Category: Economy

  • नए इनकम टैक्स कानून में बड़ा बदलाव Form 128 से प्रॉपर्टी समेत कई ट्रांजैक्शन पर मिलेगा लोअर या NIL TDS का रास्ता आसान

    नए इनकम टैक्स कानून में बड़ा बदलाव Form 128 से प्रॉपर्टी समेत कई ट्रांजैक्शन पर मिलेगा लोअर या NIL TDS का रास्ता आसान


    नई दिल्ली। इनकम टैक्स एक्ट 2025 के लागू होते ही टैक्सपेयर्स के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। अब प्रॉपर्टी और अन्य ट्रांजैक्शन पर लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए नया Form 128 लागू किया गया है जो पुराने Form 13 की जगह लेगा। सरकार का मकसद नियमों को आसान बनाना और प्रोसेस को ज्यादा पारदर्शी तथा स्ट्रीमलाइन करना है ताकि जिन लोगों पर वास्तविक टैक्स देनदारी कम है उन्हें अनावश्यक रूप से ज्यादा TDS कटने की परेशानी न झेलनी पड़े।

    यदि कोई व्यक्ति प्रॉपर्टी बेच रहा है और उसे लगता है कि उसकी कुल टैक्स देनदारी कम है या शून्य है तो वह निर्धारित अवधि के लिए लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई कर सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई संपत्ति अप्रैल से अक्टूबर के बीच बिकनी है तो उसी अवधि के लिए सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है। इससे टैक्सपेयर्स को कैश फ्लो मैनेज करने में आसानी होगी और बाद में रिफंड के झंझट से राहत मिलेगी।

    नए Form 128 में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले Form 13 में पिछले चार साल के ITR की कॉपी अपलोड करनी पड़ती थी जिससे प्रोसेस लंबा और दस्तावेज आधारित हो जाता था। अब केवल ITR से जुड़ी जरूरी जानकारियां जैसे अकनॉलेजमेंट नंबर फाइलिंग डेट टैक्सेबल इनकम और टैक्स लाइबिलिटी देना पर्याप्त होगा। इसी तरह पहले पेयर्स का TAN PAN या आधार नंबर देना होता था लेकिन अब केवल TAN या PAN देना ही काफी है। इससे दस्तावेजों का बोझ कम हुआ है और आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हुई है।

    बजट 2026 में सरकार ने NIL TDS सर्टिफिकेट के लिए ऑटोमैटेड सिस्टम लाने की घोषणा की थी। हालांकि फिलहाल Form 128 के तहत प्रक्रिया मैन्युअल ही है। फॉर्म में चार कैटेगरी दी गई हैं जिनमें NPO स्पेसिफाइड एंटिटी बिजनेस या प्रोफेशन वाले व्यक्ति और अन्य शामिल हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में अन्य कैटेगरी में आने वाले छोटे टैक्सपेयर्स को ऑटोमैटिक सर्टिफिकेट जारी करने की सुविधा मिल सकती है जिससे उन्हें Assessing Officer की मैन्युअल मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

    अभी की प्रक्रिया के अनुसार टैक्सपेयर को ई फाइलिंग पोर्टल पर Form 128 भरना होगा। इसके बाद Assessing Officer संबंधित दस्तावेज और इनकम रिकॉर्ड की जांच करेगा। संतुष्ट होने पर वह लोअर या NIL TDS सर्टिफिकेट जारी करेगा। यह सर्टिफिकेट संबंधित पेयर को दिया जाएगा और उसी के आधार पर तय दर से TDS काटा जाएगा।

    पहले सेक्शन 197 के तहत Form 13 भरकर यह सुविधा ली जाती थी लेकिन अब नए कानून में यही काम Form 128 के जरिए होगा। कुल मिलाकर यह बदलाव टैक्स सिस्टम को डिजिटल और सरल बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है जिससे प्रॉपर्टी डील समेत अन्य बड़े ट्रांजैक्शन में टैक्सपेयर्स को राहत मिल सके।

  • भारत-चिली FTA: क्रिटिकल मिनरल में भारत की रणनीतिक मजबूती, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बड़ा लाभ

    भारत-चिली FTA: क्रिटिकल मिनरल में भारत की रणनीतिक मजबूती, इलेक्ट्रिक व्हीकल और क्लीन एनर्जी सेक्टर को बड़ा लाभ


    नई दिल्ली। अमेरिका और यूरोपियन यूनियन के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच भारत चुपचाप एक और अहम मोर्चे पर काम कर रहा है। भारत और दक्षिण अमेरिकी देश चिली के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA को अंतिम रूप देने की तैयारी चल रही है। चिली दुनिया के प्रमुख लिथियम और अन्य क्रिटिकल मिनरल रिजर्व वाला देश है। यह समझौता सिर्फ व्यापार के लिहाज से ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    लिथियम इलेक्ट्रिक व्हीकल की बैटरियों और ऊर्जा स्टोरेज सिस्टम के लिए सबसे जरूरी संसाधन है और चिली दुनिया में इसका सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इसके अलावा चिली में कॉपर, कोबाल्ट, रेनियम और मोलिब्डेनम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल भी मौजूद हैं। ये मिनरल इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और सोलर सेक्टर के लिए जरूरी हैं। वर्तमान में क्रिटिकल मिनरल केवल इंडस्ट्री के कच्चे माल नहीं हैं, बल्कि उनका ग्लोबल पावर बैलेंस पर भी बड़ा असर है। कई देश सप्लाई चेन को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए भरोसेमंद सोर्स से मिनरल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है।

    भारत और चिली के बीच 2006 से प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट लागू है। लेकिन अब दोनों देश इसे आगे बढ़ाकर एक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट करना चाहते हैं। प्रस्तावित समझौते में केवल सामान का व्यापार ही नहीं बल्कि डिजिटल सर्विस, निवेश और एमएसएमई सहयोग भी शामिल होगा। खास बात यह है कि इसमें क्रिटिकल मिनरल सेक्टर को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

    क्रिटिकल मिनरल की स्थिर और किफायती सप्लाई से भारत के मेक इन इंडिया और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन प्रोजेक्ट्स को बड़ा फायदा मिलेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और सोलर पैनल प्रोडक्शन के लिए इन मिनरल की जरूरत तेजी से बढ़ रही है। अगर चिली से भरोसेमंद सप्लाई सुनिश्चित होती है तो डोमेस्टिक प्रोडक्शन में विस्तार, लागत कम करना और रणनीतिक मजबूती हासिल करना संभव होगा।

    इस समझौते से भारत को न केवल आर्थिक बल्कि सामरिक लाभ भी मिलेगा। क्रिटिकल मिनरल की उपलब्धता से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत का प्रभाव बढ़ेगा। इसके अलावा, यह कदम भारत के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह मजबूत करने का भी जरिया बनेगा।

    अमेरिका और यूरोप के साथ ट्रेड डील की चर्चाओं के बीच चिली के साथ भारत का यह रणनीतिक कदम शिक्षा देता है कि क्रिटिकल मिनरल पर फोकस केवल आर्थिक लाभ के लिए नहीं बल्कि देश की रणनीतिक सुरक्षा और इंडस्ट्री को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी जरूरी है।

  • कम कर्ज और तगड़ा मुनाफा! Afcom Holdings के शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी, निवेशकों को दिया 349% का मल्टीबैगर रिटर्न

    कम कर्ज और तगड़ा मुनाफा! Afcom Holdings के शेयरों में ताबड़तोड़ खरीदारी, निवेशकों को दिया 349% का मल्टीबैगर रिटर्न


    नई दिल्ली। एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Afcom Holdings Ltd ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही Q3FY26के बेहद शानदार आंकड़े पेश किए हैं। इन नतीजों का असर कंपनी के शेयरों पर साफ देखने को मिला, जहाँ एक ही दिन में शेयर करीब 12.3% की बढ़त के साथ ₹960.05 के स्तर तक जा पहुंचे।Q3FY26 के प्रमुख आंकड़े: रेवेन्यू और मुनाफे में छलांगकंपनी ने वित्तीय मोर्चे पर हर पैमाने पर शानदार प्रदर्शन किया है:
    रेवेन्यू Revenue: सालाना आधार पर रेवेन्यू 208% बढ़कर ₹49.6 करोड़ से सीधे ₹153 करोड़ हो गया।नेट प्रॉफिट Net Profit: कंपनी का शुद्ध मुनाफा 326% की जबरदस्त छलांग लगाते हुए ₹9.04 करोड़ से बढ़कर ₹38.5 करोड़ पर पहुंच गया।प्रति शेयर आय EPS: यह ₹11.42 से बढ़कर ₹15.48 हो गई है, जो निवेशकों के लिए अच्छे संकेत हैं।विस्तार की तैयारी: MRO सेक्टर में कदमAfcom Holdings केवल मौजूदा बिजनेस तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी के बोर्ड ने भारत में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल MROबिजनेस के लिए एक नई ग्रीनफील्ड सब्सिडियरी बनाने को मंजूरी दे दी है।
    यह कदम कंपनी को एविएशन सेक्टर की वैल्यू चेन में और मजबूती प्रदान करेगा।फाइनेंशियल मैट्रिक्स: क्यों आकर्षक है यह स्टॉक?कंपनी के बुनियादी ढांचे Fundamentalsकाफी मजबूत नजर आते हैं, जो लॉन्ग टर्म निवेश के लिहाज से इसे आकर्षक बनाते हैं:वित्तीय मानक Metricवैल्यू Valueविश्लेषणROCE36%पूंजी का बेहतरीन इस्तेमालROE28.9%निवेशकों को शानदार रिटर्नDebt-to-Equity0.12लगभग कर्ज मुक्त कंपनीPEG Ratio0.18वैल्यूएशन के लिहाज से सस्ताशेयरों का प्रदर्शन और कामकाजAfcom Holdings चेन्नई से अपने अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस संचालित करती है। यह ASEAN देशों सहित दुनिया के कई हिस्सों में फार्मा, हाई-वैल्यू कार्गो और फ्रेश प्रोड्यूस जैसे स्पेशलाइज्ड लॉजिस्टिक्स समाधान देती है।रिटर्न: पिछले 3 सालों में इस शेयर ने 349% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। पिछले एक हफ्ते में ही स्टॉक 29% तक चढ़ चुका है।

  • एजुकेशन सेक्टर का चमकता सितारा: SEIL ने 3 साल में पैसा किया लगभग 3 गुना, संस्थागत निवेश में बढ़ोत्तरी से उत्साह

    एजुकेशन सेक्टर का चमकता सितारा: SEIL ने 3 साल में पैसा किया लगभग 3 गुना, संस्थागत निवेश में बढ़ोत्तरी से उत्साह


    नई दिल्ली। शांति एजुकेशनल इनिशिएटिव्स लिमिटेड यानी SEIL तेजी से बढ़ती शिक्षा प्रबंधन कंपनी के रूप में आज चर्चा में है। 2009 में चिरिपाल ग्रुप की ओर से स्थापित यह कंपनी प्ले स्कूल से लेकर हायर एजुकेशन संस्थानों तक स्कूल मैनेजमेंट और लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदान करती है। टेक्नोलॉजी आधारित इंग्लिश मीडियम करिकुलम, टीचर ट्रेनिंग और बेहतर लर्निंग आउटकम के जरिए SEIL देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर फोकस कर रही है।

    हाल ही में कंपनी ने Q3FY26 के तिमाही नतीजे जारी किए हैं। इस दौरान SEIL ने 5.83 करोड़ रुपये की नेट सेल्स दर्ज की, हालांकि 0.61 करोड़ रुपये का घाटा रहा। वहीं, 9 महीनों में कुल 32.41 करोड़ रुपये की बिक्री और 4.91 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया गया। पिछले वर्ष FY25 में कंपनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 220 प्रतिशत की उछाल के साथ 58.99 करोड़ रुपये की नेट सेल्स और मुनाफे में 93 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 7.06 करोड़ रुपये हासिल किए थे।

    भले ही तिमाही में घाटा दिखा हो, लेकिन विदेशी और घरेलू निवेशकों का भरोसा SEIL पर कायम है। दिसंबर 2025 में FII और DII ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। सितंबर 2025 में FII की हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत थी, जो दिसंबर में बढ़कर 22.5 प्रतिशत हो गई। वहीं DII ने भी अपनी हिस्सेदारी को 0.2 प्रतिशत बढ़ाया। निवेशकों का यह भरोसा कंपनी की दीर्घकालीन संभावनाओं को दर्शाता है।

    SEIL का मार्केट कैप 2,842 करोड़ रुपये है और वर्तमान शेयर कीमत 172.70 रुपये है। हाल के प्रदर्शन को देखें तो पिछले एक हफ्ते में इसका शेयर 17 प्रतिशत उछला है और सालभर में 53 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। तीन साल में 185 प्रतिशत और पांच साल में यह कंपनी निवेशकों को 1187 प्रतिशत का मल्टीबैगर रिटर्न दे चुकी है। इसने शिक्षा क्षेत्र में अपनी मजबूती और निवेशकों का भरोसा साबित किया है।

    कंपनी की ताकत इसकी व्यापक शिक्षा सेवा और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान में निहित है। प्ले स्कूल से लेकर बिजनेस मैनेजमेंट स्कूल तक स्कूल मैनेजमेंट सॉल्यूशंस देने वाली SEIL ने शिक्षा के हर स्तर पर गुणवत्ता सुधार को प्राथमिकता दी है। शिक्षकों के प्रशिक्षण और बेहतर लर्निंग आउटपुट पर ध्यान देने से यह कंपनी न केवल छात्रों के लिए बल्कि निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनी हुई है।

    कुल मिलाकर, SEIL शिक्षा क्षेत्र का एक उभरता सितारा बन चुकी है। तिमाही में घाटा होने के बावजूद निवेशकों का भरोसा, लगातार बढ़ती एफआईआई और डीआईआई हिस्सेदारी और पिछले वर्षों में निवेशकों को दिए गए शानदार रिटर्न ने इसे सेक्टर में छुपे हुए मल्टीबैगर के रूप में साबित कर दिया है।

  • अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी

    अडानी ग्रुप की कंपनी से US की एजेंसी ने मांगी ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात को लेकर जानकारी


    वाशिंगटन।
    गौतम अडानी समूह (Gautam Adani Group) की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) (Adani Enterprises Limited (AEL) ने मंगलवार को कहा कि एक अमेरिकी एजेंसी (American agency) ने प्रतिबंधित इकाइयों के साथ लेनदेन की गैर-आपराधिक जांच के तहत ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के कथित आयात को लेकर कंपनी से जानकारी मांगी है।


    क्या कहा अडानी एंटरप्राइजेज ने?

    अडानी एंटरप्राइजेज ने शेयर बाजार को बताया कि उसे चार फरवरी को अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) से सूचना का अनुरोध मिला है। यह अनुरोध जून, 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के संबंध में हुई स्वैच्छिक चर्चा के बाद आया है। उस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि अडानी से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए शिपिंग मार्गों का उपयोग करके भारत में ईरानी तरल पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का आयात किया था। अडानी एंटरप्राइजेज ने कहा-कंपनी स्वेच्छा से विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय के साथ सहयोग कर रही है और मांगी गई जानकारी देगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्राधिकरण से प्राप्त संचार में ‘किसी भी प्रकार के उल्लंघन या गैर-अनुपालन का कोई निष्कर्ष शामिल नहीं है।


    पिछले साल आई थी रिपोर्ट

    पिछले साल जून में आई रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिकी अभियोजक इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या अडानी समूह की कंपनियों ने गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात किया था। अडानी समूह ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि नीतिगत रूप से अडानी समूह अपने किसी भी बंदरगाह पर ईरान के किसी भी माल का प्रबंधन नहीं करता है। इसमें ईरान से आने वाली कोई भी खेप या ईरानी ध्वज के तहत चलने वाले जहाज शामिल हैं। समूह ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी जहाज का प्रबंधन या सुविधा प्रदान नहीं करता है, जिनके मालिक ईरानी हों।

  • KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम… RBI कर रहा लोगों को जागरूक

    KYC-सुरक्षित बैंकिंग की ओर पहला कदम… RBI कर रहा लोगों को जागरूक


    नई दिल्ली।
    भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) मंगलवार को बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट्स (Business Correspondents) और स्वयं सहायता समूहों के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। केवाईसी- सुरक्षित बैंकिंग (KYC- Secure Banking) की ओर पहला कदम विषय पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को जागरुक किया गया। लोगों को समझाया गया कि सुरक्षित बैंकिंग के लिए केवाईसी कितना जरूरी है।


    13 फरवरी तक आयोजन

    आरबीआई द्वारा हर वर्ष जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इस बार वित्तीय साक्षरता सप्ताह 2026 का आयोजन 13 फरवरी तक किया जा रहा है, जिसमें केवाईसी को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को केवाईसी से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां दी जाएंगी। इसमें बताया जाएगा कि केवाईसी एक जरूरी नियम है, लेकिन इसे पूरा करना आसान है। इसके लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, लोगों को सेंट्रल केवाईसी (सीकेवाईसी) की सुविधा के बारे में भी जानकारी दी जाएगी, जिससे केवाईसी प्रक्रिया और आसान हो जाती है।


    बैंक खाते का गलत इस्तेमाल न करें

    अभियान के दौरान लोगों को फर्जी कॉल, मैसेज और लिंक से सावधान रहने के लिए भी जागरूक किया जाएगा, क्योंकि इन्हीं के चलते कई बार साइबर ठगी होती है और लोगों को आर्थिक नुकसान भी होता है। कई बार लालच में आकर लोग अपने बैंक खाते का गलत इस्तेमाल करने देते हैं, जिससे उन्हें गंभीर कानूनी और आर्थिक परेशानी हो सकती है। सप्ताह के दौरान आरबीआई, बैंकों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से देशभर में जागरूकता कार्यक्रम और संपर्क अभियान चलाए जाएंगे। इन गतिविधियों को पूरे साल जारी रखने की योजना है, जिससे कि लोगों पर इसका स्थायी असर पड़े।


    भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है KYC

    आरबीआई की तरफ से कहा गया है कि केवाईसी केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकिंग व्यवस्था की नींव है। सभी संबंधित संस्थाओं से अपील की गई है कि वह इस संदेश को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं। मंगलवार को कार्यशाला का उद्घाटन आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक रोहित पी दास, आरबीआई के मुख्य महाप्रबंधक चंदन कुमार ने किया। इस मौके पर नाबार्ड और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

  • रेल यात्री अलर्ट! 1 मार्च से जनरल टिकट वाला UTS ऐप होगा बंद, इस नए ऐप से करें बुकिंग

    रेल यात्री अलर्ट! 1 मार्च से जनरल टिकट वाला UTS ऐप होगा बंद, इस नए ऐप से करें बुकिंग


    नई दिल्ली ।अगर आप रोजाना लोकल ट्रेन या अनरिजर्व्ड टिकट के लिए UTS on Mobile ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों को जानकारी दी है कि UTS on Mobile ऐप को 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद किया जा रहा है। यानी इस तारीख के बाद UTS ऐप से न तो टिकट कटेगा और न ही कोई दूसरी सुविधा मिलेगी। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते RailOne ऐप पर शिफ्ट हो जाएं, ताकि उनकी रोजमर्रा की यात्रा में कोई परेशानी न आए। RailOne एक नया ऐप है, जिसमें टिकट बुकिंग से लेकर यात्रा से जुड़ी कई सुविधाएं एक ही जगह मिलेंगी।

    आज के समय में लाखों यात्री रोज़ाना मोबाइल से टिकट बुक करते हैं। ऐसे में UTS ऐप का बंद होना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। रेलवे का कहना है कि RailOne ऐप यात्रियों को पहले से ज्यादा आसान, तेज और भरोसेमंद अनुभव देगा। अगर आपने अब तक RailOne ऐप डाउनलोड नहीं किया है, तो आगे चलकर आपको टिकट लेने में दिक्कत हो सकती है।

    क्यों बंद हो रहा UTS on Mobile ऐप
    भारतीय रेलवे लगातार अपनी डिजिटल सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है। UTS on Mobile ऐप पिछले कई सालों से अनरिजर्व्ड टिकट के लिए इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन अब रेलवे ने फैसला लिया है कि अलग-अलग ऐप की जगह एक ही ऑल-इन-वन ऐप दिया जाए।

    RailOne ऐप क्या है और इसमें क्या मिलेगा
    RailOne ऐप भारतीय रेलवे की नई डिजिटल पहल है। इस ऐप के जरिए यात्री एक ही जगह पर कई काम कर सकते हैं। RailOne ऐप से आप अनरिजर्व्ड टिकट ले सकते हैं, रिजर्व्ड टिकट से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं, यात्रा प्लान कर सकते हैं, ट्रेन से जुड़ी जरूरी सेवाएं पा सकते हैं। यानी अब टिकट बुकिंग के लिए अलग-अलग ऐप रखने की जरूरत नहीं होगी।

    कब से बंद होगा UTS ऐप
    रेलवे द्वारा जारी सूचना के मुताबिक UTS on Mobile ऐप 1 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद ऐप काम नहीं करेगा। टिकट बुकिंग के लिए केवल RailOne ऐप का ही इस्तेमाल करना होगा। इसलिए यात्रियों को सलाह दी गई है कि आखिरी समय का इंतजार न करें।

    ऐसे डाउनलोड करें RailOne ऐप
    RailOne ऐप को डाउनलोड करना बेहद आसान है। Android यूजर्स Google Play Store से ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। iPhone यूजर्स Apple App Store से RailOne ऐप इंस्टॉल कर सकते हैं। डाउनलोड के बाद अपने मोबाइल नंबर से लॉग-इन करें और जरूरी जानकारी भरकर ऐप का इस्तेमाल शुरू करें।

  • BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..

    BSE के Q3 नतीजों ने मचाया धमाल शेयर ने बनाया नया रिकॉर्ड..


    नई दिल्ली । बीएसई के शेयरों ने तीसरी तिमाही के नतीजों के बाद बाजार में जबरदस्त हलचल मचा दी है। एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 में बदले जाने के बावजूद वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही बीएसई के लिए बेहद मजबूत साबित हुई है। शानदार ट्रेडिंग आंकड़ों और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन के चलते कई ब्रोकरेज हाउस ने अपने टारगेट प्राइस बढ़ा दिए हैं। इसी का असर रहा कि आज शुरुआती कारोबार में बीएसई के शेयरों में छह फीसदी से ज्यादा की तेजी देखने को मिली।

    कारोबार के दौरान बीएसई का शेयर 6.81 फीसदी की उछाल के साथ 3188.40 रुपये के रिकॉर्ड हाई स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि कुछ निवेशकों ने मुनाफावसूली की जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन इसके बावजूद शेयर मजबूत स्थिति में बना हुआ है। फिलहाल बीएसई का शेयर 6.25 फीसदी की तेजी के साथ 3171.60 रुपये पर कारोबार कर रहा है।

    एनालिस्ट्स की राय भी बीएसई के पक्ष में दिखाई दे रही है। इसे कवर करने वाले 16 एनालिस्ट्स में से 12 ने शेयर पर खरीद की सलाह दी है जबकि चार ने होल्ड रेटिंग दी है। खास बात यह है कि किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सिफारिश नहीं की है। यूबीएस जेफरीज और नुवामा जैसी बड़ी ब्रोकरेज फर्मों ने बीएसई के टारगेट प्राइस में इजाफा किया है।

    दिसंबर 2025 की तिमाही बीएसई के लिए काफी दमदार रही है। तिमाही आधार पर कंपनी का टर्नओवर 30 फीसदी बढ़ा है। औसत दैनिक नोशनल टर्नओवर 28 फीसदी की वृद्धि के साथ 210 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि औसत दैनिक प्रीमियम टर्नओवर 29.7 फीसदी बढ़कर 19459 करोड़ रुपये हो गया। एक्सचेंज के ट्रांजैक्शन चार्ज से होने वाली आय के चलते रेवेन्यू परफॉर्मेंस बाजार की उम्मीदों से बेहतर रही।

    बीएसई की ऑपरेटिंग इनकम तिमाही आधार पर 16 फीसदी बढ़कर 1244 करोड़ रुपये हो गई है जबकि ऑपरेटिंग प्रॉफिट 13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 778 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन बढ़ने से मार्जिन पर थोड़ा दबाव जरूर देखने को मिला है। रेगुलेटरी कंट्रीब्यूशन तिमाही आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 187 करोड़ रुपये हो गया जिससे मार्जिन 64.7 फीसदी से घटकर 62.5 फीसदी पर आ गया।

    ब्रोकरेज सेंटिमेंट की बात करें तो यूबीएस ने बीएसई पर बाय रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3650 रुपये कर दिया है। यूबीएस का कहना है कि ज्यादा लागत के चलते कंपनी अपने प्रॉफिट टारगेट से थोड़ी चूकी जरूर है लेकिन शेयर प्राइस में मजबूती रेवेन्यू ग्रोथ और प्रीमियम एवरेज डेली टर्नओवर की मजबूती इसे सपोर्ट कर रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसटीटी रेट बढ़ने का ऑप्शन वॉल्यूम पर असर पहले की आशंका से कम हो सकता है।

    जेफरीज ने बीएसई को होल्ड रेटिंग दी है लेकिन टारगेट प्राइस बढ़ाकर 3050 रुपये कर दिया है। ब्रोकरेज का मानना है कि 610 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट उम्मीद से बेहतर रहा है। हालांकि नए प्रोडक्ट्स को लेकर अनिश्चितता FY2029 के बाद ग्रोथ के लिए चुनौती बन सकती है।

    नुवामा ने बीएसई पर बाय रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस 3760 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज के मुताबिक एक्सपायरी डेट बदलने के बावजूद बीएसई ने इंडेक्स ऑप्शंस में मजबूत मार्केट शेयर हासिल किया है जिससे रेवेन्यू और ऑपरेटिंग प्रॉफिट में तेज उछाल देखने को मिला है। कुल मिलाकर मजबूत नतीजों और सकारात्मक ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के चलते बीएसई का शेयर आने वाले समय में निवेशकों के रडार पर बना रह सकता है।

  • PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ

    PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ


    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन EPFO अपने करोड़ों सदस्यों के लिए एक नया मोबाइल एप लॉन्च करने की तैयारी में है, जिससे PF की निकासी अब और तेज, आसान और डिजिटल होगी। इस एप में सदस्य सीधे अपने बैंक खाते से लिंक होकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस UPI के माध्यम से पैसा निकाल सकेंगे। फिलहाल यह प्लेटफॉर्म परीक्षण चरण में है और तकनीकी खामियों को दूर किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, एप का संभावित लॉन्च मार्च–अप्रैल 2026 में किया जा सकता है।

    यह नया एप मौजूदा UMANG प्लेटफॉर्म से अलग होगा और सीधे सदस्य के बैंक खाते से जुड़ा रहेगा। एप के जरिए उपयोगकर्ता अपने पात्र EPF बैलेंस की जानकारी देख पाएंगे और UPI पिन का इस्तेमाल करके राशि सीधे अपने आधार-सीडेड बैंक खाते में ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके साथ ही पासबुक बैलेंस की जांच और क्लेम स्टेटस देखने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

    EPFO के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में लगभग 100 डमी खातों के माध्यम से परीक्षण चल रहा है। परीक्षण के दौरान लेनदेन की गति, सुरक्षा और डेटा समन्वय की जांच की जा रही है। प्रारंभिक चरण में PF का एक हिस्सा सुरक्षित रहेगा, जबकि शेष पात्र राशि UPI के जरिए निकाली जा सकेगी।

    यह पहल EPFO 3.0 डिजिटल अपग्रेड कार्यक्रम का हिस्सा है। इसका मकसद क्लेम प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के लिए सहज बनाना है। वर्तमान में सदस्य UAN पोर्टल या UMANG एप के माध्यम से क्लेम फाइल करते हैं, जिसमें सत्यापन और स्वीकृति में समय लगता है। महामारी के दौरान शुरू की गई ऑटो-सेटलमेंट प्रणाली ने प्रक्रिया को तेज किया था, लेकिन प्रत्यक्ष त्वरित निकासी की सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं थी।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि UPI इंटीग्रेशन से PF निकासी की प्रक्रिया बैंकिंग सेवाओं के समान सुविधा प्रदान करेगी। सदस्य अब बीमारी, शिक्षा, विवाह या आवास जैसे जरूरी खर्चों के लिए कम समय में धन प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और सेवा वितरण की दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

    EPFO के पास लगभग 8 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं और हर वर्ष करोड़ों क्लेम सेटल किए जाते हैं। संगठन के मुताबिक, नई मोबाइल एप सुविधा से सेवा की गुणवत्ता और उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा। हालांकि, EPFO के पास बैंकिंग लाइसेंस नहीं है, इसलिए निकासी प्रक्रिया सीधे बैंक खातों के माध्यम से ही पूरी की जाएगी।इस एप के आने से EPFO सदस्यों के लिए PF निकासी का समय घटेगा, प्रक्रिया पारदर्शी होगी और डिजिटल भुगतान प्रणाली को अपनाने में तेजी आएगी। आने वाले महीनों में यह एप PF के डिजिटल अनुभव को पूरी तरह बदलने की संभावना रखता है।

  • भारत का वैश्विक बढ़त का सफर 6.4% GDP वृद्धि के साथ जारी नीति और बैंकिंग स्थिरता दे रही सहारा

    भारत का वैश्विक बढ़त का सफर 6.4% GDP वृद्धि के साथ जारी नीति और बैंकिंग स्थिरता दे रही सहारा


    नई दिल्ली।भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अगले वित्त वर्ष 2026-27 की तस्वीर मूडीज की ताज़ा रिपोर्ट में सामने आई है वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने अनुमान जताया है कि भारत का GDP 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकता है और यह वृद्धि दर G20 देशों में सबसे अधिक रहने की संभावना है रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू खपत नीति आधारित प्रोत्साहन और बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता भारत की आर्थिक वृद्धि को सहारा देंगी

    मूडीज का यह अनुमान सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के आकलनों से थोड़ा कम है आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.8 से 7.4 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान रखा गया था वहीं RBI ने हाल ही में अपनी नीतिगत समीक्षा में करीब सात प्रतिशत वृद्धि की संभावना व्यक्त की थी इसके बावजूद वैश्विक परिदृश्य में भारत की स्थिति मजबूत और अग्रणी मानी जा रही है

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कर ढांचे में किए गए हालिया बदलाव और उपभोक्ताओं की आय में संभावित वृद्धि से बाजार में मांग बढ़ेगी GST नियमों में संशोधन और आयकर में राहत से लोगों की खर्च करने की क्षमता में वृद्धि होने की उम्मीद है इससे घरेलू खपत को मजबूती मिलेगी और आर्थिक गतिविधियां गतिशील बनी रहेंगी

    बैंकिंग क्षेत्र के बारे में मूडीज ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 में बैंकों की ऋण वृद्धि दर 11 से 13 प्रतिशत के बीच रहेगी साथ ही गैर निष्पादित परिसंपत्तियों का स्तर 2 से 2.5 प्रतिशत के दायरे में नियंत्रित रह सकता है हालांकि छोटे उद्योग और MSME क्षेत्र पर कुछ दबाव की संभावना जताई गई है लेकिन बैंकों की पूंजी क्षमता इस जोखिम को संभालने में सक्षम मानी गई है जिससे वित्तीय प्रणाली स्थिर बनी रहेगी

    रिपोर्ट में भारत अमेरिका व्यापार समझौते को भी महत्वपूर्ण कारक बताया गया है फरवरी 2026 में हुए इस समझौते से निर्यात क्षेत्र में नई गति आने की संभावना है इससे छोटे उद्यमों को राहत मिलेगी और निवेश वातावरण बेहतर बनेगा जिससे आर्थिक वृद्धि में स्थिरता आएगी

    मूडीज ने यह भी संकेत दिया है कि अगर महंगाई नियंत्रित बनी रहती है तो RBI भविष्य में भी ब्याज दरों में नरमी का रुख अपना सकता है वर्ष 2025 में केंद्रीय बैंक द्वारा की गई दर कटौती से वित्तीय परिस्थितियां पहले ही सहायक बनी हुई हैं कम ब्याज दरें निवेश और उपभोग दोनों को बढ़ावा दे सकती हैं जिससे आर्थिक वृद्धि की गति और मजबूत होगी

    कुल मिलाकर मूडीज की रिपोर्ट यह दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति में है घरेलू खपत स्थिर बैंकिंग प्रणाली और नीतिगत प्रोत्साहन अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की दिशा में सहारा बनेंगे भारत G20 में सबसे तेज़ विकास दर वाला देश बनकर उभर सकता है जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा और अर्थव्यवस्था की विश्वसनीयता बढ़ेगी