Category: Economy

  • Q3 में ACC का रिकॉर्ड ब्रेकिंग रिजल्ट, मुनाफे में 346% की छलांग, बिक्री शिखर पर

    Q3 में ACC का रिकॉर्ड ब्रेकिंग रिजल्ट, मुनाफे में 346% की छलांग, बिक्री शिखर पर

    नई दिल्ली | अदाणी ग्रुप की प्रमुख सीमेंट कंपनी एसीसी लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) सालाना आधार पर 346 प्रतिशत बढ़कर 380 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं, तिमाही आय 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 6,483 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

    रिकॉर्ड सीमेंट बिक्री, उत्पादन में भी तेज बढ़त

    एक्सचेंज फाइलिंग में एसीसी ने बताया कि 31 दिसंबर को समाप्त तिमाही में कंपनी ने अब तक की सबसे ज्यादा सीमेंट बिक्री दर्ज की है।
    इस दौरान कुल सीमेंट उत्पादन 11.3 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है।

    प्रीमियम सीमेंट और RMC कारोबार बना ताकत

    एसीसी लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक एवं सीईओ विनोद बहेटी ने कहा कि कंपनी ने एक और मजबूत तिमाही के साथ अपनी ग्रोथ को बरकरार रखा है।

    उन्होंने बताया कि प्रीमियम सीमेंट, ट्रेड सेगमेंट और रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) कारोबार के विस्तार से कंपनी को उद्योग की अन्य कंपनियों की तुलना में बेहतर कीमतें मिलीं, जिससे बाजार में उसकी स्थिति और मजबूत हुई।

    अंबुजा सीमेंट्स में विलय से बनेगा ‘वन सीमेंट प्लेटफॉर्म’

    कंपनी के मुताबिक, तिमाही के दौरान सबसे बड़ा रणनीतिक बदलाव एसीसी लिमिटेड का अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड में विलय है।

    इस विलय से एक साझा ‘वन सीमेंट प्लेटफॉर्म’ बनेगा, जो ग्रोथ को तेज करने, संचालन को बेहतर बनाने, लागत घटाने और लंबे समय में कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती बढ़ाने में मदद करेगा।

    विनोद बहेटी ने कहा कि सभी कानूनी मंजूरियां मिलने के बाद यह एकीकरण खरीद, निर्माण और वितरण के क्षेत्रों में बेहतर तालमेल लाएगा।

    नए श्रम कानूनों से बढ़ा खर्च

    नवंबर 2025 से नए लेबर कोड लागू होने के बाद एसीसी ने 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च दर्ज किया है। यह राशि कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और अवकाश भुगतान से जुड़ी देनदारियों के लिए है।

    FY28 तक लागत घटाने का बड़ा लक्ष्य

    एसीसी ने बताया कि वह अपनी मूल कंपनी के साथ मिलकर लगातार लागत कम करने पर काम कर रही है।
    कंपनी का लक्ष्य है कि वित्त वर्ष 2028 तक प्रति टन लागत 3,650 रुपये तक लाई जाए।

    नए प्लांट और प्रीमियम पोर्टफोलियो से बढ़ेगा मुनाफा

    कंपनी ने जानकारी दी कि सलाई बनवा (2.4 मिलियन टन) और कलंबोली (1.0 मिलियन टन) की सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट्स FY26 की चौथी तिमाही में शुरू होने की राह पर हैं।

    इसके अलावा, ACC गोल्ड जैसे प्रीमियम सीमेंट बेहतर मार्जिन दे रहे हैं। ट्रेड और प्रीमियम सेगमेंट की बढ़ती हिस्सेदारी से आगे भी बेहतर रियलाइजेशन की उम्मीद जताई गई है।

    कंक्रीट कारोबार में भी जबरदस्त विस्तार

    पिछले एक साल में एसीसी ने 14 नए कंक्रीट प्लांट जोड़े हैं।
    अब कंपनी के कुल 117 प्लांट, देश के 45 शहरों में संचालित हो रहे हैं।

    विनोद बहेटी ने ग्राहकों, एक लाख से ज्यादा डीलर-रिटेलर और सात लाख से अधिक मिस्त्री-ठेकेदारों का आभार जताया।

  • RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत

    RBI का फरवरी तोहफा: लोन की EMI में बड़ी कटौती के संकेत जानें कैसे आपकी जेब को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली । देश के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और कर्जदारों के लिए फरवरी का महीना खुशियों की सौगात लेकर आ सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति समिति की बैठक को लेकर वित्तीय गलियारों में सरगर्मी तेज हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बैंक ऑफ अमेरिका की ताजा रिपोर्ट और आर्थिक संकेतकों की मानें तो आगामी 6 फरवरी को केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती का ऐतिहासिक फैसला ले सकता है। यदि यह अनुमान हकीकत में बदलता है तो आपके होम लोन कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तों में बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी जिससे आम आदमी की मासिक बजट योजना को बड़ी मजबूती मिलेगी।

    मुद्रास्फीति में नरमी और रेपो रेट का गणित आर्थिक विशेषज्ञों का तर्क है कि देश में मुद्रास्फीति महंगाई दर के आंकड़े अब धीरे-धीरे आरबीआई के संतोषजनक दायरे में आ रहे हैं। इसी अनुकूल स्थिति का लाभ उठाते हुए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है। वर्तमान में जो रेपो रेट लागू है उसमें कटौती के बाद यह घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर आ सकता है। गौरतलब है कि रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से पैसा उधार लेते हैं। जब बैंकों को केंद्रीय बैंक से सस्ता फंड मिलता है तो वे अपनी लेंडिंग दरों में कटौती करते हैं जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को सस्ती EMI के रूप में मिलता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह वर्तमान कटौती चक्र की अंतिम कटौती हो सकती है जिसके बाद स्थिरता का दौर शुरू होगा।

    सिस्टम में नकदी बढ़ाने का मास्टर प्लान आरबीआई केवल ब्याज दरें घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि वह भारतीय बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त नकदी सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक लिक्विडिटी मैनेजमेंट प्लान पर भी काम कर रहा है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 1 लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद करेगा। ओपन मार्केट ऑपरेशंसके माध्यम से होने वाली यह खरीद दो चरणों में 29 जनवरी और 5 फरवरी को आयोजित की जाएगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों के हाथ में अधिक पैसा देना है ताकि वे आम जनता और उद्योगों को बिना किसी बाधा के कर्ज बांट सकें। इसके अतिरिक्त 4 फरवरी को 10 अरब डॉलर की डॉलर-रुपया स्वैप नीलामी भी की जाएगी जो विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता लाने और दीर्घकालिक तरलता को बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी।

    अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति वित्तीय जानकारों का कहना है कि बजट के ठीक बाद आरबीआई के ये कदम वास्तविक अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। ब्याज दरों में कमी से न केवल व्यक्तिगत कर्जदारों को राहत मिलेगी बल्कि कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए भी पूंजी जुटाना सस्ता होगा जिससे निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। 6 फरवरी को होने वाले औपचारिक ऐलान पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

  • Gold Price Today: सोने की कीमतों में तेजी बरकरार! चांदी ने लगाई 21 000 रुपये की छलांग जानें आपके शहर का ताजा भाव

    Gold Price Today: सोने की कीमतों में तेजी बरकरार! चांदी ने लगाई 21 000 रुपये की छलांग जानें आपके शहर का ताजा भाव


    नई दिल्ली । आज सोने का भाव घरेलू फ्यूचर मार्केट में सोने की कीमतों में मंगलवार 27 जनवरी को तेजी देखने को मिल रही है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 5 फरवरी 2026 का एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा मंगलवार को 1 58 674 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ओपन हुआ. इसके आखिरी कारोबारी दिन एमसीएक्स पर सोना 1 56 037 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ था. 27 जनवरी की सुबह 9:55 बजे एमसीएक्स पर 5 फरवरी का एक्सपायरी वाला गोल्ड 1 58 310 रुपए पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 2300 रुपये की तेजी दिखाता है. एमसीएक्स गोल्ड शुरुआती कारोबार में 1 59 820 रुपए के हाई लेवल पर पहुंचा था.

    एमसीएक्स पर 5 मार्च 2026 का एक्सपायरी वाला सिल्वर 3 56 661 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रहा था. जो कि पिछले दिन की बंद कीमत से लगभग 21 000 रुपये की तेजी दिखाता है. एमसीएक्स सिल्वर शुरुआती कारोबार में 3 59 800 रुपये के हाई लेवल पर पहुंचा था. आइए जानते हैं कि आज आपके शहर में सोने और चांदी का ताजा भाव क्या है.

    आपके शहर में सोने का भाव गुड रिटर्न के अनुसार

    दिल्ली में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 62 100 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 600 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 610 रुपए

    मुंबई में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 61 950 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 450 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 460 रुपए

    चेन्नई में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 63 200 रुपए
    22 कैरेट – 1 49 600 रुपए
    18 कैरेट – 1 24 750 रुपए

    कोलकाता में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 61 950 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 450 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 460 रुपए

    अहमदाबाद में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 62 000 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 500 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 510 रुपए

    लखनऊ में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 62 100 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 600 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 610 रुपए

    पटना में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 62 000 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 500 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 510 रुपए

    हैदराबाद में सोने के दाम प्रति 10 ग्राम

    24 कैरेट – 1 61 950 रुपए
    22 कैरेट – 1 48 450 रुपए
    18 कैरेट – 1 21 460 रुपए

    सोना-चांदी की कीमतों में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है. आज इन बहुमूल्य धातुओं को खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसा खर्च करना होगा. अगर आज आप सोना-चांदी की खरीदारी का प्लान बना रहे हैं तो अपने शहर के ताजा भाव जरूर पता कर लेना चाहिए.

  • वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर

    वैश्विक व्यापार में भारत का बड़ा धमाका: PM मोदी ने किया इंडिया एनर्जी वीक का उद्घाटन, भारत-EU फ्री ट्रेड समझौते पर लगी मुहर


    नई दिल्ली।
    ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत-ईयू एफटीए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में आयोजित इंडिया एनर्जी वीक 2026 का उद्घाटन करते हुए वैश्विक मंच पर एक बड़ी कूटनीतिक जीत की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति बन गई है। यह समझौता न केवल दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को करीब लाएगा, बल्कि वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का 25% हिस्सा भी कवर करेगा। पीएम ने कहा कि यह डील भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को विश्व स्तर पर मजबूती देगी और सर्विस सेक्टर के लिए विकास के नए द्वार खोलेगी। साथ ही, यह पिछले साल ब्रिटेन के साथ हुए समझौते को भी और अधिक शक्ति प्रदान करेगा।

    ऊर्जा अर्थव्यवस्था के रूप में भारत का उदय पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि आज भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र की एक महाशक्ति बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ग्रीन हाइड्रोजन और बायोफ्यूल जैसे क्षेत्रों में भारत की प्रगति दुनिया के लिए मिसाल है। कार्यक्रम में मौजूद संयुक्त अरब अमीरात के मंत्रियों और वैश्विक विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में हो रहे निरंतर सुधारों ने निवेश के माहौल को दुनिया में सबसे बेहतर बना दिया है।

    इंडिया एनर्जी वीक 2026: क्या है खास? गोवा में 30 जनवरी तक चलने वाला यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऊर्जा जगत का सबसे बड़ा आयोजन है। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शुरू हुए इस सम्मेलन में 75,000 से अधिक एनर्जी प्रोफेशनल्स हिस्सा ले रहे हैं। 700 से अधिक प्रदर्शक और 550 विशेषज्ञ वक्ता शामिल हैं। इसमें तेल, गैस के साथ-साथ AI, डिजिटलाइजेशन और नेट-जीरो पाथवे जैसे 11 थीमेटिक जोन बनाए गए हैं। 12 से ज्यादा देशों के पवेलियन और 120 से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह आयोजन भारत के उस विजन को दर्शाता है जहां विकास और पर्यावरण संरक्षण नेट-जीरो एक साथ चलते हैं। इस समझौते और समिट से भारत में करोड़ों के विदेशी निवेश और हजारों रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

  • ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी

    ट्रंप के टैरिफ झटके से उबरता भारत, एक मेगा डील से 10 गुना मुनाफे की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के बाद भारतीय निर्यात को हुए नुकसान की भरपाई का रास्ता अब यूरोप की ओर से दिखाई दे रहा है। भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब अंतिम चरण में है और अगर यह समझौता 27 जनवरी को औपचारिक रूप से हो गया तो यह भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत साबित होगी।

    ट्रंप के टैरिफ से कितना हुआ नुकसान?
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल अप्रैल और अगस्त में भारत पर 25-25% टैरिफ लगाए थे। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 50% तक का टैरिफ लागू हो गया, जिससे भारतीय निर्यात क्षेत्र को लगभग 6 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।

    अब एक डील से 10 गुना फायदा
    भारत ने इस नुकसान को कम करने के लिए रणनीतिक कदम उठाया और अब एक ही डील से न सिर्फ यह नुकसान भरपाई हो जाएगी, बल्कि उस नुकसान से 10 गुना ज्यादा कमाई का रास्ता खुल सकता है।
    27 जनवरी को होने वाले EU-India FTA से भारत एक साथ 27 यूरोपीय देशों के बाजार में बिना शुल्‍क के कारोबार करने का अवसर पाएगा।

    ‘मदर ऑफ आल डील’ क्यों कहा जा रहा है?
    भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को दोनों पक्षों ने ‘मदर ऑफ आल डील’ कहा है। क्योंकि इस एक समझौते से भारत को यूरोप के 27 देशों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा, जो भारतीय निर्यात को एक बड़ा बाजार प्रदान करेगा।
    इस समय यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद हैं और इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड को लेकर बातचीत भी हुई है।

    भारतीय निर्यात को कितना फायदा होगा?
    अगर EU-India FTA लागू होता है, तो भारतीय निर्यात का ट्रेड सरप्लस लगभग 50 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
    एमके ग्लोबल की शोध रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के पूरा होने पर वित्त वर्ष 2031 तक भारत का यूरोप के साथ ट्रेड सरप्लस 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
    वित्त वर्ष 2025 में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी 17.3% थी, जो इस डील के बाद 2031 तक 22-23% तक बढ़ने का अनुमान है।

    यूरोप को भी फायदा होगा
    यह डील सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि यूरोपीय बाजार के लिए भी फायदेमंद होगी।
    हालांकि अभी यूरोप के निर्यात बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज 0.8% है, लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यूरोप का भारत के साथ 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा रहा था।
    वित्त वर्ष 2019 में यूरोप का भारत के साथ 3 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस था।

    इस डील के बाद भारत का यूरोप के साथ व्यापार और बढ़ेगा और यूरोप का घाटा भी बढ़ सकता है।
    फिर भी यूरोप ने रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता कम करने और चीन की सप्लाई का विकल्प खोजने की तैयारी कर ली है। इसलिए यूरोप में भारतीय रिफाइनरी के तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल की खरीद पहले से बढ़ रही है, और FTA के बाद इसमें और तेजी आने की संभावना है।

    किस सेक्टर को सबसे ज्यादा फायदा?
    यूरोप के साथ फ्री ट्रेड डील से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और केमिकल उद्योग को सबसे अधिक लाभ होने का अनुमान है।
    वर्तमान वित्त वर्ष में भारत के कुल निर्यात में यूरोप की हिस्सेदारी मामूली रूप से गिरकर 16.8% पर आ गई है।
    लेकिन इस डील के बाद भारत के साथ यूरोप का व्यापार घाटा बढ़ने की संभावना है।

    EU-India FTA के लागू होने से भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और यह ट्रंप के टैरिफ के नुकसान की भरपाई के साथ 10 गुना अधिक लाभ का मार्ग खोल सकता है।
    यह डील भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति को नई दिशा दे सकती है और भारत को विश्व व्यापार में मजबूत स्थिति प्रदान करेगी।

  • विश्व आर्थिक मंच 2026 में भारत ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को और मजबूत किया: प्रल्हाद जोशी

    विश्व आर्थिक मंच 2026 में भारत ने वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व को और मजबूत किया: प्रल्हाद जोशी

    नई दिल्ली। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक 2026 से लौटने के बाद कहा कि भारत ने स्थिर नीतियों, वैश्विक सहयोग और दीर्घकालिक निवेश के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है। उनके अनुसार, यह प्रयास भारत को वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में स्थापित कर रहा है।

    वैश्विक विश्वास और रणनीतिक साझेदारी

    जोशी ने बताया कि विश्व ऊर्जा सम्मेलन 2026 में उनकी बैठकों ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के विकास के प्रति वैश्विक विश्वास को फिर से जागृत किया। उन्होंने दुनिया भर की सरकारों, निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के साथ रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा, “स्वच्छ ऊर्जा विकास की दिशा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो पूर्वानुमानित नियमों, नीतिगत स्थिरता और निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग द्वारा समर्थित है।”

    दीर्घकालिक निवेश और नीति समन्वय

    दावोस में जोशी ने भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा निवेश रणनीति को प्रस्तुत किया, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय, पारदर्शी नीतियां और हितधारकों की निरंतर भागीदारी पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेशकों ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताया, जो आर्थिक विकास और सामाजिक समावेश सुनिश्चित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से बढ़ा रहा है।

    प्रधानमंत्री योजनाओं की वैश्विक सराहना

    मंत्री ने पीएम-सूर्य घर और पीएम-कुसुम जैसी प्रमुख योजनाओं की वैश्विक सराहना का उल्लेख किया, जिन्होंने बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रमों को कुशलतापूर्वक लागू करने की भारत की क्षमता को प्रदर्शित किया। इसके साथ ही भारत द्वारा सौर ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने के प्रयासों को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली, जिससे देश की स्थिति स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण के विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में और मजबूत हुई।

    हरित हाइड्रोजन और एआई में अग्रणी प्रयास

    जोशी ने कहा कि हरित हाइड्रोजन उत्पादों में भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में योगदान देने वाला महत्वपूर्ण कारक है। साथ ही, उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर भी जोर दिया। एआई के माध्यम से भारत पूर्वानुमान सुधारने, बिजली की हानि घटाने, लागत कम करने और ग्रिड की विश्वसनीयता मजबूत करने में सक्षम है।

    डिजिटल प्लेटफॉर्म और बड़े पैमाने पर तकनीकी अपनाने की रणनीति

    मंत्री ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से पायलट परियोजनाओं से प्लेटफॉर्म-आधारित समाधानों की दिशा में भारत के कदमों को साझा किया। इससे उन्नत प्रौद्योगिकियों को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद मिलेगी और भारत वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा मंच पर अपनी भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

  • रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    रोजगार की रीढ़ बना MSME, देश के लिए सबसे शक्तिशाली मंच: जीतन राम मांझी

    नई दिल्ली। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि एमएसएमई रोजगार पैदा करने का सबसे मजबूत और प्रभावी मंच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को समृद्ध राष्ट्र बनाना है तो एमएसएमई सेक्टर को और मजबूती देनी होगी। मांझी गणतंत्र दिवस परेड 2026 देखने के लिए आमंत्रित एमएसएमई लाभार्थियों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि एमएसएमई देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

    कृषि के बाद अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदान

    मंत्री ने बताया कि एमएसएमई न सिर्फ रोजगार देता है, बल्कि देश की समृद्धि को भी मजबूत करता है। उन्होंने कहा, “कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र का ही आर्थिक विकास में सबसे बड़ा योगदान है। यह सेक्टर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी अवसर पैदा करता है, जिससे संतुलित विकास संभव हो पाता है।” मांझी ने एमएसएमई की भूमिका को अहम और निर्णायक बताते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत का मजबूत आधार करार दिया।

    गणतंत्र दिवस परेड में विशेष अतिथि बने कारीगर

    इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय की ओर से एमएसएमई से जुड़े लाभार्थियों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना के 100 लाभार्थी, खादी विकास योजना के तहत प्रशिक्षित 199 कारीगर, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड के 50 लाभार्थी और महिला कॉयर योजना की 50 उत्कृष्ट महिला कारीगर अपने जीवनसाथियों के साथ शामिल रहीं। यह आयोजन कारीगरों और उद्यमियों के सम्मान का प्रतीक बना।

    ‘मिनी इंडिया’ जैसा दृश्य: शोभा करंदलाजे

    एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, “आप सभी को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे मैं एक ‘मिनी इंडिया’ देख रही हूं।” उन्होंने कहा कि सभी अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमि से आए हैं, लेकिन देश की प्रगति के लिए एकजुट हैं। करंदलाजे ने प्रधानमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार लगातार ऐसी योजनाएं बना रही है, जिनसे प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

    मेहनत से आगे बढ़ रहा देश: सचिव

    एमएसएमई मंत्रालय के सचिव एस.सी.एल. दास ने कहा कि देश की प्रगति आप सभी की मेहनत का नतीजा है। उन्होंने विविधता में एकता को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया और भरोसा दिलाया कि एमएसएमई मंत्रालय लगातार लाभार्थियों से जुड़ा रहेगा, ताकि और लोग आगे बढ़ सकें।

    पीएम विश्वकर्मा और एसआरआई फंड की अहम भूमिका

    पीएम विश्वकर्मा योजना 18 पारंपरिक कार्यों से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने का काम कर रही है। वहीं, सेल्फ रिलायंट इंडिया (एसआरआई) फंड एमएसएमई को मजबूत कर आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम सरकारी पहल साबित हो रहा है।

  • यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौता, मर्सिडीज जैसी कारों पर भारत 40% तक घटाएगा टैरिफ

    मुंबई। अगर आप लग्जरी कार खरीदने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा व्यापार समझौता (Free Trade Deal) होने जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, भारत यूरोप से आने वाली कारों पर लगने वाले भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को 110% से घटाकर सीधे 40% करने की तैयारी में है.

    यह देश के बड़े बाजार को खोलने की अब तक की सबसे बड़ी पहल हो सकती है, क्योंकि दोनों देशों के बीच मंगलवार तक फ्री ट्रेड समझौता होने की उम्मीद है.
    क्या हैं डील की अहम बातें?
    अभी भारत विदेशी कारों पर 110% तक टैक्स लेता है, जिसे घटाकर 40% किया जा सकता है.
    यह छूट उन कारों पर मिलेगी जिनकी कीमत 15,000 यूरो (करीब 13-14 लाख रुपये) से ज्यादा होगी. यानी इसका बड़ा फायदा लग्जरी कारों को मिलेगा.

    टैक्स सिर्फ 40% पर नहीं रुकेगा. आने वाले समय में इसे धीरे-धीरे घटाकर 10% तक लाने की योजना है.
    इस फैसले से फॉक्सवैगन, मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी दिग्गज कंपनियों की कारें भारतीय बाजार में काफी सस्ती हो जाएंगी.

    आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
    अभी तक विदेशों में बनी कारें भारत आते-आते अपनी असली कीमत से दोगुनी महंगी हो जाती थीं. टैक्स कम होने से इन प्रीमियम कारों की कीमतों में भारी गिरावट आएगी, जिससे भारतीय ग्राहकों के पास ज्यादा ऑप्शन होंगे. वहीं दूसरी तरफ विदेशी कंपनियों के लिए भारत में अपना बाजार बढ़ाना आसान होगा.

    भारत के लिए क्यों अहम है यह FTA?

    यह भारत के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता होगा. 27 देशों के यूरोपीय ब्लॉक के साथ सर्विस और सामानों का यह तालमेल भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस हब बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है.

  • डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    डिजिटल इंडिया की जीत: UPI को पब्लिक गुड बनाने पर RBI की तारीफ, नारायण मूर्ति ने कही बड़ी बात

    नई दिल्ली।  इंफोसिस के संस्थापक एन.आर. नारायण मूर्ति ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जमकर सराहना करते हुए कहा है कि आरबीआई हमेशा से एक उत्प्रेरक, उदार, दूरदर्शी और देश को सक्षम बनाने वाली संस्था रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को एक पब्लिक गुड के रूप में विकसित करना आरबीआई का ऐतिहासिक निर्णय है, जिसने डिजिटल भुगतान को आम आदमी के लिए सस्ता, सुरक्षित और सुलभ बना दिया।

    यूपीआई ने जीता आम लोगों का भरोसा

    नारायण मूर्ति ने कहा कि यूपीआई को कम लागत वाला और सभी के लिए आसानी से उपलब्ध बनाकर आरबीआई ने देश के हर वर्ग का भरोसा जीता है। इससे डिजिटल भुगतान प्रणाली सिर्फ शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गांवों, छोटे दुकानदारों और आम नागरिकों तक पहुंच सकी। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल सफलता की सबसे बड़ी कहानी बताया।

    नेतृत्व की सोच से बदलता है देश

    बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए मूर्ति ने कहा कि जब किसी देश में ऐसे नेता होते हैं जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं और जिनकी नीयत साफ होती है, तब वही नेतृत्व देश को बदलने की ताकत रखता है। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थाएं मजबूत मूल्यों से बनती हैं, और यही मूल्य लंबे समय तक विकास की नींव रखते हैं।

    कथनी और करनी में समानता जरूरी

    आईआईएम बेंगलुरु के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक गुड्स में हुई बातचीत के दौरान उन्होंने नेतृत्व के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई संगठन मजबूत मूल्यों के साथ आगे बढ़ना चाहता है, तो नेताओं को कथनी और करनी में समानता रखनी होगी।
    मूर्ति ने साफ शब्दों में कहा, “मूल्य भाषणों से नहीं, बल्कि कार्यों से बनते हैं।”

    संवेदनशील पूंजीवाद का महत्व

    उन्होंने कहा कि अनुशासन, सही मूल्य, मजबूत नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद समाज और राष्ट्र दोनों को आगे बढ़ाता है। तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदलती है, इसलिए समय के साथ उसे समझना, सुधारना और अनुकूल बनाना बेहद जरूरी है।

    संस्थागत यादों को संजोने की जरूरत

    नारायण मूर्ति ने इस बात पर चिंता जताई कि भारत में संस्थाओं के विकास को लेकर लिखित दस्तावेज बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि संगठनों के बनने की प्रक्रिया, संघर्ष, नेतृत्व की कमियां, टीमवर्क की जटिलताएं और नई तकनीक पर काम करने के अनुभव—ये सभी संस्थागत यादों का हिस्सा होते हैं, जिन पर भविष्य की प्रगति टिकी होती है।

    ओपन और कम लागत वाला मॉडल जरूरी

    उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सबक यह है कि कोड को सार्वजनिक और कम लागत वाला बनाया जाए। इससे एकाधिकार खत्म होता है और नवाचार को बढ़ावा मिलता है। मजबूत आधार के साथ इनोवेशन को आगे बढ़ाने के लिए उच्च गुणवत्ता वाले नेताओं की जरूरत होती है।

    छात्रों को दिया नेतृत्व का मंत्र

    छात्रों को संबोधित करते हुए मूर्ति ने कहा कि भविष्य के नेताओं को सादा जीवन जीना चाहिए और दिखावे से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “आप संवेदनशील पूंजीवाद के संदेशवाहक हैं, जो समाज, देश और उद्यमिता तीनों को आगे ले जाएंगे।”

    नारायण मूर्ति ने यूपीआई को पब्लिक गुड बनाने के लिए आरबीआई की सराहना करते हुए कहा कि मजबूत मूल्य, दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील पूंजीवाद ही भारत की डिजिटल और आर्थिक प्रगति की असली ताकत हैं।

  • अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को फिर मिला A+ नेशनल रैंकिंग: बिजली आपूर्ति में बनी देश की अग्रणी कंपनी

    नई दिल्ली। अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने एक बार फिर बिजली वितरण कंपनियों की राष्ट्रीय रैंकिंग में अपनी मजबूत स्थिति साबित की है। पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) द्वारा जारी ‘14वीं वार्षिक रेटिंग और रैंकिंग ऑफ डिस्कॉम्स रिपोर्ट’ में अदाणी इलेक्ट्रिसिटी को ए+ रैंकिंग प्रदान की गई है। लगातार दूसरी बार शीर्ष श्रेणी में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि कंपनी बिना रुकावट बिजली आपूर्ति, कम तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान तथा सुदृढ़ वित्तीय अनुशासन के मामले में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही है।

    मुंबईवासियों के भरोसे की जीत

    इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि यह रैंकिंग मुंबई के नागरिकों के भरोसे की पहचान है। कंपनी ने बताया कि वह बीते 100 वर्षों से मुंबई की सेवा कर रही है और हर दिन घरों, अस्पतालों, उद्योगों और आवश्यक सेवाओं को भरोसेमंद और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
    कंपनी के अनुसार, “लगातार एक और वर्ष शीर्ष स्थान हासिल करना इस बात को दर्शाता है कि मुंबईवासी हर दिन शहर और देश की अग्रणी विद्युत वितरण कंपनी पर भरोसा करते हैं।”

    100 साल की सेवा, भविष्य पर नजर

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने कहा कि मुंबई की सेवा के 100 साल पूरे होने के साथ ही कंपनी शहर के विकास के साथ आगे बढ़ रही है। आधुनिक तकनीक, स्मार्ट सिस्टम और उपभोक्ता-केंद्रित सेवाओं के जरिए कंपनी भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए खुद को लगातार तैयार कर रही है।

    बिजली वितरण सेक्टर के लिए ऐतिहासिक साल

    यह रेटिंग देश के बिजली वितरण क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ मानी जा रही है। वित्त वर्ष 2025 में देशभर की बिजली वितरण कंपनियों ने मिलकर 2,701 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है। यह पहली बार है जब यह सेक्टर कागजी हिसाब से मुनाफे में आया है।
    इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024 में डिस्कॉम्स को 27,022 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुधार संरचनात्मक सुधारों, बेहतर वित्तीय अनुशासन और तकनीक के प्रभावी उपयोग का नतीजा है।

    बिलिंग और वसूली में देश में अव्वल

    रिपोर्ट के मुताबिक, अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की बिलिंग दक्षता लगातार 95 प्रतिशत से अधिक रही है, जबकि बिल वसूली लगभग 100 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भुगतान प्रबंधन और राजस्व वसूली के मामले में कंपनी का प्रदर्शन देश में सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

    डेटा और तकनीक बनी सफलता की कुंजी

    रिपोर्ट में कहा गया है कि अदाणी इलेक्ट्रिसिटी की सबसे बड़ी ताकत उसका निरंतर एक जैसा उत्कृष्ट प्रदर्शन है। यह किसी एक समय की उपलब्धि नहीं, बल्कि मजबूत सिस्टम, डेटा आधारित निर्णय, स्मार्ट मीटर, एनालिटिक्स और बेहतर उपभोक्ता सेवाओं का परिणाम है।
    इसी वजह से अदाणी इलेक्ट्रिसिटी न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश में शहरी बिजली वितरण के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

    अदाणी इलेक्ट्रिसिटी ने लगातार दूसरी बार ए+ रैंकिंग हासिल कर यह साबित किया है कि मजबूत वित्तीय अनुशासन, तकनीक और भरोसेमंद सेवा से बिजली वितरण में देशभर में नई मिसाल कायम की जा सकती है।