Category: Economy

  • लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता

    लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 500 अंक तक टूटा, निवेशकों में सतर्कता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला लगातार दूसरे कारोबारी दिन भी जारी रहा। मंगलवार को बाजार की शुरुआत से ही दबाव का माहौल देखने को मिला और कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक टूट गया। वहीं एनएसई निफ्टी 50 फिसलकर 26,200 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया। हैवीवेट शेयरों में मुनाफावसूली, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने बाजार की धारणा को कमजोर बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 376 अंक की गिरावट के साथ 85,063 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 75 अंक टूटकर 26,175 पर आ गया। केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में भी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों का मनोबल और प्रभावित हुआ। व्यापक बाजार में गिरावट से साफ संकेत मिला कि फिलहाल निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव हैवीवेट शेयरों में बिकवाली के कारण देखने को मिला। बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के दिग्गज शेयरों में कमजोरी रही। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स जैसे प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि हाल के दिनों में आई तेज़ी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी, जिससे बड़े शेयरों पर दबाव बढ़ा।

    वैश्विक मोर्चे पर भी कुछ ऐसे संकेत मिले, जिन्होंने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। अमेरिका की ओर से भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं ने बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा किया। इसका असर खासतौर पर निर्यात आधारित कंपनियों और सेक्टर्स पर देखने को मिला। निवेशकों को आशंका है कि अगर व्यापारिक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर कंपनियों की आय और आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है।इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की चाल को प्रभावित किया। जनवरी के शुरुआती कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। इससे बाजार में तरलता पर दबाव बढ़ा है और घरेलू निवेशक भी सतर्क रुख अपनाते नजर आ रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों का असर भी घरेलू शेयर बाजार पर पड़ा। कुछ देशों में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर झुकने के लिए मजबूर किया है। इसका नतीजा यह रहा कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।इस बीच इंडिया VIX, जिसे बाजार की अस्थिरता का पैमाना माना जाता है, में भी लगातार तेजी देखी गई। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी को 26,100 से 26,150 के दायरे में मजबूत सपोर्ट मिल सकता है, जबकि ऊपर की ओर 26,400 के आसपास कड़ी रुकावट है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सतर्क रहें और किसी भी फैसले में लंबी अवधि के नजरिए को प्राथमिकता दें।

  • आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड

    आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत के साथ आधार कार्ड से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू हो गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणUIDAI ने आधार PVC कार्ड बनवाने की फीस में वृद्धि कर दी है। अब नागरिकों को आधार PVC कार्ड के लिए पहले की तरह ₹50 नहीं, बल्कि ₹75 शुल्क देना होगा। यह नई दरें 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं। UIDAI ने साफ किया है कि यह फैसला मैटेरियल कॉस्ट, प्रिंटिंग खर्च और सुरक्षित डिलीवरी लागत में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    UIDAI के अनुसार, आधार PVC कार्ड एक आधुनिक, टिकाऊ और सुविधाजनक विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह कार्ड सामान्य प्लास्टिक कार्ड की तरह मजबूत होता है, जिसे आसानी से वॉलेट में रखा जा सकता है। कागज़ी आधार लेटर की तुलना में यह पानी, नमी और टूट-फूट से अधिक सुरक्षित रहता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच PVC आधार कार्ड की मांग लगातार बढ़ी है। बढ़ती मांग के साथ उत्पादन, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत भी बढ़ी, जिसके चलते शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो गया।

    UIDAI ने यह भी बताया कि आधार PVC कार्ड में कई अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इसे ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं। इसमें सिक्योर QR कोड, होलोग्राम, माइक्रोटेक्स्ट और घोस्ट इमेज जैसे फीचर्स दिए जाते हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। प्राधिकरण ने नागरिकों को यह चेतावनी भी दी है कि बाजार में निजी एजेंसियों द्वारा छपवाए गए PVC आधार कार्ड मान्य नहीं होते। केवल UIDAI द्वारा जारी किया गया आधार PVC कार्ड ही आधिकारिक और वैध माना जाएगा।

    आधार PVC कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बेहद सरल और सुविधाजनक है। इच्छुक नागरिक UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करना होता है, जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से लॉगिन किया जाता है। लॉगिन के बाद विकल्प पर क्लिक कर विवरण की पुष्टि करनी होती है। अंतिम चरण में ऑनलाइन भुगतान करना होता है, जिसमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। भुगतान सफल होते ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

    UIDAI के मुताबिक, भुगतान के बाद लगभग पांच कार्यदिवस के भीतर आधार PVC कार्ड प्रिंट कर भारतीय डाक को सौंप दिया जाता है। इसके बाद स्पीड पोस्ट के जरिए कार्ड सीधे आवेदक के पते पर भेज दिया जाता है। जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं, उनके लिए ऑफलाइन विकल्प भी मौजूद है। ऐसे नागरिक नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर PVC कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    फिलहाल आधार तीन स्वरूपों में उपलब्ध है—आधार लेटर, ई-आधार और आधार PVC कार्ड। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फीस में ₹25 की बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन इसकी मजबूती, लंबी उम्र और सुविधाजनक उपयोग को देखते हुए आधार PVC कार्ड की लोकप्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

  • Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    Bank of India में जमा करें ₹2,00,000 और पाएं ₹77,945 का फिक्स ब्याज, गारंटी के साथ

    नई दिल्ली। भारत में कुल सरकारी बैंकों की संख्या 12 है, जिन्हें केंद्र सरकार कंट्रोल करती है। बैंक ऑफ इंडिया भी देश के 12 सरकारी बैंकों की लिस्ट में शामिल है। ये सरकारी बैंक अपने ग्राहकों को एफडी खातों पर काफी अच्छा ब्याज दे रहा है। बताते चलें कि पिछले साल आरबीआई द्वारा रेपो रेट में की गई 1.25 प्रतिशत की कटौती के बाद तमाम बैंकों ने एफडी की ब्याज दरों में संशोधन कर दिया था। बैंक ऑफ इंडिया ने भी 1 दिसंबर, 2025 से अपनी एफडी स्कीम की ब्याज दरों में संशोधन किया था। यहां हम आपको बैंक ऑफ इंडिया की एक ऐसी एफडी स्कीम के बारे में बताएंगे, जिसमें 2 लाख रुपये जमा कर गारंटी के साथ 77,945 रुपये तक का फिक्स ब्याज पाया जा सकता है।
    एफडी खातों पर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है बैंक ऑफ इंडिया
    बैंक ऑफ इंडिया में कम से कम 7 दिनों के लिए और ज्यादा से ज्यादा 10 साल के लिए एफडी खाता खुलवाया जा सकता है। ये सरकारी बैंक एफडी खातों पर 3.00 प्रतिशत से लेकर 7.35 प्रतिशत तक का ब्याज दे रहा है। बैंक ऑफ इंडिया 450 दिनों की स्टार स्वर्णिम स्पेशल एफडी स्कीम पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है। बैंक इस स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.70 प्रतिशत, वरिष्ठ नागरिकों को 7.20 प्रतिशत और अति वरिष्ठ नागरिकों को 7.35 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पब्लिक सेक्टर का ये बैंक 3 साल से ज्यादा और 5 साल से कम अवधि वाली एफडी स्कीम पर सामान्य नागरिकों को 6.25 प्रतिशत और वरिष्ठ नागरिकों को 6.75 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है।

    2 लाख रुपये जमा करने पर मिलेगा 77,945 रुपये तक का ब्याज
    अगर आप एक सामान्य नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने (5 साल से कम) की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो 6.25% की ब्याज दर से आपको मैच्यॉरिटी पर कुल 2,71,302 रुपये मिलेंगे, जिसमें 71,302 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है। इसी तरह, अगर आप एक वरिष्ठ नागरिक हैं और बैंक ऑफ इंडिया में 59 महीने की अवधि के लिए 2 लाख रुपये की एफडी कराते हैं तो आपको 6.75 प्रतिशत की ब्याज दर से मैच्यॉरिटी पर कुल 2,77,945 रुपये मिलेंगे, जिसमें 77,945 रुपये का फिक्स ब्याज शामिल है।

  • नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर फिक्स्ड रिटर्न और टैक्स छूट निवेश करने का बेहतरीन अवसर

    नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर फिक्स्ड रिटर्न और टैक्स छूट निवेश करने का बेहतरीन अवसर


    नई दिल्ली । भारत सरकार की एक प्रमुख बचत योजना नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट भारतीय निवेशकों के लिए एक सुरक्षित निवेश विकल्प साबित हो रही है। इस स्कीम पर मिलने वाली ब्याज दर 7.7% सालाना है जो आपके निवेश पर अच्छा रिटर्न देती है। एनएससी की विशेष बात यह है कि इसका ब्याज हर साल कंपाउंड होता है और भुगतान पूरी तरह से मेच्योरिटी 5 साल के बाद ही किया जाता है।
    कंपाउंडिंग इंटरेस्ट से मिलने वाला फिक्स्ड रिटर्न
    एनएससी पर रिटर्न कंपाउंडिंग इंटरेस्ट फ़ॉर्मूला से कैलकुलेट किया जाता है। अगर आप ₹250000 का निवेश करते हैं तो पांच साल के बाद आपको ₹116062 का फिक्स रिटर्न मिलेगा। इसका मतलब है कि आपके ₹250000 निवेश के ऊपर 5 साल बाद ₹366062 तैयार होंगे। यह निवेश आपके भविष्य के लिए एक सुरक्षित और स्थिर विकल्प हो सकता है खासकर उन लोगों के लिए जो अपनी बचत को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
    टैक्स छूट का लाभ
    एनएससी में निवेश करने पर आपको ₹1.5 लाख तक के निवेश पर 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि एनएससी पर मिलने वाला ब्याज आखिरी वर्ष तक टैक्स फ्री होता है इसके बाद उस पर टैक्स लगाया जाता है। इस तरह एनएससी निवेशकों को टैक्स छूट के रूप में अतिरिक्त लाभ देता है।
    कौन कर सकता है निवेश
    एनएससी स्कीम में कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। हालांकि नॉन-रेजिडेंट इंडियन्स एनआरआई इस स्कीम में निवेश नहीं कर सकते। यदि कोई निवासी भविष्य में एनआरआई बन जाता है तो वह अपने एनएससी निवेश को परिपक्वता तक रख सकता है। वयस्क नाबालिग और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों के अभिभावक भी इस योजना में निवेश कर सकते हैं। 10 वर्ष से ऊपर के नाबालिग भी एनएससी में निवेश कर सकते हैं।

    निवेश का तरीका और प्रक्रिया
    एनएससी में निवेश करने के लिए आपको नजदीकी डाकघर में जाकर आवेदन करना होगा। यहां आपको एक फॉर्म भरने के बाद अपनी पहचान पते और अन्य जरूरी दस्तावेज़ों की जानकारी देनी होगी। एनएससी पर निवेश करने की कोई भी अधिकतम सीमा नहीं है लेकिन आपको टैक्स लाभ 80C के तहत ₹1.5 लाख तक ही मिलेगा।नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट एक बेहतरीन निवेश विकल्प है जो आपको टैक्स लाभ सुरक्षित रिटर्न और कंपाउंडिंग इंटरेस्ट प्रदान करता है। यदि आप एक स्थिर और जोखिम-मुक्त निवेश की तलाश में हैं तो एनएससी एक आदर्श विकल्प हो सकता है। इसके साथ ही आप अपनी बचत को भी सुरक्षित रख सकते हैं और अच्छा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं।

  • बैंकों ने 27 जनवरी को हड़ताल का ऐलान, लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, कर्मचारी कर रहे 5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग

    बैंकों ने 27 जनवरी को हड़ताल का ऐलान, लगातार 4 दिन रहेंगे बंद, कर्मचारी कर रहे 5 दिन के कार्य सप्ताह की मांग


    नई दिल्ली । जनवरी के आखिरी हफ्ते में बैंकिंग सेवाओं से जुड़े किसी काम की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर है। बैंक कर्मचारियों ने 27 जनवरी 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल का कारण है कर्मचारियों द्वारा की जा रही 5 डेज वीक की मांग। यदि हड़ताल होती है तो बैंकों का काम लगातार चार दिनों तक ठप रहेगा क्योंकि 24 जनवरी को चौथा शनिवार 25 जनवरी को रविवार और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की छुट्टी होगी। ऐसे में 27 जनवरी को होने वाली हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो सकती हैं।

    क्यों हो रही है हड़ताल

    बैंक कर्मचारियों का संघ, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 5 दिन का कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की है। वर्तमान में बैंक कर्मचारियों को हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश मिलता है, जबकि रविवार के दिन भी अवकाश होता है। कर्मचारियों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए वेतन संशोधन समझौते के तहत भारतीय बैंकों के संघ आईबीए और यूएफबीयू के बीच सहमति बनी थी कि वे हर महीने के दो शनिवारों को अवकाश देंगे लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।

    यूनियन ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार उनकी वास्तविक मांग पर ध्यान नहीं दे रही है। संघ का कहना है कि यदि 5 डेज वीक लागू किया जाता है तो वे हर दिन 40 मिनट अतिरिक्त काम करने के लिए तैयार हैं जिससे कार्य समय में कोई कमी नहीं होगी।

    क्या हैं बैंकों की मुख्य मांगें

    संघ का कहना है कि अन्य सरकारी संस्थान जैसे कि आरबीआई भारतीय रिजर्व बैंक एलआईसी भारतीय जीवन बीमा निगम जीआईसी जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन पहले से ही सप्ताह में 5 दिन काम कर रहे हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा बाजार, करेंसी मार्केट और स्टॉक एक्सचेंज जैसे वित्तीय बाजार भी शनिवार को बंद रहते हैं। ऐसे में बैंकों द्वारा सप्ताह में पांच दिन काम करने की कोई वजह नहीं बनती।

    यूएफबीयू के बारे में

    यूएफबीयू भारत के नौ प्रमुख बैंक यूनियनों का एक संगठन है। यह संगठन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और कुछ पुराने निजी बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। संघ ने कहा कि उनकी सोशल मीडिया अभियान को जबरदस्त समर्थन मिला है, जिसमें 18 लाख से अधिक इंप्रेशन और पूर्व में ट्विटर पर लगभग 2,85,200 पोस्ट्स मिली हैं।

    आगे क्या होगा
    27 जनवरी को होने वाली इस हड़ताल से बैंकिंग सेवाओं का संचालन प्रभावित हो सकता है। यह हड़ताल एक दिन की होगी, लेकिन इसके कारण बैंकों की सेवाएं तीन दिन तक ठप रह सकती हैं। क्योंकि हड़ताल के दिन के अलावा, 24, 25, और 26 जनवरी को पहले से ही छुट्टियां हैं। इसलिए अगर आप जनवरी के अंत में किसी बैंक से जुड़ा काम निपटाना चाहते हैं तो इसे पहले के हफ्ते में निपटा लें या फिर आपको अगले महीने तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

    हालांकि यूएफबीयू ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्यभार के लिए तैयार हैं बशर्ते उन्हें सप्ताह में पांच दिन काम करने का अवसर मिले। कर्मचारियों का कहना है कि यह कदम न केवल उनके लिए बल्कि ग्राहकों के लिए भी सुविधाजनक होगा क्योंकि इससे बैंकों का कामकाज और भी व्यवस्थित हो सकता है।

  • Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    Good News: चांदी की कीमत में आ सकती है 60% तक की बड़ी गिरावट, जानें क्या है वजह

    नई दिल्ली। पिछले साल चांदी की कीमतों ने रिकॉर्ड उछाल देखा था। तेजी के चलते चांदी की कीमत प्रति किलो 2.54 लाख रुपये तक पहुँच गई थी। हालांकि, अब घरेलू बाजार में यह गिरकर 2.35 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई है। 2025 में चांदी की कीमत में लगभग 180% की बढ़ोतरी हुई थी, जिसका मुख्य कारण बढ़ती डिमांड और सप्लाई में कमी थी। लेकिन अब मार्केट एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि FY27 के अंत तक चांदी की कीमत में 60% तक की बड़ी गिरावट आ सकती है।

    तेजी के पीछे की वजहें

    चांदी की कीमत में रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई कारण थे। सबसे पहले, सैमसंग द्वारा लिथियम-आयन बैटरी से सॉलिड-स्टेट बैटरी में बदलाव की घोषणा ने इंडस्ट्रियल डिमांड बढ़ा दी। इसके अलावा, अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव के कारण पेरू और चाड से सप्लाई प्रभावित हुई। साथ ही, 1 जनवरी 2026 से चीन द्वारा चांदी के एक्सपोर्ट पर अप्रत्यक्ष बैन ने भी कीमतें बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। ये सभी कारक मिलकर चांदी को बाजार में महँगी बनाने का काम कर रहे थे।

    एक्सपर्ट्स क्यों जताते हैं गिरावट की आशंका?

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी की कीमतें अब खतरनाक स्तर पर पहुँच गई हैं। इंडस्ट्रियल डिमांड पर कीमतों की बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है। फोटोवोल्टिक सेल और सोलर पैनल इंडस्ट्री पहले ही चांदी की जगह तांबे का इस्तेमाल बढ़ा रही है। वहीं बैटरी सेक्टर में भी चांदी से कॉपर बाइंडिंग तकनीक अपनाने की कोशिशें की जा रही हैं। ऐसे में चांदी की मांग घटने की संभावना है और FY27 के अंत तक कीमतों में 60% तक की गिरावट का अनुमान लगाया जा रहा है।

    इतिहास खुद को दोहरा सकता है

    चांदी के इतिहास पर नजर डालें तो अक्सर बुल मार्केट के बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता बताते हैं कि 1980 में हंट ब्रदर्स ने दुनिया के लगभग एक-तिहाई सिल्वर रिजर्व जमा कर लिए थे। इसके बाद एक्सचेंजों ने मार्जिन मनी बढ़ा दी, जिससे सिल्वर की कीमत $49.50 से गिरकर $11 प्रति औंस हो गई। इसी तरह 2011 में भी चांदी $48 प्रति औंस पर पहुंचने के बाद लगभग 75% गिर गई थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतिहास एक बार फिर दोहरा सकता है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

    निवेशकों के लिए संदेश

    चांदी में हाल की तेजी निवेशकों के लिए अवसर और जोखिम दोनों लेकर आई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्री की मांग घटने और विकल्पों के इस्तेमाल के चलते चांदी की कीमतें तेजी से घट सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ भावनाओं के आधार पर निवेश करने की बजाय सावधानीपूर्वक योजना और मार्केट ट्रेंड्स की निगरानी करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर, पिछले साल की रिकॉर्ड तेजी के बावजूद चांदी के बाजार में मंदी की संभावना बढ़ गई है। FY27 तक 60% तक गिरावट की चेतावनी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।

  • निरोगी काया का सीक्रेट कोड है आयुर्वेदिक दिनचर्या बुढ़ापा थमेगा और बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

    निरोगी काया का सीक्रेट कोड है आयुर्वेदिक दिनचर्या बुढ़ापा थमेगा और बीमारियाँ रहेंगी कोसों दूर

    नई दिल्ली । धुनिक युग में खराब जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर समय से पहले बीमारियों का घर बनता जा रहा है। आयुर्वेद के अनुसारहमारा शरीर एक मशीन की तरह है जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए सही ईंधन और समय पर सर्विसिंग की जरूरत होती है। वैज्ञानिक जिसे सर्कैडियन रिदम कहते हैंआयुर्वेद उसे दिनचर्या के रूप में सदियों पहले परिभाषित कर चुका है। यदि इस लय का पालन किया जाएतो बुढ़ापा भी जल्दी दस्तक नहीं देता।

    ब्रह्म मुहूर्त और सुबह की शुरुआत

    दिनचर्या का सबसे पहला नियम है ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय से पूर्व जागना। सुबह उठकर शरीर से विषाक्त पदार्थों के निष्कासन के बाद तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसारबालों और त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए नाभि में तेल की कुछ बूंदें डालना और आंखों में अंजन लगाना अत्यंत लाभकारी है।

    व्यायाम और अभ्यंग मालिश का महत्व

    दिन की शुरुआत हल्के व्यायाम और सैर से करें। इसके बाद अभ्यंग यानी शरीर की तेल मालिश जरूर करें। अभ्यंग न केवल रक्त संचारको बेहतर बनाता हैबल्कि मांसपेशियों की थकान मिटाकर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है।

    आहार का नियम कब और क्या खाएं

    आयुर्वेद में भोजन को मात्र पेट भरने का साधन नहींबल्कि औषधि माना गया है। दोपहर का भोजन दोपहर 12 से 1 बजे के बीच भोजन कर लेना चाहिए। इस समय शरीर की जठराग्नि पाचन अग्नि सबसे प्रबल होती हैजिससे भोजन आसानी से पच जाता है। त का भोजन रात का खाना हमेशा हल्का होना चाहिए और कोशिश करें कि सूर्यास्त के आसपास ही भोजन कर लें। ज्रासन का लाभ खाना खाने के तुरंत बाद लेटना नहीं चाहिए। या तो कुछ कदम पैदल चलें या कम से कम 10-15 मिनट वज्रासन में बैठें। यह आसन पाचन प्रक्रिया को तेज करता है।

    गहरी नींद और मरम्मत का समय

    नींद शरीर की मरम्मत का समय है। रात को सोने से पहले दूध के साथ हल्दी या त्रिफला का सेवन करें। यह न केवल तनाव कम करता हैबल्कि गहरी नींद लाने में भी सहायक है। सोते समय बाईं करवट लेकर सोना सबसे उत्तम माना गया हैक्योंकि इससे पाचन तंत्र सुचारू रहता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। युर्वेदिक दिनचर्या कोई कठिन नियम नहींबल्कि प्रकृति के साथ जीने का एक तरीका है। यदि हम अपने शरीर की इस प्राकृतिक लय को पहचान लेंतो हम एक शक्तिशाली और रोगमुक्त जीवन जी सकते हैं।

  • सर्दियों में शरीर का सुरक्षा कवच है ब्राउन फैट मोटापा बढ़ाने नहींकैलोरी जलाने में करता है मदद

    सर्दियों में शरीर का सुरक्षा कवच है ब्राउन फैट मोटापा बढ़ाने नहींकैलोरी जलाने में करता है मदद


    नई दिल्ली । आमतौर पर फैट या वसा शब्द सुनते ही हमारे मन में मोटापे और बीमारियों का ख्याल आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर में एक ऐसा गुड फैट भी है जो आपको मोटा करने के बजाय पतला रखने और बीमारियों से बचाने में मदद करता है मेडिकल साइंस की भाषा में इसे ब्राउन फैट कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसारसर्दियों के मौसम में यह शरीर के लिए किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है।

    व्हाइट फैट बनाम ब्राउन फैट क्या है अंतर

    हमारे शरीर में मुख्य रूप से दो प्रकार के फैट पाए जाते हैं। पहला व्हाइट फैटजिसका काम शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा को जमा करना है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेते हैंतो वह व्हाइट फैट के रूप में जमा होकर मोटापे का कारण बनती है इसके विपरीतब्राउन फैट एक सक्रिय ऊतक है। इसमें प्रचुर मात्रा में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैंजो इसे गहरा रंग देते हैं। ब्राउन फैट का मुख्य कार्य कैलोरी को स्टोर करना नहींबल्कि उसे जलाकर शरीर के लिए ऊष्मा पैदा करना है। जब शरीर को ठंड लगती हैतो यही ब्राउन फैट बर्न होकर हमें भीतर से गर्माहट देता है।

    सेहत के लिए क्यों है यह जरूरी

    ब्राउन फैट केवल शरीर को गर्म ही नहीं रखताबल्कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी हैं मेटाबॉलिज्म में सुधार यह शरीर की चयापचय दर को बढ़ाता हैजिससे वजन नियंत्रित रहता है। ब्लड शुगर पर नियंत्रण ब्राउन फैट इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा कम होता है। तेजी से कैलोरी बर्न रिसर्च के अनुसारसक्रिय ब्राउन फैट सामान्य फैट की तुलना में कई गुना तेजी से कैलोरी जला सकता है। हृदय स्वास्थ्य यह खून से ट्राइग्लिसराइड्स और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक हो सकता है।

    ब्राउन फैट की कमी के संकेत

    यदि किसी व्यक्ति के शरीर में ब्राउन फैट की कमी है और व्हाइट फैट की अधिकता हैतो उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे लोगों को ठंड अधिक लगती हैवे जल्दी थक जाते हैं और उनका वजन तेजी से बढ़ने लगता है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण उन्हें सुस्ती और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

    कैसे करें इसे एक्टिवेट

    ब्राउन फैट किसी भोजन के जरिए सीधे शरीर में नहीं डाला जा सकताबल्कि इसे जीवनशैली के माध्यम से सक्रिय करना पड़ता हैठंड का संपर्क हल्की ठंड में रहने या ठंडे पानी से स्नान करने से शरीर का ब्राउन फैट सक्रिय हो जाता है। नियमित व्यायाम वर्कआउट करने से शरीर में इरिसिन नामक हार्मोन निकलता हैजो व्हाइट फैट को ब्राउन फैट में बदलने में मदद करता है।  संतुलित आहार पोषण युक्त भोजन और सही मात्रा में कैलोरी का सेवन इसे स्वस्थ बनाए रखता है। ब्राउन फैट हमारे शरीर की वह आंतरिक भट्टी है जो न केवल हमें कड़ाके की ठंड से बचाती हैबल्कि आधुनिक जीवनशैली की बीमारियों जैसे मोटापा और डायबिटीज से लड़ने में भी सक्षम है। फिट रहने के लिए जरूरी है कि हम अपनी जीवनशैली में सुधार कर इस गुड फैट को एक्टिव रखें।

  • शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 300 अंक उछलकर 85,350 पार, निफ्टी में 100 अंकों की बढ़त

    शेयर बाजार में जोरदार तेजी: सेंसेक्स 300 अंक उछलकर 85,350 पार, निफ्टी में 100 अंकों की बढ़त


    नई दिल्ली । साल 2026 के दूसरे कारोबारी दिन शुक्रवार 2 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही खरीदारी का दबाव बना रहा और बीएसई सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक चढ़कर 85350 के पार कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी 50 भी करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ 26250 के स्तर पर पहुंच गया। आज के कारोबार में बैंकिंग ऑटो और मेटल शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। बीएसई सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 24 शेयर हरे निशान में रहे जबकि केवल 6 शेयर लाल निशान में थे। निफ्टी 50 के अधिकांश शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली।

    सेक्टोरल प्रदर्शन

    बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। निजी और सरकारी दोनों बैंकों के शेयरों में लगातार खरीदारी हुई जिससे सेक्टर मजबूती के साथ बंद हुआ। ऑटो सेक्टर में भी मांग मजबूत रही जिससे प्रमुख ऑटो कंपनियों के शेयर चढ़े। मेटल सेक्टर में भी सकारात्मक रुख देखा गया।इसके विपरीत FMCG सेक्टर में मुनाफावसूली का दबाव रहा और यह सेक्टर लाल निशान में बंद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनिंदा सेक्टर्स में वैल्यू बाइंग और घरेलू संस्थागत निवेशकोंDII की खरीद ने बाजार को मजबूती प्रदान की।

    वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेत
    वैश्विक बाजारों में आज मिले-जुले संकेत मिले। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.29 प्रतिशत बढ़कर 4268 पर पहुंचा। जापान का निक्केई इंडेक्स 0.37 प्रतिशत गिरकर 50339 पर रहा। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स 2.25 प्रतिशत की तेजी के साथ 26205 पर बंद हुआ जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट मामूली बढ़त के साथ 3968 पर कारोबार कर रहा था।अमेरिकी बाजारों में 1 जनवरी को डाउ जोंस 0.63 प्रतिशत गिरकर 48063 पर बंद हुआ। नैस्डेक कंपोजिट और S&P 500 में क्रमशः 0.76 और 0.74 प्रतिशत की कमजोरी रही।

    निवेशकों की गतिविधि

    आंकड़ों के अनुसार 31 दिसंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकोंFII ने लगभग 3268 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकोंDII ने 1525 करोड़ रुपये की खरीदारी की। दिसंबर 2025 में FIIs ने कुल 34349 करोड़ रुपये के शेयर बेचे जबकि DIIs ने लगभग 79620 करोड़ रुपये की खरीदारी की। नवंबर 2025 में भी घरेलू निवेशकों की खरीद ने बाजार को मजबूती दी थी।

    पिछले कारोबारी दिन का हाल

    साल के पहले कारोबारी दिन 1 जनवरी 2026 को बाजार लगभग सपाट बंद हुआ था। सेंसेक्स 32 अंक गिरकर 85189 पर और निफ्टी 17 अंकों की बढ़त के साथ 26147 पर बंद हुआ था।कुल मिलाकर आज के कारोबार में घरेलू निवेशकों के भरोसे और सेक्टोरल खरीदारी के दम पर बाजार में मजबूती देखी गई। आगे की चाल वैश्विक संकेतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक डेटा पर निर्भर करेगी। निवेशक बैंकिंग और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टर्स पर नजर बनाए रख सकते हैं जबकि FMCG में मुनाफावसूली का दबाव जारी रह सकता है।

  • Small Saving Schemes Q4FY26: PPF और सुकन्या योजना पर ब्याज दरें स्थिर, निवेशकों को राहत

    Small Saving Schemes Q4FY26: PPF और सुकन्या योजना पर ब्याज दरें स्थिर, निवेशकों को राहत


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत में निवेशकों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने जनवरी-मार्च 2026 तिमाहीQ4FY26 के लिए स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला किया है। इस निर्णय के अनुसार पब्लिक प्रोविडेंट फंडPPF सुकन्या समृद्धि योजना, पोस्ट ऑफिस फिक्स्ड डिपॉजिट और नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट जैसी योजनाओं पर मौजूदा दरें ही लागू रहेंगी।स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर PPF निवेशकों को 7.1% और सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2% सालाना ब्याज मिलेगा। अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरें 4% से 8.2% के दायरे में स्थिर रहेंगी। यह लगातार आठवीं तिमाही है जब इन योजनाओं की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले दिसंबर 2023 में ब्याज दरों में संशोधन किया गया था।

    आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्मॉल सेविंग स्कीम्स की ब्याज दरें तय करते समय महंगाई दर, सरकारी उधारी और बाजार में नकदी की स्थिति जैसे कई पहलुओं का ध्यान रखा जाता है। हर तिमाही इन दरों की समीक्षा होती है। श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के अनुसार, इन योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न समान अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड से थोड़ी अधिक होना चाहिए, ताकि निवेशकों को सुरक्षित और आकर्षक विकल्प मिल सके।छोटी बचत योजनाएं भारतीय घरेलू बचत का अहम हिस्सा हैं। इन 12 वित्तीय साधनों के माध्यम से लोग जोखिम से दूर रहकर निवेश कर सकते हैं। इन योजनाओं में जुटाई गई राशि नेशनल स्मॉल सेविंग्स फंड NSSF में जमा होती है, जिसका उपयोग सरकार वित्तीय प्रबंधन और घाटे की भरपाई के लिए करती है।

    स्मॉल सेविंग स्कीम्स को संरचना के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में पोस्टल डिपॉजिट आते हैं, जिनमें सेविंग अकाउंट, रिकरिंग डिपॉजिट, टाइम डिपॉजिट और मंथली इनकम स्कीम शामिल हैं। दूसरी श्रेणी में सेविंग सर्टिफिकेट जैसे नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं हैं, जिनमें PPF सुकन्या समृद्धि योजना और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना प्रमुख हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार स्थिर ब्याज दर निवेशकों में विश्वास बनाए रखती है। यह खासकर उन लोगों के लिए अहम है जो लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं। 2026 की शुरुआत में ब्याज दरों में स्थिरता ने निवेशकों को यह संकेत दिया है कि सरकारी छोटी बचत योजनाएं जोखिम-मुक्त और लाभदायक विकल्प बनी हुई हैं।