Category: Economy

  • शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।

    शेयर बाजार समाचार, सेंसेक्स गिरावट, निफ्टी अपडेट, विदेशी निवेशक बिकवाली, आईटी शेयर, ऑटो सेक्टर, आईपीओ न्यूज़।


    नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ सत्रों से जारी अनिश्चितता का माहौल मंगलवार को भी बरकरार रहा। घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में दबाव में नजर आयाजिसके चलते प्रमुख सूचकांकों ने लाल निशान के साथ विदाई ली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज BSE का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 245 अंक फिसलकर 83,383 के स्तर पर बंद हुआवहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज NSE का निफ्टी भी 67 अंकों की कमजोरी के साथ 25,666 के स्तर पर आ गया। बाजार की इस गिरावट में सबसे बड़ी भूमिका ऑटोआईटी और एफएमसीजी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में हुई बिकवाली ने निभाई।

    बिकवाली के चक्रव्यूह में फंसे निवेशक मंगलवार के कारोबार में निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल साफ दिखाई दिया। सेंसेक्स के 30 प्रमुख शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार जानकारों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों FII द्वारा भारतीय बाजार से लगातार पूंजी निकालने और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता के कारण घरेलू सेंटिमेंट कमजोर हुआ है। आंकड़ों के मुताबिक13 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने 1,499 करोड़ रुपए के शेयर बेचेजिसने बाजार के मोमेंटम को धीमा कर दिया।

    आईटी और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा ‘दर्द’ सेक्टर आधारित प्रदर्शन पर नजर डालें तो आईटी IT और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे ज्यादा मुनाफावसूली देखी गई। हालिया तेजी के बाद इन सेक्टर्स में निवेशकों ने अपनी पोजीशन हल्की की। इसके विपरीतमेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में थोड़ी खरीदारी दर्ज की गईजिससे बाजार को निचली स्तरों पर कुछ सहारा मिला। घरेलू संस्थागत निवेशकों DII ने भी 1,181 करोड़ रुपए की खरीदारी कर बाजार को संभालने का प्रयास कियालेकिन एफआईआई FII की बिकवाली का दबाव भारी पड़ा।

    वैश्विक संकेतों का मिला-जुला असर अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेत मिले। जहां जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ बंद हुएवहीं चीन के शंघाई कंपोजिट में गिरावट रही। अमेरिकी बाजारोंविशेषकर डाउ जोंस में रही 0.80% की गिरावट का असर भी भारतीय बाजार की ओपनिंग और क्लोजिंग पर स्पष्ट रूप से देखा गया। ब्याज दरों को लेकर वैश्विक अनिश्चितता ने निवेशकों को जोखिम लेने से दूर रखा है।

    प्राइमरी मार्केट में हलचल और आगे की राह सेकेंडरी मार्केट में जारी उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की नजर आईपीओ मार्केट पर बनी हुई है। अमागी मीडिया लैब्स के आईपीओ का दूसरा दिन रहाजिसके जरिए कंपनी 1,788 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करेगा। फिलहालछोटे और मध्यम निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करने की सलाह दी जा रही है।

  • दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची

    दिसंबर में थोक महंगाई में इजाफा, दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंची


    नई दिल्ली । देश में थोक स्तर पर महंगाई एक बार फिर बढ़ती नजर आई है। विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि के कारण दिसंबर 2025 में थोक मूल्य सूचकांक WPI आधारित मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 0.83 प्रतिशत पर पहुंच गई। यह सितंबर 2025 के बाद पहली बार है जब थोक महंगाई की दर शून्य से ऊपर दर्ज की गई है।सरकारी आंकड़ों के अनुसारनवंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर शून्य से नीचे रही थी और यह माइनस 0.32 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वहींएक साल पहले दिसंबर 2024 में थोक महंगाई दर 2.57 प्रतिशत के स्तर पर थी। इस तरह साल-दर-साल तुलना में थोक महंगाई अब भी अपेक्षाकृत निचले स्तर पर हैलेकिन हालिया बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव के संकेत मिलते हैं।

    विनिर्मित उत्पादों ने बढ़ाई महंगाई

    दिसंबर में थोक महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में इजाफा रहा। विनिर्मित वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा योगदान होता है और इनकी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी भी समग्र महंगाई दर को प्रभावित करती है। उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसारकच्चे माल की लागतपरिवहन खर्च और मांग में धीरे-धीरे हो रही बढ़ोतरी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं।

    तीन महीने बाद राहत खत्म

    सितंबर 2025 के बाद से लगातार तीन महीनों तक थोक महंगाई दर शून्य के आसपास या उससे नीचे बनी हुई थीजिससे उद्योग और व्यापार जगत को कुछ राहत मिली थी। हालांकि दिसंबर में दर के फिर से सकारात्मक क्षेत्र में आने से यह संकेत मिलता है कि कीमतों में स्थिरता की अवधि अब खत्म हो सकती है।

    खुदरा महंगाई से अलग संकेत

    थोक महंगाई और खुदरा महंगाई CPI के रुझान अक्सर अलग-अलग होते हैं। थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिख सकता है। ऐसे में दिसंबर के आंकड़े आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर संभावित दबाव की ओर इशारा कर सकते हैंहालांकि इसका सीधा और त्वरित असर होना जरूरी नहीं है।

    आगे क्या संकेत

    अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी फिलहाल चिंताजनक नहीं हैलेकिन अगर विनिर्मित उत्पादों और कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा होता रहातो इसका असर उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। दिसंबर 2025 में थोक मुद्रास्फीति दर का 0.83 प्रतिशत पर पहुंचना यह दर्शाता है कि कीमतों में गिरावट का दौर थम गया है और महंगाई धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। हालांकि मौजूदा स्तर अभी नियंत्रण में हैलेकिन सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह एक संकेत है कि महंगाई के रुझानों पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

  • थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी

    थोक महंगाई में बढ़ोतरी, लेकिन रोजमर्रा की खाने की वस्तुएं नहीं हुईं महंगी


    नई दिल्ली। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में थोक कीमतों पर आधारित भारत की महंगाई दर (WPI) 0.83 प्रतिशत रही। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्मित वस्तुओं और खनिजों की कीमतों में इजाफे के कारण हुई। खाने-पीने की चीजों की थोक कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, इसलिए खाद्य महंगाई दर शून्य प्रतिशत रही। इसका मतलब यह है कि पिछले साल की तुलना में खाने की चीजें महंगी नहीं हुईं, जिससे आम जनता को राहत मिली।

    विनिर्मित वस्तुओं और अन्य समूहों का असर
    थोक महंगाई में सबसे बड़ा हिस्सा रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के समूह का वजन 64.23 प्रतिशत है। दिसंबर में इस समूह की कीमतों में 0.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस समूह में शामिल 22 उत्पादों में से 13 की कीमतें बढ़ीं, 8 उत्पादों की कीमतें घटीं और एक उत्पाद की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। कीमतों में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मूल धातुएं, रसायन और रासायनिक उत्पाद, वस्त्र और गैर-धातु खनिज उत्पादों में हुई।

    वहीं, रबर और प्लास्टिक उत्पाद, खाद्य उत्पाद, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक सामान, कागज और पेय पदार्थों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

    पिछले महीनों का रुझान
    नवंबर 2025 में थोक महंगाई दर -0.32 प्रतिशत थी, जबकि अक्टूबर में यह -1.21 प्रतिशत रही थी। पिछले साल नवंबर में थोक महंगाई 2.16 प्रतिशत थी। दिसंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित खुदरा महंगाई दर 1.33 प्रतिशत रही, जो नवंबर के 0.71 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है।
    खाद्य महंगाई लगातार सातवें महीने नकारात्मक रही (-2.71 प्रतिशत), जिससे आम लोगों के घर के बजट को स्थिरता और राहत मिली।

    आरबीआई की प्रतिक्रिया और आर्थिक संकेत
    भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए महंगाई का अनुमान 2.6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया। आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई घटने के कारण रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई है, जो अब 5.25 प्रतिशत हो गई है।

    उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 8.2 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि और महंगाई में गिरावट ने भारत को एक खास ‘सुनहरा समय’ दिया है, जिसमें विकास और स्थिरता दोनों साथ-साथ चल रहे हैं।

    कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में महंगाई नियंत्रण में रही, विनिर्मित वस्तुओं में मामूली बढ़ोतरी और खाद्य महंगाई में लगातार कमी ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी। आम लोगों के लिए खर्च करने की क्षमता बढ़ी और RBI ने रेपो रेट में कटौती कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया।

  • 2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता

    2026 में भारतीय शेयर बाजार की मजबूत शुरुआत, आम बजट से मिलेगी नीतिगत स्थिरता


    नई दिल्ली। बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार पिछले सालों की स्थिरता के बाद अब 2026 में निवेशकों के लिए बेहतर अवसर पेश कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शेयरों के मूल्यांकन ठीक हैं, कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदें यथार्थवादी हैं और देश की आर्थिक नींव मजबूत है। हालांकि, वैश्विक घटनाएं निवेशकों के लिए कभी-कभी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं।


    मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार

    स्मॉलकेस मैनेजर्स का कहना है कि भारत की मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति अभी भी मजबूत है। देश में नियंत्रित महंगाई, ब्याज दरों में कटौती, टैक्स में राहत और जीएसटी में छूट के कारण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। यह कदम उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ाएंगे और कर्ज लेना आसान बनाएंगे।

    सोनम श्रीवास्तव, राइट रिसर्च की संस्थापक, बताती हैं कि 2026 में बाजार 2025 की तुलना में ज्यादा संतुलित और सकारात्मक है। उन्होंने कहा कि निवेश से मिलने वाला लाभ कंपनियों की कमाई पर आधारित होगा, न कि केवल शेयरों की कीमत बढ़ने पर।


    लार्ज, मिड और स्मॉल कैप शेयरों का परिदृश्य

    वेल्थट्रस्ट कैपिटल की स्मॉलकेस मैनेजर और सीईओ स्नेहा जैन के अनुसार, 2025 में मूल्यांकन में गिरावट के बाद अब लार्ज कैप कंपनियों के शेयर मिड और स्मॉल कैप से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। लार्ज कैप कंपनियों की बैलेंस शीट, कैश फ्लो और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत है। इसलिए अगले 6 से 8 महीनों में ये निवेशकों के लिए अपेक्षा से अधिक आकर्षक साबित हो सकते हैं।

    स्नेहा जैन बताती हैं कि लार्ज कैप को ज्यादा मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो में स्थिरता और मजबूत आधार देने के लिए रखना चाहिए। इसके अलावा, सरकार की राजकोषीय अनुशासन नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग और एमएसएमई सेक्टर को समर्थन, लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की स्पष्टता, अल्पकालिक प्रोत्साहनों से ज्यादा अहम हैं।


    बजट और निवेशकों की भागीदारी

    प्राची देउस्कर, लोटसड्यू वेल्थ एंड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स की सह-संस्थापक, कहती हैं कि आगामी केंद्रीय बजट बुनियादी ढांचे, औपचारिक अर्थव्यवस्था और वित्तीय अनुशासन से जुड़े कदम बढ़ाएगा। इससे घरेलू निवेशकों की वित्तीय भागीदारी बढ़ सकती है।

    एमएसएमई सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिए फाइनेंस तक आसान पहुंच, क्रेडिट गारंटी और उत्पादकता बढ़ाने व बाजार तक पहुंच को मजबूत करने वाले कदम भी देखने को मिल सकते हैं।


    निवेशकों के लिए सलाह

    विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में निवेश करने वाले निवेशकों को सोच-समझकर कंपनियों के कमाई के आधार पर शेयर चुनने चाहिए। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मजबूत आर्थिक नींव और संतुलित बाजार संभावनाओं को बढ़ा रहे हैं। निवेशकों के लिए यह साल लंबी अवधि के फायदे के लिहाज से अवसरपूर्ण साबित हो सकता है।

  • ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    ₹70,000 है मंथली सैलरी, 20 साल के लिए मैक्सिमम कितना मिल सकता है Home Loan? समझें EMI का गणित

    नई दिल्ली। अगर आपकी मंथली सैलरी ₹70,000 है और आप अपना घर खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो सबसे पहला सवाल यही है कि बैंक आपको अधिकतम कितना होम लोन दे सकता है। लोन की राशि सीधे आपकी आय, मौजूदा खर्च, ब्याज दर और लोन अवधि पर निर्भर करती है। 20 साल की अवधि के लिए होम लोन लेते समय EMI कैसे तय होती है और आपकी सैलरी के हिसाब से बैंक कितना लोन अप्रूव कर सकता है, आइए इस EMI के गणित को आसान शब्दों में समझते हैं। इससे आपको प्लानिंग में मदद मिलेगी।
    सबसे सस्ता होम लोन
    कोई भी बैंक जिस सबसे शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन या अन्य लोन उपलब्ध कराते हैं, वही उस बैंक का सबसे सस्ता लोन होता है। उदाहरण के लिए मौजूदा समय में बैंक ऑफ इंडिया या बैंक ऑफ महाराष्ट्र महज 7.10 प्रतिशत की शुरुआती ब्याज दर पर होम लोन ऑफर कर रहे हैं। बैंक ब्याज दर आपकी इनकम, उम्र, सिबिल स्कोर और लोन रीपेमेंट की अवधि के मुताबिक तय करती है। होम लोन में एक बात समझ लें होम लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी कम होगी, ब्याज आप उतना कम चुकाएंगे। लोन की रीपेमेंट अवधि जितनी ज्यादा होगी तो आपको ब्याज उतना ही ज्यादा चुकाना होगा।

    ₹70,000 है मंथली सैलरी पर मैक्सिमम होम लोन
    बैंक ऑफ इंडिया के होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आपकी मंथली सैलरी 70,000 रुपये है। आपका पिछला कोई बकाया लोन या ईएमआई नहीं चल रहा है तो 7.10 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 साल की रीपेमेंट अवधि के लिए आपको मैक्सिमम ₹50,40,000 तक होम लोन मिल सकेगा। 20 साल के लिए इसकी ईएमआई ₹39,378 बनेगी। इस आधार पर आप इस होम लोन पर ₹44,10,760 सिर्फ ब्याज के तौर पर चुकाएंगे। यानी आखिर में बैंक को ₹94,50,760 चुकाएंगे। इतनी सैलरी पर अगर आप 15 साल के लिए होम लोन लेते हैं तो आपको मैक्सिमम ₹46,43,818 होम लोन मिलेगा।

  • शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ

    शेयर बाजारों में गिरावट सेंसेक्स 250 अंक टूटा; निफ्टी भी गिरकर बंद हुआ


    नई दिल्ली । मंगलवार को शेयर बाजारों में गिरावट का रुख देखा गया। विदेशों से मिले मिश्रित संकेतों और घरेलू स्तर पर निवेशकों के बीच सतर्कता की भावना ने बाजार को दबाव में डाला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 250.48 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 83 627.69 अंक पर बंद हुआ। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 सूचकांक भी 57.95 अंक यानी 0.22 प्रतिशत गिरकर 25, 732.30 अंक पर रहा विदेशी बाजारों से मिले संकेतों में मिश्रित रुझान देखे गए जिससे घरेलू निवेशकों ने सतर्कता बरती। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई जो भारतीय बाजारों पर असर डालने का कारण बनी। इसके अलावा घरेलू स्तर पर भी कुछ प्रमुख कंपनियों के तिमाही परिणामों को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी रही जिससे बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ा।
    इस गिरावट के बावजूद विश्लेषकों का मानना है कि यह कोई लंबी अवधि की मंदी नहीं है। वे मानते हैं कि आगामी दिनों में बाजार में पुनः सुधार की संभावना हो सकती है खासकर अगर वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ बेहतर होती हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी पोर्टफोलियो को सावधानीपूर्वक देखें और लंबी अवधि के लिए निवेश करें। वहीं कुछ विश्लेषकों का यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू मजबूत हैं और आने वाले समय में सकारात्मक रुझान दिख सकते हैं। सरकार के आर्थिक सुधारों और कॉरपोरेट क्षेत्र में संभावित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए बाजार में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और निवेशकों को सतर्क रहना होगा।
    इसी के साथ मंगलवार को मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की गिरावट आई। मिडकैप इंडेक्स में 0.32 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट आई। बैंकों और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भी दबाव देखा गया जबकि ऊर्जा और कच्चे तेल से संबंधित कंपनियों में कुछ राहत मिली। कुल मिलाकर मंगलवार का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजारों के लिए नकारात्मक रहा हालांकि आने वाले दिनों में कुछ सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशकों के लिए सलाह है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति को समझते हुए अपने निवेश निर्णय लें और लघु अवधि के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए धैर्य रखें।

  • कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की

    कैट ने खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की मांग की


    नई दिल्ली । अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ कैट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खुदरा व्यापारियों के हितों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। कैट का कहना है कि बजट में खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए और साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए ताकि व्यापारियों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े।
    कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक सीट से लोकसभा सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने मंगलवार को बताया कि संगठन ने वित्त मंत्री के समक्ष कुछ प्रमुख सुझाव रखे हैं। इन सुझावों में व्यापार के लिए सम्मान सरलता सुरक्षा और समान अवसर प्रदान करने की बात की गई है। खंडेलवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की है जिनमें “आत्मनिर्भर भारत” “मेक इन इंडिया” “डिजिटल इंडिया” और “लोकल के लिए वोकल” जैसे अभियानों ने देश के व्यापारिक वातावरण को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि अब आगामी बजट में इन पहलों को और भी मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि व्यापारियों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।

    सस्ते ऋण की आवश्यकता
    कैट ने यह स्पष्ट किया है कि खुदरा व्यापारियों के लिए सस्ते ऋण की उपलब्धता व्यापार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वर्तमान में व्यापारियों को उच्च ब्याज दरों पर ऋण मिलता है जिससे उनके लिए व्यापार में वृद्धि करना और नई चुनौतियों का सामना करना मुश्किल हो जाता है। अगर सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाती है तो छोटे और मंझले व्यापारी अपनी व्यापारिक गतिविधियों को बेहतर तरीके से चला सकते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा व्यापारियों को ऋण के लिए कागजी प्रक्रिया में भी सरलता की आवश्यकता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि ऋण लेने की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाया जाए ताकि व्यापारी समय और श्रम की बचत कर सकें और अपने व्यापार को गति दे सकें।
    ई-कॉमर्स पर नियंत्रण की आवश्यकता
    कैट ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर बेईमानी से प्रतिस्पर्धा की वजह से खुदरा व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े पैमाने पर डिस्काउंट और भारी प्रमोशन करती हैं जिनका छोटे व्यापारियों से मुकाबला करना मुश्किल हो जाता है। कैट ने वित्त मंत्री से यह अनुरोध किया कि ई-कॉमर्स के नियमों को सख्त किया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि यह प्लेटफॉर्म्स खुदरा व्यापारियों के लिए एक समान अवसर प्रदान करें न कि उन्हें नुकसान पहुँचाए। कैट का कहना है कि इन अनुचित प्रतिस्पर्धाओं के कारण खुदरा व्यापारियों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि उनका सम्मान भी प्रभावित हो रहा है। यदि ई-कॉमर्स कंपनियों को नियंत्रित किया जाता है तो पारदर्शिता और समता को बढ़ावा मिलेगा जिससे सभी व्यापारी एक समान तरीके से व्यापार कर सकेंगे।

    सरकारी पहलों का महत्व
    प्रवीन खंडेलवाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आत्मनिर्भर भारत” अभियान के तहत छोटे और मंझले व्यापारियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कई अवसर दिए गए हैं। वहीं मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” जैसे अभियानों ने भारतीय व्यापारियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम किया है। हालांकि उन्होंने कहा कि इन पहलों को और भी मजबूत किया जाना चाहिए ताकि व्यापारियों को अधिक प्रोत्साहन मिले और वे वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकें।
    कैट का यह सुझाव है कि आगामी बजट में छोटे और मंझले खुदरा व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए सस्ते ऋण की सुविधा प्रदान की जाए साथ ही ई-कॉमर्स पर नियंत्रण भी सुनिश्चित किया जाए। यह कदम न केवल व्यापारियों के लिए अवसर पैदा करेगा बल्कि भारत के समग्र व्यापारिक वातावरण को भी एक नई दिशा दे सकता है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को और भी सशक्त किया जाए ताकि देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार क्षेत्र में संतुलन बना रहे और छोटे व्यापारियों को भी समान अवसर प्राप्त हो सकें।

  • रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने की चमक पड़ी फीकी, चांदी ने ज़ोरदार वापसी कर पकड़ी रफ्तार

    नई दिल्ली। सोमवार को ऐतिहासिक ऊंचाई छूने के बाद हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को कीमती धातुओं के बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी ने गिरावट से उबरते हुए मजबूती दिखाई।

    एमसीएक्स पर सोना कमजोर, चांदी में उछाल

    एमसीएक्स पर फरवरी डिलीवरी वाला सोना 0.32 प्रतिशत टूटकर 1,41,577 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं मार्च डिलीवरी वाली चांदी 0.50 प्रतिशत यानी 1,352 रुपये की तेजी के साथ 2,70,322 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी। इससे साफ है कि रिकॉर्ड स्तर के बाद सोने में जहां दबाव बना, वहीं चांदी में खरीदारी लौटी।

    घरेलू बाजार में भी हल्की नरमी

    इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव घटकर 1,40,482 रुपये रह गया, जो पिछले कारोबारी दिन 1,40,499 रुपये था। यह गिरावट भले ही मामूली हो, लेकिन यह संकेत देती है कि ऊंचे दामों पर निवेशक फिलहाल सतर्क हो गए हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिला संकेत

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार 4,600 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंचा था। इसी रिकॉर्ड स्तर के बाद वैश्विक निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू की, जिसका असर घरेलू बाजारों पर भी पड़ा। हालांकि भू-राजनीतिक तनावों के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी हुई है।

    भू-राजनीति और फेड पर टिकी नजर

    सोने में हालिया तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी बड़ा कारण रही। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल से जुड़ी जांच की खबरों ने भी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। मेहता इक्विटीज लिमिटेड के कमोडिटी उपाध्यक्ष राहुल कलंत्री के मुताबिक, निवेशकों की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और ब्याज दर नीति पर टिकी है।

    ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद

    हालिया अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट में उम्मीद से कम नौकरियां बढ़ने से यह भरोसा मजबूत हुआ है कि इस साल के अंत तक फेड ब्याज दरों में दो बार कटौती कर सकता है। यही उम्मीद कीमती धातुओं को मध्यम अवधि में सहारा दे रही है।

    तकनीकी स्तर और आगे का रुख

    विश्लेषकों के अनुसार सोने को 1,39,550 से 1,37,310 रुपये के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल रहा है, जबकि ऊपर की ओर 1,44,350 से 1,46,670 रुपये पर रेजिस्टेंस है। चांदी के लिए 2,60,810 से 2,54,170 रुपये सपोर्ट जोन है और 2,71,810 से 2,74,470 रुपये रेजिस्टेंस।

    चांदी की लंबी अवधि में चमक

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि उद्योगों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के कारण चांदी की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में आने वाले समय में चांदी की कीमतें सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।

  • तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    तेज विकास, कम महंगाई-भारत को अपनानी चाहिए संतुलित और तटस्थ नीति: रिपोर्ट

    नई दिल्ली। भारत इस समय आर्थिक विकास और कम महंगाई के संतुलित दौर में है, जिसे अर्थशास्त्री ‘गोल्डीलक्स फेज’ कह रहे हैं। मंगलवार को जारी एचएसबीसी ग्लोबल इन्वेस्टमेंट रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया कि अब नीतियों को न तो बहुत सख्त और न ही बहुत ढीला रखना चाहिए, बल्कि लगभग तटस्थ नीति अपनाई जानी चाहिए।

    नीति का संतुलित दृष्टिकोण

    रिपोर्ट में सुझाया गया है कि 2026 में अर्थव्यवस्था और बाजार को सहारा देने के लिए ऐसी नीति सबसे बेहतर होगी जिसमें सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखा जाए और ब्याज दरें आसान बनी रहें। यदि सरकार खर्च में सावधानी रखे और रिजर्व बैंक ब्याज दरों को आसान बनाए रखे, तो इससे निवेशकों और अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।

    अंदरूनी कमजोरियों पर ध्यान

    हालांकि, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अर्थव्यवस्था में कुछ कमजोरियां अभी भी मौजूद हैं। इनमें कंपनियों का कम निवेश और विदेशी पूंजी का सीमित प्रवाह शामिल है, जिन्हें सुधारना जरूरी होगा।

    बॉन्ड और विदेशी निवेश की उम्मीद

    बॉन्ड मार्केट्स ने 2026 की शुरुआत में राज्यों द्वारा कर्ज लेने की संभावना पहले ही ध्यान में रख ली है। आरबीआई द्वारा बॉन्ड खरीद, बजट में वित्तीय अनुशासन और भारत को ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने से विदेशी निवेश आने की उम्मीद बढ़ी है।

    शेयर बाजार और आर्थिक सुधार

    रिपोर्ट के अनुसार, हाल के आर्थिक सुधारों, सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि और शेयरों के उचित दामों के कारण शेयर बाजार को फायदा मिल सकता है। हालांकि, लंबे समय तक लाभ के लिए कंपनियों का निवेश और विदेशी निवेश बढ़ाने वाले बड़े सुधार जरूरी हैं।

    ब्याज दर और महंगाई का अनुमान

    एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि अगले साल महंगाई दर चार प्रतिशत से थोड़ी कम रहने की संभावना है। इससे आरबीआई पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा और विकास धीमा होने पर दरें और कम करने की गुंजाइश भी रहेगी।

    वैश्विक घटनाओं का असर

    भंडारी ने बताया कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ से जुड़ी खबरें, ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की प्रक्रिया और विकसित देशों में बढ़ती ब्याज दरें भारतीय बाजार को प्रभावित कर सकती हैं।

    सरकार का वित्तीय संतुलन लक्ष्य

    केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि 2031 तक सार्वजनिक कर्ज महामारी से पहले के स्तर पर लाया जाए। इसके लिए अगले पांच वर्षों तक वित्तीय सुधार और खर्च पर नियंत्रण जरूरी होगा। निजीकरण के जरिए यह संतुलन स्थापित किया जा सकता है ताकि आर्थिक विकास पर असर कम से कम हो।

    राज्यों का कर्ज और घाटा

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कई राज्यों में सार्वजनिक कर्ज बढ़ने की संभावना है, लेकिन 3 प्रतिशत की वित्तीय घाटे की सीमा के कारण यह नियंत्रित रहेगा। इस प्रकार, भारत 2026 में संतुलित विकास और तटस्थ नीतियों के जरिए आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की स्थिति में है।

  • दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    दिसंबर में ऑटो सेल्स में रिकॉर्ड बढ़त, कारों की बिक्री ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

    नई दिल्ली। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने मंगलवार को दिसंबर 2025 के वाहन बिक्री आंकड़े जारी किए। इसके अनुसार, दिसंबर में थोक पैसेंजर वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर करीब 26.8 प्रतिशत बढ़कर 3,99,216 यूनिट्स रही, जो पिछले साल दिसंबर में 3,14,934 यूनिट्स थी। इस बढ़त ने वाहन निर्माता और डीलरों के बीच उत्साह पैदा कर दिया है।

    दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मजबूत बिक्री

    सियाम के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहिया वाहनों की थोक बिक्री सालाना आधार पर 39 प्रतिशत बढ़कर 15,41,036 यूनिट्स हुई, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 11,05,565 यूनिट्स था। तिपहिया वाहनों की बिक्री भी 17 प्रतिशत बढ़कर 61,924 यूनिट्स दर्ज की गई, जो पिछले साल 52,733 यूनिट्स थी। इन आंकड़ों से साफ है कि छोटे और कम लागत वाले वाहन भी ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं।

    तीसरी तिमाही में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा

    वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में पैसेंजर वाहनों की थोक बिक्री 12.76 लाख यूनिट्स रही। यह तिमाही की बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20.6 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है।

    2025 में वार्षिक बिक्री का नया रिकॉर्ड

    पूरा साल 2025 (जनवरी-दिसंबर) देखा जाए तो पैसेंजर वाहनों की कुल थोक बिक्री 44.90 लाख यूनिट्स रही। यह वार्षिक बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

    निर्यात में भी वृद्धि

    साल 2025 में देश से 8.63 लाख पैसेंजर वाहनों का निर्यात हुआ। यह निर्यात का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

    मजबूत बिक्री के पीछे कारक

    सियाम का मानना है कि इस मजबूत वृद्धि के पीछे कई कारक हैं। आयकर में कटौती, जीएसटी 2.0 की सुविधा और आरबीआई द्वारा ब्याज दरों में कमी ने ग्राहकों की खरीद क्षमता और धारणा पर सकारात्मक असर डाला। इन उपायों के चलते उपभोक्ता वाहन खरीदने के लिए ज्यादा प्रेरित हुए।

    सियाम के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर लगातार बढ़त पर है। दिसंबर और पूरे 2025 के आंकड़े बताते हैं कि पैसेंजर, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की मांग में मजबूत रिकवरी हुई है। भविष्य में भी यह रुझान उद्योग के लिए उत्साहजनक संकेत देता है।