Category: Economy

  • मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर

    मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 7 अगस्त का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक दोनों संकेतों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम से तय हो सकती है।

    यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर इस कारोबारी सत्र में खास नजर रहने की संभावना है। यदि इन प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा स्टॉक्स निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में रह सकते हैं। इसलिए निवेशकों को परिणाम घोषित करने वाली कंपनियों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूत समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है। इसके अलावा रुपये की चाल और डॉलर इंडेक्स पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है इसलिए जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को तकनीकी स्तरों पर नजर रखते हुए ट्रेडिंग करनी चाहिए। बिना शोध और जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

    बाजार में सफलता पाने के लिए धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना आवश्यक है। यदि निवेशक सही रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं तो बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर अवसर तलाश सकते हैं।

    कुल मिलाकर 7 अगस्त का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी लेकिन मजबूत सेक्टरों और गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। समझदारी से लिया गया निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मददगार साबित हो सकता है।

  • बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    बैंक ऑफ बड़ौदा में 206 पदों पर भर्ती शुरू, सीनियर मैनेजर समेत कई पदों के लिए 26 अगस्त तक आवेदन

    नई दिल्ली । बैंकिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने विभिन्न विभागों में कुल 206 पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत डिजिटल बैंकिंग, सुविधा प्रबंधन, सूचना सुरक्षा, सुरक्षा, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट और कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग जैसे प्रमुख विभागों में योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति की जाएगी। इच्छुक अभ्यर्थी 26 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    भर्ती के तहत सबसे अधिक 88 पद सुविधा प्रबंधन विभाग में भरे जाएंगे। इसके अलावा सुरक्षा विभाग में 54, डिजिटल बैंकिंग विभाग में 19, सूचना सुरक्षा विभाग में 16, एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट ऑफिस में 14 तथा कॉर्पोरेट अकाउंट्स एवं टैक्स प्लानिंग विभाग में 15 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इनमें मैनेजर, सीनियर मैनेजर, चीफ मैनेजर, टेक्निकल ऑफिसर, डेटा साइंटिस्ट, डेटा क्वालिटी एनालिस्ट, डिजिटल प्रोडक्ट मैनेजर और टैक्सेशन से जुड़े कई पद शामिल हैं।

    डिजिटल बैंकिंग विभाग में डिजिटल प्रोडक्ट और डिजिटल लेंडिंग से जुड़े पदों पर भर्ती होगी। सुविधा प्रबंधन विभाग में सिविल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से संबंधित तकनीकी अधिकारियों और प्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी। सूचना सुरक्षा विभाग में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए अवसर उपलब्ध हैं, जबकि एंटरप्राइज डेटा मैनेजमेंट विभाग में डेटा साइंटिस्ट, डेटा प्रोफाइलिंग, बिजनेस इंटेलिजेंस और डैशबोर्ड डेवलपमेंट से जुड़े अनुभवी उम्मीदवारों की भर्ती होगी।

    इन पदों के लिए उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र के अनुसार बीई, बीटेक, बीसीए, एमसीए, बीएससी, एमएससी, डेटा साइंस, कंप्यूटर साइंस, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी, आईसीडब्ल्यूए, ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। इसके साथ ही पद के अनुसार दो से दस वर्ष तक का कार्य अनुभव भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा भी पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। न्यूनतम आयु 23 से 31 वर्ष तथा अधिकतम आयु 35 से 43 वर्ष तक रखी गई है। आयु की गणना 1 अगस्त के आधार पर होगी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया में ऑनलाइन लिखित परीक्षा, साइकोमेट्रिक टेस्ट, व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज सत्यापन तथा आवश्यकता अनुसार अन्य मूल्यांकन शामिल किए जाएंगे। अंतिम चयन के बाद उम्मीदवारों को पद के अनुसार 48,480 रुपये से लेकर 1,20,940 रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा बैंक की सेवा शर्तों के अनुसार अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।

    आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। सामान्य, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 850 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग, पूर्व सैनिक और महिला अभ्यर्थियों के लिए शुल्क 175 रुपये रखा गया है। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को सभी आवश्यक दस्तावेज, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अनुभव संबंधी जानकारी सही तरीके से दर्ज करनी होगी। बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी और प्रतिष्ठित करियर की तलाश कर रहे योग्य उम्मीदवारों के लिए यह भर्ती एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है।

  • PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी

    PhonePe का बड़ा ऐलान, एक ही ऐप पर खुलेगी एफडी और 100 रुपये रोजाना से शुरू होगी डिजिटल आरडी


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करते हुए फोनपे ने अपने प्लेटफॉर्म पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) डिस्ट्रीब्यूशन सेवा शुरू कर दी है। इस नई सुविधा के जरिए अब ग्राहक सीधे फोनपे ऐप पर विभिन्न बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की एफडी योजनाओं की तुलना कर निवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही कंपनी ने शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक के सहयोग से एक नया डिजिटल माइक्रो-सेविंग्स प्रोडक्ट ‘डेली रिकरिंग डिपॉजिट (डेली आरडी)’ भी लॉन्च किया है, जिसमें केवल 100 रुपये प्रतिदिन से बचत शुरू की जा सकती है।

    नई सुविधा का उद्देश्य निवेश प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाना है। अब ग्राहकों को अलग-अलग बैंकों की वेबसाइट या शाखाओं में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे एक ही ऐप पर उपलब्ध विभिन्न एफडी विकल्पों की तुलना कर अपनी जरूरत और निवेश अवधि के अनुसार उपयुक्त योजना चुन सकेंगे। इससे निवेश की प्रक्रिया तेज, सुविधाजनक और अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    फोनपे के अनुसार, ऐप के माध्यम से खोली गई एफडी पर भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के तहत डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (डीआईसीजीसी) की व्यवस्था के अनुसार पात्र जमा राशि पर 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर भी मिलेगा। इसके अलावा उपयोगकर्ता एक ही प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग बैंकों की एफडी को आसानी से ट्रैक और प्रबंधित कर सकेंगे।

    कंपनी ने छोटे निवेशकों, युवाओं, मिलेनियल्स, जेन-जी और नियमित बचत की आदत विकसित करने वाले ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए डेली आरडी की शुरुआत की है। इस योजना में प्रतिदिन 100 रुपये से लेकर 1,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। यह सुविधा यूपीआई ऑटोपे आधारित है, जिससे तय राशि स्वतः निवेश होती रहेगी और ग्राहकों को बार-बार भुगतान करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

    डेली आरडी की एक विशेषता यह भी है कि निवेशक जरूरत पड़ने पर केवल सात दिन बाद ही अपनी जमा राशि निकाल सकते हैं। यदि कोई ग्राहक लगातार 15 दिनों तक निवेश नहीं कर पाता है, तब भी उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। साथ ही, वह किसी भी समय अपना यूपीआई ऑटोपे मैंडेट बंद करने का विकल्प भी चुन सकता है। इससे यह योजना लचीली और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनती है।

    फोनपे का कहना है कि उसका उद्देश्य देश के अधिक से अधिक लोगों तक सुरक्षित और सरल डिजिटल निवेश सुविधाएं पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि फिक्स्ड डिपॉजिट लंबे समय से भारतीय परिवारों की पसंदीदा बचत योजना रही है और अब इसे पूरी तरह डिजिटल बनाकर निवेशकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराया जाएगा।

    एफडी या डेली आरडी शुरू करने के लिए ग्राहक फोनपे ऐप के होम स्क्रीन पर उपलब्ध “म्यूचुअल फंड्स एंड डिपॉजिट” सेक्शन में जाकर अपनी पसंद का विकल्प चुन सकते हैं। यहां सात दिन से लेकर दस वर्ष तक की अवधि वाली एफडी उपलब्ध होगी। निवेश प्रक्रिया के दौरान पैन और आधार के माध्यम से डिजिटल सत्यापन, नॉमिनी जोड़ने तथा यूपीआई या नेट बैंकिंग के जरिए भुगतान की सुविधा भी मिलेगी। कंपनी का कहना है कि जरूरत पड़ने पर निवेश की गई राशि को निर्धारित नियमों के अनुसार समय से पहले भी निकाला जा सकेगा।

  • भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा

    भारतीय कंपनियों के पहली तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर, बैंकिंग और मेटल सेक्टर की मजबूत बढ़त से बढ़ा कॉरपोरेट मुनाफा


    नई दिल्ली ।
    वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र का प्रदर्शन बाजार की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, धातु, सूचना प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मजबूत वृद्धि ने कंपनियों के समग्र मुनाफे को मजबूती दी। हालांकि तेल विपणन कंपनियों को ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन अन्य प्रमुख क्षेत्रों के अच्छे प्रदर्शन से कुल आय पर इसका प्रभाव काफी हद तक संतुलित हो गया।

    तिमाही नतीजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यदि तेल विपणन कंपनियों को अलग कर दिया जाए तो भारतीय कंपनियों की आय में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों के दबाव के बावजूद अधिकांश कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला है।

    प्रमुख क्षेत्रों में सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाओं का रहा, जहां आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। धातु क्षेत्र ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 53 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 11 प्रतिशत और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे समग्र कॉरपोरेट आय को मजबूती मिली।

    अब तक अपने तिमाही परिणाम घोषित करने वाली निफ्टी की कई प्रमुख कंपनियों ने भी बाजार की उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है। औसतन कंपनियों के मुनाफे में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि विश्लेषकों का अनुमान इससे काफी कम था। बड़ी संख्या में कंपनियां अपने अनुमानित लाभ से बेहतर नतीजे देने में सफल रहीं, जबकि अपेक्षाकृत कम कंपनियों के परिणाम अनुमान से कमजोर रहे।

    हालांकि सभी क्षेत्रों की स्थिति समान नहीं रही। तेल विपणन कंपनियों के अलावा सीमेंट, विमानन और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों पर लागत और मांग से जुड़ी चुनौतियों का असर देखने को मिला। विशेष रूप से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बनाया, जिससे इन क्षेत्रों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा।

    बाजार पूंजीकरण के आधार पर देखें तो बड़ी कंपनियों ने स्थिर प्रदर्शन करते हुए अपनी आय में वृद्धि दर्ज की। दूसरी ओर मिड-कैप कंपनियों के समग्र आंकड़ों में गिरावट दिखाई दी, जिसका प्रमुख कारण तेल विपणन कंपनियों का कमजोर प्रदर्शन रहा। हालांकि इन कंपनियों को अलग करने पर मिड-कैप श्रेणी की अधिकांश कंपनियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिससे स्पष्ट होता है कि व्यापक स्तर पर कारोबार की स्थिति सकारात्मक बनी हुई है।

    स्मॉल-कैप कंपनियों ने इस तिमाही में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। इन कंपनियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें वित्तीय क्षेत्र की मजबूती और अनुकूल तुलनात्मक आधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि छोटे और मध्यम आकार के कारोबारों में भी कारोबारी गतिविधियां बेहतर हो रही हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि पहली तिमाही के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। हालांकि आने वाले महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और पूंजी बाजार में बढ़ती गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। इसके बावजूद मौजूदा तिमाही के परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती का सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

  • Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    Stock Market Closing: बैंकिंग शेयरों की तेजी और क्रूड ऑयल में नरमी से लगातार दूसरे दिन मजबूत हुआ भारतीय बाजार

    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों की सकारात्मक धारणा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के चलते प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 373.76 अंकों की बढ़त के साथ 78,954.76 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 11.35 अंक चढ़कर 24,636.00 पर पहुंच गया। निफ्टी का 24,600 के ऊपर बंद होना बाजार की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

    कारोबार के दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम चरण में चुनिंदा हैवीवेट और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से सूचकांक हरे निशान में बंद हुए। इससे पहले मंगलवार की गिरावट के बाद भी बाजार ने वापसी करते हुए लगातार दूसरे दिन बढ़त दर्ज की है। निवेशकों का मानना है कि घरेलू आर्थिक संकेतकों और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से आगे भी बाजार को समर्थन मिल सकता है।

    सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, फाइनेंशियल सर्विसेज और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने भी सकारात्मक प्रदर्शन किया। दूसरी ओर मीडिया, रियल्टी, ऑटो, मेटल और आईटी सेक्टर में मुनाफावसूली के कारण गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद व्यापक बाजार में स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में एसबीआई, बीईएल, टाइटन, श्रीराम फाइनेंस, सिप्ला और इटरनल में अच्छी बढ़त दर्ज की गई। वहीं पावर ग्रिड, टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, टीसीएस और बजाज ऑटो के शेयर दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मजबूत मूलभूत आधार वाली कंपनियों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और पश्चिम एशिया में समुद्री व्यापार को सामान्य बनाने की दिशा में जारी कूटनीतिक प्रयासों ने बाजार की धारणा को मजबूत किया है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने और कंपनियों की लागत घटने की उम्मीद बढ़ी है, जिसका सकारात्मक असर कॉर्पोरेट मुनाफे पर पड़ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बाजार में बना हुआ है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के स्थिर नीतिगत रुख और आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेतों ने भी निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। बैंकिंग और ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में आई खरीदारी इसी भरोसे को दर्शाती है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की संभावना निवेशकों को आकर्षित कर सकती है।

    हालांकि कुछ क्षेत्रों में मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन स्मॉलकैप और चुनिंदा वैल्यू शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। विशेष रूप से ऊर्जा, टेलीकॉम और रिटेल से जुड़े कारोबार में लंबी अवधि की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी। इससे बाजार का समग्र रुख सकारात्मक बना रहा और प्रमुख सूचकांक लगातार दूसरे दिन बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहे।

  • ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    ओल्ड मॉन्क, रॉयल चैलेंज और मैकडॉवेल्स समेत कई शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक, एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को लेकर देश में नियामकीय सख्ती के बीच भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने कई लोकप्रिय शराब उत्पादों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने नियमों के कथित उल्लंघन, भ्रामक दावों और बिना अनुमति वाले फ्लेवर के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में कई प्रसिद्ध शराब उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई के बाद शराब उद्योग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित कंपनियों से जवाब भी मांगा जा रहा है।

    एफएसएसएआई के अनुसार जांच और प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान यह पाया गया कि कुछ उत्पादों में ऐसे बाहरी फ्लेवर का उपयोग किया गया, जिनकी अनुमति निर्धारित मानकों के तहत नहीं थी। नियामक का कहना है कि रम और व्हिस्की जैसे उत्पादों में स्वाद और खुशबू का विकास उत्पादन की प्राकृतिक प्रक्रिया, जैसे फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और मैच्योरेशन के माध्यम से होना चाहिए। यदि किसी उत्पाद में कृत्रिम या बाहरी फ्लेवर मिलाए जाते हैं, तो उसे उसी श्रेणी के अनुरूप स्पष्ट रूप से लेबल किया जाना आवश्यक है।

    जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ उत्पाद मुख्य रूप से एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल या न्यूट्रल स्पिरिट से तैयार किए गए थे और बाद में उनमें स्वाद तथा खुशबू के लिए अतिरिक्त फ्लेवर मिलाए गए। नियामक का मानना है कि ऐसे उत्पादों को सामान्य रम या व्हिस्की के रूप में प्रस्तुत करना उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है। इसलिए ऐसे उत्पादों की वास्तविक प्रकृति को स्पष्ट करने के लिए उचित लेबलिंग अनिवार्य है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके।

    कार्रवाई के दौरान जिन उत्पादों पर रोक लगाई गई है उनमें ओल्ड मॉन्क के कुछ वेरिएंट, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, सेंट्रल प्रोविंस व्हिस्की और मैकडॉवेल्स नंबर 1 सेलिब्रेशन मैच्योर XXX रम सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। नियामक का कहना है कि इन उत्पादों की बिक्री तब तक प्रतिबंधित रहेगी, जब तक संबंधित नियमों और मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता।

    एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि कुछ उत्पादों पर किए गए आयु और गुणवत्ता संबंधी दावे उपलब्ध तथ्यों से मेल नहीं खाते थे। ऐसे दावों को उपभोक्ताओं के लिए भ्रामक माना गया है। नियामक ने स्पष्ट किया कि खाद्य और पेय पदार्थों की पैकेजिंग पर दी जाने वाली प्रत्येक जानकारी सत्य, प्रमाणित और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। यदि किसी उत्पाद में फ्लेवर आधारित विशेषताएं हैं तो उन्हें उसी रूप में प्रदर्शित किया जाना चाहिए, न कि मानक श्रेणी के उत्पाद के रूप में।

    इस कार्रवाई को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी पालन और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे शराब उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण, पारदर्शी लेबलिंग और नियामकीय अनुपालन पर अधिक जोर दिया जाएगा। आने वाले समय में संबंधित कंपनियां नियामकीय निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक सुधार कर सकती हैं, जबकि उपभोक्ताओं को भी उत्पाद खरीदते समय लेबल और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

  • शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    शेयर बाजार में तेजी का माहौल, जूनिपर ग्रीन एनर्जी की दमदार लिस्टिंग ने निवेशकों का बढ़ाया उत्साह

    नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सकारात्मक रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 250 अंकों की बढ़त के साथ 78,850 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी मामूली तेजी के साथ 24,650 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में शुरुआती घंटे में निवेशकों की ओर से बैंकिंग और एनर्जी सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान चुनिंदा बड़े शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे बाजार का माहौल सकारात्मक बना रहा।

    आज के कारोबार में बैंकिंग कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में भी निवेशकों ने भरोसा दिखाया। विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू स्तर पर मजबूत निवेश गतिविधियों और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है। हालांकि वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों के चलते निवेशक सतर्क भी नजर आए और सीमित दायरे में कारोबार जारी रहा।

    इसी बीच रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की। कंपनी का शेयर राष्ट्रीय स्टॉक एक्सचेंज पर 245 रुपये और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर 242 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हुआ। यह कंपनी के 225 रुपये प्रति शेयर के इश्यू प्राइस की तुलना में लगभग 9 प्रतिशत अधिक रहा। मजबूत लिस्टिंग ने उन निवेशकों को शुरुआती दिन ही लाभ दिया जिन्होंने कंपनी के सार्वजनिक निर्गम में निवेश किया था।

    कंपनी का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम 30 जुलाई से 3 अगस्त के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस इश्यू का प्राइस बैंड 214 से 225 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। निवेशकों की अच्छी भागीदारी के चलते इस निर्गम को लगभग 7.97 गुना सब्सक्रिप्शन प्राप्त हुआ। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं और निवेशकों के सकारात्मक रुख का लाभ कंपनी को सूचीबद्ध होने के पहले ही दिन मिला।

    दूसरी ओर एशियाई बाजारों में कमजोरी का माहौल देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और विभिन्न आर्थिक संकेतकों का असर एशियाई बाजारों पर स्पष्ट रूप से नजर आया। वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिला-जुला प्रदर्शन दर्ज किया गया, जहां डाउ जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में हल्की गिरावट रही।

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर डालें तो हाल के सात कारोबारी दिनों में उन्होंने कुल 2,703 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की है। हालांकि ताजा कारोबारी सत्र में विदेशी निवेशकों की ओर से सीमित बिकवाली दर्ज की गई, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की लगातार खरीदारी ने बाजार को संतुलित बनाए रखा। पिछले कारोबारी दिन भी सेंसेक्स 152 अंकों की बढ़त के साथ 78,581 के स्तर पर बंद हुआ था। लगातार दूसरे दिन शुरुआती तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशकों का भरोसा अभी भी घरेलू बाजार में बना हुआ है और आगामी कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कॉर्पोरेट गतिविधियों पर भी बाजार की नजर रहेगी।

  • सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत

    सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी, अगस्त के छह दिनों में निवेशकों को मिला मजबूत तेजी का संकेत


    नई दिल्ली ।
    घरेलू सर्राफा बाजार में गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव प्रति 10 ग्राम ₹2,735 बढ़कर ₹1,48,361 पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत ₹931 की बढ़त के साथ ₹2,25,493 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। अगस्त महीने की शुरुआत से अब तक केवल छह दिनों के भीतर सोना ₹5,501 और चांदी ₹7,198 महंगी हो चुकी है। लगातार बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर निवेशकों और आभूषण खरीदारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    देश के प्रमुख शहरों में भी सोने के दाम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। दिल्ली, जयपुर और लखनऊ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना लगभग ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। भोपाल, पटना और अहमदाबाद में भी कीमतें लगभग इसी स्तर पर बनी हुई हैं, जबकि मुंबई, कोलकाता और रायपुर में भाव कुछ कम रहने के बावजूद रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास बने हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि पूरे देश में सर्राफा बाजार में तेजी का माहौल कायम है।

    कैरेट के आधार पर भी सोने की कीमतों में उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,48,361, 22 कैरेट का ₹1,35,899, 18 कैरेट का ₹1,11,271 और 14 कैरेट सोने का भाव ₹86,791 प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। शुद्धता के अनुसार कीमतों में यह अंतर उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत और बजट के अनुरूप विकल्प चुनने का अवसर देता है।

    यदि पूरे वर्ष के प्रदर्शन पर नजर डालें तो वर्ष 2026 में अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹15 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन सोने का भाव करीब ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, जो अब बढ़कर ₹1.48 लाख के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि चांदी की कीमत साल की शुरुआत की तुलना में अभी भी कुछ नीचे बनी हुई है। वर्ष के दौरान दोनों धातुओं ने अपने उच्चतम स्तर भी छुए थे, जिसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर भी सोना और चांदी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बने हुए हैं। उनका सुझाव है कि निवेश एकमुश्त करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से किया जाए, जिससे कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सके। उनका अनुमान है कि यदि वैश्विक और घरेलू परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वर्ष के अंत तक सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है।

    जो निवेशक भौतिक सोना या चांदी खरीदने के बजाय बाजार आधारित विकल्प चाहते हैं, उनके लिए गोल्ड और सिल्वर ETF भी एक प्रभावी माध्यम माने जा रहे हैं। इन योजनाओं में निवेश शेयर बाजार की तरह डीमैट खाते के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें वास्तविक धातु की डिलीवरी नहीं मिलती, बल्कि निवेशक को उस समय के बाजार मूल्य के अनुसार लाभ या हानि प्राप्त होती है। कम राशि से निवेश शुरू करने की सुविधा के कारण यह विकल्प छोटे निवेशकों के बीच भी लगातार लोकप्रिय हो रहा है।

  • मेटा के एआई मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान बाहरी सिस्टम में लगाई सेंध, इंटरनेट कनेक्शन की गड़बड़ी बनी वजह

    मेटा के एआई मॉडल ने टेस्टिंग के दौरान बाहरी सिस्टम में लगाई सेंध, इंटरनेट कनेक्शन की गड़बड़ी बनी वजह

    नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती क्षमताओं के बीच एक नया मामला सामने आया है, जिसने एआई सुरक्षा और परीक्षण प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। मेटा ने खुलासा किया है कि उसके एक एआई मॉडल ने साइबर सिक्योरिटी परीक्षण के दौरान अनजाने में इंटरनेट तक पहुंच बना ली और इसके बाद एक बाहरी सर्विस सिस्टम की सुरक्षा कमजोरी का फायदा उठाकर उसमें अनधिकृत प्रवेश कर लिया। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह घटना परीक्षण के दौरान हुई तकनीकी गड़बड़ी का परिणाम थी और इसकी विस्तृत जांच जारी है।

    कंपनी के अनुसार यह घटना उसके हाल ही में जारी किए गए एआई मॉडल ‘म्यूज स्पार्क 1.1’ के परीक्षण के दौरान हुई। परीक्षण के लिए तैयार किए गए विशेष वातावरण में एक गलत कॉन्फिगरेशन के कारण मॉडल इंटरनेट से कनेक्ट हो गया। सामान्य परिस्थितियों में इस प्रकार के परीक्षण पूरी तरह नियंत्रित और सीमित नेटवर्क पर किए जाते हैं, लेकिन तकनीकी त्रुटि के चलते मॉडल बाहरी नेटवर्क तक पहुंच गया। इसके बाद उसने एक थर्ड पार्टी सर्विस में मौजूद सुरक्षा कमजोरी का उपयोग करते हुए अनधिकृत पहुंच प्राप्त कर ली।

    मेटा ने कहा कि परीक्षण प्रक्रिया एक स्वतंत्र साइबर सिक्योरिटी पार्टनर के सहयोग से संचालित की जा रही थी। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि तकनीकी सेटअप में हुई कॉन्फिगरेशन संबंधी गलती के कारण यह स्थिति बनी। कंपनी ने जोर देकर कहा कि यह किसी जानबूझकर किए गए साइबर हमले का मामला नहीं था, बल्कि परीक्षण वातावरण में हुई चूक के कारण उत्पन्न हुई अप्रत्याशित घटना थी। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा की जा रही है और सभी तथ्य सामने आने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी।

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब दुनिया भर की प्रमुख एआई कंपनियां अधिक सक्षम और स्वायत्त मॉडल विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। पिछले कुछ सप्ताहों के दौरान अन्य बड़ी एआई कंपनियों ने भी परीक्षण के दौरान अपने मॉडल्स द्वारा बाहरी सिस्टम तक अनपेक्षित पहुंच बनाने जैसी घटनाओं की जानकारी साझा की थी। इन घटनाओं ने यह सवाल और गहरा कर दिया है कि अत्यधिक सक्षम एआई मॉडल्स के परीक्षण के लिए वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक एआई एजेंट अब केवल निर्देशों का पालन करने तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि वे नेटवर्क संरचना, सिस्टम की कमजोरियों और संभावित सुरक्षा खामियों की पहचान करने में भी पहले से अधिक सक्षम हो रहे हैं। यदि परीक्षण वातावरण पूरी तरह सुरक्षित और अलग-थलग न हो तो इस प्रकार की घटनाएं भविष्य में बड़े जोखिम का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि नियंत्रित परीक्षण ढांचे, मजबूत नेटवर्क आइसोलेशन और बहुस्तरीय सुरक्षा उपायों की आवश्यकता लगातार बढ़ती जा रही है।

    घटना के बाद एआई सुरक्षा मानकों और परीक्षण प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग भी तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी के एआई मॉडल्स की बढ़ती क्षमताओं को देखते हुए केवल पारंपरिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। कंपनियों को अधिक कठोर परीक्षण प्रोटोकॉल, सुरक्षित नेटवर्क संरचना और स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट अपनाने होंगे ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। फिलहाल मेटा पूरे मामले की जांच में जुटा है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    प्लास्टिक के 10-20 रुपये के नोट कब आएंगे? आरबीआई गवर्नर ने फील्ड ट्रायल और लॉन्च प्लान पर दी अहम जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक देश में पॉलिमर यानी प्लास्टिक बैंक नोटों को प्रचलन में लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों का फील्ड ट्रायल जारी है। इन परीक्षणों के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का अंतिम फैसला लिया जाएगा। यदि सभी परीक्षण सफल रहते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 तक इन नोटों को चरणबद्ध तरीके से जारी किए जाने की संभावना है।

    आरबीआई के अनुसार, पॉलिमर नोटों का परीक्षण देश के विभिन्न क्षेत्रों और अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ये नोट भारतीय मौसम, लगातार उपयोग और दैनिक लेनदेन की परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और प्रभावी साबित होते हैं। परीक्षण के दौरान नोटों की मजबूती, घिसाव, सुरक्षा और परिचालन संबंधी कई पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है।

    केंद्रीय बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक समय तक उपयोग योग्य रहते हैं। विशेष रूप से 10 और 20 रुपये जैसे छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का लेनदेन सबसे अधिक होता है, जिसके कारण वे जल्दी खराब हो जाते हैं। ऐसे में पॉलिमर सामग्री से बने नोट लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं और बार-बार नए नोट छापने की आवश्यकता भी कम हो सकती है। इससे नोटों की छपाई और प्रतिस्थापन पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

    सरकार पहले ही 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलिमर नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे चुकी है। पायलट परियोजना के तहत दोनों मूल्यवर्ग के बड़ी संख्या में नोट जारी कर विभिन्न परिस्थितियों में उनकी उपयोगिता का परीक्षण किया जा रहा है। इन परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और अनुभवों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    पॉलिमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा। इनमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और नकली नोटों की पहचान आसान बनाने वाली तकनीक शामिल हो सकती है। इससे जालसाजी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही नोटों की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा।

    आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कागजी मुद्रा को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है। पॉलिमर नोट जारी होने के बाद भी मौजूदा कागजी नोट कानूनी रूप से मान्य रहेंगे और दोनों प्रकार की मुद्रा समानांतर रूप से प्रचलन में रहेगी। इससे लोगों को नए नोटों को अपनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और नकदी व्यवस्था पर किसी प्रकार का अचानक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फील्ड ट्रायल सफल रहता है तो भारत भी उन देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां पॉलिमर मुद्रा का व्यापक उपयोग किया जाता है। इससे नोटों की उम्र बढ़ाने, नकली मुद्रा पर अंकुश लगाने और नकदी प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सभी की नजर फील्ड ट्रायल के परिणामों और आरबीआई के अंतिम निर्णय पर बनी हुई है।