Category: Economy

  • FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा

    FY2026 में क्रेडिट ग्रोथ में उछाल: रिटेल और MSME सेक्टर बने सहारा


    नई दिल्ली।  भारत में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ ने जोरदार रफ्तार पकड़ी है। यस बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल कर्ज वितरण (क्रेडिट फ्लो) में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से रिटेल ग्राहकों और MSME सेक्टर की मजबूत मांग की वजह से आया है, जिसने अर्थव्यवस्था में नई जान फूंक दी है।

    रिपोर्ट के अनुसार, FY26 में कुल क्रेडिट फ्लो बढ़कर 25.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जो लगभग 26.1 लाख करोड़ रुपए के डिपॉजिट के बराबर है। रिटेल, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग इस ग्रोथ का प्रमुख आधार रही। हालांकि, डिपॉजिट ग्रोथ की गति धीमी रहने से बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी पर हल्का दबाव भी देखने को मिला है।

    इसी के चलते क्रेडिट-डिपॉजिट (C/D) रेशियो बढ़कर 82.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह संकेत देता है कि बैंक अब ज्यादा आक्रामक तरीके से कर्ज दे रहे हैं, जबकि जमा की रफ्तार उतनी तेज नहीं है।

    रिटेल लोन इस ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरा है। पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से बढ़कर 33 प्रतिशत हो गई है। टैक्स में राहत और GST से जुड़े फायदों के चलते लोगों की आय में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनकी कर्ज लेने की क्षमता भी मजबूत हुई है। खास बात यह है कि इस बार वाहन लोन ने हाउसिंग लोन को पीछे छोड़ दिया है और क्रेडिट ग्रोथ का सबसे बड़ा ड्राइवर बनकर सामने आया है।

    दूसरी ओर, लोन लेने के ट्रेंड में भी बदलाव देखने को मिला है। अब लोग अनसिक्योर्ड (बिना गारंटी) लोन की बजाय सिक्योर्ड लोन की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे बैंकिंग सिस्टम में जोखिम भी कम हो सकता है।

    इंडस्ट्रियल क्रेडिट में भी सुधार दर्ज किया गया है, जिसमें MSME सेक्टर की अहम भूमिका रही है। यह सेक्टर अब कुल औद्योगिक कर्ज का करीब एक-तिहाई हिस्सा बन चुका है। सरकार की क्रेडिट गारंटी स्कीम और MSME की नई परिभाषा ने इस सेगमेंट को मजबूती दी है। माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइज ने 2.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज जोड़ा, जबकि मीडियम एंटरप्राइज ने 63,000 करोड़ रुपए का योगदान दिया।

    हालांकि, रिपोर्ट में भविष्य को लेकर थोड़ी चिंता भी जताई गई है। FY27 में क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसके पीछे बढ़ती तेल कीमतें, कमजोर निर्यात और खाद्य महंगाई जैसे कारक जिम्मेदार हो सकते हैं। साथ ही, GST से मिलने वाले फायदों का असर कम होने से भी लोन की मांग प्रभावित हो सकती है।

  • केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

    केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी



    नई दिल्ली।  भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    क्या बोले Jitendra Singh?

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

    मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ी

    सरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

    नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं:

    नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू
    विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालू
    शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना

    ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे।

    किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज?

    दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे:

    इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
    नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)
    इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर
    रक्षा और एयरोस्पेस
    अंतरिक्ष तकनीक

    इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

    आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।

    क्यों है यह रणनीतिक कदम?

    वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।

  • LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस

    LIC को झटका: वित्त वर्ष 2022 के लिए इनकम टैक्स विभाग का डिमांड नोटिस


    नई दिल्ली।  देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी Life Insurance Corporation of India (एलआईसी) को इनकम टैक्स विभाग से बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने जानकारी दी है कि उसे वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भारी भरकम डिमांड नोटिस मिला है, जिसमें टैक्स और ब्याज मिलाकर कुल रकम 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठती है।

    कितना है टैक्स डिमांड?

    एलआईसी के मुताबिक Income Tax Department की असेसमेंट यूनिट ने:

    6,146.71 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में
    953.25 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में
    की मांग की है।

    यह डिमांड टैक्स अधिकारियों द्वारा मूल्यांकन के दौरान किए गए कुछ समायोजनों (adjustments) के कारण सामने आई है।

    किन वजहों से बना मामला?

    इनकम टैक्स विभाग ने एलआईसी की कुछ वित्तीय गणनाओं और दावों को स्वीकार नहीं किया। प्रमुख मुद्दे इस प्रकार हैं:

    अंतरिम बोनस को आय (Income) के रूप में शामिल करना
    जीवन सुरक्षा कोष (Life Fund) से हुए नुकसान को आय में जोड़ना
    नेगेटिव रिजर्व को आय मानना
    धारा 80M के तहत दावा की गई कटौतियों को खारिज करना
    TDS जमा करने में देरी से जुड़े ब्याज खर्च को अस्वीकार करना
    इन सभी कारणों से कंपनी पर यह अतिरिक्त टैक्स बोझ डाला गया है।

    एलआईसी ने क्या कहा?

    एलआईसी ने साफ किया है कि वह इस आदेश से सहमत नहीं है और इसे चुनौती देगी। कंपनी जल्द ही आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष अपील दायर करेगी और कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपना पक्ष रखेगी। कंपनी का यह भी कहना है कि इस नोटिस का उसके रोजमर्रा के कारोबार या संचालन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

    निवेशकों के लिए राहत की खबर

    दिलचस्प बात यह रही कि इस बड़े डिमांड नोटिस के बावजूद बाजार में निवेशकों का भरोसा बरकरार दिखा। National Stock Exchange of India पर एलआईसी का शेयर 20.90 रुपये (2.75%) की बढ़त के साथ 779.60 रुपये पर बंद हुआ।

    नियमों के तहत किया खुलासा

    एलआईसी ने यह जानकारी Securities and Exchange Board of India के LODR (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट) नियमों के तहत शेयर बाजार को दी है। इन नियमों के मुताबिक, सूचीबद्ध कंपनियों को ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।

    आगे क्या होगा?

    अब यह मामला अपील प्रक्रिया में जाएगा, जहां एलआईसी और टैक्स विभाग दोनों अपने-अपने तर्क पेश करेंगे। अंतिम फैसला आने में समय लग सकता है, लेकिन यह मामला बीमा सेक्टर और टैक्स कानूनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

  • इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें

    इजरायल-अमेरिका और ईरान तनाव से महंगा हुआ तेल, नेपाल-बांग्लादेश ने बढ़ाईं कीमतें


    नई दिल्ली। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कई देशों ने पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं, जबकि कुछ जगहों पर ईंधन की राशनिंग तक शुरू हो गई है।

    नेपाल में पेट्रोल-डीजल महंगा

    नेपाल में नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) ने पेट्रोल, डीजल और केरोसीन की कीमतों में 15 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें आधी रात से लागू हो गई हैं।

    पेट्रोल: 184.50 से 187 रुपये/लीटर (कैटेगरी के अनुसार)
    डीजल/केरोसीन: 164.50 से 167 रुपये/लीटर

    एनओसी ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेजी के कारण घरेलू कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

    बांग्लादेश में जेट फ्यूल 80% महंगा

    बांग्लादेश में हालात और ज्यादा गंभीर हैं। Bangladesh Energy Regulatory Commission ने जेट फ्यूल की कीमतों में करीब 80% की भारी बढ़ोतरी की है।

    घरेलू उड़ानों के लिए: 112.41 टका से बढ़कर 202.29 टका/लीटर
    अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए: 0.738 डॉलर से बढ़कर 1.3216 डॉलर/लीटर

    इस बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई यात्रा और कार्गो लागत पर पड़ेगा।

    पाकिस्तान और यूरोप भी प्रभावित

    पाकिस्तान में पहले से आर्थिक संकट के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20-25% तक उछाल दर्ज किया गया है। वहीं जर्मनी समेत कई यूरोपीय देशों में गैस और पेट्रोल के दाम 10-15% तक बढ़ गए हैं।

    थाईलैंड में शुरू हुई राशनिंग

    थाईलैंड में हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू करनी पड़ी है। इसका मतलब है कि एक व्यक्ति को सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है, ताकि सप्लाई संतुलित बनी रहे।

    क्या है राशनिंग का मतलब?

    जब किसी देश में ईंधन की भारी कमी हो जाती है या कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं, तो सरकार या पेट्रोल पंप यह तय कर देते हैं कि एक व्यक्ति एक बार में कितना तेल खरीद सकता है। इससे सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण किया जाता है।

    आगे क्या असर पड़ेगा?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो:

    तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं
    महंगाई में तेजी आएगी
    ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स महंगे होंगे
    आम लोगों पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ेगा

    ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण तेल महंगा हो रहा है, जिससे नेपाल, बांग्लादेश समेत कई देशों में ईंधन कीमतें बढ़ीं और कुछ जगह राशनिंग तक शुरू हो गई।

  • रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर

    रिपोर्ट का दावा: भारत में इस साल हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी रहेगी स्थिर


    नई दिल्ली। भारत में घर खरीदने का सपना देखने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। CBRE South Asia Pvt. Ltd. की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में देश में हाउसिंग अफोर्डेबिलिटी यानी घर खरीदने की क्षमता स्थिर रहने की संभावना है। बढ़ती आय और सरकार की सहायक नीतियों के चलते प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों का असर काफी हद तक संतुलित हो सकता है, जिससे मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    आय बढ़ेगी, EMI का बोझ होगा कम

    रिपोर्ट ‘इंडिया रेसिडेंशियल मार्केट आउटलुक 2026’ में कहा गया है कि 2021 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब लोगों की आय प्रॉपर्टी की कीमतों से तेज गति से बढ़ेगी। इसका सीधा फायदा होम बायर्स को मिलेगा क्योंकि उनकी EMI का बोझ कम होगा और वे आसानी से घर खरीदने का फैसला ले सकेंगे।

    बड़े शहरों में दिखेगा असर

    इस रिपोर्ट में मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों का विश्लेषण किया गया है। 2021 से 2024 के बीच इन शहरों में प्रॉपर्टी कीमतों और ब्याज दरों में तेजी के कारण अफोर्डेबिलिटी पर दबाव बढ़ा था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद जताई गई है।

    बदल रहा है रियल एस्टेट का ट्रेंड

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कम होती ब्याज दरें, धीमी कीमत वृद्धि और बढ़ती आय—ये तीनों मिलकर हाउसिंग डिमांड को मजबूत बनाएंगे। 2026 से 2028 के बीच EMI और आय का अनुपात स्थिर रहने से बाजार में संतुलन बनेगा और खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा।

    प्रीमियम और लग्जरी घरों की बढ़ी मांग

    रिपोर्ट में एक और दिलचस्प ट्रेंड सामने आया है-लोग अब प्रीमियम और लग्जरी घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। कुल बिक्री में इनकी हिस्सेदारी करीब 27% रही, जबकि इस सेगमेंट में बिक्री सालाना आधार पर 30% से ज्यादा बढ़ी है। यह संकेत देता है कि खरीदार अब बेहतर सुविधाओं और लाइफस्टाइल को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    2030 तक और मजबूत होगा सेक्टर

    रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को और मजबूती मिलेगी। बढ़ती आय, शहरीकरण और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण हाउसिंग सेक्टर में लंबे समय तक ग्रोथ बनी रहने की संभावना है।

    निवेश और खरीदारों के लिए सुनहरा मौका

    कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियां घर खरीदने वालों और निवेशकों दोनों के लिए अनुकूल होती दिख रही हैं। अगर ब्याज दरें नियंत्रित रहती हैं और आय में बढ़ोतरी जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में घर खरीदना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो सकता है।

  • शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल: सेंसेक्स 1,205 अंकों की छलांग!

    शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल: सेंसेक्स 1,205 अंकों की छलांग!


    नई दिल्ली । रविवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरा शेयर बाजार तेजी से बंद हो गया। वनप्लस 1,205 एनके या 1.63 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,273.45 पर बंद हुआ, जबकि एन कंसल्टेंसी 394.05 एनके या 1.72 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,306.45 पर बंद हुआ। बाजार में चौतरफ़ा तेजी से देखने को मिली और लगभग सभी व्यापारी हरे निशान में बंद हो गए।

    विशेष रूप से मैकेनिकल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 3.51 प्रतिशत, मैक्सिकन रियल्टी 2.69 प्रतिशत, मेडीक लार्जकैप के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप टुकड़ियों में भी जगह रही। मैडम मिडकैप 100 टुकड़े 1,244.05 अंक या 2.30 प्रतिशत की तेजी के साथ 55,331.05 पर और प्रतिभावान मिडकैप 100 टुकड़े 401.35 अंक या 2.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 15,896.55 पर बंद हुए।

    इलेक्ट्रॉनिक्स में अल्ट्राटेक वैलिडीज, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, टाइटन, इंडिगो, ट्रेंट, एमएंडएम, टाटा स्टील, एलसीडी, सन मेडिसिन, बजाज फिनसर्व, अदानी पोर्ट्स, एशियन पेंट्स और रैम्स बैंक प्रमुख गेनर रह रहे हैं। वहीं, टेक महिंद्रा, पावर इलेक्ट्रानिक्स, टीसीएस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लूजर्स शामिल हैं। तेजी के शेयरों की सूची में सभी बैंकों का बाजार पूंजीकरण लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का उछाल 4.31 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    मिथाइल कैथोलिक और डेरिवेटिव्स के प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि मिस्टिक ने लगातार दूसरे दिन रेजीडेंसी के साथ कारोबार शुरू किया और दिन के दौरान बढ़त के साथ बंद हो गया। उन्होंने कहा कि जादूगर 23,460-23,465 के बीच प्रतिद्वंद्वियों का सामना कर रहा है। अगर इस जोन को पार करता है तो यह 23,600 और फिर 23,800 तक जा सकता है। गिरावट की स्थिति में 23,150-23,100 लेवल सपोर्ट का काम करेंगे।

    विशेषज्ञ के अनुसार, बाजार में तेजी का मुख्य कारण कच्चे तेल की उपज में गिरावट, वैश्विक बाजारों और ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव में कमी मानी जा रही है। इन ऑब्जेक्ट्स से सुपरमार्केट में खरीदारी का रूझान बढ़ा और भारतीय शेयर बाजार में स्टॉक मार्केट देखने को मिला।

  • सहकारी लाभ का फायदा, अब डिविडेंड इनकम पर नहीं लगेगा टैक्स-सरकार का नया नियम टैक्स में राहत! केंद्र ने को-ऑपरेटिव डिविडेंड पर तीन साल की छूट की घोषणा

    सहकारी लाभ का फायदा, अब डिविडेंड इनकम पर नहीं लगेगा टैक्स-सरकार का नया नियम टैक्स में राहत! केंद्र ने को-ऑपरेटिव डिविडेंड पर तीन साल की छूट की घोषणा


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को को-ऑपरेटिव डिविडेंड इनकम पर बड़ा कदम सही हुए तीन साल की टैक्स छूट देने की घोषणा की। अब नेशनल को-ऑपरेटिव फेडरेशन से मिलने वाली डिविडेंड आय पर इस अवधि के दौरान कर नहीं लगेगा। यह पहले देश के छोटे और मध्यम को-ऑपरेटिव को सशक्त बनाने और अधिक लोगों को इनसे जोड़ने के उद्देश्य से की गई है।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कहा कि टैक्स छूट का मकसद कम इच्छुक वाले सदस्यों को प्रोत्साहित करना है, ताकि को-ऑपरेटिव से जुड़े लोग रुकें। उन्होंने बताया कि को-ऑपरेटिव, एमएसएमई और किसान मिलकर देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और रोजगार के अवसर सृजित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने इसे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और समावेशी विकास के लिए जरूरी कदम बताया।

    वाय ने फाइनेंस बिल पर चर्चा में डेटा सेंटर सेवाओं से जुड़े नए प्रावधान का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, सेफ हार्बर नियम के तहत विदेशी उधार को सेवाएं देने वाली भारतीय कंपनियों को लागत पर 15 प्रतिशत मार्जिन मिलेगा। इसका उद्देश्य भारत में वास्तविक और लाभदायक संचालन सुनिश्चित करना और फर्जी उधार के निर्माण को रोकना है। उन्होंने सरकारी खर्च की शिफ्टिंग पर भी जोर दिया और बताया कि केंद्र ने उपकर और शिफ्टिंग से लागू की गई राशि का उपयोग जन कल्याण के लिए किया है।

    फाइनेंस बिल के अन्य उपायों में तकनीकी चूक पर लगने वाले जुर्माने को निश्चित शुल्क में बदलना शामिल है, जिससे व्यवसायों के लिए अनुपालन आसान होगा। इसके अलावा, हवाई अड्डे पर विवाद कम करने और यात्रियों के लिए प्रक्रिया सुलभ बनाने के लिए यात्री भट्टों को युक्तिसंगत बनाया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इन पैदल का उद्देश्य प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करना, व्यापार में आसानी बढ़ाना और आर्थिक विकास से समाज के व्यापक वर्ग को लाभ पहुंचाना है।

  • विशेषज्ञों की चेतावनी: वैश्विक झटकों के सामने कमजोर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, सुधार न हुए तो मुश्किलें बढ़ेंगी

    विशेषज्ञों की चेतावनी: वैश्विक झटकों के सामने कमजोर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, सुधार न हुए तो मुश्किलें बढ़ेंगी

    इस्लामाबाद। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आयातित ईंधन पर अधिक निर्भरता, कमजोर विदेशी वित्तीय स्थिति और सीमित सरकारी खर्च की क्षमता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वैश्विक झटकों के प्रति काफी संवेदनशील बनी हुई है। अगर जल्द ही बड़े आर्थिक सुधार नहीं किए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

    डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा हाई-ऑक्टेन ईंधन पर पेट्रोलियम शुल्क बढ़ाने का कदम कुछ हद तक सही माना जा रहा है, क्योंकि यह मुख्य रूप से महंगी और लग्जरी गाड़ियों के उपयोगकर्ताओं पर लागू होता है। इस फैसले से सरकार हर महीने लगभग 9 अरब रुपए जुटा रही है, जिसका इस्तेमाल आम लोगों को बढ़ती तेल कीमतों से राहत देने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल अस्थायी राहत है और अर्थव्यवस्था की गहरी समस्याओं को हल नहीं करता।

    इन गहरी समस्याओं में आयातित ईंधन पर निर्भरता, विदेशी मुद्रा की कमजोर स्थिति और सीमित वित्तीय संसाधन शामिल हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनी हुई है। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने भी इस स्थिति की गंभीरता को स्वीकार किया और कहा कि बिना ठोस रणनीति के संकट लंबे समय तक जारी रह सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा की मांग को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। इसमें बाजार, रेस्तरां और व्यापारिक संस्थानों को समय से पहले बंद करना जैसे उपाय शामिल हैं, जिन्हें अब तक राजनीतिक कारणों से टाला गया था। इसके अलावा, सप्लाई चेन, उत्पादन और व्यापार मार्गों पर प्रभाव के चलते तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं। इससे यह स्पष्ट है कि आर्थिक सुधार और स्थायी नीतियों को तुरंत लागू करना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

  • बढ़ते व्यापारिक सहयोग के संकेत, भारत-ताइवान का कारोबार 12 अरब डॉलर से ऊपर

    बढ़ते व्यापारिक सहयोग के संकेत, भारत-ताइवान का कारोबार 12 अरब डॉलर से ऊपर


    नई दिल्ली भारत और ताइवान के बीच सकल व्यापार 2025 के आधार पर 17 प्रतिशत अनुपात 12.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। यह जानकारी ताइपे निकोलाईक एंड कल्चरल सेंटर (टीआइसीसी) ने जारी किये आंकड़े में दी। भारत का ताइवान 3.3 अरब डॉलर का है, जिसमें ईंधन, एल्यूमीनियम, लोहा, स्टील, जैविक रसायन और प्लास्टिक शामिल हैं। ताइवान का भारत 9.2 अरब डॉलर का है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, इंटेग्रेटेड सर्किट, प्लास्टिक, बायोलॉजिकल केमिकल, इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रानिक्स, लोहा और स्टील प्रमुख हैं।

    टीआईसीके के डायरेक्ट डिवीजन के डायरेक्टर एस्टेला चेन ने ‘ताइवान एक्सीलेंस’ एक्सपो के दौरान कहा कि ताइवान सेमीकंडक्टर, स्टूडियो सर्वर, प्लेसओटी टोटल सॉल्यूशन और एज लीडर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल भारत-ताइवान व्यापार ने 12.5 अरब डॉलर का रिकॉर्ड स्तर गिरा दिया और दोनों देशों के बीच निवेश और व्यापार सहयोग मजबूत हुआ।

    चेन ने आगे कहा कि ताइवानी उद्योगपति भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और ऑटोमोटिव सेक्टर में सक्रिय निवेश कर रहे हैं, जबकि भारतीय उद्योगपति ताइवान के आईटी और इंजीनियरिंग क्षेत्र में अवसर तलाश रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ताइवान भारत के प्रमुख पहल जैसे डिजिटल इंडिया और इंडिया मिशन में शामिल होकर योगदान दे रहे हैं। टेक्नोलॉजी और आईओटी मैन्युफैक्चरिंग से लेकर एडवांस हाई-टेक उत्पाद डिजाइन तक ताइवान की विशेषज्ञता भारत के डिजिटल बदलाव में मदद कर रही है।

    वर्तमान में भारत में 300 से अधिक ताइवानी पर्यटक सक्रिय हैं। हालाँकि, अमेरिका (246.43 अरब डॉलर), चीन (100.1 अरब डॉलर), दक्षिण कोरिया (90.2 अरब डॉलर) और जापान (84.85 अरब डॉलर) जैसे देशों के साथ ताइवान के व्यापार की तुलना में भारत के साथ व्यापार में और अधिक वृद्धि की संभावना है। यह बढ़ती आर्थिक और तकनीकी सहायता के लिए नई स्टैमिना का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है।

  • कृषि मंत्रालय की सख्त तैयारी! जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के साथ खाद आपूर्ति पर फोकस

    कृषि मंत्रालय की सख्त तैयारी! जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के साथ खाद आपूर्ति पर फोकस


    नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के बीच देश में खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने, कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने तथा खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा पर चर्चा हुई। बैठक का उद्देश्य किसानों तक समय पर खाद, बीज और अन्य जरूरी संसाधन पहुंचाना और वितरण प्रणाली को उचित बनाना बताया गया।

    बैठक में मंत्री ने ‘फार्मर आईडी’ प्रणाली को तेज करने के निर्देश दिए ताकि खाद और बीज का वितरण पूरे देश में समान और बिना बांट के हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए जल्द ही बैठक की जाएगी। इसके अलावा, मंत्री ने कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और राज्य अमेरिकियों को कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

    बैठक में कृषि निकायों और बीज सुखाने के लिए जरूरी गैसों की उपलब्धता की समीक्षा की गई। दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए रोपण सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता पर भी ध्यान दिया गया। मंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य पशुओं के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा न आए। कृषि क्षेत्र की निगरानी के लिए एक ‘स्पेशल सेल’ बनाया गया है, जो चौबीसों घंटे काम करेगा और हर हफ्ते खाद, बीज और किसानों की उपलब्धता की रिपोर्ट सीधे कृषि मंत्री को देगा।

    शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभाने और किसानों तक जरूरी संसाधन समय पर पहुंचाने के लिए पूरी उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 10 दशकों में देश में कृषि उत्पादन लगभग 44 प्रतिशत बढ़ा है और कई किसानों की आय दोगुनी हुई है। केंद्र सरकार किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड खरीद भी शामिल है।