Category: Economy

  • Budget पर मिले सुझावों में क्रिप्टो पर 20% टैक्स लगाने की मांग…कर मुक्त हो PF योगदान

    Budget पर मिले सुझावों में क्रिप्टो पर 20% टैक्स लगाने की मांग…कर मुक्त हो PF योगदान


    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) अब तक राज्यों और अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उनसे आगामी बजट (Budget 2026) को लेकर सुझाव ले चुका है। बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन सुझाव (Online Suggestions) भेज रहे हैं। अभी तक क्रिप्टो करेंसी (Cryptocurrency) पर लगने वाले टैक्स को कम करने और उसकी निगरानी के लिए समूचित प्रावधान को लेकर सबसे ज्यादा सुझाव मिले हैं।

    कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि क्रिप्टो पर सीधे 20 फीसदी कर लगाया जाना चाहिए। लोगों का सुझाव है कि क्रिप्टो और ब्लॉकचेन सेक्टर के लिए स्पष्ट, संतुलित और व्यावहारिक नीति बनाई जाए।


    अभी कितना लगता है टैक्स

    वर्तमान में 30 फीसदी टैक्स और एक फीसदी टीडीएस लगता है जो छोटे निवेशकों व स्टार्टअप्स के लिए बाधा है, जिसे तर्कसंगत किया जाना चाहिए। क्रिप्टो को डिजिटल एसेट की स्पष्ट परिभाषा मिले और नुकसान को लाभ से समायोजित करने की अनुमति दी जाए। इससे नवाचार बढ़ेगा, रोजगार सृजित होंगे और भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनेगा।

    क्रिप्टोकरेंसी को नियंत्रित ढंग से लागू करने के लिए भी सुझाव दिए जा रहे हैं। कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि इसके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा एवं व्यापक कानून बनाया जाए, जिसमें इसकी कानूनी स्थिति, उपयोग और सीमाएं स्पष्ट हों। इसकी निगरानी के लिए एक नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाए। केवाईसी एवं एंटी मनी लॉड्रिंग (एएमएल) नियमों का पालन सभी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर नियमों को अनिवार्य किया जाए, जिससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए।


    पीएफ योगदान पर न लगाया जाए टैक्स

    मौजूदा नियमों के तहत किसी कर्मचारी के पीएफ खाते में सालाना 2.5 लाख रुपये के योगदान पर अर्जित ब्याज कर मुक्त होती है लेकिन 2.5 लाख रुपये से अधिक के योगदान पर अर्जित ब्याज पर कर्मचारी को कर देना होता है। लोगों ने सुझाव रखा है कि ईपीएफओ में होने वाले योगदान में कर से जुड़े प्रावधान को हटाया जाए क्योंकि इस प्रावधान से अनिवार्य पीएफ योगदान करने वाले कर्मचारी प्रभावित होते हैं।

    इसके बाद कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाए जाने को लेकर सुझाव आए हैं। काफी लोगों ने www.mygov.in वेबसाइट पर जाकर सुझाव दिया है कि कर्मचारियों की न्यूनतम वेतनमान सीमा को बढ़ाया जाएगा। करीब 11 वर्षों से न्यूनतम वेतन न बढ़ाए जाने के चलते लोगों का ईपीएफओ में जमा होने वाला अंशदान सीमित है। ऐसी स्थिति में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को लंबी नौकरी करने के बाद भी पेंशन बहुत कम मिलती है।

  • एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    एनएसई का बड़ा IPO आने वाला, निवेशकों के लिए संकेत: सेबी से जल्द मिल सकता है NOC

    नई दिल्ली| नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का आईपीओ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) मिलने के करीब है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि नियामक एनएसई को अप्रूवल देने की प्रक्रिया इस महीने के अंत तक पूरी कर सकता है। एनओसी मिलने के बाद एनएसई अपने पब्लिक इश्यू को बाजार में उतारने के लिए तैयार हो जाएगा, और लिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय एक्सचेंज के हाथ में होगा।

    डार्क फाइबर विवाद ने रोके एनएसई के रास्ते

    एनएसई का आईपीओ कई सालों से अटका हुआ था, जिसका मुख्य कारण 2010-2014 के बीच हुए तथाकथित डार्क फाइबर केस हैं। आरोप था कि कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को एनएसई के को-लोकेशन सर्वर तक खास एक्सेस दिया गया था, जिससे वे अन्य बाजार भागीदारों की तुलना में तेजी से ट्रेडिंग कर पाते थे। अप्रैल 2019 में, सेबी ने एनएसई को कथित गैर-कानूनी मुनाफे के रूप में 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मार्केट से जुड़े पदों पर कार्य करने से रोकने का निर्देश दिया था। 2022 में एक्सचेंज पर 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने रद्द कर दिया।

    रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी

    एनएसई ने पिछले साल जुलाई में जानकारी दी थी कि लगभग 1.46 लाख रिटेल निवेशक उसके शेयरों में निवेश कर चुके हैं। ये शेयर ग्रे (अनलिस्टेड) मार्केट में हैं और हर निवेशक के पास की कीमत 2 लाख रुपये से कम है। इसके बावजूद रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ के बाद इस हिस्सेदारी और बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशकों को लंबे समय से एक्सचेंज के शेयर में संभावित मुनाफा नजर आ रहा है।

    एनएसई के लिए रास्ता अब साफ

    सेबी से एनओसी मिलने के बाद एनएसई को अपने पब्लिक इश्यू को समयबद्ध तरीके से लॉन्च करने का अधिकार मिलेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, आईपीओ के लिए निवेशक पहले से उत्साहित हैं और बाजार में इसकी मांग अच्छी रहने की संभावना है। लंबे समय से रुका यह आईपीओ न केवल एनएसई के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी नया उत्साह और रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा।

  • EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    EMI की जिम्मेदारी किसकी? जानें व्यक्ति की मौत के बाद बैंक क्या कर सकता है

    नई दिल्ली|  किसी भी तरह के लोन में कई तरह की चीजें शामिल होती हैं, जिसकी वजह से लोन आज के डिजिटल युग में भी काफी पेचीदा प्रोसेस बना हुआ है। जिन लोगों को आसानी से लोन मिल जाता है, उन्हें इस पेचीदा प्रोसेस के बारे में मालूम नहीं चल पाता। लेकिन, जिन लोगों के लोन ऐप्लिकेशन को बैंक बार-बार रिजेक्ट कर देते हैं, वे इस समस्या को बहुत अच्छे से जानते हैं। लोन के लिए अप्लाई करने से लेकर लोन की पूरी पेमेंट होने तक ये एक बहुत लंबा प्रोसेस होता है। अगर लोन चलते-चलते किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा? यहां हम जानेंगे कि अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में बैंक किस व्यक्ति से लोन की वसूली करेगा?
    उधारकर्ता की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है आगे का प्रोसेस
    नियमों के मुताबिक, अगर लोन लेने के बाद किसी व्यक्ति की मौत हो जाए तो बैंक सबसे पहले उस लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकैंट से संपर्क करेगा। अगर लोन के लिए कोई को-ऐप्लिकैंट ही नहीं है या फिर को-ऐप्लिकैंट लोन की भरपाई के लिए असमर्थ है तो फिर बैंक लोन के लिए गारंटर बने व्यक्ति से संपर्क करती है। अगर गारंटर भी लोन की भरपाई के लिए मना कर दे तो बैंक फिर मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी से संपर्क करते हैं और उनसे लोन की बकाया राशि के समय-समय पर भुगतान करने की अपील करते हैं। को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी में से कोई भी लोन की भरपाई करने में समर्थ नहीं है तो बैंक वसूली के लिए मजबूरी में आखिरी विकल्प पर काम करना शुरू कर देते हैं।

    वसूली के लिए किस हद तक जा सकते हैं बैंक
    लोन की वसूली के लिए बैंकों के पास आखिरी विकल्प के तौर पर मृतक की संपत्ति को अपने कब्जे में लेना है। जब लोन अकाउंट के को-ऐप्लिकेंट, गारंटर और कानूनी उत्तराधिकारी लोन का भुगतान करने में असमर्थता जताते हैं तो ऐसे मामलों में बैंकों के पास ये अधिकार होते हैं कि वो मृतक की संपत्ति को बेचकर कर्ज की वसूली कर सकते हैं। होम लोन और ऑटो लोन के मामले में बैंक सीधे-सीधे मृतक के घर या गाड़ी को अपने कब्जे में लेते हैं और फिर नीलामी आयोजित कर उसे बेचकर लोन की वसूली करते हैं। अगर किसी व्यक्ति ने पर्सनल लोन या फिर कोई अन्य लोन लिया है तो ऐसे मामलों में बैंक उसकी किसी अन्य संपत्ति को नीलामी में बेचकर अपने पैसों की वसूली करते हैं।

  • Post office की धांसू स्कीम, एकमुश्त ₹2,50,000 जमा करने पर मिलेगा ₹1,16,062 का रिटर्न, जानें गणित

    Post office की धांसू स्कीम, एकमुश्त ₹2,50,000 जमा करने पर मिलेगा ₹1,16,062 का रिटर्न, जानें गणित

    नई दिल्ली: अगर आप सुरक्षित और फिक्स्ड रिटर्न की तलाश में हैं, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) स्कीम आपके लिए एक भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकती है। यह योजना भारत सरकार द्वारा चलाई जाती है, इसलिए इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और मार्केट उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता। रिटायरमेंट प्लानिंग, बच्चों की पढ़ाई या भविष्य की जरूरतों के लिए यह योजना निवेशकों के लिए सबसे भरोसेमंद मानी जाती है।

    NSC की ब्याज दर और टैक्स बेनिफिट
    पोस्ट ऑफिस NSC पर वर्तमान में 7.7% सालाना फिक्स ब्याज दर मिल रही है। स्कीम की मैच्योरिटी अवधि 5 साल है। ब्याज सालाना आधार पर कंपाउंड होता है और मैच्योरिटी पर भुगतान किया जाता है। आखिरी साल को छोड़कर ब्याज पर टैक्स छूट है और सेक्शन 80C के तहत निवेशकों को ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट भी मिलती है। इसका मतलब है कि आप सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स बचत का भी फायदा उठा सकते हैं।

    2.5 लाख निवेश पर रिटर्न का गणित
    अगर आप NSC में एकमुश्त ₹2,50,000 का निवेश करते हैं, तो सालाना 7.7% ब्याज का फायदा मिलेगा। 5 साल में इस निवेश पर कुल ₹1,16,062 ब्याज आएगा। मैच्योरिटी पर कुल राशि ₹3,66,062 हो जाएगी। यह पूरा रिटर्न पहले से तय है और किसी तरह के मार्केट रिस्क से मुक्त है। फिक्स रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए यह स्कीम आदर्श विकल्प है और भविष्य की प्लानिंग में सहायक साबित होती है।

    एनएससी में कौन कर सकता है निवेश
    इस स्कीम में सभी भारतीय नागरिक निवेश कर सकते हैं। वयस्क अपने नाम से और अभिभावक नाबालिग के नाम निवेश कर सकते हैं। 10 साल या उससे अधिक उम्र के नाबालिग स्वयं भी निवेश कर सकते हैं। ध्यान रहे कि NRI, ट्रस्ट और HUF सीधे निवेश के लिए पात्र नहीं हैं, लेकिन निवेश के बाद NRI बनने पर सर्टिफिकेट वैध रहता है।

    क्यों चुनें नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट
    NSC उन निवेशकों के लिए आदर्श है जो सुरक्षित, स्थिर और टैक्स बचत वाला विकल्प चाहते हैं। इसमें न्यूनतम निवेश राशि थोड़ी भी हो सकती है और अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। पोस्ट ऑफिस का भरोसा, सरकार की गारंटी और फिक्स रिटर्न इसे मिडिल क्लास और रिस्क से बचने वाले निवेशकों के लिए एक मजबूत विकल्प बनाते हैं। लंबी अवधि के सुरक्षित निवेश की तलाश में NSC आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बन सकती है।

  • बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    बड़े निवेशकों के लिए अलर्ट! Reliance Jio का IPO जल्द होगा लॉन्च, जानें पूरी डिटेल और फायदे

    नई दिल्ली। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली कंपनी रिलायंस जियो (Reliance Jio) साल 2026 की पहली छमाही में अपना आईपीओ लेकर आ सकती है. हाल ही में हुई रिलायंस AGM में कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जून 2026 तक कंपनी के शेयरों को लिस्ट कराने के अपने प्लान का जिक्र किया था. कई इंवेस्टमेंट बैंकरों के लगाए गए अनुमान के मुताबिक, , रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स की वैल्यूएशन 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के बीच है.

    क्या है कंपनी का प्लान?
    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ के जरिए रिलायंस ग्रुप की यह कंपनी अपनी 2.50 परसेंट की हिस्सेदारी बेचकर 4.5 अरब डॉलर जुटा सकती है. इसी के साथ यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इससे पहले साल 2025 में ह्युडई मोटर इंडिया 3.3 अरब डॉलर का आईपीओ लेकर आई थी इसलिए अभी तक का सबसे बड़ा आईपीओ पेश करने का रिकॉर्ड इसी कंपनी के नाम है.
    जेरोधा वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, “अगस्त 2025 में 48वीं रिलायंस इंडस्ट्रीज AGM में मुकेश अंबानी ने औपचारिक रूप से कहा था कि जियो IPO के लिए फाइल करने की सभी तैयारियां कर रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी भारतीय मार्केट अथॉरिटीज से सभी जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल मिलने के बाद 2026 के पहले छमाही में जियो को लिस्ट करने का प्लान बनाकर चल रही है इसलिए रिलायंस जियो IPO के जून 2026 तक भारतीय प्राइमरी मार्केट में आने की उम्मीद है.

    कितना है GMP?
    रिलायंस जियो IPO GMP बिगुल के मुताबिक, रिलायंस जियो IPO का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) फिलहाल 93 रुपये प्रति शेयर चल रहा है. इसका मतलब है कि कंपनी के शेयर DRHP फाइलिंग से काफी पहले ग्रे मार्केट में उपलब्ध हैं. जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि कंपनी आईपीओ के जरिए 2.50 परसेंट हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है. इससे पहले, मार्केट रेगुलेटर सेबी IPO लाने वाली बड़ी कंपनियों के लिए शेयर बिक्री का न्यूनतम साइज 5 परसेंट की जगह घटाकर 2.5 परसेंट करने का प्रस्ताव लेकर आई थी, जो अभी वित्त मंत्रालय की मंजूरी के अधीन है.

    कितना रहेगा प्राइस बैंड?
    रिलायंस जियो IPO की अनुमानित प्राइस बैंड को लेकर बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी ने कहा, “कंपनी के बताए गए वैल्यूएशन रेंज 130 बिलियन डॉलर से 170 बिलियन डॉलर के हिसाब से और रिटेल इन्वेस्टर्स को 15-20 परसेंट तक डिस्काउंट मिलने की बात को लेकर चले, तो रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिलायंस जियो IPO शेयर की अनुमानित कीमत 1,048 से 1,457 प्रति शेयर के बीच रहने की संभावना है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि आखिर में कौन सा वैल्यूएशन बैंड तय होता है.’

  • US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया

    US का नया दावा… भारत-अमेरिका ट्रेड डील अटकने की वजह ऑपरेशन सिंदूर को बताया


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक (US Commerce Secretary Howard Lutnick) ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US trade agreement) के सिरे न चढ़ पाने के पीछे एक नया दावा पेश किया है। लुटनिक के अनुसार, यह समझौता मई और जुलाई 2025 के बीच हस्ताक्षर के लिए लगभग तैयार था, लेकिन यह इसलिए विफल रहा क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) को व्यक्तिगत रूप से फोन कर सौदे को अंतिम रूप देने में असहजता दिखाई। हालांकि, इस घटनाक्रम के पीछे की असल वजह ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद पैदा हुई कूटनीतिक तल्खी बताई जा रही है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस समय यह समझौता होना था, उसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच भारी तनाव था। 7 मई को भारत ने पहलगाम हत्याओं के जवाब में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 10 मई को दोनों देशों के बीच युद्ध विराम की घोषणा से ठीक पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा कर दिया कि उन्होंने इस युद्ध विराम में मध्यस्थता की है।

    भारत ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि युद्ध विराम पाकिस्तान के अनुरोध पर द्विपक्षीय रूप से हुआ था। ट्रंप के बार-बार मध्यस्थता का श्रेय लेने की कोशिशों ने द्विपक्षीय संबंधों में तनाव पैदा कर दिया था। लुटनिक के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका उम्मीद कर रहा था कि पीएम मोदी ट्रंप को फोन करें, जिसके लिए भारत तैयार नहीं था।


    क्या भारत ने वाकई ‘ट्रेन मिस’ कर दी?

    लुटनिक ने दावा किया कि भारत ने समझौते पर हस्ताक्षर करने में तीन हफ्ते की देरी कर दी और तब तक वह “ट्रेन मिस” कर चुका था। उन्होंने ट्रंप की ‘सीढ़ी’ नीति का हवाला दिया, जिसके तहत पहले आने वाले देश को सबसे कम टैरिफ मिलता है और बाद में आने वालों के लिए यह बढ़ता जाता है। हालांकि, व्यापारिक आंकड़े लुटनिक के दावों के विपरीत हैं। अमेरिका ने ब्रिटेन के साथ 10% और वियतनाम के साथ 20% टैरिफ पर समझौता किया। लेकिन वियतनाम के बाद हुए कई समझौतों (दक्षिण कोरिया, जापान, यूरोपीय संघ) में वाशिंगटन ने कम टैरिफ लगाए, जबकि भारत पर 50% का सबसे ऊंचा टैरिफ बरकरार रखा गया।


    रूस के साथ संबंध बने ‘कांटा’
    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में रूस के साथ भारत के ऊर्जा और रक्षा संबंध भी एक बड़ी बाधा बने। जुलाई 2025 तक भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 37% थी। अगस्त की शुरुआत में, रूस से कच्चा तेल खरीदने के कारण ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क लगा दिया। लुटनिक ने पहले भी कहा था कि भारत का रूस से सैन्य उपकरण खरीदना और BRICS के माध्यम से डॉलर पर निर्भरता कम करना अमेरिका को नागवार गुजरा है।


    फोन कॉल नहीं, नीतियां थीं वजह
    थिंक टैंक GTRI के प्रमुख अजय श्रीवास्तव ने लुटनिक के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा, “इतने बड़े स्तर के व्यापारिक समझौते महज एक नेता के फोन कॉल न करने से नहीं रुकते। यह दावा वास्तविक कारण के बजाय एक ‘तर्क’ जैसा लगता है।” उन्होंने कहा कि टैरिफ, कृषि, डिजिटल व्यापार और नियामक स्वायत्तता जैसे अनसुलझे नीतिगत मतभेद ही इस सौदे के न हो पाने की असली वजह थे।

  • FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी

    FASTag Annual Pass के नाम हो रही धोखाधड़ी, सतर्क रहें…. NHAI ने जारी की चेतावनी


    नई दिल्ली। अगर आप भी फास्टेग एनुअल पास (FASTag Annual Pass) खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से इसे रिन्यू (Renew) करने का प्लान बना रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहिए। NHAI ने हाल ही में एक बड़े धोखाधड़ी (fraud) चेतावनी जारी की है जिसमें फर्जी वेबसाइट्स और अनधिकृत लिंक के जरिए वाहन मालिकों को फंसाया जा रहा है। NHAI के अधिकारियों का कहना है कि कुछ फर्जी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और लिंक “Annual Pass” की बिक्री का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे धोखाधड़ी के जाल हैं। इन झूठे ऑफर्स पर भरोसा करने से न सिर्फ आपका पैसा लगभग 3,000 रुपए तक तथा इसे खरीदते समय दर्ज की गई व्यक्तिगत और वाहन संबंधित जानकारी का दुरुपयोग होने का खतरा भी बढ़ जाता है।


    वार्षिक FASTag पास क्या होता है?

    FASTag Annual Pass एक वार्षिक सुविधा है जिसे NHAI ने उन निजी वाहनों के लिए पेश किया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर अक्सर यात्रा करते हैं। इसके तहत एक ₹3,000 का एक-बार शुल्क देकर वाहन मालिक एक साल या 200 टोल (जो पहले पूरा हो) तक टोल शुल्क के बिना यात्रा कर सकता है।

    यह Annual Pass Rajmargyatra App या आधिकारिक NHAI वेबसाइट के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है। जैसे ही पास सक्रिय होता है, SMS के जरिए इसकी पुष्टि भी मिलती है। इसे टीकरी और निजी एक्सप्रेसवे जैसे कुछ टोलों पर लागू नहीं किया जा सकता इसलिए यात्रा से पहले मार्ग और टोल लिस्ट चेक करना महत्त्वपूर्ण है।


    क्या है Scam का तरीका?
    NHAI ने पाया है कि कुछ फर्जी वेबसाइट्स, अनधिकृत लिंक्स और अनधिकृत ऐप्स “FASTag Annual Pass” बेचने का दावा करते हैं। ये प्लेटफॉर्म अपने नकली विज्ञापनों और आकर्षक ऑफर्स के साथ लोगों को लुभाते हैं। जैसे ही यूज़र इन फर्जी लिंक्स पर क्लिक करता है और अपनी वाहन और व्यक्तिगत जानकारी दर्ज करता है, कई बार पैसा पहले ही कट जाता है और पास कभी एक्टिव नहीं होता।

    कुछ यूजर्स ने ऑनलाइन पर ऐसे अनुभव भी साझा किए हैं जहां आधिकारिक ऐप पर भुगतान पेज फ्रीज़ हो जाता है या वाहन विवरण VAHAN डेटाबेस में ना होने के कारण पास नहीं बन पाता। ऐसे मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • Post Office Time Deposit: ₹7 लाख निवेश पर 5 साल में ₹10.14 लाख, गारंटीड रिटर्न और जीरो रिस्क वाली सुरक्षित स्कीम

    Post Office Time Deposit: ₹7 लाख निवेश पर 5 साल में ₹10.14 लाख, गारंटीड रिटर्न और जीरो रिस्क वाली सुरक्षित स्कीम


    नई दिल्ली। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम (Post Office Time Deposit Scheme) उन निवेशकों के लिए फिर से आकर्षण का केंद्र बन गई है, जो सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न की तलाश में हैं। यह योजना बैंक एफडी की तरह काम करती है और इसे पूरी तरह से भारत सरकार का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है। इस स्कीम के तहत निवेशक ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीकों से अकाउंट खोल सकते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे देश के किसी भी पोस्ट ऑफिस में आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

    पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट एक फिक्स्ड-इनकम स्मॉल सेविंग स्कीम है, जिसमें निवेशक अपनी पसंद की अवधि के लिए एकमुश्त राशि जमा कर सकते हैं और तय अवधि के बाद गारंटीड ब्याज प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में इस योजना पर 1 साल से लेकर 5 साल की अवधि के लिए 6.90% से 7.50% तक की ब्याज दर मिल रही है।

    इसका मतलब यह है कि कम जोखिम चाहने वाले निवेशक इस योजना के जरिए बिना बाजार की चिंता किए मजबूत रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

    इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और स्थिरता है। चूंकि यह वित्त मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है, इसलिए इसमें निवेश का जोखिम लगभग नगण्य है। निवेशक अपनी सुविधा अनुसार 1, 2, 3 या 5 साल की अवधि में पैसा लगा सकते हैं। न्यूनतम निवेश केवल 1,000 रुपये है और इसके बाद 1,000 रुपये के मल्टीपल में कोई भी राशि जमा की जा सकती है। अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है, जिससे बड़े निवेशक भी आसानी से इसमें पैसा लगा सकते हैं।

    लिक्विडिटी के मामले में भी यह स्कीम निवेशकों के लिए बेहद लाभकारी है।

    अकाउंट खोलने के 6 महीने बाद समय से पहले पैसा निकालने की अनुमति होती है। हालांकि, प्री-मैच्योर विदड्रॉल पर ब्याज दर थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन यह सुविधा फाइनेंशियल इमरजेंसी की स्थिति में बेहद उपयोगी साबित होती है।

    अब बात करते हैं 7 लाख रुपये के निवेश पर मिलने वाले रिटर्न की। यदि कोई निवेशक पोस्ट ऑफिस की 5 साल वाली टाइम डिपॉज़िट स्कीम में 7.50% ब्याज दर पर ₹7,00,000 एकमुश्त जमा करता है, तो 60 महीने बाद उसे लगभग ₹3,14,964 सिर्फ ब्याज के रूप में प्राप्त होंगे। मैच्योरिटी के समय कुल राशि लगभग ₹10,14,964 बन जाएगी। इस रिटर्न की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह गारंटीड है और इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता।

    टैक्स के नजरिए से भी यह स्कीम निवेशकों के लिए फायदेमंद है। 5 साल की टाइम डिपॉज़िट पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत सालाना ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ उठाया जा सकता है। हालांकि, स्कीम से मिलने वाले ब्याज पर टैक्स देना अनिवार्य है और अगर सालाना ब्याज तय सीमा से ज्यादा होता है तो TDS कट सकता है। पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट में ब्याज की गणना तिमाही आधार पर कंपाउंडिंग के साथ की जाती है और ब्याज का भुगतान सालाना होता है।

    यह व्यवस्था उन निवेशकों के लिए बेहद लाभकारी है, जो लंबी अवधि में कंपाउंडिंग से बेहतर फंड बनाना चाहते हैं और हर साल निश्चित ब्याज आय पाना चाहते हैं।

    कुल मिलाकर, पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉज़िट स्कीम उन लोगों के लिए एक बेहतरीन निवेश विकल्प है जो सुरक्षित, गारंटीड और जोखिम-रहित रिटर्न चाहते हैं। 7 लाख रुपये के निवेश पर 5 साल में 10 लाख रुपये से अधिक का फंड तैयार होना इस बात का सबूत है कि यह योजना लंबी अवधि के लिए भरोसेमंद और मजबूत निवेश विकल्प साबित हो सकती है।

  • Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?

    Bharat Coking Coal IPO 2026: ग्रे मार्केट 50% उछाल, लिस्टिंग पर बड़ा रिटर्न या निवेश का मौका?


    नई दिल्ली। साल 2026 का पहला मेनबोर्ड IPO Bharat Coking Coal Limited (BCCL) लेकर आया है, जो 9 से 13 जनवरी 2026 तक खुलेगा। IPO का लक्ष्य 1,071 करोड़ रुपये जुटाना है। BCCL, Coal India की सहायक कंपनी और देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी है। FY25 में BCCL का घरेलू उत्पादन में हिस्सा 58.5% रहा।

    IPO से पहले 8 जनवरी 2026 को एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें LIC सबसे बड़ा निवेशक रही, जिसने 78 करोड़ रुपये के 3.39 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदे। इसके अलावा निप्पॉन इंडिया और बंधन म्यूचुअल फंड ने 75-75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

    SBI Securities ने निवेशकों को कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब करने की सलाह दी, जबकि Anand Rathi ने इसे लिस्टिंग गेन के नजरिए से निवेश करने की सिफारिश की। IPO का ऊपरी प्राइस बैंड 23 रुपये है और वैल्यूएशन 6.4x EV/EBITDA के हिसाब से है। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा।

    IPO संरचना और डिटेल्स: यह IPO पूरी तरह OFS (Offer for Sale) है, जिसमें Coal India अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रही है। कुल शेयर 46.57 करोड़ हैं और प्राइस बैंड 21–23 रुपये निर्धारित किया गया है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट 600 शेयर है, जिसके लिए ऊपरी प्राइस बैंड पर निवेश 13,800 रुपये होगा। अलॉटमेंट स्ट्रक्चर के अनुसार, रिटेल निवेशक को 35%, QIB को 50%, और NII को 10% शेयर मिलेंगे।

    इसके अलावा Coal India के शेयरधारकों के लिए 107 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित हैं, और कर्मचारियों को प्रति शेयर 1 रुपये की छूट भी दी जाएगी।

    ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP): BCCL के शेयर ग्रे मार्केट में लगभग 50% प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जो लिस्टिंग पर मजबूत रिटर्न का संकेत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल अनलिस्टेड मार्केट की धारणा को दर्शाता है और अस्थिर रह सकता है। पोस्ट-इश्यू मार्केट कैपिटलाइजेशन का अनुमान लगभग 10,711 करोड़ रुपये है। लिस्टिंग के बाद Coal India की हिस्सेदारी 90% रहेगी, जो न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग नियम से काफी अधिक है।

    BCCL के फायदे और निवेश के कारण: देश की सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक कंपनी होने के साथ BCCL के पास 7.91 अरब टन अनुमानित कोल रिजर्व और 34 ऑपरेशनल माइंस हैं। FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

    जोखिम: लंबी अवधि में कोल रिजर्व में कमी, टॉप 10 ग्राहकों पर 80% से अधिक निर्भरता, और रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते उपयोग से कोल की मांग पर असर मुख्य जोखिम हैं।

    लिस्टिंग और अलॉटमेंट डेट: BCCL IPO का अलॉटमेंट 14 जनवरी 2026 को होने की संभावना है, जबकि लिस्टिंग 16 जनवरी 2026 को होने की उम्मीद है। बुक रनिंग लीड मैनेजर IDBI Capital और ICICI Securities हैं।

    निवेशक इस IPO में कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब कर सकते हैं, जबकि लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशक इसे देख सकते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम और कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स इसे शॉर्ट-टर्म और मिड-टर्म दोनों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।

  • Bharat Coking Coal (BCCL) IPO: जीएमपी 50% के करीब, पैसा लगाएं या नहीं?

    Bharat Coking Coal (BCCL) IPO: जीएमपी 50% के करीब, पैसा लगाएं या नहीं?



    नई दिल्ली। भारत की कोकिंग कोल कंपनी Bharat Coking Coal Limited (BCCL) ने साल 2026 का पहला मेनबोर्ड आईपीओ लॉन्च कर दिया है। यह IPO 9 से 13 जनवरी 2026 तक खुलेगा, जिसका लक्ष्य 1,071 करोड़ रुपये जुटाना है। कोल इंडिया से जुड़ी यह मिनी रत्न कंपनी देश में कोकिंग कोल की सबसे बड़ी उत्पादक है और FY25 में घरेलू उत्पादन में इसका 58.5% हिस्सा रहा।

    IPO से पहले 8 जनवरी 2026 को एंकर निवेशकों से 273.13 करोड़ रुपये जुटाए गए। इसमें LIC सबसे बड़ा निवेशक रही, जिसने 78 करोड़ रुपये के 3.39 करोड़ शेयर खरीदे। निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड और बंधन म्यूचुअल फंड ने 75-75 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

    ब्रोकरेज के मुताबिक 23 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड पर IPO 6.4x EV/EBITDA पर वैल्यूएशन पर है। FY25 में EBITDA मार्जिन 12.7% और ROCE 18.2% रहा।

    BCCL IPO का स्ट्रक्चर:

    यह पूरी तरह से OFS (Offer for Sale) है, जिसमें कोल इंडिया अपनी 10% हिस्सेदारी बेच रही है।

    प्राइस बैंड: 21–23 रुपये

    कुल शेयर: 46.57 करोड़

    रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम लॉट: 600 शेयर (ऊपरी प्राइस बैंड पर 13,800 रुपये)

    अलॉटमेंट स्ट्रक्चर:

    रिटेल: 35%

    QIB: 50%

    NII: 10%

    कोल इंडिया शेयरधारकों के लिए 107 करोड़ रुपये के शेयर आरक्षित

    IPO के ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) की रिपोर्ट भी सामने आई है।

    BCCL के शेयर ग्रे मार्केट में लगभग 50% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो मजबूत लिस्टिंग की संभावना दिखाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि GMP केवल अनलिस्टेड मार्केट की धारणा दर्शाता है और अस्थिर रह सकता है।

    पोस्ट-इश्यू मार्केट कैप लगभग 10,711 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, और लिस्टिंग के बाद कोल इंडिया की हिस्सेदारी 90% रहेगी।

    BCCL के फायदे और निवेश के कारण:

    देश में सबसे बड़ी कोकिंग कोल उत्पादक

    7.91 अरब टन का अनुमानित कोल रिजर्व

    34 ऑपरेशनल माइंस

    FY23–FY25 के दौरान बिक्री और मुनाफा क्रमशः 5% और 37% CAGR से बढ़ा

    मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और विश्वसनीय ट्रैक रिकॉर्ड

    जोखिम जिन पर नजर रखनी जरूरी है:

    कोल रिजर्व में लंबी अवधि में कमी

    टॉप 10 ग्राहकों पर 80% से अधिक निर्भरता

    रिन्यूएबल

    एनर्जी के बढ़ते उपयोग से कोल की मांग पर असर

    निवेशक इस IPO में कट-ऑफ प्राइस पर सब्सक्राइब कर सकते हैं, जबकि लिस्टिंग गेन के लिए उत्सुक लोग भी इसे देख सकते हैं। ग्रे मार्केट प्रीमियम 50% के करीब होने के कारण यह IPO शॉर्ट-टर्म लिस्टिंग के लिए आकर्षक नजर आता है, लेकिन निवेशकों को लंबी अवधि के जोखिमों का ध्यान रखना जरूरी है।