Category: Economy

  • त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर रोक, एसआईपी और लंपसम निवेशकों के लिए बदले नियम

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन में सोने की मांग बढ़ने से पहले कई म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) से जुड़े फंड-ऑफ-फंड्स (एफओएफ) में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह व्यवस्था 16 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत नए एकमुश्त निवेश, नई सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के पंजीकरण और पहले से चल रही एसआईपी में अतिरिक्त निवेश से जुड़े कुछ अनुरोधों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
    निवेशकों को भेजी गई सूचनाओं के अनुसार, यह रोक अगले आदेश तक लागू रहेगी। कुछ फंड हाउसों ने इसके दायरे में स्विच-इन लेनदेन और नई सिस्टेमेटिक ट्रांसफर प्लान (एसटीपी) के पंजीकरण को भी शामिल किया है। हालांकि, सभी कंपनियों के नियम और प्रतिबंधों का दायरा एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। निवेशकों को संबंधित फंड हाउस की ओर से जारी सूचना के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले लेने होंगे।
    गोल्ड ईटीएफ एफओएफ ऐसी म्यूचुअल फंड योजनाएं होती हैं, जो मुख्य रूप से गोल्ड ईटीएफ की इकाइयों में निवेश करती हैं। इनके माध्यम से निवेशक सीधे सोने के आभूषण या सिक्के खरीदे बिना सोने की कीमतों से जुड़े निवेश का विकल्प चुन सकते हैं। नए निवेश पर रोक का मतलब यह नहीं है कि इन योजनाओं में पहले से निवेश करने वाले सभी निवेशकों का पैसा निकालने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
    फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में स्पष्ट किया गया है कि प्रतिबंध लागू होने से पहले पंजीकृत एसआईपी और एसटीपी की निर्धारित किस्तों का लेनदेन सामान्य रूप से जारी रहेगा। यानी पहले से पंजीकृत योजनाओं के तहत होने वाले नियमित निवेश पर सामान्य तौर पर असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, मौजूदा एसआईपी में अतिरिक्त राशि जोड़ने या निवेश बढ़ाने के अनुरोधों पर रोक लागू हो सकती है।
    निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि रिडेम्प्शन यानी निवेश की रकम वापस लेने और स्विच-आउट के अनुरोधों पर इन प्रतिबंधों का असर नहीं पड़ेगा। इससे पहले से निवेश कर चुके लोगों के लिए अपनी इकाइयां भुनाने या दूसरी योजना में स्थानांतरित करने का विकल्प बना रहेगा। संबंधित कंपनियों ने यह भी बताया है कि निर्धारित कट-ऑफ समय के बाद जमा किए गए कुछ आवेदन अस्वीकार किए जा सकते हैं और निवेशकों की राशि वापस की जा सकती है।
    हालांकि, म्यूचुअल फंड कंपनियों की ओर से जारी सूचनाओं में नए निवेश पर रोक लगाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है। एक फंड हाउस ने इसे नियामकीय स्तर पर हुई चर्चाओं के बाद उद्योग के माध्यम से मिले निर्देशों के अनुरूप उठाया गया कदम बताया है। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी एक कारण को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
    यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान भारत में सोने की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है। इस अवधि में लोग आभूषणों और अन्य रूपों में सोना खरीदते हैं। भारत घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर सोने के आयात पर निर्भर है। आयात में बढ़ोतरी से व्यापार घाटे पर दबाव पड़ सकता है और रुपये की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
    इस वर्ष की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के संदर्भ में विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने की अपील की थी। उन्होंने नागरिकों से एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री ने समारोहों और अन्य अवसरों पर सोने के आभूषण नहीं खरीदने का संकल्प लेने की बात कही थी।
    फिलहाल गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में नए निवेश पर लगी रोक अस्थायी है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। निवेश करने या एसआईपी में बदलाव करने की योजना बना रहे लोगों के लिए संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी की ताजा सूचना और लागू शर्तों की जांच करना जरूरी होगा।
  • निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    निर्मला सीतारमण ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने पर दिया जोर, बातचीत अंतिम चरण में पहुंची

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते का निष्पादन वैश्विक व्यापार और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के हित में होगा। उनके अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत अब अंतिम चरण के करीब पहुंचती दिखाई दे रही है। ऐसे में समझौते को जल्द पूरा करना दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
    सीतारमण ने यह बात बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों से इतर अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत के दौरान कही। उन्होंने संकेत दिया कि व्यापार समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच लगातार चर्चा हो रही है और इसके जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
    वित्त मंत्री ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हालिया बयान का भी उल्लेख किया। गोयल ने एक-दो दिन पहले उम्मीद जताई थी कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द हस्ताक्षर के लिए तैयार हो सकता है। इससे पहले उन्होंने बताया था कि समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दिया जा चुका है और फिलहाल उसका कानूनी मसौदा तैयार किया जा रहा है।
    गोयल के अनुसार, समझौते को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि भारत को समान प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिले। इस रुख से स्पष्ट है कि समझौते को आगे बढ़ाने के साथ भारत अपने आर्थिक और व्यापारिक हितों को भी ध्यान में रख रहा है।
    भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अमेरिकी पक्ष की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा था कि प्रस्तावित समझौते का व्यापक ढांचा तैयार हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उन्होंने नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम में यह बात कही थी।
    व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था विभिन्न अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे माहौल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और इसके लागू होने की तारीख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
    बातचीत के दौरान सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है। उनके अनुसार, कोविड महामारी के बाद पिछले चार से पांच वर्षों के दौरान भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
    वित्त मंत्री ने इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी विकास नीतियों, कौशल विकास में निवेश और वित्तीय अनुशासन को दिया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक धन के इस्तेमाल को लेकर अपनी जिम्मेदारी समझती है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की सहायता करना जरूरी है, लेकिन इसके साथ सरकारी खर्च को अनुशासित बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
    सीतारमण ने बुनियादी ढांचे के विकास में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय की भूमिका पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, इस खर्च से देश में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण को गति मिली है और अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका व्यापक गुणक प्रभाव पड़ा है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की उनकी अपील के साथ आर्थिक विकास, वित्तीय अनुशासन और व्यापारिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
  • एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    एलन मस्क के आरोपों पर रिलायंस का जवाब, कहा- स्टारलिंक समेत सभी कंपनियों पर भारत के नियम समान रूप से लागू

    नई दिल्ली । भारत में सैटेलाइट संचार सेवाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एलन मस्क के आरोपों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी ने कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार क्षेत्र के लिए निर्धारित नियम और नीतियां घरेलू तथा विदेशी सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होती हैं। रिलायंस ने इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करते हुए कहा कि हर कंपनी को देश के कानूनों का पालन करना होगा। यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टारलिंक की भारत में सेवाएं शुरू करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
    रिलायंस ने कहा कि वह सैटेलाइट संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा का स्वागत करती है और इसमें स्टारलिंक भी शामिल है। कंपनी के मुताबिक, जियो समेत सभी कंपनियों की जिम्मेदारी भारतीय उपभोक्ताओं को सेवाएं देना और देश के कानूनों तथा नीतियों का पालन करना है। रिलायंस ने स्पष्ट किया कि भारत में निवेश और नवाचार के लिए खुला माहौल है। देश में विकसित होने वाली तकनीक हो या विदेश से आने वाला निवेश, लोगों के जीवन में सुधार लाने वाली पहल का स्वागत किया जाता है।
    कंपनी ने कहा कि इस खुलेपन का आधार कानून का शासन और सभी के लिए समान प्रक्रिया है। भारत सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए भारतीय और विदेशी आवेदकों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। रिलायंस ने यह भी बताया कि जियो की अपनी सैटेलाइट सेवाएं शुरू करने के लिए भी विभिन्न मंजूरियों का इंतजार है। कंपनी के अनुसार, नियामकीय प्रक्रिया किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित नियम सभी आवेदकों पर लागू होते हैं।
    रिलायंस ने प्रतिस्पर्धा को लेकर अपनी नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने कभी मुकाबले से पीछे हटने का रुख नहीं अपनाया। कंपनी के मुताबिक, प्रतिस्पर्धा से यह तय होता है कि कौन उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराता है। रिलायंस की दूरसंचार इकाई जियो ने वर्ष 2016 में भारतीय दूरसंचार बाजार में प्रवेश किया था। कंपनी ने बताया कि शुरुआत में उसके पास कोई ग्राहक नहीं था, लेकिन दस वर्षों में जियो के ग्राहकों की संख्या 53 करोड़ से अधिक हो गई। रिलायंस ने इसे डिजिटल सेवाओं और किफायती डेटा उपलब्ध कराने की अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
    स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने का लाइसेंस मिल चुका है। हालांकि, व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले कंपनी को सुरक्षा संबंधी मंजूरियों और अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की जरूरत है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही भारत में उसकी सेवाओं की शुरुआत का रास्ता साफ हो सकेगा।
    इस विवाद की पृष्ठभूमि में एलन मस्क की वे टिप्पणियां हैं, जिनमें उन्होंने भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर उद्योगपति मुकेश अंबानी पर निशाना साधा था। पिछले सप्ताह सोशल मीडिया मंच एक्स पर मस्क ने व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्हें “प्रिय प्रधानमंत्री अंबानी” कहकर संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी भारत में अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं और स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति नहीं देना चाहते।
    मस्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह समझने में देर हुई कि भारत में वास्तविक फैसले लेने वाले अंबानी हैं। इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का अवसर दिया जाएगा। इन आरोपों के जवाब में रिलायंस ने समान नियमों और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर जोर दिया है।
    भारत में सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में कंपनियों की भागीदारी और सेवाओं की शुरुआत नियामकीय मंजूरियों से जुड़ी है। ऐसे में रिलायंस का बयान इस बात पर केंद्रित है कि बाजार में प्रवेश करने वाली सभी कंपनियों को निर्धारित कानूनी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
  • सरकार ने देर रात पेट्रोल पर दो रुपये बढ़ाया विंडफॉल टैक्स… डीजल पर 16 रुपये घटाया, नई दरें आज से लागू

    सरकार ने देर रात पेट्रोल पर दो रुपये बढ़ाया विंडफॉल टैक्स… डीजल पर 16 रुपये घटाया, नई दरें आज से लागू


    नई दिल्ली।
    पेट्रोल-डीजल (Petrol and Diesel) पर विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) को लेकर सरकार ने गुरुवार को देर रात एक बड़ा फैसला किया। केंद्र सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स 2 रुपये बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, जबकि डीजल पर लगने वाला शुल्क 16 रुपये से घटाकर 8.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। रॉयटर्स के मुताबक नई दरें 16 अक्टूबर 2026 यानी आज से लागू हो गई हैं।


    पेट्रोल-डीजल पर नई टैक्स दरें

    सरकार के फैसले के मुताबिक, पेट्रोल के निर्यात पर अब 2.50 रुपये प्रति लीटर की दर से विंडफॉल टैक्स लगेगा। वहीं, डीजल के निर्यात पर टैक्स में 7.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    क्या इससे देश में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
    इस फैसले का सीधा असर घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा। सरकार ने घरेलू खपत के लिए जारी किए जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर लागू मौजूदा शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है। इसलिए केवल निर्यात टैक्स में बदलाव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे।


    पेट्रोल-डीजल के दाम कब बदलते हैं?

    जिन देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पूरी तरह बाजार तय करता है, वहां कच्चे तेल की कीमत बदलने का असर बहुत जल्दी दिखता है। जबकि, भारत में फ्यूल की कीमत जारी तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियां करती हैं, लेकिन नियंत्रण सरकार का होता है। क्योंकि, भारत में 90 प्रतिशत से अधिक पेट्रोल पंपों पर सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। प्राइवेट कंपनियां जैसे नायरा और रिलायंस-बीपी दाम खुद बढ़ाती या घटती हैं। इसके अलावा ईंधन के दाम टैक्स पर भी निर्भर करता है। ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी ज्यादा होगी तो कच्चे तेल की कीमत बदलने का असर अपेक्षाकृत कम होता है।


    पेट्रोल-डीजल के रेट जारी

    रात को विंडफॉल टैक्स में हुए बदलाव के बाद आज शुक्रवार सुबह HPCL, IOCL और BPCL ने पेट्रोल-डीजल के रेट जारी कर दी हैं। आज दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की 95.20 पर स्थिर है। यानी पेट्रोल-डीजल के रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है।


    विंडफॉल टैक्स की हर 15 दिन में होती है समीक्षा

    सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को देखते हुए विंडफॉल टैक्स के रेट की समीक्षा हर 15 दिन में करती है। इस तरह के टैक्स का उद्देश्य ईंधन के निर्यात और घरेलू उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना है।

    बता दें भारत ने पहली बार जुलाई 2022 में फ्यूल के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स, जिसे अप्रत्याशित कर भी कहा जाता है, लगाया और दो साल बाद उन्हें वापस ले लिया।इसके बाद ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद सरकार ने मार्च 2026 में विंडफॉल टैक्स को फिर से लागू किया।

  • भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत करों से राजस्व में वृद्धि

    भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत करों से राजस्व में वृद्धि

    नई दिल्ली ।भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 14 अक्टूबर तक पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 13.21 प्रतिशत बढ़कर 13.38 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस दौरान कॉरपोरेट टैक्स, गैर-कॉरपोरेट टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) से होने वाली प्राप्तियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई। जारी आंकड़ों के अनुसार, कर रिफंड को घटाने के बाद प्राप्त शुद्ध राजस्व में यह वृद्धि सामने आई है।

    रिफंड से पहले सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी बढ़ोतरी हुई। चालू वित्त वर्ष में 14 अक्टूबर तक यह 14.89 प्रतिशत बढ़कर 16.03 लाख करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 13.95 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। इस तरह सकल संग्रह में सालाना आधार पर उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।

    इस अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड की राशि भी बढ़ी। पिछले वर्ष की समान अवधि में 2.13 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए थे, जबकि चालू वित्त वर्ष में यह रकम बढ़कर 2.65 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसमें सालाना आधार पर 24.22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिफंड को समायोजित करने के बाद ही शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह का आंकड़ा निकाला जाता है।

    कॉरपोरेट टैक्स के शुद्ध संग्रह में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। चालू वित्त वर्ष में 14 अक्टूबर तक यह राशि बढ़कर 5.99 लाख करोड़ रुपये हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 4.97 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह हुआ था। इस आंकड़े से दोनों अवधियों के बीच कॉरपोरेट कर राजस्व में वृद्धि का संकेत मिलता है।

    गैर-कॉरपोरेट करों के शुद्ध संग्रह में भी इजाफा हुआ। इस श्रेणी में व्यक्तियों और अन्य गैर-कॉरपोरेट इकाइयों की ओर से चुकाए गए कर शामिल हैं। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह संग्रह 6.54 लाख करोड़ रुपये था, जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 6.92 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

    सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स से प्राप्त शुद्ध राजस्व में अपेक्षाकृत अधिक वृद्धि दर्ज की गई। एसटीटी का शुद्ध संग्रह पिछले वर्ष के 30,901.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 46,840.43 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, अन्य करों की श्रेणी में शुद्ध संग्रह नकारात्मक रहा। यह एक वर्ष पहले के 282.39 करोड़ रुपये से घटकर माइनस 1.64 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    सकल संग्रह के आंकड़ों पर नजर डालें तो कॉरपोरेट कर प्राप्तियां पिछले वर्ष की समान अवधि के 6.44 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 7.53 लाख करोड़ रुपये हो गईं। इसी तरह सकल गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह 7.20 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.03 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। सकल एसटीटी संग्रह भी 30,901.81 करोड़ रुपये से बढ़कर 46,840.43 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर, अन्य करों का सकल संग्रह 301.22 करोड़ रुपये से घटकर 18.87 करोड़ रुपये रह गया।

    प्रत्यक्ष कर संग्रह में कंपनियों के अलावा व्यक्तियों, हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ), फर्मों, एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स (एओपी), बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स (बीओआई), स्थानीय निकायों और कृत्रिम न्यायिक व्यक्तियों द्वारा चुकाए गए कर भी शामिल हैं। चालू वित्त वर्ष के आंकड़े 14 अक्टूबर तक की अवधि के हैं और इनकी तुलना पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि से की गई है।
  • पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा

    पीयूष गोयल का दावा, भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा


    नई दिल्ली ।केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत अगले 20-25 वर्षों तक दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दशकों में वैश्विक आर्थिक विकास और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रगति को गति देने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनके मुताबिक, देश की युवा आबादी, विशाल उपभोक्ता बाजार और उद्यमशीलता की क्षमता भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को मजबूती देती है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एसआरसीसी शताब्दी सम्मेलन को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया के कई देश भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ओर बढ़ती दिलचस्पी का प्रमुख कारण यहां की युवा और महत्वाकांक्षी आबादी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय भारत की क्षमता को पहचान रहा है और आने वाले समय में देश अंतरराष्ट्रीय विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आकांक्षाओं से भरा युवा भारत वैश्विक विकास का नेतृत्व करने की स्थिति में है। उन्होंने प्रौद्योगिकी और वैश्विक व्यापार में देश की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, भारत आने वाले वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में प्रगति को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हो सकता है। उन्होंने देश की विकास क्षमता को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया।

    भारत की लंबी अवधि की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने जनसांख्यिकीय क्षमता, युवा आबादी और बड़े उपभोक्ता बाजार को देश की प्रमुख ताकत बताया। उन्होंने कहा कि इन विशेषताओं के साथ उद्यमशील ऊर्जा भी भारत की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने में योगदान देगी। उनके अनुसार, इन क्षमताओं के कारण भारत आने वाले दो से ढाई दशकों तक तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    गोयल ने कहा कि भारत की आबादी और बाजार का आकार देश को भविष्य के वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर देता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की आर्थिक प्रगति केवल वर्तमान उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले दशकों में भी इसके व्यापक प्रभाव की संभावना है। हालांकि, उनके संबोधन में इस अनुमान के समर्थन में कोई विशिष्ट आर्थिक आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।

    केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के नागरिकों को सामूहिक रूप से योगदान देना होगा। उनके मुताबिक, राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी स्वीकार करना आवश्यक है और लोगों को चुनौतियों से बचने की मानसिकता छोड़कर अपने दायित्वों को निभाने पर ध्यान देना चाहिए।

    गोयल ने कहा कि समाज के एक बड़े वर्ग में समस्याओं से बचने की प्रवृत्ति दिखाई देती है और लोग कई बार यह स्वीकार नहीं करते कि भविष्य को दिशा देने की जिम्मेदारी उनके अपने हाथों में है। उन्होंने इस सोच में बदलाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य सभी के प्रयासों से ही पूरा हो सकता है।

    अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने की महत्वाकांक्षा को आधुनिक भारत की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही महत्वाकांक्षा देश की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा के पीछे प्रमुख कारणों में से एक है। उनके वक्तव्य का मुख्य संदेश यह रहा कि भारत की युवा शक्ति, आर्थिक क्षमता और सामूहिक जिम्मेदारी आने वाले दशकों में देश की विकास यात्रा को दिशा देने में अहम होंगी।

  • भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    नई दिल्ली ।भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में सितंबर के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। सालाना आधार पर बिक्री 21.8 प्रतिशत बढ़कर 4,54,574 यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 3,73,347 यूनिट्स था। वाहन उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यात्री वाहनों के साथ दोपहिया और तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में दोपहिया वाहनों की कुल थोक बिक्री सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत बढ़कर 24.63 लाख यूनिट्स हो गई। पिछले साल इसी महीने में दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.70 लाख यूनिट्स रही थी। इस तरह एक साल के अंतराल में इस श्रेणी में भी बिक्री का आंकड़ा बढ़ा है। यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों के आंकड़े घरेलू बाजार में वाहन निर्माताओं की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहनों की संख्या को दर्शाते हैं।

    तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी सितंबर के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। इस महीने डीलरों को कुल 98,162 तिपहिया वाहन भेजे गए, जो पिछले साल की समान अवधि के 84,635 यूनिट्स से 16 प्रतिशत अधिक हैं। इस तरह यात्री, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री के आंकड़ों में सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

    थोक बिक्री के अलावा, सितंबर में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की खुदरा बिक्री ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में सभी श्रेणियों को मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 3,33,634 यूनिट्स तक पहुंच गई। यह पिछले साल सितंबर की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा उपभोक्ताओं को वाहनों की बिक्री से संबंधित है, इसलिए इसकी तुलना निर्माताओं से डीलरों को भेजे गए वाहनों की थोक बिक्री से अलग आधार पर की जाती है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री सितंबर में बढ़कर 2,07,314 यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 88.67 प्रतिशत अधिक रही। अगस्त के मुकाबले भी इसमें 13.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले सितंबर में यह 8.2 प्रतिशत थी।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर में इस श्रेणी की बिक्री 36,108 यूनिट्स के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 94.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त की तुलना में बिक्री 17.63 प्रतिशत अधिक रही। इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी। पिछले साल सितंबर में यह 5.7 प्रतिशत थी, जो इस साल बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई।

    सितंबर के आंकड़े पारंपरिक वाहनों की थोक बिक्री और इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा बिक्री में वृद्धि को दर्शाते हैं। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 21.8 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ दोपहिया और तिपहिया श्रेणियों में भी विस्तार दर्ज किया गया। वहीं, इलेक्ट्रिक दोपहिया और यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री ने अपने-अपने उच्चतम मासिक स्तर हासिल किए। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में दर्ज वृद्धि के साथ बाजार में उनकी हिस्सेदारी भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है।

  • सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। एक दिन पहले दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को बाजार में फिर बढ़त लौट आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत में करीब 1,420 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का इजाफा हुआ। वहीं, चांदी का भाव भी लगभग 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया।

    ताजा दरों के मुताबिक, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,35,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर पहुंच गई। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक दर्ज किया गया। कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अलग-अलग शहरों के भाव जानना महत्वपूर्ण हो गया है।

    राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,510 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों के सोने की कीमतें दिल्ली के समान रहीं। इन शहरों में 24 कैरेट गोल्ड 1,47,510 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,360 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने की कीमतें मुंबई के समान रहीं। इन दोनों शहरों में 24 कैरेट सोना 1,47,360 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,410 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,47,410 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में चांदी करीब 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई। इसके बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव बढ़कर 2,09,460 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

    गुरुवार को दर्ज हुए भाव में दिल्ली और जयपुर में सोने की कीमत सबसे अधिक रही, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भाव अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया। अहमदाबाद और भोपाल में सोने की दरें इन दोनों समूहों के बीच रहीं। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव के कारण खरीदारी से पहले संबंधित शहर का ताजा भाव जानना जरूरी है। यहां दिए गए आंकड़े 15 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध दरों पर आधारित हैं।

  • भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश

    भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश


    नई दिल्ली।
    भारत और कनाडा (India and Canada) के बीच कारोबारी रिश्तों को बढ़ावा देने की दिशा में आईडीबीआई बैंक का सौदा (IDBI Bank Deal) अहम माना जा रहा है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू (Maninder Sidhu) ने कहा है कि उनका देश भारत में निवेश और बढ़ाने की संभावनाएं देख रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है और इसमें कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका अहम है। सिद्धू के मुताबिक, भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कनाडाई कंपनियों के लिए काफी अवसर हैं।

    सिद्धू ने कहा कि कनाडा अब तक भारत में करीब 107 अरब अमेरिकी डॉलर (107 Billion US Dollars) का निवेश कर चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कनाडाई कंपनियां, संस्थान और पेंशन फंड भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रहे हैं। सिद्धू ने फेयरफैक्स और उसके प्रमुख प्रेम वत्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में हवाई अड्डों के विकास में मदद कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की विकास योजनाएं कनाडा के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकती हैं।


    निर्मला सीतारमण बोलीं- बैंकिंग व्यवस्था होगी मजबूत

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे बैंक को विकास के अगले चरण में पहुंचने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हासिल करने में मदद मिलेगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी। इस सौदे के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी घटकर 19 प्रतिशत रह जाएगी। सीतारमण के मुताबिक, इस कदम से देश का बैंकिंग तंत्र मजबूत होगा और बैंकिंग सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ेगा और छोटे कारोबारियों तथा उद्यमियों के लिए नए अवसर बनेंगे। सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सौदे के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बैंक की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। इसका सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात सितंबर 2018 के 31.78 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 2.32 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए भी 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। खराब वित्तीय स्थिति के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा था, जिसे सुधार के बाद मार्च 2021 में हटा दिया गया।


    आईडीबीआई बैंक के सौदे में क्या हुआ और कनाडा की भूमिका क्यों अहम है?

    केंद्र सरकार की कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये है। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 19 प्रतिशत करने वाला है। वहीं, कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भागीदारी से बैंक के स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह सौदा भारत के बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की कोशिशों का अहम हिस्सा है। इसके साथ ही भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान गया है।


    भारत में किन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहता है कनाडा?

    सिद्धू ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कनाडा के लिए निवेश के बड़े अवसर हैं। उन्होंने भारत की हवाई यातायात और परिवहन से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश 100 और हवाई अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत को करीब 2,000 और विमानों की जरूरत होगी। सिद्धू के अनुसार, कनाडा का विमानन उद्योग, बुनियादी ढांचे से जुड़ी विशेषज्ञता और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता इन जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे सकती है।


    भारतीय बुनियादी ढांचे में कनाडाई पेंशन फंड कैसे मदद कर रहे हैं?

    कनाडा के मंत्री ने बताया कि उनके देश के पेंशन फंड भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भागीदारी कर रहे हैं। इनमें राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। पेंशन फंड ऐसे निवेश को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं, जिससे बड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। सिद्धू ने भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के लिए उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, भारत की विकास जरूरतें और कनाडा की निवेश क्षमता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ा सकती हैं।


    क्या आईडीबीआई बैंक सौदे से दोनों देशों का निवेश संबंध मजबूत होगा?

    सिद्धू ने भरोसा जताया कि भारत और कनाडा के बीच निवेश आने वाले समय में और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा पहले ही भारत में बड़ी रकम निवेश कर चुका है, लेकिन अवसर अभी खत्म नहीं हुए हैं। आईडीबीआई बैंक का सौदा ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस सौदे के बाद कितना अतिरिक्त निवेश आएगा, इसकी कोई निश्चित राशि या समयसीमा मंत्री ने नहीं बताई। फिलहाल बुनियादी ढांचा, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।

  • 15 से 31 अक्टूबर के बीच कब-कहां बंद रहेंगे बैंक? दशहरा से करवा चौथ तक छुट्टियों की देंखे पूरी लिस्ट

    15 से 31 अक्टूबर के बीच कब-कहां बंद रहेंगे बैंक? दशहरा से करवा चौथ तक छुट्टियों की देंखे पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में बैंक से जुड़ा जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो शाखा जाने से पहले छुट्टियों की तारीखें जरूर जांच लें। 15 से 30 अक्टूबर 2026 के बीच दुर्गा पूजा, दशहरा, विजयादशमी, लक्ष्मी पूजा और करवा चौथ सहित विभिन्न त्योहारों के कारण कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा रविवार और महीने के चौथे शनिवार को भी बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

    हालांकि, इन सभी तारीखों पर देशभर में बैंक बंद नहीं रहेंगे। त्योहारों की छुट्टियां अलग-अलग राज्यों और शहरों के अनुसार लागू होंगी। ऐसे में एक शहर में बैंक बंद होने पर दूसरे शहर में सामान्य कामकाज जारी रह सकता है। यहां देखें 15 से 30 अक्टूबर के बीच दी गई छुट्टियों की सूची।

    17 से 19 अक्टूबर: इन शहरों में बैंक रहेंगे बंद
    17 अक्टूबर, शनिवार: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। यह महीने का तीसरा शनिवार है, इसलिए अन्य शहरों में केवल इस आधार पर बैंक बंद नहीं होंगे।

    18 अक्टूबर, रविवार: रविवार के साप्ताहिक अवकाश के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

    19 अक्टूबर, सोमवार: महा नवमी और आयुध पूजा के अवसर पर अगरतला, आइजोल, भुवनेश्वर, चेन्नई, गुवाहाटी, इम्फाल, ईटानगर, कोहिमा, कोलकाता, पटना, रांची और शिलांग में बैंक बंद रहेंगे।

    20 और 21 अक्टूबर: दशहरा और विजयादशमी की छुट्टियां
    20 अक्टूबर, मंगलवार: विजयादशमी और दशहरा के अवसर पर देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। दी गई सूची के मुताबिक, गंगटोक और इम्फाल में बैंक खुले रहेंगे।

    21 अक्टूबर, बुधवार: अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इन शहरों में दुर्गा पूजा और उससे जुड़ी स्थानीय छुट्टियां लागू होंगी।

    22 से 25 अक्टूबर: सिक्किम में छुट्टी, फिर शनिवार-रविवार का अवकाश
    22 अक्टूबर, गुरुवार और 23 अक्टूबर, शुक्रवार: इन दोनों तारीखों पर गंगटोक में बैंक बंद रहेंगे। सिक्किम में दुर्गा पूजा और दसैं से जुड़ी छुट्टियों के कारण शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

    24 अक्टूबर, शनिवार: महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

    25 अक्टूबर, रविवार: साप्ताहिक अवकाश के चलते देशभर में बैंक बंद रहेंगे।

    इस तरह 24 और 25 अक्टूबर को बैंक शाखाओं में लगातार दो दिन कामकाज नहीं होगा। ग्राहकों को नकद जमा, चेक से जुड़े काम और अन्य शाखा-आधारित सेवाओं के लिए तारीख का ध्यान रखना चाहिए।

    26 और 29 अक्टूबर: कहां रहेगी स्थानीय छुट्टी?
    26 अक्टूबर, सोमवार: लक्ष्मी पूजा और संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण अगरतला, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे।

    29 अक्टूबर, गुरुवार: करवा चौथ के अवसर पर शिमला में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह छुट्टी सभी शहरों में लागू नहीं होगी।

    27, 28 और 30 अक्टूबर को क्या बैंक खुले रहेंगे?
    दी गई सूची के अनुसार, 27, 28 और 30 अक्टूबर को किसी शहर के लिए अलग बैंक अवकाश का उल्लेख नहीं है। हालांकि, स्थानीय त्योहारों और संबंधित बैंक की छुट्टी सूची के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए शाखा जाने से पहले अपने शहर के बैंक अवकाश की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

    बैंक बंद होने पर कौन-सी सेवाएं चालू रहेंगी?
    बैंक शाखाओं में छुट्टी होने के बावजूद आम तौर पर डिजिटल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। ग्राहक इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं:

    UPI: मोबाइल से पैसे भेजने और भुगतान करने के लिए।

    मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग: बैलेंस देखने, ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने और अन्य बैंकिंग कार्यों के लिए।

    ATM: नकदी निकालने और उपलब्ध अन्य सुविधाओं के लिए।

    ऑनलाइन बिल भुगतान: बिजली, मोबाइल और अन्य बिलों का भुगतान करने के लिए।

    हालांकि, चेक क्लियरेंस, बैंक ड्राफ्ट, नकद जमा और शाखा से जुड़े दूसरे कामों में छुट्टियों के कारण देरी हो सकती है। डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता संबंधित बैंक और तकनीकी स्थिति पर निर्भर करेगी।

    ध्यान दें: 15 से 30 अक्टूबर के बीच बैंक छुट्टियों की स्थिति शहर और राज्य के अनुसार अलग-अलग होगी। 18, 24 और 25 अक्टूबर को साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, जबकि अन्य प्रमुख छुट्टियां चुनिंदा स्थानों पर लागू होंगी। बैंक जाने से पहले अपने शहर के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक छुट्टी सूची जरूर जांच लें।