Category: Economy

  • आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए को समर्थन देने और सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 12 अक्टूबर 2026 से एक विशेष डॉलर विंडो खोलेगा। यह सुविधा अगले आदेश तक जारी रहेगी। आरबीआई ने मौजूदा बाजार परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सरकारी तेल विपणन कंपनियों को उनकी दैनिक जरूरत के अनुसार डॉलर उपलब्ध कराना है।

    इस विशेष सुविधा के तहत तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को डॉलर की आपूर्ति की जाएगी। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन शामिल हैं। आरबीआई निर्धारित बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को डॉलर बेचेगा। केंद्रीय बैंक ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब विदेशी मुद्रा बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। हालांकि, इस सुविधा के तहत डॉलर की कुल मात्रा या प्रत्येक कंपनी के लिए निर्धारित सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

    विशेष डॉलर विंडो शुरू करने के साथ आरबीआई ने विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी नियम कड़े किए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और एक ही जोखिम के लिए कई जगह हेजिंग करने की संभावना को रोकने के उद्देश्य से दस्तावेजीकरण संबंधी शर्तें लागू की हैं। नए नियमों के अनुसार, अधिकृत डीलरों को ऐसे उपयोगकर्ताओं से लिखित आश्वासन लेना होगा और उसे अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना होगा, जो भारतीय रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करते हैं।

    इस लिखित आश्वासन में उपयोगकर्ता को पुष्टि करनी होगी कि संबंधित अंतर्निहित जोखिम के लिए किसी दूसरे अधिकृत डीलर के साथ हेजिंग नहीं की गई है। इस तरह एक ही जोखिम के आधार पर अलग-अलग अधिकृत डीलरों के माध्यम से हेजिंग करने पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह दस्तावेजीकरण अधिकृत डीलरों की जिम्मेदारी होगी। उन्हें उपयोगकर्ता से आश्वासन प्राप्त करने के साथ उसे अपने पास सुरक्षित भी रखना होगा।

    विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित संचालन के लिए आरबीआई ने रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। नए निर्देश जारी होने के बाद किसी अधिकृत डीलर के साथ रद्द किए गए रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध डिलीवरेबल और नॉन-डिलीवरेबल, दोनों प्रकार के अनुबंधों पर लागू होगा। अधिकृत डीलरों को अपने ग्राहकों को ऐसे अनुबंध फिर से बुक करने की अनुमति नहीं देनी होगी।

    केंद्रीय बैंक ने बिना अंतर्निहित जोखिम के किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा भी घटा दी है। अब सभी अधिकृत डीलरों के लिए ऐसे लेनदेन की सीमा पांच मिलियन डॉलर के बराबर निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, दो मिलियन डॉलर से अधिक की नोशनल वैल्यू वाले रुपए से जुड़े सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान लागू किया गया है।

    ऐसे अनुबंधों के मामले में अधिकृत डीलरों को आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व बनाए रखना होगा। इस रिजर्व की राशि प्रत्येक लेनदेन की नोशनल वैल्यू के भारतीय रुपए में बराबर मूल्य का 20 प्रतिशत होगी। यह राशि नकद के रूप में रखनी होगी। इन उपायों के जरिए आरबीआई ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को पूरा करने के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार में हेजिंग और लेनदेन से जुड़े नियमों को अधिक सख्त बनाया है।

  • सोने की कीमत में इस सप्ताह 1,292 रुपये की बढ़ोतरी, चांदी भी महंगी होकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंची

    सोने की कीमत में इस सप्ताह 1,292 रुपये की बढ़ोतरी, चांदी भी महंगी होकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंची

    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में इस सप्ताह तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव 1,292 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,49,430 रुपये हो गया। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई और यह 280 रुपये महंगी होकर 2,21,109 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले चांदी का भाव 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम था। हालांकि, सप्ताह के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव बना रहा।

    सोने की अलग-अलग शुद्धता वाली श्रेणियों में भी कीमतें बढ़ीं। 22 कैरेट सोने का भाव बढ़कर 1,36,878 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि इससे पहले यह 1,35,694 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसी तरह 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,104 रुपये से बढ़कर 1,12,073 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इन आंकड़ों के मुताबिक, सप्ताह के दौरान 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान सोने के भाव में अलग-अलग सत्रों में बदलाव देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 अक्टूबर को सुबह के सत्र में सोने का भाव 1,47,278 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जिसे सप्ताह का उच्चतम भाव बताया गया है। वहीं, 9 अक्टूबर को सुबह के सत्र में इसका भाव 1,49,614 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जिसे न्यूनतम कीमत बताया गया है। हालांकि, इन दोनों तारीखों के साथ दिए गए भावों और उच्चतम तथा न्यूनतम स्तर के विवरण में विसंगति दिखाई देती है। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर सप्ताह के सबसे ऊंचे और सबसे नीचे भाव की स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

    चांदी के भाव में भी सप्ताह के दौरान उतार-चढ़ाव रहा। इसका साप्ताहिक भाव 280 रुपये बढ़कर 2,21,109 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 5 अक्टूबर को शाम के सत्र में चांदी का भाव 2,24,157 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जिसे सप्ताह का उच्चतम स्तर बताया गया। वहीं, 7 अक्टूबर को शाम के सत्र में कीमत 2,20,866 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जिसे न्यूनतम स्तर बताया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सप्ताह के अलग-अलग कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में अंतर रहा।

    सोने और चांदी के दैनिक भाव सुबह और शाम के सत्र में जारी किए जाते हैं। इस व्यवस्था के तहत दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में दिन के दौरान होने वाले बदलाव दर्ज किए जाते हैं। साप्ताहिक भाव में बढ़ोतरी के बावजूद, दोनों धातुओं की कीमतों में पूरे सप्ताह एक समान तेजी नहीं रही और अलग-अलग सत्रों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। सोने का भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं की कीमतें एक सीमित दायरे में रहीं। बॉन्ड यील्ड का लगातार 5 प्रतिशत पर बने रहना और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहना इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबाव भी सोने और चांदी की कीमतों पर बना हुआ है। इस तरह घरेलू बाजार में सप्ताह के दौरान दोनों धातुओं के भाव बढ़े, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति ने उनकी कीमतों को प्रभावित किया।

  • Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें

    Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करके लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की चाह रखने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस शेयर में पैसा लगाया जाए और कौन सी कंपनी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। बाजार में रोजाना शेयरों की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में कई निवेशक तेजी से मुनाफा कमाने की उम्मीद में बिना पूरी जानकारी के शेयर खरीद लेते हैं। हालांकि शेयर बाजार में कमाई की कोई गारंटी नहीं होती और गलत फैसले से पूंजी का नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार को समझना बेहद जरूरी है।

    अगर आप शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता तय करें। कम समय में जरूरत पड़ने वाली रकम को शेयर बाजार में लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि बाजार गिरने पर नुकसान में शेयर बेचने की नौबत आ सकती है। लंबी अवधि के निवेश के लिए ऐसी कंपनियों का अध्ययन किया जा सकता है जिनका कारोबार मजबूत हो और जिनकी कमाई बढ़ने की संभावनाएं हों। केवल किसी परिचित की सलाह या इंटरनेट पर मिलने वाले बड़े मुनाफे के दावों के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

    निवेश के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कंपनियों पर भी नजर रखी जा सकती है। रोजमर्रा की जरूरतों के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां और बिजली तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी निवेशकों के अध्ययन में शामिल हो सकती हैं। लेकिन किसी सेक्टर का तेजी से बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा हर शेयर अच्छा रिटर्न देगा। कंपनी की मौजूदा कीमत और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।

    किसी शेयर को खरीदने से पहले पांच महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। पहला संकेत कंपनी की बिक्री और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी है। दूसरा संकेत कंपनी पर कर्ज की स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता है। तीसरा संकेत कंपनी का प्रबंधन और कारोबार चलाने का तरीका है। चौथा संकेत कंपनी के पास भविष्य में विकास के अवसर होना है। पांचवां संकेत शेयर की मौजूदा कीमत का कंपनी की कमाई और वित्तीय स्थिति के मुकाबले उचित होना है। इन पहलुओं का अध्ययन करने से निवेशक को कंपनी की मजबूती और संभावित जोखिम समझने में मदद मिल सकती है।

    जो लोग खुद कंपनियों का विश्लेषण नहीं कर पाते वे म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड के विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स देश की 50 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। इससे जुड़े इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं। इससे किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम हो सकती है लेकिन बाजार में गिरावट आने पर ऐसे निवेश का मूल्य भी घट सकता है।

    निवेश करते समय पूरी रकम एक ही शेयर में लगाने से बचना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निवेश करें और आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग बचत रखें। बिना पर्याप्त जानकारी के इंट्राडे ट्रेडिंग और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम वाले कारोबार में पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर मिलने वाली शेयर खरीदने की सलाह और निश्चित मुनाफे के दावों की जांच किए बिना उन पर भरोसा न करें।

    शेयर बाजार में बेहतर निवेश का रास्ता जल्दबाजी के बजाय जानकारी और अनुशासन से होकर गुजरता है। किसी भी शेयर को खरीदने से पहले कंपनी के कारोबार और उसकी कीमत का आकलन करें तथा अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखें। कोई भी शेयर निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देता। बड़ी रकम निवेश करने से पहले जरूरत के अनुसार सेबी में पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लेना समझदारी हो सकती है।

  • ‘आप ही भारत के रियल बॉस…’ स्टारलिंक विवाद में मस्क का अंबानी पर फिर तंज, लगाए आरोप

    ‘आप ही भारत के रियल बॉस…’ स्टारलिंक विवाद में मस्क का अंबानी पर फिर तंज, लगाए आरोप


    नई दिल्ली। भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर एलन मस्क और मुकेश अंबानी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। मस्क ने लगातार दूसरे दिन सोशल मीडिया पर अंबानी पर निशाना साधते हुए तंज कसा कि क्या वही भारत के ‘रियल बॉस’ हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि अंबानी अपना कारोबारी एकाधिकार बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का मौका नहीं देना चाहते। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने में सुरक्षा और नियामकीय शर्तों का पालन जरूरी है।

    मस्क बोले- क्या स्टारलिंक को मुकाबले का मौका देंगे?

    दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क ने शुक्रवार देर शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मुकेश अंबानी को संबोधित करते हुए लिखा, ‘डियर प्राइम मिनिस्टर अंबानी, कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि मुझे यह एहसास नहीं हुआ कि आप ही भारत के रियल बॉस हैं।’

    मस्क ने आगे तंज कसते हुए आरोप लगाया कि अंबानी भारत के लोगों का एकाधिकार के दम पर शोषण जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या इसके बावजूद अंबानी स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने का मौका देने पर विचार करेंगे?

    अपने पोस्ट में मस्क ने भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या का भी उल्लेख किया। उनका दावा है कि देश के कई क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई और छोटे कारोबारियों के अवसर प्रभावित होते हैं। इंटरनेट की बेहतर पहुंच से छोटे व्यवसाय अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा सकते हैं। मस्क के मुताबिक, स्टारलिंक ऐसे इलाकों में कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद कर सकता है।

    एक दिन पहले भी पूछा था- क्या अंबानी हैं भारत के असली बॉस?

    मस्क ने इससे एक दिन पहले भी इसी मुद्दे पर सवाल उठाया था। उन्होंने डॉ. अनिरुद्ध की एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा था कि क्या मुकेश अंबानी भारत के असली बॉस हैं? संबंधित पोस्ट में आरोप लगाया गया था कि सरकार भारतीय नागरिकों के हितों के बजाय बड़े कारोबारी समूहों को फायदा पहुंचाने वाली व्यवस्था को बचा रही है।

    मस्क ने दावा किया था कि स्टारलिंक को दुनिया के 165 देशों में लाइसेंस मिल चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जरूरी नियमों और शर्तों का पालन करने के बावजूद कंपनी को भारत में लाइसेंस क्यों नहीं मिल रहा है। इसके बाद उन्होंने अंबानी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए एकाधिकार को लेकर अपनी आपत्ति दोहराई।

    भारत में स्टारलिंक की एंट्री का इंतजार

    एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है। इस तकनीक से उन क्षेत्रों में भी कनेक्टिविटी पहुंचाने की संभावना है, जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड या मोबाइल नेटवर्क की पहुंच सीमित है।

    भारत में स्टारलिंक की शुरुआत को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। कंपनी का तर्क है कि उसकी सेवा ग्रामीण, पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट की कमी दूर करने में उपयोगी हो सकती है। हालांकि, भारतीय बाजार में सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को सरकार से आवश्यक मंजूरियां हासिल करनी होंगी और देश के दूरसंचार नियमों तथा सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

    सिंधिया बोले- किसी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं

    स्टारलिंक विवाद के बीच केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा है कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता। उनका यह बयान मस्क की ओर से लगाए जा रहे आरोपों के बीच आया है।

    सरकार का रुख है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में सुरक्षा मानकों और डेटा सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद लाइसेंस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

    डेटा सुरक्षा और स्थानीय गेटवे को लेकर सख्ती

    स्टारलिंक की भारत में शुरुआत के रास्ते में सुरक्षा और नियामकीय शर्तें अहम हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गृह मंत्रालय और रक्षा एजेंसियों की ओर से भारतीय उपयोगकर्ताओं के डेटा को भारत में ही प्रोसेस और स्टोर करने जैसी शर्तों पर जोर दिया गया है।

    स्टारलिंक की इंटर-सैटेलाइट लेजर लिंक तकनीक को लेकर भी भारतीय एजेंसियां कानूनी निगरानी और सुरक्षा संबंधी पहलुओं की समीक्षा कर रही हैं। इसके अलावा, सरकारी मापदंडों के तहत कंपनी को भारत में 20 स्थानीय गेटवे स्टेशन स्थापित करने की जरूरत बताई गई है। इनका उद्देश्य जरूरत पड़ने पर नेटवर्क ट्रैफिक की निगरानी और नियमानुसार उसे नियंत्रित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    इस पूरे विवाद में एक ओर मस्क भारतीय बाजार में स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा का अवसर देने की मांग उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार के लिए सुरक्षा, डेटा संरक्षण और नियामकीय अनुपालन प्रमुख शर्तें हैं। अंबानी पर मस्क के एकाधिकार संबंधी आरोपों पर उनका पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • फोनपे और डीपीसीजीसी की साझेदारी से ओटीटी मंचों पर नियामकीय नियमों के पालन और शिकायत निवारण को मिलेगा बढ़ावा

    फोनपे और डीपीसीजीसी की साझेदारी से ओटीटी मंचों पर नियामकीय नियमों के पालन और शिकायत निवारण को मिलेगा बढ़ावा

    नई दिल्ली । डिजिटल भुगतान कंपनी फोनपे और डिजिटल पब्लिशर कंटेंट ग्रीवेंस काउंसिल (डीपीसीजीसी) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य फोनपे के भुगतान गेटवे से जुड़ने वाले व्यापारियों के लिए स्व-नियामक संगठन (एसआरओ) का प्रमाणन आसान बनाना, नियामकीय नियमों के पालन को प्रोत्साहित करना और इस संबंध में जागरूकता बढ़ाना है। इस पहल के माध्यम से ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मंचों और ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशकों को लागू नियमों तथा शिकायत निवारण से संबंधित आवश्यकताओं की जानकारी देने पर जोर दिया जाएगा।

    भारत में लागू नियमों के अनुसार, ओटीटी मंचों और ऑनलाइन चुने गए कंटेंट के प्रकाशकों (ओसीसीपी) के लिए शिकायतों के निवारण के उद्देश्य से किसी मान्यता प्राप्त स्व-नियामक संगठन का सदस्य होना अनिवार्य है। फोनपे अपने व्यापारी पंजीकरण की प्रक्रिया में इस आवश्यकता को जरूरी शर्त के रूप में लागू करता है। ऐसे में एसआरओ की सदस्यता और प्रमाणन से जुड़ी जानकारी व्यापारियों के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है। दोनों संस्थाओं के बीच हुए समझौते का उद्देश्य इस प्रक्रिया को समझने और पूरा करने में व्यापारियों की मदद करना है।

    डीपीसीजीसी सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत गठित दूसरे स्तर की स्व-नियामक संस्था है। यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के साथ पंजीकृत है। समझौते के जरिए फोनपे और डीपीसीजीसी ओटीटी मंचों तथा ऑनलाइन कंटेंट के प्रकाशकों के बीच नियामकीय नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संयुक्त रूप से काम करेंगे। दोनों संस्थाओं ने माना है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले कई व्यापारियों को एसआरओ की सदस्यता और उससे संबंधित प्रक्रियाओं की पर्याप्त जानकारी नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए मौजूदा और नए व्यापारियों तक नियमों से जुड़ी जानकारी पहुंचाने की योजना है।

    इस संयुक्त पहल के तहत व्यापारियों को लागू नियामकीय आवश्यकताओं को समझने में सहायता मिलेगी। साथ ही, डीपीसीजीसी के माध्यम से उनके एसआरओ प्रमाणन की प्रक्रिया को सरल बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे व्यापारियों को पंजीकरण के दौरान जरूरी शर्तों की जानकारी प्राप्त करने और उनका पालन करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साझेदारी का एक प्रमुख उद्देश्य तेजी से विस्तार कर रहे ओटीटी क्षेत्र में शिकायत निवारण व्यवस्था और स्व-नियमन से जुड़ी प्रक्रियाओं के बारे में समझ बढ़ाना भी है। इस सहयोग से फोनपे की ऐसे भुगतान भागीदार के रूप में स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई गई है, जो नियामकीय नियमों के पालन पर ध्यान देता है।

    इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सुभो रे ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत स्थापित डीपीसीजीसी स्व-नियमन के माध्यम से ओटीटी मंचों से संबंधित शिकायतों और समस्याओं का प्रभावी समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, डीपीसीजीसी और फोनपे के बीच सहयोग से आचार संहिता के बेहतर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्व-नियमन का दायरा बढ़ाने और इसके लाभ उद्योग के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने में सहायता मिल सकती है।

    फोनपे के पेमेंट हेड दीप अग्रवाल ने कहा कि कंपनी की सभी सेवाओं में नियमों का पालन और ग्राहकों का भरोसा महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ओटीटी क्षेत्र का विस्तार हुआ है और इसकी पहुंच तेजी से बढ़ी है। डीपीसीजीसी के साथ समझौते से ओटीटी मंचों के बीच जागरूकता बढ़ाने और ग्राहकों की शिकायतों के निवारण से संबंधित नियमों की समझ विकसित करने में मदद मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते ओटीटी क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन, जागरूकता और भरोसे को मजबूत करने में योगदान देना है।

  • शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद आईपीओ से रिकॉर्ड फंड जुटाव, भारतीय कंपनियों ने जनवरी-सितंबर में 12.5 अरब डॉलर जुटाए

    नई दिल्ली ।भारतीय कंपनियों ने वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के माध्यम से रिकॉर्ड 12.5 अरब डॉलर जुटाए हैं। जनवरी से सितंबर तक जुटाई गई यह राशि 1980 से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि का अब तक का सबसे बड़ा फंड जुटाव है। खास बात यह है कि आईपीओ बाजार में यह मजबूती ऐसे समय देखने को मिली, जब व्यापक शेयर बाजार दबाव में रहा और निफ्टी में करीब 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम के जरिए पूंजी जुटाने की गतिविधियां मजबूत बनी रहीं।

    जनवरी-सितंबर 2026 के दौरान कुल 220 आईपीओ बाजार में आए। पिछले वर्ष की समान अवधि में 268 आईपीओ जारी किए गए थे। इस तरह निर्गमों की संख्या में लगभग 17.9 प्रतिशत की कमी आई। इसके बावजूद कंपनियों ने कुल मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में 11.3 प्रतिशत अधिक राशि जुटाई। इसका प्रमुख कारण बड़े आकार के आईपीओ का बाजार में आना रहा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, औसत आईपीओ का आकार बढ़कर लगभग 5.7 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि एक वर्ष पहले यह करीब 4.2 करोड़ डॉलर था। कुल जुटाई गई राशि का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा कुछ चुनिंदा बड़े निर्गमों से आया।

    सितंबर का महीना आईपीओ बाजार के लिए विशेष रूप से मजबूत रहा। इस महीने 34 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए लगभग 39,380 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह 2026 में किसी एक महीने के दौरान जुटाई गई सबसे बड़ी राशि रही। हालांकि, इस रकम का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा ऑफर फॉर सेल यानी ओएफएस के माध्यम से आया। ओएफएस में मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचते हैं, इसलिए इससे प्राप्त धन का बड़ा हिस्सा सीधे कंपनियों के खाते में जाने के बजाय शेयर बेचने वाले निवेशकों को मिलता है। इस वजह से कुल आईपीओ राशि और कंपनियों को वास्तव में मिलने वाली नई पूंजी के बीच अंतर बना रहा।

    आईपीओ बाजार की मजबूती के विपरीत, व्यापक इक्विटी पूंजी बाजार में कुल फंड जुटाव कमजोर हुआ। फॉलो-ऑन ऑफरिंग्स और ब्लॉक डील्स सहित कुल इक्विटी कैपिटल मार्केट फंड जुटाव 1.7 प्रतिशत घटकर 40.8 अरब डॉलर रह गया। यह पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया गया है। इस दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय शेयर बाजार से अनुमानित 2.7 लाख करोड़ से 3 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। इसके बावजूद घरेलू बाजार में उपलब्ध तरलता ने आईपीओ गतिविधियों को समर्थन दिया।

    लिस्टिंग के बाद निवेशकों को मिलने वाले लाभ में हालांकि कमी के संकेत सामने आए। सितंबर में आईपीओ का औसत लिस्टिंग प्रीमियम 15.1 प्रतिशत रहा, जबकि अगस्त में यह 24.4 प्रतिशत था। इसी तरह मीडियन लिस्टिंग लाभ अगस्त के 21.3 प्रतिशत से घटकर सितंबर में 5.9 प्रतिशत रह गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईपीओ से पूंजी जुटाने की गतिविधि मजबूत रहने के बावजूद शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद मिलने वाला शुरुआती लाभ कम हुआ है। इससे नए निर्गमों में निवेश करने वाले लोगों के लिए लिस्टिंग प्रदर्शन पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो गया है।

    निवेश बैंकिंग उद्योग के आंकड़ों में भी मिली-जुली तस्वीर सामने आई। इक्विटी अंडरराइटिंग से मिलने वाली फीस नौ प्रतिशत घटकर 415.6 मिलियन डॉलर रह गई। इसके विपरीत, विलय और अधिग्रहण यानी एमएंडए से जुड़ी मजबूत गतिविधियों के कारण कुल निवेश बैंकिंग फीस दो प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 1.1 अरब डॉलर तक पहुंच गई। आगे आईपीओ बाजार की दिशा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निवेशकों की भागीदारी और लिस्टिंग से मिलने वाला लाभ किस स्तर पर बना रहता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 130 से अधिक कंपनियों के पास भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी है। ऐसे में आने वाले महीनों में नए निर्गमों की गतिविधियों पर बाजार की नजर रहेगी।

  • एलन मस्क की संपत्ति 36.4 अरब डॉलर घटी, स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में गिरावट से फिर एक ट्रिलियन डॉलर से नीचे पहुंचे

    एलन मस्क की संपत्ति 36.4 अरब डॉलर घटी, स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में गिरावट से फिर एक ट्रिलियन डॉलर से नीचे पहुंचे

    नई दिल्ली ।दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क की कुल संपत्ति एक बार फिर एक ट्रिलियन डॉलर से नीचे आ गई है। स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में गिरावट के कारण उनकी संपत्ति में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान 36.4 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई। 8 अक्टूबर 2026 को उनकी अनुमानित कुल संपत्ति घटकर 991.6 अरब डॉलर रह गई। इससे केवल तीन दिन पहले ही मस्क ने दोबारा एक ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का आंकड़ा पार किया था। शेयर बाजार में आई कमजोरी ने उनकी संपत्ति पर सीधा असर डाला।

    स्पेसएक्स के शेयरों में लगभग 3.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ने की एक वजह चिप निर्माता एनवीडिया से चिप खरीदने के लिए 40 अरब डॉलर जुटाने की संभावित योजना बताई गई। इस योजना को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच कंपनी के शेयर कमजोर हुए। वहीं, टेस्ला के शेयरों में भी दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। दोनों कंपनियों के शेयरों में कमजोरी का असर मस्क की कुल संपत्ति पर पड़ा और वह फिर ट्रिलियन डॉलर के स्तर से नीचे आ गए।

    मस्क ने पहली बार जून में एक ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का आंकड़ा पार किया था। उस समय स्पेसएक्स के सार्वजनिक बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद उनकी अनुमानित संपत्ति लगभग 1.45 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई थी। इसके बाद उनकी संपत्ति में उतार-चढ़ाव जारी रहा। ताजा गिरावट के साथ उनकी कुल संपत्ति 991.6 अरब डॉलर रह गई, जिससे वह एक बार फिर इस स्तर से नीचे आ गए। उनकी संपत्ति में बदलाव का प्रमुख कारण स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों के मूल्य में आई कमी रही।

    टेक्नोलॉजी शेयरों में गिरावट का असर दूसरे प्रमुख अरबपतियों पर भी पड़ा। एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेन्सन हुआंग की अनुमानित संपत्ति एक दिन में 6.1 अरब डॉलर घटकर 199.3 अरब डॉलर रह गई। इस गिरावट के बाद उनकी संपत्ति 200 अरब डॉलर के स्तर से नीचे आ गई। इसी तरह, ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन की संपत्ति में 8.9 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई और यह घटकर 176.8 अरब डॉलर रह गई। दोनों कारोबारियों की संपत्ति में आई गिरावट ने टेक क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी के व्यापक असर को दिखाया।

    अरबपतियों की संपत्ति में गिरावट के बावजूद जेन्सन हुआंग और लैरी एलिसन की सूची में स्थिति में बदलाव नहीं हुआ। वास्तविक समय में अरबपतियों की संपत्ति का आकलन करने वाली सूची में हुआंग सातवें और एलिसन आठवें स्थान पर बने रहे। हालांकि, गुरुवार के कारोबारी सत्र में दोनों की संपत्ति में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। शेयरों के बाजार मूल्य में होने वाले बदलाव के साथ इन कारोबारियों की अनुमानित संपत्ति भी घटती-बढ़ती रहती है।

    अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी टेक शेयरों में बिकवाली का असर दिखाई दिया। नैस्डैक-100 सूचकांक 1.4 प्रतिशत गिर गया। यह पिछले सात सप्ताह में उसकी सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट रही। वहीं, एसएंडपी 500 सूचकांक में 0.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। बाजार में आई इस गिरावट के पीछे टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित शेयरों में बढ़ती बिकवाली को प्रमुख कारण बताया गया। इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई और प्रमुख अमेरिकी सूचकांक दबाव में रहे।

    इसके विपरीत, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के दौरान निफ्टी आईटी सूचकांक तीन प्रतिशत से अधिक चढ़ गया और 28,600 के स्तर को पार कर गया। इस तरह अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों की कमजोरी के बीच भारतीय आईटी सूचकांक में तेजी दर्ज की गई।

  • एलन मस्क की बादशाहत पर दौलत का झटका, 1.05 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 987 अरब डॉलर हुई संपत्ति, जेफ बेजोस दूसरे नंबर पर

    एलन मस्क की बादशाहत पर दौलत का झटका, 1.05 ट्रिलियन डॉलर से घटकर 987 अरब डॉलर हुई संपत्ति, जेफ बेजोस दूसरे नंबर पर


    नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अंतरिक्ष कारोबार में बढ़ते निवेश और कंपनियों की वैल्यूएशन में बदलाव ने अरबपतियों की संपत्ति के समीकरण बदल दिए हैं। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस की संपत्ति में जबरदस्त उछाल आया है और वह अल्फाबेट के सह-संस्थापक लैरी पेज को पीछे छोड़कर दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। दूसरी ओर टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क की संपत्ति घटकर 987 अरब डॉलर रह गई है। हालांकि वह अब भी दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के आंकड़ों के मुताबिक इस बदलाव के पीछे अंतरिक्ष कारोबार में निवेश और कंपनियों की बाजार में बढ़ती अहमियत बड़ी वजह है।

    जेफ बेजोस की संपत्ति में आई तेजी का प्रमुख कारण उनकी अंतरिक्ष कंपनी ब्लू ओरिजिन की वैल्यूएशन में हुई बढ़ोतरी है। रिपोर्ट के अनुसार कंपनी का मूल्यांकन 140 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसके बाद बेजोस की कुल संपत्ति में लगभग 80 अरब डॉलर यानी करीब 7.74 लाख करोड़ रुपये का उछाल दर्ज किया गया। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने उन्हें दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में दूसरे स्थान पर पहुंचा दिया है। हालांकि अरबपतियों की संपत्ति का आकलन कंपनियों में हिस्सेदारी और उनके मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। इसलिए संपत्ति में हुई यह बढ़ोतरी जरूरी नहीं कि उतनी ही रकम नकद के रूप में उनके पास आ गई हो।

    जेफ बेजोस ने वर्ष 2000 में ब्लू ओरिजिन की स्थापना की थी। कंपनी का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रा और रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाना है। हालिया फंडिंग राउंड में ब्लू ओरिजिन ने पहली बार बाहरी निवेशकों से इक्विटी पूंजी जुटाई। इस निवेश के बाद कंपनी का मूल्यांकन 140 अरब डॉलर आंका गया। रिपोर्ट के मुताबिक बेजोस के पास कंपनी की करीब 93 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में कंपनी की वैल्यूएशन में बढ़ोतरी का सीधा असर उनकी अनुमानित कुल संपत्ति पर पड़ा है। अंतरिक्ष कारोबार में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने भी इस क्षेत्र की कंपनियों को लेकर उम्मीदें बढ़ाई हैं।

    दूसरी ओर एलन मस्क की संपत्ति में गिरावट ने भी सुर्खियां बटोरी हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनकी कुल संपत्ति पहले 1.05 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गई थी लेकिन अब घटकर 987 अरब डॉलर रह गई है। इस गिरावट के बावजूद मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। उनकी कंपनियां टेस्ला और स्पेसएक्स इलेक्ट्रिक वाहन तथा अंतरिक्ष कारोबार में अहम भूमिका निभाती हैं। उनकी संपत्ति में उतार चढ़ाव का असर अरबपतियों की वैश्विक रैंकिंग पर भी दिखाई देता है।

    अंतरिक्ष कारोबार में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक स्पेसएक्स ने पिछले साल करीब 18.7 अरब डॉलर का राजस्व अर्जित किया जबकि ब्लू ओरिजिन का राजस्व लगभग 800 मिलियन डॉलर रहा। दोनों कंपनियां रॉकेट लॉन्च और चंद्रमा से जुड़े अभियानों सहित कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम कर रही हैं। राजस्व में बड़ा अंतर होने के बावजूद ब्लू ओरिजिन के मूल्यांकन में हुई बढ़ोतरी ने बेजोस की संपत्ति को नई ऊंचाई दी है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि अरबपतियों की दौलत केवल मौजूदा कमाई से नहीं बल्कि भविष्य की संभावनाओं और निवेशकों की उम्मीदों से भी प्रभावित होती है। आने वाले समय में अंतरिक्ष उद्योग में होने वाले निवेश और कंपनियों के प्रदर्शन पर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की रैंकिंग काफी हद तक निर्भर करेगी।