Category: Economy

  • भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री सितंबर में 21.8 प्रतिशत बढ़ी, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी दर्ज हुई वृद्धि

    नई दिल्ली ।भारत में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में सितंबर के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। सालाना आधार पर बिक्री 21.8 प्रतिशत बढ़कर 4,54,574 यूनिट्स पर पहुंच गई, जबकि पिछले साल सितंबर में यह आंकड़ा 3,73,347 यूनिट्स था। वाहन उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में यात्री वाहनों के साथ दोपहिया और तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में दोपहिया वाहनों की कुल थोक बिक्री सालाना आधार पर 13.5 प्रतिशत बढ़कर 24.63 लाख यूनिट्स हो गई। पिछले साल इसी महीने में दोपहिया वाहनों की बिक्री 21.70 लाख यूनिट्स रही थी। इस तरह एक साल के अंतराल में इस श्रेणी में भी बिक्री का आंकड़ा बढ़ा है। यात्री वाहनों और दोपहिया वाहनों के आंकड़े घरेलू बाजार में वाहन निर्माताओं की ओर से डीलरों को भेजे गए वाहनों की संख्या को दर्शाते हैं।

    तिपहिया वाहनों की थोक बिक्री में भी सितंबर के दौरान बढ़ोतरी देखने को मिली। इस महीने डीलरों को कुल 98,162 तिपहिया वाहन भेजे गए, जो पिछले साल की समान अवधि के 84,635 यूनिट्स से 16 प्रतिशत अधिक हैं। इस तरह यात्री, दोपहिया और तिपहिया वाहनों की बिक्री के आंकड़ों में सालाना वृद्धि दर्ज की गई।

    थोक बिक्री के अलावा, सितंबर में इलेक्ट्रिक वाहन बाजार की खुदरा बिक्री ने भी नया रिकॉर्ड बनाया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में सभी श्रेणियों को मिलाकर इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल खुदरा बिक्री 3,33,634 यूनिट्स तक पहुंच गई। यह पिछले साल सितंबर की तुलना में 74 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा उपभोक्ताओं को वाहनों की बिक्री से संबंधित है, इसलिए इसकी तुलना निर्माताओं से डीलरों को भेजे गए वाहनों की थोक बिक्री से अलग आधार पर की जाती है।

    इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री सितंबर में बढ़कर 2,07,314 यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 88.67 प्रतिशत अधिक रही। अगस्त के मुकाबले भी इसमें 13.16 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। बाजार में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 11.6 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले सितंबर में यह 8.2 प्रतिशत थी।

    इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। सितंबर में इस श्रेणी की बिक्री 36,108 यूनिट्स के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 94.56 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि अगस्त की तुलना में बिक्री 17.63 प्रतिशत अधिक रही। इलेक्ट्रिक यात्री वाहनों की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़ी। पिछले साल सितंबर में यह 5.7 प्रतिशत थी, जो इस साल बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई।

    सितंबर के आंकड़े पारंपरिक वाहनों की थोक बिक्री और इलेक्ट्रिक वाहनों की खुदरा बिक्री में वृद्धि को दर्शाते हैं। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में 21.8 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ दोपहिया और तिपहिया श्रेणियों में भी विस्तार दर्ज किया गया। वहीं, इलेक्ट्रिक दोपहिया और यात्री वाहनों की खुदरा बिक्री ने अपने-अपने उच्चतम मासिक स्तर हासिल किए। इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में दर्ज वृद्धि के साथ बाजार में उनकी हिस्सेदारी भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ी है।

  • सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    सोने और चांदी की कीमतों में लौटी तेजी, 24 कैरेट गोल्ड 1.47 लाख रुपये के पार, जानिए दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    नई दिल्ली ।भारतीय सर्राफा बाजार में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली। एक दिन पहले दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट दर्ज की गई थी, लेकिन गुरुवार को बाजार में फिर बढ़त लौट आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सोने की कीमत में करीब 1,420 रुपये प्रति 10 ग्राम तक का इजाफा हुआ। वहीं, चांदी का भाव भी लगभग 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गया।

    ताजा दरों के मुताबिक, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,35,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर से ऊपर पहुंच गई। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव 1,47,500 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक दर्ज किया गया। कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए अलग-अलग शहरों के भाव जानना महत्वपूर्ण हो गया है।

    राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,510 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों के सोने की कीमतें दिल्ली के समान रहीं। इन शहरों में 24 कैरेट गोल्ड 1,47,510 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,360 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने की कीमतें मुंबई के समान रहीं। इन दोनों शहरों में 24 कैरेट सोना 1,47,360 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,068 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,47,410 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। यहां 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। भोपाल में 24 कैरेट सोना 1,47,410 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,35,118 रुपये प्रति 10 ग्राम पर दर्ज किया गया।

    सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी बढ़त दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले दिन की तुलना में चांदी करीब 1,120 रुपये प्रति किलोग्राम महंगी हुई। इसके बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव बढ़कर 2,09,460 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया।

    गुरुवार को दर्ज हुए भाव में दिल्ली और जयपुर में सोने की कीमत सबसे अधिक रही, जबकि मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भाव अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया। अहमदाबाद और भोपाल में सोने की दरें इन दोनों समूहों के बीच रहीं। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव के कारण खरीदारी से पहले संबंधित शहर का ताजा भाव जानना जरूरी है। यहां दिए गए आंकड़े 15 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध दरों पर आधारित हैं।

  • भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश

    भारत-कनाड़ा के बीच कारोबारी रिश्तों को मजबूत करेगी IDBI बैंक डील…..इन क्षेत्रों में आएगा निवेश


    नई दिल्ली।
    भारत और कनाडा (India and Canada) के बीच कारोबारी रिश्तों को बढ़ावा देने की दिशा में आईडीबीआई बैंक का सौदा (IDBI Bank Deal) अहम माना जा रहा है। कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू (Maninder Sidhu) ने कहा है कि उनका देश भारत में निवेश और बढ़ाने की संभावनाएं देख रहा है। केंद्र सरकार ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये का है और इसमें कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका अहम है। सिद्धू के मुताबिक, भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में कनाडाई कंपनियों के लिए काफी अवसर हैं।

    सिद्धू ने कहा कि कनाडा अब तक भारत में करीब 107 अरब अमेरिकी डॉलर (107 Billion US Dollars) का निवेश कर चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने की काफी गुंजाइश है। उन्होंने कहा कि कनाडाई कंपनियां, संस्थान और पेंशन फंड भारत के बुनियादी ढांचे के विकास में योगदान दे रहे हैं। सिद्धू ने फेयरफैक्स और उसके प्रमुख प्रेम वत्स की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि कंपनी भारत में हवाई अड्डों के विकास में मदद कर रही है। उनके मुताबिक, भारत की विकास योजनाएं कनाडा के लिए निवेश के नए रास्ते खोल सकती हैं।


    निर्मला सीतारमण बोलीं- बैंकिंग व्यवस्था होगी मजबूत

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन को मंजूरी मिलने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे बैंक को विकास के अगले चरण में पहुंचने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) हासिल करने में मदद मिलेगी। बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स को आईडीबीआई बैंक की 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी 52,878 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दी। इस सौदे के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की हिस्सेदारी घटकर 19 प्रतिशत रह जाएगी। सीतारमण के मुताबिक, इस कदम से देश का बैंकिंग तंत्र मजबूत होगा और बैंकिंग सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी।

    केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ेगा और छोटे कारोबारियों तथा उद्यमियों के लिए नए अवसर बनेंगे। सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी 30.48 प्रतिशत हिस्सेदारी और एलआईसी अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी। सौदे के बाद सरकार के पास 15 प्रतिशत और एलआईसी के पास 19 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। बैंक की वित्तीय स्थिति में भी सुधार हुआ है। इसका सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) अनुपात सितंबर 2018 के 31.78 प्रतिशत से घटकर मार्च 2026 में 2.32 प्रतिशत रह गया। शुद्ध एनपीए भी 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। खराब वित्तीय स्थिति के कारण मई 2017 में आरबीआई ने बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के दायरे में रखा था, जिसे सुधार के बाद मार्च 2021 में हटा दिया गया।


    आईडीबीआई बैंक के सौदे में क्या हुआ और कनाडा की भूमिका क्यों अहम है?

    केंद्र सरकार की कैबिनेट ने आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी है। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये है। इस प्रक्रिया के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 19 प्रतिशत करने वाला है। वहीं, कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भागीदारी से बैंक के स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह सौदा भारत के बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी हिस्सेदारी घटाने की कोशिशों का अहम हिस्सा है। इसके साथ ही भारत और कनाडा के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ने की संभावनाओं पर भी ध्यान गया है।


    भारत में किन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहता है कनाडा?

    सिद्धू ने कहा कि भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कनाडा के लिए निवेश के बड़े अवसर हैं। उन्होंने भारत की हवाई यातायात और परिवहन से जुड़ी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश 100 और हवाई अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत को करीब 2,000 और विमानों की जरूरत होगी। सिद्धू के अनुसार, कनाडा का विमानन उद्योग, बुनियादी ढांचे से जुड़ी विशेषज्ञता और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता इन जरूरतों को पूरा करने में सहयोग दे सकती है।


    भारतीय बुनियादी ढांचे में कनाडाई पेंशन फंड कैसे मदद कर रहे हैं?

    कनाडा के मंत्री ने बताया कि उनके देश के पेंशन फंड भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भागीदारी कर रहे हैं। इनमें राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। पेंशन फंड ऐसे निवेश को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं, जिससे बड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। सिद्धू ने भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे के लिए उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, भारत की विकास जरूरतें और कनाडा की निवेश क्षमता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ा सकती हैं।


    क्या आईडीबीआई बैंक सौदे से दोनों देशों का निवेश संबंध मजबूत होगा?

    सिद्धू ने भरोसा जताया कि भारत और कनाडा के बीच निवेश आने वाले समय में और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि कनाडा पहले ही भारत में बड़ी रकम निवेश कर चुका है, लेकिन अवसर अभी खत्म नहीं हुए हैं। आईडीबीआई बैंक का सौदा ऐसे समय हुआ है, जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस सौदे के बाद कितना अतिरिक्त निवेश आएगा, इसकी कोई निश्चित राशि या समयसीमा मंत्री ने नहीं बताई। फिलहाल बुनियादी ढांचा, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।

  • 15 से 31 अक्टूबर के बीच कब-कहां बंद रहेंगे बैंक? दशहरा से करवा चौथ तक छुट्टियों की देंखे पूरी लिस्ट

    15 से 31 अक्टूबर के बीच कब-कहां बंद रहेंगे बैंक? दशहरा से करवा चौथ तक छुट्टियों की देंखे पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में बैंक से जुड़ा जरूरी काम निपटाने की योजना बना रहे हैं, तो शाखा जाने से पहले छुट्टियों की तारीखें जरूर जांच लें। 15 से 30 अक्टूबर 2026 के बीच दुर्गा पूजा, दशहरा, विजयादशमी, लक्ष्मी पूजा और करवा चौथ सहित विभिन्न त्योहारों के कारण कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा रविवार और महीने के चौथे शनिवार को भी बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

    हालांकि, इन सभी तारीखों पर देशभर में बैंक बंद नहीं रहेंगे। त्योहारों की छुट्टियां अलग-अलग राज्यों और शहरों के अनुसार लागू होंगी। ऐसे में एक शहर में बैंक बंद होने पर दूसरे शहर में सामान्य कामकाज जारी रह सकता है। यहां देखें 15 से 30 अक्टूबर के बीच दी गई छुट्टियों की सूची।

    17 से 19 अक्टूबर: इन शहरों में बैंक रहेंगे बंद
    17 अक्टूबर, शनिवार: अगरतला में बैंक बंद रहेंगे। यह महीने का तीसरा शनिवार है, इसलिए अन्य शहरों में केवल इस आधार पर बैंक बंद नहीं होंगे।

    18 अक्टूबर, रविवार: रविवार के साप्ताहिक अवकाश के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

    19 अक्टूबर, सोमवार: महा नवमी और आयुध पूजा के अवसर पर अगरतला, आइजोल, भुवनेश्वर, चेन्नई, गुवाहाटी, इम्फाल, ईटानगर, कोहिमा, कोलकाता, पटना, रांची और शिलांग में बैंक बंद रहेंगे।

    20 और 21 अक्टूबर: दशहरा और विजयादशमी की छुट्टियां
    20 अक्टूबर, मंगलवार: विजयादशमी और दशहरा के अवसर पर देश के कई हिस्सों में बैंक बंद रहेंगे। दी गई सूची के मुताबिक, गंगटोक और इम्फाल में बैंक खुले रहेंगे।

    21 अक्टूबर, बुधवार: अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इन शहरों में दुर्गा पूजा और उससे जुड़ी स्थानीय छुट्टियां लागू होंगी।

    22 से 25 अक्टूबर: सिक्किम में छुट्टी, फिर शनिवार-रविवार का अवकाश
    22 अक्टूबर, गुरुवार और 23 अक्टूबर, शुक्रवार: इन दोनों तारीखों पर गंगटोक में बैंक बंद रहेंगे। सिक्किम में दुर्गा पूजा और दसैं से जुड़ी छुट्टियों के कारण शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

    24 अक्टूबर, शनिवार: महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।

    25 अक्टूबर, रविवार: साप्ताहिक अवकाश के चलते देशभर में बैंक बंद रहेंगे।

    इस तरह 24 और 25 अक्टूबर को बैंक शाखाओं में लगातार दो दिन कामकाज नहीं होगा। ग्राहकों को नकद जमा, चेक से जुड़े काम और अन्य शाखा-आधारित सेवाओं के लिए तारीख का ध्यान रखना चाहिए।

    26 और 29 अक्टूबर: कहां रहेगी स्थानीय छुट्टी?
    26 अक्टूबर, सोमवार: लक्ष्मी पूजा और संबंधित स्थानीय अवकाश के कारण अगरतला, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला और श्रीनगर में बैंक बंद रहेंगे।

    29 अक्टूबर, गुरुवार: करवा चौथ के अवसर पर शिमला में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। यह छुट्टी सभी शहरों में लागू नहीं होगी।

    27, 28 और 30 अक्टूबर को क्या बैंक खुले रहेंगे?
    दी गई सूची के अनुसार, 27, 28 और 30 अक्टूबर को किसी शहर के लिए अलग बैंक अवकाश का उल्लेख नहीं है। हालांकि, स्थानीय त्योहारों और संबंधित बैंक की छुट्टी सूची के आधार पर स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए शाखा जाने से पहले अपने शहर के बैंक अवकाश की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।

    बैंक बंद होने पर कौन-सी सेवाएं चालू रहेंगी?
    बैंक शाखाओं में छुट्टी होने के बावजूद आम तौर पर डिजिटल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। ग्राहक इन सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं:

    UPI: मोबाइल से पैसे भेजने और भुगतान करने के लिए।

    मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग: बैलेंस देखने, ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने और अन्य बैंकिंग कार्यों के लिए।

    ATM: नकदी निकालने और उपलब्ध अन्य सुविधाओं के लिए।

    ऑनलाइन बिल भुगतान: बिजली, मोबाइल और अन्य बिलों का भुगतान करने के लिए।

    हालांकि, चेक क्लियरेंस, बैंक ड्राफ्ट, नकद जमा और शाखा से जुड़े दूसरे कामों में छुट्टियों के कारण देरी हो सकती है। डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता संबंधित बैंक और तकनीकी स्थिति पर निर्भर करेगी।

    ध्यान दें: 15 से 30 अक्टूबर के बीच बैंक छुट्टियों की स्थिति शहर और राज्य के अनुसार अलग-अलग होगी। 18, 24 और 25 अक्टूबर को साप्ताहिक अवकाश के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी, जबकि अन्य प्रमुख छुट्टियां चुनिंदा स्थानों पर लागू होंगी। बैंक जाने से पहले अपने शहर के लिए संबंधित बैंक की आधिकारिक छुट्टी सूची जरूर जांच लें।

  • भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी मटेरियल इकोसिस्टम विकसित करना होगा, अश्विनी वैष्णव ने बताई चुनौती

    भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को मजबूत बनाने के लिए जरूरी मटेरियल इकोसिस्टम विकसित करना होगा, अश्विनी वैष्णव ने बताई चुनौती

    नई दिल्ली ।केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि भारत के लिए तकनीकी संप्रभुता हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण सामग्रियों का मजबूत घरेलू इकोसिस्टम विकसित करना बड़ी चुनौती है। सेमीकंडक्टर और अन्य उन्नत तकनीकों के लिए आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति कुछ सीमित देशों में केंद्रित होने के कारण भारत को अपनी विनिर्माण क्षमता और विशेषज्ञता तेजी से बढ़ाने की जरूरत है।

    ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में अपने विचार रखते हुए वैष्णव ने कहा कि भारत को सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और अन्य इनपुट्स के उत्पादन में घरेलू क्षमताएं मजबूत करनी होंगी। उनके मुताबिक, इन सामग्रियों की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर कुछ देशों का अधिक नियंत्रण भारत की एक प्रमुख प्रौद्योगिकी और विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा के सामने चुनौती है।
    मंत्री ने बताया कि जिन देशों ने महत्वपूर्ण सामग्रियों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति बनाई है, उन्होंने इसके लिए कई दशकों तक काम किया है। हालांकि, भारत के पास इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करने का विकल्प नहीं है। इसलिए देश को महत्वपूर्ण सामग्रियों के विनिर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण और प्रबंधन से जुड़ी विशेषज्ञता विकसित करने की गति बढ़ानी होगी।
    उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल चिप बनाने और उनकी असेंबली तक सीमित नहीं है। इसका दायरा बढ़ाकर उन सामग्रियों और औद्योगिक क्षमताओं को भी शामिल किया जा रहा है, जिनकी जरूरत चिप निर्माण के विभिन्न चरणों में होती है। इस व्यापक दृष्टिकोण में केमिकल्स, गैसों, सब्सट्रेट्स और अन्य आवश्यक इनपुट्स का इकोसिस्टम तैयार करना शामिल है।
    वैष्णव के अनुसार, देश के सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के दूसरे चरण में इन क्षेत्रों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की रणनीति तैयार उत्पादों की असेंबली से आगे बढ़कर मॉड्यूल और कंपोनेंट्स के निर्माण तक पहुंचने की है। इसके बाद मटेरियल्स और अंततः पूंजीगत उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित करना भी इस दिशा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में टिकाऊ विकास के लिए केवल अंतिम उत्पाद तैयार करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उससे जुड़े पूरे औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूत करना आवश्यक है।
    तकनीकी संप्रभुता के अर्थ को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत का उद्देश्य दूसरे देशों पर हर तरह की निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है। इसके बजाय रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी कमजोरियों को दूर करना और जरूरत के समय देश की क्षमता तथा लचीलेपन को मजबूत बनाना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि यह तय करना जरूरी है कि किन उत्पादों और क्षेत्रों में भारत के भीतर डिजाइन, विनिर्माण और संपूर्ण उत्पाद विकास की क्षमताएं होनी चाहिए और किन क्षेत्रों में दूसरे देशों के साथ सहयोग जारी रखा जा सकता है। प्रौद्योगिकी को उन्होंने वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा बताया।
    उन्होंने कहा कि भारत जिन क्षेत्रों में प्रवेश करना चाहता है, वहां एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने 28 नैनोमीटर से 90 नैनोमीटर के लेगेसी नोड्स का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, इस श्रेणी में एक मिलियन डॉलर की मशीन का उत्पादन केवल एक डॉलर की चिप की कमी के कारण भी रुक सकता है। ऐसे में डिजाइन, विनिर्माण और अंतिम उत्पाद के संपूर्ण मूल्यांकन की क्षमता विकसित करना महत्वपूर्ण है। इसी सोच के आधार पर भारत अपनी तकनीकी और औद्योगिक रणनीति को आगे बढ़ा रहा है।
  • सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 11.39 प्रतिशत पहुंची, ईंधन, खाद्य पदार्थों और विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों का दबाव बढ़ा

    सितंबर में थोक महंगाई बढ़कर 11.39 प्रतिशत पहुंची, ईंधन, खाद्य पदार्थों और विनिर्माण क्षेत्र में कीमतों का दबाव बढ़ा

    नई दिल्ली ।देश में थोक महंगाई सितंबर 2026 में बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में यह दर 9.92 प्रतिशत दर्ज की गई थी। सितंबर में हुई इस वृद्धि के साथ थोक कीमतों पर दबाव लगातार दूसरे महीने तेज बना रहा। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी कच्चे माल और विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में आए बदलाव के बीच दर्ज की गई।
    सितंबर में सभी वस्तुओं का संयुक्त थोक मूल्य सूचकांक बढ़कर 112.5 हो गया, जबकि अगस्त में यह 110.8 था। आंकड़ों में प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन एवं ऊर्जा तथा विनिर्मित उत्पादों, तीनों प्रमुख क्षेत्रों में महंगाई बढ़ने की जानकारी सामने आई। इससे पता चलता है कि थोक कीमतों में वृद्धि किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े कई हिस्सों में दर्ज की गई।
    प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 8.67 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 7.76 प्रतिशत थी। इसी तरह ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र की महंगाई 22.93 प्रतिशत से बढ़कर 25.85 प्रतिशत पर पहुंच गई। विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति भी अगस्त के 8.37 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 9.76 प्रतिशत दर्ज की गई। इन तीनों क्षेत्रों के सूचकांकों में भी वृद्धि हुई। प्राथमिक वस्तुओं का सूचकांक 120.3, ईंधन एवं ऊर्जा का 110.5 और विनिर्मित उत्पादों का 110.2 रहा।
    विभिन्न वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी ने थोक महंगाई को ऊपर ले जाने में भूमिका निभाई। इनमें खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, कच्चा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल हैं। इसके अलावा कोयला एवं लिग्नाइट, बेसिक मेटल्स, रसायन, वस्त्र, रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद और विद्युत उपकरणों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बढ़ी कीमतें सितंबर के समग्र थोक मूल्य सूचकांक में दिखाई दीं।
    खाद्य महंगाई के आंकड़ों में भी तेजी दर्ज की गई। डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स में प्राथमिक खाद्य वस्तुओं और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को शामिल किया जाता है। सितंबर में इस सूचकांक की वार्षिक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 8.66 प्रतिशत हो गई, जबकि अगस्त में यह 7.05 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं से जुड़े इस आंकड़े में वृद्धि से संकेत मिलता है कि खाद्य श्रेणी में भी थोक कीमतों का दबाव बढ़ा है।
    इस दौरान आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स यानी पीपीआई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में इसका सूचकांक 112.5 पर पहुंच गया, जो अगस्त में 110.8 था। कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन, खनन और विनिर्माण क्षेत्रों में उत्पादक कीमतें बढ़ीं। इसके विपरीत बिजली क्षेत्र का सूचकांक अपेक्षाकृत कम रहा। विनिर्माण क्षेत्र के लिए जारी प्रायोगिक इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स यानी आईपीपीआई सितंबर में 106.1 दर्ज किया गया। यह सूचकांक उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और अन्य इनपुट की लागत से संबंधित जानकारी देता है।
    सरकार ने जुलाई 2026 के अंतिम संशोधित आंकड़े भी जारी किए। इनके अनुसार, जुलाई का थोक मूल्य सूचकांक 110.0 पर अपरिवर्तित रहा और उस महीने की अंतिम थोक महंगाई दर 9.78 प्रतिशत रही। जुलाई का आउटपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक भी संशोधन के बाद 109.9 पर स्थिर दर्ज किया गया। इस तरह सितंबर के आंकड़ों में थोक महंगाई के साथ उत्पादक कीमतों में भी वृद्धि सामने आई।
  • फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान जयपुर डायवर्ट, हाईजैक अलर्ट के बाद विमान की सुरक्षा जांच शुरू

    नई दिल्ली ।फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान को बुधवार, 14 अक्टूबर की सुबह सुरक्षा अलर्ट मिलने के बाद जयपुर में आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी। विमान में कथित हाईजैक खतरे से संबंधित संकेत मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। एहतियात के तौर पर विमान को दिल्ली ले जाने के बजाय जयपुर की ओर मोड़ दिया गया। वहां सुरक्षित उतरने के बाद विमान को जांच के लिए अलग निर्धारित स्थान पर ले जाया गया।

    यह उड़ान एआई-2030 फ्रैंकफर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी। भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब पहुंचने के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) को सुरक्षा से जुड़ा अलर्ट मिला। इसके बाद विमान की सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। अधिकारियों ने विमान को जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतारने का निर्णय लिया। लैंडिंग के बाद विमान को आइसोलेशन बे में रखा गया, ताकि सुरक्षा संबंधी जांच की जा सके।

    उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सुबह करीब 9 बजे कुछ सेकंड के लिए इमरजेंसी सिग्नल मिला था। इसके लगभग 10 मिनट बाद, सुबह 9:10 बजे, विमान को जयपुर की ओर मोड़ने का फैसला किया गया। इसके बाद विमान ने करीब 9:45 बजे जयपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित लैंडिंग की। अलर्ट मिलने से लेकर विमान के उतरने तक सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता दी गई।

    बताया गया कि विमान से कथित तौर पर 7500 कोड का सिग्नल प्रसारित हुआ था। विमानन क्षेत्र में इस कोड का इस्तेमाल संभावित हाईजैकिंग या विमान में अवैध हस्तक्षेप की स्थिति का संकेत देने के लिए किया जाता है। इसके जरिए पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल को गोपनीय तरीके से ऐसी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं। हालांकि, इस मामले में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि विमान से यह संकेत किस परिस्थिति में प्रसारित हुआ और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या था।

    जयपुर में विमान के उतरने के बाद विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने उसकी विस्तृत जांच शुरू कर दी। विमान को अलग स्थान पर रखने के बाद यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू हुई कि कहीं उसमें कोई संदिग्ध वस्तु या सुरक्षा से जुड़ी गतिविधि तो नहीं है। शुरुआती जानकारी में किसी संदिग्ध वस्तु या गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद जांच जारी रखी गई, ताकि अलर्ट से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा सके।

    विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकालकर हवाई अड्डे के निर्धारित सुरक्षित क्षेत्र में पहुंचाया गया। घटना में किसी के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं मिली। हालांकि, अचानक विमान का मार्ग बदलने और सुरक्षा अलर्ट की जानकारी सामने आने से यात्रियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता की स्थिति बनी। सुरक्षा एजेंसियों और हवाई अड्डा प्रशासन ने इस दौरान स्थिति को नियंत्रित रखा।

    फिलहाल जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि हाईजैक अलर्ट किस वजह से सक्रिय हुआ। जांच में यह स्पष्ट किया जाना है कि सिग्नल किसी तकनीकी गड़बड़ी, गलत संकेत या किसी अन्य कारण से प्रसारित हुआ था। घटना के समय तक एयर इंडिया और जयपुर हवाई अड्डा प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। जांच पूरी होने के बाद ही अलर्ट के कारण और पूरे घटनाक्रम से संबंधित स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला दीपावली तक टला, दुकानदार फिर लगाएंगे क्यूआर कोड, ग्राहकों को मिलेगी राहत

    यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लगाने का फैसला दीपावली तक टला, दुकानदार फिर लगाएंगे क्यूआर कोड, ग्राहकों को मिलेगी राहत


    नई दिल्ली ।
    त्योहारी सीजन के बीच दुकानदारों को राहत मिली है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दीपावली के बाद तक स्थगित कर दिया गया है। नई तारीख को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। इस फैसले से छोटे और बड़े कारोबारियों ने राहत की सांस ली है।
    यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबर सामने आने के बाद कई दुकानदारों की चिंता बढ़ गई थी। कारोबारियों को आशंका थी कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने से उनके खर्च में बढ़ोतरी होगी और इसका असर कारोबार पर पड़ सकता है। इसी वजह से कुछ दुकानदार ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान लेने से बचने लगे थे। कई दुकानों पर नकद भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही थी, जबकि कुछ कारोबारियों ने अपनी दुकानों से यूपीआई क्यूआर कोड हटाने भी शुरू कर दिए थे।
    अब शुल्क लागू करने का फैसला स्थगित होने से दुकानदारों को राहत मिली है। कई कारोबारियों का कहना है कि वे दोबारा अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाएंगे, ताकि ग्राहक पहले की तरह डिजिटल माध्यम से भुगतान कर सकें। त्योहारी मौसम में खरीदारी बढ़ने के दौरान यूपीआई भुगतान की सुविधा कारोबारियों और ग्राहकों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में प्रस्तावित शुल्क पर रोक से दुकानदार फिलहाल अपने कारोबार पर ध्यान दे सकेंगे।
    प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगाए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, अब इसकी समयसीमा आगे बढ़ा दी गई है। नई तारीख को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कारोबारियों को आगे होने वाले फैसले का इंतजार है कि शुल्क व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी या इस संबंध में क्या निर्णय लिया जाएगा।
    दिल्ली के लाजपत नगर में एक दुकानदार ने कहा कि यूपीआई लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने से कारोबारियों को काफी फायदा हुआ है। त्योहारों के दौरान ग्राहक बिना किसी झिझक के यूपीआई से भुगतान कर रहे हैं। इससे दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है और कारोबार सामान्य रूप से चलता है। दुकानदार के मुताबिक, डिजिटल भुगतान की सुविधा ग्राहकों के लिए उपयोगी है और इससे खरीदारी के समय भुगतान करना आसान रहता है।
    दुकानदार ने इस फैसले को सकारात्मक बताया। हालांकि, उसने यह भी कहा कि आगे इस व्यवस्था को जारी रखने के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना होगा। शुल्क लगाने की नई तारीख तय होने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
    कारोबारियों का कहना है कि यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। ऐसे में इस तरह के लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर आर्थिक असर पड़ सकता है। फिलहाल फैसला टलने से दुकानदारों को राहत मिली है। अब वे त्योहारी सीजन में ग्राहकों को डिजिटल भुगतान की सुविधा देने और अपने कारोबार पर ध्यान केंद्रित करने की तैयारी कर रहे हैं।
  • अब PF खाते से आवश्यकतानुसार पैसे निकाल सकेंगे कर्मचारी… EPFO ने आसान किए नियम

    अब PF खाते से आवश्यकतानुसार पैसे निकाल सकेंगे कर्मचारी… EPFO ने आसान किए नियम


    नई दिल्ली।
    कभी अचानक इलाज पर बड़ा खर्च आ जाता है, तो कभी बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर बनवाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. ऐसी जरूरतों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund- PF) में जमा रकम मददगार हो सकती है. अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation- EPFO) ने पीएफ से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियम आसान कर दिए हैं।

    नए ढांचे के तहत पात्र सदस्य अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% रकम खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर रखनी होगी. हालांकि, निकासी की सीमा, सेवा अवधि और कितनी बार पैसा निकाला जा सकता है, यह जरूरत की श्रेणी पर निर्भर करेगा. पीएफ की आंशिक निकासी के इस नए ढांचे को 1 जुलाई 2026 से लागू किया गया है. नियमों और आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट https://www.epfindia.gov.in/ देख सकते हैं।


    पीएफ निकासी के नियमों में क्या बदला?

    पहले पीएफ से आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई नियम थे. इससे पात्रता और निकासी की शर्तें समझना मुश्किल हो सकता था. अब इन प्रावधानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है।


    ₹1 लाख जमा हैं, तो कितना पैसा निकाल पाएंगे?

    नियम के मुताबिक, पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75% निकाला जा सकता है और कम से कम 25% रकम खाते में बचाकर रखनी होगी. यहां 25% बैलेंस का मतलब कोई तय रकम नहीं है. यह आपके पात्र पीएफ बैलेंस के हिसाब से तय होगा. वास्तविक निकासी संबंधित श्रेणी की शर्तों और पात्रता पर भी निर्भर करेगी.


    बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए कितनी बार निकाल सकेंगे पैसा?

    बीमारी, शिक्षा और शादी को जरूरी जरूरतों की श्रेणी में रखा गया है. इन मामलों में कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद निकासी के लिए आवेदन किया जा सकता है.
    – बीमारी: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार निकासी की अनुमति.
    – पढ़ाई: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार निकासी.
    – शादी: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार निकासी.

    इन जरूरतों के लिए भी निकासी की अधिकतम सीमा और बाकी शर्तें लागू रहेंगी. इसलिए केवल पात्र होने का मतलब यह नहीं है कि हर बार खाते में जमा पूरी रकम निकाली जा सकेगी.


    घर खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के नियम

    अगर आप घर खरीदने, प्लॉट लेने, मकान बनवाने या होम लोन चुकाने के लिए पीएफ का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो हाउसिंग श्रेणी में निकासी का प्रावधान है. घर की मरम्मत, सुधार या नवीनीकरण के लिए भी तय शर्तों के तहत पैसा निकाला जा सकता है।

    इसके लिए कम से कम 12 महीने की सदस्यता पूरी होनी चाहिए. आवास संबंधी जरूरतों के लिए पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है. हालांकि, आवेदन मंजूर होने के लिए संबंधित योजना की पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है.


    25% रकम खाते में क्यों रखनी होगी?

    पीएफ का मकसद केवल जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नौकरी के बाद के जीवन के लिए बचत तैयार करना भी है. बार-बार निकासी करने पर रिटायरमेंट के समय खाते में कम रकम बच सकती है. इसी वजह से न्यूनतम 25% बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान किया गया है. खाते में बची रकम पर ब्याज मिलता रह सकता है और समय के साथ ब्याज पर ब्याज यानी चक्रवृद्धि का लाभ भी मिल सकता है. इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बचत तैयार करने में मदद मिलती है।


    विशेष परिस्थितियों में भी निकाल सकते हैं पैसे

    विशेष परिस्थितियों की श्रेणी में नियमों को आसान किया गया है. इसके तहत सदस्य को कुछ स्थितियों में निकासी का कारण बताने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इस श्रेणी में भी निर्धारित शर्तें और निकासी की सीमाएं लागू होती हैं. बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य तत्काल अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है. बाकी 25% रकम 12 महीने की बेरोजगारी के बाद निकाली जा सकती है. यह सामान्य आंशिक निकासी के नियमों से अलग प्रावधान है.

    इसके अलावा, रिटायरमेंट और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियों में पूरी रकम के अंतिम निपटान की अनुमति हो सकती है. इनमें स्थायी विकलांगता, छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और स्थायी रूप से विदेश जाने जैसी स्थितियां शामिल हैं. हालांकि, हर मामले में संबंधित नियमों के मुताबिक पात्रता की जांच जरूरी है.

    पीएफ निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
    पीएफ से जरूरत के समय पैसा निकालने की सुविधा राहत देती है, लेकिन इसे नियमित खर्चों का विकल्प नहीं बनाना चाहिए. खाते से निकाली गई रकम पर आगे मिलने वाला ब्याज और चक्रवृद्धि का लाभ कम हो सकता है. इसका असर रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल बचत पर पड़ सकता है. इसलिए बीमारी या किसी जरूरी खर्च के लिए निकासी करते समय अपनी मौजूदा जरूरत और भविष्य की बचत, दोनों का हिसाब रखें. आवेदन करने से पहले ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर नियम और पात्रता जरूर जांचें।

  • UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगाने की समय सीमा बढ़ी, 1 जनवरी 2027 तक टली व्यवस्था से व्यापारियों को मिलेगी राहत

    नई दिल्ली । त्योहारी सीजन के दौरान डिजिटल भुगतान करने वाले व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) शुल्क लागू करने की समय सीमा आगे बढ़ा दी गई है। पहले इस व्यवस्था को 15 अक्टूबर से लागू किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब इसकी समय सीमा बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दी गई है। इस फैसले से देशभर के छोटे-बड़े दुकानदारों और कारोबारियों को अतिरिक्त समय मिल गया है। त्योहारी खरीदारी के बीच व्यापारियों की चिंताओं और नई व्यवस्था को लागू करने की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    एमडीआर का पूरा नाम मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह वह शुल्क होता है, जो किसी दुकानदार या कारोबारी से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले लिया जाता है। आमतौर पर यह रकम भुगतान सेवाएं उपलब्ध कराने वाले बैंकों, फिनटेक कंपनियों या भुगतान व्यवस्था से जुड़ी संस्थाओं को मिलती है। यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारियों के लिए इस तरह के शुल्क की समय सीमा और दरें कारोबार की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। इसी वजह से एमडीआर लागू करने की तारीख को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता बनी हुई थी।

    हाल ही में 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क तय किए जाने की बात सामने आई थी। इस व्यवस्था से भुगतान गेटवे और पेटीएम तथा मोबिक्विक जैसी कंपनियों को फायदा मिलने की उम्मीद जताई गई थी। शुल्क लागू होने की संभावित व्यवस्था को लेकर भुगतान सेवाओं से जुड़ी कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की संभावना भी चर्चा में रही। हालांकि, अब समय सीमा आगे बढ़ने के कारण व्यापारियों और संबंधित कंपनियों को नई व्यवस्था के लिए तैयारी करने का अधिक समय मिलेगा।

    समय सीमा बढ़ाने के पीछे व्यापारियों की ओर से उठाई गई चिंताओं को भी अहम माना गया है। कारोबारियों और मर्चेंट्स की मांग थी कि नई व्यवस्था को ठीक से समझने और लागू करने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। त्योहारी सीजन को देखते हुए 15 अक्टूबर से इसे लागू करने के बजाय समय सीमा आगे बढ़ाने का फैसला लिया गया। इस दौरान दुकानदारों को अपने भुगतान से जुड़े कामकाज और व्यवस्था को समझने का अवसर मिलेगा। त्योहारी खरीदारी के समय डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल बढ़ने के बीच यह फैसला कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    समय सीमा बढ़ने से देशभर के लाखों छोटे-बड़े व्यापारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। कई कारोबारी संभावित डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर चिंतित थे, क्योंकि इससे उनके कारोबार की लागत और मुनाफे पर असर पड़ सकता था। अब नई तारीख तक उन्हें इस व्यवस्था को समझने और उसके लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। हालांकि, शुल्क लागू होने पर इसका वास्तविक असर कारोबार के आकार और भुगतान व्यवस्था के इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करेगा।

    इस फैसले का असर भुगतान सेवाएं देने वाली कंपनियों पर भी पड़ सकता है। जब पिछले महीने एमडीआर से जुड़ी व्यवस्था की घोषणा हुई थी, तब भुगतान गेटवे और फिनटेक कंपनियों के शेयरों में तेजी देखी गई थी। उस समय इन कंपनियों के राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई थी। अब शुल्क लागू करने की समय सीमा बढ़ने से इस व्यवस्था के प्रभाव को लेकर बाजार की उम्मीदों और व्यापारियों की तैयारियों के बीच अधिक समय मिल गया है। फिलहाल, एमडीआर से जुड़ी नई समय सीमा 1 जनवरी 2027 तय की गई है।