Category: Economy

  • Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट

    Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में आयी तेजी, जानिए प्रमुख शहरों का आज का रेट


    नई दिल्ली। सोमवार, 9 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। घरेलू फ्यूचर मार्केट में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 मार्च, 2026 की एक्सपायरी वाला गोल्ड फ्यूचर वायदा 1,54,224 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 1,53,931 रुपये पर बंद हुआ था।

    दिन की शुरुआत में ही सोना 1,55,674 रुपये तक पहुंच गया, यानी पिछले बंद रेट से करीब 1,800 रुपये की तेजी। शुरुआती कारोबार में MCX गोल्ड ने 1,57,000 रुपये तक का उच्च स्तर भी छुआ।

    चांदी में भी तेजी, जानें MCX रेट
    सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी मजबूती रही। MCX पर 5 मार्च 2026 की सिल्वर फ्यूचर वायदा 2,60,301 रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। यह पिछले बंद रेट से लगभग 10,400 रुपये की तेजी दिखाता है। शुरुआती कारोबार में सिल्वर 2,64,885 रुपये के उच्च स्तर तक भी गया।

    शहरवार सोने का रेट
    दिल्ली:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    मुंबई:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    चेन्नई:
    24 कैरेट: ₹1,57,300
    22 कैरेट: ₹1,44,190
    18 कैरेट: ₹1,23,490

    कोलकाता:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

    अहमदाबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    लखनऊ:
    24 कैरेट: ₹1,56,740
    22 कैरेट: ₹1,43,690
    18 कैरेट: ₹1,17,590

    पटना:
    24 कैरेट: ₹1,56,640
    22 कैरेट: ₹1,43,590
    18 कैरेट: ₹1,17,490

    हैदराबाद:
    24 कैरेट: ₹1,56,590
    22 कैरेट: ₹1,43,540
    18 कैरेट: ₹1,17,440

  • बैंकों में FDI की सीमा 20 से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की तैयारी… वित्त मंत्रालय कर रहा विचार

    बैंकों में FDI की सीमा 20 से बढ़ाकर 49 फीसदी करने की तैयारी… वित्त मंत्रालय कर रहा विचार



    नई दिल्ली।
    वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (Public Sector Banks) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) Foreign Direct Investment – FDI) की सीमा को मौजूदा 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 49 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने कहा, हम अभी भी विचार कर रहे हैं, और एफडीआई सीमा को 49 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए अंतर-मंत्रालयी परामर्श जारी है।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बेहतर स्थिति से उत्साहित वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने भरोसा जताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में इन बैंकों का संयुक्त मुनाफा दो लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर जाना चाहिए। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के अच्छी स्थिति में होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस साल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ऋण वृद्धि 12 प्रतिशत और जमा वृद्धि 10 प्रतिशत है, जो काफी उत्साहजनक है।


    बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना होगा

    उन्होंने कहा, बैंक अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत हैं। इसलिए, वे लचीले हैं। हमारे पास नियामक आरबीआई के तहत बहुत ही विवेकपूर्ण प्रबंधन प्रणाली मौजूद है। इसलिए हम अपने बैंकिंग क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाले बाहरी कारकों के बारे में बहुत चिंतित नहीं हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का संयुक्त मुनाफा तीन साल में दोगुना हो जाएगा। संपत्ति की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार, ऋण वृद्धि, स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता अनुपात और संपत्तियों पर बढ़ते प्रतिफल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का मुनाफा वित्त वर्ष 2022-23 में एक लाख करोड़ रुपये को पार कर 1.05 लाख करोड़ रुपये हो गया था।

  • भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे

    भारत में गोल्ड ETF में 98% उछाल, दुनिया भर के निवेशक सोने की ओर खिंचे


    नई दिल्ली। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 में भारत के गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में 2.49 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश आया। यह दिसंबर 2025 के 1.25 अरब डॉलर से 98 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी है। यह लगातार आठवां महीना है जब गोल्ड ETF में निवेश बढ़ रहा है।

    2025 का निवेश सिलसिला जारी

    साल 2025 में मार्च और मई को छोड़कर हर महीने गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा। पूरे साल 2025 में कुल 4.68 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2024 के 1.29 अरब डॉलर से 262 प्रतिशत अधिक है। तुलना करें तो 2023 में यह केवल 310 मिलियन डॉलर और 2022 में महज 33 मिलियन डॉलर था।

    वैश्विक स्तर पर भी रिकॉर्ड

    दुनियाभर में भी निवेशकों ने सोना ETF में पैसा लगाना जारी रखा। जनवरी में वैश्विक सोना ETF में 19 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो अब तक का सबसे मजबूत मासिक फंड फ्लो है। सोने की कीमतों में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ, वैश्विक सोना ETF में प्रबंधित संपत्ति 669 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले महीने से 20 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक होल्डिंग भी 120 टन बढ़कर 4,145 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।

    एशिया ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

    एशियाई गोल्ड ETF में जनवरी में 10 अरब डॉलर का निवेश आया, जो 2025 के मासिक औसत से काफी अधिक है। यह क्षेत्र लगातार पांचवें महीने निवेश में वृद्धि दिखा रहा है और अब तक का सबसे मजबूत मासिक प्रवाह दर्ज किया है।

    सभी क्षेत्रों में बढ़त
    जनवरी में उत्तरी अमेरिका और एशिया ने वैश्विक मांग को बढ़ावा दिया। उत्तरी अमेरिका में दूसरा सबसे बड़ा मासिक फ्लो दर्ज किया गया, जबकि एशिया ने अपना सर्वाधिक मासिक प्रवाह देखा। यूरोप में भी भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनावों के बावजूद निवेश उल्लेखनीय रहा।

    गिरावट के बावजूद निवेश जारी

    सोने की कीमतों में कुछ गिरावट के बावजूद, यूरोप को छोड़कर सभी क्षेत्रों में 30 जनवरी और 2 फरवरी को शुद्ध निवेश जारी रहा। निवेशकों ने कीमतों में गिरावट का फायदा उठाते हुए खरीदारी जारी रखी।

    निवेश को सहारा देने वाले कारक
    जनवरी में निवेश को शुरुआती कीमतों में तेजी, अमेरिका और ईरान, ग्रीनलैंड और यूरोप में भू-राजनीतिक तनावों ने सहारा दिया। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर अपरिवर्तित रखने के बावजूद, केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता और नए फेड चेयर केविन वॉर्श की नीतियों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। इसके साथ ही ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने गोल्ड ETF की मांग बनाए रखी।

  • CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम

    CIBIL स्कोर खराब है तो क्या नहीं मिलेगा नया क्रेडिट कार्ड? जानिए क्या कहता है नियम


    नई दिल्ली। ऑनलाइन शॉपिंग करनी हो फ्लाइट टिकट बुक करनी हो या अचानक आई जरूरत आज के दौर में क्रेडिट कार्ड केवल सुविधा नहीं बल्कि फाइनेंशियल लाइफ का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन जैसे ही कोई व्यक्ति नया क्रेडिट कार्ड अप्लाई करता है सबसे पहले जिस चीज की जांच होती है वह है उसका CIBIL स्कोर। ऐसे में जिन लोगों का सिबिल स्कोर खराब है उनके मन में यही सवाल उठता है कि क्या अब उन्हें कभी नया क्रेडिट कार्ड नहीं मिलेगा? चलिए जानते हैं।
    क्या है CIBIL स्कोर?
    CIBIL स्कोर एक तीन अंकों की संख्या होती है जो आपकी क्रेडिट हिस्ट्री को दर्शाती है। यह स्कोर 300 से 900 के बीच होता है। आमतौर पर 750 या उससे ज्यादा स्कोर को बैंक अच्छा मानते हैं। वहीं 600 से नीचे का स्कोर यह संकेत देता है कि आपने पहले लोन या क्रेडिट कार्ड के भुगतान में लापरवाही की है। ऐसे में बैंक आपको ‘हाई रिस्क कस्टमर’ मान लेते हैं।

    क्या RBI ने खराब स्कोर वालों पर रोक लगाई है?
    यह जानना जरूरी है कि भारतीय रिजर्व बैंक RBIने ऐसा कोई नियम नहीं बनाया है जो खराब CIBIL स्कोर वाले व्यक्ति को क्रेडिट कार्ड देने से रोकता हो। दरअसल क्रेडिट कार्ड जारी करना पूरी तरह बैंकों और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों की नीति पर निर्भर करता है। बैंक अपने रिस्क को देखते हुए शर्तें तय करते हैं।

    खराब CIBIL स्कोर वालों के लिए कोई ऑप्शन?
    अगर आपका स्कोर कम है तब भी कुछ रास्ते खुले हैं। सबसे सेफ ऑप्शन है सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड। इसमें आपको बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट FDकरानी होती है और उसी के बदले कार्ड मिलता है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य के कार्ड पर ऐड-ऑन कार्ड भी लिया जा सकता है। कुछ फिनटेक कंपनियां और NBFC सीमित क्रेडिट लिमिट के साथ कार्ड ऑफर करती हैं ताकि यूजर धीरे-धीरे अपनी साख सुधार सके।

    क्रेडिट कार्ड से कैसे सुधरेगा सिबिल स्कोर?
    सही तरीके से इस्तेमाल किया गया क्रेडिट कार्ड आपके खराब CIBIL स्कोर को सुधारने में मदद कर सकता है। समय पर बिल भुगतान लिमिट से कम खर्च और नियमित उपयोग से 6 से 12 महीनों में स्कोर में अच्छा सुधार देखा जा सकता है। एक बार स्कोर बेहतर होते ही अनसिक्योर्ड यानी बिना FD वाले क्रेडिट कार्ड के रास्ते भी खुल जाते हैं।

  • सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!

    सालाना इनकम 12 लाख रुपये से ज्यादा है तो आज ही करें ये 4 निवेश, रिटायरमेंट भी रहेगा सुरक्षित और टैक्स भी जीरो!


    नई दिल्ली । अगर आपकी सालाना आमदनी 12 लाख रुपये से ज्यादा है और हर साल इनकम टैक्स आपकी जेब पर भारी पड़ता है, तो अब चिंता छोड़ दीजिए। सही टैक्स प्लानिंग और स्मार्ट निवेश से न सिर्फ टैक्स का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है, बल्कि रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फाइनेंशियल फंड भी तैयार किया जा सकता है। खास बात यह है कि कुछ निवेश ऐसे हैं, जो टैक्स बचत और भविष्य की सुरक्षा दोनों का डबल फायदा देते हैं।
    नेशनल पेंशन सिस्टम
    नेशनल पेंशन सिस्टम हाई इनकम वालों के लिए सबसे असरदार टैक्स सेविंग टूल माना जाता है। सेक्शन 80CCD के तहत इसमें 50,000 रुपये की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है, जो 80C की 1.5 लाख रुपये की सीमा से अलग है। यानी सीधे-सीधे टैक्सेबल इनकम कम। NPS में इक्विटी, डेट और सरकारी बॉन्ड में निवेश होता है, जिससे लंबे समय में 10-12% तक रिटर्न की उम्मीद की जाती है। रिटायरमेंट के समय 60% राशि टैक्स-फ्री निकाली जा सकती है, जबकि बाकी रकम से नियमित पेंशन मिलती है।

    पब्लिक प्रोविडेंट फंड

    जो लोग रिस्क से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड बेहतरीन ऑप्शन है। इसमें 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा समय में PPF पर 7.1% का फिक्स्ड और टैक्स-फ्री रिटर्न मिलता है। 15 साल की लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का फायदा इसे रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बेहद मजबूत बनाता है।

    इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम

    इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम उन निवेशकों के लिए है, जो टैक्स बचाते हुए ज्यादा रिटर्न चाहते हैं। इसमें भी 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। 3 साल के लॉक-इन के साथ ELSS फंड्स इक्विटी में निवेश करते हैं और लंबे समय में 12–15% तक रिटर्न दे सकते हैं। हालांकि इसमें बाजार का रिस्क रहता है, इसलिए निवेश से पहले प्रोफाइल समझना जरूरी है।

    ULIP और पेंशन प्लान
    ULIP और लाइफ इंश्योरेंस पेंशन प्लान्स भी हाई इनकम वालों के लिए फायदेमंद हैं। 80C/80CCC के तहत टैक्स छूट और 10 के तहत टैक्स-फ्री मैच्योरिटी इन्हें अट्रैक्टिव बनाती है। ULIP में निवेश और इंश्योरेंस दोनों का लाभ मिलता है, जबकि पेंशन प्लान रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करते हैं।

  • Business शुरू करने की सोच रहे हैं….तो अब बिना किसी गारंटी के ₹20 लाख तक का लोन

    Business शुरू करने की सोच रहे हैं….तो अब बिना किसी गारंटी के ₹20 लाख तक का लोन


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय रिजर्व बेंक (Central Reserve Bank) ने कई अहम ऐलान किए हैं। इसमें एक बड़ा ऐलान उन लोगों से जुड़ा था जो अपना बिजनेस शुरू (Start Business) करने की सोच रहे हैं। दरअसल, आरबीआई (RBI) ने माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के छोटे बिजनेस के लिए बिना गारंटी वाले लोन की लिमिट 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की है। बिना गारंटी वाले लोन की बढ़ी हुई लिमिट 01 अप्रैल, 2026 को या उसके बाद मंजूर या रिन्यू किए गए छोटे कर्जदारों के सभी लोन पर लागू होगी।


    कोलैटरल-फ्री लोन क्या है?

    एक खबर में कोटक महिंद्रा बैंक की वेबसाइट का हवाला देते हुए बताया गया है कि यह एक अनसिक्योर्ड लोन है जो लेंडर आपकी बिजनेस की जरूरतों के लिए देते हैं। इस तरह के लोन में, लोन चुकाए जाने तक अपने घर, कार या प्रॉपर्टी जैसी कोई भी चीज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। कोलैटरल-फ्री लोन बिजनेस के लिए तुरंत फंड पाने का एक शानदार तरीका है, जिसमें फाइनेंशियल संस्था के पास अपनी संपत्ति को जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है।


    MSME का मतलब क्या है?

    MSME से मतलब माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइज यानी कारोबार से होता है। एक माइक्रो एंटरप्राइज, जिसमें प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है। वहीं, स्मॉल एंटरप्राइज में इन्वेस्टमेंट 25 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 100 करोड़ रुपये तक होना चाहिए। इसके अलावा, मीडियम एंटरप्राइज में प्लांट और मशीनरी या इक्विपमेंट में इन्वेस्टमेंट 125 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होता है और टर्नओवर 500 करोड़ रुपये तक का होता है।


    किसान क्रेडिट कार्ड पर अपडेट

    इसके साथ ही आरबीआई किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से संबंधित नये दिशा-निर्देश भी जारी करेगा। इसमें फसल सीजन के मानकीकरण, केसीसी की अवधि बढ़ाकर छह साल करने और हर फसल सीजन के लिए लोन लिमिट तय करने संबंधी प्रावधान होंगे। इसके प्रारूप दिशा-निर्देश जल्द जारी किये जाएंगे।

  • एक अप्रैल से लागू होंगे इनकम टैक्स के नए रूल्स… विभाग ने जारी किया ड्राफ्ट

    एक अप्रैल से लागू होंगे इनकम टैक्स के नए रूल्स… विभाग ने जारी किया ड्राफ्ट


    नई दिल्ली।
    इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) ने इनकम-टैक्स नियम, 2026 (Income-tax Rules, 2026) का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। ये ड्राफ्ट नियम 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने का प्रस्ताव है। इन ड्राफ्ट नियमों में कई दूसरी पहलों के साथ-साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग फॉर्म को आसान बनाया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने एक बयान में कहा कि ड्राफ्ट नियम और फॉर्म करीब 15 दिनों के लिए पब्लिक डोमेन में रहेंगे। सभी स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से अनुरोध है कि वे इन ड्राफ्ट नियमों और फॉर्म को देखें और उन पर सोच-समझकर फीडबैक दें ताकि और बेहतर किया जा सके । आपको बता दें कि 15 दिन की अवधि 22 फरवरी, 2026 को पूरी हो रही है।


    CBDT चेयरमैन ने क्या कहा था?

    CBDT का कहना है कि ड्राफ्ट नियमों का हिस्सा नए फॉर्म को भी टैक्स देने वालों की आसानी के लिए काफी हद तक आसान बनाया गया है। बीते दिनों CBDT के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बताया था कि इसके अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों की सूची भी जारी की जाएगी। अग्रवाल ने कहा था कि CBDT नए कानून पर ‘बार-बार पूछे जाने वाले सवाल’ (एफएक्यू) और एक प्रस्तुति तैयार करने पर भी काम कर रहा है।

    यह नए अधिनियम के लागू होने के साथ जनता के लिए उपलब्ध होगी ताकि उन्हें चीजों को समझने में आसानी हो। सीबीडीटी प्रमुख ने कहा कि पिछले साल पूरा जोर (आयकर अधिनियम की) भाषा को सरल बनाने पर था और नए कानून को इस तरह से लाने पर था कि करदाता इसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।


    क्या कहते हैं एक्सपर्ट

    नांगिया ग्लोबल के पार्टनर संदीप झुनझुनवाला ने कहा- इनकम टैक्स फॉर्म्स को आसान बनाया गया है। फॉर्म को ज्यादा साफ, आसानी से समझ में आने वाली भाषा में तैयार किया गया है ताकि ऑपरेशनल, एडमिनिस्ट्रेटिव या कानूनी अनिश्चितता से बचा जा सके और उनसे जुड़े नोट्स को भी उसी हिसाब से आसान बनाया गया है। खास बात यह है कि ड्राफ्ट फॉर्म नंबर 26, ऑडिट रिपोर्ट और इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 63 के तहत दी जाने वाली जानकारियों का स्टेटमेंट, ICDS एडजस्टमेंट का प्रावधान करता है।

  • Trade Deal: अगले 5 साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा भारत… क्या US कंपनियां पूरी कर पाएंगी डिमांड?

    Trade Deal: अगले 5 साल में 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा भारत… क्या US कंपनियां पूरी कर पाएंगी डिमांड?


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Historic Trade Agreements) के तहत भारत (India) ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर लगभग 41 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के सामान आयात करने की जो प्रतिबद्धता जताई है वह वैश्विक व्यापार की दिशा बदल सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य की सफलता केवल भारतीय कंपनियों (Indian Companies) के ऑर्डर देने पर नहीं, बल्कि अमेरिकी सप्लायर्स की सप्लाई क्षमता पर भी निर्भर करेगी। शनिवार को जारी संयुक्त बयान के बाद अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन क्षेत्रों में भारत अपनी खरीदारी बढ़ाएगा और अमेरिका के सामने क्या चुनौतियां होंगी।

    आयात के इस लक्ष्य को हासिल करने में ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा। आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में भारत ने अमेरिका से करीब 40 अरब डॉलर का आयात किया, जिसमें से 11 अरब डॉलर केवल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद थे। यह पिछले साल की तुलना में 35% अधिक है।

    भारत अब अपनी तेल जरूरतों के लिए रूस के बजाय अमेरिकी तेल को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ रहा है। भारत अब इंडोनेशिया से आने वाले ‘कोकिंग कोल’ की जगह अमेरिकी कोयले को तरजीह दे सकता है। अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी कोयला न केवल गुणवत्ता में बेहतर है, बल्कि कीमत में भी प्रतिस्पर्धी है। भारतीय तेल कंपनियों ने पहले ही अधिक तरल प्राकृतिक गैस (LNG) की खरीद के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।


    हाई-टेक और विमानन

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, चिप्स, सेमीकंडक्टर और हवाई जहाज जैसे हाई-टेक उत्पाद इस 500 अरब डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी होंगे। भारत अकेले बोइंग को 70 से 80 अरब डॉलर के नए ऑर्डर देने की तैयारी में है। डेटा सेंटर्स और AI के लिए आवश्यक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स और हाई-एंड चिप्स की खरीद में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है।


    सप्लाई चेन और पेंडिंग ऑर्डर्स जैसी अड़चनें

    इस भव्य योजना की राह में कुछ तकनीकी अड़चनें भी हैं। उदाहरण के तौर पर, बोइंग जैसी कंपनियों के पास पहले से ही भारी ऑर्डर का बैकलॉग है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या अमेरिकी कंपनियां समय पर डिलीवरी दे पाएंगी? इसी तरह, वैश्विक बाजार में सेमीकंडक्टर चिप्स की भारी मांग है। भारतीय खरीदारों को इन उत्पादों को हासिल करने के लिए वैश्विक कतार में लगना होगा। गोयल ने कहा, “यह अमेरिकी विक्रेताओं पर निर्भर करता है कि वे भारतीय खरीदारों को ऐसा प्रस्ताव दें जिसे वे ठुकरा न सकें। 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का लक्ष्य पहले ही साल में शायद पूरा न हो, लेकिन हम उसी दिशा में बढ़ रहे हैं।”


    100 अरब डॉलर प्रति वर्ष का रोडमैप

    विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत सालाना 100 अरब डॉलर का आयात अमेरिका से करता है तो अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार होने के साथ-साथ सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी बन सकता है। इससे भारत की रूस पर निर्भरता कम होगी और अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंध और गहरे होंगे। यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक दांव है। जहां भारत को 18% कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है, वहीं अमेरिका को 500 अरब डॉलर का सुनिश्चित बाजार मिल गया है। अब सफलता इस बात पर टिकी है कि अमेरिकी फैक्ट्रियां और तेल के कुएं भारत की इस विशाल मांग को कितनी तेजी से पूरा करते हैं।

  • पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम में हर महीने 5000 रुपये जमा करेंगे तो 5 साल में कितना फंड होगा तैयार?

    पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम में हर महीने 5000 रुपये जमा करेंगे तो 5 साल में कितना फंड होगा तैयार?


    नई दिल्ली।महंगाई के दौर में अगर आप बिना जोखिम के सुरक्षित निवेश की तलाश में हैं, तो पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपोजिट (RD) स्कीम आपके लिए एक भरोसेमंद ऑप्शन बन सकती है। खासतौर पर वे लोग जो हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम बचाकर भविष्य के लिए एक अच्छा फंड तैयार करना चाहते हैं, उनके लिए यह स्कीम बेहद उपयोगी है। पोस्ट ऑफिस की RD न सिर्फ सरकारी गारंटी के साथ आती है, बल्कि इसमें मिलने वाला ब्याज भी स्थिर होता है, जिससे निवेशक पहले से जान सकता है कि मैच्योरिटी पर उसे कितनी रकम मिलेगी।
    क्या है पोस्ट ऑफिस RD स्कीम?
    पोस्ट ऑफिस की RD यानी रिकरिंग डिपोजिट स्कीम में निवेशक को हर महीने एक निश्चित रकम जमा करनी होती है। यह स्कीम उन लोगों के लिए बनाई गई है जो एक साथ बड़ी रकम निवेश नहीं कर सकते, लेकिन नियमित बचत की आदत डालना चाहते हैं। फिलहाल पोस्ट ऑफिस इस स्कीम पर 6.7% सालाना ब्याज दे रहा है, जो तिमाही चक्रवृद्धि के आधार पर जोड़ा जाता है।

    कितनी रकम से कर सकते हैं शुरुआत?
    इस स्कीम में खाता खोलने के लिए न्यूनतम मासिक जमा सिर्फ 100 रुपये है। अच्छी बात यह है कि इसमें अधिकतम जमा की कोई सीमा तय नहीं है, यानी आपकी आमदनी जितनी अनुमति दे, आप उतना निवेश कर सकते हैं। यही वजह है कि यह स्कीम नौकरीपेशा लोगों, गृहिणियों और छोटे कारोबारियों के बीच काफी लोकप्रिय है।

    मैच्योरिटी और अवधि
    पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम की अवधि 5 साल यानी 60 महीने होती है। इस दौरान हर महीने तय तारीख तक राशि जमा करनी होती है। अगर किसी महीने किस्त चूक जाती है, तो मामूली जुर्माने के साथ उसे बाद में भी जमा किया जा सकता है।

    हर महीने 5000 रुपये जमा करने पर कितना मिलेगा?
    अगर आप पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम में हर महीने 5000 रुपये जमा करते हैं, तो 5 साल में आपकी कुल जमा राशि 3,00,000 रुपये होगी। इस पर मिलने वाले ब्याज को जोड़ दें, तो 60 महीने बाद आपको कुल करीब 3,56,830 रुपये मिलेंगे। यानी आपको लगभग 56,830 रुपये से ज्यादा का ब्याज लाभ होगा।

    क्यों चुनें पोस्ट ऑफिस RD?
    पोस्ट ऑफिस की RD स्कीम पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है क्योंकि यह सरकार द्वारा समर्थित है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ता और निवेशक को फिक्स रिटर्न मिलता है। बच्चों की पढ़ाई, शादी या किसी छोटे भविष्य लक्ष्य के लिए यह स्कीम एक मजबूत फाइनेंशियल प्लान बन सकती है।