Category: Economy

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशियों की खबर दी है। वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां, NABARD और RBI के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगासरकारी आंकड़ों के अनुसार इस फैसले से 46,322 कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी जबकि 23,570 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनधारकों की आय में भी वृद्धि होगी

    PSU बीमा कंपनियों में इस संशोधन के लिए अनुमानित खर्च 8,170.30 करोड़ रुपये है जिसमें एरियर के लिए 5,822.68 करोड़ और पारिवारिक पेंशन के लिए 2,097.47 करोड़ रुपये शामिल हैंनाबार्ड के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा इसके कारण सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और बकाया भुगतान के लिए करीब 510 करोड़ रुपये खर्च होंगे

    RBI और NABARD के पेंशनर्स के लिए भी संशोधन किया गया है इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी साथ ही पात्र लाभार्थियों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगाइस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और पारिवारिक पेंशनधारकों की भी जीवनशली में सुधार होगा

  • 1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!

    1,00,000 डाकघर में जमा करो और पाओ ₹44,995 का फिक्स ब्याज, सरकारी गारंटी वाली इस स्कीम ने मचा दिया धमाल!



    नई दिल्‍ली । पोस्ट ऑफिस की टाइम डिपॉजिट TD स्कीम इन दिनों खूब चर्चा में है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जहां कई बड़े बैंक एफडी पर ब्याज कम कर चुके हैं, वहीं डाकघर अब भी अच्छा और तय रिटर्न दे रहा है। साथ ही, इसमें सरकारी गारंटी भी मिलती है, जिससे लोगों को अपने पैसे की पूरी सुरक्षा का भरोसा रहता है।बढ़ती महंगाई और घटते बैंक ब्याज दरों के बीच अगर कोई इन्वेस्टमेंट ऑप्शन आम लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है, तो वह डाकघर की बचत योजनाएं है। खासकर तब, जब भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में कटौती की और बैंकों ने अपनी एफडी की ब्याज दरें घटा दीं। ऐसे माहौल में पोस्ट ऑफिस की एक स्कीम निवेशकों के लिए किसी राहत से कम नहीं है, जिसमें न सिर्फ बेहतर रिटर्न मिल रहा है, बल्कि पैसा भी पूरी तरह सुरक्षित है।

    दरअसल, डाकघर की फिक्स्ड डिपॉजिट को टाइम डिपॉजिट TD कहा जाता है। यह योजना बैंकों की एफडी की तरह ही काम करती है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है केंद्र सरकार की सीधी गारंटी। पोस्ट ऑफिस में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि के लिए टीडी अकाउंट खुलवाया जा सकता है। मौजूदा समय में डाकघर 1 साल की टीडी पर 6.9 प्रतिशत, 2 साल पर 7.0 प्रतिशत, 3 साल पर 7.1 प्रतिशत और 5 साल की टीडी पर 7.5 प्रतिशत का आकर्षक ब्याज दे रहा है।

    44,995 का फिक्स रिटर्न

    अगर कोई निवेशक 5 साल की टीडी स्कीम में ₹1,00,000 जमा करता है, तो मैच्योरिटी पर उसे कुल ₹1,44,995 मिलते हैं। यानी सीधे ₹44,995 का फिक्स ब्याज। मौजूदा हालात में देश का कोई भी बड़ा बैंक 5 साल की एफडी पर इतना हाई ब्याज दर नहीं दे रहा है। यही वजह है कि पोस्ट ऑफिस की यह स्कीम निवेशकों के बीच तेजी से फेमस हो रही है।

    सभी निवेशकों को समान ब्याज

    डाकघर की टीडी स्कीम का एक और अहम पहलू यह है कि इसमें सभी आयु वर्ग के निवेशकों को समान ब्याज दर मिलती है। हालांकि, बैंकों की तरह इसमें वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक्स्ट्रा ब्याज का लाभ नहीं दिया जाता। इसके बावजूद, सरकारी गारंटी और स्थिर रिटर्न इसे सुरक्षित निवेश चाहने वालों के लिए बेहतरीन ऑप्शन बनाता है।

    ब्याज दरों पर सरकारी कंट्रोल

    खास बात यह भी है कि डाकघर की बचत योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों की समीक्षा हर तीन महीने में की जाती है और इन्हें वित्त मंत्रालय द्वारा कंट्रोल किया जाता है। इससे निवेशकों को यह भरोसा रहता है कि उनका पैसा सुरक्षित हाथों में है।

  • Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग

    Budget 2026: रेलवे में आम आदमी की उम्मीदों पर नजर, सस्ती टिकट और बेहतर सेवाओं की मांग


    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई सुविधा भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

    रेलवे की शिकायतों की सूची लंबी है। ट्रेनों में सफाई व्यवस्था कमजोर है पैंट्री कार का खाना क्वालिटी में अधूरा है बोतलबंद पानी और अन्य सामान की कीमत अधिक वसूली जाती है। गंदे टॉयलेट पानी की कमी स्टेशन और ट्रेन में चोरी और कभी-कभार दुर्घटनाएं यात्रियों की चिंता बढ़ाती हैं। बजट से उम्मीद है कि इन बुनियादी समस्याओं के सुधार के लिए पर्याप्त फंड आवंटित होगा।रेल विशेषज्ञों का मानना है कि नई और तेज रफ्तार ट्रेनों से पहले ट्रैक और सिग्नल सिस्टम को मजबूत करना जरूरी है। कई रूट्स पर ट्रैक की हालत ऐसी है कि ट्रेनें घोषित स्पीड पर नहीं चल पातीं। बजट 2026 में ट्रैक अपग्रेडेशन सेफ्टी सिस्टम और मेंटेनेंस पर खर्च बढ़ने की संभावना है।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2026 को रेलवे के लिए रिफॉर्म ईयर बताया है। उनका दावा है कि साल के 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाएंगे। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री के पूर्व जीएम सुधांशु मणि का कहना है कि पहले बजट आम आदमी की जेब और जरूरतों पर केंद्रित होता थानई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। इस बार बजट में रेलवे सेवाओं को लेकर यात्रियों की उम्मीदें बढ़ी हैं। करोड़ों लोगों की नजर है कि क्या बजट में आम आदमी की जेब और उनकी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रीमियम ट्रेनों और बड़े निवेशों के बावजूद आम यात्री आज भी सफाई, सुविधा, भीड़ और समयबद्धता जैसी समस्याओं से असंतुष्ट है।

    रेल यात्री चाहते हैं कि कन्फर्म टिकट सस्ती दरों पर उपलब्ध हों और वेटिंग लिस्ट की समस्या कम हो। इसके साथ ही लोकल और मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की समयबद्धता सुधारने की उम्मीद है। यात्रियों का कहना है कि प्रीमियम ट्रेनों की तुलना में आम ट्रेनों की सेवाओं में सुधार जरूरी है।

  • ₹12.5 करोड़ की लग्जरी घड़ी लॉन्च, वनतारा को समर्पित खास डिज़ाइन..

    ₹12.5 करोड़ की लग्जरी घड़ी लॉन्च, वनतारा को समर्पित खास डिज़ाइन..


    नई दिल्ली ।लग्जरी घड़ियों की दुनिया में एक बार फिर शिल्पकला और नवाचार का अनोखा उदाहरण देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय वॉच ब्रांड जैकब एंड कंपनी ने 21 जनवरी को अपनी नई एक्सक्लूसिव टाइमपीस ओपेरा वनतारा ग्रीन कैमो को लॉन्च किया। यह घड़ी गुजरात में स्थित अनंत अंबानी के महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास प्रोजेक्ट वनतारा को समर्पित है। सीमित संस्करण में तैयार की गई इस घड़ी की कीमत करीब 1.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 12.5 करोड़ रुपये आंकी गई है।

    इस लग्जरी वॉच का सबसे आकर्षक पहलू इसका थिएटर-स्टाइल डायल है। डायल के भीतर बेहद बारीक कारीगरी से बनाई गई मिनिएचर आकृतियां लगाई गई हैं। इनमें नीली फ्लोरल शर्ट पहने अनंत अंबानी की मूर्ति प्रमुख रूप से दिखाई देती है। उनके साथ एक शेर और एक बंगाल टाइगर की सूक्ष्म आकृतियां भी शामिल हैं, जो वनतारा परियोजना की आत्मा और वन्यजीव संरक्षण की भावना को दर्शाती हैं। डायल में सोने से उकेरा गया हाथी और Vantara नाम भी शामिल किया गया है, जो इस घड़ी को प्रतीकात्मक पहचान देता है।

    डिजाइन को जंगल से प्रेरित लुक देने के लिए इसमें ग्रीन कैमुफ्लाज मोटिफ का उपयोग किया गया है। घड़ी में कुल 397 कीमती रत्न जड़े गए हैं, जिनका कुल वजन लगभग 21.98 कैरेट है। इनमें डिमेंटोइड गार्नेट, सावोराइट्स, हरे रंग के नीलम और सफेद हीरे शामिल हैं। इन रत्नों की बारीक सजावट घड़ी को एक विशिष्ट और बेहद प्रीमियम पहचान देती है।

    तकनीकी दृष्टि से भी यह घड़ी बेहद खास मानी जा रही है। यह जैकब एंड कंपनी के प्रतिष्ठित ओपेरा कलेक्शन का हिस्सा है, जिसमें जटिल म्यूजिकल मैकेनिज्म दिया गया है। बटन दबाते ही घड़ी से धुन निकलती है और उसी के साथ पूरा डायल अनंत अंबानी, शेर और बाघ की आकृतियों सहित घूमने लगता है। घड़ी निर्माण की दुनिया में म्यूजिक और रोटेटिंग मैकेनिज्म का यह संयोजन अत्यंत दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

    जिस वनतारा प्रोजेक्ट से यह घड़ी प्रेरित है, वह गुजरात के जामनगर में रिलायंस के रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के भीतर फैला लगभग 3500 एकड़ का विशाल वन्यजीव पुनर्वास केंद्र है। इसका उद्घाटन मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यहां डेढ़ लाख से अधिक पशुओं की देखभाल की जाती है और हाथियों के लिए विशेष अस्पताल के साथ MRI और CT स्कैन जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक अत्याधुनिक वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल भी स्थापित किया गया है।कुल मिलाकर ओपेरा वनतारा ग्रीन कैमो केवल एक महंगी लग्जरी घड़ी नहीं बल्कि कला तकनीक और वन्यजीव संरक्षण के संदेश को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का एक प्रतीक बनकर सामने आई है।

  • छोटी आदतें जो तनाव कम कर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएं

    छोटी आदतें जो तनाव कम कर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाएं


    नई दिल्ली :तेज़ रफ्तार जिंदगी बढ़ता काम का दबाव और हर समय मोबाइल स्क्रीन से जुड़ी दिनचर्या ने मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर चुनौती बना दिया है। तनाव बेचैनी अनिद्रा और चिड़चिड़ापन अब किसी एक उम्र या पेशे तक सीमित नहीं रहे। ऐसे समय में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ माइंडफुलनेस को संतुलित जीवन के लिए बेहद जरूरी मान रहे हैं। माइंडफुलनेस कोई जटिल साधना या धार्मिक अभ्यास नहीं बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाई जा सकने वाली एक सरल और व्यवहारिक आदत है।

    क्या है माइंडफुलनेस और क्यों जरूरी
    माइंडफुलनेस का अर्थ है वर्तमान क्षण में पूरी जागरूकता के साथ जीना। यानी जो काम आप कर रहे हैं उसे बिना जल्दबाज़ी और बिना मन भटकाए पूरी चेतना के साथ करना। विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मल्टीटास्किंग और भविष्य की चिंता दिमाग को थका देती है। माइंडफुलनेस व्यक्ति को वर्तमान में टिके रहना सिखाती है जिससे तनाव कम होता है भावनात्मक संतुलन बढ़ता है और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।

    सुबह की शुरुआत से करें माइंडफुलनेस
    माइंडफुलनेस अपनाने के लिए अलग से लंबा समय निकालना जरूरी नहीं है। इसकी शुरुआत सुबह उठते ही की जा सकती है। जागने के बाद कुछ मिनट गहरी सांस लेकर अपने शरीर और मन की स्थिति को महसूस करना एक सरल अभ्यास है। इससे दिन की शुरुआत शांति और सजगता के साथ होती है।

    खाने में भी लाएं सजगता
    खाना खाते समय मोबाइल या टीवी से दूरी बनाना माइंडफुलनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भोजन के स्वाद बनावट और खुशबू पर ध्यान देने से न केवल पाचन बेहतर होता है बल्कि भोजन से संतुष्टि भी बढ़ती है। यह आदत अनावश्यक ओवरईटिंग को भी रोकने में मदद करती है।

    काम के दौरान माइंडफुल अप्रोच
    ऑफिस या घर से काम करने वाले लोग अक्सर एक साथ कई काम करने की कोशिश करते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एक समय में एक ही काम करें। ईमेल लिखते समय केवल उसी पर ध्यान दें और बीच बीच में छोटे ब्रेक लें। इससे मानसिक थकान कम होती है और कार्यक्षमता बढ़ती है।

    डिजिटल डिटॉक्स भी है जरूरी
    लगातार नोटिफिकेशन और सोशल मीडिया अपडेट दिमाग को बेचैन रखते हैं। माइंडफुलनेस के लिए डिजिटल संतुलन बेहद जरूरी है। दिन में कुछ समय के लिए फोन साइलेंट करना सोशल मीडिया से दूरी बनाना और सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना मानसिक शांति में सहायक होता है।

    चलते फिरते भी संभव है माइंडफुलनेस
    सुबह की वॉक या रोज़ के सफर को भी माइंडफुल बनाया जा सकता है। चलते समय अपने कदमों सांसों और आसपास के वातावरण पर ध्यान देना तनाव को कम करता है। यह अभ्यास खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनके पास योग या ध्यान के लिए लंबा समय नहीं होता।मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि माइंडफुलनेस कोई तात्कालिक समाधान नहीं बल्कि धीरे धीरे विकसित होने वाली आदत है। रोज़ कुछ मिनट का अभ्यास भी लंबे समय में मानसिक और भावनात्मक संतुलन को मजबूत करता है। बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक दबाव के दौर में माइंडफुलनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बनती जा रही है।

  • बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर

    बजट से पहले निवेशकों में सतर्कता, बैंकिंग और एनर्जी शेयर कमजोर


    नई दिल्ली :घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को गिरावट का रुख देखने को मिला। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली के दबाव में प्रमुख सूचकांक कमजोर नजर आए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 100 अंकों की गिरावट के साथ 82,250 के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 30 अंक फिसलकर 25,250 के स्तर पर बना रहा।
    बाजार की इस कमजोरी के पीछे बैंकिंग, एनर्जी और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों में दबाव को प्रमुख वजह माना जा रहा है।कारोबार के दौरान बैंकिंग सेक्टर के दिग्गज शेयरों में बिकवाली देखी गई, जिससे बाजार को कोई ठोस सहारा नहीं मिल सका। निजी और सरकारी दोनों बैंकों के शेयरों में दबाव बना रहा। इसके अलावा तेल गैस और ऊर्जा कंपनियों में मुनाफावसूली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। एफएमसीजी शेयरों में सुस्ती के चलते निवेशकों की धारणा कमजोर रही और व्यापक बाजार पर इसका असर साफ दिखाई दिया।

    बजट से पहले बाजार में असमंजस
    विशेषज्ञों का मानना है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले शेयर बाजार फिलहाल स्पष्ट दिशा के अभाव में है। निवेशक बड़े फैसले लेने से बच रहे हैं और सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इसी कारण आने वाले सत्रों में भी बाजार में उतार चढ़ाव बने रहने की संभावना जताई जा रही है।तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 25,000 का स्तर एक अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है। वहीं ऊपर की ओर 25,400 से 25,500 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ निवेशकों को फिलहाल केवल मजबूत फंडामेंटल वाले चुनिंदा लार्ज कैप शेयरों में ही निवेश की सलाह दे रहे हैं।

    ग्लोबल बाजारों से मिले मिले जुले संकेत
    जहां घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहा, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूती का रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 0.84 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,994 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। जापान का निक्केई भी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53,870 पर पहुंच गया।हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.29 प्रतिशत चढ़कर 26,706 के स्तर पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.27 प्रतिशत की तेजी के साथ 4,133 पर कारोबार कर रहा था। अमेरिकी बाजारों में भी गुरुवार को मजबूती देखने को मिली थी। डाउ जोंस 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ था, जबकि नैस्डेक कंपोजिट और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII बने सहारा
    निवेश प्रवाह की बात करें तो 22 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार में बिकवाली की। एफआईआई ने करीब 2,549 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 4,222 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को कुछ हद तक सहारा दिया।आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में एफआईआई ने कुल 34,350 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जबकि डीआईआई ने 79,620 करोड़ रुपये की मजबूत खरीदारी की थी। इससे साफ है कि घरेलू निवेशक बाजार में स्थिरता बनाए रखने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

    पिछले सत्र में दिखी थी तेजी
    इससे पहले गुरुवार को बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिली थी। सेंसेक्स 398 अंक की तेजी के साथ 82,307 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 132 अंक चढ़कर 25,290 के स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि बजट से पहले मौजूदा सत्र में बाजार ने फिर से सतर्क रुख अपना लिया है।कुल मिलाकर बजट से जुड़ी उम्मीदें और वैश्विक संकेत आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • 27 जनवरी को बैंक बंद? यूनियनों की हड़ताल का ऐलान, जानिए कर्मचारियों की मुख्य मांगें

    27 जनवरी को बैंक बंद? यूनियनों की हड़ताल का ऐलान, जानिए कर्मचारियों की मुख्य मांगें

    नई दिल्ली। Bank Unions Strike: पूरे देश में 27 जनवरी 2026 को बैंकिंग व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है. करीब आठ लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल करने वाले हैं. बैंक कर्मचारी पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं. इस आंदोलन में सरकारी, निजी, विदेशी, ग्रामीण और सहकारी बैंक सभी शामिल होंगे
    5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग है हड़ताल की वजह
    बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के पीछे सप्ताह में 5 दिनों की कार्य दिवस की मांग है. जिसे लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है. भारतीय बैंक संघ की ओर से यह प्रस्ताव पिछले दो साल से सरकार के पास लंबित है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है.

    यूनियनों के अनुसार, यह मांग 7 दिसंबर 2023 को यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस और भारतीय बैंक संघ के बीच हुए समझौते का हिस्सा थी. जिसे बाद में 8 मार्च 2024 के सेटलमेंट और जॉइंट नोट में भी दोहराया गया था.

    इस प्रस्ताव के तहत सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना काम का समय 40 मिनट बढ़ाने और सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने की बात कही गई है. यह मांग पूरी न होने के कारण बैंकों यूनियनों ने 27 जनवरी को पूरे देश में हड़ताल करने का फैसला लिया है.
    इन संगठनों ने दिया समर्थन
    देशभर में होने वाली यह हड़ताल यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के नेतृत्व में आयोजित की जा रही है. जो बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के नौ प्रमुख संगठनों का संयुक्त मंच है. इसमें ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन, इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस, नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स और नेशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स शामिल हैं.
    लगातार 4 दिन बंद रह सकते हैं बैंक

    जनवरी के आखिरी हफ्ते में ग्राहकों को बैंक से जुड़े कामों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. लगातार चार दिन बैंक बंद रहने की संभावना है. 24 जनवरी को चौथा शनिवार होने की वजह से बैंक बंद रहने वाले हैं. वहीं, 25 जनवरी को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी होगी.

    26 जनवरी को गणतंत्र दिवस और 27 जनवरी को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं. ऐसे में लोगों को पहले से अपनी बैंक के प्लान बना लेने की सलाह दी जा रही है.

  • शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार

    शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी: सेंसेक्स 850 अंक उछलकर 82,750 पर, निफ्टी 25,400 के पार


    नई दिल्ली। गुरुवार, 22 जनवरी को घरेलू शेयर बाजार ने पिछले तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद दमदार वापसी की। शुरुआती कारोबार से ही बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला और सेंसेक्स करीब 850 अंकों की छलांग लगाकर 82,750 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी में भी लगभग 250 अंकों की तेजी रही और यह 25,400 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर कारोबार करता नजर आया। इस उछाल ने निवेशकों को बड़ी राहत दी और बाजार में दोबारा भरोसे का माहौल बना।

    बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे, जबकि केवल 2 शेयरों में हल्का दबाव रहा। जोमैटो, एशियन पेंट्स और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया SBI के शेयरों में 4 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार की चौड़ाई मजबूत रही और तेजी व्यापक आधार पर दिखाई दी।

    बाजार में इस मजबूती के पीछे सबसे अहम भूमिका ग्लोबल संकेतों की रही। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले सकारात्मक रुझानों ने घरेलू निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयानों ने भी बाजार की चिंता को कम किया। ट्रम्प द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर टैरिफ लगाने की धमकी वापस लेने और नाटो देशों के साथ बातचीत के संकेत देने से भू-राजनीतिक तनाव को लेकर आशंकाएं घटी हैं। इसके अलावा भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर उनके सकारात्मक रुख से निवेशकों में भरोसा बढ़ा है।एशियाई बाजारों की बात करें तो वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.77 प्रतिशत की तेजी के साथ 53,706 पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.87 प्रतिशत चढ़कर 5,001 के स्तर पर पहुंच गया। हालांकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स हल्की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। अमेरिकी बाजारों में भी मजबूती का असर दिखा, जहां 21 जनवरी को डाउ जोंस 1.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था।

    निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs ने 1,787 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने 4,520 करोड़ रुपये की जोरदार खरीदारी कर बाजार को मजबूत सहारा दिया। दिसंबर 2025 में FIIs की भारी बिकवाली के बावजूद DIIs की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा है।गौरतलब है कि बुधवार को बाजार दबाव में रहा था। उस दिन सेंसेक्स 270 अंक गिरकर 81,909 पर और निफ्टी 75 अंक टूटकर 25,157 पर बंद हुआ था। लेकिन गुरुवार की तेजी ने संकेत दिया है कि बाजार में रिकवरी की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक ग्लोबल संकेतों, भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी खबरों और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करेगी।