Category: Economy

  • सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    सेंसेक्स-निफ्टी मामूली गिरावट के साथ बंद, स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी से बाजार में लौटी रौनक

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए। प्रमुख सूचकांकों में मामूली गिरावट के बावजूद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टरों में मीडिया इंडेक्स सबसे आगे रहा, जबकि बैंकिंग शेयरों पर दबाव बना रहा। अक्टूबर सीरीज के वायदा एवं विकल्प कारोबार की मासिक एक्सपायरी के दिन बाजार में अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

    सेंसेक्स मंगलवार को 8.08 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,598.67 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में इसने 73,762.98 का ऊपरी और 73,179.41 का निचला स्तर छुआ। दूसरी ओर, निफ्टी 3.45 अंक यानी 0.02 प्रतिशत फिसलकर 22,749.75 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान निफ्टी 22,636.85 से 22,829.75 के दायरे में रहा। दोनों प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की दिलचस्पी छोटे और मझोले शेयरों में अधिक दिखाई दी।

    स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में खरीदारी बाजार की प्रमुख विशेषता रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69 प्रतिशत, निफ्टी स्मॉलकैप 50 में 2.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.19 प्रतिशत की तेजी आई। निफ्टी नेक्स्ट 50 में 1.30 प्रतिशत और निफ्टी 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.01 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी मिडकैप 50 में 0.90 प्रतिशत की तेजी रही। इससे संकेत मिला कि सेंसेक्स और निफ्टी की सुस्ती के बावजूद व्यापक बाजार में खरीदारी का रुझान मजबूत रहा।

    शेयर बाजार की मजबूती का असर कारोबार की व्यापकता में भी नजर आया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले 3,665 शेयरों में से 2,455 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,103 शेयरों में गिरावट रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कुल 4,547 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 2,936 शेयर चढ़े और 1,383 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इस आंकड़े से पता चलता है कि प्रमुख सूचकांकों के लगभग स्थिर रहने के बावजूद बाजार में बढ़त वाले शेयरों की संख्या अधिक रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन में निफ्टी मीडिया इंडेक्स 3.52 प्रतिशत उछलकर सबसे आगे रहा। निफ्टी मिडस्मॉल हेल्थकेयर में 2.78 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी में 1.91 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा में 1.89 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। निफ्टी ऑटो 1.48 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.20 प्रतिशत और निफ्टी एफएमसीजी 0.74 प्रतिशत बढ़कर बंद हुए। निफ्टी मेटल में भी 0.63 प्रतिशत की बढ़त रही।

    इसके विपरीत, बैंकिंग और कुछ अन्य क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.73 प्रतिशत और निफ्टी बैंक 0.72 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी आईटी में 0.26 प्रतिशत की कमजोरी रही। निफ्टी सीमेंट 1.80 प्रतिशत टूटकर कमजोर प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।

    बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 4.74 प्रतिशत गिरकर 16.35 पर आ गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 115.90 डॉलर प्रति बैरल रहा। कुल मिलाकर, मंगलवार को प्रमुख सूचकांकों में खास तेजी नहीं दिखी, लेकिन स्मॉलकैप, मिडकैप और मीडिया शेयरों की बढ़त ने बाजार के व्यापक रुझान को मजबूती दी।

  • मध्य प्रदेश में त्योहारी खरीदारी का जोर, प्रीमियम उत्पादों के साथ किफायती सामानों की भी बढ़ी मांग

    मध्य प्रदेश में त्योहारी खरीदारी का जोर, प्रीमियम उत्पादों के साथ किफायती सामानों की भी बढ़ी मांग


    भोपाल।
    अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में ऑनलाइन खरीदारी का रुझान तेजी से बढ़ा है। स्मार्टफोन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, बड़े घरेलू उपकरण, फैशन, ब्यूटी और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी के अनुसार, राज्य में सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग सात गुना बढ़ी है। वहीं, प्रीमियम स्मार्टफोन की खरीदारी में 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई। इसके साथ ही ग्राहकों ने किफायती खरीदारी के विकल्पों में भी दिलचस्पी दिखाई है।

    बड़े घरेलू उपकरणों की खरीदारी में जबलपुर सबसे आगे

    त्योहारी सीजन में रेफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे बड़े घरेलू उपकरणों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में जबलपुर में इन उत्पादों की मांग 26 गुना, ग्वालियर में 21 गुना, इंदौर में 16 गुना और भोपाल में 12 गुना बढ़ी है। लैपटॉप, मॉनिटर, टैबलेट, गेमिंग कंसोल, हेडफोन, ईयरफोन, स्मार्ट रिंग और साउंडबार जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद भी ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं।

    फिटनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की बढ़ी लोकप्रियता

    मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में फिटनेस और लाइफस्टाइल से जुड़े उत्पादों की खरीदारी में भी तेजी आई है। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में रनिंग शूज की मांग जबलपुर में सात गुना, ग्वालियर में छह गुना और इंदौर में पांच गुना दर्ज की गई। एनालॉग घड़ियों की मांग ग्वालियर और इंदौर में पांच-पांच गुना बढ़ी है। इसके अलावा फिटनेस ट्रैकर्स, बैडमिंटन रैकेट और एक्सरसाइज बाइक जैसे उत्पादों को भी ग्राहकों ने पसंद किया।

    ब्यूटी और पर्सनल केयर उत्पादों की मांग में उछाल

    त्योहारी खरीदारी के दौरान ब्यूटी और पर्सनल केयर श्रेणी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भोपाल में बॉडी केयर उत्पादों की मांग सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में 14 गुना बढ़ी। साबुन की मांग भोपाल में 16 गुना, जबलपुर में 10 गुना और इंदौर में आठ गुना दर्ज की गई। स्कैल्प ट्रीटमेंट, फेस केयर और कैजुअल फुटवियर भी प्रमुख शहरों में ग्राहकों की पसंद में शामिल रहे।

    रोजमर्रा के सामान और बेबी केयर उत्पादों की मांग भी बढ़ी

    राज्य में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी में भी मजबूती देखने को मिली। भोपाल और जबलपुर में बेबी प्रोडक्ट्स की मांग तीन गुना बढ़ी। हेल्दी ब्रेकफास्ट विकल्पों में योगाबार हाई प्रोटीन ओट्स की मांग भोपाल में आठ गुना और इंदौर में सात गुना दर्ज की गई। घरेलू सफाई और लॉन्ड्री उत्पादों की मांग भोपाल में 15 गुना, जबकि ग्वालियर और इंदौर में 11-11 गुना बढ़ी।

    बेबी केयर श्रेणी में हिमालया हैप्पी बेबी गिफ्ट पैक्स की मांग भोपाल में सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में 95 गुना बढ़ने का दावा किया गया है। यह आंकड़ा त्योहारी खरीदारी के दौरान बच्चों की देखभाल से जुड़े उत्पादों में बढ़ी दिलचस्पी को दर्शाता है।

    होम, किचन और आउटडोर उत्पादों की खरीदारी में भी तेजी

    घर, रसोई और आउटडोर से जुड़े उत्पादों की मांग में भी वृद्धि दर्ज की गई। सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में इस श्रेणी में ग्वालियर में लगभग पांच गुना, इंदौर और जबलपुर में करीब चार-चार गुना तथा भोपाल में तीन गुना से अधिक वृद्धि हुई। फिटनेस उपकरणों, सजावटी और आपातकालीन लाइटिंग, कार के रखरखाव से जुड़े उत्पादों तथा फैमिली कार्ड गेम्स की मांग ने इस वृद्धि में योगदान दिया।

    किफायती खरीदारी के विकल्पों को भी मिला बढ़ावा

    प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ ग्राहकों ने किफायती खरीदारी को भी प्राथमिकता दी। अमेज़न बाजार पर सामान्य कारोबारी दिनों की तुलना में भोपाल में छह गुना, ग्वालियर और जबलपुर में चार-चार गुना तथा इंदौर में तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई।

    कंपनी के अनुसार, अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2026 के दौरान मध्य प्रदेश में खरीदारी के रुझान से स्पष्ट है कि ग्राहक एक ओर प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर खर्च कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रोजमर्रा की जरूरतों और बजट के अनुकूल उत्पादों की खरीदारी में भी सक्रिय हैं। कंपनी ने बताया कि ग्राहक त्योहारी सीजन के दौरान जारी ऑफर्स और डील्स का लाभ उठा सकते हैं।

  • करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव

    करवाचौथ से पहले सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट, 22 कैरेट गोल्ड सस्ता, जानें दिल्ली से भोपाल तक के ताजा भाव


    नई दिल्ली । करवाचौथ से पहले सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के दाम नीचे आए। सोने की कीमत में करीब 660 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की कमी आई, जबकि चांदी का भाव लगभग 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम टूट गया। त्योहारी सीजन में खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए कीमतों में यह बदलाव महत्वपूर्ण है।

    ताजा दरों के अनुसार, 22 कैरेट सोने की कीमत कई प्रमुख शहरों में 1,31,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई है। वहीं, 24 कैरेट सोने का भाव भी 1,42,900 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम दर्ज किया गया। बीते सप्ताह के दौरान भी सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी। ऐसे में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों की नजर अब बाजार के ताजा भाव पर है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 27 अक्टूबर को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,870 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,964 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर और लखनऊ में भी दोनों श्रेणियों की कीमतें दिल्ली के समान रहीं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,720 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। कोलकाता और बेंगलुरु में भी सोने के भाव इसी स्तर पर रहे। इन शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,42,720 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,814 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,42,770 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा। यहां 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी कीमतें अहमदाबाद के समान रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,770 रुपये और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,30,864 रुपये प्रति 10 ग्राम रही।

    चांदी की कीमतों में भी मंगलवार को उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सोमवार की तुलना में इसका भाव करीब 3,260 रुपये प्रति किलोग्राम नीचे आया। इसके बाद अधिकांश प्रमुख शहरों में चांदी की कीमत लगभग 1,93,150 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। सोने के साथ चांदी के दाम घटने से त्योहारों के दौरान इन धातुओं की खरीदारी पर विचार कर रहे ग्राहकों को ताजा कीमतों की जानकारी लेना जरूरी हो गया है।

    करवाचौथ से पहले सोने और चांदी के भाव में आई कमी ऐसे समय हुई है, जब बाजार में त्योहारों के लिए खरीदारी की गतिविधियां जारी हैं। हालांकि, कीमतों में गिरावट को खरीदारी के लिए निश्चित रूप से बेहतर अवसर नहीं माना जा सकता, क्योंकि वास्तविक खर्च आभूषण के डिजाइन, वजन, शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू करों पर भी निर्भर करता है।

    खरीदारी करने से पहले ग्राहकों को अपने शहर के सर्राफा बाजार में उपलब्ध दरों की पुष्टि करनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों में अंतर हो सकता है। इसके अलावा, सोने की शुद्धता और आभूषण पर हॉलमार्क की जांच करना भी जरूरी है। बाजार में कीमतों में होने वाले बदलाव के कारण खरीदारी के समय अंतिम बिल में दर्ज राशि घोषित दर से अलग हो सकती है।

  • भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    भारत-चिली व्यापार समझौता अंतिम चरण में, कनाडा और अन्य देशों के साथ भी बातचीत तेज

    नई दिल्ली । भारत और चिली के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) अंतिम चरण में पहुंच गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कनाडा के साथ भी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अच्छी गति से आगे बढ़ रही है। भारत विभिन्न देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने के लिए समझौतों पर काम कर रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना है।

    नीदरलैंड्स की दो दिवसीय यात्रा के दौरान गोयल ने बताया कि दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ भी औपचारिक वार्ता शुरू हो चुकी है। अगस्त में भारत और एसएसीयू ने वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते की दिशा में बातचीत शुरू करने के लिए संदर्भ शर्तों पर हस्ताक्षर किए थे। इस समूह में बोत्सवाना, इस्वातिनी, लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

    गोयल के मुताबिक, चिली के साथ समझौता लगभग निष्कर्ष तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। कनाडा के साथ बातचीत भी अच्छी प्रगति कर रही है, जबकि एसएसीयू के साथ चर्चा अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए इस समूह के साथ समझौते की प्रक्रिया में अधिक समय लग सकता है।

    भारत मेक्सिको के साथ भी व्यापारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। गोयल ने बताया कि मेक्सिको भारत के साथ शुरुआती चरण के व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने का इच्छुक है। इसके अलावा ब्राजील में चुनावों के बाद सरकार की निरंतरता से दक्षिण अमेरिकी व्यापारिक समूह मर्कोसुर के साथ भारत के मौजूदा वरीयता प्राप्त व्यापार समझौते के विस्तार की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।

    नीदरलैंड्स यात्रा के दौरान गोयल ने वहां के विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग मंत्री स्जोर्ड स्जोर्ड्स्मा, आर्थिक मामलों एवं जलवायु मंत्री हेलेन हेर्बर्ट और नॉर्थ हॉलैंड के किंग्स कमिश्नर आर्थर वैन डाइक के साथ बैठकें कीं। उन्होंने डच संसद के प्रतिनिधि सदन की विदेश व्यापार एवं विकास सहयोग समिति तथा सीनेट की यूरोपीय मामलों की समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की।

    इन बैठकों में भारत और नीदरलैंड्स के आर्थिक संबंधों के साथ भारत-यूरोपीय संघ आर्थिक साझेदारी पर चर्चा हुई। यात्रा का प्रमुख कार्यक्रम इंडिया-नीदरलैंड्स बिजनेस फोरम रहा, जिसकी सह-अध्यक्षता गोयल और स्जोर्ड्स्मा ने की। इसमें दोनों देशों की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों सहित करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

    फोरम में भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से बनने वाले अवसरों, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश साझेदारी मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार किया गया। गोयल ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा और खुदरा कारोबार से जुड़ी डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठकें भी कीं।

    इसके अलावा उन्होंने द हेग में भारतीय दूतावास और एचएसबीसी नीदरलैंड्स की ओर से आयोजित 15 डच कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। इस बैठक में व्यापार और निवेश से जुड़े अवसरों पर चर्चा हुई।

    गोयल ने कहा कि भारत और नीदरलैंड्स के संबंध रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनके अनुसार, भारत-यूरोपीय संघ एफटीए की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। उन्होंने नीदरलैंड्स को यूरोपीय बाजारों तक पहुंचने का प्रमुख प्रवेश द्वार बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

  • राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    राहुल गांधी की रैली पर व्यापारियों की चिंता बरकरार, दिल्ली में 10 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान

    नई दिल्ली । दिल्ली में 1 नवंबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों ने एक बार फिर कार्यक्रम की तारीख बदलने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि दिवाली के आसपास चल रहे खरीदारी के महत्वपूर्ण सीजन में रैली आयोजित होने से राजधानी के प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित हो सकता है। व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने आशंका जताई है कि स्थिति गंभीर होने पर व्यापारियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    यह मांग ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया है कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली आयोजित करने का उनका इरादा बरकरार है। सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भी पत्र की प्रति भेजकर अनुरोध किया है कि वह इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के दूसरे सहयोगी दलों के साथ चर्चा करें। संगठन का कहना है कि रैली के आयोजन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर बाजारों में कारोबार करने वाले व्यापारी असमंजस में हैं।

    राहुल गांधी ने सोमवार को व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि उनकी चिंताओं को सुना जा रहा है और उनकी परवाह की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, सड़कों को सील कर दिया और राजधानी में लॉकडाउन जैसी स्थिति बना दी। उन्होंने यह भी कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने पर विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। हालांकि, सीटीआई का कहना है कि इस बयान से व्यापारियों की व्यावहारिक चिंताएं दूर नहीं हुई हैं।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रामलीला मैदान के आसपास स्थित 20 प्रमुख बाजारों के व्यापारी रैली की घोषणा के बाद से चिंतित हैं। कारोबारियों के सवाल हैं कि क्या 31 अक्टूबर से ही बैरिकेडिंग शुरू हो जाएगी, क्या प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध लगाए जाएंगे और क्या ग्राहकों को बाजारों तक पहुंचने में परेशानी होगी। इन व्यवस्थाओं का असर खरीदारी और माल की आवाजाही पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    व्यापारियों ने रैली में शामिल होने वाले लोगों और वाहनों की संभावित संख्या पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, यदि आयोजकों के अनुमान के मुताबिक रैली में 10 लाख लोग और 15,000 से 20,000 वाहन पहुंचते हैं, तो पार्किंग की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती होगी। सीटीआई का दावा है कि रामलीला मैदान के आसपास 200 वाहनों के लिए भी अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है। संगठन के मुताबिक, इस आयोजन से करीब 21 प्रमुख बाजार सीधे प्रभावित हो सकते हैं।

    सीटीआई ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, उस कार्यक्रम में 3,000 से 4,000 लोग शामिल हुए थे, लेकिन इसके कारण मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात प्रतिबंध लगाए गए और व्यापारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन का अनुमान है कि 1 नवंबर को प्रस्तावित बड़ी रैली से पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली में व्यापारिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।

    व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि रैली को भाई दूज के बाद, यानी 10 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए। यदि तारीख बदलना संभव नहीं है, तो कार्यक्रम को रामलीला मैदान के बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कराने पर विचार किया जाए। उनका तर्क है कि इससे आसपास के व्यावसायिक क्षेत्रों पर पड़ने वाला असर कम किया जा सकता है।

    कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) के महासचिव और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी राहुल गांधी के बयान को व्यापारियों की चिंताओं का समाधान नहीं माना। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेट्रो बंद करने और सड़कें सील करने की जरूरत पड़ी, तो प्रशासन ने ऐसा क्यों किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की मुख्य चिंता त्योहारी सीजन में कारोबार को बड़े राजनीतिक आयोजनों के कारण होने वाले व्यवधान से बचाना है।

  • अनूप बागची बने एचडीएफसी बैंक के नए एमडी और सीईओ, शशिधर जगदीशन का कार्यकाल पूरा

    अनूप बागची बने एचडीएफसी बैंक के नए एमडी और सीईओ, शशिधर जगदीशन का कार्यकाल पूरा

    नई दिल्ली ।देश के प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंक एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। अनूप बागची ने 27 अक्टूबर 2026 से बैंक के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का कार्यभार संभाल लिया है। यह बदलाव शशिधर जगदीशन का कार्यकाल पूरा होने के बाद हुआ है। जगदीशन ने 26 अक्टूबर को कारोबारी समय समाप्त होने के साथ इन दोनों पदों से अपना कार्यकाल पूरा किया।

    बैंक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अनूप बागची अब बैंक के प्रबंधन और परिचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनके सामने बैंक के मौजूदा प्रदर्शन को बनाए रखने, कारोबार की वृद्धि को आगे बढ़ाने और संगठन से जुड़ी चुनौतियों पर ध्यान देने की जिम्मेदारी होगी।

    शशिधर जगदीशन के कार्यकाल की सराहना करते हुए बैंक ने कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदर्शन, संगठनात्मक संस्कृति और ग्राहक-केंद्रित कार्यशैली को मजबूत करने में मदद मिली। बैंक ने यह भी रेखांकित किया कि कॉरपोरेट भारत के सबसे बड़े विलयों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा कराने में जगदीशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके कार्यकाल के बाद अब बैंक के नेतृत्व की जिम्मेदारी अनूप बागची को सौंपी गई है।

    नए एमडी और सीईओ ऐसे समय में पद संभाल रहे हैं, जब बैंक का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है, लेकिन कुछ परिणाम बाजार की अपेक्षाओं से पीछे भी रहे हैं। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 19,610 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5.2 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, लाभ का आंकड़ा बाजार के अनुमान से थोड़ा कम रहा।

    तिमाही के दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय यानी नेट इंटरेस्ट इनकम 9.7 प्रतिशत बढ़कर 34,619 करोड़ रुपये पहुंच गई। विश्लेषकों ने इसके 34,991 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था। वहीं, बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.16 प्रतिशत दर्ज किया गया। बैंक के अनुसार, अधिक प्रावधान और अपेक्षा से कम शुद्ध ब्याज आय का असर तिमाही के प्रदर्शन पर पड़ा। इसके बावजूद ऋण और जमा, दोनों में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

    वित्तीय नतीजों के अलावा बैंक एक संभावित गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले की आंतरिक जांच भी कर रहा है। बैंक के प्रवक्ता के अनुसार, मामले से जुड़े सभी तथ्यों का आकलन किया जा रहा है। समीक्षा पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जांच प्रक्रिया और संबंधित लोगों की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बैंक ने फिलहाल इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया है।

    अक्टूबर की शुरुआत में सामने आए कुछ दावों में कहा गया था कि बैंक की आंतरिक जांच के दौरान दो वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से गोपनीय जानकारी साझा किए जाने के संकेत मिले हैं। हालांकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने आने तक बैंक ने कोई विस्तृत सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

    वर्ष 2026 में बैंक के नेतृत्व से जुड़े अन्य बदलाव भी हुए हैं। मार्च में तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने व्यक्तिगत मूल्यों और बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों के बीच मतभेद का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा, उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा ने भी वर्ष के अंत तक पद छोड़ने का निर्णय लिया है। उन्होंने 31 दिसंबर से प्रभावी रूप से अपनी सेवाएं समाप्त करने का अनुरोध किया है।

    ऐसे में अनूप बागची के कार्यभार संभालने के साथ एचडीएफसी बैंक में नेतृत्व का नया चरण शुरू हो गया है। बैंक के वित्तीय प्रदर्शन, आंतरिक समीक्षा और प्रबंधन से जुड़े आगामी फैसलों पर अब निवेशकों और बैंकिंग क्षेत्र की नजर रहेगी।

  • Share Market Today, बाजार की दिशा तय करेंगे वैश्विक संकेत और कंपनियों के नतीजे, निवेशकों के लिए अहम रहेगा आज का कारोबार

    Share Market Today, बाजार की दिशा तय करेंगे वैश्विक संकेत और कंपनियों के नतीजे, निवेशकों के लिए अहम रहेगा आज का कारोबार


    नई दिल्ली । शेयर बाजार में मंगलवार 27 अक्टूबर 2026 को कारोबार के दौरान उतार चढ़ाव का माहौल बना रहा। पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी रिकवरी के बाद निवेशकों को बाजार में तेजी लौटने की उम्मीद थी लेकिन वैश्विक संकेतों कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों ने बाजार की चाल को प्रभावित किया। कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी पर दबाव दिखाई दिया। निवेशकों की नजर इस बात पर बनी रही कि घरेलू खरीदारी बाजार को कितनी मजबूती दे पाती है और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां आगे कारोबार की दिशा को किस तरह प्रभावित करती हैं।

    सोमवार 26 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद खरीदारी लौटी थी। सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73 हजार 606.75 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 153.20 अंक यानी 0.68 प्रतिशत चढ़कर 22 हजार 753.20 के स्तर पर पहुंच गया था। इस तेजी से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली लेकिन मंगलवार के कारोबार में बाजार की स्थिरता को लेकर सतर्कता बनी रही। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि बाजार में आई रिकवरी आगे भी जारी रहती है या फिर वैश्विक दबाव एक बार फिर गिरावट का कारण बनता है।

    बाजार की चिंता बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में कच्चे तेल की कीमतें शामिल हैं। ब्रेंट क्रूड के करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता बढ़ी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर महंगाई परिवहन खर्च और कई कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। यदि कंपनियों की लागत बढ़ती है तो उनके मुनाफे पर भी दबाव आने की आशंका रहती है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता को और बढ़ाया है।

    मंगलवार को आईटी शेयरों में कमजोरी भी बाजार पर दबाव बनाने वाला प्रमुख कारक रही। इंफोसिस के वित्त वर्ष 2027 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती की खबर से कंपनी के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इसके अलावा टीसीएस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसे प्रमुख आईटी शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। हालांकि दूसरी ओर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में मजबूती दिखाई दी। कंपनी के तिमाही प्रदर्शन से जुड़े बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में कंपनियों के वित्तीय नतीजों के आधार पर अलग अलग क्षेत्रों में खरीदारी और बिकवाली देखने को मिल रही है।

    वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेश की दिशा और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही डेरिवेटिव सौदों की एक्सपायरी के आसपास कारोबार में उतार चढ़ाव बढ़ने की संभावना भी रहती है। ऐसे में बाजार की अगली चाल को लेकर निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल बना हुआ है।

    इस माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार की हर तेजी या गिरावट के आधार पर जल्दबाजी में फैसला न लें। निवेश से पहले कंपनियों की वित्तीय स्थिति उनके नतीजों और जोखिमों का आकलन करना महत्वपूर्ण है। अल्पकालीन कारोबार करने वालों को बाजार में तेजी से बदलती परिस्थितियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए जबकि लंबी अवधि के निवेशकों को अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम सहने की क्षमता के अनुसार रणनीति बनानी चाहिए। कुल मिलाकर भारतीय शेयर बाजार की दिशा आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक घटनाक्रम अमेरिकी फेड के फैसले और कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

  • कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    कमजोर वैश्विक संकेतों और महंगे कच्चे तेल से शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 396 अंक तक फिसला

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 27 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। बाजार में यह लगातार छठा कारोबारी सत्र रहा, जब गिरावट का दबाव देखने को मिला। इस सप्ताह भी बाजार लगातार दूसरे दिन कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया।

    शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 122.37 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 73,484.38 पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 44.40 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,708.80 के स्तर पर खुला। कारोबार आगे बढ़ने के साथ प्रमुख सूचकांकों पर दबाव और बढ़ गया। सेंसेक्स एक समय अपने पिछले बंद स्तर 73,606.75 से 395.99 अंक यानी 0.53 प्रतिशत नीचे आकर 73,210.76 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। निफ्टी 50 भी अपने पिछले बंद स्तर 22,753.20 से 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत गिरकर 22,653.20 तक फिसल गया।

    हालांकि, व्यापक बाजार में प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन देखने को मिला। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.6 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.54 प्रतिशत चढ़ा। इससे संकेत मिला कि प्रमुख कंपनियों के शेयरों में दबाव के बावजूद छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के कुछ शेयरों में खरीदारी बनी रही।

    सेक्टरवार कारोबार में आईटी, सीमेंट और ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स एक प्रतिशत से अधिक गिर गया। निफ्टी सीमेंट में 0.98 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.53 प्रतिशत की कमजोरी रही। दूसरी ओर, फार्मा, हेल्थकेयर और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में खरीदारी दर्ज की गई। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.68 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी फार्मा में 0.44 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की बढ़त रही।

    मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूती दिखाई। रुपया दो पैसे बढ़कर 95.17 प्रति डॉलर पर खुला। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.19 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। हालांकि, रुपये का कमजोर स्तर और कच्चे तेल की महंगाई बाजार के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

    बाजार के सामने प्रमुख चुनौतियों में ब्रेंट क्रूड का 114 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का लगभग 4.97 प्रतिशत पर रहना शामिल है। ऐसे माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों के जोखिम लेने से बचने की आशंका जताई गई है। हालांकि, दूसरी तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों में दिखाई दे रहे बेहतर कारोबारी संकेत और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकते हैं।

    तकनीकी स्तरों के लिहाज से निफ्टी 50 के लिए 22,690 के आसपास रिकवरी की कोशिश और कमजोरी, दोनों संभावनाएं बनी हुई हैं। यदि सूचकांक 22,630 के ऊपर टिकता है, तो 23,000 से 23,500 तक पहुंचने की संभावना पर नजर रखी जा सकती है। हालांकि, 22,800 से 22,900 के दायरे में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसके विपरीत, 22,630 का स्तर टूटने पर निफ्टी 22,250 से 22,000 तक फिसल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

    संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 1,462 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार दसवें कारोबारी सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 2,609 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ बंद हुए। एसएंडपी 500 में 0.7 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.82 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान मिला-जुला रुख रहा।

    आगे बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का असर पड़ सकता है। साप्ताहिक और मासिक डेरिवेटिव अनुबंधों की समाप्ति के कारण कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक और कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

  • छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग

    छोटे कारोबारियों के लिए AI कैसे बन सकता है तरक्की का साधन, किराना दुकान से रेस्टोरेंट तक जानें इसके उपयोग


    नई दिल्ली ।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों और स्टार्टअप के साथ अब छोटे कारोबारियों के लिए भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। किराना दुकान, कपड़ों का कारोबार, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और छोटी विनिर्माण इकाइयों में AI की मदद से रोजमर्रा के कई काम आसान बनाए जा सकते हैं। इससे कारोबारियों को समय बचाने, ग्राहकों की जरूरतों को समझने और अपने व्यवसाय के विस्तार पर ध्यान देने का अवसर मिल सकता है।

    छोटे कारोबारों में अक्सर सीमित कर्मचारी ही बिक्री, स्टॉक, हिसाब-किताब, प्रचार और ग्राहक सेवा जैसी जिम्मेदारियां संभालते हैं। इसके मुकाबले बड़ी कंपनियों के पास अलग-अलग कामों के लिए विशेष टीमें होती हैं। ऐसे में डिजिटल उपकरण और AI आधारित सुविधाएं छोटे कारोबारियों के लिए सहायक बन सकती हैं। हालांकि, तकनीक का चुनाव कारोबार की जरूरत और बजट को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    किराना दुकानदार बिक्री और स्टॉक से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने के लिए डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे ज्यादा बिकने वाली वस्तुओं की पहचान करने और दोबारा सामान मंगाने की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। कपड़ों के कारोबार में पिछले बिक्री रिकॉर्ड और मौसमी मांग को समझकर खरीदारी की योजना बेहतर बनाई जा सकती है। इस तरह उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल कारोबार से जुड़े फैसलों को व्यवस्थित करने में सहायक हो सकता है।

    रेस्टोरेंट संचालक AI की मदद से मेन्यू के विवरण, प्रचार सामग्री और सोशल मीडिया पोस्ट तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देने में भी ऐसे उपकरण उपयोगी हो सकते हैं। कोचिंग सेंटरों में प्रवेश, फीस, कक्षाओं के समय और पाठ्यक्रम से संबंधित नियमित पूछताछ को व्यवस्थित किया जा सकता है। वहीं, छोटी विनिर्माण इकाइयां ऑर्डर, स्टॉक और डिलीवरी से जुड़ी जानकारी को संभालने के लिए डिजिटल समाधानों का उपयोग कर सकती हैं।

    छोटे कारोबारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि हर काम के लिए महंगे AI सॉफ्टवेयर की आवश्यकता नहीं होती। यदि किसी दुकानदार को बिलिंग और स्टॉक का हिसाब रखने में परेशानी है, तो सामान्य बिलिंग या इन्वेंटरी सॉफ्टवेयर ही उसकी जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरी ओर, जहां बड़ी संख्या में ग्राहकों की पूछताछ आती है, वहां AI आधारित चैटबॉट सामान्य सवालों के जवाब देने और जानकारी को संबंधित कर्मचारी तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

    सभी ऑटोमेशन उपकरण AI आधारित नहीं होते। कुछ सॉफ्टवेयर पहले से तय नियमों के अनुसार काम करते हैं, जबकि AI आधारित प्रणालियां भाषा समझने, सामग्री तैयार करने और आंकड़ों का विश्लेषण करने जैसे कार्य कर सकती हैं। इसलिए किसी समाधान को अपनाने से पहले उसकी उपयोगिता, लागत और मौजूदा कार्यप्रणाली के साथ अनुकूलता की जांच करनी चाहिए।

    AI का इस्तेमाल करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। इससे तैयार की गई जानकारी या बिक्री संबंधी अनुमान हमेशा सही हों, यह जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण व्यावसायिक फैसले लेने से पहले परिणामों की जांच करनी चाहिए। ग्राहकों की निजी जानकारी, भुगतान विवरण और कारोबार के गोपनीय आंकड़ों की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी है। किसी सेवा का इस्तेमाल करने से पहले उसकी गोपनीयता नीति और डेटा उपयोग की शर्तों को समझना चाहिए।

    छोटे कारोबारी शुरुआत किसी एक काम से कर सकते हैं। मसलन, प्रचार सामग्री तैयार करना, ग्राहकों के सामान्य सवालों के जवाब देना या बिक्री के आंकड़ों को समझना। इसके बाद यह देखा जा सकता है कि संबंधित उपकरण से कितना समय बचा, खर्च कितना हुआ और काम में कितना सुधार आया। यदि परिणाम उपयोगी हों, तो धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छोटे कारोबारों की असली ताकत अनुभव, स्थानीय बाजार की समझ और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध हैं। AI इन खूबियों का विकल्प नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने का साधन बन सकता है। कारोबारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे तकनीक को केवल नया चलन समझकर नहीं, बल्कि अपनी वास्तविक जरूरतों के हिसाब से अपनाएं।

  • पेट्रोल के विकल्प के रूप में 100% एथेनॉल को मंजूरी, अब E100 ईंधन से चलेंगी खास गाड़ियां

    पेट्रोल के विकल्प के रूप में 100% एथेनॉल को मंजूरी, अब E100 ईंधन से चलेंगी खास गाड़ियां


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश में 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स में संशोधन करते हुए E100 ईंधन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से भारत में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक को बढ़ावा मिलने का रास्ता खुल गया है। सरकार का मानना है कि एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मौजूदा पेट्रोल गाड़ियों में भी सीधे E100 ईंधन इस्तेमाल किया जा सकेगा।

    क्या है E100 ईंधन

    E100 का मतलब ऐसा ईंधन है जिसमें 100 प्रतिशत एथेनॉल होता है। एथेनॉल एक जैव ईंधन है जिसे मुख्य रूप से गन्ने और मक्के जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सामान्य पेट्रोल की तुलना में इसका स्रोत अलग है और इसके इस्तेमाल से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की संभावना रहती है। सरकार के नए नियमों के तहत वाहन उत्सर्जन संबंधी प्रावधानों में E85 के साथ E100 को भी शामिल किया गया है। इससे इस तरह के ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए नियामकीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    सामान्य पेट्रोल कारों में नहीं डाल सकेंगे E100

    सरकार के इस फैसले को लेकर वाहन मालिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वे अपनी मौजूदा कार या बाइक में E100 ईंधन भरवा सकेंगे। इसका जवाब नहीं है। सामान्य पेट्रोल या E20 पेट्रोल पर चलने वाले वाहन अपने आप E85 या E100 ईंधन के अनुकूल नहीं हो जाते। इन ईंधनों का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा जिन्हें इनके लिए विशेष रूप से डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो। इसलिए मौजूदा वाहन मालिकों को अपनी गाड़ी में बदलाव कराने या अचानक ईंधन बदलने की जरूरत नहीं है।

    फ्लेक्स फ्यूल तकनीक कैसे करती है काम

    फ्लेक्स फ्यूल तकनीक से लैस वाहनों को पेट्रोल और एथेनॉल के अलग-अलग अनुपात वाले मिश्रण पर चलने के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे वाहनों में इंजन और ईंधन प्रणाली को इस तरह बनाया जाता है कि वे निर्धारित ईंधन मिश्रण के अनुसार काम कर सकें। कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जा सकता है यह संबंधित वाहन के डिजाइन और प्रमाणन पर निर्भर करेगा। भविष्य में वाहन निर्माता कंपनियां इस तकनीक के अनुरूप नए मॉडल पेश कर सकती हैं। यह व्यवस्था सामान्य पेट्रोल वाहनों का विकल्प है न कि उन्हें तुरंत बंद करने का आदेश।

    देश को क्या होंगे फायदे

    भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है। ऐसे में एथेनॉल जैसे घरेलू स्तर पर उत्पादित किए जा सकने वाले ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की संभावना है। इसके अलावा एथेनॉल के उपयोग से वाहनों के कुछ प्रदूषक उत्सर्जन में कमी आ सकती है। हालांकि वास्तविक पर्यावरणीय लाभ एथेनॉल के उत्पादन के तरीके और वाहन की तकनीक पर भी निर्भर करेंगे।

    क्या पेट्रोल गाड़ियां बंद हो जाएंगी

    E100 ईंधन को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि पेट्रोल से चलने वाली गाड़ियां बंद कर दी जाएंगी। यह वाहन चालकों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प विकसित करने की दिशा में कदम है। अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल पहले से किया जा रहा है। भारत में भी इस तकनीक का विस्तार वाहन निर्माताओं की तैयारी ईंधन की उपलब्धता और उपभोक्ताओं की मांग पर निर्भर करेगा। फिलहाल आम वाहन मालिकों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि वे अपनी गाड़ी में केवल वही ईंधन इस्तेमाल करें जिसकी निर्माता कंपनी ने अनुमति दी है।