Category: Economy

  • अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    अगले हफ्ते शेयर बाजार में IPO की बारिश, 4 कंपनियां खोलेंगी पब्लिक इश्यू, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए अगला हफ्ता बेहद अहम रहने वाला है। 9 मार्च से शुरू होने वाले सप्ताह में देश में चार नए आईपीओ खुलने जा रहे हैं। इनमें से तीन पब्लिक इश्यू मेनबोर्ड सेगमेंट से जुड़े हैं जबकि एक आईपीओ एसएमई सेगमेंट का है। इसके अलावा पहले से खुले दो आईपीओ में भी निवेश का मौका मिलेगा। ऐसे में निवेशकों के पास अलग अलग सेक्टर की कंपनियों में पैसा लगाने का अच्छा अवसर रहेगा।

    आने वाले सप्ताह में जिन कंपनियों के आईपीओ खुलने वाले हैं उनमें राजपूताना स्टेनलेस, इनोविजन, एप्सिस एरोकॉम और राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट शामिल हैं। इन कंपनियों के जरिए बाजार से हजारों करोड़ रुपये जुटाने की योजना है।

    सबसे पहले राजपूताना स्टेनलेस का आईपीओ 9 मार्च को खुलेगा और 11 मार्च को बंद होगा। यह लगभग 254.98 करोड़ रुपये का इश्यू है। कंपनी ने इसके लिए 116 से 122 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है और एक लॉट में 110 शेयर होंगे। इस कंपनी के शेयर 16 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके बाद इनोविजन का आईपीओ 10 मार्च को खुलेगा और 12 मार्च को बंद होगा। कंपनी का लक्ष्य लगभग 322.84 करोड़ रुपये जुटाना है। इसके लिए 521 से 548 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है और एक लॉट में 27 शेयर शामिल होंगे। कंपनी के शेयर 17 मार्च को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध हो सकते हैं।

    तीसरा आईपीओ एप्सिस एरोकॉम का है जो 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। यह एसएमई सेगमेंट का इश्यू है और कंपनी करीब 35.77 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके लिए 104 से 110 रुपये प्रति शेयर का प्राइस तय किया गया है और लॉट साइज 1200 शेयर का है। इस कंपनी के शेयर 18 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने की संभावना है।

    इसके अलावा राजमार्ग इंफ्रा इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट का बड़ा आईपीओ भी 11 मार्च को खुलेगा और 13 मार्च को बंद होगा। करीब 6000 करोड़ रुपये के इस इश्यू के लिए कंपनी ने 99 से 100 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। इस कंपनी के शेयर 24 मार्च को बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होने की उम्मीद है।

    इन नए आईपीओ के अलावा दो ऐसे आईपीओ भी हैं जो पहले से खुले हुए हैं और जिनमें निवेशक अब भी पैसा लगा सकते हैं। एल्फिन एग्रो इंडिया का आईपीओ 5 मार्च को खुला था और 9 मार्च को बंद होगा। कंपनी करीब 25.03 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है और इसका प्राइस 47 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। एक लॉट में 3000 शेयर हैं और कंपनी के शेयर 12 मार्च को बीएसई एसएमई पर लिस्ट होने की संभावना है।

    वहीं श्रीनिबासा प्रधान कंस्ट्रक्शन्स का आईपीओ 6 मार्च को खुला था और 10 मार्च को बंद होगा। करीब 20.32 करोड़ रुपये के इस इश्यू को अभी तक लगभग 9 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन मिला है। इसके लिए 91 से 98 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड रखा गया है और लॉट साइज 1200 शेयर है। कंपनी के शेयर 13 मार्च को एनएसई एसएमई प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर सकते हैं।

    आने वाला सप्ताह आईपीओ बाजार के लिहाज से काफी व्यस्त रहने वाला है। मेनबोर्ड और एसएमई दोनों सेगमेंट में कई कंपनियां बाजार में उतर रही हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे निवेश करने से पहले कंपनियों के कारोबार, वित्तीय स्थिति और जोखिम कारकों का सावधानी से विश्लेषण करें, ताकि सही निर्णय लेकर बेहतर रिटर्न हासिल किया जा सके।

  • इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत

    इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स और निफ्टी फिसले 3 प्रतिशत


    नई दिल्ली। इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली के चलते सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 3 प्रतिशत तक गिर गए। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 81,287.19 से फिसलकर 78,918.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,178.65 से गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ।

    एफआईआई की लगातार बिकवाली इस सप्ताह बाजार पर दबाव डालती रही। निवेशकों ने भारतीय बाजार से 23,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की। वैश्विक जोखिम और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के कारण विदेशी निवेशक सतर्क नजर आए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) और लगातार आ रहे एसआईपी फंड ने बाजार में गिरावट को कुछ हद तक रोकने में मदद की।

    मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे ऊर्जा संबंधित सेक्टर और समग्र बाजार पर दबाव बढ़ा। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी लगभग 3 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

    सेक्टरवार नजर डालें तो बीएसई रियल्टी इंडेक्स में 4.9 प्रतिशत, बीएसई ऑयल एंड गैस 4.8 प्रतिशत, बीएसई बैंकएक्स 4.6 प्रतिशत, बीएसई ऑटो 3.9 प्रतिशत और बीएसई कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बीएसई कैपिटल गुड्स में 0.2 प्रतिशत की मामूली बढ़त हुई और डिफेंस सेक्टर के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी देखी गई, क्योंकि वैश्विक तनाव के बीच निवेशकों ने रक्षा कंपनियों में रुचि दिखाई।

    वेंचुरा सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड विनीत बोलिंजकर के अनुसार, इस सप्ताह भारतीय बाजार में वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच खींचतान देखने को मिली। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता और बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू निवेशकों की भागीदारी और एसआईपी के जरिए लगातार फंड आना बाजार को सहारा दे रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी50 इंडेक्स 24,450 के आसपास अपने 200-दिन के मूविंग एवरेज के करीब पहुंच गया है। यह दर्शाता है कि फिलहाल बाजार अस्थिर है लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से स्थिति अभी भी मजबूत बनी हुई है। इस दौरान इंडिया वीआईएक्स इंडेक्स में 11 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जो निवेशकों की जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

    इस तरह इस सप्ताह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव डाला, जबकि घरेलू निवेशकों और एसआईपी फंड की भागीदारी ने स्थिति को संतुलित रखा।

  • 7 मार्च 2026 बैंक अपडेट: शनिवार को बैंक खुलेंगे या बंद, राज्यवार जानकारी

    7 मार्च 2026 बैंक अपडेट: शनिवार को बैंक खुलेंगे या बंद, राज्यवार जानकारी


    नई दिल्ली।सोमवार से शुक्रवार तक भागदौड़ भरी जिंदगी के बाद कई लोग शनिवार को अपने बैंक से जुड़े काम निपटाना पसंद करते हैं। लेकिन अक्सर यही सवाल उठता है कि बैंक शनिवार को खुले हैं या बंद। इस कन्फ्यूजन का कारण यह है कि कुछ शनिवार बैंक खुले रहते हैं, जबकि कुछ पर वे बंद होते हैं। हालांकि डिजिटल बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग की सुविधाओं ने कैश निकालना, पैसे भेजना और RTGS, NEFT या IMPS जैसी ट्रांजैक्शन को कहीं से भी करना आसान कर दिया है, फिर भी कई कार्य ऐसे हैं जिनके लिए बैंक जाकर अधिकारी से मिलना जरूरी होता है।

    आज 7 मार्च 2026 को कई लोगों के मन में यही सवाल होगा कि बैंक खुले हैं या बंद। RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार बैंक हर शनिवार नहीं खुलते। दूसरे और चौथे शनिवार को सभी शेड्यूल्ड और नॉन-शेड्यूल्ड बैंक बंद रहते हैं। महीने के पहले, तीसरे और पांचवे शनिवार आमतौर पर बैंक खुले रहते हैं, जब तक कि किसी विशेष पर्व या छुट्टी के कारण बंद न हों। 7 मार्च 2026 महीने का पहला शनिवार है और RBI की छुट्टियों की लिस्ट में कोई त्योहार या अवकाश दर्ज नहीं है, इसलिए पूरे भारत में बैंक खुलेंगे।

    मार्च 2026 में बैंक कई दिन बंद रहेंगे। पहले 2, 3 और 4 मार्च को होली और होलिका दहन के अवसर पर अलग-अलग राज्यों में बैंक बंद रहे। आने वाले हफ्तों में भी कई बैंक अवकाश पर रहेंगे।

    मुख्य बंद रहने वाले दिन और राज्य:

    13 मार्च 2026: मिजोरम में चपचार कुट त्योहार

    17 मार्च 2026: जम्मू-कश्मीर में शब-ए-कद्र

    19 मार्च 2026: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, मणिपुर, जम्मू-कश्मीर, गोवा, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और श्रीनगर में गुड़ी पड़वा, उगादी, तेलुगु न्यू ईयर, सजिबू नोंगमापनबा और प्रथम नवरात्र

    20 मार्च 2026: जम्मू-कश्मीर, केरल, श्रीनगर और आंध्र प्रदेश में ईद-उल-फितर और जुमात-उल-विदा

    21 मार्च 2026: असम, गुजरात, मिजोरम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, चंडीगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखंड, सिक्किम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, गोवा, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मेघालय और श्रीनगर में रमजान-ईद, खुतुब-ए-रमजान और सरहुल

    26 मार्च 2026: मिजोरम, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, मुंबई, नागपुर, झारखंड और हिमाचल प्रदेश में राम नवमी

    इसलिए आज 7 मार्च को घर से निकलने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके राज्य या शहर में बैंक खुले हैं। अगर आपके काम के लिए बैंक जाना आवश्यक है तो यह जानकारी आपके लिए मददगार साबित होगी। यह है कि इस महीने बैंक की खुलने और बंद रहने की तिथियां जानना जरूरी है ताकि आप अपने बैंकिंग कार्य बिना परेशानी के निपटा सकें।
  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में ₹115 की बढ़ोतरी

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगाई का नया झटका: घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा, कमर्शियल गैस में ₹115 की बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।
    मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। रसोई में इस्तेमाल होने वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये का इजाफा किया गया है। नए रेट 7 मार्च से पूरे देश में लागू कर दिए गए हैं और तेल कंपनियों की वेबसाइट पर भी इन्हें अपडेट कर दिया गया है।

    नई कीमतों के लागू होने के बाद दिल्ली में घरेलू LPG सिलेंडर अब 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये का हो गया है। इसी तरह कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये हो गई है। चेन्नई में पहले जहां यह सिलेंडर 868.50 रुपये में मिल रहा था वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है। मुंबई में भी घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़कर 912.50 रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देशभर में करोड़ों परिवारों के घरेलू बजट पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

    खास बात यह है कि अप्रैल 2025 के बाद पहली बार घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। करीब एक साल तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ था लेकिन अब अचानक हुई इस बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। पहले से ही महंगाई के दबाव से जूझ रहे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह फैसला खर्च बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

    घरेलू सिलेंडर के साथ साथ कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में करीब 115 रुपये की वृद्धि की गई है। नई कीमतों के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब 1883 रुपये में मिलेगा जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1835 रुपये हो गई है। कोलकाता में इसका रेट बढ़कर 1990 रुपये तक पहुंच गया है। वहीं चेन्नई में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2043.50 रुपये हो गई है।

    कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ सकता है क्योंकि इन जगहों पर बड़े पैमाने पर कमर्शियल गैस सिलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है जिसका असर आगे चलकर खाने पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय पर हुई है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले ही कहा था कि भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति के कई स्रोत मौजूद हैं और देश में पेट्रोल डीजल या गैस की कोई कमी नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर फैल रही उन खबरों को खारिज किया है जिनमें देश में ईंधन की कमी की बात कही जा रही थी।

    सरकारी सूत्रों के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संभावित जोखिमों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आयात के कई विकल्प तैयार कर रखे हैं जिससे सप्लाई सामान्य बनी हुई है। हालांकि एलपीजी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है और आने वाले समय में महंगाई को लेकर चर्चा और तेज हो सकती है।

  • गोल्ड मार्केट में उतार चढ़ाव होली के बाद सोना फिसला 24 कैरेट ₹1.62 लाख के करीब..

    गोल्ड मार्केट में उतार चढ़ाव होली के बाद सोना फिसला 24 कैरेट ₹1.62 लाख के करीब..


    नई दिल्ली। होली के बाद सर्राफा बाजार से निवेशकों और खरीदारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। घरेलू बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक उतार चढ़ाव के कारण सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोने की कीमत में करीब 4,923 रुपये की कमी आई है। इसके साथ ही सोना घटकर लगभग 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार इससे पहले सोने का भाव करीब 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास था। बाजार में गिरावट के बाद अब यह 1.62 लाख रुपये के करीब कारोबार कर रहा है।

    देश के अलग अलग शहरों में भी सोने के दामों में इसी तरह का रुख देखने को मिला। दिल्ली में 24 कैरेट सोना करीब 1,64,650 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    मुंबई चेन्नई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1,64,500 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा जबकि 22 कैरेट सोना करीब 1,50,790 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता नजर आया। अहमदाबाद और भोपाल में 24 कैरेट सोने का रेट करीब 1,64,550 रुपये और 22 कैरेट सोना लगभग 1,50,840 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    वहीं जयपुर लखनऊ और चंडीगढ़ में 24 कैरेट सोना 1,64,650 रुपये और 22 कैरेट सोना करीब 1,50,940 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। इसके अलावा 18 कैरेट सोने की कीमत भी लगभग 1,23,300 से 1,23,470 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच रही।

    सोने के साथ साथ चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी का भाव करीब 18,501 रुपये गिरकर लगभग 2.71 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक आ गया।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से मुनाफावसूली की वजह से आई है। त्योहार के दौरान कीमतों में तेजी आने के बाद निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर दी जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया।

    हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वैश्विक बाजार में सोने का हाजिर भाव करीब 0.8 प्रतिशत बढ़कर 5,176.69 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 1 प्रतिशत बढ़कर 5,186.30 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    इस तेजी की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.05 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में सोने और चांदी के दाम कई कारकों पर निर्भर करते हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतें कॉमा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कॉमा आयात शुल्क कॉमा जीएसटी और घरेलू मांग व आपूर्ति जैसे कारक शामिल होते हैं। इसके अलावा लंदन बुलियन मार्केट और कॉमेक्स के रुझान भी भारतीय बाजार को प्रभावित करते हैं।

  • चांदी के दामों में बड़ी गिरावट 36 दिन में ₹1.25 लाख सस्ती 3 दिन में ही ₹29 हजार टूटा भाव

    चांदी के दामों में बड़ी गिरावट 36 दिन में ₹1.25 लाख सस्ती 3 दिन में ही ₹29 हजार टूटा भाव


    नई दिल्ली।भारत में चांदी की कीमतों में इन दिनों भारी उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। वैश्विक बाजार में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण लगातार तीसरे दिन चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक चांदी की कीमतों में सिर्फ तीन दिनों के भीतर करीब 29 हजार रुपये की बड़ी गिरावट आई है।

    इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार एक किलो चांदी का भाव 3,489 रुपये टूटकर 2,60,723 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले इसका रेट 2,64,212 रुपये प्रति किलो था। यानी पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल मिलाकर 29,125 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है।

    केवल चांदी ही नहीं बल्कि सोने की कीमतों में भी कमजोरी देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने की कीमत 1,835 रुपये गिरकर 1,58,751 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। इससे पहले 5 मार्च को सोने का भाव 1,60,586 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह तीन दिनों के दौरान सोना करीब 8,720 रुपये तक सस्ता हो चुका है।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक ऊंचे स्तर पर निवेशकों द्वारा की जा रही मुनाफावसूली इस गिरावट की मुख्य वजह है। जब किसी धातु की कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर देते हैं जिससे बाजार में दबाव बढ़ जाता है।

    भारत के प्रमुख शहरों में भी चांदी की कीमतों में गिरावट का असर देखा गया। दिल्ली मुंबई कोलकाता पटना लखनऊ नोएडा जयपुर अहमदाबाद और पुणे जैसे शहरों में 10 ग्राम चांदी का भाव करीब 2,849 रुपये रहा जबकि 100 ग्राम का रेट 28,490 रुपये और एक किलो का भाव लगभग 2,84,900 रुपये के आसपास दर्ज किया गया। वहीं चेन्नई और हैदराबाद जैसे शहरों में चांदी की कीमत थोड़ी ज्यादा रही जहां 1 किलो का रेट लगभग 2,94,900 रुपये तक पहुंचा।

    वैश्विक बाजार की बात करें तो मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर कीमती धातुओं के बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी की कीमत 83.40 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई है। वहीं मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 0.11 प्रतिशत की हल्की बढ़त के साथ करीब 2,68,569 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में भी चांदी के दामों में दबाव बना रहा। अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार यहां चांदी का भाव गिरकर लगभग 2,71,700 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। कारोबारियों का कहना है कि ऊंचे स्तर पर लगातार दूसरे दिन मुनाफावसूली होने से बाजार में कमजोरी बनी हुई है।

    अगर पिछले कुछ हफ्तों का आंकड़ा देखें तो चांदी में और भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत 3.86 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई थी। इसके बाद से बाजार में लगातार गिरावट आई और केवल 36 दिनों के भीतर चांदी करीब 1,25,210 रुपये सस्ती हो चुकी है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं। इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति कॉमा आयात शुल्क कॉमा जीएसटी कॉमा अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातुओं की मांग और आपूर्ति जैसे कारक शामिल होते हैं।

  • तेल महंगा बेरोजगारी बढ़ी निवेशकों में डर अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली डाउ जोंस गिरा

    तेल महंगा बेरोजगारी बढ़ी निवेशकों में डर अमेरिकी बाजार में भारी बिकवाली डाउ जोंस गिरा

    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ती तनातनी के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की चिंता और अनिश्चितता के कारण 6 मार्च को कारोबार के अंत में प्रमुख अमेरिकी सूचकांक डाउ जोंस 453 अंक गिरकर 47,501 के स्तर पर बंद हुआ।

    केवल डाउ जोंस ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख इंडेक्स भी दबाव में नजर आए। टेक्नोलॉजी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाला नैस्डैक कंपोजिट 361 अंक यानी करीब 1.59 प्रतिशत गिरकर 22,387 पर बंद हुआ। वहीं व्यापक बाजार का संकेत देने वाला एस एंड पी 500 इंडेक्स 90 अंक की गिरावट के साथ 6,740 के स्तर पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों में बढ़ती अनिश्चितता और कमजोर आर्थिक संकेतकों ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई और कुछ समय के लिए 91 डॉलर से ऊपर भी चली गई। यह अप्रैल 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है और यही कारण है कि निवेशक बाजार में सतर्क रुख अपना रहे हैं।

    इसी बीच अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़ों ने भी निवेशकों की चिंता को बढ़ा दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले महीने रोजगार वृद्धि उम्मीद से कम रही। गैर कृषि क्षेत्र में नौकरियों के अवसर घटे हैं जबकि बेरोजगारी दर बढ़कर 4.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विश्लेषकों का मानना है कि श्रम बाजार की कमजोरी आर्थिक गतिविधियों में संभावित सुस्ती का संकेत हो सकती है।

    इन परिस्थितियों के बीच बाजार में स्टैगफ्लेशन को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। स्टैगफ्लेशन वह स्थिति होती है जब आर्थिक विकास धीमा पड़ जाता है लेकिन महंगाई लगातार बढ़ती रहती है। बढ़ती तेल कीमतें और कमजोर रोजगार आंकड़े इस आशंका को और मजबूत कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति बन सकती है।

    इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इस साल फेडरल रिजर्व कई बार ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। लेकिन महंगाई बढ़ने की संभावना के कारण अब दरों में कटौती सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें शेयर बाजार के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि इससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कम हो जाती है।

    जहां अमेरिकी बाजारों में दबाव देखने को मिला वहीं एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख रहा। जापान दक्षिण कोरिया और हांगकांग के प्रमुख शेयर सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए।

    वैश्विक संकेतों का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा गिरकर 78,919 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,450 के स्तर पर आ गया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है और महंगाई की आशंका मजबूत होती है तो निवेशक अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। ऐसे माहौल में शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।
  • निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम

    निवेशकों के चार दिन में 13 लाख करोड़ रुपये डूबे, ईरान-इजरायल युद्ध के बीच शेयर बाजार में कोहराम


    नई दिल्ली। ईरान-इजरायल युद्ध के लगातार खिंचने के असर से भारतीय शेयर बाजार में पिछले चार कारोबारी सत्रों में भारी गिरावट आई है। निवेशकों की कुल संपत्ति इस दौरान 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गई है। कारोबारी हफ्ते के आखिरी दिन शुक्रवार को भी सेंसेक्स और निफ्टी में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी 315.45 अंक गिरकर 24,450.45 पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स करीब 1100 अंक टूटकर 79,000 के नीचे बंद हुआ। शुक्रवार को ही लगभग 3 लाख करोड़ का मार्केट कैप स्वाहा हो गया।

    बैंकिंग और बड़े शेयरों पर दबाव

    सबसे अधिक दबाव ICICI बैंक के शेयर पर रहा जो 3.39 प्रतिशत गिरा। इसके अलावा एक्सिस बैंक अल्ट्राटेक सीमेंट HDFC बैंक और SBI के शेयरों में भी 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 27 फरवरी को 463.25 लाख करोड़ रुपये था जो अब घटकर 449.79 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने भारतीय बाजार में भारी बिकवाली की है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक अक्सर सुरक्षित बाजारों की ओर रुख करते हैं जिससे उभरते बाजारों जैसे भारत में दबाव बढ़ जाता है। इसके अलावा कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की गिरावट को तेज किया। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।

    लार्ज-कैप और 52-वीक लो पर शेयर

    चार दिन की बिकवाली में सबसे अधिक दबाव बड़े शेयरों यानी लार्ज-कैप स्टॉक्स पर पड़ा जिससे सेंसेक्स में ज्यादा गिरावट आई। बीएसई 500 इंडेक्स के कई शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर पर आ गए। इनमें ACC अंबुजा सीमेंट एल्काइल एमिन्स केमिकल्स साइएंट बर्जर पेंट्स इंडिया कोहांस लाइफसाइंसेज इंद्रप्रस्थ गैस एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस बिरला कॉर्पोरेशन जेके लक्ष्मी सीमेंट जुबिलेंट फार्मावा प्रॉक्टर एंड गैंबल हाइजीन एंड हेल्थ केयर और सोनाटा सॉफ्टवेयर शामिल हैं।

    विशेषज्ञों की राय और भविष्य का अनुमान

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट करीब 2–3 प्रतिशत के करेक्शन के रूप में देखी जा सकती है। हालांकि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ा है और बाजार पहले ही लगभग 8 प्रतिशत टूट चुका है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर भी पैदा कर सकती है। यदि वैश्विक हालात स्थिर होते हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन पर रहेगी।

  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संकट के बीच स्वर्ण भंडार में तेज उछाल से देश का विदेशी मुद्रा भंडार 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में 4.885 अरब डॉलर बढ़कर 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि इससे पिछले हफ्ते में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 2.11 अरब डॉलर घटकर 723.60 अरब डॉलर रहा था। इससे पहले इस वर्ष 13 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार 725.72 अरब डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

    आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 56.1 करोड़ डॉलर बढ़कर 573.12 अरब डॉलर हो गईं। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 4.14 अरब डॉलर बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया।

    केंद्रीय बैंक के अनुसार इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 2.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.87 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 15.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

  • शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में, बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड..

    शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में, बैंकिंग और रियल्टी शेयर लीड..


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में कमजोर दिखा और दोपहर तक लाल निशान में रहा। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 588 अंक यानी 0.72 प्रतिशत फिसलकर 79,427 पर और निफ्टी 154 अंक यानी 0.62 प्रतिशत कमजोरी के साथ 24,612 पर कारोबार कर रहा था।

    इस गिरावट की अगुवाई बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने की। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.85 प्रतिशत और निफ्टी बैंक इंडेक्स 1.31 प्रतिशत कमजोर हुए। इसके अलावा ऑटो, सर्विसेज और कंज्यूमर सेक्टर पर भी दबाव देखा गया। हालांकि, डिफेंस, एनर्जी, पीएसई, ऑयल एंड गैस, कमोडिटी और मेटल इंडेक्स हरे निशान में बने रहे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे मुख्य कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध है। युद्ध के लंबा चलने से वैश्विक एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे निवेशकों का सेंटीमेंट नकारात्मक हो गया है।

    युद्ध के प्रभाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत 80.39 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 84.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से हटकर सुरक्षित निवेश की ओर रुख कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक कॉमेक्स पर सोने की कीमत 0.81 प्रतिशत बढ़कर 5,120 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.96 प्रतिशत मजबूत होकर 84.61 डॉलर प्रति औंस पर थी।

    अमेरिकी बाजार में भी गिरावट ने भारतीय बाजार की कमजोरी को बढ़ावा दिया। गुरुवार को डाओ इंडेक्स 1.61 प्रतिशत और नैस्डैक 0.26 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। इससे एफआईआई और घरेलू निवेशकों के बीच बिकवाली का दबाव बढ़ा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। गुरुवार को एफआईआई ने 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी शेयर बेचे। इस बिकवाली ने भारतीय बाजार में लगातार कमजोरी का माहौल बनाया और निवेशकों में सतर्कता बढ़ा दी।

    विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों की बेचैनी का असर अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है, खासकर जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में स्थिरता नहीं आती। ऐसे समय में बैंकिंग, रियल्टी और ऑटो सेक्टर पर दबाव बना रहेगा, जबकि सोना, चांदी और एनर्जी सेक्टर निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बने