Category: Economy

  • वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा

    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत के निर्यात में 1.87 फीसदी का इजाफा


    नई दिल्ली।
    वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं (Global Economic Uncertainties) के बीच बीते महीने (दिसंबर 2025) में भारत (India) से होने वाले वस्तु निर्यात (Commodity Export) में 1.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान भारत ने 38.51 अरब डॉलर का निर्यात किया है। जबकि, उससे पहले वर्ष की की समान अवधि (दिसंबर 2024) में 37.80 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    वहीं, बीते महीने वस्तुओं का आयात 8.7 प्रतिशत बढ़कर 63.55 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर 2024 में 58.43 अरब डॉलर का रहा है। इस तरह से बीते महीने वस्तुओं के आयात में वृद्धि के चलते व्यापार घाटा बढ़कर 25.04 अरब डॉलर हो गया।

    गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय की तरफ से जारी आयात-निर्यात के आंकड़ों से पता चलता है कि वस्तु एवं सेवाओं को मिलाकर भारत ने बीते महीने 74.01 अरब डॉलर का निर्यात किया है, जबकि दिसंबर 2024 में 74.77 अरब डॉलर का निर्यात किया था।

    सेवा के निर्यात में गिरावट
    इस अवधि में सेवा के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है, जो 36.97 से घटकर 36.50 अरब डॉलर रही है। वहीं, आयात की बात करें तो दिसंबर 2025 में भारत ने वस्तु एवं सेवा का कुल निर्यात 80.84 अरब डॉलर का रहा है, जो दिसंबर 2024 में 76.23 अब ड़लर का रहा था। चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान देश का कुल वस्तु निर्यात 2.44 प्रतिशत बढ़कर 330.29 अरब डॉलर का रहा है। जबकि आयात 5.9 प्रतिशत बढ़कर 578.61 अरब डॉलर हो गया।


    नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर पर पहुंचा

    इस तरह वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में कुल व्यापार घाटा 248.32 अरब डॉलर दर्ज किया गया। अगर वस्तु एवं सेवा क्षेत्र के निर्यात को जोड़कर देखा जाए तो बीते नौ महीनों में निर्यात 4.33 प्रतिशत बढ़ गया है जो वित्तीय वर्ष 2024-25 में 607.93 अरब डॉलर का था लेकिन चालू वित्तीय वर्ष दिसंबर तक ही निर्यात बढ़कर 634.26 अरब डॉलर का रहा है।


    निर्यात के मोर्चे पर सकारात्मक रुझान

    वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल का निर्यात को लेकर कहना है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का निर्यात सकारात्मक दिखाई दे रहा है। मौजूदा रुझानों को देखते हुए उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में कुल निर्यात (वस्तु और सेवाएं) 850 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर सकता है। बीते महीने इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, समुद्री उत्पाद और दवा जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ा है। इसके साथ अमेरिका, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को भारत का निर्यात स्थिर गति से बढ़ रहा है।


    अमेरिका-चीन के साथ बढ़ रहा कारोबार

    वैश्विक खींचतान के बीच अमेरिका द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया हुआ है लेकिन उसके बावजूद अमेरिका को होने वाला निर्यात नवंबर की तुलना में दिसंबर में भी स्थिर रहा है। बीते महीने भारत से 6.89 अरब डॉलर का निर्यात हुआ है। जबकि नवंबर 2025 में 6.98 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। अगर दिसंबर 2024 के मुकाबले देखा जाए तो थोड़ी से कमी दिखाई देती है क्योंकि दिसंबर 2024 में भारत से 7.01 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था। उधर, चालू वित्तीय वर्ष में वित्तीय वर्ष 2024-25 के मुकाबले 9.75 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती है। वहीं, चीन को होने वाले निर्यात में 36.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • भारत में टेस्ला को नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स, 2025 में सिर्फ 225 कारों की बिक्री..

    भारत में टेस्ला को नहीं मिला अपेक्षित रिस्पॉन्स, 2025 में सिर्फ 225 कारों की बिक्री..


    नई दिल्ली। दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति की अगुआ मानी जाने वाली अमेरिकी कार कंपनी टेस्ला को भारत में अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार वर्ष 2025 में टेस्ला ने भारतीय बाजार में केवल 225 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की जो कंपनी की वैश्विक पहचान और भारत में तेजी से बढ़ते ईवी बाजार को देखते हुए बेहद कम मानी जा रही है।

    फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन FADA के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर 2025 में टेस्ला की 64 कारें बिकीं अक्टूबर में यह आंकड़ा 40 यूनिट्स रहा नवंबर में 48 यूनिट्स और दिसंबर में 73 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई। साल के अंतिम महीने में थोड़ी बढ़त जरूर देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर आंकड़े यह संकेत देते हैं कि भारतीय ग्राहक टेस्ला से अभी दूरी बनाए हुए हैं।

    टेस्ला ने भारत में अपने सफर की शुरुआत मुंबई में शोरूम खोलकर की थी। इसके बाद कंपनी ने गुरुग्राम मुंबई और दिल्ली में एक्सपीरियंस सेंटर्स भी शुरू किए जहां ग्राहकों को वाहन देखने टेस्ट ड्राइव और चार्जिंग सुविधाओं की जानकारी दी जाती है। कंपनी के पास फिलहाल भारत में करीब 12 सुपरचार्जर और 10 डेस्टिनेशन चार्जर मौजूद हैं लेकिन यह नेटवर्क अभी बड़े पैमाने पर ग्राहकों का भरोसा जीतने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा।

    वर्तमान में टेस्ला भारत में केवल एक मॉडल – मॉडल वाई – की बिक्री कर रही है। यह रियरव्हीलड्राइव RWD इलेक्ट्रिक एसयूवी है। इसके स्टैंडर्ड RWD वेरिएंट की एक्सशोरूम कीमत 59.89 लाख रुपये है जबकि लॉन्ग रेंज RWD वेरिएंट की कीमत 67.89 लाख रुपये रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह से निर्मित वाहनों CBU पर लगने वाले भारी आयात शुल्क के कारण टेस्ला की कीमतें भारतीय बाजार में काफी ज्यादा हो गई हैं जिससे संभावित ग्राहक पीछे हट रहे हैं।

    हालांकि तकनीकी रूप से टेस्ला मॉडल वाई एक दमदार इलेक्ट्रिक वाहन है। कंपनी के अनुसार इसका स्टैंडर्ड वेरिएंट एक बार चार्ज करने पर करीब 500 किलोमीटर की रेंज देता है जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट 622 किलोमीटर तक चल सकता है। स्टैंडर्ड मॉडल 0 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार महज 5.9 सेकंड में पकड़ लेता है जबकि लॉन्ग रेंज वेरिएंट 5.6 सेकंड में यह गति हासिल कर लेता है। दोनों मॉडलों की अधिकतम रफ्तार 201 किमी प्रति घंटे बताई गई है। फास्ट चार्जिंग के जरिए सिर्फ 15 मिनट में 238 से 267 किलोमीटर तक की अतिरिक्त रेंज मिलने का दावा भी किया जाता है।

    दिलचस्प बात यह है कि जहां टेस्ला को भारत में संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं देश का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार 2025 में कुल वाहन पंजीकरण में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 8 प्रतिशत तक पहुंच गई है और कुल ईवी बिक्री 23 लाख यूनिट्स का आंकड़ा पार कर चुकी है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टेस्ला भारत में स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग या किफायती मॉडल लाती है तो भविष्य में उसकी स्थिति बेहतर हो सकती है।

  • CREDIT CARD अभी-अभी लिया है तो बुद्धिमानी से इस्तेमाल की ये बातें तुरंत जान लें, चक्रव्यूह में फंसने से बच जाएंगे

    CREDIT CARD अभी-अभी लिया है तो बुद्धिमानी से इस्तेमाल की ये बातें तुरंत जान लें, चक्रव्यूह में फंसने से बच जाएंगे

    नई दिल्ली  क्रेडिट कार्ड अभी-अभी आपके हाथ में आया है और वो चमकदार प्लास्टिक का टुकड़ा आपको लग रहा है जैसे जादू की छड़ी, लेकिन सावधान! ये जादू की छड़ी नहीं, बल्कि एक दो धारी तलवार है। सही इस्तेमाल से ये आपकी फाइनेंशियल लाइफ को आसान बना सकता है, रिवॉर्ड्स, कैशबैक, क्रेडिट स्कोर मजबूत कर सकता है और इमरजेंसी में काम आ सकता है। लेकिन थोड़ी सी लापरवाही और आप चक्रव्यूह में फंस जाएंगे, जहां ब्याज की दरें 3-3.5% प्रति माह (यानी 36-42% सालाना), लेट फीस, पेनाल्टी और क्रेडिट स्कोर का भारी नुकसान आपको सालों तक परेशान कर सकता है। खासकर पहली बार क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए ये शुरुआती दौर सबसे खतरनाक और सबसे महत्वपूर्ण होता है। बैंक आपको कम लिमिट देता है, लेकिन आपकी हर हरकत पर नजर रखता है। इसलिए अभी से ही कुछ बुनियादी लेकिन गेम-चेंजिंग नियमों को अपनाएं, ताकि आप क्रेडिट कार्ड के फायदे उठा सकें और उसके जाल में न फंसें।
    क्रेडिट कार्ड का सही इस्तेमाल कैसे करें?
    बिल समय पर और पूरा चुकाना है सबसे जरूरी

    क्रेडिट कार्ड का बिल हमेशा तय तारीख से पहले और पूरा चुकाने की कोशिश करें। इससे न केवल आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर बना रहता है, बल्कि भारी ब्याज देने से भी बचाव होता है। अगर किसी कारणवश पूरा भुगतान संभव न हो, तो कम से कम न्यूनतम राशि से अधिक भुगतान जरूर करें, ताकि ब्याज का बोझ कम किया जा सके।

    बड़े खर्च को EMI में बदलना हो सकता है फायदेमंद
    क्रेडिट कार्ड से की गई बड़ी खरीदारी को EMI में बदलने का विकल्प चुनकर आप अपने खर्च को आसान किस्तों में बांट सकते हैं। इससे एकमुश्त भुगतान का दबाव कम होता है और कई बार यह सामान्य क्रेडिट कार्ड ब्याज से सस्ता भी पड़ता है।

    कैश निकालने से करें परहेज
    क्रेडिट कार्ड से नकद निकालना सबसे महंगे विकल्पों में से एक माना जाता है। कैश एडवांस पर पैसे निकालते ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है और इसमें कोई ब्याज-मुक्त अवधि नहीं मिलती। साथ ही, अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ता है। इसलिए इस सुविधा का इस्तेमाल केवल आपात स्थिति में ही करें।

    अपने खर्च पर लगातार रखें नजर
    क्रेडिट कार्ड के खर्च को कंट्रोल में रखने के लिए स्टेटमेंट और बैंक से आने वाले SMS या ई-मेल अलर्ट नियमित रूप से चेक करते रहें। इससे आपके खर्च की पूरी जानकारी बनी रहती है। इसके अलावा, समय-समय पर क्रेडिट रिपोर्ट की जांच करना भी जरूरी है, ताकि किसी तरह की गलती या गड़बड़ी समय रहते पकड़ी जा सके।

    एक साथ कई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन न करें
    बार-बार या एक साथ कई क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि इससे हार्ड इंक्वायरी बढ़ती है। बेहतर है कि अपनी जरूरत और खर्च करने की आदतों के अनुसार ही सही कार्ड का चयन करें।

    रिवॉर्ड्स और बेनिफिट्स की जानकारी रखें
    हर क्रेडिट कार्ड पर मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक और अन्य ऑफर्स अलग-अलग होते हैं। इनकी जानकारी रखकर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी बचत में इजाफा कर सकते हैं।

    सिर्फ भरोसेमंद जगहों पर ही कार्ड का इस्तेमाल करें
    क्रेडिट कार्ड से होने वाले फ्रॉड से बचने के लिए हमेशा भरोसेमंद दुकानों, वेबसाइट्स और मर्चेंट्स पर ही भुगतान करें। इससे कार्ड के दुरुपयोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। समझदारी से किया गया क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल न केवल आपके रोजमर्रा के खर्च को आसान बनाता है, बल्कि भविष्य में लोन और अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए भी आपको मजबूत स्थिति में रखता है।

  • वैश्विक विरोध के बाद एलन मस्क की एक्स ने ग्रोक का आपत्तिजनक इमेज फीचर बंद किया

    वैश्विक विरोध के बाद एलन मस्क की एक्स ने ग्रोक का आपत्तिजनक इमेज फीचर बंद किया


    नई दिल्ली: दुनिया भर में बढ़ते विरोध और कानूनी दबाव के बाद एलन मस्क के नेतृत्व वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स X ने गुरुवार को अपने एआई चैटबॉट ग्रोक का आपत्तिजनक तस्वीर बनाने वाला फीचर बंद कर दिया। अब ग्रोक किसी भी स्थिति में महिलाओं की अशोभनीय या आपत्तिजनक तस्वीरें नहीं बना सकेगा चाहे यूजर के पास प्रीमियम अकाउंट ही क्यों न हो।एक्स के सेफ्टी अकाउंट ने पोस्ट में कहा कि तकनीकी बदलाव किए गए हैं जिससे ग्रोक असली लोगों की तस्वीरों को बिकिनी या अन्य खुले कपड़ों में एडिट नहीं कर सकेगा। यह नियम सभी यूजर्स पर लागू होगा जिसमें पेड और प्रीमियम दोनों प्रकार के अकाउंट्स शामिल हैं।

    ग्रोक के ‘स्पाइसी मोड’ फीचर ने कई देशों में नाराजगी पैदा की थी। इस मोड के जरिए यूजर्स आसानी से किसी भी व्यक्ति की अश्लील डीपफेक तस्वीरें बना सकते थे जैसे कपड़े हटाना या बिकिनी में दिखाना। इस पर कई देशों ने प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर दिया या इसकी जांच शुरू कर दी। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने भी एक्सएआई से इस मामले में रिपोर्ट मांगी थी। वहीं अमेरिका के कैलिफोर्निया अटॉर्नी जनरल ने डेवलपर के खिलाफ जांच शुरू की।28 सामाजिक संगठनों ने एप्पल और गूगल को पत्र लिखकर मांग की थी कि ग्रोक और एक्स ऐप को उनके ऐप स्टोर से हटाया जाए। बढ़ती अश्लील तस्वीरों की वजह से यह कदम जरूरी समझा गया।

    अब एक्स ने तस्वीर बनाने और एडिट करने की सुविधा केवल पेड सब्सक्राइबर्स तक सीमित कर दी है। पहले यह सुविधा प्रीमियम यूजर्स के लिए थी लेकिन अब इसे और भी सख्त बनाया गया है। प्लेटफॉर्म ने बताया कि यह कदम एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में काम करेगा और नियम तोड़ने वाले यूजर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव होगी।एक्स ने यह भी स्पष्ट किया कि बाल यौन शोषण सामग्री CSAM और बिना अनुमति की नग्न तस्वीरों जैसे गंभीर नियम उल्लंघन वाले कंटेंट को तुरंत हटाया जाएगा। ऐसे नियम तोड़ने वाले अकाउंट्स को निलंबित या बंद किया जाएगा।

    दिसंबर में मंत्रालय ने एक्स को निर्देश दिया था कि कानून के खिलाफ पहले से मौजूद आपत्तिजनक कंटेंट को हटाया जाए या उसकी पहुंच बंद की जाए। भारत में एक्स ने ग्रोक की मदद से बनाई गई लगभग 3500 अश्लील तस्वीरें हटाईं और करीब 600 यूजर्स को प्रतिबंधित किया।इस कदम को प्लेटफॉर्म की सुरक्षा नीतियों और कानूनी जिम्मेदारी के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। एक्स ने कहा कि अब ग्रोक का इस्तेमाल केवल सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से ही संभव होगा जिससे किसी की निजता और सम्मान का उल्लंघन न हो।

  • भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध

    भारत कोकिंग कोल लिमिटेड का आईपीओ अब 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में होगा सूचीबद्ध


    नई दिल्ली।  कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेडBCCL की शेयर बाजार में प्रस्तावित लिस्टिंग अब 16 जनवरी की बजाय 19 जनवरी 2026 को होगी। लिस्टिंग में यह बदलाव मुख्य रूप से बृहन्मुंबई नगर निगम BMC चुनावों के परिणामों के कारण किया गया है जिनकी घोषणा 16 जनवरी को होनी है। हालांकि तारीख बदली है लेकिन निवेशकों में आईपीओ को लेकर उत्साह और भरोसा जस का तस बना हुआ है।BCCL का आईपीओ हाल के वर्षों के सबसे चर्चित सरकारी आईपीओ में से एक रहा है। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल OFS आधारित था जिसके तहत कोल इंडिया ने कंपनी में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है। लिस्टिंग के बाद भी कोल इंडिया की BCCL में हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत बनी रहेगी।

    आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला। बोली बंद होने तक यह इश्यू कुल 146 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ। कुल पब्लिक इश्यू का आकार करीब 1071 करोड़ रुपये था लेकिन इसकी मांग हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई। सब्सक्रिप्शन में संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा दिखाया जिनके लिए आरक्षित कोटा 300 गुना से अधिक भरा गया। इसके अलावा रिटेल कैटेगरी करीब 49 गुना शेयरहोल्डर कोटा लगभग 87 गुना और कर्मचारी वर्ग करीब 5 गुना सब्सक्राइब हुआ।ग्रे मार्केट की गतिविधियां भी इस आईपीओ के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं। BCCL के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले ग्रे मार्केट में करीब 60 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार करते दिखे। इसका अर्थ यह है कि 19 जनवरी को लिस्टिंग के दिन शेयर मजबूत शुरुआत कर सकते हैं।BCCL देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनियों में शामिल है। वित्त वर्ष 202425 में देश के कुल कोकिंग कोल उत्पादन में कंपनी का योगदान लगभग 58 प्रतिशत रहा। इसका प्रमुख संचालन झारखंड के झरिया और पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र में होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि BCCL आईपीओ की यह भारी सफलता PSU शेयरों पर निवेशकों के भरोसे की बहाली को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि सरकारी कंपनियों के शेयरों में फिर से निवेशकों की रुचि बढ़ रही है। बाजार विश्लेषक यह भी मानते हैं कि लिस्टिंग के दिन शेयर में सकारात्मक माहौल देखने को मिल सकता है खासकर तब जब ग्रे मार्केट में पहले ही मजबूत प्रीमियम नजर आ रहा है।कुल मिलाकर BCCL का आईपीओ न सिर्फ निवेशकों के लिए आकर्षक साबित हुआ है बल्कि यह संकेत देता है कि PSU सेक्टर में नए अवसर और निवेश की संभावनाएं मजबूत हैं। 19 जनवरी को स्टॉक एक्सचेंज में इसकी लिस्टिंग के बाद बाजार और निवेशकों के नजरिए पर इसके असर पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

  • भारतीय प्रकाशन उद्योग की बदली तस्वीर: 2026 में आएगी नई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट

    भारतीय प्रकाशन उद्योग की बदली तस्वीर: 2026 में आएगी नई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट


    नई दिल्ली। भारत के प्रकाशन उद्योग में तेजी से हो रहे बदलावों को समझने और उनका आकलन करने के लिए अब एक और अहम अध्ययन सामने आने वाला है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स एफआईपी ने नील्सनआईक्यू बुकडेटा के सहयोग से इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट – एडिशन 3 के लॉन्च की घोषणा कर दी है। यह रिपोर्ट प्रिंट बुक्स के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग और ऑडियोबुक के बढ़ते प्रभाव को न सिर्फ दर्ज करेगी बल्कि पहली बार उनके आर्थिक योगदान का भी विस्तृत विश्लेषण पेश करेगी।इस रिपोर्ट की घोषणा नई दिल्ली वर्ल्ड बुक फेयर 2026 के दौरान आयोजित एक मीडिया बातचीत में की गई। रिपोर्ट के अगस्त-सितंबर 2026 तक जारी होने की संभावना जताई गई है। प्रकाशन जगत से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह अध्ययन ऐसे समय में आ रहा है जब भारत में पढ़ने की आदतें प्लेटफॉर्म और कंटेंट की खपत तेजी से बदल रही है।

    एफआईपी के उपाध्यक्ष प्रणव गुप्ता ने बताया कि इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट का तीसरा संस्करण पहले के दोनों अध्ययनों से काफी अलग होगा। उन्होंने कहा कि अब तक की रिपोर्ट्स में मुख्य रूप से प्रिंट पब्लिशिंग पर फोकस किया गया था लेकिन नया संस्करण भारतीय बुक इंडस्ट्री की पूरी तस्वीर सामने लाएगा। इसमें प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल पब्लिशिंग के सभी स्वरूपों-ई-बुक्स और ऑडियोबुक-का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह भी आकलन किया जाएगा कि ये सभी प्रारूप भारतीय अर्थव्यवस्था में कितना योगदान दे रहे हैं।प्रणव गुप्ता ने इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2022 का हवाला देते हुए बताया कि उस अध्ययन के अनुसार भारत में 24000 से अधिक प्रकाशक सक्रिय हैं और हर साल 2.5 लाख से ज्यादा आईएसबीएन प्रकाशित होते हैं। उस रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि प्रिंट बुक मार्केट में स्कूल शिक्षा की हिस्सेदारी सबसे अधिक यानी 71 प्रतिशत थी जबकि उच्च शिक्षा का हिस्सा 25 प्रतिशत और ट्रेड पब्लिशिंग का योगदान करीब 4 प्रतिशत रहा।

    उन्होंने कहा कि नया संस्करण प्रिंट और डिजिटल दोनों प्रारूपों को एक साथ देखकर यह समझने की कोशिश करेगा कि प्रकाशन उद्योग किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। खास बात यह है कि पहली बार डिजिटल पब्लिशिंग के आर्थिक प्रभाव को आंकड़ों के साथ सामने रखा जाएगा जो उद्योग के लिए एक अहम संदर्भ साबित हो सकता है।नील्सनआईक्यू बुकडेटा इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विक्रांत माथुर ने बताया कि रिपोर्ट के पहले संस्करणों में कोविड-19 का प्रकाशन उद्योग पर प्रभाव शिक्षा अवसंरचना का विस्तार स्कूल बोर्डों में नामांकन के रुझान आयात-निर्यात कॉपीराइट नीतियां और पाइरेसी जैसी चुनौतियों का अध्ययन किया गया था।

    उन्होंने कहा कि अब पांच साल के अंतराल के बाद बाजार को दोबारा देखना जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि डिजिटल पब्लिशिंग किस तरह बढ़ी है उसका आकार क्या है और स्कूल उच्च शिक्षा तथा जनरल ट्रेड जैसे अलग-अलग सेगमेंट में उसका असर कैसा रहा है। इसके अलावा इस रिपोर्ट में पब्लिशिंग इंडस्ट्री की तुलना संगीत और फिल्म जैसे अन्य एंटरटेनमेंट सेक्टर से भी की जाएगी।उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिपोर्ट के निष्कर्ष न सिर्फ प्रकाशकों लेखकों और वितरकों के लिए उपयोगी होंगे बल्कि नीति-निर्माण और भविष्य की रणनीतियों को आकार देने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।

  • राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां

    राइडर्स की सुरक्षा पर केंद्र सरकार सख्त, ‘10 मिनट डिलीवरी’ के दावों से पीछे हटीं क्विक कॉमर्स कंपनियां


    नई दिल्ली।क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेज डिलीवरी को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच अब केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राइडर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकार की आपत्ति के बाद स्विगी और जेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी जैसे दावों को हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब डिलीवरी की होड़ में सड़क सुरक्षा और गिग वर्कर्स पर बढ़ते दबाव को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।

    सरकारी स्तर पर यह मुद्दा तब गंभीर रूप से सामने आया जब क्विक कॉमर्स कंपनियों के विज्ञापनों और प्रचार अभियानों में बेहद कम समय में सामान पहुंचाने को प्रमुखता दी जाने लगी। मंत्रालय का मानना है कि इस तरह के वादे डिलीवरी पार्टनर्स पर अप्रत्यक्ष लेकिन गहरा दबाव बनाते हैं। नतीजतन कई बार राइडर्स को समय पर डिलीवरी पूरी करने के लिए तेज ड्राइविंग करनी पड़ती है जिससे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों का खतरा बढ़ जाता है।मंगलवार को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में क्विक कॉमर्स कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में गिग वर्कर्स की सुरक्षा काम के घंटे भुगतान प्रणाली और डिलीवरी के दौरान पड़ने वाले दबाव जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के बाद कंपनियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी ब्रांडिंग और मार्केटिंग से ऐसी समय-सीमाएं हटाएं जो राइडर्स को जोखिम लेने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

    इससे पहले क्विक कॉमर्स सेक्टर की बड़ी कंपनी ब्लिंकिट ने अपने ऐप और प्रचार सामग्री से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा लिया था। अब स्विगी और जेप्टो ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपनी टैगलाइन और विज्ञापन रणनीति में बदलाव किया है। कंपनियां अब डिलीवरी की गति के बजाय उत्पादों की उपलब्धता सेवा की सुविधा और ग्राहकों को मिलने वाले विकल्पों पर जोर दे रही हैं।क्विक कॉमर्स मॉडल को लेकर यह सवाल लंबे समय से उठता रहा है कि क्या बेहद कम समय में डिलीवरी वास्तव में सुरक्षित और टिकाऊ है। सोशल मीडिया श्रमिक संगठनों और गिग वर्कर्स की ओर से बार-बार यह चिंता जताई गई कि कम समय की प्रतिस्पर्धा में राइडर्स को अपनी और दूसरों की सुरक्षा से समझौता करना पड़ता है। हाल के महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में गिग वर्कर्स की हड़तालों ने भी इस मुद्दे को और मुखर बना दिया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि विज्ञापनों से समय-सीमा हटाने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां अपनी तेज डिलीवरी क्षमता खो देंगी। डार्क स्टोर्स माइक्रो-वेयरहाउस और स्थानीय आपूर्ति नेटवर्क के चलते क्विक कॉमर्स कंपनियां पहले की तरह तेजी से ऑर्डर पूरा करती रहेंगी। फर्क बस इतना होगा कि अब मार्केटिंग में सबसे तेज होने के बजाय सबसे भरोसेमंद सुरक्षित और सुविधाजनक सेवा को प्राथमिकता दी जाएगी।यह कदम भारत की गिग इकोनॉमी में काम करने वाले लाखों डिलीवरी पार्टनर्स के लिए अहम माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा इन प्लेटफॉर्म्स से जुड़े हैं और उनकी सुरक्षा काम की शर्तों और अधिकारों को लेकर लंबे समय से स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग हो रही थी। केंद्र सरकार का यह हस्तक्षेप उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

  • Bank Holiday: बैंक जानें वालों के लिए अलर्ट, कल 16 जनवरी को इस राज्य में बैंकिंग सेवाएं रहेंगी बंद

    Bank Holiday: बैंक जानें वालों के लिए अलर्ट, कल 16 जनवरी को इस राज्य में बैंकिंग सेवाएं रहेंगी बंद

    नई दिल्ली जनवरी 2026 का महीना बैंकों से जुड़े कामों के लिहाज से थोड़ा सतर्क रहने वाला है. अलग-अलग राज्यों और शहरों में त्योहारों और खास मौकों की वजह से कई दिन बैंक बंद करने का फैसला लिया गया है. ऐसे में अगर आप किसी काम से बैंक ब्रांच जाने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि उस दिन आपके शहर में बैंक खुले रहेंगे या नहीं? जानकारी लिए बिना बैंक जाने से आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

    कल यानी 16 जनवरी को भी कुछ जगहों पर बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहने वाली हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बैंक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, 16 जनवरी को कुछ राज्यों में बैंक बंद करने का ऐलान किया गया है. इसलिए कल बैंक जाने से पहले चेक कर लें कि आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद. ताकि आपका कीमती समय और मेहनत दोनों बच सके….

    इस राज्य में 16 जनवरी को बैंक रहेंगे बंद

    कल यानी 16 जनवरी को तमिलनाडु में बैंकों को बंद करने का फैसला लिया गया है. आरबीआई की बैंक हॉलिडे लिस्ट के अनुसार, इस दिन राज्यभर में सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी. अगर आप तमिलनाडु में रहते हैं और बैंक से जुड़ा कोई काम है, तो बेहतर होगा कि आप किसी और दिन अपना काम पूरा करें.

    दरअसल, 16 जनवरी को तमिलनाडु में तिरुवल्लुवर दिवस मनाया जाता है. यह दिन महान तमिल संत और कवि तिरुवल्लुवर की याद में मनाया जाता है. इस अवसर पर आरबीआई ने राज्य में बैंक हॉलिडे घोषित किया है. तमिलनाडु को छोड़कर देश के बाकी सभी राज्यों में 16 जनवरी को बैंक सामान्य रूप से खुले रहेंगे.

    ऑनलाइन सुविधाएं रहेंगी चालू

    बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद भी ऑनलाइन सेवाएं पहले की तरह ही सुचारु रूप से चालू रहेंगी. ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाओं में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. बैंक ग्राहक यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और एटीएम जैसी सुविधाएं सामान्य दिनों की तरह ही इस्तेमाल कर सकेंगे.

    आप पैसे ट्रांसफर करने, बैलेंस चेक करने, बिल भुगतान करने और अन्य डिजिटल लेनदेन आसानी से कर सकेंगे, जिससे जरूरी काम में किसी तरह की रूकावट नहीं आएगी. हालांकि जिन कामों के लिए बैंक ब्रांच जाना जरूरी है, वैसे काम नहीं हो पाएंगे.

  • सेंसेक्स नहीं, कम महंगाई ने दी सोने-चांदी को उड़ान, बनाया नया रिकॉर्ड

    सेंसेक्स नहीं, कम महंगाई ने दी सोने-चांदी को उड़ान, बनाया नया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली। बुधवार के कारोबारी सत्र में कीमती धातुओं ने नया रिकार्ड बनाया। एमसीएक्स पर सोना 1,43,500 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,87,990 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। हालांकि दोपहर 12.16 बजे सोने ने 1,43,300 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,85,129 रुपए प्रति किलोग्राम पर कारोबार किया। पिछले कुछ दिनों में भी दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर को छुआ था।

    अमेरिकी महंगाई आंकड़ों का असर

    अमेरिका में दिसंबर के कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में महीने-दर-महीने महंगाई 0.2 प्रतिशत और साल-दर-साल 2.6 प्रतिशत रही, जो उम्मीद से कम थी। यह संकेत मिला कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक भविष्य में ब्याज दरें घटा सकता है। इसी कारण निवेशक सोने-चांदी की ओर आकर्षित हुए।

    वैश्विक तनाव बढ़ा रहे खरीदारी

    राहुल कलंत्री, कमोडिटी विशेषज्ञ, मेहता इक्विटीज लिमिटेड के अनुसार, ईरान में अशांति और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोना और चांदी खरीद रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका की ब्याज दरों और महंगाई के आंकड़े भी इन धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर रहे हैं।

    तकनीकी स्तर और निवेशकों के लिए संकेत

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोने को 1,37,310–1,39,550 रुपए के स्तर पर सपोर्ट और 1,44,350–1,46,670 रुपए के बीच रेजिस्टेंस मिलता है। चांदी के लिए 2,54,170–2,69,810 रुपए सपोर्ट और 2,79,810–2,84,470 रुपए रेजिस्टेंस पर बनी हुई है।

    उद्योग में मांग और सीमित आपूर्ति

    चांदी की मजबूत कीमतों के पीछे सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उद्योगों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति भी एक बड़ा कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि शॉर्ट और मीडियम-टर्म में चांदी की खरीदारी लगातार बनी रहेगी।

    आगे की संभावनाएं

    डॉलर की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका की सर्वोच्च अदालत के टैरिफ फैसले और वैश्विक तनाव की घटनाओं के चलते इस हफ्ते सोना और चांदी की कीमतों में हल्की उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। निवेशक सुरक्षित निवेश और तकनीकी स्तर को ध्यान में रखते हुए ही खरीदारी करें।

  • चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…

    चांदी में जबरदस्त उछाल, तीन दिन में ₹34 हजार की तेजी; सोना भी सर्वकालिक रिकॉर्ड पर…


    नई दिल्ली।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन IBJA के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।

    सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।

    अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों को चौंका दिया है। बुधवार को सोना और चांदी दोनों ही नई ऊंचाइयों पर पहुंच गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेज उछाल दर्ज किया गया है। बुधवार को एक किलो चांदी ₹14,145 महंगी होकर ₹2,77,175 के स्तर पर पहुंच गई। बीते महज तीन दिनों में चांदी की कीमतों में कुल ₹34 हजार से अधिक की छलांग लग चुकी है, जो हालिया वर्षों में सबसे तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।सोने की कीमतें भी ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाती नजर आ रही हैं। 24 कैरेट सोना बुधवार को ₹1,868 की मजबूती के साथ ₹1,42,152 प्रति 10 ग्राम पर खुला। यह अब तक का सर्वकालिक उच्च स्तर है। इससे पहले मंगलवार को सोना ₹1,40,482 प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर सोने को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प के रूप में स्थापित कर दिया है।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी ने कीमती धातुओं को मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के कमजोर होने से सोने की होल्डिंग कॉस्ट कम हो गई है, जिससे निवेशकों का रुझान तेजी से सोने की ओर बढ़ा है। वहीं चांदी को केवल कीमती धातु ही नहीं, बल्कि एक अहम औद्योगिक धातु के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।विशेषज्ञों के अनुसार चांदी की कीमतों में तेजी के पीछे सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर से आ रही मजबूत औद्योगिक मांग बड़ी वजह है। इसके अलावा अमेरिका में संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर कंपनियां पहले से चांदी का स्टॉक बढ़ा रही हैं, जिससे सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

    आईबीजेए द्वारा जारी किए गए सोने और चांदी के भाव में 3 प्रतिशत जीएसटी, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स का मार्जिन शामिल नहीं होता। इसी कारण दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में खुदरा स्तर पर कीमतें अलग-अलग हो सकती हैं। आईबीजेए के रेट का उपयोग रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की कीमत तय करने और बैंकों द्वारा गोल्ड लोन की गणना के लिए किया जाता है।अगर पिछले एक साल के प्रदर्शन पर नजर डालें, तो 2025 में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब ₹57,033 यानी लगभग 75 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं चांदी के दामों में ₹1,44,403 की जबरदस्त तेजी आई है, जो करीब 167 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाती है।

    भू-राजनीतिक तनाव, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक आर्थिक सुस्ती के संकेतों ने सोने को एक बार फिर सुरक्षित निवेश का मजबूत विकल्प बना दिया है। चीन सहित कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व में इजाफा कर रहे हैं, जिससे मांग और कीमतों दोनों को समर्थन मिल रहा है।बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले महीनों में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी बनी रह सकती है। हालांकि निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की चाल और जोखिम को समझते हुए ही निवेश का फैसला लें।