Category: Economy

  • RBI का बड़ा फैसला: ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP, डिजिटल पेमेंट हुआ आसान

    RBI का बड़ा फैसला: ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट पर नहीं लगेगा OTP, डिजिटल पेमेंट हुआ आसान


    नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने ई-मैंडेट से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं। इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब ₹15,000 तक के ऑटो-पेमेंट के लिए हर बार OTP डालने की जरूरत नहीं होगी।

    क्या है नया नियम?
    RBI की ओर से जारी Digital Payment E-Mandate Framework 2026 के अनुसार, बार-बार होने वाले ट्रांजैक्शन (Recurring Payments) को आसान बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। नए नियम के तहत ₹15,000 तक के भुगतान बिना OTP के पूरे हो सकेंगे, जबकि इससे ज्यादा राशि के ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर OTP जरूरी होगा। हालांकि, कुछ खास कैटेगरी जैसे बीमा, म्यूचुअल फंड और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए ₹1 लाख तक के ऑटो-पेमेंट बिना OTP के किए जा सकेंगे। यह सुविधा ग्राहकों को बार-बार OTP डालने की झंझट से राहत देगी।

    ई-मैंडेट क्या होता है?
    ई-मैंडेट एक ऐसी सुविधा है, जिसमें ग्राहक पहले से किसी पेमेंट की अनुमति दे देता है। इसके बाद तय समय पर अपने आप खाते से पैसे कट जाते हैं। यह सुविधा आमतौर पर OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल बिल, EMI और इंश्योरेंस प्रीमियम जैसे भुगतान के लिए इस्तेमाल होती है।

    हर ट्रांजैक्शन से पहले मिलेगा अलर्ट
    RBI के नए नियम के मुताबिक, हर ऑटो-पेमेंट से कम से कम 24 घंटे पहले ग्राहक को नोटिफिकेशन भेजा जाएगा। इस नोटिफिकेशन में मर्चेंट का नाम, पेमेंट की राशि, तारीख और समय जैसी सभी जरूरी जानकारी दी जाएगी। ग्राहक SMS या ईमेल के जरिए यह अलर्ट प्राप्त कर सकता है।

    बदलाव या कैंसिल करने का नियम
    अगर ग्राहक ई-मैंडेट में कोई बदलाव करना चाहता है या उसे बंद करना चाहता है, तो इसके लिए OTP जरूरी होगा। ग्राहक किसी भी समय ऑटो-पेमेंट को रोक (opt-out) सकता है, लेकिन इसके लिए भी सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना होगा। पहला ट्रांजैक्शन हमेशा OTP के साथ ही पूरा किया जाएगा। अगर रजिस्ट्रेशन के समय ही पेमेंट किया जाता है, तो दोनों प्रक्रियाएं एक साथ पूरी हो सकती हैं। कुछ मामलों में प्री-नोटिफिकेशन जरूरी नहीं होगा, जैसे FASTag और नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) के ऑटो रिचार्ज। इन सेवाओं में ऑटो-पेमेंट पहले से तय नियमों के तहत जारी रहेगा। RBI के इस नए कदम से डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और ज्यादा सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने की कोशिश की गई है। इससे ग्राहकों को राहत मिलेगी और डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

  • कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे

    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से ग्लोबल मार्केट में हलचल… पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे


    नई दिल्ली।
    वैश्विक बाजार (Global market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude oil Prices) में मंगलवार को जोरदार उछाल देखने को मिला। डोनॉल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक बयान के बाद तेल की कीमतें करीब 5% तक बढ़ गईं, जिससे पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार में हलचल मच गई। ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिकी सेना कार्रवाई के लिए तैयार है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

    इस बयान का असर तुरंत बाजार पर दिखा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब $99.78 प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल WTI (West Texas Intermediate) भी बढ़कर लगभग $94.36 प्रति बैरल हो गया। तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे तौर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा है।


    क्यों बढ़ी तेल की कीमत?

    तेल की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईरान-अमेरिका तनाव है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने एक ईरानी ऑयल टैंकर को समुद्र में रोक लिया, जिससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि ईरान शांति वार्ता में शामिल होगा या नहीं। ऐसी अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर बढ़ जाता है और वे तेल जैसे कमोडिटी में पैसा लगाते हैं, जिससे कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं।


    होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर

    तेल सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। यह रास्ता दुनिया की लगभग 20% तेल और LNG सप्लाई को संभालता है, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि पिछले 24 घंटों में यहां से सिर्फ 3 जहाज ही गुजर पाए। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बाधित रहता है, तो तेल की कीमतें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।

    दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
    तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ सकती है, यानी कि इससे महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है। यूरोप में तो हालात को देखते हुए एयरलाइंस के लिए भी एडवाइजरी जारी करने की तैयारी हो रही है, ताकि जेट फ्यूल की कमी जैसी स्थिति से निपटा जा सके।


    रूस और यूरोप की स्थिति

    इस बीच रूस और यूरोप के बीच तेल सप्लाई को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया है कि एक अहम पाइपलाइन दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन दूसरी तरफ खबर है कि रूस मई से कुछ सप्लाई रोक सकता है। इससे भी वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।


    आगे क्या होगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका तनाव और बढ़ता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रह सकता है और सप्लाई चेन बाधित हो सकती है, तो तेल की कीमतें $100 के पार भी जा सकती हैं। हालांकि, अगर कूटनीतिक बातचीत सफल रहती है, तो कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है।

  • तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार

    तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तूफानी तेजी सेंसेक्स 800 अंक उछला निफ्टी 24550 के पार


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए मजबूत तेजी लेकर आया, जहां निवेशकों के बीच उत्साह और भरोसा दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली। पूरे दिन के कारोबार में बाजार ने सकारात्मक रुख बनाए रखा और प्रमुख सूचकांक लगातार ऊंचाई की ओर बढ़ते नजर आए। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी ने इस तेजी को और मजबूती दी।

    कारोबार के दौरान सेंसेक्स में करीब 800 अंकों की तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 79 हजार 296 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी मजबूत प्रदर्शन करते हुए 24 हजार 550 के पार कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया और खरीदारी का रुझान बढ़ा।

    इस उछाल का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड के दाम 94 से 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गए, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं। तेल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी, जिसका असर सीधे तौर पर शेयर बाजार पर देखने को मिला।

    इसके साथ ही एशियाई बाजारों में आई मजबूती ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। एशिया के प्रमुख बाजारों में सकारात्मक रुझान देखने को मिला, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी और घरेलू बाजार में भी खरीदारी तेज हो गई। वैश्विक स्तर पर स्थिरता के संकेतों ने भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

    सेक्टोरल स्तर पर देखें तो बैंकिंग शेयरों ने बाजार की तेजी में सबसे अहम भूमिका निभाई। बड़े निजी बैंकों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी बैंक इंडेक्स में करीब डेढ़ प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। वित्तीय शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार को ऊपर उठाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    रियल्टी सेक्टर ने आज सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें करीब तीन प्रतिशत के आसपास की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो, इंफ्रास्ट्रक्चर और पीएसयू बैंक सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इससे यह साफ संकेत मिला कि बाजार में व्यापक स्तर पर निवेशकों की भागीदारी बनी हुई है और तेजी केवल कुछ ही सेक्टरों तक सीमित नहीं है।

    आईटी सेक्टर ने भी आज मजबूती दिखाई और शुरुआती कमजोरी से उबरकर इसमें सुधार देखने को मिला। प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि कुछ इंश्योरेंस शेयरों में हल्की कमजोरी देखने को मिली, लेकिन इसका असर पूरे बाजार पर सीमित रहा।

    बाजार के आंकड़ों के अनुसार अधिकतर शेयरों में तेजी देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच सकारात्मक भावना और मजबूत हुई। वोलैटिलिटी इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि बाजार में घबराहट कम हुई है और निवेशक अधिक आत्मविश्वास के साथ ट्रेडिंग कर रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि निफ्टी का 24 हजार 300 के ऊपर बने रहना बाजार के लिए मजबूत संकेत है। आने वाले समय में 24 हजार 450 से 24 हजार 500 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि नीचे की ओर 24 हजार 150 से 24 हजार 200 का स्तर सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। हालांकि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक घटनाक्रम बाजार की दिशा पर असर डाल सकते हैं।

  • सोने में फिर जोरदार उछाल चांदी की कीमत गिरी बाजार में बढ़ी हलचल 10 ग्राम गोल्ड ₹1.52 लाख के पार

    सोने में फिर जोरदार उछाल चांदी की कीमत गिरी बाजार में बढ़ी हलचल 10 ग्राम गोल्ड ₹1.52 लाख के पार


    नई दिल्ली: देश के सर्राफा बाजार में आज फिर कीमती धातुओं के दामों में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। निवेशकों और ग्राहकों के लिए यह बदलाव एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। आज के ताजा कारोबार में सोने की कीमत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई है, जिससे बाजार में हल्की अस्थिरता का माहौल देखा जा रहा है।

    आज 24 कैरेट सोने की कीमत में मामूली लेकिन महत्वपूर्ण बढ़त देखने को मिली है। ताजा आंकड़ों के अनुसार 10 ग्राम सोना बढ़कर लगभग ₹1,52,155 के स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले इसके दाम थोड़े कम थे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग में बदलाव के चलते इसमें उछाल देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि शादी और त्योहारी सीजन की मांग के कारण भी सोने की कीमतों पर असर पड़ रहा है।

    दूसरी ओर चांदी के बाजार में गिरावट दर्ज की गई है। एक किलो चांदी का भाव घटकर लगभग ₹2,50,063 के आसपास पहुंच गया है। पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में इसमें कुछ सौ रुपये की कमी आई है। चांदी की कीमतों में यह गिरावट औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार के दबाव के कारण बताई जा रही है। हालांकि जानकारों का कहना है कि चांदी की कीमतें अक्सर ज्यादा उतार चढ़ाव दिखाती हैं क्योंकि इसका उपयोग निवेश के साथ साथ उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के भाव में थोड़ा अंतर देखने को मिला है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ, जयपुर और अन्य बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग समान स्तर पर बनी हुई है, जो ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेंड कर रही है। वहीं चेन्नई जैसे शहरों में यह दर थोड़ी अधिक दर्ज की गई है। यह अंतर स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत के कारण देखा जाता है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय संकेतों, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बदलाव से प्रभावित होती हैं। जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी कीमत में बढ़ोतरी होती है। इसी तरह चांदी की कीमतें भी वैश्विक मांग और औद्योगिक उपयोग पर निर्भर करती हैं।

    निवेशकों के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता की जांच करना बेहद जरूरी है। हमेशा हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए, जिससे उसकी गुणवत्ता और असली होने की पुष्टि हो सके। इसके साथ ही खरीदारी से पहले बाजार भाव की सही जानकारी लेना भी आवश्यक माना जाता है ताकि किसी प्रकार का नुकसान न हो।

    वहीं चांदी की खरीदारी में भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि बाजार में नकली धातुओं की संभावना बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार सरल परीक्षण जैसे चुंबक परीक्षण, बर्फ परीक्षण और कपड़े से रगड़कर जांच जैसी विधियों से इसकी शुद्धता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

  • अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम

    अदाणी पावर का न्यूक्लियर सेक्टर में बड़ा कदम नई सहायक कंपनी बनाकर ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार की दिशा में बढ़ाया कदम


    नई दिल्ली: देश के ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही अदाणी पावर लिमिटेड ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है कंपनी ने एक नई पूर्ण स्वामित्व वाली स्टेप डाउन सहायक इकाई के गठन की घोषणा की है जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करेगी इस कदम को भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के अनुरूप एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है

    कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड ने रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक नई इकाई का गठन किया है यह नई कंपनी 20 अप्रैल 2026 को स्थापित की गई है और इसे 5 लाख रुपए की अधिकृत पूंजी के साथ शुरू किया गया है इस पूंजी को 10 रुपए प्रति शेयर के 50 हजार इक्विटी शेयरों में विभाजित किया गया है

    इस नई इकाई की संरचना को देखें तो यह पूरी तरह से समूह के नियंत्रण में है रावतभाटा राज एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड के पास है और अदाणी एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड की पूरी हिस्सेदारी अदाणी पावर लिमिटेड के पास है इस प्रकार यह कंपनी समूह की एक स्टेप डाउन सहायक इकाई के रूप में कार्य करेगी जो न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगी

    इसी क्रम में समूह की एक अन्य इकाई ने भी न्यूक्लियर क्षेत्र में अपनी सक्रियता दिखाई है अदाणी एनर्जी ने कोस्टल महा एटॉमिक एनर्जी लिमिटेड नामक एक और स्टेप डाउन पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी का गठन किया है यह इकाई परमाणु ऊर्जा के उत्पादन ट्रांसमिशन और वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में संलग्न रहेगी जिससे ऊर्जा क्षेत्र में विविधता और मजबूती आएगी

    ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह कदम केवल व्यावसायिक विस्तार तक सीमित नहीं है बल्कि यह भारत के स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा संकेत है देश तेजी से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से हटकर स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों की ओर बढ़ रहा है और न्यूक्लियर एनर्जी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है

    वर्तमान समय में भारत की स्थापित न्यूक्लियर ऊर्जा क्षमता लगभग 8 दशमलव 7 गीगावाट है लेकिन देश ने वर्ष 2047 तक इसे बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है

    अदाणी समूह का यह कदम दर्शाता है कि वह भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने पोर्टफोलियो को विविध बना रहा है और नई तकनीकों तथा क्षेत्रों में निवेश कर रहा है न्यूक्लियर एनर्जी में यह विस्तार न केवल कंपनी के लिए नए अवसर खोलेगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगा

  • वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    वैश्विक संकट के बीच भारत में पेट्रोल डीजल की कीमतें स्थिर कई देशों में 85 प्रतिशत तक उछाल के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत

    नई दिल्ली: वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच जहां कई देशों में ईंधन की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है वहीं भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि दर्ज की जा रही है इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर आ रही है

    दुनिया के कई हिस्सों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है आंकड़ों के अनुसार यूएई में डीजल की कीमतों में लगभग 85 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी डीजल की कीमतें 60 प्रतिशत से अधिक बढ़ी हैं वहीं कनाडा पाकिस्तान फ्रांस श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देशों में यह वृद्धि 35 से 50 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई है यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से भू राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण मानी जा रही है

    पेट्रोल की कीमतों का रुझान भी इसी प्रकार का रहा है पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में सबसे अधिक लगभग 44 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जबकि अमेरिका और यूएई में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है अन्य देशों जैसे कनाडा श्रीलंका और चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है हालांकि ब्राजील और रूस जैसे देशों में यह वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है

    इसके विपरीत भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें वर्ष की शुरुआत के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं डीजल की कीमत लगभग 87 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत करीब 94 रुपए प्रति लीटर के आसपास बनी हुई है यह स्थिरता ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब वैश्विक बाजार में अस्थिरता अपने चरम पर है और कई देश महंगाई के दबाव से जूझ रहे हैं

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीमतों को नियंत्रित रखने में सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण योगदान है तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन की खरीद इस तरह कर रही हैं जिससे खुदरा कीमतों को स्थिर रखा जा सके हालांकि इसके चलते कंपनियों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है

    आर्थिक विश्लेषण यह भी संकेत देता है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बढ़ती हैं तो भारतीय तेल कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है अनुमान के अनुसार यदि कीमतें 135 से 165 डॉलर प्रति बैरल के बीच रहती हैं तो पेट्रोल पर प्रति लीटर लगभग 18 रुपए और डीजल पर लगभग 35 रुपए तक का नुकसान हो सकता है इसके अलावा कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से लागत में करीब 6 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है

    कुल मिलाकर वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि जहां वैश्विक बाजार में अस्थिरता और महंगाई का दबाव बढ़ रहा है वहीं भारत में संतुलित नीतियों और प्रबंधन के चलते ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखने में सफलता मिली है यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात है बल्कि आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक साबित हो रही है

  • Gold Rate: ट्रंप के सख्त रुख से सोने पर दबाव, चांदी अब तक 1.87 लाख रुपये तक टूटी

    Gold Rate: ट्रंप के सख्त रुख से सोने पर दबाव, चांदी अब तक 1.87 लाख रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय हालात के बीच कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयान के बाद सोने की कीमतों में एक बार फिर नरमी देखने को मिली है। वहीं चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है और यह अपने उच्चतम स्तर से करीब 1.87 लाख रुपये तक सस्ती हो चुकी है।

    दरअसल, मध्य पूर्व में जारी तनाव के चलते बाजार लगातार प्रभावित हो रहा है। अमेरिका और Iran के बीच टकराव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान के साथ समझौता नहीं होता, तब तक ब्लॉकेड हटाने का सवाल ही नहीं है। दूसरी ओर ईरान ने भी संकेत दिया है कि यदि ब्लॉकेड जारी रहा, तो वह Strait of Hormuz को नहीं खोलेगा। इस तनातनी ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    इसी माहौल का असर सोने पर दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 21 अप्रैल, मंगलवार को कॉमैक्स गोल्ड करीब 4 डॉलर टूटकर 4,816.77 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।

    घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) पर भी कमजोरी देखने को मिली। 5 जून डिलीवरी वाला सोना 41 रुपये फिसलकर 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

    चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही। MCX पर चांदी 4,568 रुपये टूटकर 2,52,574 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। सोमवार को बाजार खुलते ही चांदी में भारी बिकवाली देखने को मिली थी। अगर इसके ऑल टाइम हाई से तुलना करें, तो कीमत करीब 1,87,552 रुपये तक नीचे आ चुकी है। उल्लेखनीय है कि MCX पर चांदी इससे पहले 4.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तनाव और अमेरिकी नीति संकेतों के चलते आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में इसी तरह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

    ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है।

    मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है।


    ट्रंप ने दी चेतावनी

    इससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे।


    भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हाल

    क्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट

    > दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर
    > मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर
    > चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर
    > कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर

  • ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?

    ब्रोकरेज ने जताया 64 रुपये के टारगेट का भरोसा; क्या अब मल्टीबैगर रिटर्न के लिए तैयार हैं निवेशक?


    नई दिल्ली।विंड एनर्जी सेक्टर की प्रमुख कंपनी सुजलॉन एनर्जी के शेयरों में हाल के दिनों में तेज रफ्तार देखने को मिली है। लगातार खरीदारी के चलते स्टॉक में मजबूत तेजी बनी हुई है और निवेशकों का रुझान इस ओर बढ़ा है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में शेयर में लगभग 20 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि एक महीने के भीतर इसमें करीब 28 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है।

    हाल के कारोबारी सत्र में शेयर लगभग 53 रुपये के स्तर पर बंद हुआ, जिससे बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह आगे चलकर 64 रुपये के स्तर को पार कर सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी में आई यह तेजी केवल अल्पकालिक नहीं है, बल्कि इसके पीछे सेक्टर की मजबूत संभावनाएं भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

    ब्रोकरेज हाउस जेएम फाइनेंशियल ने सुजलॉन एनर्जी पर अपनी BUY रेटिंग को बरकरार रखते हुए अगले 12 महीनों के लिए 64 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा स्तर से शेयर में लगभग 30 प्रतिशत तक की अतिरिक्त बढ़त की संभावना बनी हुई है। इसके पीछे मुख्य कारण भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग और नवीकरणीय ऊर्जा पर सरकार का बढ़ता फोकस माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार विंड एनर्जी सेक्टर आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब सोलर और गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन दिन के कुछ समय तक सीमित रहता है। शाम और रात के समय बिजली की मांग को पूरा करने में विंड एनर्जी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है, जिससे इस सेक्टर की कंपनियों को फायदा मिल सकता है।

    सरकारी स्तर पर भी विंड एनर्जी क्षमता बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नए प्रोजेक्ट्स शुरू होने की संभावना है, जिससे इस क्षेत्र में निवेश और विस्तार दोनों को बढ़ावा मिलेगा। इससे कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होने और उत्पादन क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

    कंपनी के प्रदर्शन में हाल के समय में सुधार देखने को मिला है। प्रोजेक्ट्स के निष्पादन और डिलीवरी में तेजी आई है, जिससे पहले की तुलना में कामकाज अधिक सुचारू हुआ है। इससे कंपनी के कैश फ्लो में सुधार और नए ऑर्डर्स मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सुजलॉन के शेयर की दिशा आगे चलकर पूरी तरह से रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की मांग, सरकारी नीतियों और वैश्विक ऊर्जा परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि सेक्टर में मौजूदा रफ्तार बनी रहती है, तो शेयर में आगे और मजबूती देखने को मिल सकती है।

  • सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!

    सरकार का 'फ्लेक्स फ्यूल' पर बड़ा दांव, एथेनॉल के दम पर ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी!


    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी दिखाई है। सरकार का उद्देश्य परिवहन क्षेत्र में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ाना और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से सुरक्षित रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नीति स्तर पर इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श की तैयारी की जा रही है, जिसमें तेल कंपनियों, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर एक स्पष्ट रणनीति तैयार की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऐसे उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो मौजूदा ईंधन नीतियों को आगे बढ़ाते हुए एथेनॉल मिश्रण के स्तर को बढ़ा सकें और फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के उपयोग को आसान बना सकें।

    वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथेनॉल मिलाने का कार्यक्रम लागू है। अब सरकार ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है जो उच्च स्तर के एथेनॉल मिश्रण, यहां तक कि 85 प्रतिशत तक, पर भी आसानी से चल सकें। इससे न केवल वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि एथेनॉल उत्पादन में कृषि आधारित कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अपनाना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही, सरकार एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्यों को पहले तय समय से पहले हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में तेजी लाई जा सके।

    एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाने के लिए भी कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें कच्चे माल के दायरे का विस्तार, उत्पादन के लिए कृषि क्लस्टर विकसित करना और अतिरिक्त खाद्यान्न का उपयोग शामिल है। चावल और चीनी जैसे संसाधनों का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हो सके। इसके अलावा, एथेनॉल की खरीद के लिए तय मूल्य और कर में रियायत जैसे कदम भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

    यह पहल न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक स्थिरता के लिए भी लाभकारी मानी जा रही है। फ्लेक्स फ्यूल वाहनों के माध्यम से भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य में परिवहन क्षेत्र में बड़े बदलाव का संकेत देता है।