

    प्रवक्ता ने बताया कि यात्रियों को सामान्य रूप से गर्म और ताजा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। हालांकि हाल के दिनों में कुछ यात्रियों ने भोजन ठंडा मिलने की शिकायत की थी, लेकिन ट्रेनों में माइक्रोवेव ओवन की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर भोजन को दोबारा गर्म कर यात्रियों को परोसा जाता है। IRCTC की टीम लगातार कैटरिंग व्यवस्था पर नजर रख रही है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    संभावित गैस संकट को देखते हुए IRCTC ने एहतियात के तौर पर वैकल्पिक योजना भी तैयार कर ली है। मुंबई स्थित जोनल कार्यालय की ओर से क्लस्टर किचनों और ट्रेनों में इंडक्शन कुकर, माइक्रोवेव ओवन और रेडी-टू-ईट फूड की व्यवस्था रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि अगर भविष्य में गैस सप्लाई प्रभावित होती है तो यात्रियों को भोजन उपलब्ध कराने में कोई परेशानी न आए।

    हालांकि IRCTC ने साफ किया है कि फिलहाल इन वैकल्पिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ी है। गैस सप्लाई सिस्टम सामान्य रूप से चल रहा है और ट्रेनों में भोजन की आपूर्ति नियमित तरीके से की जा रही है।

    प्रवक्ता के अनुसार यात्रियों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और कैटरिंग व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि भविष्य में किसी तरह की समस्या सामने आती है तो तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, ताकि यात्रियों को भोजन से जुड़ी किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल पश्चिम मध्य रेलवे क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ट्रेनों में भोजन की सप्लाई सुचारू रूप से जारी है।