यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।
Category: Economy
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डिजिटल भारत की नई रफ्तार: अब टोल कटेगा ऑटोमैटिक, न रुकना पड़ेगा न कतार में लगना होगा
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के लिए आने वाला समय एक बड़े तकनीकी बदलाव का संकेत लेकर आ रहा है। देश में टोल प्लाजा व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और बाधारहित बनाने की दिशा में सरकार तेजी से काम कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और न ही लंबी कतारों का सामना करना पड़ेगा। पूरा सिस्टम ऑटोमैटिक तकनीक पर आधारित होगा, जिससे यात्रा पहले से कहीं अधिक सुगम और तेज हो जाएगी।नई व्यवस्था में FASTag और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका होगी। अभी तक टोल प्लाजा पर वाहनों को बैरियर के पास रुककर स्कैनिंग प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, लेकिन भविष्य की प्रणाली में इन भौतिक बाधाओं को हटाया जा रहा है। हाईवे पर लगाए जाने वाले हाई-टेक कैमरे और सेंसर तेज रफ्तार में गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट और फास्टैग को तुरंत पहचान लेंगे। जैसे ही वाहन निर्धारित क्षेत्र से गुजरेंगे, टोल शुल्क अपने आप जुड़े बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से कट जाएगा। यह प्रक्रिया इतनी तेज होगी कि ड्राइवर को इसका अनुभव भी लगभग नहीं होगा।इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत और ईंधन की खपत में कमी के रूप में सामने आएगा। बार-बार रुकने और चलने की प्रक्रिया खत्म होने से ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाएगी। साथ ही, राजमार्गों पर पारदर्शिता बढ़ेगी और मैनुअल हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो जाएगा।नई प्रणाली के साथ नियमों को भी और सख्त बनाया गया है। अब टोल भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यमों पर आधारित होगा। नकद भुगतान का विकल्प धीरे-धीरे समाप्त किया जा रहा है। यदि किसी वाहन में वैध फास्टैग नहीं है या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं है, तो चालक को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में टोल प्लाजा पर प्रवेश भी रोका जा सकता है। इसके अलावा UPI आधारित QR कोड स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में वैकल्पिक भुगतान संभव हो सके।हालांकि, इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे हाईवे नेटवर्क को कैशलेस और पूरी तरह डिजिटल बनाना है। इससे न केवल लेनदेन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि यात्रा प्रणाली भी अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनेगी। लेकिन यह भी सच है कि जिन लोगों के पास डिजिटल साधनों की सुविधा नहीं है, उन्हें शुरुआती दौर में कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को सक्रिय और अपडेट रखें। इसके साथ ही बैंक खाते से लिंकिंग और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए UPI एप्लिकेशन तैयार रखना भी आवश्यक माना जा रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भुगतान में बाधा न आए।इस पूरी पहल का उद्देश्य केवल टोल संग्रह को सरल बनाना नहीं है, बल्कि देश के राजमार्गों को एक स्मार्ट और फ्यूचर-रेडी सिस्टम में बदलना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था भारतीय परिवहन प्रणाली को एक नई दिशा देगी, जहां यात्रा न केवल तेज होगी बल्कि पूरी तरह डिजिटल और व्यवस्थित भी होगी। -

कैशलेस भारत की नई उड़ान, यूपीआई बना दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम
नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण यूपीआई की लगातार बढ़ती रफ्तार है। अप्रैल महीने में यूपीआई ने एक बार फिर ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। इस दौरान कुल लेनदेन की संख्या लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 22 अरब से अधिक पहुंच गई, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 29 लाख करोड़ रुपए से ऊपर दर्ज किया गया। यह आंकड़े देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार और लोगों की बढ़ती डिजिटल निर्भरता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।आज स्थिति यह है कि छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक, हर जगह यूपीआई भुगतान एक सामान्य प्रक्रिया बन चुका है। लोग नकद लेनदेन की बजाय मोबाइल के जरिए तुरंत भुगतान करना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं। इस बदलाव ने न केवल भुगतान प्रणाली को सरल बनाया है, बल्कि लेनदेन की गति और पारदर्शिता को भी बढ़ाया है।
अप्रैल के दौरान रोजाना होने वाले यूपीआई लेनदेन में भी लगातार वृद्धि देखी गई। हर दिन औसतन करोड़ों ट्रांजैक्शन इस माध्यम से पूरे किए गए, जो यह दिखाता है कि यह प्रणाली अब दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। चाहे किराने की दुकान हो, ऑनलाइन शॉपिंग हो या फिर सेवाओं का भुगतान, यूपीआई हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बना चुका है।
इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण इसकी सरल प्रक्रिया और तत्काल भुगतान सुविधा है। केवल मोबाइल नंबर या QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है, जिससे समय की बचत होती है और कैश संभालने की परेशानी भी खत्म हो जाती है। इसके अलावा बैंकिंग सिस्टम से सीधा जुड़ाव इसे अधिक सुरक्षित बनाता है।
पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने जिस तेजी से विकास किया है, वह देश की डिजिटल प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। जहां पहले डिजिटल भुगतान सीमित स्तर पर उपयोग होता था, वहीं अब यह प्रणाली देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनती जा रही है। इससे न केवल वित्तीय समावेशन बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिला है।
अप्रैल के ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है और यूपीआई इस बदलाव का सबसे मजबूत आधार बन चुका है। आने वाले समय में इसके और विस्तार की संभावना है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।
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गौतम अदाणी ने विकास रणनीति में स्थानीय लोगों को दी प्राथमिकता..
नई दिल्ली। अदाणी समूह ने अपनी विकास रणनीति को लेकर एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है, जिसमें स्थानीय रोजगार सृजन, कर्मचारियों के सम्मानजनक जीवन और कौशल विकास को केंद्रीय भूमिका दी गई है। समूह के चेयरमैन ने यह स्पष्ट किया है कि संगठन की प्रगति अब केवल आर्थिक विस्तार या बड़ी परियोजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका मूल्यांकन इस आधार पर किया जाएगा कि वह कितने लोगों के जीवन को बेहतर बना पा रहा है।कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति जो किसी भी परियोजना से जुड़ा है, वह केवल एक श्रमिक नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का सक्रिय हिस्सा है। उनके अनुसार जब कोई परियोजना पूरी होती है तो वह सिर्फ एक संरचना नहीं होती, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि समूह की प्राथमिकता अब स्थानीय भर्ती को बढ़ावा देना है। किसी भी परियोजना में सबसे पहले आसपास के क्षेत्रों के लोगों को अवसर दिया जाएगा, उसके बाद राज्य स्तर पर और आवश्यकता पड़ने पर अन्य क्षेत्रों के उम्मीदवारों पर विचार किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य स्थानीय समुदायों को सीधे विकास प्रक्रिया से जोड़ना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
कर्मचारियों के कल्याण को लेकर भी समूह ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। दूरस्थ और बड़े प्रोजेक्ट स्थलों पर कार्यरत लोगों के लिए बेहतर आवास और सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है ताकि वे गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन जी सकें। इसके साथ ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था विकसित की जा रही है, जिससे काम करने वालों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को सम्मानजनक जीवन और बेहतर कार्य परिस्थितियां मिलना केवल सुविधा नहीं बल्कि एक मूलभूत आवश्यकता है। इसी सोच के साथ संगठन अपने सभी प्रोजेक्ट्स में मानव केंद्रित विकास को प्राथमिकता दे रहा है।
संगठनात्मक ढांचे में भी बदलाव किए जा रहे हैं ताकि निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सके। नई प्रणाली के तहत साइट स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाई जा रही है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होगी और गति में सुधार आएगा। यह कदम बड़े पैमाने पर चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में सहायक होगा।
इसके अलावा साझेदारी के मॉडल में भी बदलाव किया गया है, जिसमें सीमित लेकिन अधिक सक्षम और विश्वसनीय भागीदारों के साथ काम करने की रणनीति अपनाई जा रही है। इसका उद्देश्य बेहतर समन्वय, गुणवत्ता नियंत्रण और तेज निष्पादन सुनिश्चित करना है। यह मॉडल दीर्घकालिक सहयोग और स्थिर विकास को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
कौशल विकास को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और उन्नति के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं ताकि वे अपने करियर में आगे बढ़ सकें और अधिक जिम्मेदार भूमिकाएं निभा सकें। इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि लोगों को सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है।
बड़ी परियोजनाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ते हुए यह भी कहा गया कि ये केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि देश की आर्थिक और बुनियादी ढांचे की मजबूती का आधार हैं। इनके माध्यम से देश की ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षमता को नया आकार दिया जा रहा है।
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1 मई 2026 से बड़े बदलाव: गैस सिलेंडर से ATM तक बदले नियम, आम जनता की जेब पर सीधा असर
नई दिल्ली। 1 मई 2026 से देश में कई ऐसे नए नियम लागू हुए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी और उनके खर्च पर पड़ने वाला है। LPG सिलेंडर की कीमतों से लेकर ATM ट्रांजैक्शन और बैंकिंग चार्ज तक कई क्षेत्रों में बदलाव किए गए हैं।सरकार और वित्तीय संस्थानों के इन फैसलों का उद्देश्य सिस्टम को अधिक पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है, लेकिन इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।
1. LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बदलाव
हर महीने की तरह इस बार भी LPG सिलेंडर के दामों में संशोधन किया गया है। इससे घरेलू और व्यावसायिक दोनों उपभोक्ताओं का मासिक बजट प्रभावित हो सकता है।2. गैस डिलीवरी में OTP अनिवार्य
अब गैस सिलेंडर डिलीवरी के समय OTP देना जरूरी कर दिया गया है। इससे फर्जी डिलीवरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगाई जाएगी और सिस्टम ज्यादा सुरक्षित बनेगा।3. सिलेंडर बुकिंग नियम सख्त
अब एक सिलेंडर बुक करने के तुरंत बाद दूसरा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा। दोनों बुकिंग के बीच एक निश्चित समय अंतराल रखना अनिवार्य होगा।4. ATM ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ा
फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट खत्म होने के बाद अब ATM से पैसे निकालने पर अधिक शुल्क देना होगा। इससे बार-बार कैश निकालने वाले ग्राहकों का खर्च बढ़ सकता है।5. बैंकिंग सेवाओं में बदलाव
कुछ बैंकों ने मिनिमम बैलेंस, सर्विस चार्ज और अन्य बैंकिंग फीस में संशोधन किया है। इसका असर सीधे ग्राहकों के खाते के बैलेंस पर दिखाई देगा।6. CNG और PNG की कीमतों में बदलाव
CNG और PNG की कीमतों में मासिक संशोधन किया गया है, जिससे परिवहन और घरेलू गैस खर्च में बढ़ोतरी की संभावना है।7. क्रेडिट कार्ड नियमों में बदलाव
क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए लेट पेमेंट चार्ज और अन्य फीस में बदलाव किया गया है। समय पर भुगतान न करने पर अब ज्यादा जुर्माना देना पड़ सकता है।1 मई 2026 से लागू ये बदलाव आम लोगों के मासिक बजट पर सीधा असर डालने वाले हैं। गैस, बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी के चलते उपभोक्ताओं को अब पहले से ज्यादा सतर्क और योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन की जरूरत होगी।
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Labour Day 2026: क्या होता है न्यूनतम वेतन? जानिए आपके राज्य में कितनी है मजदूरी और नए नियमों का असर
नई दिल्ली। Labour Day 2026 के अवसर पर देश में मजदूरों के अधिकारों और वेतन व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा सामने आई है। सरकार द्वारा लागू किए गए Code on Wages 2019 के बाद न्यूनतम वेतन प्रणाली को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर श्रमिक को उसकी मेहनत का उचित और सम्मानजनक मूल्य मिले। आज न्यूनतम वेतन केवल जीवनयापन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान का आधार बन चुका है।क्या होता है न्यूनतम वेतन?
न्यूनतम वेतन वह कानूनी रूप से तय की गई राशि है, जो किसी भी कर्मचारी को उसकी सेवाओं के बदले देना अनिवार्य होता है। इसका मुख्य उद्देश्य मजदूरों को शोषण से बचाना और उन्हें एक निश्चित आय सुरक्षा प्रदान करना है। यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि कोई भी श्रमिक अपनी बुनियादी जरूरतों से वंचित न रहे।भारत में वेतन तय करने का सिस्टम
देश में न्यूनतम वेतन तीन स्तरों पर तय किया जाता है-1. नेशनल फ्लोर लेवल
यह पूरे देश के लिए न्यूनतम वेतन की आधार सीमा तय करता है।2. केंद्रीय क्षेत्र (Central Sector)
रेलवे, खनन और सार्वजनिक उपक्रमों जैसे क्षेत्रों में केंद्र सरकार वेतन तय करती है।3. राज्य स्तर (State Level)
हर राज्य अपने जीवनयापन खर्च और आर्थिक स्थिति के अनुसार मजदूरी निर्धारित करता है।2026 में राज्यवार न्यूनतम वेतन (अनुमानित आंकड़े)
दिल्ली: अकुशल ₹18,456 | कुशल ₹22,411
हरियाणा: अकुशल ₹15,221 | कुशल ₹18,501
बिहार: अकुशल ₹11,336
पश्चिम बंगाल: अकुशल ₹8,840
इन आंकड़ों से साफ है कि महानगरों में जीवनयापन की लागत अधिक होने के कारण वेतन भी ज्यादा तय किया जाता है।केंद्र सरकार के क्षेत्र में वेतन
केंद्र सरकार के अधीन क्षेत्रों में मजदूरी अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है-अकुशल श्रमिक: लगभग ₹20,358
कुशल श्रमिक: लगभग ₹24,800वेतन संरचना में बड़ा बदलाव
नए नियमों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी है।इस बदलाव से कर्मचारियों को भविष्य में PF और ग्रेच्युटी जैसे लाभों में भी बढ़ोतरी मिलेगी।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
सरकार ने न्यूनतम वेतन कानून के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान किया है—पहली गलती पर ₹50,000 तक जुर्माना
दोबारा उल्लंघन पर ₹10 लाख तक जुर्माना और जेल की सजाLabour Day 2026 पर लागू ये बदलाव देश के श्रमिक वर्ग के लिए एक सकारात्मक कदम हैं। इससे न केवल उनकी आय में सुधार होगा, बल्कि उन्हें आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिलेगा।
न्यूनतम वेतन व्यवस्था अब अधिक पारदर्शी और मजबूत होती जा रही है, जो भारत के श्रम बाजार को नई दिशा दे रही है।
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RBI ने 6 माह में भारत में शिफ्ट किया 104 टन सोना…. जानें विदेशी मुद्रा भंडार का हाल
नई दिल्ली। भारत (India) के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India- RBI) ने पिछले छह महीनों में अपने सोने के भंडार का बड़ा हिस्सा देश के भीतर शिफ्ट किया है, जिससे गोल्ड की हिस्सेदारी भी तेजी से बढ़ी है।
6 महीने में 104 टन सोना देश में शिफ्ट
आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 104.23 मीट्रिक टन सोना विदेश से भारत लाया गया। इसके साथ ही देश में रखा गया कुल सोना बढ़कर 290.37 मीट्रिक टन हो गया है। हालांकि, कुल गोल्ड रिजर्व में बहुत बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। मार्च 2026 तक RBI के पास कुल 880.52 मीट्रिक टन सोना है, जो सितंबर 2025 के 880.18 टन से थोड़ा ही ज्यादा है।विदेश में अभी भी कितना सोना रखा है
आरबीआई अभी भी अपने सोने का एक बड़ा हिस्सा विदेश में सुरक्षित रखता है। करीब 197.67 मीट्रिक टन सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटेलमेंट्स (BIS) के पास सुरक्षित रखा गया है। इसके अलावा 2.80 टन सोना गोल्ड डिपॉजिट के रूप में है।
गोल्ड की हिस्सेदारी में तेज बढ़ोतरी
सोने की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ा है।मार्च 2026 तक फॉरेक्स रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई, जो छह महीने पहले 13.92% थी। यह दिखाता है कि RBI धीरे-धीरे अपने रिजर्व में गोल्ड का महत्व बढ़ा रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार का हाल
भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में विदेशी मुद्रा संपत्ति (FCA) का बड़ा हिस्सा है। कुल विदेशी मुद्रा 552.28 अरब डॉलर है। इसमें से 465.61 अरब डॉलर सिक्योरिटीज में निवेश है। 46.83 अरब डॉलर अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा है। 39.84 अरब डॉलर विदेशी कमर्शियल बैंकों में जमा है।रणनीति में क्या बदलाव दिख रहा: रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि RBI धीरे-धीरे अपनी रणनीति बदल रहा है। सिक्योरिटीज और विदेशी बैंकों में जमा राशि थोड़ी घटाकर, अन्य केंद्रीय बैंकों और BIS में जमा बढ़ाई गई है।
क्या है इसका मतलब
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम वैश्विक अनिश्चितता के बीच सुरक्षा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है। सोना एक सुरक्षित निवेश माना जाता है, इसलिए RBI अपने रिजर्व को ज्यादा स्थिर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। -

4 साल के उच्च स्तर पर पहुंचा क्रूड…. ईरान युद्ध चरम पर था तब भी इतने नहीं बढ़े थे दाम
तेहरान । ईरान युद्ध (Iran War) जब चरम पर था, तब क्रूड (Crude) ने इतनी बड़ी छलांग नहीं लगाई थी। अब जब बातचीत की कोशिशें दिख रही हैं और युद्ध की रफ्तार धीमी हुई है, तब ब्रेंट क्रूड (Brent crude) उछलकर चार साल के उच्च स्तर 126 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। यह विरोधाभास नहीं है। तेल बाजार युद्ध की आवाज नहीं, आपूर्ति की सांस सुनता है।दरअसल, एक्सिओस की एक रिपोर्ट (Axios reports) आने के बाद बृहस्पतिवार को कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड 126.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जो 9 मार्च, 2022 के बाद इसका उच्चतम स्तर है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बृहस्पतिवार को ईरान पर सैन्य हमलों की एक शृंखला की योजनाओं के बारे में जानकारी दी जानी है। ऐसा इस उम्मीद में किया जा रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए वापस लौट आएगा। ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के इस रुख से संघर्ष और बढ़ सकता है, जिससे क्रूड आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट आ सकती है।
बाद में बिना किसी स्पष्ट कारण के ब्रेंट क्रूड में गिरावट आई और कीमतें 3.5 फीसदी गिरकर 113.89 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गईं। तेल ब्रोकर पीवीएम के तमास वर्गा ने कहा, क्रूड में यह गिरावट किसी खास घटना से जुड़ी नहीं लगती, बल्कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से बाजार में बढ़ी अस्थिरता को दर्शाती है। यह बस ट्रंप की दुनिया में ट्रेडिंग के अप्रत्याशित स्वभाव को संक्षेप में बताती है।
डर ही नहीं बैरल भी कम
बाजार में सिर्फ डर नहीं, असल में बैरल भी कम हैं। आईईए के आंकड़े बताते हैं, मार्च में वैश्विक तेल भंडार 8.5 करोड़ बैरल घटा है। खाड़ी के बाहर भंडार में 20.5 करोड़ बैरल की गिरावट आई। समुद्र में चल रहा तेल भी घटा है। ऑयल ऑन वाटर 10.7 करोड़ बैरल कम हुआ, क्योंकि होर्मुज के बंद होने से ट्रांजिट में मौजूद तेल 18.1 करोड़ बैरल घट गया।
उबाल की असली वजह होर्मुज
तेल में उबाल की असल वजह है होर्मुज। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के मुताबिक, युद्ध से पहले होर्मुज से रोज 2 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइंड उत्पाद निकलते थे। अप्रैल के शुरू में यह घटकर सिर्फ 38 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। वैकल्पिक रास्तों से निर्यात जरूर बढ़कर 72 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंचा, लेकिन कुल निर्यात नुकसान अब भी 1.3 करोड़ बैरल प्रतिदिन से ज्यादा है।केडिया कमोडिटी के प्रमुख अजय केडिया कहते हैं, यही वह आंकड़ा है, जिसने बाजार को बेचैन किया है। युद्ध रुक भी जाए, तो जहाज तुरंत नहीं चलेंगे। बीमा, रूट, बंदरगाह, लोडिंग और रिफाइनरी आपूर्ति को सामान्य होने में समय लगेगा। यही बात तेल के बाजार को परेशान कर रही है।
आपूर्ति का प्रभावित होना भी बड़ी वजह
अर्थवृक्ष फाइनेंशियल सर्विसेज के संस्थापक रविंद्र राव ने बताया, आपूर्ति प्रभावित होने से भी क्रूड में मजबूती दिख रही है। उनका कहना है कि ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, जब तक उस पर नाकेबंदी जारी रहेगी, जिससे तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। जब बाजार को पता है कि तेल अभी नहीं मिल रहा, तो जो कॉन्ट्रैक्ट आज डिलीवरी का है, वो सबसे ज्यादा महंगा हो जाता है। रिफाइनरी और ट्रेडर्स किसी भी दाम पर खरीदने को तैयार हो जाते हैं। -

कमर्शियल LPG महंगी: 993 रुपये की बढ़ोतरी, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत जारी
नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। तेल विपणन कंपनियों की ओर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस फैसले के बाद कारोबारियों और व्यावसायिक संस्थानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। हालांकि, आम घरेलू उपभोक्ताओं को इस बार राहत दी गई है और उनके सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।राजधानी New Delhi में अब 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर 3,071.5 रुपये में उपलब्ध होगा। यह बढ़ोतरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों में आई तेजी के कारण की गई है।
तेल कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं, जिनकी संख्या देश में करीब 33 करोड़ है, उनके लिए एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इसका सीधा फायदा आम परिवारों को मिलेगा, जिन पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का असर सीधे गैस और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। इससे पहले भी कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत लगातार बढ़ रही है।
सरकारी तेल कंपनियों ने यह भी बताया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम जनता को राहत मिली है। इसके अलावा एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें भी स्थिर रखी गई हैं ताकि हवाई यात्रा की लागत में अचानक बढ़ोतरी न हो।
वहीं सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगाए गए शुल्कों में भी संशोधन किया है, ताकि घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके। डीजल और एविएशन फ्यूल पर अलग-अलग दरों पर शुल्क लागू किया गया है, जबकि पेट्रोल पर निर्यात शुल्क शून्य रखा गया है।
कुल मिलाकर, यह बदलाव एक तरफ व्यापारिक क्षेत्र के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में स्थिरता आने तक ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
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मई की शुरुआत में झटका और राहत साथ-साथ: LPG महंगा, पेट्रोल-डीजल स्थिर, सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव
नई दिल्ली। मई 2026 की शुरुआत आम जनता और कारोबारियों के लिए मिली-जुली खबर लेकर आई है। जहां एक ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी ने झटका दिया है। साथ ही, सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट और चांदी में लगातार तीसरे दिन कमजोरी देखने को मिली है।देश की राजधानी New Delhi में पेट्रोल ₹94.77 प्रति लीटर और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर स्थिर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद तेल कंपनियों ने आम जनता को राहत देते हुए ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। Mumbai, Kolkata और Chennai जैसे प्रमुख महानगरों में भी दाम जस के तस बने हुए हैं।हालांकि, कमर्शियल उपयोग करने वालों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। 19 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹993 की भारी बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.50 तक पहुंच गई है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। राहत की बात यह है कि घरेलू 14.2 किलो एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे आम घरों पर फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ा है।सर्राफा बाजार की बात करें तो सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना ₹1,50,820 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,38,260 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में नरमी का रुख बना हुआ है। वहीं चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखने को मिली है और यह ₹2,49,900 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर Iran और United States के बीच हालात, बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। इसका असर कच्चे तेल से लेकर सोना-चांदी तक सभी कमोडिटी पर देखने को मिल रहा है।वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs का अनुमान है कि आने वाले महीनों में सोने की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। केंद्रीय बैंकों की बढ़ती खरीद और अमेरिका में ब्याज दरों में संभावित कटौती के चलते साल के अंत तक सोना ₹1.63 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। हालांकि, अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना जताई गई है।कुल मिलाकर, जहां ईंधन की स्थिर कीमतों ने आम जनता को राहत दी है, वहीं कमर्शियल एलपीजी की बढ़ी कीमतों से व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। सोना-चांदी में जारी उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। -

एसएचजी सेविंग्स अकाउंट से वित्तीय समावेशन को मिलेगा नया बल..
नई दिल्ली । ग्रामीण भारत में वित्तीय सेवाओं को अधिक सरल, सुलभ और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है, जिसके तहत स्वयं सहायता समूहों के लिए विशेष सेविंग्स अकाउंट की शुरुआत की गई है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य उन लाखों महिलाओं और ग्रामीण परिवारों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाना है, जो अब तक पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली से दूर रहे हैं।यह खाता पूरी तरह जीरो बैलेंस सुविधा के साथ उपलब्ध कराया गया है, जिससे किसी भी प्रकार की न्यूनतम राशि रखने की बाध्यता समाप्त हो जाती है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग भी बिना किसी दबाव के इसका उपयोग कर सकता है। इस खाते को खोलने की प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाया गया है, जिससे इसे गांवों में भी आसानी से शुरू किया जा सकता है।
इसके लिए डाकघर नेटवर्क और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत डाक सेवकों की मदद ली जा रही है, ताकि बैंकिंग सेवाएं सीधे लोगों तक पहुंच सकें और उन्हें किसी लंबी प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। इस खाते में कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनमें मासिक औसत बैलेंस रखने की आवश्यकता नहीं होना, अधिकतम दो लाख रुपये तक की जमा सीमा, नियमित अंतराल पर ब्याज का लाभ और बिना किसी शुल्क के कैश जमा और निकासी की सुविधा शामिल है। इसके अलावा खाताधारकों को हर महीने निःशुल्क स्टेटमेंट प्रदान किया जाएगा, जिससे उनके लेनदेन की जानकारी पारदर्शी बनी रहे।
खाता बंद करने पर भी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए क्यूआर कार्ड की सुविधा भी बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में कैशलेस व्यवस्था को मजबूती मिल सके।
यह पहल विशेष रूप से स्वयं सहायता समूहों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि ये समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य करते हैं और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इस सुविधा के माध्यम से इन समूहों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़कर उनके लेनदेन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाएगा।
इससे न केवल बचत की आदत को बढ़ावा मिलेगा बल्कि छोटे स्तर पर चल रही आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की सीमित पहुंच को देखते हुए यह कदम वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा परिवर्तन माना जा रहा है। डोरस्टेप बैंकिंग और डिजिटल नेटवर्क की मदद से अब बैंकिंग सेवाएं सीधे घरों और गांवों तक पहुंचेंगी, जिससे लोगों को बैंक शाखाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
यह पहल ग्रामीण विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है और आने वाले समय में इससे व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।