Category: Economy

  • गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

    गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था


    वाशिंगटन ।
    पूरी दुनिया (Whole World) के बाजारों में इस वक्त हलचल मची हुई है. कहीं वॉरकी वजह से टेंशन के हालात हैं तो कहीं ट्रेड को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. लेकिन इन सबके बीच भारत (India) के लिए एक साथ दो ऐसी खबरें आई हैं, जो बताती हैं कि आने वाला समय हमारा है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations-UN) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India-SBI) दोनों ने अपनी ताजा रिपोर्ट्स में माना है कि साल 2026 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जब दुनिया के बाकी देश अपनी रफ्तार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे, तब भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ रहा होगा।

    संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026’ रिपोर्ट में भारत को लेकर बहुत पॉजिटिव बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में जब पूरी दुनिया की विकास दर महज 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, तब भारत 6.6 प्रतिशत की दमदार रफ्तार से आगे बढ़ेगा। यूएन का कहना है कि भारत की घरेलू मांग इतनी मजबूत है कि दुनिया में होने वाली किसी भी उथल-पुथल का इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. भले ही वैश्विक स्तर पर व्यापार करने के तरीके बदल रहे हों, लेकिन भारत अपनी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहेगा।

    यूएन के बाद देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने तो भारत की तरक्की को लेकर और भी बड़ा अनुमान लगाया है. एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि भारत की जीडीपी साल 2025-26 में 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकती है. यह सरकार और आरबीआई के अनुमानों से भी थोड़ा ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का काम-काज और टैक्स कलेक्शन इतना अच्छा है कि घाटे की चिंता कम है. एसबीआई का मानना है कि भारत की आर्थिक नींव इतनी मजबूत हो चुकी है कि वह हर चुनौती को पार करने के लिए तैयार है.


    दुनिया में मंदी का खतरा, भारत क्यों है सुरक्षित?

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक सुस्त रह सकती है. अमेरिका जैसे देशों में व्यापार नियमों में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव ने माहौल को थोड़ा खराब किया है. महंगाई के कारण दुनिया भर के परिवारों का बजट बिगड़ा हुआ है. लेकिन भारत के मामले में कहानी अलग है. भारत एकमात्र ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी जो 6 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ रेट हासिल करेगी. भारत सरकार का भी अनुमान यही कहता है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 7.4 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ेगी.


    आम आदमी पर क्या होगा असर?

    जब देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है. इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और लोगों की आमदनी बढ़ने का रास्ता साफ होता है. भले ही दुनिया भर में सप्लाई चेन बिगड़ने का खतरा हो या महंगाई का दबाव हो, भारत की मजबूत ग्रोथ यह भरोसा दिलाती है कि हमारा बाजार सुरक्षित है. सरकार के नए आंकड़ों से भी साफ है कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सही कदम बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

  • AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी

    AI के दौर में नौकरियों पर संकट, Global Tech कंपनियों में छंटनी का सिलसिला जारी


    नई दिल्ली।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स (Artificial Intelligence (AI) and Robotics) समेत नई तकनीक अपनाने पर जोर के बावजूद दुनियाभर की टेक कंपनियों (Tech Companies) ने 2024 के मुकाबले 2025 में करीब 20 फीसदी कम छंटनी की। इस दौरान अमेरिकी कंपनी इंटेल (American company Intel) ने दो बार में सर्वाधिक 27,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। कंपनी ने पहली बार अप्रैल, 2025 में 22,000 और जुलाई, 2025 में 5,000 छंटनी की थी।

    लेऑफ्स डॉट एफवाईआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते साल भारत समेत दुनियाभर की 257 टेक कंपनियों ने 1,22,549 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। यह आंकड़ा 2024 में 551 कंपनियों से निकाले गए 1,52,922 कर्मचारियों की तुलना में 19.86 फीसदी कम है। साल 2023 में वैश्विक स्तर पर 1,193 कंपनियों ने 2,64,320 लोगों की छंटनी की थी, जबकि 2022 में 1,064 संस्थाओं ने 1,65,269 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दुनियाभर की टेक कंपनियों में एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के कंपनी छोड़ने की दर) काफी ज्यादा है। साथ ही, कुशल पेशेवरों की कमी के बावजूद टेक कंपनियों में लगातार छंटनी चिंता की बात है। 


    कंपनियों की खर्च में कटौती का नतीजा

    विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक एट्रिशन रेट और कुशल पेशेवरों की कमी से जूझ रहीं टेक कंपनियों में छंटनी की कई वजहें हैं। वैश्विक अनिश्चितता और टैरिफ वॉर के बीच मंदी की बढ़ती आशंका ने कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, जो कमाई के मोर्चे पर जूझ रही हैं। इसके अलावा, कई देशों में तनाव के बाद आपूर्ति शृंखला से जुड़ीं समस्याओं और महंगाई बढ़ने के कारण लागत वृद्धि से जूझ रहीं कंपनियां खर्च में कटौती कर रही हैं, जिसका असर छंटनी के रूप में दिख रहा है।

    इन कंपनियों में सबसे ज्यादा निकाले
    इंटेल…2025 में दो बार में 22,000 कर्मचारियों को बाहर निकाला।
    माइक्रोसॉफ्ट…कुल 15,000 पेशेवरों को बाहर का रास्ता दिखाया।
    अमेजन…वैश्विक स्तर पर 14,000 कर्मचारियों की नौकरी गई।
    एचपी…दो बार में 8,000 लोगों की छंटनी की गई।
    सेल्सफोर्स…4,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया।
    मेटा…खर्च में कटौती का हवाला देकर 3,600 पेशेवरों की छंटनी।


    टीसीएस से लेकर जोमैटो ने भी की छंटनी

    भारत में बीते साल टाटा समूह की कंपनी टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने सबसे ज्यादा 12,000 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से निकाला था। कंपनी ने रिस्ट्रक्चरिंग और स्किल मिसमैच का हवाला देकर इतनी बड़ी संख्या में छंटनी की थी, जिसे लेकर विरोध भी हुआ था।टीसीएस के अलावा 2025 में 29 छोटी-बड़ी कंपनियों ने भी करीब 6,995 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इनमें सबसे ज्यादा 1,000 लोगों की छंटनी ओला इलेक्ट्रिक ने की थी। जोमैटो में भी 600 और कार्स24 में 520 लोगों की नौकरी गई थी।

  • नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नियम तोड़े, नहीं बख्शेंगे! RBI ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द

    नई दिल्‍ली। वित्तीय अनुशासन को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। रेगुलेटरी नियमों का लगातार उल्लंघन करने पर आरबीआई ने 35 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इस कार्रवाई के साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट कर दिया है कि ये कंपनियां अब किसी भी तरह का एनबीएफसी से जुड़ा कारोबार नहीं कर सकेंगी। यह फैसला आम निवेशकों और कर्ज लेने वालों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में भी देखा जा रहा है।

    दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई आरबीआई एक्ट, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए की है। केंद्रीय बैंक के अनुसार ये कंपनियां लंबे समय से जरूरी शर्तों और नियामकीय मानकों का पालन नहीं कर रही थीं, जिसके चलते उन्हें एनबीएफसी के रूप में काम करने की अनुमति वापस ले ली गई।

    मामले में सामने आया है कि आरबीआई द्वारा सात जनवरी 2026 को जारी सर्कुलर में बताया गया है कि इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के आदेश अलग-अलग तारीखों पर 9 दिसंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच जारी किए गए थे। इसका सीधा मतलब है कि इन तारीखों के बाद ये कंपनियां कानूनी रूप से किसी भी तरह का एनबीएफसी कारोबार नहीं कर सकतीं।

    क्यों हुई इतनी बड़ी कार्रवाई?

    आरबीआई के मुताबिक, जिन 35 एनबीएफसी के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उन्होंने कई अहम नियमों का उल्लंघन किया। इनमें न्यूनतम नेट ओन्ड फंड (NOF) बनाए न रखना, पूंजी पर्याप्तता अनुपात (CRAR) का पालन न करना, समय पर वित्तीय रिपोर्टिंग न करना और एसेट क्लासिफिकेशन से जुड़े मानकों की अनदेखी शामिल है। कई कंपनियां लंबे समय से निष्क्रिय (डोरमेंट) स्थिति में थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका रजिस्ट्रेशन बरकरार था, जो वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम पैदा कर रहा था।

    आर्थ‍िक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आरबीआई के ‘स्केल-बेस्ड रेगुलेशन’ और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की नीति का हिस्सा है। इससे पहले भी 2023 और 2024 में कई एनबीएफसी के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं।

    ये है 35 NBFCs की पूरी सूची

    सत्य प्रकाश कैपिटल इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    AG सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    ALB लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड

    ATM क्रेडिट एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    कॉर्पोरेट कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    डेसिसिव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड

    डिवाइन इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    लिबर्टी प्राइवेट लिमिटेड सेल्स

    पर्ल्स हायर परचेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड

    क्वासर इंडिया फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड

    सनलाइफ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    सनराइज मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड

    स्वितो फाइनेंस एंड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड

    त्रिवेणी विनिमय प्राइवेट लिमिटेड

    ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी मार्केटिंग लिमिटेड

    यूनिट्रॉन फिनलीज लिमिटेड

    वीरा सिक्योरिटीज एंड फिनलीज प्राइवेट लिमिटेड

    विनी फाइनेंशियल एंड मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    शिवोम इन्वेस्टमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड

    अधिनाथ इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    एग्रोहा सेविंग्स लिमिटेड

    अहुसंस फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    अल्टर इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड

    एसोसिएटेड लीजिंग लिमिटेड

    अटलांटिक लीजिंग लिमिटेड

    BHL फॉरेक्स एंड फिनलीज लिमिटेड

    भरतपुरिया फाइनेंस एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड

    दादा देव फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    ईस्ट दिल्ली लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड

    इकोनॉमिक कैपिटल सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

    ESN फाइनेंस एंड कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड

    FMI इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड

    गणपति फिनकैप सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड

    गुडवर्थ सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड

    गोपाल ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड

    बाजार और निवेशकों पर असर

    आरबीआई के इस कदम को वित्तीय बाजार में सकारात्मक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कमजोर और नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों के बाहर होने से एनबीएफसी सेक्टर की साख मजबूत होगी। दूसरी ओर इससे जुड़ा एक पक्ष ये भी है कि जिन निवेशकों या ग्राहकों का पैसा इन कंपनियों में फंसा है, उनके लिए यह स्थिति चिंता का विषय हो सकती है। ऐसे मामलों में निवेशकों को कानूनी रास्ता अपनाना पड़ सकता है, क्योंकि आरबीआई इन कंपनियों के लेन-देन की गारंटी नहीं देता।

    आम जनता के लिए आरबीआई की अहम सलाह

    आरबीआई ने इस मौके पर आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि किसी भी निवेश, लोन या वित्तीय लेन-देन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित कंपनी आरबीआई में पंजीकृत है या नहीं। इसके लिए आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध एनबीएफसी की सूची देखी जा सकती है।

  • UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

    UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में डिजिटल पेमेंट (Digital payments.) का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बन चुका UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सब्ज़ी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping), बिजली बिल (Electricity bills), स्कूल फीस (School Fees) और ट्रैवल बुकिंग (Travel Bookings) तक हर जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अब इसी UPI को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है, जिसकी जानकारी न होने पर यूजर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


    इस वजह से होता है UPI ब्लॉक

    इस नए नियम का सीधा असर UPI अकाउंट की सुरक्षा और वैधता से जुड़ा है। अगर कोई यूजर लापरवाही करता है, गलत या पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करता है, या जरूरी अपडेट्स को नजरअंदाज करता है, तो उसका UPI अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनका पेमेंट अचानक फेल न होने लगे।


    UPI का नया नियम क्या है?

    UPI से जुड़े नए नियम के तहत यह जरूरी किया गया है कि हर UPI अकाउंट एक सक्रिय, वैध और सही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए। अगर किसी यूज़र का मोबाइल नंबर इनएक्टिव है, बंद हो चुका है, या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है, तो उस नंबर से जुड़ी UPI ID को जोखिम भरा माना जाएगा। इसके अलावा, अगर बैंक या UPI सिस्टम को यह लगता है कि किसी अकाउंट से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है, पहचान वेरिफिकेशन अधूरा है या यूजर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उस अकाउंट पर पाबंदी लगाई जा सकती है।


    यह नियम क्यों लाया गया?

    इस नियम के पीछे सबसे बड़ा कारण है डिजिटल फ्रॉड और गलत लेन-देन को रोकना। कई मामलों में देखा गया है कि: – बंद मोबाइल नंबर किसी और को दोबारा मिल जाता है – उसी नंबर से जुड़ा UPI अकाउंट पुराना रहता है – नया यूजर अनजाने में पुराने बैंक अकाउंट से लिंक हो जाता है ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन और डेटा मिसयूज़ की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए UPI सिस्टम को साफ और सुरक्षित रखने के लिए यह नियम लाया गया है।


    आम यूजर पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    इस नए नियम का असर सीधे तौर पर हर UPI यूजर पर पड़ता है। UPI पेमेंट अचानक बंद हो सकता है अगर आपका अकाउंट नियमों के अनुरूप नहीं है, तो पेमेंट करते समय ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड हो सकता है

    लगातार नियमों की अनदेखी करने पर UPI ID को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। Google Pay, PhonePe, Paytm सब पर असर यह नियम किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी UPI प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं बिल पेमेंट, पैसे ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी सब कुछ प्रभावित हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक होने से कैसे बचें?

    अगर आप चाहते हैं कि आपका UPI अकाउंट सुरक्षित रहे, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
    – बैंक अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा एक्टिव रखें
    – मोबाइल नंबर बदला है तो तुरंत अपडेट करें
    – समय-समय पर UPI का इस्तेमाल करते रहें
    – UPI ऐप में प्रोफाइल और KYC पूरी रखें
    – किसी अनजान लिंक या कॉल से UPI जानकारी शेयर न करें


    कैसे पता करें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं?

    इस वक्त कोई सार्वजनिक लिस्ट नहीं है जिससे आप सीधे जान सकें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं। लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए: लगातार UPI फेल हो रहा है, “Transaction under review” या “Could not process” जैसे मैसेज आ रहे हैं, QR कोड स्कैन करने पर भी पेमेंट नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में अपने बैंक या UPI ऐप की हेल्पलाइन से संपर्क करें।

  • GDP केवल आंकड़ों का खेल नहीं… लोगों की जिंदगी पर पड़ता है इसका सीधा असर

    GDP केवल आंकड़ों का खेल नहीं… लोगों की जिंदगी पर पड़ता है इसका सीधा असर


    नई दिल्ली।
    जीडीपी (GDP) किसी देश की सीमाओं के भीतर एक निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष या तिमाही) में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य है। यह अर्थव्यवस्था (Economy) के आकार और स्वास्थ्य को दर्शाती है। जीडीपी सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होता। इसका सीधा और अप्रत्यक्ष असर नौकरी (Jobs), महंगाई (Inflation), आमदनी (Income), कर्ज (Debt), टैक्स (Taxes) और सरकारी सुविधाओं (Government services) पर पड़ता है।


    1. रोजगार और नौकरी के मौके

    ऊंची जीडीपी ग्रोथ (7% या उससे ज्यादा) का मतलब है कि अर्थव्यवस्था में गतिविधियां तेज हैं। इससे नई नौकरियां बनती हैं, खासकर निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी और सर्विस सेक्टर में। कम ग्रोथ होने पर कंपनियां भर्ती रोकती हैं या छंटनी करती हैं। नौकरी मिलने की संभावना बढ़ती है, वेतन वृद्धि बेहतर हो सकती है।


    2. महंगाई और खर्च

    तेज जीडीपी से मांग बढ़ती है, जिससे कभी-कभी महंगाई का दबाव भी आता है। अगर विकास दर संतुलित रहे, तो आपूर्ति बढ़ने से महंगाई काबू में रहती है। आम आदमी के लिए बहुत तेज विकास दर का मतलब महंगाई का खतरा होती है वहीं इसकी धीमी रफ्तार से आमदनी पर असर होता है। इसका मध्यम और स्थिर विकास सबसे बेहतर होता है।


    3. आपकी आमदनी और व्यापार

    अच्छी जीडीपी दर से छोटे कारोबार, दुकानदार, ट्रांसपोर्ट, होटल और सर्विस सेक्टर को फायदा होता है। ग्रामीण इलाकों में बेहतर विकास का मतलब कृषि से जुड़े रोजगार और आमदनी में सुधार होता है। आम आदमी के लिए बेहतर है काम-धंधा चलता है, आमदनी बढ़ने की उम्मीद बनती है।


    4. कर्ज, ईएमआई और ब्याज दर

    अगर जीडीपी दर मजबूत और महंगाई काबू में हो, तो आरबीआई ब्याज दरें घटा सकता है। इससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन सस्ते होते हैं। ईएमआई कम हो सकती है, नया कर्ज लेना आसान होता है।


    5. सरकार की कमाई और योजनाएं

    ज्यादा जीडीपी दर से सरकार को ज्यादा टैक्स राजस्व मिलता है। इससे सड़क, अस्पताल, स्कूल, सब्सिडी और सामाजिक योजनाओं पर खर्च बढ़ सकता है। आम आदमी के लिए बेहतर सरकारी सेवाएं तैयार होती हैं और योजनाओं का लाभ मिलता है।


    6. शेयर बाजार और निवेश

    अच्छी जीडीपी दर के अनुमान से शेयर बाजार में तेजी आती है। म्यूचुअल फंड, पीएफ और रिटायरमेंट फंड पर सकारात्मक असर पड़ता है। आम आदमी के लिए निवेश से बेहतर रिटर्न की संभावनाएं बनती हैं।

  • भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव

    भारत में आज सोने का भाव,सोने-चांदी के दाम तेजी से बढ़ रहे जानिए आज आपके शहर का भाव


    नई दिल्ली । भारत में सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और यह बढ़ोतरी लगातार तीसरे दिन देखने को मिल रही है। जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार की अनिश्चितता के कारण दोनों धातुओं की कीमतों में उछाल आया है। 7 जनवरी को सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी से निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं।

    सोने की कीमत में बढ़ोतरी

    आज दिल्ली में 24-कैरेट सोना प्रति दस ग्राम ₹10 महंगा हो गया है और 22-कैरेट सोने की कीमत भी ₹10 बढ़ी है। पिछले दो दिनों में 24-कैरेट सोने की कीमत में ₹3010 और 22-कैरेट सोने की कीमत में ₹2760 की बढ़ोतरी हुई है। सोने की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं लेकिन इसके साथ ही सोने की मांग भी बढ़ रही है खासकर अस्थिर बाजारों में।

    चांदी की कीमत में उछाल

    चांदी की कीमतों में भी लगातार तीसरे दिन बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में एक किलोग्राम चांदी की कीमत में ₹12100 का इज़ाफा हुआ है। पिछले तीन दिनों में चांदी की कीमत में कुल ₹12100 की बढ़ोतरी हो चुकी है। इससे पहले चांदी की कीमत स्थिर थी लेकिन अब 7 जनवरी को दिल्ली में चांदी ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम बिक रही है। इस दौरान चांदी की कीमतों में प्रति किलोग्राम ₹100 का इज़ाफा हुआ है।

    शहरों के हिसाब से सोने और चांदी के भाव

    भारत के प्रमुख शहरों में सोने और चांदी के दामों में भिन्नताएँ हैं। यहां 18-कैरेट 22-कैरेट और 24-कैरेट शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमतें दी गई हैं:
    दिल्ली 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    मुंबई: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    कोलकाता: 24-कैरेट सोना,₹56,550, 22-कैरेट सोना,₹51,950
    चेन्नई: 24-कैरेट सोना,₹57,550 ,22-कैरेट सोना,₹52,900

    चांदी की कीमतों में क्षेत्रीय अंतर

    चांदी के दाम में भी क्षेत्रीय अंतर दिखाई दे रहे हैं दिल्ली मुंबई और कोलकाता में चांदी का मूल्य ₹2,53,100 प्रति किलोग्राम है। चेन्नई में चांदी का मूल्य ₹2,71,100 प्रति किलोग्राम है जो चार प्रमुख महानगरों में सबसे महंगा है।

    कुल मिलाकर स्थिति

    सोने और चांदी के दामों में इस समय तेजी देखने को मिल रही है जो आने वाले दिनों में भी जारी रह सकती है खासकर वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक तनावों के कारण। इन बढ़ी हुई कीमतों का प्रभाव निवेशकों खरीदारों और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा। सुझाव,अगर आप सोने या चांदी में निवेश करना चाहते हैं तो इन कीमतों के बढ़ने के साथ सतर्क रहना और संभावित गिरावट का इंतजार करना बेहतर हो सकता है।

  • डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो-स्विगी फूड एप्लीकेशन पर खाना क्यों है महंगा रेस्टोरेंट से ज्यादा प्राइस जानिए पूरी कहानी

    डिलीवरी ऐप ज़ोमैटो-स्विगी फूड एप्लीकेशन पर खाना क्यों है महंगा रेस्टोरेंट से ज्यादा प्राइस जानिए पूरी कहानी


    नई दिल्ली ।
    आजकल फूड डिलीवरी ऐप्स जैसे जोमैटो स्विगी और ब्लिंकिट का उपयोग बढ़ता जा रहा है लेकिन इन ऐप्स पर खाना ऑर्डर करना अब ग्राहकों के लिए महंगा साबित हो रहा है। लोकलसर्कल्स के एक हालिया सर्वे में यह बात सामने आई कि 55% कंज्यूमर्स ने बताया कि ऐप्स से खाना ऑर्डर करने पर उन्हें रेस्टोरेंट की तुलना में ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं। लेकिन इसके पीछे क्या कारण है

    महंगे होने का कारण,कमीशन और डिलीवरी चार्ज

    इन ऐप्स द्वारा रेस्टोरेंट से लिया जाने वाला 20-30% का भारी कमीशन जो सीधे ग्राहकों की जेब पर असर डालता है महंगे खाने का प्रमुख कारण है। डिलीवरी ऐप्स रेस्टोरेंट से इस कमीशन के अलावा खुद से भी डिलीवरी शुल्क वसूलते हैं जो कुल मिलाकर खाने की कीमत को काफी बढ़ा देता है। सर्वे में हिस्सा लेने वाले 79,000 से ज्यादा नागरिकों में से 55% ने इस बात को माना है कि यह कमीशन उन्हें रेस्टोरेंट में खाने की तुलना में कहीं अधिक खर्च करने के लिए मजबूर करता है।

    कंज्यूमर्स की बढ़ती नाराजगी

    सर्वे में यह भी देखा गया कि ग्राहक सिर्फ महंगे होने की वजह से नाराज नहीं हैं बल्कि डिलीवरी वर्कर्स की स्थिति को लेकर भी उन्हें चिंता है। कई बार ग्राहकों को लगता है कि डिलीवरी टाइम बहुत लंबा होता है और कभी-कभी खाना खराब या ठंडा हो जाता है जो ग्राहकों के अनुभव को और खराब करता है।

    क्विक डिलीवरी ऐप्स पर जंक फूड का दबदबा

    एक और दिलचस्प बात यह सामने आई कि क्विक डिलीवरी ऐप्स पर बेचे जाने वाले आधे से ज्यादा पैकेट वाले फूड आइटम्स में ज्यादा फैट चीनी और नमक होता है या ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड होते हैं। 39% परिवार नियमित रूप से सॉफ्ट ड्रिंक्स बिस्कुट चिप्स और नूडल्स जैसी चीजें ऑर्डर करते हैं। यह स्थिति मुख्यतः बच्चों और युवाओं के बीच अधिक देखी जाती है जो जंक फूड की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

    भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट

    भारत का ऑनलाइन फूड डिलीवरी मार्केट 2024 में लगभग $31.8 बिलियन ₹2.86 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है और इस मार्केट के 2030 तक ₹12 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण यह मार्केट तेज़ी से बढ़ रहा है। हालांकि इस बढ़ती मांग के बावजूद इन ऐप्स पर खाद्य पदार्थों की बढ़ी हुई कीमतें ग्राहकों को परेशान कर रही हैं।

    क्या हो सकता है समाधान

    इन समस्याओं का समाधान ग्राहक को पारदर्शिता और ऑप्शन की सुलभता में हो सकता है। उदाहरण स्वरूप रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के बीच कम कमीशन या बेहतर डील्स पर बातचीत हो सकती है जिससे ग्राहक को थोड़ी राहत मिल सके। इसके अलावा डिलीवरी शुल्क को भी ग्राहकों के लिए और अधिक स्पष्ट और उचित बनाया जा सकता है।

  • coInme Tax Payers और Zero Tax Filers टैक्स देने वालों में 50% बढ़ोतरी जानिए कितने करोड़ लोगों ने दिया टैक्स

    coInme Tax Payers और Zero Tax Filers टैक्स देने वालों में 50% बढ़ोतरी जानिए कितने करोड़ लोगों ने दिया टैक्स


    नई दिल्ली ।देश में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है जबकि टैक्स छूट की सीमा में वृद्धि के बावजूद जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या भी बढ़ी है। केंद्र सरकार ने संसद में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसमें बताया गया कि पिछले चार वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में 50.4% और जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या में 20% की बढ़ोतरी हुई है।

    टैक्स देने वालों की बढ़ती संख्या

    2020-21 में कुल 6.72 करोड़ रिटर्न फाइल किए गए थे जिनमें से 4.84 करोड़ लोग जीरो टैक्स फाइलर्स थे यानी इन लोगों पर कोई टैक्स देनदारी नहीं थी। वहीं 1.88 करोड़ लोगों ने टैक्स अदा किया। अब 2024-25 तक जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़कर 5.58 करोड़ हो गई है जबकि टैक्स देने वालों की संख्या 2.82 करोड़ तक पहुंच गई है।

    जीरो टैक्स फाइलर्स और टैक्स पेयर की बढ़ती संख्या

    2020-21 में कुल रिटर्न का 72% जीरो टैक्स फाइलर्स ने फाइल किया था जो 2024-25 में घटकर 66% हो गया है। इसके उलट टैक्स देने वालों का हिस्सा 28% से बढ़कर 34% हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स सिस्टम में सुधार जैसे कि AI फेसलेस असेसमेंट और सरल नियमों के चलते अब लोग टैक्स भरने में ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं।

    कोविड के बाद बढ़ी इनकम और टैक्स कलेक्शन

    COVID-19 महामारी के बाद सैलरी बिजनेस और MSMEs से होने वाली इनकम में बढ़ोतरी भी टैक्स कलेक्शन में दिखाई दे रही है। पिछले पांच वर्षों में कॉर्पोरेट मुनाफा बढ़ा है जिससे इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने और टैक्स देने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

    दक्षिणी राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या बढ़ी

    विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में जैसे कि तेलंगाना केरल और तमिलनाडु में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। तेलंगाना में पिछले पांच वर्षों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तीन गुना बढ़ गई जबकि केरल में यह ढाई गुना बढ़ी है। तमिलनाडु में यह लगभग 1.25 गुना बढ़ी है।विशेषज्ञों के अनुसार इन राज्यों में युवा अपनी पहली नौकरी शुरू करते हैं और कम सैलरी होने के बावजूद PAN कार्ड और प्रोविडेंट फंड में योगदान देना शुरू कर देते हैं। इसके अलावा टैक्स छूट का फायदा उठाने के कारण इन राज्यों में जीरो टैक्स फाइलर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है।

    हरियाणा और उत्तर भारत में टैक्स देने वालों की बढ़ोतरी

    हरियाणा में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। उत्तर भारत में पिछले पांच वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब लोग अपनी इनकम को सही तरीके से दर्शाकर टैक्स अदा करने में सहज महसूस कर रहे हैं। इसके कारण टैक्स देने वालों की संख्या में 1 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है।हरियाणा इस मामले में पहले स्थान पर है जबकि गुजरात दूसरे और बिहार तीसरे स्थान पर है। मध्य प्रदेश 7वें स्थान पर है। सरकार द्वारा टैक्स छूट की सीमा बढ़ाए जाने और टैक्स सिस्टम को आसान बनाने से अब लोग अपनी इनकम सही तरीके से दिखाने और टैक्स भरने में रुचि दिखा रहे हैं। इस कारण पिछले कुछ वर्षों में टैक्स देने वालों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है जो भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के संकेत हैं।

  • गिरावट के बीच निवेशकों के लिए शानदार मौका, जानिए आज किस स्टॉक पर रखें नजर

    गिरावट के बीच निवेशकों के लिए शानदार मौका, जानिए आज किस स्टॉक पर रखें नजर


    नई दिल्ली ।आज के व्यापारिक माहौल में एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच GIFT निफ्टी घरेलू बाजार के लिए कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है। 6 जनवरी को निफ्टी की साप्ताहिक एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 376.28 अंक गिरकर 85,063.34 पर और निफ्टी 50 71.60 अंक गिरकर 26,178.70 पर बंद हुआ। इस गिरावट के बीच निवेशकों को कुछ खास कंपनियों के स्टॉक्स पर नजर रखने का मौका मिल सकता है जिनमें कॉर्पोरेट गतिविधियों के कारण महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
    आज अपने तिमाही नतीजे घोषित करने वाली कंपनियाँ
    आज गैलेक्सी एग्रीको एक्सपोर्ट्स महेश डेवलपर्स प्रीमियर एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर और सिद्धेश्वरी गारमेंट्स तिमाही नतीजे जारी करेंगी जिससे इन स्टॉक्स में हलचल संभव है।
    प्रमुख कंपनियों के नतीजे और अपडेट्स टाइटन कंपनी Q3 YoY
    टाइटन ने दिसंबर तिमाही में घरेलू कारोबार में 38% की वृद्धि की जबकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार में 79% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी ने 54 नए घरेलू और 2 नए अंतरराष्ट्रीय स्टोर खोले जिससे कुल स्टोर की संख्या 3433 हो गई। यह मजबूत प्रदर्शन कंपनी के शेयरों के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
    ज्युबिलेंट फूडवर्क्स Q3 YoY
    ज्युबिलेंट फूडवर्क्स का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू 13.4% बढ़कर ₹2,438.7 करोड़ हो गया है। डोमिनोज इंडिया की लाइक-फॉर-लाइक ग्रोथ 5% रही और कंपनी ने 75 नए स्टोर खोले जिससे कुल स्टोर की संख्या 2,396 हो गई। यह अच्छा प्रदर्शन निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।
    लोढ़ा डेवलपर्स Q3 YoY
    लोढ़ा डेवलपर्स की प्री-सेल्स में 25% की वृद्धि हुई लेकिन कलेक्शन में 17% की गिरावट आई। कंपनी ने ₹33,800 करोड़ के ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू वाले पांच नए प्रोजेक्ट जोड़े हैं जो स्टॉक की दिशा पर असर डाल सकते हैं।
    यस बैंक
    यस बैंक को NSDL से अपने रिटेल डिवीजन के डीमैट अकाउंट्स को अपनी सब्सिडियरी यस सिक्योरिटीज इंडियाको ट्रांसफर करने की मंज़ूरी मिल गई है। यह कदम बैंक के भविष्य के लिए सकारात्मक हो सकता है।
    IRB इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट
    IRB इंफ्रा ट्रस्ट ने ओडिशा में NHAI के प्रोजेक्ट के लिए सफलतापूर्वक बोली लगाई है। ट्रस्ट को 20 साल के रेवेन्यू-लिंक्ड कंसेशन अवधि के लिए ₹3087 करोड़ की अपफ्रंट बिड कंसेशन फीस देना होगा जो इसके लिए एक महत्वपूर्ण विकास हो सकता है।
    बायोकॉन
    बायोकॉन की सब्सिडियरी बायोकॉन बायोलॉजिक्स JP मॉर्गन हेल्थकेयर कॉन्फ्रेंस में नए ऑन्कोलॉजी बायोसिमिलर पेश करेगी जो कैंसर के इलाज के क्षेत्र में कंपनी के पोर्टफोलियो को मजबूत करेगा।
    पिडिलाइट इंडस्ट्रीज
    पिडिलाइट इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी पिडिलाइट वेंचर्स ने Pepperfry में अपनी पूरी हिस्सेदारी 100% शेयर-स्वैप डील में ट्रांसफर कर दी है जिससे कंपनी के विकास की दिशा पर असर हो सकता है।
    ONGC
    ONGC ने इरुसुमंडा क्षेत्र में लगी आग को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की है जिससे कंपनी के संचालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
    फिनो पेमेंट्स बैंक
    फिनो पेमेंट्स बैंक ने नए कोर बैंकिंग सिस्टम को लागू करने की घोषणा की है। 8-10 जनवरी के बीच माइग्रेशन के दौरान बैंकिंग सेवाओं का निलंबन रहेगा जिसका असर बैंक के स्टॉक्स पर हो सकता है।
    रिलायंस इंडस्ट्रीज
    रिलायंस ने रूस से तेल आयात करने के दावों को खारिज किया है और इसे झूठा और मानहानिकारक बताया है। यह कंपनी के स्टॉक्स के लिए एक सकारात्मक संकेत हो सकता है खासकर जब बात विश्वव्यापी तेल आपूर्ति की हो। आज इन कंपनियों के परिणाम और घटनाओं के बीच निवेशक इन स्टॉक्स पर नजर रख सकते हैं। गिरावट के बीच यह कुछ स्टॉक्स अच्छे निवेश अवसर प्रदान कर सकते हैं।

  • SBI के करोड़ों ग्राहकों के लिए जरूरी खबर! क्या आधार अपडेट नहीं किया तो ब्लॉक हो जाएगा YONO ऐप?

    SBI के करोड़ों ग्राहकों के लिए जरूरी खबर! क्या आधार अपडेट नहीं किया तो ब्लॉक हो जाएगा YONO ऐप?

    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करोड़ों ग्राहकों के लिए एक बेहद अहम चेतावनी सामने आई है। अगर आप भी SBI के ग्राहक हैं, तो यह खबर आपके लिए जानना बहुत ज़रूरी है। इन दिनों SBI ग्राहकों के WhatsApp पर बैंक के नाम से एक संदिग्ध मैसेज तेजी से वायरल हो रहा है। इस मैसेज में दावा किया जा रहा है कि अगर ग्राहक ने अपना आधार अपडेट नहीं किया, तो उसका SBI YONO मोबाइल ऐप ब्लॉक कर दिया जाएगा।

    सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मैसेज के साथ एक APK फाइल भी भेजी जा रही है और ग्राहकों से इसे तुरंत इंस्टॉल करने को कहा जा रहा है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह मैसेज पूरी तरह फर्जी है और इसका मकसद ग्राहकों की निजी जानकारी और बैंक डिटेल्स चुराना है।

    जैसे ही कोई ग्राहक इस APK फाइल को डाउनलोड करता है, उसके मोबाइल का कंट्रोल साइबर ठगों के हाथ में जा सकता है। इसके बाद बैंक अकाउंट खाली होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

    ध्यान रखें, SBI या कोई भी बैंक कभी WhatsApp पर APK फाइल भेजकर ऐप डाउनलोड करने को नहीं कहता। अगर आपके पास ऐसा कोई मैसेज आए, तो उसे तुरंत डिलीट करें और किसी भी लिंक या फाइल पर क्लिक न करें।

    साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक या साइबर हेल्पलाइन को दें। आपकी एक छोटी सी गलती भारी नुकसान में बदल सकती है।