Category: Economy

  • मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    मजबूत घरेलू खपत और बैंकिंग सिस्टम ने वैश्विक झटकों को किया बेअसर।

    नई दिल्ली । दुनिया भर में छाई आर्थिक अनिश्चितता और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था एक सुरक्षित और मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पैदा हुई बड़ी बाधाओं के बावजूद भारत की आंतरिक मजबूती इसके बचाव में सबसे बड़ी ढाल बनी हुई है। रिपोर्ट यह रेखांकित करती है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, प्रभावी सरकारी निवेश और एक बेहद लचीली वित्तीय प्रणाली ने मिलकर अर्थव्यवस्था को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान किया है, जो बाहरी झटकों को सहने में पूरी तरह सक्षम है।

    बाजार के वर्तमान आंकड़ों पर नजर डालें तो खपत का स्तर उम्मीद से कहीं बेहतर है। मार्च महीने के दौरान वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री में हुई बढ़ोतरी इस बात का प्रमाण है कि देश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मांग का पहिया तेजी से घूम रहा है। हालांकि, समीक्षा में इस बात को लेकर आगाह भी किया गया है कि भविष्य की आर्थिक दिशा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनपुट लागत और आपूर्ति श्रृंखला पर कितना दबाव रहता है। उम्मीद जताई गई है कि साल 2026 के उत्तरार्ध तक मध्य पूर्व की स्थितियों में सुधार देखने को मिल सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार को राहत मिलेगी।

    चुनौतियों के मोर्चे पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि पश्चिम एशिया का संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इसके राजकोषीय प्रभाव पड़ना तय है। इससे न केवल केंद्र बल्कि राज्यों की राजस्व प्राप्ति और खर्च करने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

    ऊर्जा और उर्वरक की आपूर्ति में संभावित अनिश्चितता मुद्रास्फीति (महंगाई) और व्यापार घाटे को बढ़ा सकती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़कर 333.2 अरब डॉलर तक पहुँच गया है, और यह प्रवृत्ति अगले वित्त वर्ष में भी जारी रहने की संभावना है। इसके बावजूद, सरकार ने ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ जैसी रणनीतियों के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त राजकोषीय गुंजाइश बना रखी है।

    आर्थिक विकास की इस गति को भविष्य में भी बनाए रखने के लिए सरकार अब नई तकनीकों और कौशल विकास पर दांव लगा रही है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और टिकाऊ व्यापार कौशल में निपुण बनाकर घरेलू विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है।

    इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत के निर्यात की हिस्सेदारी भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सावधानीपूर्ण नीतिगत फैसलों और आंतरिक मजबूती के दम पर भारत वैश्विक संकटों के बीच भी अपनी विकास दर को सुरक्षित रखने में कामयाब रहेगा।

  • अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    अदाणी पोर्ट्स का रिकॉर्ड प्रदर्शन, 50 करोड़ टन कार्गो के साथ आय और लाभ में उल्लेखनीय बढ़ोतरी

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026 अदाणी पोर्ट्स के लिए मजबूत प्रदर्शन और विस्तार का वर्ष साबित हुआ है, जहां कंपनी ने अपने मुनाफे और आय दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है। इस दौरान कंपनी ने न केवल वित्तीय रूप से मजबूती दिखाई, बल्कि परिचालन स्तर पर भी कई नए रिकॉर्ड स्थापित किए।

    कंपनी का शुद्ध लाभ इस वित्त वर्ष में 16 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12,782 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, कुल आय में भी उल्लेखनीय उछाल देखा गया, जो 25 प्रतिशत बढ़कर 38,736 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि कंपनी ने अपने विभिन्न कारोबार क्षेत्रों में संतुलित और प्रभावी रणनीति अपनाई है।

    इस दौरान परिचालन लाभ यानी एबिटा में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 22,851 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह आंकड़ा कंपनी की मजबूत कार्यप्रणाली और लागत नियंत्रण को दर्शाता है।

    परिचालन उपलब्धियों की बात करें तो कंपनी ने इस वर्ष एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया। एक ही वर्ष में 50 करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कार्गो को संभालना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है, जिसने कंपनी को देश के अग्रणी एकीकृत परिवहन ऑपरेटर के रूप में स्थापित किया है।

    कंपनी के लॉजिस्टिक्स कारोबार ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई। इस सेगमेंट में 55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई सेवाओं के विस्तार के कारण संभव हो पाई। वहीं समुद्री कारोबार में 134 प्रतिशत की तेज वृद्धि ने कंपनी के कुल प्रदर्शन को और मजबूती दी। बेड़े में जहाजों की संख्या बढ़ने से इस क्षेत्र में तेजी आई है।

    अंतरराष्ट्रीय संचालन से भी कंपनी को सकारात्मक परिणाम मिले हैं। विदेशी बंदरगाहों से प्राप्त राजस्व में 34 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो वैश्विक स्तर पर कंपनी के विस्तार को दर्शाता है।

    वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में भी कंपनी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। इस अवधि में आय में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मुनाफा 9 प्रतिशत बढ़कर 3,308 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि वर्ष के अंत तक भी कंपनी की विकास दर बनी रही।

    भविष्य की योजनाओं को लेकर कंपनी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले वर्षों में वह अपनी क्षमता और दायरे को और बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी। कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाने, सेवाओं का विस्तार करने और निवेश को संतुलित बनाए रखने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

  • कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता-बिकवाली के दबाव में बाजार, सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला, जहां कारोबारी सत्र के अंत में प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा, लेकिन अंततः निवेशकों की सतर्कता और बिकवाली के दबाव ने बाजार को लाल निशान में पहुंचा दिया।

    कारोबार की शुरुआत हल्की मजबूती के साथ हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार पर दबाव बढ़ता गया। निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिसके चलते सूचकांक धीरे-धीरे नीचे आते गए। दिन के अंत तक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि बाजार का मूड फिलहाल कमजोर बना हुआ है।

    इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम एक प्रमुख कारण रहा। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे आर्थिक अनिश्चितता बढ़ गई। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई और उत्पादन लागत पर पड़ता है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बाजार से दूरी बनानी शुरू कर दी।

    बाजार के विभिन्न सेक्टरों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। धातु, बैंकिंग, रियल एस्टेट और उपभोक्ता क्षेत्र से जुड़े शेयरों में खासा दबाव रहा। इन क्षेत्रों में आई गिरावट यह संकेत देती है कि व्यापक स्तर पर निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। हालांकि कुछ चुनिंदा सेक्टरों में हल्की बढ़त देखने को मिली, लेकिन वह समग्र गिरावट को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं रही।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जो यह दर्शाता है कि बाजार का दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रहा। व्यापक बाजार में कमजोरी का मतलब है कि निवेशकों ने सभी स्तरों पर सतर्कता अपनाई है और जोखिम कम करने की कोशिश की है।

    व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो कुछ कंपनियों के शेयरों में मजबूती जरूर देखने को मिली, लेकिन गिरावट वाले शेयरों की संख्या ज्यादा रही। यह असंतुलन बाजार की वर्तमान स्थिति को दर्शाता है, जहां सकारात्मक संकेत सीमित हैं और नकारात्मक कारक हावी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्थिति में स्थिरता नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में नहीं आतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए यह समय सतर्कता और सोच-समझकर फैसले लेने का है।

  • होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार

    होर्मुज में अमेरिकी नाकाबंदी से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल …. कच्चा तेल 120 डॉलर के पार


    तेहरान।
    ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में उथल-पुथल जारी है। अमेरिका के ईरान के खिलाफ सख्त रुख और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में जारी नौसैनिक नाकाबंदी (Naval blockade) के चलते कच्चे तेल के दाम (Crude Oil Price) लगातार बढ़ रहे हैं। गुरुवार को कीमतों में और इजाफा देखने को मिला, जबकि एक दिन पहले ही इनमें करीब 7 प्रतिशत की उछाल आई थी।


    ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के पार

    ब्लूमबर्ग के मुताबिक इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड का जून कॉन्ट्रैक्ट 120.08 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 1.74 प्रतिशत अधिक है। वहीं, न्यूयॉर्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (Nymex) पर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का जून कॉन्ट्रैक्ट 0.55 प्रतिशत चढ़कर 107.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।


    ट्रंप का बयान: ‘सूअर की तरह घुट रहे हैं ईरान’

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक इंटरव्यू में साफ किया कि जब तक ईरान के साथ परमाणु समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी नहीं हटाई जाएगी। उन्होंने कहा, “यह नाकाबंदी बमबारी से कहीं ज्यादा कारगर है। वे (ईरान) सूअर की तरह घुट रहे हैं। उनके पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते।”


    ईरान का प्रस्ताव भी खारिज

    इससे पहले ईरान ने परमाणु वार्ता को टालते हुए होर्मुज को फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन ट्रंप इससे खुश नहीं थे क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा नहीं उठाया गया था। शांति वार्ता ठप होने और नाकाबंदी जारी रहने से ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चरमरा गई है। ध्यान रहे कि होर्मुज स्ट्रेट से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार की आवाजाही होती है।

    भारत पर क्या असर पड़ रहा है?
    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में इस नाकाबंदी ने देश के लिए एलपीजी, एलएनजी और क्रूड ऑयल की सप्लाई बुरी तरह बाधित की है। महंगे कच्चे तेल का सीधा असर आम नागरिक की जेब पर भी पड़ने के आसार प्रबल होते जा रहे हैं, हालांकि पेट्रोल-डीजल के रिटेल दाम अभी स्थिर हैं।


    इक्रा की चेतावनी: इन सेक्टरों पर दबाव

    रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बुधवार को अनुमान जताया कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में कच्चे माल की कीमतों में दबाव और सप्लाई कमी के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs, फर्टीलाइजर सेक्टर, केमिकल इंडस्ट्री, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन क्षेत्र के मुनाफे पर असर पड़ेगा।


    OMCs का मुनाफा क्यों घट रहा है?

    इक्रा के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बावजूद पंप पर पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं, जिससे तेल कंपनियों की लाभप्रदता प्रभावित हुई है। हाल ही में एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बाद भी यह स्थिति बनी हुई है।


    कंपनियों को पेट्रोल-डीजल पर कितना हो रहा नुकसान

    उनके अनुसार, अगर क्रूड 120-125 डॉलर प्रति बैरल पर रहता है और लॉन्ग-टर्म औसत क्रैक स्प्रेड बना रहता है, तो पेट्रोल पर मार्केटिंग मार्जिन लगभग माइनस 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर माइनस 18 रुपये प्रति लीटर रहने का अनुमान है।


    क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी जारी रहेगी और अमेरिका-ईरान वार्ता में सफलता नहीं मिलती, तब तक तेल की कीमतों में गिरावट की संभावना कम है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है।

  • पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….

    पांच राज्यों के चुनाव के बाद भी पेट्रोल-डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं….


    नई दिल्ली।
    5 राज्यों के चुनाव के बाद आज पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel Price) के नए रेट जारी हो गए हैं। इस बीच बुरी खबर ये है कि कच्चा तेल (Crude oil) 119 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। आज 30 अप्रैल को सुबह 6 बजे सरकारी ऑयल माार्केटिंग कंपनियों (Government oil marketing companies) इंडियन ऑयल, एचपीसीएल और बीपीसीएल ने फ्यूल के रेट अपडेट कीं। आज के ताजा रेट के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। बता दें कि अप्रैल 2022 के शुरू से ही पेट्रोल और डीजल के रिटेल दाम नहीं बदले हैं।


    कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग

    ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 119 डॉलर प्रति बैरल के पार हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थीं। ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल के पार ट्रेड कर रहा है। जबकि, WTI के भाव 106 डॉलर प्रति बैरल पर हैं।


    क्या कही थी सरकार

    केंद्र सरकार ने उन अटकलों को खारिज कर दिया था कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। आज चुनाव के बाद भी तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की अफवाह

    बता दें चुनाव बाद पेट्रोल डीजल के रेट में इजाफे को लेकर सोशल मीडिया पर एक आदेश वायरल हो रहा है। इस दावा किया गया है कि आदेश पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में क्रमशः ₹10 और ₹12.50 की बढ़ोतरी की गई है।” पीआईबी फैक्ट चेक ने कहा कि भारत सरकार ने ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है।


    भारत में आज कहां मिल रहा सस्ता पेट्रोल

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹82.46 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹90.87 प्रति लीटर
    – सिलवासा, दादरा और नगर हवेली: ₹92.37 प्रति लीटर
    – दमन, दमन और दीव: ₹92.55 प्रति लीटर
    – हरिद्वार, उत्तराखंड: ₹92.78 प्रति लीटर
    – रुद्रपुर, उत्तराखंड: ₹92.94 प्रति लीटर
    – ऊना, हिमाचल प्रदेश: ₹93.27 प्रति लीटर
    – देहरादून, उत्तराखंड: ₹93.35 प्रति लीटर
    – नैनीताल, उत्तराखंड: ₹93.41 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    भारत में सस्ता डीजल बेचने वाले शहर

    – पोर्ट ब्लेयर, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह: ₹78.05 प्रति लीटर
    – ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: ₹80.38 प्रति लीटर
    – जम्मू, जम्मू और कश्मीर: ₹81.32 प्रति लीटर
    – संबा, जम्मू और कश्मीर: ₹81.58 प्रति लीटर
    – कठुआ, जम्मू और कश्मीर: ₹81.97 प्रति लीटर
    – उधमपुर, जम्मू और कश्मीर: ₹82.15 प्रति लीटर
    – चंडीगढ़: ₹82.44 प्रति लीटर
    – राजौरी, जम्मू और कश्मीर: ₹82.64 प्रति लीटर
    स्रोत: इंडियन ऑयल


    पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बेकाबू

    कच्चे तेल की कीमतों का असर से भारत के पड़ोसी देश के लोग पेट्रोल-डीजल की महंगाई की मार झेल रहे हैं। पाकिस्तान में 133.56 और चीन में 125.71 रुपये लीटर है। श्रीलंका में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 135.13 रुपये पर पहुंच गई है। नेपाल में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 137.13 रुपये तक पहुंच गई है। बंग्लादेश में भी पेट्रोल 107.78 रुपये लीटर है। जबकि, म्यांमार में 147.25 रुपये। भूटान में पेट्रोल 102.78 रुपये लीटर पर पहुंच गया है।

  • मई 2026 में बैंक छुट्टियां: 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, RBI कैलेंडर जारी

    मई 2026 में बैंक छुट्टियां: 12 दिन बंद रहेंगे बैंक, RBI कैलेंडर जारी


    नई दिल्ली| मई 2026 में बैंक से जुड़े काम करने वालों के लिए जरूरी खबर है। Reserve Bank of India की ओर से जारी छुट्टियों की लिस्ट (Banking Holidays List) के मुताबिक इस महीने कुल 12 दिन बैंक बंद रहेंगे। इसमें वीकेंड के अलावा कई बड़े त्योहार भी शामिल हैं, ऐसे में ग्राहकों को पहले से प्लानिंग करना जरूरी होगा।

    12 दिन बंद रहेंगे बैंक, वीकेंड और त्योहारों का असर
    मई महीने में कुल 12 दिन बैंक बंद रहने वाले हैं। इसमें सभी रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार की छुट्टियां शामिल हैं। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों में स्थानीय त्योहारों और आयोजनों के चलते भी बैंक बंद रहेंगे। इसलिए यह जरूरी है कि ग्राहक अपने शहर के हिसाब से छुट्टियों की लिस्ट जरूर चेक कर लें, ताकि किसी जरूरी काम में परेशानी न हो।

    बुद्ध पूर्णिमा और ईद जैसे त्योहारों पर भी रहेगी छुट्टी
    इस महीने कई अहम त्योहार पड़ रहे हैं, जिनमें Buddha Purnima और Eid al-Adha जैसे मौके शामिल हैं। इन त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहेंगे। हालांकि सभी छुट्टियां पूरे देश में लागू नहीं होतीं, कुछ छुट्टियां क्षेत्रीय होती हैं।

    जरूरी काम पहले निपटाएं, ऑनलाइन सेवाएं रहेंगी चालू
    लगातार छुट्टियों को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटा लें। कैश निकालने, चेक क्लियरेंस या ब्रांच विजिट से जुड़े काम छुट्टियों से पहले कर लेना बेहतर रहेगा।

    हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाएं इन दिनों में भी चालू रहेंगी, जिससे ग्राहकों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

  • होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट

    होर्मुज खुलने की चर्चा से कमोडिटी मार्केट में हलचल…. तेजी से गिरे सोने-चांदी के रेट


    नई दिल्‍ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold- Silver Rate) में अचानक से बड़ी गिरावट आई है. भारतीय कमोडिटी मार्केट (Indian Commodity Market) में सोने और चांदी के भाव तेजी से गिरे हैं. शाम के करोबार के दौरान चांदी करीब 7000 रुपये गिर गई. इसी तरह, 10 ग्राम सोने का फ्यूचर रेट भी गिरा है. कमोडिटी मार्केट में सोने-चांदी के भाव में यह गिरावट, ईरान-अमेरिका तनाव (Iran-America tension) और होर्मुज खोलने (Opening of Hormuz) की चर्चा के बीच आई है. ऐसे में यह संकेत दिख रहा है कि ग्‍लोबल मार्केट में कुछ तो हलचल चल रही है।

    मंगलवार की रात करीब 7.45 बजे कमोडिटी मार्केट MCX पर 3 जुलाई फ्यूचर के लिए 1 किलो चांदी की कीमत 2.40 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई थी, जो 6900 रुपये से ज्‍यादा या 3 फीसदी की गिरावट है. इसी तरह, 5 जून फ्यूचर के लिए सोने का भाव भी 1.70 फीसदी या 2500 रुपये टूटकर 1.49 लाख रुपये पर आ गया।


    अचानक क्‍यों आई ये बड़ी गिरावट?

    डॉलर में तेजी देखी गई है, जिस कारण कमोडिटी मार्केट में कीमती धातुओं के दाम गिरे हैं. रुपया डॉलर की तुलना में 94.5 के ऊपर जा पहुंचा है. इसी तरह, ब्रेंट क्रूड ऑयल में भी करीब 3 फीसदी की तेजी देखी जा रही है, जो होमुर्ज पर बढ़ते तनाव का संकेत दे रहा है. हालांकि, रिपोर्ट्स और डोनाल्‍ड ट्रंप का दावा है कि ईरान ने जंग रोकने और होर्मुज खोलने का प्रताव दिया है. यह दावा तब किया जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता अभी तक नहीं हो पाई है।

    वहीं कुछ खबरें यह भी दावा कर रही हैं कि अमेरिका और ईरान समुद्र में अपनी ताकत को बढ़ा रहे हैं, जो एक तनाव का संकेत दे रहा है. वहीं एशियाई, भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजार में व्‍यापक स्‍तर पर गिरावट दिख रही है.


    इंटरनेशनल गोल्‍ड-सिल्‍वर प्राइस

    अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर भी सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. सोना 2.30 फीसदी या 108 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4586 डॉलर पर औंस पर आ चुका है. वहीं चांदी की बात करें तो 3.20 फीसदी या 2.5 डॉलर टूटकर 72.6 डॉलर पर औंस पर आ चुका है।


    रिकॉर्ड हाई से कितना सस्‍ता हुआ गोल्‍ड-सिल्‍वर?

    एमसीएक्‍स के मुताबिक, गोल्‍ड का रिकॉर्ड हाई लेवल 2.02 लाख रुपये है, जो अब 53 हजार रुपये गिरकर 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ चुका है. इसी तरह, चांदी का लाइफटाइम हाई लेवल 4.57 लाख रुपये है, जो अब 2.07 लाख रुपये सस्‍ती होकर 2.40 लाख रुपये पर आ चुकी है।

  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान


    नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही।

    डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मर

    शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारी

    बाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।
    निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला।

    वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असर

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे।

    अमेरिकी बाजारों में कमजोरी

    इसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले।

    कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।

  • सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता

    सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता


    नई दिल्ली | अमेरिकी फेड के अहम फैसले से पहले बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई। 5 जून 2026 का सोना कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,027 रुपये के मुकाबले 693 रुपये यानी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,50,720 रुपये पर खुला।

    हालांकि शुरुआती तेजी के बाद इसमें हल्का दबाव भी देखने को मिला। सुबह 9:55 बजे तक सोना 19 रुपये यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,50,008 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिनभर के कारोबार में सोने ने 1,49,720 रुपये का निचला स्तर और 1,51,527 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड की बजाय इंतजार की स्थिति में है।

    चांदी में भी सीमित तेजी, निवेशकों की नजर फेड के फैसले पर

    चांदी ने भी बुधवार को हल्की मजबूती दिखाई। 3 जुलाई 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,42,763 रुपये के मुकाबले 826 रुपये यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,43,589 रुपये पर खुला।
     दिन के दौरान चांदी 712 रुपये यानी 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,43,475 रुपये पर कारोबार करती रही। इस दौरान इसका न्यूनतम स्तर 2,42,972 रुपये और अधिकतम स्तर 2,43,835 रुपये दर्ज किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का रुख

    वैश्विक बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। सोना 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,616 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.81 प्रतिशत की तेजी के साथ 73.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    फेड का फैसला बना सबसे बड़ा फैक्टर

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की नजर अब पूरी तरह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले पर टिकी है, जो देर रात आने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय पर आ रहा है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है या भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत देता है, तो इसका असर सोने की कीमतों पर नकारात्मक पड़ सकता है और इसमें दबाव बढ़ सकता है।

    एक साल में शानदार रिटर्न, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी ने पिछले एक साल में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। डॉलर में सोना लगभग 40 प्रतिशत तक चढ़ा है, जबकि चांदी ने करीब 120 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दर्ज किया है। इसी वजह से इनकी मांग और निवेश रुचि लगातार बनी हुई है।

    फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही फेड के फैसले से पहले ‘वेट एंड वॉच’ मोड में हैं। आने वाले समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीति ही इनकी दिशा तय करेगी—तेजी या दबाव, दोनों की संभावनाएं खुली हुई हैं।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 358 अंक उछला, निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली | हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही खरीदारी का दबाव देखने को मिला, जिससे पूरा बाजार सकारात्मक रुख में आ गया।

    BSE Sensex में आज करीब 358 अंकों की तेजी देखने को मिली और यह मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं Nifty 50 भी 101 अंकों की बढ़त के साथ हरे निशान में रहा। इस तेजी ने निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ाया और बाजार में उत्साह का माहौल बना रहा।

    बाजार में खरीदारी का दबदबा

    सुबह से ही बाजार में बैंकिंग, आईटी और एनर्जी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, जिससे इंडेक्स को सपोर्ट मिला। कई लार्जकैप शेयरों में भी अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिससे पूरे बाजार का मूड सकारात्मक रहा।

     वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर

    वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और तेल बाजार में हलचल ने निवेशकों को सतर्क रखा। इसके बावजूद घरेलू बाजार ने मजबूती दिखाई।

    अमेरिकी बाजारों में हाल की गिरावट जहां Nasdaq Composite और Dow Jones Industrial Average में कमजोरी देखने को मिली उसका भी हल्का असर एशियाई बाजारों पर पड़ा, लेकिन भारत में इसका प्रभाव सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों का रुख

    एशिया के अन्य बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ इंडेक्स में हल्की बढ़त रही, जबकि कुछ में गिरावट दर्ज की गई। जापान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे।

    निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तेजी सकारात्मक संकेत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।