Category: Economy

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें उछलीं

    अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें उछलीं

    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जबकि निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर बनी हुई है। इन आंकड़ों से आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव 1,53,765 रुपये की तुलना में 1,182 रुपये की बढ़त के साथ 1,54,947 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान सोना 1,54,950 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। इसका निचला स्तर 1,54,323 रुपये रहा।

    कारोबार के दौरान सोने में 0.77 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक सोना 895 रुपये यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,54,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि सोना इस वर्ष के 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर से अभी काफी नीचे है।

    चांदी में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 2,35,659 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 2,314 रुपये की बढ़त के साथ 2,37,973 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान चांदी 2,38,271 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंची।

    चांदी का इंट्रा-डे उच्च स्तर पिछले बंद भाव से 1.10 प्रतिशत यानी 2,612 रुपये अधिक रहा। इसका निचला स्तर 2,36,500 रुपये दर्ज किया गया। खबर लिखे जाने तक चांदी 1,241 रुपये यानी 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती रही। कॉमेक्स पर सोना 4,430 डॉलर प्रति औंस पर खुलने के बाद 4,473.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 32.40 डॉलर की बढ़त को दर्शाता है।

    कॉमेक्स पर चांदी 64.87 डॉलर प्रति औंस पर खुली और कारोबार के दौरान 65.90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक बाजार में चांदी में करीब 0.97 डॉलर प्रति औंस की बढ़त दर्ज हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस मजबूती का असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया।

    बाजार में इस समय अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महंगाई के आंकड़े फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं। यदि महंगाई में नरमी के संकेत मिलते हैं तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है।

    हाल के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटकर 48 प्रतिशत रह गई है। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बीच महंगाई को लेकर मतभेद बने हुए हैं। शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने भी महंगाई को चिंता का विषय बताया है।

    सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख कारकों में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी शामिल हैं। अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता और समुद्री जहाजों से जुड़ी घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को सहारा मिल रहा है।

  • चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता

    चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता


    नई दिल्ली ।
    टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर बुधवार को अटकलें तेज हो गईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम से पहले अपने पद से हटने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में टाटा संस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन चेयरमैन के रूप में बने रहने के लिए उनका टाटा संस के निदेशक के तौर पर पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली एजीएम में उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर शेयरधारकों को मतदान करना है।

    रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चंद्रशेखरन अपने करीबी सहयोगियों के साथ इस विकल्प पर चर्चा कर चुके हैं कि वह शेयरधारकों के संभावित विवादास्पद मतदान का सामना करने के बजाय स्वयं पद छोड़ दें। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह वास्तव में इस्तीफा देने जा रहे हैं या नहीं।

    नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है और समूह की रणनीतिक दिशा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बताया गया है कि इस वर्ष फरवरी में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति से जुड़े फैसले को टाल दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद पुनर्नियुक्ति के मामले में अंतिम निर्णय आगे बढ़ा दिया गया।

    हालांकि, इन घटनाक्रमों को लेकर टाटा समूह की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इसलिए चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की खबर को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति एजीएम से पहले या शेयरधारकों के मतदान के बाद अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ करीब चार दशक का जुड़ाव रहा है। उन्होंने 1987 में समूह में अपने करियर की शुरुआत की थी। आगे चलकर उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उनके नेतृत्व में टीसीएस ने वैश्विक आईटी सेवा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की।

    वर्ष 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने समूह की विभिन्न कंपनियों और कारोबारों से जुड़े रणनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर सामने आई खबरों ने निवेशकों और बाजार में भी ध्यान खींचा है।

    बुधवार सुबह कारोबार के दौरान टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर एनएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 1,066 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। टीसीएस में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट रही और शेयर करीब 2,424.50 रुपये तक पहुंचा।

    टाइटन कंपनी का शेयर लगभग 1.03 प्रतिशत गिरकर 5,075.10 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं टाटा पावर में करीब 0.9 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई और शेयर लगभग 376.60 रुपये के स्तर पर रहा।

    टाटा संस के नेतृत्व से जुड़ी स्थिति पर अब 18 अगस्त की एजीएम महत्वपूर्ण होगी। शेयरधारकों के मतदान और कंपनी की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा के बाद ही चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने या संभावित बदलाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • लीप इंडिया लिटिडेट का ईपीओ 8.38 गुना हुआ सब्सक्राइब

    लीप इंडिया लिटिडेट का ईपीओ 8.38 गुना हुआ सब्सक्राइब


    नई दिल्ली।
    लीप इंडिया लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को बोली के आखिरी दिन मंगलवार को 8.38 गुना सब्सक्रिप्शन किया गया है। आपूर्ति श्रृंखला एसेट पूलिंग कंपनी की योजना इस आईपीओ से 2,480 करोड़ रुपये जुटाने की है। कंपनी के शेयरों को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के अनुसार आईपीओ के तहत ऑफर की गई 11,49,91,735 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 96,32,60,770 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं है। वहीं, पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए आरक्षित हिस्से को 16.84 गुना अभिदान मिला। इसी तरह गैर-संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.64 गुना बोलियां मिलीं, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी को 1.71 गुना बोलियां प्राप्त हुई है।

    लीप इंडिया लिमिटेड ने गरुवार को कई संस्थागत निवेशकों से 743.62 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए मूल्य का दायरा 151-159 रुपये प्रति शेयर तय किया हुआ है। आईपीओ में 480 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें 2,000 करोड़ रुपये तक की बिक्री पेशकश (ओएफएस) भी शामिल है।

    कंपनी इस नए निर्गम से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कुछ कर्ज़ों को चुकाने या पूर्व-भुगतान करने में करेगी, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में होगा। मूल्य का दायरे के ऊपरी स्तर पर कंपनी का निर्गम के बाद बाजार पूंजीकरण लगभग 7,005 करोड़ रुपये होगा।

    उल्लेखनीय है कि 2013 में बनी ये कंपनी अपने ‘शेयर और रीयूज’ (साझा करने और दोबारा इस्तेमाल करने) वाले बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल करती है, जिसे ‘पूलिंग’ कहा जाता है। एफएंडएस रिपोर्ट के मुताबिक यह भारत के सप्लाई चेन मैनेजमेंट सेक्टर में ऑन-डिमांड एसेट पूलिंग सर्विस देने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

  • शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 10 अगस्त तक 23 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये

    शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 10 अगस्त तक 23 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    देश में वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चालू वित्त वर्ष में 10 अगस्त तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 23.09 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 19.83 फीसदी बढ़कर करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये रहा है। व्यक्तिगत आयकर समेत गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह 23 फीसदी बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये हो गया। विभाग के मुताबिक इस दौरान प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगने वाले कर एसटीटी से राजस्व 51 फीसदी बढ़कर 33,824 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 1 अप्रैल से लेकर 10 अगस्त के बीच 1.43 लाख करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए गए, जो एक साल पहले की समान अवधि से 3.8 फीसदी अधिक है।

    आयकर विभाग के मुताबिक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.75 फीसदी बढ़कर लगभग 9.55 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें कॉरपोरेट कर, व्यक्तिगत आयकर और एसटीटी शामिल हैं। आयकर विभाग ने कहा कि 10 अगस्त तक चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल प्रत्यक्ष कर (डीटी) संग्रह, रिफंड और शुद्ध प्रत्यक्ष कर (डीटी) संग्रह के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं।

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में प्रत्यक्ष करों से 26.97 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में जुटाए गए 23.40 लाख करोड़ रुपये कर राजस्व से करीब 15 फीसदी अधिक है।

  • AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक

    AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक


    नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि AI क्रेडिट डिलीवरी को बदलने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बैंकों से इस तकनीक को जिम्मेदारी और सोच समझकर अपनाने की अपील की। RBI गवर्नर के मुताबिक बैंकों को AI को केवल एक नई तकनीक या सीमित अवधि वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे बैंकिंग के कामकाज और निर्णय लेने के नए तरीके के तौर पर अपनाना चाहिए।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए मल्होत्रा ने AI को भारतीय बैंकिंग के लिए निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था की दिशा बदली थी और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने वित्तीय सेवाओं का चेहरा बदल दिया था उसी तरह AI मौजूदा दशक में भारतीय बैंकिंग को नई दिशा दे सकता है। उनके मुताबिक AI का प्रभाव बैंकिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ने वाला है।

    RBI गवर्नर ने कहा कि AI को ऐसी तकनीक नहीं माना जाना चाहिए जिसे खरीदकर किसी एक परियोजना की तरह लागू कर दिया जाए और फिर काम खत्म समझ लिया जाए। इसके बजाय बैंकों को AI के इस्तेमाल की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी। जोखिम का आकलन करने से लेकर ग्राहकों को सेवाएं देने तक पूंजी की कीमत तय करने से लेकर संस्थानों के संचालन तक AI बैंकिंग के पारंपरिक तरीकों में बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि बैंकों को इस तकनीक को अपनाने से पहले उसकी क्षमता और जोखिम दोनों को समझना होगा।

    AI का सबसे बड़ा असर क्रेडिट डिलीवरी के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था में जिन ग्राहकों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए बैंक से कर्ज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है। AI विभिन्न प्रकार के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे संभावित उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता का बेहतर आकलन करने में बैंकों की मदद कर सकता है। इससे उन लोगों तक भी औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो अब तक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

    ग्राहक अनुभव के स्तर पर भी AI बैंकिंग सेवाओं को तेज और अधिक व्यक्तिगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों की जरूरतों को समझकर सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए कामकाज की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि RBI गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को अपनाने की प्रक्रिया जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ानी होगी। बैंकों को यह तय करना होगा कि वे AI की दिशा खुद तय करते हैं या तकनीक को अपने हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को बदलने देते हैं। उन्होंने कहा कि कई बैंक पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य संस्थान इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI को लेकर बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    कुल मिलाकर RBI की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि AI भारतीय बैंकिंग के भविष्य का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। यदि इसे पारदर्शिता सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने ग्राहक सेवाओं को बेहतर करने और देश में वित्तीय समावेशन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां

    आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ी तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम यानी सीएमएएस के जरिए भारत में कंटेनर बनाने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से देश में 53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनमें करीब 3000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। इस योजना का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे भारत के समुद्री परिवहन लॉजिस्टिक्स और निर्यात आयात से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के मुताबिक 10000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली सीएमएएस योजना कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में निवेश तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी। इसके तहत अलग अलग आकार के कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 99149 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश में कंटेनर निर्माण के साथ साथ इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी फायदा होगा। कॉर्नर कास्टिंग लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में भी मांग बढ़ सकती है।

    भारत के लिए इस योजना की जरूरत इसलिए भी अहम है क्योंकि देश हर साल बड़ी संख्या में खाली कंटेनरों का आयात करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी जरूरतों और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से इस आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ साथ देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    वैश्विक व्यापार में समुद्री परिवहन की भूमिका को देखते हुए कंटेनर किसी भी देश की सप्लाई चेन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के अनुसार दुनिया के कुल माल व्यापार का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक व्यापार की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। हाल के वर्षों में भू राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री मार्गों पर दबाव और माल ढुलाई की लागत में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में भारत का घरेलू कंटेनर निर्माण पर जोर रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार का कहना है कि सीएमएएस भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेगी। यह योजना मेक इन इंडिया और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी पहलों के अनुरूप है। इसके जरिए देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। सरकार पहले ही जहाज निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 70000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा कर चुकी है। अब कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहन मिलने से भारत के समुद्री विनिर्माण क्षेत्र को और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में यह कदम रोजगार बढ़ाने के साथ भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी

    ट्रंप की नई डिमांड से मचा तेल बाजार में हड़कंप, क्रूड के दाम में अचानक जोरदार तेजी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सामने रखी गई नई मांग के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 5 फीसदी की तेजी के साथ 87 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.50 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। कच्चे तेल के साथ प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। इस अचानक बढ़ी कीमत ने दुनियाभर के बाजारों में एक बार फिर महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ समय से बातचीत और तनाव दोनों का दौर जारी है। युद्ध भले ही फिलहाल थमा हुआ माना जा रहा हो लेकिन दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। इसी बीच ट्रंप ने ईरान के सामने एक नई मांग रख दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से उन लोगों के लिए मुआवजे की मांग की है जिन्होंने ईरान से जुड़े संघर्षों में अपनी जान गंवाई है या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में इस मुद्दे को भी शामिल किया जाएगा।

    ट्रंप की इस मांग ने बाजार की चिंताओं को बढ़ा दिया है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों पर इसका तत्काल असर देखने को मिला। तेल बाजार में सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और दुनिया की कुल तेल जरूरत का करीब 20 फीसदी हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

    ईरान और अमेरिका के बीच विवाद का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहता। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर पेट्रोल डीजल परिवहन और औद्योगिक उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है। तेल महंगा होने पर विमानन से लेकर माल ढुलाई तक कई क्षेत्रों का खर्च बढ़ सकता है और इसका दबाव आम उपभोक्ताओं पर भी दिखाई दे सकता है।

    मध्य पूर्व में तनाव के बीच निवेशक लगातार अमेरिका और ईरान से आने वाले बयानों और घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है और तनाव कम होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है। लेकिन अगर टकराव दोबारा बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को लेकर कोई गंभीर समस्या सामने आती है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।

    फिलहाल ट्रंप की नई मांग ने तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और होर्मुज क्षेत्र की स्थिति कैसी रहती है इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यही घटनाक्रम तय करेगा कि कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी आगे जारी रहती है या बाजार को राहत मिलती है।

  • शेयर बाजार में आज बनेगा तेजी या गिरावट का माहौल? 11 अगस्त को इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर

    शेयर बाजार में आज बनेगा तेजी या गिरावट का माहौल? 11 अगस्त को इन फैक्टर्स पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । 11 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत सावधानी और सतर्कता के साथ होने की उम्मीद है। पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी ने दिनभर उतार चढ़ाव के बीच कारोबार किया और अंत में लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। ऐसे में मंगलवार के कारोबार में निवेशकों की नजर घरेलू संकेतों के साथ वैश्विक बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियों कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मौजूदा माहौल में एकतरफा तेजी की उम्मीद करने के बजाय सेक्टर और शेयर आधारित कारोबार ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

    निवेशकों के लिए सबसे अहम बात यह है कि बाजार फिलहाल संवेदनशील स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले सप्ताह के तकनीकी संकेतों में निफ्टी के लिए करीब 24150 से 24050 का क्षेत्र अहम सपोर्ट जोन माना गया था जबकि 24400 से 24450 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण प्रतिरोध के तौर पर देखा गया। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो खरीदारी का रुझान बढ़ सकता है जबकि कमजोरी की स्थिति में मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है।

    11 अगस्त को बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रह सकती है। पिछले सत्र में पीएसयू बैंक इंडेक्स पर दबाव देखने को मिला था इसलिए इस सेक्टर में कारोबार करते समय सावधानी जरूरी होगी। दूसरी ओर रियल्टी सेक्टर में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया। ऐसे में जिन सेक्टरों में लगातार खरीदारी दिखाई दे रही है उनमें अवसर तलाशे जा सकते हैं लेकिन किसी भी शेयर में केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में पैसा लगाना जोखिम भरा हो सकता है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है तो बाजार पर दबाव बन सकता है वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी गिरावट को सीमित करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिलने वाले संकेत भी भारतीय बाजार की शुरुआती चाल को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था और उन कंपनियों के लिए चिंता का कारण बन सकती है जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर करती है।

    कंपनियों के तिमाही नतीजे भी इस समय बाजार के लिए अहम ट्रिगर बने हुए हैं। बेहतर कमाई और मजबूत भविष्य के संकेत देने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में निवेशकों को सिर्फ इंडेक्स की दिशा देखने के बजाय कंपनियों के नतीजों और उनके कारोबारी प्रदर्शन पर भी नजर रखनी चाहिए। सप्ताह के लिए बाजार के आउटलुक में भी कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैक्रो आर्थिक परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना गया है।

    कुल मिलाकर 11 अगस्त को शेयर बाजार में तेजी और गिरावट दोनों के बीच मुकाबला देखने को मिल सकता है। बाजार अगर महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों के ऊपर बना रहता है तो धीरे धीरे खरीदारी लौट सकती है जबकि कमजोर वैश्विक संकेत विदेशी बिकवाली या अहम सपोर्ट टूटने की स्थिति में दबाव बढ़ सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए धैर्य रखना जोखिम का सही आकलन करना और बिना पूरी जानकारी के किसी शेयर में बड़ा दांव लगाने से बचना बेहतर रणनीति हो सकती है। यह बाजार विश्लेषण सामान्य जानकारी के लिए है इसे निवेश की सलाह न माना जाए और निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करना उचित है।