Category: Economy

  • पेट्रोल-डीजल स्थिरता के बीच कीमती धातुओं में गिरावट और वैश्विक दबाव ने बढ़ाई आर्थिक हलचल

    पेट्रोल-डीजल स्थिरता के बीच कीमती धातुओं में गिरावट और वैश्विक दबाव ने बढ़ाई आर्थिक हलचल


    नई दिल्ली।  में देश के ऊर्जा और कीमती धातु बाजार में इन दिनों स्थिरता और उतार-चढ़ाव का मिश्रित प्रभाव देखने को मिल रहा है। एक ओर पेट्रोल और डीजल की कीमतें प्रमुख शहरों में स्थिर बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सोना और चांदी के दामों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इस स्थिति ने आम उपभोक्ताओं से लेकर निवेशकों तक सभी को प्रभावित किया है और बाजार की दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    देश के बड़े महानगरों में ईंधन की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। इससे उपभोक्ताओं को अल्पकालिक राहत जरूर मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिरता लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां आने वाले समय में ईंधन दरों को प्रभावित कर सकती हैं।

    ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा है। कई क्षेत्रों में चल रहे तनाव और अनिश्चितता का असर सीधे तौर पर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश में इसका प्रभाव रिफाइनिंग लागत और आयात बिल पर साफ दिखाई देता है, जिससे भविष्य में कीमतों में बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    दूसरी ओर, सोने और चांदी के बाजार में गिरावट का दौर जारी है। सोने की कीमतों में लगातार कमी दर्ज की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी का अवसर तो बना है, लेकिन निवेशकों के बीच चिंता भी बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक वित्तीय बाजार में बदलाव के कारण सोने की मांग प्रभावित हो रही है।

    चांदी के दामों में भी कमजोरी देखी जा रही है। औद्योगिक मांग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव के कारण चांदी की कीमतें भी नीचे आ रही हैं। इससे कीमती धातुओं का बाजार फिलहाल दबाव में नजर आ रहा है और निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि ईंधन की कीमतों में स्थिरता ने उपभोक्ताओं को राहत दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अस्थायी हो सकती है। वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव आने वाले समय में ईंधन दरों को प्रभावित कर सकता है। इसी तरह सोना और चांदी में गिरावट के बाद भी बाजार में अचानक बदलाव की संभावना बनी रहती है।

    वर्तमान स्थिति में बाजार संतुलन की अवस्था में दिखाई दे रहा है, लेकिन वैश्विक आर्थिक कारक इसे किसी भी समय प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों के लिए सतर्क रहना और सोच-समझकर निर्णय लेना आवश्यक माना जा रहा है

  • BSE Limited की निवेशकों को चेतावनी, सीईओ सुंदररामन राममूर्ति के नाम पर फर्जी डीपफेक वीडियो से रहें सावधान

    BSE Limited की निवेशकों को चेतावनी, सीईओ सुंदररामन राममूर्ति के नाम पर फर्जी डीपफेक वीडियो से रहें सावधान


    नई दिल्ली ।  शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। देश के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज BSE Limited ने निवेशकों को एक खतरनाक फर्जीवाड़े से सावधान रहने को कहा है। दरअसल, कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ Sundararaman Ramamurthy के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर एक डीपफेक वीडियो वायरल किया जा रहा है, जिसमें उन्हें शेयर बाजार में निवेश की सलाह देते हुए दिखाया गया है।
    डीपफेक वीडियो से गुमराह करने की कोशिश
    बीएसई ने साफ शब्दों में कहा है कि यह वीडियो पूरी तरह नकली है और इसे आधुनिक डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किया गया है। वीडियो में निवेशकों को झूठे वादों के जरिए लुभाया जा रहा है, जैसे कम समय में भारी मुनाफा कमाने का दावा। यह तरीका लोगों के भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें जाल में फंसाने की कोशिश है।
    व्हाट्सएप-टेलीग्राम ग्रुप के जरिए ठगी
    फर्जी वीडियो में लोगों को कुछ खास शेयरों में निवेश करने और व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप जॉइन करने के लिए उकसाया जा रहा है। इन ग्रुप्स में ‘एक्सक्लूसिव टिप्स’ देने का लालच दिया जाता है, जो पूरी तरह भ्रामक और धोखाधड़ी का हिस्सा होता है। बीएसई ने स्पष्ट किया कि उसका कोई भी अधिकारी इस तरह की सलाह नहीं देता।
    चार महीने में चौथी घटना, बढ़ता खतरा
    एक्सचेंज के मुताबिक, पिछले चार महीनों में यह चौथी बार है जब इस तरह का मामला सामने आया है। इससे साफ है कि ठग लगातार नई तकनीकों का इस्तेमाल कर निवेशकों को निशाना बना रहे हैं। डीपफेक जैसे टूल्स ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है।
    बीएसई की अपील: सतर्क रहें, शेयर न करें
    बीएसई ने निवेशकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी वीडियो, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और उन्हें आगे शेयर करने से भी बचें। किसी भी निवेश से पहले जानकारी की पुष्टि केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही करें।
    सेबी के साथ जागरूकता अभियान
    एक्सचेंज ने बताया कि वह Securities and Exchange Board of India (सेबी) के निर्देशों के तहत लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है। इसका मकसद लोगों को फर्जी स्कीम, गलत निवेश सलाह और ‘फिनफ्लुएंसर’ जैसे नए खतरों से बचाना है।
    सख्त कार्रवाई की तैयारी
    बीएसई ने कहा कि इस तरह के फर्जी कंटेंट को हटाने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। निवेशकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की धोखाधड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • Nirmala Sitharaman ने जताया ‘मिथोस AI’ से अभूतपूर्व खतरा, बैंकों को सतर्क रहने की सलाह

    Nirmala Sitharaman ने जताया ‘मिथोस AI’ से अभूतपूर्व खतरा, बैंकों को सतर्क रहने की सलाह


    नई दिल्ली ।  तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब सिर्फ अवसर ही नहीं, बल्कि बड़े जोखिम भी लेकर आ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने ‘मिथोस एआई’ को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह नया एआई मॉडल बैंकिंग सेक्टर के लिए “अभूतपूर्व खतरा” बन सकता है, इसलिए सभी बैंकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत है।
    एआई का बढ़ता प्रभाव और खतरे
    वित्त मंत्री ने मीडिया से बातचीत में बताया कि अमेरिकी कंपनी Anthropic द्वारा विकसित ‘मिथोस एआई’ अपनी उन्नत क्षमताओं के कारण दुनियाभर में चर्चा में है। हालांकि इसकी ताकत जितनी बड़ी है, उससे जुड़े जोखिम भी उतने ही गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के एआई मॉडल साइबर फ्रॉड, डेटा चोरी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे मामलों को और जटिल बना सकते हैं।
    सरकार की नजर, वैश्विक स्तर पर सहयोग
    सीतारमण ने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले को हल्के में नहीं ले रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ मिलकर इस तकनीक के जोखिमों का आकलन कर रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि समय रहते जरूरी कदम उठाए जाएं, ताकि बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित बना रहे।
    बैंकों को चेतावनी: अपडेट करें सुरक्षा ढांचा
    उन्होंने कहा कि भारतीय बैंक फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं, लेकिन तेजी से बदलती तकनीक के कारण मौजूदा नियम और सुरक्षा व्यवस्था को अपडेट करना बेहद जरूरी हो गया है। बैंकों को आपसी सहयोग बढ़ाने और नई चुनौतियों से मिलकर निपटने की सलाह दी गई है। इस दिशा में भारतीय बैंक संघ (IBA) को समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है।
    मजबूत अर्थव्यवस्था दे रही सहारा
    इससे पहले भी वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक मजबूती पर भरोसा जताया था। उन्होंने कहा कि देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और आर्थिक स्थिति स्थिर है, जिससे Reserve Bank of India को नीतिगत फैसले लेने की पर्याप्त स्वतंत्रता मिलती है।
    नीतिगत फैसलों के लिए पर्याप्त गुंजाइश
    6 अप्रैल को National Institute of Public Finance and Policy (NIPFP) के कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि भारत के पास सरकारी पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) जारी रखने, जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में कटौती करने और संकटग्रस्त सेक्टर को सहायता देने की पर्याप्त क्षमता है। उन्होंने इसे पिछले एक दशक के वित्तीय अनुशासन का परिणाम बताया।
    आगे की राह
    विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के इस नए दौर में बैंकों को तकनीकी रूप से और ज्यादा सशक्त होना होगा। साइबर सुरक्षा, डेटा प्रोटेक्शन और एआई मॉनिटरिंग सिस्टम को मजबूत करना अब समय की मांग बन गया है।
  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, सोना ₹927 लुढ़ककर ₹1.51 लाख पर आया, चांदी ₹4,700 सस्ती

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट, सोना ₹927 लुढ़ककर ₹1.51 लाख पर आया, चांदी ₹4,700 सस्ती


    नई दिल्ली । सोना और चांदी की कीमतों में आज 23 अप्रैल को गिरावट दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव 927 रुपए घटकर 1.51 लाख रुपए पर आ गया। एक दिन पहले यानी 22 अप्रैल को यह 1.52 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था। वहीं चांदी की कीमत में भी बड़ी कमी आई है और यह 4,700 रुपए गिरकर 2.43 लाख रुपए प्रति किलो पर पहुंच गई है, जो पहले 2.48 लाख रुपए थी।

    इस साल अब तक महंगा ही रहा सोना-चांदी
    हालांकि ताजा गिरावट के बावजूद 2026 में सोने-चांदी की कीमतों में कुल मिलाकर बढ़त बनी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपए था, जो अब बढ़कर 1.51 लाख रुपए पर पहुंच चुका है, यानी करीब 18 हजार रुपए की तेजी। इसी तरह चांदी भी 2.30 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 2.43 लाख रुपए पर आ गई है।

    ऊंचाई से नीचे आए दाम

    इस साल 29 जनवरी को सोने और चांदी ने रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उस दिन सोना 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.86 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इसके मुकाबले अब सोना करीब 25 हजार रुपए और चांदी लगभग 1.42 लाख रुपए सस्ती हो चुकी है।

    वैश्विक संकेतों का असर, बाजार में उतार-चढ़ाव
    विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोना-चांदी के दामों में लगातार उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं। हालांकि, कीमतों में आई ताजा गिरावट ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए कुछ राहत जरूर लेकर आई है।

  • मार्केट क्रैश: निवेशकों को झटका, Sensex लुढ़का, Nifty में भारी गिरावट से मचा हड़कंप

    मार्केट क्रैश: निवेशकों को झटका, Sensex लुढ़का, Nifty में भारी गिरावट से मचा हड़कंप


    नई दिल्ली । गुरुवार, 23 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार खुलते ही निवेशकों को झटका लगा और दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

    सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में
    30 शेयरों वाला BSE Sensex करीब 532 अंक की गिरावट के साथ 77,983 के आसपास खुला। वहीं NSE Nifty 50 भी 175 अंक से ज्यादा गिरकर 24,202 के स्तर पर ओपन हुआ। दिन की शुरुआत से ही बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    बुधवार को भी रहा था बाजार कमजोर
    इससे पहले बुधवार, 22 अप्रैल को भी बाजार में गिरावट देखी गई थी। सेंसेक्स 756 अंक टूटकर 78,516 पर बंद हुआ था निफ्टी 198 अंक गिरकर 24,378 के स्तर पर बंद हुआ लगातार दूसरे दिन गिरावट से बाजार में कमजोरी का संकेत मिल रहा है। बाजार में कई सेक्टरों में दबाव देखने को मिला आईटी सेक्टर में कमजोरी बैंकिंग शेयरों में गिरावट ऑटो सेक्टर भी दबाव में हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे FMCG और मिडकैप शेयरों में हल्की मजबूती देखने को मिली।

    किन शेयरों ने किया निराश?
    गिरावट के बीच कई दिग्गज कंपनियों के शेयर टूटे, जिनमें शामिल हैं HCL Technologies, TCS, ICICI Bank, Mahindra & Mahindra, वहीं कुछ कंपनियों जैसे Reliance Industries और NTPC में हल्की तेजी देखी गई।

    निवेशकों के लिए क्या संकेत?
    लगातार गिरते बाजार से यह संकेत मिल रहा है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों को सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। 23 अप्रैल को शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही और सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि दिन के आगे के कारोबार में बाजार संभलता है या गिरावट जारी रहती है।

  • अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    अटल पेंशन योजना में हो सकती है बढ़ोत्‍तरी, ₹10,000 तक करने पर सरकार कर रही विचार

    नई दिल्ली । भारत सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। बढ़ती महंगाई और रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्चों को देखते हुए, सरकार अटल पेंशन योजना (APY) के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक करने की संभावना पर मंथन कर रही है। यह जानकारी मिंट ने तीन सरकारी अधिकारियों के हवाले से दी है, जिन्होंने नाम सार्वजनिक नहीं किया।

    असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर फोकस
    भारत में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की हिस्सेदारी करीब 90% है। इनमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, दिहाड़ी मजदूर और स्वरोजगार करने वाले लोग शामिल हैं। इस वर्ग के लिए नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं सीमित होती हैं, जिससे बुढ़ापे में आर्थिक असुरक्षा बढ़ जाती है।

    क्या है अटल पेंशन योजना?
    अटल पेंशन योजना की शुरुआत मई 2015 में की गई थी, जिसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के लोगों को वृद्धावस्था में आर्थिक सहारा देना है। फिलहाल इस योजना के तहत 60 वर्ष की आयु के बाद ₹1,000 से ₹5,000 प्रति माह तक की गारंटीड पेंशन दी जाती है। हालांकि, बढ़ती महंगाई के कारण यह राशि अब पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    सदस्यता तो बढ़ी, लेकिन नियमित योगदान में कमी
    अब तक इस योजना से 9 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। हालांकि इनमें से लगभग आधे सदस्य समय पर नियमित योगदान नहीं कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 1.35 करोड़ नए सदस्य जुड़े हैं, जो योजना के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि पेंशन राशि बढ़ाने से न केवल नए लोग जुड़ेंगे, बल्कि पुराने सदस्य भी योजना में बने रहेंगे।

    पेंशन बढ़ाने पर चल रहा मंथन
    वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक प्राधिकरण (PFRDA) मिलकर इस प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं। विचार यह है कि वर्तमान अधिकतम पेंशन सीमा को ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रति माह तक किया जाए। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम योजना को मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाएगा और इसे अधिक आकर्षक भी करेगा।

    सरकारी योगदान और विस्तार की योजना
    शुरुआती वर्षों में सरकार ने कुछ लाभार्थियों को सह-योगदान (co-contribution) भी दिया था। अब सरकार इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए ‘पेंशन सखी’ और बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क का विस्तार करने की तैयारी में है। योजना को वित्त वर्ष 2031 तक जारी रखने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है।

    खजाने पर सीमित असर की संभावना
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव से सरकारी वित्त पर बड़ा बोझ नहीं पड़ेगा, क्योंकि यह योजना मुख्य रूप से लाभार्थियों के अपने योगदान पर आधारित है। ऐसे में पेंशन राशि बढ़ने के बावजूद राजकोष पर सीमित प्रभाव ही पड़ेगा।

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..

    सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के विस्तार को मिला बढ़ावा, एपीवाई में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज..


    नई दिल्ली: दिल्ली में केंद्र सरकार द्वारा संचालित अटल पेंशन योजना ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जहां इस योजना के तहत कुल नामांकन संख्या 9 करोड़ के पार पहुंच गई है। यह आंकड़ा देश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ती जागरूकता और सरकारी योजनाओं के प्रति लोगों के भरोसे को दर्शाता है। विशेष रूप से वित्त वर्ष 2025-26 में नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो अब तक के किसी भी एक वर्ष में सबसे अधिक बताई जा रही है।

    अटल पेंशन योजना को वर्ष 2015 में इस उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था कि देश के नागरिकों को वृद्धावस्था में एक सुनिश्चित आय का सहारा मिल सके। यह योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के कामगारों और कम आय वर्ग के लोगों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकें। इस योजना के तहत लाभार्थियों को 60 वर्ष की आयु के बाद निश्चित मासिक पेंशन प्रदान की जाती है, जो उनकी चुनी गई राशि पर आधारित होती है।

    योजना के अंतर्गत 18 से 40 वर्ष की आयु के नागरिक इसमें शामिल हो सकते हैं, जिससे उन्हें लंबी अवधि तक योगदान करने और भविष्य के लिए पेंशन सुनिश्चित करने का अवसर मिलता है। इस व्यवस्था में सरकार की ओर से एक मजबूत संरचना तैयार की गई है, जो पेंशन फंड प्रबंधन के माध्यम से योजना को स्थिर और प्रभावी बनाती है।

    अटल पेंशन योजना की एक विशेषता यह भी है कि यह केवल व्यक्तिगत सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की सुरक्षा को भी ध्यान में रखती है। लाभार्थी की मृत्यु के बाद पेंशन का लाभ उनके जीवनसाथी को मिलता है, और दोनों की अनुपस्थिति में संचित राशि नामित व्यक्ति को वापस की जाती है। इससे यह योजना सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे को कवर करती है।

    पिछले एक दशक में इस योजना के विस्तार में बैंकों, डाक विभाग और अन्य वित्तीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियानों और जनसंपर्क प्रयासों के माध्यम से योजना को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पहुंचाया गया है। इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों और बहुभाषी जानकारी ने भी इसके प्रसार में अहम योगदान दिया है।

    वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार इस योजना की बढ़ती लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी सरल संरचना और सुनिश्चित लाभ है, जो आम नागरिकों को भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। विशेष रूप से उन वर्गों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण साबित हुई है, जिनके पास रिटायरमेंट के बाद स्थायी आय का कोई साधन नहीं होता।

    सरकारी प्रयासों के तहत इस योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें। इसके साथ ही वित्तीय जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे लोगों को बचत और भविष्य की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके।

  • वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…

    वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव, आय और लाभ दोनों प्रभावित…


    नई दिल्ली । ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़ी कंपनी Maharashtra Scooters Limited ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजे जारी किए हैं, जिनमें मुनाफे में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर लगभग 92 प्रतिशत घटकर 4.01 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 51.63 करोड़ रुपये था। इस गिरावट ने कंपनी के समग्र प्रदर्शन पर दबाव को स्पष्ट रूप से सामने रखा है।

    कंपनी की आय में भी इस तिमाही के दौरान कमी देखी गई है। कुल राजस्व सालाना आधार पर 3.55 प्रतिशत घटकर 6.51 करोड़ रुपये पर आ गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में कम है। इसके साथ ही कर पूर्व मुनाफा भी करीब 91 प्रतिशत गिरकर 5.46 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 62.05 करोड़ रुपये था। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि कंपनी की लाभप्रदता पर कई स्तरों पर असर पड़ा है।

    हालांकि लागत के मोर्चे पर कंपनी ने कुछ राहत दर्ज की है। मार्च तिमाही में कुल खर्च में सालाना आधार पर लगभग 55 प्रतिशत की गिरावट आई और यह घटकर 1.05 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कर्मचारी लागत में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई, जो तीन गुना से अधिक बढ़कर 0.22 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वहीं अन्य खर्चों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 0.83 करोड़ रुपये पर आ गया।

    कमजोर वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए डिविडेंड की घोषणा की है। बोर्ड ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष के लिए प्रति शेयर 60 रुपये का अंतिम डिविडेंड प्रस्तावित किया है, जो अंकित मूल्य के आधार पर 600 प्रतिशत के बराबर है। यह प्रस्ताव आगामी वार्षिक आम बैठक में अनुमोदन के अधीन रहेगा। यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो भुगतान 4 अगस्त 2026 तक किया जा सकता है, जबकि पात्र शेयरधारकों के निर्धारण के लिए रिकॉर्ड तिथि 30 जून 2026 तय की गई है।

    कंपनी का मुख्य व्यवसाय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए डाई, जिग्स, फिक्स्चर और डाई कास्टिंग कंपोनेंट्स के निर्माण से जुड़ा है, हालांकि वर्तमान में यह एक सक्रिय वाहन निर्माता के बजाय मुख्य रूप से निवेश कंपनी के रूप में कार्य कर रही है। यह कंपनी Bajaj Holdings and Investment Limited की सहायक इकाई है और एक गैर पंजीकृत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में संचालित होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार कंपनी की आय का प्रमुख स्रोत उसके निवेश पोर्टफोलियो से प्राप्त रिटर्न है, जिसमें समूह की अन्य कंपनियों में किया गया निवेश शामिल है। ऐसे में बाजार की परिस्थितियों और निवेश से मिलने वाले लाभ में उतार चढ़ाव का सीधा असर इसके वित्तीय परिणामों पर पड़ता है। हालिया तिमाही के नतीजे भी इसी प्रवृत्ति को दर्शाते हैं, जहां निवेश आधारित आय में कमी ने समग्र लाभप्रदता को प्रभावित किया है।

  • शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट

    शेयर बाजार में कमजोरी: शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty 50 दोनों में गिरावट


    नई दिल्ली। सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार, 22 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही। शुरुआती कारोबार में ही बाजार पर दबाव देखने को मिला और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और NSE Nifty 50 लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए।

    Sensex और Nifty की कमजोर शुरुआत
    सुबह बाजार खुलते ही 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 253 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 79,000 के आसपास खुला। वहीं निफ्टी 50 भी 100 अंकों से ज्यादा फिसलकर 24,470 के करीब पहुंच गया। कुछ ही देर में गिरावट और बढ़ी और सेंसेक्स करीब 365 अंक टूटकर 78,900 के आसपास कारोबार करने लगा, जबकि निफ्टी भी करीब 90 अंक गिरकर 24,485 के स्तर पर आ गया।

    किन शेयरों में रही तेजी और गिरावट?
    बाजार में आई इस गिरावट के बीच कुछ शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली। Trent Ltd, Bajaj Finance, Maruti Suzuki और ITC Limited जैसे शेयरों में तेजी रही। वहीं दूसरी ओर HCL Technologies, Tech Mahindra, Infosys, Tata Consultancy Services और ICICI Bank के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

    मंगलवार को बाजार में रही थी तेजी
    इससे पहले मंगलवार को बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 753 अंक चढ़कर 79,273 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 211 अंक की बढ़त के साथ 24,576 के स्तर पर पहुंच गया था। उस दिन बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिली थी।

    क्या है गिरावट की वजह?
    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को आई गिरावट के पीछे मुख्य वजह मुनाफावसूली और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत हैं। पिछले सत्र में तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर दबाव बना। हालांकि जानकारों का कहना है कि इस तरह की गिरावट बाजार का सामान्य हिस्सा है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सोच-समझकर निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

  • Gold & Petrol-Diesel Price Today: तेल के दाम स्थिर, सोने में उतार-चढ़ाव; जानें आपके शहर का ताजा रेट

    Gold & Petrol-Diesel Price Today: तेल के दाम स्थिर, सोने में उतार-चढ़ाव; जानें आपके शहर का ताजा रेट


    नई दिल्ली। देश में बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू स्तर पर तेल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम लोगों को राहत मिली है।

    देश के प्रमुख शहरों की बात करें तो दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर मिल रहा है। मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और डीजल ₹90.03 प्रति लीटर है। वहीं कोलकाता में पेट्रोल ₹105.41 और डीजल ₹92.02, चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84 और डीजल ₹92.61 प्रति लीटर बिक रहा है। बेंगलुरु में पेट्रोल ₹102.96 और डीजल ₹90.99, जबकि हैदराबाद में पेट्रोल ₹107.50 और डीजल ₹95.70 प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर हैं। इसके पीछे सरकार की नीतियां और चुनावी माहौल को भी एक कारण माना जा रहा है।

    सोने की कीमतों में फिर उछाल
    दूसरी ओर, सोने की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 24 कैरेट सोना करीब 1.01% की बढ़त के साथ ₹1,53,200 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया।

    इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, आज 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,355 प्रति 10 ग्राम है। वहीं 22 कैरेट सोना ₹1,39,557 और 18 कैरेट सोना ₹1,14,266 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।

    अगर शहरों के हिसाब से देखें तो दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ में 24 कैरेट सोना ₹1,55,430 प्रति 10 ग्राम के आसपास बिक रहा है। मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में यह ₹1,55,280 के करीब है, जबकि चेन्नई में यह ₹1,55,990 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है।

    क्यों बढ़ रहे हैं सोने के दाम?
    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और वैश्विक अनिश्चितता भी सोने की कीमतों को प्रभावित कर रही है।

    शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं रेट?
    पेट्रोल-डीजल और सोने की कीमतें हर शहर में अलग होती हैं। इसकी मुख्य वजह केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, परिवहन लागत और स्थानीय मांग होती है। इसी कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में फर्क देखने को मिलता है।

    क्या है आम लोगों के लिए मतलब?
    जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आम जनता को राहत दे रही है, वहीं सोने की बढ़ती कीमतें खरीदारों और निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। आने वाले दिनों में वैश्विक हालात के आधार पर इनकी दिशा तय होगी।