Category: Economy

  • भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल का बड़ा मौका, 2026 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम लॉन्च

    भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल का बड़ा मौका, 2026 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम लॉन्च

    नई दिल्ली टेक दिग्गज गूगल ने मंगलवार को भारत में अपने ‘स्टार्टअप्स एक्सेलेरेटर’ के 2026 बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह तीन महीने का इक्विटी-फ्री प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य देश के एआई आधारित स्टार्टअप्स को सहयोग देना है।

    गूगल इंडिया के अनुसार, यह एक्सेलेरेटर खासतौर पर उन भारतीय स्टार्टअप्स को लक्षित कर रहा है जो एजेंटिक एआई, मल्टीमॉडल एआई, फिजिकल एआई और सॉवरेन एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, अब एआई का उपयोग केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े स्तर पर काम करने वाले समाधानों की ओर बढ़ रहा है।

    गूगल ने बताया कि यह प्रोग्राम उन एआई-फर्स्ट स्टार्टअप्स के लिए खुला है जो सीड से लेकर सीरीज ए स्टेज तक हैं और भारत से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं या वैश्विक इंडस्ट्री के लिए खास मॉडल विकसित कर रहे हैं।

    2026 बैच के तहत स्टार्टअप्स को बिना इक्विटी दिए कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें गूगल के एडवांस एआई मॉडल्स जैसे जेमिनी, जेम्मा, इमेजन, वीओ और लिरिया तक पहुंच और तकनीकी सहयोग शामिल है।

    इसके अलावा, स्टार्टअप्स को गूगल डीपमाइंड, क्लाउड, हेल्थ और एंड्रॉयड टीम्स के एक्सपर्ट्स से वन-ऑन-वन मेंटरशिप भी मिलेगी। साथ ही क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, टीपीयू और क्रेडिट्स का लाभ भी पात्रता के आधार पर दिया जाएगा।

    यह प्रोग्राम स्टार्टअप्स को साप्ताहिक ट्रैकिंग और समर्पित मैनेजर्स के जरिए प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा।

    पिछले बैचों में इस प्रोग्राम के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। डीव्यू जैसे स्टार्टअप्स ने राजस्व में चार गुना वृद्धि दर्ज की, जबकि सुपरजॉइन ने जेमिनी 3.0 की मदद से अपनी सटीकता और स्पीड में 50 प्रतिशत सुधार किया। वहीं, पल्स ने डेटा एनालिसिस के जरिए 30 लाख डॉलर के जोखिम वाले राजस्व की पहचान की।

    कई स्टार्टअप्स ने एआई के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान भी किया है।

    एआईस्टेथ ने एक स्मार्ट स्टेथोस्कोप तैयार किया, जिससे 75,000 से ज्यादा मरीजों की जांच की गई। वानी एआई ने वॉइस प्रोसेसिंग को बेहतर बनाया, जबकि रेजिलिएंस एआई और वीडियोएसडीके ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाई।

    यह एक्सेलेरेटर प्रोग्राम जून के आखिर में बेंगलुरु में एक सप्ताह के बूटकैंप के साथ शुरू होगा और अक्टूबर में ‘डेमो डे’ के साथ समाप्त होगा। इसके अलावा, आवेदन 19 अप्रैल को बंद हो जाएंगे।


  • महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ

    महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ


    नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका नतीजा एक ही होगा—महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा पड़ेगा।

    आईएमएफ के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहा यह युद्ध न केवल वहां के लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो पहले ही पिछली आर्थिक चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रही थीं।

    आईएमएफ ने कहा कि यह संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसका असर सभी देशों पर समान नहीं है। ऊर्जा आयात करने वाले देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, गरीब देशों पर ज्यादा दबाव है और जिन देशों के पास कम आर्थिक भंडार हैं, वे ज्यादा मुश्किल में हैं।

    एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देश ईंधन और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है, जो एशिया और यूरोप की जरूरतों को पूरा करती है।

    आईएमएफ ने बताया कि अफ्रीका और एशिया के कई देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, अब बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भी पर्याप्त सप्लाई हासिल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

    संस्था ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ने से अतिरिक्त दबाव बन रहा है। खासतौर पर गरीब देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है और उन्हें बाहरी मदद की जरूरत पड़ सकती है।

    आईएमएफ के मुताबिक, अगर यह युद्ध छोटा रहता है तो तेल और गैस की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं, लेकिन अगर यह लंबे समय तक चलता है तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात पर निर्भर देशों की हालत और खराब हो सकती है।

    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ रहा है। कुछ देशों में भुगतान संतुलन पर भी दबाव दिख रहा है, जिससे उनकी मुद्रा कमजोर हो रही है।

    यूरोप में यह संकट 2021-22 के गैस संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन जैसे देश अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।

    यह युद्ध केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रहा है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ रही है और सामान पहुंचने में देरी हो रही है।

    आईएमएफ ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया में हीलियम की बड़ी सप्लाई करता है, जो सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों में इस्तेमाल होता है। वहीं, इंडोनेशिया को निकेल प्रोसेस करने के लिए जरूरी सल्फर की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

    पूर्वी अफ्रीका के वे देश जो खाड़ी देशों पर व्यापार और रेमिटेंस के लिए निर्भर हैं, उन्हें भी कमजोर मांग, लॉजिस्टिक समस्याओं और कम पैसे भेजे जाने का असर झेलना पड़ सकता है।

    आईएमएफ ने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा और खाद्य कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी।

    इसके अलावा, इस युद्ध ने वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, अभी तक यह गिरावट पिछले बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में सीमित है, लेकिन इससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को सही नीतियां अपनानी होंगी। जिन देशों के पास कम संसाधन हैं, उन्हें खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

    आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, “अनिश्चित दुनिया में ज्यादा देशों को हमारे समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ हैं।”

  • ईरान में अलर्ट रहने का नया तरीका, हमलों और अपडेट के लिए ऐप बना सहारा

    ईरान में अलर्ट रहने का नया तरीका, हमलों और अपडेट के लिए ऐप बना सहारा


    नई दिल्ली मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान में एक गंभीर डिजिटल संकट उत्पन्न हो रहा है। पिछले 30 दिनों से अधिक समय से देश में इंटरनेट समुद्र तट पर मौजूद हैं, जिसमें शेष आम नागरिकों के सामने की जानकारी हासिल करना बड़ी चुनौती बन गई है। हालांकि इस मुश्किल दौर में लोगों ने खुद ही रास्ता निकाल लिया है। अब वे हवाई हमले और जरूरी अपडेट पाने के लिए वैकल्पिक प्लेटफॉर्म और ऐप्स का सहारा ले रहे हैं।

    इथियोपिया के अनुसार, हज़ारों ईरानी नागरिक टेलीग्राम जैसे इलेक्ट्रानिक मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके माध्यम से लोग एक-दूसरे को यह जानकारी दे रहे हैं कि किस स्थान पर हवाई हमला हुआ, किस स्थान पर बिजली गिरी और किस स्थान पर कितनी क्षति हुई। इंटरनेट की भारी पाबंदियों के बावजूद यह ऐप एक महत्वपूर्ण संचार माध्यम बना हुआ है, जहां लोग तेजी से अपडेट शेयर कर रहे हैं।

    इसके अलावा, एक खास ऐप महसा संभावित (महसा अलर्ट) भी इस समय लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रहा है। यह ऐप ईरान के डिजिटल अधिकार और स्वयंसेवकों द्वारा तैयार किया गया है। महसा अलर्ट के माध्यम से लोग हवाई हमले, सैन्य हमले और खतरनाक क्षेत्र की जानकारी ट्रैक कर पा रहे हैं। खास बात यह है कि यह पूरी तरह से क्राउडसोर्स सिस्टम है, यानी आम लोग ही सूचना प्रौद्योगिकीकर और साझा करके इसे शुरू करते हैं।

    इस ऐप की सूची भी काफी दिलचस्प है। मिलने वाली जानकारी को सीधे प्रकाशित नहीं किया जाता है, बल्कि उसे कई स्तरों पर दर्ज किया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, चित्र और अन्य तथ्यों के आधार पर भ्रूण की पुष्टि की जाती है, इसलिए फर्जी खबरों से बचा जा सके। हालाँकि यह कोई आधिकारिक वेबसाइट नहीं है और पूरी तरह से रीयल-टाइम भी नहीं है, लेकिन फिर भी यह लोगों के लिए स्वामित्व की जानकारी का ज़रिया बन गया है।

    महसा की एक और प्रकृति यह है कि इसके डेटा अपडेट में बेहद बच्चे होते हैं—औसतन सिर्फ 100KB। इसका फ़ायदा यह है कि अवैध या सीमित इंटरनेट कनेक्शन में भी लोग आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ऐप में मेडिकल लॉट, एसआईटी सुईट और स्कींट चेक प्वाइंट जैसी अतिरिक्त जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे लोगों को सुरक्षा के दावे से मदद मिलती है।

    वहीं नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट सामान्य स्तर के केवल 1 प्रतिशत तक है। यह स्थिति 28 फरवरी 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त सैन्य हमले के बाद बनी। इसके बाद देश से करीब-करीब डिजिटल ब्लैक आउट हो गया, जिससे करीब 9 करोड़ लोग ग्लोबल वर्ल्ड से कट गए।

    इन हालातों ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय में प्रौद्योगिकी और सामूहिक प्रयास कितने अहम हैं। जब सरकारी सिस्टम उपलब्ध नहीं होता है, तब आम नागरिक खुद आगे बढ़कर समाधान तैयार करते हैं—और ईरान में ‘महसा संभावना’ का सबसे बड़ा उदाहरण सामने आया है।

  • महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा

    महावीर जयंती पर शेयर बाजार बंद, कमोडिटी मार्केट शाम को खुलेगा


    नई दिल्ली महावीर जयंती के मौके पर मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर किसी भी तरह की ट्रेडिंग या सेटलमेंट नहीं हुआ। अब निवेशकों के लिए अगला ट्रेडिंग दिन 1 अप्रैल 2026 (बुधवार) होगा, जब बाजार सामान्य रूप से खुलेगा। हालांकि इस दिन एक खास बात यह रहेगी कि सेटलमेंट हॉलिडे होगा यानी खरीद-बिक्री तो होगी, लेकिन पे-इन और पे-आउट उसी दिन नहीं होगा।

    कमोडिटी मार्केट का हाल
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX):
    सुबह का सेशन बंद, लेकिन शाम 5 बजे से रात 11:30 बजे तक ट्रेडिंग होगी
    नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX):
    पूरे दिन बंद रहेगा
    इस हफ्ते कम रहेंगे ट्रेडिंग के दिन

    इस सप्ताह निवेशकों को कम मौके मिलेंगे:

    31 मार्च: महावीर जयंती (बंद)
    3 अप्रैल: गुड फ्राइडे (फिर से बंद)
    यानी पूरे हफ्ते में सिर्फ 3 दिन ही ट्रेडिंग होगी।

    निवेशकों के लिए जरूरी सलाह

    लगातार छुट्टियों के कारण बाजार में वोलैटिलिटी (उतार-चढ़ाव) बढ़ सकता है। ऐसे में:

    ट्रेडिंग प्लान पहले से बनाएं
    सेटलमेंट हॉलिडे को ध्यान में रखें
    शॉर्ट-टर्म ट्रेड में सावधानी बरतें

  • एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच

    एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड पर 'पंप-एंड-डंप' का आरोप, सेबी ने शुरू की जांच


    नई दिल्ली  शेयर बाजार में निवेशकों के लिए एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने एलीटकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के शेयरों में कथित ‘पंप-एंड-डंप’ घोटाले के संकेत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। यह मामला शेयर कीमतों में असामान्य तेजी और उसके बाद आई तेज गिरावट से जुड़ा हुआ है।

    60 गुना उछाल के बाद अचानक गिरावट ने बढ़ाए शक
    सेबी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कंपनी के शेयरों में बेहद कम समय में 60 गुना से ज्यादा की उछाल आई। इसके बाद कीमतों में अचानक गिरावट देखी गई, जो आमतौर पर ‘पंप-एंड-डंप’ स्कीम का संकेत माना जाता है। इस तरह के मामलों में पहले कीमतें कृत्रिम रूप से बढ़ाई जाती हैं और फिर ऊंचे स्तर पर शेयर बेचकर मुनाफा कमाया जाता है।

    प्रमोटरों और जुड़े पक्षों की भूमिका पर सवाल
    नियामक को संदेह है कि कंपनी के प्रमोटरों और उनसे जुड़े पक्षों ने आपसी तालमेल से ट्रेडिंग की और फंड ट्रांसफर के जरिए शेयर की कीमतों को ऊपर पहुंचाया। जांच में यह भी सामने आया कि ऊंचे दामों पर शेयर बेचने वालों में कंपनी के अंदरूनी लोग शामिल हो सकते हैं। प्रमोटर विपिन शर्मा को इस मामले में एक प्रमुख विक्रेता के तौर पर चिन्हित किया गया है।

    आय में असामान्य उछाल ने खड़े किए सवाल
    सेबी ने कंपनी के वित्तीय आंकड़ों पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी का राजस्व दो वर्षों में करीब 686 गुना बढ़ा, जो असामान्य माना जा रहा है। खासतौर पर सितंबर 2025 तिमाही में आय 525 करोड़ रुपए से बढ़कर 2,195.8 करोड़ रुपए तक पहुंच गई, जिसने नियामक की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

    भ्रामक जानकारी से निवेशकों को गुमराह करने का शक
    जांचकर्ताओं को यह भी आशंका है कि कंपनी ने अपने वास्तविक कारोबार से ज्यादा मजबूत तस्वीर दिखाने के लिए भ्रामक कॉर्पोरेट खुलासे किए। इसका उद्देश्य शेयर की कीमतों में तेजी लाकर खुदरा निवेशकों को आकर्षित करना हो सकता है।

    खुलासे में लापरवाही भी जांच के दायरे में
    सेबी ने कंपनी पर गंभीर खुलासा संबंधी चूक का आरोप भी लगाया है। खासकर 408 करोड़ रुपए के जीएसटी विवाद जैसी अहम जानकारी समय पर शेयरधारकों को नहीं दी गई। इसके अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं को या तो देर से बताया गया या पूरी तरह छिपाया गया।

    जांच जारी, हो सकते हैं कड़े एक्शन
    नियामक इस पूरे मामले में ट्रेडिंग पैटर्न, फाइनेंशियल डेटा और संबंधित पक्षों के बीच संबंधों की गहराई से जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद कंपनी और संबंधित लोगों पर भारी जुर्माना, बाजार से प्रतिबंध जैसे सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों में चिंता
    इस खबर के बाद सोमवार को बीएसई पर एलीटकॉन इंटरनेशनल का शेयर करीब 5% गिरकर 48.38 रुपए पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

    क्या होता है ‘पंप-एंड-डंप’?
    ‘पंप-एंड-डंप’ एक धोखाधड़ी वाली रणनीति होती है, जिसमें शेयर की कीमत को कृत्रिम रूप से बढ़ाया जाता है (पंप) और फिर ऊंचे स्तर पर बेचकर (डंप) निवेशकों को नुकसान में छोड़ दिया जाता है।

  • पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी

    पश्चिम एशिया संकट का असर: महंगाई से धीमी ग्रोथ तक, IMF की चेतावनी


    नई दिल्ली वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। संस्था के अनुसार, इस संकट का सीधा असर महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट के रूप में देखने को मिलेगा।

    ऊर्जा संकट से बढ़ेगा दबाव, आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर
    आईएमएफ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर एशिया और यूरोप के उन देशों पर पड़ेगा, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

    गरीब और विकासशील देशों पर दोहरी मार
    रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका और एशिया के कई गरीब देश पहले ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अब बढ़ती ऊर्जा कीमतों और सप्लाई में कमी के कारण उनकी स्थिति और खराब हो सकती है। इन देशों को महंगे दाम पर भी पर्याप्त ईंधन नहीं मिल पा रहा, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

    खाद्य और उर्वरक संकट गहराने का खतरा
    आईएमएफ ने आगाह किया है कि यह संकट केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं रहेगा। खाद्य और उर्वरकों की कीमतों में बढ़ोतरी से भी वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ेगा। खासकर गरीब देशों में खाद्य संकट गहरा सकता है और उन्हें बाहरी सहायता की जरूरत पड़ सकती है।

    लंबा चला युद्ध तो बढ़ेगा संकट का दायरा
    संस्था का मानना है कि अगर यह संघर्ष अल्पकालिक रहा, तो तेल-गैस की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिलेगा। लेकिन यदि यह लंबे समय तक चला, तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात करने वाले देशों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।

    उद्योग और आम उपभोक्ता दोनों प्रभावित
    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन महंगा हो रहा है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। साथ ही कई देशों में भुगतान संतुलन पर दबाव बढ़ने से उनकी मुद्रा भी कमजोर हो रही है।

    यूरोप में दोहराया जा सकता है गैस संकट जैसा हाल
    आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यूरोप में 2021-22 जैसा गैस संकट फिर से पैदा हो सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रह सकते हैं।

    सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स पर भी असर
    इस संघर्ष के चलते वैश्विक सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ गई है, जिससे सामान की डिलीवरी में देरी हो रही है। साथ ही, खाड़ी क्षेत्र से मिलने वाले हीलियम और अन्य जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

    वित्तीय बाजारों में बढ़ी अस्थिरता
    इस भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों पर भी दिख रहा है। शेयर बाजारों में गिरावट, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, यह गिरावट अभी पिछले बड़े संकटों जितनी गंभीर नहीं है, लेकिन इससे वित्तीय स्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ की सलाह: सतर्क रहें और सही नीतियां अपनाएं
    आईएमएफ ने देशों को सलाह दी है कि वे इस स्थिति से निपटने के लिए संतुलित और प्रभावी नीतियां अपनाएं। खासतौर पर कम संसाधनों वाले देशों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि “अनिश्चितता भरे इस दौर में अधिक देशों को समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ खड़े हैं।”

  • 1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत

    1 अप्रैल 2026 से बदलेंगे कई नियम, नए टैक्स सिस्टम के साथ वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत


    नई दिल्ली  भारत में 1 अप्रैल 2026 से नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही टैक्स सिस्टम में कई बड़े और अहम बदलाव लागू होने जा रहे हैं। सरकार द्वारा पेश किया गया नया आयकर अधिनियम, 2025 अब लागू होगा, जो लगभग 60 साल पुराने कानून की जगह लेगा। इन बदलावों का मकसद टैक्स प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    अब ‘टैक्स ईयर’ से होगी पहचान, खत्म होंगे FY और AY
    नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव ‘फाइनेंशियल ईयर (FY)’ और ‘असेसमेंट ईयर (AY)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ का कॉन्सेप्ट लागू होना है। इससे टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइलिंग और समझने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी। अब अलग-अलग सालों के भ्रम से राहत मिलने की उम्मीद है।

    ITR फाइलिंग की समयसीमा में राहत
    सरकार ने आयकर रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा में भी बदलाव किया है। जहां सैलरीड क्लास के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन पहले की तरह बनी रहेगी, वहीं नॉन-ऑडिट केस वाले करदाताओं जैसे फ्रीलांसर और प्रोफेशनल्स को अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा। इससे उन्हें अतिरिक्त समय का फायदा मिलेगा।

    डेरिवेटिव ट्रेडिंग होगी महंगी
    फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में निवेश करने वालों के लिए झटका है। सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। इसका असर शेयर बाजार के सक्रिय निवेशकों पर साफ दिखाई देगा।

    HRA क्लेम के नियम हुए सख्त
    हाउस रेंट अलाउंस (HRA) पर टैक्स छूट लेने के नियमों को भी सख्त किया गया है। अब कई मामलों में मकान मालिक का PAN देना अनिवार्य होगा। हालांकि राहत की बात यह है कि बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे शहरों को अधिक छूट वाली सूची में शामिल किया गया है।

    टैक्स बेनिफिट्स में भी मिली राहत
    सरकार ने कुछ मामलों में टैक्सपेयर्स को राहत भी दी है। खाने-पीने से जुड़े टैक्स बेनिफिट्स बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सीमा में भी इजाफा किया गया है। साथ ही पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।

    शेयर और निवेश पर बदले नियम
    अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड के बजाय कैपिटल गेन के रूप में लगेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए बॉन्ड्स पर ही लागू होगी। इसके अलावा, डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट खत्म कर दी गई है।

    TDS और TCS नियमों में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र के जरिए कई इनकम सोर्स पर TDS से बच सकते हैं। NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर अब TAN की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ PAN से काम चल जाएगा। विदेश यात्रा पर TCS घटाकर 2% कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी राहत दी गई है।

    रिवाइज्ड रिटर्न और ITR फॉर्म में बदलाव
    अब टैक्सपेयर्स 31 मार्च तक अपने रिटर्न में संशोधन कर सकेंगे, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा। साथ ही ITR-1 फॉर्म में अब दो मकानों से होने वाली आय दिखाने की सुविधा भी दी गई है, जिससे कई लोगों के लिए फाइलिंग आसान हो जाएगी।

  • ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    ग्रामीण विकास को रफ्तार: केंद्र ने 6 राज्यों को जारी किए 1500 करोड़ से ज्यादा

    नई दिल्ली  ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत सरकार ने 15वां वित्त आयोग के तहत 6 राज्यों को 1,500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की है। इस फंड का उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मजबूत बनाकर जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है।

    किन राज्यों को मिला फायदा

    इस वित्तीय सहायता का लाभ तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मिजोरम और मेघालय को मिला है। यह राशि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ग्रामीण ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं को लागू करने में मदद करेगी।

    तेलंगाना और उत्तराखंड को मिली पहली किस्त

    तेलंगाना को 247.94 करोड़ रुपए की अनटाइड ग्रांट जारी की गई है, जिससे राज्य की 12,600 ग्राम पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं उत्तराखंड को 91.31 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त दी गई है, जिससे जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा रुकी हुई राशि भी जारी कर दी गई है, जिससे अतिरिक्त पंचायतों को भी फायदा पहुंचेगा।

    राजस्थान और मेघालय में विकास को बल

    राजस्थान को 315.61 करोड़ रुपए की दूसरी किस्त जारी की गई है। इससे राज्य की जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायतों को मजबूती मिलेगी। वहीं मेघालय को स्वायत्त जिला परिषदों और ग्राम परिषदों के लिए कुल मिलाकर करीब 49 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि दी गई है, जिससे स्थानीय प्रशासन को और सशक्त बनाया जा सकेगा।

    महाराष्ट्र को कई मदों में बड़ी सहायता

    महाराष्ट्र को अलग-अलग मदों में बड़ी रकम जारी की गई है। इसमें टाइड और अनटाइड ग्रांट की कई किस्तें शामिल हैं। इस राशि से जिला और ब्लॉक पंचायतों के साथ हजारों ग्राम पंचायतों को फायदा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिलेगी।

    क्या है इस फंड का उद्देश्य

    15वां वित्त आयोग के तहत जारी यह फंड ग्रामीण भारत में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वच्छता, जल प्रबंधन, सड़क निर्माण और अन्य आवश्यक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दिया जाता है। इससे स्थानीय निकायों को अपनी जरूरतों के हिसाब से योजनाएं लागू करने की स्वतंत्रता भी मिलती है।

    जमीनी स्तर पर दिखेगा असर

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद से गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी और स्थानीय प्रशासन अधिक प्रभावी तरीके से काम कर सकेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
    निष्कर्ष केंद्र सरकार का यह कदम ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने और पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

  • डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव

    डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 पार, करेंसी मार्केट में बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली।भारतीय रुपए ने सोमवार को डॉलर के मुकाबले पहली बार 95 के स्तर को पार किया और 95.2 का नया निचला स्तर देखा। हालांकि दिन के अंत में रुपया 94.83 पर बंद हुआ, जो कि शुक्रवार के 94.81 के बंद से 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।

    मध्य पूर्व तनाव और तेल की कीमतों का असर

    विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के चलते रुपए में कमजोरी लगातार बढ़ रही है। अकेले मार्च महीने में भारतीय मुद्रा ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भी सोमवार को गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,635.67 अंक या 2.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक या 2.14 प्रतिशत कमजोर होकर 22,331.40 पर बंद हुआ। मार्च 2026 में निफ्टी में 10 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जो कि मार्च 2020 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी गिरावट है।

    आरबीआई की नई दिशा, ओवरनाइट नेट ओपन लिमिट

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में बैंकों के लिए ओवरनाइट नेट ओपन पोजिशन लिमिट को 100 मिलियन डॉलर करने का निर्णय लिया। इसके बाद रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूती के साथ खुला, लेकिन सत्र के दौरान 160 पैसे गिरावट के साथ शुरुआती स्तर खो दिया। केंद्रीय बैंक ने शुक्रवार को कहा था कि बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 10 अप्रैल तक हर कारोबारी दिन के अंत में उनकी नेट ओपन रुपया पोजिशन 100 मिलियन डॉलर से अधिक न हो। अनुमान है कि इन निवेशों का आकार 25 अरब डॉलर से लेकर 50 अरब डॉलर तक हो सकता है।

    तेल की बढ़ती कीमतों का दबाव

    पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 115 डॉलर प्रति बैरल पर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 101.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रा कमजोर होने के कारण भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बढ़ा है। निवेशकों ने सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे बाजार में गिरावट और तेज हुई।

    मार्च 2026 का आखिरी कारोबारी सप्ताह भारतीय निवेशकों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रुपए ने पहली बार 95 का स्तर पार कर नई चुनौतियों का संकेत दिया, वहीं शेयर बाजार में गिरावट ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व तनाव, तेल की ऊंची कीमतें और आरबीआई की नई दिशा रुपए और शेयर बाजार दोनों पर असर डाल रही हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा और निवेशकों की प्रतिक्रिया इस समय की आर्थिक नीतियों और वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी।

  • ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए

    ब्लैक बॉक्स ने प्रेफरेंशियल इश्यू पूरा किया, वारंट कन्वर्जन से मिले 386 करोड़ रुपए


    नई दिल्ली। ग्लोबल डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी ब्लैक बॉक्स लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि 27 सितंबर, 2024 को जारी किए गए वारंटों के कन्वर्जन के माध्यम से 386.36 करोड़ रुपए सफलतापूर्वक प्राप्त किए गए हैं। इस कदम से कंपनी की वित्तीय मजबूती और निवेशकों के प्रति विश्वास को और बढ़ावा मिला है।

    वारंट कन्वर्जन का पूरा लाभ

    कंपनी ने 92,65,215 वारंट को 417 रुपए प्रति शेयर के निर्गम मूल्य पर इक्विटी शेयरों में बदल दिया। सभी वारंट धारकों ने अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से उपयोग किया, और किसी ने भी अपने अधिकार नहीं गंवाए। इस पूरी प्रक्रिया के समय पर और सफलतापूर्वक होने से ब्लैक बॉक्स के व्यापारिक सिद्धांत, विकास रणनीति और क्रियान्वयन क्षमता में निवेशकों और प्रमोटरों का मजबूत विश्वास दिखाई देता है।

    प्रमोटरों ने किया बड़ा योगदान

    इस प्रेफरेंशियल इश्यू में प्रमोटरों का योगदान भी अहम रहा, जिन्होंने कुल निवेश का 51.76 प्रतिशत यानी लगभग 200 करोड़ रुपए जुटाए। हस्तांतरण के बाद प्रमोटरों की कुल शेयरधारिता 69.99 प्रतिशत हो गई है। यह कंपनी के प्रति उनकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और शेयरधारकों के साथ एकजुटता को दर्शाता है।

    विकास और रणनीतिक उपयोग

    ब्लैक बॉक्स के सीईओ संजीव वर्मा ने कहा”हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि प्रमोटरों और निवेशकों दोनों की पूर्ण भागीदारी के साथ यह पूंजी जुटाना सफल रहा। 386 करोड़ रुपए के इस निवेश से हमारी बैलेंस शीट मजबूत हुई है और विकास लक्ष्यों को गति देने के लिए हमें अतिरिक्त लचीलापन मिला है।उन्होंने आगे कहा कि यह राशि कंपनी को डिजिटल अवसंरचना क्षमताओं को बढ़ाने, बाजार में उपस्थिति का विस्तार करने और ग्राहकों एवं शेयरधारकों को लगातार मूल्य प्रदान करने में मदद करेगी।

    वित्तीय दृष्टिकोण और निवेशकों का विश्वास

    ब्लैक बॉक्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी दीपक बंसल ने कहा,”हम अपने निवेशकों के निरंतर विश्वास और समर्थन के लिए आभारी हैं। यह पूंजी हमें प्राथमिकता वाले विकास क्षेत्रों में निवेश करने की क्षमता देती है और पूंजी आवंटन, परिचालन दक्षता और प्रतिफल के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण बनाए रखने में भी सहायक है।उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी अब सभी बाजारों में उभरते अवसरों का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।

    ब्लैक बॉक्स का यह प्रेफरेंशियल इश्यू न केवल 386 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने में सफल रहा, बल्कि प्रमोटरों और निवेशकों के बीच विश्वास और सहयोग को भी स्पष्ट रूप से दर्शाता है। कंपनी अब डिजिटल अवसंरचना क्षेत्र में विस्तार और मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ अपने अगले विकास चरण की ओर बढ़ रही है।