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  • देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार उच्चतम स्तर पर पहुंचा… खजाने में पहली बार आए 725 अरब डॉलर


    नई दिल्ली।
    इकोनॉमी के मोर्चे पर एक अच्छी खबर है। दरअसल, देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Country’s Foreign Exchange Reserves) 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में 8.66 अरब डॉलर बढ़कर 725.72 अरब डॉलर के अपने उच्चतम स्तर (Highest Level) पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का ऑल टाइम हाई है। इससे पहले का सर्वोच्च स्तर जनवरी में 723.774 अरब डॉलर का रहा था। छह फरवरी को समाप्त सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 6.71 अरब डॉलर घटकर 717.06 अरब डॉलर रह गया था।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 फरवरी को समाप्त सप्ताह में मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा माने जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 3.55 अरब डॉलर बढ़कर 573.60 अरब डॉलर हो गईं। डॉलर के रूप में व्यक्त की जाने वाली विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में विदेशी मुद्रा भंडार में रखे गए यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर अमेरिकी मुद्राओं के मूल्य में घट-बढ़ के प्रभाव शामिल होते हैं। रिजर्व बैंक ने कहा कि समीक्षाधीन सप्ताह के दौरान स्वर्ण भंडार यानी गोल्ड रिजर्व का मूल्य 4.99 अरब डॉलर बढ़कर 128.46 अरब डॉलर हो गया। केंद्रीय बैंक ने बताया कि विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 10.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.92 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार, समीक्षाधीन सप्ताह में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत का आरक्षित भंडार भी 1.9 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.734 अरब डॉलर हो गया।


    रुपया हुआ कमजोर

    विदेशी मुद्रा भंडार के ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब रुपया एक बार फिर कमजोर होता नजर आ रहा है। अमेरिका-ईरान के परस्पर बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी मुद्रा के मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की वजह से शुक्रवार को अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 26 पैसे टूटकर 90.94 पर बंद हुआ। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख भी रुपये को समर्थन देने में विफल रहा। इस पर अमेरिका और ईरान के बीच आने वाले दिनों में जंग छिड़ने की बनती स्थिति का विशेष प्रभाव रहा। बता दें कि बुधवार को डॉलर के मुकाबले रुपया चार पैसे बढ़कर 90.68 पर बंद हुआ था। वहीं, गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती के कारण विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार बंद था। इस बीच, विश्व की छह प्रमुख प्रतिस्पर्धी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.01 प्रतिशत बढ़कर 97.86 पर कारोबार कर रहा था।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत डॉलर के कारण रुपये में गिरावट आई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भी घरेलू मुद्रा पर दबाव डाला। हालांकि, घरेलू बाजारों की तेजी ने गिरावट को कम किया। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के मजबूत होने के कारण रुपया थोड़े नकारात्मक रुख के साथ कारोबार करेगा।

  • US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम

    US-Iran टेंशन के बीच सुरक्षित निवेश… फिर 3 लाख के पार जा सकते हैं चांदी के दाम


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच बढ़ते तनाव से सोने-चांदी की कीमतों (Gold and Silver Prices) में एक बार फिर उछाल आया है। देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को चांदी जहां 2.6 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई तो सोना 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम की ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उछाल वैश्विक रुख तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग में बढ़ोतरी की वजह से आया। अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो चांदी की कीमत (Silver Prices) एक बार फिर से 3 लाख रुपये के पार जा सकती है। वहीं, सोना भी अपने ऑल टाइम हाई के करीब जा सकता है। बता दें कि चांदी की कीमत जनवरी महीने में 4 लाख रुपये के स्तर को पार कर गई थी।


    18 हजार रुपये महंगी हुई चांदी

    स्थानीय बाजार के जानकारों के मुताबिक, चांदी बुधवार के 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम के बंद स्तर से 18,000 रुपये या 7.32 प्रतिशत बढ़कर 2,64,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी 1,950 रुपये या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,58,650 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गया। पिछले सत्र में यह 1,56,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर चांदी 1.03 प्रतिशत बढ़कर 77.97 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी, जबकि सोना थोड़ा बढ़कर 4,991.24 डॉलर प्रति औंस पर था।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सौमिल गांधी ने कहा-ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की बढ़ती अटकलों के बीच भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ने के कारण सुरक्षित निवेश परिसंपत्तियों की मांग में नई लहर से समर्थन पाकर सोने की कीमतें बढ़कर लगभग 5,000 डॉलर प्रति औंस हो गईं। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन के बीच नई बातचीत के विफल होने से भी वैश्विक अनिश्चितता फिर से बढ़ गई है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश वाली परिसंपत्तियों में आवंटन बढ़ा रहे हैं। ऑगमोंट में रिसर्च हेड रेनिशा चैनानी ने कहा कि निवेशक अमेरिकी जीडीपी और व्यक्तिगत खपत खर्च (पीसीई) मुद्रास्फीति आंकड़े सहित मुख्य वृहद आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो आने वाले महीनों में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की उम्मीदों को आकार दे सकता है।


    शेयर बाजार में भी कोहराम

    अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने से उपजी चिंताओं के बीच गुरुवार को शेयर बाजार में भी कोहराम रहा। बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स तीन सत्रों से जारी तेजी पर विराम लगाते हुए 1,236.11 अंक यानी 1.48 प्रतिशत टूटकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 1,470.05 अंक फिसलकर 82,264.20 अंक पर आ गया था। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 365 अंक यानी 1.41 प्रतिशत लुढ़ककर 25,454.35 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 430.6 अंक के नुकसान के साथ 25,388.75 अंक तक आ गया था।

  • US-Iran तनाव का असरः शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट से निवेशकों ने गंवाए 8 लाख करोड़ रुपये…

    US-Iran तनाव का असरः शेयर मार्केट में बड़ी गिरावट से निवेशकों ने गंवाए 8 लाख करोड़ रुपये…


    नई दिल्ली।
    गुरुवार को सेंसेक्स (Sensex) में 1236 अंक की जोरदार गिरावट (Strong Decline) में निवेशकों के करीब ₹आठ लाख करोड़ की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹464 लाख करोड़ पर आ गया, जो पिछले सत्र में करीब ₹472 लाख करोड़ था। बाजार की यह गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। बीएसई मिडकैप (BSE Midcap) और स्मॉलकैप इंडेक्स (Smallcap Indices) भी आधे प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। इससे साफ है कि बिकवाली व्यापक थी।

    बुधवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी सेना मिलिट्री (US Army Military) इस सप्ताहांत ही ईरान (Iran) पर हमला करने वाली है। बताया गया कि ईरान पर अमेरिकी हमला शायद एक ‘बड़ा, हफ्तों तक चलने वाला अभियान’ होगा जो सीमित हमले के बजाय पूरे युद्ध जैसा होगा। बाजार अमेरिका-ईरान रिश्तों से जुड़े घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है। जानकारों का कहना है कि निवेश तनाव के और बढ़ने की उम्मीद में बाजार से रकम निकाल रहे हैं।


    विदेशी हिस्सेदारी 15 साल के निचले स्तर पर

    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने कुछ महीनों में एनएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों से रिकॉर्ड 18.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक निकाल लिया है, जिससे उनका कुल स्वामित्व पिछले 15.5 वर्षों के सबसे निचले स्तर 16.7% पर पहुंच गया है। इस गिरावट का असर प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखा। निफ्टी 50 में एफपीआई का हिस्सा 23.8% तक गिर गया, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम रहा।


    आईटी कंपनियों से हाथ खींचे

    फरवरी के पहले छह महीनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय आईटी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के लगभग ₹11,000 करोड़ के शेयर बेचे, क्योंकि इस सेक्टर में एआई से पैदा होने वाली चुनौतियों को लेकर चिंता बढ़ रही थी। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के मुताबिक, एक से 15 फरवरी के बीच एफपीआई ने भारतीय आईटी शेयरों में ₹10,956 करोड़ के शेयर बेचे। इससे पहले जनवरी 2026 में एफपीआई ने आईटी सेक्टर से ₹1,835 करोड़ निकाले थे। इस वजह से, 15 फरवरी, 2026 तक आईटी शेयरों में कुल एफपीआई निवेश लगभग 16% घटकर ₹4,48,938 करोड़ रह गया, जो जनवरी के आखिर में ₹5,33,953 करोड़ था।


    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने संभाला मोर्चा

    एफपीआई की निरंतर निकासी के बीच, घरेलू संस्थागत निवेशकों जैसे म्यूचुअल फंड, बैंकों, बीमा कंपनियों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी में तेजी बनाई रखी। घरेलू बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों का कुल हिस्सा अब 19% तक पहुच गया है, जो एफपीआई से अधिक है। इस दौरान म्यूचुअल फंड्स की होल्डिंग्स 11.1% के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंची हैं। यह प्रवाह मुख्यतः एसआईपी यानी सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये मजबूत निवेश और घरेलू संस्थानों की निरंतर खरीद के कारण रहा है।


    ऐसे माहौल में शेयर खरीदने कितना सही?

    जानकारों के मुताबिक, निफ्टी इस समय वित्त वर्ष 27 की अनुमानित कमाई के करीब 20 गुना पर ट्रेड कर रहा है, जबकि एनएसई मिडकैप इंडेक्स 28 गुना और स्मॉलकैप इंडेक्स 24 गुना के आसपास है। उनका कहना है कि ऐसे माहौल में यह स्टॉक पिकर का बाजार बन जाता है, जहां सही शेयर चुनना ही असली खेल है।


    1. प्रॉफिट-बुकिंग के कारण बिकवाली

    हाल के तेजी के बाद निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए शेयर बेच रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा है।


    2. वैश्विक संकेत कमजोर

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों के कमजोर रुख और अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक सतर्क हैं, जिससे भारतीय बाजार में बिकवाली बढ़ी।


    3. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें

    तेल की बढ़ती कीमतों से लागत और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ता है, जो निवेशकों के मनोबल को कमजोर करता है।


    4. प्रमुख शेयरों में भारी गिरावट

    बैंक, वित्तीय सेवाएँ, मेटल, एफएमसीजी जैसे बड़े समूहों के शेयरों में बिकवाली से इंडेक्स को बड़ी चोट लग रही है।


    5. वैश्विक नीतिगत अनिश्चितता

    यूएस फेडरल रिज़र्व की नीति समेत ग्लोबल नीतिगत असमंजस ने विदेशी पूंजी प्रवाह को प्रभावित किया है।


    6. बाजार में व्यापक मंदी

    मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी गिरावट के साथ व्यापक बिकवाली देखने को मिल रही है।

  • सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?

    सिबिल स्कोर के बिना भी मिल सकेगा लोन, जानिए क्या है सरकार की नई प्लानिंग?


    नई दिल्ली । देश में लाखों ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी बैंक से कर्ज नहीं लिया, इसलिए उनका कोई क्रेडिट इतिहास नहीं है। नतीजा यह होता है कि जब वे पहली बार लोन के लिए आवेदन करते हैं तो सिबिल स्कोर न होने के कारण उन्हें आसानी से मंजूरी नहीं मिलती। अब केंद्र सरकार इस स्थिति को बदलने की तैयारी में है।
    बिना सिबिल स्कोर के लोन
    क्या अब लोन लेने के लिए सिबिल स्कोर जरूरी नहीं रहेगा? केंद्र सरकार एक ऐसी नए सिस्टम पर काम कर रही है, जो देश के लाखों लोगों के लिए बैंकिंग के दरवाजे खोल सकती है। खासकर महिलाएं, ग्रामीण आबादी और वे लोग जिन्होंने कभी बैंक से लोन नहीं लिया, उन्हें इस पहल से बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्रेडिट स्कोरिंग फ्रेमवर्क विकसित करने पर विचार कर रही है, जिससे बिना पारंपरिक क्रेडिट इतिहास के भी ऋण मिल सके।

    फिलहाल बैंक किसी भी व्यक्ति को लोन देने से पहले उसका सिबिल स्कोर और क्रेडिट हिस्ट्री जांचते हैं। सिबिल जैसी क्रेडिट एजेंसियां पुराने लोन, समय पर भुगतान और डिफॉल्ट का रिकॉर्ड रखती हैं। जिन लोगों ने पहले कभी लोन नहीं लिया या जिनका कोई क्रेडिट रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें अक्सर न्यू टू क्रेडिट मानकर लोन से वंचित कर दिया जाता है। सरकार का मानना है कि यह व्यवस्था पहली बार लोन लेने वालों के लिए एक बड़ी बाधा है।

    AI आधारित क्रेडिट स्कोरिंग क्या करेगी?

    नई योजना के तहत एआई और डेटा एनालिटिक्स की मदद से वैकल्पिक आंकड़ों के आधार पर व्यक्ति की क्रेडिट योग्यता आंकी जा सकती है। उदाहरण के तौर पर नियमित बिजली-पानी के बिल का भुगतान, मोबाइल रिचार्ज या डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड, बैंक खाते में लेनदेन का व्यवहार और सरकारी योजनाओं का लाभ। इन सभी डेटा को मिलाकर एक वैकल्पिक क्रेडिट प्रोफाइल तैयार किया जा सकता है। इससे उन लोगों को भी ऋण मिल सकेगा जिनका पारंपरिक सिबिल स्कोर नहीं है।

    महिलाओं और ग्रामीण आबादी को मिलेगा फायदा

    यह पहल खासकर महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों छोटे कारोबारियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है। इन वर्गों के पास आय का सोर्स तो होता है, लेकिन औपचारिक क्रेडिट इतिहास नहीं होता। नई प्रणाली उन्हें औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने में मदद करेगी।

    बैंकिंग सेक्टर के लिए क्या मतलब?
    यदि यह ढांचा लागू होता है, तो बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहक आधार का विस्तार कर सकेंगे। साथ ही, वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।

  • 1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड के नियमों पर लागू होंगे 5 अहम बदलाव, जानिए कैसे बदलेंगे आपके खर्च के तरीके

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड के नियमों पर लागू होंगे 5 अहम बदलाव, जानिए कैसे बदलेंगे आपके खर्च के तरीके


    नई दिल्ली । अगर आप रोजमर्रा के खर्च, ऑनलाइन शॉपिंग या टैक्स पैमेंट के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो 1 अप्रैल 2026 से आपके लिए कई नियम बदल सकते हैं। आयकर विभाग द्वारा जारी ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में क्रेडिट कार्ड से जुड़े पांच बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ये नियम 1962 के पुराने प्रावधानों की जगह ले सकते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि इन बदलावों का आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग पर क्या असर पड़ेगा।

    बड़े क्रेडिट कार्ड बिल पर होगी सख्त रिपोर्टिंग

    नए ड्राफ्ट के मुताबिक, अगर किसी वित्त वर्ष में आपके एक या ज्यादा क्रेडिट कार्ड का कुल भुगतान ₹10 लाख या उससे ज्यादा है (कैश छोड़कर), तो बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी को इसकी जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी। वहीं, अगर ₹1 लाख या उससे ज्यादा का भुगतान नकद में किया जाता है, तो उसकी भी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इसका उद्देश्य बड़े लेनदेन पर नजर रखना और टैक्स अनुपालन को मजबूत बनाना है।

    पैन बनवाते समय काम आएगा क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट

    अब तीन महीने से कम पुराना क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट पते के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। इससे नए पैन आवेदनकर्ताओं को ज्यादा सुविधा मिलेगी और डॉक्यूमेंट जुटाने की प्रक्रिया आसान होगी।

    टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को मंजूरी
    अब आयकर का ऑनलाइन भुगतान करते समय क्रेडिट कार्ड भी मान्य इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड होगा। पहले केवल डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग आदि विकल्प उपलब्ध थे। इस बदलाव से करदाताओं को भुगतान में लचीलापन मिलेगा, हालांकि उन्हें ब्याज और चार्जेस का ध्यान रखना होगा।

    कंपनी के दिए क्रेडिट कार्ड पर टैक्स नियम

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया गया है और उस पर हुए खर्च का भुगतान कंपनी करती है, तो उसे परक्विजिट माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, अगर खर्च पूरी तरह ऑफिशियल काम के लिए है और कंपनी के पास उसका पूरा रिकॉर्ड व प्रमाणपत्र मौजूद है, तो टैक्स से छूट मिल सकती है। 1 अप्रैल 2026 से क्रेडिट कार्ड नियम बदलेंगे, जिनमें बड़े बिल की रिपोर्टिंग, पैन अनिवार्यता कंपनी कार्ड पर टैक्स और क्रेडिट कार्ड से टैक्स भुगतान शामिल जिससे खर्च और टैक्स प्लानिंग दोनों प्रभावित होंगे।
    क्रेडिट कार्ड के लिए पैन अनिवार्य
    अब किसी भी बैंक या संस्था से क्रेडिट कार्ड लेने के लिए पैन नंबर देना जरूरी होगा। बिना पैन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसका मकसद बड़े लेनदेन को टैक्स सिस्टम से जोड़ना और फर्जी खातों पर रोक लगाना है।

    क्या बदलेगा आपके खर्च का तरीका?
    इन नियमों से साफ है कि सरकार बड़े क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर नजर सख्त करने की तैयारी में है। साथ ही डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और पारदर्शिता लाने पर जोर है। यदि आप बड़े खर्च करते हैं या कंपनी कार्ड का उपयोग करते हैं, तो रिकॉर्ड और टैक्स प्लानिंग पर खास ध्यान देना जरूरी होगा।

  • नो टॉलरेंस… एयरपोर्ट और फ्लाइट में अब हंगामा किया तो खैर नहीं, होगी सख्त कार्रवाई, DGCA ने जारी किया ड्राफ्ट

    नो टॉलरेंस… एयरपोर्ट और फ्लाइट में अब हंगामा किया तो खैर नहीं, होगी सख्त कार्रवाई, DGCA ने जारी किया ड्राफ्ट


    नई दिल्ली । फ्लाइट में हंगामा करने वालों पर अब सरकार सख्ती बरतने जा रही है. नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फ्लाइट या एयरपोर्ट पर हंगामा करना, क्रू से बदतमीज़ी करना या नशे में उत्पात मचाना महंगा पड़ सकता है. इन सब चीजों को लेकर DGCA ने एयरलाइंस और दूसरे संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं. सुझावों के बाद ही इन्हें अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा.

    DGCA का कहना है कि विमान और एयरपोर्ट हंगामा या प्रदर्शन करने की जगह नहीं हैं. यात्रियों की सुरक्षा और फ्लाइट की व्यवस्था में रुकावट डालने वाले किसी भी व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. ड्राफ्ट में जीरो टॉलरेंस यानी बिल्कुल भी ढील न देने की बात कही गई है.

    किन हरकतों पर होगी कार्रवाई?

    ड्राफ्ट के मुताबिक फ्लाइट या एयरपोर्ट पर शराब या नशे में हंगामा करना, धूम्रपान करना, पायलट या केबिन क्रू की बात न मानना, गाली-गलौज या मारपीट करना, इमरजेंसी गेट से छेड़छाड़ करना, फ्लाइट के अंदर नारेबाजी या विरोध प्रदर्शन करना इन हरकतों को गंभीर माना जाएगा. ऐसे मामलों में यात्री को फ्लाइट से उतारा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर पुलिस कार्रवाई भी हो सकती है.

    DGCA ने ड्राफ्ट में अनुशासनहीन व्यवहार को चार स्तरों में बांटने का प्रस्ताव रखा है. हल्की बदतमीज़ी से लेकर मारपीट, जानलेवा हिंसा और कॉकपिट में घुसने की कोशिश तक को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है. इसी आधार पर तय होगा कि यात्री पर कितनी सख्त कार्रवाई होगी.

    नो-फ्लाई लिस्ट और उड़ान से बैन

    गंभीर मामलों में यात्रियों को कुछ महीनों से लेकर कई साल तक उड़ान से बैन करने का प्रस्ताव है. ऐसे यात्रियों का नाम नो-फ्लाई लिस्ट में डाला जा सकता है. ताकि वे दूसरी एयरलाइन से टिकट लेकर भी नियमों से बच न पाएं. कम से कम 30 दिन तक उड़ान से बैन लगाने का प्रस्ताव भी है. हालांकि यह सूची सार्वजनिक नहीं होगी बल्कि सिर्फ एयरलाइंस और संबंधित एजेंसियों के बीच साझा की जाएगी. DGCA ने साफ किया है कि ये नियम फिलहाल सिर्फ ड्राफ्ट हैं. सभी पक्षों से सुझाव मिलने के बाद ही इन्हें फाइनल कर लागू किया जाएगा.
  • सोना 2000 रुपये से ज्यादा हुआ महंगा, चांदी की भी 15000 रुपये बढ़ी कीमत; चेक करें लेटेस्ट रेट

    सोना 2000 रुपये से ज्यादा हुआ महंगा, चांदी की भी 15000 रुपये बढ़ी कीमत; चेक करें लेटेस्ट रेट


    नई दिल्ली । बुधवार को सोने-चांदी के दाम में आई गिरावट के बाद आज फिर से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. गुरुवार, 19 फरवरी को देश में 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,54,200 रुपये है, जो कल के मुकाबले 2,290 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत आज 2,100 रुपये बढ़कर 1,41,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,650 रुपये है, जो बुधवार के मुकाबले 1,720 रुपये ज्यादा है.

    देश के इन शहरों में सोने का ताजा भाव

    मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, कटक, विशाखापत्तनम, मैंगलोर, अमरावती जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 15,649 रुपये है. वहीं, इन शहरों में 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,345 और 11,737 रुपये है.
    दिल्ली, वडोदरा, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, सूरत और अयोध्या में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 15,664 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 14,360 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,752 रुपये है.
    चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे तमाम दक्षिण भारतीय शहरों में गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 15,818 रुपये, 22 कैरेट सोने की कीमत 14,500 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,400 रुपये है.

    चांदी ने भी लगाई छ
    लांग
    देश में आज 1 किलो चांदी की कीमत 2,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि कल इसकी कीमत 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी. यानी कि सीधे-सीधे इसमें 15,000 रुपये का उछाल आया है. इस हिसाब से आज भारत में 1 ग्राम चांदी की कीमत कल के 255 रुपये से बढ़कर आज 270 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.

    भारत में चांदी की कीमत इंटरनेशनल कीमतों से तय होती है, जो किसी भी दिशा में ऊपर-नीचे हो सकती हैं. इसके अलावा यह डॉलर के मुकाबले रुपये की के मूवमेंट पर भी निर्भर करता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है और इंटरनेशनल कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चांदी और भी महंगी हो जाएगी.

     बुधवार को सोने-चांदी के दाम में आई गिरावट के बाद आज फिर से कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. गुरुवार, 19 फरवरी को देश में 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,54,200 रुपये है, जो कल के मुकाबले 2,290 रुपये ज्यादा है. इसी तरह से 22 कैरेट सोने की कीमत आज 2,100 रुपये बढ़कर 1,41,350 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,650 रुपये है, जो बुधवार के मुकाबले 1,720 रुपये ज्यादा है.

    देश के इन शहरों में सोने का ताजा भाव

    मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, केरल, पुणे, विजयवाड़ा, नागपुर, भुवनेश्वर, कटक, विशाखापत्तनम, मैंगलोर, अमरावती जैसे शहरों में आज 24 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 15,649 रुपये है. वहीं, इन शहरों में 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने की कीमत क्रमश: 14,345 और 11,737 रुपये है.
    दिल्ली, वडोदरा, अहमदाबाद, जयपुर, लखनऊ, पटना, चंडीगढ़, सूरत और अयोध्या में आज 24 कैरेट सोने की कीमत 15,664 रुपये प्रति ग्राम है. इन शहरों में आज 22 कैरेट सोने की कीमत प्रति ग्राम के हिसाब से 14,360 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 11,752 रुपये है.
    चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, सेलम, त्रिची जैसे तमाम दक्षिण भारतीय शहरों में गुरुवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 15,818 रुपये, 22 कैरेट सोने की कीमत 14,500 रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत 12,400 रुपये है.

    चांदी ने भी लगाई छलांग
    देश में आज 1 किलो चांदी की कीमत 2,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि कल इसकी कीमत 2,55,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी. यानी कि सीधे-सीधे इसमें 15,000 रुपये का उछाल आया है. इस हिसाब से आज भारत में 1 ग्राम चांदी की कीमत कल के 255 रुपये से बढ़कर आज 270 रुपये प्रति ग्राम हो गई है.

    भारत में चांदी की कीमत इंटरनेशनल कीमतों से तय होती है, जो किसी भी दिशा में ऊपर-नीचे हो सकती हैं. इसके अलावा यह डॉलर के मुकाबले रुपये की के मूवमेंट पर भी निर्भर करता है. अगर डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है और इंटरनेशनल कीमतें स्थिर रहती हैं, तो चांदी और भी महंगी हो जाएगी.

  • टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के भविष्य का फैसला 24 फरवरी को… ग्रुप बोर्ड की होगी अहम बैठक

    टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के भविष्य का फैसला 24 फरवरी को… ग्रुप बोर्ड की होगी अहम बैठक


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह (Tata Group) के लिए अगला सप्ताह काफी अहम होगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अगले सप्ताह टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग (Board meeting of Tata Sons) होने वाली है। 24 फरवरी को प्रस्तावित इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) के तीसरे कार्यकाल पर फैसला होगा। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में बोर्ड के सामने तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड के एक सूत्र के अनुसार टाटा संस बोर्ड में कार्यकाल बढ़ाने की चर्चा से चंद्रशेखरन खुद को अलग रखेंगे। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल अगले वर्ष पूरा होने वाला है, ऐसे में समय से पहले ही उनके नेतृत्व को लेकर स्पष्टता लाने की तैयारी की जा रही है।


    पिछले साल नोएल टाटा ने रखा था प्रस्ताव

    टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले साल एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। उस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा था। अब इस प्रस्ताव पर बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।


    रतन टाटा ने की थी सिफारिश

    चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल की बात करें तो साल 2022 में जब कार्यकाल बढ़ाया गया था, तब टाटा ट्रस्ट्स के तत्कालीन अध्यक्ष और समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा ने टाटा संस बोर्ड की बैठक में हिस्सा लिया था। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों के लिए चंद्रशेखरन के नाम की सिफारिश की थी। बता दें कि नमक से सेमीकंडक्टर तक के कारोबार में सक्रिय टाटा समूह इस समय कई रणनीतिक विस्तार योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की निरंतरता को समूह की दीर्घकालिक रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने एयरलाइन, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार में बड़े फैसले लिए हैं, जिससे कंपनी की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हुई है।


    कौन है एन चंद्रशेखरन?

    नटराजन चंद्रशेखरन टाटा समूह की सभी कंपनियों के प्रमोटर टाटा संस के चेयरमैन हैं। वह अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में चेयरमैन नियुक्त हुए। वे टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, एयर इंडिया, इंडियन होटल्स कंपनी और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सहित समूह की कई ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं।चेयरमैन बनने से पहले, वे टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, जहां उन्होंने 30 वर्षों तक सेवा की। वह 2017 तक आठ वर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में शामिल हैं।

  • सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी…. जानिए क्यों गिर रहे दाम?

    सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी…. जानिए क्यों गिर रहे दाम?

     gold and silver

    नई दिल्ली। सोने और चांदी (Gold- Silver Price) के लिए मंगलवार को दिन अच्छा नहीं रहा है। इस दिन कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिली है। एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर (MCX Gold Futures) का रेट गिरकर 151244 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। गोल्ड की आज की कीमतों में 3500 रुपये या फिर 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, एमसीएक्स सिल्वर मार्च कॉन्ट्रैक्ट्स (MCX Silver March Contracts) के शेयरों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का रेट 10,500 रुपये फिर 4.4 प्रतिशत टूटकर 229352 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया।


    सोने और चांदी की कीमतों में क्यों आ रही है गिरावट

    गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट के पीछे की वजह डॉलर का मजूबत होना है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान बातचीत, यूएस फेड रिजर्व का ताजा अपडेट और छुट्टी की वजह से ज्यादा एशियाई बाजार के बंद होने की वजह से यह गिरावट देखने को मिली है। बता दें, आज डॉलर इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है।

    एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?
    जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी कहते हैं, “गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में गिरावट का सिलसिला आज भी जारी है। इसके पीछे की वजह डॉलर का मजबूत होना और हालिया तेजी के बाद प्रॉफिट बुकिंग है। कल छुट्टी की वजह से यूएस मार्केट बंद था। इसकी वजह से भी सोने और चांदी की कीमतों पर असर पड़ा है।” हरीश कहते हैं, “बाजार में मौजूद निवेशक इस हफ्ते आने वाले अमेरिकी इकनॉमिक आंकड़ों से पहले सतर्कता दिखा रहे हैं। ताजा जीडीपी आंकड़े और FOMC मीटिंग का असर फेड रिजर्व की उम्मीदों पर पड़ेगा।”


    क्या सोना और चांदी खरीदने का यह है सही समय?

    गोल्ड और सिल्वर इस समय काफी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कोई भी तेजी शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए बेच कर बाहर निकलने का सही मौका होगा। ब्रोकरेज हाइस च्वाइस ब्रोकिंग का कहना है कि गोल्ड के लिए 149000 रुपये और चांदी 225000 का रेट काफी अहम होगा। अगर दाम इसके नीचे जाते हैं तो दबाव के कारण कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी।

  • 10 फाइनेंशियल मिस्टेक्स जो किसी को भी नहीं करनी चाहिए, समय रहते समझने में है समझदारी

    10 फाइनेंशियल मिस्टेक्स जो किसी को भी नहीं करनी चाहिए, समय रहते समझने में है समझदारी

    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में कमाई बढ़ाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है पैसों का सही प्रबंधन करना। अक्सर आर्थिक संकट बड़ी वजहों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी वित्तीय गलतियों से पैदा होता है। अनियोजित खर्च, बढ़ता क्रेडिट कार्ड बिल, बिना योजना के बड़े खरीद फैसले और बचत की अनदेखी-ये सभी मिलकर वित्तीय स्थिरता को कमजोर कर देते हैं। अगर समय रहते इन आदतों पर नियंत्रण न किया जाए, तो अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक दबाव बना रह सकता है। आइए, यहां हम उन 10 गलतियों की चर्चा करते हैं, जिनसे हर किसी को बचना चाहिए।
    गैर-जरूरी खर्च
    कभी-कभार महंगी कॉफी, बाहर खाना या पेड मूवी ऑर्डर करना मामूली लग सकता है, लेकिन ये छोटे खर्च मिलकर बड़ा बोझ बन जाते हैं। मान लीजिए, अगर आप हर हफ्ते बाहर खाने पर 500 रुपये खर्च करते हैं, तो साल भर में यह 24000 रुपये हो जाता है। यह रकम छोटे-मोटे कर्ज चुकाने या सेविंग में लगाई जा सकती है। आर्थिक तंगी के समय ऐसे खर्चों से बचना बेहद जरूरी है।

    बार-बार होने वाले नियमित खर्च
    हर महीने या सालाना कटने वाले खर्चों पर नजर डालें- जैसे कई स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन या महंगे जिम मेंबरशिप। खुद से पूछें, क्या ये जरूरत हैं या सिर्फ चाहत? कई बार कम खर्च वाला विकल्प भी काम चला सकता है और आपको बचत का मौका दे सकता है।

    क्रेडिट कार्ड का ज्यादा उपयोग
    गैर-जरूरी चीजों के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आम हो गया है। लेकिन अगर आप महीने के आखिर तक पूरा बकाया नहीं चुका पाते, तो ऊंची ब्याज दरें खरीदी गई वस्तुओं को बेहद महंगा बना देती हैं। कई बार क्रेडिट कार्ड के चलते लोग अपनी आय से ज्यादा खर्च कर बैठते हैं।

    गाड़ी खरीदने में जल्दबाजी
    हर साल लाखों नई गाड़ियां बिकती हैं, लेकिन बहुत कम लोग उन्हें नकद खरीद पाते हैं। लोन लेकर गाड़ी खरीदना आसान लगता है, लेकिन किस्त भर पाने की क्षमता और गाड़ी का वास्तविक खर्च उठाने की क्षमता अलग बातें हैं।

    ध्यान रहे, गाड़ी एक घटती कीमत वाली संपत्ति है। उस पर ब्याज देना आर्थिक रूप से नुकसानदायक हो सकता है। बार-बार गाड़ी बदलना भी घाटे का सौदा साबित होता है। जरूरत के अनुसार गाड़ी का चुनाव ही समझदारी है। दिखावे के लिए महंगी SUV खरीदना बजट पर भारी पड़ सकता है।

    घर पर जरूरत से ज्यादा खर्च
    घर खरीदते समय “बड़ा ही बेहतर है” हमेशा सही नहीं होता। बड़ी प्रॉपर्टी का मतलब ज्यादा टैक्स, मेंटेनेंस और यूटिलिटी बिल। मॉर्गेज के अलावा अन्य नियमित खर्चों पर भी विचार करना जरूरी है। घर ऐसा हो, जो आपकी जरूरत और बजट दोनों के मुताबिक हो।

    बार-बार रीफाइनेंसिंग करना
    अगर आप घर की जरूरत के लिए बार-बार रीफाइनेंसिंग करते हैं तो यह जोखिम भरा हो सकता है। अगर कम ब्याज दर पर कर्ज चुकाने के लिए ऐसा किया जाए तो ठीक है, लेकिन इसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड की तरह करना अनावश्यक ब्याज का कारण बन सकता है।

    बचत न करना
    कई परिवार “पेचेक टू पेचेक” जीवन जी रहे हैं। ऐसे में एक वेतन न मिलना भी संकट पैदा कर सकता है। आपातकालीन फंड का होना बेहद जरूरी है, खासकर आर्थिक मंदी जैसे समय में।

    रिटायरमेंट के लिए निवेश न करना
    अगर आपका पैसा निवेश के जरिए काम नहीं कर रहा, तो आरामदायक रिटायरमेंट मुश्किल हो सकता है। रिटायरमेंट खातों में नियमित निवेश लंबी अवधि में वित्तीय सुरक्षा देता है। इसलिए किसी अच्छी रिटायरमेंट स्कीम में अभी से निवेश की शुरुआत कर दें।

    कर्ज चुकाने के लिए रिटायरमेंट फंड का इस्तेमाल
    कुछ लोग ऊंचे ब्याज वाले कर्ज से बचने के लिए रिटायरमेंट फंड निकालने का सोचते हैं। ऐसा करने से कंपाउंडिंग का लाभ खत्म हो जाता है और तय वर्ष से कम उम्र में निकासी पर पेनल्टी भी लग सकती है। रिटायरमेंट फंड को छूना बिल्कुल आखिरी विकल्प होना चाहिए।

    वित्तीय योजना का अभाव
    आज के डिजिटल दौर में लोग घंटों मनोरंजन और सोशल मीडिया पर व्यतीत कर देते हैं, लेकिन अपने वित्तीय भविष्य की योजना बनाने के लिए समय नहीं निकालते। परिणामस्वरूप, आय और खर्च का सही आकलन नहीं हो पाता और बचत व निवेश की दिशा अस्पष्ट रह जाती है। बिना ठोस वित्तीय योजना के भविष्य अनिश्चित और असुरक्षित बन सकता है। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि आप नियमित रूप से अपनी आय, खर्च, बचत और निवेश की समीक्षा करें और स्पष्ट वित्तीय लक्ष्य तय करें।