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  • कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा

    कॉम्पटीशन खत्म अब साथ मिलकर काम RVNL IRCON मर्जर से क्या बदलेगा


    नई दिल्ली:     देश के प्रमुख डिस्काउंट ब्रोकर Zerodha ने ट्रेडर्स को बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल से इंट्राडे फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग के कुछ मामलों में ब्रोकरेज चार्ज ₹20 से बढ़ाकर ₹40 प्रति ऑर्डर कर दिया जाएगा। इस फैसले से खासतौर पर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेड करने वाले निवेशकों की लागत बढ़ने वाली है

    यह बदलाव हर ट्रेडर पर लागू नहीं होगा। कंपनी के अनुसार, यह बढ़ा हुआ शुल्क केवल उन निवेशकों पर लगेगा जो Securities and Exchange Board of India के नियमों का पालन नहीं करते। सेबी के नियम के मुताबिक, किसी भी ट्रेड के लिए कुल मार्जिन का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा कैश या कैश इक्विवेलेंट के रूप में होना जरूरी है

    अब तक Zerodha ऐसे मामलों में ग्राहकों की कमी को अपने फंड से पूरा कर देता था और इसके लिए अलग से कोई चार्ज नहीं लेता था। लेकिन अब कंपनी इस सुविधा की लागत वसूल करेगी। यानी अगर कोई ट्रेडर पर्याप्त कैश मार्जिन नहीं रखता और ब्रोकर के फंड का इस्तेमाल करता है, तो उसे ₹40 प्रति ऑर्डर देना होगा

    हालांकि कंपनी ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का असर इंट्राडे इक्विटी ट्रेडिंग पर नहीं पड़ेगा। यह बदलाव केवल F&O यानी डेरिवेटिव ट्रेडिंग तक सीमित रहेगा

    इस फैसले के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एक तरफ बाजार में पहले से ही डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम पर दबाव है, वहीं दूसरी ओर सरकार द्वारा सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव भी लागत बढ़ाने वाला है। बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने की बात कही गई है

    कंपनी के सह संस्थापक और सीईओ Nithin Kamath ने भी इस फैसले को जरूरी बताया है। उनका कहना है कि ग्राहकों के कोलेटरल में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और कंपनी को मार्जिन फंडिंग के लिए उधार लेना पड़ सकता है जिसकी लागत होती है। ऐसे में यह कदम कंपनी के लिए जरूरी हो गया था

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Zerodha का यह फैसला पूरे ब्रोकरेज इंडस्ट्री पर असर डाल सकता है। अगर दूसरे ब्रोकर भी इसी राह पर चलते हैं तो आने वाले समय में ट्रेडिंग और महंगी हो सकती है

    यह बदलाव उन ट्रेडर्स के लिए चेतावनी है जो ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करते हैं। अब उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी और पर्याप्त कैश मार्जिन रखना होगा वरना ट्रेडिंग की लागत सीधे दोगुनी हो जाएगी

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    Zerodha, F&O Trading, Stock Market India, SEBI Rules, Brokerage Charges📝 शॉर्ट डिस्क्रिप्शन

  • भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से

    भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से


    नई दिल्ली: 
    भीम ऐप में एक नया और अहम फीचर जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल पेमेंट और भी आसान और तेज हो जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सहायक कंपनी एनबीएसएल ने यह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है

    इस फीचर के जरिए अब यूजर्स 5,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन को अपने फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन से कन्फर्म कर सकेंगे। इसका मतलब है कि छोटे पेमेंट के लिए हर बार UPI PIN डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी

    इस बदलाव से पेमेंट प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी बल्कि यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा। अक्सर लोग पिन भूल जाते हैं या गलत पिन डाल देते हैं, जिससे ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। नया फीचर इस समस्या को काफी हद तक कम कर देगा

    बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके यूजर्स अपने दोस्तों और परिवार को पैसे भेज सकते हैं, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी आसानी से कर सकते हैं

    कंपनी के अनुसार, यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है क्योंकि फिंगरप्रिंट और फेस डेटा सीधे यूजर के डिवाइस में सुरक्षित रहता है। इससे पिन शेयर होने या उसके गलत इस्तेमाल का खतरा कम हो जाता है

    हालांकि, 5,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए अभी भी UPI PIN की जरूरत होगी, जिससे बड़े पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बनी रहेगी

    फिलहाल यह सुविधा उन स्मार्टफोन्स पर उपलब्ध है जिनमें बायोमेट्रिक सपोर्ट यानी फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन की सुविधा मौजूद है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iOS डिवाइस

  • आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    आईपीओ बाजार में फाइनेंशियल सेक्टर की मजबूत पकड़ 34% हिस्सेदारी

    नई दिल्ली:  नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी एनएसई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग IPO के जरिए फंड जुटाने में फाइनेंशियल सेक्टर ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया है। अप्रैल से फरवरी की अवधि में जुटाई गई कुल राशि में इस सेक्टर की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत रही, जो अन्य सभी क्षेत्रों से अधिक है

    रिपोर्ट में बताया गया कि फाइनेंशियल सेक्टर के बाद कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेक्टर की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत रही, जबकि इंडस्ट्रियल सेक्टर ने 11 प्रतिशत योगदान दिया। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान मुख्य रूप से वित्तीय और उपभोक्ता आधारित कंपनियों की ओर बना हुआ है

    एसएमई SME सेगमेंट में अलग रुझान देखने को मिला। यहां इंडस्ट्रियल सेक्टर 36 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे रहा, जबकि कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी 23 प्रतिशत और मटेरियल सेक्टर 10 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शामिल रहे। यह दिखाता है कि छोटे और मझोले उद्योगों में औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी ज्यादा है

    मेनबोर्ड आईपीओ की बात करें तो अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच 99 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1,65,036 करोड़ रुपए जुटाए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी मजबूत वृद्धि को दर्शाता है, जहां 79 कंपनियों ने 1,62,517 करोड़ रुपए जुटाए थे

    हालांकि, एसएमई आईपीओ में कुछ गिरावट देखी गई है। वित्त वर्ष 2026 में अब तक 105 एसएमई आईपीओ लिस्ट हुए, जिनसे कुल 5,121 करोड़ रुपए जुटाए गए, जबकि पिछले वर्ष 163 आईपीओ के जरिए 7,111 करोड़ रुपए जुटाए गए थे

    निवेशकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। फरवरी 2026 तक एनएसई पर पंजीकृत निवेशकों की संख्या 12.8 करोड़ तक पहुंच गई। हर महीने औसतन 13.6 लाख नए निवेशक बाजार से जुड़ रहे हैं, जो भारत के पूंजी बाजार की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है

    राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र 2 करोड़ से अधिक निवेशकों के साथ पहला राज्य बन गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल और राजस्थान प्रमुख निवेशक आधार वाले राज्य हैं

  • ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..

    ऑनलाइन फूड ऑर्डर करना हुआ महंगा Swiggy ने बढ़ाई डिलीवरी फीस..


    नई दिल्ली:फूड डिलीवरी सेक्टर में एक बार फिर कीमतों का बोझ बढ़ गया है। Swiggy ने अपने प्लेटफॉर्म पर लगने वाली फीस में बढ़ोतरी कर दी है जिससे अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे।

    कंपनी के अनुसार प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर अब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर कर दिया गया है जिसमें जीएसटी भी शामिल है। पहले यह फीस 14.99 रुपये थी। इस तरह करीब 2.59 रुपये यानी लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    स्विगी का कहना है कि यह बढ़ोतरी प्लेटफॉर्म के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है। कंपनी लगातार अपने नेटवर्क को मजबूत करने और डिलीवरी अनुभव को बेहतर बनाने पर काम कर रही है जिसके चलते यह बदलाव किया गया है।

    यह पहली बार नहीं है जब स्विगी ने प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी की है। इससे पहले अगस्त 2025 में भी कंपनी ने फीस बढ़ाकर 12 रुपये से करीब 14-15 रुपये के स्तर तक पहुंचा दिया था। अब एक बार फिर बढ़ोतरी ने ग्राहकों की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है।

    इसी तरह Zomato ने भी हाल ही में अपनी प्लेटफॉर्म फीस में इजाफा किया था। कंपनी ने फीस में करीब 19.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे 12.5 रुपये से बढ़ाकर 14.90 रुपये कर दिया था। जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि करीब 17.58 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच गई है।

    फूड डिलीवरी कंपनियों द्वारा यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है जब एलपीजी की कीमतों में भी वृद्धि हुई है जिससे रेस्तरां की लागत बढ़ गई है। इससे पूरे फूड डिलीवरी इकोसिस्टम पर दबाव बढ़ा है और इसका असर ग्राहकों तक पहुंच रहा है।

    बाजार में इस खबर के बीच स्विगी के शेयरों में हल्की तेजी देखी गई। दोपहर 12:30 बजे कंपनी का शेयर करीब 2.55 प्रतिशत की बढ़त के साथ 279.55 रुपये पर ट्रेड कर रहा था। हालांकि पिछले कुछ समय में शेयर में गिरावट का रुख रहा है और बीते एक हफ्ते में यह 5 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं एक महीने में करीब 10 प्रतिशत और पिछले छह महीनों में 36 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

    कुल मिलाकर फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती फीस ग्राहकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये कंपनियां अपनी कीमतों को और बढ़ाती हैं या फिर प्रतिस्पर्धा के चलते कुछ राहत देती हैं।

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  • एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति

    एचडीएफसी बैंक में बड़ा कदम इस्तीफे की जांच के लिए बाहरी लॉ फर्म की नियुक्ति


    नई दिल्ली:HDFC Bank ने अपने पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष और स्वतंत्र निदेशक अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। बैंक ने इस पूरे मामले की जांच के लिए बाहरी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्मों की नियुक्ति को मंजूरी दी है। यह निर्णय बैंक के बोर्ड की 23 मार्च को हुई बैठक में लिया गया।

    बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस जांच का उद्देश्य इस्तीफे की परिस्थितियों को स्पष्ट करना और गवर्नेंस से जुड़े मानकों को और मजबूत बनाना है। कानूनी फर्मों को निर्देश दिया गया है कि वे चक्रवर्ती के इस्तीफा पत्र की गहराई से समीक्षा करें और एक तय समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

    गौरतलब है कि अतानु चक्रवर्ती ने 18 मार्च को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने संकेत दिया था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थे। हालांकि उन्होंने किसी विशिष्ट घटना का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।

    बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा किसी गड़बड़ी या कदाचार के कारण नहीं बल्कि विचारधाराओं और दृष्टिकोण में मतभेद के चलते लिया गया है। वे वर्ष 2021 में बैंक के बोर्ड में शामिल हुए थे और अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसलों में शामिल रहे।

    इस बीच Reserve Bank of India ने बैंक के संचालन को सुचारू बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने की मंजूरी दी है। उन्होंने यह संकेत भी दिया है कि चक्रवर्ती के जाने के बाद बैंक के संचालन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि बाहरी जांच का उद्देश्य केवल पारदर्शिता और मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस को सुनिश्चित करना है। यह कदम निवेशकों और ग्राहकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही रिपोर्ट्स के मुताबिक बैंक ने अपने विदेशी कारोबार से जुड़े एनआरआई ग्राहकों को हाई-रिस्क एटी1 बॉन्ड की बिक्री के मामले में भी सख्त कार्रवाई की है। आंतरिक जांच के बाद बैंक ने तीन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

    शेयर बाजार में HDFC Bank के शेयर में हलचल देखने को मिली। मंगलवार दोपहर 12 बजे बैंक का शेयर 1.79 प्रतिशत की बढ़त के साथ 757.45 रुपये पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बीते एक सप्ताह में शेयर में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

     यह मामला बैंक के भीतर गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। बाहरी जांच के बाद आने वाली रिपोर्ट से ही इस पूरे प्रकरण पर और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।

  • सोना-चांदी में तेज गिरावट मजबूत डॉलर, ने बिगाड़ा बाजार का खेल

    सोना-चांदी में तेज गिरावट मजबूत डॉलर, ने बिगाड़ा बाजार का खेल


    नई दिल्ली:वैश्विक बाजार में मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का सीधा असर सोना और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं में तेज गिरावट दर्ज की गई और कीमतें लगभग 4.3 प्रतिशत तक फिसल गईं।

    घरेलू बाजार में MCX पर सोने के अप्रैल 2026 कॉन्ट्रैक्ट में सुबह 10:34 बजे तक 2094 रुपये यानी करीब 1.50 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह 1,37,166 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। दिन के दौरान सोने ने 1,36,684 रुपये का न्यूनतम स्तर और 1,38,450 रुपये का उच्चतम स्तर छुआ।

    वहीं चांदी में गिरावट और भी ज्यादा रही। MCX पर मई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में चांदी करीब 9837 रुपये यानी 4.37 प्रतिशत टूटकर 2,15,330 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। दिनभर के कारोबार में चांदी ने 2,15,330 रुपये का निचला स्तर और 2,19,658 रुपये का ऊपरी स्तर देखा।

    इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण मजबूत होता अमेरिकी डॉलर माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स, जो कि दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है, इस समय करीब 0.51 प्रतिशत की तेजी के साथ 99.23 के स्तर पर पहुंच गया है। डॉलर की मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है जिससे इसकी मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों पर दबाव बना हुआ है। सोना 1.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4356 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है जबकि चांदी करीब 3.78 प्रतिशत टूटकर 66.73 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।

    पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। डॉलर में देखें तो बीते एक सप्ताह में सोना 13 प्रतिशत से अधिक और पिछले एक महीने में 15 प्रतिशत से ज्यादा फिसल चुका है। वहीं चांदी में गिरावट और भी तेज रही है जहां एक सप्ताह में 16 प्रतिशत से ज्यादा और एक महीने में 24 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक डॉलर मजबूत बना रहेगा और ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी तब तक सोना और चांदी पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि बाजार में अस्थिरता के बीच निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने का है।

  • शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके

    शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके


    नई दिल्ली:मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूत शुरुआत की और निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया।

    बेंचमार्क इंडेक्स SENSEX 1516.08 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74212.47 के स्तर पर खुला। वहीं NIFTY 50 365.80 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 22878.45 पर पहुंच गया। इस तेजी ने पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया।

    शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में नजर आए और चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।

    लार्जकैप के साथ साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। NIFTY Midcap 100 करीब 772 अंक यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53490 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं NIFTY Smallcap 100 भी 219 अंक यानी 1.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 15318 पर कारोबार करता नजर आया। इससे साफ है कि बाजार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि छोटे और मिड साइज कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    ब्रोकरेज हाउस चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह के अनुसार निफ्टी फिलहाल अपने शॉर्ट टर्म सपोर्ट जोन से नीचे ट्रेड कर रहा है जिससे बाजार का रुझान अभी कमजोर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 22650 से 22700 के स्तर पर मजबूत रुकावट देखी जा रही है जबकि 22300 से 22400 के बीच सपोर्ट जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले समय में बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है।

    सेंसेक्स पैक में कई बड़े स्टॉक्स ने मजबूती दिखाई। एशियन पेंट्स, इंडिगो, ट्रेंट, टाइटन, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। केवल पावर ग्रिड एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो लाल निशान में ट्रेड कर रहा था।

    ग्लोबल मार्केट की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल जैसे प्रमुख बाजार हरे निशान में खुले। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे जहां डाओ और नैस्डैक इंडेक्स में करीब 1.38 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

    बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत और वैश्विक स्तर पर बेहतर निवेश माहौल को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी पक्ष द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले को फिलहाल टालने के फैसले से तनाव में कमी आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में खरीदारी तेज हुई है।

  • सोने-चांदी के बाजार में ऐतिहासिक 'ब्लैक मंडे'! चांदी ₹9000 से ज्यादा टूटी, 45 सालों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज!

    सोने-चांदी के बाजार में ऐतिहासिक 'ब्लैक मंडे'! चांदी ₹9000 से ज्यादा टूटी, 45 सालों की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज!


    नई दिल्ली:  साल 2026 के मार्च महीने ने सोने और चांदी के निवेशकों को बड़ा झटका दिया है। घरेलू वायदा बाजार (MCX) से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक, कीमती धातुओं की कीमतों में ऐसी गिरावट देखी गई है जिसे विशेषज्ञ पिछले 45 वर्षों का सबसे बड़ा ‘क्रैश’ मान रहे हैं। सोमवार को एमसीएक्स पर चांदी की कीमतें 4.21% यानी करीब 9,474 रुपये की भारी गिरावट के साथ 2,15,693 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गईं। वहीं, सोने में भी 2,460 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी कटौती देखी गई, जिसके बाद भाव 1,36,800 रुपये के स्तर पर सिमट गए।

    बाजार में आई इस सुनामी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव कम होने के संकेत बताए जा रहे हैं। जैसे ही भू-राजनीतिक अस्थिरता कम होने की उम्मीद जगी, निवेशकों ने ‘सेफ-हेवन’ यानी सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना 1.5% गिरकर 4,340.80 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि चांदी में 3.3% की गिरावट दर्ज की गई।

    45 साल का रिकॉर्ड टूटा, ‘बेयर मार्केट’ की आहट

    मार्च 2026 का यह महीना इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है क्योंकि इस महीने अब तक दोनों धातुओं की कीमतों में 20% से ज्यादा की गिरावट आई है। यह करीब साढ़े चार दशकों में देखी गई सबसे तेज गिरावट है। तकनीकी रूप से, जब किसी एसेट की कीमत अपने ‘ऑल टाइम हाई’ से 20% या उससे ज्यादा गिर जाती है, तो उसे ‘बेयर मार्केट’ माना जाता है। वर्तमान में सोना और चांदी दोनों इसी दायरे में प्रवेश कर चुके हैं।

    गिरावट के प्रमुख कारण:
    विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस भारी गिरावट के पीछे चार प्रमुख वैश्विक कारक काम कर रहे हैं:

    मजबूत अमेरिकी डॉलर: डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं के लिए सोना खरीदना महंगा हो गया, जिससे मांग में कमी आई।

    ऊंची ब्याज दरें: महंगाई के दबाव के कारण केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने की संभावना ने बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों (सोना-चांदी) के प्रति आकर्षण कम कर दिया है।

    मुनाफावसूली: हाल ही में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद निवेशकों ने बाजार से पैसा निकालना शुरू किया, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा।

    सेफ हेवन की छवि को झटका: आमतौर पर युद्ध या तनाव के समय सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार मजबूत डॉलर और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के कारण सोना अपनी साख बरकरार नहीं रख पाया।

    बाजार जानकारों का मानना है कि अल्पकालिक (Short-term) निवेश करने वालों के लिए यह स्थिति चिंताजनक हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह ‘करेक्शन’ खरीदारी का एक बेहतर अवसर साबित हो सकता है। फिलहाल, बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है, इसलिए विशेषज्ञों ने चरणबद्ध तरीके से निवेश (Step-by-step investment) करने की सलाह दी है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

    मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72696.39 पर आ गया, जबकि निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत गिरकर 22512.65 पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

    निवेशकों को भारी नुकसान, 13.65 लाख करोड़ डूबे

    इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 14 लाख करोड़ रुपए घट गया और यह 428.76 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। इंट्रा डे में बाजार और भी ज्यादा दबाव में दिखा, जहां सेंसेक्स एक समय करीब 1974 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, निफ्टी भी 643 अंकों तक गिर गया था। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX में 19 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार, सभी सेक्टर दबाव में

    बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिरा। सेक्टरवार देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है और निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

    तेल कीमतें और होर्मुज संकट बने बड़ी वजह

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Strait of Hormuz में संभावित बाधा से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार का माहौल और नकारात्मक कर दिया है।

    आगे का रुख अनिश्चित, निवेशकों में बढ़ी चिंता

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता लौटना मुश्किल है। वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल के चलते भारत भी इस दबाव से बच नहीं पा रहा है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत! देश के रणनीतिक तेल भंडार पर सरकार का बड़ा खुलासा

    ऊर्जा सुरक्षा मजबूत! देश के रणनीतिक तेल भंडार पर सरकार का बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। संसद में जानकारी देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने बताया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में इस समय 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है। यह कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है, जो किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

    आईएसपीआरएल के तहत मजबूत भंडारण व्यवस्था

    सरकार ने Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए हैं। इनकी कुल क्षमता 5.3 मिलियन मीट्रिक टन है। तटीय क्षेत्रों में स्थित ये भंडार आपातकालीन स्थिति में बफर के रूप में काम करते हैं। मंत्री ने बताया कि इन भंडारों में मौजूद कच्चे तेल की मात्रा स्थिर नहीं रहती, बल्कि बाजार की स्थिति, खपत और आपूर्ति के अनुसार बदलती रहती है। फिलहाल इनमें लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल उपलब्ध है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

    भविष्य की तैयारी, नए भंडारों को मिली मंजूरी

    ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। जुलाई 2021 में ओडिशा और कर्नाटक में 6.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले दो अतिरिक्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने को मंजूरी दी गई थी। इन नए प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद भारत की कुल भंडारण क्षमता और बढ़ेगी, जिससे किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की निर्भरता कम होगी। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आयात में विविधता, 41 देशों से तेल की खरीद

    सरकार ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां भारत मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर था, वहीं अब आयात को विविध बनाकर जोखिम कम किया गया है। वर्तमान में भारत इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ साथ अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, ब्राजील और मैक्सिको सहित कुल 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। खासतौर पर Strait of Hormuz में व्यवधान के बाद यह रणनीति और महत्वपूर्ण हो गई है। अब देश के लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी देशों के बाहर से हो रहे हैं, जिससे सप्लाई बाधित होने का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।