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  • नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत

    नया साल 2026 CNG PNG के दाम घटेंगे रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव NPS निवेशकों को राहत


    नई दिल्ली । नया साल 2026 आपके लिए कई महत्वपूर्ण बदलावों और राहतों के साथ आ रहा है। इन बदलावों से आम आदमी की जिंदगी में राहत मिलेगी खासकर सीएनजी और पीएनजी के दामों में कटौती रेलवे रिजर्वेशन में नए नियम और राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए राहत।
    सीएनजी और पीएनजी की कीमतों में कटौती
    1 जनवरी 2026 से संपीडित प्राकृतिक गैस CNG और घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस PNG के दामों में कटौती हो सकती है। सीएनजी की कीमतें दो से ढाई रुपये तक घट सकती हैं जबकि पीएनजी के दाम में करीब दो रुपये तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड PNGRB ने गैस के परिवहन शुल्क को सरल और तर्कसंगत बनाने का फैसला किया है। पहले यह शुल्क दूरी के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा गया था अब इसे दो हिस्सों में बांटा जाएगा। इससे 40 सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों और 312 भौगोलिक क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।यह परिवर्तन गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आएगा और उनकी जीवनशैली को और भी किफायती बनाएगा।
    रेलवे रिजर्वेशन में बदलाव
    रेलवे बोर्ड ने रिजर्वेशन चार्ट बनाने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट 10 से 12 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों को यह जानने में आसानी होगी कि उनका टिकट कंफर्म हुआ है या नहीं खासकर दूरदराज क्षेत्रों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह बहुत सहूलियतपूर्ण रहेगा। पहले ट्रेन खुलने से चार घंटे पहले रिजर्वेशन चार्ट तैयार किया जाता था जिससे यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था अब सुबह 5 बजे से दोपहर 2 बजे तक की ट्रेनों का रिजर्वेशन चार्ट एक दिन पहले रात 8 बजे तैयार किया जाएगा। यह बदलाव यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित होगा खासकर यात्रा की प्लानिंग को लेकर।
    NPS निवेशकों के लिए राहत
    पीएफआरडीए ने राष्ट्रीय पेंशन योजना NPS के निवेशकों के लिए एक बड़ा बदलाव किया है। अब गैर सरकारी NPS खाताधारकों को पेंशन प्लान एन्युटी में सिर्फ 20 फीसदी राशि निवेश करनी होगी। शेष 80 फीसदी राशि को एकमुश्त या किश्तों में निकाला जा सकेगा। यह नियम 15 साल NPS में निवेश करने वालों और 60 वर्ष की उम्र पार करने या रिटायर होने वाले निवेशकों के लिए लागू होगा। पहले के नियमों के तहत निवेशक को 40 फीसदी राशि पेंशन प्लान में डालने की बाध्यता थी लेकिन अब 20 फीसदी राशि से काम चल जाएगा।
    इसके अलावा 8 लाख रुपये तक की कुल राशि पर पूरी निकासी की अनुमति दी जाएगी। हालांकि सरकारी कर्मचारियों के लिए पुराने नियम लागू रहेंगे। 2026 का नया साल देशवासियों के लिए खुशखबरी लेकर आ रहा है। गैस की कीमतों में कमी रेलवे के रिजर्वेशन चार्ट में बदलाव और NPS निवेशकों के लिए नए नियम ये सभी बदलाव आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होंगे। इस साल का आगमन नए अवसर और सस्ती सेवाओं के साथ होगा जिससे लोगों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नए NPS नियम लागू: रिटायरमेंट पर पैसा निकालते समय यह गलती पड़ सकती है भारी

    नई दिल्ली।रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी चिंता होती है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए नेशनल पेंशन सिस्टम NPS को देश की सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट स्कीम्स में गिना जाता है। साल 2025 से NPS के नए नियम लागू हो चुके हैं, जो निवेशकों को पहले से ज्यादा लचीलापन तो देते हैं, लेकिन साथ ही एक गलत फैसले का जोखिम भी बढ़ा देते हैं।पेंशन फंडरेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटीPFRDA द्वारा किए गए बदलावों का सही इस्तेमाल किया जाए तो रिटायरमेंट आरामदायक हो सकता है, लेकिन अगर निवेशक केवल एकमुश्त रकम निकालने के लालच में आ गए, तो भविष्य में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
    NPS के नए नियम क्या कहते हैं?
    PFRDA के नए नियम मुख्य रूप से नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स, यानी ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS निवेशकों पर लागू होते हैं। सबसे बड़ा बदलाव अनिवार्य एन्युटी निवेश को लेकर किया गया है।पहले नियमों के तहत रिटायरमेंट पर कुल NPS कॉर्पस का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा एन्युटी में लगाना जरूरी था। अब इसे घटाकर 20 प्रतिशत कर दिया गया है। इस बदलाव के बाद निवेशकों को रिटायरमेंट के समय 80 प्रतिशत तक रकम एकमुश्तLump Sum निकालने की सुविधा मिल गई है। कुछ खास परिस्थितियों में 100 प्रतिशत तक निकासी की अनुमति भी दी गई है।

    एन्युटी को नजरअंदाज करना क्यों हो सकता है खतरनाक?
    एन्युटी वह व्यवस्था है, जिसके जरिए रिटायरमेंट के बाद निवेशक को हर महीने नियमित पेंशन मिलती है। नए नियमों में भले ही इसकी अनिवार्यता कम कर दी गई हो, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है।अगर किसी निवेशक का कुल NPS कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है, तो कम से कम 20 प्रतिशत राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होगा। यह नियम न सिर्फ 60 साल की उम्र में रिटायरमेंट लेने वालों पर लागू होता है, बल्कि 60 से 85 वर्ष के बीच NPS से एग्जिट करने वाले निवेशकों पर भी लागू रहेगा। यानी सरकार यह साफ संकेत दे रही है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

    कॉर्पस के हिसाब से निकासी के विकल्प
    नए नियमों में NPS कॉर्पस के आधार पर अलग-अलग विकल्प तय किए गए हैं-अगर कुल NPS कॉर्पस 8 लाख रुपये तक है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।अगर कॉर्पस 8 से 12 लाख रुपये के बीच है, तो अधिकतम 6 लाख रुपये लंपसम निकाले जा सकते हैं। बाकी राशि एन्युटी या किश्तों में मिलेगी।अगर कॉर्पस 12 लाख रुपये से ज्यादा है, तो कम से कम 20 प्रतिशत एन्युटी में निवेश जरूरी होगा और शेष 80 प्रतिशत एक साथ निकाला जा सकता है।

    सबसे बड़ी चूक कहां हो सकती है?
    ज्यादा लंपसम निकासी की सुविधा देखकर कई निवेशक पूरा पैसा एक साथ निकालने का फैसला कर लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है।रिटायरमेंट के बाद मेडिकल खर्च, बढ़ती महंगाई और लंबी उम्र के कारण नियमित आय की जरूरत लगातार बनी रहती है। अगर पेंशन का स्थायी स्रोत नहीं होगा, तो कुछ ही सालों में एकमुश्त रकम खत्म हो सकती है।

    संतुलन बनाना है सबसे जरूरी 
    NPS के नए नियम निवेशकों को आज़ादी जरूर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि लंपसम और एन्युटी के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। एक हिस्सा एकमुश्त निकालकर जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं, लेकिन नियमित पेंशन के लिए पर्याप्त एन्युटी रखना रिटायरमेंट को सुरक्षित बनाता है। NPS के नए नियम राहत देने वाले जरूर हैं, लेकिन जल्दबाजी में लिया गया फैसला भारी नुकसान पहुंचा सकता है। समझदारी इसी में है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय केवल आज नहीं, बल्कि आने वाले 20–25 सालों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। सही संतुलन ही सुरक्षित और तनावमुक्त रिटायरमेंट की कुंजी है।

  • Billionaires list में टेक दिग्गजों का जलवा.. कई देशों की GDP एलन मस्क के नेटवर्थ से कम

    Billionaires list में टेक दिग्गजों का जलवा.. कई देशों की GDP एलन मस्क के नेटवर्थ से कम


    वाशिंगटन।
    दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची (World’s Richest People list) में एक बार फिर टेक्नोलॉजी के दिग्गजों (Technology Giants) का जलवा बरकरार है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स (Bloomberg Billionaires Index) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने $638 बिलियन की कुल संपत्ति के साथ टॉप पोजीशन पर बरकरार रखा है।

    यह आंकड़ा न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ है, बल्कि एक ही दिन में 167 बिलियन की जबरदस्त बढ़ोतरी और YTD (ईयर-टू-डेट) में +$205 बिलियन का उछाल दर्शाता है। मस्क की संपत्ति में यह उछाल टेस्ला के शेयरों की तेजी और स्पेसएक्स के वैल्यूएशन से जुड़ा है।

    130 से अधिक देशों की जीडीपी एलन मस्क की दौलत से कम
    IMF डेटा के अनुसार, 2025 के लिए लगभग 130 से अधिक देशों की नाममात्र GDP 600 अरब डॉलर से कम अनुमानित है। दुनिया में कुल 195 संप्रभु देश हैं, जिनमें से शीर्ष 60-65 अर्थव्यवस्थाओं (जैसे अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी आदि) की GDP इससे ऊपर है, जबकि बाकी छोटे द्वीप राष्ट्र, अफ्रीकी और कुछ एशियाई देश इससे नीचे आते हैं। IMF की 2025 अपडेटेड अनुमानों के मुताबिक कई विकासशील देशों की GDP $100B से भी कम है।

    टॉप-10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा
    टॉप 10 में अमेरिकी टेक मैग्नेट्स का कब्जा साफ दिख रहा है। गूगल के सह-संस्थापकों लैरी पेज ($265B) और सर्गेई ब्रिन ($246B) ने दूसरे और तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया, हालांकि हालिया बदलाव में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

    जेफ बेजोस (246 अरब डॉलर), लैरी एलिसन (238 अरब डॉलर), मार्क जुकरबर्ग (229 अरब डॉलर), स्टीव बाल्मर (166 अरब डॉलर) और एनवीडिया के जेंसन हुआंग (153 अरब डॉलर) भी टेक सेक्टर से ही हैं। हुआंग की संपत्ति में इस साल अबतक 39 अरब डॉलर की शानदार बढ़ोतरी हुई, जो AI चिप डिमांड का असर दिखाती है।

    फ्रांस के बर्नार्ड अर्नाल्ट ($202B) लक्जरी कंज्यूमर सेक्टर से अकेले गैर-अमेरिकी नाम हैं, जबकि वॉरेन बफे ($152B) डाइवर्सिफाइड निवेश से 10वें स्थान पर हैं। वॉल्टन फैमिली के जिम वॉल्टन (141 अरब डॉलर) रिटेल से हैं, लेकिन कुल मिलाकर टॉप 11 में 9 अमेरिकी और ज्यादातर टेक से जुड़े हैं।

    क्या कहते हैं आंकड़े?
    टेक स्टॉक्स की रैली ने इन बिलियनेयर्स को आसमान छू लिया है, खासकर AI और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के बूम से, लेकिन हालिया घाटे (जैसे बेजोस के -$3.47B) बाजार की अस्थिरता की ओर इशारा करते हैं। भारतीय निवेशकों के लिए यह सबक है कि टेक पर दांव लगाना फायदेमंद तो है, मगर जोखिम भरा भी।

  • देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS ने हासिल किया 1 अरब डॉलर का बड़ा ऑर्डर

    देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS ने हासिल किया 1 अरब डॉलर का बड़ा ऑर्डर


    नई दिल्ली।
    भारत की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी (India’s Largest Software Services Company), टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services -TCS) ने स्पेनिश दूरसंचार दिग्गज टेलीफोनिका (Spanish Telecommunications Giant Telefónica) की ब्रिटिश शाखा, टेलीफोनिका यूके से 10 साल में 1 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का एक बड़ा ऑर्डर हासिल किया है। इस सौदे के साथ, कंपनी को लगभग दो साल बाद इतने बड़े कांट्रैक्ट की प्राप्ति हुई है। टेलीफोनिका यूके ब्रिटेन में O2 मोबाइल सेवा ब्रांड चलाती है।


    क्या है कांट्रैक्ट में

    मुंबई स्थित टीसीएस इस कान्ट्रैक्ट के तहत एप्लिकेशन और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा कार्य करेगी। इस सौदे का अधिकतर हिस्सा कंपनी के लिए नया काम है। दो अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी, जिन्होंने नाम न छापने की शर्त रखी। आने वाले हफ्तों में इसकी आधिकारिक घोषणा होने की उम्मीद है।


    यूके में चौथी बड़ी डील

    यह टीसीएस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. कृतिवासन के कार्यकाल में यूनाइटेड किंगडम से मिला चौथा 1 अरब डॉलर का अनुबंध है। कृतिवासन ने जून 2023 में पदभार संभाला था। उसी महीने, कंपनी ने यूके की सबसे बड़ी वर्कप्लेस पेंशन योजना, यूके नेशनल एम्प्लॉयमेंट सेविंग्स ट्रस्ट के साथ 1.1 अरब डॉलर का अनुबंध किया था।

    तीन महीने बाद, उसे जगुआर लैंड रोवर के साथ 1 अरब डॉलर का डिजिटल परिवर्तन अनुबंध मिला। पिछले साल जनवरी में, कंपनी को ब्रिटिश बीमा कंपनी एविवा के साथ 2.5 अरब डॉलर का, 15 साल का प्रशासनिक अनुबंध मिला था, जो अब तक का सबसे बड़ा सौदा है।

    यूके है अहम बाजार
    टीसीएस के लिए अमेरिका के बाद यूनाइटेड किंगडम दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है, जो उसके 30.18 अरब डॉलर के वार्षिक राजस्व में लगभग 17% का योगदान करता है। इस खबर के प्रकाशन के समय तक, टीसीएस और टेलीफोनिका की ओर से भेजे गए सवालों का जवाब नहीं मिला था।


    मुनाफे पर असर का डर

    पहले जिक्र किए गए दोनों अधिकारियों ने टेलीफोनिका यूके सौदे में मुनाफे की दर कम होने की ओर इशारा किया है। उन्होंने दावा किया कि यह दर टीसीएस के 24.2% के परिचालन मार्जिन से कम है, हालांकि उन्होंने अधिक विवरण नहीं दिए।

    यह रणनीति में बदलाव का संकेत है, क्योंकि आईटी आउटसोर्सिंग कंपनी पारंपरिक रूप से कंपनी के समग्र मुनाफे से कम दर वाले अनुबंध करने से बचती रही है। यह दूसरा ऐसा सौदा है जो एक दूरसंचार कंपनी के साथ है और कंपनी के समग्र मार्जिन को नुकसान पहुंचा रहा है।


    बीएसएनल सौदे जैसी स्थिति

    सार्वजनिक दूरसंचार ऑपरेटर भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के साथ कंपनी का 1.83 अरब डॉलर का अनुबंध भी एक ऐसा ही सौदा था जिसने कंपनी की लाभप्रदता को नुकसान पहुंचाया। उस सौदे के तहत टीसीएस ने बीएसएनएल के लिए 4जी नेटवर्क तैनात किया था। हालांकि, एक अधिकारी के अनुसार, टेलीफोनिका यूके सौदे का परिचालन मार्जिन बीएसएनएल के साथ किए गए सौदे से अधिक होने की उम्मीद है।


    राजस्व पर प्रभाव

    फिलहाल, 10 साल में 1 अरब डॉलर के अनुबंध का मतलब है आईटी सेवा कंपनी के लिए सालाना 100 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त आय। सीधे शब्दों में कहें तो, अगर टीसीएस इस साल कोई व्यवसाय नहीं खोती है, तो अगले वित्तीय वर्ष में उसका राजस्व 0.3% बढ़ने की उम्मीद है।

  • Post Office की गारंटीड स्कीम: ₹10 लाख निवेश पर मिलेगा ₹4.49 लाख ब्याज, जानें NSC का पूरा गणित

    Post Office की गारंटीड स्कीम: ₹10 लाख निवेश पर मिलेगा ₹4.49 लाख ब्याज, जानें NSC का पूरा गणित


    नई दिल्ली
    ।अगर आप ऐसा निवेश विकल्प ढूंढ रहे हैं जिसमें जोखिम बिल्कुल न हो, सरकार की पूरी गारंटी मिले और फिक्स रिटर्न भी सुनिश्चित हो, तो पोस्ट ऑफिस की नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट NSC स्कीम आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। यह स्कीम खासतौर पर उन निवेशकों के लिए बनाई गई है जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर सुरक्षित भविष्य की योजना बनाना चाहते हैं।इस स्कीम में यदि कोई निवेशक एकमुश्त ₹10,00,000 जमा करता है, तो 5 साल की मैच्योरिटी पर उसे करीब ₹4,49,034 का ब्याज मिलता है। यानी कुल रकम लगभग ₹14.49 लाख हो जाती है।

    क्या है नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट NSC?

    नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट भारत सरकार द्वारा समर्थित एक फिक्स्ड इनकम सेविंग स्कीम है, जिसे पोस्ट ऑफिस के जरिए चलाया जाता है। इसमें निवेश पूरी तरह सुरक्षित होता है क्योंकि यह सरकारी योजना है। इस स्कीम में बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता और निवेशक को तय समय के बाद तय रिटर्न मिलता है। NSC की लॉक-इन अवधि 5 साल होती है। इसमें कम से कम ₹1,000 से निवेश शुरू किया जा सकता है, जबकि अधिकतम निवेश की कोई सीमा तय नहीं है। यानी आप अपनी जरूरत और क्षमता के अनुसार जितनी भी रकम चाहें, निवेश कर सकते हैं।

    ब्याज दर और रिटर्न का पूरा कैलकुलेशन

    फिलहाल पोस्ट ऑफिस की NSC स्कीम पर 7.7% सालाना ब्याज दिया जा रहा है। यह ब्याज चक्रवृद्धि Compounding आधार पर मिलता है, लेकिन इसका भुगतान मैच्योरिटी पर किया जाता है।यदि कोई निवेशक:निवेश राशि: ₹10,00,000,अवधि: 5 साल, ब्याज दर: 7.7% प्रति वर्ष  तो 5 साल बाद:  कुल ब्याज: ₹4,49,034 लगभगl, कुल मैच्योरिटी अमाउंट: ₹14,49,034 यह स्कीम उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी है जो बच्चों की पढ़ाई, शादी, रिटायरमेंट या किसी बड़े फाइनेंशियल लक्ष्य के लिए सुरक्षित फंड बनाना चाहते हैं।

    टैक्स बेनिफिट का बड़ा फायदा

    NSC स्कीम का एक बड़ा आकर्षण इसका टैक्स लाभ है।NSC में किया गया निवेश इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक टैक्स फ्री होता है।हर साल मिलने वाला ब्याज भी दोबारा निवेश माना जाता है, जिससे टैक्स सेविंग बढ़ जाती है।हालांकि, मैच्योरिटी पर मिलने वाला अंतिम ब्याज टैक्सेबल होता है।

    कौन खोल सकता है NSC अकाउंट? 

    पोस्ट ऑफिस के नियमों के अनुसार: केवल भारत का निवासी नागरिक NSC में निवेश कर सकता है
    NRI, HUF, ट्रस्ट और कंपनियां इसके लिए पात्र नहीं हैं अकाउंट के प्रकार: सिंगल अकाउंट: वयस्क अपने नाम से या नाबालिग की ओर से जॉइंट अकाउंट: दो या तीन वयस्क मिलकर जॉइंट A – सभी खाताधारकों को राशि  जॉइंट B – किसी एक खाताधारक को  नाबालिग के लिए: अभिभावक खाता खोल सकता है 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र का बच्चा अपने नाम से खाता खोल सकता है मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के लिए गार्जियन खाता खोल सकता है

    क्यों चुनें NSC स्कीम?

    100% सुरक्षित निवेश भारत सरकार की गारंटी  तय और स्थिर रिटर्न टैक्स बचत का फायदा
    बी अवधि की फाइनेंशियल प्लानिंग के लिए आदर्श

  • फर्जी डोनेशन पर आयकर विभाग का कड़ा एक्शन  रिफंड पर लगेगी सख्त जांच और जुर्माना

    फर्जी डोनेशन पर आयकर विभाग का कड़ा एक्शन रिफंड पर लगेगी सख्त जांच और जुर्माना


    नई दिल्ली । आयकर विभाग ने फर्जी डोनेशन के जरिए टैक्स रिफंड लेने वाले करदाताओं पर शिकंजा कसने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में कई करदाताओं ने अपने आयकर रिटर्न में राजनीतिक दलों या चैरिटेबल संस्थाओं को किए गए कथित दानों का झूठा दावा किया था। इन दावों के माध्यम से उन्होंने टैक्स रिफंड की मांग की थी लेकिन अब विभाग ने इन दावों की सख्त जांच शुरू कर दी है।

    आयकर विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि संदिग्ध दावों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और अगर कोई फर्जी डोनेशन के माध्यम से टैक्स रिफंड लेने की कोशिश करेगा तो न केवल उसका रिफंड रोका जाएगा बल्कि उस पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

    फर्जी दस्तावेज और एजेंट्स का नेटवर्क

    आयकर अधिकारियों ने अपनी जांच में पाया है कि कुछ करदाता फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से टैक्स रिफंड हासिल करने की कोशिश कर रहे थे। इन करदाताओं ने किसी चैरिटेबल ट्रस्ट या राजनीतिक दल को सीधे दान नहीं किया बल्कि बिचौलियों या एजेंट्स के माध्यम से फर्जी रसीदें तैयार करवाईं। इन दस्तावेजों में नकली चैरिटेबल ट्रस्ट की रसीदें अनरिकॉग्नाइज्ड राजनीतिक दलों के नाम पर चंदे की रसीदें और अन्य ऐसे ही झूठे रिकॉर्ड शामिल थे जिनका कोई वास्तविक आधार नहीं था।

    रिफंड में देरी का एक बड़ा कारण

    आयकर विभाग ने यह भी बताया कि रिफंड में देरी का एक कारण यह भी है कि अब सभी दावों की गहन जांच की जा रही है। विशेष रूप से उन मामलों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां टैक्स छूट और रिफंड का दावा असामान्य रूप से अधिक है। विभाग का कहना है कि अब रिटर्न फाइल करने के बाद किया गया हर दावा बारीकी से खंगाला जाएगा। इससे न केवल सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि विभाग को यह भी सुनिश्चित करने का मौका मिलेगा कि कोई भी करदाता फर्जी तरीके से रिफंड प्राप्त न कर सके।

    सख्त चेतावनी और अपील

    आयकर विभाग ने सभी ईमानदार करदाताओं से अपील की है कि वे केवल वास्तविक और वैध डोनेशन पर ही टैक्स छूट का दावा करें। इसके अलावा किसी भी बिचौलिए या एजेंट के झांसे में न आएं। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि रिटर्न फाइल करने से पहले सभी दस्तावेजों की सही तरीके से जांच करना बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या से बचा जा सके।

    इस कदम से यह स्पष्ट हो जाता है कि आयकर विभाग अब फर्जी तरीके से टैक्स रिफंड लेने वालों के खिलाफ एक कठोर नीति अपनाने जा रहा है। फर्जी डोनेशन के जरिए टैक्स रिफंड लेने का प्रयास करने वालों के लिए यह एक बड़ा झटका है क्योंकि अब उन्हें न केवल अपने रिफंड की उम्मीद छोड़नी पड़ेगी बल्कि कानूनी कार्रवाई और जुर्माना का सामना भी करना पड़ सकता है।

    आयकर विभाग की यह कार्रवाई टैक्स सिस्टम में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कड़ा संदेश है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में ऐसे फर्जी दावों में कमी आएगी और लोग टैक्स रिफंड के लिए वास्तविक और वैध दावों को ही प्राथमिकता देंगे।

  • भारी टैरिफ के बाद भी भारत से जमकर सामान खरीद रहा अमेरिका… 19.4 % बढ़ा एक्सपोर्ट

    भारी टैरिफ के बाद भी भारत से जमकर सामान खरीद रहा अमेरिका… 19.4 % बढ़ा एक्सपोर्ट


    वाशिंगटन।
    डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के टैरिफ (Tariff) के बाद भी अमेरिका (America) भारत से जमकर सामान खरीद रहा है। सरकार की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार नवंबर के महीने में भारत का एक्सपोर्ट्स (India’s exports) 19.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 38.1 बिलियन डॉलर रहा। जोकि पिछले तीन साल में सबसे बेहतर है। इस उछाल के पीछे की वजह अमेरिका और चीन को अधिक मात्रा में एक्सपोर्ट्स हुए सामान हैं। इसके साथ इंपोर्ट्स में 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। नवंबर के महीने में इपोर्ट्स 62.70 बिलियन डॉलर रहा। बता दें, व्यापार घाटा 2 प्रतिशत की गिरावट के बाद नवंबर के महीने में 24.60 बिलियन डॉलर रहा। जोकि जून के बाद सबसे न्यूनतम स्तर है।

    अक्टूबर के महीने में भारत के एक्सपोर्ट्स में 12 प्रतिशत की गिरावट आई थी। ऐसे में एक बार से इजाफा इंडियन इकनॉमी के लिए अच्छी खबर है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अमेरिका को भारत का एक्सपोर्ट करीब 7 बिलियन डॉलर रहा है। जोकि 22.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। यह स्थिति तब है जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है।


    चीन भी जमकर कर रहा भारत से खरीदारी

    नवंबर के महीने में चीन ने भारत से 2.2 बिलियन डॉलर के सामन खरीदे। इसमें 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी की हुई है। इसके अलावा नीदरलैंड को पीछे छोड़ते हुए चीन, भारत का तीसरा सबसे बड़ा एक्सपर्ट डेस्टिनेशन बन गया।


    भारत किन तीन देशों में करता है अधिक एक्सपोर्ट

    नवंबर के आंकडों के अनुसार एक्सपोर्ट के लिहास से अमेरिका पहले नबंर पर है। वहीं, यूएई दूसरे नबंर है। बीते महीने चीन इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर आ गया है। भारत के इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स और पेट्रोलियम गुड्स की डिमांड अलग-अलग देशों में खूब रही है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है कि एक्सपोर्ट्स में बढ़ोतरी और इंपोर्ट्स में गिरावट के पीछे की वजह त्योहारों का सीजन खत्म होना है। जिसकी वजह से डिमांड में गिरावट आई है। भारत इंपोर्ट किए जाने वाले गोल्ड में नवंबर के महीने में 59 प्रतिशत की गिरावट आई है। बीते महीने सिर्फ 4 बिलियन डॉलर का गोल्ड खरीदा गया है।

  • पड़ोसी देश नेपाल में भी चलेंगे भारत के 200 और 500 रुपये के नोट… लंबे समय से लगा वैन हटा

    पड़ोसी देश नेपाल में भी चलेंगे भारत के 200 और 500 रुपये के नोट… लंबे समय से लगा वैन हटा


    काठमांडू।
    भारत और नेपाल (India and Nepal) के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने वाली एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। नेपाली कैबिनेट (Nepali Cabinet) ने सोमवार को हुई बैठक में 200 रुपये और 500 रुपये के भारतीय नोटों (Indian Notes 200-500 Rupees) पर लगे लंबे समय के प्रतिबंध को हटाने का फैसला किया है। यह निर्णय भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हाल ही में विदेशी मुद्रा प्रबंधन नियमों में किए गए संशोधन के बाद लिया गया है। सरकार के प्रवक्ता एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री जगदीश खरेल ने बताया कि अब इन नोटों का आयात-निर्यात दोनों देशों के बीच अनुमत होगा, हालांकि प्रति व्यक्ति अधिकतम सीमा बरकरार रहेगी।

    इस दौरान खरेल ने स्पष्ट किया कि नेपाली या भारतीय नागरिकों के लिए भारत से नेपाल में प्रति व्यक्ति 25000 रुपये लाने और नेपाल से भारत में इतनी ही राशि वापस ले जाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बड़े भारतीय नोटों पर प्रतिबंध हटाने के बाद 9 नवंबर 2016 के बाद जारी किए गए नोटों को प्रचलन में लाया जा सकता है। भारत ने 2016 में बड़े नोटों की विमुद्रीकरण किया था, जिसके बाद नेपाल में ऐसे नोटों के आयात-निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

    इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने नेपाल को बड़े भारतीय नोटों के आयात-निर्यात की अनुमति देने की व्यवस्था की थी। भारत द्वारा प्रतिबंधों में छूट दिए जाने के बाद नेपाल सरकार ने भी अपना प्रतिबंध हटा लिया। आरबीआई ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन विनियम, 2015 में संशोधन करके नेपाल और भारत के बीच बड़े भारतीय नोटों के आयात-निर्यात की अनुमति प्रदान की थी। अब नेपाल सरकार ने दोनों देशों के बीच खुली सीमा और भारत पर नेपाल की व्यापारिक निर्भरता को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंध हटा लिया है।

    बता दें कि भारत द्वारा 2016 में नोटबंदी के बाद नेपाल में बड़े भारतीय नोटों का विनिमय नहीं किया गया। परिणामस्वरूप, नेपाल ने भी 100 रुपये से अधिक भारतीय नोटों के प्रचलन पर प्रतिबंध लगा दिया था। गौरतलब है कि नोटबंदी के समय नेपाल के बैंकिंग सिस्टम में लगभग 5 करोड़ रुपये मूल्य की भारतीय मुद्रा मौजूद थी, जिसका अभी तक विनिमय नहीं हो सका है।

  • मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…

    मार्च से पहले पीएफ से यूपीआई लिंक, एटीएम से भी निकलेगा पैसा; प्रोसेस होगा और आसान…


    नई दिल्ली/केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने प्रोविडेंट फंड (PF) से जुड़ी नई डिजिटल पहल का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी अपने पीएफ खाते को UPI और एटीएम से लिंक कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में पीएफ निकालना अब पहले से कहीं आसान और डिजिटल हो जाएगा।

    पीएफ निकालने की मौजूदा प्रक्रिया में कठिनाई

    आज की तारीख में पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों को कई फॉर्म भरने और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फार्म भरते-भरते थक जाते हैं और प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाते। मनसुख मांडविया ने कहा कि यही परेशानी ध्यान में रखकर सरकार ने नियमों में बदलाव किया है। अब कर्मचारी अपने पीएफ का 75 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी वजह के निकाल सकेंगे।

    क्यों रखा जाएगा 25 प्रतिशत पीएफ?

    केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पीएफ में 25 प्रतिशत राशि इसलिए सुरक्षित रखी जाएगी ताकि कर्मचारियों की नौकरी की निरंतरता बनी रहे। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई कर्मचारी 7 महीने काम करने के बाद पूरी राशि निकाल लेता है और बाद में नई नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसकी पीएफ कंटिन्यूटी टूट जाती है। वहीं पेंशन के लिए 10 साल की लगातार नौकरी जरूरी होती है। 25 प्रतिशत राशि जमा रहने से कर्मचारी पेंशन के लिए पात्र बने रहेंगे और नई नौकरी मिलने तक सुरक्षा भी मिलती है।

    एटीएम और यूपीआई से पीएफ निकासी कैसे होगी

    मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार ने पीएफ खाते को बैंक खाता, आधार और यूएन से पहले ही जोड़ दिया है। अब इसमें डेबिट कार्ड और एटीएम फंक्शनैलिटी जोड़ने की तैयारी चल रही है। इसका मतलब यह है कि मार्च 2026 से पहले कर्मचारी सीधे एटीएम से अपने पीएफ का पैसा निकाल सकेंगे। इसके अलावा, पीएफ खाते को UPI से भी लिंक किया जा सकेगा। इससे कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफार्म पर पैसा ट्रांसफर करने की सुविधा मिलेगी और उन्हें कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी। मंत्री ने कहा कि यह फैसला कर्मचारियों के जीवन को आसान बनाने और डिजिटल सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है।

    सरल और डिजिटल भविष्य की ओर

    पीएफ से जुड़े यह बदलाव कर्मचारियों के लिए बड़ा लाभ हैं। अब उन्हें बैंक, ऑफिस या सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डिजिटल प्लेटफार्म और एटीएम के माध्यम से कभी भी, कहीं भी पीएफ निकालने की सुविधा उपलब्ध होगी। यह नई पहल सरकारी सेवाओं को और पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

    सरकार की तैयारी और अगला कदम

    मनसुख मांडविया ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल शुरुआत है। भविष्य में और भी डिजिटल सुधार किए जाएंगे, जिससे पीएफ खाताधारकों को तेजी से और सुरक्षित तरीके से पैसा निकालने की सुविधा मिले। यह पहल कर्मचारियों की मेहनत की कमाई को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • पोस्‍ट ऑफिस आरडी स्‍कीम से कमाई करें 2.54 लाख रुपये जानें पूरी कैलकुलेशन

    पोस्‍ट ऑफिस आरडी स्‍कीम से कमाई करें 2.54 लाख रुपये जानें पूरी कैलकुलेशन

    नई दिल्ली । हर कोई निवेश करके अच्छा पैसा बनाना चाहता है लेकिन सही विकल्प का चयन न करने पर कभी-कभी नुकसान भी हो सकता है। यदि आप सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं तो पोस्ट ऑफिस की छोटी बचत योजनाएं आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं। इन योजनाओं में से एक है रेकरिंग डिपॉजिट जो आपको बिना किसी जोखिम के अच्छा मुनाफा दे सकती है। आइए जानें कैसे इस स्कीम के जरिए आप ब्‍याज से ही लाखों रुपये कमा सकते हैं।

    पोस्ट ऑफिस आरडी स्कीम का आकर्षक ऑफर

    पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम में निवेशक को 6.7% वार्षिक ब्याज मिलता है जो तिमाही आधार पर जमा होता है। इस स्कीम की खास बात ये है कि यह पूरी तरह से रिस्क-फ्री है क्योंकि यह सरकार द्वारा संचालित योजना है। इसमें निवेश करने पर आपको अच्छा रिटर्न मिलता है जो आपको बैंक एफडी से भी ज्यादा ब्याज प्रदान करता है।

    कैसे होगी 2.54 लाख की कमाई: कैलकुलेशन

    पोस्ट ऑफिस आरडी स्कीम में आप हर महीने ₹5000 का निवेश करके बड़ी रकम जमा कर सकते हैं। अब जानें कैसे इस स्कीम में निवेश से आप ब्‍याज से 2.54 लाख रुपये कमा सकते हैं:

    5 साल का निवेश:

    हर महीने ₹5000 निवेश करने पर 5 साल में आपका कुल निवेश होगा ₹300000। इस निवेश पर 6.7% वार्षिक ब्याज मिलेगा जो तिमाही आधार पर जमा होता है। इस पर मिलने वाला ब्याज ₹56830 होगा।
    कुल मिलाकर 5 साल में आपका फंड बढ़कर ₹356830 हो जाएगा।

    10 साल का निवेश
    अब आप अपनी आरडी स्कीम को 5 और साल के लिए बढ़ा सकते हैं। इस तरह 10 साल में आपका कुल निवेश ₹600000 हो जाएगा।10 साल के बाद मिलने वाला ब्‍याज ₹254272 होगा।इस हिसाब से आपके पास 10 साल के अंत में कुल फंड ₹854272 होगा।

    पोस्ट ऑफिस आरडी स्कीम के फायदे

    रिस्क-फ्री निवेश: पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम पूरी तरह से सुरक्षित है क्योंकि यह सरकार द्वारा संचालित है। इसमें कोई भी जोखिम नहीं होता है। बेहद आकर्षक ब्याज दर: इस स्कीम में आपको 6.7% का ब्याज मिलता है जो बहुत से बैंकों की एफडी से ज्यादा है। लचीलापन आप इस योजना को अपनी सुविधानुसार 5 या 10 साल के लिए बढ़ा सकते हैं।

    सुविधाजनक निवेश: हर महीने ₹5000 का निवेश करके आप इस स्कीम में भाग ले सकते हैं जिससे आपके पास एक बड़ा कोष बन सकता है।

    पोस्ट ऑफिस आरडी स्कीम एक बेहतरीन और सुरक्षित निवेश विकल्प है जिसमें आप नियमित रूप से छोटी राशि का निवेश करके बड़ी रकम जमा कर सकते हैं। 10 साल के निवेश से ब्‍याज से ₹2.54 लाख की कमाई की जा सकती है और इस दौरान आपका कुल फंड ₹8.54 लाख तक पहुंच सकता है। यदि आप एक सुरक्षित और जोखिम-मुक्त निवेश की तलाश में हैं तो यह स्कीम आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है।