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  • डॉलर के आगे कमजोर पड़ा रुपया, पहली बार 94 के पार, जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट ?

    डॉलर के आगे कमजोर पड़ा रुपया, पहली बार 94 के पार, जानिए क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट ?


    नई दिल्ली। भारतीय करेंसी में गिरावट का सिलसिला जारी है और शुक्रवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। पहली बार रुपया 94 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान यह 94.84 तक फिसल गया, जबकि दिन के अंत में 94.81 पर बंद हुआ।

    विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में अब तक रुपया करीब 11 प्रतिशत कमजोर हो चुका है। यह गिरावट पिछले एक दशक में किसी भी वित्त वर्ष की तुलना में सबसे अधिक मानी जा रही है।

    रुपये में गिरावट के प्रमुख कारण

    विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रुपये पर दबाव बना रहा है। जानकारों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रह सकता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और इसका सीधा असर करेंसी पर पड़ रहा है।

    विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकालना भी एक बड़ी वजह है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक महीने में करीब 13 अरब डॉलर की निकासी की गई है, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ा है।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भी स्थिति को और कमजोर किया है। युद्ध शुरू होने के बाद से रुपया करीब 4 फीसदी तक गिर चुका है। इस अनिश्चित माहौल ने निवेशकों के भरोसे को भी प्रभावित किया है।

    आगे क्या रह सकता है रुख?

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जब तक ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव कम नहीं होता, तब तक रुपये में बड़ी मजबूती की संभावना कम है। हालांकि सरकार अपने स्तर पर स्थिति संभालने की कोशिश कर रही है।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का फैसला लिया है, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, इससे सरकारी राजस्व पर दबाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

  • गोल्ड की कीमतों में जोरदार तेजी, चांदी रही सुस्त—जानिए बाजार का हाल

    गोल्ड की कीमतों में जोरदार तेजी, चांदी रही सुस्त—जानिए बाजार का हाल


    नई दिल्ली विश्वव्यापी और कच्चे तेल की सीमा में गिरावट के बीच इस सप्ताह सोने ने शानदार वापसी की। सोने की कीमत में करीब 5.77% की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी में हल्की गिरावट देखने को मिली। बाजार में रिलीज- विज्ञापन के बावजूद सोने का टिकाऊ मजबूत बना हुआ है।

    बाबक्स पर क्या चल रहा है?

    शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एमसीएक्स) पर गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स में 0.15% की बढ़ोतरी हुई और यह करीब 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। वहीं मई सिल्वर फ्यूचर्स 0.09% ग्रुप करीब 2,27,750 रुपए प्रति किराए पर कारोबार करता है।

    लैपटॉपजे के आंकड़े में भी तेजी से साफ

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 999 करोड़ रुपये वाले सोने का भाव शुक्रवार को 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जो सप्ताह की शुरुआत में 1,35,141 रुपये था। यानी पूरे सप्ताह में मजबूत उछाल देखने को मिला।

    क्यों टूटे सोने के दाम? समझें कारण

    वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के सुरक्षित निवेश के विशेष रूप से सोने की मांग की गारंटी
    कॉन्स्टेबल सोने की दुकान सेंट्रल द्वारा
    कच्चे तेल की उपज से उपज का दबाव कुछ कम हुआ

    हालाँकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बोल्ड बॉन्ड यील्ड ने बीच-बीच में सोने की तेजी को तोड़ने की भी कोशिश की।

    कच्चे तेल की गिरावट का असर

    ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत इस सप्ताह करीब 120 डॉलर से बढ़कर 93 डॉलर प्रति शेयर तक बढ़ गई। इसी तरह की संगति को लेकर चिंता कुछ कम हुई और सोने को गुड़िया स्तर से शुरू करने में मदद मिली।

    आगे क्या ट्रेंड?

    विशेषज्ञ के अनुसार, प्रमाणन गोल्ड के लिए 1,36,000-1,40,000 रुपये का स्तर मजबूत समर्थन माना जाता है, जबकि 1,55,000-1,60,000 रुपये के बीच मजबूत समर्थन है।

    आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की स्थिति, कच्चे तेल के बांध और केंद्रीय बैंकों के न्याय बाजार की दिशा तय होगी। रिलीज़- अपलोड जारी रह सकता है, लेकिन लॉन्ग स्टार में सोने की स्टोरेज जारी रह सकती है।

    सुरक्षित निवेश वास्तव में विश्वसनीय बना हुआ है

    विश्वसनीयता के बीच गोल्ड एक बार फिर से अन्नू की पहली पसंद बनी दिख रही है, जबकि सिल्वर इंडिकेटेड आइटम में बिजनेस कर रही है।

  • ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित

    ऊर्जा सेक्टर में बूस्ट: Coal India का 3,300 करोड़ का निवेश, 8 नई वाशरी स्थापित


    नई दिल्ली। देश की प्रमुख कोयला कंपनी Coal India Limited ने कोकिंग कोल की गुणवत्ता सुधारने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए बड़ा निवेश ऐलान किया है। कंपनी करीब 3,300 करोड़ रुपये खर्च कर 8 नई कोकिंग कोल वॉशरियां स्थापित करेगी। इस कदम को भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। कंपनी का लक्ष्य है कि इन वॉशरियों को 2029-30 तक चालू कर दिया जाए।

    क्षमता में होगा बड़ा इजाफा, दोगुनी से ज्यादा बढ़ेगी ताकत

    नई वॉशरियों की कुल क्षमता 21.5 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTY) होगी। फिलहाल Coal India Limited के पास 10 वॉशरियों का नेटवर्क है, जिसकी कुल क्षमता 18.35 MTY है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनी अपनी वॉशिंग क्षमता को दोगुने से भी अधिक बढ़ा देगी। इससे न सिर्फ उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

    क्या होती है कोकिंग कोल वॉशरी?

    कोकिंग कोल वॉशरी एक ऐसा संयंत्र होता है, जहां कच्चे कोयले से राख, मिट्टी और पत्थर जैसी अशुद्धियों को हटाया जाता है। इससे कोयले की गुणवत्ता बेहतर होती है और वह स्टील उत्पादन के लिए उपयुक्त बन जाता है। भारत में कोयले में राख की मात्रा 25% से 45% तक होती है, जो इसकी गुणवत्ता को प्रभावित करती है। ऐसे में वॉशरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

    कहां लगेंगी नई वॉशरियां?

    नई बनने वाली 8 वॉशरियों में से-

    5 वॉशरियां (14.5 MTY) Central Coalfields Limited के तहत स्थापित की जाएंगी
    3 वॉशरियां (7 MTY) Bharat Coking Coal Limited के अंतर्गत विकसित होंगी

    इसके अलावा कंपनी मौजूदा वॉशरियों के आधुनिकीकरण और नवीनीकरण पर भी करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी, जिससे उनकी दक्षता और उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके।

    पुरानी परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण और निजी साझेदारी

    Coal India Limited राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के तहत अपनी पुरानी वॉशरियों का भी उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है। कुछ बंद पड़ी इकाइयों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही कंपनी Tata Steel जैसी निजी कंपनियों के साथ मिलकर तकनीकी सहयोग बढ़ा रही है, ताकि वॉशिंग क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सके।

    आयात में कमी और विदेशी मुद्रा की बचत

    भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोल की कमी के कारण भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। Coal India Limited की यह पहल आयात निर्भरता कम करने, लागत घटाने और घरेलू स्टील उद्योग को सस्ता व बेहतर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करेगी।

      आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

    यह निवेश न सिर्फ कोल सेक्टर बल्कि पूरे औद्योगिक ढांचे को मजबूती देगा। इससे ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी बढ़ावा मिलेगा।

  • जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा

    जुलाई से नया नियम लागू: मिस-सेलिंग पर RBI का शिकंजा, ग्राहकों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी हल्दी कंपनियों के बीच ‘मिस-सेलिंग’ पर सहमति की तैयारी की है। प्रस्तावित नए नियम जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं, जैसे मुख्य उद्देश्य निवेशकों को गलत या बुनियादी जानकारी हासिल करने वाले वित्तीय योजनाओं पर रोक लगाना है। इन प्रावधानों के लागू होने के बाद यदि किसी ग्राहक को पता चलता है कि उसके साथ धोखे से कोई उत्पाद निकाला गया है, तो वह शिकायत करेगा और जांच के मामले में सही पाए जाने पर बैंक को पूरा पैसा लौटाना होगा।

    मिस-सेलिंग क्या है? आसान भाषा में

    ‘मिस-सेलिंग’ का मतलब ग्राहक की ज़रूरत, प्रोफ़ाइल या समझ के आधार पर वित्तीय उत्पाद युवाओं के लिए गलत जानकारी है। ऐसा अक्सर होता है जब बैंक कर्मचारी अपने निवेशकों या इंसेंटिव के दबाव में निवेशकों को बीमा, फंड फंड या अन्य थर्ड पार्टी उत्पाद बेचते हैं। कई बार रिस्क, लॉक-इन होम या रिटर्न से जुड़ी अहम जानकारी छिपा ली जाती है।

    उदाहरण के तौर पर पर-

    एफडी ने ग्राहकों को यूलिप से “सेफ इन्वेस्टमेंट” में शामिल किया
    लोन के साथ इंश्योरेंश जॉइंट देना
    बुजुर्ग व्यक्ति को लंबी अवधि की स्थायित्व थमा देना

    ये सभी मिस-सेलिंग के क्लासिक केस माने जाते हैं।

    जुलाई 2026 से क्या बदला जाएगा?

    भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रस्तावित पदासीन पदों के लिए आवेदकों के लिए स्पष्ट और बंधनकारी प्रणाली बनाई जाएगी। यदि ग्राहक को समय सीमा निर्धारित नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज कर सकता है।

    अगर जांच में मिस-सेलिंग साबित होती है, तो-

    उत्पादों को रद्द करना होगा
    ग्राहक को पूरी रकम लौटानी होगी
    हुए नुकसान की खोज भी करनी होगी
    इसके अलावा, बैंकों को अपने कर्मचारियों को ऐसे उत्पाद बेचने के लिए गलत प्रोत्साहन देने से भी रोकना होगा।

    सिस्टम से सुपरमार्केट प्लांट

    नए स्नातक के अधीन संस्थानों को हर स्टायर्ड पार्टी उत्पाद की बिक्री के लिए 30 दिन के अंदर ग्राहक से अंतिम संस्कार लेना अनिवार्य होगा। इस डेटा के आधार पर हर 6 महीने में रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिस्टम में टुकड़े और टुकड़े होंगे।

    बदनसीब की वजह

    पिछले कुछ वर्षों में बैंकों की ऑर्थोडॉक्स पार्टी के उत्पादों की कमाई तेजी से बढ़ी है। उदाहरण के तौर पर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का कमीशन कमाया। इसी प्रवृत्ति को देखते हुए सरकार और जनरल जनरल को अब सबसे ज्यादा छूट दी गई है। हाल ही में निर्मला सीतारमण ने भी बैंकों को अपने मूल कार्य-जमा और कर्ज-पर ध्यान देने की सलाह दी थी।

    वेबसाइट के लिए क्या जरूरी है?

    ऐसे विंटेज को भी रहने की ज़रूरत है। किसी भी वित्तीय उत्पाद के रिकॉर्ड्स से पहले—

    सभी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें
    जोखिम और ऑटोमोबाइल को मंजूरी
    केवल मूल्यवान वादों पर भरोसा न करें
    आवश्यकता है लिखित जानकारी लेने की

    यदि आपको लगता है कि आपके साथ कुछ गलत हुआ है, तो आप अपने बैंक की वेबसाइट या संबंधित लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

    वाद-विवाद के हित में बड़ा कदम

    भारतीय रिज़र्व बैंक का यह कदम नेटवर्क सिस्टम में निवेशकों की रक्षा करने की दिशा को बढ़ाना और महत्व देना माना जा रहा है। इससे मिस-सेलिंग जैसी समस्याओं पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।

  • शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट

    शेयर बाजार पर दबाव बरकरार: विदेशी निवेशकों की बिकवाली से लगातार पांचवीं साप्ताहिक गिरावट


    नई दिल्ली भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का नाम थमाने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बहुलता और विदेशी उपभोक्ताओं की लगातार बिकवाली रही। सप्ताह के आखिरी प्रमुख दिन निफ्टी 50 2.09% बढ़त के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि पूरे सप्ताह में इसमें 0.52% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि पिछले एक महीने में शेयरधारकों को करीब 8.23% का नुकसान हुआ है, लेकिन जिन निवेशकों की चिंता काफी बढ़ गई है।

    गोदाम और बैंक में भी भारी दबाव

    वहीं बीएसई सेंसेक्स में भी गिरावट साफ नजर आई और यह शुक्रवार को 1,690 अंक 2.25% 73,583.22 पर बंद हुआ। पूरे हफ्ते में करीब 1.94% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि एक महीने में यह 8.29% तक टूट गई। नेटवर्क सेक्टर की बात करें तो निफ्टी बैंक सबसे ज्यादा दबाव में रहा और शुक्रवार को 2.67% 52,274 के करीब बंद हुआ। पूरे सप्ताह में इसमें 2.16% की गिरावट दर्ज की गई।

    वैश्विक तनाव और सरकारी कच्चे तेल का असर

    बाजार पर सबसे बड़ा असर संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का है, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके साथ ही ब्रेंट क्रूड की पार्टनरशिप 98 से 115 डॉलर प्रति शेयर के बीच बनी हुई है, जिसने स्थिरता और आर्थिक स्थिरता को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। कच्चे कच्चे तेल का सीधा असर भारत जैसे मजबूत देश पर पड़ता है, जिससे आरएमबी भी दबाव में आ गई।

    सेक्टर में मिलाजुला रुख, मेटल और पीएसयू बैंक सबसे खराब

    सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात तो मेट्रिक मेटल और पीएससीयू बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली। वहीं आईटी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में छोटी-छोटी जगहें दिखाई दीं, जहां आईटी में 1.17% और फार्मास्युटिकल में 0.11% की बढ़त दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी प्रेशर में रहे—निफ्टी मिडकैप100 में 1.38% और स्मॉलकैप100 में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई।

    FII की बिकवाली, DII का सहारा

    बाजार में गिरावट की एक बड़ी वजह विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली रही। सप्ताह भर में करीब 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की बिक्री बढ़ी, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 1.13 लाख रुपये करोड़ से ज्यादा तक पहुंच गया। वहीं घरेलू उद्यमों (डीआईआई) ने 25,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।

    क्या? अहम किरदार पर टिकी नजर

    निफ्टी 50 22,850-22,750 के अहम सपोर्ट जोन पर टिकने की कोशिश कर रहा है। ऊपर की तरफ 23,000-23,100 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है। वहीं निफ्टी बैंक के लिए 52,000-51,800 का सपोर्ट जोन है, जबकि 53,000-53,600 के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है।


    प्रकाशन- जारी रहने के संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के कारखाने में स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि घरेलू निवेश और बाज़ारों में सुधार से बाज़ार को आगे सहारा मिल सकता है।

  • नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार

    नोएडा एयरपोर्ट बनेगा गेमचेंजर! बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार और रोजगार को रफ्तार


    नई दिल्ली करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण अब देश को समर्पित हो चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे भारत के विकास क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का दूसरा प्रमुख सिविल हवाई अड्डा बन गया है, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में हवाई यात्रा का दबाव कम होगा और यात्रा पहले से अधिक सशक्त बनेगी।

    प्रोजेक्ट में क्रांतिकारी परिवर्तन, मल्टी-मॉडल हब के रूप में विकास

    नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को एक मल्टी-मॉडल बिजनेस हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां सड़क, रेल और मेट्रो सुविधाओं का बेहतरीन संगम होगा। यह हवाई अड्डा न सिर्फ दिल्ली-मैदान, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों के लिए भी बड़ा पर्यटक केंद्र बनेगा। यहां के माध्यम से एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित रेल लिंक बेहद आसान होगा, जिससे यात्रियों के साथ-साथ सहयोगियों को भी लाभ मिलेगा।

    आधुनिक तकनीक से लैस ‘ऑल वेडर’ एयरपोर्ट

    इस हवाई अड्डे को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से ‘ऑल वेडर ऑपरेशन’ की शुरुआत मिली है। इसका मतलब यह है कि यहां राक्षसी नेविगेशन सिस्टम, रनवे लाइटिंग और एयर रिमोट कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं, जिससे खराब मौसम या कम दृश्यता में भी उड़ान ऑपरेशन ऑपरेशन रूप से जारी रहता है। 3,900 मीटर वजनी रनवे बड़े वीडियो-बॉडी चित्रों को संलग्न करने में सक्षम है और दोनों सिरों पर आईएलएस सिस्टम स्थापित किया गया है, जो अधिक सुरक्षित और आसान सुविधा प्रदान करता है।

    क्षमता और बुनियादी ढांचे: भविष्य की इंजीनियरों के स्कूल की तैयारी

    पहले चरण में इस एयरपोर्ट की यात्री क्षमता 1.2 करोड़ रखी गई है, जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही यहां कार्गो हैंडलिंग की क्षमता भी काफी बड़ी है, जो हर साल 2.5 लाख टन से अधिक कार्गो हैंडलिंग कर सकती है। खास बात यह है कि यह देश का पहला एयरपोर्ट होगा, जहां इन-हाउस बात एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल) की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे एयरलाइंस की लागत और समय दोनों की बचत होगी।

    उद्योग और रोजगार को मिलेगा बड़ा सहारा

    नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास का नया इंजन साबित हो रहा है। इसके माध्यम से निवेश, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे। उत्तर प्रदेश में पहले ही एक्सप्रेसवे, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी कंपनियां प्रमुखता से काम कर रही हैं, और अब इस एयरपोर्ट के साथ देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट वाले राज्य शामिल हो गए हैं।

    निष्कर्ष: भारत के एविएशन सेक्टर की नई उड़ान

    अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे की शुरुआत न सिर्फ एनसीआर की ओर से मजबूत होगी, बल्कि यह भारत को वैश्विक एविएशन हब की दिशा में बनाना भी एक बड़ा कदम है। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट देश की आर्थिक प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।

  • ईरान-US तनाव से शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, ₹41 लाख करोड़ का मार्केट कैपिटल घटा, जाने क्‍या बोले एक्सपर्ट?

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दुनियाभर के शेयर बाजारों में हड़कंप मचा हुआ है। भारतीय शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट देखी गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटल पिछले एक महीने में लगभग 9% या करीब ₹41 लाख करोड़ घट गया। 27 फरवरी 2026 को जहां मार्केट कैपिटल ₹463 लाख करोड़ था, वह 27 मार्च तक गिरकर ₹422 लाख करोड़ पर आ गया। हालांकि, इस गिरावट ने निवेशकों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं।

    एक्सपर्ट्स का क्या कहना है

    मार्केट विशेषज्ञों का मानना है कि इस करेक्शन ने शेयरों के वैल्यूएशन को आकर्षक बनाया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वीके विजयकुमार ने कहा कि निफ्टी का वैल्यूएशन अब अपनी 10 साल की औसत 22.4 गुना से नीचे, लगभग 19 गुना कमाई पर ट्रेड कर रहा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि मौजूदा एनर्जी संकट भारत के मैक्रोइकोनॉमिक फंडामेंटल्स पर असर डालता है, तो वैल्यूएशन और भी गिर सकते हैं।

    फिलिप कैपिटल इसे तकनीकी अवसर मान रहा है। ब्रोकरेज के अनुसार, मौजूदा गिरावट अस्थायी है और मिडिल ईस्ट में हालात सामान्य होने पर बाजार में सुधार संभव है। उन्होंने अपने पोर्टफोलियो में कैपिटल गुड्स, डिफेंस, बैंकिंग और स्टेपल सेक्टर में हिस्सेदारी बढ़ाई है, जबकि ऑटो, आईटी, ऑयल-गैस और फार्मा में कटौती की है।

    Stoxkart के डायरेक्टर और सीईओ प्रणय अग्रवाल का कहना है कि अच्छी क्वालिटी वाले घरेलू कारोबारों के लिए लंबी अवधि के बुनियादी सिद्धांत मजबूत हैं। हालांकि, ऊर्जा लागत बढ़ने, स्टैगफ्लेशन और मौजूदा तनाव के माहौल में निवेशकों को रक्षात्मक रणनीति अपनाकर पूंजी बचाने पर ध्यान देना चाहिए।

    विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट

    देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी घट गया है। 20 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 11.413 अरब डॉलर कम होकर 698.346 अरब डॉलर रह गया। यह मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार में भारी गिरावट के कारण हुआ। इससे एक सप्ताह पहले भंडार 7.05 अरब डॉलर घटकर 709.76 अरब डॉलर रहा था। 27 फरवरी को समाप्त हुए सप्ताह में भंडार 4.88 अरब डॉलर बढ़कर 728.49 अरब डॉलर पर पहुंचा था, जो अब तक का सबसे उच्च स्तर था।

  • RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना

    RBI का 3 सरकारी बैंकों पर बड़ा एक्शन… लगाया 2.17 करोड़ से अधिक का जुर्माना


    नई दिल्ली।
    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने अलग-अलग नियमों और दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के कारण तीन सार्वजनिक बैंकों (Three Public Sector Banks) पर कुल दो करोड़ 17 लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक ने एक बयान में बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपये, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपये, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स पर भी तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।


    यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

    आरबीआई के मुताबिक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग की समुचित व्यवस्था न करने और परिसंपत्ति वर्गीकरण तंत्र में मानवीय हस्तक्षेप करने के लिए 95.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने पाया कि बैंक ने धोखाधड़ी वाले लेनदेन की रिपोर्टिंग के लिए ग्राहकों को अलग-अलग चैनलों पर 24 घंटे रिपोर्टिंग की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई।


    बैंक ऑफ इंडिया

    इसके अलावा, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बैंक पर प्राथमिक सेक्टर को लोन देने और जमा पर ब्याज संबंधी नियमों के उल्लंघन का आरोप है। बैंक ने प्राथमिक क्षेत्रों के 25 हजार रुपये तक के लोन देने पर भी सर्विस चार्ज, निरीक्षण शुल्क और प्रोसेसिंग चार्ज वसूले थे। इसके अलावा बैंक ने सावधि जमा खातों पर मैच्योरिटी की तारीख से पैसे ग्राहकों को देने की तारीख तक के लिए ब्याज भुगतान नहीं किया।


    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया

    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी और बुनियादी बचत बैंक जमा खाता संबंधी नियमों के उल्लंघन के कारण 63.60 लाख का जुर्माना लगा है। वह तय समय सीमा के भीतर केंद्रीय केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री में कुछ ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रहा था। इसके अलावा बैंक को कुछ ग्राहकों के एक से अधिक बुनियादी बचत बैंक जमा खाता खोलने का भी दोषी पाया गया।


    पाइन लैब्स पर भी एक्शन

    केंद्रीय बैंक ने पाइन लैब्स को प्रीपेड भुगतान तंत्र संबंधी नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया और उस पर तीन लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आरबीआई ने बताया कि तीन सार्वजनिक बैंकों और पाइन लैब्स को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लिखित जवाब और मौखिक सुनवाई में दिये गये जवाब असंतोषजनक पाए जाने के बाद जुर्माने की कार्रवाई की गई है।


    एचएसबीसी पर भी लगा था जुर्माना

    हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक ने हांगकांग एंड शंघाई बैंकिंग कॉरपोरेशन (एचएसबीसी) पर 31.8 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। बैंक पर निष्क्रिय खातों और बिना दावे वाली जमा राशि से जुड़े कुछ निर्देशों का पालन नहीं करने का आरोप है। बैंक की निगरानी संबंधी जांच उसके 31 मार्च, 2025 तक के वित्तीय हालात के आधार पर की गई थी। जांच में आरबीआई के निर्देशों के पालन में कमी मिलने के आधार पर बैंक को नोटिस जारी किया गया। आरबीआई ने कहा कि नोटिस पर बैंक के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियां और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान दी गई मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद यह पाया गया कि बैंक पर लगे आरोप सही हैं। इसी कारण उस पर आर्थिक जुर्माना लगाया गया।

  • 31 मार्च तक निपटा लें ये जरूरी काम….. इस दिन खत्म हो जा रही है डेडलाइन

    31 मार्च तक निपटा लें ये जरूरी काम….. इस दिन खत्म हो जा रही है डेडलाइन


    नई दिल्ली।
    एक अप्रैल (April 1st) से नए फाइनेंशियल ईयर (New Financial Year) की शुरुआत होने वाली है। इससे पहले, 31 मार्च को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर में कुछ जरूरी काम निपटा लेने होंगे। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई ऐसी डेडलाइन (Deadline) हैं जो 31 मार्च को पूरी हो रही हैं। इनमें इनकम टैक्स (Income Tax) और इन्वेस्टमेंट (Investment) से जुड़ी डेडलाइन (Deadline) भी शामिल हैं।


    वेतन आयोग को सुझाव देने की डेडलाइन

    8वें वेतन आयोग ने वेतन, भत्तों और पेंशन से संबंधित सुधारों के लिए सुझाव और राय आमंत्रित किए हैं, जिसके लिए अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई है। यह डेडलाइन केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स और विभिन्न हितधारकों के लिए है। बता दें कि वेतन आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए MyGov पोर्टल पर 18 सवालों का एक विस्तृत प्रश्नावली जारी किया है। इस प्रश्नावली के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों के मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों, न्यायिक अधिकारियों, कोर्ट कर्मचारियों, नियामक संस्थाओं के सदस्यों, कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों से राय मांगी गई है।


    ITR-U की डेडलाइन

    31 मार्च तक अपडेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (ITR-U) फाइल करने की डेडलाइन है। जिन लोगों ने अपनी कोई इनकम रिपोर्ट नहीं की है या इनकम का गलत हिसाब लगाया है, जिससे उनकी इनकम टैक्स देनदारी कम हो गई है, उनके पास अब इस गलती को सुधारने का मौका है। ऐसे लोग ITR-U फाइल करके ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, यह ध्यान रखें कि ITR-U फाइल करने के लिए आपको पेनल्टी और ब्याज के तौर पर अतिरिक्त इनकम टैक्स देना होगा और ITR-U के जरिए टैक्स रिफंड का कोई दावा नहीं किया जा सकता। पहले ITR-U का इस्तेमाल पिछले दो सालों की गलतियों को सुधारने के लिए किया जा सकता था लेकिन बजट 2025 में, इस समयसीमा को बढ़ाकर पिछले चार सालों तक कर दिया गया है। अगर आप रिटर्न सही समय पर भरने या सही डेटा देने से चूक गए हैं तो समझदारी इसी में है कि आप अभी अतिरिक्त टैक्स का भुगतान करें और ITR-U फाइल कर दें। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर आप अभी ITR-U फाइल नहीं करते हैं और बाद में इनकम टैक्स विभाग आपको पकड़ लेता है, तो आप पर अभी ITR-U फाइल करने के लिए लगने वाली पेनल्टी से कहीं ज्यादा बड़ी पेनल्टी लगाई जा सकती है।


    धारा 80C के तहत टैक्स बचाने का आखिरी मौका

    पुराने टैक्स सिस्टम को मानने वाले टैक्सपेयर्स के लिए 31 मार्च निवेश करने का आखिरी मौका है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) जैसे विकल्पों में योगदान 31 मार्च से पहले पूरा कर लेना चाहिए। इन निवेशों में देरी करने का मतलब हो सकता है कि आप मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए कीमती टैक्स छूट से चूक जाएं।

    – नया वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले यह आवेदन कर लेना चाहिए। इससे अप्रैल 2026 से ही डिडक्टर सही दर पर TDS काट सकेंगे। हालांकि यह अनिवार्य नहीं है लेकिन प्लानिंग के लिए बहुत उपयोगी है।
    – वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) का TDS रिटर्न जमा करने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी गई है।


    PAN कार्ड नियमों की समय सीमा

    31 मार्च के बाद आप सिर्फ आधार का इस्तेमाल करके PAN के लिए अप्लाई नहीं कर सकते। इसलिए अगर आप कम से कम डॉक्यूमेंट्स और बिना किसी परेशानी के PAN कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो आपको यह 31 मार्च को या उससे पहले करना होगा। उसके बाद, पैन एप्लीकेशन के लिए जन्म प्रमाण पत्र, वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट जैसे डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी। जरूरत पड़ने पर एफिडेविट और दूसरे सरकारी डॉक्यूमेंट्स का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।


    नियोक्ताओं को निवेश के प्रमाण जमा करना

    आपको 31 मार्च 2026 की समय सीमा तक अपने नियोक्ता को अपने निवेश के प्रमाण जमा करने होंगे। इनमें मकान किराया भत्ता (HRA) के दावों के लिए किराए की रसीदें, जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम भुगतान की रसीदें, ELSS निवेश विवरण, PPF पासबुक या जमा की रसीदें शामिल हैं।

  • Ola-Hero को टक्कर देने आ रहे VinFast के नए ई-स्कूटर, लॉन्च की तैयारी पूरी

    Ola-Hero को टक्कर देने आ रहे VinFast के नए ई-स्कूटर, लॉन्च की तैयारी पूरी


    नई दिल्ली। वियतनाम की ऑटो कंपनी VinFast अब भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में कदम रखने जा रही है। कंपनी ने पुष्टि की है कि वह अपने तीन इलेक्ट्रिक स्कूटर Evo, Feliz और Viper को भारत में लॉन्च करेगी। ऑटोकार की रिपोर्ट के अनुसार, इन स्कूटर्स को भारतीय सड़कों और उपयोग के हिसाब से तैयार किया जाएगा, ताकि लोकल कंडीशंस में बेहतर परफॉर्मेंस मिल सके।

    भारत में ऐसे होगी एंट्री

    शुरुआती चरण में ये स्कूटर CKD यूनिट्स के रूप में भारत लाए जाएंगे और तमिलनाडु स्थित प्लांट में असेंबल किए जाएंगे। कंपनी ने राज्य सरकार के साथ MoU साइन किया है, जिसके तहत थूथुकुडी के SIPCOT इंडस्ट्रियल पार्क में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन पर अपनी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भारतीय बाजार में इनका सीधा मुकाबला TVS iQube, Bajaj Chetak, Ola S1, Ather Rizta और Hero Vida जैसे इलेक्ट्रिक स्कूटर्स से होगा।

    VinFast स्कूटर्स के फीचर्स

    Viper इस नई लाइनअप का सबसे प्रीमियम मॉडल होगा, जिसमें एडवांस डिजाइन और नई टेक्नोलॉजी दी जाएगी। इसमें LED प्रोजेक्टर हेडलैंप, स्मार्ट-की सिस्टम, व्हीकल ट्रैकिंग, रिमोट सर्च और एंटी-थेफ्ट फीचर्स मिलेंगे। इसमें 3,000W BLDC इन-हब मोटर दी गई है, जो इसे 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड तक पहुंचने में सक्षम बनाती है।

    Feliz भी लगभग इसी परफॉर्मेंस के साथ आएगा, जबकि Evo में 2,450W इन-हब मोटर दी जाएगी। ये दोनों मॉडल भी 70 किमी/घंटा की टॉप स्पीड हासिल कर सकते हैं। वहीं, Evo Lite वर्जन की स्पीड 50 किमी/घंटा से कम रखी गई है, जिससे इसे बिना ड्राइविंग लाइसेंस के चलाया जा सकता है।

    बैटरी और रेंज

    इन सभी स्कूटर्स में बैटरी स्वैप टेक्नोलॉजी दी जाएगी। सीट के नीचे दो बैटरी स्लॉट होंगे, जिनमें 1.5 kWh की LFP बैटरियां लगेंगी। दोनों बैटरियों के फुल चार्ज होने पर Evo करीब 165 किमी तक चल सकता है, जबकि Viper और Feliz लगभग 156 किमी की रेंज देने में सक्षम होंगे। खबरों के मुताबिक, कंपनी ने Evo सीरीज के लिए एडवांस बुकिंग भी शुरू कर दी है, जिससे शुरुआती ग्राहकों को खास लाभ मिलने की संभावना है।