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  • गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो 76 पर पहुंचा, सोने के मुकाबले चांदी हुई सस्ती, जानिए अब किस धातु में निवेश का पलड़ा भारी

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों को लेकर निवेशकों और खरीदारों की नजर बाजार के नए संकेतों पर है। इस बीच गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर करीब 76 तक पहुंच गया है। इस बदलाव ने दोनों कीमती धातुओं के प्रदर्शन को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। बाजार के जानकारों के अनुसार, मौजूदा अनुपात बताता है कि सोने की तुलना में चांदी अपेक्षाकृत सस्ती हो गई है। ऐसे में आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। हालांकि, यह अनुपात अपने आप में कीमतों की दिशा तय करने वाला संकेत नहीं है।

    गोल्ड-सिल्वर रेशियो का इस्तेमाल सोने और चांदी की तुलनात्मक कीमत समझने के लिए किया जाता है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की आवश्यकता होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि रेशियो 76 है तो एक औंस सोने के बराबर कीमत हासिल करने के लिए लगभग 76 औंस चांदी चाहिए। इस अनुपात में बढ़ोतरी का अर्थ है कि सोना चांदी के मुकाबले महंगा हो रहा है या चांदी का प्रदर्शन कमजोर पड़ रहा है। इसके विपरीत रेशियो घटने पर चांदी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

    मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड-सिल्वर रेशियो इस साल करीब 27 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एक महीने में ही इसमें लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका स्तर लंबे समय के औसत 65 से 70 के दायरे से भी ऊपर पहुंच गया है। इससे संकेत मिलता है कि चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने सोने के मुकाबले उसे सस्ता बना दिया है।

    साल 2026 की शुरुआत में दोनों धातुओं के अनुपात में इसके उलट स्थिति देखने को मिली थी। उस समय चांदी की कीमत बढ़कर 121.6 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसके चलते गोल्ड-सिल्वर रेशियो गिरकर लगभग 43.6 रह गया था। यह स्तर एक दशक से अधिक समय में सबसे कम था। इसके बाद बाजार में परिस्थितियां बदलीं और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट आई।

    आंकड़ों के अनुसार, चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से 55 प्रतिशत से अधिक टूट चुकी है। इस साल इसकी कीमत में लगभग 27 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह करीब 52.8 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई है। दूसरी ओर सोने की कीमत में इस साल लगभग 7 प्रतिशत की कमी आई है और इसका भाव करीब 4,027 डॉलर प्रति औंस बताया गया है। दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट की रफ्तार अलग-अलग रहने से रेशियो में बढ़ोतरी हुई है।

    कमोडिटी बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड-सिल्वर रेशियो को खरीदारी या बिकवाली का अंतिम संकेत मानने के बजाय निवेश की रणनीति समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। जब यह अनुपात ऐतिहासिक औसत से काफी ऊपर चला जाता है, तब निवेशक सोने की तुलना में चांदी में निवेश धीरे-धीरे बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, रेशियो बहुत नीचे आने पर चांदी में कुछ मुनाफा निकालकर सोने में निवेश बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा सकती है।

    इतिहास में भी इस अनुपात के आधार पर बाजार के बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। मार्च 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गोल्ड-सिल्वर रेशियो लगभग 126 तक पहुंच गया था। इसके बाद अगले पांच महीनों में चांदी की कीमतों में करीब 140 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी। आमतौर पर 80 से ऊपर का अनुपात चांदी के लिए अनुकूल स्थिति का संकेत माना जाता है, जबकि 50 से नीचे का स्तर सोने के बेहतर प्रदर्शन की ओर इशारा करता है।

    निवेशकों के लिए इस अनुपात का एक अन्य उपयोग पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना है। इसके तहत सोने और चांदी में निवेश का एक निश्चित हिस्सा तय किया जा सकता है। रेशियो में बड़ा बदलाव आने पर उसी के अनुसार निवेश का अनुपात बदला जा सकता है। हालांकि, केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश का फैसला करने के बजाय चरणबद्ध निवेश और जोखिम का ध्यान रखना जरूरी है।

  • सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    सेंसेक्स-निफ्टी में मामूली बढ़त के बावजूद शेयर बाजार में बिकवाली हावी, कच्चे तेल और ग्लोबल गिरावट ने बढ़ाई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को कारोबार के दौरान दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते नजर आए, लेकिन व्यापक बाजार में बिकवाली का रुख बना रहा। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली देखने को मिली। आईटी और फार्मा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को गिरावट से बचाने में मदद की, लेकिन बाजार की कुल स्थिति कमजोर बनी रही।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 74,422.42 के ऊपरी स्तर और 74,099.33 के निचले स्तर के बीच कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी ने 23,019.25 का उच्चतम और 22,919.85 का न्यूनतम स्तर दर्ज किया। प्रमुख सूचकांकों में मामूली तेजी के बावजूद ज्यादातर शेयरों में गिरावट ने बाजार की वास्तविक स्थिति को कमजोर बनाए रखा।

    बाजार में बिकवाली का अंदाजा मार्केट ब्रेड्थ के आंकड़ों से भी लगाया जा सकता है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर शुरुआती कारोबार के दौरान कुल 3,076 शेयरों में कारोबार हो रहा था। इनमें से 934 शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि 2,053 शेयर गिरावट में थे। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कुल 3,541 शेयरों में कारोबार हुआ। इनमें 1,234 शेयरों में तेजी और 2,097 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट था कि बाजार में तेजी का दायरा सीमित था और अधिकांश शेयरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में कमजोरी की एक प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.20 प्रतिशत बढ़कर 112.13 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल की कीमत में लगभग 1.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 103.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। कच्चे तेल के महंगे होने से भारत जैसे आयात पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए अहम चिंता माना जा रहा है।

    दूसरा बड़ा कारण एशियाई शेयर बाजारों में आई गिरावट रही। शुक्रवार को जापान का निक्केई 225 करीब 2.58 प्रतिशत टूट गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.87 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा था। ताइवान के बाजार में 2.53 प्रतिशत और इंडोनेशिया के जकार्ता कंपोजिट में 1.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले अमेरिकी बाजार में भी नैस्डैक करीब 1.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ था। वैश्विक बाजारों के इस रुख का असर भारतीय निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दिया।

    तीसरा महत्वपूर्ण संकेत बाजार में बढ़ती अस्थिरता का रहा। इंडिया VIX शुक्रवार सुबह करीब 3.24 प्रतिशत उछलकर 15.61 के स्तर पर पहुंच गया। इसे बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव और निवेशकों की अनिश्चितता का संकेतक माना जाता है। इसमें बढ़ोतरी से संकेत मिलता है कि निवेशक आने वाले समय में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। इसका असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर विशेष रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, बिकवाली के बीच आईटी और फार्मा शेयरों में खरीदारी ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1.37 प्रतिशत और निफ्टी फार्मा में 0.96 प्रतिशत की तेजी रही। हेल्थकेयर इंडेक्स भी 0.82 प्रतिशत ऊपर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 1.78 प्रतिशत गिर गया। निफ्टी बैंक में 0.27 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.32 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।

    इस तरह शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों की मामूली बढ़त और व्यापक स्तर पर जारी बिकवाली के बीच अंतर दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, विदेशी बाजारों की कमजोरी और इंडिया VIX में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

  • एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    एशियन पेंट्स का मुनाफा 7.5% बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये, निवेशकों को मिलेगा 5.75 रुपये प्रति शेयर डिविडेंड

    नई दिल्ली ।देश की सबसे बड़ी पेंट निर्माता कंपनियों में शामिल एशियन पेंट्स ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1,067.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, पिछली तिमाही की तुलना में कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। नतीजों के साथ कंपनी ने शेयरधारकों के लिए अंतरिम डिविडेंड का भी एलान किया है।

    एशियन पेंट्स का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 1,539 करोड़ रुपये था। इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में मुनाफा करीब 30 प्रतिशत घटकर 1,067.6 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि के बावजूद तिमाही-दर-तिमाही प्रदर्शन में दबाव दिखाई दिया। कंपनी के कारोबार पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का असर पड़ा।

    कंपनी की बिक्री से होने वाली आय में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी तिमाही में एशियन पेंट्स का रेवेन्यू 9,954 करोड़ रुपये रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह 8,514 करोड़ रुपये था। इस तरह सालाना आधार पर राजस्व में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के 10,521 करोड़ रुपये के मुकाबले दूसरी तिमाही का रेवेन्यू करीब पांच प्रतिशत कम रहा।

    कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे माल की ऊंची कीमतों के कारण लागत से जुड़ा दबाव बना रहा। भू-राजनीतिक तनावों के चलते आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावटों ने भी कच्चे माल की उपलब्धता को प्रभावित किया। कंपनी ने बताया कि इन परिस्थितियों का असर जुलाई से सितंबर के दौरान उसके कामकाज पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला। लागत में बढ़ोतरी के बीच कारोबार की वृद्धि और मुनाफे के प्रदर्शन पर दबाव एक महत्वपूर्ण पहलू रहा।

    डिविडेंड की घोषणा इस तिमाही के नतीजों का एक प्रमुख हिस्सा है। एशियन पेंट्स ने एक रुपये फेस वैल्यू वाले प्रत्येक शेयर पर 5.75 रुपये का अंतरिम डिविडेंड देने का फैसला किया है। इसके लिए रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर 2026 तय की गई है। पात्र शेयरधारकों को डिविडेंड का भुगतान 13 नवंबर 2026 को या उसके बाद किया जाएगा। इस घोषणा से उन निवेशकों को लाभ मिलेगा, जो निर्धारित रिकॉर्ड डेट के अनुसार डिविडेंड पाने के पात्र होंगे।

    घरेलू कारोबार में कंपनी के डेकोरेटिव पेंट्स खंड ने वृद्धि दर्ज की। दूसरी तिमाही में घरेलू डेकोरेटिव पेंट्स कारोबार का वॉल्यूम 6.4 प्रतिशत और वैल्यू 14.5 प्रतिशत बढ़ी। कुल घरेलू कोटिंग्स कारोबार में वैल्यू के आधार पर 16.4 प्रतिशत और वॉल्यूम के आधार पर 6.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस प्रदर्शन में इंडस्ट्रियल कोटिंग्स कारोबार का भी योगदान रहा, जहां वैल्यू के लिहाज से 31.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भी बिक्री बढ़ी, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना रहा। इस खंड से शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 846 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,095.6 करोड़ रुपये हो गई, जो 29.5 प्रतिशत की वृद्धि है। स्थिर मुद्रा के आधार पर राजस्व में 23.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कारोबार का कर-पूर्व मुनाफा 31 प्रतिशत घटकर 52.7 करोड़ रुपये रह गया। इससे स्पष्ट है कि बिक्री में बढ़ोतरी के साथ लागत और लाभप्रदता कंपनी के प्रदर्शन के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

  • PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके

    PNB की ग्रेटर नोएडा शाखा में 35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, जानिए बैंक खाते और जमा पूंजी को सुरक्षित रखने के तरीके


    नई दिल्ली ।
    बैंक में जमा अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे, यह हर खाताधारक की सबसे बड़ी चिंता होती है। लेकिन पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ी करीब 35 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय गड़बड़ी ने ग्राहकों की जमा पूंजी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में 25 ग्राहकों की शिकायतें सामने आने, कई बैंक कर्मचारियों को निलंबित किए जाने और प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी है। हालांकि, रकम किस तरह गायब हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इसका अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

    मामले में ग्रेटर नोएडा के एक गांव में रहने वाले 60 वर्षीय संतोष ने आरोप लगाया कि उनके बैंक खाते में जमा रकम में गड़बड़ी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी करीब 1.18 करोड़ रुपये की राशि गायब होने का दावा किया गया है। संतोष का कहना है कि उन्होंने जमीन और जेवर से जुड़े लेनदेन के बाद यह पैसा बैंक में जमा किया था। अन्य ग्राहकों ने भी अपने खातों से बड़ी रकम गायब होने की शिकायत की है। प्रभावित लोगों में ऐसे ग्राहक भी बताए गए हैं, जिन्होंने बेटी की शादी, इलाज और परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए बचत की थी।

    इस तरह के मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि बैंक खाते में गड़बड़ी का पता कैसे लगाया जाए। अनधिकृत लेनदेन, जाली दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड में संभावित हेरफेर और डिजिटल माध्यम से धोखाधड़ी अलग-अलग परिस्थितियों में वित्तीय नुकसान का कारण बन सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं को पीएनबी के मौजूदा मामले का प्रमाणित कारण नहीं माना जा सकता। वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगी।

    खाताधारकों को अपनी पासबुक, बैंक स्टेटमेंट और मोबाइल पर मिलने वाले लेनदेन संदेशों की नियमित जांच करनी चाहिए। खाते में दर्ज जमा और निकासी का मिलान करने से किसी संदिग्ध गतिविधि का समय रहते पता लगाया जा सकता है। यदि बैंक रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली राशि और वास्तविक बैलेंस के बीच अंतर नजर आए, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत बैंक से संपर्क करना चाहिए।

    बैंकिंग धोखाधड़ी में बाहरी साइबर अपराधियों के साथ-साथ आंतरिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग की आशंका भी अलग-अलग मामलों में सामने आती रही है। साइबर ठग अक्सर बैंक अधिकारी बनकर फोन करते हैं और खाते को सुरक्षित रखने, केवाईसी अपडेट करने या किसी समस्या को ठीक करने के नाम पर गोपनीय जानकारी मांगते हैं। ऐसे में ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड और कार्ड की संवेदनशील जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक खोलने या किसी के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल करने से भी बचना जरूरी है।

    बैंक में जमा रकम की सुरक्षा के लिए भारत में जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम यानी डीआईसीजीसी की व्यवस्था है। इसके तहत पात्र बैंक जमाओं पर निर्धारित शर्तों के अनुसार एक जमाकर्ता को एक बैंक में समान अधिकार और क्षमता के तहत मूलधन तथा ब्याज मिलाकर अधिकतम पांच लाख रुपये तक की बीमा सुरक्षा मिलती है। यह सीमा हर खाते पर अलग-अलग लागू नहीं होती। एक ही बैंक में संबंधित जमाकर्ता की पात्र जमाओं को जोड़कर इसकी गणना की जाती है। इसलिए किसी बैंक में गड़बड़ी की शिकायत सामने आने का अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक की पूरी जमा राशि स्वतः बीमित है।

    यदि खाते से बिना अनुमति पैसे निकलने का पता चले, तो सबसे पहले संबंधित बैंक की शाखा या आधिकारिक ग्राहक सेवा के माध्यम से शिकायत दर्ज करानी चाहिए। शिकायत संख्या, बैंक स्टेटमेंट और लेनदेन से जुड़े संदेशों को सुरक्षित रखना भी जरूरी है। डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जा सकता है और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जरूरत पड़ने पर पुलिस से भी संपर्क करना चाहिए। बैंक से निर्धारित प्रक्रिया के तहत समाधान नहीं मिलने पर पात्रता के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक की शिकायत व्यवस्था का सहारा लिया जा सकता है।

    पीएनबी की ग्रेटर नोएडा शाखा से जुड़ा मामला ग्राहकों के लिए बैंक खातों की नियमित निगरानी का महत्व सामने लाता है। किसी भी संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई करना, गोपनीय जानकारी सुरक्षित रखना और बैंक से लिखित शिकायत करना नुकसान को सीमित करने में मददगार हो सकता है। वहीं, बैंकिंग संस्थानों के लिए आंतरिक नियंत्रण मजबूत रखना और शिकायतों की निष्पक्ष जांच करना जरूरी है।

  • धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    धनतेरस-दिवाली से पहले सोने-चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव, जानिए 24 से 14 कैरेट तक के ताजा रेट..

    नई दिल्ली ।धनतेरस और दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव अहम बना हुआ है। घरेलू सर्राफा बाजार से लेकर वायदा कारोबार तक दोनों कीमती धातुओं के भाव में बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में त्योहारों के लिए आभूषण खरीदने या सोने-चांदी में निवेश करने की योजना बना रहे लोगों की नजर ताजा दरों पर है। बाजार में कीमतों की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाओं, डॉलर की मजबूती और रुपये की स्थिति से प्रभावित हो रही है।

    गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार शुरू होने से पहले मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 24 कैरेट सोने का वायदा भाव 105 रुपये यानी 0.07 प्रतिशत गिरकर 1,43,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,43,705 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,44,000 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,054 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतों में 700 रुपये की तेजी दर्ज की गई। इसके बाद 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला 24 कैरेट सोना सभी करों सहित 1,46,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। खुदरा बाजार के एक अन्य मूल्य आकलन के अनुसार, 24 कैरेट सोने का भाव 1,44,100 रुपये प्रति 10 ग्राम, 22 कैरेट का 1,32,100 रुपये और 18 कैरेट का 1,08,110 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन के 28 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 999 शुद्धता वाले 24 कैरेट सोने की दर 1,42,707 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। 916 शुद्धता वाले 22 कैरेट सोने का भाव 1,30,720 रुपये और 750 शुद्धता वाले 18 कैरेट सोने की कीमत 1,07,030 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं, 585 शुद्धता वाले 14 कैरेट सोने का भाव 83,484 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। इन दरों में अलग-अलग बाजारों, करों और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क के कारण अंतर हो सकता है।

    चांदी की कीमतों में भी मिला-जुला रुख दिखाई दिया। गुरुवार को बाजार खुलने से पहले एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 125 रुपये यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 1,94,450 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। पिछले सत्र में यह 1,94,325 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। बुलियन बाजार के आंकड़ों में चांदी की कीमत 1,94,990 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। वहीं, 28 अक्टूबर तक के उपलब्ध आंकड़ों में 999 शुद्धता वाली चांदी का भाव 1,93,442 रुपये प्रति किलोग्राम था।

    दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी 1.98 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। दूसरी ओर, खुदरा बाजार के कुछ आकलनों में इसका भाव 2.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी में गिरावट दर्ज की गई और यह 1.23 प्रतिशत टूटकर 53.75 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई। अलग-अलग समय और बाजारों के आंकड़ों के कारण चांदी की कीमतों में अंतर दिखाई दे रहा है।

    घरेलू बाजार पर रुपये की कमजोरी का भी असर पड़ रहा है। बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 21 पैसे गिरकर 95.28 प्रति डॉलर पर आ गया। डॉलर की मजबूती और सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी पर हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने रुपये पर दबाव बढ़ाया। रुपये के कमजोर होने से सोने का आयात महंगा पड़ सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद घरेलू कीमतों को सहारा मिल सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व और फेडरल ओपन मार्केट कमेटी के नीतिगत फैसलों पर भी है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के जिंस मामलों के वरिष्ठ विश्लेषक सौमिल गांधी के अनुसार, महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले से पहले वैश्विक बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। मिराए एसेट शेयरखान के प्रवीण सिंह ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बाजार के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    मांग के मामले में भी भारत और चीन के खरीदारों का रुख अलग दिखाई दे रहा है। उपलब्ध बाजार आकलन के अनुसार, चीन में कुछ परिवार कीमतों में नरमी का लाभ उठाकर खरीदारी कर रहे हैं, जबकि भारत में कई खरीदार त्योहारों से पहले और गिरावट की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं। धनतेरस और दिवाली पर खरीदारी करने वालों के लिए कैरेट, शुद्धता और स्थानीय भाव की तुलना करना महत्वपूर्ण है। आभूषण खरीदते समय सोने की कीमत के साथ मेकिंग चार्ज और लागू करों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार शुरू, सेंसेक्स 156 अंक चढ़ा, मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी

    शेयर बाजार में तेजी के साथ कारोबार शुरू, सेंसेक्स 156 अंक चढ़ा, मीडिया और आईटी शेयरों में खरीदारी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। सुबह 9:25 बजे सेंसेक्स 156 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 73,401 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी 36 अंक यानी 0.16 प्रतिशत चढ़कर 22,743 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में शुरुआती तेजी को मीडिया और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों से समर्थन मिला।

    शुरुआती कारोबार के दौरान कई क्षेत्रीय सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। निफ्टी मीडिया और निफ्टी आईटी के अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी इंफ्रा और निफ्टी पीएसई भी हरे निशान में रहे। इसके साथ ही निफ्टी एनर्जी, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर में भी मजबूती देखने को मिली। हालांकि, बाजार के सभी क्षेत्रों में एक जैसी तेजी नहीं रही।

    कुछ क्षेत्रीय सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शुरुआती कारोबार में नुकसान में रहे। इससे संकेत मिला कि बाजार में तेजी के बावजूद कुछ क्षेत्रों में बिकवाली का दबाव बना हुआ था।

    बाजार में खरीदारी का रुझान केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती दर्ज की गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक 60 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,695 पर पहुंच गया। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 167 अंक यानी 0.29 प्रतिशत चढ़कर 57,441 पर कारोबार कर रहा था। इन आंकड़ों से शुरुआती सत्र में व्यापक बाजार में खरीदारी का संकेत मिला।

    सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो अदाणी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, टीसीएस, टाइटन और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे। एनटीपीसी, इन्फोसिस, एचयूएल, बीईएल और टेक महिंद्रा में भी मजबूती रही। इसके अलावा एसबीआई, सन फार्मा, इंडिगो, भारती एयरटेल और एक्सिस बैंक के शेयर भी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।

    दूसरी ओर, कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। ट्रेंट, एलएंडटी, एशियन पेंट्स और मारुति सुजुकी नुकसान में रहे। बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और इटरनल के शेयरों में भी कमजोरी दर्ज की गई। इस तरह प्रमुख सूचकांकों में तेजी के बावजूद कई बड़े शेयरों पर दबाव बना रहा।

    वैश्विक बाजारों से भी मिले-जुले संकेत मिले। एशियाई बाजारों में शंघाई, हांगकांग, सोल और जकार्ता गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि टोक्यो का बाजार बढ़त में था। इससे पहले बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे।

    कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध कारोबारी आंकड़ों के अनुसार, डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.30 प्रतिशत गिरकर 101 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड 1.23 प्रतिशत कमजोर होकर 110.28 डॉलर प्रति बैरल पर था। सोने और चांदी की कीमतों में भी नरमी रही। कॉमेक्स पर सोना 0.10 प्रतिशत गिरकर 4,047 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.86 प्रतिशत फिसलकर 53.20 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    शुरुआती कारोबार में घरेलू बाजार की तेजी के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी भी प्रमुख घटनाक्रम रही। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर के कारण बाजार की चाल एकसमान नहीं रही।

  • अमेजन ने इस माह दूसरी बार किया छंटनी का ऐलान…. 250 लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता!

    अमेजन ने इस माह दूसरी बार किया छंटनी का ऐलान…. 250 लोगों को दिखाया बाहर का रास्ता!


    सैन फ्रांसिस्को ।
    अमेजन (Amazon) ने इस महीने दूसरी बार छंटनी (Layoffs) का एलान किया है। कंपनी अपने डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में 250 तक कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर रही है। इससे पहले इसी महीने कंपनी के मुख्य रिटेल कारोबार (Core Retail Business) में करीब 1,000 पदों पर कटौती की गई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम कंपनी की ओर से किंडल ई-रीडर और टैबलेट जैसे नए उत्पाद पेश किए जाने के कुछ सप्ताह बाद उठाया गया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी से मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट टीमों के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। कंपनी ने कहा है कि यह फैसला कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने और उत्पादों की योजनाओं के अनुरूप संगठन को तैयार करने के लिए लिया गया है।


    सुबह ईमेल और टेक्स्ट मैसेज से दी गई जानकारी

    कर्मचारियों को बुधवार सुबह ईमेल और टेक्स्ट मैसेज के जरिए इसकी जानकारी दी गई। डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में मानव संसाधन की उपाध्यक्ष चेरी रॉबिन्सन की ओर से भेजे गए ईमेल में कहा गया कि कंपनी ने अपने संगठनात्मक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की, जिसके बाद कुछ पदों को खत्म करने का फैसला लिया गया।


    कंपनी ने क्या कहा?

    रॉयटर्स की पूछताछ के बाद अमेजन के प्रवक्ता ने छंटनी की पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने कम संख्या में पद खत्म करने का कठिन फैसला लिया है।” कंपनी के मुताबिक, इस कदम से कामकाज को अधिक कुशल बनाने और उत्पाद योजनाओं के साथ बेहतर तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। इस साल जनवरी में भी अमेजन ने करीब 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी। इससे पहले अक्तूबर 2025 में कंपनी ने लगभग 14,000 कर्मचारियों की नौकरियां खत्म की थीं।

    जनवरी में कंपनी की वरिष्ठ उपाध्यक्ष बेथ गैलेट्टी ने कर्मचारियों को बताया था कि छंटनी का उद्देश्य प्रबंधन के स्तर कम करना, जिम्मेदारी बढ़ाना और नौकरशाही को घटाना है। उन्होंने कहा था कि कंपनी की योजना हर कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर छंटनी करने की नई परंपरा शुरू करने की नहीं है। हालांकि, हर टीम अपने कामकाज, गति और ग्राहकों के लिए नए उत्पाद विकसित करने की क्षमता की समीक्षा करती रहेगी।


    उत्पाद योजनाओं के अनुरूप बदलाव का दावा

    कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि छंटनी का उद्देश्य अमेजन को अधिक कुशलता से काम करने में मदद करना और उसके उत्पादों की योजनाओं के अनुरूप संगठन को तैयार करना है। बुधवार को कंपनी ने एलेक्सा से लैस नई अलार्म घड़ी और फोटो फ्रेम की भी घोषणा की। कंपनी की परंपरा के अनुसार, बुधवार सुबह कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए छंटनी की जानकारी दी गई।

    रॉयटर्स के अनुसार, डिवाइस और सर्विसेज यूनिट में मानव संसाधन की उपाध्यक्ष चेरी रॉबिन्सन ने एक संदेश में कहा कि कंपनी ने अपने संगठनात्मक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की थी। इसके बाद कुछ पदों को खत्म करने की जरूरत सामने आई।


    गुरुवार को तीसरी तिमाही के नतीजे

    अमेजन गुरुवार को शेयर बाजार बंद होने के बाद तीसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे जारी करने वाली है। इस साल जनवरी में कंपनी ने करीब 16,000 कर्मचारियों की छंटनी की थी। इससे पहले अक्टूबर 2025 में भी लगभग 14,000 कर्मचारियों की नौकरियां खत्म की गई थीं।

    रिपोर्टों में पहले की छंटनी के संभावित कारणों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई में कंपनी के बड़े निवेश का भी उल्लेख किया गया था। बताया गया है कि अमेजन डेटा सेंटर और बुनियादी ढांचे पर 125 अरब डॉलर निवेश कर रही है। कंपनी इस क्षेत्र में गूगल और माइक्रोसॉफ्ट से प्रतिस्पर्धा कर रही है।


    माइक्रोसॉफ्ट और ड्रॉपबॉक्स में भी कटौती

    तकनीकी क्षेत्र में इस सप्ताह कर्मचारियों की संख्या घटाने वाली अमेजन अकेली कंपनी नहीं है। मंगलवार को माइक्रोसॉफ्ट ने अपने करीब 60,000 कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने का विकल्प देने की घोषणा की। कंपनी बदलती कारोबारी प्राथमिकताओं और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश के बीच अपने कार्यबल में बदलाव कर रही है।

    वहीं, बुधवार को फाइल साझा करने वाली कंपनी ड्रॉपबॉक्स ने वैश्विक स्तर पर अपने 9 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी की योजना बताई। कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य संसाधनों को उन क्षेत्रों पर केंद्रित करना है, जहां ग्राहकों को अधिक लाभ पहुंचाने और कारोबार बढ़ाने की संभावना सबसे ज्यादा है।

    2026 में टेक कंपनियों में बड़े पैमाने पर छंटनी
    तकनीकी उद्योग में छंटनी के आंकड़े जुटाने वाली संस्था ट्रूअप के अनुसार, 2026 में अब तक 670 टेक कंपनियों ने छंटनी की घोषणा की है। इससे 1,97,123 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। यानी औसतन हर दिन 655 लोगों की नौकरी गई है। वर्ष 2025 में 783 टेक कंपनियों ने 2,45,953 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की थी। उस साल औसतन हर दिन 674 लोगों की नौकरी प्रभावित हुई थी।

  • एबीडी की बिक्री में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि, दूसरी तिमाही में 1 करोड़ केस का आंकड़ा पार

    एबीडी की बिक्री में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि, दूसरी तिमाही में 1 करोड़ केस का आंकड़ा पार


    मुंबई।
    भारत की प्रमुख स्पिरिट्स कंपनियों में शामिल अलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स लिमिटेड (एबीडी) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत बिक्री वृद्धि दर्ज की है। 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड वित्तीय परिणामों की घोषणा करते हुए कंपनी ने बताया कि दूसरी तिमाही में उसकी कुल बिक्री 1 करोड़ केस तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 11.1 प्रतिशत अधिक है।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक अमर सिन्हा ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही एबीडी के लिए महत्वपूर्ण रही। सभी उत्पाद श्रेणियों में वृद्धि के दम पर पहली बार कंपनी की तिमाही बिक्री 1 करोड़ केस के पार पहुंची है। कंपनी अपने सुपर-प्रीमियम और लक्जरी उत्पाद पोर्टफोलियो के विस्तार के लिए ब्रांड निर्माण और वितरण से जुड़ी पहलों में निवेश जारी रखे हुए है।

    उन्होंने कहा कि क्षमता विस्तार परियोजनाओं के हाल में शुरू होने से कंपनी की विनिर्माण क्षमता मजबूत हुई है। इससे आपूर्ति शृंखला की दक्षता बेहतर होने और मार्जिन में वृद्धि की संभावनाएं हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए कंपनी को आय में वृद्धि की रफ्तार बने रहने की उम्मीद है। साथ ही, महंगाई के रुझानों पर नजर रखते हुए परिचालन दक्षता बढ़ाने और पूंजीगत व्यय कार्यक्रम को अनुशासित तरीके से लागू करने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    दूसरी तिमाही में 11.1 प्रतिशत बढ़ा बिक्री वॉल्यूम

    एबीडी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 10.0 मिलियन यानी 1 करोड़ केस की बिक्री की, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 9.0 मिलियन यानी 90 लाख केस था। इस तरह कंपनी के कुल बिक्री वॉल्यूम में 11.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस बढ़ोतरी में मास प्रीमियम एवं अन्य श्रेणियों के साथ प्रेस्टीज और उससे ऊपर (पीएंडए) श्रेणी का भी योगदान रहा।

    कंपनी के अनुसार, पहली छमाही में भी बिक्री की मजबूत रफ्तार बनी रही। इस दौरान तीन बार रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की गई। सितंबर 2026 में मासिक बिक्री 3.5 मिलियन यानी 35 लाख केस से अधिक पहुंच गई, जो कंपनी का अब तक का सर्वोच्च स्तर है।

    प्रीमियम उत्पादों की हिस्सेदारी में बदलाव

    कंपनी के पोर्टफोलियो में प्रीमियम उत्पादों का महत्व बना हुआ है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में प्रेस्टीज और उससे ऊपर (पीएंडए) श्रेणी की मूल्य आधारित हिस्सेदारी बढ़कर 58 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 56 प्रतिशत थी।

    हालांकि, कुल बिक्री वॉल्यूम में इस श्रेणी की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत से घटकर 46 प्रतिशत रही। कंपनी के प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उसके मिलियनेयर ब्रांड्स ने वृद्धि में योगदान दिया।

    आईकॉनिक व्हाइट की बिक्री में 20.6 प्रतिशत उछाल

    एबीडी के प्रमुख ब्रांड आईकॉनिक व्हाइट ने भी दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया। कंपनी के अनुसार, यह ब्रांड लगातार तीन कैलेंडर वर्षों 2023, 2024 और 2025 में दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला मिलियनेयर व्हिस्की ब्रांड रहा है।

    वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में आईकॉनिक व्हाइट की बिक्री बढ़कर 3.2 मिलियन यानी 32 लाख केस हो गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 2.6 मिलियन यानी 26 लाख केस थी। इस तरह ब्रांड की बिक्री में 20.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसकी औसत मासिक बिक्री भी लगातार 10 लाख केस से अधिक बनी हुई है।

    कंपनी के मुताबिक, बिक्री में बढ़ोतरी, प्रीमियम उत्पादों पर जोर और विनिर्माण क्षमता के विस्तार से कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। आगामी त्योहारी सीजन के दौरान भी कंपनी अपनी वृद्धि की गति बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

  • E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं

    E20 फ्यूल को लेकर फैली गलत जानकारी पर हरदीप पुरी का जवाब, बोले- 20% से ज्यादा मिश्रण की योजना नहीं


    नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने फिलहाल अपनी नीति में बदलाव के संकेत नहीं दिए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मौजूदा 20 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की अभी कोई योजना नहीं है। उन्होंने E20 ईंधन को लेकर फैल रही भ्रामक जानकारी पर भी चिंता जताई और कहा कि सरकार आयातित कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है।

    हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को दक्षिण गोवा में आयोजित 29वें ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान यह बात कही। उनसे पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछा गया था। इस पर उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम किया है और फिलहाल इसे 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना नहीं है। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि निकट भविष्य में E20 नीति में किसी बड़े बदलाव की घोषणा नहीं की गई है।

    E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें लगभग 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य इसके इस्तेमाल के जरिए विदेशों से कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को कम करना और देश में वैकल्पिक ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देना है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति को ऊर्जा सुरक्षा और विदेशी मुद्रा की बचत से जोड़कर देखा जाता है।

    पुरी ने दावा किया कि E20 ईंधन को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ईंधन वाहनों के अनुकूल है। हालांकि मंत्री ने यह भी माना कि वर्ष 2003 से पहले निर्मित कुछ पुराने वाहनों में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से संबंधित समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन की उम्र और निर्माता की ओर से निर्धारित ईंधन संबंधी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    E20 के इस्तेमाल से इंजन को नुकसान पहुंचने की शिकायतों पर मंत्री ने कहा कि ईंधन के परिवहन और भंडारण से जुड़ी समस्याएं भी चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने बताया कि मिश्रित ईंधन के परिवहन में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों का उपयोग अन्य कामों में भी किया जाता था। इंजन खराब होने के दावों पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बड़े पैमाने पर ऐसी समस्या होती तो इसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता। हालांकि वास्तविक प्रभाव वाहन के मॉडल उसकी तकनीकी अनुकूलता और रखरखाव जैसी बातों पर निर्भर कर सकता है।

    केंद्रीय मंत्री ने E20 नीति से देश को 1.60 लाख करोड़ रुपये की बचत होने का दावा भी किया। उनके मुताबिक इसमें से 1.40 लाख करोड़ रुपये किसानों तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन से कृषि क्षेत्र को भी लाभ मिला है और किसानों को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने का अवसर मिला है। सरकार का तर्क है कि जैव ईंधन की मांग बढ़ने से कृषि आधारित उद्योगों को बाजार मिल सकता है।

    इसी बीच सड़क परिवहन मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत E100 यानी लगभग पूरी तरह एथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहनों को अनुमति देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे वाहन अलग-अलग अनुपात वाले एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के लिए बनाए जाते हैं। हालांकि E100 वाहनों की अनुमति और सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की सीमा दो अलग-अलग नीतिगत विषय हैं।

    फिलहाल सरकार ने E20 से आगे मिश्रण बढ़ाने की योजना से इनकार किया है। उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने वाहन की पुस्तिका में दिए गए ईंधन संबंधी निर्देशों का पालन करें और किसी भी तकनीकी समस्या की स्थिति में अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लें।

  • LPG से लेकर GST तक…. होने वाले हैं बड़े बदलाव….एक नवंबर से लागू होंगे नए नियम

    LPG से लेकर GST तक…. होने वाले हैं बड़े बदलाव….एक नवंबर से लागू होंगे नए नियम


    नई दिल्ली।
    अक्टूबर (October) का महीना खत्म होने वाला है और नवंबर की शुरुआत देश में कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st November) के साथ होने जा रही है. इन चेंज का असर हर घर हर जेब पर देखने को मिलेगा. दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि नए महीने के पहले दिन से लागू होने जा रहे ये बदलाव घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) से लेकर जीएसटी (GST) ही नहीं, बल्कि हाइवे पर सफर से लेकर शराब खरीदने के लिए पेमेंट तक से जुड़े हुए हैं. आइए ऐसे ही पांच बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।


    पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के बदलेंगे दाम

    हर महीने की तरह नवंबर महीने के पहले दिन भी देश के लोगों की नजर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में होने वाले बदलाव पर रहेगी. इससे पहले 1 अक्तूबर 2026 को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG Cylinder Price Change किए थे और इसके तहत 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 62.50 रुपये तक इजाफा किया था. हालांकि, 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम यथावत हैं. ऐसे में 1 नवंबर को भी दाम में बदलाव देखने को मिल सकता है. न सिर्फ LPG, बल्कि हवाई ईंधन यानी ATF के रेट भी बदल सकते हैं।


    दूसरा बदलाव: GST से जुड़ा नियम

    1 नवंबर से जो दूसरा बड़ा बदलाव देश में लागू होने जा रहा है, वो GST से जुड़ा हुआ है. GST Rule Change की बात करें, तो इससे कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सकती है. जीएसटी प्रोसेस को सरल बनाने के लिए ये रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स रिफंड में होने वाली देरी कम करने और कारोबारियों पर डॉक्युमेंटेशन का भार घटाने की तैयारी सरकार ने की है. बदलावों के तहत कुछ मामलों में रिफंड ऑटोमैटिक अप्रूवल की व्यवस्था की जाएगा. इसके अलावा सालाना 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए नई रिटर्न व्यवस्था की जाएगी, जो ग्राहकों को सीधे सामान या सर्विसेस देते हैं।


    तीसरा बदलाव: शराब पेमेंट का बदलेगा नियम

    नवंबर की शुरुआत के साथ लागू होने वाला तीसरा बदलाव शराब के शौकीनों से जुड़ा हुआ है. दरअसल, 1 नवंबर से तमिलनाडु में शराब पेमेंट का नियम बदलने (Liquor Payment Rule Change) जा रहा है. तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) ने बड़ा फैसला लेते हुए अब 1000 रुपये से महंगी शराब की बोतल की रिटेल बिक्री के लिए डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य कर दिया है. यानी आप शराब खरीदने दुकान पर जाते हैं और एक हजार रुपये से ज्यादा की शराब लेते हैं, तो फिर कैश नहीं लिया जाएगा।


    चौथा बदलाव: इस हाइवे पर सफर का नियम

    अगर आप मुंबई से पुणे का सफर करते हैं, तो फिर अगला बदलाव आपने लिए है. दरअसल, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए कनेक्टिंग लिंक पर अब सभी वाहन नहीं चल पाएंगे. महाराष्ट्र हाईवे पुलिस ने इस रास्ते पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर स्थायी रोक का फैसला किया है और ये New Highway Rule 1 नवंबर से लागू हो रहा है. तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर लिए गए इस फैसले के तहत इस प्रतिबंध के दायरे में छोटे कमर्शियल वाहन, पिकअप वैन और टाटा ऐस जैसे वाहन भी आएंगे. हालांकि, प्राइवेट कार और पैसेंजर बसों को इस रास्ते से चलने की अनुमति होगी।


    पांचवां बदलाव: मोबाइल यूजर्स के लिए रूल चेंज

    पांचवां बदलाव मोबाइल यूजर्स से जुड़ा हुआ है. केंद्र सरकार के आदेश के बाद अब 1 नवंबर से नया नियम लागू होने जा रहा है. दूरसंचार विभाग (DoT) की तरफ से जारी ऑर्डर पर नजर डालें, तो सभी मोबाइल यूजर्स को कॉलर का नाम दिखाना जरूरी होगा. दरअसल, कई बार अनजान नंबर से आने वाले कॉलर का नाम पता करने के लिए बहुत से लोग ट्रू कॉलर जैसे मोबाइल ऐप करते थे. ऐसे में DoT ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को दिशा-निर्देश दिए हैं कि कॉलिंग नेम प्रजेंटेशन (CNAP) को 1 नवंबर 2026 से लागू करें।