Category: Economy

  • स्टार्टअप से संकट तक का सफर, ShopClues की कहानी ने सबको चौंकाया!

    स्टार्टअप से संकट तक का सफर, ShopClues की कहानी ने सबको चौंकाया!


    नई दिल्ली। भारतीय ई-कॉमर्स बाजार में एक समय ShopClues का नाम तेजी से उभरते स्टार्टअप्स में लिया जाता था। 2016 में कंपनी की वैल्यूएशन करीब 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई थी। लेकिन कुछ ही वर्षों में हालात इतने बदल गए कि 2019 में सिंगापुर की कंपनी Qoo10 ने इसे मात्र 70–100 मिलियन डॉलर में खरीद लिया यानी लगभग 90% गिरावट।

    टियर-2 और टियर-3 शहरों पर दांव, शुरुआत में मिली बड़ी सफलता
    ShopClues ने खुद को “ऑनलाइन चांदनी चौक” के रूप में स्थापित किया था। कंपनी ने छोटे शहरों के कीमत-संवेदनशील ग्राहकों को टारगेट किया और कम कीमत वाले, बिना ब्रांड के प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराए। उस समय Amazon और Flipkart जैसे दिग्गज मुख्य रूप से मेट्रो शहरों पर फोकस कर रहे थे, जिससे ShopClues को तेजी से ग्रोथ मिली।

    बड़ी कंपनियों की एंट्री से बिगड़ा खेल
    जैसे ही Amazon और Flipkart ने छोटे शहरों में अपनी पकड़ मजबूत की, बेहतर लॉजिस्टिक्स, तेज डिलीवरी और भरोसेमंद सर्विस के दम पर उन्होंने बाजार पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया। ShopClues का सस्ता मॉडल इस प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाया और कंपनी का मार्केट शेयर तेजी से गिरने लगा।

    खराब क्वालिटी और बढ़ते रिटर्न ने तोड़ा भरोसा
    ShopClues की सबसे बड़ी कमजोरी बनी-असंगठित विक्रेताओं पर अत्यधिक निर्भरता। इससे प्लेटफॉर्म पर नकली और निम्न गुणवत्ता वाले उत्पादों की भरमार हो गई। नतीजतन, रिटर्न रेट 30-40% तक पहुंच गया और ग्राहकों का भरोसा टूटने लगा। वहीं प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने क्वालिटी और कस्टमर एक्सपीरियंस पर भारी निवेश किया।

    लीडरशिप संकट और विवादों ने बढ़ाई मुश्किलें
    कंपनी को अंदरूनी झटके भी लगे। सह-संस्थापक Sandeep Aggarwal को अमेरिका में इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों के बाद पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद Radhika Aggarwal और Sanjay Sethi ने नेतृत्व संभाला। संस्थापकों के बीच सार्वजनिक विवादों ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर कर दिया।

    फंडिंग की कमी और गिरता कारोबार
    IPO से पहले मुनाफा दिखाने के प्रयास में कंपनी ने मार्केटिंग खर्च घटा दिया, जिससे बिक्री (GMV) में भारी गिरावट आई। नए निवेश जुटाने के प्रयास भी असफल रहे और मौजूदा निवेशकों ने भी हाथ खींच लिया। इससे कंपनी “पतन के चक्र” में फंसती चली गई।

    रणनीतिक बदलाव भी नहीं बचा पाए
    ShopClues ने बिजनेस मॉडल बदलने की कोशिश की—जैसे B2B वर्टिकल और रीसेलर प्लेटफॉर्म but ये प्रयास गिरावट को रोकने में नाकाम रहे। साथ ही, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जैसी खबरों ने अनिश्चितता और बढ़ा दी।

    संस्थापक का नया सफर, लेकिन चुनौतियां जारी
    ShopClues छोड़ने के बाद संदीप अग्रवाल ने Droom की शुरुआत की, जो सेकंड हैंड वाहनों का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है। हालांकि, यह कंपनी भी GST जांच जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है।

  • Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर

    Gold & Petrol Diesel Price Today: सोना हुआ सस्ता, पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल मार्केट पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं, जिससे आम जनता को राहत मिली है।

    सोना हुआ सस्ता, दो दिन बाद टूटी तेजी
    लगातार दो दिनों की स्थिरता के बाद आज सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी Delhi में 24 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,50,800 प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना ₹10 सस्ता होकर ₹1,38,240 प्रति 10 ग्राम पिछले दो दिनों में 24 कैरेट सोना ₹280 और 22 कैरेट ₹260 तक सस्ता हो चुका है। सरकार द्वारा इंपोर्ट प्राइस में कटौती का असर भी कीमतों पर देखा जा रहा है।

    देश के बड़े शहरों में सोने का भाव
    Mumbai: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Kolkata: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Chennai: ₹1,52,630 (24K), ₹1,39,910 (22K)
    Bengaluru: ₹1,50,650 (24K), ₹1,38,090 (22K)
    Lucknow: ₹1,50,800 (24K), ₹1,38,240 (22K)
    Patna: ₹1,50,700 (24K), ₹1,38,140 (22K)

    चांदी भी सस्ती, 4 दिन बाद आई गिरावट
    चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। दिल्ली में चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,49,900 प्रति किलो पर पहुंच गई है Mumbai और Kolkata में भी लगभग यही भाव है Chennai में चांदी सबसे महंगी ₹2,54,900 प्रति किलो है

    कच्चे तेल में उछाल, सप्लाई को लेकर चिंता
    ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड $96.73 प्रति बैरल WTI क्रूड $96.99 प्रति बैरल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर, जानें आपके शहर का रेट कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में ईंधन के दाम नहीं बढ़े हैं

    Delhi: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    Mumbai: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    Chennai: पेट्रोल ₹101.06 | डीजल ₹91.50
    Kolkata: पेट्रोल ₹105.86 | डीजल ₹92.02
    Bengaluru: पेट्रोल ₹102.96 | डीजल ₹88.95
    Hyderabad: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹97.00

    घर बैठे ऐसे चेक करें ताजा रेट
    आप SMS के जरिए भी अपने शहर का पेट्रोल-डीजल रेट जान सकते हैं: IOCL: RSP भेजें 9224992249 पर BPCL: RSP भेजें 9223112222 पर HPCL: HP Price भेजें 9222201122 पर विशेषज्ञों के अनुसार सोना, चांदी और कच्चे तेल की कीमतें आगे Iran-United States के बीच तनाव, ग्लोबल आर्थिक आंकड़े और RBI की नीतियों पर निर्भर करेंगी।

  • शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

    शेयर मार्केट टुडे: हफ्ते के चौथे दिन बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 9 अप्रैल को गिरावट देखने को मिली। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन बाजार की शुरुआत कमजोर रही और शुरुआती कारोबार में ही बिकवाली का दबाव नजर आया। प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 दोनों लाल निशान में कारोबार करते दिखे।

    कमजोर शुरुआत, शुरुआती कारोबार में गिरावट तेज
    सेंसेक्स 243 अंक की गिरावट के साथ 77,319 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 भी 88 अंकों की कमजोरी के साथ 23,909 पर ओपन हुआ। सुबह करीब 9:20 बजे तक गिरावट और बढ़ गई, जहां सेंसेक्स करीब 300 अंक टूटकर 77,261 पर आ गया, वहीं निफ्टी 113 अंक गिरकर 23,883 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया।

    गेनर्स और लूजर्स में दिखा मिला-जुला रुख
    गिरते बाजार के बीच कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। टॉप गेनर्स में NTPC, Tata Steel, Power Grid Corporation of India, ITC Limited और Bharti Airtel शामिल रहे। वहीं टॉप लूजर्स में Sun Pharmaceutical Industries, IndiGo, Adani Ports और Larsen & Toubro जैसे शेयर दबाव में रहे।

    एक दिन पहले बाजार में आई थी जोरदार तेजी
    इससे पहले 8 अप्रैल को बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला था। सेंसेक्स करीब 2946 अंक चढ़कर 77,562 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 873 अंक की तेजी के साथ 23,997 पर पहुंच गया था। उस दिन ज्यादातर सेक्टर्स में खरीदारी देखी गई थी।

    गिरावट की वजह क्या है?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, बाजार में आई इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं पिछले दिन की तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव निवेशकों का सतर्क रुख निवेशकों के लिए क्या संकेत? बाजार में हल्की गिरावट को सामान्य करेक्शन माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ऐसे मौके निवेश के लिहाज से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 9 अप्रैल को शेयर बाजार में आई गिरावट ने यह संकेत दिया है कि तेज रैली के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

  • ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट

    ईरान युद्ध थमने से क्रिप्टो मार्केट में तेजी…. 3 हफ्ते के उच्च स्तर पर पहुंचे Bitcoin के रेट


    वाशिंगटन।
    ईरान-अमेरिका युद्ध (Iran-America War) में सीजफायर के बाद बिटकॉइन की कीमतें (Bitcoin Price) तीन हफ्ते के हाई पर पहुंच गई हैं। न्यूयॉर्क ट्रेडिंग (New York Trading) में बिटकॉइन 5% चढ़कर 72,841 डॉलर तक पहुंच गया, जो 18 मार्च के बाद सबसे ऊंचा स्तर है। हालांकि, बाद में इसमें हल्की मुनाफावसूली भी देखने को मिली।

    ईथर और अन्य क्रिप्टो में भी उछाल: तेजी सिर्फ बिटकॉइन तक सीमित नहीं रही। ईथेरियम भी 7.5% उछलकर 2,273 डॉलर तक पहुंच गया। यानी पूरे क्रिप्टो मार्केट में निवेशकों का भरोसा लौटा है।

    सीजफायर से बाजार में आई राहत
    डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले ने ग्लोबल मार्केट में पॉजिटिव माहौल बना दिया। इसके बाद शेयर बाजारों में तेजी आई और कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 95 डॉलर से नीचे आ गईं। होर्मूज स्ट्रेट के फिर से खुलने की उम्मीद ने निवेशकों का डर कम किया, जिससे जोखिम वाले ऐसेट्स जैसे क्रिप्टो में खरीदारी बढ़ी।


    खतरा अभी बाकी: टूट सकता है ट्रेंड

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह तेजी स्थायी नहीं भी हो सकती। अगर सीजफायर टूटता है, तो बिटकॉइन फिर से गिरकर 66,000 डॉलर तक जा सकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से बिटकॉइन 60,000 से 75,000 डॉलर के बीच ही झूल रहा है।


    शॉर्ट सेलर्स को झटका

    तेजी ने उन ट्रेडर्स को नुकसान पहुंचाया, जो गिरावट पर दांव लगा रहे थे। डेटा के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की शॉर्ट पोजीशन खत्म हो गईं। ब्लूमबर्ग ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया है कि अगर कीमत 73,500 डॉलर के ऊपर टिकती है, तो बिटकॉइन 80,000 डॉलर तक जा सकता है। ब्लॉकचेन डेटा के अनुसार, अभी स्पॉट मार्केट में मांग उतनी मजबूत नहीं है।

    हालांकि, यूएस में लिस्टेड स्पॉट बिटकॉइन एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में सोमवार को $471.3 मिलियन का नेट इनफ्लो हुआ। यह पिछले हफ़्ते के $22.3 मिलियन के इनफ्लो से काफी अधिक था। यह संस्थागत निवेशकों की वापसी का शुरुआती संकेत हो सकता है।


    राहत की रैली, पर नजर जरूरी:

    सीजफायर ने क्रिप्टो मार्केट को मजबूती दी है, लेकिन आगे की दिशा पूरी तरह जियो-पॉलिटिकल हालात और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में तेजी है, लेकिन जोखिम भी बरकरार है।

  • विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा

    विशेषज्ञों का कहना, RBI के फैसले से गृह ऋण लेने वालों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से होम लोन (मॉर्गेज) की ब्याज दरों में स्थिरता बनी रहेगी और रियल एस्टेट सेक्टर को राहत मिलेगी। रियल एस्टेट मार्केट में अब खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही अपने वित्तीय निर्णयों को बेहतर तरीके से योजना बना सकेंगे।

    विशेषज्ञों ने दी प्रतिक्रिया

    श्रीनिवास राव, वेस्टियन के सीईओ (FRICS) ने कहा कि रेपो रेट स्थिर रहने से निर्माण लागत बढ़ने के बावजूद होम लोन दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी, जो घर खरीदने वालों के लिए राहत है। उन्होंने बताया कि यह कदम बढ़ती लागत के असर को कम करने में मदद करेगा और बाजार की बदलती स्थिति के अनुसार रणनीति बनाने का समय देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह आखिरी बार हो सकता है जब रेपो रेट स्थिर रहे; भविष्य में ब्याज दरों में वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

    शिशिर बैजल, नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि आरबीआई का ‘न्यूट्रल’ रुख अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाएगा। उन्होंने बताया कि स्थिर ब्याज दरों से घर खरीदने वालों के लिए सामर्थ्य बनी रहती है और डेवलपर्स को बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहां आर्थिक संकेतों से बाजार प्रभावित होता है, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का न होना सकारात्मक संकेत है।

    विमल नादर, कोलियर्स इंडिया के नेशनल डायरेक्टर और रिसर्च हेड ने कहा कि मौजूदा संकट की तीव्रता और अवधि का असर खपत पर पड़ सकता है, खासकर रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और हाउसिंग सेक्टर में। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से सस्ते और मिड-इनकम सेगमेंट के खरीदार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू रियल एस्टेट सेक्टर को मध्यम अवधि में मजबूती देंगे।

    आर्थिक संकेतक: महंगाई और जीडीपी

    आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6 प्रतिशत और जीडीपी ग्रोथ 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को देखते हुए बैंक ने ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई है। इससे अर्थव्यवस्था पर अप्रत्याशित झटकों का असर कम होगा और मौद्रिक स्थिरता बनी रहेगी।

    रियल एस्टेट और होम लोन पर असर

    स्थिर रेपो रेट से होम लोन दरें स्थिर रहेंगी, जिससे घर खरीदने वालों के लिए वित्तीय योजना आसान होगी। डेवलपर्स को भी परियोजनाओं की योजना और लागत प्रबंधन में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कदम से निजी निवेश और मांग को बनाए रखने में सहारा मिलेगा, जबकि सप्लाई चेन बाधाओं और बढ़ती निर्माण लागत जैसी चुनौतियों का असर सीमित रहेगा।

    आरबीआई का यह निर्णय रियल एस्टेट सेक्टर और होम लोन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। स्थिर ब्याज दरों से खरीदार और डेवलपर्स दोनों ही लाभान्वित होंगे, जबकि अर्थव्यवस्था के मजबूत बुनियादी पहलू भविष्य में स्थिर विकास सुनिश्चित करेंगे। हालांकि, वैश्विक और स्थानीय जोखिमों पर नजर रखना आवश्यक रहेगा।

  • भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया

    भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, RBI ने अगले दो साल का GDP अनुमान पेश किया


    नई दिल्ली।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर (GDP Growth) का नया अनुमान बुधवार को जारी किया।

    वित्त वर्ष 2026
    वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.6%, जो पहले 7.4% थी।
    बढ़ती वृद्धि के कारण: मजबूत सर्विस सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग में विस्तार, और घरेलू मांग में मजबूती। दिसंबर तिमाही 2026 में जीडीपी ग्रोथ 7.8%, जबकि पिछली तिमाही में 8.4% थी।

    वित्त वर्ष 2027
    जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.9%, जो बाहरी जोखिम और लागत दबाव के कारण थोड़ी नरमी दर्शाता है।
    पहली तिमाही: 6.8% (पहले 6.9%)
    दूसरी तिमाही: 6.7% (पहले 7%)
    मुख्य कारण: ईरान युद्ध और वैश्विक स्तर पर बढ़ते दबाव।
    महंगाई का अनुमान
    वित्त वर्ष 2027 के लिए CPI मुद्रास्फीति 4.6% रहने का अनुमान।
    पहली तिमाही: 4%
    दूसरी तिमाही: 4.4%
    तीसरी तिमाही: 5.2%
    चौथी तिमाही: 4.7%
    आरबीआई के अन्य संकेत
    बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी सुनिश्चित की जाएगी।
    निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ने की उम्मीद, क्योंकि उद्योगों में क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर।
    विदेशी निवेश आकर्षक बना हुआ है; 3 अप्रैल तक विदेशी मुद्रा भंडार 697.1 अरब डॉलर। नेट FDI में सुधार और ग्रीनफील्ड निवेश के लिए भारत को एक आकर्षक गंतव्य माना जा रहा है।

    आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने चेताया कि ऊर्जा की कीमतों में तेज बढ़ोतरी महंगाई का खतरा बढ़ा सकती है और वैश्विक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकती है।

    वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, जबकि 2027 में वैश्विक और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण वृद्धि में थोड़ा नरमी आने का अनुमान है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रहने की संभावना है और निजी निवेश आर्थिक विकास का समर्थन करेगा।

  • ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी

    ट्रंप के सीजफायर ऐलान के बावजूद सोना और कीमती धातुओं में जोरदार तेजी


    नई दिल्ली।अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के लिए युद्धविराम (सीजफायर) की घोषणा के बावजूद, सुरक्षित निवेश की मांग के कारण बुधवार को कीमती धातुओं में जोरदार उछाल देखने को मिला।

    सोना और चांदी में रिकॉर्ड उछाल
    एमसीएक्स पर सोने का वायदा (5 जून) 3,688 रुपए यानी 2.7% की तेजी के साथ 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई तक पहुंच गया।
    चांदी का वायदा (5 मई) 6% से अधिक बढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम के दिन के उच्चतम स्तर पर था। खबर लिखे जाने तक, 5 जून कॉन्ट्रैक्ट सोना 1,54,471 रुपए (+2.8%) और 5 मई कॉन्ट्रैक्ट चांदी 2,45,678 रुपए (+6.19%) पर था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमती धातुओं में यह तेजी सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग और निचले स्तर पर खरीदारी की वजह से आई है।

    करंसी और शेयर बाजार में मजबूती
    भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 40 पैसे मजबूत होकर 92.61 पर पहुंच गया।
    शेयर बाजार में भी सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4% तक उछल गए। इसका कारण आरबीआई द्वारा रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखना और सीजफायर की घोषणा रही।

    तेल की कीमतों में भारी गिरावट
    ब्रेंट क्रूड 16% यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल।
    यूएस डब्ल्यूटीआई क्रूड 20% यानी 21.90 डॉलर गिरकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल।
    बाजार पर प्रभाव

    विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप का सीजफायर ऐलान भू-राजनीतिक तनाव को कुछ हद तक कम कर रहा है। इसके बावजूद अस्थिर वैश्विक हालात और निवेशकों की सतर्कता सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और चांदी की मांग को बढ़ा रही है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश दिए हैं, जो कुछ घंटे पहले दिए गए कड़े बयानों के बाद एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

     सीजफायर की घोषणा के बावजूद निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर आकर्षित हुए, जिससे सोना और चांदी में तेजी आई, रुपये की मजबूती और शेयर बाजार में उछाल देखा गया।

  • मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी

    मजबूत रबी फसल के बीच RBI का अनुमान, FY 2026-27 में महंगाई 4.6% रहेगी


    नई दिल्ली।देश में महंगाई को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। Reserve Bank of India (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि मजबूत रबी फसल के चलते खाद्य आपूर्ति बेहतर रहेगी, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलेगी।

    तिमाही आधार पर महंगाई का अनुमान

    आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बताया कि पूरे वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई 4.6% रहने का अनुमान है।

    पहली तिमाही: 4.0%
    दूसरी तिमाही: 4.4%
    तीसरी तिमाही: 5.2%
    चौथी तिमाही: 4.7%
    यह संकेत देता है कि साल के बीच में महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है, लेकिन कुल मिलाकर यह नियंत्रित दायरे में रहेगी।

    रबी फसल से मिलेगी राहत

    अच्छे रबी उत्पादन के कारण बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे खाद्य कीमतों पर दबाव कम होगा। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है।

    ऊर्जा कीमतें बनीं चिंता का कारण

    Sanjay Malhotra ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर प्रीमियम पेट्रोल, एलपीजी और डीजल पर दिख रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव इस स्थिति को और जटिल बना सकता है।

    कोर महंगाई भी नियंत्रण में

    आरबीआई के अनुसार, कोर महंगाई (खाद्य और ईंधन को छोड़कर) 2026-27 में करीब 4.4% रहने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि घरेलू मांग से जुड़ा महंगाई दबाव फिलहाल ज्यादा नहीं है।

    मौसम और वैश्विक हालात से जोखिम

    महंगाई के अनुमान के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं-

    पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष
    ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी
    संभावित एल नीनो जैसी मौसम स्थितियां
    सप्लाई चेन में बाधाएं
    ये सभी कारक भविष्य में महंगाई को बढ़ा सकते हैं।

    अर्थव्यवस्था में बनी हुई है मजबूती

    फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है। निजी खपत और निवेश मांग आर्थिक विकास को सहारा दे रहे हैं। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं का असर आगे देखने को मिल सकता है।

    “वेट एंड वॉच” की रणनीति

    आरबीआई ने फिलहाल सतर्क रुख अपनाया है। Reserve Bank of India का कहना है कि मौजूदा स्थिति एक “सप्लाई शॉक” जैसी है, इसलिए बदलते हालात को देखते हुए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति सही रहेगी।

    संतुलन बनाए रखने की चुनौती

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) का मानना है कि महंगाई और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहेगा। हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था पहले से अधिक मजबूत है और बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।

  • कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं

    कामकाज में कोई समस्या नहीं, RBI ने दिया भरोसा और खत्म की चिंताएं


    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC Bank को लेकर उठे सवालों के बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने बड़ा बयान दिया है। आरबीआई गवर्नर Sanjay Malhotra ने बुधवार को साफ कहा कि बैंक के कामकाज में किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है और बैंकिंग सेक्टर पूरी तरह स्थिर है।

    इस्तीफे के बाद उठे थे सवाल

    हाल ही में बैंक के अंशकालिक अध्यक्ष Atanu Chakraborty के अचानक इस्तीफे ने हलचल पैदा कर दी थी। उन्होंने कुछ नीतियों और कार्यशैली से असहमति जताते हुए पद छोड़ा था, जिसके बाद बैंक की गवर्नेंस पर सवाल उठने लगे थे।

    आरबीआई की निगरानी में सब ठीक

    मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की घोषणा के बाद मीडिया से बातचीत में Sanjay Malhotra ने कहा कि नियामक निगरानी के दौरान बैंक के संचालन में कोई खामी नहीं पाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा बैंकिंग कानून पर्याप्त और प्रभावी हैं, और फिलहाल उनमें बदलाव की जरूरत नहीं है।

    “व्यक्तिगत घटनाओं से सिस्टम पर असर नहीं”

    आरबीआई गवर्नर ने भरोसा दिलाया कि बैंकिंग सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि किसी एक बैंक में हुई व्यक्तिगत घटना पूरे सेक्टर की स्थिरता को प्रभावित नहीं करती।
    उन्होंने यह भी जोड़ा कि HDFC Bank की वित्तीय स्थिति और मुनाफे को लेकर कोई प्रणालीगत जोखिम नहीं है।

    बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश जल्द

    आरबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह बैंक बोर्ड्स के लिए नए दिशा-निर्देश लाने की तैयारी कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड सदस्य रोजमर्रा के कामकाज में उलझने के बजाय नीतिगत और रणनीतिक फैसलों पर ज्यादा ध्यान दें।

    प्रबंधन और बोर्ड की भूमिकाएं होंगी स्पष्ट

    प्रस्तावित बदलावों के तहत बैंकों के प्रबंधन को दैनिक संचालन की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि बोर्ड बड़े फैसलों और दीर्घकालिक रणनीति पर फोकस करेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी होने की उम्मीद है।

    बैंकिंग सेक्टर में स्थिरता का संदेश

    Reserve Bank of India के इस बयान से निवेशकों और ग्राहकों को राहत मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बाजार में फैली अनिश्चितता कम होगी और बैंकिंग सेक्टर में विश्वास मजबूत बना रहेगा।

  • करण अदाणी का ऐलान, ओडिशा में विकास और रोजगार को मिलेगा नया बढ़ावा

    करण अदाणी का ऐलान, ओडिशा में विकास और रोजगार को मिलेगा नया बढ़ावा


    नई दिल्ली। देश के औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में Adani Group ने ओडिशा में बड़ा निवेश करने का ऐलान किया है। Adani Ports and Special Economic Zone (एपीएसईजेड) के मैनेजिंग डायरेक्टर Karan Adani ने बुधवार को तीन बड़े प्रोजेक्ट्स में 33,081 करोड़ रुपए निवेश की घोषणा की। इन परियोजनाओं से करीब 9,700 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।

    डिजिटल इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा: भुवनेश्वर में डेटा सेंटर

    पहला प्रोजेक्ट Bhubaneswar में स्थापित किया जाएगा, जहां 800 करोड़ रुपए की लागत से एक आधुनिक डेटा सेंटर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी और करीब 200 लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। यह कदम राज्य को आईटी और डिजिटल सेक्टर में आगे बढ़ाने में मददगार साबित होगा।

    बिजली उत्पादन में मजबूती: कटक में मेगा थर्मल पावर प्लांट

    दूसरा और सबसे बड़ा प्रोजेक्ट Cuttack के पास लगाया जाएगा, जहां 30,181 करोड़ रुपए की लागत से एक विशाल थर्मल पावर प्लांट विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से लगभग 7,000 नौकरियां सृजित होंगी। साथ ही, इससे उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली आपूर्ति मजबूत होगी, जिससे राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।

    इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा: सीमेंट निर्माण यूनिट

    तीसरा प्रोजेक्ट भी कटक के पास ही प्रस्तावित है, जहां 2,100 करोड़ रुपए के निवेश से एक सीमेंट निर्माण यूनिट स्थापित की जाएगी। इस यूनिट से करीब 2,500 लोगों को रोजगार मिलेगा और राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को मजबूती मिलेगी।

    “निवेश नहीं, विश्वास का प्रतीक”

    Karan Adani ने कहा कि ये प्रोजेक्ट्स केवल निवेश नहीं, बल्कि ओडिशा के विकास में विश्वास का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि राज्य अब विकास के मोड़ पर नहीं, बल्कि विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है और भारत की औद्योगिक प्रगति का अगला अध्याय यहीं लिखा जाएगा।

    ओडिशा बनेगा बड़ा औद्योगिक हब

    अदाणी ग्रुप का मानना है कि ओडिशा के पास प्राकृतिक संसाधन, कुशल मानव संसाधन और बेहतर प्रशासन जैसी बड़ी ताकतें हैं। कंपनी राज्य को एक बड़े औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।

    दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर

    Adani Group ने स्पष्ट किया है कि वह ओडिशा में केवल निवेश नहीं कर रहा, बल्कि लंबे समय तक विकास यात्रा में साझेदार बनने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में भी कंपनी राज्य में अपनी मौजूदगी और निवेश को बढ़ा सकती है।