Category: Economy

  • देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त

    देश में ईंधन का मौजूदा भंडार 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त


    नई दिल्ली।
    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (Petroleum and Natural Gas Regulatory Board- PNGRB) के सचिव अंजन कुमार मिश्रा (Anjan Kumar Mishra) ने कहा है कि भारत का तरल ईंधन का मौजूदा भंडार देश की 20 से 40 दिनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। हालांकि, इसे इस तरह से नहीं बढ़ाया जा सकता कि यह कई महीनों तक चल सके। नई दिल्ली में आयोजित ‘पीएचडीसीसीआई हाइड्रोकार्बन समिट 2026’ के दौरान उन्होंने मौजूदा ऊर्जा स्थिति और वैश्विक संकट पर विस्तार से चर्चा की।


    ईंधन भंडार और पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव

    मिश्रा ने कहा कि हमारे पास पहले से ही तरल ईंधन का रिजर्व मौजूद है, लेकिन ऐसा भंडार नहीं बनाया जा सकता जो छह महीने तक चले। यह 20 से 40 दिनों की मांग को पूरा कर सकता है, लेकिन उससे लंबी अवधि के लिए नहीं। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि इसका असर भारत पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह झूठ नहीं बोलूंगा कि इसका असर भारत पर हो रहा है, लेकिन निश्चित रूप से सरकार ने पूरी योजना बना ली है और हम स्थिति पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।’


    देश में कोई संकट नहीं, पड़ोसियों की भी हो रही मदद

    वैश्विक तनाव के कारण पैदा हुई चिंताओं को खारिज करते हुए पीएनजीआरबी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि देश में जीवाश्म ईंधन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में तरल ईंधन का कोई संकट नहीं है और पैनिक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। मिश्रा ने बताया कि भारत इस संकट की घड़ी में केवल अपनी जरूरतें पूरी नहीं कर रहा, बल्कि बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों की भी मदद कर रहा है।


    आयात निर्भरता और तेल खरीद के नए विकल्प

    आयात पर निर्भरता कम करने के सवाल पर मिश्रा ने कहा कि घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाना एक क्रमिक प्रक्रिया है। सरकार के हालिया प्रयासों और नई खोजों के बावजूद इसे रातों-रात हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कच्चे तेल की खरीद का दायरा काफी बढ़ाया है। अब आपूर्ति केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आ रहा है। इसके अलावा मोजाम्बिक और अंगोला में भी नए विकल्प तलाशे जा रहे हैं।


    कीमतों में उछाल अस्थायी होगा

    अगर वैश्विक संघर्ष लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होती है, तो इस चिंता पर मिश्रा ने कहा कि इसका असर केवल कुछ समय के लिए होगा। उन्होंने भरोसा जताते हुए कहा कि अगर कीमतें बढ़ती हैं, तो हम स्थिति को संभालने में सक्षम होंगे… जो भी मूल्य वृद्धि होगी, वह बहुत ही अस्थायी होगी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कीमतें अंततः संकट से पहले के स्तर पर लौट आएंगी।

  • मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े

    मध्य पूर्व तनाव का असर: अमेरिका और UAE में पेट्रोल-डीजल के दाम 72% तक बढ़े


    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते राजनीतिक तनाव का असर पूरी दुनिया में महसूस किया जा रहा है। इस संघर्ष ने खासतौर पर तेल बाजार को हिला दिया है, जिससे अमेरिका और खाड़ी देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 30 से 72 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    अमेरिका में गैसोलीन और डीजल महंगे

    अमेरिका में गैसोलीन (पेट्रोल) की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन (लगभग 380 रुपए) के पार चली गई हैं। यह बीते तीन वर्षों में पहला मौका है जब अमेरिकी उपभोक्ताओं को इतने महंगे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, देश में औसत गैसोलीन की कीमत 4.018 डॉलर प्रति गैलन हो गई है।

    डीजल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। डीजल अब 5 डॉलर प्रति गैलन (करीब 475 रुपए) के पार बिक रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर संभावित हमलों और मध्य पूर्व में तनाव के कारण गैसोलीन और डीजल की कीमतों में क्रमशः 30 और 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

    खाड़ी देश यूएई में रिकार्ड बढ़ोतरी

    यूएई की फ्यूल प्राइस कमेटी ने 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई कीमतों का ऐलान किया है। नए दामों के अनुसार:

    सुपर 98 पेट्रोल की कीमत 30% बढ़कर 3.39 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 87 रुपए) हो गई है, जो पहले 2.59 दिरहम थी।
    स्पेशल 95 पेट्रोल का दाम 32% बढ़कर 3.28 दिरहम प्रति लीटर (लगभग 84 रुपए) हो गया है, जो पहले 2.48 दिरहम था।
    डीजल की कीमत में सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई, जो 72% बढ़कर 4.69 दिरहम प्रति लीटर (करीब 120 रुपए) पहुंच गई है, जबकि पहले यह 2.72 दिरहम थी।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यूएई में डीजल की यह सबसे तेज और रिकॉर्ड बढ़ोतरी है, जो घरेलू और वाणिज्यिक वाहनों के लिए महंगी होगी।

    कच्चे तेल की कीमत में उछाल

    मध्य पूर्व में तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत में जबरदस्त तेजी देखी गई है। पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड के दाम 48 प्रतिशत बढ़कर 107.28 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गए हैं। इस उछाल का सीधा असर ग्लोबल फ्यूल प्राइस पर पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर दबाव बढ़ा है।

    वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

    विश्लेषकों का कहना है कि इस बढ़ोतरी का असर केवल अमेरिका और यूएई तक सीमित नहीं है। यूरोप, एशिया और भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। उभरते देशों में तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है।

  • भारत में 2025 में डेटा का क्रेज़, प्रति यूजर औसत मासिक खपत 31GB से अधिक

    भारत में 2025 में डेटा का क्रेज़, प्रति यूजर औसत मासिक खपत 31GB से अधिक


    नई दिल्ली भारत में मोबाइल डेटा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। नोकिया की नई मोबाइल ब्रॉडबैंड इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश में प्रति यूजर औसत मासिक डेटा उपभोग 31 जीबी से अधिक हो गया है। बीते पांच वर्षों में इसमें 18 प्रतिशत का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में मुख्य कारण के रूप में 5जी की बढ़ती लोकप्रियता, डेटा-हेवी एप्लीकेशन और डिजिटल मनोरंजन को बताया गया है।

    डेटा ट्रैफिक में 5जी का बढ़ता योगदान

    2025 में भारत में कुल मोबाइल डेटा ट्रैफिक 27 एक्सबाइट प्रति माह से अधिक हो गया, जिसमें अकेले 5जी का योगदान 47 प्रतिशत था। 5जी ट्रैफिक सालाना आधार पर 70 प्रतिशत बढ़कर 12.9 एक्सबाइट प्रति माह तक पहुंच गया। मेट्रो शहर 5जी अपनाने में सबसे आगे हैं, जहां कुल डेटा ट्रैफिक में 5जी की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

    छोटे शहरों में 5जी का प्रसार

    रिपोर्ट में बताया गया है कि 5जी अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। छोटे शहरों में भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है। यह बदलाव भारत के डिवाइस इकोसिस्टम और 5जी-सक्षम स्मार्टफोन की उपलब्धता से संभव हुआ है। 2025 में सक्रिय 4जी उपकरणों की संख्या 892 मिलियन थी, जिनमें से 383 मिलियन से अधिक उपकरण 5जी-सक्षम थे। साथ ही, वर्ष के दौरान बेचे गए स्मार्टफोनों में 90 प्रतिशत से अधिक 5जी-सक्षम थे, जिससे उपयोगकर्ताओं के लिए 5जी अपनाना आसान हो गया।

    4के स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और एआई एप्स

    भारतीय यूजर पहले से कहीं अधिक डेटा का उपभोग कर रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण 4के वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग और एआई-आधारित एप्लीकेशन हैं। इन सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता ने नेटवर्क पर लोड बढ़ा दिया है और इससे उच्च गति, कम विलंबता और बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता उत्पन्न हुई है।

    भविष्य में नेटवर्क और एआई की भूमिका

    रिपोर्ट में भविष्य के दृष्टिकोण पर भी जोर दिया गया है। जैसे-जैसे एआई-आधारित एप्लिकेशन और डिजिटल अनुभव आम होंगे, नेटवर्क को उच्च डेटा लोड, जटिल कंप्यूटिंग और कम विलंबता संभालने के लिए विकसित होने की आवश्यकता होगी।

    2031 तक 5जी ग्राहकों का अनुमान

    भविष्य में भारत में 5जी ग्राहकों की संख्या 2031 तक 1 अरब से अधिक होने का अनुमान है। यह संकेत देता है कि मोबाइल डेटा उपभोग और डिजिटल सेवाओं की मांग लगातार बढ़ती रहेगी।

  • 1 अप्रैल से F&O पर बढ़ेगा STT, विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि में सीमित असर

    1 अप्रैल से F&O पर बढ़ेगा STT, विशेषज्ञों के अनुसार लंबी अवधि में सीमित असर


    नई दिल्ली वित्त वर्ष 2025-26 के समापन के साथ निवेशकों को कई नए बदलावों का सामना करना पड़ रहा है। इसमें फ्यूचर्स और ऑप्शंस (एफएंडओ) पर लागू सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) में बढ़ोतरी सबसे अहम बदलाव है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में घोषित ये संशोधन विशेष रूप से ऑप्शंस ट्रेडिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जिससे ट्रेडिंग लागत बढ़ जाएगी।

    फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर नई एसटीटी दरें

    नई दरों के अनुसार फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02% से बढ़कर 0.05%, जबकि ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज पर एसटीटी 0.10% और 0.125% से बढ़कर 0.15% हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डेरिवेटिव्स सेगमेंट में निवेश की लागत बढ़ेगी, खासकर उन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के लिए, जो हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग और डेरिवेटिव आधारित रणनीतियों पर निर्भर हैं।

    एफपीआई और बाजार पर अल्पकालिक असर

    जनवरी 2026 में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 41,000 करोड़ रुपए से अधिक की निकासी की थी, जो वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और करेंसी दबाव को दर्शाती है। एसटीटी बढ़ने से टैक्स के बाद रिटर्न कम हो सकता है, जिससे शॉर्ट-टर्म विदेशी निवेश के लिए भारत का आकर्षण थोड़ी मात्रा में घट सकता है। कुछ निवेशक इस कारण एशिया के अन्य बाजारों जैसे अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में निवेश की ओर रुख कर सकते हैं।

    लंबी अवधि के निवेशकों पर सीमित प्रभाव

    विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा। उनके निवेश निर्णय कंपनी की कमाई, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता जैसे कारकों पर आधारित होते हैं। वहीं, सरकार को टैक्स कलेक्शन में वृद्धि का लाभ मिलेगा, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम पर अल्पकालिक दबाव पड़ सकता है।

    रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स पर असर

    एसटीटी बढ़ोतरी से रिटेल और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स की ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी। हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह प्रभाव अल्पकालिक होगा। शुरुआती समय में बाजार में हलचल दिखाई दे सकती है, लेकिन जैसे-जैसे निवेशक समायोजित होंगे, ट्रेडिंग गतिविधियां सामान्य हो जाएंगी।

    1 अप्रैल 2026 से लागू हुए नए एसटीटी नियमों के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर टैक्स बढ़ गया है। अल्पकालिक प्रभाव: ट्रेडिंग लागत बढ़ी- एफपीआई और शॉर्ट-टर्म निवेश प्रभावित। दीर्घकालिक असर: सीमित → लंबी अवधि के निवेशक कंपनी की स्थिति, मुद्रा स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता पर ध्यान देंगे। सरकार को टैक्स में लाभ, बाजार में मामूली दबाव और विदेशी निवेश में थोड़ी नरमी संभव है।

  • 36% हिस्सेदारी के साथ गोल्ड लोन भारत में सबसे बड़े क्रेडिट सेगमेंट में शामिल

    36% हिस्सेदारी के साथ गोल्ड लोन भारत में सबसे बड़े क्रेडिट सेगमेंट में शामिल


    नई दिल्ली भारत के रिटेल क्रेडिट मार्केट में गोल्ड लोन अब सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है। मंगलवार को जारी ट्रांसयूनियन सीआईबीएल की रिपोर्ट के अनुसार, कुल लोन वॉल्यूम में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत और वैल्यू (मूल्य) के हिसाब से करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके पीछे मुख्य कारण सोने की बढ़ती कीमतें और सुरक्षित लोन की ओर बढ़ता ग्राहक रुझान माना गया है।

    गोल्ड लोन में वृद्धि और औसत राशि

    रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में गोल्ड लोन की औसत राशि काफी बढ़ी है। दिसंबर 2025 की तिमाही में औसत गोल्ड लोन करीब 1.9 लाख रुपए तक पहुंच गया, जो इस सेगमेंट की तेजी को दर्शाता है। इसी दौरान कंज्यूमर मार्केट इंडिकेटर (CMI), जो क्रेडिट मार्केट की स्थिति को दर्शाता है, दिसंबर तिमाही में बढ़कर 102 हो गया। एक साल पहले यह 97 और सितंबर तिमाही में 100 था, यानी लगातार तीसरी तिमाही में सुधार देखा गया।

    क्षेत्रीय और ग्राहक विस्तार

    पहले गोल्ड लोन का दबदबा दक्षिण भारत में था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे उत्तर और पश्चिम राज्यों में भी इसकी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इस सेगमेंट में अब अलग-अलग तरह के ग्राहक जुड़ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि आधे से ज्यादा लोन प्राइम और उससे ऊपर की कैटेगरी के ग्राहकों द्वारा लिए जा रहे हैं, जिससे गोल्ड लोन मुख्यधारा का क्रेडिट विकल्प बनता जा रहा है।

    मांग में प्रवृत्ति और नॉन-मेट्रो क्षेत्र

    त्योहारों और जीएसटी से जुड़े असर के बावजूद क्रेडिट सप्लाई में केवल मौसमी नरमी देखी गई है, न कि स्थायी गिरावट। खासकर अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में मांग मजबूत बनी हुई है। नॉन-मेट्रो क्षेत्रों का कुल उधारकर्ताओं में हिस्सा बढ़कर 54 प्रतिशत हो गया है, जो पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, पहली बार लोन लेने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक बढ़ गई है।

    ऑटो लोन सेगमेंट में स्थिरता

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऑटो लोन सेगमेंट में स्थिर ग्रोथ बनी हुई है। मिड-सेगमेंट वाहनों की मजबूत मांग के कारण इस क्षेत्र में संतुलित विकास देखा गया और पिछले साल की तुलना में सप्लाई भी बढ़ी है।

  • इंडिगो का नया CEO, विलियम वॉल्श लेंगे कमान संभालने का जिम्मा

    इंडिगो का नया CEO, विलियम वॉल्श लेंगे कमान संभालने का जिम्मा


    नई दिल्लीइंडिगो की पैरेंट कंपनी InterGlobe Aviation Limited ने मंगलवार को घोषणा की कि विलियम वॉल्श को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति नियामकीय मंजूरी के अधीन है। इससे पहले इसी महीने पीटर एल्बर्स ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

    नियुक्ति का समय और पृष्ठभूमि

    वॉल्श, जिन्हें ‘विली’ के नाम से भी जाना जाता है, वर्तमान में International Air Transport Association (IATA) के डायरेक्टर जनरल हैं। उनका कार्यकाल 31 जुलाई 2026 को समाप्त होगा और वह 3 अगस्त 2026 से इंडिगो से जुड़ सकते हैं।

    एयरलाइनिंग अनुभव

    वॉल्श पहले British Airways और International Airlines Group (IAG) के CEO रह चुके हैं। IAG के तहत एयरलिंगस, इबेरिया, लेवल और वुएलिंग जैसी एयरलाइंस आती हैं। उनके पास बड़े पैमाने पर एयरलाइन संचालन का अनुभव और जटिल बाजार स्थितियों को संभालने की क्षमता है।

    इंडिगो का बयान

    इंडिगो के चेयरमैन Vikram Singh Mehta ने कहा कि वॉल्श एयरलाइन संचालन और रणनीतिक नेतृत्व के लिए उपयुक्त हैं। मैनेजिंग डायरेक्टर Rohit Bhatia ने बताया कि कंपनी अब बदलाव और विकास के नए दौर में प्रवेश कर रही है, ऐसे समय में वॉल्श का योगदान अहम रहेगा।

    जिम्मेदारियां और फोकस

    वॉल्श अपने नए पद पर इंडिगो के पूरे ऑपरेशन और रणनीतिक दिशा के लिए जिम्मेदार होंगे। उनका मुख्य फोकस ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को मजबूत करना, नेटवर्क और कमर्शियल रणनीति को आगे बढ़ाना और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाना रहेगा।

    वॉल्श का बयान

    वॉल्श ने कहा कि एविएशन सेक्टर तेजी से बदल रहा है और इंडिगो इस बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने उत्कृष्टता, नवाचार और सहयोग की संस्कृति को मजबूत करने का संकल्प जताया।

  • पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा

    पीएमएवाई-जी योजना: 3 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा


    नई दिल्ली केंद्र सरकार ने मंगलवार को बताया कि Pradhan Mantri Awas Yojana-Gramin (PMAY-G) के तहत अब तक लगभग 3 करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। योजना के पहले और दूसरे चरण में कुल 4.15 करोड़ घरों का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से 3.90  करोड़ घर स्वीकृत किए गए और 2.99 करोड़ घर बनकर तैयार हो चुके हैं।

    वित्तीय सहायता और लक्ष्य

    सरकार के अनुसार, इस योजना में घरों के निर्माण और लाभार्थियों को समय पर सहायता देने के लिए अब तक कुल 4,03,886 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। योजना का अंतिम लक्ष्य 2029 तक कुल 4.95 करोड़ घर बनाना है।

    लाभार्थी-आधारित निर्माण

    पीएमएवाई-जी लाभार्थी-आधारित है, यानी परिवार खुद अपने घर का निर्माण करते हैं और वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में जाती है। योजना में घरों की जियो-टैगिंग की जाती है, जिसमें समय और तारीख के साथ फोटो अपलोड की जाती है। इससे रियल-टाइम निगरानी संभव होती है और यह सुनिश्चित होता है कि घर तय मानकों के अनुसार बन रहे हैं।

    एआई और तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता

    योजना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। AI मॉडल घरों की दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों जैसी चीजों की पहचान कर सही तस्वीर को मंजूरी के लिए चुनते हैं। इससे केवल पूरी तरह तैयार घरों को ही पूर्ण माना जाता है।
    लाभार्थियों की पहचान आधार आधारित-एआई फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए होती है, जिसमें आंख झपकने और मूवमेंट डिटेक्शन जैसी तकनीकें भी शामिल हैं। इससे सुनिश्चित होता है कि केवल योग्य लोग ही योजना का लाभ प्राप्त करें।

    अन्य योजनाओं के साथ समन्वय

    पीएमएवाई-जी को स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी अन्य योजनाओं के साथ जोड़ा गया है, ताकि लाभार्थियों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकें।

    लगातार प्रगति

    पिछले 10 वर्षों में पीएमएवाई-जी ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। हर साल बड़ी संख्या में घरों का निर्माण पूरा हुआ है, जो इसकी स्थिर प्रगति को दर्शाता है। AI और मशीन लर्निंग तकनीकों के इस्तेमाल से निगरानी और ज्यादा सटीक हो गई है, जिससे फर्जीवाड़े की संभावना कम हुई है।

  • युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, BBMB भर्ती में आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक

    युवाओं के लिए सुनहरा अवसर, BBMB भर्ती में आवेदन की आखिरी तारीख नजदीक


    नई दिल्ली सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। Bhakra Beas Management Board (बीबीएमबी) ने हिंदी ट्रांसलेटर के पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के तहत कुल 6 पद भरे जाएंगे, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 19 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथि

    बीबीएमबी की इस भर्ती के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन मोड में स्वीकार किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन की अंतिम तिथि 19 अप्रैल तय की गई है, जिसके बाद कोई फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    योग्यता और पात्रता मानदंड

    हिंदी ट्रांसलेटर पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से संबंधित विषय में कम से कम ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों के पास निर्धारित अनुभव और अन्य जरूरी पात्रता शर्तें भी पूरी होनी चाहिए।

    आयु सीमा में छूट का प्रावधान

    इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 37 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना 19 अप्रैल के आधार पर की जाएगी। वहीं, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

    चयन प्रक्रिया कैसी होगी?

    उम्मीदवारों का चयन तीन चरणों में किया जाएगा—लिखित परीक्षा, ट्रेड टेस्ट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन। इन सभी चरणों में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अंतिम रूप से नियुक्ति दी जाएगी।

    सैलरी और आवेदन शुल्क

    चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 35,400 रुपए से लेकर 1,12,400 रुपए तक का वेतन दिया जाएगा, जो सरकारी मानकों के अनुसार आकर्षक माना जा रहा है।
    वहीं, आवेदन शुल्क की बात करें तो सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस वर्ग के उम्मीदवारों को 1,000 रुपए फीस देनी होगी, जबकि एससी, एसटी और पीडब्ल्यूबीडी वर्ग के लिए यह शुल्क 500 रुपए निर्धारित किया गया है।

    ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले Bhakra Beas Management Board की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
    इसके बाद होमपेज पर दिए गए भर्ती लिंक पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें। लॉगिन करने के बाद आवेदन फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारी सही-सही भरें। जरूरी दस्तावेज निर्धारित फॉर्मेट में अपलोड करें और ऑनलाइन शुल्क का भुगतान करें। अंत में फॉर्म सबमिट कर उसका प्रिंटआउट भविष्य के लिए सुरक्षित रख लें।

    युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर

    यह भर्ती उन युवाओं के लिए खास मौका है, जो हिंदी भाषा में दक्षता रखते हैं और सरकारी क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। सीमित पदों के बावजूद अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी इसे और आकर्षक बनाती है।

  • भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल का बड़ा मौका, 2026 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम लॉन्च

    भारत में AI स्टार्टअप्स के लिए गूगल का बड़ा मौका, 2026 एक्सेलेरेटर प्रोग्राम लॉन्च

    नई दिल्ली टेक दिग्गज गूगल ने मंगलवार को भारत में अपने ‘स्टार्टअप्स एक्सेलेरेटर’ के 2026 बैच के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह तीन महीने का इक्विटी-फ्री प्रोग्राम है, जिसका उद्देश्य देश के एआई आधारित स्टार्टअप्स को सहयोग देना है।

    गूगल इंडिया के अनुसार, यह एक्सेलेरेटर खासतौर पर उन भारतीय स्टार्टअप्स को लक्षित कर रहा है जो एजेंटिक एआई, मल्टीमॉडल एआई, फिजिकल एआई और सॉवरेन एआई जैसे उभरते क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार, अब एआई का उपयोग केवल प्रयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े स्तर पर काम करने वाले समाधानों की ओर बढ़ रहा है।

    गूगल ने बताया कि यह प्रोग्राम उन एआई-फर्स्ट स्टार्टअप्स के लिए खुला है जो सीड से लेकर सीरीज ए स्टेज तक हैं और भारत से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं या वैश्विक इंडस्ट्री के लिए खास मॉडल विकसित कर रहे हैं।

    2026 बैच के तहत स्टार्टअप्स को बिना इक्विटी दिए कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी, जिसमें गूगल के एडवांस एआई मॉडल्स जैसे जेमिनी, जेम्मा, इमेजन, वीओ और लिरिया तक पहुंच और तकनीकी सहयोग शामिल है।

    इसके अलावा, स्टार्टअप्स को गूगल डीपमाइंड, क्लाउड, हेल्थ और एंड्रॉयड टीम्स के एक्सपर्ट्स से वन-ऑन-वन मेंटरशिप भी मिलेगी। साथ ही क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, टीपीयू और क्रेडिट्स का लाभ भी पात्रता के आधार पर दिया जाएगा।

    यह प्रोग्राम स्टार्टअप्स को साप्ताहिक ट्रैकिंग और समर्पित मैनेजर्स के जरिए प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी और ग्रोथ से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा।

    पिछले बैचों में इस प्रोग्राम के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। डीव्यू जैसे स्टार्टअप्स ने राजस्व में चार गुना वृद्धि दर्ज की, जबकि सुपरजॉइन ने जेमिनी 3.0 की मदद से अपनी सटीकता और स्पीड में 50 प्रतिशत सुधार किया। वहीं, पल्स ने डेटा एनालिसिस के जरिए 30 लाख डॉलर के जोखिम वाले राजस्व की पहचान की।

    कई स्टार्टअप्स ने एआई के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान भी किया है।

    एआईस्टेथ ने एक स्मार्ट स्टेथोस्कोप तैयार किया, जिससे 75,000 से ज्यादा मरीजों की जांच की गई। वानी एआई ने वॉइस प्रोसेसिंग को बेहतर बनाया, जबकि रेजिलिएंस एआई और वीडियोएसडीके ने भी अपने-अपने क्षेत्रों में दक्षता बढ़ाई।

    यह एक्सेलेरेटर प्रोग्राम जून के आखिर में बेंगलुरु में एक सप्ताह के बूटकैंप के साथ शुरू होगा और अक्टूबर में ‘डेमो डे’ के साथ समाप्त होगा। इसके अलावा, आवेदन 19 अप्रैल को बंद हो जाएंगे।


  • महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ

    महंगाई से लेकर धीमी आर्थिक वृद्धि तक, पश्चिम एशिया संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरह से करेगा प्रभावित: आईएमएफ


    नई दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था को कई तरीकों से प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका नतीजा एक ही होगा—महंगाई बढ़ेगी और आर्थिक विकास धीमा पड़ेगा।

    आईएमएफ के अनुसार, मध्य पूर्व में चल रहा यह युद्ध न केवल वहां के लोगों की जिंदगी और आजीविका को प्रभावित कर रहा है, बल्कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए भी चिंता का कारण बन गया है, जो पहले ही पिछली आर्थिक चुनौतियों से उबरने की कोशिश कर रही थीं।

    आईएमएफ ने कहा कि यह संकट पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, लेकिन इसका असर सभी देशों पर समान नहीं है। ऊर्जा आयात करने वाले देश ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं, गरीब देशों पर ज्यादा दबाव है और जिन देशों के पास कम आर्थिक भंडार हैं, वे ज्यादा मुश्किल में हैं।

    एशिया और यूरोप के बड़े ऊर्जा आयातक देश ईंधन और अन्य इनपुट लागत बढ़ने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। दुनिया के करीब 25-30 प्रतिशत तेल और 20 प्रतिशत एलएनजी की सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य से होती है, जो एशिया और यूरोप की जरूरतों को पूरा करती है।

    आईएमएफ ने बताया कि अफ्रीका और एशिया के कई देश, जो तेल आयात पर निर्भर हैं, अब बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद भी पर्याप्त सप्लाई हासिल करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

    संस्था ने चेतावनी दी कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, एशिया-प्रशांत और लैटिन अमेरिका के कई हिस्सों में खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ने से अतिरिक्त दबाव बन रहा है। खासतौर पर गरीब देशों में खाद्य संकट का खतरा बढ़ सकता है और उन्हें बाहरी मदद की जरूरत पड़ सकती है।

    आईएमएफ के मुताबिक, अगर यह युद्ध छोटा रहता है तो तेल और गैस की कीमतें अचानक बढ़ सकती हैं, लेकिन अगर यह लंबे समय तक चलता है तो ऊर्जा की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहेंगी, जिससे आयात पर निर्भर देशों की हालत और खराब हो सकती है।

    एशिया के बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों में ईंधन और बिजली की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और लोगों की खरीद क्षमता पर असर पड़ रहा है। कुछ देशों में भुगतान संतुलन पर भी दबाव दिख रहा है, जिससे उनकी मुद्रा कमजोर हो रही है।

    यूरोप में यह संकट 2021-22 के गैस संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। इटली और यूनाइटेड किंगडम (यूके) जैसे देश ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, जबकि फ्रांस और स्पेन जैसे देश अपनी परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के कारण अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं।

    यह युद्ध केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि अन्य जरूरी सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर रहा है। जहाजों के रूट बदलने से ट्रांसपोर्ट और बीमा लागत बढ़ रही है और सामान पहुंचने में देरी हो रही है।

    आईएमएफ ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र दुनिया में हीलियम की बड़ी सप्लाई करता है, जो सेमीकंडक्टर और मेडिकल उपकरणों में इस्तेमाल होता है। वहीं, इंडोनेशिया को निकेल प्रोसेस करने के लिए जरूरी सल्फर की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

    पूर्वी अफ्रीका के वे देश जो खाड़ी देशों पर व्यापार और रेमिटेंस के लिए निर्भर हैं, उन्हें भी कमजोर मांग, लॉजिस्टिक समस्याओं और कम पैसे भेजे जाने का असर झेलना पड़ सकता है।

    आईएमएफ ने चेतावनी दी कि अगर ऊर्जा और खाद्य कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इससे पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ेगी।

    इसके अलावा, इस युद्ध ने वित्तीय बाजारों को भी प्रभावित किया है। वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट आई है, बॉन्ड यील्ड बढ़ी है, और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। हालांकि, अभी तक यह गिरावट पिछले बड़े वैश्विक संकटों की तुलना में सीमित है, लेकिन इससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो गई हैं।

    आईएमएफ ने कहा कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को सही नीतियां अपनानी होंगी। जिन देशों के पास कम संसाधन हैं, उन्हें खास तौर पर सतर्क रहने की जरूरत है।

    आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, “अनिश्चित दुनिया में ज्यादा देशों को हमारे समर्थन की जरूरत है और हम उनके साथ हैं।”