Category: Economy

  • दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू

    दिवाली से पहले राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता, दिल्ली के 20 बड़े बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू


    नई दिल्ली । दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारिक संगठनों ने रामलीला मैदान में प्रस्तावित राजनीतिक रैली को लेकर चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में बड़ी संख्या में लोगों और वाहनों के पहुंचने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच और खरीदारी पर पड़ने की आशंका है। इसी मुद्दे को लेकर व्यापारियों ने राहुल गांधी से अपील की है कि दिवाली के दौरान बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की स्थिति पैदा न हो।

    चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में रामलीला मैदान के आसपास स्थित प्रमुख बाजारों में पोस्टर अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, पोस्टरों के माध्यम से राहुल गांधी तक व्यापारियों की चिंता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। अभियान का संदेश है कि जिस तरह मोहब्बत और आपसी विश्वास की बात की जाती है, उसी तरह व्यापारियों की दुकानें भी ग्राहकों के साथ भरोसे और संबंधों के आधार पर चलती हैं। ऐसे में दिवाली जैसे बड़े त्योहार के दौरान उनके कारोबार को प्रभावित नहीं होना चाहिए।

    बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी अपनी राजनीतिक गतिविधियों में मोहब्बत की दुकान का संदेश देते रहे हैं, लेकिन प्रस्तावित रैली के कारण दिल्ली के करीब 300 साल पुराने बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इन बाजारों में अलग-अलग तरह की दुकानें हैं, जिनसे हजारों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। चांदनी चौक की परांठे वाली दुकानें, खारी बावली के मसालों का कारोबार, सदर बाजार में चूड़ी-बिंदी की दुकानें और चांदनी चौक में लहंगों का व्यापार इसकी प्रमुख पहचान हैं।

    इसके अलावा दरियागंज में एसी का कारोबार, चावड़ी बाजार में सैनिटरी सामान की दुकानें और करोल बाग में कुल्फी की दुकानें भी स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों का हिस्सा हैं। संगठन का कहना है कि इन दुकानों का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार और परिवारों को नियमित आय मिलती है।

    CTI ने रामलीला मैदान से लगभग पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजारों में पोस्टर अभियान चलाने की बात कही है। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, नया बाजार, चावड़ी बाजार, कश्मीरी गेट, दरियागंज, कनॉट प्लेस, करोल बाग, नबी करीम, पहाड़गंज, अजमेरी गेट, लाहौरी गेट, जनपथ, पालिका बाजार, बल्लीमारान और किनारी बाजार शामिल हैं।

    व्यापारियों की चिंता का एक प्रमुख कारण रैली में संभावित रूप से जुटने वाली बड़ी भीड़ और वाहनों की संख्या है। बृजेश गोयल के अनुसार, रैली में करीब 10 लाख लोगों और 20 हजार वाहनों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग और गाड़ियां आसपास के इलाकों में पहुंचती हैं, तो बाजारों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इससे ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी होने और व्यापारियों को दुकानें बंद करने की नौबत आने की आशंका है।

    उन्होंने यह भी कहा कि रामलीला मैदान में लगभग 100 बसों की पार्किंग तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी रैली के दौरान यातायात और पार्किंग प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि दिवाली से ठीक पहले होने वाले इस आयोजन के कारण दिल्ली का लगभग 10 हजार से 12 हजार करोड़ रुपये तक का त्योहारों का कारोबार प्रभावित हो सकता है।

    CTI के मुताबिक, इस संभावित व्यवधान का असर करीब 20 लाख व्यापारियों और उनसे जुड़े लगभग 75 लाख लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है। संगठन ने धनतेरस और दिवाली से पहले बाजारों में सामान्य कारोबार बनाए रखने की मांग उठाई है। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां सुचारु रहना जरूरी है।

  • दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.35% रहने का अनुमान …. वित्त मंत्रालय

    दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.35% रहने का अनुमान …. वित्त मंत्रालय


    नई दिल्ली।
    भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) के मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है. वित्त मंत्रालय की ताजा मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार चालू वित्त वर्ष (FY27) की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश की सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product- GDP) की विकास दर 7.35% रहने का अनुमान लगाया गया है।

    यह मजबूत अनुमान ऐसे समय में आया है, जब पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था ने 7.8% की शानदार रफ्तार दर्ज की थी. वित्त मंत्रालय के नाउकास्टिंग मॉडल (Nowcasting Model) के मुताबिक देश की आर्थिक गतिविधियों में लगातार तेजी बनी हुई है। मजबूत औद्योगिक उत्पादन (Industrial Output): देश के विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार सुधार देखा जा रहा है, जिससे उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

    ऊर्जा की बढ़ती खपत (Energy Consumption): बिजली और अन्य ऊर्जा की मांग में उछाल इस बात का संकेत है कि देश में कमर्शियल और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। बेहतर माल ढुलाई और परिवहन: बंदरगाहों पर यातायात, ऑटोमोबाइल सेक्टर में बिक्री और जीएसटी कलेक्शन के आंकड़ों में लगातार मजबूती दर्ज की गई है, जो घरेलू मांग के मजबूत होने का प्रमाण है. घरेलू मोर्चे पर अर्थव्यवस्था जहां मजबूत स्थिति में है, वहीं रिपोर्ट में कुछ बाहरी और वैश्विक जोखिमों को लेकर आगाह भी किया गया है।


    पश्चिम एशिया संकट का असर

    पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और भूमध्यसागरीय मार्ग पर समुद्री माल ढुलाई में रुकावटों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे इनपुट लागत बढ़ने का खतरा है. इस बीच वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए मंत्रालय ने कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए हेडलाइन इंफ्लेशन (मुद्रास्फीति) के अनुमान को पहले के 3.7% से बढ़ाकर 4.7% कर दिया है. मौसम से जुड़े जोखिमों, खासकर अल नीनो के कारण रबी की बुआई के दौरान मिट्टी की नमी प्रभावित होने की आशंका जताई गई है, जिसका असर खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है।


    विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी क्षेत्र की स्थिति

    इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का बाहरी क्षेत्र काफी मजबूत स्थिति में बना हुआ है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नीतियों और मजबूत पूंजी प्रवाह के चलते देश का विदेशी मुद्रा भंडार स्थिर है. वर्तमान में यह भंडार लगभग 10.3 महीने के आयात कवर को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है. वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय रुपये और मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई सक्रिय रूप से मौद्रिक और तरलता प्रबंधन पर काम कर रहा है. वित्त मंत्रालय के इस अनुमान से साफ है कि मजबूत घरेलू मांग, निवेश गतिविधियों और सरकारी सुधारों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है।

  • नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नवंबर में 16 दिन बंद रहेंगे बैंक, दिवाली से गुरु नानक जयंती तक जानिए किस तारीख को कहां मिलेगी छुट्टी

    नई दिल्ली । नवंबर 2026 में बैंकिंग से जुड़े कामकाज की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए छुट्टियों की जानकारी महत्वपूर्ण है। इस महीने दिवाली, गोवर्धन पूजा, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती और अन्य क्षेत्रीय त्योहारों के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अलावा रविवार और महीने के दूसरे तथा चौथे शनिवार को भी नियमित अवकाश रहेगा। उपलब्ध छुट्टी कैलेंडर के अनुसार नवंबर में कुल 16 दिन बैंक बंद रहने का प्रावधान है। हालांकि, इन सभी दिनों में देशभर के बैंक एक साथ बंद नहीं रहेंगे। त्योहारों की छुट्टियां संबंधित राज्यों और शहरों के आधार पर लागू होंगी।

    नवंबर में कुल सात दिन रविवार और शनिवार के नियमित अवकाश के कारण बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा। इसके अलावा नौ तारीखों पर अलग-अलग राज्यों में त्योहारों और स्थानीय आयोजनों के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसलिए ग्राहकों को अपने शहर के अनुसार छुट्टियों की जानकारी रखना जरूरी है। खासतौर पर चेक जमा करने, बैंक ड्राफ्ट बनवाने, नकद लेनदेन और अन्य शाखा आधारित कामों के लिए पहले से योजना बनाना उपयोगी रहेगा।

    महीने की शुरुआत में 9 नवंबर को दिवाली, लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और विश्वकर्मा दिवस के अवसर पर अगरतला, भोपाल, चंडीगढ़, गंगटोक, इंफाल, जयपुर, कानपुर और लखनऊ समेत कई शहरों में बैंक बंद रहेंगे। इसके अगले दिन यानी 10 नवंबर को अहमदाबाद, बेलापुर, बेंगलुरु, देहरादून, गंगटोक, मुंबई और नागपुर में दिवाली से जुड़े आयोजनों तथा विक्रम संवत नववर्ष के कारण बैंक शाखाओं में छुट्टी रहेगी।

    11 नवंबर को भाई दूज, लक्ष्मी पूजा और चित्रगुप्त जयंती के चलते गंगटोक, इंफाल, कानपुर, कोलकाता, लखनऊ और शिमला में बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 13 नवंबर को मेघालय के शिलांग में वांगला उत्सव के कारण बैंकिंग सेवाएं शाखाओं में उपलब्ध नहीं रहेंगी।

    16 नवंबर को छठ पूजा के अवसर पर बिहार की राजधानी पटना और झारखंड की राजधानी रांची में बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। छठ पूजा बिहार और आसपास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पर्व है, जिसके चलते संबंधित शहरों में बैंकिंग कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके बाद 20 नवंबर को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इगास-बग्वाल के अवसर पर छुट्टी रहेगी।

    23 नवंबर को मेघालय के शिलांग में सेंग कुट स्नेम के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं, 24 नवंबर को गुरु नानक जयंती, कार्तिक पूर्णिमा और राहस पूर्णिमा के अवसर पर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के विभिन्न शहरों में बैंक शाखाओं में अवकाश रहेगा। महीने के अंतिम सप्ताह में 27 नवंबर को कर्नाटक के बेंगलुरु में कनकदास जयंती के कारण बैंक बंद रहेंगे।

    त्योहारों के अलावा नवंबर में पांच रविवार पड़ रहे हैं। ये रविवार 1, 8, 15, 22 और 29 नवंबर को होंगे। इन सभी दिनों में देशभर की बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। इसके अतिरिक्त 14 नवंबर को दूसरा शनिवार और 28 नवंबर को चौथा शनिवार होने के कारण भी नियमित बैंकिंग कामकाज नहीं होगा।

    हालांकि, बैंक शाखाओं में छुट्टी होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों की सभी बैंकिंग सेवाएं बंद हो जाएंगी। मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम जैसी सुविधाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की संभावना है। ग्राहक इन माध्यमों से पैसे ट्रांसफर करने, बैलेंस चेक करने और नकद निकालने जैसे काम कर सकेंगे।

    दूसरी ओर, चेक क्लियरेंस, बैंक दस्तावेजों से जुड़े काम और शाखा में जाकर किए जाने वाले लेनदेन छुट्टियों के कारण प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में नवंबर में किसी जरूरी वित्तीय काम की योजना बना रहे ग्राहकों को अपने शहर की छुट्टियों की सूची देखकर पहले ही बैंकिंग संबंधी औपचारिकताएं पूरी कर लेनी चाहिए।

  • शेयर बाजार में निवेश की बना रहे हैं योजना, जानिए कहां पैसा लगाने से मिल सकता है बेहतर रिटर्न

    शेयर बाजार में निवेश की बना रहे हैं योजना, जानिए कहां पैसा लगाने से मिल सकता है बेहतर रिटर्न


    नई दिल्ली। आज के समय में शेयर बाजार निवेश का एक लोकप्रिय विकल्प बनता जा रहा है। बहुत से लोग अपनी बचत को बैंक खाते में रखने के बजाय ऐसी जगह निवेश करना चाहते हैं जहां लंबे समय में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो। हालांकि शेयर बाजार में पैसा लगाना जितना आसान दिखाई देता है उतना ही जरूरी सही जानकारी और समझ के साथ निवेश करना भी है। बिना जानकारी के किसी शेयर को खरीद लेना या दूसरों की सलाह पर पैसा लगा देना नुकसान का कारण बन सकता है। अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आपके लिए कौन सा निवेश विकल्प सही रहेगा।

    नए निवेशकों के लिए निफ्टी 50 इंडेक्स फंड एक अच्छा शुरुआती विकल्प हो सकता है। इस तरह के फंड में पैसा लगाने पर निवेश निफ्टी 50 में शामिल बड़ी कंपनियों में फैल जाता है। इसका फायदा यह है कि निवेशक को अलग-अलग कंपनियों के शेयर चुनने की जरूरत नहीं पड़ती। इंडेक्स फंड का प्रदर्शन संबंधित इंडेक्स के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है। इसमें भी बाजार गिरने पर निवेश की कीमत कम हो सकती है इसलिए इसे लंबे समय के नजरिए से देखना बेहतर होता है।

    इसके अलावा लार्ज कैप म्यूचुअल फंड भी निवेश का विकल्प हो सकते हैं। ये फंड मुख्य रूप से बड़ी और स्थापित कंपनियों में निवेश करते हैं। जिन लोगों को अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में पैसा लगाने का अनुभव नहीं है उनके लिए म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना सुविधाजनक हो सकता है। वहीं फ्लेक्सी कैप फंड में फंड मैनेजर को बड़ी मझोली और छोटी कंपनियों में निवेश करने की सुविधा मिलती है। इससे निवेश का दायरा बढ़ता है लेकिन जोखिम भी बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति सीधे कंपनियों के शेयर खरीदना चाहता है तो उसे पहले कंपनी का कारोबार उसकी कमाई कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को समझना चाहिए। केवल कम कीमत वाला शेयर देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है। कई बार सस्ते दिखने वाले शेयर लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन करते हैं। निवेश से पहले कंपनी के नतीजों और उसके क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन करना जरूरी है। नए निवेशकों को शुरुआत में पेनी स्टॉक और बिना जानकारी वाले छोटे शेयरों से बचना चाहिए।

    निवेश की शुरुआत छोटी रकम से भी की जा सकती है। हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए लगाना एक व्यवस्थित तरीका हो सकता है। इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान नियमित निवेश होता रहता है। हालांकि एसआईपी से मुनाफे की गारंटी नहीं मिलती और निवेश की वैल्यू घट भी सकती है। इसलिए निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है।

    शेयर बाजार में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें। अगर आपको कुछ महीनों या एक-दो साल में पैसों की जरूरत पड़ सकती है तो उस रकम को शेयर बाजार जैसे जोखिम वाले विकल्पों में लगाना उचित नहीं हो सकता। लंबी अवधि के निवेश के लिए भी आपातकालीन जरूरतों का पैसा अलग रखना चाहिए। उधार लेकर निवेश करने और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम भरे कारोबार से शुरुआत करने से बचें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शेयर बाजार में रातोंरात अमीर बनने की सोच के बजाय अनुशासन और धैर्य के साथ निवेश करें। सही जानकारी हासिल करें और जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लें। निवेश में जोखिम हमेशा रहता है इसलिए किसी भी योजना में पैसा लगाने से पहले उसके नियम और खर्च जरूर समझें।

  • अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर

    अक्टूबर में सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट, चांदी 39,485 रुपये टूटी, सोना भी सात महीने के निचले स्तर पर


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सर्राफा बाजार में अक्टूबर 2026 के दौरान सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। लगातार कमजोर होते भाव ने कीमती धातुओं में निवेश करने वाले लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। चांदी करीब 11 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि सोने की कीमतों में भी पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। महीनेभर के आंकड़ों के अनुसार चांदी लगभग 40 हजार रुपये और सोना आठ हजार रुपये से अधिक सस्ता हो गया है।

    चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार में सबसे ज्यादा असर दिखाया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी के वायदा सौदों में शुक्रवार को 10,577 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद भाव 1.80 लाख रुपये के स्तर से नीचे फिसलकर 1,79,600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। इस स्तर पर चांदी का कारोबार पिछली बार दिसंबर 2025 में देखने को मिला था।

    महीने के शुरुआती और अंतिम कारोबारी दिनों की तुलना करें तो चांदी में बड़ी गिरावट सामने आती है। इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अक्टूबर को चांदी की कीमत 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम थी। वहीं 30 अक्टूबर को इसका भाव घटकर 1,81,344 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। इस तरह एक महीने में चांदी 39,485 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो गई। अन्य कारोबार आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में इसकी कुल गिरावट करीब 45 हजार रुपये तक पहुंची।

    सोने की कीमतों में भी लगातार कमजोरी बनी हुई है। शुक्रवार को सोना 4,347 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरकर 1,38,249 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह मार्च 2026 के बाद का सबसे कम भाव बताया गया है। सोने में लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। सितंबर में इसकी कीमत करीब 5,400 रुपये घटी थी, जबकि अक्टूबर में 10,787 रुपये प्रति 10 ग्राम की अतिरिक्त गिरावट सामने आई।

    महीने के आधार पर देखें तो 24 कैरेट सोने की कीमत 1 अक्टूबर को 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 30 अक्टूबर को यह घटकर 1,40,054 रुपये रह गई। इस तरह अक्टूबर में सोना 8,084 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। लगातार दो महीनों से जारी गिरावट ने सोने के बाजार में तेजी के पिछले रुख को कमजोर किया है।

    दोनों धातुओं की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर से भी काफी नीचे आ चुकी हैं। चांदी का सर्वकालिक उच्च स्तर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम रहा है। मौजूदा कीमतों के आधार पर इसमें रिकॉर्ड स्तर से करीब 57 प्रतिशत की गिरावट बताई जा रही है। वर्ष 2025 में चांदी ने लगभग 170 प्रतिशत की तेजी दर्ज की थी, लेकिन हालिया गिरावट ने उस बढ़त का बड़ा हिस्सा खत्म कर दिया है। इसी तरह सोने का सर्वकालिक उच्च स्तर 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा है। मौजूदा भाव इससे 42,321 रुपये नीचे है।

    कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कारण बताए जा रहे हैं। अमेरिका में महंगाई बढ़ने से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका मजबूत हुई है। सितंबर में अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (पीसीई) प्राइस इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मार्च के बाद सबसे अधिक थी। सालाना महंगाई दर भी बढ़कर 3.6 प्रतिशत पहुंच गई।

    ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने और चांदी जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की मांग प्रभावित होती है। निवेशक ऐसे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जहां उन्हें ब्याज या अन्य रिटर्न मिलने की संभावना हो।

    इसके अलावा मध्य पूर्व में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकर पर हमले से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे महीने तेजी दर्ज की गई। इससे वैश्विक महंगाई लंबे समय तक बने रहने की आशंका पैदा हुई है।

    अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती भी सोने-चांदी पर दबाव का एक कारण मानी जा रही है। तीसरी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर 3.4 प्रतिशत रही, जो अनुमान से बेहतर बताई गई। मजबूत आर्थिक प्रदर्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में निवेश के कारण डॉलर को भी समर्थन मिला है।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने फिलहाल ब्याज दरों को 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच स्थिर रखा है। हालांकि महंगाई के दबाव के चलते दिसंबर में दरें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। इसी आशंका के बीच निवेशकों की रणनीति में बदलाव आया है और सोने-चांदी में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।

  • सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट, आईटी शेयरों ने संभाला बाजार, मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी बिकवाली

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी और हेल्थकेयर कंपनियों के शेयरों में मजबूती ने बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निवेशकों के बीच महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता का असर बाजार के रुख पर दिखाई दिया।

    कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 308.49 अंक यानी 0.42 प्रतिशत गिरकर 74,459.53 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई निफ्टी 116.35 अंक यानी 0.51 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 23,053.10 पर आ गया। प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के साथ बाजार बंद होने के बावजूद कुछ बड़े शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 540.40 अंक यानी 0.93 प्रतिशत गिरकर 57,301.25 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 347.75 अंक यानी 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 18,463.60 के स्तर पर आ गया। इन दोनों सूचकांकों में गिरावट से छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की बिकवाली का संकेत मिला।

    सेक्टर आधारित कारोबार में आईटी शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक समर्थन दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.32 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन के प्रमुख लाभ वाले सूचकांकों में शामिल रहा। निफ्टी हेल्थकेयर में भी 1.58 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी फार्मा 1.55 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.17 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्पशन 0.29 प्रतिशत और निफ्टी इंफ्रास्ट्रक्चर 0.07 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।

    दूसरी ओर, कई सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी इंडिया डिफेंस में 2.01 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.78 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 1.46 प्रतिशत कमजोर हुआ। निफ्टी एनर्जी में 0.97 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.93 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में ट्रेंट, इंडिगो, इन्फोसिस, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, इटरनल, टेक महिंद्रा, एचयूएल टेक, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, सन फार्मा, आईटीसी, एशियन पेंट्स, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, एचयूएल और टाइटन बढ़त के साथ बंद हुए। इसके विपरीत एसबीआई, एमएंडएम, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, एक्सिस बैंक, बीईएल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल और मारुति सुजुकी के शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार में कमजोरी के पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को भी प्रमुख कारण माना गया। महंगाई को लेकर बनी चिंताओं के बीच यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान ने भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरह ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के ऊंचे मूल्यांकन को लेकर निवेशकों की चिंता दोबारा बढ़ी है। इसका असर एशियाई बाजारों में भी दिखाई दिया।

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से जुड़ी नई खबरों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया। इस माहौल में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बड़े स्तर पर बिकवाली हुई। दूसरी ओर, वैश्विक एआई शेयरों से कुछ निवेश निकलकर चुनिंदा आईटी कंपनियों में खरीदारी के रूप में आया। बेहतर नतीजों और डिफेंसिव मांग के चलते फार्मा तथा हेल्थकेयर शेयरों में भी मजबूती बनी रही। इस तरह आईटी और स्वास्थ्य क्षेत्र की खरीदारी के बावजूद व्यापक बाजार में गिरावट का रुख कायम रहा।

  • टेस्ला ने भारत में मॉडल वाई के लिए लॉन्च किया हैलोवीन मोड, कार में मिलेंगे भूतिया साउंड और खास लाइटिंग फीचर्स..

    टेस्ला ने भारत में मॉडल वाई के लिए लॉन्च किया हैलोवीन मोड, कार में मिलेंगे भूतिया साउंड और खास लाइटिंग फीचर्स..

    नई दिल्ली । इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला ने भारतीय ग्राहकों के लिए अपनी मॉडल वाई और मॉडल वाईएल कारों में नया सॉफ्टवेयर अपडेट पेश किया है। इस अपडेट की सबसे खास बात हैलोवीन मोड है, जिसमें कार को भूतिया थीम के अनुरूप कई नए फीचर्स से लैस किया गया है। इसमें विशेष साउंड इफेक्ट्स, आकर्षक लाइटिंग सीक्वेंस और थीम आधारित लॉक साउंड जैसी सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि नए अपडेट के जरिए ग्राहकों को गाड़ी में अतिरिक्त सुविधाओं और तकनीकी सुधारों का अनुभव मिलेगा।

    टेस्ला इंडिया ने शुक्रवार को इस अपडेट की घोषणा की। कंपनी के अनुसार, सॉफ्टवेयर अपडेट के माध्यम से कारों में नए फीचर्स शामिल करने के लिए ग्राहकों को सर्विस सेंटर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। ये सुविधाएं दूर से ही गाड़ियों तक पहुंचाई जा सकती हैं। इस तकनीक के जरिए कंपनी समय-समय पर अपनी कारों के सॉफ्टवेयर में बदलाव और सुधार उपलब्ध करा सकती है।

    नए हैलोवीन मोड में कई ऐसे फीचर्स दिए गए हैं, जो कार के बाहरी और आंतरिक अनुभव को खास बनाते हैं। इसमें भूत की थीम वाला व्हीकल अवतार शामिल है। इसके अलावा हैलोवीन से जुड़े विशेष साउंड इफेक्ट्स, खास लाइटिंग सीक्वेंस, मौसमी व्हीकल रैप और थीम आधारित लॉक साउंड भी दिए गए हैं। इन सुविधाओं के जरिए कार के लुक और आवाज को हैलोवीन के उत्सवी माहौल के अनुरूप बदला जा सकता है।

    अपडेट में ट्रिक ऑर ट्रीट मोड भी जोड़ा गया है। इस फीचर को सक्रिय करने पर जब कोई व्यक्ति कार के नजदीक पहुंचता है, तो गाड़ी से विशेष आवाजें और लाइटिंग इफेक्ट्स शुरू हो जाते हैं। यह सुविधा खास तौर पर हैलोवीन थीम को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे कार के आसपास होने वाली गतिविधियों के दौरान एक अलग तरह का अनुभव मिलता है।

    टेस्ला ने इस अपडेट में फोटोबूथ फंक्शन भी शामिल किया है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता कार में उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए तस्वीरों से जुड़ा अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इसके साथ ही वॉयस मैसेजिंग फीचर भी दिया गया है, जिसके जरिए ग्राहक टेस्ला मोबाइल ऐप की मदद से बोलकर संदेश भेज सकेंगे।

    वॉयस मैसेजिंग की खास बात यह है कि उपयोगकर्ता द्वारा ऐप के माध्यम से रिकॉर्ड किए गए संदेश को कार अपनी आवाज में सुनाएगी। इससे वाहन और मोबाइल ऐप के बीच कनेक्टिविटी को एक नया उपयोगी विकल्प मिलेगा। कंपनी का कहना है कि इन सुविधाओं का उद्देश्य ग्राहकों के वाहन अनुभव को अधिक सुविधाजनक और मनोरंजक बनाना है।

    कंपनी ने भारतीय ग्राहकों को नए फीचर्स का अनुभव लेने के लिए अपने एक्सपीरियंस सेंटरों पर आने का विकल्प भी दिया है। फिलहाल टेस्ला देश में नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई में एक्सपीरियंस सेंटर संचालित कर रही है। इसके अतिरिक्त पुणे और अहमदाबाद में अधिकृत कोलिजन सेंटर भी मौजूद हैं।

    इससे पहले अक्टूबर में टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क ने स्पेसएक्स की टेक्सास स्थित एक फैसिलिटी में रोडस्टर स्पोर्ट्स कार के नए संस्करण का प्रदर्शन किया था। इस दौरान कार के प्रोटोटाइप को एक घुमावदार ऊंचे ट्रैक पर चलते हुए दिखाया गया। प्रदर्शन के दौरान वाहन कुछ समय के लिए जमीन से ऊपर उठा और फिर सुरक्षित रूप से नीचे उतर गया। इस घटनाक्रम ने उड़ने वाली कार की तकनीक को लेकर भी चर्चा पैदा की थी।

  • दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, गोल्ड 800 और सिल्वर 3,730 रुपये तक टूटी

    नई दिल्ली । दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। शुक्रवार, 30 अक्टूबर को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.59 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि चांदी की कीमत में करीब 1.96 प्रतिशत की गिरावट आई। कारोबार के दौरान चांदी 3,730 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई। वैश्विक बाजार में कमजोर रुख और अमेरिका की आर्थिक परिस्थितियों को इस गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

    घरेलू वायदा बाजार में दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले कारोबारी बंद भाव 1,42,596 रुपये प्रति 10 ग्राम से 843 रुपये नीचे आकर 1,41,753 रुपये के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें लगभग 0.59 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, चांदी का भाव पिछले बंद स्तर 1,89,453 रुपये प्रति किलोग्राम से घटकर 1,85,723 रुपये पर आ गया। इसमें 3,730 रुपये यानी करीब 1.96 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। कॉमेक्स पर सोना लगभग 0.28 प्रतिशत गिरकर 4,020 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत 1.20 प्रतिशत टूटकर 51.750 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बदलती परिस्थितियों का असर सोने-चांदी की मांग पर पड़ रहा है।

    बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह अमेरिका में महंगाई के आंकड़े हैं। सितंबर में अमेरिकी कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई दर में मासिक आधार पर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि सालाना दर 3.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा तीसरी तिमाही में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई। इन आंकड़ों से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है।

    बाजार में यह आशंका भी बढ़ी है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। उपलब्ध बाजार अनुमानों के अनुसार, इस संभावना को 80 प्रतिशत से अधिक माना जा रहा है। ब्याज दरें ऊंची रहने पर निवेशकों का रुझान उन विकल्पों की ओर बढ़ सकता है, जिनसे नियमित ब्याज मिलता है। सोना और चांदी ब्याज नहीं देते, इसलिए ऐसी परिस्थितियों में इनकी मांग प्रभावित होती है।

    तकनीकी स्तरों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के लिए 1.40 लाख से 1.41 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन है। यदि कीमत इस दायरे से नीचे जाती है तो इसमें 1.37 लाख से 1.38 लाख रुपये तक गिरावट की संभावना बन सकती है। चांदी के लिए 1.83 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर अहम माना जा रहा है।

    चांदी की मौजूदा कीमतों की तुलना इस साल बने रिकॉर्ड स्तर से करें तो गिरावट काफी बड़ी दिखाई देती है। जनवरी के आखिरी सप्ताह में चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक उच्चतम स्तर छुआ था। इसके बाद कीमतों में लगातार कमजोरी आई और अब यह अपने रिकॉर्ड स्तर के आधे से भी कम भाव पर कारोबार कर रही है।

    इस बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम और आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं से तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई पर दबाव आ सकता है, जिसके कारण केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती का फैसला टाल सकते हैं।

    अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 8 और 9 दिसंबर को होने वाली बैठक पर है। साथ ही महंगाई और रोजगार से जुड़े आगामी आंकड़े भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। यदि आर्थिक आंकड़े कमजोर आते हैं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका घटती है तो सोने-चांदी की कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है। इसके विपरीत महंगाई के मजबूत आंकड़े आने पर गिरावट का दबाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी स्थिति में चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

  • एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    एक ही मकान में मकान मालिक और किरायेदार ले सकते हैं अलग-अलग LPG कनेक्शन, जानें क्या हैं जरूरी शर्तें

    नई दिल्ली ।किराए के मकान में रहने वाले लोगों के सामने अक्सर रसोई गैस कनेक्शन को लेकर असमंजस की स्थिति रहती है। खासकर तब, जब मकान मालिक के नाम पर पहले से घरेलू LPG कनेक्शन मौजूद हो। ऐसे में किरायेदार के मन में सवाल उठता है कि क्या वह उसी मकान के पते पर अपने नाम से अलग गैस कनेक्शन ले सकता है? इसका जवाब हां है। निर्धारित शर्तें पूरी होने पर एक ही पते पर मकान मालिक और किरायेदार दोनों के नाम से अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन हो सकते हैं।

    घरेलू LPG कनेक्शन के नियमों के अनुसार, एक परिवार के लिए सामान्य रूप से एक ही घरेलू गैस कनेक्शन की व्यवस्था है। इसका उद्देश्य एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा अलग-अलग नामों से एक से अधिक घरेलू कनेक्शन लेने पर रोक लगाना है। हालांकि, एक ही मकान में रहने वाले दो अलग-अलग परिवार अपनी अलग रसोई होने पर अलग-अलग कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    इस नियम के तहत मकान मालिक और किरायेदार को अलग परिवार के रूप में रहना जरूरी है। साथ ही दोनों की रसोई भी अलग-अलग होनी चाहिए। केवल मकान के अलग-अलग हिस्सों में रहने या अलग कमरे इस्तेमाल करने से दूसरा गैस कनेक्शन लेने की पात्रता नहीं बनती। परिवार और रसोई की अलग व्यवस्था इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    उदाहरण के तौर पर, यदि मकान मालिक अपने परिवार के साथ पहली मंजिल पर रहता है और किरायेदार दूसरी मंजिल पर रहता है, तो केवल मंजिल अलग होने से किरायेदार को दूसरा LPG कनेक्शन नहीं मिल सकता। यदि दोनों परिवार एक ही रसोई में खाना बनाते हैं और साझा व्यवस्था का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग कनेक्शन लेने की अनुमति नहीं होगी।

    इसके विपरीत, यदि मकान मालिक और किरायेदार के परिवार अलग हैं और दोनों के पास खाना बनाने के लिए अपनी स्वतंत्र रसोई है, तो वे एक ही मकान के पते पर अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि, आवेदन करने के बाद संबंधित गैस कंपनी और वितरक की ओर से दस्तावेजों तथा पात्रता की जांच की जाएगी। अंतिम मंजूरी इसी प्रक्रिया के आधार पर मिलेगी।

    नया गैस कनेक्शन लेने के लिए किरायेदार को अपनी पहचान और निवास से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने पड़ सकते हैं। इसमें आधार कार्ड या अन्य मान्य पहचान पत्र, किराए का समझौता और बिजली बिल जैसे पते के प्रमाण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा गैस एजेंसी की ओर से निर्धारित KYC प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।

    कुछ मामलों में एजेंसी अलग परिवार और स्वतंत्र रसोई होने से संबंधित जानकारी या अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है। इसलिए आवेदन करने से पहले संबंधित LPG वितरक से आवश्यक कागजात और प्रक्रिया की जानकारी लेना उचित रहेगा। इससे आवेदन के दौरान दस्तावेजों की कमी या पात्रता को लेकर होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    वहीं, यदि मकान मालिक और किरायेदार वास्तव में एक ही परिवार का हिस्सा हैं और एक ही रसोई का इस्तेमाल करते हैं, तो अलग-अलग घरेलू कनेक्शन लेने का विकल्प उपलब्ध नहीं होगा। ऐसी स्थिति में डबल बॉटल कनेक्शन यानी DBC की सुविधा ली जा सकती है।

    DBC में एक ही घरेलू गैस कनेक्शन के तहत दो सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसमें एक सिलेंडर खत्म होने पर दूसरे सिलेंडर का उपयोग किया जा सकता है। इससे गैस की आपूर्ति बनाए रखने में सुविधा मिलती है। हालांकि, इसे दो अलग-अलग घरेलू गैस कनेक्शन नहीं माना जाता।

    इसलिए किराए के मकान में रहने वाले लोगों को नया LPG कनेक्शन लेने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका परिवार और रसोई मकान मालिक से अलग हैं। निर्धारित दस्तावेजों और जांच प्रक्रिया के बाद ही एक ही पते पर अलग कनेक्शन की मंजूरी मिल सकती है।

  • दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    दिल्ली के 20 बड़े बाजारों पर महारैली का असर पड़ने की आशंका, 12 हजार करोड़ के कारोबार को लेकर व्यापारियों की चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की महारैली को लेकर व्यापारिक संगठनों ने चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि रैली के कारण मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में यातायात प्रभावित हो सकता है। इसका असर धनतेरस और दिवाली से पहले होने वाले कारोबार पर पड़ने की आशंका है। इस संबंध में चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

    कांग्रेस की इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है। व्यापारिक संगठन का दावा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के लिए 15 से 20 हजार वाहनों की जरूरत पड़ सकती है। संगठन के अनुसार, रामलीला मैदान में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं है। यहां 200 बड़ी बसों को खड़ा करने की भी पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बड़ी संख्या में बसों, कारों और अन्य वाहनों के मध्य दिल्ली में पहुंचने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

    CTI ने अपने पत्र में बताया है कि रामलीला मैदान के पांच किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के करीब 20 प्रमुख थोक और खुदरा बाजार स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट, पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।

    संगठन के मुताबिक, इन बाजारों में प्रतिदिन 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। यहां दिल्ली के नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर और मंगोलपुरी समेत 56 औद्योगिक क्षेत्रों से करीब पांच हजार ट्रक और टेंपो माल लेकर पहुंचते हैं। इसके अलावा रोजाना लगभग तीन हजार ट्रक इन बाजारों से सामान लेकर गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत और पानीपत सहित एनसीआर के 25 शहरों तथा देश के विभिन्न राज्यों में जाते हैं।

    CTI का कहना है कि रैली का असर केवल 1 नवंबर तक सीमित नहीं रह सकता। संगठन के अनुसार, 31 अक्टूबर की दोपहर से ही सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों की आवाजाही बढ़ सकती है। शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग और जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग होने की आशंका भी जताई गई है। ट्रांसपोर्टरों की ओर से 31 अक्टूबर से ही मालवाहक गाड़ियां भेजने में असमर्थता जताए जाने की बात कही गई है।

    व्यापारियों ने अपनी आशंका के समर्थन में 10 अक्टूबर का उदाहरण भी दिया है। CTI के अनुसार, उस दिन जंतर-मंतर पर पांच से सात हजार लोगों की मौजूदगी के बावजूद मध्य दिल्ली में करीब आठ घंटे तक यातायात प्रभावित रहा था। ऐसे में 10 लाख लोगों की प्रस्तावित भीड़ के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    संगठन ने सोनिया गांधी के सामने दो विकल्प रखे हैं। पहली मांग है कि महारैली को दिवाली के बाद 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। दूसरा विकल्प यह दिया गया है कि यदि रैली निर्धारित समय पर ही करनी है तो इसे रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी मैदान में कराया जाए, जहां संगठन के अनुसार 15 हजार वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था हो सकती है।

    CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी रैली का विरोध नहीं कर रहे, बल्कि त्योहारों के सबसे व्यस्त कारोबारी समय में अपने व्यापार को सुरक्षित रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। संगठन ने राहुल गांधी से भी रैली आगे बढ़ाने की अपील की थी, लेकिन उनकी ओर से इनकार किए जाने के बाद अब सोनिया गांधी को पत्र लिखकर अंतिम गुहार लगाई गई है।