Category: Economy

  • नए वित्तीय साल में नए नियम: 1 अप्रैल से आयकर और LPG में बदलाव, जानिए असर

    नए वित्तीय साल में नए नियम: 1 अप्रैल से आयकर और LPG में बदलाव, जानिए असर


    नई दिल्ली। भारत में 1 अप्रैल 2026 से नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही आम आदमी की आर्थिक जिंदगी में कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं। करीब 65 साल पुराने आयकर अधिनियम 1961 की जगह अब नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य टैक्स सिस्टम को सरल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है। इसके साथ ही जीएसटी व्यवस्था, बैंकिंग नियम, डिजिटल पेमेंट और रोजमर्रा के खर्चों से जुड़े कई अहम बदलाव भी लागू हुए हैं, जिनका सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा।

    नए टैक्स सिस्टम के तहत अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ ‘टैक्स ईयर’ की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा। सरकार ने 12 लाख रुपए तक की आय को करमुक्त रखने का ऐलान किया है। साथ ही, टैक्स से जुड़े नियमों को सरल भाषा में पेश किया गया है ताकि आम लोगों को समझने में आसानी हो और अनुपालन बेहतर हो सके।

    आईटीआर दाखिल करने की समय सीमा में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी, जबकि अन्य करदाताओं के लिए यह 31 अगस्त तय की गई है। जिन मामलों में ऑडिट जरूरी है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर होगी।

    इसके अलावा, अब गिफ्ट और वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 15,000 रुपए कर दी गई है, जो पहले 5,000 रुपए थी। बच्चों के शिक्षा और हॉस्टल भत्ते में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है, जिससे परिवारों को राहत मिलेगी।

    हालांकि, इस बीच महंगाई का दबाव भी बढ़ता नजर आ रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2078.50 रुपए तक पहुंच गई है, जो पहले 1884.50 रुपए थी। इसका असर होटल और रेस्टोरेंट के खाने-पीने की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों का खर्च बढ़ना तय है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    सरकारी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने राष्ट्रीय राजधानी में अपने प्रीमियम फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत अब 160 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 149 रुपए थी। इसी तरह कंपनी ने एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमत भी बढ़ा दी है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। हालांकि, सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद, भारत के प्रमुख शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं।

    पैन कार्ड से जुड़े नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। अब सिर्फ आधार के आधार पर पैन बनवाना संभव नहीं होगा और अतिरिक्त दस्तावेज देना जरूरी होगा। बड़े लेनदेन के लिए पैन अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, क्रेडिट कार्ड से बड़े खर्च की जानकारी अब आयकर विभाग को दी जाएगी, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी।

    मकान किराया भत्ता (एचआरए) के नियमों को भी कड़ा किया गया है। अब किराये की छूट पाने के लिए मकान मालिक का पैन और अन्य विवरण देना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को मेट्रो शहरों में शामिल कर लिया गया है, जिससे इन शहरों में रहने वालों को 50 प्रतिशत तक एचआरए छूट मिलेगी।

    बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में भी बदलाव हुए हैं। अब एटीएम से यूपीआई के जरिए नकद निकासी को भी फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट में गिना जाएगा। वहीं, सभी डिजिटल पेमेंट के लिए ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ऑनलाइन फ्रॉड पर रोक लगेगी।

    यात्रियों के लिए रेलवे नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब कंफर्म टिकट पर रिफंड पाने के लिए ट्रेन छूटने से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट कैंसिल करना होगा। वहीं, बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा अब ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तक उपलब्ध रहेगी।

    हाईवे पर सफर करने वालों के लिए फास्टैग महंगा हो गया है और टोल प्लाजा पर नकद भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब केवल डिजिटल माध्यमों से ही भुगतान करना होगा, अन्यथा जुर्माना देना पड़ सकता है।

  • निवेशकों के लिए राहत: पुराने निवेश ट्रांसफर से होने वाली आय पर नहीं लगेगा जीएएआर

    निवेशकों के लिए राहत: पुराने निवेश ट्रांसफर से होने वाली आय पर नहीं लगेगा जीएएआर


    नई दिल्ली। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने इनकम टैक्स नियमों में संशोधन करते हुए स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेश के ट्रांसफर से होने वाली आय पर जनरल एंटी-अवॉइडेंस रूल्स (जीएएआर) लागू नहीं होगा। यह संशोधन 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा और निवेशकों को पुराने निवेशों (लेगेसी इन्वेस्टमेंट) पर भरोसा और स्पष्टता प्रदान करेगा।

    पीछे का घटनाक्रम और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

    यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा मॉरीशस स्थित टाइगर ग्लोबल इंटरनेशनल के खिलाफ दिए गए फैसले के बाद आया है। कोर्ट ने 2018 में फ्लिपकार्ट से एग्जिट पर हुए मुनाफे पर आयकर विभाग के टैक्स लगाने के अधिकार को सही ठहराया था। इससे स्पष्ट हुआ कि पुराने निवेश और नए निवेश पर टैक्स नियमों की व्याख्या में अंतर हो सकता है, जिसे अब सीबीडीटी ने स्पष्टीकरण के जरिए दूर किया है।

    नए आयकर ढांचे में अन्य बदलाव

    नए वित्त वर्ष से लागू नए आयकर कानून ने 1961 के पुराने कानून की जगह ली है। इस कानून में अनुपालन, शब्दावली और टैक्स प्रणाली में कई बदलाव किए गए हैं।

    टैक्स ईयर का परिचय: अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ (एफवाई) और ‘असेसमेंट ईयर’ (एवाई) की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ लागू होगा, जिससे रिटर्न फाइल करना आसान होगा और टैक्सपेयर्स के लिए स्पष्टता बढ़ेगी आईटीआर फाइलिंग समय-सीमा: सैलरी पाने वाले लोगों के लिए डेडलाइन 31 जुलाई रहेगी, जबकि सेल्फ-एम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स जैसे नॉन-ऑडिट मामलों में अब 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल किया जा सकेगा।

    एफएंडओ ट्रेडिंग शुल्क: यूनियन बजट में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाए जाने के कारण फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) में ट्रेडिंग पर शुल्क बढ़ा दिया गया है।
    शेयर बायबैक टैक्स: अब कंपनियों के शेयर बायबैक पर टैक्स को ‘डिविडेंड’ की बजाय ‘कैपिटल गेन’ के रूप में लिया जाएगा, जिससे प्रमोटर्स और रिटेल निवेशकों दोनों पर असर पड़ेगा।

     सीबीडीटी ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2017 से पहले किए गए निवेश पर जीएएआर लागू नहीं होगा। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे और निवेशकों को पुराने निवेशों पर भरोसा देंगे। इसके साथ ही नए आयकर कानून में टैक्स ईयर, आईटीआर समय-सीमा, एफएंडओ शुल्क और शेयर बायबैक टैक्स जैसी महत्वपूर्ण बदलाव लागू किए गए हैं, जो टैक्स प्रणाली को अधिक स्पष्ट और आसान बनाएंगे।

  • सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार

    सलीम दुर्रानी: अफगान मूल के एकमात्र भारतीय क्रिकेटर जिन्हें मिला अर्जुन पुरस्कार


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में अपनी जगह बनाना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं रहा है, लेकिन अगर आप किसी दूसरे देश से हों और वहां क्रिकेट प्रमुख खेल न हो, तो यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सलीम दुर्रानी की कहानी इस कठिन रास्ते को पार करने वाले खिलाड़ियों में अद्वितीय है।

    अफगानिस्तान से जामनगर तक का सफर

    सलीम दुर्रानी का जन्म 11 दिसंबर 1934 को खैबर दर्रा, अफगानिस्तान में हुआ। उनके पिता अब्दुल अजीज दुर्रानी पेशेवर क्रिकेटर थे। 1935 में कराची के दौरे पर अब्दुल अजीज की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग से प्रभावित होकर नवानगर (आज का जामनगर) के जाम साहिब दिग्विजयसिंह रणजीतसिंह ने उन्हें सब-इंस्पेक्टर की नौकरी का ऑफर दिया। इसी अवसर पर दुर्रानी परिवार जामनगर में बस गया। सलीम केवल तीन साल के थे जब वह भारत आ गए। 1947 के बंटवारे के बाद उनके पिता पाकिस्तान चले गए, जबकि उनका परिवार जामनगर में रहा।

    ऑलराउंडर की भूमिका और टेस्ट करियर

    दुर्रानी एक ऑलराउंडर थे। वह धीमे बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज और बाएं हाथ के बल्लेबाज थे। उनके छक्के मारने की क्षमता उन्हें खास बनाती थी। अफगानिस्तान में जन्मे और भारतीय टीम के लिए खेलते हुए, दुर्रानी 1960 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद 1973 तक 29 मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। उन्होंने 50 पारियों में 1 शतक और 7 अर्धशतक बनाकर 1202 रन बनाए और 75 विकेट लिए।

    महत्वपूर्ण जीतों में अहम भूमिका

    1961-62 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सीरीज जीत में दुर्रानी ने कोलकाता और चेन्नई में क्रमशः 8 और 10 विकेट लेकर भारत को जीत दिलाई। एक दशक बाद, 1970 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत की पहली जीत में भी उन्होंने क्लाइव लॉयड और गैरी सोबर्स जैसे दिग्गजों को आउट किया, जो भारतीय क्रिकेट के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुआ।

    अर्जुन पुरस्कार और जीवन सम्मान

    सलीम दुर्रानी पहले क्रिकेटर थे जिन्होंने अर्जुन पुरस्कार जीता। 2011 में उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से भी सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट बोर्ड का सर्वोच्च पुरस्कार है।

    विदाई: 88 साल की उम्र में

    सलीम दुर्रानी ने 2 अप्रैल 2023 को 88 वर्ष की उम्र में कैंसर से अंतिम सांस ली। उनका क्रिकेट और भारतीय खेल जगत में योगदान आज भी याद किया जाता है।

  • वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उड़ानों के फ्यूल पर आंशिक रोक

    वैश्विक ईंधन संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू उड़ानों के फ्यूल पर आंशिक रोक


    नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच केंद्र सरकार ने आम यात्रियों और घरेलू विमानन क्षेत्र को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमतों में 100 प्रतिशत से अधिक उछाल की आशंका जताई जा रही थी।

    तेजी से बढ़ते वैश्विक संकट के बीच हस्तक्षेप

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के मद्देनजर लिया गया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे जेट ईंधन महंगा होने का दबाव बढ़ गया था।

    घरेलू एयरलाइंस को राहत, किराए पर नियंत्रण

    सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर यह तय किया कि घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमतों में केवल आंशिक और चरणबद्ध वृद्धि की जाएगी। इसके तहत कीमतों में करीब 25 प्रतिशत यानी लगभग 15 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। इस कदम का उद्देश्य हवाई किराए में अचानक भारी वृद्धि को रोकना और यात्रियों को राहत देना है।

    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू नहीं होगी राहत

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल घरेलू उड़ानों के लिए है। अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर संचालित उड़ानों को वैश्विक बाजार के अनुसार पूरी कीमत चुकानी होगी। इससे एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय संचालन पर लागत का दबाव बना रहेगा।

    नई दरें लागू, कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज

    1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार, New Delhi में ATF की कीमत बढ़कर 1,04,927 रुपए प्रति किलोलीटर हो गई है, जो मार्च में 96,638.14 रुपए थी। हालांकि वास्तविक वृद्धि लगभग 8.5 प्रतिशत के आसपास रही है, जो संभावित भारी उछाल के मुकाबले काफी नियंत्रित है।

    सरकार और मंत्रालय की प्रतिक्रिया

    नागर विमानन मंत्री Ram Mohan Naidu Kinjarapu ने इस फैसले को व्यावहारिक और दूरदर्शी बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का आभार जताते हुए कहा कि यह कदम यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने, एयरलाइंस पर वित्तीय दबाव कम करने और विमानन क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा।

    व्यापक आर्थिक असर भी सकारात्मक

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सिर्फ यात्रियों को ही राहत नहीं मिलेगी, बल्कि माल ढुलाई और व्यापार के लिए जरूरी हवाई संपर्क भी सुचारु बना रहेगा। इससे अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।

  • प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार

    प्रीमियम ईंधन महंगा, आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत बरकरार


    नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में उथल-पुथल के बीच देश में ईंधन कीमतों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (आईओसी) ने प्रीमियम ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है, जबकि आम पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। इससे आम उपभोक्ताओं को राहत जरूर मिली है, लेकिन लग्जरी और हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के उपयोगकर्ताओं पर असर पड़ा है।

    एक्सपी100 पेट्रोल में बड़ा उछाल

    आईओसी के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में एक्सपी100 पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर 160 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 149 रुपए थी। यह हाई-ऑक्टेन फ्यूल खासतौर पर लग्जरी कारों और हाई-परफॉर्मेंस मोटरसाइकिलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे इंजन की क्षमता और स्मूद परफॉर्मेंस बेहतर होती है। कीमतों में यह उछाल प्रीमियम फ्यूल सेगमेंट में बढ़ती लागत और वैश्विक बाजार के दबाव को दर्शाता है।

    प्रीमियम डीजल भी हुआ महंगा

    सिर्फ पेट्रोल ही नहीं, बल्कि एक्स्ट्रा ग्रीन डीजल (प्रीमियम डीजल) की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। अब दिल्ली में इसकी कीमत 92.99 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो पहले 91.49 रुपए थी। यह डीजल बेहतर माइलेज और कम उत्सर्जन के लिए जाना जाता है और मुख्य रूप से कमर्शियल और प्रीमियम उपयोग के लिए अपनाया जाता है।

    आम पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत

    हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में पेट्रोल अभी भी 94.72 रुपए प्रति लीटर और डीजल 87.62 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Mumbai में पेट्रोल 103.44 रुपए और डीजल 89.97 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है।

    एलपीजी और एटीएफ में भी भारी बढ़ोतरी

    इस बीच, अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में तेजी देखने को मिली है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 195.50 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। वहीं एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें दोगुने से अधिक बढ़कर 2 लाख रुपए प्रति किलोलीटर के पार पहुंच गई हैं, जिससे विमानन सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।

    वैश्विक तनाव का असर

    ईंधन कीमतों में यह बदलाव वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। पश्चिम एशिया में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अमेरिका आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों को सीमित कर सकता है, जिससे हालात में कुछ नरमी की उम्मीद है।

    हालांकि, Iran ने चेतावनी दी है कि यदि उसके हितों पर हमला जारी रहा तो वह जवाबी कार्रवाई करेगा। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास की स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

    भारत में कीमतें क्यों स्थिर?

    वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें स्थिर रखी गई हैं। तेल कंपनियां फिलहाल आम उपभोक्ताओं को राहत देने की रणनीति पर काम कर रही हैं, जबकि प्रीमियम और अन्य उत्पादों में लागत का असर दिख रहा है।

  • जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा

    जीएसटी रेवेन्यू में उछाल, मार्च में भारत ने पार किया 2 लाख करोड़ का आंकड़ा


    नई दिल्ली। सकल जीएसटी संग्रह मार्च 2026 में 2,00,064 करोड़ रुपए तक पहुँच गया, जो पिछले साल इसी महीने के 1,83,845 करोड़ रुपए के मुकाबले 8.8 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। सरकार ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और आयात पर लगने वाले जीएसटी में तेज इजाफे के कारण हुई है। घरेलू सामान पर जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत और आयात पर जीएसटी में 17.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    रिफंड को हटाने पर शुद्ध संग्रह

    यदि 22,074 करोड़ रुपए के रिफंड को हटा दिया जाए, तो मार्च में शुद्ध जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 1,77,990 करोड़ रुपए हो गया। इससे पता चलता है कि कर राजस्व में निरंतर सुधार और बेहतर अनुपालन की स्थिति बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सकल जीएसटी संग्रह 22.27 लाख करोड़ रुपए रहा, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 20.55 लाख करोड़ रुपए से 8.3 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध जीएसटी संग्रह (रिफंड हटाकर) 19.34 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक है।

    उपकर संग्रह में गिरावट

    हालांकि, उपकर संग्रह में मार्च में नकारात्मक प्रवृत्ति देखी गई और यह -177 करोड़ रुपए पर रहा। इसका मुख्य कारण अधिक रिफंड और समायोजन थे। विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी संग्रह की यह वृद्धि भारत की अनुमानित जीडीपी वृद्धि (लगभग 7 प्रतिशत) के अनुरूप है, जो बढ़ती खपत, आयात और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देती है।

    पिछले महीने का प्रदर्शन

    फरवरी 2026 में भी जीएसटी संग्रह में 9.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की गई थी। फरवरी में सकल संग्रह बढ़कर 1.84 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा। इसमें घरेलू जीएसटी राजस्व में 10.2 प्रतिशत और आयात से जीएसटी राजस्व में 5.4 प्रतिशत का योगदान रहा। यह प्रवृत्ति बताती है कि भारत में कर प्रणाली मजबूत होती जा रही है और कर अनुपालन में सुधार हो रहा है।

    विशेषज्ञों की राय और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

    विशेषज्ञों का मानना है कि मार्च और फरवरी में जीएसटी संग्रह की लगातार वृद्धि यह दिखाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बनी हुई है। घरेलू खपत में बढ़ोतरी, आयात में विस्तार और बेहतर अनुपालन ने कर संग्रह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह संकेत है कि सरकारी राजस्व आधार मजबूत है और देश की वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिल रही है।।

  • आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा

    आठवें वेतन आयोग के सदस्य सरकारी कर्मचारियों से करेंगे अहम मुद्दों पर चर्चा


    नई दिल्ली। आठवें वेतन आयोग प्रस्तावित वेतन वृद्धि और भत्तों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से बातचीत करने के लिए तैयार है। आयोग के सदस्य 24 अप्रैल को देहरादून में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और अन्य पक्षकारों के प्रतिनिधि वेतन संरचना, भत्ते और पेंशन से जुड़े सुझाव साझा करेंगे।

    आयोग ने कहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह की बैठकें आयोजित की जाएंगी ताकि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की समस्याओं और अपेक्षाओं को व्यापक रूप से समझा जा सके। इन बैठकों से मिली प्रतिक्रियाओं के आधार पर आयोग यह तय करेगा कि वेतन, पेंशन और अन्य लाभों में कितना संशोधन किया जाना चाहिए।

    इच्छुक समूहों और व्यक्तियों को बैठक में भाग लेने के लिए 10 अप्रैल तक समय का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। आयोग चयनित प्रतिभागियों को बैठक के सटीक स्थान और समय के बारे में सूचित करेगा। बयान में कहा गया है कि स्थान और कार्यक्रम की जानकारी बाद में दी जाएगी।

    कर्मचारी संघ, पेंशनभोगी संघ, संगठन और व्यक्तिगत कर्मचारी भी वेतन, भत्ते और पेंशन संबंधी मुद्दों पर अपने विचार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से 30 अप्रैल तक ज्ञापन के रूप में भेज सकते हैं। आयोग इन सभी प्रस्तुतियों और बैठकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें तैयार करेगा।

    वर्तमान में लगभग 1.1 करोड़ केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी 8वें वेतन आयोग की त्वरित सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कुल 18 महीने का समय दिया गया है।

  • भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी

    भारत के डिजिटल भविष्य के लिए बड़ी खबर: डेटा सेंटर क्षमता में 2026 तक 30% बढ़ोतरी


    नई दिल्ली।  भारत की डेटा सेंटर इंडस्ट्री अगले सालों में तेजी से बढ़ने की ओर बढ़ रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में देश की डेटा सेंटर क्षमता सालाना आधार पर लगभग 30 प्रतिशत बढ़ सकती है। इसके पीछे मजबूत मांग और निवेशकों की लगातार रुचि मुख्य कारण माने जा रहे हैं।

    सीबीआरई के विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष लगभग 500 मेगावाट की नई डेटा सेंटर क्षमता जोड़ी जाएगी, जो 2025 में जोड़ी गई रिकॉर्ड 440 मेगावाट से अधिक है। 2025 के अंत तक घरेलू डेटा सेंटर की कुल क्षमता लगभग 1,700 मेगावाट तक पहुँच चुकी थी।

    निवेश में तेजी और विदेशी पूंजी का योगदान

    डेटा सेंटर सेक्टर में नई पूंजी निवेश भी लगातार आकर्षित हो रही है। 2025 में इस क्षेत्र में 56.4 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धताएँ हुईं, जिससे कुल निवेश प्रतिबद्धताएँ 126 अरब डॉलर तक पहुँच गईं। इस वर्ष निवेश में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है, जिससे यह राशि संभावित रूप से 180 अरब डॉलर से अधिक हो सकती है।

    सीबीआरई के अध्यक्ष और सीईओ Anshuman Magazine ने कहा, “भारत में डेटा सेंटर की कहानी अब संभावनाओं के बारे में नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन के बारे में है।” उन्होंने कहा कि विदेशी पूंजी इस विकास को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।

    राज्यों और शहरों की भूमिका

    रिपोर्ट में बताया गया है कि महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य डेटा सेंटर निवेश में आगे रहेंगे। वहीं, कम लेटेंसी, 5G रोलआउट और डेटा स्थानीयकरण की बढ़ती मांग के कारण टियर-II शहर जैसे अहमदाबाद, विशाखापत्तनम, पटना और भोपाल में भी तेजी से विकास हो रहा है।

    मुंबई का दबदबा, एआई और क्लाउड की बढ़ती मांग

    भारत में वर्तमान में कुल डेटा सेंटर क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक मुंबई में स्थित है। मुंबई, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर और बेंगलुरु मिलकर कुल क्षमता का लगभग 90 प्रतिशत योगदान देते हैं।

    एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग से बढ़ती मांग बिजली के बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ा रही है, जिससे ऑपरेटर नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान दे रहे हैं। भारत ने 2025 में रिकॉर्ड 44.5 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी।

    सरकारी नीतियों का समर्थन

    रिपोर्ट के अनुसार कर प्रोत्साहन, हरित पूंजीगत व्यय समर्थन और नियामकीय सरलीकरण जैसी सरकारी नीतियां निवेश में और तेजी लाने और भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख डेटा सेंटर केंद्र बनाने में मदद करेंगी।

  • “महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”

    “महिंद्रा की मार्च में धमाकेदार बिक्री: 99,969 गाड़ियों के साथ 21% उछाल!”


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख ऑटो कंपनी Mahindra & Mahindra ने मार्च 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए बिक्री के नए आंकड़े छू लिए हैं। कंपनी ने कुल 99,969 वाहनों की बिक्री दर्ज की, जो सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्शाती है। यह आंकड़ा घरेलू और निर्यात दोनों को मिलाकर है, जो कंपनी की मजबूत बाजार पकड़ और बढ़ती मांग का संकेत देता है।

    SUV सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजन

    महिंद्रा की इस तेज रफ्तार का सबसे बड़ा कारण उसका यूटिलिटी व्हीकल (SUV) सेगमेंट रहा। मार्च में घरेलू बाजार में कंपनी ने 60,272 यूनिट SUV बेचीं, जो 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। वहीं निर्यात को मिलाकर कुल SUV बिक्री 62,109 यूनिट तक पहुंच गई। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी ने SUV सेगमेंट में 6,60,276 यूनिट की बिक्री की, जो 20 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाती है।

    कमर्शियल व्हीकल में भी दमदार प्रदर्शन

    कमर्शियल व्हीकल (CV) सेगमेंट में भी कंपनी ने संतुलित और मजबूत प्रदर्शन किया। मार्च में घरेलू CV बिक्री 24,928 यूनिट रही, जो 11 प्रतिशत की बढ़त है। खासतौर पर 2 से 3.5 टन वाले लाइट कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 21,402 यूनिट की बिक्री हुई। वहीं 3.5 टन से कम वाले वाहनों की सालाना बिक्री 2,89,597 यूनिट रही, जो 13 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाती है।

    थ्री-व्हीलर सेगमेंट में जबरदस्त उछाल

    कंपनी के थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी तेज रफ्तार देखने को मिली। मार्च में 39 प्रतिशत की बढ़त के साथ 10,801 यूनिट की बिक्री हुई। इस सेगमेंट में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बढ़ती मांग भी एक बड़ा कारण रही। पूरे वित्त वर्ष में इस श्रेणी में 1,12,003 यूनिट की बिक्री हुई, जो 30 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि है।

    निर्यात में सालाना बढ़त, लेकिन मार्च में हल्की गिरावट

    निर्यात के मोर्चे पर कंपनी ने वित्त वर्ष के दौरान 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 40,990 यूनिट का आंकड़ा पार किया। हालांकि मार्च महीने में निर्यात 4 प्रतिशत घटकर 3,968 यूनिट रहा, जो वैश्विक बाजार की चुनौतियों की ओर इशारा करता है।

    सीईओ का बयान: मांग बनी हुई मजबूत

    कंपनी के ऑटोमोटिव डिवीजन के सीईओ Nalinikanth Gollagunta ने कहा कि मार्च में SUV की 60,272 यूनिट बिक्री और LCV सेगमेंट में 24,928 यूनिट की बिक्री कंपनी की मजबूत मांग को दर्शाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में भी यह ग्रोथ जारी रहेगी।

    शेयर बाजार में भी दिखा असर

    कंपनी के इस शानदार प्रदर्शन का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। NSE पर महिंद्रा एंड महिंद्रा का शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़कर 3,051 रुपये के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

    लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला

    गौरतलब है कि कंपनी ने फरवरी 2026 में भी 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97,177 यूनिट की बिक्री दर्ज की थी। लगातार दूसरे महीने मजबूत प्रदर्शन से साफ है कि महिंद्रा की रणनीति और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बाजार में अच्छी पकड़ बनाए हुए है।

  • मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू हुई इन-टर्मिनल क्विक कॉमर्स सर्विस, अदाणी एयरपोर्ट और Blinkit की पहल

    मुंबई एयरपोर्ट पर शुरू हुई इन-टर्मिनल क्विक कॉमर्स सर्विस, अदाणी एयरपोर्ट और Blinkit की पहल


    नई दिल्ली हवाई यात्रा को आसान और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल हुई है। अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (एएएचएल) ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के साथ साझेदारी कर देश की पहली “इन-टर्मिनल क्विक बिजनेस सर्विस” शुरू की है। इस नई सुविधा की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल -2 से की गई है, जहां घरेलू विमान यात्रियों को अब हवाई अड्डे के भीतर ही कुछ मिनटों में आवश्यक सामान मिल जाएगा।

    एक मिनट में यात्रा: यात्रा के दौरान नई सुविधा

    इस सेवा के लिए यात्री अब ब्लिंकिट ऐप पर ऑर्डर करके चार्जर, दुकान, किताबें, पर्सनल केयर उत्पाद जैसी जरूरी चीजें तुरंत मंगा सकते हैं। खास बात यह है कि यह बोर्डिंग गेट, टॉक, फूड कोर्ट और आईसीआईसीआई बैंक के अंदर ही है। ऐसे यात्रियों को आखरी की तलाश में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।

    सुरक्षा के साथ स्मार्ट सेवा

    एयरपोर्ट जैसे संकेतक स्थान पर इस सेवा को पूरी सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण ऑन-बोर्ड स्टाफ यह सुनिश्चित कर रहा है कि हवाई अड्डे के संचालन या यात्रियों के समय पर कोई असर न पड़े। सुरक्षा मानकों के तहत पैक्ड पानी, साबुत और ठंडे पेय पदार्थ जैसे तरल पदार्थ भी टर्मिनल के गैसोलीन स्टॉक के माध्यम से उपलब्ध हैं।

    यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने का प्रयास

    एचएएल के प्रवक्ता का कहना है, इसका पहला उद्देश्य टर्मिनल के साथ-साथ डिजिटल सुविधा में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाना है। ऐप-आधारित इस सेवा यात्रियों को अपने समय का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिलता है और एयरपोर्ट पर अधिक “यात्री-दर्शक” बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है।

    नए अवसर के लिए ब्लिंकिट, नई कमाई के लिए एयरपोर्ट

    ब्लिंक के लिए इसने एक नए और हाई-डिमांड सेक्टर में शामिल होने का मौका दिया है, जहां समय की कमी के साथ त्वरित सेवा की जरूरत सबसे ज्यादा है। वहीं एचएएल के लिए यह पहले केवल यात्रियों की सुविधा को बढ़ावा देता है, बल्कि डिजिटल पैमाने के माध्यम से गैर-विमान राजस्व को भी बढ़ावा देता है।

    यात्रियों की आम समस्या का समाधान

    अक्सर देखा जाता है कि यात्री जरूरी सामान भूल जाते हैं या बोर्डिंग से पहले खरीदारी के लिए उनके पास नहीं जाते। टर्मिनल-2 जैसे संयुक्त हवाई अड्डे पर यह सेवा इस समस्या का प्रभावी समाधान साबित हो सकती है। अब बिना समय गंवाए, यात्री अपनी जरूरत की चीजें तुरंत हासिल कर सकता है।

    प्रौद्योगिकी से परिवर्तन यात्रा अनुभव

    सबसे पहले इस बात का संकेत है कि कैसे तकनीक और डिजिटल हवाई यात्रा के अनुभव को तेजी से बदला जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह के अन्य हवाई अड्डों पर भी दर्शन मिल सकते हैं, जिससे यात्रियों को अधिक सुविधा और विकल्प मिलेंगे।