ऑनलाइन गेमिंग पर 2% अतिरिक्त शुल्क
रिवॉर्ड पॉइंट्स पर नई सीमा
एंटरटेनमेंट ऑफर्स में सख्ती
प्रीमियम कार्ड्स पर अतिरिक्त बोझ

एंटरटेनमेंट ऑफर्स में सख्ती
प्रीमियम कार्ड्स पर अतिरिक्त बोझ

हालांकि, आज फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर्स इंडेक्स में यह 748.9 बिलियन डॉलर दिख रही है, जो भारत के टॉप 40 सबसे अमीरों की कुल संपत्ति के बराबर है। मस्क पहले शख्स हैं ,जिन्होंने यह आंकड़ा छुआ। 16 दिसंबर को यह 600 बिलियन डॉलर पर पहुंची थी।
दौलत में उछाल का डेलावेयर ट्रिगर
उनकी संपत्ति में यह ऐतिहासिक उछाल अमेरिका की एक अदालत के फैसले के बाद आया, जिसमें टेस्ला के स्टॉक विकल्प पैकेज को बहाल कर दिया गया, जिसकी कीमत करीब 139 अरब डॉलर है। फोर्ब्स मैगजीन ने पहले मस्क को 600 अरब डॉलर से अधिक सम्पति वाला पहला व्यक्ति बताया था
अदालत का यह फैसला मस्क के 2018 के उस वेतन पैकेज से जुड़ा है, जिसे निचली अदालत ने अकल्पनीय बताते हुए रद्द कर दिया था। टेस्ला कंपनी ने मस्क के लिए यह मोटा पैकेज स्वीकृत किया था, जो टेस्ला के शेयरों की मौजूदा कीमत के हिसाब से करीब 139 अरब डॉलर का है। फोर्ब्स रियल टाइम बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक मस्क की वेल्थ अब लैरी पेज (252.6 बिलियन), लैरी एलिसन (242.7 बिलियन) और जेफ बेजोस (239.4 बिलियन) की कुल संपत्ति से भी ज्यादा है।
कारण 1: टेस्ला पे-पैकेज की वापसी
2018 में टेस्ला ने मस्क को 56 बिलियन डॉलर का स्टॉक ऑप्शन दिया था। 2024 में लोअर कोर्ट ने रद्द किया, लेकिन दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने बहाल किया। इससे वेल्थ पहली बार 700 बिलियन पार हुई।
कारण 2: स्पेसएक्स का 800 बिलियन वैल्यूएशन
रॉयटर्स के अनुसार, आंतरिक शेयर बिक्री से स्पेसएक्स की वैल्यूएशन 800 बिलियन डॉलर पहुंची। मस्क की 42% हिस्सेदारी पर अगर लिस्टिंग हो, तो अकेले यह 336 बिलियन डॉलर से ज्यादा जोड़ सकती है।
कारण 3: टेस्ला शेयरों की उछाल
नवंबर 2025 में शेयरहोल्डर्स ने 1 ट्रिलियन डॉलर का नया पे-पैकेज अप्रूव किया। 2025 में मस्क की वेल्थ में 340 बिलियन डॉलर जुड़े। टेस्ला में 12% स्टेक अब 197 बिलियन डॉलर का है। शेयर 13% चढ़े, सोमवार को 4% ऊपर जब मस्क ने रोबोटैक्सी टेस्ट की घोषणा की।

कैश निकासी और क्रेडिट रिपोर्ट पर नजर
पुराना कार्ड बंद करने से पहले सोचें
सही इस्तेमाल से बनेगा फाइनेंशियल फ्यूचर

दूसरा अहम कारण डॉलर की वैश्विक मजबूती है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरों और मजबूत आर्थिक संकेतों के चलते डॉलर दुनियाभर की मुद्राओं के मुकाबले मजबूत बना हुआ है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर रिटर्न बढ़ता है तो वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी निकालकर अमेरिका की ओर रुख करते हैं। इसका असर भारत जैसे देशों की मुद्रा पर पड़ता है।भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर कुछ उत्पादों में ऊंची टैरिफ दरें लगाए जाने से भारतीय सामानों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा घटी है। इससे निर्यात से होने वाली डॉलर की आमद सीमित हुई है और चालू खाते के घाटे की चिंता बढ़ी है।
रुपये की गिरावट का असर आम आदमी की जिंदगी पर भी पड़ता है। कमजोर रुपये के कारण कच्चा तेल गैस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने और महंगाई में दोबारा तेजी आने का खतरा रहता है जिसका बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ता है।तेल आयात भी रुपये की कमजोरी की एक बड़ी वजह है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ गया है। इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा बढ़ने की आशंका है जो मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट को थामने में भारतीय रिजर्व बैंक RBIकी भूमिका बेहद अहम है। आरबीआई जरूरत पड़ने पर बाजार में डॉलर बेचकर और तरलता का प्रबंधन कर रुपये की तेज गिरावट को रोक सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक आमतौर पर बहुत ज्यादा हस्तक्षेप से बचता है ताकि बाजार में अस्थिरता न बढ़े।लंबी अवधि में रुपये को स्थिर रखने के लिए सिर्फ मौद्रिक हस्तक्षेप काफी नहीं होगा। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत को विदेशी प्रत्यक्ष निवेश FDIऔर दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देना होगा। मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से डॉलर की स्थायी आमद होगी।
निर्यात बढ़ाना भी रुपये को सहारा देने का एक अहम तरीका है। आईटी फार्मा इंजीनियरिंग और सेवा क्षेत्र के निर्यात में मजबूती आने से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ संतुलित और स्पष्ट व्यापार समझौते विदेशी मुद्रा प्रवाह को बढ़ा सकते हैं।महंगाई पर नियंत्रण भी रुपये की स्थिरता के लिए जरूरी है। अगर महंगाई काबू में रहती है तो आरबीआई को नीतिगत समर्थन बनाए रखने में आसानी होती है और ब्याज दरों पर दबाव कम रहता है। मध्यम से लंबी अवधि में नीतिगत सुधार निवेश अनुकूल माहौल और निर्यात को बढ़ावा देने वाली रणनीतियां रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगा सकती हैं।

औद्योगिक मांग का प्रभाव
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
चांदी की मूल्यवृद्धि
सतर्कता और जोखिम
निवेशकों के लिए सलाह

ICICI बैंक की नई शुल्क संरचना
क्रेडिट कार्ड पर गेमिंग शुल्क 15 जनवरी 2026 से ICICI बैंक क्रेडिट कार्ड से गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए गए ट्रांजैक्शन्स पर 2% शुल्क लगाएगा।वॉलेट पर शुल्क थर्ड-पार्टी वॉलेट ऐप्स जैसे पेटीएम मोबिक्विक पर ₹5000 से अधिक राशि भेजने पर 1% शुल्क लिया जाएगा।क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान शाखा में जाकर क्रेडिट कार्ड बिल जमा करने पर 150 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा जो पहले 100 रुपये था। फिल्म के ऑफर में बदलाव 1 फरवरी 2026 से इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर फिल्म देखने के मुफ्त ऑफर को बंद कर दिया जाएगा और इसके लिए ₹25000 खर्च करने की शर्त रखी जाएगी।
एयरटेल पेमेंट बैंक
एयरटेल पेमेंट बैंक ने 1 जनवरी 2026 से अपने वॉलेट पर ₹75 प्रति वर्ष का रखरखाव शुल्क एएमसीलगाने का निर्णय लिया है। यदि वॉलेट में शेष राशि नहीं होगी तो यह शुल्क डेबिट कर लिया जाएगा।
वॉलेट ऐप्स पर शुल्क वृद्धि
भारत में वॉलेट सेवाएं 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट से शुरू हुईं लेकिन 2010 में पेटीएम के बाद वॉलेट ऐप्स ने काफी लोकप्रियता हासिल की। शुरुआती दौर में अधिकांश कंपनियां अपनी सेवाएं मुफ्त देती थीं लेकिन 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क और केवाईसी न कराने पर जुर्माना लगाना शुरू किया। अब कई वॉलेट कंपनियां क्रेडिट व डेबिट कार्ड से वॉलेट में पैसा डालने पर 1.5% सर्विस चार्ज लगा रही हैं।
ग्रामीण बैंकों का एकीकरण
इसके अलावा सरकार ने 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एक नया एकीकृत ब्रांड लोगो जारी किया है। यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक NABARDके सहयोग से तैयार किया गया है और यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और प्रगति को दर्शाता है।
उपभोक्ताओं के लिए चिंता
बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत के साथ उपभोक्ताओं को आने वाले समय में अतिरिक्त शुल्क और सीमित सेवाओं का सामना करना पड़ेगा। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए चिंता का कारण बन सकती है खासकर उन लोगों के लिए जो इन सेवाओं पर निर्भर हैं।

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) आने वाले वर्ष में अपनी कई सेवाओं को महंगा करने जा रहा है। 15 जनवरी 2026 से क्रेडिट कार्ड के जरिए गेमिंग प्लेटफॉर्म पर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन पर दो फीसदी शुल्क लगेगाा। इसी तरह से अमेजॉन, पेटीएम, मोबिक्विक जैसे थर्ड पार्टी वॉलेट ऐप में पांच हजार से अधिक की धनराशि भेजने पर एक प्रतिशत शुल्क देना होगा।
अगर बैंक शाखा में जाकर कैश में क्रेडिट कार्ड का बिल जमा करते हैं तो 150 रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगेगा, जो अभी तक 100 रुपये था। बैंक द्वारा इंसटेंट प्लेटिनम कार्ड पर बुकमाईशो के जरिए दिए जाने वाले फिल्म के मुफ्त लाभ एक फरवरी 2026 से बंद कर दिए जाएंगे। साथ ही, अन्य श्रेणी के कार्ड पर फिल्म ऑफर का लाभ उठाने के लिए खर्च की शर्त निर्धारित की गई है। मुफ्त फिल्म का लाभ उठाने के लिए कम से कम 25 हजार रुपये पिछली तिमाही में खर्च करने होंगे।
रूबिक्स और सैफिरो जैसे क्रेडिट कार्ड पर हर महीने 20 हजार रुपये खर्च करने पर ही रिवॉर्ड पांइंट्स मिलेंगे। जबकि प्लेटिनम और कोरल श्रेणी के कार्ड पर ट्रांसपोर्ट खर्च की सीमा 10 हजार रुपये प्रति महीने तय की गई है।
एयरटेल वॉलेट पर लगाएगा वार्षिक शुल्क
एयरटेल पेमेंट बैंक ने एक जनवरी से वॉलेट पर 75 रुपये प्रति वर्ष (जीएसटी को छोड़कर) का वार्षिक रखरखाव शुल्क (एएमसी) लगाने का फैसला लिया है। एयरटेल की तरफ से कहा गया है कि यदि शुल्क लगाते समय पर्याप्त शेष राशि उपलब्ध नहीं है, तो उपलब्ध शेष राशि डेबिट कर दी जाएगी। ऐसे में शेष राशि अगली बार धनराशि जमा होने पर स्वतः कट कर ली जाएगी।
पहले मुफ्त सेवा, फिर लगाते गए शुल्क
मोबाइल पर डिजिटल मोड में पैसे रखने के लिए भारत में सबसे पहले वर्ष 2004 में ऑक्सीजन वॉलेट आया लेकिन वॉलेट के क्षेत्र में असली बदलाव वर्ष 2010 से शुरू हुआ जब पेटीएम की शुरुआत हुई। इसके बाद तमाम कंपनियां वॉलेट ऐप के जरिए डिजिटल लेनदेन की सुविधा प्रदान करने के लिए मैदान में आई। शुरुआत में अधिकांश कंपनियों ने अपनी सेवा का मुफ्त रखा, लेकिन अब फरवरी 2021 से मोबिक्विक ने गैर-सक्रिय वॉलेट पर रखरखाव शुल्क लगाने की शुरुआत की। इसी तरह से अन्य वॉलेट कंपनियों ने केवीईसी के लिए 15 रुपये शुल्क साथ में जीएसटी लगाने का फैसला लिया।
केवाईसी न कराने पर जुर्माना
इसके साथ ही, केवाईसी न कराने वाले ग्राहकों पर पांच रुपये प्रति तिमाही का जुर्माना भी लगाना शुरू किया। इसी तरह से अब क्रेडिट व डेबिट कार्ड के जरिए वॉलेट में पैसा डाले पर 1.5 प्रतिशत सर्विस चार्ज लगाया जाता है। हालांकि कई वॉलेट ऐप ने अभी तक कई चार्ज नहीं लगाए हैं।
सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों का एक ही लोगो होगा
राज्य स्तर पर क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के एकीकरण के बाद सरकार ने अब उनके लिए नया लोगो जारी किया गया है। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह लोगो राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के साथ मिलकर जारी किया गया है। यह देश में काम कर रहे सभी 28 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के लिए एकीकृत ब्रांड पहचान स्थापित करेगा। इस लोगो में एक लौ है जो तीन स्तरों से मिलकर बनी है।

ब्याज दर: 8.75% शुरुआती
प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 1% + GST
अधिकतम लोन: ₹20 लाख
न्यूनतम सालाना आय: ₹3 लाख
गारंटर: नहीं
बैंक का दावा है कि वह देश के सबसे सस्ते पर्सनल लोन में से एक ऑफर कर रहा है।
2. पंजाब एंड सिंध बैंक
यह बैंक भी किफायती ब्याज दर पर पर्सनल लोन की सुविधा दे रहा है।
ब्याज दर: 9.60% शुरुआती
प्रोसेसिंग फीस: 0.50% से 1% तक
3. एचडीएफसी बैंक
प्राइवेट सेक्टर में एचडीएफसी बैंक तेज प्रोसेसिंग के लिए जाना जाता है।
ब्याज दर: 9.99% शुरुआती
प्रोसेसिंग फीस: अधिकतम ₹6,500
अधिकतम लोन: ₹50 लाख (पात्रता पर निर्भर)
डिस्बर्सल: प्री-अप्रूव्ड ग्राहकों को 10 सेकेंड में फंड ट्रांसफर
4. एक्सिस बैंक
ब्याज दर: 9.99% शुरुआती
प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 2% तक
5. आईडीएफसी फर्स्ट बैंक
ब्याज दर: 9.99% शुरुआती
प्रोसेसिंग फीस: लोन अमाउंट का 2% तक
₹12 लाख के पर्सनल लोन पर EMI का हिसाब
अगर आप ₹12 लाख का पर्सनल लोन 5 साल (60 महीने) के लिए लेते हैं, तो अलग-अलग ब्याज दर पर आपकी EMI कुछ इस तरह होगी:
8.75% ब्याज दर पर
मंथली EMI: ₹24,765
कुल ब्याज: ₹2,85,881
9.99% ब्याज दर पर
मंथली EMI: ₹25,491
कुल ब्याज: ₹3,29,433
यानी सिर्फ ब्याज दर में 1–1.25% का फर्क आपके कुल भुगतान में करीब ₹43,000 से ज्यादा का अंतर ला सकता है।अगर आप सबसे सस्ता पर्सनल लोन चाहते हैं, तो आवेदन से पहले अच्छी तरह तुलना करना बेहद जरूरी है।अपना सिबिल स्कोर सुधारेंब्याज दर के साथ प्रोसेसिंग फीस और शर्तें भी देखें EMI कैलकुलेशन पहले ही कर लें सही बैंक चुनकर आप न सिर्फ कम EMI चुका सकते हैं, बल्कि अपने वित्तीय बोझ को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।