Category: Economy

  • आईओएल में नौकरी का बड़ा मौका, इंजीनियर और मैनेजमेंट पदों पर 6 वैकेंसी, आवेदन 15 मई तक

    आईओएल में नौकरी का बड़ा मौका, इंजीनियर और मैनेजमेंट पदों पर 6 वैकेंसी, आवेदन 15 मई तक

    नई दिल्ली। देहरादून स्थित इंडिया ऑप्टेल लिमिटेड ने युवाओं के लिए रोजगार का एक नया अवसर जारी किया है। कंपनी ने प्रोजेक्ट इंजीनियर सहित कुल 6 पदों पर भर्ती की घोषणा की है, जो अनुबंध आधारित होगी। इस भर्ती में तकनीकी और प्रबंधन दोनों क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर शामिल हैं।

    जारी की गई भर्ती में प्रोजेक्ट इंजीनियर, सहायक प्रोजेक्ट मैनेजर और सहायक प्रोजेक्ट इंजीनियर जैसे पद शामिल हैं। प्रत्येक पद पर दो-दो रिक्तियां निर्धारित की गई हैं। इन पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 15 मई तय की गई है।इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फिजिक्स या मैनेजमेंट से जुड़ी डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों के साथ बीई, बीटेक या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा अनिवार्य रखा गया है।

    उम्मीदवारों की आयु सीमा पद के अनुसार निर्धारित की गई है, जिसमें न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 30 से 40 वर्ष के बीच हो सकती है। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। इसमें पहले आवेदन की स्क्रीनिंग की जाएगी, उसके बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया जाएगा। अंतिम चयन मेरिट सूची और दस्तावेज सत्यापन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार 40,000 रुपये से लेकर 1,80,000 रुपये प्रति माह तक का वेतन दिया जाएगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को निर्धारित फॉर्म डाउनलोड कर उसे सावधानीपूर्वक भरना होगा। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों को संलग्न कर फॉर्म को तय पते पर डाक के माध्यम से भेजना होगा। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन की एक प्रति भविष्य के लिए सुरक्षित रखें।

    यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जो तकनीकी और प्रबंधन क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित संगठन के साथ जुड़कर अनुभव हासिल करना चाहते हैं।

  • निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर

    निवेशकों की बिकवाली भारी पड़ी, एक हफ्ते में सोना 500 और चांदी 7,000 रुपये से ज्यादा कमजोर


    नई दिल्ली।इस सप्ताह कीमती धातुओं के बाजार में कमजोरी का माहौल देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों ही मुनाफावसूली के दबाव में आ गए। शुरुआती मजबूती के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर अपनी होल्डिंग बेचनी शुरू कर दी, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन हल्की रिकवरी देखने को मिली, लेकिन पूरे सप्ताह का रुझान गिरावट की ओर ही रहा।

    सोने की कीमतों में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.34 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। हफ्ते के अंत में इसमें मामूली सुधार हुआ और कीमत करीब 1,52,799 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई। दिन के दौरान सोने ने 1,53,164 रुपये का उच्च स्तर और 1,50,750 रुपये का निचला स्तर छुआ, जो बाजार में जारी अस्थिरता को दर्शाता है। पूरे सप्ताह में सोना करीब 523 रुपये सस्ता हो गया, जो यह बताता है कि निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

    चांदी के मामले में गिरावट और ज्यादा गहरी रही। एक हफ्ते के दौरान इसकी कीमत में 7,000 रुपये से अधिक की कमी दर्ज की गई। हालांकि अंतिम कारोबारी दिन इसमें तेजी आई और यह करीब 2,44,321 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,45,555 रुपये का उच्च स्तर और 2,38,291 रुपये का निचला स्तर छुआ, जिससे इसके दामों में तेज उतार-चढ़ाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह मुनाफावसूली रही। जब कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो निवेशक लाभ सुरक्षित करने के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर चल रहे घटनाक्रमों ने भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक हल निकलने की उम्मीदों ने सुरक्षित निवेश की मांग को थोड़ा कमजोर किया, जिससे सोने और चांदी पर दबाव पड़ा।

    हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने सोने को कुछ समर्थन दिया, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाली संपत्तियों की आकर्षण क्षमता बढ़ती है। इसके बावजूद बाजार में मजबूत तेजी नहीं आ सकी, क्योंकि निवेशक अभी भी अनिश्चित परिस्थितियों को लेकर सतर्क हैं। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिली, लेकिन यह तेजी को स्थायी रूप नहीं दे सकी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार संतुलन की स्थिति में है, जहां न तो तेज गिरावट की आशंका है और न ही मजबूत तेजी के स्पष्ट संकेत। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, डॉलर की चाल और आर्थिक नीतियां कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी। ऐसे में निवेशकों को सावधानी के साथ रणनीति बनानी होगी, क्योंकि बाजार में अस्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।

  • टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..

    टेक्नोलॉजी ने बदली निवेश की तस्वीर, ट्रेडिंग और सलाह का पूरा सिस्टम हुआ डिजिटल..


    नई दिल्ली। 
    वित्तीय बाजार आज जिस तेजी से बदल रहे हैं, उसका सबसे बड़ा कारण तकनीकी प्रगति को माना जा रहा है। हाल ही में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यक्रम के दौरान यह बात सामने आई कि निवेश, ट्रेडिंग और वित्तीय सलाह देने के पारंपरिक तरीके अब लगभग पूरी तरह डिजिटल ढांचे में बदल चुके हैं। यह बदलाव सिर्फ तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेशकों के व्यवहार और बाजार की संरचना में भी गहरा परिवर्तन आया है।

    आज का निवेशक पहले की तुलना में कहीं अधिक डिजिटल रूप से सक्रिय और जागरूक है। मोबाइल और इंटरनेट की आसान पहुंच ने निवेश को हर व्यक्ति के लिए सरल बना दिया है। अब लोग बिना किसी भौतिक प्रक्रिया के सीधे बाजार से जुड़ सकते हैं और तुरंत निर्णय ले सकते हैं। इसी कारण नए निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है और बाजार का दायरा भी व्यापक हुआ है।

    तकनीक ने ट्रेडिंग सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जहां निवेश के लिए लंबी प्रक्रियाएं और मध्यस्थों पर निर्भरता होती थी, वहीं अब सब कुछ कुछ सेकंड में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए संभव हो गया है। इसके साथ ही निवेश सलाह और वित्तीय सेवाएं भी ऑनलाइन माध्यमों पर शिफ्ट हो गई हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों में सुधार हुआ है।

    इस बदलाव का असर केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूंजी प्रवाह भी अब वैश्विक स्तर पर अधिक सक्रिय हो गया है। निवेशक अब देश की सीमाओं से बाहर जाकर भी अवसरों की तलाश कर रहे हैं। इससे बाजार अधिक जुड़ा हुआ और गतिशील बन गया है, लेकिन इसके साथ जोखिमों का स्वरूप भी जटिल हो गया है क्योंकि अब वैश्विक घटनाओं का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ता है।

    भारतीय शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि यह अब केवल आंकड़ों का खेल नहीं रह गया है। करोड़ों निवेशकों की भागीदारी और हजारों सूचीबद्ध कंपनियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि बाजार में विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में बाजार पूंजीकरण और निवेश साधनों में भी तेज वृद्धि देखी गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिली है।

    हालांकि, इस तेजी के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब बाजार तेजी से बढ़ता है और तकनीक हर प्रक्रिया को आसान बनाती है, तब नियमों और निगरानी की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। जरूरत इस बात की है कि नवाचार और सुरक्षा दोनों के बीच सही संतुलन बना रहे, ताकि निवेशकों का भरोसा कायम रहे और बाजार स्थिरता के साथ आगे बढ़े।

    अंत में यह कहा जा सकता है कि तकनीक ने निवेश की दुनिया को पूरी तरह नया रूप दे दिया है। अब बाजार केवल खरीद-बिक्री का स्थान नहीं रहा, बल्कि यह एक डिजिटल इकोसिस्टम बन चुका है, जहां जानकारी, गति और जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

  • मेटा में AI जॉब्स का क्रेज, इंजीनियरों को मिल रहा रिकॉर्डतोड़ वेतन….

    मेटा में AI जॉब्स का क्रेज, इंजीनियरों को मिल रहा रिकॉर्डतोड़ वेतन….


    नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने नौकरी और कमाई के पैटर्न को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में देखने को मिल रहा है, जहां AI और मशीन लर्निंग इंजीनियरों को बेहद ऊंचे पैकेज दिए जा रहे हैं। यह सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि एक हाई-वैल्यू स्किल बन चुकी है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में काम करने वालों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

    मेटा में AI इंजीनियरों की कमाई कई स्तरों पर तय होती है, लेकिन शुरुआती बेस सैलरी ही इतनी ज्यादा है कि यह आमतौर पर करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। मशीन लर्निंग और AI से जुड़े इंजीनियरों को सालाना लाखों डॉलर तक की बेस सैलरी दी जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में करोड़ों रुपये के बराबर बैठती है। यह दिखाता है कि कंपनी अपने एआई टैलेंट को सबसे महत्वपूर्ण संसाधन मान रही है।

    सिर्फ इंजीनियरिंग रोल्स ही नहीं, बल्कि डेटा साइंस और रिसर्च से जुड़े पदों पर भी भारी वेतन दिया जा रहा है। डेटा से जुड़ी रणनीति बनाने वाले प्रोफेशनल्स की सैलरी भी करोड़ों रुपये तक पहुंच रही है। इससे यह साफ होता है कि सिर्फ कोडिंग ही नहीं, बल्कि डेटा को समझने और उसका उपयोग करने वाले लोगों की भी भारी मांग है।

    मेटा में सीनियर लेवल पर काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की कमाई भी काफी ज्यादा है। अनुभव और जिम्मेदारी बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी बड़ा उछाल देखने को मिलता है। कई मामलों में कुल पैकेज कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है, जिससे यह इंडस्ट्री दुनिया की सबसे ज्यादा भुगतान देने वाली इंडस्ट्री में शामिल हो जाती है।

    भारत में भी मेटा अपने इंजीनियरों को बहुत आकर्षक पैकेज ऑफर करती है। यहां शुरुआती स्तर पर ही अच्छी सैलरी मिलती है, जबकि अनुभवी AI इंजीनियरों के लिए यह पैकेज करोड़ों रुपये तक जा सकता है। यह भारत के टेक सेक्टर में सबसे हाई-पेइंग जॉब्स में से एक माना जाता है।

    इस पूरे पैकेज में सिर्फ बेस सैलरी ही नहीं बल्कि स्टॉक ऑप्शंस और बोनस भी शामिल होते हैं। इन्हीं अतिरिक्त फायदों के कारण कुल कमाई और भी ज्यादा बढ़ जाती है। कई सीनियर इंजीनियरों की कुल सालाना कमाई कई करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है, जिससे यह क्षेत्र और भी आकर्षक बन जाता है।

  • महंगाई के संकेत सोना चांदी गिरे लेकिन बाजार में तेजी पेट्रोल डीजल के दाम जस के तस

    महंगाई के संकेत सोना चांदी गिरे लेकिन बाजार में तेजी पेट्रोल डीजल के दाम जस के तस


    नई दिल्ली । देश में 25 अप्रैल 2026 को सोना चांदी और ईंधन की कीमतों को लेकर मिली जुली स्थिति देखने को मिल रही है। जहां एक ओर सराफा बाजार में गिरावट दर्ज की गई है वहीं कमोडिटी बाजार में तेजी का रुख बना हुआ है। इस बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं जिससे आम लोगों को थोड़ी राहत जरूर मिली है।

    अखिल भारतीय सराफा संघ के अनुसार नई दिल्ली में 24 कैरेट सोना घटकर लगभग 155900 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है और यह करीब 247000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है। हालांकि इसके उलट Multi Commodity Exchange यानी एमसीएक्स पर सोना और चांदी दोनों में तेजी दर्ज की गई है। यहां सोना करीब 152830 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग 244845 रुपए प्रति किलो के आसपास ट्रेड करती नजर आई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इन कीमतों में उतार चढ़ाव के पीछे कई वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। डॉलर की मजबूती पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार को प्रभावित कर रही हैं। इन कारणों से निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है और इसका सीधा असर कीमती धातुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।

    ईंधन की बात करें तो देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपए और डीजल 87.67 रुपए प्रति लीटर बना हुआ है। मुंबई में पेट्रोल 103.54 रुपए और डीजल 90.03 रुपए है जबकि चेन्नई में पेट्रोल 100.80 रुपए और डीजल 92.39 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है।

    इस बीच बाजार में एक और चिंता पाम ऑयल की कमी को लेकर सामने आई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और खासकर इंडोनेशिया से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। यदि यह स्थिति बनी रहती है तो आने वाले समय में खाद्य तेल समेत रोजमर्रा की कई वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

    एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है हालांकि पिछले कुछ महीनों में इसमें बढ़ोतरी देखी गई थी। कुल मिलाकर जहां पेट्रोल डीजल के दाम स्थिर हैं वहीं सोना चांदी में उतार चढ़ाव जारी है और वैश्विक परिस्थितियों के चलते महंगाई बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है।

  • रिलायंस का दमदार प्रदर्शन चौथी तिमाही में 20589 करोड़ मुनाफा 6 रुपए डिविडेंड का ऐलान

    रिलायंस का दमदार प्रदर्शन चौथी तिमाही में 20589 करोड़ मुनाफा 6 रुपए डिविडेंड का ऐलान


    नई दिल्ली । रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत दिया है। कंपनी ने जनवरी से मार्च तिमाही के लिए 20589 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। साथ ही निवेशकों को 6 रुपए प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान भी किया गया है जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी के नेतृत्व में आरआईएल ने कई क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। हालांकि साल दर साल आधार पर शुद्ध मुनाफे में लगभग 8.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है लेकिन इसके बावजूद कंपनी की कुल आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। तिमाही के दौरान कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू बढ़कर 325290 करोड़ रुपए तक पहुंच गया जो करीब 12.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    कंपनी के ऑयल टू केमिकल डिजिटल सर्विसेज और रिटेल सेगमेंट ने इस वृद्धि में अहम योगदान दिया है। खासकर डिजिटल कारोबार में तेजी से विस्तार देखने को मिला है। जियो प्लेटफॉर्म्स का ईबीआईटीडीए 17.9 प्रतिशत बढ़कर 20060 करोड़ रुपए हो गया है। जियो के कुल ग्राहकों की संख्या 52.4 करोड़ से अधिक हो चुकी है जिनमें 26.8 करोड़ से ज्यादा 5जी यूजर्स शामिल हैं। यह भारत के डिजिटल इकोसिस्टम में कंपनी की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।

    रिटेल सेगमेंट में भी कंपनी ने स्थिर प्रदर्शन किया है। रिलायंस रिटेल का ईबीआईटीडीए 3.1 प्रतिशत बढ़कर 6921 करोड़ रुपए रहा और देशभर में इसके स्टोर्स की संख्या 20000 के पार पहुंच गई है। यह विस्तार कंपनी की आक्रामक ग्रोथ रणनीति को दिखाता है।

    हालांकि तेल और गैस सेगमेंट में थोड़ी कमजोरी देखने को मिली है। इसका मुख्य कारण केजी डी6 बेसिन में गैस उत्पादन में प्राकृतिक गिरावट बताया गया है जिससे इस हिस्से की आय प्रभावित हुई है। इसके बावजूद कंपनी अन्य सेगमेंट्स की बदौलत संतुलन बनाए रखने में सफल रही है।

    पूरे वित्त वर्ष 2025 26 की बात करें तो कंपनी ने रिकॉर्ड 95610 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट हासिल किया है जो पिछले वर्ष की तुलना में 18.3 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान कंपनी का कुल पूंजीगत खर्च 144271 करोड़ रुपए रहा है जो भविष्य की विस्तार योजनाओं और नए प्रोजेक्ट्स में निवेश को दर्शाता है।

    मुकेश अंबानी ने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह कंपनी के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने यह भी बताया कि जियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के माध्यम से देश के डिजिटल विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।

    कुल मिलाकर रिलायंस इंडस्ट्रीज का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कंपनी पारंपरिक कारोबार के साथ साथ डिजिटल और रिटेल जैसे नए क्षेत्रों में भी मजबूत पकड़ बना रही है और आने वाले समय में निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पैदा कर सकती है।

  • आर्थिक रिश्तों में नया अध्याय भारत न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर 27 अप्रैल को मुहर

    आर्थिक रिश्तों में नया अध्याय भारत न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर 27 अप्रैल को मुहर


    नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से पहले केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने न्यूजीलैंड के ट्रेड और इन्वेस्टमेंट मंत्री टॉड मैक्ले का भारत में स्वागत किया। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच 27 अप्रैल 2026 को होने वाले समझौते से पहले हुई, जिसे आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

    मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह दौरा भारत और न्यूजीलैंड के बीच मजबूत होते भरोसे और साझा आर्थिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। उन्होंने इस समझौते को द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को गति देने वाला अहम कदम बताया।

    इस बीच न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने भी पहले ही इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से दोनों देशों को अपने व्यापार का विस्तार करने और एक दूसरे के बाजार तक बेहतर पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। खास तौर पर न्यूजीलैंड के निर्यातकों को भारतीय बाजार में नए अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    लक्सन के अनुसार, इस समझौते के तहत व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम किया जाएगा और धीरे धीरे टैरिफ में भी कमी लाई जाएगी। इससे न केवल सामान का आदान प्रदान आसान होगा बल्कि दोनों देशों के व्यवसायों के लिए प्रतिस्पर्धा के नए अवसर भी खुलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि इससे न्यूजीलैंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

    एफटीए के तहत खास तौर पर उन क्षेत्रों को लाभ मिलने की संभावना है जहां तकनीकी और औद्योगिक सहयोग की गुंजाइश है। न्यूजीलैंड की कंपनियां जो मरीन जेट सिस्टम जैसे विशेष उत्पाद बनाती हैं, उन्हें भारतीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है। वहीं भारत के लिए भी यह समझौता निर्यात को बढ़ाने और वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर देगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। साथ ही यह साझेदारी इंडो पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को भी मजबूती देगी।

    आने वाले दिनों में इस समझौते पर आधिकारिक मुहर लगने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश इस अवसर का किस तरह लाभ उठाते हैं और वैश्विक व्यापार में अपनी भूमिका को कैसे मजबूत करते हैं।

  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • नौकरी से निकाले जाने पर मिलते हैं ये कानूनी अधिकार, जानिए पूरी प्रक्रिया….

    नौकरी से निकाले जाने पर मिलते हैं ये कानूनी अधिकार, जानिए पूरी प्रक्रिया….


    नई दिल्ली।नौकरी के क्षेत्र में आज के समय में अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। कई बार कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक नौकरी से निकाल दिया जाता है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां सामने आती हैं। ऐसी स्थिति में अधिकतर लोग घबरा जाते हैं, लेकिन यह जानना जरूरी है कि कर्मचारियों के अधिकार कानून द्वारा सुरक्षित होते हैं।

    भारत में नौकरी से संबंधित नियम श्रम कानूनों के तहत निर्धारित किए जाते हैं। अधिकतर कंपनियों में नियुक्ति पत्र में नोटिस पीरियड स्पष्ट रूप से लिखा होता है। इसका मतलब यह है कि यदि किसी कर्मचारी की सेवाएं समाप्त की जाती हैं, तो कंपनी को पहले से निर्धारित अवधि का नोटिस देना होता है या उसके बदले में वेतन देना अनिवार्य होता है। यदि कंपनी ऐसा नहीं करती, तो वह कानूनी रूप से गलत मानी जाती है और कर्मचारी अपने अधिकारों की मांग कर सकता है।

    स्थायी कर्मचारियों के मामले में यह नियम और भी सख्ती से लागू होता है। कई बार कंपनियां अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करतीं, ऐसे में कर्मचारी के पास कानूनी विकल्प मौजूद रहते हैं। नौकरी समाप्त होने के बाद कर्मचारी को उसकी बकाया सैलरी, अवकाश का भुगतान और अन्य देय राशि समय पर मिलना जरूरी होता है। इसे फुल एंड फाइनल सेटलमेंट कहा जाता है, जिसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करना कंपनी की जिम्मेदारी होती है।

    यदि किसी कर्मचारी को लगता है कि उसकी नौकरी गलत तरीके से समाप्त की गई है, तो वह श्रम विभाग या संबंधित न्यायिक मंच पर शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा कानूनी नोटिस भेजकर भी अपने अधिकारों की मांग की जा सकती है। ऐसे मामलों में कानूनी प्रक्रिया कर्मचारी के हितों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत माध्यम बनती है।

    निजी क्षेत्र और आईटी सेक्टर में भी ये नियम लागू होते हैं, खासकर तब जब कंपनी अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करती है। कई बार जानकारी की कमी के कारण कर्मचारी अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पाते, जिससे उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।

  • भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 703 अरब डॉलर के पार, आरबीआई के आंकड़े जारी..

    भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 703 अरब डॉलर के पार, आरबीआई के आंकड़े जारी..


    नई दिल्ली।पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी एक सकारात्मक खबर सामने आई है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 703.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह बढ़ोतरी हाल के सप्ताह में दर्ज की गई है, जिसमें भंडार में लगभग 2.3 अरब डॉलर की वृद्धि देखी गई है। यह संकेत देता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद देश की वित्तीय स्थिति स्थिर बनी हुई है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ महीनों से इसमें उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता के कारण पहले भंडार पर दबाव बना था, जिससे इसमें गिरावट भी दर्ज की गई थी। हालांकि हाल के आंकड़े बताते हैं कि स्थिति अब धीरे-धीरे संतुलन की ओर बढ़ रही है।

    कुछ समय पहले भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद वैश्विक तनाव और मुद्रा बाजार में बदलाव के चलते इसमें कमी आई थी। अब फिर से इसमें सुधार देखने को मिल रहा है, जो आर्थिक स्थिरता के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    इस दौरान देश के सोने के भंडार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 122 अरब डॉलर से अधिक के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा विशेष आहरण अधिकार और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत की स्थिति में भी हल्का सुधार देखने को मिला है। ये सभी संकेत मिलकर देश की बाहरी आर्थिक मजबूती को दर्शाते हैं।

    विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार होता है। यह आयात भुगतान, विदेशी व्यापार और मुद्रा स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। मजबूत भंडार से देश को वैश्विक झटकों का सामना करने की क्षमता मिलती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

    हालिया बढ़ोतरी यह संकेत देती है कि वैश्विक दबाव के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति स्थिर बनी हुई है और धीरे-धीरे और मजबूत हो रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं, लेकिन विदेशी मुद्रा भंडार में यह सुधार आर्थिक संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।