Category: Economy

  • विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    विझिंजम पोर्ट से मंगलवार को शुरू होगा पूर्ण निर्यात-आयात संचालन, केरल के वैश्विक व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । केरल का विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह मंगलवार से पूर्ण निर्यात-आयात संचालन के साथ अपने विकास के नए चरण में प्रवेश करेगा। भारत के पहले गहरे पानी वाले कंटेनर ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह के रूप में विकसित किए गए विझिंजम में अब ट्रांसशिपमेंट गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष वाणिज्यिक व्यापार संचालन भी शुरू होगा। इसे केरल की अर्थव्यवस्था, निर्यात क्षमता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

    पूर्ण निर्यात-आयात संचालन की शुरुआत के अवसर पर सुबह 10:45 बजे पहले निर्यात कंटेनर को रवाना किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस शुरुआत के साथ केरल के निर्यातकों को अपने माल को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए दूसरे ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर निर्भरता कम करने का विकल्प मिलेगा।

    अब तक विझिंजम मुख्य रूप से ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर विकसित किया गया है। नई व्यवस्था के बाद यहां से केरल और देश के अन्य हिस्सों के निर्यातक सीधे विदेशी बाजारों के लिए कंटेनर भेज सकेंगे। इससे कोलंबो, सिंगापुर और दुबई जैसे पारंपरिक ट्रांसशिपमेंट केंद्रों के जरिए माल भेजने की आवश्यकता कुछ मामलों में कम हो सकती है। इसका असर परिवहन समय और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ने की उम्मीद है।

    विझिंजम की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी प्राकृतिक समुद्री गहराई और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति शामिल है। बंदरगाह में करीब 20 से 24 मीटर की प्राकृतिक गहराई है, जिससे यहां बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने की क्षमता विकसित हुई है। यह अंतरराष्ट्रीय ईस्ट-वेस्ट शिपिंग कॉरिडोर से लगभग 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार के प्रमुख मार्गों तक इसकी पहुंच मजबूत होती है।

    परीक्षण संचालन के दौरान स्पेन के वालेंसिया भेजा गया पहला निर्यात कंटेनर इस क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है। अब नियमित निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद कृषि उत्पाद, मसाले, काजू, समुद्री उत्पाद, हथकरघा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों से जुड़े कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। खास तौर पर छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

    बंदरगाह के विस्तार का असर केवल समुद्री व्यापार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, कंटेनर फ्रेट स्टेशन और लॉजिस्टिक्स पार्क जैसी सहायक सुविधाओं की मांग बढ़ सकती है। इससे तिरुवनंतपुरम और आसपास के क्षेत्रों में निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।

    राज्य सरकार इस अवसर के साथ बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास को गति देने के लिए मिशन समुद्र शुरू कर रही है। इसके तहत विझिंजम मैरीटाइम इकोनॉमिक रीजन विकसित करने की योजना है। इसमें आठ औद्योगिक क्लस्टर और तीन नए शहरों को विकसित करने के साथ केरल की करीब 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

    सरकार ने इस पहल के लिए 400 करोड़ रुपये का कैटेलिटिक फंड निर्धारित किया है। इसका इस्तेमाल बंदरगाह और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक क्लस्टर, नए शहरों, कार्यक्रम प्रबंधन और क्षमता निर्माण से जुड़ी 14 उप-योजनाओं में किया जाएगा। वर्ष 2031 तक निजी निवेश के जरिए सार्वजनिक निवेश की तुलना में कई गुना अधिक आर्थिक गतिविधि पैदा करने की उम्मीद जताई गई है।

    विझिंजम के संचालन का जिम्मा अदाणी पोर्ट्स के पास है। मजबूत सड़क और रेल संपर्क के साथ बंदरगाह के विस्तार से केरल के विनिर्माण, सेवा और निर्यात क्षेत्रों को नई संभावनाएं मिल सकती हैं। पूर्ण निर्यात-आयात संचालन शुरू होने के बाद विझिंजम केवल ट्रांसशिपमेंट केंद्र नहीं, बल्कि केरल के लिए वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विकास का प्रमुख द्वार बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    आरबीआई ने एनबीएफसी से रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर मांगी राय, जोखिम नियंत्रण और आंतरिक अनुपालन मजबूत करने पर जोर

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी एनबीएफसी के तेजी से बढ़ते कारोबार और नए डिजिटल लेंडिंग मॉडल से जुड़े जोखिमों को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। केंद्रीय बैंक ने प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर एनबीएफसी से राय मांगी है। इसके साथ ही कंपनियों को मजबूत अनुपालन व्यवस्था, आंतरिक ऑडिट और जोखिम प्रबंधन ढांचे पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी गई है।

    आरबीआई और एनबीएफसी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हुई बैठक में तेजी से विस्तार कर रहे लेंडिंग सेगमेंट से जुड़े जोखिमों पर चर्चा हुई। केंद्रीय बैंक ने वित्तीय संस्थानों से कहा कि नए उत्पादों और कारोबारी मॉडल से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान शुरुआती स्तर पर ही की जाए, ताकि किसी कमजोरी के बड़े संकट में बदलने से पहले उसे नियंत्रित किया जा सके।

    रिवॉल्विंग क्रेडिट ऐसे ऋण या क्रेडिट सुविधा से संबंधित है, जिसमें ग्राहक निर्धारित सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार राशि का इस्तेमाल कर सकता है और भुगतान के बाद उपलब्ध क्रेडिट सीमा फिर से उपयोग कर सकता है। इस तरह के उत्पादों के विस्तार के साथ उनके जोखिम और नियामकीय अनुपालन को लेकर भी केंद्रीय बैंक का ध्यान बढ़ा है।

    आरबीआई ने एनबीएफसी के आंतरिक नियंत्रण तंत्र को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। इसके तहत कंपनियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने कारोबार में जोखिमों की नियमित समीक्षा करें और आंतरिक ऑडिट व्यवस्था को प्रभावी बनाएं। खासतौर पर तेजी से विकसित हो रहे तकनीक आधारित उत्पादों में जोखिम की निगरानी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    एनबीएफसी अक्सर टेक्नोलॉजी आधारित लेंडिंग उत्पादों और नए कारोबारी मॉडल को जल्दी अपनाने वाली वित्तीय संस्थाओं में शामिल होती हैं। डिजिटल माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंच, ऋण आवेदन, मूल्यांकन और सर्विसिंग की प्रक्रिया तेज हुई है। ऐसे में इन कंपनियों के अनुभव से मिलने वाली जानकारी भविष्य में उभरते वित्तीय क्षेत्रों के लिए नियामकीय ढांचा तैयार करने में मददगार हो सकती है।

    केंद्रीय बैंक एनबीएफसी के नियामकीय ढांचे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और मजबूत बनाने पर भी विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय प्रणाली में स्थिरता बनाए रखने के साथ नए कारोबारी मॉडल से उत्पन्न होने वाले जोखिमों को समय रहते नियंत्रित करना है।

    बैठक में स्व-नियामक संगठनों यानी एसआरओ की भूमिका पर भी चर्चा हुई। आरबीआई ने स्पष्ट किया कि एसआरओ को समानांतर नियामक के रूप में काम नहीं करना चाहिए। उनकी भूमिका उद्योग में नियमों के अनुपालन को बढ़ावा देने और उभरते जोखिमों की पहचान तथा समाधान में सहयोग करने की होनी चाहिए। उन्हें उद्योग की पहली सुरक्षा पंक्ति के रूप में प्रभावी भूमिका निभाने की अपेक्षा की गई है।

    ग्राहक शिकायतों के समाधान को लेकर भी एनबीएफसी को स्पष्ट सलाह दी गई है। कंपनियों से कहा गया है कि वे शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करें और ग्राहकों की शिकायतों का समाधान निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करें। डिजिटल लेंडिंग के बढ़ते इस्तेमाल के बीच ग्राहक सेवा और पारदर्शिता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इसके साथ ही एनबीएफसी को डिजिटल लेंडिंग से संबंधित मौजूदा नियामकीय ढांचे और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून का पूरी तरह पालन करने को कहा गया है। ग्राहकों को जोड़ने, ऋण का आकलन करने और सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण डेटा सुरक्षा और गोपनीयता का महत्व भी बढ़ गया है।

    आरबीआई की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब एनबीएफसी क्षेत्र में नए डिजिटल उत्पादों और कारोबारी मॉडलों का तेजी से विस्तार हो रहा है। प्रस्तावित रिवॉल्विंग क्रेडिट नियमों पर उद्योग की राय लेने के साथ केंद्रीय बैंक जोखिम आधारित निगरानी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन सुझावों और नियामकीय समीक्षा के आधार पर एनबीएफसी क्षेत्र के लिए अनुपालन और जोखिम प्रबंधन से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

  • Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली

    Stock Market Today: सेंसेक्स 281 अंक गिरकर 78 हजार से नीचे, निफ्टी भी कमजोर; आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली


    नई दिल्ली । 
    भारतीय शेयर बाजार सोमवार को लगातार दबाव के बीच लाल निशान में बंद हुआ। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 281.09 अंक यानी 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,728.16 पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी 78.35 अंक यानी 0.32 प्रतिशत टूटकर 24,287.65 के स्तर पर पहुंच गया। इस गिरावट के बावजूद बाजार के मिडकैप और स्मॉलकैप वर्ग में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

    सोमवार के कारोबार में आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी प्रमुख कमजोर सेक्टरों में रहे। इनके अलावा निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी पीएसयू बैंक भी गिरावट के साथ बंद हुए।

    इसके विपरीत रियल्टी और मेटल शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी कमोडिटीज और निफ्टी पीएसई में भी तेजी दर्ज की गई।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर इन्फोसिस, एचसीएल टेक, सन फार्मा, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी रही।

    आईटी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों पर दबाव का असर पूरे बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा। इसके अलावा आईटीसी, ट्रेंट, एनटीपीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा और भारती एयरटेल समेत कई बड़े शेयर भी लाल निशान में बंद हुए। बजाज फिनसर्व, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी में भी गिरावट दर्ज की गई।

    बड़े शेयरों में कमजोरी के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 34.85 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63,817.00 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 70.70 अंक यानी 0.36 प्रतिशत चढ़कर 19,809.25 पर पहुंच गया।

    बाजार के मौजूदा रुख में ऊर्जा लागत एक महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियों की इनपुट लागत पर दबाव बना हुआ है। इसका असर निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। हालांकि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में कई कंपनियों के उम्मीद से बेहतर परिणामों ने आगे की कमाई को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं।

    पहली तिमाही में कम लागत वाली इन्वेंट्री से कई कंपनियों के मुनाफे को सहारा मिला। हालांकि आने वाली तिमाहियों में महंगी इन्वेंट्री की खरीद बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आने की आशंका बनी हुई है। इसलिए निवेशक कंपनियों की कमाई और लागत के रुझान पर विशेष नजर रख रहे हैं।

    बाजार में निवेशकों का रुझान अब उन सेक्टर और कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जहां भविष्य की कमाई अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है। इसी वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिल रही है।

    घरेलू स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में बदलाव बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और अपेक्षाकृत नरम उपभोक्ता आंकड़ों ने निकट अवधि में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका को कुछ कम किया है। ऐसे संकेत लंबी अवधि में जोखिम लेने की क्षमता को समर्थन दे सकते हैं, लेकिन घरेलू लागत और वैश्विक घटनाक्रम के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।

  • E20 पेट्रोल पर नई बहस, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 जारी रखने और E30 पर सावधानी बरतने को कहा

    E20 पेट्रोल पर नई बहस, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 जारी रखने और E30 पर सावधानी बरतने को कहा

    नई दिल्ली ।भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने दोपहिया वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों पर E10 पेट्रोल की उपलब्धता बनाए रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि देश में बड़ी संख्या में पुराने बाइक और स्कूटर ऐसे हैं, जिनके इंजन E20 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते।

    नागेश्वरन के अनुसार, पुराने कार्बोरेटर आधारित इंजन E20 में मौजूद अधिक एथेनॉल के साथ हवा और ईंधन के मिश्रण को आधुनिक इंजनों की तरह प्रभावी तरीके से समायोजित नहीं कर पाते। ऐसी स्थिति में इंजन के अधिक गर्म होने और लंबे समय में रबर तथा अन्य संबंधित हिस्सों पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

    मुख्य आर्थिक सलाहकार का सुझाव है कि जब तक पुराने वाहनों को E20 के अनुरूप तकनीकी रूप से अनुकूल नहीं बनाया जाता, तब तक उनके उपयोगकर्ताओं के लिए E10 पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध रहना चाहिए। इससे पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी जरूरत और वाहन की क्षमता के अनुसार ईंधन चुनने का अवसर मिल सकता है।

    भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और किसानों के लिए कृषि उत्पादों का अतिरिक्त बाजार तैयार करना है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने के साथ-साथ मक्का और कुछ अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। मिश्रण की मात्रा बढ़ने के साथ इन फसलों की मांग पर भी असर पड़ता है।

    नागेश्वरन ने एथेनॉल ब्लेंडिंग के खाद्य क्षेत्र पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई है। उनके मुताबिक गन्ने, मक्का और चावल जैसी फसलों का अधिक इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में होने पर पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए उपलब्ध चारे की लागत प्रभावित हो सकती है। इसका असर अंडे, चिकन और दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

    चीनी उद्योग पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। गन्ने से बनने वाली चीनी का एक हिस्सा यदि एथेनॉल उत्पादन की ओर जाता है तो भविष्य में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से एथेनॉल नीति को केवल ईंधन की जरूरत के नजरिये से नहीं, बल्कि खाद्य आपूर्ति और कृषि बाजार के व्यापक संदर्भ में देखने की जरूरत बताई जा रही है।

    जल संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाया गया है। गन्ने की खेती में बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने की खेती बढ़ने पर भूजल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। नागेश्वरन का कहना है कि एथेनॉल नीति का मूल्यांकन करते समय केवल कारखानों में इस्तेमाल होने वाले पानी का हिसाब पर्याप्त नहीं है। फसल उगाने में इस्तेमाल होने वाले भूजल को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए।

    सरकार की ओर से E20 नीति को लगातार समर्थन मिलता रहा है। नीति के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि एथेनॉल मिश्रण बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिलती है और किसानों को अपनी उपज के लिए अतिरिक्त बाजार मिलता है। वाहनों पर E20 के प्रभाव को लेकर किए गए परीक्षणों में बड़े पैमाने पर इंजन क्षति के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।

    हालांकि E10 और E20 दोनों को समानांतर रूप से उपलब्ध कराने पर भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था की अतिरिक्त लागत का मुद्दा उठता है। अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल की उपलब्धता के लिए ईंधन आपूर्ति व्यवस्था में अतिरिक्त प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है।

    एथेनॉल मिश्रण को लेकर मौजूदा बहस का मूल सवाल यही है कि ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने के साथ वाहन मालिकों, खाद्य कीमतों, किसानों और जल संसाधनों के हितों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। E30 की दिशा में आगे बढ़ने से पहले इन पहलुओं का व्यापक मूल्यांकन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं पुराने वाहनों के लिए E10 उपलब्ध रखने का सुझाव मौजूदा नीति में व्यावहारिक विकल्प को लेकर नई चर्चा को जन्म दे रहा है।

  • 17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क

    17 अगस्त को शेयर बाजार में क्या होगा? Nifty-Sensex की दिशा तय करेंगे ये बड़े ट्रिगर, निवेशकों को रहना होगा सतर्क


    नई दिल्ली । 17 अगस्त 2026 सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के बीच होने की संभावना है। पिछले सप्ताह घरेलू बाजार कमजोर होकर बंद हुआ और Nifty 50 करीब 205 अंक की गिरावट के साथ 24366 के स्तर पर जबकि Sensex करीब 490 अंक टूटकर 78009.25 के स्तर पर बंद हुआ। लगातार कमजोर प्रदर्शन के बीच निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बाजार निचले स्तरों पर खरीदारी का सहारा लेता है या बिकवाली का दबाव और बढ़ता है।
    बाजार की चाल पर इस समय सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का पड़ रहा है। Reuters के मुताबिक शुक्रवार को Brent crude करीब 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था और तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई रुपये और कंपनियों की लागत पर असर डाल सकता है। यही वजह है कि सोमवार के कारोबार में ऊर्जा कीमतों से जुड़ी खबरें बाजार के लिए महत्वपूर्ण ट्रिगर बनी रहेंगी। 
    तकनीकी नजरिए से Nifty के लिए 24250 से 24200 का क्षेत्र अहम सपोर्ट माना जा रहा है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है। वहीं ऊपर की तरफ 24500 से 24550 का क्षेत्र तत्काल चुनौती बना हुआ है। इस जोन के ऊपर मजबूती से टिकने पर बाजार में राहत की खरीदारी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में किसी एक दिशा में तेजी से दांव लगाने के बजाय प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। 
    Bank Nifty के लिए भी 58000 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंकिंग शेयरों में यदि खरीदारी लौटती है तो इंडेक्स को मजबूती मिल सकती है लेकिन कमजोर वैश्विक संकेत और बढ़ती बॉन्ड यील्ड दबाव बनाए रख सकते हैं। पिछले सप्ताह वित्तीय क्षेत्र में भी कमजोरी देखने को मिली थी। ऐसे में सोमवार को बैंकिंग और वित्तीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

    इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। पिछले सप्ताह वैश्विक जोखिमों और तेल की कीमतों के दबाव के बीच निवेशकों का रुख सावधान रहा। घरेलू स्तर पर कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर भी अलग अलग शेयरों में दिखाई दे सकता है। ऐसे में पूरे बाजार की बजाय मजबूत नतीजों और बेहतर कारोबार वाली कंपनियों पर निवेशकों का फोकस रह सकता है। 

    हालांकि बाजार में कमजोरी के बावजूद लंबी अवधि को लेकर कुछ विशेषज्ञ भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक बने हुए हैं। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Carnelian Asset Management का मानना है कि कॉरपोरेट आय में सुधार और वैश्विक निवेश धारणा में बदलाव से भारतीय इक्विटी बाजार में 2027 तक रिकवरी की संभावना बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि मौजूदा उतार चढ़ाव को केवल तत्काल गिरावट के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।

    कुल मिलाकर 17 अगस्त को बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। Nifty के लिए 24200 के आसपास का सपोर्ट और 24500 से 24550 का जोन अहम रहेगा जबकि Sensex की दिशा वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी पर निर्भर करेगी। निवेशकों को बाजार की चाल देखकर ही निर्णय लेना चाहिए और केवल एक दिन के उतार चढ़ाव के आधार पर जल्दबाजी में निवेश या बिकवाली से बचना बेहतर होगा। यह बाजार विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है और निवेश की सलाह नहीं है।

  • FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    FSSAI खाद्य सुरक्षा जांच, खाद्य उत्पाद लेबलिंग, FSSAI नोटिस कंपनियां, खाद्य पैकेजिंग नियम, भ्रामक खाद्य दावे

    नई दिल्ली । भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण की ओर से भ्रामक दावों, गैर-मानकीकृत उत्पादों और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन को लेकर जारी नोटिसों के बाद कई खाद्य कारोबारियों ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं। नियामक की ओर से रविवार को बताया गया कि नोटिस मिलने के बाद संबंधित कंपनियों ने अपने उत्पादों और पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव शुरू किए हैं।

    खाद्य नियामक के अनुसार, सुधारात्मक कार्रवाई में उत्पादों के लेबल पर किए गए भ्रामक दावों को हटाना, उत्पादों के नाम में बदलाव करना और पैकेजिंग को लागू नियमों के अनुरूप बनाना शामिल है। इन कदमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना है।

    कुछ कंपनियों को भ्रामक ट्रेडमार्क के इस्तेमाल को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। इनमें ऑनेस्ट इनोवेशन फॉर यू प्राइवेट लिमिटेड और हेलियोस्टोन स्पेशलिटीज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। नोटिस मिलने के बाद दोनों कंपनियों ने अपने संबंधित उत्पादों के नाम में बदलाव किया।

    राजस्थान एग्रो एंड जनरल इंडस्ट्रीज के मामले में भी भ्रामक ट्रेडमार्क से जुड़ी आपत्ति सामने आई थी। कंपनी ने नियामकीय निर्देशों के अनुरूप उत्पादों से जुड़े भ्रामक दावों को हटाया। इसके अलावा उत्पादों से संबंधित संचार में पीपीएम शब्द का इस्तेमाल भी बंद कर दिया गया।

    एक अन्य मामले में आयोटा नैनोटेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को गैर-मानकीकृत उत्पाद से संबंधित नियमों के उल्लंघन के लिए चिन्हित किया गया। कंपनी ने संबंधित उत्पाद के लेबल से भ्रामक दावों को हटाने के साथ गैर-मानकीकृत पानी का उत्पादन भी बंद कर दिया।

    पंचामृत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड को इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया गया था। नियामकीय कार्रवाई के बाद कंपनी ने संबंधित उत्पाद को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। यह कदम कंपनी की ओर से नोटिस के बाद की गई सुधारात्मक कार्रवाई का हिस्सा रहा।

    लिव्योर वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के उत्पाद ‘लिव्योर रोस्टेड एडामे बीन्स’ के लेबल पर किए गए ‘वीगन’ और ‘हेल्थी’ दावों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई थी। कंपनी ने इन दावों को नियमों के अनुरूप नहीं होने की बात स्वीकार करते हुए सुधारात्मक कदम उठाए।

    कंपनी के अनुसार, लागू नियमों की जानकारी के अभाव में ये दावे अनजाने में उत्पाद के लेबल पर दर्ज हो गए थे। कंपनी ने इस मामले पर खेद जताते हुए माफी मांगी और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होने का आश्वासन दिया।

    इसके साथ ही कंपनी ने संशोधित लेबल भी तैयार किया। नियमों का उल्लंघन करने वाले दावों वाली मौजूदा पैकेजिंग सामग्री को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने की बात भी कही गई। कंपनी ने अपने उत्पादों के लेबल की समीक्षा और संशोधन का काम भी शुरू कर दिया है।

    खाद्य उत्पादों के लेबल पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होती है। उत्पाद की प्रकृति, दावे और संबंधित विवरण में किसी तरह की गलत या भ्रामक जानकारी उपभोक्ता के फैसले को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में नियामकीय निगरानी का उद्देश्य कंपनियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कारोबार करने के लिए बाध्य करना है।

    नोटिसों के बाद कंपनियों की ओर से किए गए बदलाव यह दिखाते हैं कि खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग और प्रचार सामग्री में नियमों के पालन पर निगरानी बढ़ रही है। आने वाले समय में कंपनियों के लिए लेबलिंग दावों की सटीकता और नियामकीय अनुपालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण रहने की संभावना है।

  • कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    कॉरपोरेट आय सीजन में निफ्टी मुनाफा 18 प्रतिशत बढ़ा, मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों ने भी अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया

    नई दिल्ली । वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में 19 सेक्टर्स ने अनुमान से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि फाइनेंशियल और मेटल्स प्रमुख बढ़त वाले क्षेत्र रहे।

    Keywords:
    Financials, Metals, Nifty, Earnings, BFSI,

    नई दिल्ली ।

    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। तिमाही आय सीजन के दौरान 19 सेक्टर्स का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। वित्तीय सेवाएं, मेटल्स, ऑयल एंड गैस, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम जैसे क्षेत्रों ने कॉरपोरेट आय में मजबूती बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पहली तिमाही का आय सीजन कुल मिलाकर मजबूत रहा। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को अलग रखने पर कंपनियों की बिक्री, ईबीआईटीडीए और टैक्स के बाद मुनाफे में सालाना आधार पर क्रमशः 18 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों में अनुमान क्रमशः 15 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि का था।

    इस प्रदर्शन में वित्तीय सेवाओं यानी बीएफएसआई क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण रहा। मेटल्स और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को छोड़कर ऑयल एंड गैस क्षेत्र ने भी आय वृद्धि को मजबूती दी। टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन ने भी कुल कॉरपोरेट आय के आंकड़ों को बेहतर बनाने में योगदान किया।

    ऑटोमोबाइल, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स और रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में भी अपेक्षाकृत मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। इन क्षेत्रों के बेहतर नतीजों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कारोबार पर घरेलू मांग, परिचालन क्षमता और क्षेत्रवार परिस्थितियों का सकारात्मक असर पड़ा।

    हालांकि, सभी सेक्टरों का प्रदर्शन समान नहीं रहा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर खासा दबाव डाला। इन कंपनियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि में 162 अरब रुपये का मुनाफा दर्ज किया था, जबकि इस बार करीब 181 अरब रुपये का नुकसान सामने आया। इससे कुल कॉरपोरेट आय के प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

    सीमेंट और इंटरग्लोब एविएशन का प्रदर्शन भी कुल आय के आंकड़ों पर दबाव डालने वाले कारकों में शामिल रहा। इसके बावजूद अन्य प्रमुख क्षेत्रों की मजबूती ने समग्र नतीजों को उम्मीद से बेहतर बनाए रखने में मदद की।

    निफ्टी कंपनियों के स्तर पर भी पहली तिमाही के आंकड़े महत्वपूर्ण रहे। निफ्टी का टैक्स के बाद मुनाफा सालाना आधार पर 18 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले 10 तिमाहियों में सबसे तेज वृद्धि रही। खास बात यह रही कि यह प्रदर्शन 10 प्रतिशत की अनुमानित वृद्धि से काफी अधिक रहा।

    बाजार पूंजीकरण के अलग-अलग वर्गों में भी कंपनियों की आय वृद्धि अनुमानों से बेहतर रही। लार्जकैप कंपनियों की आय में सालाना आधार पर 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अनुमान 14 प्रतिशत की वृद्धि का था। इससे बड़ी कंपनियों के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन का संकेत मिलता है।

    मिडकैप कंपनियों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। उनकी आय में 23 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई, जो पिछले 11 तिमाहियों का उच्चतम स्तर बताया गया है। वहीं स्मॉलकैप कंपनियों की आय में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि अनुमान 22 प्रतिशत का था।

    पहली तिमाही के ये आंकड़े भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत देते हैं। खासकर वित्तीय सेवाओं, मेटल्स और कुछ अन्य प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर आय वृद्धि ने बाजार के अनुमान को पीछे छोड़ा है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और कुछ कमजोर सेक्टरों से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की आय पर लागत, मांग और वैश्विक परिस्थितियों का असर महत्वपूर्ण रहेगा।

  • शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    शेयर बाजार में गिरावट से TCS, रिलायंस समेत पांच दिग्गज कंपनियों का मार्केटकैप एक लाख करोड़ रुपये घटा

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में बीते सप्ताह हुई बिकवाली का असर देश की सबसे बड़ी कंपनियों की बाजार पूंजी पर भी दिखाई दिया। भारत की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के मार्केटकैप में करीब एक लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इस दौरान पांच अन्य कंपनियों की बाजार वैल्यूएशन में कुल 55,149.45 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई।

    बीते सप्ताह सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 204.65 अंक यानी 0.83 प्रतिशत फिसलकर 24,366 अंक पर रहा। बाजार में बिकवाली के दबाव का सीधा असर कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा, जिससे उनकी कुल बाजार पूंजी घट गई।

    शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे अधिक नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस को हुआ। कंपनी का मार्केटकैप 34,263.28 करोड़ रुपये घटकर 8.53 लाख करोड़ रुपये रह गया। आईटी क्षेत्र की इस प्रमुख कंपनी की बाजार वैल्यू में आई कमी ने शीर्ष कंपनियों के कुल मार्केटकैप पर भी असर डाला।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार पूंजी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 31,869.13 करोड़ रुपये घटकर 17.70 लाख करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद सप्ताह के अंत में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे अधिक बाजार मूल्य वाली भारतीय कंपनी बनी रही।

    स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मार्केटकैप में 25,891.88 करोड़ रुपये की कमी आई। सप्ताह के अंत में बैंक का बाजार मूल्यांकन 9.86 लाख करोड़ रुपये रहा। एचडीएफसी बैंक की बाजार पूंजी 7,165.37 करोड़ रुपये घटकर 11.21 लाख करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक की वैल्यूएशन 2,792.65 करोड़ रुपये कम होकर 10.18 लाख करोड़ रुपये रह गई।

    दूसरी ओर, शीर्ष 10 कंपनियों में पांच ऐसी भी रहीं जिनके मार्केटकैप में सप्ताह के दौरान बढ़ोतरी हुई। इनमें सबसे ज्यादा फायदा भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी को मिला। कंपनी की बाजार वैल्यूएशन 26,438.49 करोड़ रुपये बढ़कर 5.23 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई।

    भारती एयरटेल की बाजार पूंजी में भी मजबूत बढ़त दर्ज की गई। कंपनी का मार्केटकैप 20,592.13 करोड़ रुपये बढ़कर 12.43 लाख करोड़ रुपये हो गया। इस बढ़ोतरी के साथ भारती एयरटेल शीर्ष कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे स्थान पर रही।

    बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 3,548.79 करोड़ रुपये बढ़कर 6.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। लार्सन एंड टुब्रो की बाजार वैल्यूएशन में 2,490.66 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 5.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का मार्केटकैप भी 2,079.38 करोड़ रुपये बढ़कर 4.91 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    सप्ताह के अंत में बाजार पूंजी के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, लार्सन एंड टुब्रो, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।

    शीर्ष कंपनियों के मार्केटकैप में यह बदलाव बताता है कि व्यापक बाजार में बिकवाली के बावजूद सभी बड़ी कंपनियों के शेयरों पर एक जैसा दबाव नहीं रहा। कुछ कंपनियों में निवेशकों की खरीदारी से बाजार मूल्य बढ़ा, जबकि दूसरी कंपनियों में बिकवाली के कारण वैल्यूएशन कम हुई। आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा इन कंपनियों के शेयर प्रदर्शन और निवेशकों के रुझान पर निर्भर करेगी।

  • सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम

    सरसों तेल की कीमत में भारी उछाल…. 220 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में सुल्तानपुर, जौनपुर सहित अन्य आस-पास के जिलों में सरसों का दाम (Mustard price) प्रति क्विंटल 7000 रुपये से 7500 रुपये तक बिक रहा है। किसानों का उम्मीद है कि दाम 8000 रुपये तक भी जाएगा। वहीं, सरसों के तेल (Mustard oil) के फुटकर विक्रेता इस समय 220 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेच रहे हैं। महज एक महीने के अंदर ही कीमतों में यह तेजी देखने को मिली है।

    केंद्र सरकार (Central Government) के कंज्यूमर डिपार्टमेंट की तरफ से जारी किए गए रेट के अनुसार देशभर में औसतन आज सरसों का तेल 197.25 रुपये में बिक रहा है। एक महीना पहले यह 194.15 रुपये में बिक रहा था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल यानी 15 अगस्त 2025 को सरसों के तेल का दाम 188.20 रुपये था। यानी कीमतों में उछाल साफ देखने को मिल रही है।


    देश के प्रमुख शहरों में क्या है सरसों का रेट

    – दिल्ली में 209 रुपये प्रति किलोग्राम
    – मुंबई में 231 रुपये प्रति किलोग्राम
    – चेन्नई में 247 रुपये प्रति किलोग्राम


    मूंगफली, पाम ऑयल की कीमतों में भी लगी आग

    सिर्फ सरसों ही नहीं, पाम ऑयल के दाम भी पिछले साल की तुलना में इस बार काफी बढ़ गया है। 15 अगस्त को पाम ऑयल का रेट 149.57 रुपये है। एक साल पहले दाम 130.24 रुपये था। यानी पिछले साल की तुलना में इस बार कीमतों में 20 रुपये का इजाफा हुआ है। करीब 14% दाम बढ़ा है।

    सूरजमुखी के तेल का दाम पिछले साल की तुलना में इस बार 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। बीते साल 15 अगस्त को दाम 159 रुपये था। आज यह 191.16 रुपये के स्तर पर है। मूंगफली की बात करें तो यहां भी कीमतों में तेज इजाफा देखने को मिल रहा है। इसका लेटेस्ट रेट 205.39 रुपये है। पिछले साल आज के दिन ही 185.62 रुपये दाम था। कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।


    दिल्ली में सब्जियों का क्या है रेट

    – आलू का दाम – 23 रुपये प्रति किलोग्राम
    – प्याज का दाम – 45 रुपये प्रति किलोग्राम
    – टमाटर का रेट – 45 रुपये प्रति किलोग्राम

  • LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर

    LPG e-KYC की 16 अगस्त आखिरी डेडलाइन, रात 12 बजे के बाद बुकिंग और सब्सिडी पर पड़ेगा असर


    नई दिल्‍ली । अगर घर में खाना बनाने के लिए LPG गैस सिलेंडर (LPG Gas Cylinder) का इस्तेमाल करते हैं, तो 16 अगस्त की तारीख बेहद खास है. आज अगर रविवार की छुट्टी मनाने और आराम के चक्कर में पड़कर आप कुकिंग गैस (Cooking gas) से e KYC का काम भूलते हैं, तो सिलेंडर की कीमत आपके लिए बढ़ जाएगी. सिर्फ कीमत ही नहीं, LPG गैस मिलने में भी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है.

    16 अगस्त LPG सिलेंडर के आधार बेस्ड e-KYC की डेडलाइन
    तेल कंपनियों ने गैस सिलेंडर की सप्लाई में किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए घरेलू LPG सिलेंडर के लिए आधार बेस्ड e-KYC को अनिवार्य कर दिया है. 16 अगस्त की रात 12 बजे के बाद e-KYC नहीं कराने वाले ग्राहकों की मुश्किल बढ़ जाएगी. ग्राहकों को सिलेंडर के लिए ज्यादा दाम चुकाने पड़ सकते हैं.

    16 अगस्त की डेडलाइन मिस हुई, तो क्या होगा?
    अगर आप आज भी सिलेंडर की ई-केवाईसी नहीं करवाते हैं, तो आपके एलपीजी की सप्लाई अटक सकती है. गैस एजेंसियां आपकी बुकिंग रोक सकती हैं. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी रुक जाएगी. उज्ज्वला कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं के लिए भी बिना ई-केवाईसी वाले कनेक्शन पर सब्सिडी बंद हो सकती है.

    कैसे करवा सकते हैं LPG की e-KYC ?
    एलपीजी सिलेंडर को आधार से लिंक करते हुए उसकी केवाईसी बेहद आसान है. आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से इसे पूरा कर सकते हैं.

    ऑनलाइन प्रोसेस: आपका कनेक्शन जिस गैस कंपनी का है, जैसे कि Indane, HP, Bharat Gas उसका ऐप डाउनलोड कर कुछ मिनटों में केवाईसी को पूरा किया जा सकता है. गैंस कंपनी के ऐप पर जाकर e-KYC का ऑप्शन चुनें. गैस कनेक्शन नबंर भरे. आधार नंबर भरने के बाद फेस ऑथेंटिफिकेशन के लिए Aadhaar FACE RD पर जाएं. ऐप के सामने के सामने अपना चेहरा स्कैन करें. स्कैनिंग पूरा होने के बाद सारी डिलीट सब्सिट करें. ओटीपी भरने के साथ ही आपका ई-केवाईसी पूरा हो जाएगा.

    ऑफलाइन प्रोसेस: आप ऑनलाइन नहीं कर पा रहे हैं, तो अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर या गैस एजेंसी में जाकर केवाईसी फॉर्म भरकर इसे पूरा कर सकते हैं. अगर गैस एजेंसी भी नहीं जाना चाहते हैं, तो गैस सिलेंडर लेकर आने वाले डिलीवरी ब्वॉय की मदद लें. डिलीवरी ब्वॉय के पास उपलब्ध आधिकारिक डिवाइस के जरिए भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन कराया जा सकता है.

    LPG eKYC से जुड़े मन में उठ रहे इन सवालों के जवाब जानिए…

    सवाल: क्या LPG ई-केवाईसी के लिए पैसे देने होंगे?
    जवाब: बिल्कुल भी नहीं, ई-केवाईसी पूरी तरह से निशुल्क है. गैस एजेंसी, डिलीवरी ब्वॉय कोई भी केवाईसी के लिए आपसे पैसे नहीं मांग सकता है.

    सवाल: अगर e-KYC नहीं कराया, तो क्या गैस कनेक्शन कैंसिल हो जाएगा?
    जवाब: नहीं,डेडलाइन खत्म होने के बाद भी अगर आपने ई-केवाईसी को पूरा नहीं करते हैं, तो कनेक्शन रद्द नहीं होगा, लेकिन सिलेंडर की डिलीवरी मिलने में दिक्कत हो सकती है. गैस सिलेंडर पर मिलने वाली छूट खत्म हो सकती है.

    सवाल: अगर ई-केवाईसी नहीं करवाया, तो क्या सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए जाएंगे?
    जवाब: गैस एजेंसियों की ओर से साझा किए गए पोस्ट के मुताबिक ई-केवाईसी न होने पर ग्राहकों को घरेलू के बजाय कॉमर्शियल दरों पर सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है. मतलब ये कि अगर आप दिल्ली में रहते हैं और 16 अगस्त तक अपने घरेलू सिलेंडर कनेक्शन का केवाईसी पूरा नहीं करते हैं, तो 942 रुपये के बजाए आपको 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम यानी करीब 2738 रुपये में सिलेंडर लेना होगा.