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  • पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव

    पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव


    नई दिल्ली |  देशभर में आज 29 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन कुछ शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और आम लोगों दोनों की नजर बाजार पर बनी हुई है।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कहां कितना रेट?
    तेल कंपनियां हर रोज सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। आज भी कई शहरों में कीमतें स्थिर हैं, लेकिन राज्यों के हिसाब से फर्क देखने को मिल रहा है।

    दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80 | डीजल ₹92.39
    कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02
    बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹90.99
    अमरावती: पेट्रोल ₹110.10 | डीजल ₹97.92
    जयपुर: पेट्रोल ₹104.88 | डीजल ₹90.36
    लखनऊ: पेट्रोल ₹94.65 | डीजल ₹87.76

    क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगी कीमतें?
    सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कंपनियों के नुकसान को देखते हुए भविष्य में बढ़ोतरी की अटकलें बनी हुई हैं।

    सोने की कीमत में गिरावट
    देश में सोने के भाव में गिरावट आई है। 18 से लेकर 24 कैरेट तक सभी कैटेगरी में कीमतें नीचे आई हैं।

    दिल्ली: 24 कैरेट: ₹1,51,070 प्रति 10 ग्राम
    22 कैरेट: ₹1,38,490 प्रति 10 ग्राम
    मुंबई/कोलकाता: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340
    चेन्नई: 24 कैरेट: ₹1,53,810
    22 कैरेट: ₹1,40,990
    बेंगलुरु/पुणे: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340

    क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मजबूत डॉलर के कारण सोने-चांदी पर दबाव बना है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग घटती है।

    चांदी भी हुई सस्ती
    चांदी की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है आज का भाव: ₹2,59,900 प्रति किलोग्राम, अंतरराष्ट्रीय बाजार: $73.18 प्रति औंस, एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, वहीं सोना और चांदी सस्ते हुए हैं। ऐसे में निवेश करने वालों के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है, जबकि आम लोगों को ईंधन की कीमतों में राहत बनी हुई है।

  • 8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    नई दिल्ली| देशभर में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब कर्मचारी सैलरी में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। शिक्षक, पोस्टमैन समेत कई वर्गों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, ऐसे में सरकार को वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

    कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की है। फिटमेंट फैक्टर वह अहम फॉर्मूला होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, लेकिन अब कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.5 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    सैलरी तय करने का गणित केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं होता। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे कई भत्ते भी जुड़े होते हैं, जो कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। महंगाई भत्ता खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों के असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, DA में भी वृद्धि की जाती है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलती है।

    इसके अलावा, पे मैट्रिक्स सिस्टम के तहत हर कर्मचारी का एक लेवल तय होता है। इसी लेवल के आधार पर उसकी बेसिक सैलरी और प्रमोशन के बाद होने वाली बढ़ोतरी निर्धारित होती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार वेतन तय करते समय परिवार के वास्तविक खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सैलरी मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप हो।

    8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मांगों को माना गया, तो खासकर निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, लाखों कर्मचारियों की नजर इस पर टिकी है कि सरकार उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    ग्लोबल टेंशन से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद..

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को निवेशकों के लिए दिन कमजोर साबित हुआ। बाजार खुलने से लेकर बंद होने तक दबाव बना रहा और अंत में प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर की ट्रेडिंग में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लाल निशान में आ गए।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स में करीब 416 अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी भी नीचे फिसल गया। शुरुआती कारोबार में ही बाजार की कमजोरी के संकेत मिल गए थे, जो पूरे दिन जारी रहे। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए सतर्क रुख अपनाया, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों के चलते निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई है। विशेष रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है। तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास पहुंचने से उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ता है।

    तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण निवेशकों ने शेयरों में खरीदारी कम कर दी और बिकवाली का रुख अपनाया।

    सेक्टरवार बात करें तो बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। कई बड़े शेयरों में गिरावट के कारण पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा। हालांकि कुछ एनर्जी और मेटल शेयरों में हल्की खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन वह बाजार को संभाल नहीं सकी।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में शुरुआत में स्थिरता दिखी, लेकिन बाद में ये भी दबाव में आ गए। इससे यह साफ हुआ कि केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि व्यापक बाजार भी वैश्विक संकेतों से प्रभावित हुआ है।

    एशियाई बाजारों में भी आज मिश्रित रुख रहा, जहां कुछ बाजारों में गिरावट देखने को मिली और कुछ में हल्की मजबूती रही। वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के कारण निवेशक फिलहाल सतर्कता बरत रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को सोच-समझकर और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही फैसले लेने की सलाह दी जा रही है।

  • फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    फिनटेक सेक्टर में नया ट्रेंड: शुरुआती कंपनियों में गिरावट, बड़े सौदों पर बढ़ा निवेश

    नई दिल्ली।भारत के फिनटेक सेक्टर की कहानी इस साल की पहली तिमाही में एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंची है। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में इस सेक्टर में करीब 513 मिलियन डॉलर की फंडिंग दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में हल्की बढ़त दिखाती है। हालांकि यह बढ़ोतरी सिर्फ 2 प्रतिशत की रही, लेकिन असली बदलाव फंडिंग के तरीके में देखने को मिला।

    पहले जहां दर्जनों छोटे-बड़े निवेश राउंड होते थे, वहीं अब तस्वीर बदल गई है। इस बार कुल 99 की जगह सिर्फ 45 फंडिंग डील्स हुईं। यानी निवेशक अब कम सौदों में ज्यादा पैसा लगाने की रणनीति अपना रहे हैं। औसतन निवेश राशि भी पहले से काफी बढ़ गई है, जिससे साफ है कि ध्यान अब मजबूत और स्थापित कंपनियों पर ज्यादा है।

    इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण लेट-स्टेज कंपनियां हैं, जहां निवेश 273 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया—जो पिछली तिमाही से दोगुने से भी ज्यादा है। इसके उलट शुरुआती स्टार्टअप्स को मिलने वाली फंडिंग में गिरावट आई है, जो यह दिखाती है कि जोखिम लेने की बजाय अब निवेशक सुरक्षित विकल्प चुन रहे हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि पूरे निवेश का बड़ा हिस्सा सिर्फ एक ही क्षेत्र—ऑनलाइन लेंडिंग—को मिला, जो लगभग 60 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसका मतलब है कि ऐसे मॉडल ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं जिनकी कमाई पहले से साबित हो चुकी है और जिनमें स्थिरता दिखती है।

    अगर भौगोलिक बदलाव की बात करें तो इस बार मुंबई ने बड़ा उछाल दिखाया है। कुल फंडिंग का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा मुंबई की कंपनियों को मिला, जबकि बेंगलुरु का हिस्सा घटकर करीब 30 प्रतिशत रह गया। पहले तस्वीर इसके उलट थी, जहां बेंगलुरु आगे रहता था।

    इस बदलाव की एक बड़ी वजह यह भी मानी जा रही है कि मुंबई में बैंकिंग, एनबीएफसी और बीमा कंपनियों का मजबूत नेटवर्क मौजूद है, जिससे फिनटेक कंपनियों को तेजी से स्केल करने में मदद मिल रही है।

  • यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    यात्रियों के लिए नई राहत: अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई ट्रेनें शुरू, उत्तर से महाराष्ट्र तक सीधी कनेक्टिविटी

    नई दिल्ली। भारतीय रेल ने यात्रियों को बड़ी सुविधा देते हुए अमृत भारत एक्सप्रेस की दो नई सेवाओं की शुरुआत की है, जो उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा को अधिक आसान और किफायती बनाएंगी। नई ट्रेन सेवाएं अयोध्या से मुंबई और वाराणसी से पुणे के बीच चलाई जा रही हैं, जिससे लाखों यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

    इन ट्रेनों के शुरू होने से लंबे समय से प्रतीक्षित सीधी कनेक्टिविटी अब साकार हो गई है। विशेष रूप से वाराणसी से पुणे तक चलने वाली ट्रेन उत्तर भारत और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरेगी। यह ट्रेन अपने मार्ग में कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर ठहराव करेगी, जिससे विभिन्न शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।

    इसी तरह अयोध्या से मुंबई के बीच शुरू की गई ट्रेन धार्मिक और व्यावसायिक दोनों दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। यह सेवा राम मंदिर अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को सरल बनाएगी, वहीं मुंबई जैसे बड़े महानगर तक सीधी पहुंच भी उपलब्ध कराएगी।

    नई सेवाओं के संचालन के साथ रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग, तीर्थ स्थलों की लोकप्रियता और राज्यों के बीच बढ़ते आवागमन को ध्यान में रखा है। इन ट्रेनों के रूट ऐसे चुने गए हैं, जो प्रमुख शहरों और महत्वपूर्ण जंक्शनों को जोड़ते हैं, जिससे यात्रा समय और लागत दोनों में कमी आएगी।

    इस पहल का असर केवल यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्रों के लिए यह कनेक्टिविटी नई संभावनाएं लेकर आएगी। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

  • पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन

    पीयूष गोयल ने EPC प्रमुखों संग की बैठक, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक अवसरों पर किया मंथन


    नई दिल्ली| भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने सोमवार को विभिन्न निर्यात संवर्धन परिषदों (EPCs) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में निर्यात को मजबूत बनाने और वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

    मंत्री Piyush Goyal ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में क्षेत्र-विशेष प्राथमिकताओं पर चर्चा की गई और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधियों की रचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी सुनी गईं।

    बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि हाल ही में भारत द्वारा किए गए विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) देश के निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं। इन समझौतों का अधिकतम लाभ उठाकर भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने पर फोकस किया गया।

    मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार निर्यातकों को मजबूत बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने के लिए लगातार नीतिगत सहयोग प्रदान कर रही है।

    इससे पहले, Piyush Goyal ने भारत-न्यूजीलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत का बड़ा बाजार, कुशल कार्यबल, डिजिटल क्षमता और विनिर्माण शक्ति न्यूजीलैंड की कृषि-तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और फिनटेक विशेषज्ञता के साथ मिलकर नए अवसर पैदा कर सकती है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौता (FTA) को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में व्यापार को 5 अरब डॉलर तक बढ़ाने का है, जिससे द्विपक्षीय आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत स्थिति में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली

    कच्चे तेल की तेजी से शेयर बाजार दबाव में, बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली


    नई दिल्ली| कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कमजोरी के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिसका असर सीधे प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया।

    सुबह 9:17 बजे तक सेंसेक्स करीब 203 अंक गिरकर 77,099 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी लगभग 50 अंक टूटकर 24,042 पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव को माना जा रहा है।

    सेक्टोरल फ्रंट पर बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। Nifty Bank Index में आधा प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, हेल्थकेयर और सर्विस सेक्टर भी लाल निशान में रहे।

    हालांकि कुछ सेक्टरों में मजबूती भी देखी गई। एनर्जी, मेटल, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में खरीदारी का रुझान बना रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए हरे निशान में कारोबार किया, जिससे व्यापक बाजार में कुछ संतुलन देखने को मिला।

    एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख रहा। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार कमजोर रहे, जबकि बैंकॉक और सोल में हल्की तेजी देखी गई। वहीं अमेरिकी बाजारों में सोमवार को डाओ जोन्स में गिरावट और नैस्डैक में हल्की तेजी दर्ज की गई।

    बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 109 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का परिणाम है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता के कारण। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के शांति प्रस्ताव पर अमेरिका की असहमति ने भी बाजारों में अस्थिरता बढ़ाई है, जिससे ऊर्जा कीमतों में तेजी आई है।

    जब तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में स्थिरता नहीं आती, तब तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव

    अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी में गिरावट, शुरुआती कारोबार में दबाव


    नई दिल्ली| अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच मंगलवार को सोने और चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में दोनों कीमती धातुएं करीब आधा प्रतिशत तक कमजोर होकर खुलीं, जिससे निवेशकों में हल्का दबाव देखा गया।
    घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का 05 जून 2026 कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,51,721 रुपये के मुकाबले 1,51,700 रुपये पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 1,51,514 रुपये तक गिरा, जबकि 1,51,802 रुपये का उच्चतम स्तर भी छुआ।
    चांदी में भी गिरावट देखने को मिली। 05 मई 2026 का कॉन्ट्रैक्ट 2,41,824 रुपये की पिछली क्लोजिंग के मुकाबले 2,40,490 रुपये पर खुला और 2,40,400 रुपये के स्तर तक फिसल गया।
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना 0.27 प्रतिशत गिरकर लगभग 4,680 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी।
    हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में सोना और चांदी ने मजबूत रिटर्न दिया है। पिछले एक साल में डॉलर में सोना 40 प्रतिशत से अधिक और चांदी 126 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी है, जिससे यह साफ है कि दोनों धातुएं अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्प बनी हुई हैं।
    बाजार में यह हलचल ऐसे समय पर देखी जा रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। दोनों देशों के बीच शांति वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के शांति प्रस्ताव को फिलहाल स्वीकार नहीं किया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।
    विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव स्पष्ट दिशा नहीं लेता, तब तक सोना-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना

    भारत-न्यूजीलैंड एफटीए को लेकर बड़ा बयान: पीएम मोदी के नेतृत्व की टॉड मैक्ले ने की सराहना


    नई दिल्ली| भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री Todd McClay ने कहा है कि इस समझौते को रिकॉर्ड नौ महीनों में पूरा करने में प्रधानमंत्री Narendra Modi और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस लक्सन के मजबूत नेतृत्व की अहम भूमिका रही है।

    उन्होंने कहा कि दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच विकसित हुए मजबूत और मैत्रीपूर्ण संबंधों ने बातचीत की प्रक्रिया को बेहद तेज और प्रभावी बनाया। पिछले वर्ष न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री द्वारा भारत का दौरा एक ऐतिहासिक कदम था, जिसमें अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल था।

    Todd McClay ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नेतृत्व क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ मुलाकात करना उनके लिए सम्मान की बात रही। उन्होंने यह भी कहा कि अब सरकारों का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब व्यापारिक समुदाय को इस समझौते का लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लगातार बढ़ाए जाएंगे ताकि आर्थिक सहयोग को नई गति मिल सके। साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड में निवेश और व्यापार के अवसर तलाशने के लिए आमंत्रित किया गया है।

    Todd McClay ने यह भी कहा कि भारत और न्यूजीलैंड दुनिया के दो मजबूत लोकतंत्र हैंभारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जबकि न्यूजीलैंड सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक माना जाता है।

    बातचीत के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच क्रिकेट संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि इस वर्ष भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल सहयोग के 70 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने हल्के अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी को न्यूजीलैंड आने और अपनी क्रिकेट टीम साथ लाने का आमंत्रण भी दिया।

  • लीबिया में तेल-गैस खोज से बढ़ी भारत की वैश्विक ऊर्जा ताकत, केंद्र ने बताया बड़ा कदम

    लीबिया में तेल-गैस खोज से बढ़ी भारत की वैश्विक ऊर्जा ताकत, केंद्र ने बताया बड़ा कदम


    नई दिल्ली| भारत की ऊर्जा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि लीबिया में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा की गई तेल और गैस की खोज देश की बढ़ती वैश्विक ऊर्जा उपस्थिति का संकेत है।

    सरकार के अनुसार, Oil India Limited और Indian Oil Corporation Limited ने स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर लीबिया के घदामेस बेसिन में यह खोज की है। यह कार्य अल्जीरिया की एसआईपीईएक्स के साथ एक भारतीय कंसोर्टियम के तहत किया गया।

    यह खोज कॉन्ट्रैक्ट एरिया 95/96 में हुई, जहां कुओं की खुदाई लगभग 8,440 फीट गहराई तक की गई। परीक्षण के दौरान इस कुएं से प्रतिदिन करीब 13 मिलियन क्यूबिक फीट गैस और 327 बैरल कंडेनसेट उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे एक सकारात्मक और व्यावसायिक रूप से उपयोगी संकेत माना जा रहा है।

    केंद्र सरकार ने इस उपलब्धि पर दोनों कंपनियों को बधाई देते हुए कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट होता है कि भारतीय तेल कंपनियां अब घरेलू बाजार से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

    सरकार ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए ऊर्जा संपत्तियों में निवेश और खोज से भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।

    इसी बीच सरकार ने यह भी दोहराया कि देश में कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाकर 2030 तक 29 मिलियन टन से 35 मिलियन मीट्रिक टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने और नई नीतियों के तहत तेजी से खोज एवं विकास कार्य किए जा रहे हैं।

    बाजार में भी इस खबर का असर देखा गया, जहां Oil India Limited के शेयर में मजबूती दर्ज की गई, जबकि Indian Oil Corporation Limited में मामूली गिरावट देखने को मिली।

    कुल मिलाकर यह खोज भारत की ऊर्जा रणनीति और वैश्विक विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है।