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  • शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

    शेयर बाजार में हाहाकार: सेंसेक्स 1700 अंक लुढ़का, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे


    नई दिल्ली। दो दिनों की तेजी के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप सभी सेगमेंट में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1690 अंक यानी 2.25% गिरकर 73,583 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 486 अंक या 2.09% टूटकर 22,819 पर आ गया। वहीं, निफ्टी बैंक 1433 अंक गिरकर 52,274 पर क्लोज हुआ।

    इस गिरावट की बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल ठिकानों पर 10 दिनों तक हमला न करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की समयसीमा 6 अप्रैल तक बढ़ाने की घोषणा की है, फिर भी बाजार में नकारात्मक असर बना हुआ है।

    टॉप शेयरों में बड़ी गिरावट

    बीएसई के टॉप 30 शेयरों में एयरटेल, टीसीएस और पावरग्रिड को छोड़कर बाकी 27 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज्यादा दबाव रिलायंस इंडस्ट्रीज पर रहा, जिसके शेयर 4.60% गिरकर 1347 रुपये पर आ गए। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फाइनेंस और एसबीआई में करीब 4% की गिरावट देखने को मिली, जबकि अन्य कई शेयर 2% से अधिक टूटे।

    निवेशकों को भारी नुकसान

    बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 431 लाख करोड़ रुपये था, जो अब घटकर 422 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस तरह निवेशकों को करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

    गिरावट के प्रमुख कारण

    मुनाफावसूली का दबाव: पिछले दो सत्रों में करीब 3.5% की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। आईटी सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टरों में गिरावट रही। स्मॉल और मिडकैप शेयरों में करीब 1.7% की गिरावट आई। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, एसबीआई, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ के शेयर 1-3% तक गिरे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सबसे ज्यादा दबाव बनाया।

    जियो-पॉलिटिकल तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच स्थिति सामान्य नहीं हो पा रही है। ट्रंप के बयान के बावजूद बाजार इस अनिश्चितता को नकारात्मक रूप में ले रहा है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखा। कच्चे तेल की कीमतें: शुक्रवार को कच्चा तेल 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: भारतीय रुपया 94 प्रति डॉलर के पार चला गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। मिडिल ईस्ट में संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता ने आयात-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा दिया है।VIX में उछाल: बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX करीब 9% बढ़कर 28 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में और गिरावट की आशंका को दर्शाता है।

  • भारत में अदाणी पोर्ट्स का नया कदम: पोर्ट ऑफ रिफ्यूज शुरू, समुद्री सुरक्षा मजबूत

    भारत में अदाणी पोर्ट्स का नया कदम: पोर्ट ऑफ रिफ्यूज शुरू, समुद्री सुरक्षा मजबूत


    नई दिल्ली। भारत ने अब तक लंबे समय से महसूस की जा रही समुद्री आपातकालीन क्षमता की कमी को दूर करते हुए पहला पोर्ट ऑफ रिफ्यूज (POR) शुरू कर दिया है। इस पहल से संकट में फंसे जहाजों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा और जीवन, माल और तटीय पर्यावरण की सुरक्षा मजबूत होगी। यह कदम अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) द्वारा उठाया गया है और इसे एसएमआईटी साल्वेज, रॉयल बोस्कालिस वेस्टमिंस्टर एनवी और समुद्री आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र (MERC) के सहयोग से संचालित किया जाएगा।

    पोर्ट ऑफ रिफ्यूज का महत्व

    अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज वह स्थान होता है जहां जहाज संकट की स्थिति में स्थिर होकर जीवन बचाने, माल की सुरक्षा करने और पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए आश्रय ले सकते हैं। विश्व की प्रमुख समुद्री अर्थव्यवस्थाओं में यह सुविधा आम है, लेकिन भारत ने अब तक औपचारिक रूप से ऐसा कोई ढांचा स्थापित नहीं किया था।

    भारत की तटरेखा और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर असर

    APSEZ भारत की सबसे बड़ी और तेजी से बढ़ती एकीकृत परिवहन कंपनी है, जो देश के बंदरगाह कार्गो वॉल्यूम का लगभग 27 प्रतिशत संभालती है। CEO अश्वनी गुप्ता ने कहा, “समर्पित POR स्थापित करके हम भारत की समुद्री तैयारियों को अपग्रेड कर रहे हैं और विश्व स्तरीय तटीय सुरक्षा के लिए नया मानदंड स्थापित कर रहे हैं। यह कदम जीवन और समुद्री अर्थव्यवस्था की सुरक्षा में महत्वपूर्ण है।”

    दो प्रमुख बंदरगाह होंगे POR के रूप में

    APSEZ ने दो स्थलों को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज के रूप में नामित किया है:

    दिघी बंदरगाह (पश्चिमी तट): अरब सागर और फारस की खाड़ी की ओर जाने वाले मार्गों पर यातायात को सुविधा देगा।
    गोपालपुर बंदरगाह (पूर्वी तट): बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले मार्गों पर जहाजों को सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

    इन पोर्ट्स में विशेष उपकरण और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया टीमें होंगी जो बचाव, जहाज मलबा हटाने, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और आपातकालीन समन्वय जैसी सेवाएं प्रदान करेंगी।

    विशेषज्ञों की टिप्पणियां

    शिपिंग के डायरेक्टर जनरल श्याम जगन्नाथन ने कहा, “मानकीकृत POR फ्रेमवर्क से समुद्री दुर्घटनाओं के दौरान अधिक समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई संभव होगी। इससे जीवन, माल और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”
    एसएमआईटी साल्वेज के MD रिचर्ड जानसेन ने कहा, “किसी दुर्घटनाग्रस्त जहाज को पोर्ट ऑफ रिफ्यूज प्रदान करना बचाव अभियान में बेहद महत्वपूर्ण है। भारत के प्रमुख शिपिंग मार्गों पर तेज़, सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।”

    वैश्विक मानक और सुरक्षा

    यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सम्मेलनों के अनुरूप है और सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक शिपिंग कॉरिडोर में भारत की भूमिका को मजबूत करती है। इससे भारत समुद्री सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पर्यावरणीय प्रबंधन के वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम बढ़ा रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: पेट्रोल 10 रुपये सस्ता, डीजल पर जीरो एक्साइज ड्यूटी, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट

    पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत: पेट्रोल 10 रुपये सस्ता, डीजल पर जीरो एक्साइज ड्यूटी, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने फ्यूल संकट के बीच आम जनता को राहत दी है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये कर दी गई है, जबकि डीजल पर पूरी तरह जीरो कर दिया गया है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग 10 रुपये प्रति लीटर तक कम हो गई हैं।

    आज के डीजल-पेट्रोल के रेट
    दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 / लीटर, डीजल ₹87.67 / लीटर
    नोएडा: पेट्रोल ₹94.85 / लीटर, डीजल ₹87.98 / लीटर
    मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 / लीटर, डीजल ₹90.03 / लीटर

    राज्यों का वैट अलग से लागू होगा। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के बाद पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

    शहरवार सबसे सस्ता फ्यूल
    पोर्ट ब्लेयर: ₹82.46 / लीटर
    ईटानगर: ₹90.87 / लीटर
    सिलवासा: ₹92.37 / लीटर

    सबसे सस्ता डीजल

    पोर्ट ब्लेयर: ₹78.05 / लीटर
    इटानगर: ₹80.38 / लीटर
    जम्मू: ₹81.32 / लीटर
    वैश्विक तेल संकट और कीमतें

    ब्रेंट क्रूड आज $107.10 और WTI क्रूड $93.73 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे हैं। ईरान-इजरायल-अमेरिका के तनाव के बीच भी भारत सरकार ने घरेलू कीमतों में राहत दी है।

    सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट
    27 मार्च 2026 को भारत में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बुलियन बाजार की कमजोरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और उच्च ट्रेजरी यील्ड के कारण सोना और चांदी सस्ते हुए हैं।

    सोने की कीमतें (10 ग्राम के लिए)

    शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट
    दिल्ली ₹1,44,690 ₹1,32,640 ₹10,855
    मुंबई ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840
    चेन्नई ₹1,45,630 ₹1,33,490 ₹11,134
    बैंगलोर ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840
    कोलकाता ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840
    हैदराबाद ₹1,44,540 ₹1,32,490 ₹10,840

    पंपों पर भीड़ और मांग में इजाफा
    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बताया कि पिछले दो दिनों में फ्यूल की मांग 15% बढ़ी है। कुछ जगहों पर बिक्री औसत से 50% तक अधिक रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के बाद लोग पंपों पर भीड़ जुटा रहे हैं।

  • पेट्रोल और डीजल पर नियंत्रण: एक्साइज कटौती से युद्ध के समय उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

    पेट्रोल और डीजल पर नियंत्रण: एक्साइज कटौती से युद्ध के समय उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी के फैसले को आम जनता ने सराहते हुए कहा कि इससे युद्ध के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी।
    राजकोट के अवि मकवाना ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी कम करना एक अच्छा फैसला है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी और यह छोटे व्यापारियों के भी बड़ी राहत है, क्योंकि ईंधन की कीमत में बदलाव का सीधा असर व्यापार पर पड़ता है।

    वहीं, केयूर अनोरकट ने कहा कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के युद्ध के कारण पूरी दुनिया में पेट्रोल,डीजल और गैस की भारी कम हो गई है। हाल ही में पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और श्रीलंका में पेट्रोल-डीजल के दाम में भारी वृद्धि देखी गई है। वहीं, मोदी सरकार ने महंगाई को काबू में रखने के लिए पेट्रोल और डीजल में 10-10 रुपए एक्साइज ड्यूटी को कम किया है। इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि को रोकने में मदद मिलेगी।

    संगरूर में पंजाब पेट्रोलियम एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विनोद बंसल ने आईएएनएस से कहा कि सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को 10-10 रुपए घटाया गया है। इससे आम जनता के लिए कीमतों में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन यह तेल कंपनियों के लिए बड़ी राहत है और इससे नुकसान में कुछ हद तक कमी करने में मदद मिलेगी और युद्ध के कारण जो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़नी थी, उसे टाला जा सकेगा। उन्होंने आगे बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। ऊपर से लगातार आपूर्ति जारी है।

    सुखदीप सिंह ने कहा कि सरकार का एक्साइज ड्यूटी घटाने का फैसला एक अच्छा फैसला है और इससे आम जनता को किसी न किसी रूप में इसका लाभ होगा। इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कमी से उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव के बीच घरेलू खपत के लिए पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की गई है। इससे उपभोक्ताओं को कीमतों में वृद्धि से सुरक्षा मिलेगी। इससे पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जो कि पहले 13 रुपए प्रति लीटर थी। डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम होकर शून्य हो गई है, जो कि पहले 10 रुपए प्रति लीटर थी।

    वित्त मंत्री ने पोस्ट में आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि नागरिकों को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लागत में उतार-चढ़ाव से बचाया जाए।

  • वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के

    वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी-ईरान युद्ध में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन लाल निशान में बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति
    सेंसेक्स: दिन के अंत में 1,690.23 अंक यानी 2.25% की गिरावट के साथ 73,583.22 पर बंद हुआ।
    निफ्टी50: 486.85 अंक यानी 2.09% की गिरावट के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,883.79 पर खुलकर 1,736 अंक यानी 2.30% से अधिक गिरकर 73,534.41 के निचले स्तर को छुआ। वहीं निफ्टी50 23,173.55 से शुरू होकर 501 अंक यानी 2.15% गिरकर 22,804.55 तक पहुंच गया।

    व्यापक बाजार और सेक्टर प्रदर्शन
    निफ्टी मिडकैप: 2.23% की गिरावट
    निफ्टी स्मॉलकैप: 1.74% की गिरावट

    सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर:

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU) – 3.86% गिरावट
    निफ्टी रियल्टी – 3.17%
    निफ्टी ऑटो – 2.82%
    निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज – 2.69%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक – 2.01%

    सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर:

    निफ्टी आईटी – केवल 0.44% की गिरावट
    शेयरों का दिनभर का प्रदर्शन

    सकारात्मक प्रदर्शन: केवल 6 कंपनियों में तेजी

    ओएनजीसी: +4.03%
    विप्रो: +1.22%
    भारती एयरटेल: +0.82%
    टीसीएस: +0.42%
    कोल इंडिया: +0.32%
    पावरग्रिड: +0.24%

    सबसे अधिक नुकसान:

    श्रीराम फाइनेंस: -5.54%
    टीएमपीवी: -4.92%
    रिलायंस: -4.61%
    इंडिगो: -4.48%
    बजाज फाइनेंस: -4.11%
    कुल बाजार पूंजीकरण और निवेशकों को नुकसान

    दिन के कारोबार में निवेशकों को लगभग 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 431 लाख करोड़ रुपए से घटकर 422 लाख करोड़ रुपए रह गया।

  • पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

    पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार


    नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसद

    सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक।

    भारत ने रखा स्थिर रुख

    इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है।

    वित्त मंत्री का बयान

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है।

    निर्यात पर भी लगाया गया शुल्क

    सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  • 1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: इनकम टैक्स से लेकर ट्रेन टिकट रिफंड तक नए अपडेट लागू

    1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: इनकम टैक्स से लेकर ट्रेन टिकट रिफंड तक नए अपडेट लागू


    नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। सरकार हर साल की तरह इस बार भी टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम बदलाव कर रही है। आइए जानते हैं, कौन-कौन से नए नियम लागू होंगे और उनका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    नया इनकम टैक्स एक्ट करेगा शुरुआत

    सबसे बड़ा बदलाव नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 है, जो 1 अप्रैल से पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स से जुड़े नियमों और भाषा को सरल बनाना है, ताकि आम लोगों को समझने में आसानी हो। इसके तहत कई जटिल शब्दों को हटाया गया है और पूरी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है।

    ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’

    नए कानून के तहत अब ‘असेसमेंट ईयर’ जैसे जटिल शब्दों को हटाकर ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को समझना आसान होगा और आम करदाताओं को कम भ्रम का सामना करना पड़ेगा।

    12 लाख तक की आय पर टैक्स राहत

    नए वित्त वर्ष में न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। सेक्शन 87A के तहत इस सीमा तक आने वाले करदाताओं की टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी।

    फॉर्म 16-16A की जगह नए फॉर्म

    1 अप्रैल से फॉर्म 16 और फॉर्म 16A की जगह क्रमशः फॉर्म 130 और फॉर्म 131 लागू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य टैक्स डॉक्यूमेंटेशन को और व्यवस्थित करना और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही, इनके जारी करने की समयसीमा में भी बदलाव संभव है।

    पैन कार्ड के लिए नए नियम

    अब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। इनकम टैक्स विभाग जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में कक्षा 10 का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट जैसे अन्य दस्तावेज भी अनिवार्य करेगा। इससे पहचान प्रक्रिया और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।

    रेलवे टिकट रिफंड के नियम बदले

    1 अप्रैल से भारतीय रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में भी बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार:

    ट्रेन चलने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर 50% रिफंड मिलेगा।
    24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 25% रिफंड मिलेगा।
    72 घंटे से पहले रद्द करने पर अधिकतम कैंसिलेशन शुल्क लागू होगा और रिफंड रेलवे के नियमों पर निर्भर करेगा।
    इन बदलावों का उद्देश्य टिकट कैंसिलेशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    इन सभी बदलावों का असर सीधे आम लोगों की वित्तीय योजना पर पड़ेगा। जहां एक ओर टैक्स में राहत से बचत बढ़ेगी, वहीं नए नियमों को समझना और समय पर उनका पालन करना जरूरी होगा। रेलवे के नए नियम भी यात्रा की योजना बनाते समय ध्यान में रखने होंगे।

  • जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा

    जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली। भारत के विकास को गति देने के लिए जापान ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने भारत को 275.858 बिलियन येन (करीब 16,420 करोड़ रुपए) का आधिकारिक विकास सहायता (ODA) लोन देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फंड देश के शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इस फैसले से भारत-जापान के बीच दशकों पुराने आर्थिक रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।

    मेट्रो प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बड़ा सहारा

    इस लोन का सबसे बड़ा हिस्सा शहरी परिवहन, खासकर मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मेट्रो रेल फेज-3 परियोजना के लिए 102.480 बिलियन येन दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर व तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

    इसी तरह, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मेट्रो लाइन-11 परियोजना के लिए 92.400 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इस परियोजना से मुंबई में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने, यात्रा को आसान बनाने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। यह पहल शहरी जीवन को अधिक सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार

    जापान की इस आर्थिक सहायता का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर भी खर्च किया जाएगा। महाराष्ट्र में आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों के निर्माण के लिए 62.294 बिलियन येन का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस निवेश से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

    कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा

    कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए भी इस लोन का उपयोग किया जाएगा। पंजाब में टिकाऊ बागवानी (हॉर्टिकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए 18.684 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर ज्यादा लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, कृषि से जुड़ी सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    1958 से मजबूत हो रहे रिश्ते

    भारत और जापान के बीच विकास सहयोग का रिश्ता नया नहीं है। यह साझेदारी 1958 से लगातार मजबूत होती आ रही है। जापान लंबे समय से भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। मौजूदा फंडिंग पैकेज इस रिश्ते को और गहराई देगा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में व्यापक सुधार लाने में सहायक होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट्स से शहरी परिवहन बेहतर होगा, स्वास्थ्य निवेश से चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होंगी और कृषि क्षेत्र में बदलाव से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, यह लोन भारत के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

  • जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के

    जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के


    नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के बड़े जज ने भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक को अपना मुख्य पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है, जिसके बाद शुक्रवार के कारोबार में बैंक के स्टॉक पर दबाव साफ नजर आया। सूची पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक जनसंख्या 758 रुपये के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही बैंक का स्टॉक पिछले एक महीने में 14.3 प्रतिशत और छह महीने में करीब 20 प्रतिशत तक टूट गया है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

    ‘ग्रिड एंड फियर’ की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, एचएसबीसी को मिली जगह

    जेफरीज़ के रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपनी नामांकन रिपोर्ट “ग्रिड एंड फियर” में इस बदलाव का ज़िक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया (जापान को खत्म), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो को हटा दिया गया है। हालाँकि, इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार में इसे शामिल करने की घटना देखी जा रही है। खास बात यह है कि बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है। इस बदलाव के चलते भारत का कुल वेटेज भी थोड़ा कम हो गया है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है।

    एशिया-पैसिफिक पोर्टफोलियो में भी स्टॉक, भारत का वेटेज कम हो गया

    जेफरीज ने सिर्फ ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही नहीं, बल्कि एशिया-पैसिफिक (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेस्टेज़ 2-2 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि ताइवान का वेस्टेज़ 4 प्रतिशत नीचे आया है। इस पोर्टफोलियो में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अभी भी MSCI से थोड़ी अधिक बनी हुई है। इसके बावजूद वेस्टेज में यह टिप्पणी की गई है कि विदेशी ब्रोकरेज हाउस को भारत ले जाने से रोका गया है।

    शव के अवशेषों से लेकर गहनता तक की जांच, जांच की भी चर्चा

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में डिजिटल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारक अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और संपत्तियों’ से जुड़े शेयरों की शपथ ली थी। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को पोर्टफोलियो में नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। वहीं, अन्यत्र में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस मामले की समीक्षा कर सकता है। इन घटनाओं में बैंक की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति का भरोसेमंद प्रभाव हो सकता है।

    युवाओं की धारणा पर असर, आगे भी रह सकता है दबाव

    विशेषज्ञ विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भले ही अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की धारणा प्रभावित होती है। इससे शेयर पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बनाया जा सकता है। स्थिर स्थिति में बैंक का 52 ग्रेड का निचला स्तर 741.05 रुपये और उच्च स्तर 1,020.50 रुपये है, जबकि बैंक की बाजार पूंजी करीब 5.82 करोड़ लाख रुपये है। ऐसे में किसी भी निवेश के लिए यह समय अत्यावश्यक रहना होगा और किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्थिति को भरना जरूरी होगा।

  • शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग

    शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, ग्लोबल संकेतों के चलते गिरावट में ओपनिंग


    नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही निवेशकों की सतर्कता साफ नजर आई, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए। सुबह करीब 9:18 बजे बीएसई सेंसेक्स 808 अंकों यानी 1.07 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,435 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, वहीं एनएसई निफ्टी भी 274 अंक यानी 1.18 प्रतिशत टूटकर 23,033 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे लगभग सभी सेक्टर प्रभावित हुए। खासकर पीएसयू बैंक और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई, जो बाजार की गिरावट के प्रमुख कारण बने।

    सेक्टरों में मिला-जुला रुख, आईटी ने दिखाई मजबूती

    शुरुआती सत्र में जहां एक ओर निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप लूजर्स के रूप में उभरे, वहीं कुछ सेक्टरों ने मजबूती भी दिखाई। निफ्टी आईटी एकमात्र ऐसा प्रमुख सेक्टर रहा जो हरे निशान में कारोबार करता दिखा। इसके अलावा निफ्टी फाइनेंशियल सर्विस, रियल्टी, इंडिया डिफेंस, प्राइवेट बैंक, कंजप्शन, मेटल और इंफ्रा में सीमित खरीदारी देखने को मिली। हालांकि यह तेजी बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही। लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 561 अंक यानी 1.02 प्रतिशत गिरकर 54,769 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 130 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 15,766 पर आ गया।

    दिग्गज शेयरों का प्रदर्शन: आईटी चमका, बैंकिंग और ऑटो दबाव में

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में आईटी कंपनियों ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की। एचसीएल टेक, टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा सन फार्मा और ट्रेंट भी बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर बैंकिंग, ऑटो और इंफ्रा से जुड़े शेयरों में गिरावट हावी रही। बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, एलएंडटी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, मारुति सुजुकी, टाइटन, आईसीआईसीआई बैंक और पावर ग्रिड जैसे बड़े शेयर नुकसान में रहे, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

    वैश्विक संकेतों का असर, अमेरिका-ईरान तनाव बना वजह

    एशियाई बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। टोक्यो, सोल और जकार्ता में जहां तेजी देखी गई, वहीं शंघाई और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी बाजार गुरुवार को पहले ही गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक में आई कमजोरी और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। शांति वार्ता की समय सीमा नजदीक आने से बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। हालांकि बाद में इस समय सीमा को आगे बढ़ा दिया गया, जिससे कुछ राहत की उम्मीद जरूर बनी, लेकिन शुरुआती कारोबार में इसका सकारात्मक असर नहीं दिखा।

    निवेशकों के लिए सतर्कता जरूरी, उतार-चढ़ाव के बीच सीमित मौके

    विशेषज्ञों का मानना है कि खबरों के आधार पर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और सोच-समझकर निवेश करना चाहिए। मौजूदा परिस्थितियों में बाजार में सीमित अवसर ही दिखाई दे रहे हैं, इसलिए जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी है।