Category: Economy

  • आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    आरबीआई के सख्त विदेशी मुद्रा नियमों का असर, डॉलर के मुकाबले रुपया 95.76 पर खुला, एक प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई भारतीय मुद्रा

    नई दिल्ली ।भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर अंकुश लगाने और कारोबार को व्यवस्थित करने के लिए उठाए गए सख्त कदमों के बाद सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया एक प्रतिशत से अधिक मजबूत होकर 95.76 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। हाल के दिनों में डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था और यह 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गई थी। ऐसे में केंद्रीय बैंक के नए उपायों के बाद रुपये में आई मजबूती को विदेशी मुद्रा बाजार के घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

    रुपये की मजबूती का असर ऑफशोर कारोबार में भी दिखाई दिया। एक महीने के नॉन-डिलीवेरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) बाजार में भारतीय मुद्रा एक समय 94.17 प्रति डॉलर तक पहुंच गई थी। इस स्तर पर रुपये में लगभग 2.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि, बाद में इसमें कुछ नरमी आई और बढ़त घटकर करीब 0.7 प्रतिशत रह गई। इससे स्पष्ट हुआ कि शुरुआती मजबूती के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहा।

    अक्टूबर की शुरुआत में आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन को लेकर कई नियामकीय बदलावों की घोषणा की थी। इन उपायों के तहत बिना हेजिंग वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व (एफईआरआर) नाम से एक नई व्यवस्था लागू की। इन कदमों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में अनियंत्रित गतिविधियों पर रोक लगाना और कारोबार को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

    नए निर्देशों के अनुसार, अधिकृत डीलर भारतीय रुपये से संबंधित ऐसे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक नहीं कर सकेंगे, जिसे पहले रद्द किया जा चुका है। हालांकि, अनुबंध की निर्धारित अवधि पूरी होने पर उसके रोलओवर की अनुमति बनी रहेगी। इस व्यवस्था के जरिए पहले रद्द किए गए अनुबंधों को दोबारा बुक करने से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया गया है।

    आरबीआई ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करने वाले ग्राहकों के लिए भी नियम सख्त किए हैं। अब अधिकृत डीलरों को ग्राहकों से लिखित घोषणा लेनी होगी कि जिस मूल जोखिम से बचाव के लिए हेजिंग की जा रही है, उसके लिए किसी अन्य अधिकृत डीलर के साथ पहले से हेजिंग नहीं की गई है। इस शर्त का उद्देश्य एक ही जोखिम के लिए अलग-अलग जगहों पर दोहरी हेजिंग की संभावना को नियंत्रित करना है।

    एफईआरआर व्यवस्था के तहत 20 लाख डॉलर से अधिक मूल्य वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए अधिकृत डीलरों को अनुबंध मूल्य के रुपये में समतुल्य का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व आरबीआई के पास रखना होगा। यह रिजर्व अनुबंध की समाप्ति तक प्रतिदिन बनाए रखना अनिवार्य है। केंद्रीय बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपयोगकर्ता कई लेनदेन के माध्यम से नियामकीय नियमों को दरकिनार करने का प्रयास करता है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

    शनिवार को आरबीआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था शुरू करने समेत कई अन्य कदम उठाए थे। ये उपाय ऐसे समय में किए गए, जब रुपया 97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। इससे पहले पिछले सप्ताह केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में भी बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर मौद्रिक नीति को और सख्त किया जा सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये की आगे की चाल पर इन उपायों का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है, हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर भविष्य की दिशा को निश्चित नहीं कहा जा सकता।

  • 12 अक्टूबर को शेयर बाजार में बनेगा कमाई का मौका या बढ़ेगी बिकवाली की चिंता, सेंसेक्स निफ्टी से लेकर निवेश की रणनीति तक समझें पूरा गणित

    12 अक्टूबर को शेयर बाजार में बनेगा कमाई का मौका या बढ़ेगी बिकवाली की चिंता, सेंसेक्स निफ्टी से लेकर निवेश की रणनीति तक समझें पूरा गणित


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी। बाजार में आगे तेजी जारी रहेगी या एक बार फिर बिकवाली का दबाव बढ़ेगा यह कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा। पिछले सप्ताह बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दिए थे। ऐसे में निवेशक सोमवार को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझानों और कारोबार की दिशा पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। हालांकि शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है और किसी भी तेजी को आगे जारी रहने की गारंटी नहीं माना जा सकता।

    इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबारी अपडेट भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों की नजर उन कंपनियों पर रहेगी जिनके राजस्व मुनाफे या ऑर्डर बुक में बदलाव की जानकारी सामने आई है। Avenue Supermarts यानी डीमार्ट के कारोबारी प्रदर्शन और Premier Energies तथा KEC International जैसे कारोबारियों से जुड़े अपडेट पर भी निवेशकों की दिलचस्पी रह सकती है। कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने पर संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन या भविष्य को लेकर चिंता सामने आने पर दबाव भी बन सकता है। इसलिए किसी शेयर में निवेश करने से पहले केवल खबर देखना पर्याप्त नहीं है बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और शेयर के मौजूदा मूल्यांकन को समझना भी जरूरी है।

    वैश्विक बाजारों के संकेत भी सोमवार की कारोबारी दिशा के लिए अहम रहेंगे। अमेरिका और एशियाई बाजारों की चाल के साथ डॉलर की स्थिति और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव पर निवेशकों की नजर रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। तेल की कीमतों में तेजी आने से भारत के आयात खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली भी बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

    निवेशकों के लिए सोमवार को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वे बाजार में जल्दबाजी से बचें। बाजार खुलते ही किसी शेयर में तेजी दिखाई देने पर तुरंत पैसा लगाने के बजाय कारोबार की दिशा और उपलब्ध जानकारी का आकलन करना बेहतर रहेगा। शेयर चुनते समय कंपनी की कमाई उसकी कर्ज स्थिति कारोबार की संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। केवल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं या बिना पुष्टि वाली खबरों के आधार पर निवेश करने से नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।

    नए निवेशकों को अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार निवेश की योजना बनानी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों और कंपनी की बुनियादी मजबूती पर ध्यान दे सकते हैं जबकि इंट्राडे ट्रेडिंग करने वालों के लिए स्टॉप लॉस और पूंजी प्रबंधन महत्वपूर्ण है। किसी एक शेयर में पूरी रकम लगाने के बजाय निवेश में विविधता रखने पर भी विचार किया जा सकता है। बाजार में मुनाफे की संभावना हमेशा जोखिम के साथ जुड़ी रहती है इसलिए उधार लेकर या जरूरी खर्चों के लिए रखी रकम से शेयर बाजार में निवेश करना उचित नहीं है।

    कुल मिलाकर 12 अक्टूबर को बाजार की दिशा समझने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी के शुरुआती रुझानों के साथ वैश्विक संकेतों कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के कारोबारी अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा। निवेश का फैसला अफवाहों के बजाय विश्वसनीय जानकारी और अपनी वित्तीय योजना के आधार पर लेना समझदारी होगी।

  • आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा

    आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जनसभा के लिए आजमगढ़ के कोटिला के पास स्थित सिरसल क्लब ग्राउंड को चुना गया है। पार्टी की ओर से कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।

    कार्यक्रम की तैयारियों को लगभग पूरा बताया गया है। एआईएमआईएम के जिला अध्यक्ष नदीम अहमद के अनुसार, जनसभा शाम चार बजे से शुरू होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी के शाम करीब छह बजे कार्यक्रम में पहुंचने का कार्यक्रम है। नदीम अहमद ने कहा कि ओवैसी अल्लामा शिब्ली नोमानी की ऐतिहासिक धरती से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान की शुरुआत करेंगे। हालांकि, जनसभा में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल होते हैं, यह कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।

    आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम ने राज्य में अलग राजनीतिक गठबंधन बनाने का संकेत दिया है। जिला अध्यक्ष नदीम अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी ने खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, इन दलों ने एआईएमआईएम को अपने साथ शामिल करने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में पार्टी अब तीसरा मोर्चा बनाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। उनके बयान के अनुसार, पार्टी चुनाव में गठबंधन के विकल्प पर आगे बढ़ रही है।

    आजमगढ़ की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी नदीम अहमद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अब जिले में पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। उनका कहना था कि आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का गढ़ मानना उचित नहीं है और पार्टी नेतृत्व ने जिले के विकास की अपेक्षा अपने गृह क्षेत्र सैफई पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में आजमगढ़ के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ। नदीम अहमद के मुताबिक, जिले के लोग अब इन मुद्दों को समझ रहे हैं।

    नदीम अहमद ने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ओवैसी के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन तैयार हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह गठबंधन आजमगढ़ की अधिकतर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेगा। हालांकि, यह पार्टी पदाधिकारी का चुनावी दावा है और इसके परिणाम का आकलन मतदान के बाद ही किया जा सकेगा।

    आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी आजमगढ़ सदर और लालगंज, दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में एआईएमआईएम की जनसभा और तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा आगामी चुनाव से पहले जिले में पार्टी की रणनीति को सामने लाती है।

  • रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती

    नई दिल्ली ।डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना है। इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए गए हैं। इन उपायों से रुपये को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसकी मजबूती की गारंटी नहीं दी जा सकती।

    रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पैसा निकालने जैसे कारण बताए गए हैं। भारत को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। ऐसे में तेल कंपनियों की डॉलर मांग का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है। RBI की नई व्यवस्था इसी मांग को सीधे पूरा करने और बाजार में अतिरिक्त दबाव घटाने की कोशिश है।

    इस व्यवस्था के तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। अब तक तेल कंपनियां विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के भुगतान के लिए बाजार से डॉलर खरीदती थीं। बड़ी कंपनियों की एक साथ बढ़ी मांग से डॉलर की उपलब्धता और रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक से सीधे डॉलर मिलने पर बाजार में उनकी खरीद की जरूरत कम हो सकती है।

    RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर भी सीमाएं सख्त की हैं। जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं होती, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा, रुपये से संबंधित कुछ रद्द किए गए विदेशी मुद्रा अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाने का फैसला भी किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक गतिविधियों को सीमित करना है।

    विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के कुछ सौदों के लिए बैंकों को 20 प्रतिशत राशि रिजर्व के रूप में रखने का नियम भी लागू किया गया है। यह व्यवस्था पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर लागू होगी। दो मिलियन डॉलर से अधिक के कुछ हेजिंग सौदे इससे प्रभावित हो सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव की लागत बढ़ने की आशंका है। स्टील, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।

    रुपये की आगे की चाल को लेकर कुछ बैंकर्स ने डॉलर के मुकाबले 95 से 95.50 के स्तर का अनुमान जताया है। हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग पर दबाव बना रह सकता है। इसी तरह, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने या वहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं। इसके विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने पर डॉलर की आवक को समर्थन मिल सकता है।

    RBI रुपये को स्थिर रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देना चाहता। ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी से होम लोन, कार लोन और कारोबारी कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत और लोगों के खर्च पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने वाले उपायों पर जोर दिया है। रुपये को स्थायी राहत कितनी मिलेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

  • 11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट

    नई दिल्ली ।रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर वाहन चालकों की नजर अपने शहर के ताजा भाव पर है। रोजाना वाहन से सफर करने वाले लोगों से लेकर लंबी दूरी की यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए ईंधन की कीमतें खर्च का अहम हिस्सा होती हैं। उपलब्ध दरों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल के भाव में अंतर बना हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।

    नोएडा में पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.44 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 99.82 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रमुख शहरों में दोनों ईंधनों की कीमतें एक समान नहीं हैं।

    चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.36 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में ईंधन खरीदने वाले वाहन चालकों को अपने स्थानीय पंप पर लागू दर के अनुसार भुगतान करना होता है।

    बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। जयपुर में पेट्रोल का भाव 112.66 रुपये और डीजल का दाम 98.25 रुपये प्रति लीटर है। बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इस तरह दिल्ली, नोएडा, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना, जयपुर और बेंगलुरु में ईंधन के अलग-अलग भाव सामने आए हैं।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर के पीछे कई कारण होते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले कर अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा डीलर का कमीशन और ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी लागत भी कीमत तय करने में शामिल होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में एक ही ईंधन के लिए ग्राहकों को अलग-अलग रकम चुकानी पड़ सकती है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का भी पेट्रोल और डीजल की लागत पर असर पड़ता है। हालांकि, कच्चे तेल के भाव में बदलाव का घरेलू खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव और पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतों के बीच सीधा और तत्काल संबंध होना जरूरी नहीं है।

    ईंधन की कीमतें बढ़ने पर आम लोगों के परिवहन खर्च पर असर पड़ सकता है। पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने वालों का बजट प्रभावित होता है, जबकि डीजल की कीमतें ट्रक, बस और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। ईंधन की खपत कम रखने के लिए वाहन की नियमित सर्विस कराना, टायरों में उचित हवा बनाए रखना और लंबे समय तक इंजन चालू रखकर वाहन खड़ा करने से बचना उपयोगी हो सकता है।

  • सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    नई दिल्ली । रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों पर खरीदारी करने वालों और निवेशकों की नजर बनी हुई है। त्योहारों और शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव जानना जरूरी है। अलग-अलग बाजारों और रेट ट्रैकर्स पर कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में सोना या चांदी खरीदने से पहले संबंधित शहर के ताजा भाव की जानकारी लेना उपयोगी रहता है।

    11 अक्टूबर के बाजार आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.37 लाख रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। ये कीमतें उपलब्ध बाजार जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग कारोबारी स्रोतों पर सोने के भाव में अंतर होने के कारण खरीदारी से पहले स्थानीय जौहरी से दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    सोने की शुद्धता के आधार पर उसके इस्तेमाल में भी अंतर होता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है। हालांकि, यह अपेक्षाकृत नरम होता है, इसलिए इससे सामान्य तौर पर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मजबूत आभूषण नहीं बनाए जाते। निवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले सोने के सिक्कों और बार में आमतौर पर 24 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है। इसकी कीमत जानना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

    दूसरी ओर, 22 कैरेट सोने में थोड़ी मात्रा में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे सोना अधिक मजबूत बनता है और उससे गहने तैयार करना आसान होता है। इसी वजह से पारंपरिक आभूषणों और शादी-ब्याह में पहने जाने वाले गहनों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आम है। वहीं, 18 कैरेट सोने में भी दूसरी धातुओं का मिश्रण होता है। इसका उपयोग अलग-अलग डिजाइन के आभूषण बनाने में किया जाता है। इन तीनों श्रेणियों की कीमतों में शुद्धता के अंतर के कारण फर्क रहता है।

    चांदी की कीमतों की बात करें तो 11 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी का भाव 2,25,820 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 2,22,575 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में चांदी की कीमत 2,26,100 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। इन दरों में अंतर अलग-अलग बाजारों और मूल्य निर्धारण के आधार पर हो सकता है। इसलिए खरीदारी के समय संबंधित बाजार का भाव जांचना जरूरी है।

    सोना या चांदी खरीदते समय केवल घोषित बाजार भाव के आधार पर फैसला करना पर्याप्त नहीं है। गहने खरीदने वाले ग्राहकों को सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और मेकिंग चार्ज की जानकारी भी लेनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है। इसके अलावा, दिन के दौरान कीमतों में बदलाव संभव है। इसलिए भुगतान करने से पहले जौहरी से उस समय लागू दर और पूरे बिल की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

  • मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में अदाणी सीमेंट ने 15,000 सीमेंट बैग से बनाई मां दुर्गा की 70 फीट ऊंची आकृति

    मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में अदाणी सीमेंट ने 15,000 सीमेंट बैग से बनाई मां दुर्गा की 70 फीट ऊंची आकृति


    नई दिल्ली ।
    नवरात्रि और दुर्गा पूजा 2026 के अवसर पर अदाणी सीमेंट ने मध्य प्रदेश के कायमोर प्लांट में मां दुर्गा को समर्पित एक अनूठी कलाकृति तैयार की है। 15,000 सीमेंट बैग की मदद से बनाई गई इस विशाल आकृति के माध्यम से आस्था, शक्ति और विश्वास का संदेश देने का प्रयास किया गया है। कंपनी की इस पहल को ‘जहां विश्वास, वहां शक्ति’ नाम दिया गया है। इस रचना की खासियत इसका आकार और इसे तैयार करने का तरीका है, जिसमें हजारों सीमेंट बैग मिलकर देवी दुर्गा की एक विशाल छवि बनाते हैं।

    यह कलाकृति 70 फीट लंबी और 70 फीट चौड़े क्षेत्र में तैयार की गई है। इसमें अंबुजा सीमेंट और एसीसी के बैगों का इस्तेमाल करते हुए कुल 750 टन सीमेंट का प्रतीकात्मक उपयोग किया गया। इस पूरी रचना को आकार देने में लगभग 12,600 मानव-घंटों का सामूहिक श्रम लगा। कर्मचारियों ने सीमेंट बैगों को निर्धारित स्थानों पर व्यवस्थित करके देवी की आकृति तैयार की। इस प्रक्रिया में अलग-अलग बैगों को इस तरह रखा गया कि वे मिलकर एक संपूर्ण और स्पष्ट छवि का रूप ले सकें।

    इस स्थापना की सबसे खास बात यह है कि जमीन से देखने पर सीमेंट के बैग अलग-अलग इकाइयों की तरह नजर आते हैं, लेकिन ऊंचाई से देखने पर उनका संयोजन मां दुर्गा की विशाल आकृति में बदल जाता है। इस कलाकृति में देवी का मुकुट, आंखें, दस भुजाएं और उनका व्यापक स्वरूप बारीकी से उकेरा गया है। अलग-अलग हिस्सों में व्यवस्थित किए गए बैगों के माध्यम से देवी की पूरी छवि तैयार की गई है। इस तरह यह रचना छोटे-छोटे तत्वों के सामूहिक संयोजन से एक बड़ी कलात्मक प्रस्तुति बनाने का उदाहरण पेश करती है।

    कंपनी ने कलाकृति को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया और उसके अंतिम स्वरूप को एक डिजिटल फिल्म में दर्ज किया है। इसमें शुरुआत में कर्मचारियों को जमीन पर सीमेंट बैग व्यवस्थित करते हुए दिखाया गया है। इसके बाद कैमरा धीरे-धीरे ऊपर उठता है और अलग-अलग बैगों से बनी मां दुर्गा की पूरी आकृति सामने आती है। इस फिल्म में निर्माण प्रक्रिया के साथ कलाकृति का हवाई दृश्य भी शामिल किया गया है। इसे डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया पर साझा करने की योजना है।

    अदाणी सीमेंट के अनुसार, इस अभियान में उसके दो प्रमुख ब्रांड अंबुजा सीमेंट और एसीसी को एक साझा रचनात्मक मंच पर प्रस्तुत किया गया है। अभियान में ‘शक्ति’ को अंबुजा सीमेंट की मजबूती के वादे से जोड़ा गया है, जबकि ‘विश्वास’ एसीसी की नौ दशकों पुरानी विश्वसनीयता और विरासत का प्रतीक है। मां दुर्गा की छवि को इस प्रस्तुति का केंद्र बनाया गया है, जिन्हें शक्ति, संरक्षण और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

    कंपनी का कहना है कि इस पहल के जरिए सीमेंट को केवल भवन और बुनियादी ढांचे के निर्माण से जुड़ी सामग्री के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास, शक्ति और समर्पण जैसी भावनाओं से जोड़कर भी प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के अवसर पर तैयार की गई यह कलाकृति परंपरा और सामूहिक प्रयास के महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही, यह अंबुजा सीमेंट और एसीसी की पहचान को एक साथ सामने लाने का माध्यम भी बनी है।

  • महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी बाजार की नजर, आठ हफ्ते बाद सेंसेक्स-निफ्टी में लौटी तेजी

    महंगाई के आंकड़े, कच्चे तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी बाजार की नजर, आठ हफ्ते बाद सेंसेक्स-निफ्टी में लौटी तेजी


    नई दिल्ली:
    भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला सप्ताह अहम रहने वाला है। निवेशकों की नजर भारत और अमेरिका से जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। इन कारकों के साथ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियां बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं। अमेरिका में महंगाई, घरों की बिक्री और खुदरा बिक्री से जुड़े आंकड़े जारी होंगे। वहीं, भारत में खुदरा और थोक महंगाई, बेरोजगारी, व्यापार संतुलन तथा विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े सामने आएंगे। इन आंकड़ों से आर्थिक स्थिति के बारे में संकेत मिल सकते हैं, जिन पर निवेशकों की प्रतिक्रिया बाजार में उतार-चढ़ाव के रूप में दिखाई दे सकती है। बीते सप्ताह भारतीय बाजार में तेजी दर्ज की गई थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों साप्ताहिक आधार पर बढ़त के साथ बंद हुए, जो आठ सप्ताह बाद पहली बार हुआ। ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशक पिछले सप्ताह की तेजी के साथ नए आर्थिक संकेतों पर भी नजर रखेंगे।

    कच्चे तेल की कीमत अगले सप्ताह बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारकों में शामिल रहेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है। तेल की कीमतों में बदलाव का असर निवेशकों की धारणा और बाजार की गतिविधियों पर पड़ सकता है। इस बीच रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी चर्चा में है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी बातचीत सफल रही है। उनके मुताबिक, रूस अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तुरंत तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और उसके तुरंत बाद दस लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। इस घोषणा के संभावित प्रभाव को लेकर बाजार की नजर बनी रह सकती है। जानकारों के मुताबिक, रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ने से वैश्विक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कीमतों की वास्तविक दिशा बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    अगले सप्ताह निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी एक अहम संकेतक रहेगी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड लगातार पांच प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। निवेशक इसके स्तर और इसमें होने वाले बदलावों पर नजर रखेंगे। इसके साथ अमेरिका के महंगाई आंकड़े, खुदरा बिक्री और घरों की बिक्री से जुड़े आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं। भारत में खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़ों के अलावा बेरोजगारी, व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा भंडार की जानकारी भी जारी होने वाली है। इन आंकड़ों के आधार पर निवेशक घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन कर सकते हैं। कच्चे तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव के बीच इन आर्थिक संकेतकों पर बाजार की प्रतिक्रिया आने वाले सप्ताह में देखने को मिल सकती है।

    बीते सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में बढ़त दर्ज की गई। सेंसेक्स 562.63 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की तेजी के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी में 98.50 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की मजबूती रही और यह 22,520.45 के स्तर पर बंद हुआ। आठ सप्ताह बाद यह पहला मौका था, जब दोनों प्रमुख सूचकांक साप्ताहिक आधार पर बढ़त के साथ बंद हुए। क्षेत्रवार प्रदर्शन में बीएसई टेलीकॉम सबसे आगे रहा और इसमें 3.72 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बीएसई एफएमसीजी में 2.43 प्रतिशत, बीएसई पीएसयू बैंक में 2.31 प्रतिशत, बीएसई फाइनेंशियल सर्विसेज में 1.03 प्रतिशत और बीएसई आईटी में 0.76 प्रतिशत की बढ़त रही। हालांकि, सभी क्षेत्रों में तेजी नहीं रही। बीएसई रियल्टी में 4.19 प्रतिशत और बीएसई मेटल में 4.18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई यूटिलिटी 2.48 प्रतिशत, बीएसई कमोडिटीज 2.46 प्रतिशत और बीएसई पावर 2.22 प्रतिशत कमजोर हुए। आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा तय करने में आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों की भूमिका अहम रह सकती है।

  • सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर

    सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर


    नई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लैटिनम खरीदने वालों के लिए कीमती धातुओं के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को आयात के समय मिलने वाली अग्रिम IGST छूट समाप्त कर दी है। अब कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का भुगतान करना होगा। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही इस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बदलाव की जानकारी दी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी सीधे 3% महंगा हो जाएगा। कीमतों पर वास्तविक असर आयात लागत और कारोबारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    पहले क्या था नियम, अब क्या बदला?

    साल 2017 में सरकार ने सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम IGST भुगतान से छूट दी थी। बाद में इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल किया गया। इसके तहत बैंक और अधिकृत एजेंसियां आयात के समय IGST का अग्रिम भुगतान किए बिना सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगा सकती थीं।

    अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद आयात करने वाले बैंकों और संबंधित एजेंसियों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% IGST का भुगतान करना होगा। यानी आयात के वक्त ही टैक्स चुकाने के लिए पर्याप्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

    राजस्व सचिव के अनुसार, बैंक 1 अप्रैल 2026 से इस व्यवस्था के तहत टैक्स चुका रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इसकी जानकारी दी।

    सरकार ने क्यों खत्म की टैक्स छूट?

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से होने वाले कीमती धातुओं के आयात में टैक्स व्यवस्था को समान बनाना है। पहले बैंकों के माध्यम से आयात करने वालों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में विशेष सुविधा मिलती थी। अब इस अंतर को समाप्त करने की कोशिश की गई है।

    गुजरात की GIFT सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार चाहती है कि टैक्स नियमों के कारण किसी एक आयात माध्यम को अनुचित लाभ न मिले और सभी माध्यमों के लिए व्यवस्था अधिक समान हो।

    बैंकों और आयातकों पर क्या पड़ेगा असर?

    इस बदलाव का सबसे प्रत्यक्ष असर बैंकों और आयातकों की नकदी व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले अग्रिम IGST भुगतान से मिलने वाली राहत के कारण आयात के समय उतनी रकम की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। अब टैक्स का भुगतान कस्टम्स क्लीयरेंस के दौरान करना होगा।

    हालांकि, पात्र कारोबारियों को लागू नियमों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से चुकाए गए टैक्स का लाभ मिल सकता है। लेकिन टैक्स पहले जमा करना होगा और उसका समायोजन बाद में हो सकता है। इससे कारोबारियों की कुछ रकम अस्थायी रूप से फंस सकती है।

    बड़े पैमाने पर सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। यदि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ता है, तो उनकी वित्तीय लागत भी बढ़ सकती है। इस लागत का कितना हिस्सा आगे ग्राहकों तक पहुंचेगा, यह कारोबारियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

    क्या ग्राहकों को सोना-चांदी 3% महंगा मिलेगा?

    नहीं, केवल अग्रिम IGST छूट खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सोना-चांदी की खुदरा कीमत सीधे 3% बढ़ जाएगी। यह बदलाव आयात के समय टैक्स भुगतान की व्यवस्था से जुड़ा है। अंतिम कीमत कई दूसरे कारकों से भी तय होती है।

    सोने-चांदी के दाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात पर लागू अन्य शुल्कों और घरेलू मांग का असर पड़ता है। यदि आयातकों की लागत या वित्तीय खर्च बढ़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा बाजार की कीमतों में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यह अपने आप में तय नहीं है कि पूरी अतिरिक्त लागत ग्राहकों से ही वसूली जाएगी।

    इसलिए खरीदारों को कीमतों में संभावित बदलाव का आकलन करते समय केवल इस टैक्स संबंधी फैसले को आधार नहीं बनाना चाहिए।

    त्योहार और शादी के सीजन में क्यों अहम है बदलाव?

    भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के दौरान सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत में होने वाला बदलाव घरेलू बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

    कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा खर्च और व्यापार घाटे से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात के अलग-अलग माध्यमों पर समान टैक्स व्यवस्था लागू करने का कदम कारोबारियों की लागत और बाजार की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है।

    आम खरीदार क्या ध्यान रखें?

    सोना या चांदी खरीदने से पहले ग्राहक इन बातों पर ध्यान दें:

    बाजार भाव: खरीदारी के दिन सोने या चांदी का ताजा भाव जांचें।
    मेकिंग चार्ज: आभूषणों पर लगने वाले मेकिंग चार्ज की जानकारी लें।
    लागू टैक्स: बिल में दर्ज टैक्स और अन्य शुल्कों की जांच करें।
    अंतिम कीमत: केवल 3% IGST से जुड़ी खबर के आधार पर कीमतों में समान अनुपात में बढ़ोतरी मानकर न चलें।

    कुल मिलाकर, अग्रिम IGST छूट समाप्त होने से बैंकों और आयातकों की नकदी जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन आम खरीदारों के लिए सोना-चांदी कितना महंगा होगा, यह बाजार की परिस्थितियों और कारोबारियों की प्रतिक्रिया से तय होगा।

  • भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार इस साल डॉलर के लिहाज से 15.6 प्रतिशत गिरावट के बावजूद अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अगले वित्त वर्ष में कंपनियों की आय में 17 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। बाजार में गिरावट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि, बैंक ऋण, कॉरपोरेट कर्ज और मशीनरी आयात से जुड़े आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहे हैं। इन संकेतकों के आधार पर भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया गया है।

    एक वैश्विक इक्विटी रणनीति रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में भारत को अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाले जेफरीज के इक्विटी रणनीति विभाग के ग्लोबल प्रमुख क्रिस वुड ने एमएससीआई एशिया पैसिफिक, जापान को छोड़कर, इंडेक्स में भारत के लिए 12 प्रतिशत आवंटन की सिफारिश की। इस इंडेक्स में भारत का भार 10.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट के बावजूद देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं बनी हुई हैं और उपलब्ध आर्थिक आंकड़े भी मजबूत स्थिति दर्शाते हैं।

    स्थानीय मुद्रा में निफ्टी इस साल 13.4 प्रतिशत नीचे है। इस प्रदर्शन के आधार पर इंडोनेशिया के बाद भारतीय बाजार क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में दूसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया के बाजार में इस अवधि के दौरान 42.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के आधार पर भारतीय बाजार की गिरावट 15.6 प्रतिशत बताई गई है। इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी बरकरार है। इस आकलन में आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आय में संभावित बढ़ोतरी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 11 से 12 प्रतिशत रहने की संभावना बताई गई है। कॉरपोरेट आय के मामले में चालू वित्त वर्ष के दौरान 14 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह दर बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनियों की आय में संभावित तेजी शेयर बाजार के प्रदर्शन के लिए अहम संकेतक मानी जा रही है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान हैं और वास्तविक वृद्धि आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    बैंकिंग क्षेत्र के आंकड़ों में भी ऋण गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई गई है। सितंबर के मध्य तक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में कॉरपोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को दिए गए कर्ज में 25.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी अवधि में जमा राशि 17.3 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट ऋण में यह वृद्धि इस संभावना की ओर संकेत करती है कि निजी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय का चक्र शुरू हो सकता है।

    मशीनरी आयात के आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में बदलाव का संकेत देते हैं। अगस्त में समाप्त 12 महीनों के दौरान भारत का मशीनरी आयात 66 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 29 अरब डॉलर था। इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रुपये को लेकर भी आकलन प्रस्तुत किया गया है। क्रिस वुड के मुताबिक, वर्ष 2025 की शुरुआत से 10.7 प्रतिशत गिरावट के बाद रुपया संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के लिए अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।