Category: Economy

  • Zomato अपडेट: दीपिंदर गोयल की विदाई, कंपनी की कमान अब इस शख्स के हाथों में

    Zomato अपडेट: दीपिंदर गोयल की विदाई, कंपनी की कमान अब इस शख्स के हाथों में

    नई दिल्ली।  Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने कंपनी में ग्रुप CEO का पद छोड़ने का फैसला किया है। इस बदलाव की घोषणा Eternal ने बड़ी लीडरशिप स्ट्रक्चर में बदलाव के तहत की। शेयरहोल्डर की मंज़ूरी मिलने के बाद गोयल ने पद छोड़ दिया और अब तुरंत प्रभाव से अलबिंदर ढींडसा को नया ग्रुप CEO नियुक्त किया गया है।

    क्यों छोड़ा दीपिंदर ने पद?

    दीपिंदर गोयल का कहना है कि वे अब नई चीज़ों को आज़माना चाहते हैं, जिसमें अधिक रिस्क लेना शामिल है। उनका मानना है कि Eternal जैसी पब्लिक कंपनी में स्ट्रक्चर के बाहर ही ऐसे कदम बेहतर तरीके से लिए जा सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि कंपनी को ऐसी लीडरशिप की ज़रूरत है जो मुख्य बिज़नेस पर फोकस करे और अनुशासित ढंग से कंपनी को आगे बढ़ाए।

    अलबिंदर ढींडसा: नए CEO की प्रोफ़ाइल

    दीपिंदर गोयल की जगह अब अलबिंदर ढींडसा यानी अल्बी कंपनी के ग्रुप CEO के तौर पर जिम्मेदार होंगे। ढींडसा कंपनी की ऑपरेटिंग प्राथमिकताओं और बिज़नेस से जुड़े सभी अहम फैसलों को संभालेंगे। उनकी लीडरशिप में ब्लिंकिट को ब्रेक-ईवन तक लाने और इसे टॉप प्रायोरिटी बनाए रखने के अनुभव को देखा गया है।

    अलबिंदर की नई भूमिका और जिम्मेदारियां

    अलबिंदर ढींडसा के नेतृत्व में Zomato की रणनीति और बिज़नेस फैसलों की दिशा स्पष्ट होगी। वे ऑपरेटिंग टीम के साथ मिलकर कंपनी के मुख्य लक्ष्यों पर फोकस करेंगे और नई योजनाओं को कार्यान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दीपिंदर गोयल का यह कदम कंपनी में नए नेतृत्व के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, जबकि वे खुद नई रिस्क और प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

  • फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज

    फोनपे के ₹12,000 करोड़ IPO को SEBI की मंजूरी, डिजिटल पेमेंट सेक्टर में लिस्टिंग की तैयारी तेज


    नई दिल्ली। डिजिटल भुगतान और यूपीआई सेवाओं की अग्रणी कंपनी फोनपे को अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम IPO के लिए SEBI से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही कंपनी अब अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस DRHP दाखिल करने की तैयारी में है। अनुमान है कि फोनपे का यह IPO लगभग ₹12,000 करोड़ का होगा, जो भारतीय शेयर बाजार में डिजिटल पेमेंट सेक्टर की मौजूदगी को और मजबूत करेगा।

    इस IPO में कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS के जरिए लाया जाएगा, यानी कंपनी के मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का हिस्सा बेचेंगे। कंपनी की अनुमानित वैल्यूएशन 15 बिलियन डॉलर लगभग ₹1.33 लाख करोड़ आंकी गई है। यह पेटीएम के ₹18,000 करोड़ IPO के बाद डिजिटल पेमेंट सेक्टर का भारत का दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम होगा।

    IPO के जरिए वॉलमार्ट, टाइगर ग्लोबल और माइक्रोसॉफ्ट जैसे निवेशक अपनी संयुक्त हिस्सेदारी का लगभग 10% बेच सकते हैं। वर्तमान में वॉलमार्ट का शेयर फोनपे में 73% से अधिक है। IPO प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए कंपनी ने कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटीग्रुप, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे प्रमुख निवेश बैंकों को सलाहकार नियुक्त किया है।फोनपे की सबसे बड़ी ताकत उसका UPI कारोबार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डिजिटल भुगतान बाजार में फोनपे की हिस्सेदारी लगभग 45% है, जबकि गूगल पे के पास 35% की हिस्सेदारी है। फोनपे हर महीने लगभग 1,000 करोड़ लेनदेन प्रोसेस करता है, जिनका कुल मूल्य ₹12 लाख करोड़ से अधिक है। कंपनी के पास 53 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं।

    फोनपे ने इस साल 16 अप्रैल 2025 को खुद को प्राइवेट से पब्लिक लिमिटेड कंपनी में बदला, जो शेयर बाजार में लिस्टिंग के लिए जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले दिसंबर 2022 में कंपनी ने अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित किया था और अपने नॉन-पेमेंट कारोबार को अलग सब्सिडियरी में विभाजित किया था।विशेषज्ञों का मानना है कि यह IPO डिजिटल पेमेंट सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा। DRHP दाखिल होने के बाद इश्यू की समयसीमा, मूल्य निर्धारण और निवेशकों की रुचि के बारे में और स्पष्टता सामने आएगी। वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और भारतीय फिनटेक सेक्टर की परिपक्वता को देखते हुए यह इश्यू पब्लिक और संस्थागत निवेशकों दोनों के लिए आकर्षक अवसर होगा।

  • 2025 की रियल एस्टेट रिपोर्ट: MMR रीजन में सबसे ज्यादा जमीनों के सौदे, देश में कुल 126 ट्रांज़ैक्शन हुए

    2025 की रियल एस्टेट रिपोर्ट: MMR रीजन में सबसे ज्यादा जमीनों के सौदे, देश में कुल 126 ट्रांज़ैक्शन हुए

    नई दिल्ली। भारत में 2025 में कुल 126 जमीन सौदे संपन्न हुए, जिनमें सबसे अधिक सौदे मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में हुए। एनारॉक रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, एमएमआर में 500 एकड़ से अधिक जमीन के 32 सौदे दर्ज हुए। बेंगलुरु में भी 454 एकड़ से अधिक के 27 सौदे संपन्न हुए। हालांकि कुल सौदों की संख्या 2024 के मुकाबले कम रही, लेकिन संपन्न सौदों का वॉल्यूम बढ़ा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिल्डर्स का भरोसा देश के प्रमुख और उभरते रियल एस्टेट बाजारों में बना हुआ है।

    अविकसित और टियर 1, 2, 3 शहरों में सौदे
    रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में हुए 126 सौदों में 1,877 एकड़ जमीन के 96 सौदे आवासीय विकास के लिए हुए। ये सौदे टियर 1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में बंटे हुए हैं। एनारॉक समूह के अध्यक्ष अनुज पुरी के अनुसार, एमएमआर में नियोजित विकास परियोजनाओं में आवासीय, वाणिज्यिक, डेटा सेंटर, औद्योगिक और भूखंड विकास शामिल हैं। पूरे देश में 2025 में कुल मिलाकर 3,772 एकड़ से अधिक भूमि के 126 अलग-अलग सौदे संपन्न हुए।

    दिल्ली-एनसीआर और आसपास के शहरों में सौदे
    दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में आवासीय, वाणिज्यिक और मिश्रित उपयोग परियोजनाओं के लिए लगभग 137.22 एकड़ भूमि के 16 सौदे हुए। शहरों के हिसाब से गुरुग्राम में 39.75 एकड़ के 4 सौदे, नोएडा में 41.28 एकड़ के 8 सौदे, दिल्ली में 30.89 एकड़ के 2 सौदे, ग्रेटर नोएडा में 12 एकड़ का 1 सौदा, और गाजियाबाद में 13.3 एकड़ का 1 सौदा हुआ।

    रियल एस्टेट मार्केट में बढ़ता निवेश और विकास
    रिपोर्ट दर्शाती है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी 2025 में कुल 2,192.8 एकड़ भूमि के कम से कम 16 सौदे संपन्न हुए। यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि न केवल बड़े शहरों में बल्कि उभरते हुए शहरों में भी बिल्डर्स और निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में एमएमआर और बेंगलुरु में भूमि की कीमतों में तेजी आई है, लेकिन इससे डेवलपर्स प्रमुख और रणनीतिक संपत्तियों पर निवेश करने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

    निष्कर्ष: रियल एस्टेट में भरोसा और भविष्य की संभावना
    2025 के जमीन सौदों का विश्लेषण यह बताता है कि भारत के बड़े और उभरते शहरों में रियल एस्टेट मार्केट में निवेशक भरोसा मजबूत है। मुंबई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में बड़े सौदे संपन्न होने से यह भी संकेत मिलता है कि देश का रियल एस्टेट सेक्टर भविष्य में और अधिक विकास और आर्थिक अवसर प्रदान कर सकता है। टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी बढ़ती गतिविधियां निवेशकों के विश्वास और आवासीय व वाणिज्यिक परियोजनाओं के विस्तार की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।

  • शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में

    शेयर बाजार में कमजोरी जारी: सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी लाल निशान में



    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 21 जनवरी को कारोबार के दौरान कमजोरी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 100 अंक से अधिक गिरकर 82,000 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया जबकि निफ्टी करीब 30 अंक फिसलकर 25,200 के आसपास रहा। शुरुआती सत्र से ही बाजार पर वैश्विक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में बिकवाली का दबाव बना हुआ है।सेंसेक्स के 30 में से 16 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि 14 शेयर हरे निशान में रहे। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन रियल एस्टेट मीडिया और आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही। आईटी कंपनियों पर दबाव अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और डॉलर की मजबूती के कारण देखा गया।

    वैश्विक कारकों का असर घरेलू बाजारों पर साफ नजर आया। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.26% गिरकर 4,873 पर, जापान का निक्केई 0.56% टूटकर 52,693 पर हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.13% गिरकर 26,453 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 4,120 पर बंद हुआ अमेरिकी बाजारों में भी 20 जनवरी को भारी गिरावट दर्ज की गई थी। डाउ जोन्स 1.76% टूटकर 48,488 पर, नैस्डेक कंपोजिट में 2.39% और एसएंडपी 500 में 2.06% की गिरावट आई। इन कमजोर वैश्विक संकेतों का असर घरेलू बाजारों पर भी देखा गया।

    संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों की बात करें तो 20 जनवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों FII ने ₹2,191 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने ₹2,755 करोड़ की खरीदारी की जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला। दिसंबर 2025 में FIIs द्वारा ₹34,350 करोड़ की निकासी के मुकाबले DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था जिससे बाजार में संतुलन बना रहा।शैडोफैक्स टेक्नोलॉजीज IPO निवेशकों के रडार पर है। ₹118–₹124 के प्राइस बैंड वाला यह IPO कुल ₹1,907 करोड़ का है और 22 जनवरी तक खुला रहेगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट के पीछे कई कारण हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान वैश्विक अनिश्चितता और तीसरी तिमाही में कुछ बड़ी कंपनियों खासकर रिलायंस इंडस्ट्रीज के कमजोर नतीजे प्रमुख वजह माने जा रहे हैं।इस प्रकार निवेशकों को वैश्विक संकेतों और घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखते हुए सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

  • बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर

    बजट 2026 से पहले वित्त मंत्रालय ने गिनाईं उपलब्धियां, टैक्स सुधारों और बड़े ऐलानों पर डाली नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान करीब 300 अंक गिरकर 82950 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 25450 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों FIIs की लगातार बिकवाली के कारण आया।

    बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में से 24 शेयर नुकसान में रहे जबकि केवल 6 शेयरों में हल्की तेजी दर्ज हुई। कंज्यूमर टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। जोमैटो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट आई जिसने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    एशियाई बाजारों से भी अनुकूल संकेत नहीं मिले। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.22% गिरकर 52931 पर बंद हुआ हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.075% टूटकर 26543 पर रहा जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.30% गिरकर 4101 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 4905 पर बना रहा लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।

    अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। 16 जनवरी को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.17% गिरकर 49359 पर बंद हुआ। नैस्डेक और एसएंडपी-500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह नरमी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर रही है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 19 जनवरी को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3262 करोड़ की बिकवाली की जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने ₹4234 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने ₹34350 करोड़ की बिकवाली की थी जबकि DIIs ने ₹79620 करोड़ का निवेश किया था जिसने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।

    पिछले कारोबारी सत्र में भी सेंसेक्स 324 अंक गिरकर 83246 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी 108 अंक टूटकर 25585 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से अल्पकालिक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सरकारी अपडेट तथा राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक फिसला; निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट

    शेयर बाजार में दबाव, सेंसेक्स 300 अंक फिसला; निफ्टी में 100 अंकों की गिरावट

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। सेंसेक्स कारोबारी सत्र के दौरान करीब 300 अंक गिरकर 82950 के स्तर पर आ गया जबकि निफ्टी लगभग 100 अंकों की गिरावट के साथ 25,450 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार में यह दबाव मुख्य रूप से कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली के कारण आया।बीएसई के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स में से 24 शेयर नुकसान में रहे जबकि केवल 6 शेयरों में हल्की तेजी दर्ज हुई। कंज्यूमर टेक और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव देखा गया। जोमैटो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में 3 प्रतिशत तक गिरावट आई जिसने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव डाला।

    एशियाई बाजारों से भी अनुकूल संकेत नहीं मिले। जापान का निक्केई इंडेक्स 1.22% गिरकर 52931 पर बंद हुआ, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.075% टूटकर 26,543 पर रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 0.30% गिरकर 4,101 पर बंद हुआ। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स मामूली बढ़त के साथ 4,905 पर बना रहा, लेकिन इसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा।अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही। 16 जनवरी को डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.17% गिरकर 49,359 पर बंद हुआ। नैस्डेक और एसएंडपी-500 में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में यह नरमी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित कर रही है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 19 जनवरी को FIIs ने भारतीय शेयर बाजार से ₹3,262 करोड़ की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों DIIs ने ₹4,234 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया। दिसंबर 2025 में भी FIIs ने ₹34,350 करोड़ की बिकवाली की थी, जबकि DIIs ने ₹79,620 करोड़ का निवेश किया था, जिसने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया।

    पिछले कारोबारी सत्र में भी सेंसेक्स 324 अंक गिरकर 83,246 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 108 अंक टूटकर 25,585 पर बंद हुआ। लगातार गिरावट से अल्पकालिक निवेशकों में सतर्कता बढ़ी है।बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा, विदेशी निवेशकों का रुख और प्रमुख आर्थिक संकेतक बाजार की चाल तय करेंगे। फिलहाल निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में निवेश करने और सरकारी अपडेट तथा राष्ट्रीय-आंतरराष्ट्रीय खबरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

  • भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत

    भारतीय बाजारों की कमान अब घरेलू निवेशकों के हाथ… वैश्विक उथल-पुथल के बाद भी स्थिति मजबूत


    नई दिल्ली।
    रूसी तेल (Russian oil), वेनेजुएला (Venezuela), ईरान में प्रदर्शन (Iran protests) और ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा हर थोड़े समय बाद इन मुद्दों से शेयर बाजार (Stock market) सहमे हैं। इन सबके बीच भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिल रही। हालांकि कुछ सेक्टर में गिरावट है, स्मॉल कैप और मिड कैप में मुनाफावसूली चल रही है लेकिन सूचकांक इस गिरावट को दर्शा नहीं रहे हैं। इस संबंध में बाजार विशेषज्ञ अनुज गुप्ता से सवाल किए गए। पेश हैं उनके जवाब-

    विदेशियों की तेज बिकवाली से भी बाजार क्यों नहीं टूटा?
    अब भारतीय शेयर बाजार पूरी तरह विदेशी निवेशकों पर निर्भर नहीं है। घरेलू संस्थागत निवेशक-जैसे म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियां और ईपीएफओ लगातार खरीदारी कर रहे हैं। एसआईपी के जरिए बढ़ती रिटेल भागीदारी से हर महीने आने वाला स्थायी निवेश विदेशी बिकवाली की भरपाई कर देता है।

    क्या भारतीय शेयर बाजार अब घरेलू निवेशकों से चल रहा है?
    हां, काफी हद तक। पहले बाजार विदेश निवेशकों के मूड पर निर्भर रहता था, लेकिन अब घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ गई है। यही वजह है कि विदेशी बिकवाली का असर सीमित दिखता है। भारतीय बाजार का ढांचा बदल रहा है- देसी संस्थानों की हिस्सेदारी रिकॉर्ड पर है, एसआईपी से रिटेल निवेश साल-दर-साल बढ़ रहा, बाजार में लंबी अवधि का पैसा ज्यादा आ रहा है।

    ज्यादातर शेयर गिर रहे हैं, फिर भी निफ्टी-सेंसेक्स क्यों टिके हैं?
    निफ्टी और सेंसेक्स कुछ बड़ी कंपनियों पर आधारित हैं। इन बड़े शेयरों का अधिमान इतना ज्यादा होता है कि अगर वे स्थिर रहें, तो सूचकांक भी स्थिर रहते हैं, चाहे बाकी शेयर गिर रहे हों। सूचकांकों की हकीकत यह है कि निफ्टी के शीर्ष 10 शेयरों का अधिमान 60% है, इसमें बैंक और आईटी सेक्टर का दबदबा है और छोटे शेयरों का असर सीमित है।

    सूचकांक में गड़बड़ी हो रही है?
    नहीं, इसे सूचकांक प्रबंधन कहना सही नहीं है। यह सूचकांकों की बनावट का असर है। कुछ गिने-चुने बड़े शेयर पूरे सूचकांकों की दिशा तय करते हैं। यह ‘खेल’ संभव नहीं है क्योंकि सूचकांकों के नियम तय और पारदर्शी होते हैं, उनका अधिमान पहले से निर्धारित है, कोई रोज इनके उतार-चढ़ाव को नियंत्रित नहीं कर सकता।

    तो क्या बाजार की असली हालत सूचकांक इंडेक्स नहीं दिखा रहे?
    पूरी तरह नहीं। सूचकांक दिशा दिखाते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात नहीं। इस समय गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वालों से ज्यादा है, यानी बाजार के भीतर करेक्शन चल रहा है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर ज्यादा क्यों टूट रहे हैं?
    इन शेयरों में पहले बहुत तेज तेजी आई थी। मूल्याकंन महंगे हो गए थे, इसलिए निवेशक अब मुनाफावसूली कर रहे हैं। साथ ही जोखिम से बचने की प्रवृत्ति भी बढ़ी है।

    खुदरा निवेशकों की भूमिका कितनी अहम है?
    बहुत अहम। करोड़ों रिटेल निवेशक एसआईपी के जरिए हर महीने निवेश कर रहे हैं। यह पैसा बाजार को स्थिरता देता है।

  • SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?

    SBI Home Loan: ₹40 लाख का लोन लेने के लिए कितनी होनी चाहिए सैलरी, EMI कितनी आएगी?


    नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक SBI ने होम लोन की शुरुआती ब्याज दर 7.25 प्रतिशत रखी है। रिजर्व बैंक की रेपो रेट में कटौती के बाद होम लोन की ब्याज दरें कम हुई हैं, जिससे EMI पर बोझ घटा है। अगर आप SBI से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने की सोच रहे हैं तो जानना जरूरी है कि आपकी मंथली सैलरी कितनी होनी चाहिए और EMI कितनी लगेगी।₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए मंथली सैलरी

    SBI के मुताबिक 7.25% की ब्याज दर से 30 साल के लिए ₹40 लाख का होम लोन लेने के लिए आपकी मंथली सैलरी कम से कम ₹55,000 होनी चाहिए।ध्यान दें कि यह तभी संभव है जब आपके नाम पर कोई अन्य एक्टिव लोन न हो।

    EMI का हिसाब
    30 साल 360 महीने के लिए ₹40 लाख के होम लोन पर मासिक EMI लगभग ₹27,500 होगी। होम लोन की EMI आमतौर पर आपकी सैलरी का लगभग आधा हिस्सा होती है।

    क्रेडिट स्कोर और अन्य जरूरी बातें
    होम लोन लेने के लिए आपका क्रेडिट स्कोर अच्छा होना जरूरी है। खराब क्रेडिट स्कोर होने पर बैंक आवेदन रिजेक्ट कर सकता है।बैंक आपके पुराने लोन अकाउंट और भुगतान इतिहास की भी जांच करता है।अच्छे क्रेडिट स्कोर पर ब्याज दर में छूट भी मिल सकती है।बेहतर ऑफर पाने के लिए अलग-अलग बैंकों के लोन प्रोडक्ट्स की तुलना करना फायदेमंद है।SBI का नया होम लोन प्लान उन लोगों के लिए आकर्षक है जो लंबी अवधि के लिए बड़ा लोन लेना चाहते हैं और अपनी EMI को नियंत्रित रखना चाहते हैं।

  • डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    डव सॉफ्ट लिमिटेड ने लॉन्च किया CPaaS 2.0, एआई-संचालित मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म

    मुंबई। डव सॉफ्ट लिमिटेड, एक तेजी से बढ़ता क्लाउड-कम्युनिकेशन्स और CPaaS प्रदाता, ने CPaaS 2.0 के लॉन्च की घोषणा की है। यह एआई-संचालित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म उद्यमों को यूनिफाइड कम्युनिकेशन इकोसिस्टम के माध्यम से ग्राहक जुड़ाव को सरल, स्वचालित और स्केल करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    CPaaS 2.0 व्हाट्सएप, एसएमएस, आरसीएस, इंस्टाग्राम, वॉयस, ईमेल और एआई-संचालित बॉट्स को एक ही प्लेटफॉर्म पर यूनिफाइड वॉलेट द्वारा संचालित है। यह इंटीग्रेटेड अप्रोच बिलिंग को सरल बनाता है, पारदर्शिता बढ़ाता है और व्यवसायों को एक केंद्रीकृत डैशबोर्ड के माध्यम से स्केल पर कम्युनिकेशन मैनेज करने में सक्षम बनाता है।
    प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का उपयोग करके नियमित ग्राहक इंटरैक्शन्स को स्वचालित करता है, रिस्पॉन्स टाइम में सुधार करता है और चैनल उपयोग, परफोर्मेंस मेट्रिक्स तथा वॉलेट खपत में वास्तविक समय की दृश्यता प्रदान करता है। इसके वर्कफ्लो स्वचालित रूप से सबसे इफेक्टिव कम्युनिकेशन चैनल का चयन करते हैं, जिससे उद्यम लागतों को अनुकूलित कर सकें, जबकि प्राथमिक चैनल विफल होने पर बिल्ट इन फॉलबैक लॉजिक के माध्यम से मैसेज डिलीवरी सुनिश्चित होता है।
    CPaaS 2.0 दैनिक बिज़नेस कम्युनिकेशन को समर्थन देने के लिए एआई-सक्षम उपयोगिता टूल्स का एक सूट भी पेश करता है। इनमें सर्वे, कैलेंडरिक्स, सपोर्टिक्स, वॉयसएक्स, रिमाइंडरबॉक्स, डायनामिक पीडीएफ और डॉकएआई शामिल हैं, जो उद्यमों को फीडबैक कलेक्शन, अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग, कस्टमर सपोर्ट, वॉयस एंगेजमेंट, रिमाइंडर और पसंदीदा चैनलों पर पर्सनलाइज्ड दस्तावेज़ डिलीवरी को स्वचालित करने में सक्षम बनाते हैं।
    उन्नत उद्यम आवश्यकताओं के लिए, CPaaS 2.0 व्यवसायों को अपना खुद का एजेंटिक एआई बनाना संभव बनाता है, जो दोहराव वाले प्रश्नों को संभाल सकता है, सहायता टीमों की मदद कर सकता है और वर्कफ्लो को स्वचालित कर सकता है। एआई-सहायता प्राप्त एजेंट्स को सुझाए गए उत्तर, वार्तालाप सारांश और बुद्धिमान रूटिंग के साथ समर्थन प्रदान किया जाता है, जो स्केल पर उत्पादकता और ग्राहक अनुभव में सुधार करने में मदद करता है।
    लॉन्च पर टिप्पणी करते हुए, राहुल भानुशाली, निदेशक, डव सॉफ्ट लि., ने कहा, “CPaaS 2.0 के साथ, फोकस व्यवसायों को कम्युनिकेशन को सरल बनाने में मदद करने पर है, जबकि एआई का उपयोग संचालन दक्षता और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाता है। यह प्लेटफॉर्म कई चैनलों, बुद्धिमान वर्कफ्लो और एआई-संचालित टूल्स को इस तरह एक साथ लाता है जो जटिलता को कम करता है और उद्यमों के लिए स्केलेबल विकास को समर्थन देता है।”
    डव सॉफ्ट लिमिटेड प्लेटफॉर्म नवाचार, सुरक्षा और बुद्धिमत्ता-आधारित संचार क्षमताओं में निवेश करना जारी रखे हुए है। कंपनी उद्यमों, टेलीकॉम ऑपरेटरों और तकनीकी भागीदारों के साथ निकट सहयोग कर रही है ताकि विकसित होते व्यवसाय संचार आवश्यकताओं का समाधान किया जा सके। इसके समाधान मिशन-क्रिटिकल उपयोग मामलों का समर्थन करने के लिए बनाए गए हैं, जहां विश्वसनीयता, अनुपालन, पारदर्शिता और विश्वास सर्वोपरि हैं, भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों दोनों में।

  • सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!

    सस्ते कार लोन की दौड़: सरकारी बैंक दे रहे 7.50% से भी कम दर पर ऑफर!


    नई दिल्ली। अगर आप नई कार खरीदने के लिए ₹12 लाख का लोन लेने की सोच रहे हैं और सबसे कम ब्याज दर पर EMI चाहते हैं, तो कुछ सरकारी बैंक (Public Sector Banks) अभी भी सबसे बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं। जनवरी 2026 में कई प्रमुख सरकारी बैंकों ने कार लोन की ब्याज दरें 7.40% से शुरू रखी हैं, खासकर अच्छे CIBIL स्कोर वाले ग्राहकों के लिए। हालांकि वास्तविक ब्याज दर आपकी क्रेडिट प्रोफाइल, CIBIL स्कोर और बैंक संबंध पर निर्भर करेगी। सबसे सस्ती दर आम तौर पर उन्हीं ग्राहकों को मिलती है जिनका सिबिल स्कोर शानदार होता है।

    इन बैंकों की खास बात यह है कि वे प्री-पेमेंट पेनल्टी भी नहीं वसूल रहे हैं, यानी आप चाहें तो पहले भी लोन चुका सकते हैं बिना अतिरिक्त शुल्क के। कम ब्याज दर का फायदा यह होता है कि न सिर्फ मासिक EMI कम होगी, बल्कि कुल ब्याज भुगतान भी काफी बच जाएगा।

    सबसे पहले इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का नाम आता है, जो नई कार के लिए 7.60% सालाना ब्याज दर पर लोन दे रहा है। बैंक की सुविधा के अनुसार यह लोन 84 महीने (7 साल) में चुकाया जा सकता है।

    इस लोन में पति/पत्नी, बेटा, बेटी, पिता, माता आदि की इनकम जोड़कर लोन की पात्रता बढ़ाई जा सकती है।

    दूसरा बैंक है केनरा बैंक, जो कार या व्हीकल लोन पर 7.95% सालाना दर पर लोन दे रहा है। यहां लोन की कोई ऊपरी सीमा नहीं है और नई गाड़ी के लिए 90% तक फाइनेंसिंग उपलब्ध है। इसके साथ ही, केनरा बैंक भी प्री-पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूलता। इसके अलावा, इस बैंक से आप दूसरी और की गाड़ियों के लिए भी फाइनेंसिंग ले सकते हैं।

    तीसरा विकल्प है यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जहां कार लोन की शुरुआती दर 7.50% है। यदि आपका सिबिल स्कोर अच्छा है और बाकी पात्रता पूरी होती है, तो आपको इतनी सस्ती दर पर लोन मिल सकता है।

    नई चार पहिया गाड़ी खरीदने पर इस बैंक में ₹1000 + GST प्रोसेसिंग फीस देनी होती है।

    चौथा बैंक है बैंक ऑफ इंडिया (BOI), जो 7.60% की शुरुआती ब्याज दर पर नई कार लोन दे रहा है। इस बैंक में ब्याज Daily Reducing Balance के आधार पर लिया जाता है, यानी हर घटते बैलेंस पर ब्याज कम होता जाता है। प्रोसेसिंग चार्ज लोन अमाउंट का 0.25% तक हो सकता है, जो ₹2,500 से ₹10,000 के बीच तय होता है। अगर आप इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीद रहे हैं, तो प्रोसेसिंग फीस में 50% की छूट भी मिलती है।

    अब अगर आप यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से ₹12 लाख का कार लोन 4 साल (48 महीने) के लिए लेते हैं, तो 7.50% की शुरुआती दर पर EMI की गणना के अनुसार आपकी मंथली EMI ₹29,014.68 बनेगी। इस लोन पर कुल ₹1,92,704.75 ब्याज देना होगा और आप बैंक को कुल ₹13,92,704.75 चुकाएंगे।

    इन सरकारी बैंकों के ऑफर खासकर उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद हैं जिनका CIBIL स्कोर अच्छा है और वे कम ब्याज दर पर EMI लेकर कार खरीदना चाहते हैं।