Category: Economy

  • जल जीवन मिशन का विस्तार, केंद्र ने 8.69 लाख करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया

    जल जीवन मिशन का विस्तार, केंद्र ने 8.69 लाख करोड़ रुपए का बजट मंजूर किया


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन (JJM) को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसके स्वरूप में बदलाव करने का प्रस्ताव मंजूर किया। अब यह मिशन केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर तक साफ़ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने पर जोर देगा। सरकार ने इस योजना का कुल बजट बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपए कर दिया है, जिसमें केंद्र की हिस्सेदारी 3.59 लाख करोड़ रुपए होगी, जो 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपए से 1.51 लाख करोड़ अधिक है।

    डिजिटल मैपिंग और ग्राम स्तर पर जवाबदेही
    जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राष्ट्रीय डिजिटल फ्रेमवर्क ‘सुजलम भारत’ लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत हर गांव को एक यूनिक ‘सुजल गांव’ या सर्विस एरिया आईडी दी जाएगी, जिससे पानी के स्रोत से लेकर घर तक की पूरी आपूर्ति प्रणाली को डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा। ग्राम पंचायत (जीपी) और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (VWSC) को योजना के क्रियान्वयन और औपचारिक हस्तांतरण में शामिल किया जाएगा, जिसे ‘जल अर्पण’ प्रक्रिया कहा गया है। किसी भी ग्राम पंचायत को ‘हर घर जल’ घोषित करने से पहले यह प्रमाणित करना होगा कि गांव में पानी की आपूर्ति, संचालन और रखरखाव की पर्याप्त व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा की गई है।

    सरकार की योजना है कि हर साल ‘जल उत्सव’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें गांव के लोग मिलकर जल व्यवस्था की समीक्षा और रखरखाव करेंगे। यह समुदाय की भागीदारी और स्वामित्व सुनिश्चित करने का अहम हिस्सा है।

    मिशन के असर और सामाजिक लाभ
    साल 2019 में मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों (करीब 17%) में नल से पानी की सुविधा थी। अब तक 12.56 करोड़ नए ग्रामीण घरों को नल का पानी उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में देश के 19.36 करोड़ ग्रामीण घरों में लगभग 15.80 करोड़ घरों (81.61%) में नल से जल कनेक्शन पहुंच चुका है।

    सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहा। एसबीआई रिसर्च के अनुसार, योजना के कारण लगभग 9 करोड़ महिलाओं को रोज पानी लाने की मेहनत से राहत मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के मुताबिक, इससे महिलाओं के रोजाना श्रम में लगभग 5.5 करोड़ घंटे की बचत हो रही है, और डायरिया से होने वाली लगभग 4 लाख मौतों को रोका जा सकता है। नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर माइकल क्रेमर के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में लगभग 30% तक कमी संभव है, जिससे हर साल करीब 1.36 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकेगी।

    आईआईएम बेंगलुरु और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अध्ययन के अनुसार, मिशन के जरिए 59.9 लाख प्रत्यक्ष और 2.2 करोड़ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

    सरकार का लक्ष्य है कि जल जीवन मिशन 2.0 के तहत दिसंबर 2028 तक देश के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को नल का पानी उपलब्ध कराया जाए और सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाए। इसे नागरिक-केंद्रित सेवा मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चौबीसों घंटे सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो।

    साथ ही केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर ग्रामीण जल आपूर्ति ढांचे के दीर्घकालिक संचालन, रखरखाव और जल स्रोत संरक्षण के लिए समन्वित रणनीति भी लागू करेगी।

  • सरकार का बड़ा फैसला, रेलवे विकास के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी

    सरकार का बड़ा फैसला, रेलवे विकास के लिए 765 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को हरी झंडी


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक को आधुनिक बनाने और संचालन को सुचारू बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 765 करोड़ रुपए की कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य लाइन क्षमता बढ़ाना, माल और यात्री ट्रेनों की गति में सुधार करना और नेटवर्क के महत्वपूर्ण हिस्सों में आधुनिक संचार प्रणाली विकसित करना है। इनमें दो व्यस्त कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम का अपग्रेड और वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा एवं मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का विस्तार शामिल है।
     केंद्र सरकार ने रेलवे संचालन, मालगाड़ी क्षमता, यात्री ट्रेनों की रफ्तार और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए 765 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी। इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से भारतीय रेलवे का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक और भरोसेमंद होगा।

    विशेष रूप से, ईस्ट कोस्ट रेलवे के दुव्वाडा-विशाखापत्तनम- विजयनगरम सेक्शन में 106 किलोमीटर लंबे रूट पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 318.07 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। मौजूदा 1×25 केवी सिस्टम को 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा, जिससे मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों की रफ्तार में सुधार होगा और संचालन अधिक भरोसेमंद बनेगा। रेल मंत्रालय ने बताया कि यह परियोजना रेलवे बजट 2024-25 में शामिल राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पूरे भारत में ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाना है।

    तकनीकी उन्नयन और सुरक्षा सुधार में बड़ा कदम
    साउथ सेंट्रल रेलवे के गुंटकल डिवीजन के अंतर्गत कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में स्थित रायचूर–गुंटकल सेक्शन में भी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए 259.39 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। इस रूट को भी 1×25 केवी से 2×25 केवी सिस्टम में अपग्रेड किया जाएगा। यह मुंबई–चेन्नई कॉरिडोर का हिस्सा है और इसके सुधार से मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होगी, यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन में भी मदद मिलेगी।

    इसी के साथ, वेस्टर्न रेलवे के वडोदरा और मुंबई सेंट्रल डिवीजनों में 187.88 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत 4×48 कोर ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क स्थापित किया जाएगा। लगभग 1,000 किलोमीटर क्षेत्र में बिछाई जाने वाली इस फाइबर केबल से एलटीई आधारित ‘कवच’ प्रणाली लागू करने में मदद मिलेगी। यह भारत में विकसित स्वदेशी ट्रेन टक्कर रोकने वाली सुरक्षा प्रणाली है, जो रेलवे नेटवर्क पर सुरक्षा और संचालन दोनों में सुधार करेगी।

    सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से न केवल माल और यात्री ट्रेनों की गति बढ़ेगी, बल्कि रेलवे संचालन अधिक भरोसेमंद और सुरक्षित बन जाएगा। आधुनिक संचार नेटवर्क और उन्नत ट्रैक्शन सिस्टम के माध्यम से भारत की रेलवे संरचना को भविष्य के लिए और मजबूत बनाया जा रहा है।

  • नोटों की चिंता खत्म! सरकार का दावा, 10, 20 और 50 रुपए के नोट उपलब्ध हैं पर्याप्त

    नोटों की चिंता खत्म! सरकार का दावा, 10, 20 और 50 रुपए के नोट उपलब्ध हैं पर्याप्त


    नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि देश में 10, 20 और 50 रुपए के नोटों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार कम मूल्य के नोट परंपरागत रूप से एटीएम के माध्यम से नहीं दिए जाते रहे हैं। मंत्री ने सदन को यह भी बताया कि कम मूल्यवर्ग के नोटों को जनता तक पहुंचाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है, जिसके तहत छोटे मूल्य के नोट वितरकों के माध्यम से नोट वितरित किए जा रहे हैं।

    सरकार के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (26 फरवरी तक) में 10 रुपए के 439.40 करोड़, 20 रुपए के 193.70 करोड़ और 50 रुपए के 130.30 करोड़ नोट केंद्रीय बैंक द्वारा आपूर्ति किए गए। तुलना में पिछले वित्त वर्ष 2025 में 10 रुपए के 180 करोड़, 20 रुपए के 150 करोड़ और 50 रुपए के 300 करोड़ नोट वितरित किए गए थे। यह स्पष्ट करता है कि कम मूल्य के नोट लगातार आम जनता और व्यापारिक लेनदेन की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं।

    आरबीआई की भूमिका और डिजिटल भुगतान का बढ़ता महत्व
    भारतीय रिज़र्व बैंक लगातार विभिन्न मूल्यवर्ग के नोटों की आवश्यकता का आकलन करता है और सरकार को नोटों के मिश्रण की सलाह देता है। मंत्री ने बताया कि कम मूल्यवर्ग के नोटों की मांग को नोटों और सिक्कों के मिश्रण से पूरा किया जाता है। इसके अलावा, डिजिटल भुगतान का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 (31 दिसंबर, 2025 तक) में एनपीसीआई की रिपोर्ट के अनुसार, रुपे केसीसी कार्ड के माध्यम से कुल 3.72 लाख डिजिटल लेन-देन हुए, जिनका मूल्य 111.17 करोड़ रुपए था।

    केंद्र सरकार के अनुसार, केसीसी कार्ड के तहत सभी पात्र किसानों को ऋण सीमा उनकी फसलों, खेती योग्य क्षेत्र और वित्तपोषण आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाती है। डिजिटल माध्यम के जरिए छोटे मूल्य के लेन-देन भी सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हो रही है। पंकज चौधरी ने सदन में स्पष्ट किया कि नोटों की पर्याप्त आपूर्ति और डिजिटल भुगतान दोनों ही मिलकर देश में लेन-देन की निरंतरता और पारदर्शिता बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

  • भोपाल में कमर्शियल गैस संकट: 2000 होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित, घरेलू सिलेंडर अब 25 दिन में एक बार ही बुक होंगे

    भोपाल में कमर्शियल गैस संकट: 2000 होटल-रेस्टोरेंट प्रभावित, घरेलू सिलेंडर अब 25 दिन में एक बार ही बुक होंगे



    भोपाल। मध्य प्रदेश में ईरान-इजराइल युद्ध के असर के चलते एलपीजी सप्लाई संकट गहराने लगा है। मंगलवार को भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने तीनों तेल कंपनियों, फूड अफसर और गैस एजेंसियों के साथ मीटिंग बुलाई, जिसमें कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोकने के बाद शहर के 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में संकट की गंभीर स्थिति सामने आई।

    जानकारी के अनुसार, सोमवार से ऑयल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडरों की डिलीवरी रोक दी है। इससे बड़े और छोटे होटल, रेस्टोरेंट और बार में भोजन बनाने और शादियों के आयोजन में परेशानी बढ़ गई है। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसीआई) के अध्यक्ष गोविंद गोयल और मंत्री अजय देवनानी ने कलेक्टर से अपील की कि कमर्शियल सिलेंडर की आपूर्ति तुरंत बहाल की जाए, अन्यथा मार्च में होने वाली हजारों शादियों में खाना बनाने में दिक्कतें आएंगी।

    इधर, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग नियमों में बदलाव किया गया है। पहले 15 दिन में बुकिंग होती थी, अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही मिलेगा। इसके अलावा, बुकिंग केवल उसी रजिस्टर्ड नंबर पर ही OTP के जरिए हो पाएगी।

    मध्यप्रदेश में कुल सवा करोड़ से ज्यादा एलपीजी उपभोक्ता हैं। राजधानी भोपाल में प्रतिदिन लगभग 15 हजार सिलेंडर सप्लाई होते हैं, वहीं इंदौर में 25 हजार, जबलपुर में 20-25 हजार और ग्वालियर में 20 हजार सिलेंडर रोजाना वितरित किए जाते हैं। छोटे जिलों में भी 2 हजार सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई होते हैं।

    केंद्र सरकार ने गैस की सप्लाई और जमाखोरी रोकने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’ लागू किया है और एलपीजी को चार कैटेगरी में बांटा गया है:

    पूरी सप्लाई: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG।

    खाद कारखाने: फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध।

    बड़े उद्योग: आवश्यकतानुसार लगभग 80% गैस।

    छोटे बिजनेस और होटल: पुरानी खपत के हिसाब से 80% गैस।

    सरकार ने संकट से निपटने के लिए पांच अहम कदम उठाए हैं: हाई-लेवल कमेटी गठन, आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू, घरेलू सिलेंडर बुकिंग में बदलाव, OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य, तथा एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश।

    सप्लाई संकट के दो प्रमुख कारण हैं: पहला, फारस की खाड़ी और अरब सागर को जोड़ने वाले 167 किलोमीटर लंबे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना, जिससे भारत की 50% कच्चा तेल और 54% LNG सप्लाई प्रभावित हुई। दूसरा, कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमले के बाद उत्पादन रोक दिया गया। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का करीब 40% कतर से आयात करता है।

    इंडियन ऑयल के मुख्य महाप्रबंधक (LPG) के.एम. ठाकुर ने उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग से बचने की सलाह दी और बताया कि सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्प तलाश रही है। वहीं, G7 देश और रूस-अल्जीरिया से अतिरिक्त कच्चा तेल आने की उम्मीद है।

    साथ ही सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹60 की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर अब ₹913 में मिलेगा, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹1883 हो गए हैं।

    मध्यप्रदेश के होटल-रेस्टोरेंट संचालक और छोटे व्यवसायों में तनाव बढ़ गया है, क्योंकि कमर्शियल गैस की सप्लाई रोकने से खाना बनाने और व्यापार चलाने में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं। सरकार की हाई-लेवल कमेटी और आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू होने के बाद ही हालात में सुधार की उम्मीद है।

  • बाजार की पाठशाला: सिबिल स्कोर खराब होने पर लोन में हो रही दिक्कत? जानें आसान उपाय

    बाजार की पाठशाला: सिबिल स्कोर खराब होने पर लोन में हो रही दिक्कत? जानें आसान उपाय


    नई दिल्ली। सिबिल (CIBIL) स्कोर एक तीन अंकों का नंबर होता है, जो 300 से 900 के बीच रहता है। यह बताता है कि आपने अपने पिछले लोन और क्रेडिट कार्ड बिलों का भुगतान कितनी जिम्मेदारी से किया। आम तौर पर:

    750 से 900 -उत्कृष्ट, लोन आसानी से मिलता है

    650 से 750 -अच्छा, मामूली परेशानी हो सकती है

    300 से 600 – खराब, लोन मुश्किल

    खराब स्कोर होने पर लोन मिलने में दिक्कत, ज्यादा ब्याज और कम क्रेडिट लिमिट जैसी समस्याएं आती हैं। होम लोन, कार लोन या प्रीमियम क्रेडिट कार्ड मिलना भी मुश्किल हो सकता है।

    स्कोर सुधारने के आसान तरीके
    1. समय पर भुगतान करें
    सबसे महत्वपूर्ण है ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिल का समय पर भुगतान।

    एक दिन की देरी भी स्कोर को नुकसान पहुंचा सकती है।

    ऑटो-पे सुविधा सेट करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

    2. क्रेडिट उपयोग अनुपात (CUR) कम रखें
    कुल क्रेडिट सीमा का 30% से अधिक उपयोग न करें।

    उदाहरण: क्रेडिट लिमिट 1 लाख है, तो 30 हजार से ज्यादा खर्च न करें।

    3. बार-बार आवेदन न करें
    हर नए लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन पर बैंक आपकी रिपोर्ट चेक करता है (हार्ड इन्क्वायरी) और इससे स्कोर कम हो सकता है।

    4. पुराने अकाउंट बंद न करें
    पुराना क्रेडिट इतिहास आपके स्कोर को बेहतर बनाता है। पुराने क्रेडिट कार्ड या लोन अकाउंट को सक्रिय रखना फायदेमंद होता है।

    5. अपनी रिपोर्ट समय-समय पर चेक करें
    गलत जानकारी पाएँ? जैसे भुगतान के बाद भी बकाया दिखना।

    CIBIL की डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन प्रक्रिया के जरिए सुधार करवाएं।

    खास सुझाव: सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
    यदि स्कोर बहुत कम है और कोई बैंक कार्ड नहीं दे रहा:

    फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लें।

    इसे जिम्मेदारी से उपयोग और समय पर भुगतान करें।

    इससे धीरे-धीरे आपका स्कोर सुधारता है और लोन और अन्य वित्तीय फैसले आसान होते हैं।

    सिबिल स्कोर केवल एक नंबर नहीं, बल्कि आपकी वित्तीय साख और भविष्य के वित्तीय फैसलों का आधार है। समय पर भुगतान, सही क्रेडिट उपयोग और रिपोर्ट की नियमित जांच से आप आसानी से इसे सुधार सकते हैं। 700+ का स्कोर आपके लिए लोन, क्रेडिट कार्ड और निवेश के दरवाजे खोलता है।

  • मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, सरकार ने की निगरानी बढ़ाने की घोषणा

    मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य, सरकार ने की निगरानी बढ़ाने की घोषणा


    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की स्थिति को लेकर स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है। मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप और पेट्रोलियम मंत्री डॉ. मोहन यादव ने सप्लाई की लगातार निगरानी के निर्देश दिए।

    मंत्री का बयान: आपूर्ति सामान्य, कोई परेशानी नहीं
    मंत्री काश्यप ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता है। घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी लगातार हो रही है और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार अस्थायी रोक लगी है। यह निर्णय खाड़ी देशों में जारी युद्ध जैसी परिस्थितियों को देखते हुए लागू किया गया है।

    डीलर एसोसिएशन की चेतावनी: सोशल मीडिया से पैनिक फैल सकता है
    भोपाल पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि फिलहाल सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है। ऑर्डर देने पर नियमित आपूर्ति मिल रही है।

    हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाकर लोगों में पैनिक की स्थिति बनाई जा सकती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस पर सख्त निगरानी रखने की अपील की।

    प्रदेश में खपत और स्टॉक की स्थिति
    अजय सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश में सालाना पेट्रोल की खपत 1200 मीट्रिक लीटर और डीजल की खपत 1600 मीट्रिक लीटर के करीब है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल को स्टॉक करना संभव है, लेकिन घरेलू रसोई गैस के लिए यह कठिन है। इसलिए गैस पर विशेष निगरानी जरूरी है।

    घरेलू गैस की आपूर्ति निरंतर
    रसोई गैस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि आर.के. गुप्ता ने बताया कि कॉमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी फिलहाल बंद है, लेकिन घरेलू गैस की सप्लाई सामान्य है।उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम भोपाल जिला प्रशासन की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें स्थिति की समीक्षा कर आगे के निर्णय लिए जाएंगे।

  • कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया

    कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस संकट: होटल-रेस्टोरेंट बंद, सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू किया


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर सैन्य कार्रवाई के कारण हॉर्मुज जलमार्ग पर गैस सप्लाई ठप होने से देश में कॉमर्शियल गैस की किल्लत पैदा हो गई है। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की स्थिति बन गई है।

    केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू किया है ताकि गैस की जमाखोरी और सप्लाई में असमानता रोकी जा सके।

    गैस सप्लाई की चार श्रेणियां
    पूरा स्टॉक: घरेलू रसोई गैस (PNG) और CNG वाहन गैस को पूरी तरह उपलब्ध कराया जाएगा।

    खाद उद्योग: खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को 70% गैस उपलब्ध होगी।

    बड़े उद्योग: नेशनल ग्रिड से जुड़े बड़े उद्योगों को 80% गैस मिलेगी।

    छोटे होटल और व्यवसाय: छोटे होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों को उनकी पुरानी खपत के अनुसार 80% गैस मिलेगी।

    राज्यों में सप्लाई की स्थिति
    उत्तर प्रदेश: लखनऊ, कानपुर और वाराणसी में बुकिंग के 4-5 दिन बाद भी गैस नहीं मिल रही।

    महाराष्ट्र: मुंबई, पुणे और नागपुर में करीब 20% होटल और रेस्टोरेंट बंद। पुणे में गैस की कमी के कारण नगर निगम ने शवदाह गृह अस्थायी रूप से बंद किए।

    मध्य प्रदेश: भोपाल में 2000 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित, सिलेंडर की उपलब्धता कम।

    राजस्थान: होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज गार्डन संचालकों को परेशानी।

    कर्नाटक: बेंगलुरु में होटल बंद होने का खतरा, बुजुर्ग और छात्र प्रभावित।

    सरकार ने संकट निपटाने के लिए उठाए कदम
    हाई-लेवल कमेटी: पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की कमेटी बनाई।

    एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: जमाखोरी रोकने के लिए लागू।

    बुकिंग नियम बदलाव: एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला 25 दिन बाद बुक हो सकेगा।

    OTP और बायोमेट्रिक: जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी पर कड़ी निगरानी।

    LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: अतिरिक्त उत्पादन घरेलू गैस के लिए।

    गैस संकट की मुख्य वजहें
    हॉर्मुज जलमार्ग पर बंदी: फारस की खाड़ी से अरब सागर तक फैले 167 किमी लंबे मार्ग से गैस और तेल का बड़ा हिस्सा आता है। ईरान युद्ध के कारण यह मार्ग असुरक्षित।

    एलएनजी उत्पादन में रुकावट: ईरान के ड्रोन हमले के बाद कतर के LNG प्लांट की सप्लाई प्रभावित, जिससे भारत की 40% LNG आयात प्रभावित।

    हालात कब सुधरेंगे?
    इंडियन ऑयल के के.एम. ठाकुर ने ग्राहकों को आश्वस्त किया कि घबराने की जरूरत नहीं है और पैनिक बुकिंग से बचें। सरकार वैकल्पिक सप्लाई विकल्पों पर काम कर रही है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर G7 देश इमरजेंसी तेल भंडार से सप्लाई जारी करने पर विचार कर रहे हैं।

    घरेलू गैस की कीमतें बढ़ीं
    सरकार ने डोमेस्टिक LPG सिलेंडर की कीमत ₹60 बढ़ा दी है। अब 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर दिल्ली में ₹913 में उपलब्ध है। 19 किलोग्राम कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब ₹1,883 है।

  • कंस्ट्रक्शन साइट पर 7 श्रमिकों की मौत से हड़कंप, सिग्नेचर ग्लोबल को भेजा गया नोटिस

    कंस्ट्रक्शन साइट पर 7 श्रमिकों की मौत से हड़कंप, सिग्नेचर ग्लोबल को भेजा गया नोटिस


    नई दिल्ली। हरियाणा के Gurugram में एक निर्माण स्थल पर हुए दर्दनाक हादसे के बाद रियल एस्टेट कंपनी Signature Global को पुलिस ने नोटिस जारी किया है। इस हादसे में सात श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना के बाद कंपनी से जवाब मांगा गया है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मृतक श्रमिकों के परिवारों को जल्द से जल्द मुआवजा दिया जाए।

    प्रशासन की प्राथमिकता: परिवारों को मुआवजा और मदद
    गुरुग्राम के असिस्टेंट कमिश्नर Anil Sharma ने बताया कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंपना और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    उन्होंने कहा कि कंपनी से मुआवजे के चेक प्राप्त कर उन्हें मृतक मजदूरों के परिवारों तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही पूरे मामले की कानूनी जांच भी की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    खुदाई के दौरान अचानक धंसी मिट्टी
    यह हादसा सोमवार शाम करीब 7 बजे Sidhrawali क्षेत्र में Delhi–Jaipur Highway के पास स्थित एक निर्माण स्थल पर हुआ। अधिकारियों के मुताबिक खुदाई के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर उसके नीचे दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

    सात मजदूरों की मौत, चार घायल
    इस दुर्घटना में सात मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। घायल मजदूरों को इलाज के लिए Bhiwadi के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां तीन मजदूरों का इलाज जारी है। अधिकारियों के मुताबिक घायलों में से तीन मजदूर नेपाल के रहने वाले हैं।

    मृतकों में झारखंड और राजस्थान के मजदूर
    पुलिस के अनुसार हादसे में जान गंवाने वाले सात मजदूरों में से छह झारखंड के रहने वाले थे, जबकि एक मजदूर राजस्थान का निवासी था। अधिकारियों ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए गुरुग्राम भेजा जा रहा है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।

    लापरवाही की जांच, सख्त कार्रवाई के संकेत
    गुरुग्राम पुलिस ने बताया कि इस मामले में कंपनी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है और घटना की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि चूंकि हादसा हरियाणा के अधिकार क्षेत्र में हुआ है, इसलिए इस मामले की कानूनी कार्रवाई भी Haryana में ही की जाएगी।

  • फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल

    फूड एक्सपोर्ट में भारत का दम, आंकड़ा 5 लाख करोड़ के करीब: पीयूष गोयल


    नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कहा कि भारत का खाद्य और कृषि उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़ रहा है और अब यह सालाना करीब 5 लाख करोड़ रुपये (55 अरब डॉलर से अधिक) तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि भारत की कृषि क्षमता और वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाती है।
    नई दिल्ली में आयोजित Aahar – The International Food and Hospitality Fair के 40वें संस्करण के उद्घाटन के दौरान उन्होंने खाद्य, कृषि और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत के लोगों से अपील की कि वे मिलकर भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक बनाने की दिशा में काम करें। गोयल ने कहा कि सरकार की नीतियां, बढ़ते व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर भारतीय उत्पादों की मांग इस दिशा में बड़े अवसर पैदा कर रही हैं।

    कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में तेज उछाल
    मंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों यानी 2014 से 2025 के दौरान भारत के कृषि और खाद्य निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में प्रोसेस्ड फूड का निर्यात चार गुना, फल और दालों का निर्यात तीन गुना और प्रोसेस्ड सब्जियों का निर्यात चार गुना बढ़ा है। इसके अलावा कोको का निर्यात तीन गुना और अनाज का निर्यात दोगुना हो गया है। वहीं चावल का निर्यात भी इस अवधि में करीब 62 प्रतिशत बढ़ा है। गोयल ने कहा कि इन उपलब्धियों ने भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात के क्षेत्र में दुनिया के प्रमुख देशों की कतार में ला खड़ा किया है। वर्तमान में भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा कृषि उत्पाद निर्यातक बन चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि आगे और बड़ी संभावनाओं का संकेत देती है।

    ‘दुनिया की फूड बास्केट’ बनने की दिशा में भारत
    गोयल ने कहा कि भारत को कृषि और प्रोसेस्ड फूड निर्यात में दुनिया में शीर्ष स्थान दिलाने का लक्ष्य पूरी तरह हासिल किया जा सकता है। यह लक्ष्य प्रधानमंत्री Narendra Modi के उस विजन से जुड़ा है, जिसमें भारत को “दुनिया की फूड बास्केट” बनाने की बात कही गई है।
    उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों, उद्यमियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को मिलकर काम करना होगा। यदि उत्पादन के साथ-साथ प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ज्यादा ध्यान दिया जाए तो भारतीय कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकते हैं।

    व्यापार समझौतों से खुले नए वैश्विक बाजार
    मंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिनके जरिए 38 विकसित और समृद्ध देशों के बाजारों तक पहुंच मिली है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुले हैं और भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन से तेजी से जुड़ रही हैं।
    उन्होंने कहा कि आज भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक प्राथमिक बाजार पहुंच प्राप्त है। इससे भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य बन रहा है और निर्यात के नए रास्ते खुल रहे हैं।

    किसानों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा
    गोयल ने स्पष्ट किया कि एफटीए वार्ताओं के दौरान सरकार ने किसानों, मछुआरों और एमएसएमई के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने कहा कि डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विदेशी उत्पादकों को कोई रियायत नहीं दी गई है। इसी तरह जीन संशोधित (GM) उत्पादों को भी शुल्क में छूट या बाजार तक पहुंच नहीं दी गई है। इसके अलावा चावल, गेहूं, मक्का, सोया मील और कई तरह की दालों जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों को भी व्यापार समझौतों में सुरक्षित रखा गया है। वहीं चीनी क्षेत्र में भी आम तौर पर कोई रियायत नहीं दी गई है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय किसानों और घरेलू उत्पादकों को नुकसान न हो।

    एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से बढ़ेगा वैल्यू एडिशन
    मंत्री ने किसानों और उद्यमियों से Agriculture Infrastructure Fund के 1 लाख करोड़ रुपये के फंड का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि फूड प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर ध्यान देने से किसानों को वैश्विक बाजार में बेहतर कीमत मिल सकती है।
    उन्होंने कहा कि अब बड़ी संख्या में छोटे उद्यम भी फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    आहार मेले में पहली बार इटली बना पार्टनर देश
    गोयल ने बताया कि इस वर्ष आयोजित आहार फूड एंड हॉस्पिटैलिटी फेयर में Italy को पहली बार पार्टनर देश बनाया गया है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 13 मार्च और शनिवार को यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए भी खोली जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे खासकर युवाओं को भारत और दुनिया के फूड, बेवरेज और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की ताकत को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलेगा।

  • कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश

    कुकिंग गैस पर सरकार का बड़ा फैसला, PNG और LPG की निर्बाध सप्लाई के आदेश


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने Essential Commodities Act (ईसीए) के तहत अहम आदेश जारी किए हैं। इस आदेश के तहत घरेलू रसोई के लिए Piped Natural Gas (PNG), परिवहन के लिए Liquefied Petroleum Gas (LPG) और Compressed Natural Gas (CNG) की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा से बढ़ी चिंता
    सरकार के आकलन के अनुसार मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण Strait of Hormuz के रास्ते आने वाले Liquefied Natural Gas (LNG) के शिपमेंट में बाधा आई है। कुछ आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर की घोषणा भी की है, जिसके तहत सीमित आपूर्ति को पहले प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में भेजा जा रहा है।

    रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश
    सरकार ने रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को भी एलपीजी पूल में भेजने के लिए कहा गया है, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।

    उर्वरक संयंत्रों के लिए गैस आपूर्ति तय
    आदेश के अनुसार प्राथमिकता क्षेत्र-2 में आने वाले उर्वरक संयंत्रों को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति उनके पिछले छह महीनों की औसत खपत के 70 प्रतिशत तक सुनिश्चित की जाएगी।

    साथ ही यह भी कहा गया है कि इन संयंत्रों को गैस का इस्तेमाल केवल उर्वरक उत्पादन के लिए ही करना होगा। इसके लिए उन्हें प्रमाण पत्र Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) को जमा करना होगा।

    उद्योगों को भी सीमित आपूर्ति जारी रहेगी
    गैस मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि प्राथमिकता क्षेत्र-1 में आने वाले चाय उद्योग, विनिर्माण इकाइयों और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को राष्ट्रीय गैस ग्रिड के माध्यम से गैस की आपूर्ति जारी रखी जाए।

    इन उपभोक्ताओं को परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीनों की औसत गैस खपत के 80 प्रतिशत तक गैस आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    सिटी गैस नेटवर्क को भी निर्देश
    आदेश में यह भी कहा गया है कि City Gas Distribution (CGD) नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियां अपने नेटवर्क से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराएं।

    सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति में संभावित संकट के बीच घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि आम लोगों की रसोई और जरूरी उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।