Category: Economy

  • फार्मा, फूड और कृषि सेक्टर को मिलेगा फायदा, केंद्र का बड़ा फैसला


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी आवंटन का नया फॉर्मूला तय किया है। Ministry of Petroleum and Natural Gas के इस फैसले का मकसद जरूरी सेक्टर्स को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना और ऊर्जा संकट के संभावित असर को कम करना है।

    किन सेक्टर्स को मिलेगी प्राथमिकता

    नए फॉर्मूले के तहत फार्मा, फूड, कृषि, पॉलीमर, पैकेजिंग, पेंट, स्टील, बीज, सिरेमिक, फाउंड्री, फोर्जिंग, ग्लास और एयरोसोल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को बल्क एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि ये सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था और रोजमर्रा की जरूरतों से सीधे जुड़े हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिकता देना जरूरी है।

    खपत के आधार पर तय होगा आवंटन

    सरकार ने तय किया है कि इन उद्योगों को मार्च 2026 से पहले की उनकी एलपीजी खपत का 70 प्रतिशत आवंटित किया जाएगा। हालांकि, पूरे सेक्टर के लिए कुल सीमा 0.2 टीएमटी (थाउजेंड मीट्रिक टन) प्रति दिन रखी गई है, ताकि सभी को संतुलित तरीके से गैस मिल सके।

    जहां गैस विकल्प नहीं, वहां पहले एलपीजी

    नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन उद्योगों में एलपीजी की जगह प्राकृतिक गैस (PNG) का उपयोग संभव नहीं है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी दी जाएगी। इससे उत्पादन पर असर कम होगा और सप्लाई चेन बनी रहेगी।

    रजिस्ट्रेशन और पीएनजी कनेक्शन जरूरी

    सरकार ने उद्योगों के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। कंपनियों को तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के साथ रजिस्ट्रेशन कराना होगा और साथ ही सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के पास पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। हालांकि, जिन उद्योगों में एलपीजी अनिवार्य है, वहां यह शर्त लागू नहीं होगी।

    राज्यों के लिए भी प्रोत्साहन योजना

    सरकार ने राज्यों को पहले ही नॉन-डोमेस्टिक पैक्ड एलपीजी का 70 प्रतिशत आवंटन कर दिया है। इसके अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त कोटा उन राज्यों को मिलेगा, जो पीएनजी से जुड़े सुधार लागू करेंगे। राज्यों को तीन प्रमुख कदम उठाने को कहा गया है

    गैस वितरण आदेश 2026 को सभी विभागों तक पहुंचाना
    रिफॉर्म-लिंक्ड एलपीजी आवंटन का लाभ उठाना
    कंप्रेस्ड बायो गैस नीति को जल्द लागू करना
    छोटे सिलेंडरों की मांग में उछाल

    सरकार के मुताबिक, 23 मार्च से अब तक करीब 7.8 लाख 5 किलो के फ्री-ट्रेड एलपीजी सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। सिर्फ एक दिन में 1.06 लाख से ज्यादा सिलेंडर बिके, जो मांग में तेज बढ़ोतरी का संकेत है। इसके अलावा तेल कंपनियों ने जागरूकता बढ़ाने के लिए 1,300 से ज्यादा शिविर भी लगाए हैं।

    क्या होगा असर?

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया फॉर्मूला उद्योगों को राहत देने के साथ-साथ ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने में मदद करेगा। खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है, यह कदम आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने में अहम साबित हो सकता है।

  • ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान!

    ऑटो सेक्टर में झटका: हुंडई ने 1% तक कीमत बढ़ाने का किया ऐलान!


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी Hyundai Motor India Limited (एचएमआईएल) ने अपने ग्राहकों को झटका देते हुए कारों की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। कंपनी ने बताया कि 1 मई 2026 से उसकी गाड़ियों की कीमतों में अधिकतम 1 प्रतिशत तक की वृद्धि की जाएगी। यह बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के आधार पर लागू होगी, यानी हर गाड़ी पर इसका असर अलग-अलग देखने को मिलेगा।

    लागत बढ़ने का असर, ग्राहकों पर डाला जाएगा आंशिक भार

    कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में साफ किया है कि इनपुट लागत में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। Hyundai Motor India Limited ने कहा कि वह हमेशा लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश करती रही है, ताकि ग्राहकों पर ज्यादा बोझ न पड़े। लेकिन अब परिस्थितियां ऐसी हो गई हैं कि लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाना जरूरी हो गया है।

    बिक्री के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन

    कीमतें बढ़ाने के बावजूद कंपनी की बिक्री के आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। मार्च 2026 में एचएमआईएल ने कुल 69,004 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की, जो पिछले साल के मुकाबले 2.5 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें घरेलू बिक्री 55,064 यूनिट्स रही, जो मार्च महीने के लिए अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और इसमें सालाना आधार पर 6.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    तिमाही और तिमाही में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन

    जनवरी से मार्च 2026 के बीच कंपनी की कुल बिक्री 2,08,275 यूनिट्स रही, जो पिछले साल की तुलना में 8.7 प्रतिशत ज्यादा है। चौथी तिमाही में घरेलू बिक्री 1,66,578 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो कंपनी के इतिहास में किसी भी तिमाही का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह पिछले साल के मुकाबले 8.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    निर्यात में भी दिखी तेजी

    घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मोर्चे पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इस दौरान निर्यात 9.4 प्रतिशत बढ़कर 41,697 यूनिट्स तक पहुंच गया, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की मजबूत पकड़ को दिखाता है।

    टाटा मोटर्स ने भी बढ़ाए दाम

    ऑटो सेक्टर में कीमतों में बढ़ोतरी का यह ट्रेंड सिर्फ हुंडई तक सीमित नहीं है। Tata Motors ने भी हाल ही में अपने पैसेंजर वाहनों की कीमतों में 0.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है। इसके अलावा कंपनी ने अपने कमर्शियल वाहनों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। कंपनी के एमडी और सीईओ Shailesh Chandra के मुताबिक, लगातार बढ़ती कमोडिटी और इनपुट लागत के कारण यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

    आगे क्या होगा असर?

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटो सेक्टर में बढ़ती लागत और सप्लाई चेन से जुड़े दबाव के चलते आने वाले समय में अन्य कंपनियां भी कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं। इसका असर ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है, खासकर एंट्री-लेवल सेगमेंट में।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया चढ़ा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों का दिखा असर

    डॉलर के मुकाबले रुपया चढ़ा, कच्चे तेल की गिरती कीमतों का दिखा असर


    नई दिल्ली। वैश्विक घटनाक्रमों के बीच भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत मिली है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा ईरान के साथ अस्थायी सीजफायर की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक संकेत देखने को मिले, जिसका असर सीधे रुपये पर पड़ा। बुधवार को भारतीय रुपया लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 40 पैसे की बढ़त के साथ 92.61 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 93 के आसपास बंद हुआ था।

    सीजफायर से घटा भू-राजनीतिक तनाव

    अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा ने बाजार में चल रही अनिश्चितता को काफी हद तक कम किया है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और सैन्य गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकने की बात शामिल है। Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की पुष्टि करते हुए अमेरिकी सेना को पीछे हटने के निर्देश भी दिए। इस कदम से निवेशकों के बीच भरोसा लौटा और जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी।

    कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट

    सीजफायर का सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिला। Brent Crude करीब 16 प्रतिशत यानी 17.39 डॉलर गिरकर 91.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI Crude लगभग 20 प्रतिशत यानी 21.90 डॉलर टूटकर 91.05 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि सस्ता कच्चा तेल आयात बिल को कम करता है और मुद्रा को मजबूती देता है।

    आरबीआई की नीतिगत स्थिरता भी बनी सहायक

    इस बीच Reserve Bank of India (आरबीआई) ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, जिससे बाजार में स्थिरता का संदेश गया है। ब्याज दरों में बदलाव न होने से निवेशकों को स्पष्ट संकेत मिला कि फिलहाल मौद्रिक नीति संतुलित बनी रहेगी।

    सोना-चांदी में तेज उछाल

    कमोडिटी बाजार में भी हलचल देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। सोने का वायदा भाव 3,688 रुपए (2.7%) उछलकर 1,54,934 रुपए प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया। वहीं चांदी का वायदा भाव 6 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 2,46,376 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    विश्लेषकों का मानना है कि रुपये की यह मजबूती फिलहाल वैश्विक संकेतों पर निर्भर है। अगर सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो रुपये को और समर्थन मिल सकता है। हालांकि, ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव को देखते हुए अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

  • पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन, 40 लाख करोड़ से ज्यादा का वितरण

    पीएम मुद्रा योजना के 11 साल: 57.79 करोड़ लोन, 40 लाख करोड़ से ज्यादा का वितरण


    नई दिल्ली। देश में छोटे कारोबारियों और नए उद्यमियों के लिए शुरू की गई Pradhan Mantri Mudra Yojana (पीएमएमवाई) ने 11 साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान योजना ने वित्तीय समावेशन की दिशा में बड़ा बदलाव लाया है। सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक 57.79 करोड़ लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनके जरिए 40 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि वितरित की गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि छोटे व्यवसायों को सशक्त बनाने में इस योजना की भूमिका कितनी अहम रही है।

    2015 में हुई थी शुरुआत, ‘फंडिंग द अनफंडेड’ था लक्ष्य

    इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत साल 2015 में Narendra Modi ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य उन लोगों को बिना गारंटी के लोन उपलब्ध कराना था, जो पारंपरिक बैंकिंग सिस्टम से बाहर रह जाते थे। योजना के तहत छोटे गैर-कॉरपोरेट और गैर-कृषि व्यवसायों को 20 लाख रुपए तक का कर्ज दिया जाता है, जिससे वे अपना कारोबार शुरू या विस्तार कर सकें।

    एमएसएमई सेक्टर में आया बड़ा बदलाव

    केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि पीएम मुद्रा योजना ने एमएसएमई और छोटे उद्यमियों के लिए क्रेडिट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार, पिछले एक दशक में देश में एक “शांत क्रांति” देखने को मिली है, जहां करोड़ों लोगों ने आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय शुरू किया और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।

    महिलाओं और नए उद्यमियों को मिला बड़ा लाभ

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा महिलाओं को मिला है। कुल लोन में लगभग दो-तिहाई हिस्सा महिलाओं को दिया गया है, जबकि करीब 20 प्रतिशत लोन ऐसे लोगों को मिला है जिन्होंने पहली बार अपना व्यवसाय शुरू किया। नए उद्यमियों को ही करीब 12.15 करोड़ लोन दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि लगभग 12 लाख करोड़ रुपए है।

    वंचित वर्गों के लिए बना सहारा

    वित्त राज्य मंत्री Pankaj Chaudhary ने बताया कि यह योजना सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए भी बड़ी राहत साबित हुई है। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लोगों को इससे बड़े पैमाने पर लाभ मिला है, जो कुल लाभार्थियों का करीब 51 प्रतिशत हैं। वहीं महिलाओं की हिस्सेदारी 67 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा संकेत है।

    चार श्रेणियों में मिलता है लोन

    पीएम मुद्रा योजना के तहत लाभार्थियों की जरूरत के अनुसार चार कैटेगरी बनाई गई हैं—

    शिशु: 50,000 रुपए तक
    किशोर: 50,000 से 5 लाख रुपए
    तरुण: 5 लाख से 10 लाख रुपए
    तरुण प्लस: 10 लाख से 20 लाख रुपए

    इन श्रेणियों के जरिए मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेडिंग, सर्विस सेक्टर और कृषि से जुड़े कार्यों के लिए टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराया जाता है।

    विकसित भारत के लक्ष्य में अहम योगदान

    सरकार का मानना है कि Pradhan Mantri Mudra Yojana आने वाले समय में भी उद्यमिता को बढ़ावा देती रहेगी और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रही है, बल्कि लाखों लोगों को आत्मनिर्भर बनाकर देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही है।

  • ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल

    ईरान युद्ध टलने के ऐलान से चमके सोना-चांदी… दोनों की कीमतों में जबरदस्त उछाल


    नई दिल्ली।
    डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) पर हमले दो हफ्तों के लिए टालने का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद सोने की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स पर चांदी की कीमत (Silver Price) 6% या 13,000 रुपये से अधिक बढ़कर 2,44,770 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एमसीएक्स पर सोने की कीमत (Gold Price ) 2.4% या 3600 रुपये से अधिक बढ़कर 1,53,944 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।

    इंटरनेशनल मार्केट में भी स्पॉट गोल्ड 2.3% चढ़कर 4,811.66 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 3.3% की तेजी के साथ 4,840 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बंद हुए।


    बाजार में ‘रिलीफ रैली’, आगे भी दिख सकता है उतार-चढ़ाव

    विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी फिलहाल “रिलीफ रैली” है। ब्लूमबर्ग ने एक्सपर्ट ताई वोंग के हवाले से बताया है कि सोने के लिए 4,930 डॉलर और 5,000 डॉलर के स्तर अहम रेजिस्टेंस बने रहेंगे। हालांकि, आगे की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान इस युद्धविराम का पालन करता है या नहीं।


    पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की उम्मीद

    पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता दिख रहा है। खबरों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हो सकती है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है।


    सोने के लिए ऊर्जा कीमतें और महंगाई बनी बड़ी चिंता

    ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव अब भी बाजार के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। अगर तेल की कीमतें फिर बढ़ती हैं, तो इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे माहौल में सोना पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें इसकी तेजी को सीमित भी कर सकती हैं।


    चांदी और अन्य धातुओं में भी तेजी

    सोने के साथ-साथ अन्य कीमती धातुओं में भी उछाल देखने को मिला। स्पॉट सिल्वर 4.3% बढ़कर 76.08 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई। प्लैटिनम 2.4% चढ़ा, जबकि पैलेडियम में 2.1% की बढ़त दर्ज की गई।


    राहत के संकेत, लेकिन अनिश्चितता बरकरार

    ट्रंप के फैसले से फिलहाल बाजार को राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सोने की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, क्योंकि बाजार अब अमेरिका-ईरान वार्ता और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर नजर रखे हुए है।

  • फूड पीएलआई स्कीम से आया 9,207 करोड़ रुपए का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार

    फूड पीएलआई स्कीम से आया 9,207 करोड़ रुपए का निवेश, 3.29 लाख लोगों को मिला रोजगार


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को जानकारी दी कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया गया है। इसके साथ ही इस योजना ने करीब 3.29 लाख रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं।

    योजना की अवधि और उद्देश्य

    यह योजना वित्त वर्ष 2021-22 से 2026-27 तक 6 साल के लिए लागू है। कुल बजट 10,900 करोड़ रुपए रखा गया है।
    योजना का मुख्य उद्देश्य खाद्य प्रसंस्करण में वैल्यू एडिशन बढ़ाना, प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार करना और विशेषकर ग्रामीण व गैर-कृषि क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करना है।

    कौन से सेक्टरों को फायदा

    पीएलआई योजना के तहत निम्नलिखित क्षेत्रों को बढ़ावा दिया गया है:

    रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट (आरटीसी/आरटीई) फूड
    प्रसंस्कृत फल और सब्जियां
    समुद्री उत्पाद
    मोजरेला चीज
    एमएसएमई सेक्टर के इनोवेटिव और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स

    इसके अलावा, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के जरिए भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की वैश्विक पहचान को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है।

    कंपनियों और यूनिट्स की स्थिति
    अब तक 128 कंपनियों को मंजूरी दी गई है, जो 274 यूनिट्स चला रही हैं।
    एमएसएमई सेक्टर की भागीदारी मजबूत रही, जिसमें 68 एमएसएमई कंपनियां और 40 कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स शामिल हैं।
    कुल निवेश 7,722 करोड़ रुपए के लक्ष्य से अधिक होकर 9,207 करोड़ रुपए हो गया है।
    तकनीकी सुधार और प्रोसेसिंग क्षमता

    सरकार ने बताया कि योजना से कई राज्यों में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की क्षमता बढ़ी, तकनीक में सुधार हुआ और आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिला।
    इसके साथ ही लगभग 34 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष की प्रोसेसिंग और स्टोरेज क्षमता जोड़ी गई है।

    बिक्री और निर्यात में तेजी

    पीएलआई स्कीम के तहत आने वाले उत्पादों की बिक्री में 10.58 प्रतिशत की सालाना वृद्धि (सीएजीआर) दर्ज की गई।
    निर्यात में भी 7.41 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है, जो वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत के खाद्य उत्पादों की प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है।

    मिलेट और मोटे अनाज की बढ़ती मांग
    मिलेट (मोटे अनाज) से बने उत्पादों की बिक्री वित्त वर्ष 2023 में 345.73 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 1,845.25 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
    इस अवधि में बाजरा की खरीद में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे देश में स्वास्थ्यवर्धक और पोषणयुक्त फूड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है।
    विशेषज्ञों की राय

    विशेषज्ञों का कहना है कि फूड पीएलआई योजना ने देश में खाद्य प्रसंस्करण और रोजगार सृजन में नई दिशा दी है।
    एमएसएमई और बड़े उद्योगों की भागीदारी से उत्पादन क्षमता, तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हुआ है।

    फूड पीएलआई स्कीम ने अब तक 9,207 करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित किया और 3.29 लाख रोजगार पैदा किए। योजना ने 128 कंपनियों और 274 यूनिट्स के माध्यम से उत्पादन और प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाई, मिलेट और मोटे अनाज की मांग में तेजी आई, और देश में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाई।

  • रेलवे करियर में कदम रखें, आईआरसीटीसी की इस भर्ती में बनें उम्मीदवार

    रेलवे करियर में कदम रखें, आईआरसीटीसी की इस भर्ती में बनें उम्मीदवार


    नई दिल्ली। भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) ने हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के कुल 84 पदों के लिए भर्ती का ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी किया है। यह नौकरी उन युवाओं के लिए शानदार अवसर है जो रेलवे क्षेत्र में कैरियर बनाने की सोच रहे हैं।

    पद और चयन प्रक्रिया

    आईआरसीटीसी में चयन प्रक्रिया वॉक-इन-इंटरव्यू, मेडिकल फिटनेस और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के आधार पर होगी। चयनित उम्मीदवारों को 30,000 रुपए प्रति माह सैलरी के साथ अन्य भत्ते और लाभ भी मिलेंगे।

    शैक्षणिक योग्यता

    उम्मीदवारों के पास निम्नलिखित योग्यता होनी चाहिए:
    हॉस्पिटैलिटी और होटल एडमिनिस्ट्रेशन में बीएससी / बीबीए / एमबीए (पाक कला)
    होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग साइंस में बीएससी / एमबीए (पर्यटन और होटल मैनेजमेंट)
    योग्य फ्रेशर्स भी इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    आयु सीमा
    अधिकतम आयु: 27 वर्ष (1 अप्रैल 2026 के आधार पर)
    आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु में छूट
    वॉक-इन-इंटरव्यू का शेड्यूल और स्थान
    इंटरव्यू का आयोजन 25 से 28 अप्रैल 2026 के बीच होगा। उम्मीदवार सुबह 10:30 बजे से शाम 17:30 बजे तक दिए गए पते पर पहुंच सकते हैं:

    आईआरसीटीसी क्षेत्रीय कार्यालय
    6ए, द रेन ट्री प्लेस, नंबर 9, मैक निकोल्स रोड, चेटपेट, चेन्नई – 600031
    उम्मीदवारों को सभी डॉक्यूमेंट्स और एप्लीकेशन फॉर्म की हार्ड कॉपी इंटरव्यू के दिन साथ ले जाने की सलाह दी जाती है।

    आवेदन कैसे करें

    उम्मीदवारों को सबसे पहले आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। होमपेज पर संबंधित पद के नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक कर एप्लीकेशन फॉर्म डाउनलोड करें। फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ इंटरव्यू के दिन लेकर जाएं।

    आईआरसीटीसी ने हॉस्पिटैलिटी मॉनिटर के 84 पदों पर भर्ती की अधिसूचना जारी की है। वॉक-इन-इंटरव्यू 25-28 अप्रैल को चेन्नई में आयोजित होंगे। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार आवेदन फॉर्म डाउनलोड करके समय पर इंटरव्यू में शामिल होकर रेलवे क्षेत्र में करियर बनाने का सुनहरा मौका प्राप्त कर सकते हैं।

  • क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर: अब कीमत नहीं, सुविधा बन रही खरीदारी की पहली पसंद!

    क्विक कॉमर्स का बढ़ता असर: अब कीमत नहीं, सुविधा बन रही खरीदारी की पहली पसंद!


    नई दिल्ली। भारत में तेजी से बदलते उपभोक्ता व्यवहार के बीच क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मंगलवार को जारी ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 70 प्रतिशत से ज्यादा उपभोक्ताओं ने कहा कि चाहे छूट कम हो जाए, वे क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल जारी रखेंगे। इससे यह साफ है कि आज उपभोक्ता कीमत से ज्यादा सुविधा और त्वरित डिलीवरी को प्राथमिकता देने लगे हैं।

    मोहल्ले की दुकानों की भूमिका अब भी अहम

    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रोजमर्रा की किराना खरीदारी के लिए मोहल्ले की दुकानों का महत्व अभी भी बरकरार है। भरोसे और व्यक्तिगत संबंधों के कारण ये दुकाने उपभोक्ताओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। हालांकि, पिछले एक साल में 51 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि उनकी किराना दुकानों पर निर्भरता कम हुई है, जो डिजिटल और क्विक कॉमर्स की बढ़ती पहुंच को दर्शाता है।

    क्विक कॉमर्स के इस्तेमाल के तरीके

    रिपोर्ट के अनुसार, 45 प्रतिशत लोग आखिरी समय या जरूरी सामान के लिए क्विक कॉमर्स का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, 24 प्रतिशत लोग दूध, ब्रेड जैसे रोजमर्रा के सामान के लिए इसका सहारा लेते हैं। 19 प्रतिशत उपभोक्ता स्नैक्स, पेय और इम्पल्स बाइंग के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा करते हैं।

    दूसरी ओर, 13 प्रतिशत लोग अब भी किराना दुकानों पर ज्यादा निर्भर हैं, जबकि 27 प्रतिशत लोगों की खरीदारी आदतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

    किराना दुकानदारों की चुनौतियां और डिजिटल अपनाना

    किराना दुकानदार भी अब बदलते परिदृश्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ जुड़ने के विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जैसे कम मुनाफा, छोटा क्रेडिट साइकिल और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाएं।

    रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 प्रतिशत दुकानदार क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी में रुचि रखते हैं। वहीं 32 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें इसमें रुचि है, लेकिन वे समझ नहीं पाते कि यह साझेदारी कैसे काम करेगी। 20 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि यदि उन्हें तकनीकी और संचालन में मदद मिले, तो वे भी इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं।

    डिजिटल भुगतान और तकनीकी टूल्स

    अब ज्यादातर किराना दुकानों पर डिजिटल पेमेंट आम हो गया है। यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिए भुगतान व्यापक रूप से स्वीकार किया जा रहा है। हालांकि, पीओएस सिस्टम, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और डिजिटल ऑर्डरिंग जैसे एडवांस टूल्स का इस्तेमाल सीमित है, जिसका कारण उनकी लागत, प्रशिक्षण और संचालन की जटिलता है।

    भारत में क्विक कॉमर्स अब केवल कीमत की प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि तेजी और सुविधा की प्राथमिकता बन चुकी है। मोहल्ले की दुकानें अभी भी भरोसे का मुख्य केंद्र हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की बदलती आदतें और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति इसे चुनौती दे रही हैं। किराना दुकानदारों के लिए भी डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी सहयोग भविष्य में नई संभावनाएं खोल रहे हैं।

  • 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!

    'मेक इन इंडिया' को मिलेगा नया बढ़ावा, भारतीय ऑटो इंडस्ट्री में बड़ी खुशखबरी!


    नई दिल्ली। स्कोडा ऑटो फॉक्सवैगन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसएवीडब्ल्यूआईपीएल) ने मंगलवार को पुणे स्थित अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में अपडेटेड फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू करने की घोषणा की। कंपनी का कहना है कि यह कदम उनकी ‘मेक इन इंडिया, फॉर इंडिया एंड द वर्ल्ड’ रणनीति को मजबूती प्रदान करेगा और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को और मजबूत करेगा।

    नया डिजाइन और प्रीमियम फीचर्स

    एसएवीडब्ल्यूआईपीएल के अनुसार, अपडेटेड टाइगुन में नया डिजाइन और बेहतर प्रीमियम फीचर्स शामिल हैं। इसे भारतीय ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया है, जबकि यूरोपीय ड्राइविंग डायनामिक्स, आराम और सुरक्षा मानकों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इससे भारतीय ग्राहक उच्च गुणवत्ता और सुरक्षा के साथ आरामदायक अनुभव का लाभ उठा सकेंगे।

    उत्पादन शुरू होने पर कंपनी की प्रतिक्रिया

    कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ पीयूष अरोरा ने कहा, “नई फॉक्सवैगन टाइगुन का उत्पादन शुरू होना भारत में हमारे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है। हमारी भारत स्थित इकाइयां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी वाहनों का उच्च स्तरीय स्थानीयकरण करने के लिए तैयार हैं। यह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों की जरूरतों को कुशलतापूर्वक पूरा करने में मदद करेगा।

    एसयूवी पोर्टफोलियो में मजबूती

    ब्रांड निदेशक नितिन कोहली ने कहा कि टाइगुन लॉन्च के बाद से ही कंपनी की एसयूवी रणनीति का केंद्र रही है और इसने कंपनी के पोर्टफोलियो को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चाकन प्लांट में उत्पादन भारतीय ग्राहकों के प्रति कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    बाजार में टाइगुन का प्रदर्शन

    2021 में लॉन्च हुई टाइगुन ने प्रदर्शन, आराम और सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए बाजार में अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। कंपनी के अनुसार, अब तक 1.43 लाख से अधिक यूनिट्स का उत्पादन हो चुका है, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत का निर्यात वैश्विक बाजारों में किया गया है।

    पुणे प्लांट और कंपनी की स्थिति

    पुणे स्थित यह कंपनी ऑडी, पोर्श, लैम्बोर्गिनी और बेंटले सहित फॉक्सवैगन समूह के छह ब्रांडों का भारत में संचालन करती है। कंपनी ने 25 वर्ष पूर्व भारत में परिचालन शुरू किया था और वर्तमान में चाकन और छत्रपति संभाजीनगर में दो विनिर्माण संयंत्र संचालित करती है, जिनकी संयुक्त वार्षिक उत्पादन क्षमता 3.15 लाख यूनिट्स है।

    कर्मचारियों और ग्राहक सेवा नेटवर्क

    वर्तमान में कंपनी के लगभग 700 ग्राहक संपर्क केंद्र हैं और लगभग 5,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। इससे यह स्पष्ट है कि फॉक्सवैगन ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि ग्राहक सेवा और रोजगार के अवसरों को भी मजबूती प्रदान की है।

  • भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!

    भारत का मछली उत्पादन रिकॉर्ड तोड़कर 106% बढ़ा, FY 2025 में 197.75 लाख टन!


    नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मछली उत्पादन 197.75 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2013-14 के 95.79 लाख टन की तुलना में 106 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है और वैश्विक मछली उत्पादन में लगभग 8% योगदान कर रहा है। मत्स्य पालन क्षेत्र ने न केवल उत्पादन में उछाल दिखाया है, बल्कि ग्रामीण रोजगार, आय सृजन और खाद्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    केंद्रीय बजट में अब तक का सबसे बड़ा आवंटन

    केंद्र सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए 2,761.80 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक बजट है। इसमें से 2,500 करोड़ रुपए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत आवंटित किए गए हैं। इस योजना के माध्यम से तालाब, जलाशय पिंजरे, मछली परिवहन इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज जैसी बुनियादी ढांचा सुविधाओं का विकास हो रहा है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र में उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।

    रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत स्तंभ

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मत्स्य पालन क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 तक 74.66 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए हैं। इसके अलावा, 33 लाख से अधिक लोगों को बीमा कवरेज और लगभग 7.44 लाख मछुआरा परिवारों को आजीविका सहायता प्रदान की गई है। क्षेत्र में इस वृद्धि ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर बढ़ाए हैं।

    नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई की भूमिका

    सरकार ने बताया कि नीली क्रांति और पीएमएमएसवाई ने उत्पादन, मूल्य शृंखला और बुनियादी ढांचे में नई गति दी है। इसके तहत हजारों तालाबों और जलाशयों में पिंजरे लगाए गए हैं, 27,189 मछली परिवहन इकाइयों का निर्माण हुआ है और 12,081 आरएएस इकाइयां एवं 4,205 बायो-फ्लॉक इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इन तकनीकी बदलावों ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ मछुआरों को आधुनिक तरीकों से लाभान्वित किया है।

    निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा

    मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने से समुद्री खाद्य निर्यात में भी तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह 62,408 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। फ्रोजन झींगे (फ्रोजन श्रिम्प) भारत के प्रमुख निर्यात उत्पाद बने हुए हैं, जिनके बड़े बाजार अमेरिका और चीन हैं। सरकार ने बंदरगाह, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चेन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से निर्यात नेटवर्क को भी मजबूत किया है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती आई है।

    भविष्य की राह

    मत्स्य पालन क्षेत्र अब केवल उत्पादन का माध्यम नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि आगामी वर्षों में उत्पादन, रोजगार और निर्यात में और वृद्धि हो। पीएमएमएसवाई और तकनीकी उन्नयन के माध्यम से भारत विश्व स्तर पर मत्स्य पालन में अग्रणी देश बनने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।

    भारत का मछली उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 में 197.75 लाख टन पहुंचकर 106% बढ़ गया। पीएमएमएसवाई और नीली क्रांति ने उत्पादन, निर्यात और रोजगार में नई गति दी है। मत्स्य पालन क्षेत्र अब ग्रामीण आय, रोजगार और खाद्य सुरक्षा का मजबूत स्तंभ बन चुका है। सरकार ने बजट 2026-27 में 2,761.80 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं, जिससे आधुनिक तकनीक, आरएएस और बायो-फ्लॉक इकाइयों के माध्यम से उत्पादन और निर्यात दोनों को बल मिला है।