Category: Economy

  • इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार पर जोर, गडकरी बोले- क्लीयरेंस में देरी से बढ़ती है लागत

    इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सुधार पर जोर, गडकरी बोले- क्लीयरेंस में देरी से बढ़ती है लागत


    नई दिल्ली।भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले के सप्ताह में भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।

    गोल्ड रिजर्व में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

    विदेशी मुद्रा भंडार में इस बार सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा।

    गोल्ड रिजर्व: 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर
    फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर

    एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में आंकी जाती है।

    एसडीआर में हल्की बढ़त, आईएमएफ पोजीशन स्थिर

    आरबीआई के अनुसार,

    एसडीआर (Special Drawing Rights): 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर
    आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन: 4.816 अरब डॉलर (कोई बदलाव नहीं)
    क्यों अहम होता है विदेशी मुद्रा भंडार?

    किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है।

    यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है
    वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है
    आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है

    जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक इसी भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करता है।

    मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत

    विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जो न केवल वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएगी।

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697 अरब डॉलर पार, 9.06 अरब डॉलर की जोरदार बढ़ोतरी

    भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 697 अरब डॉलर पार, 9.06 अरब डॉलर की जोरदार बढ़ोतरी


    नई दिल्ली। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह में 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। Reserve Bank of India (आरबीआई) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। इससे पहले के सप्ताह में भंडार में 10.288 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी।

    गोल्ड रिजर्व में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी

    विदेशी मुद्रा भंडार में इस बार सबसे बड़ा योगदान गोल्ड रिजर्व का रहा।

    गोल्ड रिजर्व: 7.221 अरब डॉलर बढ़कर 120.742 अरब डॉलर
    फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA): 1.784 अरब डॉलर बढ़कर 552.856 अरब डॉलर

    एफसीए में डॉलर के अलावा येन, यूरो और पाउंड जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं शामिल होती हैं, जिनकी वैल्यू डॉलर में आंकी जाती है।

    एसडीआर में हल्की बढ़त, आईएमएफ पोजीशन स्थिर

    आरबीआई के अनुसार,

    एसडीआर (Special Drawing Rights): 5.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.707 अरब डॉलर
    आईएमएफ में भारत की रिजर्व पोजीशन: 4.816 अरब डॉलर (कोई बदलाव नहीं)
    क्यों अहम होता है विदेशी मुद्रा भंडार?

    किसी भी देश के लिए विदेशी मुद्रा भंडार उसकी आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण संकेतक होता है।

    यह मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने में मदद करता है
    वैश्विक व्यापार को सुगम बनाता है
    आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है

    जब रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक इसी भंडार का इस्तेमाल कर डॉलर की बिक्री कर मुद्रा को स्थिर करता है।

    मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत

    विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि देश में डॉलर की आवक मजबूत बनी हुई है। इससे भारत की वैश्विक व्यापार क्षमता बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

    विदेशी मुद्रा भंडार में आई यह बढ़त भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जो न केवल वित्तीय स्थिरता को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को भी और सुदृढ़ बनाएगी।

  • स्पेस मिशन में तकनीकी चुनौती, यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल!

    स्पेस मिशन में तकनीकी चुनौती, यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल!


    नई दिल्ली। NASA ने हाल ही में एक एक्सप्लेनर वीडियो जारी कर Artemis II मिशन के दौरान सामने आई एक अहम तकनीकी समस्या के बारे में जानकारी दी है। यह दिक्कत Orion spacecraft में लगे स्पेस टॉयलेट यानी ‘यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम’ (UWMS) में आई थी।

    यह सिस्टम अंतरिक्ष में मानव अपशिष्ट (वेस्ट) को संभालने के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें यूरिन को एक टैंक में इकट्ठा किया जाता है और फिर उसे वैक्यूम के जरिए बाहर निकाला जाता है। चूंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं होता, इसलिए यह पूरा सिस्टम हवा के तेज बहाव (एयर फ्लो) पर काम करता है।

    क्या आई थी समस्या?

    मिशन के दौरान अचानक इस सिस्टम में फ्लो बंद हो गया, जिससे एस्ट्रोनॉट्स टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। वीडियो में एस्ट्रोनॉट्स ने बताया कि “जब फ्लो ही नहीं था, तो सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इस स्थिति में क्रू को अस्थायी तौर पर ‘कॉन्टिगेंसी कलेक्शन यूनिट्स’ (CCUS) का उपयोग करने की सलाह दी गई, जो आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला बैकअप सिस्टम होता है।

    तकनीकी चुनौती क्यों है यह?

    NASA के अनुसार, असली समस्या यूरिन को वैक्यूम में डिस्पोज करने के दौरान आई। शुद्ध पानी को वैक्यूम में भेजना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन यूरिन जैसे जटिल तरल पदार्थ में कई अतिरिक्त चुनौतियां सामने आती हैं।

    इस प्रक्रिया में तरल के अचानक उथल-पुथल करने और जमने (फ्रीजिंग) जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। एस्ट्रोनॉट्स ने इसे मजाकिया अंदाज में “बर्फ का तूफान” बताया।

    कैसे हुआ समाधान?

    इस तकनीकी खराबी को महिला एस्ट्रोनॉट Christina Hammock Koch ने ठीक किया। शुरुआत में लगा कि मोटर में कुछ फंस गया है, लेकिन बाद में यह ‘प्राइमिंग’ से जुड़ी छोटी तकनीकी गड़बड़ी निकली। क्रिस्टीना ने इसे ठीक कर दिया और मिशन को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया। उन्होंने मजाक में खुद को “स्पेस प्लंबर” भी बताया।

    क्यों है यह इतना अहम?

    स्पेस मिशनों में टॉयलेट जैसी बुनियादी चीजें भी बेहद अहम होती हैं। छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़ी चुनौती बन सकती है। यही वजह है कि NASA ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया, ताकि भविष्य के मिशनों में सुधार किया जा सके।

    आर्टेमिस III से पहले मिला बड़ा सबक

    Artemis II में आई यह समस्या Artemis III मिशन से पहले एक अहम सीख मानी जा रही है। नासा की योजना है कि आर्टेमिस III के जरिए इंसानों को फिर से चंद्रमा पर भेजा जाए। ऐसे में इस तरह की तकनीकी खामियों को समय रहते सुधारना बेहद जरूरी है।

    स्पेस मिशन में हर छोटी तकनीक बड़ी भूमिका निभाती है। आर्टेमिस II में आई टॉयलेट की समस्या ने यह साबित कर दिया कि अंतरिक्ष में जीवन को सुचारू बनाए रखने के लिए हर सिस्टम का सही तरीके से काम करना कितना जरूरी है।

  • कोयला उत्पादन में बड़ी शुरुआत, महाजेनको ने शुरू किया पहला डिस्पैच!

    कोयला उत्पादन में बड़ी शुरुआत, महाजेनको ने शुरू किया पहला डिस्पैच!


    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ में Maharashtra State Power Generation Company Limited (महाजेनको) की गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल खदान से कोयले का पहला डिस्पैच औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। इस कोयले का उपयोग महाराष्ट्र में बिजली उत्पादन के लिए किया जाएगा, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर और भरोसेमंद सप्लाई मिल सकेगी।

    ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम कदम

    यह परियोजना देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। गारे पेलमा सेक्टर–2 कोल ब्लॉक का विकास महाजेनको द्वारा किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र की प्रमुख बिजली उत्पादन कंपनी है। इस खदान से मिलने वाली कोयले की आपूर्ति से राज्य की ताप विद्युत परियोजनाओं को नियमित ईंधन मिलेगा, जिससे बिजली उत्पादन में निरंतरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।

    विशाल कोयला भंडार और उत्पादन क्षमता

    गारे पेलमा सेक्टर-2 खदान में लगभग 655.15 मिलियन टन कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। इसकी अधिकतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 23.6 मिलियन टन निर्धारित की गई है। परियोजना के पूर्ण संचालन से छत्तीसगढ़ सरकार को रॉयल्टी, जिला खनिज निधि (DMF), जीएसटी और अन्य मदों के जरिए करीब 29,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष राजस्व मिलने का अनुमान है।

    रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा

    खनन गतिविधियों से क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। इस परियोजना के तहत 3,400 से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा परिवहन, निर्माण, खानपान और अन्य सेवाओं के जरिए हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे।

    इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

    CSR और पुनर्वास योजनाओं पर फोकस

    महाजेनको ने परियोजना के तहत सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) को प्राथमिकता दी है। शुरुआती चरण में करीब 35 करोड़ रुपये की CSR योजना लागू की गई है, जिसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता, इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं।

    इसके साथ ही परियोजना से प्रभावित 14 गांवों के 1,679 परिवारों के लिए पुनर्वास और पुनर्स्थापन योजना भी लागू की जा रही है, जिससे प्रभावित लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष उपाय

    परियोजना में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए व्यापक कदम उठाए गए हैं। इसमें हरित पट्टी का विकास, बड़े स्तर पर वृक्षारोपण, प्रदूषण नियंत्रण, जल संरक्षण और खनन के बाद भूमि सुधार जैसे उपाय शामिल हैं।

    गारे पेलमा सेक्टर–2 खदान से कोयले का पहला डिस्पैच न सिर्फ महाराष्ट्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई दिशा देगा।

  • सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती, कमजोर संकेतों के बावजूद शानदार शुरुआत!

    सेंसेक्स-निफ्टी ने दिखाई मजबूती, कमजोर संकेतों के बावजूद शानदार शुरुआत!


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बावजूद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 500 अंकों की बढ़त के साथ 77,121 के स्तर पर खुला, जबकि Nifty 50 भी 23,880 के पार पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 497 अंकों से ज्यादा की तेजी के साथ 77,129 के आसपास ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 159 अंकों की बढ़त के साथ 23,934 के स्तर पर बना हुआ था।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा तेजी

    मुख्य सूचकांकों के मुकाबले व्यापक बाजारों में ज्यादा मजबूती देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जो बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट को दर्शाता है।

    किन सेक्टर्स में रही बढ़त?

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल, ऑटो, प्राइवेट बैंक, मीडिया, पीएसयू बैंक, रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर्स में 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। वहीं आईटी सेक्टर दबाव में रहा, जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। फार्मा सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    इन शेयरों में सबसे ज्यादा हलचल

    निफ्टी 50 में श्रीराम फाइनेंस, एशियन पेंट्स, एक्सिस बैंक, आयशर मोटर्स, आईसीआईसीआई बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व और एसबीआई के शेयर तेजी के साथ कारोबार करते दिखे। दूसरी ओर, Infosys, TCS, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा जैसे आईटी और फार्मा शेयरों में गिरावट देखी गई।

    बाजार एक्सपर्ट की राय

    विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट के बावजूद बाजार में मजबूती बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों में संभावित गिरावट और आने वाला मजबूत अर्निंग सीजन बाजार के लिए सकारात्मक संकेत दे रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई में हल्की बढ़ोतरी और ग्रोथ पर थोड़ा दबाव आ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर इक्विटी बाजार का रुख सकारात्मक बना रह सकता है।

    निफ्टी के लिए अहम स्तर

    तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, Nifty 50 के लिए 23,660 का स्तर मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। जब तक इंडेक्स इसके ऊपर बना रहता है, तब तक तेजी जारी रह सकती है और 24,250 तक का स्तर देखने को मिल सकता है।
    वहीं, अगर यह स्तर टूटता है, तो गिरावट बढ़कर 23,200 तक जा सकती है।

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजार की मजबूती यह दिखाती है कि घरेलू फैक्टर्स और निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।

  • चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा!

    चीन समेत कई अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ सकता है भारत, एडीबी रिपोर्ट में दावा!


    नई दिल्ली। भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच Asian Development Bank (ADB) की ताजा रिपोर्ट में भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ग्रोथ की रफ्तार भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन भारत इस क्षेत्र में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

    एशिया-प्रशांत में सुस्ती के संकेत

    ADB के अनुसार, विकासशील एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि दर 2025 के 5.4% से घटकर 2026 और 2027 में 5.1% रहने का अनुमान है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सप्लाई चेन से जुड़े जोखिम प्रमुख कारण बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, स्थिर श्रम बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता खर्च इस क्षेत्र को कुछ हद तक सहारा देता रहेगा।

    भारत की मजबूत ग्रोथ बनी रहेगी

    ADB के मुताबिक, India की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.9% की दर से बढ़ सकती है, जो 2027 में बढ़कर 7.3% तक पहुंचने का अनुमान है। यह तेजी मुख्य रूप से मजबूत घरेलू खपत, सरकारी निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के चलते बनी रहेगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्षेत्र की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की स्थिति अधिक स्थिर और मजबूत नजर आ रही है।

    China की ग्रोथ में गिरावट

    ADB ने China (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) की आर्थिक वृद्धि को लेकर सतर्क अनुमान जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन की ग्रोथ 2026 में घटकर 4.6% और 2027 में 4.5% रहने की संभावना है, जो पिछले साल 5% थी। इस गिरावट के पीछे प्रॉपर्टी सेक्टर की कमजोरी और निर्यात में सुस्ती को मुख्य कारण माना गया है।

    जोखिम अभी भी बरकरार

    ADB के चीफ इकोनॉमिस्ट Albert Park ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष ऊर्जा और खाद्य कीमतों को बढ़ा सकता है। इससे वित्तीय स्थितियां और कमजोर हो सकती हैं, जो पूरे क्षेत्र के लिए बड़ा जोखिम है। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार नीतियों में उतार-चढ़ाव भी ग्रोथ पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

    AI और घरेलू मांग से मिलेगा सहारा

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े उत्पादों की बढ़ती मांग और मजबूत निजी खपत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं को कुछ हद तक सपोर्ट दे सकती है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल ऊंची बनी रह सकती हैं, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो आने वाले समय में स्थिरता देखने को मिल सकती है।

    कुल मिलाकर, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है और आने वाले वर्षों में यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रह सकती है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!

    मिडिल ईस्ट तनाव से कच्चे तेल में उछाल, होर्मुज स्ट्रेट संकट का बड़ा असर!


    नई दिल्ली। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को 1% से ज्यादा की तेजी देखने को मिली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक है, जहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर वैश्विक बाजार पर पड़ता है।

    ब्रेंट और WTI में तेजी

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1.13% बढ़कर 97.01 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं WTI क्रूड 1.39% की बढ़त के साथ 99.24 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता नजर आया।

    गौरतलब है कि इससे पहले बुधवार को तेल की कीमतों में करीब 20% की गिरावट आई थी और यह 100 डॉलर के नीचे आ गया था। अब दोबारा तेजी ने बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है।

    Multi Commodity Exchange पर भी दिखा असर

    भारतीय बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर क्रूड ऑयल फ्यूचर्स (20 अप्रैल डिलीवरी) करीब 2.43% बढ़कर 9,150 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह तेजी घरेलू बाजार में भी वैश्विक संकेतों का असर दर्शाती है।

    सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार

    हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। Israel द्वारा Lebanon में जारी हमले और Iran की गतिविधियों ने स्थिति को जटिल बना रखा है।

    बताया जा रहा है कि Iran ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है, जिससे शिपिंग गतिविधियां सामान्य स्तर के 10% से भी कम रह गई हैं। शिपिंग कंपनियां भी स्थिति स्पष्ट होने तक इस मार्ग से जहाज भेजने में सतर्कता बरत रही हैं।

    Donald Trump की चेतावनी

    इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर सीजफायर का पालन नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसकी संभावना फिलहाल कम है।

    उन्होंने दोहराया कि Iran को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी और Strait of Hormuz को खुला और सुरक्षित रखने के लिए अमेरिका तैयार है।

    आगे क्या संकेत?

    Asian Development Bank (ADB) के अनुसार, मौजूदा हालात को देखते हुए निकट भविष्य में तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं। हालांकि, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है।

  • आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!

    आरबीआई की समयसीमा से पहले मजबूत हुआ रुपया, डॉलर के मुकाबले दिखाई मजबूती!


    नई दिल्ली। शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया करीब 10 पैसे चढ़कर 92.57 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 92.66 पर बंद हुआ था। बाजार में यह मजबूती मुख्य रूप से Reserve Bank of India (RBI) की ओर से तय की गई समयसीमा के चलते देखने को मिली।

    बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग से मिला सपोर्ट

    10 अप्रैल बैंकों के लिए ऑफशोर नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में अपनी अतिरिक्त पोजीशन खत्म करने की आखिरी तारीख है। इसी कारण बैंकों ने अपनी आर्बिट्रेज पोजीशन कम करनी शुरू कर दी, जिससे रुपए को सपोर्ट मिला।

    मार्च में RBI ने निर्देश दिया था कि बैंकों की रुपए में नेट ओपन पोजीशन हर दिन के अंत में 100 मिलियन डॉलर से अधिक नहीं होनी चाहिए। हालांकि बैंकों ने इस सीमा में ढील की मांग की थी, लेकिन केंद्रीय बैंक ने इसे सख्ती से लागू रखा।

    बाजार में ‘वेट एंड वॉच’ का माहौल

    विश्लेषकों का मानना है कि जब तक RBI की ओवरनाइट पोजीशन लिमिट को लेकर और स्पष्टता नहीं मिलती, तब तक बाजार सतर्क बना रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि डेडलाइन के बाद रुपए में बड़ी गिरावट की आशंका फिलहाल उतनी मजबूत नहीं है, जितनी बताई जा रही है।

    कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर

    इस बीच, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी निवेशकों के रडार पर है। ब्रेंट क्रूड करीब 97 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।

    घरेलू बाजार में Multi Commodity Exchange (MCX) पर कच्चे तेल के वायदा भाव ने इंट्रा-डे में 9,222 रुपये का स्तर छुआ, जो 3% से ज्यादा की बढ़त दर्शाता है। तेल की कीमतों में तेजी आमतौर पर रुपए पर दबाव डालती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

    RBI गवर्नर का बयान

    इस हफ्ते की शुरुआत में RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा था कि विदेशी मुद्रा बाजार में लगाए गए कुछ प्रतिबंध अस्थायी हैं। इनका उद्देश्य बाजार में बढ़ती अस्थिरता को नियंत्रित करना है। उन्होंने यह भी बताया कि हाल के समय में विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा है, जिसका एक कारण बैंकों द्वारा किए गए आर्बिट्रेज ट्रेड्स भी रहे हैं।

    आगे क्या संकेत?

    रुपए की चाल आगे RBI की नीतियों, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक हालात पर निर्भर करेगी। फिलहाल डेडलाइन से पहले रुपया मजबूत जरूर हुआ है, लेकिन आगे की दिशा को लेकर बाजार सतर्क बना हुआ है। RBI की डेडलाइन से पहले बैंकों की पोजीशन अनवाइंडिंग के चलते रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ, हालांकि आगे बाजार की दिशा अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।

  • मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!

    मुनाफावसूली के चलते सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, कीमतें करीब 1% तक लुढ़कीं!


    नई दिल्ली।सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को Multi Commodity Exchange (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग में कमी आने से कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है।

    सोने में हल्की कमजोरी, लेकिन सपोर्ट कायम

    एमसीएक्स पर सोने का जून वायदा करीब 0.55% गिरकर 1,52,585 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा। कारोबार के दौरान यह 1,52,419 रुपये के निचले स्तर तक गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,52,990 रुपये रहा। विश्लेषकों का मानना है कि सोना फिलहाल 1,52,500 रुपये के आसपास सपोर्ट ले रहा है। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर देखने को मिल रही है, लेकिन मजबूत तेजी के संकेत अभी नहीं हैं। अगर कीमत 1,53,000 रुपये के ऊपर टिकती है, तो यह 1,55,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं, अगर सोना 1,52,000 रुपये के नीचे फिसलता है, तो इसमें और गिरावट आकर यह 1,50,000 से 1,48,000 रुपये तक जा सकता है।

    चांदी भी दबाव में, लेकिन इंडस्ट्रियल डिमांड से सहारा

    चांदी का मई वायदा भी करीब 0.96% गिरकर 2,41,435 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करता नजर आया। दिन के दौरान यह 2,41,510 रुपये के निचले स्तर तक पहुंचा, जबकि ऊपरी स्तर 2,43,704 रुपये रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी को 2,42,000 रुपये के आसपास सपोर्ट मिल रहा है, जहां सेफ-हेवन और इंडस्ट्रियल डिमांड दोनों का सहारा बना हुआ है। हालांकि, इसकी चाल फिलहाल सतर्क बनी हुई है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    चांदी के लिए 2,45,000 से 2,47,000 रुपये के बीच मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। अगर यह स्तर टूटता है, तो कीमत 2,50,000 से 2,52,000 रुपये तक जा सकती है। वहीं नीचे की ओर 2,40,000 रुपये का स्तर अहम है, जिसके टूटने पर यह 2,36,000 से 2,35,000 रुपये तक गिर सकती है।

    बाजार का मूड बदल रहा है

    हाल के दिनों में निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों से हटकर शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी के संकेत भी सेफ-हेवन डिमांड को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि, अमेरिका-ईरान के बीच जारी अनिश्चितता के कारण सोना-चांदी में बड़ी गिरावट फिलहाल सीमित रह सकती है।

  • छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित

    छोटे और मध्यम उद्योग संकट में…. ईरान युद्ध से फिरोजाबात का कांच उद्योग भी प्रभावित


    नई दिल्ली।
    फिरोजाबाद (Firozabad) में करीब 200 छोटे और मध्यम उद्योगों (Small and Medium Industries) का अस्तित्व गैस संकट के कारण खतरे में हैं। कई फैक्ट्रियों ने उत्पादन कम कर दिया है या बंद कर दिया है। इससे हजारों कामगारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ रहा है। ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट बताती है कि फिरोजाबाद का संकट कैसे पूरे देश की कई इंडस्ट्रीज को प्रभावित कर रहा है।

    बेंगलुरु की कंपनी Mossant Craft Kombucha के को-फाउंडर शिशिर साथ्यान पिछले एक महीने से अपने प्रीमियम ड्रिंक्स के लिए कांच की बोतलें जुटाने में परेशान हैं। उनका कहना है कि बाजार में अब कांच के फ्लास्क मिल ही नहीं रहे हैं, जबकि गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक की मांग सबसे ज्यादा होती है। बढ़ती लागत को संभालने के लिए कंपनी अब मार्केटिंग और डिस्काउंट बजट में कटौती करने पर मजबूर हो गई है।


    गैस सप्लाई में बड़ी कटौती का असर

    देश में कांच की कमी की सबसे बड़ी वजह गैस संकट है। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण एनर्जी सप्लाई प्रभावित हुई है। सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए LPG और LNG की सप्लाई फैक्ट्रियों से हटाकर घरों की ओर मोड़ दी है। इसका सीधा असर कांच बनाने वाले उद्योगों पर पड़ा है, जो गैस पर निर्भर होते हैं।


    फिरोजाबाद बना संकट का केंद्र

    पिछले 400 साल से कांच उद्योग का केंद्र रहा उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद इस संकट का सबसे बड़ा शिकार बना है। यहां के कारखाने नेचुरल गैस से चलते हैं। कांच बनाने की भट्टियां 1500°C तापमान पर लगातार चलती रहती हैं। अगर ये ठंडी पड़ जाएं तो दोबारा चालू करने में हफ्तों का समय और अरबों रुपये का खर्च लगता है।

    प्रोडक्शन हुआ आधा, कीमतें 20% तक बढ़ीं
    गैस सप्लाई कम होने के कारण कई कंपनियों को उत्पादन 50% तक घटाना पड़ा है। कांच की कीमतें 20% तक बढ़ गई हैं। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और विस्तार योजनाएं रोक दी गई हैं। ग्लोबल कंपनियों को सप्लाई करने वाले उद्योग भी इस संकट से जूझ रहे हैं।


    हर सेक्टर पर असर: दवा, शराब, FMCG तक झटका

    कांच की कमी का असर सिर्फ बोतलों तक सीमित नहीं है। दूध की बोतलें, जैम के जार, दवाइयों की शीशियां, कॉस्मेटिक पैकेजिंग, सबकी सप्लाई प्रभावित हुई है। कुछ कंपनियों को पैकेजिंग लागत 30% तक बढ़ानी पड़ी है। एस आर ग्लास के प्रबंध निदेशक प्रांजल मित्तल को उम्मीद है कि कांच उत्पादन में यह रुकावट महीनों तक चलेगा। उनका कहना है, “अगर युद्ध एक सप्ताह बढ़ता है, तो हमारा कारोबार एक महीने के लिए गड़बड़ा जाता है। इसका मतलब है कि अभी अगले चार महीने बिगड़ चुके हैं।”


    भारत की क्या है कमजोरी

    भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। लगभग 50% नेचुरल गैस आयात होती है। करीब 40% LNG सिर्फ कतर से आता है। LPG का लगभग 90% आयात मिडिल-ईस्ट से होता है। यही वजह है कि वैश्विक संकट का सीधा असर घरेलू उद्योगों पर पड़ रहा है।

    रेस्टोरेंट और शादी सीजन भी प्रभावित: गैस की कमी का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं है। रेस्टोरेंट, ढाबे और छोटे फूड बिजनेस भी LPG की कमी से जूझ रहे हैं। इसका असर शादी सीजन और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी दिख रहा है।

    जल्दी राहत की उम्मीद कम: हालांकि सीजफायर की घोषणा हुई है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि हालात जल्द सामान्य नहीं होंगे। ग्लास इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी मानते हैं कि अगर युद्ध एक हफ्ता भी बढ़ता है, तो इसका असर कई महीनों तक चलता है।