Category: Economy

  • कैंसर की 137 दवाओं की कीमतें होंगी कम… 9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें

    कैंसर की 137 दवाओं की कीमतें होंगी कम… 9 नवंबर से लागू होंगी नई दरें


    नई दिल्ली।
    दवा मूल्य नियामक एनपीपीए (Drug Price Regulator NPPA) ने शनिवार को कैंसर-रोधी 137 गैर-अनुसूचित दवाओं (137 Non-Scheduled Anti-Cancer drugs) के मुनाफे को 30% तक सीमित कर दिया। इससे इन जीवन रक्षक दवाओं के खुदरा मूल्य में 70% तक की गिरावट आने की उम्मीद है। यह फैसला 9 नवंबर से लागू होगा। उपभोक्ता एनपीपीए की वेबसाइट और फार्मा सही दाम मोबाइल एप के जरिये नई कीमतों देख सकेंगे।

    नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने बताया, यह कदम स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर उठाया है। समिति ने मुनाफे को तर्कसंगत बनाने के लिए 137 दवाओं की सिफारिश की थी। एनपीपीए की 2019 में पायलट टीएमआर योजना लॉन्च की थी। इसके तहत कैंसर-रोधी 42 दवाओं के मुनाफे को 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया था।


    संशोधित मूल्य सूची का प्रकाशन अनिवार्य…

    – दवा निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर संशोधित मूल्य सूची का प्रकाशन अनिवार्य करना होगा।
    – खुदरा विक्रेताओं व अस्पतालों को 9 नवंबर से कम कीमतों पर ही दवाएं बेचनी होंगी।

  • कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक

    कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और गन्ने से बनने वाली चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से एथेनॉल खरीद की नीति में बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत सरकारी ईंधन कंपनियां एक नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में चीनी और गन्ने के रस से तैयार एथेनॉल की खरीद के लिए प्रस्ताव नहीं मांगेंगी। इस फैसले के पीछे कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर जारी किया है। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। टेंडर में एथेनॉल की खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल से संबंधित शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

    नए टेंडर के अनुसार, गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किए गए हैं। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियां इस आपूर्ति वर्ष में इन स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, एथेनॉल की कुल खरीद के लिए अन्य निर्धारित कच्चे माल का इस्तेमाल जारी रहेगा।

    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस वर्ष देश में चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अल नीनो के प्रभाव के बीच एक दशक से अधिक समय में कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने की उपलब्धता में कमी का असर चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार चीनी की आपूर्ति और कीमतों को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल खरीद के लिए उपलब्ध कच्चे माल के इस्तेमाल में बदलाव कर रही है।

    भारत अपनी आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे परिवहन क्षेत्र में पेट्रोलियम ईंधन की खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ अनाज और अन्य अनुमत कच्चे माल का भी उपयोग किया जाता है। नए टेंडर में भी इन वैकल्पिक स्रोतों से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है।

    टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत एथेनॉल की खरीद के लिए वैकल्पिक कच्चे माल के विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इससे चीनी आधारित स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए निर्धारित मात्रा में एथेनॉल की खरीद की जा सकेगी।

    एथेनॉल खरीद से जुड़े बदलावों के साथ सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी की बिक्री के लिए भी अतिरिक्त अनुमति दी है। इसके तहत मिलें अक्टूबर में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त बेच सकती हैं। यह अनुमति निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होगी।

    उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चीनी मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर के दौरान बेच सकेगी। यह बिक्री दोनों महीनों के नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य कमजोर मानसून के कारण गन्ने की उपलब्धता पर पड़ रहे असर के बीच चीनी की आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना है।

  • काव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए उनकी संपत्ति, परिवार और करियर से जुड़ी खास बातें

    काव्या मारन और अनिरुद्ध रविचंदर की शादी की चर्चाओं के बीच जानिए उनकी संपत्ति, परिवार और करियर से जुड़ी खास बातें

    नई दिल्ली ।आईपीएल फ्रेंचाइजी सनराइजर्स हैदराबाद की सह-मालकिन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी काव्या मारन इन दिनों अपनी निजी जिंदगी और कारोबारी पृष्ठभूमि को लेकर चर्चा में हैं। संगीतकार अनिरुद्ध रविचंदर के साथ उनकी शादी की खबरों के बीच उनकी संपत्ति, परिवार और करियर को लेकर भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। हालांकि, दोनों की शादी की तारीख और समारोहों के बारे में अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में विवाह से जुड़ी विभिन्न तारीखों और आयोजन स्थलों की जानकारी को फिलहाल दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    काव्या मारन की व्यक्तिगत संपत्ति कितनी है, इसका सटीक और आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। वह देश के प्रमुख कारोबारी परिवारों में शामिल मारन परिवार से आती हैं। उनके पिता कलानिधि मारन सन ग्रुप के अध्यक्ष हैं। उनकी संपत्ति का अनुमान करीब 2.6 अरब डॉलर बताया गया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 24,692 करोड़ रुपये के बराबर है। यह आंकड़ा उनके पिता की संपत्ति से संबंधित है, काव्या की व्यक्तिगत संपत्ति का प्रमाणित मूल्य नहीं है।

    कलानिधि मारन ने मीडिया कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने वर्ष 1993 में सन टीवी नेटवर्क की स्थापना की थी। समय के साथ यह नेटवर्क भारत के प्रमुख क्षेत्रीय टेलीविजन समूहों में शामिल हो गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके पास 37 टेलीविजन चैनल हैं और इसकी पहुंच देशभर में 14 करोड़ से अधिक घरों तक बताई गई है। इसी कारोबारी पृष्ठभूमि ने काव्या को मीडिया और खेल व्यवसाय से जुड़ने का अवसर दिया।

    काव्या मारन ने चेन्नई के स्टेला मारिस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के वारविक बिजनेस स्कूल से प्रबंधन में एमबीए की डिग्री हासिल की। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने मीडिया और खेल कारोबार में अपनी भूमिका विकसित की। सन ग्रुप से जुड़ी होने के साथ-साथ वह सनराइजर्स हैदराबाद के संचालन और प्रबंधन में भी सक्रिय हैं।

    आईपीएल मैचों के दौरान काव्या अक्सर स्टेडियम में अपनी टीम का समर्थन करती दिखाई देती हैं। सनराइजर्स हैदराबाद की सह-मालकिन और सीईओ के रूप में उनकी पहचान क्रिकेट प्रशंसकों के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। टीम के प्रदर्शन के दौरान उनकी मौजूदगी भी कई बार चर्चा का विषय बनती है। हालांकि, उनकी व्यक्तिगत संपत्ति का सटीक आकलन करने के लिए सार्वजनिक रूप से उपलब्ध प्रमाणित वित्तीय जानकारी पर्याप्त नहीं है।

    अनिरुद्ध रविचंदर के साथ उनकी शादी को लेकर अलग-अलग तारीखों की चर्चा सामने आई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों 11 नवंबर को ग्रीस में शादी कर सकते हैं। इन्हीं खबरों में 14 नवंबर को चेन्नई के एक पांच सितारा होटल में रिसेप्शन आयोजित किए जाने की बात भी कही गई। हालांकि, इन तारीखों की संबंधित परिवारों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। इनमें कलानिधि मारन और उनकी पत्नी कावेरी मारन हैदराबाद के जुबली हिल्स स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर उनसे मुलाकात करते नजर आए। मुख्यमंत्री के अनुसार, दंपती ने उन्हें अपनी बेटी के रिसेप्शन में आमंत्रित किया था। उनके साझा किए गए संदेश में चेन्नई में 21 नवंबर को रिसेप्शन आयोजित होने की जानकारी दी गई थी। इससे शादी और रिसेप्शन की तारीखों को लेकर अलग-अलग दावों के बीच असमंजस बना हुआ है।

    शादी में संभावित मेहमानों को लेकर भी चर्चाएं हैं। दक्षिण भारतीय अभिनेता थलापति विजय को निमंत्रण दिए जाने की खबरें सामने आई हैं। इसके अलावा फिल्म और राजनीतिक जगत की अन्य प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। हालांकि, मेहमानों की पूरी सूची सार्वजनिक नहीं हुई है। विवाह समारोह का स्थान, तारीख और अन्य व्यवस्थाएं स्पष्ट होने के लिए दोनों परिवारों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

  • ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर के पार पहुंचा, मिडिल ईस्ट तनाव और रूस की सप्लाई चिंता से बढ़ी ईंधन महंगाई की आशंका

    नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 3.7 प्रतिशत बढ़कर 109.86 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। मई के बाद यह इसका सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत में भी तेजी दर्ज की गई और यह 3.5 प्रतिशत बढ़कर 101.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस तेजी के बाद भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में इस उछाल के पीछे मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और रूस से तेल की आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं। ऊर्जा ठिकानों के आसपास हमलों की खबरों और होर्मुज जलडमरूमध्य के क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति बाधित होने की आशंका पैदा की है। कारोबारियों को चिंता है कि यदि इस क्षेत्र में तेल की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इसके आसपास तनाव बढ़ने से तेल परिवहन और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस रास्ते से होने वाली आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर पड़ सकता है। इसी वजह से क्षेत्रीय तनाव के घटनाक्रम पर तेल बाजार की नजर बनी हुई है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष भी तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल है। दोनों देशों के बीच युद्ध के दौरान रिफाइनरियों और ऊर्जा ठिकानों पर हुए हमलों से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। यदि रूस की रिफाइनिंग क्षमता या निर्यात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो बाजार में तेल और उससे बनने वाले ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

    रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। वैश्विक बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए रूस से डीजल की आपूर्ति से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा हो रही है। हालांकि, अमेरिका में इस संबंध में प्रस्तावित समझौते का विरोध करने के लिए सांसदों ने विधेयक पेश किया है। इसके साथ ही रूस की रिफाइनरियों पर हमलों के कारण वहां से होने वाली आपूर्ति को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इन परिस्थितियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है।

    भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर अर्थव्यवस्था, महंगाई और ईंधन की लागत पर पड़ने की आशंका रहती है। पेट्रोल और डीजल परिवहन व्यवस्था से लेकर वस्तुओं की ढुलाई तक कई क्षेत्रों की लागत को प्रभावित करते हैं।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, तेल कंपनियों की लागत तथा सरकार की नीतियों सहित कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। इसलिए फिलहाल केवल वैश्विक कीमतों में तेजी के आधार पर घरेलू ईंधन की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

    आगे कच्चे तेल की कीमतों का रुख मुख्य रूप से मध्य पूर्व के हालात और रूस से आपूर्ति की स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि तनाव बढ़ता है और सप्लाई प्रभावित रहती है, तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। वहीं, परिस्थितियों में सुधार और आपूर्ति सामान्य होने पर बाजार को राहत मिल सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार की दिशा भारत में ईंधन की कीमतों को लेकर बनी चिंताओं के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।

  • आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    आज 17 अक्टूबर को बैंक खुले हैं या बंद, जानें तीसरे शनिवार और महा सप्तमी की छुट्टी का पूरा अपडेट

    नई दिल्ली ।शनिवार को बैंक जाने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए 17 अक्टूबर 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है। आज देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक शाखाएं सामान्य रूप से खुली रहेंगी, लेकिन त्रिपुरा में महा सप्तमी के अवसर पर बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में बैंक से जुड़ा जरूरी काम करने से पहले अपने राज्य और स्थानीय शाखा में लागू छुट्टी की जानकारी लेना जरूरी है। अक्टूबर में त्योहारों के कारण अलग-अलग राज्यों में बैंक कई दिनों तक बंद रहने वाले हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, देश में बैंक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को सार्वजनिक अवकाश के कारण बंद रहते हैं। इसके अलावा रविवार को भी बैंक शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होता। महीने के पहले और तीसरे शनिवार को सामान्य तौर पर बैंक खुले रहते हैं। इसी नियम के तहत शनिवार, 17 अक्टूबर को देश के अधिकांश राज्यों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।

    इसका मतलब है कि भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और अन्य प्रमुख बैंकों की शाखाएं अधिकांश क्षेत्रों में खुली रहेंगी। ग्राहक नकद जमा करने, निकासी, चेक से जुड़े कार्यों और अन्य शाखा आधारित सेवाओं के लिए बैंक जा सकते हैं। हालांकि, स्थानीय त्योहारों और राज्यवार अवकाश के कारण कुछ स्थानों पर स्थिति अलग हो सकती है।

    त्रिपुरा में आज बैंक बंद रहेंगे। राज्य में महा सप्तमी के पर्व के कारण बैंक शाखाओं में सार्वजनिक अवकाश निर्धारित है। इसलिए त्रिपुरा के ग्राहकों को आज बैंक से संबंधित काम के लिए शाखा जाने से पहले अगली कार्यदिवस की योजना बनानी पड़ सकती है। अन्य राज्यों में भी त्योहारों के अनुसार अलग-अलग तारीखों पर बैंकिंग कामकाज प्रभावित होगा।

    अक्टूबर 2026 में दुर्गा पूजा, दशहरा, विजयादशमी, आयुध पूजा, लक्ष्मी पूजा और अन्य क्षेत्रीय पर्वों के कारण कई राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। इन छुट्टियों की तारीखें राज्य और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई हैं। इसलिए किसी एक राज्य में बैंक बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि उसी दिन पूरे देश में बैंकिंग सेवाएं भी बंद रहेंगी।

    19 अक्टूबर को दुर्गा पूजा, महाष्टमी, महानवमी, आयुध पूजा और विजयादशमी से संबंधित अवसरों पर त्रिपुरा, मिजोरम, ओडिशा, तमिलनाडु, असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और मेघालय में बैंक बंद रहने का उल्लेख है।

    20 अक्टूबर को दशहरा, विजयादशमी, महानवमी, आयुध पूजा और दुर्गा पूजा के कारण कई राज्यों में बैंकिंग अवकाश रहेगा। इनमें मध्य प्रदेश के साथ गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, केरल, दिल्ली, गोवा, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और अन्य राज्य शामिल हैं।

    21 अक्टूबर को विजयादशमी और दुर्गा पूजा के अवसर पर त्रिपुरा, कर्नाटक, सिक्किम, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे। 22 और 23 अक्टूबर को दुर्गा पूजा के कारण सिक्किम में अवकाश रहेगा।इसके बाद 26 अक्टूबर को लक्ष्मी पूजा, विलय दिवस और महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर त्रिपुरा में बैंक बंद रहने का उल्लेख है। 29 अक्टूबर को करवा चौथ के कारण चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बैंकिंग अवकाश रहेगा। वहीं, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

    बैंक जाने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि छुट्टियां राज्यवार लागू होती हैं और सभी राज्यों में एक जैसी नहीं होतीं। यदि किसी दिन शाखा बंद रहती है, तो एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन सेवाओं के माध्यम से हर तरह का शाखा आधारित काम पूरा नहीं किया जा सकता।

    इसलिए 17 अक्टूबर को बैंक जाने वाले ग्राहकों के लिए मुख्य बात यह है कि देश के अधिकांश हिस्सों में तीसरे शनिवार को बैंक खुले रहेंगे, जबकि त्रिपुरा में महा सप्तमी के कारण शाखाएं बंद रहेंगी। किसी जरूरी वित्तीय काम के लिए निकलने से पहले अपनी स्थानीय शाखा की स्थिति और लागू अवकाश की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

  • सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव

    सोने में 4,500 रुपये और चांदी में 13,500 रुपये की गिरावट, जानिए सर्राफा और वायदा बाजार में ताजा भाव


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के दौरान सोना प्रति 10 ग्राम 4,500 रुपये सस्ता हुआ, जबकि चांदी की कीमत प्रति किलोग्राम 13,500 रुपये तक गिर गई। हालांकि, शुक्रवार को दिल्ली के हाजिर सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव स्थिर रहे। दूसरी ओर, वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। रुपये की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर भी घरेलू कीमतों पर पड़ा।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने का भाव सभी करों सहित 1,49,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा। पूरे सप्ताह के हिसाब से इसकी कीमत में 4,500 रुपये यानी करीब 3 प्रतिशत की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में सोने की कीमत में मामूली सुधार हुआ और यह 0.30 प्रतिशत बढ़कर 4,183.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

    वायदा बाजार में सोने की कीमतों का रुख हाजिर बाजार से अलग रहा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर दिसंबर में डिलीवरी वाले सोने का अनुबंध शुक्रवार को 876 रुपये या 0.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,48,365 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान ताजा खरीदारी और हाजिर मांग में सुधार को इस तेजी से जोड़कर देखा गया। न्यूयॉर्क के वायदा बाजार में भी सोने की कीमत 0.01 प्रतिशत बढ़कर 4,171.84 डॉलर प्रति औंस दर्ज की गई।

    चांदी की कीमतों में भी सप्ताह के दौरान उल्लेखनीय गिरावट रही। दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी का भाव 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रहा। हालांकि, साप्ताहिक आधार पर इसकी कीमत 13,500 रुपये यानी करीब 6 प्रतिशत कम हुई। अंतरराष्ट्रीय हाजिर बाजार में चांदी 1 प्रतिशत की तेजी के साथ 57.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी का वायदा अनुबंध शुक्रवार को 2,217 रुपये या 1.05 प्रतिशत बढ़कर 2,12,877 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। कारोबारियों की ओर से सौदों का आकार बढ़ाए जाने के बीच कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय वायदा बाजार में भी चांदी 0.31 प्रतिशत चढ़कर 57.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    घरेलू बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में तेजी सीमित रहने की एक प्रमुख वजह भारतीय रुपये की मजबूती रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार छठे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ और सात पैसे की बढ़त के साथ 94.92 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से मिले समर्थन के बीच रुपये की मजबूती का असर आयात लागत पर भी पड़ता है। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होने से विदेशों से खरीदे जाने वाले सोने और चांदी की लागत कम हो सकती है, जिससे घरेलू कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, सोना 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2.15 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक फिसलने के बाद दोनों धातुओं में नुकसान की भरपाई करने की कोशिश दिखाई दी। हालांकि, रुपये की लगातार मजबूती ने इस सुधार को सीमित रखा।

    आगे के रुझान को लेकर कच्चे तेल की कीमतों पर भी नजर रखी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, आने वाले समय में सोने की कीमतों में हल्की तेजी के साथ सीमित दायरे में कारोबार हो सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार, रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के अनुसार सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

  • 440 टन प्याज लेकर अगरतला पहुंचेगी पहली कांदा एक्सप्रेस, त्योहारों से पहले पूर्वोत्तर में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी

    440 टन प्याज लेकर अगरतला पहुंचेगी पहली कांदा एक्सप्रेस, त्योहारों से पहले पूर्वोत्तर में आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी

    नई दिल्ली ।त्योहारी सीजन से पहले पूर्वोत्तर भारत में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को किफायती दरों पर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने वितरण व्यवस्था का विस्तार किया है। इसी प्रयास के तहत लगभग 440 मीट्रिक टन प्याज लेकर पहली कांदा एक्सप्रेस के 18 अक्टूबर तक त्रिपुरा की राजधानी अगरतला पहुंचने की उम्मीद है। इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में प्याज की उपलब्धता मजबूत करना और त्योहारों के दौरान मांग को पूरा करने में मदद करना है।

    सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत उपलब्ध प्याज के बफर स्टॉक को पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचा रही है। इसके लिए रेल और सड़क दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
    त्योहारी सीजन में प्याज की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए आपूर्ति का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को बाजार में पर्याप्त मात्रा में प्याज उपलब्ध हो सके।

    पहली कांदा एक्सप्रेस के अगरतला पहुंचने से त्रिपुरा में प्याज की आपूर्ति को अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है। इस पहल के तहत राज्य के आठ में से सात जिलों में बाजारों तक प्याज पहुंचाने की योजना है। इनमें धलाई, दक्षिण त्रिपुरा, खोवाई, उनाकोटी, पश्चिम त्रिपुरा, गोमती और सिपाहीजाला शामिल हैं। इन जिलों में आपूर्ति बढ़ने से स्थानीय बाजारों में प्याज की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    पूर्वोत्तर क्षेत्र में बफर स्टॉक से प्याज पहुंचाने के लिए इससे पहले भी रेल और सड़क मार्ग का उपयोग किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 840 मीट्रिक टन और 452 मीट्रिक टन प्याज लेकर दो कांदा एक्सप्रेस रेल रैक भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 44 ट्रकों के जरिए कुल 1,513.46 मीट्रिक टन बफर प्याज क्षेत्र में पहुंचाया गया है।

    इस आपूर्ति व्यवस्था के जरिए असम, त्रिपुरा और नागालैंड के प्रमुख उपभोक्ता केंद्रों तक प्याज पहुंचाया गया है। इनमें असम के कामरूप और गुवाहाटी के साथ त्रिपुरा के गोमती और सिपाहीजाला तथा नागालैंड के दीमापुर, कोहिमा, निउलैंड और चुमौकेदिमा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न परिवहन माध्यमों से वितरण बढ़ाने का उद्देश्य प्रमुख बाजारों तक प्याज की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    असम में पिछले कुछ सप्ताह के दौरान खुदरा प्याज की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। राज्य के लगभग 12 केंद्रों पर खुदरा कीमतें एक रुपये से आठ रुपये प्रति किलोग्राम तक कम हुई हैं। इसके साथ ही असम और देश के औसत खुदरा मूल्य के बीच का अंतर भी पिछले दो वर्षों की तुलना में काफी घटा है।

    दो वर्ष पहले असम में प्याज का औसत खुदरा मूल्य 61.96 रुपये प्रति किलोग्राम था, जबकि अखिल भारतीय औसत कीमत 54.13 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी। उस समय दोनों के बीच 7.83 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर था। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, असम में औसत खुदरा कीमत 54.30 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि देश का औसत 53.07 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस तरह कीमतों का अंतर घटकर 1.23 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है।

    देश की प्रमुख मंडियों में भी प्याज की कीमतों में नरमी देखने को मिली है। खरीफ फसल की नई आवक बढ़ने के साथ अखिल भारतीय औसत मंडी मूल्य सितंबर में लगभग 3,600 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर अक्टूबर में करीब 3,300 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है।

    सरकार की इस व्यवस्था में बफर स्टॉक से प्याज का वितरण बढ़ाने के साथ परिवहन के विभिन्न साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। त्योहारों से पहले अगरतला और पूर्वोत्तर के अन्य बाजारों में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचने से प्याज की उपलब्धता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • दिवाली शॉपिंग पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का बड़ा ऑफर, ट्रैवल पर 10 हजार और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 7,500 रुपये तक बचत

    दिवाली शॉपिंग पर AU स्मॉल फाइनेंस बैंक का बड़ा ऑफर, ट्रैवल पर 10 हजार और इलेक्ट्रॉनिक्स पर 7,500 रुपये तक बचत

    नई दिल्ली । दिवाली के त्योहारी सीजन में खरीदारी, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर खर्च करने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए AU स्मॉल फाइनेंस बैंक ने विशेष ऑफर पेश किए हैं। बैंक का ‘AU हार्ट टू कार्ट शॉपिंग फेस्टिवल 2026’ ग्राहकों को अलग-अलग श्रेणियों में बचत का अवसर दे रहा है। यह इस अभियान का आठवां संस्करण है, जिसकी शुरुआत नवरात्र के दौरान हुई थी। ग्राहक 10 नवंबर 2026 तक इन ऑफर का लाभ उठा सकते हैं।

    इस फेस्टिवल में यात्रा की बुकिंग से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, खाने-पीने की चीजों, किराना सामान और फिल्मों तक के लिए छूट शामिल है। बैंक के AU क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से भुगतान करने वाले ग्राहकों के साथ AU 0101 मोबाइल ऐप के जरिए यूपीआई भुगतान करने वालों के लिए भी ऑफर रखे गए हैं। हालांकि, अलग-अलग सुविधाओं का लाभ संबंधित नियमों और पात्रता पर निर्भर करेगा।

    यात्रा की योजना बना रहे ग्राहकों को इस अभियान के तहत सबसे अधिक बचत का अवसर मिल सकता है। यात्रा, मेकमाईट्रिप, इक्सिगो, पेटीएम फ्लाइट्स और ईजमाईट्रिप जैसे प्लेटफॉर्म पर टिकट या अन्य यात्रा सेवाओं की बुकिंग करने पर 10,000 रुपये तक की बचत का मौका है। दिवाली की छुट्टियों में बाहर जाने की तैयारी कर रहे लोग बुकिंग से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑफर की जानकारी ले सकते हैं। वास्तविक छूट बुकिंग की श्रेणी और लागू शर्तों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    इलेक्ट्रॉनिक्स की खरीदारी करने वालों के लिए भी बैंक ने विशेष लाभ रखे हैं। त्योहारी सीजन में टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने की योजना बना रहे ग्राहक क्रोमा, रिलायंस डिजिटल और विजय सेल्स जैसे खुदरा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑफर देख सकते हैं। इन प्लेटफॉर्म पर पात्र खरीदारी के माध्यम से 7,500 रुपये तक की बचत का अवसर दिया गया है। हालांकि, प्रत्येक खरीदारी पर इतनी छूट मिलना जरूरी नहीं है।

    रोजमर्रा के खर्च में बचत के लिए फूड और ग्रोसरी को भी अभियान में शामिल किया गया है। स्विगी, जोमैटो और ईजीडाइनर पर खाने-पीने से जुड़े खर्च में 500 रुपये तक की बचत का मौका है। वहीं, बिगबास्केट और ब्लिंकिट पर किराना सामान खरीदने वाले ग्राहकों को 1,000 रुपये तक की बचत मिल सकती है। इन ऑफर के तहत मिलने वाला लाभ भुगतान के तरीके और संबंधित प्लेटफॉर्म की शर्तों पर निर्भर करेगा।

    मनोरंजन के लिए भी इस फेस्टिव अभियान में विकल्प दिए गए हैं। फिल्म देखने या अन्य मनोरंजन गतिविधियों के लिए बुकमायशो, पीवीआर आइनॉक्स और डिस्ट्रिक्ट बाय जोमैटो जैसे प्लेटफॉर्म पर ऑफर उपलब्ध हैं। इस श्रेणी में ग्राहकों को 3,000 रुपये तक की बचत का अवसर मिल सकता है। इससे त्योहारों के दौरान मनोरंजन पर खर्च करने वालों को भी फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

    बैंक के इस अभियान में कार्ड और यूपीआई भुगतान के अलावा कुछ बैंकिंग तथा लोन सेवाओं से जुड़े लाभ भी शामिल हैं। ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि सभी ऑफर एक जैसे नहीं हैं। कहीं न्यूनतम खरीदारी की शर्त हो सकती है, तो कहीं विशेष कार्ड, भुगतान माध्यम या अन्य पात्रता जरूरी हो सकती है। इसलिए खरीदारी या बुकिंग करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म पर ऑफर की पूरी जानकारी और नियम पढ़ना जरूरी है। फेस्टिवल की अंतिम तारीख 10 नवंबर 2026 है, इसलिए ग्राहक इस अवधि के भीतर पात्र ऑफर का लाभ ले सकते हैं।

  • ब्लिंकिट में दो घंटे डिलीवरी करके लॉ स्टूडेंट ने कमाए 149 रुपये, पहले दिन की कुल कमाई जानिए

    ब्लिंकिट में दो घंटे डिलीवरी करके लॉ स्टूडेंट ने कमाए 149 रुपये, पहले दिन की कुल कमाई जानिए

    नई दिल्ली । पढ़ाई के साथ अपने निजी खर्चों को पूरा करने के लिए कई छात्र पार्ट-टाइम काम का सहारा लेते हैं। कोई ट्यूशन पढ़ाता है, तो कोई अपनी सुविधानुसार दूसरे काम करता है। इसी बीच लॉ की पढ़ाई कर रहे कवल देसाई ने ब्लिंकिट के डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करने का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि इस काम के जरिए पढ़ाई जारी रखते हुए कमाई करना संभव हो रहा है। उनके मुताबिक, डिलीवरी का काम शुरू करने के बाद पार्ट-टाइम नौकरी को लेकर उनकी सोच भी बदली है।

    कवल देसाई ने अपने अनुभव में बताया कि उन्होंने दो घंटे काम करके छह ऑर्डर डिलीवर किए और इसके बदले उन्हें 149 रुपये मिले। उनके पास एथर का इलेक्ट्रिक स्कूटर है, इसलिए इस दौरान पेट्रोल पर अलग से खर्च नहीं करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उन्हें घूमना-फिरना पसंद है और डिलीवरी के काम के साथ कमाई होने से उन्हें अच्छा अनुभव मिल रहा है।

    कवल के मुताबिक, उनका मुख्य ध्यान एलएलबी की पढ़ाई पर ही है। डिलीवरी का काम उन्होंने पढ़ाई के साथ अपने निजी खर्चों को पूरा करने के उद्देश्य से शुरू किया। वह ऐसा काम करना चाहते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक रूप से कुछ मदद मिल सके। उनके साझा किए गए अनुभव ने पार्ट-टाइम काम के ऐसे विकल्पों पर ध्यान खींचा है, जिन्हें छात्र अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं।

    उन्होंने अपने पहले दिन की कमाई का विस्तृत ब्योरा भी साझा किया। कवल ने बताया कि पहले दिन उन्होंने लगभग छह घंटे 30 मिनट काम किया और इस दौरान 19 ऑर्डर डिलीवर किए। इन ऑर्डर को पहुंचाने के लिए उन्होंने करीब 51 किलोमीटर की दूरी तय की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दूरी केवल ऑर्डर डिलीवर करने के दौरान तय की गई थी। इसमें वापसी की दूरी शामिल नहीं थी।

    कवल के अनुसार, पहले दिन उनकी कुल कमाई 508 रुपये रही। इसमें 75 रुपये का इंसेंटिव भी शामिल था। इसके अलावा, निर्धारित लक्ष्य पूरा करने पर उन्हें 100 रुपये का बोनस भी मिला। इस तरह उनके पहले दिन के अनुभव में नियमित डिलीवरी की कमाई के साथ इंसेंटिव और लक्ष्य पूरा करने पर मिलने वाले अतिरिक्त बोनस की भी भूमिका रही।

    हालांकि, कवल ने यह नहीं बताया कि पहले दिन मिली कुल रकम में बोनस का हिसाब किस तरह शामिल किया गया था। उनके साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पहले दिन 19 ऑर्डर पूरे करने और लगभग साढ़े छह घंटे काम करने के बाद कुल कमाई 508 रुपये रही। वहीं, दो घंटे में छह डिलीवरी करने पर उन्होंने 149 रुपये कमाने की जानकारी दी थी।

    कवल ने यह भी बताया कि छह डिलीवरी पूरी करने के बाद उन्होंने उस दिन काम रोकने का फैसला किया। इसकी दो वजहें थीं। पहली, उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए भी समय निकालना था और दूसरी, उनके इलेक्ट्रिक स्कूटर की बैटरी कम होने लगी थी। इस अनुभव से स्पष्ट होता है कि उनके लिए काम के घंटे तय करते समय पढ़ाई और वाहन की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण रही।

    अपने अनुभव से उत्साहित कवल ने ब्लिंकिट के साथ काम करने को अपने जैसे छात्रों के लिए वरदान बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ काम करना आसान और अच्छा अनुभव रहा है। उनके अनुभव में पार्ट-टाइम डिलीवरी से मिलने वाली कमाई के साथ काम के समय को अपनी जरूरतों के अनुसार संभालने की सुविधा भी अहम रही।

    हालांकि, कवल की कमाई उनके व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। डिलीवरी करने वाले दूसरे लोगों की आय ऑर्डर की संख्या, काम के घंटों, इंसेंटिव की शर्तों, तय लक्ष्यों और यात्रा की दूरी के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए उनके बताए आंकड़ों को हर डिलीवरी पार्टनर की निश्चित कमाई नहीं माना जा सकता।

  • सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    सोने-चांदी के आभूषण निर्यात पर घटा ड्यूटी ड्रॉबैक, गोल्ड पर 3.1 प्रतिशत और सिल्वर पर करीब 9 प्रतिशत की कटौती

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों सहित कीमती धातुओं से बने उत्पादों के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में कटौती की है। नए संशोधन के तहत सोने के आभूषणों पर मिलने वाला रिफंड करीब 3.1 प्रतिशत और चांदी के आभूषणों तथा अन्य संबंधित उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड लगभग 9 प्रतिशत घटा दिया गया है। इस बदलाव से भारतीय आभूषण निर्यातकों को पहले की तुलना में कम वित्तीय राहत मिलेगी। इसका असर कारोबार की लागत, लाभ के मार्जिन और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है।
    वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, सोने के आभूषणों के निर्यात पर ड्यूटी ड्रॉबैक की दर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम से घटाकर 1,794.11 रुपये प्रति ग्राम कर दी गई है। इस तरह निर्यातकों को अब प्रत्येक ग्राम सोने के आभूषण पर पहले के मुकाबले 57.88 रुपये कम रिफंड मिलेगा। बड़ी मात्रा में आभूषणों का निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण हो सकता है।
    चांदी के उत्पादों के मामले में कटौती अधिक है। चांदी के आभूषणों और अन्य संबंधित वस्तुओं के निर्यात पर मिलने वाली ड्यूटी ड्रॉबैक दर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम से घटाकर 26,859.02 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी गई है। यानी निर्यातकों को अब प्रति किलोग्राम 2,642.07 रुपये कम रिफंड मिलेगा। इस बदलाव से चांदी के आभूषणों का कारोबार करने वाली कंपनियों की वित्तीय गणना प्रभावित हो सकती है।
    ड्यूटी ड्रॉबैक एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत निर्यातकों को निर्यात किए जाने वाले उत्पादों में इस्तेमाल हुए कच्चे माल और अन्य इनपुट पर चुकाए गए पात्र सीमा शुल्क तथा संबंधित शुल्कों का निर्धारित दरों के अनुसार रिफंड मिलता है। इसका उद्देश्य उत्पादन पर पड़ने वाले शुल्क के बोझ को कम करना और घरेलू उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में सहायता देना है। दरों में बदलाव होने से निर्यातकों को मिलने वाली इस वित्तीय राहत की मात्रा भी बदल जाती है।
    गौरतलब है कि इसी वर्ष जुलाई में सरकार ने सोने और चांदी के आभूषणों के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक दरों में बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय सोने के आभूषणों पर रिफंड की दर 773.17 रुपये प्रति ग्राम से बढ़ाकर 1,851.99 रुपये प्रति ग्राम की गई थी। इसी तरह चांदी के उत्पादों पर मिलने वाला रिफंड 14,990.66 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 29,501.09 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया गया था। उस समय इस कदम से निर्यातकों को अधिक राहत मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
    अब दरों में की गई कटौती से ज्वैलरी निर्यातकों, बुलियन कारोबारियों और विदेशों में सोने-चांदी के आभूषणों की बड़ी खेप भेजने वाली कंपनियों पर असर पड़ सकता है। कम रिफंड मिलने के कारण कारोबार की प्रभावी लागत बढ़ सकती है। यदि कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को अपने स्तर पर वहन करती हैं, तो उनके लाभ का मार्जिन कम हो सकता है। वहीं, यदि वे कीमतों में बदलाव करती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ प्रतिस्पर्धा पर भी असर पड़ने की आशंका रहेगी।
    हालांकि, निर्यात पर वास्तविक प्रभाव वैश्विक बाजार में मांग, कीमती धातुओं की कीमतों और कारोबारियों की लागत संरचना जैसे कारकों पर भी निर्भर करेगा। यदि विदेशी बाजारों में भारतीय आभूषणों की मांग मजबूत रहती है, तो कंपनियां इस बदलाव के प्रभाव को कुछ हद तक संभाल सकती हैं। इसके बावजूद, नई दरों के लागू होने के बाद निर्यातकों को अपने खर्च और कारोबार की रणनीति का दोबारा आकलन करना पड़ सकता है।